lokesh sharma

Lokesh Sharma | Editor Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.
  • CG : जल संरक्षण से आजीविका तक: छत्तीसगढ़ में ‘आजीविका डबरी’ अभियान बना ग्रामीण बदलाव की धुरी …

    नी’ महाअभियान के तहत मनरेगा में ऐतिहासिक पहल

    बारिश से पहले 10 हजार से अधिक आजीविका डबरी निर्माण का लक्ष्य

    निजी भूमि पर टिकाऊ परिसंपत्तियां, पंचायत-समुदाय की सहभागिता से विकसित हो रहा मॉडल

    निजी भूमि पर टिकाऊ परिसंपत्तियां, पंचायत-समुदाय की सहभागिता से विकसित हो रहा मॉडल
    निजी भूमि पर टिकाऊ परिसंपत्तियां, पंचायत-समुदाय की सहभागिता से विकसित हो रहा मॉडल

    रायपुर : छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सतत आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के अंतर्गत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत आजीविका डबरी (फार्म पोंड) निर्माण का विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के अंतर्गत प्रदेशभर में 10,000 से अधिक आजीविका डबरी का निर्माण कार्य प्रगति पर है। यह कार्य समाज के सबसे कमजोर वर्ग के हितग्राहियों की निजी भूमि पर किया जा रहा है, जिससे एक ओर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर दीर्घकालीन एवं टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। 

    अभियान के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राहियों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि जल संसाधन और आवास आधारित आजीविका को एकीकृत रूप में मजबूत किया जा सके।

    इस योजना के माध्यम से जहां मनरेगा के अंतर्गत स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो रहा है, वहीं वर्षा जल संचयन को संस्थागत रूप से बढ़ावा मिल रहा है। आजीविका डबरी के माध्यम से अंतर्विभागीय अभिसरण के तहत कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं अन्य जल आधारित गतिविधियों की योजनाबद्ध रूप से रूपरेखा तैयार कर उनका क्रियान्वयन किया जाएगा।

    प्रत्येक आजीविका डबरी का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप 20 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर आकार मं) किया जा रहा है। जल की गुणवत्ता और दीर्घकालीन टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए इनलेट-आउटलेट व्यवस्था तथा सिल्ट अरेस्टिंग चैंबर की अनिवार्य व्यवस्था की गई है।इस अभियान में पंचायतों और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। डबरी निर्माण कार्य का शुभारंभ पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति में किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर विषय पर विस्तृत चर्चा कर हितग्राहियों की जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा की जा रही है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही हितग्राहियों से आवश्यक अंशदान भी लिया जा रहा है, ताकि स्वामित्व और सहभागिता की भावना मजबूत हो।

    आजीविका डबरी का निर्माण सैटेलाइट आधारित क्लार्ट ऐप के माध्यम से वैज्ञानिक ढंग से ‘रिज-टू-वैली एप्रोच’ पर किया जा रहा है। यह कार्य विभिन्न विभागों के अभिसरण के साथ कन्वर्जेन्स पैकेज के रूप में लागू किया जा रहा है। पंचायतों के साथ-साथ प्रदान, ट्राइफ, एफईएस सहित अन्य सिविल सोसायटी संगठनों का भी सक्रिय सहयोग प्राप्त हो रहा है।

    सभी निर्माण कार्यों को बारिश से पूर्व पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रति आजीविका डबरी अधिकतम लागत तीन लाख रुपये तय की गई है। जल संरक्षण के साथ-साथ निजी भूमि पर टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण के माध्यम से यह पहल ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण, अभिनव और अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभर रही है।

  • CG : मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की एक और बड़ी सफलता, चाकू से कटी मुख्य धमनी, सबक्लेवियन आर्टरी को जोड़कर बचाया युवक का हाथ …

    …और इस तरह डॉक्टरों ने असंभव को किया संभव

    सबक्लेवियन आर्टरी कटने के बावजूद अत्यंत जटिल सर्जरी से बचाया गया मरीज का हाथ

    कॉलर बोन काटकर कृत्रिम नस लगाई, चार घंटे चले ऑपरेशन में डॉक्टरों ने मरीज को दिव्यांग होने से बचाया

    यह अत्यंत जटिल ऑपरेशन डॉ. कृष्णकांत साहू (विभागाध्यक्ष हार्ट चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग) के नेतृत्व में किया गया

    छत्तीसगढ़ का संभवत: पहला केस जिसमें कंधे की हड्डी को काटकर एवं कृत्रिम नस (artificial graft ) लगाकर मरीज की जान बचाई गई

    रायपुर : पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा), रायपुर के डॉक्टरों ने एक बार फिर जटिल और जानलेवा केस की जटिल एवं सफलतापूर्वक  सर्जरी कर घायल मरीज के हाथ को कटने से बचाया। डॉक्टरों के अनुसार, यदि मरीज को समय पर इस प्रकार की जटिल शल्य- चिकित्सा की सुविधा नहीं मिलती तो मरीज के हाथ कटने की नौबत आ जाती और मरीज दिव्यांग हो जाता।  हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में एक युवक के कंधे पर चाकू से हुए हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त मुख्य रक्त नली (सबक्लेवियन आर्टरी) को जोड़कर डॉक्टरों की टीम ने न केवल मरीज की जान बचाई, बल्कि उसका हाथ कटने से भी बचा लिया। इस सर्जरी की एक और विशेष बात यह रही कि इसमें ऑर्थोपेडिक सर्जन भी शामिल रहे जिनकी मदद से कॉलर बोन को काटा गया एवं ऑपरेशन के बाद वापस प्लेट लगाकर जोड़ दिया गया।

     इस केस की विस्तृत जानकारी देते हुए विभागाध्यक्ष (हार्ट- चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी) डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि :- अम्बेडकर अस्पताल के ट्रॉमा यूनिट में 34 वर्षीय एक मरीज अत्यधिक रक्तस्राव और मरणासन्न अवस्था में लाया गया। मरीज  इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी में काम करता है और अमलेश्वर का निवासी है। परिजनों के अनुसार, मरीज अपने परिवार के साथ मोटरसाइकिल से रायपुर रेलवे स्टेशन की ओर जा रहा था, तभी इलेक्ट्रिक रिक्शा से टक्कर हो गई। विवाद के दौरान रिक्शा चालक ने मरीज के बाएं कंधे पर धारदार चाकू से हमला कर दिया। घाव इतना गहरा था कि कंधे की हड्डी (क्लेविकल बोन) के पीछे से गुजरने वाली मुख्य धमनी सबक्लेवियन आर्टरी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

    चोट लगते ही धमनी से खून का तेज फव्वारा निकलने लगा और कुछ ही देर में मरीज बेहोश हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग पहुंचाया, जहां घाव में कॉटन गॉज भरकर रक्तस्राव को अस्थायी रूप से रोका गया। हालांकि रक्तस्राव रुकने के साथ ही बाएं हाथ में रक्त प्रवाह भी बंद हो गया, जिससे हाथ काला पड़ने लगा और ताकत खत्म होने लगी। समय पर ऑपरेशन न होने की स्थिति में हाथ काटने की नौबत आ सकती थी।

    प्रारंभिक उपचार के बाद मरीज के परिजन उसे अपनी इच्छा से अन्य अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन चोट की गंभीरता और धमनी के क्षतिग्रस्त होने के कारण अन्य अस्पतालों ने इलाज से मना कर दिया। इसके बाद मरीज को पुनः अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में लाया गया, जहां मेरे (डॉ. कृष्णकांत साहू के) नेतृत्व में तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

    अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी

    सबक्लेवियन आर्टरी की सर्जरी विशेष रूप से उसके दूसरे भाग (सेकंड पार्ट) में बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि यह धमनी छाती के भीतर कॉलर बोन के पीछे स्थित रहती है। पट्टी हटाते ही अत्यधिक रक्तस्राव की आशंका बनी हुई थी, जिसके लिए वैस्कुलर कंट्रोल अत्यंत आवश्यक था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निर्णय लिया गया कि मरीज की कॉलर बोन को काटकर धमनी तक पहुंच बनाई जाए।


    कॉलर बोन को काटने के बाद पाया गया कि धमनी लगभग 3 सेमी तक पूरी तरह क्षत-विक्षत हो चुकी थी। इसे जोड़ने के लिए 7×30 मिमी. साइज का डेक्रॉन ग्राफ्ट (कृत्रिम नस) लगाया गया। सर्जरी के दौरान लगभग 5 यूनिट रक्त चढ़ाया गया और करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हाथ में पुनः रक्त प्रवाह शुरू हो सका। इस दौरान ब्रैकियल प्लेक्सस (तंत्रिका तंत्र) को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया, क्योंकि इसमें क्षति होने पर हाथ में स्थायी लकवे की संभावना रहती है। ऑपरेशन के बाद कॉलर बोन को प्लेट लगाकर वापस जोड़ दिया गया

    अब पूरी तरह स्वस्थ, काम पर लौटा मरीज

    सफल ऑपरेशन और समय पर उपचार के चलते मरीज का हाथ बच गया और गैंगरीन की स्थिति टल गई। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और अपने रोजमर्रा के कार्यों में वापस लौट चुका है।

    इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने वाली टीम में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू,

    ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रणय श्रीवास्तव, डॉ लोमेश साहू, 

    एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू,

    जूनियर डॉक्टर – डॉ. आयुषी खरे, ख्याति, , आकांक्षा साहू, संजय त्रिपाठी, डॉ. ओमप्रकाश शामिल रहे।

    नर्सिंग स्टाफ में राजेन्द्र, नरेन्द्र, मुनेश, चोवा, दुष्यंत तथा एनेस्थेसिया तकनीशियन भूपेन्द्र और हरीश ने अहम भूमिका निभाई।

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    यह सफलता न केवल अम्बेडकर अस्पताल बल्कि सभी के लिए गर्व का विषय है, जो यह साबित करती है कि समय पर सही निर्णय, समेकित प्रयास और विशेषज्ञ चिकित्सा से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

    डॉ. विवेक चौधरी, डीन, पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर

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    यह सर्जरी अत्यंत जटिल और जोखिम भरी थी। सबक्लेवियन आर्टरी जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण धमनी की मरम्मत प्रत्येक अस्पताल में संभव नहीं होती। अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग, ट्रॉमा यूनिट और एनेस्थेसिया टीम के समन्वित प्रयास से यह संभव हो सका। यह प्रयास यह दर्शाती है कि सरकारी अस्पतालों में भी उच्चस्तरीय और जीवन रक्षक उपचार सुविधा उपलब्ध है।

    डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, अम्बेडकर अस्पताल

  • CG : विशेष समाचार : प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में महासमुंद जिला राज्य में दूसरे स्थान पर …

    का निर्माण पूर्ण

     विशेष समाचार : प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में महासमुंद जिला राज्य में दूसरे स्थान पर

    महासमुंद जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के प्रभावी एवं त्वरित क्रियान्वयन के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत मात्र 10 माह की अवधि में जिले में कुल 27 हजार 441 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। जिसके आधार पर महासमुंद जिला राज्य स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। जिले में निर्मित कुल 27,441 आवासों में विभिन्न विकासखंडों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पिथौरा विकासखंड में सर्वाधिक 7,193 आवास, बागबाहरा विकासखंड में 6,102 आवास, महासमुंद विकासखंड अंतर्गत 5,775 आवास, सरायपाली विकासखंड अंतर्गत 5,062 आवास तथा बसना विकासखंड में 3,309 आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है।


    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप जिला प्रशासन द्वारा गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

    इसी दिशा में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं स्थायी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। योजना के क्रियान्वयन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।


    जिले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार के सतत निरीक्षण में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जनप्रतिनिधियों तथा मैदानी अमले के सतत प्रयासों, नियमित निगरानी एवं प्रभावी समन्वय के चलते यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हितग्राहियों को समय पर तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता एवं निर्माण सामग्री उपलब्ध कराकर कार्यों में गति लाई गई। जिले में आवास निर्माण की इस उपलब्धि से हजारों परिवारों का पक्के मकान का सपना साकार हुआ है। लाभान्वित परिवारों ने केन्द्र एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसके लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है। जिला प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के लक्ष्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने निरंतर समन्वय के साथ क्रियान्वयन किया जा रहा है। ताकि कोई भी पात्र परिवार आवास सुविधा से वंचित न रहे।

  • CG : बस्तर के सिटी ग्राउंड में गूंजी शहनाई : 280 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे …

    ढ़ ने रचा विश्व कीर्तिमान

    मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना

    जगदलपुर : बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर का प्रतिष्ठित सिटी ग्राउंड मंगलवार 10 फरवरी को एक ऐतिहासिक और भव्य नजारे का गवाह बना, जहां मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 280 जोड़ों ने एक ही मंडप के नीचे अपने नव-दाम्पत्य जीवन की सामूहिक शुरुआत की। जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस गरिमामय समारोह ने उस वक्त और भी गौरव हासिल कर लिया, जब पूरे प्रदेश में एक साथ 6,412 जोड़ों का विवाह संपन्न कराकर छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। इसी कड़ी में जगदलपुर का यह आयोजन अपनी पारंपरिक भव्यता और सांस्कृतिक छटा के कारण आकर्षण का केंद्र रहा।

    मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना
    समारोह का आगाज एक भव्य बारात के साथ हुआ, जिसमें 280 वरों के साथ उनकी माताएं हाथों में कलश और दीप लेकर परंपरा अनुसार चल रही थीं। बस्तर की पारंपरिक बाजा मोहरी की सुमधुर स्वर लहरियों के बीच निकली इस बारात ने पूरे शहर को उल्लास से भर दिया। विवाह मंडप में हरिद्रालेपन, सप्तपदी और जयमाला जैसी रस्में पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न हुईं और हवन से उठने वाले सुगंधित द्रव्यों ने समूचे वातावरण को महका दिया। नव-वधुओं ने वरों के साथ एकसूत्र में बंधकर नए जीवन का संकल्प लिया, जिससे सिटी ग्राउंड का माहौल अत्यंत भावुक और उत्साहजनक हो गया।


    इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर नव विवाहित जोड़ों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में योजना की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह योजना गरीब माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा सहारा है। उन्होंने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि पूर्व में निर्धन परिवारों को बेटियों के सम्मानजनक विवाह के लिए अपनी संपत्ति तक गिरवी रखनी पड़ती थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन ने 2005 में इस जिम्मेदारी को उठाया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2005 में मात्र 5 हजार रुपये की सहायता राशि से शुरू हुई यह योजना आज 50 हजार रुपये तक पहुँच चुकी है, जो गरीब परिवारों के सशक्तिकरण का प्रतीक है।


    कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि इस पुनीत कार्य के साक्षी बने, जिनमें महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी और जनपद पंचायत अध्यक्ष पदलाम नाग शामिल थे। इन सभी ने नव-दंपत्तियों को सुखमय दाम्पत्य जीवन की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर सु नंदिनी साहू, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग मनोज सिन्हा सहित अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की सक्रिय मौजूदगी में यह विशाल आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

  • CG : छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला : जारी हुई कोरोना वॉरियर्स की सत्यापित सूची …

    भर्ती के लिए संशोधित शेड्यूल घोषित

    जगदलपुर : छत्तीसगढ़ में शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और कोरोना काल के संकट मोचकों को उनके समर्पण का समुचित अवसर देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत उन हजारों अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाण पत्रों की सत्यापित सूची सार्वजनिक कर दी गई है, जिन्होंने महामारी के कठिन दौर में छह माह से अधिक का समय अस्पतालों में निरंतर सेवा देते हुए व्यतीत किया था। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा जारी इस ताजा अपडेट के बाद अब भर्ती प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ अपने अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है।


        विभागीय जानकारी के अनुसार संभाग स्तरीय समितियों द्वारा 30 जनवरी से 8 फरवरी के बीच किए गए गहन भौतिक सत्यापन के परिणामों को आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है। इस सूची के सार्वजनिक होते ही अब अभ्यर्थियों के लिए दावा-आपत्ति की खिड़की खुल गई है, जिसके तहत वे 16 फरवरी तक अपने संबंधित संभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय में जाकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थी उसी क्षेत्र में अपना पक्ष रखें जहाँ से उनका अनुभव प्रमाण पत्र संबद्ध है, ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि की गुंजाइश न रहे।


        यह प्रक्रिया आगामी 19 मार्च को अपने अंतिम मुकाम तक पहुँचेगी। संशोधित समय-सारणी के मुताबिक, 20 फरवरी तक प्राप्त आपत्तियों का त्वरित निराकरण किया जाएगा, जिसके पश्चात 3 मार्च को पहली मेरिट सूची का प्रकाशन होगा। इस चरण में भी अभ्यर्थियों को पुनर्विचार का मौका देने के बाद, आगामी 19 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से अंतिम चयन सूची वेबसाइट https://www.cghealth.nic.in/public/#/ पर साझा कर दी जाएगी। 

  • CG : दुर्घटना में मृतक के परिजन को दो लाख रुपए प्रतिकर सहायता राशि स्वीकृत …

    महासमुन्द : दावा निपटान आयुक्त एवं कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा दुर्घटना में मृतक के परिजन को हुए अपहानि को दृष्टिगत रखते हुए दो लाख रूपए प्रतिकर सहायता राशि स्वीकृत की गई है।


    इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग-53 में टक्कर मारकर भागने मोटरयान सड़क दुर्घटना में ग्राम लोहारडीह निवासी नेहरू यादव की मृत्यु हो गई थी। अपहानि के कारण मृतक के विधिक प्रतिनिधि के रूप में उनकी माता शिखा यादव को दो लाख रुपये की प्रतिकर सहायता राशि स्वीकृत की गई है।

  • CG : विद्यार्थियों के आधार बायोमेट्रिक अपडेट के लिए विद्यालयों में किए जाएंगे शिविर आयोजित …

    352 विद्यालयों के 21 हजार 406 विद्यार्थियों का बायोमेट्रिक किया जाएगा अपडेट

    महासमुंद : जिले में यूडाईस 2025-26 के अंतर्गत आधार से संबंधित बायोमेट्रिक अपडेट की प्रक्रिया को तेज करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 06 फरवरी 2026 की स्थिति में जिले में कुल 30,587 विद्यार्थियों का बायोमेट्रिक अपडेट लंबित है, जिसे शीघ्र पूर्ण किया जाना है। इस हेतु विद्यालयों में विशेष बायोमेट्रिक अपडेट शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से यूआईडीएआई से डाटा अपडेट कर उसकी प्रविष्टि यूडाईस पोर्टल पर की जाएगी। अभियान के अंतर्गत ई.डी.एम. चिप्स से समन्वय कर 20 से अधिक लंबित बायोमेट्रिक वाले 352 विद्यालयों का चयन किया गया है, जिसमें लगभग 21,406 विद्यार्थियों का अपडेट किया जाना है।


    जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा रेखराज शर्मा द्वारा सभी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयकों को निर्देशित करते हुए अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए विद्यालयों को पालकों एवं विद्यार्थियों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं शिविर में उपस्थित होकर अपना बायोमेट्रिक अपडेट करवा सकें। इस कार्य के सफल संचालन के लिए विकासखंड स्तर पर बीआरसी एवं संकुल स्तर पर संकुल समन्वयकों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। पूरे अभियान की प्रतिदिन मॉनिटरिंग जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद द्वारा किया जाएगा। प्रथम चरण में 5 से 7 वर्ष एवं 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों के बायोमेट्रिक अपडेट पर फोकस करते हुए शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।


    यूआईडीएआई द्वारा बायोमेट्रिक अपडेट की जानकारी यूडाईस पोर्टल पर अपडेट करने की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही यूआईडीएआई के निर्देशानुसार 7 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट एक वर्ष के लिए निःशुल्क किया गया है, जबकि 5 से 7 वर्ष एवं 17 वर्ष के बच्चों के लिए यह सुविधा पहले से ही निःशुल्क है। आधार ऑपरेटरों को प्रतिदिन शिविर की जानकारी निर्धारित प्रारूप में संधारित करने तथा शिविर स्थल पर आवश्यक दस्तावेज सूची, शुल्क सूची एवं अन्य निर्देश प्रदर्शित करने कहा गया हैं। 

  • CG : कलेक्टर ने ली समय-सीमा की बैठक …

    फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत अभियान की शुरुआत

    समितियों में स्टेक का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश

    योजनाओं की प्रगति में तेजी लाएं – कलेक्टर लंगेह

    महासमुंद : कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने आज सुबह 10ः30 बजे से कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक आयोजित कर जिले में संचालित शासकीय योजनाओं, कार्यक्रमों एवं आगामी आयोजनों की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार, अपर कलेक्टर सचिन भूतड़ा, रवि कुमार साहू, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), विभागीय जिलाधिकारी, जनपद सीईओ, नगरीय निकायों के सीएमओ तथा वीसी के माध्यम से ब्लॉक स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।


    बैठक के दौरान कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने सिरपुर महोत्सव 2026 के सफल आयोजन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने आयोजन के दौरान सौंपे गए दायित्वों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करने एवं विभिन्न व्यवस्थाओं में सराहनीय सहयोग देने के लिए सभी को बधाई दी।
    कलेक्टर लंगेह ने राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत दवा सेवन करते हुए अभियान का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर बैठक में मौजूद जिला अधिकारियों ने भी दवा का सेवन किया। कलेक्टर ने कहा कि जिले में 10 से 25 फरवरी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा सामूहिक दवा सेवन कराया जाना है।

    उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया कि डीईसी एवं एल्बेंडाजोल दवा का वितरण एवं सेवन निर्धारित समय-सारणी एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाए तथा दवा सेवन स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में कराया जाए। कलेक्टर लंगेह ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग करें और स्वयं तथा अपने परिवार के सभी पात्र सदस्यों को दवा अवश्य सेवन कराएं, ताकि जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सके।


    बैठक में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने जिले में जारी धान उठाव की समीक्षा करते हुए डीईओ के विरुद्ध लंबित धान उठाव की स्थिति पर ध्यान देते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन उपार्जन केंद्रों में डीईओ के विरुद्ध धान का उठाव लंबित है, वहाँ प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र उठाव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने तथा धान खरीदी पूर्णतः प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए।

    कलेक्टर ने कहा कि धान उठाव के लिए 15 फरवरी तक डीईओ जारी करें एवं उठाव सुनिश्चित करें। स्टॉक के भौतिक सत्यापन में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए। बैठक में आधार बेस्ड उपस्थिति प्रणाली को अनिवार्य करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी-कर्मचारी प्रतिदिन सुबह 10 बजे कार्यालय में उपस्थित रहें। उपस्थिति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ई-ऑफिस प्रणाली को लेकर कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी फाइलों का मूवमेंट ई-फाइल के माध्यम से ही किया जाए, यह अनिवार्य है। इससे कार्यों में पारदर्शिता एवं समयबद्धता सुनिश्चित होगी।


    उन्होंने मुख्य सचिव द्वारा किए गए समीक्षा के अनुरूप विभिन्न विभागों के व्यापक समीक्षा की और शासन से प्राप्त निर्देशानुसार क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए गए। प्रमुख रूप से स्वास्थ्य, महिला बाल विकास, जिला पंचायत, कृषि, शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कार्यक्रम अनुसार समीक्षा की। कलेक्टर ने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं को ध्यान में रखते हुए जिले को विकास क्रम में अग्रणी बनाए रखना है।


    इसके अतिरिक्त बैठक में अन्य शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जनहित के कार्यों में तेजी, गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, तथा समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करना सभी विभागों की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने पीएम जनमन, मुख्यमंत्री जनदर्शन, कलेक्टर जन चौपाल, समय-सीमा पत्रक और राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

  • CG : आर.बी.सी. 6-4 के तहत 08 लाख रुपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत …

    महासमुंद : कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत प्राकृतिक आपदा से मृत्यु होने पर 2 मृतकों के निकटतम वारिसान के लिए चार लाख रुपए के मान से कुल 08 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की है। इनमें पानी में डूबने से मृत्यु होने पर बागबाहरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम मुनगासेर के मृतक मनीष बरिहा की माता नर्मदा बरिहा के लिए एवं आकाशीय बिजली गिरने से मृत्यु होने पर पिथौरा विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम कोल्दा के मृतक सदानंद चक्रधारी की पत्नी गायत्री चक्रधारी के लिए चार-चार लाख रुपए आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है।

  • CG : बिहान योजना से पंचबाई की बदली तकदीर, बनी सफल व्यवसायी …

    मासिक आय पहुंची 2.5 लाख रूपए से 03 लाख रूपए तक

    रायपुर : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में  मुंगेली जिले के विकासखण्ड लोरमी के ग्राम खपरीडीह निवासी पंचबाई साहू ने बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में सफलता प्राप्त की है। बिहान योजना से जुड़कर उन्होंने अपनी तकदीर बदली है, अब वे सफल व्यसायी बन चुकी है। स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पूर्व पंचबाई साहू की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी।

    परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उन्हें साहूकारों से ऊँचे ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता था। आर्थिक निर्भरता के कारण न केवल परिवार की बुनियादी ज़रूरतें अधूरी रह जाती थीं, बल्कि आत्मसम्मान भी प्रभावित होता था।

       पंच बाई ने बताया कि बिहान योजना के अंतर्गत माँ सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, सामूहिक सहयोग और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। उन्होंने व्यवसाय के लिए रिवॉल्विंग फंड से 15 हजार रूपए, बैंक ऋण 01 लाख 50 हजार रूपए और 60 हजार रूपए सीआईएफ राशि प्राप्त हुई। साथ ही समूह के स्तर पर उन्हें 30 हजार रूपए का अतिरिक्त सहयोग भी मिला।

    प्राप्त राशि से उन्होंने फर्नीचर दुकान की शुरुआत की। परिश्रम, सही योजना और समूह के सहयोग से उनका व्यवसाय निरंतर आगे बढ़ता गया। आज उनकी मासिक आय लगभग 2.5 लाख रूपए से 03 लाख रूपए तक पहुँच चुकी है। इससे उनके बच्चों की शिक्षा बेहतर होने के साथ-साथ जीवन स्तर में सुधार आया है। पंचवाई साहू आज केवल स्वयं सफल नहीं हैं, बल्कि ग्राम की अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

  • CG : गिरवानी और कन्हर एनीकट के लिए 7.69 करोड़ स्वीकृत …

    रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बलरामपुर रामानुजगंज जिले के अंतर्गत दो सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 7.69 करोड़ की राशि स्वीकृत किये गये हैं। स्वीकृत कार्यो में विकासखण्ड-रामचंद्रपुर की रामानुजगंज शहर के कन्हर एनीकट के जीर्णोद्धार व घाट निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 11 लाख 87 हजार  रुपये स्वीकृत किये गये है। योजना के निर्माण से भू-जल संवर्धन निस्तारी एवं पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी।

    इसी तरह से विकासखण्ड-रामचंद्रपुर की गिरवानी नदी एनीकट योजना के निर्माण कार्य हेतु 3 करोड़ 57 लाख 60 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं। योजना से जल संवर्धन निस्तारी, पेयजल एवं आवागमन के साथ किसानों द्वारा स्वयं के साधनो से 75 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। योजना के अंतर्गत निर्माण कार्यों को कराने मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग अम्बिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई हैं।

  • CG : बस्तर पंडुम’ बस्तर की बदली पहचान का सशक्त प्रतीक : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी …

    जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ बस्तर को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    रायपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 से 9 फरवरी के बीच छत्तीसगढ़ में आयोजित बस्तर पंडुम को बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जनजातीय विरासत का भव्य उत्सव बताते हुए इससे जुड़े सभी सहभागियों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक समय बस्तर का नाम आते ही माओवाद, हिंसा और विकास में पिछड़ेपन की छवि उभरती थी, लेकिन आज परिस्थितियाँ पूरी तरह बदल चुकी हैं। अब बस्तर शांति, विकास और स्थानीय लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास के लिए जाना जा रहा है। उन्होंने कामना की कि बस्तर का आने वाला समय शांति, प्रगति और सांस्कृतिक गौरव से परिपूर्ण हो।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर मार्गदर्शन से बस्तर आज सांस्कृतिक गौरव और समावेशी विकास के सशक्त प्रतीक के रूप में अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजन जनजातीय परंपराओं, लोक-संस्कृति और विरासत को सहेजने के साथ-साथ शांति, विश्वास और समावेशी प्रगति का प्रभावी संदेश देते हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर के जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और आजीविका के अवसरों के विस्तार से क्षेत्र में भरोसे और सहभागिता का नया वातावरण बना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में जनजातीय समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ बस्तर को शांति, समृद्धि और विकास की नई ऊँचाइयों तक निरंतर अग्रसर करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

  • CG : ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी देश में विशेष पहचान बनाएगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय …

    त्री की मौजूदगी में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी विभाग छत्तीसगढ़ और एसटीपीआई के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता

    राज्य में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (CoE) और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (ESDD) सेंटर की होगी स्थापना

    प्रदेश में नवाचार, स्टार्ट-अप और कौशल आधारित रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

    आईटी, आईटीईएस एवं इमरजिंग टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के भरोसेमंद और आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर रहा है छत्तीसगढ़

    मुख्यमंत्री की मौजूदगी में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी विभाग छत्तीसगढ़ और एसटीपीआई के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता
    मुख्यमंत्री श्री साय

    रायपुर : छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भी देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य को ज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।आधुनिक अधोसंरचना, प्रभावी ई-गवर्नेंस प्रणाली और निवेश-अनुकूल नीतियों के चलते छत्तीसगढ़ आज आईटी, आईटीईएस एवं इमरजिंग टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के लिए एक भरोसेमंद और आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के मध्य हुए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) उपरांत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।  

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवाओं में उद्यमिता विकसित करने और उन्हें आईटी एवं आईटीईएस जैसे क्षेत्रों में विश्वस्तरीय अवसर राज्य के भीतर ही उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल की गई है। इस एमओयू के तहत राज्य में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (CoE) एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (ESDD) सेंटर की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वन एवं औषधीय उत्पाद आधारित मेडटेक, स्मार्ट सिटी समाधान तथा स्मार्ट कृषि जैसे चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड डेवलपमेंट (ESDD) सेंटर की स्थापना की जाएगी, जो प्रति वर्ष लगभग 30 से 40 हार्डवेयर स्टार्ट-अप और एमएसएमई को प्रोडक्ट डिजाइन, प्रोटोटाइपिंग, कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण की सुविधाएं प्रदान करेगा।
                  
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस पहल से प्रदेश के युवाओं को राज्य के भीतर ही इनक्यूबेशन, मेंटरशिप, फंडिंग और आधुनिक प्रयोगशालाओं की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे उच्च कौशल वाले युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन रुकेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने एसटीपीआई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्था के सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देशभर में 68 केंद्रों और 24 सेक्टर-विशेष सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से एसटीपीआई का व्यापक अनुभव छत्तीसगढ़ के स्टार्ट-अप और नवाचार इकोसिस्टम को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह एमओयू राज्य के आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा और छत्तीसगढ़ को डिजिटल नवाचार, तकनीकी उद्यमिता और स्टार्ट-अप के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा।

                इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, इलेक्ट्रॉनिक और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, निदेशक एसटीपीआई रवि वर्मा, चिप्स के सीईओ प्रभात मलिक सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • CG : विधानसभा सत्र के दौरान अवकाश प्रतिबंधित …

    राजनांदगांव । छत्तीसगढ़ की षष्ठम विधानसभा का अष्टम सत्र सोमवार 23 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक आयोजित है। कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने विधानसभा प्रश्नों, ध्यानाकर्षण सूचनाओं, स्थगन प्रस्तावों की जानकारी समय-सीमा में भेजने के लिए अधिकारियों को मुख्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए है। उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान अधिकारियों, कर्मचारियों को बिना पूर्व अनुमति के अवकाश एवं मुख्यालय से बाहर नहीं जाने के निर्देश दिए है।

    सभी कार्यालय एवं जिला प्रमुखों को अपने कार्यालय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर, उनके नाम, पदनाम, दूरभाष नंबर एवं मोबाईल नंबर की जानकारी कार्यालय कलेक्टर राजनांदगांव को तत्काल प्रेषित करने कहा गया है। कार्यालयीन दिवसों के अतिरिक्त अवकाश के दिनों में कार्यालय में पर्याप्त लिपिक एवं भृत्य की ड्यूटी लगाने कहा गया है।

  • CG : प्रधानमंत्री आवास योजना से साकार हुआ मधु वर्मा का अपना घर का सपना …

    राजनांदगांव । राजनांदगांव नगर पालिक निगम के वार्ड क्रमांक-3 मोतीपुर में निवासरत मधु वर्मा ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस दिखाया। पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। दो बेटियों के पालन-पोषण के लिए वे एक निजी स्कूल में रसोइये के रूप में कार्य करते हुए परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। किराए के मकान में रहने के दौरान आर्थिक तंगी उनके जीवन का हिस्सा रही। मधु बताती हैं कि स्कूल में छुट्टी के दिनों में आय कम हो जाती थी, जिससे किराया देने की चिंता बनी रहती थी।

    उन्हें हमेशा यह डर बना रहता था कि कहीं समय पर किराया न देने पर मकान मालिक घर खाली करने के लिए न कह दे। ऐसे हालात में वे अक्सर अपने सपनों के घर की कल्पना ही कर पाती थीं। इस बीच उनकी बड़ी बेटी सुजाता एक निजी कंपनी में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत हुई। मां-बेटी ने मिलकर थोड़े-थोड़े पैसे बचाए और एक छोटा सा भूखंड खरीदा। मधु वर्मा ने बताया कि जमीन लेने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत आवेदन किया। कुछ ही दिनों में उनके आवास निर्माण की स्वीकृति मिल गई।

    स्वीकृति मिलने के बाद पूरे परिवार ने उत्साह के साथ अपने सपनों का घर बनाने की शुरूआत की। वास्तुविद के कुशल मार्गदर्शन में जल्द ही एक सुंदर, सर्वसुविधायुक्त और आकर्षक घर का निर्माण पूरा हो गया। आज मधु वर्मा ने बताया कि वे टाइल्स से सजे अपने पक्के घर में रहते हुए गर्व और संतोष का अनुभव करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। अपने सपनों का घर मिलने पर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है।

  • CG : फिश एक्वेरियम भवन के संचालन के लिए 16 तक रूचि की अभिव्यक्ति …

    राजनांदगांव । मछली पालन विभाग द्वारा नगर पालिक निगम राजनांदगांव अंतर्गत आने वाले पुष्पवाटिका में नवनिर्मित फिश एक्वेरियम भवन के संचालन के लिए 16 फरवरी 2026 दोपहर 2 बजे तक रूचि की अभिव्यक्ति अंतर्गत निर्धारित प्रारूप में मुहरबंद आवेदन आमंत्रित किया गया है। फिश एक्वेरियम भवन का मुख्य उद्देश्य स्थानीय नागरिकों को मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराना एवं अपने घरों में एक्वेरियम टैंक स्थापित करना तथा मछली पालन के प्रति जागरूक करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

    फिश एक्वेरियम भवन के संचालन के लिए इच्छुक प्रतिष्ठित, अनुभवी एवं वित्तीय रूप से सक्षम एजेंसी, संस्थान, किसान उत्पादक संगठन, फर्म, कंपनी, व्यक्ति निर्धारित नियम एवं शर्तों के अधीन निर्धारित तिथि तक आवेदन आवेदन प्रस्तुत कर सकते हंै। अभिरूचि प्रस्ताव को 16 फरवरी 2026 को ही दोपहर 3 बजे आवेदनकर्ताओं के समक्ष कार्यालय परिसर में खोला जाएगा। इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए कार्यालय सहायक संचालक मछली पालन राजनांदगांव के सूचना पटल का अवलोकन कर सकते हंै।

  • CG : अवैध तरीके से परिवहन एवं खनन, 7 वाहन जप्त …

    राजनांदगांव। कलेक्टर जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार जिले में खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण के प्रभावी नियंत्रण के लिए खनिज विभाग द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया गया। खनि अधिकारी सुश्री ज्योति मिश्रा ने बताया कि खनिज विभाग की टीम ने जांच के दौरान अवैध खनिज परिवहन करने पर 7 प्रकरणों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की गई। खनिज विभाग द्वारा ग्राम सुरगी में मरूम के अवैध खनन एवं परिवहन करते हुए जेसीबी सीजी 08 ए एम 2117 और हाईवा सीजी 08 बीएफ 1708 जप्त किया गया। इसी तरह ग्राम भंवरमरा आक्सीजोन में अवैध रेत परिवहन करते हुए ट्रेक्टर सोल्ड स्वराज और ट्रैक्टर इंजन लोडर क्रमांक सीजी 24 पी 7496 जप्त किया गया। ग्राम पारागांवकला में अवैध रेत परिवहन करते हुए ट्रैक्टर सोल्ड मैसी और ट्रैक्टर सोल्ड स्वराज राफटर सहित जप्त किया गया। जप्त वाहनों को संबंधित क्षेत्र के थानों में कार्रवाई के लिए सुपुर्द कर दिया गया है।

  • CG : बहुद्देशीय कर्मचारी व रसोईया के लिए आवेदन अब 10 तक …

    राजनांदगांव । महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर राजनांदगांव में केस वर्कर के 1 पद एवं बहुद्देशीय कर्मचारी व रसोईया के 1 पद पर सेवा प्रदाताओं की पदपूर्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किया गया है। इच्छुक एवं योग्य आवेदक 10 फरवरी 2026 शाम 5.30 बजे तक कार्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग कलेक्टोरेट परिसर जिला राजनांदगांव पिन कोड 491441 में पंजीकृत डाक, स्पीड पोस्ट, कोरियर के माध्यम से दावा आपत्ति प्रस्तुत कर सकते हैं। इस संबंध में विस्तृत जानकारी राजनांदगांव जिले की वेबसाईट एवं कार्यालय के सूचना पटल से प्राप्त की जा सकती है।

  • CG : रैंप योजना अंतर्गत बुनकर केन्द्र लखोली में हथकरघा क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों हेतु सेक्टर स्पेसिफिक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन …

    राजनांदगांव । केन्द्र सरकार की रैंप योजना अंतर्गत बुनकर केन्द्र लखोली में हथकरघा क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों हेतु सेक्टर स्पेसिफिक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय भारत सरकार तथा राज्य शासन की उद्यमिता प्रोत्साहन पहल के तहत सीएसआईडीसी रायपुर के मार्गदर्शन में चॉइस कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 32 महिला उद्यमी शामिल हुए। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना, स्वरोजगार के अवसर सृजित करना तथा प्रतिभागियों को व्यवहारिक एवं तकनीकी ज्ञान प्रदान करना था।

    प्रशिक्षण के पहले दिन प्रतिभागियों से प्रत्यक्ष संवाद कर उनकी वर्तमान गतिविधियों, कार्यप्रणाली एवं चुनौतियों की जानकारी ली गई। इसके पश्चात मास्टर ट्रेनर द्वारा वन-टू-वन मार्गदर्शन के माध्यम से संस्थागत ढांचे, अनुभवों एवं भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। दूसरे दिन केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, सब्सिडी प्रावधानों, ईडीपी प्रशिक्षण, कौशल विकास, मार्केटिंग रणनीतियों तथा उद्यम पंजीयन की आवश्यकताओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।

    प्रशिक्षण के अंतिम दिवस आयात-निर्यात की रणनीति, विभागीय समन्वय तथा भविष्य की मांगों के अनुरूप साड़ी, सूट, कुर्ता, सहित अन्य रेडीमेड वस्त्रों के निर्माण पर केंद्रित रहा। जिससे बुनकरों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सके।

    इस अवसर पर जिला उद्योग केन्द्र के प्रबंधक प्रणय बघेल ने प्रशिक्षुओं को विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभ, ऋण प्रणाली, सब्सिडी, वर्किंग कैपिटल एवं प्रस्तुति संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। पूर्व संचालित ईडीपी लीप बैच के प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक बताया। कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर पारूल पाण्डेय, डिविजनल समन्वयक लोकेश सिन्हा एवं तुषार साहू की सक्रिय भूमिका रही। समापन अवसर पर चॉइस कंसलेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

  • CG : मुस्लिम व्यक्ति पूरी संपत्ति वसीयत नहीं कर सकता : हाईकोर्ट …

    बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति का एक तिहाई से अधिक हिस्सा वसीयत के जरिए किसी को नहीं दे सकता। जब तक कि बाकी वैध वारिस अपनी सहमति न दें। हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम कानून में वारिसों के अधिकारों की सुरक्षा एक मूल सिद्धांत है। यह फैसला कोरबा जिले से जुड़े एक मामले में आया है। जहां एक विधवा को उसके पति की संपत्ति में हिस्सा देने से निचली अदालतों ने इनकार कर दिया था।

    दरअसल, 64 साल की जैबुननिशा ने अपने पति अब्दुल सत्तार लोधिया की जायदाद पर हक मांगते हुए हाईकोर्ट में अपील की थी। उन्होंने कोरबा के द्वितीय अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने उनके केस को 2015 और 2016 में खारिज कर दिया था। जैबुननिशा के पति की 2004 में मौत हो गई थी। जिसके बाद भतीजे मोहम्मद सिकंदर ने एक वसीयत पेश की, जिसमें दावा किया गया कि सारी जायदाद उसे मिलेगी। सिकंदर ने खुद को ‘’पालक बेटा’ बताया था। जैबुननिशा ने इस वसीयत को फर्जी बताया और कहा कि यह उनकी सहमति के बिना बनाई गई थी।

    जैबुननिशा ने पहले निचली अदालतों में मुकदमा दायर किया था, लेकिन दोनों अदालतों ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालतों के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि निचली अदालतें विधवा के वैध कानूनी अधिकार की रक्षा करने में असफल रही थी।हाईकोर्ट ने मुस्लिम लॉ के सेक्शन 117 और 118 का हवाला देते हुए कहा कि वसीयत के जरिए जायदाद देने की एक सीमा है। मुस्लिम व्यक्ति अपनी जायदाद का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा ही वसीयत कर सकता है। अगर इससे ज्यादा जायदाद वसीयत की जाती है, या किसी वारिस को दी जाती है, तो उसके लिए बाकी वारिसों की सहमति जरूरी है।

    जस्टिस बीडी गुरु ने यह भी कहा कि निचली अदालतों ने गलती की कि उन्होंने विधवा पर वसीयत को गलत साबित करने का बोझ डाल दिया। असल में यह सिकंदर की जिम्मेदारी थी कि वह साबित करे कि जैबुननिशा ने पति की मौत के बाद अपनी मर्जी से और पूरी समझदारी से वसीयत के लिए सहमति दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ चुप रहने या केस दायर करने में देरी करने को रजामंदी नहीं माना जा सकता। इस मामले में कोई भी गवाह यह साबित नहीं कर पाया कि जैबुननिशा ने पूरी जायदाद वसीयत करने की इजाजत दी थी।