• EPS 95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति का राष्ट्रीय नेतृत्व बैठक 23 दिसंबर को भोपाल में संपन्न

    भोपाल 
    EPS 95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति भोपाल के संस्कार पब्लिक स्कूल संत हिरदाराम नगर बैरागढ़ भोपाल में 23 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय नेतृत्व में बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता. महेन्द्र शर्मा कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा की गई जिसमें भोपाल सीहोर विदिशा जबलपुर पिपरिया से बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित थे बैठक में माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर श्री अशोक राऊत राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री बीएस नारखेडे महिला फ्रंट की राष्ट्रीय सचिव श्रीमती सरिता नारखेडे अल्प प्रवास पर भोपाल पधारे बैठक को संबोधित करते हमारे चार सूत्रीय मांगों का निराकरण अब शीघ्र होने जा रहा है पहले प्रमुख मांग न्यूनतम पेंशन 7500 प्लस महंगाई भत्ता दूसरी मांग पेंशन धारक पति पत्नी को निशुल्क अच्छी चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए तीसरी मांग माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश 4 अक्टूबर 2016 और 4 नवंबर 2022 के अनुसार पेंशनरों को बिना किसी भेदभाव के उच्च पेंशन का लाभ दिया जाए.

    चौथी मांग 1995 के पूर्व 63सेवानिवृत कर्मचारियों को सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए रुपए 5000 मासिक पेंशन दी जाए.उन्होंने अपने संबोधन में यह बताया कि राष्ट्रीय संघर्ष समिति उक्त मांगों के लिए 10 वर्षों से आंदोलन र त है राष्ट्रीय नेतृत्व संगठन द्वारा समय-समय पर माननीय प्रधानमंत्री महोदय माननीय श्रम मंत्री महोदय वित्त मंत्री ईपीएफओ से चर्चा कर पेंशनरों को बहुत ही कम पेंशन मिल रही है जिसमें उनका गुजारा होना असंभव है पेंशनर धन के अभाव में गंभीर बीमारियों का इलाज करने में असमर्थ है और पेंशन बढ़ाने की आस में वह धीरे-धीरे स्वर्गवासी हो रहे हैं राष्ट्रीय नेतृत्व संगठन को माननीय श्रम मंत्री महोदय द्वारा शीघ्र ही उक्त मांगों का अब शीघ्र ही  निराकरण करने को कहा है.

    अगर अब केंद्र सरकार श्रम मंत्री इस अवसर पर ईपीएफओ द्वारा हमारी मांगों का निराकरण नहीं किया जाता है तो हमें तीव्र आंदोलन करना होगा इसके लिए पेंशनरों को तैयार रहने हेतु कहा गया है इस अवसर महेंद्र शर्मा ने कहा की अल्प पेंशन में  गुजारा मुश्किल है.
     सरकार हमको गरीबी रेखा में भी नहीं मानती बैठक में बड़ी संख्या में पेंशनर निगम मंडल के वरिष्ठ कर्मचारी नेता गण उपस्थित थे.

  • MP में मतदाता सूची की सफाई: 42.74 लाख नाम हटाए गए,भोपाल-इंदौर में नाम कटने का ज्यादा असर, बुरहानपुर में एक ही वोटर के कई नाम

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए 22 साल बाद हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण में मंगलवार को सभी 71,930 मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन किया गया। अलग-अलग श्रेणियों में 42,74,160 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

    इनमें अधिकतर शहरी क्षेत्रों के हैं। इनमें 22,78,393 वे मतदाता सर्वाधिक शामिल है, जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं। अब प्रदेश में 23 दिसंबर 2025 की स्थिति में 5,31,31,983 मतदाता रह गए हैं। इनमें 8,65,832 वे मतदाता भी शामिल हैं, जिन्होंने गणना पत्रक अधूरे जमा किए हैं। उन्हें पत्रक में सुधार का मौका दिया गया है।

     राज्य में कुल 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 निर्वाचकों में से 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 मतदाताओं ने अपने गणना प्रपत्र जमा किए हैं। इसमें 8 लाख 65 हजार ‘नो-मैपिंग’ वाले मतदाता भी शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को पांच श्रेणियों (कैटेगरी) में विभाजित कर आंकड़े जारी किए हैं। इनमें नो-मैपिंग कैटेगरी में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर चारों महानगर शीर्ष पर हैं।

    इंदौर में हटाए गए 4 लाख से ज्यादा नाम

    इंदौर जिले की मतदाता सूची में एसआईआर के बाद मतदाता संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। पहले जिले में कुल 28 लाख 67 हजार 268 मतदाता थे। सत्यापन के बाद मतदाताओं की संख्या घटकर 24 लाख 16 हजार रह गई। 4 लाख 51 हजार 218 मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो पाया। इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने की स्थिति में है। तारीख दो बार बढ़ने से 75 हजार 467 मतदाताओं को राहत मिली है। दोबारा सत्यापन के बाद ये मतदाता सूची में बने रह सके। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, 84.26 फीसद सत्यापन पूरा हो चुका है, शेष 15.74 फीसद मतदाताओं के नाम हटना तय माना जा रहा है।

    गोविंदपुरा में 97 हजार और नरेला में 81 हजार वोटरों के नाम सूची से हटाए

    भोपाल की अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में वोटर कटने के आंकड़े असमान रहे हैं. सबसे ज्यादा असर गोविंदपुरा और नरेला विधानसभा क्षेत्र में देखा गया है. गोविंदपुरा में जहां 97 हजार से ज्यादा वोटरों के नाम सूची से हटाए गए हैं, वहीं नरेला में 81 हजार से अधिक मतदाता कम हुए हैं. इसके अलावा भोपाल मध्य, उत्तर, दक्षिण-पश्चिम, हुजूर और बैरसिया विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कटे हैं.

    खंडवा में 86193 मतदाताओं के नाम कटे

    खंडवा जिले में में एसईआर के पहले चरण का काम पूरा हो गया है। 27 अक्टूबर 2025 को यहां की चारों विधानसभाओं में 10 लाख 29 हजार 806 मतदाता थे। लेकिन, अब सर्वे के बाद 9 लाख 43 हजार 613 मतदाता शेष हैं। यानी 86 हजार 193 मतदाता कम दर्ज हुए। सबसे ज्यादा परमानेंट शिफ्टेड 50 हजार 784 मतदाता है। 18 हजार 956 मतदाता मृत पाए गए। 8 हजार 782 मतदाता डबल वोटर कार्ड वाले और 7548 मतदाताओं का कोई पता नहीं चल पाया है। खंडवा कलेक्ट्रेट में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मतदाता सूचियों के ड्रॉफ्ट पब्लिकेशन को सीडी और अंतरिम प्रकाशन की विधानसभा वार सूचियां दी गई हैं।

    वहीं, इंदौर ऐसा एकमात्र जिला है जो सभी पांचों कैटेगरी में शामिल है। मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया राज्य के सभी 55 जिला निर्वाचन अधिकारियों, 230 निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO), 532 सहायक ERO (AERO) तथा 65,014 मतदान केंद्रों पर तैनात बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के समन्वित प्रयासों से पूरी की गई। इस अभियान में स्वयंसेवकों और छह राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की भी सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने 1.35 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए।

    42.74 लाख मतदाता नहीं मिले
    आयोग के अनुसार अब्सेंट, शिफ्टेड, मृत और डुप्लीकेट कैटेगरी में प्रदेश में कुल 42 लाख 74 हजार 160 मतदाता नहीं मिले। अब इनके नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इनमें कुछ मतदाता ऐसे भी हो सकते हैं जिन्होंने समय सीमा में गणना प्रपत्र जमा नहीं किया या स्वयं पंजीकरण में रुचि नहीं ली।

    आंकड़ों के अनुसार:
    8.46 लाख मतदाता (1.47%) मृत पाए गए

    31.51 लाख मतदाता (5.49%) अन्य राज्यों में पंजीकृत पाए गए या तीन बार घर जाने पर अनुपस्थित मिले
    2.77 लाख मतदाता (0.48%) के नाम दो स्थानों पर दर्ज पाए गए, जिनमें से अब केवल एक स्थान पर नाम रखा जाएगा

    नो-मैपिंग कैटेगरी में इंदौर टॉप पर
    नो-मैपिंग कैटेगरी में कुल 8 लाख 65 हजार मतदाता पाए गए, जो 5.31 करोड़ गणना प्रपत्र जमा करने वाले मतदाताओं में शामिल हैं। 
    जिलावार स्थिति इस प्रकार है:

    इंदौर – 1,33,696
    भोपाल – 1,16,925
    जबलपुर – 69,394
    ग्वालियर – 68,540
    उज्जैन – लगभग 48,000

    क्या है ‘नो-मैपिंग’?
    चुनाव आयोग द्वारा सभी मतदाताओं को गणना प्रपत्र दिए गए थे, जिसमें उन्हें 2003 की मतदाता सूची के अनुसार अपना वोटर आईडी नंबर या किसी रक्त संबंधी (ब्लड रिलेशन) रिश्तेदार का वोटर आईडी नंबर दर्ज करना था। जिन मतदाताओं की यह जानकारी मेल नहीं खा सकी, उन्हें नो-मैपिंग श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मतदाताओं को अब आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें उन्हें 7 दिनों के भीतर आयोग द्वारा मान्य 13 पहचान पत्रों में से किसी एक के माध्यम से अपनी पात्रता सिद्ध करनी होगी। ऐसा न करने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।

    दो जगह नाम वाले मतदाता: बुरहानपुर सबसे आगे
    डुप्लीकेट वोटर आईडी मामलों में:
    बुरहानपुर – 23,544 (पहला स्थान)
    इंदौर – 22,808 (दूसरा)
    धार – 14,198 (तीसरा)

    सबसे कम डुप्लीकेट मतदाता:
    उमरिया – 968
    आगर मालवा – 985
    नीमच – 1,036
    भोपाल – 14,171

    मृत मतदाताओं में जबलपुर टॉप पर
    मृत पाए गए मतदाताओं की संख्या में:
    जबलपुर – 51,357 (पहला स्थान)
    इंदौर – 43,743 (दूसरा)
    सागर – 36,466  (तीसरा)

    सबसे कम मृत मतदाता:
    पांढुर्ना – 4,981
    हरदा – 5,303
    निवाड़ी – 5,539

    अब्सेंट मतदाता में इंदौर टॉप पर – बता दें अब्सेंट मतदाता यानी जिनके पते पर तीन बार जाने के बावजूद वह नहीं मिले। 
    अब्सेंट पाए गये मतदाताओं की संख्या में:
    इंदौर- 1, 75, 425 (पहला स्थान)
    भोपाल-1,01,503  (दूसरा)
    जबलपुर- 66,678 (तीसरा)

    सबसे कम अब्सेंट मतदाता: 
    अलीराजपुर- 672
    पाढूंर्ना- 1372
    आगर मालवा- 1734 

    शिफ्टेड मतदाता में भोपाल टॉप पर – जो दूसरे राज्यों में शिफ्ट हो गए और वहां अपना वोटर आईडी रजिस्ट्रर करा लिया। 
    शिफ्टेड मतदाताओं की संख्या में: 
    भोपाल- 2, 86,661 (पहला स्थान)
    इंदौर- 1,97,898   (दूसरा)
    ग्वालियर- 1,48, 273 (तीसरा)

    सबसे कम शिफ्टेड मतदाता:
    पाढूंर्ना- 5784

    युवा मतदाता जुडवा सकते हैं नाम
    मुख्य निर्वाचन अधिकारीझा ने बताया कि जो युवा मतदाता 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे ऑफलाइन या ऑनलाइन अपना नाम जुडवा सकते हैं। भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट Voters.eci.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म-6 भरना होगा. इसके साथ ही ऑफलाइन के लिए बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं। 

    घर-घर सत्यापन, दस्तावेज जांच और ऑनलाइन डेटा मिलान
    प्रशासन का कहना है कि SIR के दौरान घर-घर सत्यापन, दस्तावेज जांच और ऑनलाइन डेटा मिलान के बाद यह कार्रवाई की गई है. कलेक्टर कार्यालय के अनुसार, यह केवल पहली सूची है और आगे आपत्तियों के निराकरण के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी. इस बीच, जिन मतदाताओं के नाम कटे हैं, उन्हें दावा-आपत्ति का मौका भी दिया जाएगा.

    कलेक्टर कार्यालय ने जारी की SIR की पहली आधिकारिक सूची
    कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी सूची में साफ तौर पर बताया गया है कि SIR प्रक्रिया के तहत किन-किन विधानसभा क्षेत्रों में कितने वोटर हटाए गए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रक्रिया चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत की गई है. सूची सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर आंकड़ों का विश्लेषण शुरू कर दिया है.

     विधानसभा क्षेत्रवार कटे वोटर

        गोविंदपुरा: 97,052 वोटर कटे
        नरेला: 81,235 वोटर कटे
        भोपाल मध्य: 67,304 वोटर कटे
        भोपाल दक्षिण-पश्चिम: 63,432 वोटर कटे
        हुजूर: 65,891 वोटर कटे
        भोपाल उत्तर: 51,058 वोटर कटे
        बैरसिया: 12,903 वोटर कटे

    SIR से पहले और बाद की स्थिति, नंबरिंग में आंकड़े

        SIR से पहले कुल वोटर: 21,25,908
        SIR में कटे कुल वोटर: 4,38,875
        SIR के बाद बचे वोटर: 16,87,033
        सबसे ज्यादा कटौती: गोविंदपुरा विधानसभा
        सबसे कम कटौती: बैरसिया विधानसभा

    नो मैपिंग वाले मतदाता वाले जिले , जिन्हें नोटिस दिए जाएंगे

        133696 इंदौर
        116925 भोपाल
        69394 जबलपुर

    एसआईआर की पहली मतदाता सूची का प्रकाशन

        प्रदेश में 42 लाख 74 हजार 160 वोटर्स कटे
        मुख्य निवार्चन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने दी जानकारी
        दावे आपत्ति की प्रक्रिया 22 जनवरी तक चलेगी
        फिर जांच का फेस चलेगा, 21 फरवरी को अंतिम सूची प्रकाशित होगी

    22 जनवरी तक कर सके हैं दावा-आपत्तियां

    अब यदि किसी को अपना नाम जुड़वाने के लिए दावा-आपत्ति करना है तो उसे फार्म छह और किसी नाम पर आपत्ति है तो फार्म सात भरना होगा। यह प्रक्रिया 22 जनवरी 2026 तक चलेगी। इसमें यदि कोई दस्तावेज के आधार पर अपने मतदाता होने की पात्रता सिद्ध करता है, तो उसका नाम अंतिम सूची में शामिल कर लिया जाएगा। दावा-आपत्तियों का निराकरण 14 फरवरी तक किया जाएगा। इसके पश्चात मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 21 फरवरी को होगा। वहीं, अधूरे गणना पत्रक भरने वाले मतदाताओं को बुधवार से घर जाकर नोटिस दिए जाएंगे।

     

     

  • खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026 के शुभंकर ‘मोर वीर’, थीम सॉन्ग और खेलो इंडिया टॉर्च का अनावरण

    रायपुर : युवा ही प्रदेश और देश का भविष्य हैं: मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

    राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा, रोजगार और खेल सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

    बिलासपुर में तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ राज्य युवा महोत्सव का भव्य शुभारंभ

    खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026 के शुभंकर ‘मोर वीर’, थीम सॉन्ग और खेलो इंडिया टॉर्च का अनावरण

    मलखंब खिलाड़ियों को एक लाख रुपये प्रोत्साहन राशि सहित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ के युवाओं की प्रतिभा, ऊर्जा और रचनात्मक क्षमता को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित राज्य स्तरीय युवा महोत्सव का आज बिलासपुर के बहतराई स्टेडियम में भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तीन दिवसीय इस महोत्सव का उद्घाटन करते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़ 2026 के शुभंकर ‘मोर वीर’, थीम सॉन्ग एवं खेलो इंडिया टॉर्च का रिमोट बटन दबाकर अनावरण किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। उद्घाटन समारोह में अबूझमाड़ क्षेत्र के खिलाड़ियों द्वारा मलखंब की उत्कृष्ट प्रस्तुति दी गई। महिला कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी एवं एथलेटिक्स खिलाड़ी श्री अमित कुमार द्वारा खेलो इंडिया टॉर्च का अनावरण किया गया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं। राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और खेल सहित हर क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह युवा महोत्सव न केवल युवाओं की प्रतिभाओं को पहचान देने का मंच है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम भी है।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर खेलो इंडिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि देने, मलखंब खिलाड़ियों को एक लाख रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान करने तथा अमेरिका गॉट टैलेंट में चयनित मलखंब खिलाड़ी अनतई पोटाई के अमेरिका आने-जाने का सम्पूर्ण व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस युवा महोत्सव में प्रदेशभर से 3,000 से अधिक युवा भाग ले रहे हैं, जो 14 सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विधाओंकृ8 दलीय एवं 6 एकलकृमें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। लोकनृत्य, लोकगीत, वाद-विवाद, चित्रकला और कविता लेखन की विजेता प्रतिभाएँ वर्ष 2026 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय युवा उत्सव में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता यह प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होकर शांति, विकास और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जनजातीय अंचलों में खेलों की अपार संभावनाएँ हैं और सरकार इन क्षेत्रों की प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें आगे बढ़ा रही है।

    केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि युवाओं की सृजनशील सोच से ही देश आगे बढ़ता है और केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर 
    प्रयासरत हैं।

    उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने घोषणा की कि आने वाले समय में सरगुजा अंचल में भी ओलंपिक-स्तरीय खेल आयोजनों का आयोजन किया जाएगा।

    उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर बदल रहा है और आज जनजातीय क्षेत्रों के युवा राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं।

    इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, विधायकगण श्री अमर अग्रवाल, श्री धर्मजीत सिंह, श्री धरमलाल कौशिक, श्री सुशांत शुक्ला, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, क्रेडा अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी, छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष श्री राजा पांडे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी और युवा उपस्थित थे।

  • स्वास्थ्य मंत्री का जांजगीर-चांपा जिला चिकित्सालय में औचक निरीक्षण, नई ओपीडी और एनआईसीयू की शुरुआत

    रायपुर : स्वास्थ्य मंत्री ने किया जिला चिकित्सालय जांजगीर-चांपा का औचक निरीक्षण, नई ओपीडी व एनआईसीयू का किया शुभारंभ

    रायपुर

    स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने  जिला चिकित्सालय जांजगीर-चांपा का औचक निरीक्षण किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, संचालक संजीव झा एवं सहायक संचालक डॉ. सुरेंद्र पाम्भोई उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने अस्पताल की व्यवस्थाओं, स्वच्छता, दवाओं की उपलब्धता तथा मरीजों को मिल रही सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय में नवनिर्मित ओपीडी हॉल एवं नवजात शिशुओं के बेहतर उपचार हेतु 10 बेड के अत्याधुनिक एनआईसीयू वार्ड का विधिवत शुभारंभ  किया। उन्होंने कहा 10 बेड के एनआईसीय से अब क्षेत्र के नवजात शिशुओं को क्रिटिकल केयर हेतु बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
          स्वास्थ्य मंत्री मंत्री ने जीवनदीप समिति के माध्यम से स्वीकृत कार्यों की जानकारी लेते हुए कलेक्टर जन्मेजय मोहबे के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मरीजों की आवश्यकता के अनुरूप जीवनदीप समिति से समयबद्ध स्वीकृतियाँ देना सराहनीय कदम है, जिससे अस्पताल की सेवाएँ निरंतर सुदृढ़ हुई हैं। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यू.के. मरकाम, सिविल सर्जन डॉ. एस. कुजूर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक उत्कर्ष तिवारी, जिला अस्पताल प्रबंधक अंकित ताम्रकार, आरएमओ डॉ. संदीप साहू सहित जिला चिकित्सालय के समस्त अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • मुख्यमंत्री ने जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता का किया शुभारंभ

    रायपुर : छत्तीसगढ़ में खेलों का विकास हमारी प्राथमिकता- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    देश और प्रदेश में खेलों को लेकर बहुत ही उत्साहजनक वातावरण- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    मुख्यमंत्री ने जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता का किया शुभारंभ

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय यहां राजधानी रायपुर के कोटा रोड स्थित स्वामी विवेकानंद एथेलेटिक स्टेडियम में आयोजित 45वीं एनटीपीसी जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता के शुभारंभ किया। उन्होंने 45वीं एनटीपीसी जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं दी और खिलाड़ियों को उत्कृष्ठ प्रदर्शन के लिए उनका उत्साहवर्धन किया। 

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह सौभाग्य है कि प्रदेश को राष्ट्रीय ट्राइबल गेम्स के आयोजन का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया के माध्यम से देश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बहुत अच्छे अवसर मिल रहे हैं। साथ ही आज पूरे देश और प्रदेश में खेल को लेकर बेहतर वातारण तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेलों का विकास हमारी प्राथमिकता मे शामिल है। सरकार द्वारा सभी खेलों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा को निखारने सभी सुविधाएं और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। 

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी खेलो इंडिया के नये परिसरों की शुरुआत की गई है, इससे खेल प्रतिभाओं को सभी जरुरी सुविधाएं मिल रही हैं। राज्य में खेल अलंकरण समारोह का आयोजन किया जाता है जिससे खिलाड़ियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है। हमारी सरकार ओलंपिक में शामिल होने वाले एथलीट को 21 लाख रुपये देगी। यदि हमारे प्रदेश का कोई युवा खिलाड़ी ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतता है तो उसे 3 करोड़, रजत पदक जीतने पर 2 करोड़ तथा कांस्य पदक जीतने वालों को एक करोड़ रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। 

    उल्लेखनीय है कि 45वीं एनटीपीसी जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन छत्तीसगढ़ प्रदेश आरचरी एसोसिएशन एवं छत्तीसगढ़ खेल एवं युवा कल्याण विभाग के तत्वावधान में किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता 22 से 30 दिसंबर तक आयोजित होगी। प्रतियोगिता में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लगभग 500 खिलाड़ी  हिस्सा ले रहे है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया, छत्तीसगढ़ प्रदेश आर्चरी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं  राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश मोरारका, महासचिव आयुष मोरारका, ईश्वर प्रसाद अग्रवाल सहित विभिन्न प्रदेशों से आए खिलाड़ी, कोच,मैनेजर तथा गणमान्यजन व खेलप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

  • भा.ज.पा. महिला मोर्चा में रत्नावली को मिली प्रदेश कार्यसमिति सदस्य की जिम्मेदारी

     रत्नावली को भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य की मिली जिम्मेदारी 

    महिलाओं को शिक्षित एवं सशक्त बनाने कटिबद्ध:कौशल

    रायपुर 

    अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण छत्तीसगढ़ शासन की पूर्व सदस्य रत्नावली कौशल को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंह देव एवं प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की अनुशंसा पर महिला मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष विभा अवस्थी ने प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नियुक्त किया है। नवनियुक्त प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रत्नावली कौशल ने कहा कि महिला मोर्चा की समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं के साथ छत्तीसगढ़ सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं को प्रदेश के अंतिम महिलाओं तक पहुंचाने के लिए कटिबद्ध हैं।

      नवनियुक्त प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रत्नावली कौशल ने प्रेस व्यक्तव्य में कहा हम महिला मोर्चा की समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं को प्रदेश के अंतिम महिलाओं तक पहुंचाने के लिए काम करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि हर महिला को सरकार की योजनाओं का लाभ मिले और वे आत्मनिर्भर बनें। रत्नावली कौशल ने आगे कहा,हम महिला मोर्चा के माध्यम से महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए काम करेंगे। हम महिलाओं को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए काम करेंगे ताकि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ सकें।

     भाजपा महिला मोर्चा की नवनियुक्त प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रत्नावली कौशल ने भाजपा के समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं को आभार व्यक्त करते हुए कहा, हम साथ मिलकर महिला मोर्चा को मजबूत बनाएंगे और प्रदेश के विकास में योगदान देंगे। रत्नावली कौशल ने अपनी नियुक्ति पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय,केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू,उप मुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव,विजय शर्मा,कैबिनेट मंत्री द्वय गुरु खुशवंत साहेब,दयाल दास बघेल,ओपी चौधरी,रामविचार नेताम,केदार कश्यप,पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ विधायक पुन्नूलाल मोहले,भाजपा जिलाध्यक्ष दीनानाथ केशरवानी सहित भाजपा के समस्त वरिष्ठजनो का आभार व्यक्त किया है ।

  • अटल जी की विरासत को समर्पित अटल म्यूजियम का 25 दिसंबर को ग्वालियर में उद्घाटन, अमित शाह रहेंगे मौजूद

    ग्वालियर
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 25 दिंसबर को ग्वालियर के दौरे पर हैं। इस दिन गृह मंत्री महाराज बाड़ा स्थित गोरखी स्कूल में तीन साल पहले बनकर तैयार अटल म्यूजियम का शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री इस म्यूजियम को देखने के लिए पहुंच सकते हैं, क्योंकि उनका अटलजी के पैतृक निवास जाने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।

    अटल म्यूजियम के साथ ही शासकीय प्रेस बिल्डिंग में तैयार किए गए औद्योगिक म्यूजियम का भी लोकार्पण होने की संभावना है, क्योंकि ये म्यूजियम भी बनकर तैयार है और इसके संचालन-संधारण की एजेंसी भी फाइनल कर ली गई है। स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन के माध्यम से लोकार्पण वाले प्रोजेक्टों में दोनों म्यूजियम का प्रस्ताव भेजा गया था। गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन द्वारा लगभग साढ़े नौ करोड़ रुपये में अटल म्यूजियम को तैयार कराया गया था। वर्ष 2022 में ये म्यूजियम बनकर तैयार हो गया था, लेकिन अभी तक इसका विधिवत उद्घाटन नहीं हुआ है। अटलजी की यादों को समर्पित इस म्यूजियम में उनसे जुड़ी कई वस्तुएं रखी हुई हैं। म्यूजियम में अटलजी के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती गैलरियों में फोटो गैलरी, काव्य गैलरी, साइंस गैलरी, डार्क रूम गैलरी सहित विभिन्न गैलरियों का समावेश किया गया है। इनके माध्यम से अटल जी जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है।

    वहीं साइंस गैलरी के माध्यम से जहां अटलजी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान भारत के तकनीक और विज्ञान में सफलता की कहानी को डायरोमा माडल इत्यादि द्वारा प्रदर्शित किया गया है, तो वहीं काव्य गैलरी में अटल जी द्वारा लिखी गई विभिन्न कविताओं का सृजन किया गया है। इन गैलरियों में एक डार्क रूम भी तैयार किया गया है, जिसमें अटल जी के विभिन्न छायाचित्रों को स्पेशल लाइटिंग इफेक्ट से प्रदर्शित किया गया है।

  • केन्द्रीय गृह मंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में होंगे शामिल

    अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में दिखेगी प्रदेश के आर्थिक विकास की समग्र तस्वीर

    निवेश से रोजगार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हो रहा प्रदेश का औद्योगिक विकास
    केन्द्रीय गृह मंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में होंगे शामिल

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। इसी उद्देश्य से 25 दिसंबर को ग्वालियर के मेला ग्राउंड में “अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट – निवेश से रोजगार” का आयोजन किया जाएगा। यह ग्रोथ समिट प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश प्रोत्साहन और रोजगार आधारित विकास की समग्र तस्वीर को प्रदर्शित करने वाला सबसे प्रभावी मंच साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन के अनुरूप इस समिट में औद्योगिक निवेश के साथ उत्पादन और रोजगार के सृजन पर भी फोकस किया जायेगा। कार्यक्रम में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह उपस्थित रहेंगे। उनकी सहभागिता यह संदेश देगी कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक विकास मॉडल केंद्र की प्राथमिकताओं के अनुरूप है और प्रदेश में निवेश सुरक्षित, पारदर्शी और लाभकारी तरीके से लागू किया जाएगा।

    निवेश को जमीन पर उतारने का मंच

    ग्रोथ समिट के दौरान 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर आधारित भूमि आवंटन और अनुमोदन संबंधी निर्णय लिये जायेंगे। इसके साथ ही 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा। नए औद्योगिक क्षेत्र, क्लस्टर और प्लग-एंड-प्ले इकाइयों के शुभारंभ से प्रदेश में उत्पादन और उद्योग गतिविधियों को गति मिलेगी। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी व्यापक रूप से विकसित होंगे और युवाओं के लिए नई संभावनाएँ उत्पन्न होंगी।

    कार्यक्रम में निवेशकों को सिंगल-क्लिक प्रणाली के माध्यम से प्रोत्साहन सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली से निवेशक परियोजनाएँ तेजी से शुरू कर पाएंगे और औद्योगिक इकाइयों को समय पर समर्थन मिलेगा।

    रोजगार और युवाओं का सशक्तिकरण

    ग्रोथ समिट का उद्देश्य केवल निवेश नहीं, बल्कि रोजगार सृजन को भी प्राथमिकता देना है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में नए उद्योगों के साथ-साथ रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जाएगा। यह पहल यह संदेश देगी कि मध्यप्रदेश में उद्योग और रोजगार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। रोजगार पाने वाले युवाओं को मंच से प्रोत्साहन देने से उनके आत्मविश्वास और उत्पादनशीलता में वृद्धि होगी।

    एमएसएमई, कौशल विकास और स्टार्टअप पर विशेष ध्यान

    समिट में एमएसएमई, स्टार्टअप्स, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, ड्रोन, डिफेंस और फार्मा जैसे क्षेत्रीय और निर्यात आधारित उद्योगों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार सृजन पर केंद्रित सत्र यह दिखाएंगे कि प्रदेश सरकार कुशल मानव संसाधन तैयार करने और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप रोजगार अवसर प्रदान करने पर समान रूप से ध्यान दे रही है।

    औद्योगिक प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की ताकत

    कार्यक्रम स्थल पर औद्योगिक परियोजनाओं, अधोसंरचना और निवेश से जुड़े विभागीय कार्यों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी में प्रदेश के औद्योगिक अवसर, निवेश के प्रस्ताव, अधोसंरचना विकास और औद्योगिक नीतियों की जानकारी निवेशकों और आमजन को दी जाएगी। इससे निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए भरोसा मिलेगा और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

    सतत औद्योगिक और आर्थिक विकास

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यह ग्रोथ समिट यह सुनिश्चित करेगा कि निवेश केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहे। निवेश को उद्योग स्थापना, उत्पादन, रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण में बदला जाएगा। यह समिट मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति की दिशा को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करेगा। प्रदेश में औद्योगिक निवेश, रोजगार और कौशल विकास एक साथ बढ़ें। समिट के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए सुविधाजनक माहौल है, उद्योगों को गति मिलेगी और युवाओं को स्थायी रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे।

    समग्र प्रभाव और राष्ट्रीय महत्व

    ग्रोथ समिट न केवल प्रदेश के निवेश और उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं और नीति स्थिरता को प्रदर्शित करेगा। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की सहभागिता इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी आकर्षक बनाएगी।

    अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट – निवेश से रोजगार प्रदेश की औद्योगिक नीति और रोजगार सृजन दृष्टि का सबसे बड़ा और प्रभावी मंच साबित होगा। यह आयोजन निवेशकों को भरोसा, उद्योगों को गति और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करके मध्यप्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त, रोजगारोन्मुख और निवेश-फ्रेण्डली राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

     

  • देश को समर्पित हिमालयी व्यक्तित्व : श्री अटल बिहारी वाजपेयी

    देश को समर्पित हिमालयी व्यक्तित्व : श्री अटल बिहारी वाजपेयी 
     
    – डॉ. नरेश बंसल, राज्यसभा सांसद और 
    राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष ,भारतीय जनता पार्टी 

    हार नहीं मानूंगा,रार नहीं ठानूंगा,
    काल के कपाल पर ,लिखता–मिटाता हूँ,
    गीत नया गाता हूँ।
    — अटल बिहारी वाजपेयी

    भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी महज एक स्मृति-उत्सव नहीं है, यह राष्ट्रीय आत्मनिरीक्षण का क्षण है।आज जब देश अपने लोकप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म शताब्दी वर्ष मना रहा है, १४० करोड़ भारतीय एक ऐसे नेतृत्व की परंपरा पर गौरान्वित महसूस कर रहे हैं जिसने नैतिक साहस को लोकतांत्रिक संयम, दृढ़ता को सहानुभूति और दूरदर्शिता को विनम्रता के साथ जोड़ा।

    अटल जी उन दुर्लभ राजनेताओं में से एक थे जिनके लिए राजनीति जनसेवा का एक पवित्र साधन थी। उनका नेतृत्व दिखावटी नहीं था; बल्कि प्रेरक था। उनका मानना था कि अधिकार विश्वसनीयता से आना चाहिए और शक्ति जवाबदेही पर आधारित होनी चाहिए। एक प्रतिबद्ध विचारक होते हुए भी, उन्होंने कभी भी विचारधारा को संवाद पर हावी नहीं होने दिया। उनके लिए संसदीय लोकतंत्र एक प्रक्रियात्मक दायित्व नहीं बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी थी।
    प्रधानमंत्री के रूप में, अटल जी ने यह सिद्ध किया कि सशक्त नेतृत्व और मानवीय शासन एक साथ चल सकते हैं। उनके कार्यकाल में भारत ने लोकतांत्रिक मूल्यों में दृढ़ रहते हुए वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके नेतृत्व ने विश्व को दिखाया कि भारत बिना जल्दबाजी किए दृढ़ संकल्पित हो सकता है, और बिना आक्रामक हुए मुखर हो सकता है। उनके विचार में, शक्ति का अर्थ तभी सार्थक होता है जब वह शांति और स्थिरता के लिए अपनी सार्थकता प्रतिस्थापित करता हो।

    पोखरण परमाणु परीक्षण रणनीतिक दृढ़ संकल्प का प्रतीक था , जबकि शांति के लिए उनके प्रयासों ने उनकी कुशल राजनेता की भूमिका को अभिभूत किया। मानवीय मूल्यों के सशक्त प्रहरी , अटल जी  मानना था कि भारत को सशक्त होने के साथ-साथ उत्तरदायी भी होना आवश्यक है ।
     
    विकास के प्रति उनका दृष्टिकोण भी उतना ही महत्वपूर्ण था। अटल जी समझते थे कि राष्ट्रीय प्रगति तभी सार्थक होती है जब वह समावेशी हो। अवसंरचना, ग्रामीण संपर्क और दूरसंचार के क्षेत्र में शुरू की गई महत्वपूर्ण पहलों का उद्देश्य केवल संपत्ति अर्जन नहीं था, बल्कि लोगों, बाजारों और अवसरों को आपस में जोड़ना था। सड़कों, संपर्क और प्रौद्योगिकी पर उनकी प्राथमिकताओं  ने दूरस्थ क्षेत्रों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में एकीकृत करने में मदद की और भारत के विकास को एक नया आधार दिया।
     
    नीति और शासन के अलावा, अटल जी का सबसे बड़ा योगदान भारत को एक सभ्यतागत लोकतंत्र के रूप में समझना था। उनका मानना था कि भारत की शक्ति उसकी विविधता, वाद-विवाद करने की क्षमता और एकता खोए बिना मतभेदों को आत्मसात करने की क्षमता में निहित है। उनका राष्ट्रवाद आत्मविश्वास से भरा था, लेकिन कभी भी बहिष्कारवादी नहीं था; दृढ़ होते हुए भी सहानुभूतिपूर्ण था।

    उत्तराखंड के लिए अटल जी की विरासत बेहद व्यक्तिगत और परिवर्तनकारी है। 9 नवंबर, 2000 को उत्तराखंड (तब उत्तरांचल) का शांतिपूर्ण गठन लोगों की लंबे समय से पोषित आकांक्षा की पूर्ति थी। यह महज प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था; यह राजनीतिक संवेदनशीलता और राष्ट्रीय दूरदर्शिता का महायज्ञ था क्यूँकि अटल जी समझते थे कि भूगोल शासन को आकार देता है, और जनमानस की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए आवश्यक है जन-जन के दिल की धड़कनों से जुड़ना ।
    उनकी प्रतिबद्धता राज्य बनने के साथ ही समाप्त नहीं हुई ;उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि नवगठित राज्य को विशेष दर्जा और आर्थिक विकास को गति देने के लिए एक समर्पित औद्योगिक पैकेज मिले। उत्तराखंड के आध्यात्मिक और पारिस्थितिक महत्व को पहचानते हुए, उनकी सरकार ने उत्तरकाशी जैसे क्षेत्रों में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष आर्थिक सहायता भी प्रदान की। ये निर्णय विकास के प्रति उनकी समग्र समझ को दर्शाते हैं – एक ऐसी समझ जो पारिस्थितिकी, संस्कृति और आजीविका का सम्मान करती है।

    उत्तराखंड के साथ अटल जी का रिश्ता नीतिगत संबंधों से कहीं बढ़कर था। उन्हें यहाँ के पहाड़ों, नदियों और आध्यात्मिक ऊर्जा से गहरा लगाव था। 1984 में चुनाव में हार के बाद उन्होंने हरिद्वार और गंगोत्री की पहाड़ियों में शरण ली और वहाँ की शांति से शक्ति प्राप्त की। बहुत कम नेता किसी क्षेत्र की आत्मा से इतनी गहराई से जुड़ पाते हैं।

    आज जब हम कहते हैं, "अटल जी ने बनाया, मोदी जी  संवारेंगे ," तो यह तुलना का नारा नहीं, बल्कि निरंतरता की अनुभूति  है। अटल जी द्वारा रखी गई कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा और राष्ट्रीय एकता की नींव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूत और विस्तारित किया जा रहा है। दूरदृष्टि की यह निरंतरता समावेशी और महत्वाकांक्षी विकास के प्रति भारतीय जनता पार्टी की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

     जन्म शताब्दी वर्ष, विशेष रूप से युवा भारतीयों के लिए, राजनीति को एक महान कर्तव्य के रूप में पुनः स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। अटल जी का जीवन यह सिखाता है कि नेतृत्व संख्या के बारे में नहीं, बल्कि दूरदर्शिता के बारे में है; टकराव के बारे में नहीं, बल्कि आम सहमति के बारे में है; व्यक्तिगत स्वार्थ के  बारे में नहीं, बल्कि उद्देश्यगत ईमानदारी के बारे में है।
     
    सार्वजनिक जीवन में रहने वालों के लिए, उनकी यात्रा इस बात की याद दिलाती है कि सत्ता को हमेशा जवाबदेही के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। राष्ट्र के लिए, यह इस विश्वास को मजबूत करता है कि प्रगति और मूल्य प्रतिस्पर्धी विचार नहीं हैं, बल्कि पूरक हैं।
     
    अटल बिहारी वाजपेयी जी ने एक बार लिखा था कि अंधेरे से डरना नहीं चाहिए क्योंकि यह केवल अपने भीतर ही जीवित रहता है। जैसे-जैसे भारत आत्मविश्वास और आकांक्षा के साथ आगे बढ़ रहा है, उनके शब्द और कार्य आगे के मार्ग को प्रशस्त करते रहेंगे।
     
    2025 में अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मशताब्दी वर्ष है । आइये! उस  दूरदर्शी नेता, कवि, वक्ता और रणनीतिकार को नमन करें जिन्होंने भारत को एक सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने  के लिए इतिहासिक और साहसिक निर्णय लिए और “भारत के सर्वश्रेष्ठ संसद सदस्य “ का मान अर्जित किया ।

    अटल जी का व्यक्तित्व आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता , मजबूत होते हुए भी करुणामय होने की भावना से प्रेरित था। वह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था, और यह आने वाले वर्षों में भी भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा।
     
    दीप जले, अंधेरा छटे,
    सत्य पथ पर देश बढ़े,
    अटल विचार, अटल संकल्प,
    युग-युग भारत का पथ गढ़े।
    — अटल बिहारी वाजपेयी

  • महाकाल मंदिर की भस्म आरती 31 दिसंबर को ऑफलाइन बुकिंग के लिए नहीं, दर्शन की व्यवस्था जारी

    उज्जैन
     ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 31 दिसंबर को भस्म आरती की ऑफलाइन बुकिंग व्यवस्था बंद रहेगी। भीड़ भरे दिनों में दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए 25 दिसंबर से पांच जनवरी तक ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था को पहले से ही ब्लाक कर दिया गया है। ऐसे में एक जनवरी को देश-विदेश से आने वाले दर्शनार्थियों को कार्तिकेय मंडपम से चलायमान दर्शन होंगे।

    कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नए साल 2026 के अवसर पर भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले दर्शनार्थियों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए दर्शन की व्यापक योजना बनाई गई है। 31 दिसंबर को भस्म आरती का ऑफलाइन पंजीकरण बंद रहेगा।

    एक जनवरी को दर्शनार्थियों को कार्तिकेय मंडपम से चलायमान दर्शन कराए जाएंगे। चलित भस्म आरती दर्शन का समय सुबह चार बजकर, 15 मिनट से रहेगा। भस्म आरती के बाद आम दर्शन का सिलसिला शुरू होगा। सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर से शक्तिपथ के रास्ते त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से महाकाल महालोक होते हुए मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से मंदिर के बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि चौराहा होते हुए पुन: चारधाम मंदिर पहुंचेंगे।

     

  • रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली का अंदेशा, 5 आईजी आईपीएस अधिकारियों के नाम पर हो रही चर्चा

     रायपुर
     रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अगले साल एक जनवरी को लेकर सरकार के भीतर मंत्रणा चल रही है। एक जनवरी को अगर ना भी हुआ तो उस दिन कम-से-कम नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। वैसे सरकार के लोगों की कोशिश है कि एक जनवरी से पुलिस के इस बड़े रिफार्म का आगाज हो जाए।

    हालांकि, एक जनवरी में टाईम काफी कम बच गया है। मुश्किल से हफ्ता भर समय है। किस प्रकार का पुलिस कमिश्नर सिस्टम होगा, इस पर भी अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। हालांकि, चाहेगी तो हफ्ता भर काफी है। अब ज्यादा लेट होने की गुंजाइश इसलिए नहीं है कि मुख्यमंत्री के ऐलान किए सवा साल से अधिका हो गया है। सीएम विष्णुदेव साय ने 15 अगस्त 2024 के भाषण में पुलिस कमिश्नर सिस्टम शुरू करने की घोषणा की थी। उनके ऐलान के बाद काफी वक्त निकल चुका है। इसलिए, अब ज्यादा विलंब करने का प्रश्न नहीं उठता।

    छत्तीसगढ़ के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रारंभ करने चर्चाएं थीं मगर ऐन वक्त पर उसे टाल दिया गया। बाद में पता चला कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधयेक पारित कर एक्ट बनाया जाएगा। याने ओड़िसा की तरह काफी सशक्त पुलिस कमिश्नर प्रणाली बनाया जाएगा। किंतु उसके बाद विधानसभा का एक दिन का स्पेशल सत्र भी निकल गया और फिर शीतकालीन सत्र भी।

    रायपुर के फर्स्ट पुलिस कमिश्नर के लिए आईजी लेवल के पांच आईपीएस अधिकारियों के नाम चर्चाओं में हैं, उनमें पुलिस मुख्यालय में पोस्टेड अजय यादव, ब्रदीनारायण मीणा, बिलासपुर आईजी संजीव शुक्ला, दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग और सरगुजा आईजी दीपक झा का नाम प्रमुख है। हालांकि, महिला आईजी के तौर पर एक नाम नेहा चंपावत का भी है। उन्होंने एलएलबी करने के बाद यूपीएससी क्रैक किया। सरकार को अगर फर्स्ट पुलिस कमिश्नर के लिए महिला आईपीएस जंचेगी तो उन्हें मौका मिल सकता है। नेहा तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी हैं। एसपी के तौर पर उन्होंने सिर्फ एक जिला महासमुंद किया है। तेज महिलाएं पुलिस में सफल भी होती हैं, क्योंकि उनसे अकरण कोई हुज्जत नहीं करता। यद्यपि, रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा भी बेहतर चयन हो सकते हैं, मगर एसीबी और ईओडब्लू की जिम्मेदारियों के चलते सरकार शायद ही उनके नाम पर विचार करें। कोरबा में कुख्यात अपराधी का एककांउटर करने वाले सुंदरराज इस समय बस्तर आईजी हैं। नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के चलते उन्हें सरकार अभी टच नहीं करेगी।

    पांच नामों की चर्चा सबसे अधिक

    रायपुर पुलिस कमिश्नर के लिए वैसे पांच आईपीएस अधिकारियों की चर्चा सबसे अधिक है। अब सरकार नेहा चंपावत जैसा कोई नया प्रयोग कर चौंका दें तो बात अलग है। मगर इन नामों पर जोर ज्यादा है। चलिये बताते हैं इन पांचों आईपीएस अधिकारियों के बारे में कौन, किस-किस जिले में एसपी, आईजी रहे….

    1. अजय यादव

    2004 बैच के आईपीएस अजय यादव सात जिलों के एसपी रहे। नारायणपुर से उनकी कप्तानी शुरू हुई थी, इसके बाद कांकेर, बिलासपुर जांजगीर, दुर्ग, रायपुर में एसएसपी रहे। प्रोफाइल के हिसाब से देखें तो अजय यादव काफी मजबूत स्थिति में हैं। वे रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा को मिलाकर तीन पुलिस रेंज के आईजी रह चुके हैं। इसके अलावा पुलिस महकमे में नेक्स्ट टू डीजीपी इंटेलिजेंस चीफ की भी पोस्टिंग वे कर चुके हैं।

    2. बद्रीनारायण मीणा

    2004 बैच के आईपीएस बद्री नारायण मीणा छत्तीसगढ़ में नौ जिले के एसपी रह चुके हैं। बलरामपुर से उनकी कप्तानी का सफर प्रारंभ हुआ। इसके बाद कवर्धा, राजनांदगांव, जगदलपुर, कोरबा, बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़ और दुर्ग। बद्री चार पुलिस रेंज के आईजी रह चुके हैं। वे पहले आईपीएस अधिकारी होंगे, जो दुर्ग के साथ रायपुर के भी आईजी रहे। इसके बाद फिर बिलासपुर के आईजी बनाए गए। बिलासपुर के बाद उन्हें फिर दुर्ग आईजी का दायित्व सौंपा गया। याने तीन पुलिस रेंज में वे चार बार आईजी रहे। वे डेपुटेशन पर तीन साल तक आईबी में भी रहे।

    3. संजीव शुक्ला

    संजीव शुक्ला इस समय बिलासपुर पुलिस रेंज के आईजी हैं। वे पांच जिलों के पुलिस अधीक्षक रहे हैं। इनमें जशपुर, रायगढ़, राजनांदगांव, दुर्ग और रायपुर शामिल है। वे नक्सल प्रभावित इलाका कांकेर के डीआईजी भी रह चुके हैं।

    4. रामगोपाल गर्ग

    2007 बैच के आईपीएस रामगोपाल गर्ग सात साल सीबीआई में डेपुटेशन पर रहने के कारण ज्यादा जिलों के एसपी नहीं रह सके। दिल्ली जाने के बाद वे गरियाबंद के एसपी रहे। और जब लौटकर आए तो डीआईजी बन चुके थे। उन्हें अंबिकापुर पुलिस रेंज का प्रभारी आईजी बनाकर भेजा गया। वहां से फिर रायगढ़ का डीआईजी। फिर विधानसभा चुनाव के समय दुर्ग के एसएसपी बने। चुनाव के बाद दुर्ग के प्रभारी आईजी बने और फिर पिछले साल प्रमोशन होने पर वहीं आईजी बन गए। रामगोपाल का कैरियर बड़ा उतार-चढ़ाव वाला रहा। याने सरगुजा जैसे रेंज का आईजी रहने के बाद रायगढ़ का डीआईजी। इसके बाद दुर्ग का एसपी, फिर दुर्ग का प्रभारी आईजी, आईजी।

    5. दीपक झा

    2008 बैच के आईपीएस दीपक झा सात जिलों के एसपी रह चुके हैं। कोंडागांव से उनके कप्तानी का सफर प्रारंभ हुआ था, उसके बाद बालोद, महासमुंद, रायगढ़, जगदलपुर, बिलासपुर और फिर बलौदा बाजार। इसके बाद उन्हें नवगठित राजनांदगांव पुलिस रेंज का प्रभारी आईजी बनाया गया। पिछले साल उन्हें आईजी प्रमोट होने पर अंबिकापुर पुलिस रेंज के आईजी की जिम्मेदारी दी गई।

    नाम का पुलिस कमिश्नर

    पता चला है, एक जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रारंभ हो जाएगा। मगर इसके साथ यह भी जानकारी मिली है कि सोशल मीडिया और मीडिया में जो बातें चल रही हैं, उससे उलट सिर्फ नाम के लिए पुलिस कमिश्नर होगा। उसे प्रतिबंधात्मक धारा याने 151 के अलावा और कोई अधिकार देने के पक्ष में सिस्टम नहीं है।

    ओड़िसा सबसे बेस्ट

    देश में चूकि ओड़िसा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम ताजा लागू हुआ है, इसलिए उसका सिस्टम भी काफी तगड़ा है। ओड़िसा ने एक्ट बनाकर उसे क्रियान्वित किया है। लेकिन, छत्तीसगढ़ में एक वर्ग मध्यप्रदेश से ज्यादा अधिकार पुलिस कमिश्नर को देना नहीं चाहता। जाहिर है, एमपी में आईएएस लॉबी के तगड़े विरोध के चलते दंतविहीन पुलिस कमिश्नर सिस्टम बनाया गया, जिसका प्रदेश को कोई लाभ नहीं मिल रहा। वहां के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब ओड़िसा की तत्कालीन नवीन पटनायक सरकार द्वारा बनाए गए सिस्टम को फॉलो करने पर मंत्रणा कर रहे हैं।

    अंग्रेजी शासन काल से पुलिस कमिश्नर

    पुलिस कमिश्नर सिस्टम अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है। आजादी के पहले कोलकाता, चेन्नई और मुंबई जैसे देश के तीन महानगरों में लॉ एंड आर्डर को कंट्रोल करने के लिए अंग्रेजों ने वहां पुलिस कमिश्नर सिस्टम प्रभावशील कर रखा था। आजादी के बाद देश को यह वीरासत में मिली। चूकि बड़े महानगरों में अपराध बड़े स्तर पर होते हैं, इसलिए पुलिस को पावर देना जरूरी समझा गया। लिहाजा, अंग्रेजों की व्यवस्था आजाद भारत में भी बड़े शहरों में लागू रही। बल्कि पुलिस अधिनियम 1861 के तहत लागू पुलिस कमिश्नर सिस्टम को और राज्यों में भी प्रभावशील किया गया।

    कमिश्नर को दंडाधिकारी पावर

    वर्तमान सिस्टम में राज्य पुलिस के पास कोई अधिकार नहीं होते। उसे छोटी-छोटी कार्रवाइयों के लिए कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार, नायब तहसीलदारों का मुंह ताकना पड़ता है। दरअसल, भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के धारा 4 में जिले के कलेक्टरों को जिला दंडाधिकारी का अधिकार दिया गया है। इसके जरिये पुलिस उसके नियंत्रण में होती है। बिना डीएम के आदेश के पुलिस कुछ नहीं कर सकती। सिवाए एफआईआर करने के। इसके अलावा पुलिस अधिनियम 1861 में कलेक्टरों को सीआरपीसी के तहत कई अधिकार दिए गए हैं। पुलिस को अगर लाठी चार्ज करना होगा तो बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के वह नहीं कर सकती। कोई जुलूस, धरना की इजाजत भी कलेक्टर देते हैं। प्रतिबंधात्मक धाराओं में जमानत देने का अधिकार भी जिला मजिस्ट्रेट में समाहित होता है। कलेक्टर के नीचे एडीएम, एसडीएम या तहसीलदार इन धाराओं में जमानत देते हैं।

    तत्काल फैसला लेने का अधिकार

    महानगरों या बड़े शहरों में अपराध भी उच्च स्तर का होता है। उसके लिए पुलिस के पास न बड़ी टीम चाहिए बल्कि अपराधियों से निबटने के लिए अधिकार की भी जरूरत पड़ती है। धरना, प्रदर्शन के दौरान कई बार भीड़े उत्तेजित या हिंसक हो जाती है। पुलिस के पास कोई अधिकार होते नहीं, इसलिए उसे कलेक्टर से कार्रवाई से पहले इजाजत मांगनी पड़ती है। पुलिस कमिश्नर लागू हो जाने के बाद एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार पुलिस कमिश्नर को मिल जाएंगे। इससे फायदा यह होगा कि पुलिस विषम परिस्थितियों में तत्काल फैसला ले सकती है। हालांकि, इससे पुलिस की जवाबदेही भी बढ़ जाती है।

    शास्त्र और बार लायसेंस

    पुलिस कमिश्नर सिस्टम में पुलिस को धरना, प्रदर्शन की अनुमति देने के साथ ही शस्त्र और बार का लायसेंस देने का अधिकार भी मिल जाता है। अभी ये अधिकार कलेक्टर के पास होते हैं। कलेक्टर ही एसपी की रिपोर्ट पर शस्त्र लायसेंस की अनुशंसा करता है। बार का लायसेंस भी कलेक्टर जारी करता है।

    मगर छत्तीसगढ़ में नहीं

    पुलिस कमिश्नर सिस्टम में उक्त सभी अधिकारी पुलिस को होते हैं मगर छत्तीसगढ़ में जो सिस्टम लागू होने जा रहा, वो सिर्फ रस्मी होगा। याने पुलिस कमिश्नर बनकर भी उसे एसपी से खास ज्यादा कोई अधिकार नहीं होगा। वो न तो बार का लायसेंस देखेगा और न ही शास्त्र लायसेंस। उसके पास जिला बदर के अधिकार भी नहीं होंगे।

  • 1 जनवरी से रायपुर की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव, पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होगी, अपराध नियंत्रण के लिए सरकार की नई रणनीति

    रायपुर 

    रायपुर में 1 जनवरी से पुलिसिंग का चेहरा पूरी तरह बदलने वाला है। छत्तीसगढ़ की राजधानी में नए साल की शुरुआत के साथ ही पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू कर दी जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर इसकी सभी जरूरी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस नई व्यवस्था के प्रभावी होते ही छत्तीसगढ़ देश का 18वां ऐसा राज्य बन जाएगा जहां पुलिस कमिश्नर सिस्टम काम करेगा। जानकारों का कहना है कि इस बदलाव के लिए मध्य प्रदेश के मॉडल का अध्ययन किया गया है लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार रायपुर की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस को कुछ अतिरिक्त अधिकार देने की तैयारी में है।

    कानून-व्यवस्था और कर्फ्यू जैसे फैसलों पर होगा सीधा नियंत्रण

    पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद राजधानी की सुरक्षा और शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह कमिश्नर के कंधों पर होगी। अब तक शहर में तनाव या आपात स्थिति के दौरान कर्फ्यू लगाने जैसे बड़े फैसलों के लिए जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी पड़ती थी। नई व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर खुद हालात का जायजा लेकर धारा 144 लागू करने या कर्फ्यू जैसे कड़े कदम उठाने का निर्णय ले सकेंगे। इससे किसी भी गंभीर स्थिति में कागजी कार्रवाई में होने वाली देरी कम होगी और पुलिस तुरंत कार्रवाई कर पाएगी।

    फुलप्रूफ व्यवस्था बनाने में जुटे अफसर

    अब एक बार फिर से रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके साथ ही गृह विभाग लगातार समीक्षा में जुटा है, ताकि नए सिस्टम में किसी तरह की कमी न रह जाए.  विभागीय सूत्र के अनुसार, मौजूदा SP–CSP पैटर्न पर जिले का स्टाफ पहले से ही भारी दबाव में है. इसलिए नई व्यवस्था में बड़े रैंक के अधिकारियों की तैनाती बेहद आवश्यक मानी जा रही है. अक्टूबर में सौंपी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था कि रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 500 से अधिक नए स्टाफ की नियुक्ति अनिवार्य होगी. इसके साथ ही कई विभागीय संरचनाओं में बदलाव, नई शाखाओं का गठन और ट्रैफिक व्यवस्था को पुनर्गठित करना भी जरूरी बताया गया है.

    अब जुलूस और धरना-प्रदर्शन की अनुमति भी मिलेगी पुलिस से

    प्रशासन ने तय किया है कि शहर में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों, रैलियों और धरना-प्रदर्शनों की अनुमति देने का अधिकार अब कलेक्टर के बजाय पुलिस कमिश्नर के पास होगा। अक्सर देखा जाता है कि प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल में समय लग जाता है। अब कमिश्नर ही यह तय करेंगे कि किस मार्ग पर जुलूस निकलेगा और कहां प्रदर्शन की अनुमति दी जाएगी। इससे शहर के यातायात प्रबंधन और आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखकर फैसले लेना आसान होगा।

    अपराधियों को जिला बदर करने और लाइसेंस जारी करने की नई शक्ति

    अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रेट स्तर की शक्तियां प्राप्त होंगी। अब पुलिस के पास आदतन अपराधियों को जिला बदर करने और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए सीधे अधिकार होंगे। इसके अलावा शस्त्र अधिनियम के तहत हथियारों के लाइसेंस जारी करने या किसी उल्लंघन की स्थिति में उन्हें रद्द करने का काम भी पुलिस मुख्यालय से संचालित होगा। इन कड़े अधिकारों के जरिए राजधानी में बढ़ते संगठित अपराध और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने की योजना तैयार की गई है।

    दंगों पर नियंत्रण और बल प्रयोग के लिए मिलेगी पूरी छूट

    आपातकाल या दंगों जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में बल प्रयोग से जुड़े फैसलों को लेकर पुलिस अब अधिक स्वतंत्र होगी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज या अन्य सुरक्षात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस को मौके पर ही फैसला लेने की छूट मिलेगी। प्रशासन का तर्क है कि रायपुर में बढ़ती आबादी और तेजी से होते शहरीकरण के कारण अपराधों का ग्राफ भी बदला है। पुलिस कमिश्नर सिस्टम आने से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ बढ़ेगा जिससे राजधानी अधिक सुरक्षित महसूस करेगी।

  • सिंहस्थ 2028: इंदौर शहर के मंदिरों में तैयारी, श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए व्यापक काम

    इंदौर 

     सिंहस्थ 2028 के दौरान इंदौर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर के प्रमुख मंदिरों में व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर और रणजीत हनुमान मंदिर में बुनियादी ढांचे और दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाने वाले हैं। जिला कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं इन विकास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और मंदिर समितियों के साथ मिलकर रूपरेखा तैयार कर चुके हैं।

    खजराना में प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों के दर्शन की व्यवस्था बनेगी

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह का चांदी का द्वार दोनों तरफ से 3-3 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके साथ ही सभा मंडप की ऊंचाई को 3 फीट कम किया जाएगा ताकि पीछे खड़े भक्तों को भी भगवान के स्पष्ट दर्शन हो सकें। मंदिर प्रशासन के अनुसार पीछे के मंगल हॉल को स्थायी रूप से पक्का किया जा रहा है जिससे भक्त एक साथ चार लाइनों में लग सकेंगे। इन बदलावों के बाद कितनी भी भीड़ हो, भक्तों को अधिकतम आधे घंटे में दर्शन प्राप्त हो सकेंगे। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्ट ने बताया कलेक्टर और प्रबंध समिति अध्यक्ष शिवम वर्मा, प्रशासक दिलीप यादव व पुजारी, भक्तों की उपस्थिति में चर्चा कर इन बदलावों पर निर्णय हुआ है। अधिकारी मौका मुआयना करने वाले हैं, इसके बाद काम शुरू हो जाएगा। मंदिर समिति का लक्ष्य है कि पीक ऑवर्स के दौरान भी प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन कराए जा सकें।

    रणजीत हनुमान मंदिर बनेगा भव्य रणजीत लोक
    शहर का ऐतिहासिक रणजीत हनुमान मंदिर अब महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस रणजीत लोक का काम इंदौर स्मार्ट सिटी को सौंपा गया है। विकास कार्यों के तहत मुख्य मंदिर परिसर को सामने की ओर 40 फीट आगे बढ़ाया जाएगा। मंदिर की छत पर विशेष कशीदाकारी (नक्काशीदार पत्थर) का काम होगा। बाउंड्रीवॉल पर 'सुंदरकांड' के प्रसंगों को चित्रों और कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा जाएगा। मंदिर परिसर में एक अत्याधुनिक पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम (शिशु आहार कक्ष) और बुजुर्गों के लिए रैंप व विशेष जूता स्टैंड बनाए जाएंगे। पूरे परिसर में 'डायनेमिक फसाड लाइटिंग' का उपयोग होगा, जो विशेष त्योहारों पर रंग बदल सकेगी। मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने बताया कि रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि लंका विजय के बाद भगवान राम ने स्वयं हनुमान जी को रणजीत नाम दिया था। 

    सिंहस्थ-2028 में हर दिन 2 लाख से अधिक श्रद्धालु इंदौर आएंगे
    कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन जाने वाले श्रद्धालु अनिवार्य रूप से इंदौर भी आते हैं, इसीलिए मंदिर प्रबंध समितियों की बैठकों में इन स्थायी व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का अनुमान है कि सिंहस्थ के दौरान इंदौर में प्रतिदिन 2 से 5 लाख अतिरिक्त श्रद्धालु रुकेंगे। इंदौर में हो रहे ये सभी निर्माण कार्य केवल सिंहस्थ के लिए नहीं, बल्कि स्थायी संपत्ति के रूप में किए जा रहे हैं। 

     

  • मध्‍यप्रदेश पुलिस ने विगत एक सप्ताह में लूट व चोरी की बड़ी वारदातों का किया खुलासा

    68 लाख रूपए से अधिक की संपत्ति बरामद

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पिछले एक सप्ताह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में लूट, चोरी तथा संगठित अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाइयाँ की गई हैं। हैं। इन कार्रवाइयों में पुलिस ने त्वरित विवेचना, तकनीकी विश्लेषण एवं सशक्त मुखबिर तंत्र के माध्यम से आरोपियों को गिरफ्तार कर 68 लाख रूपए से अधिक मूल्य की संपत्ति बरामद की है।

    जिलेवार प्रमुख कार्रवाइयाँ
    सीहोर

    थाना शाहगंज पुलिस ने बिजली कंपनी से चोरी हुए लोहे के पोल और पाइप बरामद कर 90 हजार रूपए की संपत्ति जब्त की। इसी प्रकार थाना जावर पुलिस ने ग्राम कजलास की चोरी का खुलासा करते हुए 30 तोला सोना, 3 किलो चांदी और 2 लाख रूपए नगद सहित लगभग 48 लाख रूपए की संपत्ति जब्‍त की है।

    ग्वालियर
    थाना कम्पू पुलिस ने शराब कारोबारी के मुनीम से हुई लूट की घटना का खुलासा कर चार बदमाशों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने लूटी गई 1 लाख 70 हजार रूपए की राशि और घटना में प्रयुक्त कार जब्‍त की।

    विदिशा
    थाना कोतवाली पुलिस ने दुकान में चोरी के प्रकरण में एक आरोपी एवं एक विधि विरुद्ध बालक को अभिरक्षा में लिया। टीम ने 11 बैटरियाँ, एक ऑटो समेत 2 लाख 64 हजार रूपए की संपत्ति जब्त की। इसके अतिरिक्‍त शहर के राम जानकी मंदिर, शंकर नगर और मुखर्जी नगर क्षेत्रों में हुई चोरियों का भी खुलासा किया गया। 130 से अधिक सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण और पूछताछ के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चांदी के आभूषण, नगदी और मोटरसाइकिल सहित कुल 3 लाख 75 हजार की संपत्ति जब्‍त की है।

    टीकमगढ़
    थाना बमोरीकला पुलिस ने मात्र 24 घंटे में चोरी की वारदात का खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया तथा 4 लाख 54 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की।

    बुरहानपुर
    थाना नेपानगर पुलिस ने बिजली के एल्युमिनियम तार चोरी करने वाले शातिर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों से 2 लाख 50 हजार रूपए के तार और घटना में प्रयुक्त अर्टिगा कार सहित कुल 6 लाख 50 हजार रूपए की संपत्ति जप्त की है।

    इन सभी कार्रवाहियों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश पुलिस अपराधियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्य कर रही है। पुलिस की सक्रियता, तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई के कारण आमजन की सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

  • सरकार के 2 वर्ष पूर्ण होने पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री ने की पत्रकारों से चर्चा

    भोपाल
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अब तक 9508 मेगावॉट क्षमता हासिल की जा चुकी है। भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2025 में 5.72 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में मध्यप्रदेश देश में छठवें स्थान पर है। इसमें अब तक 76 हजार घरों पर 292 मेगावॉट के सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किये जा चुके हैं। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने यह बात मध्यप्रदेश सरकार के विकास और सेवा के 2 वर्ष पूर्ण होने पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में कही। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विगत 2 वर्ष बेमिसाल रहे हैं।

    मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि विगत 2 वर्षों में राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा नीति-2022 एवं यथा पुनरीक्षित मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा नीति-2025 लागू की है। मध्यप्रदेश में बॉयो-फ्यूल प्रोजेक्ट एवं पम्पड् हाइड्रो स्टोरेज को बढ़ावा देने के लिये मध्यप्रदेश बॉयो-फ्यूल क्रियान्वयन स्कीम-2025, मध्यप्रदेश पम्पड् हाइड्रो स्टोरेज क्रियान्वयन स्कीम-2025 लागू की गई। प्रदेश में आगर-शाजापुर-नीमच में 1045 मेगावॉट क्षमता का सौर पार्क स्थापित किया गया है। इसके साथ ही ओंकारेश्वर में विश्व की सबसे बड़ी 278 मेगावॉट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना स्थापित की गई।

    मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के वर्ष 2030 में 500 गीगावॉट के निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर कार्य कर आगे बढ़ रहा है। आगर में 550 मेगावॉट का सोलर पार्क और शाजापुर में 450 मेगावॉट का सोलर पार्क स्थापित किया जा चुका है। नीमच में 500 मेगावॉट के सोलर पार्क की स्थापना का कार्य प्रगतिरत है। प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महा-अभियान घटक (स) अंतर्गत 14 हजार 500 मेगावॉट के 550 प्रस्ताव प्राप्त हुए। इनमें 4 हजार 500 मेगावॉट का क्रियान्वयन भी शुरू हो गया है। मंत्री श्री शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में ग्रिड प्रबंधन व दिन के समय सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिये अनेक नवाचार किये जा रहे हैं।

    मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसान अन्नदाता होने के साथ अब ऊर्जादाता भी बन रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महा-अभियान घटक-ब (पीएम कृषक मित्र योजना) में अब तक 21 हजार 129 किसानों को लाभान्वित कर सोलर पम्प स्थापित किये जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि समस्त पात्र किसानों को आगामी 3 वर्षों में सोलर पम्प से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में 50 हजार सोलर पम्प स्थापनाधीन हैं।

    मंत्री श्री शुक्ला ने बताया कि प्रदेश के समस्त शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के 47 जिलों के 1500 शासकीय भवनों पर 70 मेगावॉट क्षमता के सोलर प्रोजेक्ट स्थापित करने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा-अभियान (पीएम जन-मन) में अब घर अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए 2060 पीवीटीजी घरों में सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किये जाने का कार्य चल रहा है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा एवं उत्थान महा-अभियान घटक-अ में प्रदेश में 1790 मेगावॉट क्षमता के सोलर प्रोजेक्ट की स्थापना का कार्य चल रहा है। इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है।

    मंत्री श्री शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में भविष्य की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए ऊर्जा भण्डारण के क्षेत्र में भी कार्य किया जा रहा है। इस दिशा में मुरैना सोलर पॉवर प्लस स्टोरेज प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण है। इस प्रोजेक्ट में 440 मेगावॉट की ऊर्जा क्षमता हासिल की जायेगी। यह प्रदेश की प्रथम ऊर्जा भण्डारण परियोजना है। इसमें प्राप्त होने वाली प्रति यूनिट दर देश में सबसे कम ऐतिहासिक रूप से मात्र 2 रुपये 70 पैसे प्रति यूनिट है। पत्रकार वार्ता में अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव और एमडी ऊर्जा विकास निगम श्री अमनबीर सिंह बैंस ने भी पत्रकारों के सवालों के जवाब दिये।

     

  • ग्रामीण स्वास्थ्य को मजबूती: धार में देश का पहला PPP मॉडल मेडिकल कॉलेज शुरू, बढ़ेगी MBBS डॉक्टरों की पहुंच

    धार
    देश के पहले पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) माडल के मेडिकल कालेज का भूमि पूजन मंगलवार को धार में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि धार का यह मेडिकल कालेज देश में अपनी तरह का पहला संस्थान है, जो निजी जन-भागीदारी से बनाया जा रहा है। यह केवल एक भवन नहीं होगा, बल्कि यहां से तैयार होकर एमबीबीएस डॉक्टर गांव-गांव तक सेवाएं देंगे।

    चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता
    चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता यही है कि अधिक से अधिक मेडिकल कालेज खोलने के चक्कर में मेडिकल कालेजों की स्थिति भी इंजीनियरिंग और नर्सिंग कॉलेजों जैसी न हो जाए। गुणवत्ता के लिए सबसे जरूरी फैकल्टी (प्राध्यापक, सह प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक) हैं, पर इस वर्ष प्रारंभ हुए श्योपुर और सिंगरौली मेडिकल कालेज मात्र 10 प्रतिशत फैकल्टी के सहारे चल रहे हैं।
     
    116 पदों में से 12 ही पदस्थ
    फैकल्टी की कमी से नुकसान मात्र विद्यार्थियों का ही नहीं बल्कि मरीजों को भी उठाना पड़ रहा है। मेडिकल कालेज के नाम पर आसपास के जिला अस्पतालों से रोगियों को मेडिकल कालेज रेफर किया जाता है, पर सुविधाओं के अभाव में उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पाता है। फैकल्टी की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिंगरौली में फैकल्टी के 116 पदों में से 12 यानी 10 प्रतिशत ही पदस्थ हैं।

  • उम्मीद की जीत: मौत के मुहाने से लौटे मरीज को AIIMS Bhopal के डॉक्टरों ने दी नई ज़िंदगी

    भोपाल
    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के विशेषज्ञों ने एक 35 वर्षीय मरीज की अत्यंत जटिल सर्जरी कर उसे नया जीवन प्रदान किया है। यह मरीज पिछले आठ महीनों से पेट के असहनीय दर्द से जूझ रहा था और कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी उसे राहत नहीं मिली थी।

    जानलेवा थी बीमारी, महाधमनी में सूजन
    एम्स में हुई जांच में सामने आया कि मरीज ''सुप्रा-रीनल एब्डामिनल एआर्टिक एन्यूरिज्म'' नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था। इसमें पेट की महाधमनी (शरीर की सबसे बड़ी रक्त नली) में खतरनाक सूजन आ गई थी। यह सूजन आंतों और दोनों किडनियों को रक्त पहुंचाने वाली प्रमुख धमनियों तक फैल चुकी थी। स्थिति इतनी नाजुक थी कि मरीज की बाईं किडनी ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया था। यदि समय रहते सर्जरी न होती, तो महाधमनी के फटने से मरीज की जान जा सकती थी।

    छाती और पेट के रास्ते हुई सर्जरी
    सीटीवीएस विभाग के प्रमुख डॉ. योगेश निवारिया के नेतृत्व में यह मैराथन सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने पेट और छाती के हिस्से से चीरा लगाकर ऑपरेशन शुरू किया। प्रक्रिया के दौरान सूजनग्रस्त महाधमनी को हटाकर उसकी जगह ग्राफ्ट (कृत्रिम रक्त नली) लगाई गई। साथ ही खराब हो चुकी बाईं किडनी को शरीर से अलग किया गया। सर्जरी का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा दाईं ओर की स्वस्थ किडनी और आंतों की प्रमुख धमनियों को ग्राफ्ट में फिर से जोड़ना (प्रत्यारोपित करना) था, जिसे टीम ने बखूबी अंजाम दिया।

    विशेषज्ञों की टीम का समन्वय
    सर्जरी के बाद मरीज को कुछ दिन आईसीयू में निगरानी में रखा गया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। इस सफलता में डॉ. निवारिया के साथ डॉ. एम किशन, डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव, डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. विक्रम वट्टी और डॉ. आदित्य सिरोही शामिल थे। इसके अलावा यूरोलाजी विभाग से डॉ. माधवन, डॉ. केतन मेहरा, एनेस्थीसिया से डॉ. हरीश और सर्जिकल आन्कोलाजी से डॉ. अंकित जैन का विशेष सहयोग रहा।

     

  • कोलार क्षेत्र को मिली बड़ी राहत: बच्चों के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे इलाज, अब भर्ती भी संभव

    भोपाल
    कोलार और आसपास के रहवासियों को अब बीमार बच्चों को इलाज के लिए बड़े अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलार में बच्चों के लिए 24 घंटे उपचार और भर्ती की सुविधा शुरू की जाएगी। यह निर्देश सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने मंगलवार को अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान दिए।

    हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की मानिटरिंग के निर्देश
    डॉ. शर्मा ने प्रसूति वार्ड, ओपीडी, पोषण पुनर्वास केंद्र और न्यूबार्न स्टेबलाइजेशन यूनिट का जायजा लिया। उन्होंने संस्था प्रभारी को स्पष्ट किया कि अस्पताल में अब शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो चुकी है। इसलिए केवल डे-केयर (दिन में इलाज) तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर बच्चों को वार्ड में भर्ती कर इलाज करें। उन्होंने निर्देश दिए कि केवल अति गंभीर स्थिति में ही बच्चों को हमीदिया या अन्य उच्च संस्थानों में रेफर किया जाए।
     
    गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग
    निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ ने भर्ती प्रसूता महिलाओं से भोजन और इलाज का फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क (उच्च जोखिम) वाली गर्भवती महिलाओं की संभावित डिलीवरी डेट से पहले पूरी जांच की जाए, ताकि समय रहते जटिलताओं को रोका जा सके।

    हाल ही में पकड़ में आए अटेंडेंस फर्जीवाड़े के बाद सीएमएचओ ने कोलार अस्पताल के स्टाफ की बैठक में कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक कहा कि डाक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक, सभी को ओपीडी समय पर आना होगा। उपस्थिति केवल 'सार्थक ऐप' के जरिए ही मान्य होगी और उसी आधार पर वेतन आहरित किया जाएगा। साथ ही मरीजों और परिजनों से व्यवहार में शालीनता बरतने की हिदायत दी गई। शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

     

  • राज्यपाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना की हितग्राही के घर ग्रहण किया भोजन

    राज्यपाल श्री पटेल ने सिकल सेल जांच शिविर में कहा

    भोपाल 
    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक एक भी बच्चा आनुवंशिक सिकल सेल रोग के साथ जन्म नहीं ले, यह संकल्प लिया है। सिकल सेल को खत्म करने में जन और जन प्रतिनिधि को सरकार का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज का सेवा भाव अत्यंत आनंददायी होता है। रोगियों के पोषण और अन्य जरूरतों में सहयोग मानवता की उत्तम सेवा है। राज्यपाल श्री पटेल खरगोन जिले के कसरावद के ग्राम पानवा में आयोजित सिकल सेल जांच शिविर को संबोधित कर रहे थे।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल रोग को खत्म करने के लिए जागरूकता का प्रसार जरूरी है। सिकल सेल के रोगियों को ठंडे पानी से नहाने और तैलीय खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए, नियमित दवा के सेवन के साथ व्यायाम करना और अधिक पानी पीना चाहिए। डिजिटल कार्ड का मिलान करने के बाद ही विवाह तय किए जाएँ। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 89 पेसा समितियों द्वारा जन जागरुकता के कार्य किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में आम जन और जनप्रतिनिधियों को आगे बढ़कर सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि खरगोन जिले में 10 लाख व्यक्तियों की सिकल सेल स्क्रीनिंग सराहनीय उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील प्रधानमंत्री श्री मोदी की निर्धन और जनजातीय वर्ग के लिए संवेदनशीलता का परिणाम पीएम आवास योजना, बिरसा मुंडा धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना, पीएम जनमन योजना है। सरकार योजनाबद्ध रूप से योजनाओं पर कार्य कर रही है। नागरिकों को भी प्रयास करना होगा कि उनके आसपास के शासकीय योजनाओं के पात्रों को अनिवार्य रूप से लाभ मिले।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने शासन की विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं सिकल सेल पेंशन प्रमाण पत्र, आयुष्मान कार्ड, निक्षय मित्र आहार किट, जाति प्रमाण पत्र, नवनिर्मित पीएम आवास की चाबी, लाड़ली लक्ष्मी योजना प्रमाण पत्र आदि के हितलाभ वितरित किए।

    राज्यपाल श्री पटेल ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर में सिकल सेल स्क्रीनिंग, टीबी जांच, कुष्ठ जांच, बीपी, शुगर और हीमोग्लोबिन जांच और औषधि वितरण सहित आयुष्मान कार्ड बनाने की सुविधा का अवलोकन किया और शिविर में किए गए पंजीयन और जांच की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत विभिन्न स्वसहायता समूहों द्वारा मैक्रम उत्पाद, महेश्वर हैंडलूम साड़ी, मिर्च मसाले, शहद, जैविक हल्दी और जैविक तुअर दाल, फूलबत्ती, चायपत्ती उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और समूह की दीदियों से उनके उत्पादों की विशिष्टता जानी। राज्यपाल के स्वागत में जनजातीय कार्य विभाग की छात्राओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को सांसद खरगोन श्री गजेंद्र सिंह पटेल, डीएटीसीसी सदस्य श्रीमती नंदा ब्रह्मणे ने भी संबोधित किया। सीईओ जिला पंचायत श्री आकाश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

    प्रधानमंत्री आवास हितग्राही के घर किया भोजन
    राज्यपाल श्री पटेल ने ग्राम पंचायत खलबुजुर्ग के प्रधानमंत्री आवास योजना हितग्राही श्रीमती अन्नूबाई और अशोक मेवाड़े के नवनिर्मित आवास में पारंपरिक निमाड़ी भोजन ग्रहण किया। राज्यपाल के आगमन पर मेवाड़े दंपत्ति ने पुष्प-वर्षा और ढोल-नगाड़े के साथ स्वागत किया। राज्यपाल को तिलक लगाकर, पारंपरिक धनुष-बाण भेंट किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनुबाई तंवर, कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल, निमाड़ रेंज पुलिस उप महानिरीक्षक श्री सिद्धार्थ बहुगुणा, पुलिस अधीक्षक श्री रविंद्र वर्मा, पूर्व विधायक कसरावद श्री आत्माराम पटेल, खलबुजुर्ग सरपंच सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

     

  • मानवीय दृष्टिकोण: शीतकालीन अवकाश में हाईकोर्ट सक्रिय, रेप पीड़िता को गर्भपात की इजाजत और DNA संरक्षण के निर्देश

    बिलासपुर

    रेप पीड़िता नाबालिग किशोरी के गर्भपात को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया है। शीतकालीन अवकाश के दौरान भी हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने विशेष सुनवाई करते हुए पीड़िता को गर्भपात की अनुमति प्रदान की। जस्टिस पी.पी. साहू ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल (मेकाहारा) एवं पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिए हैं कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में गर्भपात कराया जाए और भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखा जाए।

    मामला रायपुर जिले की 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी से जुड़ा है, जिसे आरोपी युवक ने प्रेमजाल में फंसाकर शादी का झांसा दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। परिजनों को तब संदेह हुआ जब किशोरी के पेट का आकार बढ़ने लगा। पूछताछ में किशोरी ने आपबीती बताई, जिसके बाद परिजन उसे चिकित्सक के पास लेकर गए। मेडिकल जांच में सामने आया कि किशोरी लगभग छह माह (करीब 25 सप्ताह) की गर्भवती है।

    इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पीड़िता ने अपने परिजनों के माध्यम से हाईकोर्ट में गर्भपात की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर को डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल और जेएनएम मेडिकल कॉलेज को नोटिस जारी कर मेडिकल बोर्ड गठित कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि गर्भपात से पीड़िता को कोई गंभीर चिकित्सकीय जोखिम नहीं है।

    मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शीतकालीन अवकाश के बावजूद विशेष पीठ का गठन कर सुनवाई की। जस्टिस पी.पी. साहू ने याचिका स्वीकार करते हुए गर्भपात की अनुमति प्रदान की। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म पीड़िता को यह अधिकार और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए कि वह स्वयं यह निर्णय ले सके कि वह गर्भावस्था जारी रखना चाहती है या उसे समाप्त करना चाहती है।

    भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने के भी दिए निर्देश

    हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि पीड़िता और उसके परिजन अस्पताल अधीक्षक, स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं संबंधित मेडिकल कॉलेज प्रशासन से समन्वय स्थापित कर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करें। गर्भपात की प्रक्रिया मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट, 1971 के प्रावधानों के तहत, दो पंजीकृत चिकित्सकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में कराई जाएगी। साथ ही, भविष्य में साक्ष्य के रूप में उपयोग के लिए भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।

    हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल कानूनन अहम है, बल्कि दुष्कर्म पीड़िताओं के अधिकार, गरिमा और मानसिक-शारीरिक सुरक्षा की दिशा में एक संवेदनशील और मानवीय पहल के रूप में देखा जा रहा है।