राजनांदगांव : मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना का निगम प्रशासन उड़ा रहे है धज्जियां – शिव वर्मा

राशन कार्ड बनाने निगम का नया नया कानून जनता परेशान

  राजनांदगांव। जिला भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष पार्षद दल के प्रवक्ता शिव वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना का निगम प्रशासन धज्जियां उड़ा रहे हैं, राशन कार्ड बनाने के लिए नगर निगम का नया कानून कायदे जिससे जनता परेशान है, श्री वर्मा ने निगम प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के अंतर्गत जो परिवार गरीबी की श्रेणी में आता है, ऐसे परिवार को तत्काल राशन कार्ड उपलब्ध कराना चाहिए। श्री वर्मा ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के अंतर्गत गरीबी राशन कार्ड बनेंगे और गरीबी से ऊपर आने पर राशन कार्ड कटेंगे भी आज भी बहुत से लोग प्रतिदिन नगर निगम का राशन कार्ड के लिए चक्कर लगा रहे हैं,  नया राशन कार्ड बनाने के लिए निगम प्रशासन द्वारा जो नियम बता रहे वह पूरी तरह मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना का विपरीत है,  नए राशन कार्ड बनाने के लिए आवेदक को पहले यदि आप किराएदार हो तो मकान मालिक का सहमति पत्र तथा निगम का टैक्स कॉपी साथ ही गरीबी सूची में नाम या 2011 के जनगणना सूची में नाम होना अनिवार्य होगा तभी नए राशन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं, ऐसा जानकारी निगम प्रशासन के द्वारा आवेदक को दिया जाता है, दूसरी तरफ अधिकारी कहते हैं, कि राशन कार्ड से पुरुष का नाम नहीं कटेगा। और अगर राशन कार्ड से नाम कटवाना है, तो शपथ पत्र मकान मालिक का किरायानामा टैक्स की कॉपी देना होगा उसके पश्चात जांच उपरांत सही पाए गए तभी राशन कार्ड से नाम कटेगा अन्यथा अपात्र माना जाएगा जबकि मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना का गाइडलाइन में स्पष्ट है, कि मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना का राशन कार्ड निरंतर बनना है, जिनका गाइडलाइन में यह उल्लेख है, कि मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के लिए एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, अति गंभीर बीमारी या श्रमिक कार्ड, असंगठित श्रमिक कार्ड ऐसे मापदंड वाले को मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के लाभ उपलब्ध कराना है, परंतु नगर निगम में खुद का नियम कानून कायदा स्वयं तैयार करते हैं, जिससे हितग्राहियों को मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना का राशन कार्ड का लाभ न मिले नगर निगम में 400 से 500 राशन कार्ड धारी कई महीनों से राशन कार्ड बनवाने, नाम कटवाने, नाम ठीक कराने के लिए हितग्राही निगम और खाद विभाग का चक्कर काट रहे हैं, तथा अधिकारी मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना का धज्जियां उड़ा रहे हैं।

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