राजनांदगांव : गुरु के बाना बांध लिए… गीत से याद किए गए नाचा के पुरोधा दाऊ मंदराजी…

राजनांदगांव , विश्व रंगमंच दिवस और नाचा के पुरोधा दाऊ मंदराजी की जयंती अवसर पर ग्राम कुतुलबोड़ भांठा में छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति द्वारा भव्य रंग-मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोक कलाकारों, कवियों और साहित्यकारों की उपस्थिति रही। उन्होंने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया। लोक कलाकारों ने दाऊ मंदराजी के दौर की खड़े साज नाचा परंपरा को जीवंत करते हुए चिंकारा वादन की प्रस्तुति दी।
लोक कलाकार पप्पू कलिहारी ने गुरु के बाना बांध लिए गीत एवं भरथरी गायन प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी। वहीं जसवंत चतुर्वेदी के चिंकारा वादन ने दर्शकों का मन मोह लिया। ग्रामीण कवि आनंदराम सार्वा के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सहकारिता अलंकरण से सम्मानित एवं मार्कफेड अध्यक्ष कवि शशिकांत द्विवेदी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक आत्माराम कोशा अमात्य के द्वारा की गई।
आभार प्रदर्शन अखिलेश मिश्रा, धन्यवाद ज्ञापन ग्राम पटेल रोहित साहू ने किया। जानकारी संयोजक पवन यादव ने दी।
नाचा में दाऊ मंदराजी के योगदान पर प्रकाश डाला: विशेष अतिथियों में ओमप्रकाश साहू ने नाचा पर अपने विचार रखते हुए दाऊ मंदराजी के योगदान को रेखांकित किया। वहीं महेंद्र बघेल ने सरगुजा के रामगढ़ स्थित प्राचीन रंगमंच का उल्लेख किया जहां महाकवि कालिदास के नाटकों के मंचन की परंपरा रही है। कार्यक्रम में कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा। हर्षा देवांगन, रेशमी साहू, रौशन साहू, पवन यादव थंगेश्वर, अखिलेश मिश्रा आदि मौजूद रहे।



