
Agriculture Tips: मार्च की शुरुआत गर्मी में किसानों को गेहूं-सौंफ-जीरे की फसल पर नुकसान का डर, यहाँ जाने इससे बचने का उपाय ?
Agriculture Tips: मौसम के मिजाज में अचानक आए बदलाव के साथ ही, पिछले कुछ दिनों में गर्मी की तीव्रता तेजी से बढ़ रही है। तापमान में इस बढ़ोतरी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। जहां आमतौर पर मार्च का महीना हल्की गर्मी लेकर आता है, वहीं इस साल शुरुआत से ही तापमान काफी बढ़ गया है। खड़ी फसलों- विशेष रूप से गेहूं, सौंफ और देर से बोए गए जीरे- पर इसके सीधे असर को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं, जिससे किसान संभावित नुकसान को लेकर भयभीत हैं।
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कृषि विशेषज्ञ बजरंग सिंह बिजारनिया ने कहा कि मौसम के मिजाज में आया यह अचानक बदलाव किसानों की सारी मेहनत पर पानी फेर सकता है। फसलें अभी पूरी तरह पकने की अवस्था तक नहीं पहुंची हैं, फिर भी तापमान तेजी से बढ़ने लगा है। नतीजतन, इस बात की संभावना बढ़ गई है कि फसल के दाने पूरी तरह विकसित होने से पहले ही सूख सकते हैं। यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो फसलों की पैदावार और गुणवत्ता- दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि गेहूं, सौंफ और जीरे की फसलों के बेहतर विकास के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान सबसे अनुकूल माना जाता है।
Agriculture Tips: कैसे करे इसकी खेती शुरू
हालांकि अभी मार्च का ही महीना है, लेकिन तापमान अचानक बढ़कर लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। यह तेज गर्मी फसलों में दाना बनने की प्रक्रिया में सीधे तौर पर बाधा डाल सकती है, जिससे पैदावार कम होने का खतरा बढ़ जाता है। गेहूं की फसल इस समय विकास के एक बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है; अधिकांश खेतों में बालियां निकल आई हैं और दाना बनने की प्रक्रिया अभी शुरू ही हुई है। ऐसे नाजुक मोड़ पर, तेज गर्मी के संपर्क में आने से दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते और सिकुड़ जाते हैं। इसका परिणाम न केवल कम उत्पादन के रूप में सामने आता है, बल्कि गेहूं की गुणवत्ता भी घट जाती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है।
Agriculture Tips: सौंफ और मेथी की फसलें
किसानों ने बताया है कि यह केवल गेहूं की फसल की ही बात नहीं है; सौंफ और मेथी की फसलें भी इस समय दाना बनने की अवस्था में हैं। बढ़ते तापमान का इन फसलों पर भी बुरा असर पड़ सकता है। तेज गर्मी के कारण दानों का आकार छोटा रह सकता है और उनकी समग्र गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इससे बाजार में अपनी उपज के लिए कम दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे किसानों की चिंताएं और भी गहरी हो जाती हैं। वर्तमान में, नागौर क्षेत्र में इन फसलों की बड़े पैमाने पर खेती की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, गेहूं लगभग 34,468 हेक्टेयर में, सौंफ 14,375 हेक्टेयर में और मेथी लगभग 3,588 हेक्टेयर में लगी हुई है।
Agriculture Tips: गेहूं की फसलों
इन सभी फसलों में इस समय दाना बनने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में, तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी एक बड़े इलाके में फसलों को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। किसानों का कहना है कि मार्च के आखिरी हफ्ते में पड़ने वाली गर्मी इस साल महीने की शुरुआत में ही आ गई है। मौसम के इस बदलाव से फसलों के समय से पहले पकने की आशंका बढ़ गई है। जब फसलें समय से पहले पक जाती हैं, तो दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाते, जिससे पैदावार कम हो जाती है और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
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अगर आने वाले दिनों में तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो किसानों की मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं। इसलिए, किसान मौसम पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि हालात में थोड़ा बदलाव आए, ताकि उनकी फसलों को बड़े नुकसान से बचाया जा सके। विशेषज्ञों का भी मानना है कि अगर तापमान नियंत्रण में रहता है, तो फसलों को कुछ हद तक बचाया जा सकता है; अन्यथा, इस मौसम में किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।