• म.प्र. का जल प्रबंधन में जलवा — खरगोन और कावेश्वर को राष्ट्रीय सम्मान, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जताई खुशी

    राष्ट्रीय जल पुरस्कार: खरगोन बना देश का सर्वश्रेष्ठ जिला, कावेश्वर सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत — CM डॉ. यादव ने दी बधाई

    म.प्र. का जल प्रबंधन में जलवा — खरगोन और कावेश्वर को राष्ट्रीय सम्मान, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जताई खुशी

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार के अंतर्गत पश्चिम क्षेत्र के लिए सर्वश्रेष्ठ जिला श्रेणी में खरगोन जिले को प्रथम और सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में खंडवा जिले की कावेश्वर पंचायत (संयुक्त विजेता) को द्वितीय पुरस्कार मिलने पर स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खरगोन जिले को प्रथम और खंडवा जिले की कावेश्वर पंचायत को द्वितीय पुरस्कार (संयुक्त रूप से) की घोषणा अभिनंदनीय है। राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु 18 नवम्बर,2025 को नई दिल्ली में पुरस्कार प्रदान करेंगी। राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक विजेता को प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी के साथ-साथ विभिन्न श्रेणियों में नगद पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।

    केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित श्रम शक्ति भवन में 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा की। जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने वर्ष 2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के लिए संयुक्त विजेताओं सहित 46 विजेताओं की घोषणा की है। ये पुरस्कार 10 श्रेणियों में दिए जाएंगे- जिनमें सर्वश्रेष्ठ राज्य, सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ उद्योग, सर्वश्रेष्ठ जल उपयोगकर्ता संघ, सर्वश्रेष्ठ संस्थान (विद्यालय या महाविद्यालय के अलावा), सर्वश्रेष्ठ नागरिक समाज और जल क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति शामिल हैं।

     

  • भारत स्काउट्स एवं गाइड्स मध्यप्रदेश के राज्य परिषद की बैठक हुई

    स्काउट-गाइड को बनाएं आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी : उच्च शिक्षा मंत्री  परमार

    राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों में, शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर दें जोर : उच्च शिक्षा मंत्री  परमार

    भारत स्काउट्स एवं गाइड्स मध्यप्रदेश के राज्य परिषद की बैठक हुई

    भोपाल 

    स्काउट-गाइड अपनी सेवा के माध्यम से विशेष पहचान बनाये हुए है और स्काउटिंग की सेवा भावना जन-जन तक फैली हुई है, यह गौरव की बात है। स्काउटिंग का यह सेवा भाव हमें सेवा ही धर्म है; का संदेश देता है और इस भाव को हम अपने भीतर भी उतारे यह एक बडी साधना है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने भारत स्काउट्स एवं गाइड्स मध्यप्रदेश के राज्य मुख्यालय में आयोजित राज्य परिषद की बैठक में कही।

    मंत्री  परमार ने कहा कि भारत स्काउट एवं गाइड म.प्र. इतने वर्षों से सतत् सेवा भाव से कार्य कर रहा है और सेवा ही धर्म है, इस संकल्प को पूरा भी कर रहा है।  परमार ने कहा कि हमें भारत स्काउट एवं गाइड म.प्र. की गतिविधियों को और अधिक विस्तृत करने पर जोर देना होगा और आमदनी के साधन भी बढ़ाने के लिए प्रयास करना होगा जिससे संगठन नियमित रूप से चल सके और स्काउट-गाइड आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बन सके।

    उच्च शिक्षा मंत्री  परमार की अध्यक्षता में बुधवार को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स मध्यप्रदेश के भोपाल स्थित राज्य मुख्यालय के सभागार में, राज्य परिषद की बैठक हुई। मंत्री  परमार ने स्काउट्स एवं गाइड्स की विविध गतिविधियों की समीक्षा की एवं विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    मंत्री  परमार ने समस्त जिला स्काउट्स एवं गाइड्स के सीए ऑडिट कराने के निर्देश दिए और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निजी विद्यालयों द्वारा स्काउट्स एवं गाइड्स के पंजीयन शुल्क जमा करवाया जाना सुनिश्चित करने को कहा।  परमार ने शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय गतिविधियों में अधिक से अधिक सहभागिता एवं प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय गतिविधियों में सहभागिता शुल्क, राज्य मुख्यालय द्वारा न लिए जाने को कहा एवं इस आशय के लिये राष्ट्रीय मुख्यालय को भी अवगत करवाने को कहा। मंत्री  परमार ने जिलों में संग्रहित पंजीयन देय राशि को राज्य मुख्यालय में शीघ्र अति शीघ्र जमा कराए जाने के लिए भी निर्देशित किया।

    मंत्री  परमार ने स्काउट्स एवं गाइड्स के सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों एवं गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ और व्यापक करने के साथ, समस्त गतिविधियों एवं आवश्यकताओं की निर्देशिका (फोल्डर) तैयार करने को कहा। स्काउट्स एवं गाइड्स को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सामूहिक समन्वय एवं सतत् प्रयास करने के लिए भी कहा। मंत्री  परमार ने कहा कि स्काउट्स एवं गाइड्स जिला स्तर तक आत्मनिर्भर बनाए जाने के लिए समुचित प्रयास किए जाएं और आमदनी में वृद्धि के लिए व्यापक कार्ययोजना के साथ क्रियान्वयन करें।

    मंत्री  परमार ने स्काउट्स एवं गाइड्स द्वारा संचालित निःशुल्क स्वास्थ्य प्रशिक्षण शिविर अन्तर्गत स्वास्थ्य का परीक्षण भी करवाया। मंत्री  परमार ने स्काउट्स एवं गाइड्स की उत्तरप्रदेश के लखनऊ में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जंबूरी के शुभांकर "शार्दू" का विमोचन भी किया।

    बैठक में सदस्यों द्वारा प्राप्त सुझावों पर व्यापक चर्चा हुई एवं सर्वसम्मति से विद्यार्थियों के हितों से जुड़े विषयों पर आवश्यक निर्णय लिए गए। अंतर्राष्ट्रीय जंबूरी एवं राष्ट्रीय जंबूरी में विद्यार्थियों की सहभागिता को लेकर भी व्यापक विमर्श हुआ।

    बैठक में, पिछली बैठक का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। वार्षिक प्रतिवेदन 2024-25 का अनुमोदन, सत्र 2025-26 का वार्षिक कार्यक्रम एवं वार्षिक योजना का अनुमोदन, वास्तविक आय-व्यय 2023-24 पुनरीक्षित 2024-25 एवं प्रस्तावित 2025-26 का बजट अनुमोदन किया गया और सी.ए. ऑडिट प्रतिवेदन 2023-24 भी प्रस्तुत किया गया। राज्य कार्यकारिणी की पिछली बैठक में पारित प्रस्तावों का अनुमोदन, कार्यालयीन प्रस्ताव एवं सदस्यों द्वारा प्राप्त प्रस्तावों पर भी गहन चर्चा की गई।

    बैठक में पूर्व मंत्री एवं राज्य मुख्य आयुक्त भारत स्काउट एवं गाइड मप्र  पारस चन्द्र जैन, उपाध्यक्ष  प्रकाश चित्तौडा, उपाध्यक्ष  अजय मिश्रा, उपाध्यक्ष  रमेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष  ओम प्रकाश गुप्ता, उपाध्यक्ष मती मीना डागोर, राज्य सचिव  राजेश प्रसाद मिश्रा (से.नि. आई.ए.एस.), राज्य कोषाध्यक्ष  रमेश शर्मा एवं राज्य आयुक्त रोवर  राजीव जैन सहित विभिन्न जिलों के पदाधिकारी एवं सदस्यगण उपस्थित रहे।

     

  • म.प्र. की बड़ी उपलब्धि! 6वें जल पुरस्कारों में दो श्रेणियों में मिला सम्मान, CM डॉ. यादव ने दी बधाई

    6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा: म.प्र. को दो श्रेणियों में मिले पुरस्कार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई

    "जल संचय-जन भागीदारी" में भी अग्रणी स्थान
    राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु 18 नवंबर को प्रदान करेंगी पुरस्कार

    भोपाल

    मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण में एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। नई दिल्ली में मंगलवार को जल शक्ति मंत्री  सी. आर. पाटिल ने 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा की। मध्यप्रदेश को दो श्रेणियों में सम्मान प्राप्त हुआ। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले को पूर्वी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ जिले का पुरस्कार मिला है, जबकि खंडवा जिले की ग्राम पंचायत कावेश्वर ने सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु 18 नवंबर 2025 को पुरस्कार प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुरस्कृत जिलों को बधाई दी है। "जल संचय-जन भागीदारी" पहल में भी वेस्टर्न-जोन की श्रेणी एक में पहला पुरस्कार ईस्ट निमाड़ को मिला। श्रेष्ठ 50 शहरी निकायों में गुनाजिले को प्रथम रैंक मिला। ज़िलों में श्रेणी तीन में गुना, बैतूल, धार, देवास, सिवनी और खरगौन का चयन हुआ है।

    उल्लेखनीय है कि जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने वर्ष 2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के तहत कुल 46 विजेताओं (संयुक्त विजेताओं सहित) की घोषणा की । ये पुरस्कार 10 श्रेणियों में दिए जा रहे हैं — सर्वश्रेष्ठ राज्य, सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत, सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय, सर्वश्रेष्ठ स्कूल या कॉलेज, सर्वश्रेष्ठ उद्योग, सर्वश्रेष्ठ जल उपयोक्ता संघ, सर्वश्रेष्ठ संस्था (स्कूल या कॉलेज के अतिरिक्त), सर्वश्रेष्ठ सिविल सोसायटी और जल क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति।

    प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर जल प्रबंधन और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक व्यापक अभियान चला रहा है।

    इसी उद्देश्य से लोगों में जल के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने और उन्हें जल उपयोग के सर्वोत्तम तौर तरीकों को अपनाने में प्रेरित करने के लिए राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी।

    वर्ष 2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार का शुभारंभ 23 अक्टूबर 2024 को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर किया गया था। कुल 751 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी समीक्षा और मूल्यांकन विशेषज्ञ समिति द्वारा किया गया। चयनित आवेदनों का परीक्षण केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा किया गया। अंतिम रिपोर्टों के आधार पर वर्ष 2024 के 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के लिए कुल 46 विजेताओं का चयन किया गया।

    राष्ट्रीय जल पुरस्कार का उद्देश्य देश में व्यक्तियों और संगठनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की पहचान करना और सरकार के ‘जल समृद्ध भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करना है। ये पुरस्कार जल के महत्व के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें जल के सर्वोत्तम उपयोग के प्रयासों को अपनाने के लिये प्रेरित करते हैं। यह पहल सभी लोगों और संगठनों के लिए जल संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन गतिविधियों में एक मजबूत साझेदारी और जन सहभागिता को और सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करता है।

    जल संचय जन भागीदारी पहल में भी अग्रणी मप्र

    जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार : कैच द रेन के अंतर्गत साउथ जोन की श्रेणी एक में पहला पुरस्कार ईस्ट निमाड़ जिले को तथा श्रेष्ठ 50 शहरी निकायों में गुना को, ज़िलों में श्रेणी तीन में दूसरी रैंक में गुना, बैतूल, धार, देवास, सिवनी और खरगौन का चयन हुआ है।

    इस पहल के अंतर्गत राज्यों को पाँच ज़ोन में बाँटा गया है। जिलों को न्यूनतम 10,000 कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण एवं संचयन संरचनाएँ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों के जिलों के लिए यह लक्ष्य 3,000 संरचनाएँ है, जबकि देशभर के नगर निगमों के लिए यह संख्या 10,000 निर्धारित की गई है। इन संरचनाओं में वर्षा जल संचयन (रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) के अलावा झीलों, तालाबों और बावड़ियों का पुनर्जीवन भी शामिल है।

    शहरी जल संरक्षण प्रयासों को सशक्त करने के लिए, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने जल शक्ति मंत्रालय के साथ साझेदारी की है। नगरीय निकायों को कम-से-कम 2,000 पुनर्भरण संरचनाएँ बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

    इस वर्ष कुल 100 पुरस्कारों की घोषणा की गई है, जिनमें तीन सर्वश्रेष्ठ राज्य, 67 जिले, छह नगर निगम, एक नगरीय स्थानीय निकाय, दो सहयोगी मंत्रालय/विभाग, दो उद्योग, तीन गैर-सरकारी संगठन, दो परोपकारी व्यक्ति और 14 नोडल अधिकारी शामिल हैं।

     

  • एकता का प्रतीक स्टेच्यू ऑफ यूनिटी: राज्यपाल पटेल ने बताया राष्ट्रीय तीर्थ

    स्टेच्यू ऑफ युनिटी भारत की एकता का तीर्थ : राज्यपाल पटेल

    पहली बार दिल्ली के बाहर एकता नगर गुजरात में आयोजित हुआ भारत पर्व 2025

    राज्यपाल ने भारत पर्व के 11वें दिन के समारोह का किया शुभारंभ

    भोपाल

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा रोपित बीज को वट वृक्ष के रूप में देखकर हर्ष और गर्व हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्टेच्यू ऑफ युनिटी भारत की एकता का तीर्थ है। पटेल एकता नगर गुजरात में आयोजित भारत पर्व के 11वें दिन 11 नवंबर के कार्यक्रम के शुभारंभ समारोह उपरांत स्टेच्यू ऑफ युनिटी परिसर में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में उपस्थित दर्शकों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और पर्यटन एवं संस्कृति राजयमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी मंचासीन थे। अतिथियों का स्टेच्यू ऑफ युनिटी और भारत भारती के पदाधिकारियों द्वारा स्मृति प्रतीक भेंट कर स्वागत किया गया।

    राज्यपाल पटेल ने मध्यप्रदेश के प्रथम नागरिक के रूप में राष्ट्रीय एकता के तीर्थ पर हमारे राष्ट्रीय गौरव को नमन करने आए सभी भाई-बहनों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गौरव जिसका आधार लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने रखा उसके प्रतीक स्टेच्यू ऑफ यूनिटी की पावन धरा पर आना हम सभी के लिए तीर्थ के समान है। भारत पर्व, सिर्फ एक सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन मात्र नहीं है; भारत की एकता, अखंडता और आत्मगौरव की भावना को नमन करने का प्रसंग है। इसिलिए भारत पर्व के अभूतपूर्व आयोजन में देश के सभी राज्यों, केन्द्र शासित क्षेत्रों की लोक संस्कृति, खान-पान, वस्त्र-विन्यास आदि के सम्मिलित प्रदर्शन के मंच भारत पर्व में हमारी अनेकता में एकता के भव्य स्वरूप देखने का अभूतपूर्व अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब एक हैं इसी भाव की अभिव्यक्ति के लिए 1 नवंबर से 15 नवंबर तक आयोजित कार्यक्रमों में देश के सभी राज्यों के राज्यपाल भी सम्मिलित हो रहे है।

    कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन गुजरात के उर्जा, पेट्रोलियम कानून राज्यमंत्री कोशिक विकरिया ने दिया। उन्होंने कहा कि हम सभी के लिए यह गर्व की बात है कि स्टेच्यू ऑफ युनिटी के निर्माण की संकल्पना से जुड़े जिले के पूर्व प्रभारी मंत्री मंगुभाई पटेल मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में हम सब के बीच में उपस्थित हैं।

    सांस्कृतिक संध्या के कार्यक्रमों की पहली प्रस्तुति मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के लोक नृत्य बधाई हो के साथ हुई। इसके बाद मध्यप्रदेश, मणिपुर, नागालेंड और गुजरात राज्यों के लोक कलाकारों द्वारा कुल 9 प्रस्तुतियाँ दी गई। कार्यक्रम का विशिष्ट आकर्षण मध्यप्रदेश के विकास, इतिहास, कला, शिल्प और विरासत की धरोहरों को शोकेस करने वाली दृश्य-श्रव्य और नृत्य सहित कला के विभिन्न रूपों की मल्टीमीडिया प्रस्तुति रही।

    राज्यपाल पटेल ने भारत पर्व में लगाई गई विभिन्न राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की इंफोरमेशन स्टॉल, फूड स्टॉल और हस्तशिल्प स्टॉलों का अवलोकन किया। उपस्थित कलाकारों, कारीगर, कर्मचारी और अधिकारियों से चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया। राज्यपाल ने महेश्वरी साड़ी के स्टॉल के विक्रेता से चर्चा की और फूड स्टॉल पर चंबल के पारंपरिक व्यंजन थोपा और सन्नाटा का रसास्वादन किया। राज्यपाल को बताया गया कि स्टॉल पर आलू बेड़नी, पूड़ी निमोना, मक्के की खीर और कोदो की खीर भी उपलब्ध है।

    राज्यपाल पटेल ने भारत पर्व के पूर्व एकता नगर स्थित आरोग्य वन सरदार पटेल जियोलोजिकल पार्क, सरदार सरोवर डैम, विद्युत उत्पादन इकाई (रिवर बेड पॉवर हॉउस) और स्टेच्यू ऑफ युनिटी परिसर की प्रदर्शनी, गैलरी और थीम पवेलियन का अवलोकन किया।

     

     

  • नवंबर में बढ़ेगी कंपकंपी: मौसम विभाग ने जारी किया बारिश और Cold Wave अलर्ट

    राजगढ़ 
    मध्य प्रदेश का राजगढ़ जिला इन दिनों पहाड़ी हिल स्टेशन जैसा नजर आ रहा है। पिछले पांच दिनों से यह प्रदेश का सबसे ठंडा जिला बना हुआ है। बीते दिन शहडोल के बाद राजगढ़ का तापमान सबसे कम दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान 7.6 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 29 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाएं और मौसमी बदलाव इसके पीछे मुख्य कारण हैं।

    नवंबर की शुरुआत से ही यहां ठंड में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। दिनभर चलने वाली ठंडी हवाओं से लोगों को कंपकंपी छूट रही है। इंदौर और भोपाल के साथ सोमवार को राजगढ़ में सबसे ज्यादा ठंड महसूस की गई। आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना जताई गई है। बारिश की भी संभावना है।

    शीतलहर का अलर्ट जारी
    मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं के कारण पश्चिमी मध्य प्रदेश में ठंड बढ़ गई है। इसका सबसे अधिक असर राजगढ़ में देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले चार दिन राजगढ़, भोपाल और इंदौर में तीव्र शीत लहर की चेतावनी जारी की गई है।
     
    टूटा 25 साल का रिकॉर्ड
    नवंबर के दूसरे ही सप्ताह में कड़ाके की ठंड से कई शहरों में रिकॉर्ड टूट गए हैं। भोपाल में नवंबर का पिछले 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया। यहां न्यूनतम तापमान 8 डिग्री पहुंच चुका है, जो साल 2015 के बाद सबसे कम है। इंदौर में पारा 7 डिग्री तक जा चुका है। इंदौर में पिछले 25 साल में नवंबर में इतनी सर्दी कभी नहीं पड़ी।
     
    हो सकती है बारिश
    भोपाल में बारिश की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। बता दें कि नवंबर के महीने में 10 साल में तीन बार बारिश हो चुकी है। साल 1936 में महीने में साढ़े 5 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है।

  • बैन के बाद भी काम की चीज़! खेतों में फिर चमकी ‘कार्बाइड गन’ की धमक

    रतलाम 
    मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के किसान सबसे अधिक जंगली सुअर, रोजड़ा, नील गाय आदि से परेशान है। ये पशु देखते ही देखते किसान की पूरी उपज चट कर रहे हैं। ऐसे में अब फसलों की जंगली जानवरों से रखवाली के लिए किसान जुगाड़ से बनाई जाने वाली कार्बाइड गन का उपयोग करने लगे है। इसको पीवीसी पाइप से बनी जुगाड़ गन कहा रहा है। जिसकी वजह से राज्य में कई लोगों की आंखें चली गई और कई लोगों की आंख एवं चेहरे पर गंभीर चोट भी आई थी। इसके बाद राज्य में इस तरह की जुगाड़ वाली गन की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था। मात्र 20 मिनट में तैयार हो रही यह जुगाड़ वाली गन से धमाका कर जंगली जानवर से अपने खेत व खेती की रक्षा किसान कर रहा है।

    लोगों की आंखें प्रभावित
    हाल ही के दिनों में दीपावली व इसके बाद भोपाल और राज्य के अनेक जिलों में धमाका करने वाली पीवीसी गन की वजह से बच्चों और वयस्क लोगों की आंखों में चोट लगी है। यहां तक की आंखों की रोशनी चली जाने के मामले सामने आए थे। इसके बाद ही शासन ने जुगाड़ की गन की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।
     
    इसलिए करते किसान इस गन का इस्तेमाल
    पीवीसी पाइप से बनाई जाने वाली जुगाड़ वाली गन का उपयोग किसान अपने खेतों पर जंगली जानवरों को भगाने के लिए करते हैं। इसमें कार्बाइड को भरते है। कार्बाइड जब पानी के संपर्क में आता है तो उसमें ज्वलनशील और धमाका करने वाली गैस बनती है। गन के पीछे वाले हिस्से वाले में लाइटर द्वारा चिंगारी से इस पीवीसी गन में जोरदार धमाका और चिंगारी निकलती है।

    किसान बोले- हमें पता है इससे नुकसान होता है
    संत रविदास चौक के करीब खेत पर पीवीसी पाइप की गन लेकर बैठे किसान समरथ पाटीदार के अनुसार हमें पता है कि इससे नुकसान पहुंचता है, लेकिन करें क्या अपनी आंखों के सामने उपज को उजड़ते होते भी नहीं देख सकते। बिक्री पर भले ही शासन ने रोक लगाई हो लेकिन यह तो 20 मिनट में खेत पर बना रहे है। इसमें प्रयोग किया जाने वाला कार्बाइड हार्डवेयर की दुकान पर मिलता है, सरकार को प्रतिबंध लगाना ही है तो जंगली जानवर को चिडिय़ाघर ले जाकर बंद करें।

  • राजधानी में जुटेंगे विशेषज्ञ और नीति निर्माता, मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे कॉन्क्लेव का शुभारंभ

    राज्यपाल श्री पटेल समापन सत्र के होंगे मुख्य अतिथि
    स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, प्रशासन पर विशेषज्ञ करेंगे चर्चा

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनजाति कार्य मंत्रालय, भारत सरकार और मध्यप्रदेश जनजाति कार्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जनजाति कल्याण के लिए कार्य कर रहे अशासकीय संगठनो की नेशनल कॉन्क्लेव का भोपाल में 12 नवंबर को शुभारंभ करेंगे। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल नेशनल कॉन्क्लेव के समापन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे। जनजाति कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह मुख्य अतिथि होंगे।

    कॉन्क्लेव का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में किया गया है। इसमें देश के 500 से ज्यादा विषय विशेषज्ञ जनजातीय कल्याण से जुड़े हुए विषयों पर चर्चा करेंगे। नेशनल कॉन्क्लेव में विषय विशेषज्ञ स्वैच्छिक संस्थाओं एवं प्रयासों के माध्यम से जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

    जनजाति समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वन अधिकार, शासन, प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञ अपने-अपने विचार रखेंगे। जनजातीय समुदाय की शिक्षा और सशक्तिकरण में शैक्षिक संगठनों की भूमिका, चुनौतियां एवं मुद्दे, वर्तमान में शिक्षा का स्तर, समग्र शिक्षा में शैक्षिक संगठनों की भूमिका पर विशेष चर्चा होगी। जनजातीय समुदाय की महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियां, टीकाकरण एवं अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमो की पहुंच बढ़ाने, टेली मेडिसिन, एमहेल्थ जैसे आधुनिक हस्तक्षेप से स्वास्थ्य सेवा बढ़ाने में अशासकीय संगठनों की भूमिका पर विचार होगा।

    कॉन्क्लेव में जनजातीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं, और आजीविका बढ़ाने, जनजातीय युवाओं में उद्यमिता बढ़ाने, आजीविका के नए अवसर, स्वसहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक उद्यमिता को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विचार विमर्श होगा। इसमें स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका तय की जाएगी, साथ ही वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों पर भी चर्चा होगी।

    कॉन्क्लेव में जनजातीय विकास एवं शासन प्रशासन से जुड़े विषयों, राज्य की भूमिका, पंचायत राज संस्थाओं, ग्राम सभा पारंपरिक जनजातीय संस्थाओं जनजाति विकास एजेंसियों की भूमिकाओं पर भी चर्चा होगी।

     

  • खतरनाक कफ सीरप! 24 बच्चों की सेहत दांव पर, 3 मासूमों की जान गई

    छिंदवाड़ा
    विषाक्त कफ सीरप कोल्ड्रिफ के सेवन से छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल जिले के 24 मासूम बच्चों की किडनी फेल होने और मौत की दुखद घटना के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। नागपुर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे चार गंभीर बच्चों में से तीन बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।

    हालांकि, अभी भी एक बच्चा वेदांश मेडिकल कालेज में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। तीन बच्चों को समय रहते बचा लिया गया है। नागपुर के पांच अस्पतालों में बच्चों का इलाज चला, जिसका पूरा खर्च शासन द्वारा वहन किया गया था।
     
    बच्चों को बचा तो लिया गया है, लेकिन विशेषज्ञ डाक्टरों के अनुसार, उनकी जिंदगी आसान नहीं है। सीरप में मौजूद जहरीले तत्व डायथिलीन ग्लायकाल (DEG) के प्रभाव से बच्चों को लंबे समय तक विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। जिसमें नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) की समस्याएं, कमजोरी आदि शामिल है।

    बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। डाक्टरों ने बताया है कि ऐसे बच्चों को लंबे समय तक किडनी और न्यूरोलाजी विशेषज्ञों की देखरेख में रहना होगा। कुछ मामलों में भविष्य में डायलिसिस की जरूरत भी पड़ सकती है।

     

  • लाड़ली बहना योजना अपडेट: इस महीने से खाते में आएंगे 1500 रुपये

    अब तक 44 हजार करोड़ से अधिक की राशि का अंतरण

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और नेतृत्व में प्रदेश में नारी सशक्तिकरण का अभियान द्रुतगति जारी है। प्रदेश की लाड़ली बहनों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव का किया हुआ वादा 12 नवम्बर 2025 को पूरा होने जा रहा है। एक करोड़ 26 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को सिवनी में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बड़ी हुई राशि उनके खाते में अंतरित की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रत्येक लाड़ली बहना के खाते में 1500 रूपये देने की शुरूआत करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस पहल पर प्रदेश की लाड़ली बहनों ने अपने भैया मोहन के प्रति आभार जताते हुए कहा है कि वे ठीक उसी प्रकार हमारा ध्यान रख रहे हैं, जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बहन सुभद्रा का ध्यान रखा था।

    प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में चल रही मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। जून 2023 से अक्टूबर 2025 तक योजना के अंतर्गत लाभार्थी महिलाओं को कुल 29 किस्तों में नियमित आर्थिक सहायता राशि का अंतरण किया गया है। रक्षा बंधन पर अगस्त 2023, अगस्त 2024 और अगस्त 2025 में लाभार्थी महिलाओं को 250 रूपये की विशेष सहायता राशि तीन बार प्रदान की गई। इस प्रकार योजना के आरंभ से अब तक 44,917.92 करोड़ रूपये की राशि का सीधा अंतरण लाभार्थी महिलाओं के खातों में किया जा चुका है। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। योजना से महिलाएं न केवल अपनी छोटी-छोटी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं, बल्कि बैंकिंग में प्रणाली से भी सीधे जुड़ रही हैं।

    मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में प्रदेशभर में महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का सीधा लाभ मिल रहा है। योजना की अब तक की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश के सभी 52 जिलों में कुल 1,26,36,250 (एक करोड़ 26 लाख 36 हजार 250)  महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है।

    लाड़ली बहना योजना में सबसे अधिक लाभार्थी इंदौर जिले में हैं, जहाँ 4 लाख 40 हजार 723 महिलाओं को योजना का लाभ मिला है। इसके बाद सागर में 4 लाख 19 हजार 903, रीवा में 4 लाख 3 हजार 182, छिंदवाड़ा में 3 लाख 90 हजार 311, धार में 3 लाख 82 हजार 417 और जबलपुर 3 लाख 81 हजार 848 महिलाओं को लाभ मिला है। योजना के तहत बालाघाट जिले में 3 लाख 47 हजार 816, उज्जैन में 3 लाख 40 हजार 203, और मुरैना में 3 लाख 33 हजार 821 बहनों को लाभ मिला है। छतरपुर में 3 लाख 24 हजार 454, खरगोन में 3 लाख 13 हजार 741, भोपाल में 3 लाख 9 हजार 20 तथा ग्वालियर जिले में 3 लाख 5 हजार 969 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। इसी क्रम में राजगढ़ में 2 लाख 95 हजार 459, शिवपुरी में 2 लाख 87 हजार 943, देवास में 2 लाख 85 हजार 496, विदिशा में 2 लाख 74 हजार 946, भिंड में 2 लाख 72 हजार 343, और बेतुल में 2 लाख 71 हजार 474 लाभार्थी पंजीकृत हुई हैं।

    सिवनी जिले में 2 लाख 68 हजार 187, मंदसौर में 2 लाख 62 हजार 827, रतलाम में 2 लाख 50 हजार 176, रायसेन में 2 लाख 46 हजार 390, दमोह में 2 लाख 45 हजार 143, सीहोर में 2 लाख 42 हजार 717, और कटनी में 2 लाख 41 हजार 302 बहनों को राशि का लाभ मिला है। बड़वानी में 2 लाख 37 हजार 60, गुना में 2 लाख 28 हजार 604, खंडवा में 2 लाख 16 हजार 372, नर्मदापुरम में 2 लाख 9 हजार 837, सिद्धी में 2 लाख 9 हजार 706, टीकमगढ़ में 2 लाख 7 हजार 79, तथा नरसिंहपुर में 2 लाख 8 हजार 734 लाभार्थी महिलाओं को योजना की राशि प्राप्त हुई है।

    मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में सिंगरौली जिले में 1 लाख 97 हजार 4, मंडला में 1 लाख 95 हजार 153, झाबुआ में 1 लाख 92 हजार 511, शहडोल में 1 लाख 88 हजार 729, पन्ना में 1 लाख 82 हजार 220, शाजापुर में 1 लाख 73 हजार 900, नीमच में 1 लाख 57 हजार 658, तथा अशोक नगर में 1 लाख 55 हजार 387 महिलाएँ इस योजना से लाभान्वित हुई हैं। दतिया में 1 लाख 44 हजार 239, अनूपपुर में 1 लाख 26 हजार 54, अलीराजपुर में 1 लाख 23 हजार 492, आगर मालवा में 1 लाख 17 हजार 255, उमरिया में 1 लाख 9 हजार 113, श्योपुर में 1 लाख 8 हजार 673, और हरदा जिले में 93 हजार 516 बहनों को योजना की राशि का लाभ मिला है। निवाड़ी जिले में 80 हजार 157 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है।

    मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने प्रदेश की महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान की भावना को सशक्त किया है। महिलाओं ने इस राशि का उपयोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा, और छोटे व्यापार के लिए पूंजी के रूप में किया है।

    लाड़ली बहना योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है बल्कि परिवारिक निर्णयों में भी उनकी भूमिका को भी सुदृढ़ कर रही है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का व्यापक प्रभाव अब प्रदेश के हर कोने में देखा जा सकता है। गाँवों से लेकर शहरों तक महिलाएँ “आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश” के निर्माण में अपनी सशक्त भूमिका निभा रही हैं।

     

  • जनजातीय क्षेत्र में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में 7,170 लोगों का हुआ मुफ्त जांच व इलाज

    जनजातीय गौरव दिवस
    स्वास्थ्य शिविर में 7170 जनजातीय बंधुओं का हुआ नि:शुल्क परीक्षण एवं उपचार

    दिव्यांग प्रमाण-पत्र और सहायक उपकरण किये वितरित

    भोपाल

    जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर, 1 नवम्बर से 15 नवम्बर तक चल रहे विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला में वृहद जनकल्याणकारी एवं मेगा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन डिंडोरी जिले के बरगाँव, शहपुरा में किया गया। जिले की 364 पंचायतों से जनजातीय वर्ग के लोगो को शिविर स्थल तक लाया गया।

    शिविर में 7170 जनजातीय भाई-बहनों ने स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श और निःशुल्क उपचार का लाभ प्राप्त किया। जनजाति वर्ग के 1734 हितग्राही की  सिकल सेल एनीमिया की जाँच, 986 की एक्स-रे, 1230 के नेत्र परीक्षण उपरांत 738 चश्मे वितरण, रक्त जांच, दंत परीक्षण एवं 2195 हितग्राहियों की आयुष जाँच जैसी अनेक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। शिविर परिसर में विभिन्न विभागों के सेवा एवं सूचना शिविर भी लगाए गए, जिनमें महिला एवं बाल विकास, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जनपद पंचायत, राजस्व, शिक्षा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित कई विभागों ने सहभागिता की। नागरिकों के लिए आधार अद्यतन, ई-केवाईसी, यूडीआईडी प्रमाण-पत्र, पेंशन संबंधी कार्य, पात्रता जाँच तथा विभिन्न योजनाओं के आवेदन जैसी सुविधाएँ भी एक ही स्थान पर प्रदान की गईं।

    शिविर में दिव्यांगजन न्यायालय का आयोजन भी किया गया, जिसमें मौके पर ही 482 दिव्यांगजनो को 201 दिव्यांग प्रमाण-पत्र और 1856 सहायक उपकरण प्रदान किए गए। इसके लिए प्रशासन ने पिछले 15 दिवस से जनपद स्तर पर आयोजित दिव्यांग शिविर के माध्यम से दिव्यांगनों को चिह्नांकित किया एवं प्रमाण-पत्र एवं किट उपकरण आदि भी वितरण किए। दिव्यांग कोर्ट के माध्यम से दिव्यांगजन के क्लेम का निराकरण भी किया गया।

  • पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ होंगे भोपाल के पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि

    भोपाल 

    पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 21 नवंबर को भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ के विमोचन कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम रवीन्द्र भवन में आयोजित किया जाएगा। आयोजन की जानकारी सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने दी। 

    उन्होंने बताया कि इस अवसर पर वृंदावन-मथुरा के आनंदम आश्रम के प्रमुख ऋतेश्वर जी महाराज भी उपस्थित रहेंगे।यह पहला अवसर होगा जब धनखड़ उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। उन्होंने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दिया था। त्यागपत्र के बाद वे केवल उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में नजर आए थे। उधर, कांग्रेस ने धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाए थे। विपक्ष ने कहा था कि पिछले महीने कहा था कि धनखड़ को उनके सभी पूर्ववर्तियों की तरह विदाई समारोह मिलना चाहिए था, जो अब तक नहीं हुआ। 

  • एमपी के युवाओं ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा, विकसित भारत बिल्डाथॉन में 20 हजार आइडिया अपलोड

    विकसित भारत बिल्डाथोन में मध्यप्रदेश से 20 हजार आइडिया किये गये अपलोड

    मध्यप्रदेश रहा देश में 57 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि हासिल कर चौथे स्थान पर

    मध्यप्रदेश के एक लाख 38 हजार 582 विद्यार्थियों ने सहभागिता की

    भोपाल

    देश में विकसित भारत बिल्डाथोन-2025 का आयोजन केन्द्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय और साक्षरता विभाग द्वारा किया गया। इस प्रतियोगिता में प्रदेश के कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को सहभागीता करने का अवसर प्रदान किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग प्रतियोगिता आयोजन में मुख्य रूप से सहयोग कर रहा है।

    बिल्डाथोन में मध्यप्रदेश के एक लाख 38 हजार 582 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। विद्यार्थियों के समूह बनाकर 34 हजार 655 टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने 20 हजार से अधिक आइडिया और प्रोजेक्ट अपलोड किये। यह आइडिया पूरे देश के 46.73 प्रतिशत के विरूद्ध 57.73 प्रतिशत रहा। मध्यप्रदेश इस मामले में देश में चौथे स्थान पर रहा। देश में पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश, दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र और तीसरे स्थान पर असम रहा।

    नवाचार को किया जा रहा है प्रोत्साहित

    बिल्डाथोन का अर्थ एक ऐसी प्रतियोगिता है, जहां प्रतिभागी एक निश्चित समय-सीमा में किसी समास्या को हल करने के लिये मिलकर काम करते है और कुछ नया बनाते है। विकसित भारत बिल्डाथोन एक राष्ट्रीय नवाचार आंदोलन है जिसका उद्देश्य छात्रों में रचनात्मकता ओर उद्यमिता को बढ़ावा देना है। यह प्रतियोगिता अटल इनोवेशन मिशन एवं नीति आयोग के सहयोग से आयोजित की गई है। इसका शुभारंभ केन्द्रीय शिक्षा मंत्री  धर्मेन्द्र प्रधान ने सितम्बर माह के चौथे सप्ताह में किया था। विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में 4 विषयों आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल और समृद्ध भारत विषय दिये गये थे।

    जूरी का गठन

    बिल्डाथोनप्रतियोगिता के अगले चरण में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में प्रत्येक जिले के लिये जूरी गठित की गई है, जो जिले से सर्वश्रेष्ठ 2 प्रोजेक्ट या प्रोटोटाइप का चयन करेगी। इस प्रकार प्रत्येक जिले के लिये केन्द्र सरकार द्वारा 2 पुरस्कार दिये जायेंगे। जिला स्तर प्रतियोगिता में विजेता रहे प्रोजेक्ट अथवा प्रोटोटाइप में से राज्य स्तर पर चयन किया जायेगा। राज्य स्तर पर विजेता छात्र अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगिता में सहभागिता करेंगे।

     

  • भोपाल में 12 नवंबर से शुरू होगा नेशनल कॉन्क्लेव, सीएम मोहन यादव करेंगे उद्घाटन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव नेशनल कॉन्क्लेव का भोपाल में 12 नवंबर को करेंगे शुभारंभ

    राज्यपाल  पटेल समापन सत्र के होंगे मुख्य अतिथि

    स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, प्रशासन पर विशेषज्ञ करेंगे चर्चा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनजाति कार्य मंत्रालय, भारत सरकार और मध्यप्रदेश जनजाति कार्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जनजाति कल्याण के लिए कार्य कर रहे अशासकीय संगठनो की नेशनल कॉन्क्लेव का भोपाल में 12 नवंबर को शुभारंभ करेंगे। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल नेशनल कॉन्क्लेव के समापन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे। जनजाति कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह मुख्य अतिथि होंगे।

    कॉन्क्लेव का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में किया गया है। इसमें देश के 500 से ज्यादा विषय विशेषज्ञ जनजातीय कल्याण से जुड़े हुए विषयों पर चर्चा करेंगे। नेशनल कॉन्क्लेव में विषय विशेषज्ञ स्वैच्छिक संस्थाओं एवं प्रयासों के माध्यम से जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

    जनजाति समुदाय की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वन अधिकार, शासन, प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञ अपने-अपने विचार रखेंगे। जनजातीय समुदाय की शिक्षा और सशक्तिकरण में शैक्षिक संगठनों की भूमिका, चुनौतियां एवं मुद्दे, वर्तमान में शिक्षा का स्तर, समग्र शिक्षा में शैक्षिक संगठनों की भूमिका पर विशेष चर्चा होगी। जनजातीय समुदाय की महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियां, टीकाकरण एवं अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमो की पहुंच बढ़ाने, टेली मेडिसिन, एमहेल्थ जैसे आधुनिक हस्तक्षेप से स्वास्थ्य सेवा बढ़ाने में अशासकीय संगठनों की भूमिका पर विचार होगा।

    कॉन्क्लेव में जनजातीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं, और आजीविका बढ़ाने, जनजातीय युवाओं में उद्यमिता बढ़ाने, आजीविका के नए अवसर, स्वसहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक उद्यमिता को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विचार विमर्श होगा। इसमें स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका तय की जाएगी, साथ ही वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों पर भी चर्चा होगी।

    कॉन्क्लेव में जनजातीय विकास एवं शासन प्रशासन से जुड़े विषयों, राज्य की भूमिका, पंचायत राज संस्थाओं, ग्राम सभा पारंपरिक जनजातीय संस्थाओं जनजाति विकास एजेंसियों की भूमिकाओं पर भी चर्चा होगी।

     

  • महिलाओं के खाते में 12 नवंबर को 1,500 रुपये, लाडली बहना योजना का मासिक भुगतान बढ़ाया गया

    भोपाल 

    अब लाड़ली बहनों के खाते में कितने पैसे आएंगे? यदि आप मध्य प्रदेश के निवासी हैं तो ये सवाल जरूर आपके मन में आ रहा होगा. तो बता दें कि मध्यप्रदेश सरकार ने लाडली बहना योजना की मासिक सहायता बढ़ा दी है. इसे बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है.

    मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए नवंबर का महीना खास है, क्योंकि इस महीने से उन्हें बढ़ी हुई किस्त मिलेगी. यह योजना 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू की थी. पहले महिलाओं के खाते में 1000 आते थे. अब हर महिला को सरकार की ओर से हर महीने 1500 रुपये मिलेंगे. नवंबर 2025 से यह दूसरी बार है जब बढ़ी हुई राशि दी जा रही है, जो आगे भी जारी रहेगी. मध्यप्रदेश सरकार ने सोमवार को लाडली बहना योजना के तहत मासिक मदद को 1,250 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये करने को मंजूरी दी है.

    12 नवंबर को महिलाओं के खाते में आएगा पैसा

    एक अधिकारी ने बताया कि इस योजना की 1.26 करोड़ से ज्यादा महिला लाभार्थियों को इस महीने से बढ़ी हुई राशि मिलनी शुरू होगी. इसके लिए सरकार को 1793.75 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा. अब 2025-26 में योजना का कुल अनुमानित व्यय बढ़कर 20,450.99 करोड़ रुपये हो गया है. मुख्यमंत्री यादव 12 नवंबर को सिवनी जिले में एक कार्यक्रम के दौरान बढ़ी हुई राशि का वितरण शुरू करेंगे.

    सरकारी बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में लाड़ली बहना योजना की मासिक सहायता 1,250 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये करने को मंजूरी दी गई. मुख्यमंत्री यादव ने 12 अक्टूबर को श्योपुर में एक कार्यक्रम में कहा था कि भाई दूज और दिवाली पर महिलाओं के लिए खुशखबरी आएगी, क्योंकि योजना की राशि बढ़ाई जाएगी.

    योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की थी

    इस योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान 10 जून, 2023 को हुई थी, तब इसके तहत सहायता राशि 1000 रुपये थी. सरकार ने सितंबर 2023 में ही इसे संशोधित कर 1,250 रुपये कर दिया था. इस योजना को मध्यप्रदेश में बीजेपी के लिए चुनावी बाजी पलटने वाला माना जाता है.

  • MP सरकारी स्कूलों में शिक्षा का नया तरीका, नृत्य और नाटक से सीखेंगे बच्चे साइंस-मैथ्स

     भोपाल 

    सरकारी स्कूलों में अब अगर नृत्य-नाटक करते शिक्षक दिखें तो यह मत सोचिएगा कि वे पढ़ाई छोड़कर मस्ती कर रहे हैं। दरअसल प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को प्रदर्शन कलाओं के जरिए पढ़ाने की तैयारी चल रही है।

    योजना है कि कठपुतली नृत्य, मुखौटा, मूर्तियों, कविता, गीत और चित्रों के जरिए गणित-विज्ञान के गूढ़ संदर्भों को समझाया जाए, ताकि कक्षा का वातावरण आनंददायक बना रहे और बच्चों को कठिन विषय आसानी से समझ आ जाए।

    इसके लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) समृद्धि-2025 में शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगा। प्रदेश के 30 जिलों के 65 शिक्षकों का चयन इसके लिए किया गया है। इनके बीच प्रतियोगिता भी कराई गई। ये शिक्षक अपने जिले में मुख्य प्रशिक्षक होंगे और अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।

    हर विषय को कला से जोड़ने का प्रयास

    स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम के तहत उच्च माध्यमिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें एनसीईआरटी की ओर से प्रशिक्षक शिक्षकों का प्रशिक्षित कर रहे हैं। स्कूलों में इसकी अधिकारी निगरानी भी करेंगे, ताकि हर विषय को कला से जोड़ते हुए पढ़ाया जा सके।
    इस विषय में ये गतिविधि

    जीव विज्ञान – सांदीपनि विद्यालय की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने पाचन तंत्र के ऊपर नुक्कड़ नाटक तैयार किया है। इसमें उन्होंन 35 बच्चों को लिया था और उन्हें भोजन और एंजाइम बनाया था। इसमें कुछ बच्चों ने मिट्टी से पाचनतंत्र के माडल बनाकर पूरी प्रक्रिया को समझाया था।

    गणित – शासकीय नवीन कन्या उमावि की शिक्षिका प्रेरणा बर्डे ने गणित के कठिन प्रमेय और सूत्र को आकृति बनाकर समझाया। इसमें वह सालिड व प्लेन आकृति को थ्रीडी माडल से समझा रही हैं। इसके अलावा उन्होंने त्रिशंकु व गोला को भी आकृति के माध्यम से पढ़ा रही हैं। साथ ही त्रिकोणमिति के कठिन सूत्र को भी आसान तरीके से कविता के माध्यम से बता रही हैं।
    कठिन विषयों को पढ़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा

        एनसीईआरटी का आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत शिक्षकों को गीत-संगीत व कला के माध्यम से कठिन विषयों को पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। – दिनेश शर्मा, नोडल अधिकारी, समृद्धि कार्यक्रम।

     

  • मध्यप्रदेश में नर्मदा परिक्रमा को नया प्रोत्साहन, परिक्रमावासियों का डेटा अपडेट और प्रमाणपत्र

    भोपाल 

    प्रदेश में अब हर नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की जानकारी सरकार के पास होगी। इसके लिए राज्य सरकार ने नर्मदा नदी और नर्मदा परिक्रमा मार्ग से जुड़े जिलों की ग्राम पंचायतों को आदेश दिए हैं कि वे परिक्रमावासियों को प्रमाण पत्र जारी करें। इसके जरिये सरकार डेटा अपडेट करेगी। 

    सरकार ने पंचायतों से कहा है कि वे परिक्रमावासियों की समस्याओं का समाधान करने में मदद करें। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने जनपद पंचायतों से 31 अक्टूबर तक जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जानकारी तलब की है।

    प्रदेश में नर्मदा नदी को मां नर्मदा के रूप में पूजा जाता है। हर साल कई श्रद्धालु अमरकंटक से लेकर अरब सागर और फिर वापस अमरकंटक तक नर्मदा की परिक्रमा करते हैं। अब प्रमाण पत्र होने से ग्रामीण इलाकों में परिक्रमा करते समय परिक्रमावासियों को पहचान दिखाने में आसानी होगी। प्रमाण पत्र लेने वाले परिक्रमावासियों के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं होना चाहिए।

    अब आपराधिक प्रकरण वाले लोग नर्मदा की परिक्रमा नहीं कर सकेंगे

     प्रदेश के नर्मदा नदी वाले सोलह जिलों यथा अनूपपुर, डिण्डौरी, मंडला, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बड़वानी, आलीराजपुर, धार, नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, हरदा, देवास, खण्डवा एवं खरगौन से नर्मदा परिक्रमा की जाती है तथा अब यह परिक्रमा वही लोग कर पायेंगे जिनके विरुध्द कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होगा।

    परिक्रमा के दौरान पडने वाली ग्राम पंचायतों में प्रवेश के दौरान परिक्रमावासी को अपने नाम, पते एवं मोबाइन नंबर के साथ आवेदन देना होगा जिसमें उसे अण्डरटेकिंग देनी होगी कि उसके विरुध्द कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है। इस आवेदन के साथ उआईडी यथा आधार या वोटर या समग्र आईडी लगाना होगी जिस पर संबंधित ग्राम पंचायत आवेदक को एक प्रमाण-पत्र जारी करेगी कि आवेदक जीवन दायिनी मांग नर्मदा की यात्रा कर रहा है।

    राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने संबंधित कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को परिपत्र जारी कर दिया है। ग्राम पंचायत द्वारा जारी नर्मदा परिक्रमावासी होने का प्रमाण-पत्र पुलिस एवं प्रशासन भी पहचान के रुप में मान्य करेगी।

    ऐसे जारी होंगे प्रमाणपत्र

        परिक्रमावासियों को ग्राम पंचायत को आवेदन देना होगा, जिसमें दो फोटो और एक पहचान पत्र लगाना होगा।
        आवेदन मिलने पर ग्राम पंचायत तय फॉर्मेट में प्रमाण पत्र जारी करेगी।
        ग्राम पंचायत को परिक्रमावासियों के लिए एक रजिस्टर बनाना होगा।
        प्रमाण पत्र दिखाकर परिक्रमावासी नर्मदा परिक्रमा के दौरान किसी भी गांव में आसानी से प्रवेश कर सकेंगे।
        स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी इस प्रमाण पत्र को परिक्रमावासी की पहचान के रूप में मानेंगे।
        सभी ग्राम पंचायतें भविष्य में इसी आधार पर कार्य करेंगी।
        अब तक जारी किए गए प्रमाण पत्रों की जानकारी पंचायतें 15 दिन के भीतर संचालनालय को भेजेंगी।

    इस निर्णय से नर्मदा परिक्रमा वासियों को पहचान के लिए दस्तावेज की कमी से होने वाली परेशानियों से बचाया जा सकेगा और उनकी यात्रा आसान होगी।

     

     

  • 17 नवंबर को इज्तिमा 2025, 600 एकड़ क्षेत्र में होगी आयोजन की तैयारी और खाने की व्यवस्था

    भोपाल
    राजधानी भोपाल से करीब 15 किलोमीटर दूर बैरसिया रोड स्थित घासीपुरा में 14 नवंबर से शुरू होने जा रहा 78वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा (Aalmi Tablighi Ijtema) पूरी तरह से तैयार है। चार दिवसीय यह धार्मिक आयोजन 17 नवंबर तक चलेगा। इस बार इज्तिमा कमेटी ने व्यवस्थाओं में कई बड़े बदलाव किए हैं, ताकि लाखों जायरीनों (Pilgrims) को किसी तरह की दिक्कत न हो।भोपाल स्टेशन परिसर में करीब 50 हजार लोगों के लिए खाना तैयार किया गया है।

    इज्तिमा कमेटी के सदस्यों ने बताया कि बुधवार से देश के अलग-अलग हिस्सों से जमाअतें भोपाल पहुंचना शुरू करेंगी। सबसे ज्यादा भीड़ शुक्रवार से रविवार के बीच रहने की संभावना है, जिसके लिए रेलवे और प्रशासन ने संयुक्त रूप से व्यवस्था मजबूत की है।
    इस बार कमेटी की अपनी 300 बसें

    इज्तिमा कमेटी के मीडिया प्रभारी उमर हफीज खान ने बताया कि इस वर्ष कमेटी ने पहली बार आरटीओ (RTO) से बसों की मांग नहीं की है। इसके बजाय समिति ने खुद की 300 बसों का प्रबंध कर लिया है। यह व्यवस्था खास तौर पर अंतिम दिन होने वाली सामूहिक दुआ (Mass Prayer) के लिए की गई है। पहले यात्रियों को बस न मिलने पर 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था, लेकिन इस बार ऐसी स्थिति नहीं रहेगी।

    इज्तिमा स्थल पर आने वाले सभी प्रवेश द्वारों (Entry Points) पर मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। चारों गेट्स पर 10 बेड वाले अस्थायी अस्पताल भी तैयार किए जा रहे हैं ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके।

    600 एकड़ में फैला इज्तिमागाह, 71 पार्किंग जोन तैयार

    इस बार इज्तिमा स्थल करीब 600 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें 300 एकड़ सिर्फ पार्किंग (Parking Zones) के लिए आरक्षित रखे गए हैं। 71 पार्किंग जोन बनाए गए हैं, जो पिछले साल से दो अधिक हैं। इन पार्किंग स्थलों में लगभग डेढ़ लाख दोपहिया वाहन, 50 हजार चारपहिया, 1000 बसें, 1000 ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और 1000 ऑटो खड़े हो सकेंगे।

    कमेटी ने बताया कि इस बार करीब 12 लाख जायरीनों के आने की उम्मीद है। इसे देखते हुए सभी व्यवस्थाएं लगभग पूरी कर ली गई हैं और तैयारियों का 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

        बुधवार से देशभर से जमाअतें पहुंचना शुरू होंगी।
        50 हजार लोगों का खाना तैयार।
        भोपाल–इटारसी और भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस में एक्स्ट्रा कोच लग सकते हैं।
        4 नए टिकट काउंटर और 6 एटीवीएम मशीनें।
        स्टेशन पर सुरक्षा, मेडिकल और स्टाफ की अतिरिक्त व्यवस्था।
        इज्तिमा की अवधि में प्लेटफॉर्म 6 की पार्किंग बंद रहेगी।

    रेलवे स्टेशन पर विशेष इंतजाम

    भोपाल रेलवे स्टेशन (Bhopal Railway Station) पर भी इज्तिमा के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार स्टेशन परिसर में करीब 50 हजार लोगों के लिए खाना तैयार किया गया है। भीड़ को देखते हुए स्टेशन परिसर में अतिरिक्त टिकट काउंटर (Ticket Counters) भी खोले जाएंगे।

    2 दिसंबर से चार नए टिकट काउंटर शुरू किए जाएंगे, जिनमें से दो प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर बने पंडाल में और दो स्टेशन परिसर में रहेंगे। इसके अलावा रेलवे दो ट्रेनों में एक्स्ट्रा कोच (Extra Coaches) जोड़ने की तैयारी कर रहा है- भोपाल–इटारसी एक्सप्रेस (Train No. 11272) और भोपाल–जोधपुर एक्सप्रेस (Train No. 14814)।

    जीआरपी और आरपीएफ की टीमें तैनात

    इज्तिमा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जीआरपी (GRP), आरपीएफ (RPF) और स्थानीय पुलिस बल को तैनात किया गया है। स्टेशन और इज्तिमा स्थल दोनों जगह निगरानी के लिए अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। भीड़ नियंत्रण (Crowd Control) के लिए दोनों फुटओवर ब्रिज (FOB) पर अलग-अलग रास्ते तय किए गए हैं ताकि आवाजाही व्यवस्थित ढंग से हो सके।

    ट्रैफिक विभाग और रेलवे ने किए इंतजाम

    इज्तिमा के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने 150 से अधिक ट्रेनों के कोच बंद रखने का निर्णय लिया है। बिना आरक्षण वाले यात्रियों के लिए मोबाइल टिकट वैन की व्यवस्था की गई है।
    मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा और आम नागरिकों के लिए वैकल्पिक रास्ते तय किए गए हैं, ताकि सामान्य यातायात बाधित न हो।
    फायर टीम और वालंटियर्स की तैनाती

    श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहायता के लिए दमकल विभाग की विशेष टीमों को इज्तिमा स्थल पर तैनात किया जा रहा है। इसके अलावा, प्रति शिफ्ट 500 वालंटियर्स ड्यूटी पर रहेंगे, जो आगंतुकों को दिशा-निर्देश देने और आपातकालीन सहायता प्रदान करने का काम करेंगे। प्रशासन ने 4,500 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मांग की है, जिन्हें ट्रैफिक, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा निगरानी में लगाया जाएगा।
    निगरानी और बैरिकेडिंग की पुख्ता व्यवस्था

    इज्तिमा स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे, चेकिंग प्वाइंट्स और बैरिकेडिंग की जा रही है। प्रशासन ने छह प्रमुख मार्गों को केवल इज्तिमा यातायात के लिए आरक्षित किया है ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारू बनी रहे।

        आयोजन तिथि : 14 से 17 नवंबर 2025
        स्थान : ईटखेड़ी (घासीपुरा), भोपाल
        सुरक्षा बल : 850 पुलिसकर्मी + 4,500 अतिरिक्त जवान
        फायर टीम : प्रति शिफ्ट 500 वालंटियर्स
        रेलवे सुविधा : मोबाइल टिकट वैन, सीमित ट्रेन संचालन

    प्रशासन का उद्देश्य : श्रद्धा के साथ शांति और अनुशासन

    नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और रेलवे मिलकर अस्थायी शौचालय, पीने के पानी, मेडिकल सहायता और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रयास यही है कि भोपाल का यह इज्तिमा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बने, बल्कि अनुशासन और प्रबंधन की मिसाल भी पेश करे।

    120 एकड़ में विशाल पंडाल

    इज्तिमा स्थल पर 120 एकड़ में विशाल पंडाल तैयार किया जा रहा है। हजारों वॉलंटियर्स (Volunteers) खानपान, जलापूर्ति और प्रकाश व्यवस्था में जुटे हुए हैं। बुधवार से देश के अलग-अलग हिस्सों से जमाअतें (Delegations) भोपाल पहुंचना शुरू करेंगी। भीड़ सबसे ज्यादा शुक्रवार से रविवार के बीच रहने की उम्मीद है। 17 नवंबर को सामूहिक दुआ के साथ चार दिवसीय इज्तिमा का समापन होगा।

    20% बढ़े इंतजाम, 350 एकड़ में पार्किंग पिछले वर्ष की तुलना में इस बार तैयारियों में 20% की वृद्धि की गई है। पार्किंग एरिया को बढ़ाकर 350 एकड़ तक किया गया है। पिछले साल जहां 66 पार्किंग जोन थे, वहीं इस बार 71 पार्किंग जोन बनाए जा रहे हैं। पंडाल का क्षेत्रफल भी 100 एकड़ से बढ़ाकर 120 एकड़ कर दिया गया है। डॉ. हफीज ने बताया कि “सर्विस एरिया, वॉटर क्लोज, फूड जोन और एवोल्यूशन सेंटर मिलाकर लगभग 200 एकड़ में व्यवस्थाएं की गई हैं। वहीं भोपाल रेलवे स्टेशन के सभी प्लेटफॉर्म से लेकर नादरा बस स्टैंड परिसर तक 850 पुलिसकर्मी, जिनमें आरपीएफ, जीआरपी और थाना पुलिस के साथ डायल-112 के जवान लगातार तैनात रहेंगे। इनकी ड्यूटी भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए लगाई गई है।

    30 हजार लोग संभालेंगे व्यवस्थाएं इज्तिमा स्थल की व्यवस्था 30 हजार प्रशिक्षित और अनुभवी लोगों के हाथों में होगी। इनमें 25 हजार वॉलंटियर्स इज्तिमा कमेटी के हैं, जबकि 5 हजार अमला नगर निगम, प्रशासन और पुलिस बल से जुड़ा है। ये टीमें सफाई, सुरक्षा, ट्रैफिक और पंडाल व्यवस्था को संभालेंगी। वहीं दमकल टीम चौबीसों घंटे इज्तिमा स्थल पर रहेगी। फायर फाइटर वाहनों को अलग-अलग बिंदुओं पर भी तैनात किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर करीब 500 वॉलंटियर प्रति शिफ्ट तैनात रहेंगे।

  • नए साल में इंदौर जू में ब्लैक टाइगर का आगमन, मेलानिस्टिक और व्हाइट टाइगर की जोड़ी से उत्साह

    इंदौर
    दुनिया भर में रहस्य बने दुर्लभ ब्लैक टाइगर भविष्य में पूरी तरह काले नजर आ सकते हैं. जिनकी उत्पत्ति के लिए इंदौर में दुर्लभ काले और सफेद टाइगर के मेल से देश के पहले पूरी तरह काले दुर्लभ टाइगर की उत्पत्ति के लिए वंशावली खंगाली जा रही है. लंबे समय से ब्लैक टाइगर दुनिया भर के लिए रहस्य बने हुए हैं खास बात यह है कि अपने शरीर पर गहरे काले रंग की पट्टिका वाले ब्लैक मेलेनिस्टिक टाइगर सिर्फ भारत में ही पाए जाते हैं, जो फिलहाल नंदनकानन अभ्यारण के अलावा इंदौर के चिड़ियाघर में मौजूद हैं.

    टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश में नए साल 2026 में एक नया मेहमान जन्म ले सकता है। प्रदेश के लिए यह पहला मौका होगा जब मेलानिस्टिक टाइगर (ब्लैकधारी वाला बाघ) का जन्म होगा। दरअसल इसके लिए इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में कुछ समय पहले मेलानिस्टिक टाइगर की व्हाइट फीमेल टाइगर से मेटिंग कराई है। इसके बाद एक्सपर्ट्स ने उम्मीद जताई है कि इंदौर जू में पूरी तरह काले रंग के टाइगर का जन्म हो सकता है।

    खास बात यह कि देश में संभवत: यह पशु मेटिंग में एक तरह अलग प्रयोग है। यह देश का एकमात्र ऐसा टाइगर हो सकता है जिसका रंग पूरी तरह से काला होगा। देश में उड़ीसा के नंदन कानन चिड़ियाघर के अलावा इंदौर जू में ऐसा दुर्लभ टाइगर मौजूद है, जिसकी धारियां काले रंग की है। जिसे मेलानिस्टिक टाइगर (काला बाघ) कहा जाता है।

    ब्लैक टाइगर की कोई विशिष्ट प्रजाति या भौगोलिक उप प्रजाति नहीं है, बल्कि यह दुर्लभ रंग वाला टाइगर होता है. जिनकी त्वचा बाल और फर आदि में गहरे काले पिगमेंट की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे उसका रंग काला हो जाता है. प्राणी विज्ञान के अनुसार, मिलेनिज्म एक जेनेटिक म्यूटेशन है जो स्तनधारी सरीसृप और कीड़ों की अलग-अलग संततियों में देखने को मिलता है, लेकिन खास बात यह है कि दुनिया भर में सिर्फ भारत के टाइगर में ही इस तरह का म्यूटेशन दिखाई देता है.

    इंदौर ही नहीं पूरे मध्यप्रदेश में अलग मामला जू प्रभारी डॉ.उत्तम यादव के मुताबिक यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ ही माह में इंदौर के चिड़ियाघर में देश का पहला काले रंग का बाघ जन्म ले। इन दोनों अलग-अलग प्रजातियों के टाइगर के बीच सितंबर में मेटिंग हुई थी।

    इसमें ब्लैक टाइगर का जीन डोमिनेटिंग जीन रहता है। इसमें गर्भकाल 300 से 310 दिनों के बीच का होता है। अभी मादा व्हाइट टाइगर की बदलती प्रकृति से पूरे संकेत हैं कि नया मेहमान कंसिव हो चुका है।

    अगर सबकुछ अच्छा रहा तो संभव है कि 2026 में मप्र में पहली बार मेलानिस्टिक टाइगर प्रजाति का नया मेहमान इंदौर में जन्म ले। यह सिर्फ इंदौर ही नहीं बल्कि मप्र में एक अलग मामला होगा।

    ऐसे होते हैं मेलानिस्टिक टाइगर मेलानिस्टिक टाइगर के शरीर पर चौड़ी और मोटी काली धारियां होती हैं। ये धारियां गहरी और फैली हुई होती हैं जिससे बाघ पूरी तरह ब्लैक नजर आता है। सामान्य रूप से टाइगर के शरीर पर येलो या चॉकलेटी रंग की धारियां नजर आती है।

    चिड़ियाघर प्रबंधन के मुताबिक मेलानिस्टिक टाइगर इंदौर जू में आकर्षण का केंद्र है जो अपनी खास कुदरती संरचना के चलते सभी का ध्यान आकर्षित करता है।

    वंशावली और हेटेरो जेनेसिस प्रक्रिया का पालन
    इंदौर प्राणी उद्यान के प्राणी विशेषज्ञ डॉ उत्तम यादव बताते हैं कि, ''देश के पहले पूरी तरह ब्लैक टाइगर की उत्पत्ति हो सके इसके लिए यहां पहली बार ब्लैक मेलोनेस्टिक टाइगर का व्हाइट टाइगर से क्रॉस कराया गया है. इसी तरह प्राणी उद्यान में मौजूद येलो टाइगर की भी क्रॉस ब्रीडिंग कराई गई है, जिससे कि दुर्लभ रंगों वाले शावकों को प्राप्त किया जा सके.''

    फिलहाल यहां दुर्लभ प्रजाति के जो टाइगर मौजूद हैं जिनके बीच F1-f2 जेनरेशन के लिहाज से क्रॉस कराने के बाद 100 प्रतिशत काले ब्लैक मेलेनिस्टिक टाइगर की उत्पत्ति के प्रयास हो रहे हैं. माना जा रहा है कि अगले कुछ माह में यहां जो टाइगर जन्म लेंगे उनमें देश का पहला पूरी तरह से ब्लैक टाइगर भी जन्म ले सकता है. ब्लैक के अलावा व्हाइट और पीले रंग के शावकों का भी जन्म होगा.

    डॉ यादव के मुताबिक, ''इंदौर में जो ब्लैक टाइगर हैं वह फिलहाल 70% ब्लैक हैं लेकिन आने वाली जनरेशन में प्रयास किया जा रहे हैं कि जो भी ब्लैक टाइगर पैदा हों, उसका रंग 100 फीसदी काला हो, जो अपने आप में दुर्लभ होकर देश का पहले पूरी तरह ब्लैक टाइगर के रूप में जन्म ले सके.

    क्या होती है पेडिग्री शीट
    जिस प्रकार इंसानों में जेनेटिकली एकरूपता और एक दूसरे से अंतर होता है ठीक उसी प्रकार टाइगर में भी अलग-अलग जीन के मिलने से उन्नत प्रजाति विकसित होती है. जैसे परिवार के विभिन्न सदस्यों के बीच रिश्तों और वंश को अलग-अलग दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है. वंशावली के आधार पर ही संबंधित प्राणी के आनुवांशिक लक्षणों उनकी बीमारी और जीवन की स्थिति का आकलन किया जाता है.

    यही वजह है कि इंसानों में ब्लड ग्रुप गोत्र जैसी अन्य व्यवस्था की तरह ही टाइगर में भी उन्नत नस्ल प्राप्त करने के लिए उनकी क्रॉसिंग में वंशावली का ध्यान रखना जरूरी है. अलग-अलग वंशावली की क्रॉसिंग से उत्पन्न होने वाले टाइगर अपने खास गुण और रंग के अलावा स्वस्थ्य शरीर वाले होते हैं. जबकि एक ही जीन की क्रॉसिंग से उत्पन्न प्राणियों की प्रजाति के बीमार होने के अलावा विलुप्त होने की आशंका ज्यादा रहती है.
     

  • मिलिंग कार्य में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जायेगी : खाद्य मंत्री राजपूत

    धान परिवहन कार्य में लगे वाहनों पर लगेगा जीपीएस
    खाद्य मंत्री ने दिये एनसीसीएफ के प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई एवं ब्लैक लिस्टेड करने के निर्देश

    भोपाल 
    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने सख्त निर्देश दिये हैं कि मिलर्स धान मिलिंग के कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरते।मिलिंग कार्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आई तो कठोर कार्रवाई की जायेगी। मिलिंग कार्य के दौरान कोई भी गड़बड़ी या अनियमितता पाई जायेगी तो संबंधित जिला प्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रबंधक के खिलाफ भी दण्डात्मक कार्रवाई की जायेगी। खाद्य मंत्री श्री राजपूत मंत्रालय में प्रदेश के मिलर्स के साथ आयोजित बैठक में विपणन वर्ष 2025-26 की मिलिंग नीति के प्रारूप पर चर्चा कर रहे थे।

    बैठक में शहडोल उमरिया क्षेत्र के मिलर्स द्वारा एनसीसीएफ के प्रभारी एवं कर्मचारियों के कार्य व्यवहार पर विरोध जताये जाने के कारण खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने एनसीसीएफ के प्रभारी एवं संबंधित जिले के ब्रांच मैनेजर के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के साथ कम्पनी को ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश अपर मुख्य सचिव खाद्य को दिये।

    मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि अन्तर जिला मिलिंग एवं धान के परिवहन के लिये किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि विपणन वर्ष 2025-26 में जिन ट्रकों से धान परिवहन होगा उन पर जीपीएस ट्रेकर अनिवार्य रूप से लगाते हुए उक्त वाहनों का सत्यापन परिवहन सेवा पोर्टल से कराया जाये। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि यदि कोई ट्रक बिना जीपीएस पाया जायेगा, तो संबंधित धान प्रदाय करने वाले कर्मचारी एवं परिवहनकर्ता तथा संबंधित मिलर्स के खिलाफ दण्डात्मक कार्रवाई की जायेगी।

    गोदामों की भंडारण क्षमता का निरीक्षण करे अधिकारी
    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि वो समय पर मिलर्स के गोदामों की वास्तविक भंडारण क्षमता की पड़ताल करने के साथ इस वर्ष धान मिलिंग के लिये अनुबंध करने वाले मिलर्स के साथ उनके गोदाम, मिल का निरीक्षण जिला स्तरीय समिति द्वारा आवश्यक रूप से कराया जाये। उन्होंने कहा कि यह संज्ञान में आया है कि मिलर्स द्वारा बताये गये गोदाम की स्थिति एवं उसकी क्षमता पर्यप्त नहीं होती है, इसलिये अधिकारी पड़ताल में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरते। खाद्य मंत्री ने अफसरों को निर्देश दिये कि इस विपणन वर्ष 2025-26 में जो मिलर्स गुणवत्तायुक्त अच्छा कार्य करेंगे, उन्हें गत वर्ष की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक मात्रा में धान देने के प्रावधान किये जाए, जिससे उनकी मिलिंग क्षमता का पूरा उपयोग किया जा सके।

    तय समय सीमा में पूर्ण करें मिलिंग कार्य
    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि सभी मिलर्स द्वारा इस बार धान मिलिंग का कार्य भारत सरकार द्वारा जून 2026 की तय की गई समय सीमा में पूर्ण करना अनिवार्य है। उन्होंने दिसम्बर 2025 से ही पूरी मिलिंग प्रक्रिया की सतत् निगरानी एवं समीक्षा करने के निर्देश नान के प्रबंध संचालक को दिये। इसके साथ ही उन्होंने निगम मुख्यालय पर प्रत्येक 15 दिवस में क्षेत्रीय प्रबंधक एवं जिला प्रबंधक की बैठक कर प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिये।

    मिलर्स को समय पर भुगतान करने के दिये निर्देश
    मिलर्स द्वारा उपार्जन एवं मिलिंग का भुगतान समय पर नहीं होने की समस्या पर खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने नान के प्रबंध संचालक अनुराग वर्मा को समय पर मिलर्स के भुगतान करने के निर्देश दिये गये। साथ ही निर्देश दिये गये कि नियमित रूप से भुगतान कार्य की समीक्षा अनिवार्य रूप से करें। अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरूण समी ने मिलिंग के लिये उपार्जन केन्द्र से ही अधिक से अधिक धान उठाव कराने के निर्देश अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि धान उठाव के उपयोग में आने वाले वाहनों के रजिस्टेशन प्रक्रिया का टेस्ट रन करें। बैठक में मिलर्स ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इस दौरान एमडी नागरिक आपूर्ति विभाग श्री अनुराग वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। 

  • मध्यप्रदेश पुलिस की त्वरित एवं संवेदनशील कार्यवाही

    डायल-112 ने बचाई दो जानें, अशोकनगर व रीवा में आत्महत्या के प्रयास किए  विफल

    भोपाल  
    मध्यप्रदेश पुलिस अपने अनुशासन, दक्षता और जनता की सुरक्षा के प्रति समर्पण के लिए निरंतर उल्लेखनीय कार्य कर रही है। राज्यभर में पुलिस बल न केवल अपराध नियंत्रण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, बल्कि संकट की घड़ी में मानवीय संवेदनशीलता दिखाकर नागरिकों के जीवन की रक्षा भी कर रहा है। इसी क्रम में डायल-112 सेवा ने अपनी तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण से दो अलग-अलग जिलों — अशोकनगर एवं रीवा में आत्महत्या के प्रयास कर रहे व्यक्तियों के जीवन को सुरक्षित बचाने में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है।

    अशोकनगर — रेलवे पटरी पर आत्महत्या करने पहुँची महिला की बचाई जान
    09 नवम्बर 2025 को दोपहर लगभग 02:00 बजे, राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कोतवाली, अशोकनगर क्षेत्र अंतर्गत गरिमा पेट्रोल पंप के पास एक महिला रेलवे पटरी पर घूम रही है और किसी अनहोनी की आशंका है। सूचना मिलते ही थाना कोतवाली क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल मौके पर भेजा गया। आरक्षक पवन धाकड़ एवं पायलट शिशुपाल शर्मा ने मौके पर पहुँचकर देखा कि लगभग 30 वर्षीय महिला पारिवारिक विवाद से आहत होकर आत्महत्या का प्रयास कर रही थी। डायल-112 के जवानों ने तुरंत महिला को संरक्षण में लिया, समझाइश दी तथा उसे आत्मघाती कदम उठाने से रोका। तत्पश्चात महिला को सुरक्षित थाने में परामर्श देकर परिवार देकर परिवार के पास पहुंचाया गया।

    रीवा — चार मिनट में पहुँची डायल-112, फंदा लगाते युवक को बचाया
    थाना अमहिया, रीवा अंतर्गत ललऊ घाट क्षेत्र में 09 नवम्बर की रात 12 बजे, डायल-112 कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि एक व्यक्ति नशे की हालत में अपने कमरे में बंद होकर आत्महत्या की धमकी दे रहा है। सूचना मिलते ही थाना अमहिया पुलिस एवं डायल-112 टीम केवल चार मिनट में स्थल पर पहुँच गई। दरवाजा तोड़कर भीतर प्रवेश करने पर युवक फंदा लगाकर आत्महत्या का प्रयास कर रहा था। पुलिस ने तत्काल उसके गले से कपड़ा हटाकर उसे बचाया और शांत किया।

    थाना प्रभारी शिवा अग्रवाल ने बताया कि युवक नशे के प्रभाव में था तथा पारिवारिक विवाद के कारण आत्मघाती कदम उठाने जा रहा था। पुलिस ने उसे समझाइश दी, परामर्श दिया और सुरक्षित रूप से परिजनों से मिलवाया।

    इन दोनों घटनाओं ने पुनः सिद्ध किया है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा केवल एक आपातकालीन नंबर नहीं, बल्कि “जनजीवन की सुरक्षा का भरोसा” है। संकट की सूचना मिलते ही डायल-112 की टीमें हर कोने में त्वरित प्रतिक्रिया देकर नागरिकों के जीवन की रक्षा कर रही हैं। यह कार्यवाही पुलिस की संवेदनशीलता, तत्परता और जनसेवा के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। मध्यप्रदेश पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी आपात स्थिति में DIAL 112 पर तुरंत संपर्क करें।