Lokesh Sharma | Editor
Lokesh Sharma is a trained journalist and editor with 10 years of experience in the field of journalism. He holds a BAJMC degree from Digvijay College and a Master of Journalism from Kushabhau Thakre University of Journalism & Mass Communication. He has also served as a Professor in the Journalism Department at Digvijay College. Currently, he writes on Sports, Technology, Jobs, and Politics for kadwaghut.com.
बिलासपुर । बिलासपुर जिले में चालू खरीफ मौसम में अब तक 1014.5 मि.मी. बारिश दर्ज की गई है। जो कि पिछले 10 वर्ष के औसत बारिश 948.9 मि.मी. से 65.6 मि.मी. अधिक है। अधीक्षक भू अभिलेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार सबसे अधिक बारिश 1250.8 मि.मी. तखतपुर तहसील में और सबसे कम बारिश 763.4 मि.मी. कोटा में रिकार्ड की गई है।
इसी प्रकार बिलासपुर तहसील में 1186 मि.मी., बिल्हा तहसील में 970.5 मि.मी., मस्तूरी में 920.5 मि.मी.,सीपत में 953 मि.मी., बोदरी में 975.5 मि.मी., बेलगहना में 1188.7 मि.मी., बेलतरा में 968 मि.मी., रतनपुर में 998.4 मि.मी., सकरी में 1115 मि.मी. और पचपेड़ी तहसील में 884.5 मि.मी. बारिश रिकार्ड की गई है। जिले की औसत वार्षिक वर्षा 1202.3 मि.मी. है।
बिलासपुर । प्रति वर्ष की भांति इस साल भी जिले में 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया जाएगा। जिला स्तरीय आयोजन की रूपरेखा तैयार करने के लिए 15 सितम्बर को अपरान्ह 3 बजे ओल्ड कम्पोजिट बिल्डिंग कक्ष क्रमांक 4 स्थित संयुक्त संचालक समाज कल्याण कार्यालय में बैठक आयोजित की गई है। वरिष्ठ नागरिकों हेतु संचालित समाज सेवी संस्थाएं, पेंशनर संगठन एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं को बैठक में आमंत्रित किया गया है।
समारोह में 1 अक्टूबर को वृद्धजनों का सम्मान के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्वास्थ्य परीक्षण, वित्तीय संरक्षण कार्यशाला, माता पिता भरण अधिनियम 2007 तथा खेलकूद प्रतियोगिता आयोजन के संबंध में विचार विमर्श किया जाएगा। संयुक्त संचालक टीपी भावे ने बैठक में शामिल होने अधिकाधिक संस्थाओं के प्रतिनिधियांे को अनुरोध किया है।
रायपुर | स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा संभाग दुर्ग के प्रभारी संयुक्त संचालक हेमन्त उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके स्थान पर आर.एल. ठाकुर उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय को संभागीय संयुक्त संचालक दुर्ग संभाग का अतिरिक्त प्रभार सौपा गया है। इस संबंध में आज स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है।
जारी आदेश के अनुसार हेमंत उपाध्याय द्वारा सरगुजा संभाग में प्रभारी संयुक्त संचालक के पद पर रहते हुए किए गए अनियमताओं की पुष्टि होने तथा उनके द्वारा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में स्वेच्छाचारीता एवं अनुशासनहीनता की गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर नियत किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
रायपुर | केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शहर के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की ज़िंदगी रोशन कर रही है। यह योजना परंपरा गत ऊर्जा खपत को कम करने के साथ हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण को दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। कोंडागांव जिले के ग्रामीण अंचल के गांव शामपुर के रहने वाले भुनेश देवांगन अब ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन गए हैं।
भुनेश देवांगन ने बताया कि इस योजना की जानकारी स्थानीय बिजली विभाग से मिली। योजना के बारे में विस्तार से समझने के बाद उन्होंने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप पैनल लगवाया। सोलर प्लांट लगाने के 15 दिन बाद ही उन्हें केंद्र शासन द्वारा प्रदान की जाने वाली 78 हजार की सब्सिडी प्राप्त हुआ।
5 किलोवाट की सोलर पैनल से केवल घर की बिजली खपत की आवश्यकता पूरी हो रही है, बल्कि अतिरिक्त बिजली का उत्पादन हो रहा है। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें हर महीने लगभग 3 हजार रुपये से साढ़े तीन हजार तक का बिजली बिल चुकाना पड़ता था, लेकिन अब उनका बिल शून्य हो गया है। साथ सोलर पैनल से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है, जिससे उन्हें भविष्य में अतिरिक्त आय भी मिलेगी। उन्होंने बताया पहले लो वोल्टेज की समस्या से बहुत परेशानी होती थी, अब उनकी यह चिंता दूर हुई है और महीने के बिजली बिल से भी छुटकारा मिला है।
केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा घर के छतों में सौर पैनल स्थापना के लिए हितग्राहियों को प्लांट की क्षमता के आधार पर सब्सिडी दी जा रही है। रूफटॉप सोलर संयंत्र की क्षमता अनुसार 01 किलोवॉट के लिए लगभग 65 हजार रूपए की लागत पर केंद्र सरकार द्वारा 30 हजार रूपए और राज्य सरकार द्वारा 15 हजार रुपए की सब्सिडी दी जाएगी, 02 किलोवाट के लिए 01 लाख 30 हजार रूपए की लागत पर 60 हजार रूपए की सब्सिडी और 03 किलोवाट से अधिक की सोलर संयंत्र के लिए 01 लाख 95 हजार की लागत पर 78 हजार रूपए और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार की सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही हितग्राहियों के लिए ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। पीएम सूर्यघर योजना का लाभ उठाने के लिए जिले के विद्युत उपभोक्ता वेब पोर्टल https://pmsuryaghar.gov.in या पीएम सूर्य घर मोबाइल एप में पंजीयन करा सकते हैं।
पहली बार लेप्रोस्कोपिक पद्धति से सफल किडनी ऑपरेशन – आर्थिक तंगी झेल रही महिला को मिला नया जीवन
रायपुर | कोंडागांव जिला लगातार स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, 4 सितंबर 2025 का दिन भी जिले के लिए एतिहासिक दिन रहा। कोण्डागांव जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने पहली बार लेप्रोस्कोपिक पद्धति से किडनी का सफल ऑपरेशन किया। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा जगत के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि गरीबी और बीमारी से जूझ रही एक महिला के जीवन के लिए भी वरदान साबित हुई।
कोण्डागांव के बाजारपारा की 35 वर्षीय सावित्री कोर्राम का जीवन निरंतर संघर्ष से भरा रहा है। सावित्री के पति का कुछ वर्ष पूर्व निधन हो गया है जिससे परिवार की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई। सावित्री घर चलने के लिए दूसरों के घरों में झाड़ू–पोछा और बर्तन धोने का काम शुरू की ताकि अपने दो बेटे और दो बेटियों का पालन–पोषण कर सके। लेकिन तकदीर ने फिर करवट बदली। दो वर्ष पहले उन्हें लगातार लघुशंका की समस्या हुई। मेहनत से जोड़ी गई थोड़ी-सी रकम लेकर वह विशाखापत्तनम गईं, जहां जांच में गंभीर किडनी रोग की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी, लेकिन खर्च सुनते ही सावित्री की दुनिया जैसे थम गई। आर्थिक स्थिति ने उन्हें मजबूर किया कि वह अधूरे इलाज के साथ घर लौट आएँ। चार बच्चों की परवरिश और घर की जिम्मेदारियों के बीच सावित्री को लगा कि उनकी जिंदगी धीरे-धीरे खत्म हो रही है।
कोण्डागांव जिला अस्पताल बना सहारा हताशा और निराशा के बीच उन्होंने जिला अस्पताल कोण्डागांव का दरवाज़ा खटखटाया। अस्पताल के सर्जन डॉ. एस. नगुलन व उनकी टीम ने जांच की और स्पष्ट किया कि उनकी एक किडनी पूरी तरह खराब हो चुकी है, जिसे निकालना ही एकमात्र विकल्प है। सामान्य ऑपरेशन में बड़े चीरे और संक्रमण का खतरा अधिक था। यह जोखिम उठाना सावित्री के लिए कठिन था। तब डॉक्टर नगुलन ने साहसिक निर्णय लिया ऑपरेशन लेप्रोस्कोपिक तकनीक से किया जाएगा।
जिला अस्पताल से प्राप्त जानकारी अनुसार 4 सितंबर को जिला अस्पताल कोण्डागांव में सावित्री का ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन थिएटर में डॉ. एस. नगुलन के साथ डॉ. शैलेश कुमार, डॉ. अनिल देवांगन, डॉ. कृष्णा मरकाम मौजूद थे। ओटी हेड नर्स स्वप्नप्रिया, स्टाफ नर्स पुष्पलता कुंवर, हेमंत मंडावी, संजना जैन, रामेश्वरी, अर्चना, साधना और रीना ने भी अहम भूमिका निभाई। करीब तीन घंटे चले इस ऑपरेशन में सावित्री की खराब किडनी को सफलतापूर्वक निकाला गया। यह ऑपरेशन पूर्णत: सफल रहा और अब सावित्री तेजी से स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। किडनी के सफलतापूर्वक इलाज के बाद सावित्री ने कहा “पहले लगा कि गरीबी और बीमारी ने मेरी जिंदगी खत्म कर दी है। लेकिन जिला अस्पताल और आयुष्मान कार्ड ने मुझे नया जीवन दिया है।”
प्रशासन की दूरदर्शिता और टीमवर्क इस सफलता के पीछे जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की योजनाबद्ध मेहनत भी है। कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दे रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. चतुर्वेदी और सिविल सर्जन डॉ. प्रेम मंडावी के मार्गदर्शन में यह ऐतिहासिक ऑपरेशन संभव हुआ।
यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएँ निरंतर सुदृढ़ हो रही हैं। राज्य सरकार का विजन है कि अब इलाज के लिए मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। पहले बस्तर अंचल के लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए विशाखापत्तनम, रायपुर या अन्य बड़े शहरों का रुख करते थे, लेकिन अब जिला स्तर पर ही आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। कोण्डागांव जिला अस्पताल में हुआ यह लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन इसी दिशा में मील का पत्थर है।
बिलासपुर । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कांकेर संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित सांसद भोजराज नाग की ओर से दायर उस अंतरिम आवेदन को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने चुनाव याचिका को प्रथम दृष्टया निरस्त करने की मांग की थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने लोकसभा चुनाव 2024 की मतगणना में हुई कथित अनियमितताओं के पर्याप्त तथ्य पेश किए हैं। ऐसे में मामला मेरिट पर सुनवाई योग्य है।
क्या है पूरा मामला? कांकेर संसदीय सीट से सांसद चुने गए भोजराज नाग के खिलाफ बीरेश ठाकुर ने 18 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव परिणाम रद्द करने, कई बूथों की पुनः मतगणना और 15 मतदान केंद्रों पर पुनः मतदान की मांग की।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में गड़बड़ी और छेड़छाड़ हुई। वोटिंग डेटा के प्रसारण में जानबूझकर देरी की गई। कई मतदान केंद्रों पर वोटों की गिनती में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। बीरेश ठाकुर ने गोंडरदेही, डोंडी लोहारा समेत कई विधानसभा क्षेत्रों के बूथों पर वोटों के अंतर और डेटा ट्रांसमिशन में हेरफेर की आशंका जताई है।
सांसद की दलील भोजराज नाग ने कोर्ट में दलील दी कि याचिका में भ्रष्ट आचरण का कोई ठोस आरोप नहीं है। यह रिप्रेज़ेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट 1951 की धारा 81, 82 और 83 का उल्लंघन है। चुनाव आयोग को पक्षकार नहीं बनाया गया है, इसलिए याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। इसके अलावा, याचिका वकील के जरिए दाख़िल की गई है जबकि क़ानून के अनुसार उम्मीदवार को खुद याचिका दाख़िल करनी चाहिए।
हाईकोर्ट का निर्णय कोर्ट ने सांसद की सभी दलीलों को खारिज कर दिया और कहा याचिका में सभी आवश्यक तथ्य और साक्ष्य मौजूद हैं। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट रूप से ईवीएम गड़बड़ी, डेटा ट्रांसमिशन में देरी और मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं का उल्लेख किया है। चुनाव आयोग को पक्षकार बनाने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है। बीरेश ठाकुर ने याचिका विधिवत दाख़िल की है और सभी पन्नों पर उनके हस्ताक्षर मौजूद हैं।
अगली सुनवाई न्यायालय ने साफ कर दिया कि भोजराज नाग की आपत्ति में दम नहीं है, इसलिए चुनाव याचिका को खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2025 को निर्धारित की है।
उप मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की
कार्यों की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी, अगली बैठक के पहले भू-अर्जन, प्राक्कलन, निविदा, कार्य अनुबंध व कार्यादेश संबंधी सभी कार्यवाहियों को पूर्ण करने कहा
सड़क निर्माण के कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश, बरसात के तुरंत बाद युद्धस्तर पर करें सड़कों की मरम्मत
रायपुर | उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने आज विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में शासन द्वारा स्वीकृति प्राप्त सड़क निर्माण के कार्यों के लिए जरूरी भू-अर्जन की कार्यवाहियों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में जिला कलेक्टर के साथ मिलकर त्वरित कार्यवाही करने को कहा। उन्होंने सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के साथ ही उन्हें निर्धारित समय पर पूरा करने पर जोर दिया। लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह और प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि सड़क, सेतु और भवन निर्माण की सभी परियोजनाओं के कार्यों को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाते हुए समय-सीमा में पूर्ण करें। उन्होंने कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को फील्ड में सक्रियता व गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त सभी कार्यों में तेजी से भू-अर्जन कर निविदा की कार्यवाही पूर्ण करने और यथाशीघ्र कार्यारंभ करने को कहा।
उप मुख्यमंत्री साव ने बैठक में मौजूद सेतु बंध तथा सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं को निर्देशित करते हुए कहा कि अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करते हुए प्रस्तावित कार्यों के लिए जरूरी मंजूरी तत्परता से प्रदान करें। उन्होंने डीपीआर बनाते समय ही परियोजना का अच्छे से मूल्यांकन करने को कहा ताकि बजट और कार्य पूर्णता के लिए निर्धारित समय के पुनरीक्षण की जरूरत न पड़े। उन्होंने बरसात के तुरंत बाद प्रदेशभर में सड़कों की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने दिसम्बर तक सभी जिलों में मरम्मत का काम पूर्ण करने को कहा।
साव ने सभी मुख्य अभियंताओं को अगली समीक्षा बैठक के पहले भू-अर्जन, प्राक्कलन, निविदा, कार्य अनुबंध और कार्यादेश से संबंधित सभी कार्यवाहियों को पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने बैठक में सड़कों पर पेच रिपेयर के लिए कार्ययोजना के अनुसार अनुबंध एवं कार्यादेश की स्थिति, राष्ट्रीय राजमार्ग तथा ए.डी.बी. के अपूर्ण कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की।
रायपुर | प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्य में बन रही ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अब तृतीय स्तर का निरीक्षण किया जाएगा। इस क्रम में राष्ट्रीय गुणवत्ता समीक्षक सितंबर माह में राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे।
छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के मुख्य अभियंता एवं राज्य गुणवत्ता समन्वयक सेे मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी नई दिल्ली द्वारा जारी निरीक्षण कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रीय गुणवत्ता समीक्षक अली शाकिर द्वारा सितंबर माह में राज्य के मुंगेली और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिलो के निर्माण कार्याे का समीक्षा किया जायेगा। उन्होंने बताया कि अली शाकिर का मोबाइल नंबर +91-9572924224, +91-6203666132 एवं ई-मेल आई.डी. alishakir19@gmail.com है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को आवेदन प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए जगदलपुर और आस-पास के गांवों में जागरूकता रथ घर-घर जाएगा। इस रथ को वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जगदलपुर विधायक किरण देव और महापौर संजय पांडे सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत् जागरूकता रथ को रवाना करते हुए वन मंत्री कश्यप ने कहा कि यह योजना लोगों को बिजली के बिल से राहत दिलाने में सहायक होगी। यह केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत सरकार द्वारा 78,000 रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है, इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा भी 30 हजार रुपए की सहायता प्रदान की जा रही है। इससे लोगों के लिए अपने घरों में सौर पैनल लगाना आसान हो गया है।
40 हजार से अधिक खिलाड़ी लेंगे भाग, 11 खेलों में दिखाएंगे कौशल
रायपुर | उप मुख्यमंत्री द्वय अरुण साव और विजय शर्मा ने बस्तर ओलंपिक की तैयारियों की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री साव के नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में आज आयोजित बैठक में पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी बस्तर ओलंपिक का वृहद आयोजन करने इसकी रुपरेखा और व्यवस्थागत तैयारियों पर गहन चर्चा की गई। आगामी अक्टूबर-नवम्बर में होने वाले बस्तर ओलंपिक में तीन स्तरों विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें बस्तर संभाग के सातों जिलों और 32 विकासखंडों के 40 हजार से अधिक खिलाड़ी भाग लेंगे। खेल और युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संयुक्त सचिव सुखनाथ अहिरवार और संचालक तनूजा सलाम भी बैठक में शामिल हुईं।
उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने बैठक में कहा कि बस्तर ओलंपिक केवल खेलों का आयोजन नहीं है, बल्कि विकास और खेल का संगम है। यह संगठित रूप से बस्तर के युवाओं के सशक्तीकरण और उनमें नेतृत्व के विकास की पहल है। राज्य सरकार इन रचनात्मक पहलों से बस्तर में भयमुक्त वातावरण बनाकर युवाओं को खेल और उत्सव से जोड़ना चाहती है। उन्होंने बस्तर ओलंपिक के सफल आयोजन के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर पुख्ता कार्ययोजना तैयार करते हुए आयोजन के ध्येय वाक्य ‘करसाय ता बस्तर बरसाय ता बस्तर’ (खेलेगा बस्तर जीतेगा बस्तर) को धरातल पर उतारने के निर्देश दिए। साव ने यूथ आइकॉन घोषित किए गए पिछले वर्ष के विजेता खिलाड़िय़ों, बस्तर संभाग के सभी खेल अधिकारियों, पी.टी.आई., पंचायत सचिवों, ‘बिहान’ की महिलाओं और खेल संघों को सक्रियता से जोड़कर बस्तर ओलंपिक को जन-जन तक पहुंचाने को कहा।
उप मुख्यमंत्री तथा गृह मंत्री विजय शर्मा ने बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों से कहा कि बस्तर ओलंपिक को यादगार बनाने सभी विभाग अपनी-अपनी भूमिका और कार्यों के अनुरूप जिम्मेदारियों का वहन करें। बस्तर के ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों की भागीदारी उनका आत्मविश्वास बढ़ाएगी और सकारात्मक वातावरण तैयार करेगी। उन्होंने बस्तर ओलंपिक के आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए इसमें बस्तर के सभी गांवों के सभी बच्चों की भागीदारी सुनिश्चत करने को कहा। शर्मा ने आयोजन की तैयारियों को मूर्त रूप देने जल्दी ही इससे जुड़े विभागों, अधिकारियों और संस्थाओं की बस्तर में भी बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए जिससे की तैयारियों को और गति दी जा सके।
11 खेलों की स्पर्धाएं होंगी, नक्सल हिंसा के दिव्यांग और आत्मसमर्पित नक्सली भी दिखाएंगे अपना दमखम
विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर करीब डेढ़ महीने तक चलने वाले बस्तर ओलंपिक में 11 खेलों को शामिल किया गया है। जूनियर वर्ग में बालक और बालिकाओं तथा सीनियर वर्ग में महिला और पुरूषों के लिए प्रतियोगिताएं होंगी। नक्सल हिंसा के दिव्यांगों तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी संभाग स्तर पर पुरूषों और महिलाओं के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। बस्तर ओलंपिक के दौरान एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साखींच में पूरे बस्तर के खिलाड़ी अपना खेल कौशल दिखाएंगे।
बिलासपुर । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि प्रदेश के निजी शैक्षणिक संस्थानों पर भी कर्मचारी राज्य बीमा निगम ईएसआईसी कानून लागू होगा। कोर्ट ने निजी स्कूलों द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अब शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत लाखों कर्मचारी भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे।
2005 से चला आ रहा था विवाद मामला साल 2005 से जुड़ा है, जब राज्य सरकार ने 27 अक्टूबर को अधिसूचना जारी कर 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले शैक्षणिक संस्थानों को ईएसआईसी कानून के दायरे में लाने का निर्णय लिया था। इसके तहत 1 अप्रैल 2006 से सभी योग्य स्कूलों को इसका पालन करना अनिवार्य किया गया। बाद में 2011 में ईएसआईसी ने योगदान राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी किया, जिसके खिलाफ प्रदेशभर के कई निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
स्कूलों की दलील और सरकार का पक्ष याचिकाकर्ता स्कूलों ने तर्क दिया कि शिक्षा देना व्यवसाय या औद्योगिक गतिविधि नहीं है, इसलिए संस्थानों को “एस्टेब्लिशमेंट” की श्रेणी में लाकर ईएसआईसी एक्ट लागू करना गलत है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला भी दिया।
वहीं राज्य सरकार और ईएसआईसी कॉर्पोरेशन का पक्ष था कि स्कूलों में बड़ी संख्या में गैर-शैक्षणिक और शैक्षणिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जिन्हें बीमारी, मातृत्व और दुर्घटनाओं की स्थिति में सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। यही इस कानून का मूल उद्देश्य है।
हाईकोर्ट का फैसला हाईकोर्ट ने सरकार की दलील को सही ठहराते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थान भी “एस्टेब्लिशमेंट” की परिभाषा में आते हैं। इसलिए उन पर ईएसआईसी एक्ट लागू होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2024 से सभी निजी स्कूलों में इस कानून का पालन अनिवार्य होगा।
96 हजार से अधिक कर्मचारियों को लाभ इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के 7,975 निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों पर पड़ेगा। इनमें 5,680 निजी स्कूल, 738 सहायता प्राप्त स्कूल, 413 आंशिक सहायता प्राप्त स्कूल और 180 अन्य संस्थान शामिल हैं।
इन संस्थानों में कार्यरत करीब 96,500 कर्मचारियों को अब ईएसआईसी का लाभ मिलेगा। इनमें से 50 हजार से अधिक गैर-शैक्षणिक कर्मचारी हैं।
कर्मचारियों के लिए सुरक्षा कवच सरकार का कहना है कि ईएसआईसी पॉलिसी कर्मचारियों के लिए बीमारी, मातृत्व और दुर्घटनाओं की स्थिति में सुरक्षा कवच है। हाईकोर्ट के इस आदेश से न केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद की वार्षिक आमसभा का आयोजन गुरुवार को राजधानी रायपुर के ‘वीमतारा’ मधुपिले चौक, शांतिनगर स्थित सभागार में किया गया। इस अवसर पर परिषद के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने समाज से आह्वान किया कि दिव्यांग बच्चों की मदद में सभी को आगे आना चाहिए और परिषद की गतिविधियों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहिए।
समाज की जिम्मेदारी : बृजमोहन अग्रवाल अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि परिषद के कार्य सिर्फ परिषद तक सीमित न रहकर पूरे समाज की जिम्मेदारी हैं। उन्होंने कहा दिव्यांग बच्चों की सहायता के लिए समाज के हर वर्ग को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। परिषद के वे सदस्य जो राज्य सरकार के विभिन्न आयोग और मंडलों में मनोनीत हुए हैं, उन्हें परिषद की योजनाओं और गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। स्पीच थेरेपी सेंटर और अन्य संस्थानों में अधिक से अधिक लोगों को लेकर जाएं, ताकि परिषद द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी समाज तक पहुंचे।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ आमसभा की शुरुआत दीप प्रज्वलन और माता सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक त्रिपाठी और महासचिव चंद्रेश शाह ने बृजमोहन अग्रवाल का स्वागत शाल, श्रीफल और प्रतीक चिन्ह भेंट कर किया।
विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारियों और सदस्यों, जिनमें दुर्ग से नथमल कोठारी, महासमुंद से विश्वनाथ पाणिग्रही, भाटापारा से अरुण छाबड़ा, कोरबा से मनोज शर्मा, जांजगीर-चांपा से दिव्यांश शेखर चंदेल, कबीरधाम से गेंददास वैष्णव, कांकेर से मनोज कुमार सिंह और राजनांदगांव से कुल प्रकाश व ढाल सिंह साहू ने भी पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
नए लोगो का विमोचन और रिपोर्ट प्रस्तुति इस अवसर पर परिषद के नए लोगो का विमोचन किया गया। महासचिव चंद्रेश शाह ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इंदिरा जैन ने ऑडिट रिपोर्ट और आगामी बजट का प्रस्ताव रखा। परिषद द्वारा संचालित संस्थाओं की उपलब्धियों और गतिविधियों को वीडियो क्लिपिंग के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।
सम्मान और अभिनंदन परिषद के पूर्व पदाधिकारियों और सदस्यों, जिन्हें छत्तीसगढ़ सरकार के आयोग/निगमों में जिम्मेदारी मिली है, का सम्मान किया गया। इनमें प्रमुख रूप से लोकेश कावड़िया, अध्यक्ष निशक्त जन वित्त एवं विकास निगम, सोमनाथ यादव, आयुक्त भारत स्काउट एवं गाइड, डॉ. सलीम राज, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य वक़्फ बोर्ड, प्रफुल्ल विश्वकर्मा, अध्यक्ष लौह शिल्पकार विकास बोर्ड और अमरजीत सिंह छाबड़ा, अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग को सम्मानित किया गया।
इसके अलावा बालगृह कोंडागांव की बालिका रंजीता कोरेटी को खेलो इंडिया जूडो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने पर सम्मानित किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और भावुक पल आमसभा के पूर्व बालगृह के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। स्पीच थेरेपी से बच्चों में आई प्रगति के अनुभव अभिभावकों ने साझा किए और परिषद का आभार जताया।
कार्यक्रम के अंत में परिषद के पूर्व कोषाध्यक्ष स्व. जे. पी. साबू और पूर्व कार्यकारिणी सदस्य स्व. शेखर चंदेल को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त सचिव राजेंद्र कुमार निगम ने किया। आभार प्रदर्शन सुनीता चंसोरिया द्वारा किया गया।
बीजापुर । जिले के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में शुक्रवार सुबह सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो माओवादी मारे गए। घटना स्थल से .303 रायफल, विस्फोटक सामग्री और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद हुई हैं।
पुलिस के अनुसार, माओवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान माओवादी जवानों के सामने आ गए, जिसके बाद दोनों ओर से लगभग दो घंटे तक गोलीबारी चली। मुठभेड़ खत्म होने के बाद की गई सर्चिंग में दो माओवादियों के शव बरामद किए गए।
अधिकारियों ने बताया कि मौके से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और हथियार बरामद हुए हैं, जिससे साफ है कि माओवादी किसी बड़ी साजिश की तैयारी में थे। जब्त सामग्री में .303 रायफल के अलावा बम बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीजें भी शामिल हैं।
बसना । स्थानीय मंगल भवन में आयोजित विकासखण्ड स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में बसना के विधायक डॉ. संपत अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों का सम्मान किया और उनके समर्पण के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और भारत के महान दार्शनिक तथा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इसके बाद, विधायक डॉ. अग्रवाल ने अपने संबोधन में शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डाला।
विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा और संस्कार देने वाले सभी गुरुजनों को मैं शत-शत नमन करता हूँ। एक विद्यार्थी के जीवन की नींव शिक्षक ही होते हैं। यदि नींव मजबूत होती है, तो उस पर बना मकान भी मजबूत होता है। इसी तरह, एक मजबूत समाज के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि वे छात्रों में जीवन मूल्य, नैतिकता और संस्कार भी भरते हैं, जिससे वे एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
इसके बाद, विधायक डॉ. अग्रवाल ने शिक्षकों को शॉल,श्रीफल, मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके अथक परिश्रम, त्याग और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान के लिए एक छोटा सा आभार है। उन्होंने सभी शिक्षकों से समाज और राष्ट्र के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए इसी तरह से कार्य करते रहने का आह्वान किया।विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कहा कि भविष्य का निर्माण शिक्षक ही करते हैं। उन्होंने शिक्षकों को सम्मानित कर शिक्षा को समाज की नींव बताया।
समारोह में जिला उपाध्यक्ष रमेश अग्रवाल, विधानसभा संयोजक डॉ एनके अग्रवाल, रामचंद्र अग्रवाल,नगर पंचायत बसना अध्यक्ष डॉ खूशबू अग्रवाल, उपाध्यक्ष शीत गुप्ता, जनपद पंचायत बसना उपाध्यक्ष मोहित पटेल, विधायक निज सचिव नरेंद्र बोरे, कामेश बंजारा, बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षाविद, स्थानीय गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे । सभी ने इस आयोजन की सराहना की और शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही । पुराना गौरेला में जमीन विवाद को लेकर हुए मारपीट और बलवा मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन सभी पर गैर-जमानतीय धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया था। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।
गौरतलब है कि 4 सितंबर को पुराना गौरेला में जमीन के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडों और घातक हथियारों से मारपीट हुई थी, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए गौरेला थाना में बीएनएसएस की धारा 191(3), 115(2), 296, 351(3) और 333 के तहत अपराध दर्ज किया गया।
यह विवाद खेरमाई चौक इलाके में दुकानों के कब्जे को लेकर था। प्रदीप दुबे ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि व्यवसायी साजन अग्रवाल और उनके परिवार ने जबरन हमला कर उनके घर पर धावा बोला और परिवार के साथ मारपीट की। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पुलिस ने उस मामले में अग्रवाल परिवार के सदस्यों पर एफआईआर दर्ज की थी।
इस बीच फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस अधीक्षक सुरजन राम भगत के निर्देश पर विशेष अभियान चलाया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल और एसडीओपी श्याम सिदार के नेतृत्व में रणनीति बनाई गई।
थाना प्रभारी अंजना केरकेट्टा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लगातार दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। 8 सितंबर को पंकज अग्रवाल उर्फ लक्की, आसिफ अंसारी और रवि साहू को गिरफ्तार किया गया। वहीं 10 सितंबर को मनोज अग्रवाल उर्फ कालू, मुकेश अग्रवाल, अनुभव अग्रवाल उर्फ मोंटी, प्रमोद अग्रवाल और सलमा खान उर्फ रानी पुलिस के हत्थे चढ़े। पुलिस का कहना है कि इस मामले में अन्य आरोपियों की भी तलाश की जा रही है।
जशपुर जिले के रूपसेरा और लोदाम आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण
बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता : मंत्री राजवाड़े
रायपुर | महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े इन दिनों विभागीय योजनाओं की जमीनी हकीक़त देखने सरगुजा संभाग के दौरे पर हैं। इसी कड़ी में उन्होंने आज जशपुर जिले के ग्राम रूपसेरा और लोदाम स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, पोषण आहार वितरण व्यवस्था, स्वास्थ्य परीक्षण, शिक्षा संबंधी गतिविधियों, स्वच्छता व्यवस्था तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित सेवाओं का विस्तार से अवलोकन किया।इस दौरान मंत्री राजवाड़े ने मासूम बच्चों को गोद में लेकर दुलार किया और उन्हें चॉकलेट भी वितरित की। उनके इस स्नेहिल व्यवहार से बच्चे बेहद खुश नज़र आए और केंद्र का माहौल उत्साहपूर्ण हो गया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के भविष्य को आकार देने की पहली पाठशाला है, इसे और सशक्त बनाना हमारी साझा जिम्मेदारी है।
भ्रमण के दौरान मंत्री राजवाड़े ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों से संबंधित किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों की सुदृढ़ व्यवस्था ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। इस कड़ी में उन्होंने ग्राम रूपसेरा एवं लोदाम के आंगनबाड़ी केंद्रों को और अधिक सक्षम एवं सुव्यवस्थित बनाने हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण पोषण और शिक्षा उपलब्ध कराना ही विभाग का मूल उद्देश्य है, इसमें किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणजनों की उपस्थिति में हुए इस निरीक्षण के दौरान मंत्री राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है कि प्रत्येक बच्चा स्वस्थ, शिक्षित और सुरक्षित वातावरण में बड़ा हो। इसके लिए शासन की ओर से सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
रायपुर | छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 989.9 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बस्तर जिले में सर्वाधिक 1386.6 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 478.6 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है।
रायपुर संभाग में रायपुर जिले में 859.8 मि.मी., बलौदाबाजार में 721.8 मि.मी., गरियाबंद में 866.1 मि.मी., महासमुंद में 715.8 मि.मी. और धमतरी में 884.0 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।
बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 1014.5 मि.मी., मुंगेली में 991.0 मि.मी., रायगढ़ में 1206.2 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 819.8़ मि.मी., जांजगीर-चांपा में 1177.5 मि.मी., सक्ती में 1071.5 मि.मी., कोरबा में 1014.1 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 931.7 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।
दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 777.4 मि.मी., कबीरधाम में 705.8 मि.मी., राजनांदगांव में 844.3 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1215.3 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 705.3 मि.मी. और बालोद में 1056.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।
सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 702.4 मि.मी., सूरजपुर में 1048.9 मि.मी., बलरामपुर में 1366.5 मि.मी., जशपुर में 952.9 मि.मी., कोरिया में 1108.0 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 997.8 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।
बस्तर संभाग में कोंडागांव जिले में 939.9 मि.मी., कांकेर में 1127.6 मि.मी., नारायणपुर में 1204.4 मि.मी., दंतेवाड़ा में 1359.3 मि.मी., सुकमा में 1062.8 मि.मी. और बीजापुर में 1353.9 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।
तर इन्वेस्टर कनेक्ट में ₹967 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव: 2100 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार
नक्सल उन्मूलन से विश्वास निर्माण तक – बदलता हुआ बस्तर
समावेशी विकास की ओर तेजी से अग्रसर बस्तर
औद्योगिक नीति 2024–30 ने दी बस्तर को नई उड़ान
“नियद नेल्ला नार” योजना और पुनर्वास नीति से सशक्त हो रहा बस्तर
नया बस्तर – निवेश, विकास और विश्वास की नई पहचान
रायपुर
बस्तर आज विकास की स्वर्णिम सुबह का प्रतीक बनकर उभर रहा है। जो क्षेत्र कभी उपेक्षा और अभाव की पहचान से जूझता था, वह अब निवेश, अवसर और रोजगार का नया केंद्र बन रहा है। यहाँ हर क्षेत्र,उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और पर्यटन में समावेशी विकास की गूंज सुनाई दे रही है। यह बदलाव न केवल बस्तर की तस्वीर बदल रहा है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की गाथा लिख रहा है।
रेल–सड़क परियोजनाओं से आएगा बड़ा बदलाव
बस्तर के विकास को गति देने के लिए सरकार ने ₹5,200 करोड़ की रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें रावघाट–जगदलपुर नई रेल लाइन (₹3,513.11 करोड़) और केके रेल लाइन (कोत्तवलसा–किरंदुल) के दोहरीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। ये परियोजनाएँ न केवल बस्तर में यात्रा, पर्यटन और व्यापार को नई दिशा देंगी, बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोज़गार और औद्योगिक अवसर भी सृजित करेंगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से नक्सलवाद उन्मूलन के प्रयास और मजबूत होंगे तथा बस्तर विश्वसनीय निवेश और समावेशी विकास का केंद्र बनकर उभरेगा।
इसके साथ ही, बस्तर में ₹2300 करोड़ की सड़क विकास परियोजनाएँ भी स्वीकृत की गई हैं। कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाने वाला यह संभाग अब छत्तीसगढ़ के सबसे विकसित और समृद्ध क्षेत्रों में से एक बनने की राह पर है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर धमतरी–कांकेर–कोंडागांव–जगदलपुर मार्ग का एक वैकल्पिक रास्ता बना रही हैं, जो कांकेर, अंतागढ़, नारायणपुर के अबूझमाड़ होते हुए दंतेवाड़ा के बारसूर और आगे बीजापुर तक पहुँचेगा। इन परियोजनाओं से बस्तर के सभी जिलों तक पहुँचने के लिए कई रास्ते उपलब्ध होंगे, जिससे दूरियाँ कम होंगी और योजनाओं व विकास कार्यों की पहुँच और अधिक प्रभावी होगी। यह आधुनिक सड़क नेटवर्क न केवल आवागमन की सुविधा बढ़ा रहा है, बल्कि सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रगति के नए द्वार भी खोल रहा है। इस प्रकार, बस्तर अब संघर्ष की भूमि से आगे बढ़कर संपर्क, समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक बन रहा है।
बड़े सार्वजनिक निवेश से बदलता बस्तर
बस्तर में एनएमडीसी द्वारा ₹43,000 करोड़ तथा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल हेतु ₹200 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। ये निवेश बस्तर की आधारभूत संरचना को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
निजी निवेश और समावेशी विकास
बड़े सार्वजनिक निवेशों के साथ-साथ लगभग ₹1,000 करोड़ का निजी निवेश भी सेवा क्षेत्र और एमएसएमई में किया जा रहा है। यह विविधीकृत विकास रोजगार के अवसरों को बढ़ाएगा और समावेशी व सतत विकास को सुनिश्चित करेगा। कुल मिलाकर लगभग ₹52,000 करोड़ की प्रतिबद्धताओं के साथ बस्तर औद्योगिक और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का नया केंद्र बन रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति: बस्तर को मिला पहला 350 बेड का निजी अस्पताल
जगदलपुर में पहली बार 350 बेड का मल्टी-स्पेशियलिटी निजी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज स्थापित होने जा रहा है। इसके लिए रायपुर स्टोन क्लिनिक प्रा. लि. को “इनविटेशन टू इन्वेस्ट” पत्र जारी किया गया है। 550 करोड़ रुपये के निवेश और 200 रोजगार अवसरों के साथ यह परियोजना बस्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाई देगी और इसे मेडिकल शिक्षा का केंद्र बनाएगी।
इसके अतिरिक्त, जगदलपुर में 33 करोड़ रुपये के निवेश से एक और मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल तथा नवभारत इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज द्वारा 85 करोड़ रुपये के निवेश से 200 बेड का मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित किया जाएगा। ये पहल न केवल आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करेंगी, बल्कि सैकड़ों युवाओं को रोजगार भी प्रदान करेंगी।
खाद्य प्रसंस्करण में नई शुरुआत
बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर और कोंडागांव में आधुनिक राइस मिल और फूड प्रोसेसिंग इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए अनेक रोजगार अवसर सृजित होंगे।
एग्रीटेक और वैल्यू एडिशन
नारायणपुर जिले में पार्श्वा एग्रीटेक प्रतिवर्ष 2,400 टन परबॉयल्ड चावल का उत्पादन करेगी। 8 करोड़ रुपये के निवेश और नए रोजगार के साथ यह परियोजना बस्तर की कृषि उपज को वैल्यू एडिशन का नया आधार देगी।
वेलनेस और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में प्रगति
जगदलपुर में नमन् क्लब एंड वेलनेस सेंटर 7.65 करोड़ रुपये के निवेश और 30 रोजगार अवसरों के साथ स्थापित हो रहा है। वहीं पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में एएस बिल्डर्स एंड ट्रेडर्स तथा सेलिब्रेशन रिजॉर्ट्स एंड होटल्स बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करेंगे।
डेयरी और कृषि-आधारित उद्योग
बस्तर डेयरी फार्म प्रा. लि. 5.62 करोड़ रुपये का निवेश कर दुग्ध उत्पादन और प्रसंस्करण को गति देगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
निर्माण सामग्री और औद्योगिक विकास
पीएस ब्रिक्स और महावीर माइन्स एंड मिनरल्स जैसी कंपनियाँ ईंट और स्टोन क्रशर क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं, जिससे निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और बुनियादी ढांचा सशक्त होगा।
वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और कोल्ड स्टोरेज
कांकेर, भानुप्रतापपुर और कोंडागांव में नए वेयरहाउसिंग केंद्र स्थापित हो रहे हैं। दंतेश्वरी कोल्ड स्टोरेज जैसी परियोजनाएँ किसानों की उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने, बर्बादी घटाने और लाभ बढ़ाने में मदद करेंगी।
वुड, फर्नीचर और कृषि मशीनरी
माँ दंतेश्वरी वेनियर्स और अली फर्नीचर जैसी इकाइयाँ बस्तर की पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक बाजारों से जोड़ेंगी।
आधुनिक उद्योगों की एंट्री
शंकरा लेटेक्स इंडस्ट्रीज 40 करोड़ रुपये के निवेश से सर्जिकल ग्लव्स निर्माण इकाई स्थापित करेगी, जिससे 150 रोजगार अवसर सृजित होंगे। यह भारत की स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पीएमएफएमई योजना के तहत सहयोग
पीएमएफएमई योजना अंतर्गत कांकेर, बस्तर और कोंडागांव जिलों के हितग्राहियों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई। कांकेर जिले के श्री मुकेश खटवानी (मेसर्स रूद्रा फूड्स एंड बेवरेजेस) को ₹35 लाख, बस्तर जिले की श्रीमती योगिता वानखेडे (मेसर्स माँ गृह उद्योग) को ₹5 लाख तथा कोंडागांव जिले की श्रीमती रागिनी जायसवाल (मेसर्स फिटनेस फ्यूल) को ₹5 लाख एवं ₹9.50 लाख की स्वीकृति मिली। कुल मिलाकर योजना के अंतर्गत ₹49.50 लाख से अधिक की सहायता दी गई।
पीएमईजीपी योजना से सशक्तिकरण
पीएमईजीपी योजना अंतर्गत कांकेर जिले के हरीश कोमरा (रेडीमेड गारमेंट्स – ₹9 लाख), सुरेश बघेल (हार्वेस्टर – ₹20 लाख), बस्तर जिले के चंद्रशेखर दास (मेसर्स दीक्षा टेंट हाउस – ₹8.80 लाख) और रेवेन्द्र राणा (मेसर्स राणा मोबाईल रिपेयरिंग – ₹7.50 लाख) को सहायता दी गई। वहीं कोंडागांव जिले के सुरेश कुमार देवांगन (मेसर्स किसान मितान एग्रो) को ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण हेतु ₹50 लाख का अनुदान स्वीकृत हुआ। इस प्रकार योजना के अंतर्गत ₹94.50 लाख की राशि वितरित की गई।
औद्योगिक नीति से नए अवसर
राज्य सरकार की औद्योगिक नीति के तहत स्थायी पूंजी निवेश हेतु भी अनुदान दिया गया। कांकेर जिले की साधना शर्मा (मेसर्स महावीर वेयरहाउस) को वेयरहाउस स्थापना के लिए ₹90 लाख की स्वीकृति मिली। इन पहलों से बस्तर संभाग में उद्यमिता और औद्योगिक विकास को गति मिल रही है और स्थानीय युवाओं व महिलाओं को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता के अवसर मिल रहे हैं।
कुल मिलाकर बस्तर में अब तक ₹967 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिससे 2100 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, पर्यटन, निर्माण और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में यह निवेश लहर बस्तर को एक सच्चे “निवेश गंतव्य” के रूप में स्थापित कर रही है।
बस्तर में औद्योगिक विस्तार के अवसर
बस्तर में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएँ हैं। स्टील प्लांट के समीप समर्पित सीमेंट प्लांट, मोटर रिपेयर एवं वाइंडिंग, मशीन एवं फैब्रिकेशन शॉप्स, पंप रिपेयर जैसी सहायक इकाइयों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही लोहा और इस्पात उद्योग से जुड़े पिग आयरन, टीएमटी बार, एंगल/चैनल, वायर रॉड्स और ब्राइट बार के उत्पादन की भी बड़ी संभावनाएँ हैं।
मुख्यमंत्री के 20 माह में 100+ दौरे: विश्वास और विकास का संकल्प
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पिछले 20 महीनों में बस्तर के 100 से अधिक स्थानों का दौरा कर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई उम्मीद और विश्वास का संचार किया है। “नियद नेल्ला नार” योजना के तहत सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएँ दूरस्थ इलाकों तक पहुँची हैं।
सुरक्षा शिविरों के 10 किमी दायरे में अब तक 81,090 आधार कार्ड, 49,239 आयुष्मान कार्ड, 5,885 किसान सम्मान निधि लाभ, 2,355 उज्ज्वला कनेक्शन और 98,319 राशन कार्ड जारी किए गए। 21 सड़कों, 635 मोबाइल टॉवर, 18 उचित मूल्य दुकानों और 9 उप-स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण हुआ। अब तक 54 सुरक्षा शिविर स्थापित हुए हैं। पहली बार 28 गाँवों (जैसे जगारगुंडा, पामेड) में बैंक खुले हैं और 50 से अधिक बंद स्कूल फिर से शुरू हुए हैं।
नई पुनर्वास नीति: आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए जीवन की नई राह
नई पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया जा रहा है। इसमें तीन वर्षों तक ₹10,000 मासिक सहायता, शहरी क्षेत्रों में 4 डिसमिल प्लॉट या ग्रामीण क्षेत्रों में एक हेक्टेयर जमीन दी जाएगी। साथ ही व्यावसायिक प्रशिक्षण, पूर्ण इनामी राशि और सामूहिक आत्मसमर्पण (80% से अधिक) पर दुगुना इनाम तथा नक्सल-मुक्त गाँवों के लिए ₹1 करोड़ तक की विकास योजनाएँ स्वीकृत होंगी। प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत 15,000 घर आत्मसमर्पित नक्सलियों और हिंसा प्रभावित परिवारों को मंजूर किए गए हैं।
मोदी की गारंटी: तेंदूपत्ता संग्राहकों को अधिक दर
राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता खरीदी दर को ₹4,000 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति मानक बोरा कर दिया है। इससे बस्तर के 52 लाख संग्राहक (13 लाख परिवार) सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।
कौशल विकास से युवाओं को अवसर
मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 90,273 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 39,137 को रोजगार मिला। वर्ष 2024–25 में ही आईटी, ऑटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में 3,296 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
नक्सल उन्मूलन में बड़ी सफलता
दिसंबर 2023 से अब तक सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति के परिणामस्वरूप 453 नक्सली मारे गए, 1,611 गिरफ्तार हुए और 1,636 ने आत्मसमर्पण किया। बीते 20 महीनों में 65 से अधिक नए सुरक्षा शिविर स्थापित हुए हैं। सड़क, पुल और मोबाइल नेटवर्क जैसे ढाँचागत विकास ने भी इस प्रक्रिया को मजबूती दी है।
सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक नक्सल उन्मूलन सुनिश्चित करना है, जिसके साथ-साथ सतत विकास और शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।
औद्योगिक नीति 2024–30: बदलाव का सूत्रधार
छत्तीसगढ़ औद्योगिक नीति 2024–30 ने बस्तर ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में निवेश, नवाचार और रोजगार के नए द्वार खोले हैं। “बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट” संतुलित क्षेत्रीय विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह नीति रोजगार सृजन, उद्यमिता संवर्धन और सामुदायिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करती है, साथ ही बस्तर की जनजातीय धरोहर और सांस्कृतिक पहचान को भी संरक्षित रखती है। 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश या 1,000 से अधिक रोजगार देने वाली परियोजनाओं को विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। फार्मा, एग्रो-प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल्स, आईटी व डिजिटल टेक, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस-डिफेंस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को प्राथमिकता दी गई है।
पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिसमें होटलों, ईको-टूरिज्म, वेलनेस सेंटर, एडवेंचर स्पोर्ट्स और खेल सुविधाओं पर 45% तक सब्सिडी मिलेगी। बस्तर के 88% ब्लॉक ग्रुप-3 श्रेणी में आते हैं, जिससे निवेशकों को अधिकतम लाभ मिलेगा।समावेशिता को नीति का केंद्र बनाया गया है: एससी/एसटी उद्यमियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त 10% सब्सिडी दी जाएगी। आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार देने वाली इकाइयों को 40% वेतन सब्सिडी (5 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक, पाँच वर्षों के लिए) प्रदान की जाएगी।
को बढ़ावा देना हमारा लक्ष्य, देश में प्रति व्यक्ति बिजली खपत में छत्तीसगढ़ काफी आगे
मुख्यमंत्री साय 97वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस “फोरम ऑफ रेगुलेटर्स” की बैठक में हुए शामिल
रायपुर | छत्तीसगढ़ विद्युत उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत मार्च 2027 तक प्रदेश के 1 लाख 30 हजार घरों की छतों पर सौर पैनल लगाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन हमारा प्रयास इससे भी आगे बढ़कर इसे 5 लाख छतों तक पहुँचाने का है। इस योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को बड़ी सब्सिडी दी जा रही है। 1 किलोवॉट से 3 किलोवॉट क्षमता तक के सोलर संयंत्र लगाने पर 30 हजार से लेकर 78 हजार रुपये तक की केंद्रीय सहायता सीधे बैंक खाते में दी जा रही है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार भी अतिरिक्त सब्सिडी दे रही है। इससे उपभोक्ताओं को कुल लागत का 75 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर में आयोजित 97वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस “फोरम ऑफ रेगुलेटर्स” को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज हम अपने राज्य स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं। इन 25 वर्षों में हमारी उत्पादन क्षमता करीब 30,000 मेगावाट तक पहुँच गई है। स्टेट सेक्टर, निजी क्षेत्र और केंद्रीय सेक्टर की भागीदारी से आज छत्तीसगढ़ की धरती से 30 हजार मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। हाल ही में हमने 32 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता वाले बिजलीघरों की स्थापना के लिए एमओयू किए हैं। इनमें ताप विद्युत, पंप स्टोरेज, परमाणु, बैटरी स्टोरेज और सौर ऊर्जा परियोजनाएँ शामिल हैं। हमारा लक्ष्य आने वाले वर्षों में 60 हजार मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन करने वाला राज्य बनने का है।
मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि प्रति व्यक्ति बिजली खपत के मामले में छत्तीसगढ़ देश से काफी आगे है। यहाँ खपत 2,211 यूनिट है, जबकि भारत में यह औसत केवल 1,255 यूनिट है। छत्तीसगढ़ अपनी आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन कर रहा है और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। हम अपने राज्य के साथ ही पड़ोसी राज्यों को भी बिजली उपलब्ध करा रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दो दिन पहले ही हमने कैबिनेट बैठक में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 2030 तक लागू रहने वाली नीति में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को औद्योगिक नीति में प्राथमिकता दी गई है।
मुख्यमंत्री साय ने देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्युत नियामक आयोगों के अध्यक्षगण, पदाधिकारियों और विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश के ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति के लिए जो गहन विचार-विमर्श हुआ है, इसका उपभोक्ताओं सहित हम सभी को दूरगामी लाभ मिलेगा। उन्होंने आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ को चुनने हेतु विशेष आभार भी प्रकट किया।
इस अवसर पर केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष जिश्नु बरुआ, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष हेमंत वर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव रोहित यादव सहित राज्य विद्युत नियामक आयोग के अन्य सदस्य एवं अन्य राज्यों से आए सदस्यगण उपस्थित थे।
महिला उद्यमी रागिनी जायसवाल स्थानीय उत्पादों से फिटनेस एवं न्यूट्रीशन के लिए कर रही पहल
बीजापुर में 6 टन प्रतिघंटा क्षमता के राइस मिल की स्थापना करेंगे गीदम के सोहैल रिजवी
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य की औद्योगिक विकास को सर्वाधिक सम्भावनाओं से युक्त बस्तर अंचल के दूरस्थ ईलाके तक पहुंचाने की पहल का सुखद परिणाम अब धरातल पर परिलक्षित हो रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इस महत्ती उद्देश्य पर ध्यान केन्द्रित कर बस्तर क्षेत्र में औद्योगिक विकास की असीम संभावनाओं के मद्देनजर इस वर्ष बीते छह महीने पहले यहां के उद्योगपति, व्यवसायियों, नव उद्यमियों के साथ ही स्टार्टअप से जुड़े युवाओं से संवाद कर सकारात्मक प्रयास किया गया था।
इन सभी सार्थक प्रयासों के फलस्वरूप गुरुवार को जगदलपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ इनवेस्टर कनेक्ट बस्तर कार्यक्रम के दौरान करीब 1000 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों की स्वीकृति पत्र निवेशकों को प्रदान किए गए। जिसमें बस्तर क्षेत्र के कोंडागांव जिले की युवा महिला उद्यमी रागिनी जायसवाल सहित माओवाद प्रभावित बीजापुर जिले में सोहैल रिजवी जैसे स्थानीय उद्यमी शामिल हैं जिन्होंने इन सुदूर ईलाके में स्वरोजगार के अवसर को अपनाने के लिए चुनौती स्वीकार किया है।
कोंडागांव निवासी युवा महिला उद्यमी रागिनी बीते एक वर्ष पहले शासन की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण योजना से लाभान्वित होकर स्थानीय उत्पादों पर आधारित फिटनेस एंड न्यूट्रिशन यूनिट स्थापित कर गर्भवती एवं पोषक माताओं सहित बच्चों को हेल्दी फूड उपलब्ध करवा रही हैं। रागिनी ने अपने इस यूनिट के लिए शासन की योजनांतर्गत 09.53 लाख रुपए की सहायता ली है, जिसमें 35 प्रतिशत अनुदान समाहित है।
वहीं दंतेवाड़ा जिले के अंतर्गत गीदम के युवा उद्यमी सोहैल रिजवी बीजापुर में एक आधुनिक राइस मिल की स्थापना करने जा रहे हैं। इस राइस मिल की क्षमता प्रतिघंटा 6 टन होगी, जिसकी स्थापना पर लगभग 06 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस परियोजना में शासन से 90 लाख रुपये का अनुदान भी प्राप्त होगा। इस राइस मिल के शुरू होने से क्षेत्र में 50 से 60 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है।
रागिनी बताती हैं कि स्थानीय परम्परागत ग्रामीण परिवेश से जुड़े परिवार तथा जन्मभूमि बस्तर होने के फलस्वरूप यहां के वनोत्पाद, आर्गेनिक कृषि उत्पाद तथा जड़ी बूटी की अच्छी जानकारी होने के साथ ही बस्तर के रहवासियों की नियमित जरूरतों एवं खानपान से पूरी तरह वाकिफ होने और प्रसंस्करण की अभिरुचि के कारण सबसे पहले माताओं एवं बच्चों की पोषण पर स्टार्टअप करने का निर्णय लिया और अब कोंडागांव में स्वयं के उत्पाद तैयार कर हेल्दी फूड कार्नर के जरिए आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर हैं।
रागिनी ने बताया कि वह 10 सदस्यीय परिवार जिसमें माता-पिता और दो भाइयों का सहयोग उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है और अब स्वयं को स्वरोजगार से जोड़कर काफी गौरवान्वित महसूस करती हैं। रागिनी कहती हैं कि वह बस्तर अंचल में सबसे ज्यादा जरूरी पोषण सम्बन्धी सेवाओं को समर्पित होकर लगातार जारी रखेंगी। वहीं दंतेवाड़ा जिले के निवासी सोहैल के पिता ने 17 वर्ष पहले गीदम में राइस मिल की स्थापना की थी, जिसके बाद सोहैल ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के उपरांत इस पारिवारिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। बीजापुर में इस नए उद्यम की स्थापना की योजना को उन्होंने अब अमलीजामा पहनाया है।
इसके साथ ही, सोहैल 3 करोड़ रुपये की लागत से फ्लाई ऐश ब्रिक्स का कारोबार भी संचालित कर रहे हैं, जो उनके उद्यमशीलता के दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस राइस मिल के शुरू होने से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। युवा स्टार्टअप रागिनी और सोहैल रिजवी का यह प्रयास सरकार के सुरक्षित, पारदर्शी एवं आकर्षक नवीन औद्योगिक नीति के साथ ही सकारात्मक पहल के दूरगामी एवं शुरुआती नतीजे हैं जो भविष्य में स्थानीय उद्योग और रोजगार सृजन के क्षेत्र में मील के पत्थर साबित होंगे।