छत्तीसगढ़बिलासपुर जिला

CG : नशीली दवाओं की तस्करी मामले में आरोपी को नहीं मिली राहत …

बिलासपुर। नशीली दवाओं की अवैध तस्करी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार से जुड़े मामलों में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि सह-आरोपी के खाते में यूपीआई के माध्यम से धनराशि भेजे जाने के तथ्य प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता की ओर संकेत करते हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एनडीपीएस एक्ट के मामलों में कानून काफी कठोर है और ऐसे मामलों में जमानत देने के लिए विशेष परिस्थितियों का होना आवश्यक है। चूंकि आरोपी की पहली जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है और मामले में कोई नया महत्वपूर्ण तथ्य सामने नहीं आया है, इसलिए दूसरी जमानत याचिका स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता। मामला अंबिकापुर में दर्ज एक प्रकरण से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सिरप की 100-100 मिलीलीटर की 108 बोतलें तथा बुप्रेनॉर्फिन के 2-2 मिलीलीटर के 100 इंजेक्शन जब्त किए थे। जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं, जिनके आधार पर अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल की गई।

जांच में सामने आया कि आरोपी जगदीश उर्फ विराट ने अपने मोबाइल फोन से यूपीआई के जरिए 25 हजार रुपये की राशि एक सह-आरोपी के बैंक खाते में स्थानांतरित की थी। पुलिस ने इस लेनदेन को नशीली दवाओं के कारोबार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और आपराधिक साजिश का हिस्सा माना। इसी आधार पर पुलिस ने 21 मई 2025 को जगदीश को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उसके पास से कोई नशीला पदार्थ या प्रतिबंधित सामग्री बरामद नहीं हुई है। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि सह-आरोपी अनिल गुप्ता उर्फ बाबू गुप्ता की दुकान उसकी दुकान के पास स्थित है। उनके अनुसार 17 फरवरी 2025 को सह-आरोपी ने यूपीआई सेवा काम नहीं करने की बात कहकर मदद मांगी थी, जिसके बाद मानवता के आधार पर 25 हजार रुपये उसके खाते में भेजे गए थे।

हालांकि शासन की ओर से इस तर्क का विरोध किया गया। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच में सामने आए डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय लेनदेन इस बात की ओर संकेत करते हैं कि आरोपी इस नेटवर्क को आर्थिक सहयोग प्रदान कर रहा था। शासन ने कहा कि ऐसे मामलों में वित्तीय सहायता भी अपराध की श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल प्रतिबंधित दवाओं की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध व्यापार के लिए बनाए गए नेटवर्क और उसकी

वित्तीय सहायता से भी जुड़ा है। अदालत ने माना कि उपलब्ध सामग्री और जांच के आधार पर इस स्तर पर आरोपी को राहत देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट को यह भी निर्देश दिया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई में तेजी लाई जाए और यथासंभव जल्द अंतिम निर्णय तक पहुंचने का प्रयास किया जाए। इस फैसले को एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में वित्तीय लेनदेन की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने संकेत दिया है कि अवैध मादक पदार्थों के कारोबार में सीधे शामिल होने के साथ-साथ आर्थिक सहयोग प्रदान करने वालों की भूमिका को भी गंभीरता से देखा जाएगा।

lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.

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