
राजनांदगांव : हम बाहर संस्कृति के इतने गुलाम हो गए कि उससे निकल नहीं पाए-मुनि वीरभद्र
मोक्ष मार्ग में जाना है तो हमें सहनशील होना पड़ेगा
राजनांदगांव। प्रख्यात जैन संत विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि हमारी संस्कृति में मुगल काल में हमला हुआ और हम उनकी संस्कृति को स्वीकारने लगे। आज हम इस संस्कृति के इतने आदि हो चुके हैं कि हम इसे बाहर निकल ही नहीं पा रहे।
जैन बगीचा स्थित उपाश्रय भवन में मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि हम पर बाहरी संस्कृतियों का काफी प्रभाव पड़ा और हमारी संस्कृति बाहरी संस्कृतियों से लड़ते-लड़ते थक गई और विदेशी संस्कृति हम पर हावी हो गई। हमारे भीतर गुलामी प्रवेश कर गई जिससे हम निकल नहीं पा रहे हैं और इससे निकलने के लिए हमें अभ्यंतर तप करना होगा।
मुनि वीरभद्र ( विराग )जी ने कहा हमने अज्ञानता की दशा में अनेक कर्मबंद बांधे हैं तो इसे हमें ही भुगतना होगा। मोक्ष मार्ग में जाना है तो हमें सहनशील होना पड़ेगा। उन्होंने कहा सब सहन करो, जब तक जीवन है तब तक सहन करो। आत्म कल्याण का मार्ग बहुत मेहनत से मिलता है। इसी तरह अनुभव भी बड़ी मुश्किल और मेहनत से मिलता है। उन्होंने कहा कि सहन करो और आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ चलो। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।





