Rajnandgaon: नियम विरूद्ध बने व्यवसायिक परिसर का आबंटन रोकेः कुलबीर
निगम आयुक्त व महापौर मधुसूदन यादव इस विषय को सामान्य सभा में जनप्रतिनिधियों से सहमति लेकर जनप्रतिनिधियों को फंसाने की तैयारी
निर्मित भवन को स्कूल के लैब के लिए दिया जाए
राजनांदगांव। म्युनिस्पल स्कूल आत्मानंद स्कूल पूर्व गांधी सभागृह पर नगर निगम द्वारा बनाए गए नियम विरूद्ध अवैध दुकानों के सामान्य सभा में प्रस्ताव लाने की तैयारी महापौर परिषद द्वारा की जा रही है। जिसको लेकर पूर्व पार्षद कुलबीर सिंह छाबड़ा ने आपत्ति लगाते हुए कहा कि पर्यावरण एवं नगरीय विकास विभाग सचिव विवेक ढांड द्वारा 10.12.2002 आदेश क्रमांक 1793/2017 पर्या.न.प्र/2002 के राजपत्रित आदेश के आदेशानुसार शैक्षणिक संस्थाओं के परिसर एवं उसके आसपास किसी भी दशा में दुकानों की अनुमति नहीं दी जायेगी। जब नगर निगम की अधिनस्त व्यवसायिक परिसर की भूमि नहीं है तो निगम द्वारा बनाए गए व्यवसायिक परिसर नियम विरूद्ध एवं पूर्णत अवैध निर्माण व नगर निगम द्वारा निर्माण कार्य में व्यय की गई राशि आर्थिक अनियमिता है। जबकि पूर्व में बने गांधी सभागृह स्कूल परिसर राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है जो कि डेंजर जोन में आता है, जहां पर आये दिन दुर्घटना होना सामान्य सी बात है, ऐसी जगह पर व्यवसायिक परिसर पूर्णता गलत है।
श्री छाबड़ा ने कहा कि बने व्यवसायिक परिसर दुकानों का अवैध निर्माण का विरोध मेरे द्वारा पहले भी किया जा चुका है और लिखित में निगम आयुक्त को पत्र के माध्यम से अवगत भी करा चुका हूं कि नियम विरूद्ध हो रही अवैध व्यवसायिक परिसर की आबंटन की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त कर स्कूल को सौंपने की कार्यवाही करें और परिसर के निर्माण में हुई आर्थिक शासकीय क्षति संबंधित लोगों पर कार्यवाही करें निगम द्वारा बनाए गए निर्माण को स्कूल के लैब से जोड़ा जाए ताकि यह निर्माण स्कूल में समायोजित होने से विद्यार्थियों के लिए हो रही कमी को पूरा किया जा सकता है। महापौर मधुसूदन यादव द्वारा नियम को ताक में रखते हुए आगामी होने वाली सामान्य सभा में लाया जा रहा है। जमीन आबंटन की प्रक्रिया भी नियम विरूद्ध की गई है एवं मास्टर प्लान का भी पालन न कर नियमों विरूद्ध कार्य किया गया है। मैं निगम प्रशासन से मांग करता हूं कि इस जनहित इस मुद्दें पर तत्काल रोक लगाई जाएं नहीं तो नियम विरूद्ध बने इस व्यवसायिक परिसर दुकानों की आबंटन की प्रक्रिया रोकने व बच्चों के भविष्य को देखते हुए एवं सभी इस विषय को पास करने वाले जनप्रतिनिधियों के विरूद्ध भी न्यायालयीन कार्यवाही हेतू मजबूर होना पड़ेगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी निगम प्रशासन की होगी।



