• मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार में खुशखबरी, बेटे की शादी सामूहिक विवाह समारोह में, उज्जैन के होटल अथर्व में होगा आयोजन

    उज्जैन 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करने का फैसला लिया है। समारोह 30 नवंबर को उज्जैन के होटल अथर्व में होगा। इसमें 20 जोड़ों की शादी होगी। यहीं डॉ. अभिमन्यु और डॉ. इशिता यादव सात फेरे लगेंगे। मुख्यमंत्री पुत्र अभिमन्यु की सगाई खरगोन के किसान दिनेश यादव की बेटी डॉ. इशिता से 5 माह पहले ही हो चुकी है।

    सामुदायिक समारोह बनेगा आयोजन

    सामूहिक विवाह समारोह के बेटे की शादी कर सीएम सामाजिक समरसता और सादगी का संदेश देना चाहते हैं। शादी में दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, राज्य के मंत्री, वरिष्ठ अफसर व भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम में पारंपरिक रस्मों के साथ सामाजिक कार्यों के लिए भी पहल की योजना है, जिससे यह सिर्फ एक शादी नहीं, सामुदायिक समारोह बन जाएगा।

    शादी मुख्यमंत्री आवास में नहीं होगी
    सीएम मोहन यादव ने खुद ट्वीट करके बताया कि शादी मुख्यमंत्री आवास में नहीं, बल्कि उज्जैन के होटल अथर्व में होगी. इसमें सिर्फ सीमित मेहमानों को बुलाया जाएगा. दोनों परिवारों के करीबी रिश्तेदार, राज्य के मंत्री, बड़े अधिकारी और भाजपा के प्रमुख नेता शामिल होंगे.

    यह आयोजन सिर्फ एक शादी नहीं होगा. इसमें पारंपरिक रस्मों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों की भी पहल होगी. जैसे गरीब कन्याओं की मदद या अन्य समाजसेवा के काम. इससे सामाजिक समरसता का संदेश जाएगा.

    सीएम यादव सादगी के लिए पहले से मशहूर हैं. उन्होंने अपने बड़े बेटे की शादी भी राजस्थान में बहुत साधारण तरीके से की थी. अब छोटे बेटे की शादी भी उसी तरह सादगी भरी रखी है. इस फैसले से सीएम ने दिखाया कि बड़े पद पर होने के बावजूद वे आम लोगों की तरह जीवन जीते हैं. वे चाहते हैं कि समाज में फिजूलखर्ची कम हो और शादियाँ सादगी से हों. उनकी इस पहल की हर तरफ तारीफ हो रही है.

    परिवार और पृष्ठभूमि

    ● डॉ. अभिमन्यु यादव, सीएम के छोटे बेटे। सर्जरी में मास्टर्स कर रहे हैं।

    ● डॉ. इशिता यादव, खरगोन के किसान दिनेश यादव की बेटी, एमबीबीएस कर चुकी हैं। पीजी कर रही हैं। इशिता, सीएम की बड़ी बेटी डॉ. आकांक्षा की ननद भी हैं।

  • All India Tiger Estimation 2026: एमपी समेत भारत के जंगलों की नब्ज टटोली जाएगी, टाइगर स्टेट बनने की तैयारी

    भोपाल 

    भारत में बाघों की असली तस्वीर जानने की सबसे बड़ी कवायद एक बार फिर शुरू होने जा रही है। देशभर में अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2026 (All India Tiger Estimation 2026) की प्रक्रिया शुरू होने को है। इसमें टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश की भूमिका बेहद अहम रही है, क्योंकि एक बार 1991 में और उसके बाद 2019 और 2022 में ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन में मध्यप्रदेश लगातार दो साल टाइगर स्टेट का तमगा हासिल करने में कामयाब रहा है। इस बार फिर वन विभाग की बड़ी तैयारी है, उम्मीद की जा रही है कि एमपी एक बार फिर टाइगर स्टेट बन सकता है।

    15 नवंबर से प्रदेशभर के फॉरेस्ट एरिया में बाघ एस्टिमेशन का काम शुरू हो जाएगा। कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे, इसके अलावा एविडेंस में मल, पगमार्क, खरोंच के निशान, शिकार के अवशेष जैसे साक्ष्य भी शामिल किए जाते हैं। चार चरणों में पूरी होने वाली एस्टिमेशन की ये प्रक्रिया फरवरी 2026 तक पूरी होगी। इसके बाद डेटा कलेक्ट करके फाइनल रिपोर्ट अप्रेल 2026 तक तैयार हो जाएगी। जो जुलाई 2026 तक जारी होगी।

    टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश की स्थिति कैसी?

    पिछले बाघ अनुमान 2022 (Tiger Estimation 2022) में मध्य प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे। जो देश के अन्य राज्यों से भी ज्यादा हैं। यानी हर पांच में से एक बाघ एमपी के जंगलों में मौजूद है। इसी के चलते राज्य को लगातार दूसरी बार 2019 और 2022 में टाइगर स्टेट का दर्जा मिला। इस बार फिर सबकी नजर इसी पर है कि क्या एमपी अपनी टॉप पॉजीशन बनाए रखेगा या किसी अन्य राज्य से मुकाबला होगा?

    दूसरी बार पेपरलेस यानी M-STRIPES ऐप से किया जा रहा है एस्टिमेशन

    पिछले ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन में एमपी समेत देशभर के जंगलों में M-STRIPES ऐप के माध्यम से पेपरलेस कार्य किया गया था। इस बार भी वही प्रक्रिया फॉलो की जाएगी। जिम्मेदारों का कहना है कि इस बार ऐप को और अपडेट किया गया है। यूजरफ्रेंडली ऐप से कई परेशानियां हल हुई हैं और मुश्किलें आसान।

    जानें क्या है टाइगर एस्टिमेशन

    अब तक हम जिसे बाघों की गणना कहते आए हैं, असल में आधुनिक भारत में ये टाइगर काउंटिंग नहीं बल्कि, टाइगर एस्टिमेशन है। टाइगर एस्टिमेशन की प्रक्रिया अब पारंपरिक गिनती से कहीं आगे बढ़ चुकी है। यह सिर्फ कैमरे में दिखे बाघों की संख्या नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश समेत देश के पूरे वन क्षेत्र में मौजूद संभावित आबादी का वैज्ञानिक मूल्यांकन है। इसे ऐसे समझें-

    एमपी में 9 टाइगर रिजर्व और कॉरिडोर, टेरिटरीज पर नजर

    राज्य के 9 टाइगर रिजर्व कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, संजय, पन्ना, ओरछा, माधव, भीमगढ़, नौरादेही सभी में गहन निगरानी चलेगी। हर रिजर्व के कोर और बफर जोन में 24 घंटे कैमरे एक्टिव होंगे। पिछली बार की तरह इस बार भी AI बेस्ड कैमरा ट्रैप और जीपीएस डेटा लिंक तकनीक वाले ऐप M-STRIPES से मॉनिटरिंग पहले से कहीं ज्यादा सटीक होगी। वन विभाग के मुताबिक जंगलों से निकल सड़कों पर नजर आ रहे बाघ जहां चुनौती साबित हो सकते हैं, वहीं ये उम्मीद भी दे रहे हैं, कि बाघों की संख्या बढ़ने की संभावना है, एमपी फिर से टाइगर स्टेट बन सकता है।

    संरक्षण की चुनौती- बढ़ती संख्या, घटता आवास

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाघों की संख्या बढ़ना जितना सुखद है, उतना ही आवास घटने का खतरा भी बढ़ा है। बाघ कॉरिडोर और गांवों की सीमा तक आने लगे हैं। पीसीसीएफ एल. कृष्णमूर्ति कहते हैं कि, 'इससे निपटने के लिए वन विभाग इस बार सह अस्तित्व मॉडल पर जोर दे रहा है। ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। स्थानीय समुदायों को निगरानी, रिपोर्टिंग और इको टूरिज्म से जोड़ा जा रहा है।'

    अखिल भारतीय टाइगर एस्टिमेशन (AITE) में एमपी की प्राथमिकता क्या?

    -बाघों की सटिक पहचान और वितरण का नक्शा तैयार करना।

    -रिजर्व से बाहर बाघों की उपस्थिति को वैज्ञानिक रूप से दर्ज करना।

    -कोरिडोर नेटवर्क को मजबूत करना ताकि, बाघ सुरक्षित क्षेत्रों में आवागमन कर सकें।

    -वन विभाग के मुताबिक ये अनुमान प्रक्रिया सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समझने की कोशिश है कि बाघ कहां हैं। कहां जा रहे हैं और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए हमें अब आगे और क्या बदलाव करने की आवश्यकता है। क्या हम सही सही मायनों में जंगलों की सुरक्षा कर पा रहे हैं?

    इस तकनीक से क्या फायदा हुआ

    -कागज की गिनती और मानवीय गलती खत्म हुई, अब सब डिजिटल रिकॉर्ड होता है।

    -हर टीम की गश्त मॉनिटर की जा सकती है, कौन कहां गया, कितना एरिया कवर हुआ, कितना बाकी है?

    -डेटा की पारदर्शिता और सटीकता बढ़ी है।

    -बाघों के संरक्षण और सुरक्षा की योजना बनाना आसान हुआ है। क्योंकि अब ठोस वैज्ञानिक डाटा उपलब्ध है।

    मध्य प्रदेश जो टाइगर स्टेट है, ने इस सिस्टम को सबसे जल्दी अपनाया। राज्य के 9 टाइगर रिजर्व और दो अन्य अभयारण्य के रेंजर्स, कर्मचारियों और अधिकारियों को M-STRiPES पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। अब हर बाघ गिनती और पेट्रोलिंग इसी एप के जरिए की जा रही है। ये नया प्रयोग पिछले टाइगर एस्टिमेशन के लिए शुरू किया गया था।

    कैसे काम करता है M-STRIPES सिस्टम

    अब बाघ गिनने का तरीका पूरी तरह से डिजिटल हो गया है। फील्ड में जब वनकर्मी या अधिकारी जाते हैं, तो उनके मोबाइल में M-STRIPES ऐप ऑन रहता है। ये एप जीपीएस की मदद से उनका पूरा रास्ता रिकॉर्ड करता है। यानी कौन सी टीम कहां गई, कितना इलाका कवर किया सब कुछ ट्रैक होता है।

    जंगल में अगर कहीं बाघ के पगमार्क, मल, शिकार के अवशेष मिलते हैं तो कर्मचारी तुरंत उसी जगह का फोटो लेकर ऐप में अपलोड कर देते हैं, फोटो के साथ उस जगह का लोकेशन और समय अपने आप एप में सेव हो जाता है।

    दिन के अंत में पूरा डेटा ऑनलाइन सर्वर पर चला जाता है, जहां विशेषज्ञ उसे जांचते हैं, कहां ज्यादा मूवमेंट मिली, किस इलाके में बाघों की मौजूदगी मजबूत है और कहां निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।

    इस तरह अब कागज, फॉर्म या मैनुअल गिनती की जगह पूरा सिस्टम मोबाइल और जीपीएस पर चलेगा। जिससे न केवल आंकड़े सटिक होंगे, बल्कि मानवीय गलती की गुंजाइश भी लगभग खत्म हो जाएगी।

     

     

  • सिंहस्थ 2028: उज्जैन में श्रद्धालुओं के लिए 20 हजार करोड़ के निवेश के साथ बड़े सुधारों की तैयारी

    उज्जैन 
    सिंहस्थ 2028 से पूर्व मध्यप्रदेश के उज्जैन की सूरत पूरी तरह बदलने जा रही है. मध्यप्रदेश सरकार का श्रद्धालुओं की सुविधाओ के लिए 5 बड़े कामों पर फोकस है, जिनकी लागत हजारों करोड़ है. सबसे पहला काम मोक्षदायिनी क्षिप्रा शुद्धिकरण (कान्हा डायवर्जन क्लोज डक्ट परियोजना) है, जिससे क्षिप्रा पर कई जगह पुल, पुलिया व सड़क निर्माण के माध्यम से यातायात सुगम बनाया जाएगा.

    इसके बाद व्यापक स्तर पर सीवरेज पाइप लाइन व ट्रीटमेंट प्लांट, पेयजल परियोजना, अस्पताल, विश्राम भवन आदि पर फोकस होगा.

    5 विकास कार्यों पर होगा सबसे ज्यादा फोकस

    सिंहस्थ 2028 से पहले मंदिरों के जीर्णोद्धार के साथ ऐतिहासिक स्थलों को मजबूती देना व सरकार की प्राथमिकता है. इन प्रमुख पांच विकास कार्यों को कैसे किया जाएगा, इसके लिए कितने बजट की जरूरत होगी और इसकी क्या टाइम लाइन होगी इसे लेकर एक बार फिर प्रशासनिक बैठक का आयोजन किया गया.

    20 हजार करोड़ से चमकेगी उज्जयनी नगरी

    सिंहस्थ महाकुंभ उज्जैन नगरी में वर्ष 2028 में लगने जा रहा है, जिसकी तैयारी अभी से शुरू हो गई है. सरकार का अनुमान है कि उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे और इसी के हिसाब से पूरा रेडमैप तैयार किया गया है. जनसंपर्क विभाग के अनुसार सिंहस्थ महापर्व 2028 के पहले जिले में लगभग 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि से अलग-अलग प्रकार के विकास कार्य किए जा रहे हैं.

    914 करोड़ कान्हा क्लोज डायवर्जन परियोजना पर

    लगभग 919.94 करोड़ रुपए की लागत से कान्‍हा डायवर्जन क्‍लोज डक्‍ट परियोजना का कार्य क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए किया जाएगा. इसमें कान्हा नदी के पानी को 18.5 किमी कट/कवर व 12 किमी टनल का निर्माण कर उज्‍जैन शहर की सीमा से बाहर कर गंभीर नदी के डाउन स्‍ट्रीम में प्रवाहि‍त किया जाएगा. यह परियोजना आगामी सितंबर 2027 तक पूर्ण हो जाएगी.

    निर्माण एजेंसी द्वारा 15 वर्षों का संचालन व रख-रखाव का प्रावधान किया गया है. इसकी कुल लंबाई 30.15 किमी रहेगी. इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद पूरे वर्ष क्षिप्रा नदी में स्‍वच्‍छ जल का प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा.

    440 करोड़ की लागत से पुलि-पुलियों का निर्माण

    सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के लिए 19 नवीन पुलों व आरओबी का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें 14 पुल नदी पर व 5 रोड ओवर ब्रिज शामिल हैं. इनकी अनुमानित लागत 440.13 करोड़ रुपए है. पुल निर्माण कार्यों की श्रृंखला में शहर के बहुप्रतीक्षित फ्रीगंज का ब्रिज भी शामिल किया गया है. शहर का सबसे महत्‍वपूर्ण हरिफाटक ब्रिज का चौड़ीकरण काम म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा 371.11 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है. साथ ही सड़कों का चौड़ीकरण, नवीन मार्गों का निर्माण भी इसमें शामिल है.

    सीवरेज पर 476 करोड़, पेयजल पर 1113 करोड़

    सिंहस्थ मेला क्षेत्र में सीवरेज पाइप लाइन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्‍लान्ट का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जो शहर के अधोसंरचना विकास की दृष्‍टि‍ से अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण रहेगी और इसकी लागत 476.06 क‍रोड़ रुपए रहेगी. शहर की पेयजल परियोजना भी 1113 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही है. इस परियोजना में 150 एमएलडी का वॉटर ट्रीटमेंट प्‍लान्‍ट, 700 किमी से अधिक पाइप लाइन का नेटवर्क और 17 नए जल टैंक बनाए जाएंगे.

    ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और मंदिर जीर्णोद्धार के लिए 500 करोड़ से ज्यादा

    ऐति‍हासिक स्थलों का संरक्षण करना जैसे शहर का कोठी पैलेस भवन उसे कुंभ एक्सपीरियंस सेंटर व वीर भारत संग्रहालय बनाना, वीर दुर्गादास सिंह राठौड़ की छत्री पर 52.69 करोड़ की लागत से विकास कार्य, मंदिर के जीर्णोद्धार कर परमार, मराठा शैली का वैभव लौटाना भी इसमें शामिल है. इसपर 500 करोड़ से ज्यादा खर्ज होंगे.

    अन्य कई परियोजनाओं पर खर्च होंगे हजारों करोड़

    सिहंस्‍थ में करोड़ों श्रध्‍दालुओं के आने पर उनके स्वास्थ्य का ध्‍यान रखते हुए 550 बिस्‍तरीय चिकित्‍सालय भवन, 150 सीट्स का चिकित्‍सा महाविद्यालय भवन व छात्रावास निर्माण होगा. इंदौर से उज्‍जैन के बीच 48 किमी एक नई ग्रीन फिल्‍ड सड़क का निर्माण कार्य लागत लगभग 2935 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे

  • मध्यप्रदेश में मखाना की खेती का नया अध्याय, 4 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के जरिए विकास

    भोपाल

    बिहार की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी मखाना की खेती होगी। प्रदेश के चार जिलों में पायलट प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा। 150 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को 75 हजार प्रति हेक्टेयर या लागत का 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इस योजना के तहत एमपी के 99 कृषकों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं।

    उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि मध्यप्रदेश में भी बिहार की तर्ज पर मखाना की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रदेश के 4 जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में मखाना खेती क्षेत्र विस्तार को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है।

    अब मध्य प्रदेश में भी बिहार की तर्ज पर मखाना की खेती की जाएगी। राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से चार जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में मखाना उत्पादन को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत प्रदेश में 150 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना खेती विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    मध्य प्रदेश के 4 जिलों से शुरुआत 

    मध्य प्रदेश के चार जिलों से मखाने की खेती की शुरुआत होने वाली है, उद्यानिकी विभाग ने मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी जिले में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरु करने की योजना बनाई है. उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं, मंत्री का कहना है कि मखाना खेती से किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और प्रदेश में जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा, इसलिए इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है. 

    कृषकों को सरकार की ओर से 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर या लागत का 40% तक अनुदान मिलेगा। फिलहाल इस योजना के अंतर्गत 99 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं।

    उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि मध्यप्रदेश की जलवायु मखाना उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त है। बिहार में जिस तरह से मखाना खेती ने किसानों की आमदनी बढ़ाई है, उसी मॉडल को अब मध्यप्रदेश में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मखाना उत्पादन छोटे तालाबों और जलाशयों में सिंघाड़े की तरह किया जा सकता है, जिससे जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग होगा।

    मंत्री कुशवाह ने किसानों से इस योजना से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मखाना बोर्ड का गठन भी किया गया है। मध्यप्रदेश इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

    आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण अरविंद दुबे ने बताया कि परियोजना पर लगभग 45 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ बीज, प्रशिक्षण और प्रसंस्करण सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। मखाने की देश और विदेश (अरब देशों व यूरोप) में उच्च मांग को देखते हुए यह योजना प्रदेश के किसानों के लिए नए अवसर लेकर आ सकती है।

    किसानों को अनुदान भी मिलेगा

    मखाना खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर या कुल लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान भी सरकार की तरफ से दिया जाएगा. इससे किसानों को नई फसल को अपनाने में मदद मिलेगी, बता दें कि मखाने का उत्पादन सिंघाड़े की तरह छोटे-छोटे तालाबों में किया जाता है, इसी को ध्यान में रखते हुए चारों जिलों में लगभग 150 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना उत्पादन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है. इस परियोजना पर करीब 45 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. जिसके लिए सरकार की तरफ से उद्यानिकी विभाग को बजट भी मिलेगा. 

    किसानों से लिए जा रहे आवेदन 

    योजना की शुरुआत के बाद प्रदेश के 99 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है, विभाग का कहना है कि सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि मखाना खेती प्रदेश के किसानों के लिए एक नई आजीविका का स्रोत बनेगी और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.  

  • Agniveer Bharti Update: 15 नवंबर तक आ सकता है रिजल्ट, ट्रेनिंग शेड्यूल में बड़ा बदलाव

    ग्वालियर
    प्रदेश के 10 जिलों के उन युवाओं के लिए खुशखबरी है, जिन्होंने भारतीय सेना में अग्निवीर बनने के लिए अगस्त माह में शारीरिक परीक्षा दी थी। अब परीक्षा परिणाम आने वाला है। 15 नवंबर तक परीक्षा परिणाम आ सकता है। एक माह ट्रेनिंग आगे बढ़ने के चलते ही परीक्षा परिणाम विलंब से आ रहा है। परीक्षा परिणाम आने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग पर भेजा जाएगा।

    लिखित परीक्षा में चयनित हुए 10500 अभ्यर्थी
    देशभर के आठ ट्रेनिंग सेंटरों के लिए चयनित अभ्यर्थियों को भेजा जाएगा। दिसंबर के पहले सप्ताह या दूसरे सप्ताह से इनकी रवानगी शुरू हो जाएगी। प्रदेश के ग्वालियर, शिवपुरी, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, टीकमगढ़, पन्ना, दमोह, सागर के करीब 33 हजार अभ्यर्थियों ने अग्निवीर बनने के लिए लिखित परीक्षा दी थी। लिखित परीक्षा में 10500 अभ्यर्थी चयनित हुए। इनकी शारीरिक परीक्षा अगस्त माह में शिवपुरी में हुई। शारीरिक परीक्षा में अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए। इसके बाद कुल प्राप्तांकों के आधार पर मेरिट लिस्ट जारी होगी।
     
    दौड़ को लेकर हुआ है बदलाव
    इस बार नया बदलाव हुआ था। पहले 5.30 मिनट से 5.45 मिनट में 1600 मीटर की दौड़ पूरी करनी होती थी। जो इस समयावधि में दौड़ पूर्ण कर लेता था, उसे ही उत्तीर्ण माना जाता था। लेकिन इस बार 1600 मीटर दौड़ के लिए 5.30 मिनट से 6.10 मिनट तक का समय दिया गया। अलग-अलग अवधि में दौड़ पूर्ण करने वालों को नंबर दिए जाएंगे। इसके आधार पर ही मेरिट लिस्ट जारी होगी।

    चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग सेंटर के लिए रवाना किया जाएगा
    लिखित और शारीरिक परीक्षा में प्राप्तांकों के आधार पर ही मेरिट लिस्ट जारी होगी। फिर दस्तावेजों का परीक्षण सेना भर्ती कार्यालय पर शुरू होगा। 15 दिन में चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज परीक्षण होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग सेंटर के लिए रवाना किया जाएगा। अग्निवीर भर्ती परीक्षा का परिणाम 15 नवंबर तक आ सकता है। इसके बाद दस्तावेज परीक्षण होगा, फिर ट्रेनिंग सेंटर पर भेजा जाएगा। कर्नल पंकज कुमारनिदेशक, सेना भर्ती कार्यालय।

  • हाई कोर्ट ने नहीं मानी अजाक्स की आपत्ति, आरक्षण सुनवाई पर लगाम नहीं

    जबलपुर
    मध्य प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण मामले पर दायर याचिकाओं पर बुधवार को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। अनुसूचित जाति, जनजाति अधिकारी, कर्मचारी संघ (अजाक्स) की ओर से इस संबंध में आरबी राय मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने का संदर्भ देकर हाई कोर्ट में सुनवाई किए जाने पर आपत्ति जताई गई। कहा गया कि हाई कोर्ट में सुनवाई नहीं होनी चाहिए।

    इस पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की। कहा कि यह मामला अलग है, सुनवाई क्यों नहीं होनी चाहिए? आपत्ति अस्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने के लिए गुरुवार (13 नवंबर) की तिथि निश्चित की है। भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती दी गई है। दलील दी गई कि वर्ष 2002 के नियमों को हाई कोर्ट के द्वारा आरबी राय के केस में समाप्त किया जा चुका है।
     
    इसके विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है, इसके बावजूद मध्य प्रदेश शासन ने महज नाम मात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर जस के तस नियम बना दिए।

    वहीं, मामले में अजाक्स सहित आरक्षित वर्ग की ओर से अनेक अधिकारियों व कर्मचारियों ने इस मामले में हस्तक्षेप याचिकाएं दायर की हैं। बुधवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव ने कुछ देर नियम की असंवैधानिकता के पक्ष में तर्क रखे। समयाभाव के चलते सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

  • मोट्रेट साइकल के रिपेयरिंग के लिये जिलास्तर पर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए: मंत्री कुशवाह

    भोपाल 
    दिव्यांगजन हितग्राहियों को, दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यक्रम के तहत प्रदान की गई, मोट्रेट साइकल के रिपेयरिंग के लिये जिलास्तर पर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस आशय के निर्देश सामाजिक न्याय दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने विभागीय अधिकारियों को दिए है।

    मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में केन्द्र सरकार की संस्था एलिम्को के माध्यम से 11 हजार 200 से अधिक दिव्यांगजन को 5 करोड़ 60 लाख रूपये के उपकरण प्रदान किए गये है। इनमें जिन हितग्राहियों को मोट्रेट साइकल प्रदान की गई है, उनकी रिपेयरिंग की व्यवस्था जिलास्तर पर दिव्यांगजन पुनर्वास केन्द्रों पर की जाना चाहिए। इसके लिए केन्द्र सरकार की संस्था एलिम्को से सम्पर्क किया जाये। वर्तमान में एलिम्को द्वारा ग्वालियर और जबलपुर में यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने यह व्यवस्था समय-सीमा में बहाल करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता होने पर सामाजिक न्याय विभाग राज्य शासन के बजट से आवश्यक पार्टस उपलब्ध करायेगा।

     

  • सालों का इंतजार खत्म, अनुकंपा नियुक्ति से परिवारों में लौटी मुस्कानें

    इंदौर
    नगर निगम के सामान्य प्रशासन विभाग ने अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार कर रहे आवेदकों को राहत देते हुए अनुकंपा नियुक्ति पत्र जारी कर दिए। सामान्य प्रशासन प्रभारी नंदकिशोर पहाड़िया ने इन आवेदकों को अनुकम्पा नियुक्ति आदेश वितरित किए।

    इस मौके पर नंदकिशोर पहाडिया ने कहा कि निगम प्रशासन कर्मचारियों और उनके स्वजनों के हितों के प्रति सदैव संवेदनशील है। कर्मचारी के असामयिक निधन की स्थिति में उनके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करना निगम का मानवीय कर्तव्य है ताकि परिवार की आजीविका निरंतर बनी रहे।
     
    नव नियुक्त कर्मचारियों को शुभकामना देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने कार्य के प्रति पूर्ण निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ निगम की सेवा करें तथा अपने दिवंगत स्वजन के कार्यों और मूल्यों को आगे बढ़ाएं।

    गौरतलब है कि वर्तमान निगम परिषद में अब तक तीन दर्जन से ज्यादा दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति दी जा चुकी है। सामान्य प्रशासन प्रभारी ने बताया कि अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों का भी जल्दी ही निराकरण किया जाकर नियुक्ति पत्र जारी किए जाएंगे।

  • जनजातीय उद्यमिता और निवेश संवर्धन में छत्तीसगढ़ बना अग्रणी राज्य

    नई दिल्ली में ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव-2025 में छत्तीसगढ़ के स्टार्टअप्स ने बढ़ाया राज्य का गौरव

    रायपुर
    ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव 2025 का आयोजन नई दिल्ली स्थित यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में किया गया, जिसमें देशभर से आए उद्यमियों,नीति-निर्माताओं एवं स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ के स्टार्टअप्स ने भी हिस्सा लेकर उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों को प्रदर्शित किया। ये स्टार्टअप्स न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त कर रहे हैं, बल्कि जनजातीय परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान को नई पहचान भी दे रहे हैं।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल एवं केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल उरांव ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का किया निरीक्षण। इस अवसर पर उन्होंने सभी स्टार्टअप्स के स्टॉलों का अवलोकन किया, उद्यमियों से संवाद किया तथा उनके उत्पादों के बारे में जानकारी प्राप्त की। केन्द्रीय मंत्री श्री गोयल ने छत्तीसगढ़ एग्रोफैब कंपनी के प्रतिनिधि श्री करण चंद्राकर से विशेष चर्चा करते हुए उनके नवाचारों की सराहना की। दोनों मंत्रियों ने छत्तीसगढ़ के स्टार्टअप्स द्वारा प्रदर्शित उत्पादों को जनजातीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने वाला उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

    कार्यक्रम में निवेश आयुक्त, छत्तीसगढ़ श्रीमती ऋतु सेन ने राज्य में उद्यमिता और निवेश को प्रोत्साहित करने वाली विभिन्न पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत उद्यमों एवं स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता, परामर्श तथा विपणन सहयोग जैसी सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक उद्यमिता से जोड़कर जनजातीय समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित करना। उन्होंने कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले उद्यमियों को उनके उत्पादों के विस्तार एवं बाज़ार पहुँच बढ़ाने के लिए उपयोगी सुझाव दिए। 

    छत्तीसगढ़ के अनेक स्टार्टअप्स – सिद्धार्थ एग्रोमार्केटिंग प्रा. लि., अंकुरण सीड्स, कोशल, शांति आनंद वेलनेस, बस्तर से बाज़ार तक, कोईतूर फिश कंपनी, कोया बाज़ार, एग्रोफैब तथा हेमल फूड प्रोडक्ट्स प्रा. लि. ने प्रदर्शनी में भाग लेकर अपने उत्पादों एवं नवाचारों का प्रदर्शन किया। इन स्टार्टअप्स ने कृषि विपणन, बीज उत्पादन, जनजातीय हस्तशिल्प, फूड प्रोसेसिंग, वेलनेस उत्पादों तथा वनोपज आधारित व्यापार से जुड़ी अभिनव पहलें प्रस्तुत कीं।

    यह सम्मेलन जनजातीय उद्यमियों, निवेशकों और नीति-निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान करता है, जिससे छत्तीसगढ़ की छवि समावेशी एवं समुदाय-केन्द्रित उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले अग्रणी राज्य के रूप में और अधिक सुदृढ़ हुई है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उद्योग संचालनालय के संयुक्त संचालक श्री संजय गजघाटे तथा निवेश आयुक्त कार्यालय की महाप्रबंधक सुश्री अंजली पटेल भी उपस्थित थीं।

  • जल संरक्षण एवं जनभागीदारी के क्षेत्र में बना आदर्श मॉडल

    रायपुर 
    जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 के विजेताओं की घोषणा की गई है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव जिले को देश के ईस्ट जोन में बेस्ट डिस्ट्रिक्ट श्रेणी में प्रथम पुरस्कार हेतु चयनित किया गया। यह सम्मान जिले में जल संरक्षण, संवर्धन तथा जनभागीदारी आधारित सतत कार्यों के लिए 18 नवम्बर 2025 को देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु द्वारा प्रदान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस पुरस्कार में देशभर के विभिन्न जिलों के नामांकन के बाद सेन्ट्रल ग्राउण्ड वॉटर बोर्ड, सेन्ट्रल वॉटर कमिशन एवं विभिन्न दलों के निरीक्षण व विस्तृत अवलोकन के उपरांत छत्तीसगढ़ राज्य ही नहीं अपितु पूरे देश के ईस्ट जोन के पांच राज्यों के समस्त जिलों में से बेस्ट डिस्ट्रिक्ट श्रेणी में प्रथम पुरस्कार के रूप में यह खिताब राजनांदगांव जिले को प्रदान किया जा रहा है। विगत वर्ष केंद्रीय भू-जल मंत्री द्वारा राजनांदगांव जिले का दौरा कर जिले में चल रहे इस अभियान के प्रयासों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए देश विभिन्न मंचों में राजनांदगांव जिले की प्रशंसा भी की गई थी।

    जनभागीदारी आधारित यह अभियान जल संरक्षण की दिशा में सफल पहल
    राजनांदगांव जिले में जल संरक्षण एवं प्रबंधन के कार्यों को शासन-प्रशासन के साथ-साथ नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, महिला स्वसहायता समूहों, उद्योगपतियों, विद्यार्थियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से मिशन के रूप में सघन अभियान चलाया गया। गांवों से लेकर शहरों तक नागरिकों ने जल ही जीवन है और जल है तो कल है के संदेश को आत्मसात करते हुए मिशन जल रक्षा को एक जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया है। किसानों द्वारा फसल चक्र परिवर्तन, वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के कार्यों से जिले में जल स्तर में सुधार हेतु निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। केंद्रीय भू-जल बोर्ड की 2021-22 की रिपोर्ट में जिले के तीन ब्लॉकों को सेमी-क्रिटिकल जोन के रूप में चिन्हित किया गया था। सेमीक्रिटिकल जोन का अर्थ पानी के विषय में 70 प्रतिशत से अधिक पानी का उपयोग करने वाले क्षेत्र इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए मिशन जल रक्षा के व्यापक प्रयासों के साथ जिले ने यह अभियान प्रारंभ किया था, अब यह पूरे देश में मॉडल के रूप में जाना जाने लगा है। इस योजना में जिले की प्राथमिकता है कि पहले तो हम पानी के तेजी से घटते जल स्तर की गति को धीमा कर सके फिर उसे एक स्तर पर स्थिर कर सके तत्पश्चात् अत्यधिक जल दोहन को रोककर इस प्राकृतिक बहुमूल्य धरोहर को संधारित कर सके। इसके लिए अनिवार्य है कि प्रत्येक नागरिक आज से ही अपने आसपास के क्षेत्र में होने वाले जल दोहन को ध्यान में रख कर कम से कम भू-जल का उपयोग करें एवं कम से कम पानी उपयोग वाली फसलों को बढ़ावा दें। 
        महिला समूहों ने नीर और नारी जल यात्रा जैसे अभियानों के माध्यम से जल संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरूकता के लिए कार्य किया गया। जिसमें जिले की पद्मश्री श्रीमती फूलबासन बाई यादव का विशेष सहयोग रहा। उन्होंने जिले के गांव-गांव में जाकर महिलाओं को एकजुट कर जल यात्राओं के माध्यम से मुहिम को बल प्रदान किया। जिले के समस्त विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने रैलियों, पौधारोपण विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को जल संरक्षण हेतु प्रेरित किया। 

    मिशन जल रक्षा – सतत विकास की दिशा में अभिनव पहल के रूप में उभर कर आने लगा
    पानी के तेजी से घटते जल स्तर की इस चुनौती को प्रयासों में बदलते हुए जिले में जीआईएस आधारित तकनीकी योजनाओं, रिचार्ज संरचनाओं, रिचार्ज सॉफ्ट, बोरवेल सह इंजक्शनवेल, परकोलेशन टैंक, फार्म पॉन्ड और तालाबों के पुर्नजीवन जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी गई। मिशन के अंतर्गत भू- जल दोहन नियंत्रण, वर्षा जल संग्रहण तथा सामुदायिक प्रयासों को जल संरक्षण की प्रमुख रणनीति के रूप में अपनाया गया।

    सामुदायिक प्रयासों से मिली राष्ट्रीय पहचान
    राजनांदगांव जिले को प्राप्त होने वाला यह राष्ट्रीय सम्मान, जिले के नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। साझा प्रयासों से जल बचाओ, भविष्य बनाओ की भावना को व्यवहार में उतारते हुए जिले ने यह साबित किया है कि जनभागीदारी से किसी भी संसाधन का संरक्षण संभव है। साथ ही साथ 18 नवंबर 2025 को ही नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में राजनांदगांव जिले को एक अन्य जल संचय से जनभागीदारी के क्षेत्र में भी सम्मानित किया जाना है। राजनांदगांव की यह उपलब्धियां अब पूरे देश के सामने आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो रही है। यह सम्मान न केवल जिले की उपलब्धियों का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए सतत जल प्रबंधन और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।

  • मुख्यमंत्री निवास में 13 नवंबर गुरुवार को होगा जनदर्शन

    रायपुर
    मुख्यमंत्री निवास रायपुर में 13 नवंबर गुरुवार को जनदर्शन का आयोजन दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इस अवसर पर प्रदेशवासियों से सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं का निराकरण करेंगे। मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनदर्शन में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का त्वरित और संवेदनशील निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को समयबद्ध समाधान मिल सके।

    राज्य सरकार के जनदर्शन कार्यक्रम का उद्देश्य शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। यह पहल मुख्यमंत्री श्री साय की जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता और पारदर्शी सुशासन के संकल्प को दर्शाती है, जिससे आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित हो सके।

  • सुधार से विश्वास तक: चारों श्रेणियों में ‘टॉप अचीवर’ बना छत्तीसगढ़, दिखाया विकास का नया मॉडल

    नीति से नीयत तक – छत्तीसगढ़ का सुधार मॉडल बना राष्ट्रीय उदाहरण

    DPIIT की BRAP रैंकिंग में ‘टॉप अचीवर’ बना छत्तीसगढ़, निवेशकों के लिए भरोसे का केंद्र बना राज्य

    रायपुर 
    छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर देशभर में अपनी पहचान सुधार और विकास के नए प्रतीक के रूप में दर्ज कराई है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT), भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘उद्योग संगम’ में राज्य को बिज़नेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (BRAP) की चारों प्रमुख श्रेणियों में ‘टॉप अचीवर’ घोषित किया गया। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ अब न केवल नीति निर्माण में बल्कि नीति क्रियान्वयन में भी अग्रणी राज्यों की पंक्ति में शामिल हो चुका है।

    यह उपलब्धि उस परिवर्तन यात्रा की गवाही है जो छत्तीसगढ़ ने बीते वर्षों में तय की है। कभी BRAP रैंकिंग में निचले पायदान पर रहने वाला यह राज्य आज गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे औद्योगिक दिग्गजों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। यह परिवर्तन केवल अंकों का सुधार नहीं, बल्कि शासन की सोच और दृष्टिकोण में आए मूलभूत परिवर्तन का परिणाम है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने सुशासन, पारदर्शिता और भरोसे पर आधारित प्रशासनिक ढांचा स्थापित किया है। इस ढांचे ने न केवल निवेशकों का विश्वास जीता है बल्कि सामान्य नागरिकों के जीवन को भी सुगम और सशक्त बनाया है। राज्य सरकार ने सुधारों को केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें जन-जीवन में उतारकर एक नए विकास मॉडल का निर्माण किया है।

    राज्य ने BRAP के अंतर्गत अब तक 434 सुधार लागू किए हैं — जो ‘Ease of Doing Business’ के साथ-साथ ‘Ease of Living’ को सशक्त बनाने की दिशा में उसके सतत प्रयासों को दर्शाते हैं। इन सुधारों का उद्देश्य केवल उद्योग स्थापित करना नहीं, बल्कि उस वातावरण का निर्माण करना है जहाँ उद्योग, समाज और प्रशासन एक साथ प्रगति करें।

    इन्हीं सुधारों में एक ऐतिहासिक कदम रहा ‘जन विश्वास अधिनियम’, जिसके तहत छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बना जिसने छोटे कारोबारी अपराधों को डीक्रिमिनलाइज किया। इस अधिनियम ने सरकार और उद्योग जगत के बीच भरोसे का पुल बनाया है। अब कारोबारियों के लिए शासन एक सहयोगी के रूप में सामने आ रहा है। यह बदलाव राज्य में उद्यमिता संस्कृति को और अधिक प्रोत्साहन देने वाला सिद्ध हुआ है।

    इसी तरह एक और ऐतिहासिक पहल के रूप में छत्तीसगढ़ ने भूमि अभिलेखों के स्वचालित म्यूटेशन की शुरुआत की। यह कदम राज्य को देश का पहला ऐसा प्रदेश बनाता है जहाँ जमीन पंजीयन के साथ ही स्वामित्व का हस्तांतरण स्वतः हो जाता है। इससे न केवल प्रक्रियाएँ सरल हुई हैं बल्कि लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिली है। यह सुधार पारदर्शिता, दक्षता और समय की बचत तीनों का बेहतरीन उदाहरण है।

    राज्य सरकार ने औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी कई क्रांतिकारी सुधार लागू किए हैं। दुकानों और प्रतिष्ठानों को अब 24×7 संचालन की अनुमति दी गई है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और व्यापारिक लचीलापन भी सुनिश्चित हुआ है। इसके अतिरिक्त फ्लैटेड इंडस्ट्री के लिए FAR में वृद्धि, भूमि उपयोगिता बढ़ाने हेतु सेटबैक में कमी, और फैक्ट्री लाइसेंस की वैधता 10 से बढ़ाकर 15 वर्ष करने के साथ ऑटो-रिन्यूअल सुविधा प्रदान की गई है। ये कदम राज्य को आधुनिक औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करते हैं।

    इन सुधारों ने मिलकर छत्तीसगढ़ को एक भरोसेमंद, स्थिर और पारदर्शी औद्योगिक केंद्र बना दिया है। अब निवेशक केवल संभावनाएँ नहीं, बल्कि निश्चितता देखते हैं। प्रक्रियाओं में सरलीकरण और नीतिगत स्पष्टता ने ‘Ease of Doing Business’ को वास्तविकता में बदल दिया है।

    इन उल्लेखनीय सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन और निवेश आयुक्त सुश्री ऋतु सेन (IAS) को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल व्यक्तियों का, बल्कि उस टीम भावना और संस्थागत प्रयासों का भी है जिसने राज्य को यह मुकाम दिलाया।

    यह गौरवपूर्ण क्षण पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणादायी है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि सही नीयत, सटीक नीति और मजबूत नेतृत्व के बल पर कोई भी राज्य देश के औद्योगिक नक्शे पर अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है।

    बीते 10 महीनों में ₹7.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव छत्तीसगढ़ को प्राप्त हुए हैं। यह आँकड़ा किसी प्रचार का परिणाम नहीं, बल्कि निवेशकों के विश्वास और नीतिगत पारदर्शिता का प्रमाण है। अब छत्तीसगढ़ निवेश का नहीं, बल्कि ‘विकास का केंद्र’ बन रहा है।

    इन निवेशों से हजारों युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे, ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी, और राज्य की अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार होगा। यह ‘विकास की श्रृंखला’ गाँव से लेकर शहर तक एक समान प्रभाव छोड़ रही है।

    छत्तीसगढ़ का यह मॉडल केवल उद्योगों तक सीमित नहीं है; यह एक समग्र विकास दृष्टि है जहाँ सुधारों का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे। शासन की प्राथमिकता केवल निवेश नहीं, बल्कि जीवन-गुणवत्ता में सुधार है।

    ‘Ease of Doing Business’ के साथ ‘Ease of Living’ का यह संयोजन छत्तीसगढ़ को अन्य राज्यों से अलग बनाता है। यहाँ सुधार, विश्वास और विकास एक-दूसरे के पूरक बनकर आगे बढ़ रहे हैं। यही छत्तीसगढ़ के परिवर्तन का वास्तविक सार है।

    राज्य सरकार का यह सुधारवादी दृष्टिकोण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। छत्तीसगढ़ ने इस दिशा में अपने प्रदर्शन से साबित किया है कि वह ‘विकसित भारत’ का अग्रदूत बनने की क्षमता रखता है।
     

  • भावांतर भुगतान में तेजी लाने मंडी बोर्ड का बड़ा कदम, 1,500 करोड़ का कर्ज मंजूर

    भोपाल
    सोयाबीन का किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के लिए लागू की गई भावांतर योजना में पहला भुगतान गुरुवार को होगा। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव देवास से किसानों के खातों में माडल दर से अंतर की राशि अंतरित करेंगे। योजना में आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल राशि केंद्र सरकार से मिलेगी।

    बाकी राशि की व्यवस्था प्रदेश सरकार को करनी है। इसके लिए मंडी बोर्ड सरकार की गारंटी पर 1,500 करोड़ रुपये का कर्ज ले रहा है। प्रदेश में खरीफ सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसल सोयाबीन है। करीब 45 लाख हेक्टेयर में लाखों किसान इसकी खेती करते हैं। इस बार समर्थन मूल्य 5,328 रुपये तय है लेकिन किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसी कारण सरकार ने भावांतर योजना लागू की है।
     
    सरकार ने सोयाबीन का माडल रेट 4,036 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। प्रतिदिन मॉडल रेट तय किए जा रहे हैं। किसानों को मंडी में चार से साढ़े चार हजार रुपये ही मिल पा रहे हैं क्योंकि इस बार अतिवर्षा और बाढ़ से फसल प्रभावित हुई है। उत्पादन भी कम हुआ है।

    भावांतर के लिए राशि की व्यवस्था फिलहाल मंडी बोर्ड कर रहा है। इसके लिए उसने 1,500 करोड़ रुपये का कर्ज लेने की निविदा जारी की है। योजना के लिए नौ लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है और एक लाख 36 हजार किसान उपज बेच चुके हैं। इन्हें भावांतर दिया जाएगा। इसके लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रम गुरुवार को देवास में किया जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री सिंगल क्लिक के माध्यम से राशि किसानों के खातों में अंतरित करेंगे।

  • धान खरीदी में सुगमता हेतु ‘तुहर टोकन मोबाइल एप’ प्रारंभ — किसानों को मिलेगी घर बैठे टोकन सुविधा, समितियों में लंबी कतारों से मिलेगी मुक्ति

    रायपुर 
    किसानों को धान विक्रय हेतु सुगम एवं बेहतर व्यवस्था प्रदाय किये जाने हेतु खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में ‘तुहर टोकन मोबाइल एप’ प्रारंभ किया गया है। इस एप के माध्यम से किसानों को घर बैठे धान विक्रय हेतु टोकन की व्यवस्था उपलब्ध होगी, जिससे समितियों में लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी।

    यह मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इस ऐप में किसानों को सर्वप्रथम आधार आधारित ओटीपी के माध्यम से पंजीयन करना होगा। किसान प्रतिदिन सुबह 8.00 बजे से इस ऐप के माध्यम से टोकन हेतु आवेदन कर सकेंगे।

    खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने जानकारी दी कि धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा को ध्यान में रखते हुए, सीमांत कृषक (2 एकड़ या 2 एकड़ से कम भूमि) को अधिकतम 1 टोकन, लघु कृषक ( 2 से 10 एकड़ तक) को अधिकतम 2 टोकन तथा दीर्घ कृषक (10 एकड़ से अधिक) को अधिकतम 3 टोकन प्रदान किये जायेंगे।

    नया टोकन बनाने हेतु समय-सीमा रविवार से शुक्रवार तक (प्रातः 8.00 बजे से सायं 5.00 बजे तक) निर्धारित की गई है। जारी टोकन आगामी 07 खरीदी दिवसों के लिए मान्य रहेंगे।

    धान खरीदी केन्द्र की प्रतिदिन की खरीदी सीमा का 70 प्रतिशत हिस्सा मोबाइल एप के माध्यम से टोकन हेतु आरक्षित रहेगा। इस 70 प्रतिशत में से लघु एवं सीमांत कृषक हेतु 80 प्रतिशत तथा दीर्घ कृषक हेतु 20 प्रतिशत का आरक्षण किया गया है।

    उदाहरण स्वरूप यदि किसी उपार्जन केन्द्र की प्रतिदिन की खरीदी सीमा 1000 क्विंटल है, तो मोबाइल ऐप हेतु आरक्षित 700 क्विंटल में से 560 क्विंटल लघु एवं सीमांत कृषकों हेतु तथा 140 क्विंटल दीर्घ कृषकों हेतु आरक्षित रहेगा।

    शेष 30 प्रतिशत टोकन सोसाइटी स्तर पर भी किसानों हेतु उपलब्ध रहेंगे, जिससे सभी वर्ग के किसानों को धान विक्रय हेतु सहज और सुगम व्यवस्था प्राप्त हो सके।

    खाद्य विभाग द्वारा विकसित ‘तुहर टोकन मोबाइल एप’ राज्य के किसानों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से सशक्त बनाते हुए खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता, समान अवसर और समय की बचत सुनिश्चित करेगा।

  • विकास कार्यों की प्रगति पर चर्चा, परियोजना क्रियान्वयन समिति की बैठक आयोजित

    रायपुर

    मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में परियोजना निर्माण एवं क्रियान्वयन समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में विभिन्न कार्यों के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में जिला रायपुर के जी.ई. रोड पर गुरू तेज बहादुर उद्यान से नेताजी सुभाष चौक/गुरूनानक चौक तक फ्लाई ओव्हर निर्माण कार्य, राजनांदगांव जिले में स्थित मोहरा एनीकट में पेयजल हेतु चौकी एनीकट से मोहरा एनीकट तक पाईप लाईन के माध्यम से जल प्रदाय योजना के निर्माण कार्य और जशपुर जिले के पत्थलगाव में बगिया बैराज सह दाबयुक्त उद्वहन सिचाई योजना का निर्माण कार्य पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी तरह से हसदेव बांगो परियोजना के अंतर्गत वृहद परियोजना अगमेण्टेशन के अंतर्गत परसाही दाबयुक्त उद्वहन सिंचाई परियेाजना कार्य और मड़वारानी बैराज निर्माण सह उद्वहन सिंचाई योजना के निर्माण कार्य के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।

    रायपुर जिले के विकासखण्ड आरंग में मोहमेला सिरपुर बैराज निर्माण कार्य और चपरीद एनीकट निर्माण के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। गरियाबंद जिले के पैरी परियोजना के अंतर्गत सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक नहर पाईप लाईन निर्माण कार्य के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बिलासपुर जिले के खारंग जलाशय योजना की बांयी तट नहर के आवर्धन हेतु पाराघाट व्यपवर्तन योजना से उद्वहन फीडर सिंचाई के निर्माण कार्य के प्रस्ताव के साथ अन्य विषयों पर विस्तृत चर्चा के उपरांत अनुमोदित किए गए।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ऋचा शर्मा, प्रमुख सचिव कृषि एवं किसान कल्याण शहला निगार, सचिव लोक निर्माण डॉ. कमलप्रीत सिंह, सचिव ऊर्जा विभाग रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, सचिव जल संसाधन विभाग राजेश सुकुमार टोप्पो, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव भूवनेश यादव, सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास भीम सिंह सहित आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

  • धान खरीदी से पहले प्रशासन एक्शन में, कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश

    देर रात हुई कार्रवाई, अवैध धान परिवहन और भंडारण पर कसी लगाम

    महासमुंद

    धान खरीदी के पूर्व जिला प्रशासन अवैध धान परिवहन, भंडारण एवं विक्रय पर सख्त रुख अपनाते हुए लगातार कार्रवाई कर रहा है। कलेक्टर श्री विनय लंगेह के निर्देश पर राजस्व, खाद्य एवं मंडी विभाग की संयुक्त टीमों ने देर रात तक कई स्थानों पर छापामार कार्रवाई कर बड़ी मात्रा में अवैध धान जप्त किया है।

    तहसील सराईपाली के ग्राम बालसी में देर रात अनिल ट्रेडर्स के गोदाम से 375 कट्टा और रोशन ट्रेडर्स के गोदाम से 50 कट्टा अवैध धान जप्त किया गया। यह कार्रवाई राजस्व विभाग, खाद्य निरीक्षक और मंडी सचिव की संयुक्त टीम द्वारा मंडी अधिनियम के तहत की गई। इसी प्रकार ओड़िशा सीमा से अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे 80 कट्टा धान को नायब तहसीलदार प्रकृति एवं मंडी टीम द्वारा जब्त किया गया।

    एक अन्य कार्रवाई में तहसील पिथौरा अंतर्गत ग्राम छोटे लोरम में साहेब लाल पटेल के गोदाम से 600 बोरी, ग्राम लालमाटी में बीसीकेशन पिता रूपसाय के घर से 200 बोरी, तथा गोमती पति गंगाराम के घर से 100 बोरी अवैध धान प्रशासनिक टीम ने जब्त किया। यह कार्रवाई एसडीएम पिथौरा श्री बजरंग वर्मा के मार्गदर्शन में की गई तथा मंडी सचिव को मंडी अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    कलेक्टर श्री विनय लंगेह ने कहा कि धान खरीदी प्रारंभ होने से पूर्व कोई भी व्यक्ति या व्यापारी अवैध रूप से धान का भंडारण या परिवहन न करे। नियम विरुद्ध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले की सीमाओं पर निगरानी और सघन जांच अभियान आगामी दिनों में भी जारी रहेगा, ताकि समर्थन मूल्य पर खरीदी में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध परिवहन, भंडारण न हो सके।

  • सोशल रील के छल से शुरू हुई ठगी — फेक पेमेंट ऐप चलाने वाले बंटी और बबली गिरफ्तार

    देवास
    सोशल मीडिया जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे ही अपराध करने के नए तरीके भी निकाले जा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण देवास शहर में देखने को मिला। यहां एक बंटी-बबली की जोड़ी ने मोबाइल पर रील देखकर फर्जी पेमेंट एप के बारे में सीखा और शहर के दो दुकानदारों को चूना लगा दिया। दोनों वारदातें सीसीटीवी में कैद हो गईं, जिसके चलते आखिरकार आरोपित जोड़ी को पकड़ लिया गया। मामले का खुलासा पुलिस कप्तान पुनीत गेहलोद ने बुधवार को पत्रकार वार्ता के दौरान किया। एसपी गेहलोद ने बताया कि 4 नवंबर को कोतवाली क्षेत्र में दिलीप सोनी की नावेल्टी चौराहा स्थित रत्नराज ज्वैलरी दुकान से शाम करीब 6 बजे युवक-युवती ने चांदी की पायल और अंगूठियां खरीदीं। कुल 6700 रुपये का भुगतान संबंधित व्यक्ति ने फोनपे क्यूआर के माध्यम से अपने मोबाइल से करते हुए स्क्रीन शाट दिखाया।
     
    इधर दुकानदार को वह भुगतान नहीं मिला, तो संबंधित ने अपना मोबाइल नंबर दिया और कहा कि भुगतान नहीं मिले तो फोन लगा देना। इसके बाद मोटरसाइकिल से युवती-युवती वहां से रवाना हो गए। सोनी ने जब जांच की तो पता चला कि उसके साथ धोखाधड़ी हो गई है। अगले दिन सोनी ने कोतवाली थाने पर मामले की शिकायत की। इस प्रकार की ठगी दोनों युवक-युवती द्वारा नावेल्टी चौराहा स्थित इलेक्ट्रानिक दुकान पर भी कर गए। वहां से 18500 रुपये कीमत का एलईडी टीवी इसी प्रकार का फर्जी पेमेंट कर ले गए।

    कोतवाली टीआई श्यामचंद्र शर्मा ने बताया कि दोनों मामलों में जांच करने पर पता चला कि यह ठग जोड़ी दुकानदारों को फर्जी पेमेंट एप के माध्यम से धोखा देकर फरार हो गई है। इसके बाद पुलिस की टीमों को दुकानों व आसपास के सीसीटीवी कैमरों के साथ मुखबिरों को सक्रिय कर आरोपितों को पकड़ने के काम में लगाया गया।

    सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान दीपक वर्मा निवासी ग्राम गदईशा पिपलिया जिला देवास और बबली के रूप में हुई। पुलिस ने लगातार आरोपितों की तलाश के बाद आखिरकार राजगढ़ से उन्हें पकड़ने में सफलता हासिल की। दोनों के कब्जे से टीवी और आभूषण जब्त किए गए हैं।

    पूछताछ में पता चला कि युवती ने सोशल मीडिया पर रील देखकर फर्जी पेमेंट एप के बारे में जानकारी ली। इसके बाद मोबाइल के प्ले स्टोर से नकली पेमेंट दिखाने वाली एप अपने मोबाइल में डाउनलोड कर लोगों को ठगने लगे। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि इन दोनों ने और कहां-कहां इस प्रकार की ठगी की है। फिलहाल दोनों आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

  • भावांतर योजना में आज बढ़कर 4077 रुपए मॉडल रेट जारी

    भोपाल
    भावांतर योजना 2025 अंतर्गत  सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए बुधवार 12 नवंबर को 4077 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी।

    मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी रही। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए तथा 11 नवंबर को 4056 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी हुआ।

  • खड़गंवा क्षेत्र को मिलेगा फायदा: बरदर जलाशय नहर जीर्णोद्धार हेतु 3 करोड़ 52 लाख स्वीकृत

    स्थानीय विधायक और कैबिनेट मंत्रीश्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

    रायपुर,

    मनेंद्रगढ़ के स्थानीय विधायक एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल पर क्षेत्र को एक और सौगात मिली है। एमसीबी जिले के विकासखंड खड़गंवा की बरदर जलाशय योजना के नहर का जीर्णोद्धार कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति जल संसाधन विभाग की तरफ से दी गयी है। यह स्वीकृति 3 करोड़ 52 लाख रुपये की  है। इस परियोजना के पूर्ण हो जाने से क्षेत्र की सिंचाई क्षमता बढ़कर 586 हेक्टेयर क्षेत्र तक पहुंच जाएगी। इससे क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिलेगी और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

    स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया है। वहीं मनेंद्रगढ़ की स्थानीय जनता ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए विधायक तथा कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रति आभार जताया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद कहा है कि नहर जीर्णोद्धार के कार्य से सिंचाई की क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्र के किसानों को बेहतर फसलों के लिए एक नई दिशा मिलेगी।

  • मंत्री सुश्री भूरिया ने कोविड बाल सेवा योजना के बच्चों को स्वयं भोजन परोसा और उनके साथ बैठकर भोजन किया

    भोपाल 
    स्नेहिल और भावनात्मक माहौल में महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बुधवार को अपने निवास पर पी.एम. केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना एवं सी.एम. कोविड-19 बाल सेवा योजना से लाभान्वित बच्चों के साथ एक विशेष “प्रेरणा एवं संवाद कार्यक्रम” का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों से आत्मीय वार्तालाप करते हुए उनकी समस्याएँ सुनीं, उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित कर हर बच्चे को स्नेहपूर्वक उपहार भेंट किए। मंत्री सुश्री भूरिया ने बच्चों को अपने घर पर स्वयं भोजन परोसा और उनके साथ बैठकर भोजन किया, जिससे माहौल परिवार जैसा स्नेहिल बन गया। उपस्थित सभी बच्चों ने प्रसन्नता और आत्मविश्वास से भरे पलों का आनंद लिया।

    मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि बच्चे हमारे अपने परिवार का हिस्सा हैं। कोविड ने भले ही इनके माता-पिता को छीन लिया हो, पर अब पूरा समाज, सरकार और मैं स्वयं इनकी अभिभावक हूँ। इनका भविष्य सुरक्षित करना मेरा कर्तव्य और मेरा सौभाग्य है। बच्चों की मुस्कान ही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है। उन्होंने कहा की इन बच्चों की आँखों में चमक और उनके चेहरे की मुस्कान ही मेरी असली उपलब्धि है। सरकार का काम सिर्फ योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि इन बच्चों के भविष्य को संवारना भी है।

    संवेदनशील पहल — स्वेच्छानुदान से की मदद
    बच्चों के प्रति मातृत्व स्नेह और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने एक संवेदनशील पहल की और एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। सुश्री भूरिया ने इन बच्चों के लिए 5 लाख रुपये की विशेष सहायता राशि अपने स्वेच्छानुदान से प्रदान की है, जिन्हें अब तक योजना का लाभ नहीं मिल पाया था। पिछले वर्ष भी उन्होंने लगभग 13 लाख रुपये की सहायता राशि व्यक्तिगत रूप से इन बच्चों के हित में दी थी।

    प्रेरणा और संवाद कार्यक्रम — बच्चों में आत्मविश्वास का संचार
    मंत्री सुश्री भूरिया ने बच्चों से सामान्य बातचीत के माध्यम से उनकी शिक्षा, सपनों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। बालिका आरती, जिसका आज जन्मदिन था। सभी बच्चों और अधिकारियों के साथ मिलकर मनाया गया, जिससे वातावरण उल्लासपूर्ण और भावनात्मक बन गया। कार्यक्रम में उप सचिव श्रीमती माधवी नागेंद्र और जिला कार्यालय के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

    योजनाएँ जो बन रही हैं आशा की किरण
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पी.एम. केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना वर्ष 2021 में आरंभ की गई थी, जो कोविड-19 में अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है।

    भोपाल जिले में 22 बच्चे इस योजना से लाभान्वित हैं। इन्हें 18 वर्ष की आयु तक मासिक आर्थिक सहायता, ₹10 लाख का कोष, निःशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य बीमा (आयुष्मान कार्ड) जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं। इसी तरह प्रदेश में मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना शुरू की गई थी, जिसके अंतर्गत बच्चों को 5 हजार रुपये मासिक सहायता, निःशुल्क शिक्षा और राशन की सुविधा दी जाती है।