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राजनांदगांव : भक्ति के शिखर से पर्यटन की राह, माई की नगरी अब बन रही टूरिज्म हब, बन गए नए टूरिस्ट प्लेस…

राजनांदगांव , नवरात्रि में मां बम्लेश्वरी मंदिर में उमड़ने वाली आस्था की भीड़ अब सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं रहेगी। डोंगरगढ़ धीरे-धीरे एक ऐसे डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है, जहां श्रद्धा के साथ-साथ पर्यटन का भी पूरा अनुभव मिलता है। एक तरह से अब डोंगरगढ़ मां बम्लेश्वरी के दर्शन से आगे बढ़कर टूरिज्म हब बनता जा रहा है।

पहाड़ी पर विराजित मां बम्लेश्वरी के दरबार तक पहुंचने की कठिन चढ़ाई, रोपवे का रोमांच, आसपास के प्राकृतिक और धार्मिक स्थल, ये सब मिलकर इसे भक्ति और टूरिज्म का नया मॉडल बना रहे हैं। डोंगरगढ़ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब सिर्फ मंदिर तक पहुंचना ही मकसद नहीं रह गया है। इसके अलावा प्रज्ञागिरी जैसे शांत बौद्ध स्थल, आसपास के प्राकृतिक दृश्य और छोटे-छोटे पिकनिक स्पॉट इसे फैमिली ट्रिप के लिए भी आकर्षक बना रहे हैं।

रोपवे से कुछ ही मिनटों में पहाड़ी की चोटी तक पहुंचते हुए नीचे का दृश्य किसी हिल स्टेशन जैसा एहसास देता है। वहीं, जो श्रद्धालु सीढ़ियों से चढ़ाई करते हैं, उनके लिए यह यात्रा एक तरह की साधना बन जाती है। नवरात्रि में डोंगरगढ़ अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि एक ऐसा मुकाम बनता जा रहा है जहां श्रद्धा के साथ-साथ सैर, सुकून और संस्कृति तीनों का संगम देखने को मिलता है। गुरुवार से यहां चैत्र नवरात्र का शुभारंभ होने के साथ विशाल नवरात्र मेला 27 मार्च तक चलेगा। साल की दोनों नवरात्र में बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं।

श्रीयंत्र की बिल्डिंग सुकून भरा अनुभव: मंदिर परिसर के बगल में ही 48.43 करोड़ की लागत से प्रसाद योजना में परिसर का कायाकल्प किया गया। करीब 10 एकड़ में श्रीयंत्र आकार का पर्यटक सुविधा केन्द्र, सीढ़ियों का सौंदर्यीकरण, पार्किंग, सोलर लाइटिंग और प्रज्ञागिरी परिसर में विकास कार्य शामिल है। इसका उद्देश्य तीर्थ स्थलों का विकास और पर्यटकों को सुविधा प्रदान करना है। सीढ़ियों का जीर्णोद्धार, रेलिंग, शेड, शौचालय एवं प्रकाश व्यवस्था शामिल है। यहां तक पहुंचना भी आसान है।

प्रज्ञागिरी, जहां बुद्ध की 30 फीट की प्रतिमा विराजित डोंगरगढ़ में प्रज्ञागिरी एक प्रमुख बौद्ध तीर्थ स्थल जो 1 हजार फीट उंची पहाड़ी पर है। ध्यान मुद्रा में भगवान बुद्ध की 30 फीट उंची प्रतिमा स्थापित है। यहां शांति, प्राकृतिक सुंदरता है। यहां से 25 से 27 किमी दूर बोरतलाव में गोंड आदिवासी समाज का पवित्र धार्मिक स्थल कचारगढ़ गुफा है। करीब 518 मीटर उंची पहाड़ी और जंगलों में एशिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गुफाओं में एक है। वहीं पास में ही करीब 518 मीटर उंची पहाड़ी और जंगलों में महाराष्ट्र की सीमा दरेकसा के पास विशाल प्राकृतिक हाजरा फाल झरना है।

डंगबोरा जलाशय, नया एडवेंचर: ट्रैकब्लॉक मुख्यालय से महज 18 किलोमीटर दूर प्रकृति और रोमांच प्रेमियों के लिए एक नया आकर्षण सामने आया है। डंगबोरा जलाशय के ऊपर पहाड़ पर स्थित एक नए व्यू पॉइंट को मैकल सनराइज व्यू पॉइंट नाम दिया गया है। यह स्थान अब जिले का नया एडवेंचर ट्रैक बनता जा रहा है, जहां ट्रैकिंग के साथ-साथ पर्यटक प्रकृति की गोद में अनूठा अनुभव ले सकेंगे।

नवरात्रि में 10 एक्सप्रेस ट्रेनों स्टापेज दिया गया डोंगरगढ़ मुंबई-हावड़ा रेल रुट पर बसा होने के कारण यहां आने ट्रेन सबसे अच्छा और सस्ता विकल्प है। साल की दोनों नवरात्र पर्व में मेले के दौरान यहां लोकल ट्रेनों का रायपुर से गोंदिया तक विस्तार करने के साथ 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज दिया जाता है। मुंबई-हावड़ा नेशनल हाईवे पर बसे तुमड़ीबोड से डोंगरगढ़ की दूरी 25 किमी है। नेशनल हाइवे के अलावा डोंगरगढ़ तक पहुंचने एक्सप्रेस, लोकल ट्रेनों के अलावा सड़क मार्ग से बस और निजी वाहनों से पहुंचने का विकल्प है।

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lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.