नर्सों के जज्बे को सलाम, कोरोना काल में योगदान को नहीं भूलेंगे

राजनांदगांव। …सदा बचाती हैं रोगी को दुख, दर्दों बीमारी से। भेदभाव को नहीं करें वह नर रोगी और नारी से। देख बुलंदी को नर्सों की, बीमारी डर जाती है फ्लोरेंस नाइटिंगेल की वह पावन बेटी नर्स कहलाती हैं। वर्तमान में कोरोना महामारी जब काल का रूप लेकर लोगों पर कहर बरपा रही है।

ऐसे दौर में नर्स खुद अपनी और अपने परिवार की चिंता छोड़कर मरीजों की जान बचाने में जुटी हैं। कोविड अस्पताल और कोविड केयर सेंटरों में भी डाक्टर के साथ पैरामेडिकल स्टॉफ की अहम भूमिका है। स्टाफ नर्से अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रही हैं।

कोरोना के संकटकाल में नर्से खुद को कोरोना योद्धा के तौर पर झोंक दिया है। कहर बरपा रही कोरोना महामारी को देख नर्से आठ की जगह दस घंटे ड्यूटी कर सेवा दे रही हैं।

शहर के जीवन आवास कालोनी में रहने वाली अंजू सिन्हा पेंड्री स्थित मेडिकल कालेज कोविड अस्पताल की इंजार्च है। पिछले साल से वो कोविड अस्पताल में ड्यूटी कर रही है। संक्रमित मरीजों की देखरेख के साथ नर्स अंजू घर भी संभाल रही है।

कोविड हास्पिटल से घर पहुंचते वो पहले खुद को सैनिटाइज करती है, जिसके बाद ही वो घर के भीतर जाती है। नर्स अंजू ने कहा कि सालभर से वो कोविड अस्पताल में ड्यूटी कर रही है। इसलिए वो क्वारंटाइन नहीं होती, लेकिन प्रोटोकाल का पूरा ख्याल रखती है।

बच्चों से शारीरिक दूरी और मास्क लगाकर ही घर का काम करती हैं। घर में उनकी दो बेटियां हैं, वो भी अपनी मां के काम की सराहना करती है। ड्यूटी से लौटने में देरी होने पर बेटियां भोजन की तैयारी कर लेती हैं। पर सुबह घर का पूरा काम-काज कर अंजू अपनी ड्यूटी में जाती है। इस तरह वो संकटकाल में दोहरी भूमिका निभाकर सहयोग कर रही है।

मरीजों के ठीक होने पर मिलती है खुशी

कोविड अस्पताल की इंजार्च अंजू सिन्हा ने कहा कि हर दिन नए-नए कोरोना से संक्रमित मरीज आते हैं। कई गंभीर हालत में रहते हैं। ऐसे मरीज जब स्वस्थ होकर घर लौटते हैं, तो बड़ी खुशी होती है। मैं इसलिए खुशी के लिए काम करती हूं।

उन्होंने बताया कि उनके पति कुंदलाल सिन्हा पुलिस में हैं और डोंगरगढ़ थाना में हेड कांस्टेबल के पद पर पदस्थ हैं। वो भी कोरोना काल में ड्यूटी कर रहे हैं। दिनभर ड्यूटी में होने की वजह से परिवार की ओर भी ध्यान बटा रहता है, जिसके बाद भी मैं कोशिश करती हूं कि भर्ती मरीजों को किसी तरह की परेशानी ना हो। इसके लिए स्टाफ की सभी 40 नर्सों को वो ड्यूटी के टाइम बेहतर काम करने की सीख भी देती हैं।

दिनभर कोरोना संक्रमित मरीजों के बीच ड्यूटी कर रही नर्स अंजू सिन्हा पखवाड़ेभर पहले संक्रमण की चपेट में आ गई थी। कोरोना ने उनके साथ दोनों बेटियों को भी अपनी चपेट में ले लिया था, पर अंजू ने हिम्मत नहीं हारी। बेटियों को भी वो लगातार मोटिवेट करती रही, इसका परिणाम यह हुआ कि जल्द ही सभी कोरोना मुक्त हो गए।

स्वस्थ होने के बाद अंजू ने बची छुट्टी को केंसल कर ड्यूटी पर लौट गई। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित होने के बाद बेटियों के स्वास्थ्य को लेकर परेशान जरूर हो गई थी, लेकिन जागरूकता और समझदारी से हमने कोरोना से जंग जीत ली। अंजू ने कहा कि कोरोना का वैक्सीन 18 प्लस और 44 प्लस वाले सभी लोग लगाएं। इससे ही हम संक्रमण को मात देने की कोशिश कर सकती हैं।

वनांचल में अस्पतालों में कई जगह डाक्टर ही नहीं है। नर्सों के भरोसे ही अस्पताल चल रहा है। कोरोना के इस संकट काल में नर्सें संघर्ष कर रहीं है। संक्रमित मरीजों के अलावा सामान्य मरीजों की समस्या को दूर करने नर्सें घंटों सेवाएं दे रहीं हैं।

सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नर्सें हर काम को आसानी से पूरा कर रहीं हैं। कोरोना की जांच से लेकर वैक्सीनेशन और संक्रमित मरीजों की देखरेख का जिम्मा भी नर्सों के भरोसे ही है। सीएमएचओ डा. मिथलेश चौधरी ने कहा कि नर्सों का सहयोग सम्मान के लायक है।

इसी सहयोग की बदौलत हम कोरोना संक्रमण को हराने का प्रयास कर रहे हैं। बेहतर काम करने वाली बात नहीं है। सभी नर्सों बेहतर वर्क कर रहीं हैं। सबका सम्मान करेंगे।

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