राजनांदगांव : हिन्दी – हिन्द का भाषायी गौरव – द्विवेदी


राजनांदगांव. विश्व हिन्दी दिवस के महत्तम अवसर पर नगर के विचार विज्ञ प्राध्यापक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने समसामयिक विचार-चिंतन टीप में कहा कि हिन्दी हिन्द की भाषायी गौरव एवं सांस्कृतिक पहचान है। जिस पर नित्य कार्य व्यवहार में अनिवार्यता से अमल कर विश्व की अग्रणी एवं सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा का दर्जा दिला सकते हैं। आज विश्व के एक सौ पचहत्तर से अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी का विशेष रूप से अध्ययन-अध्यापन होता है तथा अधिकांश बड़े राष्ट्रों एवं यू.एन.ओ. में हिन्दी भाषा को विचार अभिव्यक्ति का दर्जा प्रदान किया गया है। साथ ही विश्व के बहुत से भाषायी संगठन, संस्थान, विश्व हिन्दी सम्मेलन, संगोष्ठी, कार्यशाला आदि का आयोजन वर्ष – प्रतिवर्ष करते हैं। विशेष रूप से सूरीनाम, फिजी, त्रिनीनाड़, गुयाना, मारीशस, थाईलैण्ड, सिंगापुर आदि देशों में हमारी हिन्दी को सह-राजभाषा के रूप में मान्यता दी गई है। आगे प्राध्यापक द्विवेदी ने विशिष्ट विचार चर्चा में स्पष्ट किया कि विश्व बाजार की प्रमुख विज्ञापन भाषा बन चुकी हमारी हिन्दी और अधिक समृद्ध तथा विस्तारित करने के लिए अनिवार्य होगा कि हमारी वर्तमान युवा-किशोर-प्रबुद्ध नेतृत्वकर्ता पीढ़ी अपने समग्र, कार्य व्यवहार हिन्दी में ही करें और स्वीकारें तथा दूसरों को भी इसके लिए अभिप्रेरित करें। यही विश्व हिन्दी दिवस का प्रत्येक हिन्दवासी, सांस्कृतिक रचनाधर्मी के लिए श्रेष्ठ सार्थक संदेश होगा आईये हम सभी हिन्दी प्रेमी संकल्पित हों कि हमेशा हिन्दी में बोलेंगे, हिन्दी में लिखेंगे और हिन्दी को देश-धरती की सिरमौर भाषा बनाने में मन-प्राण से पहल कर नित्य कार्य व्यवहार करेंगे।

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