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CG : विशेष लेख : वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध – छत्तीसगढ़ का आदर्श मॉडल

रायपुर,

बुजुर्ग - संस्कृति, अनुभव और मूल्यों के स्तंभ

भारतीय संस्कृति के केंद्र में हमारे बुजुर्ग हैं – जिनके अनुभव समाज को दिशा देते हैं और जिनकी स्मृतियाँ हमारी सभ्यता की नींव हैं, लेकिन बदलते सामाजिक परिदृश्य में पारिवारिक संरचना और सामाजिक दायरे सिमटने लगे हैं। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सहभागिता और गरिमामय जीवन सुनिश्चित करना शासन की प्राथमिकता बन जाता है। इसी भावना को साकार करती है – छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील नीतियाँ और सशक्त क्रियान्वयन।

बुजुर्ग - संस्कृति, अनुभव और मूल्यों के स्तंभ

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वरिष्ठजनों के सम्मान को शासन प्रणाली में प्रमुख स्थान दिया है। उनका मानना है “माता-पिता की पूजा ही ईश्वर की पूजा है।” इसी सोच के साथ राज्य में ऐसे प्रकल्पों का विस्तार हो रहा है जो बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाते हैं। एक अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और दुर्ग में पीपीपी मॉडल के तहत आधुनिक वृद्धाश्रम स्थापित करने तथा असहाय बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए रायपुर में उपकरण सर्विस सेंटर खोलने की घोषणा की। इसी के साथ राज्य में “सियान गुड़ी” जैसे सामाजिक-आध्यात्मिक केंद्रों का विस्तार बुजुर्गों को मानसिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सहारा प्रदान कर रहा है।

छत्तीसगढ़ की समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने वृद्धजन केंद्रित कार्यक्रमों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनका कहना है “संवेदनशील शासन का अर्थ है, हर बुजुर्ग तक सेवा और सुरक्षा पहुँचाना।”

राज्य में 35 वृद्धाश्रम सक्रिय रूप से संचालित हैं, जहाँ लगभग 1049 वरिष्ठ नागरिक भोजन, आवास, स्वास्थ्य, परामर्श और मनोरंजन की सुविधाएँ प्राप्त कर रहे हैं। गंभीर रोगों या असहाय स्थिति में रह रहे बुजुर्गों के लिए रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम, रायगढ़, बालोद और बेमेतरा इन 6 जिलों में प्रशामक देखभाल गृह संचालित किए जा रहे हैं, जहाँ 128 वरिष्ठजनों को निःशुल्क उपचार, दवाइयाँ और नियमित स्वास्थ्य देखभाल मिल रहा है। वरिष्ठजनों की समस्याओं के निवारण हेतु स्थापित हेल्पलाइन सेवा द्वारा अब तक 2 लाख 70 हजार से अधिक प्रकरणों का समाधान किया जा चुका है। यह सेवा न केवल उनकी पहुँच बढ़ाती है, बल्कि आत्मविश्वास और सुरक्षा बोध भी जगाती है।

वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम – 2007 का राज्य में सख्ती से पालन किया जा रहा है। अनुविभाग स्तर पर – भरण-पोषण अधिकरण, जिला स्तर पर – अपीलीय अधिकरण इन व्यवस्थाओं ने बुजुर्गों को संपत्ति, सुरक्षा और भरण-पोषण से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को नियमित पेंशन सहायता प्रदान की जा रही है 60 से 79 वर्ष तक की आयु के बुजुर्गों को 500 रुपए प्रति माह और 80 वर्ष से अधिक आयु वाले वरिष्ठजनों को 650 रुपए प्रति माह सहायता राशि दी जा रही है। वर्तमान में 14 लाख से अधिक बुजुर्ग इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। यह सहायता उनके जीवन में आर्थिक सुरक्षा का आधार बनती है।

राज्य सरकार की योजनाएँ गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा के अधिकार को सुदृढ़ कर रही हैं। आयुष्मान भारत और शहीद वीर नारायण सिंह स्वास्थ्य सहायता योजनाओं के तहत 8 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क उपचार मिला है। साथ ही वरिष्ठ नागरिक सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत 50 हजार से अधिक बुजुर्गों को व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, छड़ी, चश्मा जैसे उपकरण प्रदान किए गए हैं।

आध्यात्मिक संतोष बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य का आधार है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना और श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिक, 278 व्यक्ति तीर्थयात्राओं का लाभ ले चुके हैं। यात्रा के दौरान भोजन, आवास और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। प्रत्येक वर्ष एक अक्टूबर वृद्धजन दिवस राज्य और जिला स्तर पर मनाया जाता है। इन कार्यक्रमों से समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदना और सहयोग की भावना को प्रोत्साहन मिलता है। वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान केवल एक सामाजिक मूल्य नहीं, बल्कि एक कर्तव्य है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने यह सिद्ध किया है कि संवेदनशील शासन, सुचारु क्रियान्वयन और मानवीय दृष्टिकोण मिलकर बुजुर्गों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकते हैं।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.