• पराली जलाने में MP का बढ़ता प्रभाव: पंजाब-हरियाणा को कड़ी टक्कर, मामले तेजी से बढ़े

    भोपाल
     मध्य प्रदेश एक अनचाहे रिकॉर्ड की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। अपनी मौजूदा गति से यह जल्द ही धान की पराली जलाने के मामले में पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ सकता है। अकेले 11 नवंबर के दिन ही एक हजार से अधिक खेतों में पराली जलाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया हैं। यह उस दिन पूरे देश में सबसे अधिक संख्या थी।

    दरअसल, एक ही दिन सबसे अधिक खेतों में पराली जलाने की घटना की जानकारी सीआरईएएमएस कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस) की रिपोर्ट से सामने आई। इस रिसर्च को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली की तरफ से किया गया था।

    पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर एमपी
    15 सितंबर से 11 नवंबर के बीच, मध्य प्रदेश में पराली जलाने की कुल 3,569 घटनाएं दर्ज की गईं, जो पंजाब के 4,507 से थोड़ा ही पीछे है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 2,224, राजस्थान में 1,577 और हरियाणा (435) कुछ ही दूरी पर हैं।

    एमपी में तेजी से बढ़ रहे हैं मामले
    सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि रबी की फसल की बुआई नजदीक आते ही पराली जलाने की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है। प्रदेश की कुल 3,569 घटनाओं में से 2947 घटनाएं केवल पिछले सात दिनों में दर्ज की गईं, जबकि 4 नवंबर को यह संख्या केवल 622 थी।

    कुछ समय के लिए प्रदेश से आगे था पंजाब
    आंकड़ों से पता चलता है कि 5 नवंबर के बाद से देश में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले मध्य प्रदेश में ही दर्ज किए जा रहे हैं। केवल 9 नवंबर को एक बार प्रदेश को पछाड़ते हुए पंजाब ने कुछ समय के लिए इस अनचाही दौड़ में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया था।

    ऐसे बढ़ते गए आंकड़े
    मध्य प्रदेश में दैनिक घटनाओं में तेज़ी से वृद्धि देखी गई है। पहले 5 नवंबर को 131 घटनाएं, 6 नवंबर को 354, 7 नवंबर को 237, 8 नवंबर को 353, 9 नवंबर को 398, 10 नवंबर को 422 और अंततः 11 नवंबर को 1,052 घटनाएं सामने आईं। यह उस दिन देश भर में दर्ज की गई सभी कृषि आग की घटनाओं का लगभग एक-तिहाई है।

    विशेषज्ञ इस वृद्धि का श्रेय मध्य प्रदेश में धान की कटाई में देरी को देते हैं, जो आमतौर पर अक्टूबर के अंत में शुरू होती है और नवंबर तक जारी रहती है, जो पंजाब और हरियाणा की तुलना में बहुत देर से होती है, जहां कटाई अक्टूबर के अंत में चरम पर होती है। परिणामस्वरूप, मध्य प्रदेश में पराली जलाने की लहर ठीक उसी समय शुरू हो जाती है जब उत्तरी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आने लगती है।

    ये जिले हैं हॉस्टस्पॉट
    नर्मदापुरम, सिवनी, गुना, अशोकनगर और दतिया जैसे जिले हॉटस्पॉट के रूप में उभर रहे हैं। पिछले साल भी, मध्य प्रदेश पराली जलाने के मामले में देश में शीर्ष पर था, जहां 15 सितंबर से 22 नवंबर के बीच 13,309 घटनाएं दर्ज की गईं, जो पंजाब से भी आगे थी। हालांकि प्रशासन ने इसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

    कई जिलों में दर्ज हुई एफआईआर
    छिंदवाड़ा और सागर सहित कई जिलों में पराली जलाने के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। वहीं, रीवा में प्रशासन ने पराली जलाने की सूचना मिलने पर एफआईआर के अलावा 15,000 रुपये का जुर्माना लगाने की घोषणा की है। वहीं, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जब तक कड़े प्रतिबंध और किसान समर्थन उपायों को तेजी से लागू नहीं किया जाता, मध्य प्रदेश एक बार फिर भारत में पराली जलाने वाले शीर्ष राज्य के रूप में उभर सकता है।

  • एम्स में नई उम्मीद: लंग्स ट्रांसप्लांट योजना तैयार, डॉक्टर ट्रेनिंग पूरी, मंजूरी का इंतजार

    भोपाल 
    एम्स भोपाल फेफड़ों के प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू होने की दिशा में महत्वपूर्ण उठाने जा रहा है। गंभीर फेफड़े संबंधी रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह बड़ी राहत साबित हो सकती है। अस्पताल में लंग्स ट्रांसप्लांट शुरू करने के लिए आवश्यक स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (SOTO) ने साइट विजिट पूरी कर ली है। टीम की रिपोर्ट सरकार को भेजे जाने के बाद अंतिम अनुमति जारी होगी, जिसके बाद यह सुविधा शुरू की जा सकेगी। अनुमति मिलने के बाद एम्स भोपाल मध्य भारत का पहला सरकारी संस्थान बनेगा, जहां हार्ट, किडनी, बोन मैरो और लंग्स चारों बड़े प्रत्यारोपण एक ही जगह उपलब्ध होंगे। 

    25 लाख से 35 लाख तक होते हैं खर्च
    भारत में निजी अस्पतालों में फेफड़े के प्रत्यारोपण की लागत आमतौर पर 25 लाख से 35 लाख के बीच होती है, हालांकि यह लागत 15.5 लाख से शुरू होकर 40 लाख तक भी जा सकती है। यह खर्च कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि एकल या दोहरे प्रत्यारोपण, अस्पताल और सर्जन की फीस, और सर्जरी के बाद की देखभाल। एम्स में सुविधा शुरू होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। 

    लंग्स ट्रांसप्लांट टीम ने विशेष प्रशिक्षण पूरा किया
    लंग्स प्रत्यारोपण अत्यंत जटिल सर्जरी मानी जाती है और इसे कार्डियक-वैस्कुलर सर्जन ही करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए एम्स भोपाल की टीएसवी टीम चेन्नई में विशेष प्रशिक्षण से होकर आई है। वहां टीम ने हार्ट और लंग्स दोनों ट्रांसप्लांट की तकनीक में महारत हासिल की। जानकारी के मुताबिक एम्स में पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। चार बच्चों को चयनित किया गया है और प्रारंभिक मेडिकल जांच चल रही है। सभी रिपोर्ट सामान्य होने के बाद ऑपरेशन शुरू किया जाएगा। 

    प्रत्यारोपण के लिए हाई-टेक मशीनें तैयार

    ECMO मशीन: हार्ट या लंग्स कमजोर होने पर जीवनरक्षक सपोर्ट

    हार्ट-लंग मशीन: ट्रांसप्लांट के दौरान अंगों की कार्यप्रणाली बनाए रखने के लिए

    IABP मशीन: हार्ट ट्रांसप्लांट के समय हृदय कमजोर होने पर अतिरिक्त सहारा

     

  • सर्द हवाओं का असर: मध्यप्रदेश के 13 जिलों में शीतलहर, राजगढ़ और इंदौर में तापमान 7 डिग्री के करीब

    भोपाल
     उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में जारी बर्फबारी का सीधा असर मध्य प्रदेश के मौसम पर दिख रहा है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं ने प्रदेश के तापमान में भारी गिरावट ला दी है। भोपाल, इंदौर, राजगढ़ समेत कई जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और मौसम विभाग ने 13 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है।
    कई जिलों में पारा 7 डिग्री के नीचे

    एमपी के कई इलाकों में बुधवार-गुरुवार की रात पारा 1 से 2 डिग्री तक गिर गया। राजगढ़ सबसे ठंडा रहा, जहां तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इंदौर में 7.6 डिग्री, भोपाल में 8.2 डिग्री, और जबलपुर में 9.9 डिग्री तापमान रहा। ग्वालियर 11.4 डिग्री और उज्जैन 10.7 डिग्री तक पहुंचा। शहडोल के कल्याणपुर में सबसे कम 6.9 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। पचमढ़ी, जो प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है, वहां तापमान 13.4 डिग्री दर्ज किया गया।

    बुधवार-गुरुवार की रात मध्य प्रदेश के कई शहरों के तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। इंदौर में 7.6 डिग्री, भोपाल में 8.2 डिग्री तो जबलपुर में पारा 9.9 डिग्री रहा। ग्वालयर में 11.4 डिग्री और उज्जैन में 10.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। सबसे ठंडा राजगढ़ रहा। यहां तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस रहा।

    वहीं, उमरिया और छतरपुर के नौगांव में 8.4 डिग्री, रीवा में 8.9 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री, बालाघाट के मलाजखंड में 9.8 डिग्री, मंडला में 10.1 डिग्री, बैतूल-छिंदवाड़ा में 10.2 डिग्री और दतिया में तापमान 10.9 डिग्री सेल्सियस रहा। बाकी शहरों में भी पारा लुढ़का रहा। इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में 13.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    पहाड़ी राज्यों से आ रही बर्फीली हवा मौसम विशेषज्ञ पीके शाह ने बताया- इस बार हिमालय क्षेत्र में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक सप्ताह पहले ही एक्टिव हो गए। इस वजह से जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी हो रही है। उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली हवा का असर एमपी में भी पड़ रहा है। जिससे ठंड का असर तेज हो गया है।

    मौसम एक्सपर्ट के अनुसार, कोल्ड डे तब होता है, जब न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम होता है और अधिकतम तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री से अधिक गिर जाता है।

    इस बार 25 साल का रिकॉर्ड टूटा मध्य प्रदेश में नवंबर के दूसरे ही सप्ताह में कड़ाके की ठंड से कई शहरों में रिकॉर्ड टूट गए हैं। राजधानी भोपाल में नवंबर का पिछले 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया। यहां न्यूनतम तापमान 8 डिग्री पहुंच चुका है, जो साल 2015 के बाद सबसे कम है।

    इंदौर में पारा 7 डिग्री तक जा चुका है। इंदौर में पिछले 25 साल में नवंबर में इतनी सर्दी कभी नहीं पड़ी। यहां नवंबर की ठंड का ओवरऑल रिकॉर्ड 1938 का है, जब पारा 5.6 डिग्री पर पहुंचा था।

    दिन में भी ठंडक, पारा लुढ़का रात के अलावा दिन में भी ठंडक घुलने लगी है। मंगलवार को ज्यादातर शहरों में पारा 28 डिग्री सेल्सियस से नीचे ही रहा। मौसम विशेषज्ञ शाह ने बताया कि दिन में धूप निकलने से पारा बढ़ा है। धूप न निकलने की स्थिति में दिन के तापमान में भी गिरावट दर्ज हो सकती है।

    नवंबर में तेज ठंड का ट्रेंड प्रदेश में नवंबर में पिछले 10 साल से ठंड के साथ बारिश का ट्रेंड भी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम है। वहीं, बारिश के लिहाज से अक्टूबर का महीना उम्मीदों पर खरा उतरा है। इस महीने औसत 2.8 इंच पानी गिर गया, जो सामान्य 1.3 इंच से 121% ज्यादा है।

    भोपाल में 30 अक्टूबर को दिन का तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 25 साल में अक्टूबर का यह सबसे ठंडा दिन था। उज्जैन, छतरपुर, नरसिंहपुर समेत कई शहरों में पारा 24 डिग्री के नीचे ही रहा।

    नवंबर में ऐसा रहेगा मौसम मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में ठंड का असर बढ़ेगा। हुआ भी वैसा ही। पारे में खासी गिरावट देखने को मिल रही है। खासकर ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में, जहां उत्तरी हवाएं सीधी आती हैं, वहां तापमान और भी लुढ़केगा। ग्वालियर में 56 साल पहले नवंबर में रात का टेम्प्रेचर रिकॉर्ड 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है।

    उज्जैन में 52 साल पहले न्यूनतम पारा रिकॉर्ड 2.3 डिग्री तक जा चुका है।

    जानिए, नवंबर में 5 बड़े शहरों का मौसम…

    भोपाल: 10 साल में 3 बार बारिश हो चुकी नवंबर में भोपाल में रात का तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। पिछले 10 साल से ऐसा ही ट्रेंड रहा है। इस बार भी दूसरे सप्ताह से पारा तेजी से लुढ़केगा। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल में नवंबर में रात का तापमान 6.1 डिग्री तक पहुंच चुका है। यह 30 नवंबर 1941 को दर्ज किया गया था।

    यहां इस महीने बारिश होने का ट्रेंड भी है। 10 साल में तीन बार बारिश हो चुकी है। साल 1936 में महीने में साढ़े 5 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है।

    अगले चार दिन भी रहेगा ठंड का असर

    मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले चार से पांच दिन तेज ठंड और शीतलहर का असर जारी रहेगा। गुरुवार को जिन जिलों में अलर्ट जारी है। उनमें भोपाल, इंदौर, राजगढ़, सीहोर, शाजापुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, उमरिया और सिवनी शामिल है।
    पश्चिमी विक्षोभ के असर से बड़ी ठंड

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार हिमालय क्षेत्र में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सामान्य से एक सप्ताह पहले सक्रिय हो गया। इससे पहाड़ों पर लगातार बर्फबारी हो रही है। इसी वजह से उत्तर दिशा से ठंडी हवाएं सीधे मध्य प्रदेश की ओर आ रही हैं, जिससे दिन और रात दोनों में ठंडक बढ़ गई है।
    25 साल में पहली बार नवंबर में इतनी ठंड

    राजधानी भोपाल में नवंबर का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री पहुंच गया है, जो पिछले 10 सालों में सबसे कम है। वहीं इंदौर में पारा 7 डिग्री तक गिरा, यह पिछले 25 साल में नवंबर का सबसे ठंडा तापमान है। मौसम विभाग के अनुसार, इंदौर में नवंबर का अब तक का न्यूनतम रिकॉर्ड 1938 में 5.6 डिग्री रहा था।
    दिन में भी नहीं मिली राहत

    इस बार दिन के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। ज्यादातर शहरों में अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि, अगर बादल छाए रहे और धूप नहीं निकली तो दिन में भी कोल्ड डे की स्थिति बन सकती है।
    समय से पहले आई शीतलहर

    आमतौर पर मध्य प्रदेश में नवंबर के मध्य या आखिरी सप्ताह में ठंड शुरू होती है, लेकिन इस बार पहले सप्ताह से ही शीतलहर का असर दिखने लगा है। पिछले 50 सालों के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में तापमान आमतौर पर 6-7 डिग्री तक महीने के अंत में गिरता है, मगर इस बार पहले ही पखवाड़े में यह स्तर देखने को मिल रहा है।
    ठंड से स्कूलों के समय में बदलाव

    बढ़ती ठंड को देखते हुए अनूपपुर, रीवा और देवास जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। प्रशासन ने बच्चों को ठंड से बचाने के लिए सुबह के समय की छुट्टियां देर से शुरू करने का निर्देश दिया है।

  • 16 नवंबर के विरोध दिवस को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट ने किया कड़ा आदेश, कानून-व्यवस्था पर फोकस

    ग्वालियर 

    प्रदेश में एससी एसटी एक्ट में संशोधन की मांग करते हुए ग्वालियर में आगामी 16 नवंबर को प्रस्तावित विरोध दिवस के दौरान कानून व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि विरोध दिवस पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी गृह विभाग की है। युगलपीठ ने जिला कलेक्टर ग्वालियर को निर्देशित किया है कि वह स्थानीय मीडिया को निर्देशित करें कि विरोध प्रदर्शन के संबंध में अनावेदक तथा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष का विरोध प्रदर्शन के आह्वान संबंधित समाचार का प्रकाशन आगामी आदेश तक नहीं करें।

    नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाज पांडे की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर हाईकोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने 16 नवंबर को विरोध दिवस घोषित किया है। इस दौरान धरना-प्रदर्शन का आयोजन भी होगा। विरोध दिवस के दौरान शहर और हाईकोर्ट परिसर में कानून व्यवस्था बिगडऩे की संभावना है। याचिकाकर्ता तर्क दिया गया कि पूर्व में भी डॉ. भीम राव आंबेडकर की मूर्ति स्थापना को लेकर भी कानून व्यवस्था बिगड़ी थी। ग्वालियर स्थित उच्च न्यायालय परिसर और ग्वालियर शहर में हो रही कुछ घटनाओं के कारण आम लोगों के जीवन और संपत्ति को खतरा है। अनावेदक में एक हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होने ही अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन का आह्वान कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस विरोध प्रदर्शन से अशांति फैलने की संभावना है।

    याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2018 की शुरुआत में ग्वालियर में विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके कारण कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी और अनिल मिश्रा उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ग्वालियर के तत्कालीन अध्यक्ष थे। आह्वान और हाल ही में घटित कुछ घटनाओं को देखते हुए विरोध दिवस के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। याचिका में ग्वालियर स्थित उच्च न्यायालय परिसर में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने के संबंध में निर्देश प्रदान करने का आग्रह किया गया है। याचिका में गृह विभाग के प्रमुख सचिव, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, कलेक्टर, ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा, भीम आर्मी जय भीम संगठन और अन्य को अनावेदक बनाया गया है। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के बाद अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए उक्त आदेश जारी किये। याचिका पर अगली सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने पैरवी की। 

  • मध्य प्रदेश में किसानों के खाते में आई 233 करोड़ की राशि, सीएम मोहन यादव ने की योजना की राशि वितरित

     देवास
     सीएम डॉ. मोहन यादव ने भावांतर योजना के तहत मध्य प्रदेश के 1 लाख 33 हजार सोयाबीन किसानों के खाते में 233 करोड़ रुपये राशि भेजी। सीएम ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां भावांतर योजना लागू की गई। उन्होंने कहा- किसान को फसलों का सही दाम दिलवाना सरकार का लक्ष्य। किसानों का भला करेंगे। दूध उत्पादन को प्रोत्साहन किया जाएगा, उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

    सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा- 1 दिसंबर को गीता जयंती मनाएंगे। नगर पालिका, नगर परिषद स्तर पर गीता भवन खोलने वाले हैं। आने वाला साल कृषि आधारित उद्योग के लिए जाना जाएगा। गेहूं धीरे धीरे 2700 किया जाएगा। कांग्रेसी रोते रहेंगे… हम योजनाओं का लाभ देते रहेंगे। सीमा पर जवान, खेत पर किसान दोनों बराबर।

    किसानों की मेहनत से मध्य प्रदेश देश में सोयाबीन स्टेट बना। हर साल केंद्र सरकार समर्थन मूल्य बढ़ा रही है। कांग्रेस अगले 50 साल सत्ता से बाहर रहेगी। बिहार में चुनाव हो रहा था राहुल गांधी पचमढ़ी में छुट्टी मना रहे थे। देवास को 188 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दे रहे हैं। प्रदेश में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई योजना चला रहे हैं। घर आंगन में गाय, बछड़े होने से आनंद आता है।
    मुख्यमंत्री ने कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी का किया अवलोकन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस लाइन स्थित कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कृषि यंत्रों में रोटावेटर, ड्रोन, सुपर सीडर, ब्रोड बेड फरो प्लांटर, मल्चर, फर्टीलाइजर ब्राड कास्टर, भूसा लोडर, लेजर एंड लेवलर, स्वचलित टूलबार, राउंड बेलर, स्लेशर, स्टॉरीपर, रीपर कम बाइंडर, स्प्रे पंप, सीड ग्रेडर विथ कन्वेयर, डिस्क प्लाउ सहित अन्य यंत्रों का अवलोकन किया। इस साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा लगाई गई जैविक खेती प्रदर्शनी, प्राकृतिक खेती की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा किसानों से चर्चा की।

  • आज से लागू हुआ भावांतर योजना का बढ़ा हुआ मॉडल रेट, 4,130 रुपए तय

    भोपाल

    भावांतर योजना 2025 अंतर्गत  सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए आज 13 नवंबर को 4130 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी।

    मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी रही। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए तथा 12 नवंबर को 4077 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी हुआ।

  • पूर्व सीएम के बयान पर डिप्टी सीएम साव का वार: कहा, धान खरीदी पर कांग्रेस कर रही भ्रामक राजनीति

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी की शुरुआत होने वाली है. लेकिन इसकी शुरुआत से पहले ही विपक्ष और सरकार के बीच सियासत तेज हो गई है. डिप्टी सीएम अरुण साव ने आज मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व सीएम भूपेश बघेल के दावों को खारिज करते हुए जमकर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि “ठगने और लूटने वाली पार्टी कांग्रेस है. हमारी सरकार किसान हितैषी है और सभी वादों को पूरा कर रही है.

    बता दें, पूर्व सीएम बघेल ने धान खरीदी को लेकर दावा किया है कि धरातल पर धान खरीदी की कोई तैयारी नहीं है. इधर एग्री स्टैक पोर्टल में पंजीयन की दिक्कतों से पंजीयन के लिए 7 लाख किसान परेशान हैं. पंजीयन के लक्ष्य से ही समझ आ रहा है कि सरकार ही नहीं चाहती कि पूरे किसान धान बेचें, इसलिए पेचीदगियां पैदा की गई हैं.

    डिप्टी सीएम अरुण साव ने पूर्व सीएम बघेल के इस बयान का पलटवार करते हुए कहा कि “कांग्रेस ने बोनस देने का वादा किया था, लेकिन उसे 5 साल तक निभाया नहीं. किस्तों में पैसा दिया और चौथी किस्त में कटौती कर पैसा खा गई.” उन्होंने आगे कहा कि धान खरीदी निर्धारित तिथि पर सुचारू रूप से शुरू होगी, किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी.

    देर रात हुई मंत्रियों की बैठक
    भाजपा प्रदेश कार्यालय में बीती रात मंत्रियों की एक अहम बैठक बुलाई गई. बैठक को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी के कई कार्यक्रम लगातार जारी हैं और कार्यकर्ताओं व नेताओं का कार्यालय आना-जाना नियमित रूप से चलता रहता है.

    SIR पर कांग्रेस की निगरानी को लेकर कसा तंज
    इस बीच, SIR प्रक्रिया को लेकर आज कांग्रेस की निगरानी समिति की बैठक प्रस्तावित है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अरुण साव ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी को न संविधान पर भरोसा है, न संवैधानिक संस्थाओं पर. उनका भरोसा सिर्फ एक परिवार और उसके आदेशों पर है. SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है, पहले भी होती रही है. कांग्रेस अपने ही जनाधार पर सवाल उठा रही है.”

    उन्होंने आगे कहा- “कांग्रेस अब वोट चोरी, मतदाता सूची और EVM में गड़बड़ी जैसे मुद्दे उठाकर जनता को गुमराह कर रही है. कांग्रेस अब जनता से कट चुकी है, उसके अपने कार्यकर्ता भी उससे दूर जा रहे हैं,”

  • इलाके में दहशत: परिवार को रस्सी से बांधकर बदमाशों ने लाखों का माल पार किया

    कोरबा

    कोरबा में  बालको थाना क्षेत्र अंतर्गत लगभग जिले से 10 किलोमीटर दूर ग्राम तराईडांड में  शत्रुघ्न दास का परिवार निवास करता है जहां शत्रुघ्न दास घर पर राशन दुकान का संचालन करता है इसके अलावा खेती किसानी भी करता है गांव का एक बड़ा किस है जहां आर्थिक रूप से  मजबूत है।

    बताया जा रहा है कि शत्रुघ्न दास के परिवार में बेटा बहू और भाई समेत लगभग 11 सदस्य हैं जो सभी रात 10:00 बजे खाना खाने के बाद सभी अपने-अपने कमरे में सोने के लिए चले गए। रात लगभग 1:00 बजे उसके घर के पीछे हिस्से से दीवार बांधकर लगभग 10 से 15 लोग घर के अंदर घुसे जिनके पास धारदार हथियार था शत्रुघ्न दास को लगा कि कोई कुत्ता या जानवर होगा जो अंदर आया होगा और वह कमरे से बाहर निकाल कर देखा तो हथियार से लेस लोग खड़े हुए थे जहां उन्हें हथियार की नोक पर आवाज देने या किसी तरह की हरकत करने पर जान से मारने की धमकी देने लगे सभी को हथियार की नोक पर सभी को घर पर रस्सी से बांध दिया। और घर पर रखें लगभग डेढ़ लाख नगदी रकम समेत सोने चांदी के जेवरात समेत सब ले भागे। रात 3:00 बजे लगभग किसी तरह सभी ने एक दूसरे के सहयोग से रस्सी को खोला और गांव वालों की इसकी जानकारी दी इसके बाद हड़कंप मच गया।

    इसकी शिकायत सुबह होने पर संबंधित बालको थाना पुलिस को दी गई जहां उच्च अधिकारियों को निर्देश पर कोरबा सीएसपी भूषण एक्का मौके पर पहुंचे और जांच कार्रवाई शुरू की जहां शत्रुघ्न दास और उनके परिजनों का बयान दर्ज किया गया। इस घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण दहशत में है। इस मामले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतीश ठाकुर ने बताया कि मकान मालिक की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है और सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है।

  • धान तस्करी पर पुलिस का शिकंजा: चिल्फी में 647 क्विंटल अवैध धान के साथ दो ट्रक ज़ब्त

    कबीरधाम

    15 नवंबर से शुरू होने वाले धान खरीदी सीजन के मद्देनजर जिले के सीमावर्ती इलाकों में अवैध धान परिवहन की रोकथाम के लिए प्रशासन ने चौकसी तेज कर दी है। सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित किए गए हैं और निगरानी के लिए राजस्व, पुलिस, मंडी और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम तैनात की गई हैं।

    इसी अभियान के तहत चिल्फी घाटी में संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए दो ट्रक में भरे कुल 647 क्विंटल अवैध धान को जब्त किया। नायब तहसीलदार ऋतु श्रीवास ने बताया कि जांच के दौरान ट्रक को रोककर पूछताछ की गई। वाहन चालकों ने बताया कि धान उत्तर प्रदेश से लाया जा रहा था, लेकिन वे इस संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। संयुक्त टीम द्वारा धान को जब्त कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर गोपाल वर्मा के निर्देश पर जिले में धान खरीदी के दौरान निगरानी और सघन जांच अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि जिले में अवैध धान परिवहन को रोका जा सके।

  • सरोज देवी ने किया देहदान, मेडिकल छात्रों के लिए बनी शिक्षा और प्रेरणा का स्रोत

    • डॉक्टर बनने वाले छात्र सीखेंगे सरोज देवी की देह से
    •  सरोज देवी के देहदान को सबने प्रेरणादायक कहा
    • देहदान को सभी ने अत्यंत प्रेरक बताया

    कांकेर
     शहर के बरदेभाठा निवासी सरोज देवी शर्मा (82) और पत्रकार स्व. बंशीलाल शर्मा की धर्मपत्नी का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को निधन हो गया। के अनुरूप परिजनों ने उनकी इच्छा सरोज देवी शर्मा उनका पार्थिव शरीर कांकेर मेडिकल कॉलेज में अध्ययन के लिए दान किया।   

    साल 2020 में खुले कांकेर मेडिकल कॉलेज के इतिहास में यह तीसरा देहदान है। सरोज देवी शर्मा समेत अब तक तीन लोगों के पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को सौंपे जा चुके हैं। मेडिकल से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा मृत देह मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए साइलेंट टीचर की तरह होती हैं। वे इसी से शारीरिक अंगों पर प्रैक्टिकल कर दूसरों को जीवन देना सीखते हैं।

    स्वर्गीय सरोज देवी शर्मा का निधन 11 नवंबर को 1.45 बजे हुआ। परिजनों ने उनकी इच्छा अनुरूप आपसी सहमति से सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करते अपनी माता के पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज को दान करने निर्णय लिया था। परिजनों ने कुछ दिन पहले ही फॉर्म भरा था। उनके पुत्र और वरिष्ठ पत्रकार राजेश शर्मा ने बताया हमारी माता के स्वभाव में ही था कि वे हमेशा लोगों की मदद करने आगे रहती थीं। उनकी इच्छा भी यही थी कि वे मृत्यु के बाद भी किसी के काम आ सकें। उनकी इसी भावना को देखते हुए पूरे परिवार ने आपस में सलाह मशवरा कर उनका पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज कांकेर के एनाटॉमी विभाग को मेडिकल अनुसंधान के लिए दान करने का फैसला लिया। विदित हो कि सरोज देवी शर्मा धार्मिक प्रवृत्ति की थीं और सामाजिक कामों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती थीं। उनके पति स्व. बंशीलाल शर्मा बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार थे। देशबंधु और दैनिक भास्कर जैसे संस्थाओं में अपनी सेवाएं दे चुके थे।

    परिवार से और भी भर चुके हैं देहदान का फॉर्म
    इस परिवार से सरोजदेवी शर्मा के देवर बिलासपुर निवासी वरिष्ठ पत्रकार नथमल शर्मा पहले ही देहदान करने फॉर्म भर चुके हैं। उनका मानना है इंसान को जीवित रहते लोगों के काम आना ही चाहिए और मरणोपरांत भी काम आते रहना चाहिए।

    देहदान एक महादान है

    विधायक आशाराम नेताम ने कहा एक अच्छी सोच होने के साथ ही यह प्रेरणादायक भी है। मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों को अध्ययन के लिए मृत देह की जरूरत होती है। मृत शरीर का मेडिकल की पढ़ाई में एक बड़ा योगदान होना होता है। देहदान एक महादान है। देहदान एक सामाजिक उत्तरदायित्व मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. यास्मिन खान ने कहा कि देहदान सामाजिक उत्तरदायित्व भी है, जो चिकित्सा शिक्षा और शोध को आगे बढ़ाने में मदद करता है।

    समाज में अच्छे डॉक्टर देने के लिए देहदान जरूरी
    मेडिकल कॉलेज में छात्रों की पढ़ाई व समाज के अच्छे डॉक्टर देने के लिए देहदान जरूरी है। छात्रों को अच्छे से पढ़ाई करने मृत देह के विकल्प में दूसरी कोई चीज नहीं है। उससे ही छात्र सीखते हैं। मृत देह छात्रों के लिए साइलेंट टीचर होती हैं।

    एनाटॉमी विभाग के प्रो. स्वयं आए देह लेने

    आज सवेरे राजेश शर्मा के निवास से अंतिम यात्रा प्रारम्भ हुई । बरदेभाटा चौक पर परिजनों एवं नगर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में सरोज देवी का पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को सौप दिया गया जिसे लेने एनाटॉमी विभाग के प्रो डा. विश्वास स्वयं अपनी टीम के साथ पहुंचे थे ।
    तत्पश्चात् वहीं श्रद्धांजलि सभा हुई । जिसमें शिक्षा विद सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने शर्मा परिवार द्वारा इस देहदान के निर्णय को अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक बताया । इससे मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को अध्ययन करने में मदद मिलेगी । तत्पश्चात् दो मिनट का मौन रख कर मृतात्मा को श्रद्धांजलि दी गई ।

  • किसानों के खाते में आएगी राहत: सोयाबीन उत्पादकों को CM द्वारा 233 करोड़ की योजना राशि दी जाएगी

    भोपाल 
    मध्य प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी। आज 13 नवम्‍बर गुरुवार को सीएम डॉ. मोहन यादव भावांतर योजना (Bhavantar Yojana) के तहत प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक 1.33 लाख किसानों के खातों में राशि भेजेंगे। बता दें कि देवास में भावांतर योजना का राज्य स्तरीय उत्सव कार्यक्रम होने जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सीएम मोहन यादव 233 करोड़ रुपए की भावांतर राशि का अंतरण करेंगे। इसके अलावा देवास जिले के 183 करोड़ 25 लाख रुपए की लागत के 8 विकास कार्यों का भूमि-पूजन भी सीएम करेंगे।

    थोड़ी देर में देवास पहुंचेंगे सीएम

    सीएम मोहन यादव थोड़ी देर में देवास पहुंचेंगे। इससे पहले वे सीएम हाउस में वीडियो कॉन्फ्रेंस लेंगे। फिर 11.50 बजे देवास पहुंचेंगे। इस कार्यक्रम के बाद वे दोपहर 01.35 बजे देवास से इंदौर के लिए रवाना हो जाएंगे। यहां वे टेक्नो ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में शामिल होंगे।

    यहां जानें भावांतर योजना का मॉडल रेट, कितने मिलेंगे पैसे

    भावांतर योजना 2025 (bhavantar yojana) के अंतर्गत सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए बुधवार 12 नवंबर को 4077 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है, जिन्होंने सोयाबीन को उपज मंडियों में विक्रय किया है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी है। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को जारी किया गया था, यह 4020 रुपए प्रतिक्विंटल था। फिर 8 नवंबर को यह 4033 रुपए किया गया, 9 और 10 नवंबर को यह 3 रुपए बढ़कर 4036 रुपए प्रतिक्विंटल हो गया। वहीं 11 नवंबर को मॉडल रेट 4056 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया।

    अब तक 9.36 किसानों का रजिस्ट्रेशन

    मध्य प्रदेश में सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए शुरू की गई भावांतर योजना के तहत 3 से 17 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया संपन्न की गई। इस दौरान प्रदेश के 9.36 पात्र किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया। प्रदेश के उज्जैन, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, देवास, सागर समेत 7 जिलों से 50-50 हजार किसानों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इसी तरह 21 जिलों से 10-10 हजार से अधिक किसान इस योजना का लाभ लेने रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं।

    ऐसे समझें क्या है भावांतर योजना का गणि

    प्रदेश में 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक सोयाबीन की विक्रय करने की अवधि तय की गई है। यदि किसानों की सोयाबीन एमएसपी से कम कीमत पर बिकती है, तो किसानों को होने वाले घाटे की भरपाई मध्य प्रदेश सरकार भावांतर योजना के माध्यम से करेगी। फसल के विक्रय मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP के अंतर की राशि सीधे राज्य सरकार देगी।

    हेल्प लाइन नंबर जारी, परेशानी या समस्या हो तो यहां कर सकेंगे बात

    भावांतर योजना को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने के लिए किसानों, व्यापारी संगठनों, मंडी बोर्ड, मंडी समितियों के अधिकारियों की सुविधा के लिए भावांतर हेल्पलाइन कॉल सेंटर भी शुरू किया गया है। यह सेंटर सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक निरंतर कार्य करेगा। योजना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी लेने या समस्या पर बात इस नंबर 0755-2704555 पर की जा सकेगी।

  • अद्वैत के ज्ञान से ही भविष्य की दिशा बदली जा सकती है : स्वामी शुद्धिदानंद

    ब्राज़ील के पद्म जोनास मसेट्टी आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा आयोजित प्रेरणा संवाद में हुए शामिल

    वेदांत केवल भारत के लिए नहीं बल्कि समस्त मानवता के लिए : पद्म आचार्य जोनास मसेट्टी

    भारतीय संस्कृति जीवंत संस्कृति है : जोनास मसेट्टी

    अद्वैत के ज्ञान से ही भविष्य की दिशा बदली जा सकती है : स्वामी शुद्धिदानंद

    अद्वैत दर्शन मानवता के कल्याण का दर्शन है : स्वामी शुद्धिदानंद

    आईआईटी इंदौर में ‘भावी विश्व का दर्शन ’ विषय पर हुआ संवाद

    ब्राजील के जोनास ने जैसे ही. ..

    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि… गाया तो तालियों से गूँज उठा सभागार

    भोपाल

    आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा उपनिषदों में निहित अद्वैत सिद्धांत को जन-जन तक पहुँचाने के लिये शंकर व्याख्यानमाला, एकात्म संवाद एवं प्रेरणा संवाद जैसे विविध प्रेरक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाता है। इसी श्रृंखला में बुधवार को भारतीय प्रोधौगिकी संस्थान (IIT) इंदौर में प्रेरणा संवाद हुआ। इसमें ‘भावी विश्व का दर्शन’ विषय पर ब्राज़ील के पद्म आचार्य जोनास मसेट्टी और स्वामी शुद्धिदानंद (अध्यक्ष, अद्वैत आश्रम मायावती) ने संवाद किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक, प्रोफेसर, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

    वेदांत और संस्कृति के माध्यम से विश्व को पुनः जोड़ना आवश्यक : जोनास

    आचार्य जोनास ने युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज की दुनिया में, विशेषकर पाश्चात्य समाज में, लोग धन और सुख की खोज में लगे हैं, पर आत्मिक मूल्य भूल गए हैं। हमारा उद्देश्य वेदांत के ज्ञान को पुनर्जीवित करना और उसे धर्म नहीं, बल्कि मानवता का सार्वभौमिक दर्शन बनाकर प्रस्तुत करना है, जो एक बेहतर व्यक्ति और एक बेहतर समाज का निर्माण करे। भारत अपने उत्सवों, कहानियों, संगीत और कला के माध्यम से संस्कार और अध्यात्म को जन-जन तक पहुँचा सकता है। कल्पना कीजिए, अगर बच्चे उपदेशों से नहीं, बल्कि एनिमेटेड कथाओं और नैतिक कहानियों से मूल्य सीखें, तो यह शिक्षा हृदय में बस जाएगी। वेदांत अलगाव नहीं, एकत्व का दर्शन है। कोई भी अन्य परंपरा इतनी स्पष्टता से यह नहीं कहती कि 'मानवता एक है', जैसा हमारे उपनिषद कहते हैं: “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव।” यह भारत की आत्मा है, और यह केवल भारत के लिए नहीं ,समस्त मानवता के लिए है। हमें विश्व की सभी संस्कृतियों को इस दृष्टि से जोड़ना है। भारतीय संस्कृति एक जीवंत संस्कृति है। यह ज्ञान (साधना), करुणा और समझ की संस्कृति है।

    अद्वैत का विचार मानवता के लिए सौगात : स्वामी शुद्धिदानंद

    स्वामी शुद्धिदानंद ने कहा कि अद्वैत का विचार मानवता के लिए सौगात है। 1200 साल पहले जब लोग स्वार्थ की आंधी में लिप्त हो गए थे और मानव मानवता से विमुख हो गया था उस समय आचार्य शंकर का जन्म होता है और उन्होंने संस्कृति में पहले से मौजूद एकात्म के दर्शन से इस समस्या का समाधान किया। पिछले 200 वर्षों में मानवता विभिन्न विचारधाराओं के साथ प्रयोग कर रही है। उन सभी विचारधाराओं के केंद्र में अर्थ का अर्जन है, और जिन देशों में विचार का केंद्र है, वहां पर मनोवैज्ञानिक समस्या सर्वाधिक है। इस विश्वव्यापी समस्या के समाधान के रूप में भारत का अद्वैत दर्शन सामने आता है।

    एकात्म धाम प्रकल्प प्रेरक है

    संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए कोई दर्शन यदि खोजा जाए तो वो अद्वैत दर्शन है। वर्तमान का हिंदू धर्म प्राचीन काल का वैदिक धर्म है। वेद मनुष्य के बाहरी और आंतरिक कल्याण का उपदेश देते है। वेद का संदेश है कि हर आत्म में दिव्यता है और इस दिव्यता का अनुभव करके शक्ति, स्वतंत्रता और निर्भयता को मनुष्य ग्रहण कर सकता है। आत्म संयम के अभ्यास से हम मनुष्य में मौजूद दिव्यता का अनुभव कर सकते है। स्वामी विवेकानंद ने इस दर्शन को विश्व पटल पर प्रस्तुत किया।

    मध्यप्रदेश शासन के एकात्म धाम प्रकल्प से अन्य प्रदेश सरकारों को प्रेरणा लेनी चाहिए। हमें अपने स्वरूप का ज्ञान पाकर विश्व के कल्याण की कामना करनी चाहिए।इस अद्वैत के ज्ञान से ही भविष्य की दिशा बदली जा सकती है और मानवता के उद्धार के लिए कदम बढ़ाए जा सकते है

    सुप्रसिद्ध गायक राहुल आर. वेल्लाल आचार्य शंकर विरचित स्तोत्रों का किया गायन

    कार्यक्रम में कर्नाटक के सुप्रसिद्ध गायक राहुल आर. वेल्लाल आचार्य शंकर विरचित स्तोत्रों एवं भक्ति पदों का सुमधुर गायन किया। उन्होंने गणेश पँचरत्नम,शिव पंचाक्षर स्तोत्र, शिवाष्टकम्, भवानी अष्टक भज गोविन्दम,काल भैरवाष्टक का गान किया।

    राहुल के गायन से मंत्रमुग्ध हुए श्रोता

    राहुल आर. वेल्लाल कर्नाटक संगीत के विश्वप्रसिद्ध कलाकार हैं। उन्होंने मात्र चार वर्ष की आयु में संगीत की यात्रा प्रारंभ की। उन्होंने भारत और दस अन्य देशों में प्रस्तुति दी है। हाल ही में अमेरिका के 10 शहरों में उनके संगीत कार्यक्रमों को अभूतपूर्व सराहना मिली। पद्म जोनास मसेट्टी ने भी ब्राजील के लोकगीत के साथ शिव शम्भू -शिव शम्भू का गान किया।

    आचार्य जोनास मसेट्टी ब्राज़ील में वेदांत का कर रहे प्रचार

    पद्म आचार्य जोनास लोपेस मसेट्टी वेदांत के प्रतिष्ठित अध्येता एवं शिक्षक हैं। वे स्वामी दयानंद सरस्वती के शिष्य हैं और भारत के कोयंबटूर स्थित आर्ष विद्या गुरुकुलम् में उन्होंने वर्षों तक वेदांत का अध्ययन किया। अध्ययन के पश्चात उन्होंने ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो स्थित पेट्रोपोलिस में विश्व विद्या गुरुकुलम् की स्थापना की, जहाँ से अब तक 2,50,000 से अधिक विद्यार्थियों को वेदांत का अध्ययन कराया जा चुका है। उन्होंने एक सफल मैकेनिकल इंजीनियर का पेशेवर जीवन त्यागकर स्वयं को वेदांत के प्रचार-प्रसार के लिये समर्पित किया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और वेदांत के सेतु-समान प्रवक्ता हैं। उनके योगदान की सराहना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में करते हुए उन्हें “अमेरिका में वैदिक संस्कृति के राजदूत” के रूप में संबोधित किया।

     

  • बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत: 13 दिसंबर को नेशनल लोक अदालत में होंगे समझौते

    भोपाल 
    नेशनल लोक अदालत 13 दिसंबर 2025 (शनिवार) को आयोजित होगी। लोक अदालत में बिजली चोरी एवं अन्‍य अनियमितताओं के प्रकरण को समझौते के माध्यम से निराकृत किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के लंबित प्रकरणों एवं विशेष न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों के निराकरण के लिए विद्युत उपभोक्ताओं एवं उपयोगकर्ताओं से अपील की गई है कि वे अप्रिय कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए अदालत में समझौता करने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय से संपर्क करें।

    विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि धारा 135 के अंतर्गत विद्युत चोरी के बनाए गए लंबित प्रकरण एवं अदालत में लंबित प्रकरणों का निराकरण के लिये निम्नदाब श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलोवॉट तक के गैर घरेलू एवं 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं को प्रकरणों में ही छूट दी जाएगी। प्रि-लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्‍येक छः माही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। 

    लिटिगेशन स्तर पर कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं आंकलित राशि के भुगतान में चूक किये जाने पर निर्धारण आदेश जारी होने की तिथि से 30 दिवस की अवधि समाप्त होने के पश्चात् प्रत्येक छःमाही चक्रवृद्धि दर अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी।

    कंपनी ने कहा है कि नेशनल लोक अदालत में छूट कुछ नियम एवं शर्तों के तहत दी जाएगी जो आंकलित सिविल दायित्‍व राशि 10 लाख रूपये तक के प्रकरणों के लिए सीमित रहेगी। यह छूट मात्र नेशनल ‘‘लोक अदालत‘‘ 13 दिसंबर 2025 को समझौते करने के लिये ही लागू रहेगी। 

  • दद्दा जी से मुलाकात को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया सौभाग्य, कहा — ऋषि परंपरा हमारी पहचान

    भारत में प्राचीन काल से है ऋषि परंपरा, दद्दा जी से मिलना मेरा सौभाग्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री कटनी में दद्दा जी धाम में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में हुए शामिल

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत में प्राचीन ऋषि परंपरा रही है। दद्दा जी ने करोड़ों शिवलिंग निर्माण करवाए। उन्होंने कहा ‍कि दद्दा जी से मिलना मेरे जीवन का सौभाग्य रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सत्संग और भक्ति के माध्यम से समाज को संस्कार दिए। संस्कारों से लोगों के विकार दूर होते हैं और जीवन धन्य हो जाता है। शिव निराकार ब्रह्म हैं। महाकाल की कृपा हम सभी पर है। राज्य सरकार ने भगवान राम और कृष्ण से जुड़े सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी जिले के झिंझरी स्थित दद्दा जी धाम में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण महारुद्राभिषेक में ये बातें कहीं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गृहस्थ संत पूज्य पंडित देवप्रभाकर शास्त्री दददा जी के समाधि स्थल पहुंच कर पुष्पांजलि अर्पित कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर कटनी जिला एवं प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं जन-कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पवित्र गीता के विविध पक्षों से विश्व को परिचित कराने के लिए राज्य सरकार लाखों विद्यार्थियों के लिए गीता-ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित करवा रही है। उज्जैन में सिंहस्थ : 2028 के भव्य आयोजन के लिए तैयारियां की जा रही हैं। दद्दाजी का आशीर्वाद हम सभी के साथ है। कटनी के दद्दाजी धाम की प्रतिष्ठा दुनिया में पहुंचेगी। दुनिया सनातन संस्कृति और हमारी तरफ देख रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिरडी सहित अन्य तीर्थ स्थलों की तरह ही कटनी का दददा जी धाम भी भविष्य में देव स्थान के रूप में विख्यात होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान महाकाल और दद्दा जी के आर्शीवाद से हम उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ को भव्यता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति का पवित्र अनुष्ठान चल रहा है। राज्य सरकार भी इस दिशा मे अनेक कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस पवित्र कार्य के लिए संत समाज से मार्गदर्शन करने का आग्रह किया। इसके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंचासीन धर्माचार्यो और साधु-संतों का सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    विजयराघवगढ़ विधायक  संजय सत्येन्द्र पाठक नें संबोधित करते हुए दददा जी के व्यक्तिव, कृतित्व व जीवन वृतांत पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि यह महोत्सव धर्म, अध्यात्म और भक्ति का अद्भुत संगम है। यहाँ विश्वकल्याण के लिये असंख्य पार्थिव शिवलिंग निर्माण, महारुद्राभिषेक एवं अमृतमयी कथा का आयोजन हो रहा है। प्रातःकाल शिव आराधना और संध्याकाल हरिकथा एवं भजन संध्या के माध्यम से दद्दा जी धाम में दिव्यता का आलोक व्याप्त है।

    प्राण प्रतिष्ठा समारोह में प्रदेश के परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री और कटनी जिले के प्रभारी मंत्री  उदय प्रताप सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता सरंक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत, खजुराहो सांसद  विष्णुदत्त शर्मा, विधायक विजयराघवगढ़  संजय सत्येन्द्र पाठक, फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा सहित धर्माचार्य और सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित मोहित मराल गोस्वामी, कथा वाचक पंडित इन्द्रेश उपाध्याय, पंडित अनिरूद्धाचार्य  महाराज सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

     

  • राज्यपाल पटेल का संदेश — जनजातीय उत्थान में मिलकर करें कार्य, एन.जी.ओ. बनें भागीदार

    जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण प्रयासों में सहभागी बनें एन.जी.ओ. : राज्यपाल पटेल

    राज्यपाल ने ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट को किया संबोधित

    भोपाल 

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट का आयोजन जनजातीय विकास और उत्थान प्रयासों की दिशा में सराहनीय पहल है। देशभर के सभी एन.जी.ओ. जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण प्रयासों में सहभागी बनें। राज्यपाल पटेल मंगलवार को भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं जनजातीय गौरव वर्ष के उपलक्ष्य में कुशाभाऊ सभागार में आयोजित ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह भी मौजूद थे।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जनजातीय समुदाय के प्रति विशेष संवेदनशील है। उनके उत्थान के लिए संकल्पित और सक्रिय हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पीएम जनमन योजना अति पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास का अभूतपूर्व प्रयास है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान ग्रामीणों की मैदानी स्तर पर ही समस्याओं के समाधान का अभिनव कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि सभी एन.जी.ओ. जनजातीय कल्याण की योजनाओं को दूरस्थ अंचलो तक पहुँचाने में सक्रिय सहयोग करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आप जब ग्रामीण अंचलों में जांए जो जनजातीय समुदाय के साथ आत्मीय और विनम्र रहें। उनकी समस्याओं को धैर्य के साथ सुनें और त्वरित निवारण करने का प्रयास करें।

    चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान पर चिंतन करें

    राज्यपाल पटेल ने देशभर के एन.जी.ओ. का आह्वान किया कि ऑल इंडिया मीट के विचार-विमर्श और सुझावों पर गंभीर चिंतन करें। चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान खोजे। जनजातीय सशक्तिकरण के लिए आवश्यक शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, ट्राईबल गवर्नेंस आदि विभिन्न आयामों को जनजातीय क्षेत्रों की भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने के नवाचार करें। उन्होंने कहा कि सभी एन.जी.ओ. जनजातीय समुदाय को शिक्षा का महत्व जरूर बताएं। उन्हें सिकल सेल एनिमिया सहित अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों के प्रति जागरूक करें। राज्यपाल पटेल ने जनजाति समाज के सर्वांगीण विकास के चिंतन पर आधारित ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट के आयोजन के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार का विशेष आभार व्यक्त किया।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय समाज में भारत की संस्कृति, पर्यावरण और मानवीय मूल्यों की जड़ें गहराई तक बसी हैं। उनका जीवन दर्शन हमें सिखाता है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य, आत्मनिर्भरता और सहयोग ही समावेशी विकास का आधार हैं। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट का आयोजन अत्यंत प्रासंगिक और समयानुकूल है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में देश जब आगे बढ़ रहा है, ऐसे में जरूरी है कि जनजातीय समाज की भागीदारी इस यात्रा का अभिन्न हिस्सा बने।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि जनजातीय विकास के लिए शिक्षा का स्वरूप ऐसा हो जो केवल साक्षरता तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उसमें जीवन कौशल, स्थानीय ज्ञान और संस्कृति संरक्षण का भी समावेश हो। उन्होंने कहा कि अशासकीय संस्थाएँ, स्थानीय भाषा में पाठ्य सामग्री तैयार करें। डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देकर बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बड़ा योगदान दिया जा सकता है। साथ ही स्वास्थ्य शिक्षा, मातृ-शिशु पोषण, टी.बी., सिकल सेल रोग जागरूकता और स्वास्थ्य शिक्षा को व्यापकता प्रदान करना भी जरूरी है।

    नीति निर्माण में समर्पित संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका, राज्य सरकार देगी पूरा सहयोग

    जनजाति कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजाति बहुल क्षेत्रों में काम कर रहे समर्पित अशासकीय संस्थाओं को राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी। उनकी विशेषज्ञता का लाभ लेते हुए जनजातीय कल्याण की कार्ययोजनाएं और रणनीतियां बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि जनजातीय विकास की योजनाएं बनाने में जमीनी स्तर के सुझावों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। समर्पित स्वैच्छिक संगठन गहन रूप से सामाजिक आर्थिक संदर्भों में समस्याओं का परीक्षण करते हैं। जनजातीय समुदाय के आचार-व्यवहार को भी करीब से जानते हैं। उन्होंने जनजातीय समुदाय के उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे छोटी घटनाओं से सबक लेकर व्यापक जनहितैषी नीतियां बन जाती हैं। डॉ. शाह ने कहा कि सरकार, समुदाय और समर्पित सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर काम करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

    उदघाटन सत्र के बाद विशेषज्ञ संस्थाओं के समूहों ने जनजातीय समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वन अधिकार, शासन, प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर सुझाव दिए। ट्राइफेड की डीजीएम सु प्रीति मैथिल ने आजीविका पर अपने समूह का प्रस्तुतिकरण करते हुए बताया कि वित्तीय समावेश, आजीविका स्कूल, संसाधनों का एटलस, उद्यमिता विकास करने संबंधी सुझाव दिए और राज्य के लिए अपने विचार रखे।

    जनजातीय समुदाय की शिक्षा और सशक्तिकरण में अशासकीय संगठनों की भूमिका, चुनौतियां एवं मुद्दे, वर्तमान में शिक्षा का स्तर, समग्र शिक्षा में संगठनों की भूमिका पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। रामकृष्ण मिशन मेघालय के स्वामी अनुरागनंदा ने सत्र की अध्यक्षता की। स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट कर्नाटक के प्रवीन कुमार सैयापराजु ने विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि ड्रॉप आउट की चुनौती को नियमित संपर्कों से दूर किया जा सकता है।

    जनजातीय समुदाय की महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियां, टीकाकरण एवं अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की पहुंच बढ़ाने, टेली मेडिसिन, एमहेल्थ जैसे आधुनिक हस्तक्षेप से स्वास्थ्य सेवा बढ़ाने में अशासकीय संगठनों की भूमिका पर विचार हुआ। विवेकानंद मेडिकल मिशन वायनाड केरल के सुरेश ने सत्र की अध्यक्षता की। डॉ. सलोनी सिडाना एमडी नेशनल हेल्ड मिशन ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय संबंधी कठिनाइयों की चर्चा करते हुए बताया कि भाषा और भौगोलिक दूरी बड़ी समस्या है।

    ट्राइफेड की डीजीएम सु मैथिल ने जनजाति अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं, और आजीविका बढ़ाने, जनजातीय युवाओं में उद्यमिता बढ़ाने, आजीविका के नए अवसर, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक उद्यमिता को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर स्वैच्छिक संगठनों ने अपने विचार रखे। राजस्थान बाल कल्याण समिति उदयपुर के मुकेश गौर ने सत्र की अध्यक्षता की।

    मती मीनाक्षी सिंह ट्राइबल सेल राजभवन ने जनजातीय विकास एवं शासन प्रशासन से जुड़े विषयों, राज्य की भूमिका, पंचायत राज संस्थाओं, ग्राम सभा पारंपरिक जनजातीय संस्थाओं जनजाति विकास एजेंसियों की भूमिकाओं पर चर्चा की। शिव गंगा झाबुआ के पद्म महेश शर्मा ने सत्र की अध्यक्षता की।

    राज्यपाल पटेल ने भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्प अर्पित किया। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह स्वरूप गोंडी पेंटिंग भेंट कर अभिनंदन किया। मंत्री डॉं. कुंवर विजय शाह ने कहा कि राज्य सरकार, एन.जी.ओ. मीट में प्राप्त हुए सुझाव और चिंतन बिन्दुओं पर सकारात्मकता के साथ कार्य करेगी। उन्होंने जनजातीय समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका आदि की बेहतरी के लिए राज्यपाल पटेल के संवेदनशील और सतत् प्रयासों की सराहना की।

    कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ (TRIFED), भोपाल (मध्यप्रदेश क्षेत्र) की डीजीएम सु मैथिल ने जनजातीय समुदाय की आजीविका सत्र, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एम.डी. डॉ. सलोनी सिडाना ने स्वास्थ्य सत्र, अतिथि विद्वान स्वामी अनुरागानंदा ने शिक्षा सत्र और राजभवन जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव मती मीनाक्षी सिंह ने ट्राइबल गवर्नेंस सत्र की चर्चा और सुझावों की जानकारी दी। आभार जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त डॉ. सतेन्द्र सिंह ने माना। ऑल इंडिया एन.जी.ओ. मीट में पद्म महेश शर्मा, सुरेश, मुकेश गौर, जनजातीय कार्य मंत्रालय की डिप्टी डायरेक्टर जनरल सु अंशु सिंह, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा एवं देशभर के एन.जी.ओ. प्रतिनिधि मौजूद रहे।

     

     

  • दोहरी सहायता पर रोक: आयुष्मान कार्ड धारक नहीं पा सकेंगे सीएम स्वेच्छानुदान का लाभ

    भोपाल
    आयुष्मान भारत योजना के लिए पात्र हितग्राहियों को मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान का लाभ नहीं मिलेगा। आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का उपचार होने के बाद ही आवेदन पर विचार होगा। इसका उद्देश्य स्वेच्छानुदान से अधिकाधिक लोगों को लाभ दिलाना है।

    इसके लिए आधार नंबर से आयुष्मान की पात्रता और अस्पताल की संबद्धता पता की जा रही है। विशेष परिस्थिति में बीमारी यदि आयुष्मान का पैकेज कवर नहीं है तभी स्वेच्छानुदान से राशि मिल सकेगी। दरअसल, मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के लिए बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन आते थे, जिसमें हितग्राही आयुष्मान योजना के तहत भी उपचार के लिए पात्र हैं।
     
    उन्हें बीमारी की गंभीरता और आर्थिक स्थिति देखते हुए राशि स्वीकृत कर दी जाती थी। ऐसे में शासन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था। शासन ने अब तय किया है आयुष्मान योजना से उपचार की सुविधा निजी और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है तो स्वेच्छानुदान से राशि देने का औचित्य नहीं है।

    मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी ने बताया कि आयुष्मान हितग्राहियों को विशेष परिस्थिति में ही स्वेच्छानुदान दिया जा रहा है, जैसे रोगी को ऐसी बीमारी हो जो आयुष्मान योजना के पैकेज में शामिल नहीं हो या फिर जिस अस्पताल में मरीज भर्ती है वह आयुष्मान योजना में है या नहीं। नहीं होने की स्थिति में स्वेच्छानुदान पर विचार किया जाता है।

  • एमपी में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा, महेश्वर-कुक्षी में होंगे हैंडलूम और क्राफ्ट टूरिज्म विलेज स्थापित

    भोपाल
    मध्यप्रदेश पर्यटन द्वारा चंदेरी के प्राणपुर की तर्ज पर महेश्वर के पास एक गांव को हैंडलूम टूरिज्म विलेज और कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। खरगोन जिले में स्थित महेश्वर का गांव केरिया खेड़ी महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि धार जिले में स्थित कुक्षी बाग प्रिंट के लिए जाना जाता है।

    चंदेरी साड़ी की बुनाई पर केंद्रित हैंडलूम टूरिज्म विलेज प्राणपुर की तरह ये दोनों नई परियोजनाएं पारंपरिक वस्त्र कला को बढ़ावा देंगी, पर्यटकों को आकर्षित करेंगी तथा बुनकरों और कारीगरों को खरीदारों से सीधे जुड़ने का एक मंच प्रदान करेंगी।

    निफ्ट, एनआईडी और अन्य संस्थानों के छात्र और शोधकर्ता बुनाई और रंगाई प्रक्रिया का जीवंत प्रदर्शन देख सकेंगे। दोनों परियोजनाओं को लेकर कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। महेश्वर में कार्य जल्द शुरू होने वाला है। इसके बाद कुक्षी में परियोजना की शुरुआत होगी।
    साड़ी बनते हुए देख सकेंगे पर्यटक

    महेश्वर से लगभग चार किमी दूर छोटे से गांव केरिया खेड़ी में लगभग सौ परिवार माहेश्वरी साड़ियां, सलवार-सूट और अन्य वस्त्र बुनते हैं। यह गांव महेश्वर से ओंकारेश्वर जाने वाली सड़क से लगभग तीन किमी दूर स्थित है। गांव में एक कैफेटेरिया और एक अनुभव और विक्रय केंद्र बनाया जाएगा। गांव के नागरिक बुनियादी ढांचे में भी सुधार किया जाएगा।

    परियोजना का क्रियान्वयन कर रहे अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा स्वीकृत और 5.11 करोड़ रुपये की लागत वाली महेश्वर परियोजना पर काम जल्द ही शुरू होगा और अगले साल जून तक पूरा होने की उम्मीद है। केरिया खेड़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से महेश्वर पर पर्यटकों का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी।

    मंदिर में दर्शन और नर्मदा नदी में डुबकी लगाने के लिए महेश्वर जाने वाले पर्यटकों का एक वर्ग हथकरघा गांव की ओर जा सकता है, क्योंकि गांव से लगभग दो किमी दूर नर्मदा नदी पर एक घाट है।वस्त्रों की रंगाई का प्रदर्शन होगा धार जिले के तहसील मुख्यालय कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा।

    कुक्षी में लगभग 1500 बाग कारीगर रहते हैं। यहां भी कस्बे का कायाकल्प किया जाएगा और इसे एक ऐसे स्थान के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां पर्यटक सीधे कारीगरों से बाग प्रिंट के वस्त्र खरीद सकेंगे। इस परियोजना का बजट 20.60 करोड़ रुपये है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा।

    गांव डाई हाउस के अतिरिक्त कैफेटेरिया, विक्रय और अनुभव केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। बोर्ड ने पहली बार चंदेरी के प्राणपुर में इस अवधारण को आकार दिया और प्राणपुर को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम का पुरस्कार केंद्र सरकार की ओर से मिला।

    इसी से प्रोत्साहन पाकर महेश्वर और कुक्षी में पर्यटन ग्राम विकसित किए जा रहा हैं। दोनों जगहों के लिए टेंडर हो गए हैं, जल्द ही कार्य शुरू होगा। – डॉ अभय अरविंद बेडेकर, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन बोर्ड

  • कान्हा टाइगर रिजर्व में असम के वाइल्ड बफेलो का आगमन, वन विभाग की नई पहल से जंगल में बढ़ेगी रौनक

    मंडला 
     टाइगर्स के लिए विश्वप्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में नए मेहमान आने वाले हैं. लेकिन इन मेहमानों को हल्के में न लें, ये हैं भारी भरकम आसामी जंगली भैैंसे. जल्द ही असम से मध्य प्रदेश के इस टाइगर रिजर्व में जंगली भैसों की एंट्री होने वाली है, जिसके बाद जंगल का रोमांच और बढ़ने जा रहा है. दुनिया भर के पर्यटक यहां प्रकृति की सुंदरता और बाघ सहित अन्य वन्य प्राणियों के दीदार के लिए पहुचते हैं, वहीं अब भैसों की तादाद भी यहां बढ़ाई जा रही है.

    कान्हा में अचानक घटी जंगली भैसों की तादाद

    कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी के अनुसार, '' यहां पहले जंगली भैंसों की उपस्थिति थी, लेकिन समय के साथ उनकी संख्या बहुत कम हो गई. किसी भी प्रजाति की अचानक कमी जंगल पर प्रतिकूल असर डालती है. यही कारण है कि अब असम के राष्ट्रीय उद्यानों से जंगली भैंसों को कान्हा में बसाने की योजना बनाई जा रही है.''

    असम से जंगली भैंसे लाने की रूपरेखा तैयार

    वन विभाग के मुताबिक सुपखार क्षेत्र को जंगली भैंसों के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है. असम से जंगली भैसों को 5 चरणों में कान्हा लाने की तैयारी चल रही है. उच्चाधिकारियों के साथ लगातार परामर्श जारी है और जल्द ही इस दिशा में कदम उठाए जाने की उम्मीद है. इस पहल से न सिर्फ वन्यजीवन को मजबूती मिलेगी बल्कि पर्यटकों के लिए भी कान्हा नेशनल पार्क का अनुभव और समृद्ध होगा.

    पांच चरणों में होगा ट्रांसलोकेशन

    योजना के अनुसार, जंगली भैंसों को असम से लाने का काम पांच चरणों में पूरा किया जाएगा. पार्क के सुपखार क्षेत्र को इनके लिए सबसे उपयुक्त चिन्हित किया गया हैृ. इस महत्वपूर्ण परियोजना पर उच्च स्तर पर चर्चा जारी है और जल्द ही इसे अमली जामा पहनाने की उम्मीद है. इस पहल से न सिर्फ पार्क के वन्यजीवन को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटकों को भी एक नए और दुर्लभ वन्यजीव को देखने का अवसर मिल सकेगा.

    कान्हा में बसेंगे आसामी भैंसे

    कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया, '' कान्हा में कभी जंगली भैंसों की अपनी आबादी हुआ करती थी और कान्हा नेशनल पार्क से इन्हें बाहर भी भेजा गया था लेकिन समय के साथ ये प्रजाति लगभग विलुप्त हो गई. किसी भी प्रजाति की अनुपस्थिति पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालती है. इसी कमी को दूर करने और जैव विविधता को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.

  • हाई कोर्ट का अहम आदेश: पटरियों पर दुर्घटना हुई तो रेलवे देगा मुआवजा, सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे की

    जबलपुर
     मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है "यदि रेलवे ने पटरियों तक अनधिकृत पहुंच को रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए तो क्रॉसिंग करते समय हुई मौत के लिए भी मुआवजा भी देना पड़ेगा." इस प्रकार जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने रेलवे दावा अधिकरण भोपाल के फैसले को निरस्त कर दिया.

    रेलवे दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती

    एकलपीठ ने अपने आदेश कहा "बच्चे सहित दो महिलाओं की मौत एक अप्रिय घटना के कारण हुई थी और रेलवे प्रशासन पटरियों तक अनधिकृत पहुंच रोकने तथा सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने वैधानिक कर्तव्य में विफल रहा. लापरवाही या अनधिकृत प्रवेश से रेलवे प्रशासन स्वतः ही दायित्व से मुक्त नहीं हो जाता है." मामले के अनुसार सिंगरौली निवासी राम अवतार सहित दो अन्य की तरफ से दायर अपील में रेलवे दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी.

    रेलवे ट्रैक पर 3 लोगों की मौत का मामला

    याचिका में कहा गया "रेलवे ही हादसे के लिए जिम्मेदार है." रेलवे दावा अधिकरण ने माना था "रेलवे मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं है, क्योंकि मृतक ट्रेन में नहीं चढ़े थे. ट्रेन की पटरी में आने के कारण उनकी मौत हुई थी." राम अवतार अपने बेटे राजेश (उम्र 3 साल) का मुंडन कराने 16 अप्रैल 2011 में मैहर ले गए थे. इस दौरान 8-10 लोगों का समूह मैहर गया था. लौटते समय रेलवे स्टेशन में बालक राजेश रेलवे की पटरियों पर आ गया था और उसे बचाने के लिए दो महिलाएं भी पटरी पर आ गईं और तीनों ट्रेन की चपेट में आ गई थीं.

    रेलवे दावा प्राधिकरण को मुआवजा के निर्देश

    प्राधिकरण ने सुनवाई के दौरान पाया था "समूह के लोग ट्रेन संख्या 51672 सतना-इटारसी पैसेंजर में नहीं चढे़ थे. लोली बाई, इंद्रमती और राजेश (बालक) की दूसरी पटरी से गुजरती हुई गुजरती ट्रेन की चपेट में आने से हुई." रेलवे ने लिखित बयान के माध्यम से दुर्घटना से इनकार किया और कहा "मृतक रेलवे लाइन पार कर रहे थे, तभी गुजरती ट्रेन की चपेट में आ गये." एकलपीठ ने रेलवे दावा अधिकरण को निर्धारित मुआवआ देने के निर्देश जारी किये हैं.

    जबलपुर में घोड़ों की मौत के मामले में सुनवाई

    एक अन्य मामले में हैदराबाद से जबलपुर लाए गए घोड़ों की मौत के मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में हुई. याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया "पिछले माह में कुछ और घोड़ों की मौत हुई, जिसे छुपाया जा रहा है." हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने आरोप को गंभीरता से लेते हुए केयरटेकर सचिन तिवारी को शपथ पत्र पर यह बताने कहा है "वर्तमान में कितने घोड़े बचे हैं और उनका मानसिक व शारीरिक स्टेटस क्या है."

    युगलपीठ ने यह भी बताने कहा है "घोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं." युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को नियत की है. जबलपुर निवासी पशु प्रेमी सिमरन इस्सर की ओर से याचिका दायर की गई थी. 

  • जबलपुर में आर्मी की सूर्या मैराथन का आयोजन, विजेताओं के लिए आकर्षक पुरस्कारों की सौगात

    जबलपुर 
     भारतीय सेना जबलपुर में हर साल सूर्या मैराथन का आयोजन करती है. इस साल भी 16 नवंबर को यह मैराथन आयोजित की जा रही है. इसमें लगभग 7500 लोग अब तक रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. इस आयोजन में थल सेनाध्यक्ष अध्यक्ष के पहुंचने की भी उम्मीद है. मुख्यमंत्री मोहन यादव मैराथन में दौड़ने वाले धावकों को हरी झंडी दिखाएंगे. कुल मिलाकर 15 लाख रुपए के इनाम दौड़ने वालों को दिए जाएंगे.

    जबलपुर में तीसरी साल सूर्या मैराथन

    जबलपुर में लगातार तीसरी साल सूर्या मैराथन का आयोजन किया जा रहा है. इस आयोजन में पिछले साल 10,000 लोगों ने हिस्सा लिया था. इस साल अभी तक 7500 लोग रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. यह आयोजन भारतीय सेना का मध्य भारत कमान करवाता है.

    सेना के अधिकारी मेजर जनरल संजय गौतम ने बताया "रजिस्ट्रेशन के आखिरी वक्त तक पिछले साल से भी ज्यादा लोग इस मैराथन में हिस्सा लेंगे. इस मैराथन में जीतने वाले धावकों को कुल मिलाकर 15 लाख रुपए की राशि इनाम के तौर पर दी जा रही है."

    सबसे बड़ी रेस 21 किमी की, इनाम एक लाख

    मैराथन में सबसे बड़ा पुरस्कार 21 किलोमीटर की रेस जीतने वाले खिलाड़ी को दिया जाएगा. इसमें एक पुरस्कार स्त्री को और एक पुरुष को दिया जाएगा. मैराथन में अलग-अलग कैटेगरी हैं. सबसे छोटी मैराथन मात्र 3 किलोमीटर की है, जिसमें कभी-कभार दौड़ने वाले लोग भी शामिल हो सकेंगे. अलग-अलग कैटेगरी में कुल मिलाकर 90 लोगों को सम्मानित किया जाएगा.

    यह रेस कोबरा मैदान से शुरू होगी और यहीं पर खत्म होगी, लेकिन इस बीच में खिलाड़ी जबलपुर शहर के भीतर भी दौड़ेंगे. इसलिए इस आयोजन में सेना ने जबलपुर पुलिस और जिला प्रशासन की मदद भी ली है.

    देश के किसी भी कोने का व्यक्ति दौड़ सकता है

    मेजर जनरल संजय गौतम ने बताया "इस रेस को इंडिया रनिंग कैलेंडर में शामिल किया गया है और पूरे देश फिट इंडिया मूवमेंट के जरिए अलग-अलग रेस की जाती हैं. उनकी जानकारी धावकों को होती है इसलिए इस आयोजन में जबलपुर के साथ ही देश के दूसरे इलाकों से भी धावक पहुंच रहे हैं. इस आयोजन में शामिल होने वाले हर खिलाड़ी को ड्रेस दी जाएगी."

    "ड्रेस का कुछ पैसा भी लिया जा रहा है. इस ड्रेस में एक चिप होगी, जो एक सेंसर से जुड़ी होगी ताकि ओपनिंग पॉइंट और एंड पॉइंट पर इस बात का मेजरमेंट किया जा सके की धावक में कब रेस शुरू की और कब खत्म की."

    ऑपरेशन सिंदूर को समर्पित मैराथन

    एक साथ 7500 लोग दौड़ेंगे तो सब की ओपनिंग और एंडिंग टाइम अलग-अलग होंगे. यह आयोजन जबलपुर में 16 नवंबर को सुबह 5:30 बजे शुरू हो जाएगा. मेजर जनरल संजय गौतम ने बताया "इस बार की रेस का उद्देश्य फ्यूल योर स्पिरिट एंड ऑनर देयर करेज रखा गया है. इस बार की रेस ऑपरेशन सिंदूर में वीरता से लड़ने वाले सैनिकों को समर्पित है."