
राजनांदगांव : विशेषज्ञ डॉक्टरों और केमिकल की कमी से चरमराई व्यवस्था…
राजनांदगांव. बसंतपुर स्थित जिला अस्पताल इन दिनों खुद इलाज मांग रहा है। करोड़ों रुपए खर्च कर भवन का रिनोवेशन और प्लिंथ लेवल ऊंचा करने का काम जारी है, लेकिन मरीजों की सेहत पर असर डालने वाले उपकरण और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी पर प्रशासन की नजर नहीं है। हालत यह है कि अस्पताल की अधिकतर जांच मशीनें दम तोड़ चुकी हैं और मरीजों को मजबूरन निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन करीब दो साल से बंद पड़ी है। बरसाती पानी अस्पताल परिसर में घुसने से मशीन दो बार पानी में डूब चुकी, जिसके बाद कंपनी ने मरम्मत से साफ इंकार कर दिया। डिजिटल एक्सरे और ओपीजी (दंत एक्सरे) मशीनें भी बार-बार खराब हो रही हैं, जिससे मरीजों को घंटों लाइन में लगना पड़ता है या बाहर निजी सेंटरों में जांच करानी पड़ती है। वहीं एमसीएच अस्पताल की ओपीजी मशीन भी बंद है। यहां आने वाले दंत मरीजों को जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा जा रहा है, जिससे पहले से दबे हुए सिस्टम पर और भार बढ़ गया है। इस संबंध में सिविल सर्जन ने कहा कि व्यवस्था में सुधार लाने प्रयास किया जा रहा है।
जिला अस्पताल की हमर लैब में भी ब्लड जांचें ठप हैं। 100 से अधिक जांचों का दावा करने वाली इस लैब में पुराने उपकरण और रीजेंट (केमिकल) की कमी के कारण मरीजों को लौटा दिया जा रहा है। यहां सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) जैसी जांच तक नहीं हो रही, इसके अलावा अन्य कई तरह की जांच के लिए मरीजों को निजी सेंटर का रूख करना पड़ रहा है। सोनोग्राफी जांच के लिए गर्भवती महिलाओं को बार-बार डेट दी जा रही है, जिससे असुविधा और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों डॉक्टरों की भी कमी
विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी से अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के अलावा किसी अन्य बीमारी की सर्जरी नहीं हो पा रही। प्लिंथ लेवल बढ़ाने के काम के चलते दोनों ओटी भी बंद हैं। इस बीच सौ बिस्तर अस्पताल के ओटी से काम चलाया जा रहा है। जिला अस्पताल फिलहाल सिर्फ सर्दी-खांसी और बुखार के मरीजों तक सीमित रह गया है। आखिर सवाल यह है कि जब भवन चमक रहा है, तो व्यवस्था क्यों कराह रही है? मरीजों के लिए नया भवन नहीं, चालू मशीनें और डॉक्टर चाहिए।






