कवर्धा जिलाप्रदेश

कवर्धा : गौठान विकास को मिल रहा ग्रामीणों का साथ

जिले के गौठानों में ग्रामीण बढ़-चढ़कर पैरादान कर रहें है। गांव गांव में लोगों ने पैरादान कर पशुधन के लिए चारा उपलब्ध कराने के उदेश्य से अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। सुराजी गांव योजना अंतर्गत बनाये गये गौठानों से ग्रामीणों को लाभ मिल रहा है। जिसके कारण ग्रामीणों का झुकाव गौठान की तरफ है तथा वे गौठान को अपने गांव की सम्पत्ति मान रहें है। गौठान में पशुधन के लिए सभी सुविधाओं उपलब्ध है। जिसमें मुख्य रूप से छाया, पानी, चारा, चिकित्सा व्यवस्था आदि। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विजय दयाराम के. ने बताया कि कबीरधाम जिले में दो चरणों पर गौठान का निर्माण किया जा रहा है। प्रथम चरण में जिले के 74 गांव में गौठान का निर्माण कर ग्रामीणों को सौप दिया गया है। इसीतरह दूसरे चरण में जिले के 149 गौठान का निर्माण प्रक्रियाधिन है। गौठान में साल भर चारे की व्यवस्था उपलब्ध हो इसके लिए ग्रामीण अपने खेत एवं घरों के पैरा गौठान को दान स्वरूप दे रहे है।

            जिला पंचायत के सीईओ श्री विजय दयाराम के. ने आगे बताया कि जिले के गौठानों के लिए अब तक 2400  क्विंटल से अधिक पैरा का संग्रहण कर लिया गया है। ग्राम कोयलारी के ग्रामीणों ने 165  क्विंटल , तिवारी नवागांव में 105 क्विंटल , ग्राम पर्थरा आंछी में 120 क्विंटल , मथानीकला, पालीगुड़ा, छिन्दीडीह में 75 बिरेन्द्र नगर में 90  क्विंटल एवं तालपूर इरिकमसा में 85 क्विंटल से तथा अन्य गांव में इसीतरह ग्रामीणो ने बढ़-चढ़कर पैरादान किया है। ग्रामीणों का गौठान से जुड़ाव का ही नतीजा है कि मैदानी क्षेत्र से लेकर जंगल क्षेत्र के ग्रामीण भी पैरादान कर रहें है। गौठान में उपलब्ध गोबरों से विभिन्न आंतरिक गतिविधियां कर आर्थिक लाभ ग्रामीणों को हो रहा है। बहुत सी महिला स्व.सहायता समूह के साथ कृषि विभाग पशुपालन विभाग एवं उघानिकी विभाग के मैदानी अमलें ग्रामीणों को सुराजी गांव योजना की उपयोगिता बता रहें है जिसका असर अब दिखने लगा है। अपनी स्वेक्षा से जितना हो सकें पैरादान कर ग्रामीणों ने एक अनोखी मिसाल पेश की है। क्योंकि पशुधन को गौठान में चारा सहज रूप से उपलब्ध हो यह उनका भी सपना है। ज्ञात हो कि गौठान निर्माण के साथ चारागाह विकास भी किया जा रहा ह,  जिसमें नेपियर, एम.पी.चेरी जैसे पौष्टिक आहार लगाये गये है जो पशुधन के लिए बहुत उपयोगी होने के साथ-साथ दुध उत्पादन को बढ़ाने में भी मदद्गार सिद्ध होगी। उल्लेखनीय है कि गौठान विकास में ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। जिसका परिणाम ही है की जहां पहले लोग अपने खलिहानों में पैरा का संग्रहण करते थे वे अब सीधे अपने खेतों से पैरा निकालकर सार्वजनिक हित के लिए गौठान समितियों में दे रहे है।

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