राजनांदगांव : महाविद्यालय में विश्व हिन्दी दिवस कार्यक्रम आयोजित

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव के प्राचार्य डॉ के एल टाण्डेकर के निर्देशन एवं पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ बी एन जागृत के मार्गदर्शन में आज विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर ज्ज्हिन्दी का वैश्विक स्वरूप और व्यावहारिक हिन्दीज्ज् के संदर्भ में एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन हिन्दी एवं पत्रकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्राचार्य के0एल0टाण्डेकर एवं विशेष अतिथि डॉ0 अंजना ठाकुर तथा डॉ0 अनीता शंकर थे।
कार्यक्रम के संरक्षक प्राचार्य डॉ.के.एल.टाण्डेकर ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि विश्व हिन्दी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य हिन्दी भाषा का विश्व स्तर पर मान्यता के लिए प्रयास करना है। साथ ही पूरे विश्व में हिन्दी का अधिक से अधिक प्रचार – प्रसार करें ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी भाषा को प्रतिस्थापित कर सकें प्रत्येक भारतीय के लिए यह गौरव का विषय है, साथ ही यह दायित्व है कि हिन्दी बोलने, सुनने एवं उसका संचार अलग – अलग क्षेत्रों में करें. हमारे देश में विभिन्न बोलियां बोली जाती हैं लेकिन जितना अधिक प्रयोग आज हिन्दी भाषा का है किसी अन्य भाषा का नहीं है. हिन्दी भाषा का मान , सम्मान व स्वाभिमान बना रहे यह प्रत्येक भारतीयों का नैतिक कर्तव्य है।
पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डॉ0 बी एन जागृत ने विश्व हिन्दी दिवस को मनाने का उद्देश्य को बताते हुए कहा कि 10 जनवरी 1975 में महाराष्ट्र नागपुर में प्रथम वैश्विक हिन्दी सम्मेलन हुआ था जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधि सम्मिलित हुए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था। सन् 2006 में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह ने प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाने की घोषणा की। तब से प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य हिन्दी भाषा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि हिन्दी को अपने ही घर में उपेक्षा झेलनी पडती है. संयुक्त राष्ट्र संघ की 6 अधिकारिक भाषाएं हैं, उनमें हिन्दी भाषा नहीं है। डॉ. जागृत ने कहा कि भारतीय जो विदेशों में निवासरत है उनका भी कर्तव्य  है कि हिन्दी भाषा का उन क्षेत्रों में प्रसार करें।
अर्थशास्त्र विभाग की प्राध्यापक डॉ. सुमिता श्रीवास्तव ने कहा कि भाषा सिर्फ ज्ञान का माध्यम नहीं वह संपर्क का भी माध्यम है किसी भी भाषा के प्रचार – प्रसार के लिए न केवल साहित्य का बल्कि उस भाषा का सम्पूर्ण ज्ञान होना भी जरुरी है। उन्होंने हिन्दी में रोजगार के अवसर को बताते हुए कहा कि एक अनुवादक के रुप में भी हमें अलग – अलग भाषाओं का ज्ञान होना जरुरी है.
प्रो0 डॉ. चंदन सोनी ने हरिवंश राय बच्चन साहब एवं गुलजार साहब की कविताओं का सस्वर वाचन किया साथ ही अपना मौलिक कविता का पाठ करते हुए हिन्दी की महत्ता को बताया.
डॉ0जेनामणी ने कहा कि किसी भी भाषा को सीखने के लिए आपको उस भाषा से प्रेम होना चाहिए।
डॉ0 अनीता शंकर  एवं क्रीडा अधिकारी अरुण चौधरी ने व्यवहारिक हिन्दी विषय पर अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम का संचालन डॉ0 नीलम तिवारी ने किया एवं कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए हिन्दी विभाग के डॉ0 गायत्री साहू, डा0 भवानी, डॉ0 कौशिक बीसी, पत्रकारिता विभाग से श्री अमितेश सोनकर, रेशमी साहू, लोकेश शर्मा तथा महाविद्यालय के प्राध्यापकगण उपस्थित थे.

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