शिक्षक विद्यार्थी के अन्दर छुपी प्रतिभा की पहचान कर उन्हें निखारते हैैं और जीवन जीने का सही तरीका सिखाते हैं – राज्यपाल सुश्री उइके

पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न स्वर्गीय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान शिक्षक हम सभी के लिए प्रेरणा के स्त्रोत – मुख्यमंत्री श्री बघेल

राज्य शिक्षक सम्मान पुरस्कार से जिले के दो शिक्षकों को किया गया सम्मानित

राजनांदगांव 22 जुलाई 2021। राज्य शिक्षक सम्मान पुरस्कार समारोह 2020 में राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके एवं मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने वर्चुअल मोड में प्रदेश के शिक्षकों को सम्मानित किया। इस अवसर पर जिले के दो शिक्षक को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया। कलेक्टर श्री तारन प्रकाश सिन्हा ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में व्याख्याता एलबी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रेंगाकठेरा श्री मोहम्मद सईद कुरैशी और शिक्षिका शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला दीवानभेड़ी श्रीमती शशिकला कठोलीया को 21 हजार रूपए, प्रशस्ति पत्र, शॉल एवं श्रीफल देकर सम्मानित किया। उन्होंने शिक्षकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षण कार्य महान कार्य है। शिक्षक, केवल विभिन्न विषयों का ज्ञान ही नहीं देते बल्कि एक अच्छे नागरिक बनने के गुण भी अपने विद्यार्थियों में विकसित करते हैं। शिक्षक विद्यार्थी के अन्दर छुपी प्रतिभा की पहचान कर उन्हें निखारते हैैं और जीवन जीने का सही तरीका सिखाते हैं। चरित्र निर्माण करने के साथ ही नैतिकता का बीजारोपण करते हैं। उन्होंने सभी सम्मानित होने वाले शिक्षकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। कोरोना काल में दिवंगत शिक्षकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उन्होंने कहा कि शिक्षक हमारे मार्गदर्शक और हमारे व्यक्तित्व के निर्माता होते हैं। वे जलते हुए दीपक की तरह स्वयं जलकर, हमारी जिंदगियों में उजाला भरते हैं। वे न केवल हमें ज्ञान की रोशनी देते हैं बल्कि सच्चाई के मार्ग पर चलने का हौसला भी देते हैं, क्योंकि शिक्षक अपना पूरा जीवन, इस दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए समर्पित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि जब-जब हम पर कोई भी विपदा आई है, शिक्षकों ने कभी हिम्मत नहीं हारी।  पिछले डेढ़ वर्ष से पूरा विश्व कोरोना से जूझ रहा है, परंतु शिक्षकों ने इस नए मोर्चे पर भी ऑनलाइन शिक्षण के जरिए पूरी काबिलियत और मेहनत के साथ शिक्षा के मुहिम को जारी रखा। चाहे मोहल्ला क्लास हो या पढ़ई तुंहर द्वार, ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से प्रदेश के शिक्षकों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ शिक्षण की निरंतरता में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी। राज्यपाल सुश्री उइके ने नई शिक्षा नीति के संबंध में चर्चा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य बच्चों का समग्र विकास करना और बच्चों को व्यावहारिक जानकारी तथा विभिन्न कौशल से युक्त करना है ताकि वे पढ़ाई खत्म करने के बाद आत्मनिर्भर बन सके।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज में शिक्षक समुदाय को हमेशा उच्च स्थान दिया गया है। हमारे गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ में अपनी परम्पराओं का सम्मान और शिक्षा का सर्वोच्च स्थान है। शिक्षा लोक कल्याण का सबसे बड़ा माध्यम बने यही हमारा प्रयास है। उन्होंने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न स्वर्गीय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान शिक्षक हम सभी के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं। उन्होंने कहा कि प्रथम शिक्षा हमें अपने घर से मिलती है। अनुभव और गलतियां हमारे सबसे बड़े शिक्षक हैं। वे हमें सिखाते हैं कि कैसे परिस्थितियों को संभालना है। महान शिक्षक भारत रत्न डॉ. राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षक वह नहीं जो छात्र के दिमाग में तथ्यों को डाले बल्कि वास्तविक शिक्षक वह है जो उसे आने वाले कल की चुनौतियों के लिए तैयार करें। भारत की वर्तमान शिक्षा पद्धति विविध विषयों और प्रौद्योगिकी के बारे में हमारे ज्ञान के विस्तार को बढ़ाती है। यह हमें हमारी संस्कृति और नैतिकता के बारे में जानने में मदद करती हैं। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कोरोना महामारी के विषम परिस्थिति में शिक्षा की बागडोर थामे रखने के लिए शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने फ्रन्ट लाइन वारियर का भी काम किया है।
स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शिक्षक सम्मान के अवसर पर देश के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि एक बालक के जन्म से लेकर उसके सम्पूर्ण जीवन काल में गुरू का उच्च स्थान है। गुरू हमें आने वाली कठिनाईयों से बचने और लडऩे की तैयारी कराते हैं। वर्तमान कोरोना काल में जिस तरह से शिक्षकों ने अपनी भूमिका निभाई है वह ऐतिहासिक है। शिक्षकों ने ऑफलाइन और ऑनलाइन पढ़ाई, मोहल्ला क्लास, पढ़ाई तुंहर दुआर जैसे नवाचार के माध्यम से लाखों बच्चों में अध्ययन-अध्यापन की अलख जगाए रखी। आज के दौर में मूल्य आधारित शिक्षा हमारी आवश्यकता बन गई है। मंत्री डॉ. टेकाम ने शिक्षकों से आव्हान किया कि सभी छात्र-छात्राओं को ऐसी शिक्षा प्रदान करें, जिससे उनमें जीवन मूल्यों का विकास हो सके।
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री प्रेम सिंह टेकाम द्वारा वर्ष 2020 में राज्य शिक्षक सम्मान पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों के नामों की घोषणा की गई। जिसमें राजनांदगांव के दो शिक्षक श्रीमती शीला सोनी प्रधानपाठक शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला घुमका और श्री विष्णु प्रसाद शर्मा शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला दीवानभेड़ी शामिल है। कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी श्री एचआर सोम, सहायक संचालक शिक्षा विभाग श्रीमती संगीता राव, साक्षरता अभियान से श्रीमती रश्मि सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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