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बेहमई कांड – 38 साल बाद अब होगा फैसला, बैंडिट क्वीन फूलन देवी ने 20 लोगों की हत्या की थी

देशभर में चर्चित रहे बेहमई कांड की सुनवाई 38 साल बाद पूरी हो गई है। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। कल इस मामले में कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है। 38 साल पहले बेहमई गांव में दस्यु सुंदरी फूलन देवी और गिरोह ने कतार में खड़ा कर 20 लोगों की गोली मारकर सामूहिक हत्या कर दी थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान फूलन समेत 15 आरोपियों की मौत हो चुकी है। जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि 14 फरवरी 1981 को दस्यु सुंदरी फूलन देवी के गिरोह ने बेहमई गांव में 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। राजाराम सिंह ने दस्यु सुंदरी फूलन देवी समेत 35-36 डकैतों के खिलाफ थाना सिकंदरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद यह कांड देशभर की सुर्खियों में रहा था। वर्ष 2012 में डकैत फूलन, भीखा, पोसा, विश्वनाथ, श्यामबाबू और राम सिंह पर आरोप तय किए गए थे। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित की अदालत में चल रही है। हत्याकांड के बाद से लगातार तारीख पर तारीख पड़ती रही। इसी तरह 38 साल बीत गए। राज्य की ओर से अभियोजन पक्ष ने वर्ष 2014 में गवाही पूरी कर ली थी। इसके बाद से अभियुक्तों की ओर से बचाव पक्ष ने बहस शुरू की। डीजीसी ने बताया कि गुरुवार को बचाव पक्ष की बहस पूरी हो गई है। फैसला सुनाने के लिए विशेष अदालत ने छह जनवरी की तारीख मुकर्रर की है। ये था बेहमई सामूहिक हत्याकांड
14 फरवरी 1981 को दस्यु सुंदरी फूलन देवी के गिरोह ने बेहमई गांव में धावा बोला था। इसके बाद जगन्नाथ सिंह, तुलसीराम, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, लाल सिंह, रामाधार सिंह, वीरेंद्र सिंह, शिवराम सिंह, रामचंद्र सिंह, शिव बालक सिंह, नरेश सिंह, दशरथ सिंह, बनवारी सिंह, हिम्मत सिंह, हरिओम सिंह, हुकुम सिंह समेत 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जंटर सिंह समेत आधा दर्जन ग्रामीण गोली लगने से घायल हुए थे। एक आरोपी जेल में, तीन जमानत पर
डीजीसी ने बताया कि बेहमई हत्याकांड में आरोपी भीखा, श्यामबाबू व विश्वनाथ उर्फ पूतानी जमानत पर हैं। आरोपी पोसा अभी भी जेल में बंद है। 38 साल में 15 गवाहों के बयान
डीजीसी ने बताया कि बेहमई हत्याकांड में 38 सालों के दौरान 24 अगस्त 2014 को आरोप तय हो सके। 21 सितंबर 2012 को पहली बार गवाही शुरू हुई। पहले वर्ष में 12 लोगों की गवाही हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 15 गवाह पेश किए गए। इनमें से सात तथ्य के साक्षी हैं।

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