• मेट्रो अंतिम टेस्ट के लिए तैयार, टीम ने स्टेशन एरिया और सुरक्षा कमियों की ओर किया ध्यान

    भोपाल
     भोपाल की बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो नवंबर के आखिरी सप्ताह तक भोपाल मेट्रो पटरियों पर दौड़ती नजर आ सकती है। दरअसल, दिल्ली से आने वाली कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम अगले सप्ताह भोपाल मेट्रो का तीसरा और अंतिम निरीक्षण करने आने वाली है।

    यह परीक्षा मेट्रो प्रबंधन के लिए निर्णायक साबित होगी, क्योंकि इस रिपोर्ट के आधार पर ही ‘ओके टू रन’ की मंजूरी दी जाएगी। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भोपाल मेट्रो इस बार सुरक्षा मानकों पर खरी उतरकर राजधानीवासियों को नवंबर के अंत तक मेट्रो की सवारी का तोहफा दे पाएगी या फिर इंतजार और लंबा खिंचेगा।

    एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्य में जुटा

    गौरतलब है कि अक्टूबर में मेट्रो संचालन शुरू किया जाना था, लेकिन सीएमआरएस टीम के पिछले निरीक्षण के दौरान मेट्रो प्रबंधन परीक्षा में पास नहीं हो सका। उस समय सुरक्षा संबंधी कई खामियां सामने आई थीं। सूत्रों के अनुसार टीम ने यात्री सुरक्षा, स्टेशन एरिया, एंट्री और एग्जिट से जुड़ी कमियों की ओर ध्यान दिलाया था। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्यों में जुटा हुआ है।

    अब टीम द्वारा देखा जाएगा कि सुरक्षा मानकों पर मेट्रो प्रबंधन ने कितना सुधार किया है और क्या ट्रेन के संचालन के लिए सभी जरूरी मानक पूरे हो गए हैं या नहीं। बता दें कि एमपी मेट्रो के प्रबंध निदेशक एस. कृष्ण चैतन्य पूरी सक्रियता के साथ प्रायोरिटी कॉरिडोर के सभी मेट्रो स्टेशनों के कार्यों की समीक्षा और निरीक्षण कर रहे हैं।मंगलवार और बुधवार उन्होंने मैदान में उतरकर चल रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और सीएमआरएस से जुड़े बिंदुओं पर विशेष रूप से रिव्यू किया।
    मैदानी कार्य पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया

    प्रायोरिटी कॉरिडोर पर नहीं शुरू हुआ मैदानी कार्य सूत्रों की मानें तो प्रायोरिटी कॉरिडोर पर अभी भी मैदानी कार्य पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। सामान्यत: यह काम तब शुरू किए जाते हैं, जब परियोजना के सभी तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े कार्य पूरे हो जाएं। ऐसे में इस बार भी मेट्रो के संचालन की मंजूरी मिल पाएगी या नहीं, यह फिलहाल संशय में है।
    अक्टूबर में संचालन शुरू नहीं होने पर हुई थी किरकिरी

    अक्टूबर में समय पर मेट्रो शुरू न होने से एमपी मेट्रो प्रबंधन की काफी किरकिरी हो चुकी है। यही कारण है कि एमडी एस. कृष्ण चैतन्य अब भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं और पूरी तैयारी के साथ सीएमआरएस परीक्षा पास करने पर फोकस कर रहे हैं। इस मामले में भी उन्होंने चुप्पी साध रखी है।

  • लाड़ली बहना योजना में बड़ा अपडेट: हजारों महिलाओं के नाम हटाए गए, 1,500 रुपए नहीं मिलेंगे

    भोपाल 
     मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत दतिया जिले की 1,44,204 महिलाओं के बैंक खातों में मध्यप्रदेश सरकार ने अक्टूबर माह में 21 करोड़ 25 लाख 29 हजार 200 रुपए की राशि ट्रांसफर की। यह राशि प्रति महिला 1,500 रुपए के मान से दी गई। लेकिन इसी माह जिले की 2,949 लाड़लियों के नाम योजना की सूची से बाहर कर दिए गए।

    इनमें 452 महिलाओं ने स्वयं आवेदन देकर योजना का लाभ छोडने की इच्छा जताई, 2,196 महिलाए 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर अपात्र हो गई, जबकि 301 महिलाएं मृत पाई गई, जिनके नाम स्वाभाविक रूप से हटाए गए। अगर मृतक महिलाओं को छोडकर शेष 2,648 महिलाएं योजना में बनी रहतीं, तो सरकार को ?39 लाख 72 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता।

    योजना से वंचित महिलाओं की परेशानी

    जिले में 50 हजार महिलाएं ऐसी हैं जो लाड़ली बहना योजना में अपना नाम जुड़वाने के लिए प्रयासरत हैं। ये महिलाएं बैंक खाते में त्रुटि, आधार या समग्र आईडी लिंक न होने तथा दस्तावेज सत्यापन में देरी और पात्रता जांच की जटिल प्रक्रिया जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं।

    नहीं जुड़ा पा रही नाम

    शहर के वार्ड क्रमांक 17 निवासी 48 वर्षीय शारदा देवी ने बताया कि वे पिछले एक साल से योजना में नाम जुड़वाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन दसतावेजों में कोई न कोई त्रुटि होने से नाम नहीं जुड़ पा रहा। ठंडी सडक़ निवासी 42 वर्षीय वैजयंती कुशवाह ने बताया कि घर से बार-बार निकल नहीं पाते। एक साल में करीब चार बार नाम जुड़वाने का प्रयास किया लेकिन जुड़ नहीं पाया।

    योजना से और भी महिलाओं के नाम हो सकते हैं बाहर

    लाड़ली बहना योजना की पात्रता जांच अब और सख्त हो रही है। विभागीय समीक्षा के अनुसार, जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो चुकी है या जिनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, उन्हें योजना से बाहर किया जा रहा है।

    यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से वित्तीय पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे ग्रामीण क्षेत्रों की कई महिलाओं पर सीधा असर पड़ेगा जो अभी भी योजना के सहारे घरेलू खर्च चला रही थीं। अगले कुछ महीनों में यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि दिसंबर-जनवरी में पात्रता की नई समीक्षा प्रस्तावित है।
    जारी है समीक्षा

    योजना से जुड़ी पात्रता की समीक्षा निरंतर जारी है। 60 वर्ष की आयु या मृत्यु की स्थिति में लाभ स्वतः समाप्त कर दिया जाता है।- अरविंद उपाध्याय, जिला कार्यकम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग दतिया

  • मुख्यमंत्री ने 22 नई इकाइयों का लोकार्पण और 4 प्रमुख परियोजनाओं का किया भूमिपूजन

    साइंस सिटी प्रोजेक्ट के लिये 25 एकड़ भूमि होगी आवंटित
    मध्यप्रदेश, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का बनेगा हब
    15 हजार 896 करोड़ का निवेश और 64 हजार से अधिक के रोजगार के अवसर
    प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत में तकनीकी विकास का प्रारंभ हुआ स्वर्णिम युग
    एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव में उद्योगपतियों ने निवेश के प्रति जताई रूचि

    भोपाल 
    एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अब अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक नई उड़ान भरने जा रहा है। हम बहुत जल्द स्पेस टेक पॉलिसी-2025 लागू करने जा रहे हैं, जिससे राज्य में सैटेलाइट डेटा, रिमोट सेंसिंग और स्पेस स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन मिलेगा। भोपाल में 2000 एकड़ भूमि पर नॉलेज एण्ड एआई सिटी विकसित की जायेगी। यह सिटी आधुनिक हाईटेक सिटी और सायबर सिटी की तर्ज पर बनाई जायेगी। यहां विश्वस्तरीय संस्थान, अनुसंधान केन्द्र और स्टार्ट-अप्स एक साथ आएंगे जिससे मध्यप्रदेश भारत का एआई हब बन जायेगा। साइंस सिटी प्रोजेक्ट के लिये 25 एकड़ भूमि आवंटित्‍की जा रही है। यहां विज्ञान, नवाचार, और तकनीकी अनुसंधान के लिये अत्याधिक सुविधाएं विकसित की जायेंगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में हमारे युवाओं और विद्यार्थियों के लिये ज्ञान और प्रयोग का केन्द्र बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेन्टर में आयोजित मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में शामिल निवेशकों को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में तकनीकी विकास का स्वर्णिम युग प्रारंभ हुआ है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र को नई गति देने के लिये मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 का आयोजन इंदौर में किया है। यह आयोजन प्रदेश को भारत में उभरते टेक्नालॉजी मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने में की दिशा में ऐतिहासिक कदम सिद्ध हुआ है। राज्य सरकार की प्रगतिशील नीतियां, सुदृढ़ बुनियादी ढांचा, निवेश अनुकूल वातावरण और कुशल मानव संसाधन ने मध्यप्रदेश को ग्लोबल निवेशकों के लिये आकर्षण का केन्द्र बना दिया है। आईटी, एआई, सेमी कंडक्टर, ड्रोन, फिनटेक, क्लाउड और इएसबीएम जैसे क्षेत्रों में प्रदेश की प्रगति तीव्र गति से हो रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्दौर में मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में कुल 68 कार्य हुए जिनमें उद्घाटन, भूमि-पूजन, आवंटन-पत्र वितरण, एग्रीमेंट, एमोयू, नीति एवं पोर्टल लॉन्च सहित उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग हुई। इनसे प्रदेश में कुल 15 हजार 896 करोड़ का निवेश आएगा साथ ही 64 हजार 85 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह आयोजन प्रदेश की तकनीकी और औद्योगिक प्रगति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्वेस्टर्स समिट से अप्रेल 2025 में हुए टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 1.0 तक लगभग 99 निवेश प्रस्ताव हुए थे, जिससे लगभग 34 हजार करोड़ रूपये के निवेश और 2 लाख लोगों के लिये रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। इसमें 27 प्रोजेक्ट, जमीन आवंटन के साथ अन्य कार्यप्रगतिरत है। साथ ही 8 प्रोजेक्ट साइट विजिट के चरण में है, जो प्राप्त प्रस्तावों का 47 प्रतिशत है। मात्र 8 महिने में लगभग 6 हजार करोड़ का निवेश एवं 50 हजार लोगों का रोजगार का सपना साकार हुआ है। यह मध्यप्रदेश की टेक ड्रिवन ग्रोथ का सकारात्मक परिणाम है।

    9 कंपनियों को प्रदाय किए भूमि आवंटन के आशय-पत्र
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में निवेश और उद्योग संवर्धन लिए 9 कंपनियों को भूमि आवंटन के लिये आशय पत्र जारी किए गए। इन इकाइयों से प्रदेश में कुल 10.61 करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 740 नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। इन आशय पत्रों से विभिन्न टेक्नोलॉजी, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कंपनियों को निवेश के लिए आवश्यक भूमि और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँगे जिससे मध्यप्रदेश में उद्यमिता और औद्योगिक विकास को और मजबूती मिलेगी। टॉस, इजीसॉफ्ट कंपनी, ओम्निस बिल्डकेयर एलएलपी, फ्लैट ट्रेडब्रोकिंग सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, असिस्ट क्लिक प्राइवेट लिमिटेड, लॉजिमोंक, मैमथ एग्जॉस्ट्स इंडिया, एमपी ऑनलाइन, रिद्धि एंटरप्राइज को भूमि आवंटन पत्र जारी किए गए हैं।

    एमओयू पर हस्ताक्षर
    कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश में निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में 7 महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इन एमओयू से प्रदेश में लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश होगा तथा 10 हजार 500 से अधिक नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। ये एमओयू सिलिकॉन वेफर विनिर्माण संयंत्र, आईटी पार्क विकास, टेक्नोलॉजी रिसर्च, गेमिंग, स्किल डेवलपमेंट एवं नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों से जुड़े हैं। इस पहल में सोमवेदा एंटरप्राइज, डीएवीवी आईटी पार्क, एएनएसआर, गेम डेवलपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया, इंडस आंत्रप्रेन्योर्स राजस्थान, मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग महू, कोडयोगी फाउंडेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं।

    राज्य सरकार एवं भारतीय सेना के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के मध्य सायबर सुरक्षा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र और नागरिक तकनीकी क्षेत्र के बीच सहयोग को सुदृढ़ करते हुए अत्याधुनिक तकनीकों के विकास, नवाचार और कौशल वृद्धि को बढ़ावा देना है। यह पहल मध्यप्रदेश को उभरते तकनीकी क्षेत्रों में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

    निवेश के लिये हुए एग्रीमेंट
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में 85.51 करोड़ निवेश के महत्वपूर्ण एग्रीमेंट् पर हस्ताक्षर हुए। इसमें आईआईएसईआर भोपाल के सहयोग से एआई-संचालित ड्रोन प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना शामिल है, जिसमें उन्नत प्रयोगशालाएँ और स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन सहायता प्रदान की जाएगी। एल एंड टी एड्यूटेक के साथ मिलकर प्रदेश में स्किल ट्रेनिंग हेतु मास्टर सर्विस एग्रीमेंट किया जाएगा, इससे नये तकनीकी क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके अंतर्गत एलएनसीटी कॉलेज, ओरिएंटल ग्रुप, बंसल कॉलेज, सेज यूनिवर्सिटी, आईईएस यूनिवर्सिटी शामिल हैं।

    सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने सीआईएसओ पोर्टल किया लांच
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरकारी विभागों में सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सीआईएसओ पोर्टल की शुरुआत की। यह सुरक्षित और केंद्रीकृत प्लेटफ़ॉर्म रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, थ्रेट इंटेलिजेंस और अनुपालन प्रबंधन को सक्षम बनाएगा, जिससे सरकारी प्रणालियों में सुरक्षा, पारदर्शिता और दक्षता में अभूतपूर्व सुधार होगा।

    ड्रोन डेटा रिपॉज़िटरी का हुआ शुभारंभ
    “डिजिटल मध्यप्रदेश” की परिकल्पना को सशक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव  ने ड्रोन डेटा रिपॉज़िटरी (DDR) का भी शुभारंभ किया। यह पहल भूमि प्रबंधन, शहरी नियोजन, वन संरक्षण, सिंचाई और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में ड्रोन-आधारित डेटा के उपयोग को बढ़ावा देगी, जिससे डेटा-संचालित शासन और स्मार्ट गवर्नेंस की नई मिसाल कायम होगी।

    स्पेस टेक नीति-2025 के मसौदे  का अनावरण
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को तकनीकी और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के विजन को साकार करते हुए मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2025 के मसौदे  का अनावरण  किया। यह नीति राज्य को भारत की स्पेस टेक अर्थव्यवस्था में अग्रणी स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, निवेश और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे एवं आर्थिक और वैज्ञानिक विकास को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करेंगे।

    22 नई इकाइयों का लोकार्पण
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य के औद्योगिक और तकनीकी विकास को नई गति प्रदान करते हुए 22 नई औद्योगिक, तकनीकी एवं नवाचार-आधारित इकाइयों का लोकार्पण किया। इनमें 257.46 करोड़ रुपये का निवेश होगा और लगभग 2125 नए रोजगार सृजित होंगे। ये अत्याधुनिक इकाइयाँ मुख्य रूप से इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर के आईटी पार्क में स्थापित की जायेंगी जिनमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, स्टार्ट-अप्स के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर, ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट तथा अन्य हाई-टेक कंपनियाँ शामिल हैं। इससे प्रदेश तकनीकी हब के रूप में उभरेगा और युवा उद्यमिता एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।

    4 प्रमुख परियोजनाओं का भूमि-पूजन
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में वर्चुअली 4 नई परियोजनाओं का भूमि-पूजन किया, जिनसे 1346.75 करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 21,150 नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। ये परियोजनाएँ इंदौर, भोपाल, जबलपुर एवं ग्वालियर में प्रमुख आईटी पार्क, ड्रोन टेक्नोलॉजी और ईएसडीएम क्षेत्र से जुड़ी हैं। एलटीआई इंडस्ट्री द्वारा 810 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर के सुपर कॉरिडोर में 10 एकड़ भूमि पर अत्याधुनिक आईटी टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग केंद्र स्थापित होगा, जिससे 10 हजार रोजगार सृजित होंगे। डीएनआर कॉर्पोरेशन द्वारा 524 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर के सुपर कॉरिडोर में स्टेट-ऑफ-द-आर्ट आईटी पार्क विकसित किया जाएगा। इससे 11 हजार रोजगार सृजित होंगे। मेसर्स इन्फिनी सेल्स कॉर्पोरेशन द्वारा भोपाल में 4 करोड़ रुपये की लागत से एलईडी विनिर्माण इकाई स्थापित होगी, जिससे 50 रोजगार सृजित होंगे। मेसर्स आरएआर इंजीनियरिंग द्वारा जबलपुर में 8.75 करोड़ रुपये की लागत से रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए इंटेलिजेंट मोशन और वाइब्रेशन कंट्रोल सिस्टम हेतु विनिर्माण हब स्थापित होगा, जिससे 100 रोजगार मिलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एलटीई माइंडट्री के श्री मनीष प्रजापति, डीएनआर कारपोरेशन के रितेश उमथ से वर्चुअली संवाद कर शुभकामनाएं दी।

    अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। स्वच्छ नगरी इंदौर में टेक्नोलॉजी के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। उद्योग जगत और सरकार के बीच सुगम संगम स्थापित हुआ है। अप्रैल माह में "एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 1.0" आयोजित कार्यक्रम ने नई दिशा दी थी, और आज का दिन इस यात्रा में एक और मील का पत्थर सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम विकास की नई संभावनाओं को साकार कर रहे हैं। कई महत्वपूर्ण अनुबंध आज धरातल पर उतर रहे हैं। एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 भारत की नई नीतियों में सेमीकंडक्टर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी के विकास को परिभाषित करने वाला एक महत्त्वपूर्ण मंच बन चुका है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने भारतीय सेना के साथ सायबर सुरक्षा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संयुक्त अनुसंधान एवं विकास के लिए एमओयू किया है। युवाओं को मध्यप्रदेश में रहकर विकास का हिस्सा बनना चाहिए।प्रदेश में रिवर्स ब्रेन ड्रेन का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है, जहाँ तकनीकी अवसंरचना, उत्पादकता और शांतिपूर्ण जीवनशैली बेहतर अवसर प्रदान कर रही है। ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस निवेश और विकास का निर्णायक कारक है। तीन टी—ट्रैफिक, ट्रैश और टॉक्सिक एयर से परे, मध्यप्रदेश देश के सबसे स्वच्छ शहर और स्वच्छतम राजधानी का गौरव रखता है। प्रदेश का औद्योगिक सेटअप निवेशकों, प्रोफेशनल्स और युवाओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है। मध्यप्रदेश राज्य तकनीकी क्षेत्र में नई सुविधाएँ उपलब्ध करा रहा है और निवेशकों एवं उद्योगपतियों के अनुकूल वातावरण निर्मित कर रहा है। 

    हाईटेक प्रदर्शनियाँ
    कॉन्क्लेव में हाई-स्पीड इलेक्ट्रॉनिक्स, एआर/वीआर, ब्लॉकचेन पब्लिक सर्विस, एग्री-ड्रोन एवं तकनीकी अनुसंधान जैसे क्षेत्रों की नवाचार झलकियाँ प्रदर्शित की गई। इंदौर भोपाल, एवं बड़वानी की कंपनियों द्वारा प्रदर्शित स्टॉल्स में हाइ स्पीड इलेक्ट्रॉनिक ड्राइव्स, एआर / वीआर (AR/VR)-बेस्ड टूरिज्म और फिजियोथेरेपी, पब्लिक सर्विस के लिए ब्लॉकचेन, एग्री ड्रोन, आईटी प्रोडक्ट और तकनीक की नई खोजों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। 

  • मप्र में जनजाति वर्गों को मिल रही गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं

    जेईई और नीट में हुआ चयन, मप्र देश में दूसरे स्थान पर

    भोपाल
    मध्यप्रदेश में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूल के जनजातीय विद्यार्थियों ने जेईई और नीट जैसी कठिन परीक्षाएं उत्तीर्ण कर मध्यप्रदेश को देश की रैंकिंग में दूसरे स्थान पर ला दिया है।

    वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश से जेईई मेंस में 51 विद्यार्थियों, जेईई एडवांस्ड में 10 और नीट में 115 विद्यार्थियों ने परीक्षा पास की। इससे देश में मध्यप्रदेश का स्थान दूसरे नंबर पर आ गया है। वर्ष 2022-23 तक इन परीक्षाओं में विद्यार्थियों के पास होने का आंकड़ा मात्र 2 था। स्पष्ट है कि शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई से अब इन शालाओं से ज्यादा से ज्यादा बच्चे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में पास हो रहे हैं।

    उल्लेखनीय है कि केंद्रीय आदिवासी कार्य मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश में 63 एकलव्य आदर्श आवासीय स्कूल संचालित है। देश में ऐसे 485 स्कूल है। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा 75 और तीसरे नंबर पर झारखंड में 51 स्कूल हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार के निर्देश दिए है। मध्यप्रदेश में शैक्षणिक सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं। जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा शैक्षणिक सुविधाएं मिल रही है। प्रदेश में 34,557 शैक्षणिक संस्थाएं हैं। इनमें प्राथमिक शालाओं की संख्या 12913, माध्यमिक शाला 6788, हाई स्कूल 788, 1109, उच्चतर माध्यमिक शाला 804, सांदीपनी विद्यालय 94, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय 63, माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिषद 82, आदर्श आवासीय विद्यालय 8, छात्रावास 1593, आश्रम 1078 और क्रीड़ा परिषद 25 शामिल है।

    अनुसूचित जनजाति वर्ग के कल्याण के लिए 2025-26 में 47296 करोड़ का बजट प्रावधान रखा गया है जो पिछले बजट की तुलना में 15.91% ज्यादा है।

    शैक्षणिक और प्रशासनिक संवर्ग सहित 4600 पदों की पूर्ति की जा रही है। जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को अध्ययन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य 139422 विद्यार्थियों को छात्रावास और आश्रम शालाओं में प्रवेश देकर 94% सीट क्षमता का उपयोग किया गया है।

    जनजाति वर्ग में सिकल सेल एनीमिया की समस्या पर नियंत्रण के लिए विभाग की संस्थाओं और छात्रावास में पढ़ रहे विद्यार्थियों के सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग निरंतर की जा रही है। अभी तक कुल 1,11,744 विद्यार्थियों की जांच की जा चुकी है।

    विद्यार्थियों को निरंतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित महाविद्यालय छात्रावास में मेस संचालन के लिए 10 माह के स्थान पर 12 माह की शिष्यवृत्ति स्वीकृत की गई है। इन समुदायों के युवाओं को रोजगारमूलक प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने के उद्देश्य में 10 परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र की स्वीकृति भारत सरकार से मिल गई है।

    भारत दर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत 125 छात्र एवं 126 छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। इस साल 300 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। विभाग द्वारा अनुबंधित नॉलेज पार्टनर संस्थाओं से जनजातीय कार्य विभाग की शैक्षणिक संस्थानों सांदीपनि आवासीय विद्यालयों में जीवन कौशल प्रशिक्षण एवं फंडामेंटल लिटरेसी-न्यूमैरेसी के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति के माध्यम से एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में 1806 शैक्षणिक स्टॉफ और 40 प्राचार्य की नियुक्ति की गई है। आकांक्षा योजना के अंतर्गत 841 मेधावी विद्यार्थियों को जेईई और नीट कोचिंग दी जा रही है।

    सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले जनजाति वर्ग के 1000 विद्यार्थियों को सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 2 करोड़ के प्रावधान राशि वितरित की गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 5 संभागों में परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र निर्माण को भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है।

     

  • ग्वालियर को स्मार्ट सिटी के रुप में पहचान मिलेगी : मंत्री तोमर

    मंत्री श्री तोमर ने किया 1.04 करोड़ के विकास कार्यों का भूमि-पूजन

    भोपाल 
    ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर गुरुवार को उप नगर ग्वालियर में 1.04 करोड़ से अधिक राशि की लागत से निर्मित होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। मंत्री श्री तोमर ने आसमानी माता मंदिर होटल क्लार्क इन के पास वार्ड क्रमांक-33 स्थित विभिन्न गलियों में एक करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले सीवर लाइन कार्य का भूमि-पूजन किया। आसमानी माता मंदिर होटल क्लार्क इन के पीछे 4 लाख रुपये लागत के नलकूप खनन कार्य का भी भूमि-पूजन किया। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि विकास की दिशा में यह कदम स्वच्छता, सुरक्षित जल और बेहतर जीवन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

     उन्होंने कहा कि ग्वालियर सांस्कृतिक, औद्योगिक और पर्यटन केन्द्र के रुप में विकसित हो रहा है। बीते कुछ समय में शहरी बुनियादी ढांचे के उन्नयन के साथ पर्यावरण से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिया गया है। शहर में चल रहीं विभिन्न विकास योजनाओं के पूरा होने से न केवल सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि ग्वालियर को स्मार्ट सिटी के रूप में नई पहचान मिलेगी।

    इस अवसर पर लवी खंडेलवाल, पार्षद श्रीमती सुनीता अरुण कुशवाह, पार्षद श्रीमती भावना कन्नोजिया, श्री भीकम खटीक, पूर्व पार्षद श्री चन्द्रू सेन, गिरजा शंकर शर्मा, रामशरण भदौरिया, जिला एवं नगर निगम प्रशासन, विद्युत वितरण कम्पनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

  • एसआईआर में सहयोग के लिये हेल्प डेस्क स्थापित

    मध्यप्रदेश निर्वाचन सदन भोपाल में मतदाताओं को मार्गदर्शन एवं सहयोग करेगी हेल्प डेस्क
    प्रदेश के सभी कलेक्टर्स एवं ईआरओ कार्यालय में भी प्रारंभ

    भोपाल 
    भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य किया जा रहा है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र श्री संजीव कुमार झा के निर्देश पर प्रदेश के मतदाताओं को एसआईआर में मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए मध्यप्रदेश निर्वाचन सदन भोपाल में हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टर तथा ईआरओ कार्यालय में हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हेल्प डेस्क पर आने वाले मतदाताओं को सही मार्गदर्शन एवं पूरा सहयोग किया जाना सुनिश्चित करें जिससे मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता से पूरा किया जा सके।

     

  • शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के शिक्षकों के भत्तों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रस्ताव करें तैयार: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    भर्ती प्रक्रिया, अधोसंरचना विकास एवं चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता सुधार के दिए निर्देश

    भोपाल
    उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, अधोसंरचना विकास परियोजनाओं, भर्ती प्रक्रिया तथा अस्पताल सेवाओं से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि विभाग में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करने के लिए पीईबी एवं मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से संचालित भर्ती प्रक्रियाओं को त्वरित और समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि भर्ती कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो और प्रत्येक चरण की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विभागीय अधोसंरचना विकास परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों, उपकरणों की स्थापना तथा नई स्वास्थ्य इकाइयों के क्रियान्वयन से संबंधित परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। यदि किसी भी स्तर पर तकनीकी या प्रशासनिक समस्या आती है तो उसे प्राथमिकता से अग्रेषित कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए, जिससे परियोजनाओं का समय पर निष्पादन हो सके और जनता को लाभ मिले।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अस्पतालों में ओ.पी.डी. में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को समय पर चिकित्सा परामर्श मिले, इसके लिए निर्धारित समय में चिकित्सकों की उपस्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों के शिक्षकों के भत्तों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट शिक्षकों की उपलब्धता और शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यह कदम आवश्यक है। इससे मेडिकल शिक्षा संस्थानों में दक्ष मानव संसाधन को बनाए रखने में सहायता मिलेगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव (वित्त) श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) श्री संदीप यादव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • उपभोक्ता आयोग का कड़ा फैसला: वेटिंग क्लॉज बताकर क्लेम नकारने पर बीमा कंपनी दंडित

    भोपाल
    अक्सर लोग स्वास्थ्य बीमा इसलिए कराते हैं,ताकि जब कभी भी बीमारी उन्हें घेरे तो इलाज के लिए उन्हें आर्थिक तौर पर परेशान ना होना पड़े। बीमा उपचार के दौरान बड़ा मददगार साबित होता है, लेकिन कई बार बीमा कंपनी अलग-अलग बहाना बनाकर बीमा राशि देने से इन्कार कर देती है। ऐसे ही मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के एक फैसले का उल्लेख कर कहा कि बीमा कंपनी बीमारियों के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के लिए दावे को अस्वीकार कर सकती है, लेकिन इसे प्रमाणित करने की जिम्मेदारी खुद बीमा कंपनी की है, इसलिए उपभोक्ता क्लेम का अधिकारी है। मामले में आयोग ने क्लेम की राशि पांच लाख रुपये सात फीसद ब्याज की दर से और मानसिक क्षतिपूर्ति राशि 15 हजार रुपये दो माह में देने के आदेश दिए हैं।
     
    यह है पूरा मामला
    कोलार रोड स्थित मंदाकिनी कालोनी निवासी स्व. देवदास सैनी की पत्नी नुरूननिशा और बेटी सीमा सैनी ने 29 जून 2024 को केयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई थी। शिकायत की है कि कंपनी के बीमा एजेंट अंकित सोनी ने साल 2020 में उनके घर आकर मृतक उपभोक्ता को बीमा लेने के लिए राजी किया। उन्हें कहा गया कि यदि कोई बीमारी हुई तो आपको इलाज में एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। इस आश्वासन के साथ उपभोक्ता का पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा करा दिया। अगले साल भी उपभोक्ता ने इसे 15,450 रुपये का भुगतान कर रिन्यू किया।

    बीमा अवधि में 23 सितंबर 2021 को तबीयत खराब होने पर देवदास सैनी को भोपाल के निजी अस्पताल में दिखाया तो यहां उन्हें निमोनिया बताकर दवाई देकर भेज दिया गया। तबीयत फिर बिगड़ने पर डाक्टर ने किडनी और यूरिन में इंफेक्शन के कारण निमोनिया होने पर भर्ती होने के लिए कहा। इसकी सूचना बीमा कंपनी को दी और अस्पताल द्वारा दस्तावेज भी भेजे गए। बीमा का पैसा न मिलने पर परिवार ने उधार लेकर इलाज जारी रखा, लेकिन जनवरी 2022 को उनकी मृत्यु हो गई। परिवार ने आवेदन में जानकारी दी कि उपभोक्ता के इलाज में कुल छह लाख 90 हजार रुपये का खर्च हुआ।

    बीमा कंपनी का तर्क
    बीमा कंपनी ने तर्क रखा कि उपभोक्ता को पहले से हाई बीपी की बीमारी थी। इसके संबंध में चार वर्ष की वेटिंग पीरियड का एक्सक्लूजन क्लाज बीमा पालिसी में डाला गया है और इसी आधार पर क्लेम खारिज किया गया है। हालांकि, देवदास सैनी की मेडिकल हिस्ट्री में कहीं भी हाई बीपी का जिक्र नहीं था। इलाज के दौरान भी पूर्व में हाई बीपी का जिक्र किसी भी अस्पताल ने नहीं किया था। ऐसे में बीमा कंपनी इस बात को साबित नहीं कर पाई।

  • ऊर्जा संरक्षण का जन जागरण हर व्यक्ति की महती जिम्मेदारी- राज्यपाल पटेल

    राज्यपाल ने ऊर्जा संरक्षण की राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को प्रदान किए पुरस्कार

    भोपाल
    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण किसी एक संस्था, संगठन और सरकार की चिंता का विषय नहीं है बल्कि हम सभी के बेहतर जीवन का अनिवार्य पहलू है। ऊर्जा की बचत ही ऊर्जा का उत्पादन है। ऊर्जा संरक्षण के महत्व को जन जागरण का मुद्दा बनाना केवल सरकार के साथ समाज के हर व्यक्ति की महती जिम्मेदारी है।

    राज्यपाल श्री पटेल विद्युत मंत्रालय भारत सरकार के ऊर्जा संरक्षण अभियान 2025 के अंतर्गत ऊर्जा संरक्षण की राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दो श्रेणियों में प्रतिभागियों और विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए और बधाई दी। राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता के लिए चयनित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के सदस्यों का भी सम्मान किया। राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, एन.एच.डी.सी. लिमिटेड और मध्यप्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वाधान में सुभाष भवन भोपाल में किया गया था।

    ऊर्जा की हर यूनिट की बचत, राष्ट्र विकास में योगदान
    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि चित्रकला, अंतर्मन की मार्मिक अभिव्यक्ति है। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों द्वारा ऊर्जा संरक्षण पर बनाए गए चित्र अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने उपस्थित जनों से अपील की कि वे चित्रकला प्रदर्शनी का अवलोकन ज़रूर करें। प्रतिभावान बाल चित्रकारों की रचनात्मकता और ऊर्जा संरक्षण संदेशों को समझे, उनका अनुसरण करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि ऊर्जा बचत की शुरूआत हमें अपने घर से करना चाहिए। सुबह से शाम तक हर क्षण, सजग रहकर ऊर्जा बचत करना होगा। घर के बड़े-बुजूर्गों द्वारा बच्चों को ऊर्जा के महत्व, जरूरत और बचत का संस्कार बचपन से ही दिया जाना चाहिए। ऊर्जा की हर यूनिट की बचत, प्रकृति संरक्षण के साथ राष्ट्र विकास में योगदान है।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऊर्जा की जरूरत और संरक्षण के महत्व को शैक्षणिक पाठ्यक्रम और गतिविधियों में शामिल किया जाना चाहिए। ताकि भावी पीढ़ी को ऊर्जा साक्षर नागरिक के रूप में तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि दूरस्थ अंचलों से लेकर शहरों तक ऊर्जा संरक्षण के ऐसे प्रयास हो कि आम नागरिक, ऊर्जा बचत की सावधानियों, उपायों और प्रयासों को सजगता, संवेदनशीलता और सक्रियता के साथ दैनिक जीवन में लागू करें। राज्यपाल श्री पटेल ने प्रदेश में ऊर्जा संरक्षण अभियान को कुशलता और समर्पण से गति देने और राज्य की ऊर्जा क्षमताओं को नई ऊंचाई तक ले जाने के प्रयासों के लिए एन.एच.डी.सी. की सराहना की।

    ऊर्जा संरक्षण और अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनुशासन जरूरी
    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि जिस प्रकार ऊर्जा संरक्षण प्रकृति के लिए जरुरी है। सतत जागरूकता और सक्रिय प्रयासों से ऊर्जा की बचत की जा सकती है। उसी प्रकार तेजस्वी जीवन के लिए स्वस्थ शरीर भी जरूरी है। उन्होंने कहा की अच्छा खान-पान, नियमित व्यायाम, भरपूर पानी और नींद उत्तम स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए विद्यार्थी अपनी दिन चर्या में अनुशासन का पालन करें। संतुलित दिनचर्या अपनाकर नियमित अध्ययन करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को संयमित जीवन, अनुशासन और पौष्टिक आहार का महत्व जरूर बताएं।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन कर किया। उनका NHDC के प्रबंध निदेशक श्री राजीव जैन ने पौधा और शॉल भेंट कर स्वागत तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। श्री राजीव जैन ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। मुख्य महाप्रबंधक मानव संसाधन श्री अशोक कुमार ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में NHDC के पदाधिकारी, निर्णायक मंडल के सदस्य, प्रतिभागी बच्चे और उनके अभिभावक उपस्थित थे। 

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भावांतर भुगतान, अन्नदाता के उत्थान का पर्याय है

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भावांतर भुगतान, अन्नदाता के उत्थान का पर्याय है। अन्नदाता को दी गई एमएसपी की गारंटी की पूर्ति करते हुए सोयाबीन भावांतर योजना में 1 लाख 33 हजार किसानों के खाते में 233 करोड रुपए की राशि अंतरित की गई है। यह इस बात का प्रमाण है कि हमने जो कहा उसे कर दिखाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में अनेक किसान हितैषी योजनाएं संचालित की जा रही है। मध्यप्रदेश किसानों को उपज का उचित लाभ दिलवाने के लिए भावान्तर योजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। पिछले साल सोयाबीन का भाव 4800 रुपए था, इस बार किसानों को 500 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ देकर 5300 रुपए से अधिक कीमत पर सोयाबीन खरीदा जा रहा है। भावान्तर योजना के लिए प्रदेश में 9 लाख से अधिक किसानों ने सोयाबीन बेचने के लिए पंजीयन किया। आज 1.33 लाख किसानों के खाते में राशि भेजी गई है। हमारी सरकार ने योजना की शुरुआत करने के 15 दिन में ही किसानों से किया वादा पूरा किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को देवास से प्रदेश के 1.33 लाख सोयाबीन उत्पादक किसानों को भावान्तर योजना के अंतर्गत 233 करोड़ रुपए की राशि अंतरित करने के बाद विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ कर कन्या-पूजन भी किया। वंदे मातरम के गान ने वातावरण को देशभक्ति की भावना का संचार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवास जिले के सर्वांगीण विकास के लिए 183.25 करोड़ लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। साथ ही हितग्राहियों को जैविक खेती, कृषि यंत्र एवं पीएमएफएमई सहित विभिन्न योजनाओं में हितलाभ वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि यंत्रों एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने वाली प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया।

    220 से अधिक मुख्य और 80 उप मंडियों में की जा रही खरीदी : सारी प्रक्रिया ई-मंडी पोर्टल पर
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष-2026 को कृषि आधारित उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भावांतर योजना पंजीकृत किसान 15 जनवरी तक अपनी सोयाबीन मंडियों में बेच सकेंगे। पूरे प्रदेश में 220 से अधिक मुख्य मंडियों और 80 उप मंडियों में खरीदी की जा रही है। रेट पारदर्शी तरीके से तय हो रहे हैं, सारी प्रक्रिया ई-मंडी पोर्टल पर है, किसान का डाटा अपने आप दिख रहा है, पैसा सीधे ऑनलाइन खाते में पहुंचने की व्यवस्था की गई है और हर कदम पर रियल टाइम एंट्री और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। किसानों की सुविधा के लिए भावांतर कॉल सेंटर भी स्थापित किया गया है। भावांतर योजना लागू होने से फसल बेचने में किसानों को होने वाली कई परेशानियां दूर हो गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक दिसंबर को गीता जयंती भी पूरी भव्यता के साथ मनाई जाएगी। प्रदेश के नगरों में गीता भवन बनाए जा रहे हैं। साथ ही प्रत्येक विकासखंड में वृंदावन ग्राम बनाए जाएंगे।

    नरवाई की समस्या के निदान के लिए लगाए जा रहे हैं कम्प्रेस्ट बायो गैस प्लांट
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे लिए धरती पुत्र किसान और सीमा पर जवान, दोनों समान सम्मान का भाव रखते हैं। धरती पुत्र किसानों से देश की विशेष पहचान बनी है। किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार खेती के साथ-साथ गोपालन को भी प्रोत्साहित कर रही है। किसान प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए पंजीयन कराएं और 4 हजार रुपए प्रति एकड़ अनुदान का लाभ उठाएं। प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शुरू की गई है। योजना में अगर कोई किसान 40 लाख रूपए लागत का डेयरी व्यवसाय शुरू करता है तो राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के लिए नरवाई की समस्या खत्म करने की दिशा में कदम उठाते हुए प्रदेश में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट का शुभारंभ किया गया है।

    बहनों का आर्थिक सशक्तिकरण सनातन संस्कृति का गौरव
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार 12 नवम्बर को लाड़ली बहनों को जारी बढ़ी हुई राशि का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की बहनों और किसानों को लगातार सौगातें मिल रही हैं। बहनों का आर्थिक सशक्तिकरण सनातन संस्कृति का गौरव है। भारत दुनिया का एक मात्र देश है, जो मातृ सत्ता को स्वीकार करता है। उन्होंने कहा कि जहां देवियों का वास है, वही देवास है। उन्होंने देवास स्थित नोट प्रेस का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के नोट दुनिया में भारत का मान बढ़ाते हैं। भले ही नोट अर्थव्यवस्था को गति देते हों, लेकिन सोयाबीन, कपास और गेहूं का उत्पादन देश की अर्थव्यवस्था को आधार प्रदान करता है। कृषि उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान देश में महत्वपूर्ण है।

    राज्य सरकार ने मोटे अनाज 'श्रीअन्न' पर दिया बोनस
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने मोटा अनाज 'श्रीअन्न' खरीदने के लिए मंडला, बालाघाट, जबलपुर सहित 11 जिलों के लिए किसानों को कोदो-कुटकी पर 1000 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया है। धान और गेहूं उत्पादक किसानों को भी बोनस का लाभ मिला है, चरणबद्ध रूप से गेहूं की कीमतें बढ़ाई जा रही है। संकल्प पत्र में किये वादे को पूरा करते हुए लाड़ली बहना योजना में बहनों के लिए भी राशि बढ़ाकर 1500 रुपए कर दी गई है। किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए अनुदान का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रत्येक 7 दिन में प्रदेशवासियों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत राशि अंतरित की जाएगी। प्रदेश में औद्योगीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार को पिछले दिनों भारत सरकार की ओर से 4 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

    देवास जिले में भावान्तर योजना के लिए सबसे अधिक हुआ पंजीयन
    कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि मध्यप्रदेश किसानों के लिए भावान्तर योजना संचालित करने वाला देश का इकलौता राज्य है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में किसान हितैषी सरकार है।

    मुख्यमंत्री का किसान मोर्चा और नागरिकों ने किया स्वागत
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के देवास पहुँचने पर रोड-शो में किसान मोर्चा के पदाधिकारियों और किसानों सहित नागरिकों ने भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने सभी का अभिवादन करते हुए किसानों को भावांतर योजना में मिले लाभ की बधाई दी।

    कार्यक्रम को सांसद श्री महेंद्र सिंह सोलंकी ने भी संबोधित किया। विधायक श्रीमती गायत्री राजे पंवार ने कहा कि देवास जिले में भावान्तर योजना के लिए सबसे अधिक पंजीयन हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश के किसानों, युवाओं और महिलाओं को अनेक सौगातें मिल रही हैं। गरीब कल्याण के लिए भी राज्य सरकर सदैव तत्पर है। कार्यक्रम में विधायक डॉ. राजेश सोनकर, विधायक श्री मनोज चौधरी विधायक श्री मुरली भंवरा, महापौर श्रीमती गीता अग्रवाल, किसान संघ के अध्यक्ष श्री जयपाल सिंह चावड़ा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में अन्नदाता भाई और लाड़ली बहनें उपस्थित रही।

  • जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और स्वाभिमान का उत्सव: डॉ. कुंवर विजय शाह

    भोपाल
    भारत एक सांस्कृतिक विविधता संपन्न देश है। यहां की आदि संस्कृति अत्यंत समृद्ध है। आज देश भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जन्म जयंती मना रहा है। हम सब इस अवसर पर गर्व से भरे हैं। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश से जनजातीय गौरव दिवस की शुरूआत कर इस अवसर को और भी गरिमापूर्ण बना दिया है। भगवान बिरसा मुंडा एक ऐसे वीर योद्धा और समाज-सुधारक हुए हैं, जिन्होंने जनजातीय समाज की उन्नति, गरिमा और उनके अधिकारों के लिए जीवन समर्पित कर दिया। हर साल 15 नवम्बर को उनकी जयंती पर राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है। यह जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और स्वाभिमान का उत्सव है। जनजातीय गौरव दिवस का महत्व केवल भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को याद करने तक सीमित नहीं है। यह जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और देशज ज्ञान की विरासत का जश्न मनाने का भी दिन है। हम जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर और उपलब्धियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन प्रेरणा का स्रोत है। नई पीढ़ी को साहस, संघर्ष और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्ध होने का संदेश देता है।

    भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव के साधारण मुंडा परिवार में हुआ था। उनका जीवन कठिनाइयों से भरा था। उन्हें निरंतर आर्थिक संघर्षों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लागू जमींदारी प्रथा, धर्मांतरण और जनजातीय अस्मिता पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष किया।

    उलगुलान विद्रोह का नेतृत्व
    भगवान बिरसा मुंडा ने "उलगुलान" नामक जनजातीय विद्रोह का नेतृत्व किया। अंग्रेजों के खिलाफ यह महान विद्रोह था। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लागू भूमि हड़पने की नीतियों, जबरन धर्मांतरण और जनजातियों की पारम्परिक जीवनशैली में दखल देने वाले कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई। भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में इस आंदोलन ने जनक्रांति की लहर पैदा कर दी थी। जनजातीय समुदाय ने उन्हें "धरती आबा" के रूप में सम्मानित किया।

    महान समाज सुधारक
    भगवान बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता संग्राम योद्धा ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे। उन्होंने जनजातीय समाज में व्याप्त सामाजिक बुराइयों अंध-विश्वास, जाति-भेदभाव, नशाखोरी, जातीय संघर्ष के खिलाफ जागरूकता फैलाई और शिक्षा का महत्व समझाया। उन्हें एकता में रहने का संदेश दिया। बिरसा मुंडा ने "बिरसाइत" नामक एक धार्मिक आंदोलन भी चलाया, जिसमें उन्होंने आचार-विचार की शुचिता, सादगी और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। भगवान बिरसा मुंडा मात्र 24 साल 7 महीने की अल्पायु में 9 जून 1900 को वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी स्मृति आज भी जनजातीय समाज के दिलों में जीवित है।

    विकास में भागीदारी
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने जनजातीय विकास के अभूतपूर्व काम किए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका जैसे क्षेत्रों में मध्य प्रदेश के कार्यों की राष्ट्रव्यापी सराहना हुई है। समग्र जनजातीय विकास की पीएम जनमन योजना की अवधारणा की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि का ही परिणाम है। उन्होंने जनजाति समुदाय के गुमनाम वीर योद्धाओं को समाज के सामने लाकर खड़ा किया और उनकी स्मृति को स्थाई बनाने का काम किया। पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना जैसी क्रांतिकारी पहल बिरसा मुंडा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

    हाल में नई दिल्ली में संपन्न ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव में केंद्र सरकार ने जनजाति समुदाय के कलाकारों के कला उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ले जाने का निर्णय लिया है। जनजातीय समुदाय पारंपरिक ज्ञान, कला और संस्कृति से समृद्ध है। मध्यप्रदेश में जनजाति समुदायों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का उल्लेखनीय काम हुआ है। पेसा कानून में जनजातीय क्षेत्रों की ग्राम सभा सशक्त हुई हैं। वे अपने निर्णय ले रही हैं और अपनी विकास योजनाएं बना रही हैं। शैक्षणिक सुविधाओं में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। किसी समय भौगोलिक रूप से दूरस्थ बसे जनजातीय गांवों का अब मुख्य सड़कों से संपर्क हो गया है। वे अब शहरी अर्थव्यवस्था में शामिल हो गए हैं। जनजातीय बच्चों को उच्च शिक्षा की सुविधाएं मिली है। वे मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। विदेशों में भी उच्च अध्ययन के लिए जा रहे हैं। राज्य शासन के प्रयासों से अब जनजातीय परिवारों में आर्थ‍िक उदयमिता बढ़ रही है। वे विकास योजनाओं में उत्साहपूर्वक भागीदारी कर रहे हैं।

    राज्य सरकार जनजातीय महानायकों की स्मृति में स्मारकों और संग्रहालयों का निर्माण करा रही है। छिंदवाड़ा में बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और जबलपुर में राजा शंकर शाह कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मुख्य संग्रहालय बनाया गया। जबलपुर एयर पोर्ट और मदन महल फ्लायओवर रानी दुर्गावती के नमा पर किया गया। पचमढ़ी अभयारण्य का नाम राजा भभूत सिंह के नाम पर, रानी कमलापति रेल्वे स्टेशन भोपाल, टाट्या भील विश्वविद्यालय खरगौन, राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा कुछ उदाहरण है। हम जनजातीय गौरव दिवस पर भगवान बिरसा मुंडा की स्मृति को नमन करते हैं। साथ उन सभी जनजातीय महानायकों का भी स्मरण करते हैं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अविस्मरणीय योगदान दिया।

     

  • जनजातीय संस्कृति का उत्सव: विरासत और स्वाभिमान की रही प्रधान भूमिका

    जनजातीय गौरव दिवस 15 नवंबर

    जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और स्वभिमान का उत्सव

    भोपाल

    भारत एक सांस्कृतिक विविधता संपन्न देश है। यहां की आदि संस्कृति अत्यंत समृद्ध है। आज देश भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जन्म जयंती मना रहा है। हम सब इस अवसर पर गर्व से भरे हैं। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश से जनजातीय गौरव दिवस की शुरूआत कर इस अवसर को और भी गरिमापूर्ण बना दिया है।

    भगवान बिरसा मुंडा एक ऐसे वीर योद्धा और समाज-सुधारक हुए हैं, जिन्होंने जनजातीय समाज की उन्नति, गरिमा और उनके अधिकारों के लिए जीवन समर्पित कर दिया। हर साल 15 नवम्बर को उनकी जयंती पर राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है। यह जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और स्वाभिमान का उत्सव है। जनजातीय गौरव दिवस का महत्व केवल भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को याद करने तक सीमित नहीं है। यह जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और देशज ज्ञान की विरासत का जश्न मनाने का भी दिन है। हम जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर और उपलब्धियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन प्रेरणा का स्रोत है। नई पीढ़ी को साहस, संघर्ष और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्ध होने का संदेश देता है।

    भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव के साधारण मुंडा परिवार में हुआ था। उनका जीवन कठिनाइयों से भरा था। उन्हें निरंतर आर्थिक संघर्षों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लागू जमींदारी प्रथा, धर्मांतरण और जनजातीय अस्मिता पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष किया।

    उलगुलान विद्रोह का नेतृत्व

    भगवान बिरसा मुंडा ने "उलगुलान" नामक जनजातीय विद्रोह का नेतृत्व किया। अंग्रेजों के खिलाफ यह महान विद्रोह था। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लागू भूमि हड़पने की नीतियों, जबरन धर्मांतरण और जनजातियों की पारम्परिक जीवनशैली में दखल देने वाले कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई। भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में इस आंदोलन ने जनक्रांति की लहर पैदा कर दी थी। जनजातीय समुदाय ने उन्हें "धरती आबा" के रूप में सम्मानित किया।

    महान समाज सुधारक

    भगवान बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता संग्राम योद्धा ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे। उन्होंने जनजातीय समाज में व्याप्त सामाजिक बुराइयों अंध-विश्वास, जाति-भेदभाव, नशाखोरी, जातीय संघर्ष के खिलाफ जागरूकता फैलाई और शिक्षा का महत्व समझाया। उन्हें एकता में रहने का संदेश दिया। बिरसा मुंडा ने "बिरसाइत" नामक एक धार्मिक आंदोलन भी चलाया, जिसमें उन्होंने आचार-विचार की शुचिता, सादगी और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। भगवान बिरसा मुंडा मात्र 24 साल 7 महीने की अल्पायु में 9 जून 1900 को वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी स्मृति आज भी जनजातीय समाज के दिलों में जीवित है।

    विकास में भागीदारी

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने जनजातीय विकास के अभूतपूर्व काम किए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका जैसे क्षेत्रों में मध्य प्रदेश के कार्यों की राष्ट्रव्यापी सराहना हुई है। समग्र जनजातीय विकास की पीएम जनमन योजना की अवधारणा की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। यह प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि का ही परिणाम है। उन्होंने जनजाति समुदाय के गुमनाम वीर योद्धाओं को समाज के सामने लाकर खड़ा किया और उनकी स्मृति को स्थाई बनाने का काम किया। पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना जैसी क्रांतिकारी पहल बिरसा मुंडा के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

    हाल में नई दिल्ली में संपन्न ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव में केंद्र सरकार ने जनजाति समुदाय के कलाकारों के कला उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ले जाने का निर्णय लिया है। जनजातीय समुदाय पारंपरिक ज्ञान, कला और संस्कृति से समृद्ध है। मध्यप्रदेश में जनजाति समुदायों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का उल्लेखनीय काम हुआ है। पेसा कानून में जनजातीय क्षेत्रों की ग्राम सभा सशक्त हुई हैं। वे अपने निर्णय ले रही हैं और अपनी विकास योजनाएं बना रही हैं। शैक्षणिक सुविधाओं में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। किसी समय भौगोलिक रूप से दूरस्थ बसे जनजातीय गांवों का अब मुख्य सड़कों से संपर्क हो गया है। वे अब शहरी अर्थव्यवस्था में शामिल हो गए हैं। जनजातीय बच्चों को उच्च शिक्षा की सुविधाएं मिली है। वे मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। विदेशों में भी उच्च अध्ययन के लिए जा रहे हैं। राज्य शासन के प्रयासों से अब जनजातीय परिवारों में आर्थ‍िक उदयमिता बढ़ रही है। वे विकास योजनाओं में उत्साहपूर्वक भागीदारी कर रहे हैं।

    राज्य सरकार जनजातीय महानायकों की स्मृति में स्मारकों और संग्रहालयों का निर्माण करा रही है। छिंदवाड़ा में बादल भोई जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और जबलपुर में राजा शंकर शाह कुंवर रघुनाथ शाह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मुख्य संग्रहालय बनाया गया। जबलपुर एयर पोर्ट और मदन महल फ्लायओवर रानी दुर्गावती के नमा पर किया गया। पचमढ़ी अभयारण्य का नाम राजा भभूत सिंह के नाम पर, रानी कमलापति रेल्वे स्टेशन भोपाल, टाट्या भील विश्वविद्यालय खरगौन, राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा कुछ उदाहरण है। हम जनजातीय गौरव दिवस पर भगवान बिरसा मुंडा की स्मृति को नमन करते हैं। साथ उन सभी जनजातीय महानायकों का भी स्मरण करते हैं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अविस्मरणीय योगदान दिया।

    • डॉ. कुंवर विजय शाह

     

  • तेज रफ्तार बनी मौत का कारण: दो बाइकों की टक्कर में एक की मौत, तीन घायल

    कवर्धा

    जिले में तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, जब मोटरसाइकिलों में जोरदार टक्कर हो गई। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई।

    जानकारी के अनुसार, यह हादसा कूकदूर थाना क्षेत्र के चितरहीन मंदिर मोड़ के पास हुआ है। मृतक की पहचान रामकुमार यादव, निवासी नागाडबरा के रूप में हुई है। घायलों में दो युवक मध्यप्रदेश के बजाग जिले के निवासी बताए गए हैं।

    घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने मर्ग कायम कर मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए मर्च्यूरी भेज दिया है और मामले की जांच की जा रही है।

  • देवड़ा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक, विधायकों व पूर्व विधायकों के भत्ते और पेंशन पर चर्चा

    भोपाल
    उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन भत्ते, पेंशन आदि के संबंध में गठित समिति की द्वितीय बैठक गुरूवार को मंत्रालय में हुई।

    बैठक में विधायक सर्व अजय विश्नोई एवं  सचिन सुभाषचंद्र यादव उपस्थित रहे। समिति ने महाराष्ट्र, गुजरात एवं छत्तीसगढ़ के राज्यों में विधायक एवं पूर्व विधायक को मिलने वाली वेतन भत्ते एवं पेंशन राशि पर विस्तृत चर्चा की गई। समिति ने यह निर्णय लिया कि अगामी बैठक में मध्यप्रदेश के विधायकों/पूर्व विधायकों को मिलने वाली सुविधा पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा।

    समिति के सदस्य सचिव अपर मुख्य सचिव,  अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव वित्त, मनीष रस्तोगी, विधान सभा के प्रमुख सचिव  अरविन्द शर्मा एवं अपर सचिव  वीरेन्द्र कुमार उपस्थित रहे।

     

  • मध्यप्रदेश बनेगा जीसीसी का नया गंतव्य, टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में हुआ लीडरशिप कनेक्ट

    मध्यप्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का पसंदीदा गंतव्य बनाने की पहल

    एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में हुआ जीसीसी लीडरशिप कनेक्ट

    इंदौर
    मध्यप्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में गुरुवार को एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 के अंतर्गत “एमपी जीसीसी लीडरशिप कनेक्ट राउंडटेबल” का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर 25 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) शामिल हुए और राज्य की दीर्घकालिक तकनीकी रणनीति को दिशा देने के लिए सार्थक चर्चा हुई।

    अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  संजय दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश को जीसीसी के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। टियर-2 शहरों में उपलब्ध सुविधाएं जीसीसी के लिए सशक्त बिजनेस इको सिस्टम बनाने में सक्षम हैं।  दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां समर्पित जीसीसी नीति बनाई गई है। इसके साथ ही राज्य में ड्रोन नीति के तहत ड्रोन डाटा रिपॉजिटरी विकसित की जा रही है। प्रदेश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश एवं विकास को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। डाटा सेंटर नीति के तहत व्यवसायों को सब्सिडी दी जा रही है और स्पेस टेक्नोलॉजी नीति तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि आईआईटी इंदौर देश का एकमात्र संस्थान है जहाँ स्पेस टेक्नोलॉजी में बीटेक एवं एमटेक कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने वाला अग्रणी राज्य है। देश के 10 प्रतिशत से अधिक गेमिंग आईपी क्रिएशन मध्यप्रदेश से हुए हैं, जो राज्य की तकनीकी क्षमता और टैलेंट की उपलब्धता को दर्शाते हैं।

    नीतिगत और प्रशासनिक सहयोग

    मध्यप्रदेश सरकार ने जीसीसी की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतिगत एवं प्रशासनिक कदम उठाए हैं। संपदा पोर्टल के माध्यम से आसान रजिस्ट्री, लेबर लॉ में सरलीकरण, साइबर तहसील के माध्यम से विवाद निपटान, पेरोल सब्सिडी और पेटेंट असिस्टेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। राज्य में ग्रीन एनर्जी की उपलब्धता और कार्बन क्रेडिट व्यवस्था जैसे पर्यावरणीय उपाय सकारात्मक बिजनेस इकोसिस्टम को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।

    उद्योग प्रतिनिधियों ने साझा किये विचार

    वेना इंडिया सेंटर हेड  गौतम यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में आईआईटी इंदौर, MANIT भोपाल, और GSITS इंदौर जैसे संस्थानों की मौजूदगी से राज्य में उच्च गुणवत्ता वाला टैलेंट पूल उपलब्ध है। उन्होंने जीसीसी के सशक्त विकास के लिए सीनियर लीडरशिप को आकर्षित करने का सुझाव दिया। वेना इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट  पार्थ सेन गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश में वित्तीय क्षेत्र की विशेषता और संभावनाएं जीसीसी की स्थापना के लिए अत्यंत अनुकूल हैं।

    केपीएमजी के पार्टनर  गौरव कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश के टियर-2 शहरों में उत्कृष्ट टैलेंट पूल उपलब्ध है और यहां के युवा राज्य में ही रहकर काम करना पसंद करते हैं, जिससे टैलेंट की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित रहती है। एनटीटी डाटा के साइबर हेड  क्षितिज बंथिया ने कहा कि राज्य में कई जीसीसी पहले से सक्रिय हैं और यहां स्टार्टअप कल्चर को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है। जीसीसी में स्थानीय भर्ती को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ई एंड वाई एलएलपी के पार्टनर  आदित्य क्षेत्रपा ने कहा कि जीसीसी की स्थापना के साथ उसकी निरंतरता पर भी ध्यान देना आवश्यक है, जिससे कार्य त्वरित गति और कम लागत से हो सके।

    प्रदेश में सस्टेनेबिलिटी, प्रगति और विकास की दिशा में आगे बढ़ते हुए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है। इन केंद्रों का उद्देश्य न केवल तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं को सशक्त बनाना है, बल्कि रोजगार, नवाचार और कौशल विकास के नए अवसर भी सृजित करना है।

     

  • शराब घोटाला केस में नई कार्रवाई — बघेल परिवार पर ईडी की नज़र, ₹61.20 करोड़ की संपत्ति कुर्क

    नई दिल्ली

    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की चल रही जांच के तहत बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की ₹61.20 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क कर ली है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है।

    धन शोधन के मामलों की जांच के तहत कार्रवाई
    ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में ₹59.96 करोड़ मूल्य की 364 आवासीय भूखंडों और कृषि भूमि के रूप में अचल संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा, ₹1.24 करोड़ की चल संपत्तियां बैंक बैलेंस और सावधि जमा के रूप में पाई गई हैं। यह कदम छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले से जुड़े धन शोधन के मामलों की जांच के दौरान उठाया गया है। ईडी की कार्रवाई से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

    ईडी ने इन संपत्तियों को कुर्क किया

        59.96 करोड़ रुपये मूल्य के 364 आवासीय भूखंडों और कृषि भूमि के रूप में अचल संपत्तियां
        1.24 करोड़ रुपये मूल्य की बैंक बैलेंस और सावधि जमा के रूप में चल संपत्तियां।
        अनुसूचित अपराधों के माध्यम से अर्जित 2500 करोड़ रुपये की अपराध आय (पीओसी)।

    ईडी ने बताया- चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर थे
    ईडी के अनुसार पीएमएलए के तहत की गई जांच से पता चला है कि भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर तैनात थे। मुख्यमंत्री के पुत्र होने के नाते, उन्हें शराब सिंडिकेट का नियंत्रक और अंतिम अधिकारी बनाया गया था। वह सिंडिकेट की ओर से एकत्रित सभी अवैध धन का हिसाब रखते थे। ये धन (अपराध की आय या पीओसी) के संग्रह, चैनलाइजेशन और वितरण से संबंधित सभी बड़े फैसले उनके निर्देशों के तहत लिए जाते थे।

    चैतन्य बघेल को हुई अपराध की आय
    ईडी की जांच में यह पता चला कि चैतन्य बघेल के पास अपराध से हुई आय गई। इसे उन्होंने अपने रियल एस्टेट व्यवसाय के माध्यम से बढ़ाया और बेदाग संपत्ति के रूप में पेश किया। चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से प्राप्त पीओसी का उपयोग अपनी स्वामित्व वाली कंपनी मेसर्स बघेल डेवलपर्स के तहत अपनी रियल एस्टेट परियोजना विट्ठल ग्रीन के विकास के लिए किया। चैतन्य बघेल को ईडी ने 18 जुलाई 2025  को गिरफ्तार किया और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।

    इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री की हो चुकी है गिरफ्तारी
    इससे पहले, इस मामले में अनिल टुटेजा (पूर्व आईएएस), अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी (आईटीएस) और कवासी लखमा (विधायक और छत्तीसगढ़ के तत्कालीन आबकारी मंत्री) को ईडी ने गिरफ्तार किया था। ईडी ने बताया कि 61.20 करोड़ रुपये की वर्तमान कुर्की, लगभग 215 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों की पूर्व में की गई कुर्की का ही एक हिस्सा है। आगे की जांच जारी है।

     

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया

    जनदर्शन में वूमेन्स सेल्फ डिफेंस ऑर्गनाइजेशन के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात

    रायपुर,

    मुख्यमंत्री निवास में आज आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में वूमेन्स सेल्फ डिफेंस ऑर्गनाइजेशन छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कराटे, कुश्ती और ताइक्वांडो जैसे खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों के लिए स्वेच्छानुदान स्वीकृत करने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने संगठन के पदाधिकारियों और खिलाड़ियों द्वारा रखे गए सुझावों और मांगों को ध्यानपूर्वक सुना। खिलाड़ियों ने बताया कि वे देश और विदेश में विभिन्न प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं तथा आगे भी राज्य का नाम और ऊंचा करने के लिए निरंतर प्रशिक्षण और सहयोग की आवश्यकता है। खिलाड़ियों ने खेल उपकरण, प्रशिक्षण सुविधाओं और प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने खिलाड़ियों की भावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं के सम्मान और प्रोत्साहन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर यथासंभव सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा और खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

  • जनदर्शन में बदल गई जिंदगी: CM साय ने रमन निर्मलकर को सौंपा श्रवण यंत्र, जताई मानवीयता

    रायपुर

    संवेदनशीलता और जनसेवा का एक और उदाहरण पेश करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में रायपुर निवासी रमन निर्मलकर को श्रवण यंत्र प्रदान किया। मुख्यमंत्री की इस त्वरित पहल ने एक व्यक्ति की जिंदगी बदल दी रमन ने भावुक होकर कहा, “अब फिर से सुन पा रहा हूं।”

    ब्राह्मणपारा वार्ड निवासी रमन निर्मलकर लंबे समय से श्रवण समस्या से जूझ रहे थे। कुछ महीनों पहले उनकी सुनने की क्षमता पूरी तरह समाप्त हो गई थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे श्रवण यंत्र खरीदने में असमर्थ थे। ऐसे में जब वे मुख्यमंत्री जनदर्शन में पहुंचे और अपनी समस्या बताई, तो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिना किसी देरी के तुरंत श्रवण यंत्र दिलाने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री की पहल के बाद मौके पर ही उन्हें नया श्रवण यंत्र प्रदान किया गया। यंत्र लगाने के कुछ ही क्षण बाद रमन की आंखों में खुशी के आंसू झलक उठे। उन्होंने मुख्यमंत्री साय का आभार जताते हुए कहा, “मुख्यमंत्री जी ने मेरी परेशानी को दिल से समझा। आज मैं फिर से सुन पा रहा हूं, यह मेरे लिए नई जिंदगी की शुरुआत है। उनका दिल से धन्यवाद करता हूं।”

    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा जनदर्शन में आमजन की समस्याओं पर तुरंत संज्ञान लेकर सहायता प्रदान करने की यह पहल जनकल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि जनदर्शन में आने वाले आम नागरिकों की समस्याओं को मुख्यमंत्री स्वयं सुनते हैं और संबंधित विभागों को तत्काल समाधान के निर्देश देते हैं।

  • बाल वैज्ञानिक प्रतिभा का प्रदर्शन: सूरजपुर जिले के चार मॉडल पहुंचे राज्य स्तर पर

    विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत विषय पर आधारित है यह कार्यक्रम

    रायपुर,

    राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद नई दिल्ली के आदेशानुसार प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी बच्चों के लिए जोन स्तरीय राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी, पश्चिम भारत विज्ञान मेला एवं विज्ञान नाटिका प्रतियोगिताओं का आयोजन शा.बहु.उ.मा.वि. अंबिकापुर जिला सरगुजा में संपन्न हुआ। इस प्रतियोगिता में सूरजपुर जिले के चार विद्यार्थियों का बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में राज्य स्तर के लिए चयन हुआ है।

    इस वर्ष छत्तीसगढ़ के 9 जोन के प्रतिभागियों का राज्य स्तरीय कार्यक्रम जशपुर जिले के स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय जयपुर में 12 सितंबर 2025 से 15 सितंबर 2025 तक आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम का विषय विकसित और आत्मनिर्भर भारत है, जिसके अंतर्गत सात उप विषय सतत कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन और प्लास्टिक के विकल्प, हरित ऊर्जा, उभरती हुई प्रौद्योगिकी, मनोरंजक गणितीय मॉडलिंग, स्वास्थ्य और स्वच्छता एवं जल संरक्षण और प्रबंधन है।

    इस प्रतियोगिता में शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामानुजनगर के छात्र अविनाश सिंह (कक्षा 12वीं) और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कारवां की छात्रा गीता सिंह (कक्षा 12वीं) का स्वास्थ्य और स्वच्छता पर प्रादर्श बनाने के लिए, नवल साय (कक्षा 10वीं) का सतत कृषि के लिए प्रादर्श बनाने एवं सेजेस जयनगर के छात्र मोहम्मद आसिफ अंसारी (कक्षा 8वीं) का उभरती हुई प्रौद्योगिकी के लिए प्रादर्श बनाकर प्रस्तुति दी गई। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्रों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए विचारों को तलाशने और विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। यह मेला विकसित भारत तथा आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर केंद्रित है जिसका लक्ष्य विद्यार्थियों के रचनात्मक सोच, संचार कौशल और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

  • माओवादी मोर्चे पर बड़ी कामयाबी: DVCM कन्ना और उसकी पत्नी उर्मिला समेत 6 नक्सली ढेर, आतंक का अंत

    बीजापुर

    मंगलवार को नेशनल पार्क के जंगलों में हुए मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबलों ने 27 लाख रुपये के इनामी 6 कुख्यात माओवादियों को मार गिराया है। वहीं घटना स्थल से भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और माओवादी सामग्री बरामद हुई है। इस नक्सल ऑपरेशन में मोस्ट वांटेड DVCM कन्ना और पापाराव की पत्नी उर्मिला के आतंक का अध्याय अब समाप्त हो गया है।

    जानकारी के अनुसार, DKSZCM पापाराव, मद्देड़ एरिया कमेटी इंचार्ज DVCM कन्ना ऊर्फ बुचन्ना, DVCM उर्मिला, DVCM मोहन कड़ती और पश्चिम बस्तर डिवीजन के 50-60 माओवादियों की मौजूदगी की सूचना पर डीआरजी बीजापुर, डीआरजी दंतेवाड़ा और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। यह मुठभेड़ कांदुलनार-कचलारम और गुज्जाकोंटा के जंगलों में हुई, जो सुबह 10 बजे से शुरू हुई और करीब शाम तक चली।

    बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि नेशनल पार्क क्षेत्र के कांदुलनार, कचलारम एवं गुज्जाकोंटा के जंगलों में SZCM पापाराव, मड्डेड़ एरिया कमेटी के इंचार्ज DVCM कन्ना ऊर्फ बुचन्ना, डीवीसीएम उर्मिला, DVCM मोहन कड़ती और पश्चिम बस्तर डिवीजन के 50-60 माओवादियों की मौजूदगी की सूचना पर सर्च अभियान शुरू किया गया।

    इस अभियान के दौरान 11 नवंबर 2025 की सुबह 10 बजे से डीआरजी बीजापुर, डीआरजी दंतेवाड़ा एवं एसटीएफ की संयुक्त टीमों और माओवादियों के बीच रुक-रुक कर फायरिंग जारी रही। सर्च ऑपरेशन के दौरान मुठभेड़ स्थल से 6 माओवादियों के शव, ऑटोमैटिक हथियार (इंसास, 9एमएम कार्बाइन, .303 राइफल सहित), विस्फोटक सामग्री एवं माओवादी साहित्य बरामद हुआ।

    आज बीजापुर जिला मुख्यालय में पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदरराज पी., पुलिस उप महानिरीक्षक दंतेवाड़ा रेंज कमलोचन कश्यप, पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेंद्र कुमार यादव, पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा गौरव राय, पुलिस अधीक्षक एसटीएफ स्मृतिक राजनाला एवं उप महानिरीक्षक केआरपीएफ ऑप्स राकेश चौधरी ने नेशनल पार्क एरिया में संचालित अभियान और मुठभेड़ के संबंध में जानकारी दी।

    मुठभेड़ में बरामद शव की पहचान

    DVCM कन्ना उर्फ बुचन्ना – उम्र 35 वर्ष, गुडडीपाल थाना, मोदकपाल जिला बीजापुर। मद्देड़ एरिया कमेटी का प्रभारी। इनाम 8 लाख रुपये। कई नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड, जिसमें ग्रामीणों की हत्या, IED ब्लास्ट, आगजनी, डकैती, मोबाइल टावर जलाना और शिक्षादूतों का अपहरण शामिल है।

        DVCM कन्ना उर्फ बुचन्ना, उम्र 35 वर्ष, निवासी गुडडीपाल, थाना मोदकपाल, जिला बीजापुर। पदनाम: डीव्हीसीएम, प्रभारी मद्देड़ एरिया कमेटी। इसपर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

    कन्ना उर्फ बुचन्ना माओवादियों के बड़े कैडर में शामिल था और कई नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड रहा। पिछले एक दशक में उसने पुलिस, आम नागरिक और विकास कार्यों को निशाना बनाने वाली कई घटनाओं को अंजाम दिया। उसके खिलाफ बीजापुर जिले के विभिन्न थानों में 42 आपराधिक मामले और 18 स्थायी वारंट लंबित हैं।

    DVCM कन्ना ऊर्फ बुचन्ना ऊर्फ बुचन्ना कुड़ियम के खिलाफ दर्ज प्रमुख घटनाएं

    कैंप अटैक – जुलाई 2008 में कोंगुपल्ली पुलिस पोस्ट और जनवरी 2016 में नुकनपाल कैम्प हमला में शामिल, जो सुरक्षाबलों की तत्परता से असफल रही।

    ग्रामीणों की हत्या – पुलिस मुखबिरी के संदेह में 20 से ज्यादा ग्रामीणों की हत्या में शामिल, जिनमें वर्ष 2016 में ग्राम पंचायत चिन्नाकोडेपाल के उपसरपंच की हत्या भी शामिल है।

    IED ब्लास्ट – कुल छह आईईडी विस्फोटों का मुख्य योजनाकार था । नवंबर 2017 में थाना भद्रकाली क्षेत्र में हुए एक विस्फोट में आरक्षक संतोष यादव शहीद हुए थे।

    आगजनी – फरवरी 2018 में कांकेर रोडवेज़ की यात्री बस सहित चार वाहनों को आग लगाने की घटनाओं का मास्टरमाइंड था।

    डकैती – दिसंबर 2024 में थाना फरसेगढ़ क्षेत्र के ग्राम गुज्जाकोंटा में डकैती की वारदात को अंजाम दिया।

    मोबाइल टावर जलाना – चिन्नाकवाली (अप्रैल 2025), आदेड़ (मई 2024) और कांदुलनार (जून 2025) में संचार टावर जलाने की घटनाओं का संचालन किया, ताकि जनता के संपर्क तंत्र को बाधित किया जा सके।

    शिक्षादूतों का अपहरण और हत्या – वर्ष 2025 में नेशनल पार्क एरिया में पील्लूर एवं टेकामेटा के दो शिक्षादूतो का अपहरण कर हत्या करने की घटना में शामिल था।

    कन्ना उर्फ बुचन्ना की मौत से क्षेत्र में फैले आतंक का लंबा अध्याय समाप्त हुआ। घटनास्थल से बरामद दस्तावेज़ और डिजिटल सामग्री से पता चलता है कि उसका अर्बन नेटवर्क से गहरा संबंध था। पुलिस अब इस नेटवर्क के तार खंगालने में जुटी है।

        DVCM उर्मिला, पत्नी पापाराव (DKSZCM), निवासी चिंतलनार, जिला सुकमा। पदनाम: सचिव, पामेड़ एरिया कमेटी। इसपर 8 लाख रुपये का इनाम था।

    उर्मिला मोस्ट वांटेड माओवादी कैडर थी और पापाराव की पत्नी थी। वह पामेड़ एरिया कमेटी की सचिव थी और संगठन की सबसे हिंसक एरिया कमेटियों में सक्रिय रही। उसने माओवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया और PLGA बटालियन की रसद व्यवस्था संभाली। उसकी मौत से पामेड़ एरिया कमेटी और संगठन की आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा।

        ACM जगत तामो उर्फ मोटू, निवासी फुल्लोड़, थाना जांगला, जिला बीजापुर। पदनाम: एसीएम, मद्देड़ एरिया कमेटी। 5 लाख रुपये का इनाम था।
        PM देवे, निवासी मीनागट्टा, थाना पामेड़, जिला बीजापुर। पदनाम: पार्टी सदस्य, पामेड़ एरिया कमेटी। 2 लाख रुपये का इनाम।
        PM भगत, निवासी भैरमगढ़, जिला बीजापुर। पदनाम: पार्टी सदस्य, मद्देड़ एरिया कमेटी। 2 लाख रुपये का इनाम ।
        PM मंगली ओयाम, निवासी पेद्दोजोजेर, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर। पदनाम: पार्टी सदस्य। 2 लाख रुपये का इनाम।

    मुठभेड़ स्थल से बरामद सामग्री

        2 नग इंसास रायफल,05 मैग्जीन, 68 कारतूस
        1 नग 9mm काबाईन, 03 मैग्जीन, 22 कारतूस
        1 नग .303 रायफल, 01 मैग्जीन 13 कारतूस
        1 नग Single Shot Rifle,
        1 नग 12 बोर बंदूक, 08 कारतूस
        रेडियो, स्केनर, मल्टीमीटर, हेण्ड ग्रेनेड,सेफ्टी फ्यूज, माओवादी साहित्य, पोच, माओवादी वर्दी, मेडिकल सामग्री एवं अन्य सामग्री

    जनवरी 2024 से अब तक कुल 202 माओवादी ढेर

    पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में जिले में हुए अलग-अलग मुठभेड़ों में 144 माओवादी को मार गिराने में सुरक्षा बलों को सफलता मिली है । वही अलग अलग थाना क्षेत्रों में चलाये गये अभियान में 499 माओवादी गिरफ्तार हुए एवं 560 माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया ।

    जनवरी 2024 से अब तक जिले में चलाए गए माओवादी विरोधी अभियान में कुल 202 माओवादी मारे गए, 1002 माओवादी गिरफ्तार हुए और 749 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए।