• रायपुर से संदेश: बस्तर में शांति और विकास को सरकार दे रही उच्च प्राथमिकता, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

    रायपुर : बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास सरकार की प्राथमिकता : उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा

    उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने माओवादियों से हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने की अपील

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री  विजय शर्मा ने अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान आज बीजापुर जिला कार्यालय के इन्द्रावती सभागार में बीजापुर और सुकमा जिले के जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंचों तथा समाज प्रमुखों, मांझी, चालकी, गायता, पुजारी और पटेलों से संवाद किया।

    इस बैठक में उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि बस्तर को अमन, चैन, शांति और सुरक्षा के साथ विकास के पथ पर अग्रसर करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्य सरकार हर हाल में बस्तर को हिंसा मुक्त करने के लिए संकल्पित है। बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास सरकार की प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि वर्षों से बस्तर संभाग के आदिवासी अंचल विकास से वंचित रहे हैं, पर अब समय आ गया है कि सभी मिलकर बस्तर को शांति और प्रगति के मार्ग पर ले जाएँ।  शर्मा ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री एवं केन्द्रीय गृहमंत्री ने सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए समयसीमा तय की है। इसी दिशा में शासन की ‘पुनर्वास नीति 2025’ के अंतर्गत बड़ी संख्या में माओवादी संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

    उन्होंने उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं ग्राम प्रमुखों से आग्रह किया कि वे भटके हुए युवाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए पहल करें।  शर्मा ने कहा कि यदि समय रहते पुनर्वास नहीं किया तो सुरक्षा बल अपनी जिम्मेदारी निभाएँगे। जो लौट आएंगे, उनका लाल कालीन बिछा कर स्वागत किया जाएगा और उनके सुनहरे भविष्य के लिए सरकार संकल्पित है।

    गृहमंत्री ने बताया कि जगदलपुर में  210 माओवादी एक साथ हथियारों छोड़कर पुनर्वास कर चुके हैं, जिनमें 92 युवा बीजापुर जिले के हैं। ये सभी पुनर्वास केंद्र में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने संबंधित परिवारों से अपील की कि वे अपने पुनर्वासित परिजनों से मिलने जरूर जाएँ ताकि उन्हें भी प्रोत्साहन मिले एवं अन्य भटके हुए युवाओं को भी लौटने के लिए प्रेरित करें।

    उन्होंने बताया कि वे स्वयं पूर्वर्ती गांव की नक्सल लीडर हिड़मा की वृद्ध माता से मिलकर उनके पुत्र को हिंसा छोड़ने और समाज की मुख्यधारा में आने के लिए प्रेरित करने का अनुरोध किया है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती जानकी कोरसा, बस्तर कमिश्नर  डोमन सिंह, आईजी  सुंदरराज पी, कलेक्टर  संबित मिश्रा, डीएफओ  रंगानाथन रामाकृष्णन वाय, सीईओ जिला पंचायत मती नम्रता चौबे, उपनिदेशक इन्द्रावती टाइगर रिजर्व  संदीप बलगा, सहित जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य, सरपंच, समाज प्रमुख एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

  • भारत पर्व हमारी विविधता में एकता का उत्सव – मुख्यमंत्री साय

    रायपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लौहपुरुष की विरासत को और सशक्त बनाया – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    सरदार पटेल की 150वीं जयंती वर्ष पर आयोजित भारत पर्व में शामिल हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री

    भारत पर्व हमारी विविधता में एकता का उत्सव – मुख्यमंत्री  साय

    छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक दल के कलाकारों से की मुलाकात और दी शुभकामनाएं

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय  गुजरात के केवड़िया स्थित एकता नगर में आयोजित भारत पर्व में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत पर्व हमारे देश की विविधता में एकता का प्रतीक है। यहां भारत के हर राज्य की संस्कृति, परंपरा और गौरव एक साथ देखने को मिलते हैं। कार्यक्रम में दिल्ली के उप राज्यपाल  वी के सक्सेना और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री  अरुण साव भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री  साय ने लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को नमन करते हुए कहा कि भारत पर्व उनकी 150वीं जयंती वर्ष पर आयोजित हो रहा है, जिसका समापन धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती — राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस — पर होगा। उन्होंने कहा कि यह पर्व भारत के सांस्कृतिक और भावनात्मक एकीकरण का सशक्त प्रतीक है।

    मुख्यमंत्री  साय ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की भव्यता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह प्रतिमा भारत की एकता की पहचान है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने इस प्रतिमा के निर्माण का निर्णय लिया, तब देश के हर गांव से लोहा मंगवाया गया था — यह सच्चे अर्थों में एक भारत का प्रतीक है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह सरदार पटेल ने रियासतों को जोड़कर एक भारत बनाया, उसी तरह प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने उनके सपनों के भारत को सशक्त करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का निर्णय लेकर सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत में सनातन संस्कृति के वैभव को पुनः स्थापित किया। प्रधानमंत्री  मोदी ने सरदार पटेल के परिजनों के साथ राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया, और जब पूरे देश ने यह दृश्य देखा तो सभी भावविभोर हो उठे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सबका सौभाग्य है कि आज देश की विरासत प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जैसे दूरदर्शी नेतृत्व के हाथों में है, जो सरदार पटेल की सोच और आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि हाल ही में राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की झांकी ने एकता परेड में हिस्सा लिया और पूरे देश को राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

    मुख्यमंत्री  साय ने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में हुए आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का वंदे मातरम् और सरदार पटेल की एकता की भावना — यही हमारी राष्ट्रीय पहचान है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरदार पटेल ने सिविल सेवा ढांचे का भारतीयकरण किया, और आज भी हमारे प्रशासनिक तंत्र में उनकी दूरदृष्टि और सोच झलकती है।

    भारत पर्व के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने प्रस्तुति देने आए छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक दल के कलाकारों से भी मुलाकात की और उन्हें शुभकामनाएँ दीं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • केवड़िया में मनाया जाएगा मध्यप्रदेश दिवस, स्टेच्यू ऑफ यूनिटी पर होगा भव्य कार्यक्रम — सीएम डॉ. यादव होंगे उपस्थित

    स्टेच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया में मनाया जाएगा मध्यप्रदेश दिवस, मुख्यमंत्री डॉ. यादव होंगे शामिल

    भारत पर्व 2025 में मध्यप्रदेश की संस्कृति, पर्यटन और स्वाद का होगा अद्भुत संगम

    भोपाल 

    भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर स्टेच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया गुजरात में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक "भारत पर्व" का उत्साहपूर्वक आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशिष्ट आतिथ्य में भारत पर्व 2025 के अंतर्गत मंगलवार, 11 नवंबर को गुजरात के केवड़िया में मध्यप्रदेश दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के ध्येय को दृष्टिगत रखते हुए देश की विविधता में एकता को प्रदर्शित करना है।

    संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि भारत पर्व के अंतर्गत मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा लगभग 25 वर्गमीटर क्षेत्रफल में एक आकर्षक थीम पेवेलियन तैयार किया गया है, जिसमें राज्य की पर्यटन, संस्कृति और हस्तशिल्प विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया जा रहा है। पेवेलियन में सांची, खजुराहो, भीमबेटका, मांडू, ओरछा, उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के साथ-साथ बांधवगढ़, कान्हा और पेंच जैसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों की झलक प्रस्तुत की जा रही है। साथ ही, राज्य के स्थानीय हस्तशिल्प और हस्तकला जैसे चंदेरी और महेश्वरी वस्त्र, बाघ प्रिंट, डोकरा कला, मिट्टी के बर्तन और गोंड पेंटिंग को भी प्रदर्शित किया जा रहा है।

    अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व  शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि भारत पर्व हमारे देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता का सुंदर उत्सव है। मध्यप्रदेश ‘भारत का हृदय’ है, और यहां की हर परंपरा, हर स्वाद, हर कला रूप हमारे देश की आत्मा को दर्शाता है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के पर्यटन, हस्तशिल्प, व्यंजनों और संस्कृति की प्रस्तुति के माध्यम से हम देशभर के आगंतुकों को अतुलनीय मध्यप्रदेश की आत्मा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि आगंतुक न केवल मध्यप्रदेश के स्वाद और संगीत का आनंद लें, बल्कि उसकी आत्मिक ऊर्जा और जीवंतता का भी अनुभव करें।

    स्टूडियो किचन में मध्यप्रदेश का स्वाद

    मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीएसटीडीसी) द्वारा 11 नवंबर को स्टूडियो किचन की विशेष प्रस्तुति दी जा रही है, जिसमें प्रदेश के पारंपरिक और प्रादेशिक व्यंजन लाइव तैयार कर परोसे जाएंगे। यह प्रस्तुति फ्लेवर्स फ्रॉम द हार्ट ऑफ इंडिया की थीम पर आधारित है। बुंदेलखंड क्षेत्र का खट्टा–तीखा छाछ पर आधारित पेय सन्नाटा, डिंडोरी क्षेत्र का पारंपरिक सूप कंगनी दाल का शोरबा, मालवा का प्रसिद्ध स्नैक भुट्टे की कीस, चना बेसन से बना स्वादिष्ट नमकीन व्यंजन चंबल का थोपा, सीधी क्षेत्र का पारंपरिक नाश्ता बेड़ई धुमना आलू, बघेलखंड क्षेत्र का लोकप्रिय व्यंजन मटर का निमोना और सादी पूरी, शहडोल क्षेत्र की प्रसिद्ध मिठाई कुटकी की खीर आगंतुकों को परोसे जाएंगे। इन व्यंजनों के माध्यम से प्रदेश के विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक स्वादों को प्रदर्शित किया जा रहा है।

    सांस्कृतिक प्रस्तुति – “अमृतस्य मध्यप्रदेश”

    संस्कृति विभाग की ओर से प्रसिद्ध नृत्य संयोजिका मैत्रीय पहाड़ी एवं समूह द्वारा “अमृतस्य मध्य प्रदेश” शीर्षक से एक भव्य नृत्य प्रस्तुति दी जाएगी। यह प्रस्तुति दर्शकों को मध्यप्रदेश की प्राचीन सभ्यता, भक्ति, प्रेम और प्रकृति की लय से जोड़ती है। इस नृत्यगाथा की शुरुआत भीमबेटका की गुफाओं से होती है, जहां मानव सभ्यता की प्रथम झलक दिखाई देती है। आगे खजुराहो के मंदिरों की मूर्तिकला, सांची के स्तूपों की शांति, और चित्रकूट की पवित्र भूमि के भावनात्मक दृश्यों को नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। उज्जैन और ओंकारेश्वर के ज्योतिर्लिंगों की दिव्यता, ग्वालियर किले की ऐतिहासिकता, मांडू की प्रेम गाथा और ओरछा के मंदिरों की भव्यता मंच पर जीवंत होती है। प्रकृति के साथ मनुष्य के संबंध को बांधवगढ़, कान्हा और पेंच के वनों तथा जबलपुर की संगमरमर चट्टानों के दृश्यों से दर्शाया गया है। पारंपरिक महेश्वरी, चंदेरी और बाग प्रिंट वस्त्रों में सजे कलाकार मंच पर राज्य की शिल्प विरासत का गौरव गान करते हैं। नर्मदा आरती के दृश्य के साथ यह यात्रा अपने आध्यात्मिक उत्कर्ष पर पहुंचती है। 

  • रबी फसलों के लिए किसानों को मिले पर्याप्त सिंचाई जल : जल संसाधन मंत्री सिलावट

    किसानों को रबी फसलों के लिये मिले पर्याप्त पानी : जल संसाधन मंत्री  सिलावट

    प्रदेश के जलाशयों में जल-भराव की स्थिति बहुत अच्छी
    बाँध सुरक्षा संबंधी हुई बैठक

    भोपाल
    जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि किसानों को रबी की फसलों की सिंचाई के लिये पर्याप्त पानी मिले, यह सुनिश्चित किया जाये। प्रदेश में रबी फसलों के लिये आगामी 15 नवम्बर से पानी छोड़ा जायेगा। इसके पूर्व जल-स्रोतों, नहरों आदि की मरम्मत का कार्य अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाये, जिससे डाउन स्ट्रीम के हर किसान के खेत तक पानी पहुँच सके। इस बार प्रदेश के जलाशयों में जल-भराव की स्थिति बहुत अच्छी है। प्रदेश के प्रमुख 286 जलाशयों में औसत जल-भराव 97 प्रतिशत है।

    जल संसाधन मंत्री  सिलावट ने सोमवार को मंत्रालय में बाँध सुरक्षा संबंधी बैठक में ये निर्देश दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन  राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता  विनोद देवड़ा, मुख्य अभियंता बोधी परियोजना  आर.डी. अहिरवार एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

    मंत्री  सिलावट ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा मध्यप्रदेश को 3 बड़ी परियोजनाएँ केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल और मेगा ताप्ती दी गईं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में निरंतर सिंचाई का रकबा बढ़ रहा है। उन्होंने निर्देश दिये कि जो अंतर्राज्यीय योजनाएँ लंबित हैं, उनके समाधान के विषय में प्रयास करें। आरआरआर (रिपेयर, रिनोवेशन और रेस्टोरेशन) एवं ईआरएम (एक्सटेंशन, रिनोवेशन एण्ड मोडर्नाइजेशन)योजनाओं संबंधी प्रस्ताव केन्द्र सरकार को तैयार कर भिजवाये जायें।

    बाँधों की सुरक्षा के लिये आईआईटी दिल्ली एवं रुढ़की के साथ होगा एमओयू

    मंत्री  सिलावट ने कहा कि सरकार के लिये बाँधों की सुरक्षा उच्च प्राथमिकता है। इस संबंध में मध्यप्रदेश सरकार शीघ्र ही आईआईटी रुढ़की और आईआईटी दिल्ली के साथ एमओयू करेगी। प्रदेश में गाँधी सागर बाँध की सुरक्षा के दृष्टिगत 29 करोड़ 41 लाख रुपये की लागत से बाँध सुदृढ़ीकरण कार्यों के लिये निविदा की जा चुकी है और कार्य प्रगतिरत है। बाँध सुरक्षा अधिनियम-2021 के अंतर्गत समस्त निर्दिष्ट बाँधों का फ्लड रिव्यू, बाँधों पर इंस्ट्रूमेंटेशन और अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाये जाने का कार्य किया जायेगा। इसके लिये प्रदेश के 1365 बाँधों को चिन्हित किया गया है।

    मंत्री  सिलावट ने निर्देश दिये कि जल-संरचनाओं में वर्षा उपरांत किये जाने वाले कार्य बाँधों के स्लूस गेटों एवं सेंट्रल स्पिलवे के गेटों का संचालन, नहरों पर आवागमन के लिये बनाये गये रास्तों का सुधार, नहरों पर बनाये गये ऐस्केप को बंद करना आदि सुनिश्चित करें। क्षतिग्रस्त जल-स्रोतों की मरम्मत, गाद की सफाई और नहरों पर बने स्ट्रक्चर – पुलिया, फॉल, साइफन, एक्वाडक्ट आदि की सफाई और मरम्मत कराई जाये।

    मंत्री  सिलावट ने कहा कि रबी फसल के लिये पानी छोड़े जाने के संबंध में जिला जल उपभोक्ता समितियों की बैठकें आयोजित की जायें और इस संबंध में जनता एवं जन-प्रतिनिधियों से संवाद किया जाये। किसानों को राज्य सरकार की सिंचाई कर पर ब्याज दर में छूट योजना का पूरा लाभ दिया जाये।

    सिंहस्थ संबंधी कार्यों को युद्ध स्तर पर करें पूरा

    मंत्री  सिलावट ने निर्देश दिये कि सिंहस्थ-2028 के कार्यों को युद्ध स्तर पर किया जाये और इन्हें वर्ष 2027 तक पूरा किया जाये। राज्य सरकार का संकल्प है कि सिंहस्थ में शिप्रा नदी के शुद्ध जल में श्रद्धालु स्नान-आचमन करें। वर्तमान में उज्जैन में विभाग के 3 कार्य – सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी, खान डायवर्जन और घाटों के निर्माण का कार्य प्रगतिरत है। इन सभी कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण किये जाने के निर्देश दिये गये।

    प्रदेश के बेसिन में जल-भराव की स्थिति

    प्रदेश में इस बार अच्छी बारिश के चलते सभी 10 बेसिन में जल-भराव की स्थिति बहुत अच्छी है। नर्मदा बेसिन में सर्वाधिक 99.83 प्रतिशत, माही बेसिन में 98.67 प्रतिशत, बेतवा बेसिन में 97.99 प्रतिशत, सिंध बेसिन में 97.63 प्रतिशत, गंगा बेसिन में 97.19 प्रतिशत, चंबल बेसिन में 95.97 प्रतिशत, वेनगंगा बेसिन में 95.48 प्रतिशत, यमुना बेसिन में 95 प्रतिशत, ताप्ती बेसिन में 89.23 प्रतिशत और धसान बेसिन में 86.60 प्रतिशत जल-भराव हुआ है।

     

  • मंत्री राजपूत बोले — जनता का साथ और आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी शक्ति है

    जनता का साथ और आशीर्वाद ही मेरी ताकत है : मंत्री  राजपूत

    बिलहरा में किया 25 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन

    भोपाल

    सुरखी विधानसभा क्षेत्र इतना साधन, सुविधा संपन्न होने से हमारे यहां से एक डिप्टी कलेक्टर बच्चा निकला है और आने वाले समय में यहां से कई बच्चे कलेक्टर, एसपी और बड़े-बड़े पदों पर पहुंचेंगे। यह बात खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने नगर परिषद बिलहरा में 25 करोड़ के विकास कार्यों के भूमि पूजन एवं लोकार्पण के अवसर पर कही।

    मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र एक समय इतना पिछड़ा था कि यहां लोग आने से कतराते थे। न तो पानी था और न ही शिक्षा के लिए स्कूल थे लेकिन अब आपके आशीर्वाद और हमारी सरकार के प्रयास से सुरखी विधानसभा विकास कार्यों में अपना अलग ही स्थान प्राप्त कर चुकी है। मंत्री श्री राजपूत ने डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए ग्राम खमकुआ निवासी यशपाल स्वर्णकार को शॉल-श्रीफल से सम्मानित किया और राहतगढ़ की डीएसपी पद पर चयनित हुए विवेक अग्रवाल को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आपकी मेहनत ने हमारे क्षेत्र का नाम रोशन किया है मैं चाहता हूं सुरखी विधानसभा क्षेत्र में बच्चों और युवाओं के लिए इस तरह की व्यवस्था हो कि हमारे यहां के बच्चे हर क्षेत्र में अव्व्ल हो।

    बिलहरा में युवाओं को दी स्टेडियम की सौगात

    मंत्री श्री राजपूत ने बिलहरा में स्टेडियम का लोकार्पण करते हुए कहा कि यह स्टेडियम हमारी युवाओं के लिए उनके सपने साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा। जहां हमारी बेटा- बेटियां खेल कर अपनी प्रतिभा के दम पर देश दुनिया में नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह हमारे बुंदेलखंड की बेटी क्रांति गौड़ ने क्रिकेट में अपनी प्रतिभा के बल पर विश्व में बुंदेलखंड का नाम रोशन किया, इस तरह इस स्टेडियम में खेल कर हमारी बेटियां भी अपने क्षेत्र का नाम रोशन करेंगी ।

    लगभग 50 गांव के लोगों को मिलेगी आवागमन में सुविधा

    मंत्री श्री राजपूत ने मोकलपुर चैराहे से मड़खेराजागीर मार्ग का लोकार्पण किया। इस मार्ग के बनने से ग्राम खेजरा माफी, पनारी, बिलहरा महुआखेड़ा,पिपरिया,कटंगी, बीरपुर, बरखुआखुर्द सहित लगभग 50 गांव के लोगों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी इस मार्ग के बनने से लोगों का समय भी बचेगा।

    बिजली की समस्या से मिलेगा छुटकारा

    बिलहरा के लिए 33/11 केव्ही उपकेंद्र में 3150 केवी क्षमता से वृद्धि कर 5000 के वी की गई है इससे विद्युत कटौती एवं व्यवधान से क्षेत्र वासियों को मुक्ति मिलेगी। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि बिजली मुख्य समस्या होती है लेकिन अब यह समस्या हल हो चुकी है बिजली की कोई कमी नहीं होगी और न ही बार-बार बिजली खराब होने की वोल्टेज कम होने की समस्या आएगी।

    बच्चों को निशुल्क साइकिल वितरण किया

    मंत्री श्री राजपूत ने बच्चों के लिए निःशुल्क साइकिल वितरण करते हुए कहा कि हमारे क्षेत्र में प्रतिभा की कमी नहीं है।सभी बच्चे प्रतिभावान है, उनकी शिक्षा में कोई व्यवधान नहीं आएगा। उनकी शिक्षा को लेकर हर स्कूल में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था की गई है। कई स्कूलों में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था हो चुकी है और अन्य स्थानों पर जल्द ही यह व्यवस्था की जाएगी, जिससे हमारे बच्चे आधुनिक शिक्षा से जुड़कर अच्छा ज्ञान अर्जित करें और अपने क्षेत्र का नाम रोशन करें।

    हर वर्ग को सरकार दे रही लाभ

    मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि राज्य सरकार हर वर्ग को ध्यान में रखकर योजनाएं बनती है और हर वर्ग को लाभ दे रही है फिर चाहे वह हमारी लाडली बहन योजना हो जिसके माध्यम से हमारी बहनें सशक्त होकर अपना परिवार चल रही हैं। तो वही किसान सम्मन निधि के माध्यम से सभी किसानों को सम्मान मिल रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव ने लोगों को योजनाओं से जोड़कर उन्हें लाभ पहुंचाया है।

    शहरों जैसी व्यवस्थाएं हो रही आपके क्षेत्र में

    मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि बिलहरा में सुंदर पार्क एवं सौंदर्य करण के कार्य चल रहे हैं आपके क्षेत्र में शहरों जैसी व्यवस्थाएं आपके लिए की जा रही है जहां घर.घर पानी भी पहुंच रहा है और बच्चों को स्कूल स्वास्थ्य सुविधाएं सहित अन्य जो आपकी मांगे हैं वह पूरी की जाएंगी। सुरखी विधानसभा क्षेत्र के लिए अस्थि विसर्जन के लिये विशेष वाहन की व्यवस्था की गई है।

    मंत्री श्री राजपूत ने ग्राम मूडरा 15 करोड़ के मंगल भवन की घोषणा करते हुए बिलहरा में 25 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि पूजन किया, जिसमें मुख्य रूप से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, मंगल भवन, स्टेडियम, जीर्णोद्धार सौंदर्यकरण, अमृत धारा 2 योजना सामुदायिक भवन शामिल हैं।

     

  • राज्यमंत्री श्रीमती गौर का निर्देश — तेज़ी से करें विकास कार्य, जनता तक पहुँचे हर योजना का लाभ

    विकास कार्यों में तेजी लाएं, जनता को मिले सीधा लाभ : राज्यमंत्री श्रीमती गौर

    भोपाल 

    पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनकल्याण से संबंधित सभी कार्यों को गति प्रदान की जाए। ऐसे कार्य किए जाएं, जिनका सीधा लाभ जनता को मिले। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने यह बात सोमवार को मंत्रालय में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में कही।

    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अवधपुरी से एसओएस बाल भवन तक बनने वाली सड़क के निर्माण कार्य में विलंब पर नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने और बिजली पोल स्थानांतरित करने के साथ शीघ्र सड़क निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। श्रीमती गौर ने कहा कि मार्ग पर यातायात निरंतर बढ़ रहा है, ऐसे में भविष्य में आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए गुणवत्ता युक्त सड़क निर्माण कार्य निर्धारित समयावधि में पूर्ण किया जाए।

    राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अन्य निर्माण कार्यों में भी तेजी लाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने पिपलानी एवं खजूरीकलां मार्ग पर अतिक्रमण हटाने और के भी निर्देश दिए। बैठक में नगर निगम और बीएचईएल के अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • तीसरे चरण में प्रवेश किया मिसाल प्रोजेक्टम, अब प्राध्यापक करेंगे विद्यार्थियों को प्रशिक्षित

    मिसाल प्रोजेक्टम का तीसरा चरण प्रारंभ, अब विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देंगे प्राध्यापक

    जनजातीय युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिये उच्च शिक्षा विभाग की पहल

    भोपाल

    मध्यप्रदेश उच्‍च शिक्षा विभाग द्वारा जनजातीय युवाओं में नेतृत्व क्षमता और चरित्र निर्माण को बढ़ावा देने के लिए गुजरात की ओएसिस संस्था के सहयोग से मिसाल प्रोजेक्ट संचालित किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य जनजातीय युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी, नेतृत्व कौशल और समुदाय सेवा की भावना विकसित करना है, जिससे वे अपने समाज और राज्य में सकारात्मक बदलाव ला सकें। उच्‍च शिक्षा विभाग की यह पहल राज्य के शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र में जनजातीय युवाओं को सशक्त नेतृत्व और समाज सेवा के लिए तैयार करने का एक अभिनव प्रयास है।

    विद्यार्थियों को निबंध लेखन, समूह संवाद एवं प्रोजेक्‍ट वर्क का प्रशिक्षण देंगे प्राध्यापक

    गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट के तहत 11 से 16 सितम्बर तक गुजरात के बडोदरा में एक प्रशिक्षण कार्यकम का आयोजन किया जा चुका है जिसमें इस प्रोजेक्ट के लिये चयनित प्रदेश 10 जनजातीय जिलों के शासकीय महाविद्यालयों के प्राध्यापक शामिल हुए थे। प्रशिक्षण के दौरान महाविद्यालय में एनएनएस का प्रभार संभाल रहे प्राध्यापकों को अपने-अपने महाविद्यालयों में जनजातीय युवाओं का चयन करके उन्हें कॉलेज के रोल मॉडल और समाज-सेवी नेतृत्व के रूप में तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। प्रोजेक्ट के अगले चरण में अब ये प्राध्यापक अपने महाविद्यालयों में अध्‍ययनरत युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। जिसके तहत विद्यार्थियों को निबंध लेखन, समूह संवाद एवं प्रोजेक्ट वर्क का प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। प्र‍शिक्षण कार्यकम का यह तीसरा चरण 7 नवंबर से 12 दिसंबर तक चलेगा।

    100 युवा सामाजिक परिवर्तनकर्ता होंगें तैयार

    प्रशिक्षण के बाद ओएसिस मिसाल प्रोजेक्‍ट के द्वारा 29 महाविद्यालयों में 100 युवा सामाजिक परिवर्तनकर्ताओं का चयन किया जाएगा। यह प्रक्रिया तीन चरणों में होगी :

    1. निबंध प्रतियोगिता: छात्रों के विचार और सामाजिक समस्याओं के समाधान के नवाचार जानने के लिए।

    2. समूह संवाद: टीम वर्क, सुनने और विचार साझा करने की क्षमता का मूल्यांकन।

    3. प्रोजेक्ट वर्क: समाज में वास्तविक बदलाव लाने की प्रतिबद्धता और कार्यान्वयन क्षमता का परीक्षण।

    तीनों चरण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले युवाओं को मिसाल विजेता घोषित किया जाएगा और उन्हें ओएसिस की ग्लोबली-प्रशंसित Live-Love-Learn (L3) कोर्स में शामिल किया जाएगा। यह कोर्स चार सप्ताह के residential workshops के माध्यम से आयोजित होगा।

    उद्देश्य और दीर्घकालिक प्रभाव

    जनजातीय युवाओं को सशक्त बनाना और उन्हें नेतृत्व के योग्य बनाना।

    युवाओं में चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना।

    उनके माध्यम से महाविद्यालयों में सकारात्मक बदलाव और सामुदायिक विकास कार्यक्रम संचालित करना।

    जनजातीय युवाओं का सशक्तिकरण

    विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह पहल 10,000–20,000 युवाओं तक लाभ पहुँचाने की क्षमता रखती है, विशेषकर आदिवासी क्षेत्र में। इसके माध्यम से नवीन नेतृत्व और समाज सेवा के रोल मॉडल तैयार होंगे।

    मध्यप्रदेश के जनजातीय युवाओं के लिए नेतृत्व और चरित्र निर्माण में यह प्रोजेक्‍ट मील का पत्थर साबित होगा। चयनित एनएनएस अधिकारी और प्राध्यापक नोडल अधिकारी अपने कॉलेजों में इस कार्यक्रम के संचालन और युवा नेतृत्व विकास के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले ये युवा नेतृत्वकर्ता आने वाले वर्षों में विद्यालयों, कॉलेजों और समुदायों में रोल मॉडल बनकर कार्य करेंगे।

    प्रशिक्षण में शामिल जिले

    इंदौर, धार, उज्जैन, बड़वानी, रतलाम, खंडवा, झाबुआ, बैतूल, आलीराजपुर और छिंदवाड़ा जिले के कुल 29 शासकीय महाविद्यालयों के विद्यार्थी शामि‍ल होंगे।

     

  • मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश — सभी सिंचाई परियोजनाएं तय समय सीमा में पूरी हों

    सिंचाई सुविधाओं का विस्तार ही प्रदेश के समग्र विकास का है आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रदेश के एक करोड़ हेक्टेयर रकबे को सिंचित बनाना हमारा लक्ष्य

    मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश — सभी सिंचाई परियोजनाएं तय समय सीमा में पूरी हों

    हरदा प्रदेश का पहला सिंचित जिला बनने की ओर अग्रसर

    तीन जनजातीय बहुल जिलों में 2 साल में 2 लाख हेक्टेयर रकबे में सिंचाई परियोजनाएं पूर्ण

    सिंहस्थ 2028 के लिए जलगत तैयारियां हर हाल में दिसंबर 2027 तक हो जाएं पूरी

    मुख्यमंत्री ने की नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण एवं नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक में निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा

     

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश एक बार भी इतिहास बनाने जा रहा है। प्रदेश का हरदा जिला जल्द ही शत-प्रतिशत सिंचित जिला बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। हरदा जिले में शहीद ईलाप सिंह माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना प्रगति पर है। करीब 756.76 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से हरदा जिले के 39 हजार 976 हेक्टेयर रकबे में सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलेगी। बीते 16 महीनों में इसका 42 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। इस परियोजना से हरदा जिले की तवा सिंचाई परियोजना के अंतिम छोर (टेल एण्ड एरिया) तक रबी फसल की सिंचाई के लिए पानी पहुंचेगा। इससे जिले के वे सभी किसान भी लाभान्वित होंगे जो अब तक कमांड एरिया के गांव में कोई योजना न होने के कारण सिंचाई सुविधाओं से वंचित थे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने पर हरदा प्रदेश का पहला शत-प्रतिशत सिंचित जिला बन जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के एक करोड़ हेक्टेयर कृषि रकबे को सिंचित बनाना हमारा प्राथमिक लक्ष्य है और हम इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से लागे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 268वीं, नर्मदा नियंत्रण मंडल की 85वीं और नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड के गवर्निंग बोर्ड की 33वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। बैठक में नर्मदा घाटी प्राधिकरण एवं नर्मदा नियंत्रण मंडल द्वारा प्रस्तावित सभी परियोजना प्रस्तावों एवं उनके उपबंधों का अनुमोदन किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में निर्माणाधीन सभी सूक्ष्म, लघु, मध्यम एवं वृहद श्रेणी की सिंचाई परियोजनाओं एवं जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण कार्य की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश में निर्माणाधीन परियोजनाएं हर हाल में तय समय-सीमा में ही पूरी की जाएं। समय-सीमा में वृद्धि न की जाए। मुख्यमंत्री ने नर्मदा बेसिन प्रोजेक्टस कंपनी लिमिटेड द्वारा पूर्ण कराई जा रही परियोजनाओं के बारे में कहा कि निर्माणाधीन परियोजनाओं में वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एशियन और इंटरनेशनल मौद्रिक संस्थाओं से उच्च स्तर का समन्वय किया जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से जुड़े सभी प्रकार के निर्माण कार्यों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जाए। विभागीय वरिष्ठ अधिकारी केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के साथ सतत् समन्वय करें और प्रदेश के तय लक्ष्य प्राप्त करने के लिए फोकस्ड होकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन में शिप्रा नदी के घाटों, जल संरक्षण संरचनाओं और अन्य श्रेणी के निर्माण कार्य अनिवार्यत: दिसंबर 2027 तक पूर्ण हो जाने चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पड़ौसी राज्यों के साथ संयुक्त नदी-लिंक परियोजनाओं पर सक्रियता से कार्य किया जाए, ताकि मध्यप्रदेश के किसानों को अधिकतम जलराशि का लाभ मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में गौशाला, घाट और धर्मशालाओं के निर्माण में धार्मिक एवं परमार्थिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि आवश्यकता पड़ने पर कंपनियों के सीएसआर फंड से भी सहयोग लिया जाए।

    जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि बीते 2 वर्षों में हरदा, बड़वानी और धार जिलों के जनजातीय अंचलों में करीब 2 लाख हेक्टेयर रकबे में सिंचाई उपलब्ध कराने वाली परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं पर शासन द्वारा कुल 6,640 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। इससे इन तीन जिलों के लगभग 600 गांवों के किसान सिंचाई सुविधा से लाभान्वित हुए हैं। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संसाधन विभाग को इस उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं का यह विस्तार प्रदेश के समग्र विकास का आधार बनेगा।

    अपर मुख्य सचिव, जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि निर्माणाधीन स्लीमनाबाद टनल एलाईनमेंट के मध्य मिट्टी स्थिरीकरण के लिए केमिकल/कोल ग्राउटिंग मात्राओं की स्वीकृति दी जा चुकी है। इसका निर्माण कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। शेष काम मात्र सवा 2 महीने में पूरा हो जाएगा। यह परियोजना 31 जनवरी 2026 तक पूरी कर ली जाएगी, इससे पूरा क्षेत्र कृषि उत्पादन में अग्रणी बन जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र को सिंचाई सुविधाओं से लेस करने के लिए इसे पार्वती, कालीसिंध और चंबल राष्ट्रीय नदी लिंक परियोजना में शामिल कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट और मंदाकिनी नदी में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की संयुक्त सिंचाई परियोजना के लिए उत्तरप्रदेश सरकार से समन्वय स्थापित किया जाए। मुख्यमंत्री ने ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना की भी समीक्षा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के हिस्से में आने वाले जल का पूरा लाभ सिंचाई और जल आपूर्ति व्यवस्था में सुनिश्चित किया जाए। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजौरा ने बताया कि बड़नगर, नीमच और जावद सहित अन्य क्षेत्रीय सिंचाई परियोजनाओं को मिलाकर करीब 12,000 करोड़ रुपये के परियोजना प्रस्ताव केंद्र सरकार के जलशक्ति मंत्रालय को भेज दिए गए हैं। केंद्र सरकार ने इस संयुक्त परियोजना की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) मांगी है। डीपीआर स्वीकृत होने पर यह संयुक्त परियोजना केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी लिंक परियोजना का हिस्सा बनेगी। उन्होंने बताया कि ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना के लिए भी महाराष्ट्र सरकार से लगातार समन्वय किया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजना का 96 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यह फाइनल स्टेज पर है। आईएसपी- कालीसिंध उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजना का भी 96 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। शेष काम 31 दिसम्बर 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा। डही उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजना का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष काम 30 जून 2026 तक पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि नर्मदा नियंत्रण मंडल के अधीन सेंधवा (बड़वानी) माईक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का काम भी तेजी से जारी है। इससे बड़वानी जिले के 29 गावों की 9 हजार 855 हेक्टेयर कृषि रकबे में सिंचाई होगी। इसी तरह बड़वानी जिले में ही निवाली उद्वहन सिंचाई परियोजना का काम पूरा होने पर करीब 92 गांवों की 33 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सिंचित की जाएगी। माँ रेवा उद्वहन सिंचाई परियोजना- जिला देवास से बारना परियोजना के अंतिम छोर (टेल एण्ड एरिया) तक सिंचाई का पानी पहुंचाया जाएगा।

    बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी सहित अन्य विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • दिल्ली में होने वाले ‘उद्योग संगम’ में मध्यप्रदेश पेश करेगा अपनी इनोवेशन उपलब्धियां

    दिल्ली में होने वाले ‘उद्योग संगम’ में मध्यप्रदेश पेश करेगा अपनी इनोवेशन उपलब्धियां

    भोपाल 

    केंद्र सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा नई दिल्ली में 11 नवम्बर को ‘उद्योग संगम’ (Conference of Industries & Commerce Ministers) का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सहभागिता करेंगे। इस कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल मुख्य अतिथि रहेंगे।

    इस सम्मेलन में Business Reform Action Plan (BRAP 2024) के परिणाम जारी किए जाएंगे और Ease of Doing Business के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सम्मानित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के अनुरूप राज्य में निवेशकों के लिए व्यवसायिक सुगमता, पारदर्शिता और दक्षता को नई दिशा दी गई है। 434 सुधारों (Reforms) का प्रभावी क्रियान्वयन मध्यप्रदेश द्वारा किया गया है। इन सुधारों में प्रोसेस इंजीनियरिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और निवेश प्रोत्साहन से जुड़े कई उल्लेखनीय कदम शामिल हैं, जिनसे राज्य की औद्योगिक छवि सशक्त हुई है।

    मध्यप्रदेश के उद्योग विभाग द्वारा ‘उद्योग संगम’ में Invest MP Portal के माध्यम से स्थापित Single Window System, National Single Window System (NSWS) के साथ Integration, औद्योगिक भूमि बैंक (Industrial Land Bank) की सुविधा, Gati Shakti से जुड़ी लॉजिस्टिक सुधार पहल, ऑनलाइन क्लियरेंस प्रणाली, और Startup Ecosystem को प्रोत्साहित करने वाले नवाचार प्रमुख रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे।

    इन सुधारों से राज्य में उद्योग स्थापना और संचालन प्रक्रियाएँ न केवल सरल हुई हैं, बल्कि निवेशकों का विश्वास भी अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। Ease of Doing Business में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन देश के अग्रणी राज्यों में गिना जा रहा है और ‘उद्योग संगम’ में राज्य की पहलें अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत की जाएंगी।

    कार्यक्रम के दौरान DPIIT सचिव द्वारा स्वागत उद्बोधन के बाद औद्योगिक पार्क, स्टार्टअप्स, गतिशक्ति, लॉजिस्टिक्स, और Ease of Doing Business पर विभिन्न विषयगत प्रस्तुतियाँ होंगी। सत्र के समापन पर BRAP 2024 Video Release और राज्यों के Felicitation समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय मंत्री  पीयूष गोयल द्वारा राज्यों को सम्मानित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार इस दिशा में कार्य कर रहा है, जहाँ उद्योग स्थापना और निवेश प्रक्रियाएँ सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनें। ‘उद्योग संगम’ में राज्य की प्रस्तुति इसी विजन का प्रतीक होगी।

     

  • पिता ने कर्ज लेकर भेजा दिल्ली, महिला IAS अधिकारी के ड्राइवर का बेटा बना डिप्टी कलेक्टर

    खंडवा 

     यह कहानी है मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के रहने वाले ऋतिक सोलंकी (Hrithik Solanki) की. उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से मिसाल कायम की है. ऋतिक सोलंकी के पिता रूपसिंह सोलंकी आईएएस अफसर सृष्टि जयंत देशमुख के ड्राइवर हैं. आपने बड़े अधिकारियों के बच्चों को सफलता का शिखर छूते हुए तो अक्सर देखा होगा, लेकिन ऋतिक की सफलता ने साबित कर दिया कि लगन और दृढ़ संकल्प से गरीबी की रेखा को पार किया जा सकता है.

    ऋतिक सोलंकी की उपलब्धि सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है, जिनके पास सीमित संसाधन हैं. ऋतिक सोलंकी ने हाल ही में घोषित मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) परीक्षा के नतीजों में सफलता हासिल की है. यह सफलता उन्हें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि उनके पिता की ईमानदार मेहनत और मां के सहयोग से मिली है. अपने पिता को आईएएस सृष्टि देशमुख के यहां काम करते देखकर ऋतिक ने भी सिविल सेवा में जाने का सपना देखा और उसे पूरा किया.

     आईएएस सृष्टि देशमुख के ड्राइवर हैं ऋतिक के पिता

    ऋतिक सोलंकी के पिता रूपसिंह सोलंकी वर्तमान में आईएएस सृष्टि देशमुख के ड्राइवर के पद पर तैनात हैं. आईएएस सृष्टि देशमुख देश की सबसे चर्चित महिला अफसरों की लिस्ट में शामिल है. इंस्टाग्राम पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं. सृष्टि देशमुख ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2018 में ऑल इंडिया रैंक 5 हासिल की थी. उन्होंने महिला वर्ग में टॉप किया था. आईएएस सृष्टि देशमुख वर्तमान में नरसिंहपुर जिले (मध्य प्रदेश) में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (ADM) के पद पर कार्यरत हैं.

    चर्चा में हैं मध्य प्रदेश के ऋतिक सोलंकी

    ऋतिक सोलंकी ने MPPSC 2023 की परीक्षा में सफलता हासिल की है. इस परीक्षा के माध्यम से उनका चयन सरकारी अधिकारी के पद पर हुआ है, जिससे उनका सिविल सेवा का सपना पूरा हो गया है. ऋतिक ने सिर्फ मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग 2023 की परीक्षा में ही सफलता हासिल नहीं की है. वह इससे पहले 2022 में हुई एमपीपीएससी परीक्षा में भी सफल हो चुके हैं. तब उन्हें एटीओ यानी ट्रेजरी ऑफिसर के पद पर नियुक्ति मिली थी. फिलहाल वे अलीराजपुर में पोस्टेड हैं.

    दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं ऋतिक सोलंकी

    ऋतिक सोलंकी के पिता रूपसिंह ने बताया कि उन्होंने बेटे को अफसर बनाने के लिए कई त्याग किए. उन्होंने अपनी और पत्नी की जरूरतों को पीछे रखकर घरखर्च में कटौती की. कई सुविधाओं से भी समझौता किया. बेटे को दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाने और यूपीएससी की कोचिंग जॉइन करवाने के लिए उन्होंने अपनी जीपीएस मशीन बेच दी थी. ऋतिक सोलंकी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं. उनके बड़े भाई राहुल भी मप्र वन सेवा परीक्षा में पास होकर महाराष्ट्र की चंद्रपुर फॉरेस्ट अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं.

     

  • इंदौर स्टेशन: QR कोड से ऑटो रिक्शा ड्राइवर का डेटा, यात्रियों को मिलेगी भरोसे वाली सवारी

    इंदौर
     रेल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) नई पहल शुरू करने जा रही है, जिसका नाम है 'हमारी सवारी, भरोसे वाली'। पुलिस ने ऐसे ऑटो रिक्शा ड्राइवरों का डिजिटल डेटा बनाया है जो रेलवे स्टेशन से चलते हैं। ऑटो पर क्यूआर कोड भी लगाया जा रहा है, जिसे स्कैन करते ही उसकी संपूर्ण पहचान मोबाइल पर आ जाएगी।

    पुलिस अधीक्षक (रेल) पद्मविलोचन शुक्ल के अनुसार सवारियों की सुरक्षा और सुविधा में ऑटो ड्राइवरों का अहम रोल है। बाहर से आने वाले यात्री कई बार ड्राइवरों की शिकायत करते हैं पर उनके संबंध में जानकारी नहीं रहती। यह सब देखते हुए पुलिस ने रेलवे स्टेशन परिसर से संचालित होने वाले ऑटो ड्राइवरों का डिजिटल डेटा तैयार करवाया है। पुलिस ने ड्राइवरों का सत्यापन एवं पंजीकरण कर उनके नाम, मोबाइल नंबर, वाहन संख्या, फोटो और परिवार व रिश्तेदारों की जानकारी आदि का डेटाबेस तैयार कर लिया है।

    पुलिस रिकॉर्ड में पंजीकृत ऑटो रिक्शा पर क्यूआर कोड स्टीकर लगाया जाएगा, जिसे स्कैन करते ही ड्राइवर की पहचान मोबाइल पर मिल जाएगी। एसपी के अनुसार यात्री यह जान सकेगा कि उसका ड्राइवर कौन है और वह किस ऑटो रिक्शा में सफर कर रहा है। उसका सामान छूटने, विवाद होने, तय स्थान पर न छोड़ने पर पुलिस से मदद भी ले सकते हैं। एसपी ने बताया इस अभियान की शुरुआत 14 नवंबर से होगी। इससे चालकों को भी बेवजह के आरोपों से राहत मिलेगी।

    'पटरी की पाठशाला' में पढ़ेंगे भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चे

    जीआरपी पुलिस ने 'पटरी की पाठशाला' की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य रेल सुरक्षा, महिला सुरक्षा, साइबर जागरूकता, नैतिक शिक्षा एवं नशामुक्त जीवन के संदेश को आमजन तक पहुंचाना है। इससे स्थानीय बच्चों में नैतिक शिक्षा, अनुशासन और जिम्मेदारी का भाव विकसित होगा। 'पटरी की पाठशाला' अभियान में बच्चों के लिए रेल सुरक्षा कक्षाएं, कहानी, पोस्टर व खेल के माध्यम से शिक्षा देना, गुड टच-बैड टच की जानकारी देना शामिल किया है।

    रेलवे स्टेशन और उसके आसपास भिक्षावृत्ति, व्यावसायिक गतिविधियों में लगे व लावारिस घूमने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि वे देश के भविष्य निर्माण में सहभागी बन सकें। महिला एवं साइबर सुरक्षा सत्र में हेल्पलाइन नंबरों (139, 112, 1930) की जानकारी के साथ आत्मरक्षा एवं आत्मविश्वास पर भी चर्चा होगी।

  • मध्य प्रदेश बनेगा आस्था का केंद्र: सांची में थाईलैंड, जापान और श्रीलंका के श्रद्धालु लेंगे भाग

    रायसेन 
     अपने अनोखे बौद्ध स्तूपों के लिए विश्व प्रसिद्ध सांची में 29 और 30 नवंबर को दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है. इसकी तैयारियां जोरों पर हैं, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मेहमान और कलाकार शिरकत करेंगे. साल में एक बार होने वाले इस धार्मिक उत्सव में श्रीलंका, जापान, थाईलैंड और वियतनाम सहित कई देशों के बौद्ध अनुयायी शामिल होने के लिए आमंत्रित किए गए हैं.

    इस वर्ष, श्रीलंका के हाई कमिश्नर के साथ ही वहां की विशेष नृत्य मंडली भी सांची में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करेगी. विदेश भक्त अपने साथ पूजा के लिए विशेष सामग्रियां लेकर यहां पहुंचेंगे, जिससे महोत्सव की दिव्यता और बढ़ेगी.

    भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के अस्थि कलश के दर्शन

    इस महोत्सव की मुख्य वजह सांची स्तूप के पास स्थित चैत्यगिरि में सुरक्षित रखे भगवान बुद्ध के परम शिष्य सारिपुत्र और महामोदग्लायन के पवित्र अस्थि कलश हैं. बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है, क्योंकि वर्ष में एक बार, दो दिन के लिए, सूर्योदय से सूर्यास्त तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ इन कलशों को रखा जाता है. महोत्सव के आखिरी दिन (रविवार) को इन अस्थि कलशों को मुख्य स्तूप की परिक्रमा के लिए शोभा यात्रा के साथ निकाला जाता है.

    इन देशों के अनुयायियों को किया गया आमंत्रित

    महाबोधि सोसाइटी के स्वामी विमल तिस्से थेरो ने बताया, '' जापान, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम सहित कई देशों के मेहमानों को आमंत्रित किया जा चुका है. इस तरह से जब विश्व के कोने-कोने से बौद्ध अनुयाई यहां पर उपस्थित होंगे तो इस कार्यक्रम की भव्यता और बढ़ेगी सब लोग मिलकर इस महोत्सव को मनाएंगे.''

    सांची स्तूप का गौरवशाली इतिहास

    सांची की इस ऐतिहासिक धरोहर का निर्माण सम्राट अशोक महान ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में करवाया था. यह भारत के सबसे प्राचीन बौद्ध स्मारकों में से एक है. बाद में शुंग और सातवाहन शासकों ने इसका विस्तार किया और पहली शताब्दी ईसा पूर्व में यहां के चार भव्य तोरण द्वार (प्रवेश द्वार) बनाए गए, जिन पर बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं से जुड़ी विस्तृत नक्काशी है. सांची का यह महान स्तूप प्रेम, शांति, विश्वास और साहस का प्रतीक है और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल है.

    सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम

    बौद्ध धर्म के इस विशेष महत्व वाले आयोजन के लिए प्रशासन भी कमर कस रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश खरपुसे ने जानकारी देते हुए बताया की पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष पुलिस इंतजाम किए गए हैं, जिसमें महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी शामिल है और आसामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखना शामिल है।जिससे की पर्यटको को आसुविधा न हो

  • नवा रायपुर का बंगला M-01 बनेगा रणनीति हब, PM मोदी, अमित शाह और NSA अजित डोभाल करेंगे उच्चस्तरीय चर्चा

    रायपुर 

    छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 28 से 30 नवंबर तक डीजी कांफ्रेंस का आयोजन होगा, जिसमें  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, देशभर के डीजीपी और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख भी शामिल होंगे. कॉन्फ्रेंस में आतंकवाद, नक्सल, साइबर क्राइम और पुलिस सुधार पर मंथन होगा, जिसकी तैयारियों के लिए प्रशासनिक अमला जुट गया है.

    बंगला M-01 तीन दिनों के लिए मिनी PMO

    रायपुर में डीजी कॉन्फ्रेंस के दौरान नवा रायपुर का बंगला M-01 तीन दिनों के लिए मिनी PMO में तब्दील होगा. यह बंगला विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का बंगला है. बैठक में पीएम मोदी, अमित शाह और अजित डोभाल के अलावा 70 डीजी, पैरामिलिट्री चीफ समेत 500 अफसर जुटेंगे. इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं और NSG की तैनाती की जा रही है. इसके अलावा 400 गाड़ियां तैयार की गई है.

    बैठक में किस रणनीति पर होगी चर्चा?

    डीजी कॉन्फ्रेंस (DG Conference) के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मुख्य रूप से नक्सलवाद, आतंकवाद, साइबर क्राइम और पुलिस सुधार पर चर्चा करेंगे. नक्सलियों के खात्मे के लिए मार्च 2026 की डेडलाइन तय है, जिसमें अब सिर्फ पांच महीने का समय बचा है. ऐसे में यह बैठक नक्सलवाद के खात्मे को लेकर बेहद अहम मानी जा रही है.

    डीजी कॉन्फ्रेंस के दौरान देशभर के पुलिस महानिदेशकों और केंद्रीय बलों के प्रमुख अधिकारियों की मौजूदगी में नक्सलवाद खत्म करने पर चर्चा होगी और इसको लेकर रणनीति तय की जाएगी. इसके अलावा आधुनिक पुलिसिंग के तरीकों, तकनीक का उपयोग करके निगरानी (जैसे तकनीकी निगरानी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों और राज्यों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने (इंटेलिजेंस शेयरिंग) जैसे महत्वपूर्ण आंतरिक सुरक्षा के विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी और योजनाएं बनाई जाएंगी.

    आईआईएम भवन में होग कॉन्फ्रेस!

    डीजी कॉन्फ्रेंस सम्मेलन का आयोजन नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) भवन में होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के रात्रि विश्राम के लिए बंगला M-01 के चुनाव के पीछे खास वजह हो सकती है. इस बंगले से आईआईएम और नया विधानसभा भवन बेहद नजदीक हैं, जिससे आवागमन में सहूलियत होगी. 

  • महाकाल मंदिर: कॉरिडोर तक नया 710 मीटर मार्ग, दर्शन आसान, परियोजना जून 2027 तक पूरी

    उज्जैन 

     मध्यप्रदेश सरकार उज्जैन को नया रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब क्षिप्रा नदी के घाटों (Kshipra Ghat) पर होने वाली आरती को बनारस और हरिद्वार की गंगा आरती (Shipra is a tributary of Ganga) की तरह भव्य और आधुनिक रूप में आयोजित किया जाएगा। सरकार चाहती है कि आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ (2028) तक उज्जैन में ऐसी आरती शुरू हो जाए, जिसे देखने वाले श्रद्धालु भावविभोर हो उठें।

    इस दिशा में राज्य सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। इसका उद्देश्य ऐसी पेशेवर एजेंसियों का चयन करना है, जो टेक्निक, म्यूजिक, लाइट और परम्परा को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट को अंजाम दे सकें।
    तकनीक से बनेगी आरती आकर्षक

    उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि इस पहल का मकसद क्षिप्रा आरती (Kshipra River) को इतना भव्य और यादगार बनाना है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां का अनुभव जीवनभर याद रखें।

    महाकाल लोक जाने के लिए 710 मीटर लंबा और 22.18 मीटर चौड़ा नया रास्ता बन रहा है। 63 करोड़ की लागत से बनने वाला यह सुगम रास्ता जून 2027 तक तैयार हो जाएगा। रेलवे से भी सहमति मिल गई है। इससे अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को महाकाल लोक तक पहुंचना आसान होगा। अभी उन्हें पार्किंग से पुल पर चढ़ने के बाद 2100 मीटर लंबी दूरी तय कर महाकाल लोक पहुंचना पड़ रहा है।

    भीड़ नियंत्रण में रहेगी: इंदौर, देवास से आने वाले यात्री हरिफाटक के पास वाहन पार्क कर सीधे महाकाल लोक पहुंच सकेंगे। महाशिवरात्रि, नागपंचमी, नववर्ष पर भीड़ नियंत्रण में की जा सकेगी। 2. यातायात का दबाव कम होगा: पैदल यात्रियों के लिए अलग मार्ग बनने से हरिफाटक ब्रिज, महाकाल घाटी, नीलगंगा, इंदौर रोड, जयसिंहपुरा में यातायात का दबाव कम होगा।

    उन्होंने कहा, हमने ऐसी एजेंसियों से प्रस्ताव मांगे हैं, जो तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आरती को और आकर्षक बना सकें। इसका मकसद यह है कि जब श्रद्धालु घाट पर आएं तो उन्हें सिर्फ आरती नहीं, बल्कि भावनात्मक अनुभव हो। 
    गंगा आरती क्यों है प्रेरणा का स्रोत

    हरिद्वार और बनारस की महागंगा आरती में हर शाम सैकड़ों पुजारी, घंटों और दीपों के साथ गंगा आरती करते हैं। वाराणसी की दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती अपने आप में खास होती है। यहां दर्जनों पुजारी एक साथ समान वेशभूषा में दीप थाल लेकर मंत्रोच्चार करते हैं।

    हर पुजारी एक लय में जब आरती करते हैं तो भव्य नजारा होता है। शंखनाद, घंटों की गूंज और वेद मंत्रों की ध्वनि श्रद्धालुओं के मन में गहराई तक उतर जाती है।अब मध्यप्रदेश की डॉ.मोहन यादव सरकार चाहती है कि उज्जैन की क्षिप्रा आरती (shipra river in ujjain) भी इसी तरह का भव्य अनुभव दे। 

    तकनीक से सजेगी क्षिप्रा आरती

    एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट में कहा गया है कि आरती में परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम होना चाहिए। सरकार ने एजेंसियों से ऐसे सुझाव मांगे हैं।जिनमें AI आधारित प्रोजेक्शन मैपिंग, सिंक्न्रोनाइज्ड लाइटिंग, साउंड और विजुअल स्टोरीटेलिंग, होलोग्राम और AR/VR अनुभव और आध्यात्मिक संगीत संयोजन जैसी तकनीकें शामिल होंगी।

    इन तकनीकों की मदद से घाटों पर आरती का अनुभव केवल धार्मिक न रहकर दिव्य दृश्यात्मक आयोजन बन जाएगा। श्रद्धालु दीपों की रोशनी के साथ मां क्षिप्रा की कथा, उज्जैन के इतिहास और महाकाल की महिमा को लाइट एण्ड साउंड श्खो की मदद से अनुभव कर सकेंगे। 

    कई घाटों पर एक साथ आरती की तैयारी

    फिलहाल क्षिप्रा नदी की आरती केवल रामघाट तक सीमित है और ज्यादातर निजी समूहों द्वारा कराई जाती है।अब सरकार की योजना है कि कई घाटों को जोड़ा जाए और एक साथ सामूहिक आरती का आयोजन हो। इसका प्रारूप बनारस के मल्टी-घाट मॉडल जैसा होगा।

    जहां एक ही समय पर अलग-अलग घाटों पर आरती होती है, लेकिन उनकी ध्वनि और लय एक होती है।

  • इंदौर का पश्चिमी रिंग रोड प्रोजेक्ट पिछड़ा, जनवरी तक काम की संभावना कम

    इंदौर
     किसानों का विरोध और मुआवजा बांटने में देरी ने पश्चिमी रिंग रोड प्रोजेक्ट को सालभर पीछे कर दिया है। जनवरी 2025 में शुरू होने वाला काम नवंबर तक अटका हुआ है। अगले दो से तीन महीने तक भी सड़क निर्माण शुरू होने के आसार नहीं हैं, क्योंकि अभी तक महज 55 प्रतिशत किसानों को ही मुआवजे की राशि दी गई है। बावजूद इसके कई किसान नाराज हैं, क्योंकि इन्हें बाजार मूल्य की तुलना में पैसा कम मिला है। इस लेटलतीफी ने प्रोजेक्ट को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

    इंदौर वन मंडल की 40 और धार की आठ से 10 हेक्टेयर जमीन शामिल

    शासन ने सड़क को सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए बनाने की योजना तैयार की थी। 64 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। प्रोजेक्ट के लिए कुल 638 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है, जिसमें से लगभग 50 हेक्टेयर वनभूमि है। इसमें इंदौर वन मंडल की 40 हेक्टेयर और धार की आठ से 10 हेक्टेयर जमीन शामिल है। बाकी 580 हेक्टेयर भूमि में 472 निजी व 98 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। एनएचएआई 64 किमी लंबी पश्चिमी रिंग रोड को दो हिस्सों में बनाएगा। यह महू से हातोद और हातोद से क्षिप्रा के बीच बनाएंगे।

    डेढ़ साल पहले एजेंसी तय

    सड़क बनाने के लिए निर्माण एजेंसी डेढ़ साल पहले तय हो चुकी है। अहमदाबाद की कंपनी को ठेका मिला है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से एजेंसी को काम करने में दिक्कतें आ रही हैं। नियमानुसार प्रोजेक्ट में 80 प्रतिशत भूमि अधिग्रहित कर प्रशासन से क्लियरनेंस मिलने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। वैसे अभी तक एक हजार करोड़ में से 500 से 550 करोड़ का मुआवजा बांटा गया है। शेष किसानों को राशि दिए जाने में दो से तीन महीने लग सकते हैं।

    इन्हें देना है मुआवजा

        इंदौर जिले की तीन तहसील सांवेर, देपालपुर और हातोद के 26 गांवों से यह सड़क निकलेगी। यहां 998 किसानों को कुल 795 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाने हैं।
        धार जिले की पीथमपुर तहसील के किसानों को लगभग 200 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा।
        सांवेर तहसील के नौ गांवों के 512 किसानों को 473 करोड़ रुपये मिलेंगे।
        देपालपुर तहसील के पांच गांवों के 153 किसानों को 140 करोड़ रुपये का भुगतान होगा।
        हातोद तहसील के 12 गांवों के 333 किसानों को 182 करोड़ रुपये दिए जाने हैं।

    बांट रहे मुआवजे की राशि

        अगले साल यानी जनवरी से पश्चिमी रिंग रोड का काम शुरू किया जाएगा। इन दिनों किसानों को मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। नवंबर तक 55 फीसद लोगों को राशि बांटी गई है। अगले दो महीनों में प्रोजेक्ट के लिए शेष जमीन भी अधिग्रहित की जाएगी। वहीं वन विभाग की जमीन को लेकर पर्यावरण अनुमति आना बाकी है। – प्रवीण यादव, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई

     

  • भक्ति से बिजनेस तक: उज्जैन के युवाओं ने महाकाल के फूलों से रचा स्टार्टअप सफलता का मंत्र

    उज्जैन

    महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को अर्पित होने वाले फूलों से कमाई का आइडिया मध्य प्रदेश, कर्नाटक और बिहार के युवा छात्र एवं छात्राओं ने एकसाथ मिलकर ढूंढ निकाला. उसे स्टार्टअप के तौर पर शुरू कर छात्र लाखों की कमाई करने लगे हैं. छात्र एवं छात्राएं वेस्टेज फूलों को रीसायकल कर इको फ्रेंडली हार्ड प्रोडक्ट बना रहे हैं और मार्केट में बेच कर मोटी कमाई कर रहे हैं.

    खास बात यह है छात्रों के इस स्टार्टअप से कई कम्पनियों ने छात्रों को ऑफर देना भी शुरू कर दिए हैं. अभी छात्रों ने वेस्टेज फूलों से कटोरी, प्लेट्स, मोमेंटो सहित 16 तरह के अलग-अलग हार्ड प्रोडक्ट बनाएं हैं. ये सभी छात्र उज्जैन में रहकर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर रहे हैं. आइए इस रिपोर्ट में आपको छात्रों से भी मिलवाते हैं और उनके कामों को भी दिखाते हैं.

    कौन हैं ये पांच छात्र, जिन्होंने शुरू किया स्टार्टअप

    सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय पहुंचकर  छात्रों के बारे में पता किया तो स्टार्टअप टीम में खरगोन निवासी मृत्युंजय बड़ोले (उम्र 21 वर्ष) सब्जेक्ट बीएससी ऑनर्स बायो टेक्नोलॉजी तीसरा सेमेस्टर, दूसरी बालाघाट निवासी योजना राहंगडाले (उम्र 20 वर्ष ) जो बीएससी बॉटनी तीसरा सेमेस्टर की छात्रा हैं. तीसरे भभुआ बिहार निवासी यूगांक सिंह (उम्र 22 वर्ष) बीएससी ऑनर्स बायो टेक्नोलॉजी से चौथे सेमेस्टर के छात्र हैं. चौथे उज्जैन के तराना तहसील के निवासी तन्मय जैन (उम्र 27 वर्ष) बायो टेक्नोलॉजी से पीएचडी कर रहे हैं. पांचवी कोलकाता निवासी आहना चक्रवर्ती (उम्र 20 वर्ष) हैं जो बीएससी फोरेंसिक तीसरे सेमेस्टर की छात्रा हैं.

    फूलों को सुखाकर बनाते हैं खास प्रोडक्ट

     छात्र एवं छात्राओं से चर्चा की. जिसमें मृत्युंजय बड़ोले ने बताया, ''हमने अभी तक 16 तरह के प्रोडक्ट बनाये हैं, जिसमें कटोरी, प्लेट्स शील्ड्स (मोमेंटो), लोगो, राखी, टेंपल, कॉस्टर्स, श्री चरण व अन्य आइटम शामिल हैं, जिसकी क्वालिटी अपने आप में बेहद खास है. 13 साल तक की वारंटी हम देते हैं की इनका कुछ नहीं बिगड़ेगा. कोई भी प्रोडक्ट टूटने पर हम वापस ले लेते हैं यानी उसे भी हम रिसायकल कर देते हैं. बस ग्राहक को तय कीमत चुकानी होगी.''

    कैसे आया आईडिया?

    छात्रा योजना राहंगडाले ने कहा, ''हम जब उज्जैन आकर पढ़ाई कर रहे थे तब मंदिरों में दर्शन को भी गए तो वहां बड़ी मात्रा में फूलों को कचरा गाड़ी में जाते देखा, क्षिप्रा नदी दर्शन को गए तो वहां भी नदी में फूलों को डालते हुए व पड़ा हुआ देखा. तो विचार किया कि क्यों न भक्तों के भाव को सहेज कर रखा जाए. बस हम पांचों ने 2021 से रिसर्च करना शुरू कर दिया और आज रिजल्ट आपके सामने हैं.''

    स्टार्टअप को नाम दिया 'प्रयास भावनाओं को सहेजने का'

    छात्रों ने बताया हमने 2021 से रिसर्च किया और 2024 तक काम किया. 2024 में हमने हमारे प्रोडक्ट को एग्जीबिशन में लांच किया. स्टार्टअप को नाम दिया निर्मल निर्माण "प्रयास भावनाओं को सहेजने का", ये पूरा काम हमने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज सर के निर्देशन में किया. 22 दिसंबर को हमने प्रोडक्ट्स को YOUNG ENTREPRENEURSHIP FORUM में लॉन्च किया. पहले दिन से इन्क्वायरी मिलने लगी. ऑटोमोबाइल सेक्टर से गाड़ियों के डैशबोर्ड के लिए ऑफर मिले, फंडिंग देने के लिए व्यपारियों ने हमसे संपर्क किया. गुजरात की एक कम्पनी से हमारा टायअप भी हो गया है. हम साथ में काम कर रहे हैं अब.''

    स्टार्टअप के लिए मिल चुके हैं अवार्ड

    स्टार्टअप के लिए टीम को 22 दिसंबर 2024 को यंग एंटरप्रेन्योरशिप फोरम द्वारा डिस्ट्रिक्ट लेवल पर फर्स्ट प्राइज दिया गया था. जिसमें उन्हें 51000 रुपए का प्राइज मिला था. वहीं 12 जनवरी 2025 में भोपाल में पीपुल्स यूनिवर्सिटी में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी ने स्टेट लेवल पर फर्स्ट प्राइज दिया था. इसमें 11000 रुपए की राशि दी गई है.

    शुरुआत 15 से 20% प्रॉफिट के साथ की

    छात्राओं ने बताया, ''हमने 2024 से जब प्रोडक्ट बेचना शुरू किए तो अभी शुरुआत में ही साल भर में 2 लाख रेवेन्यू जेनेरेट किया है. 60 रुपए से 2200 रुपए तक के प्रोडक्ट हमने बनाए हैं और अभी 15 से 20% ही फायदा ले रहे हैं. हमारा ध्यान अभी खुद का प्रोडक्शन और प्रोडक्ट को मार्केट में ऑनलाइन बेचने पर है. अभी जो रेवेन्यू हमें मिला ये उज्जैन लोकल से ही मिला है. छात्रों ने बताया रेस्पॉन्स अच्छा मिल रहा है, देश दुनिया के मंदिरों से संपर्क कर आगे बढ़ेंगे.''

    कैसे और कहां बना रहे ये प्रोडक्ट जानिए

    छात्र छात्राओं ने प्रोडक्ट की पूरी प्रोसेस बताई. उन्होंने कहा, ''शुरुआत हमने 1000 स्क्वायर फिट एरिया से की है. जिला प्रशासन के सहयोग से फूल मंदिरों से लेना शुरू किए. अभी सिर्फ महाकाल मंदिर से सप्ताह भर में 100 kg फूल लेते हैं, जिसमें सिर्फ ट्रांसपोर्ट खर्च आ रहा है. फूल लाकर 2 से 3 दिन के लिए सुखने को एक वेंटिलेशन रूम में रखते हैं पंखे या खुली हवा में. उसमें से प्लास्टिक और प्रसाद हटाते हैं, मटेरियल हटा कर फूल को धोते हैं. फिर धूप में सूखने के लिए 3 से 7 दिन तक रखते हैं. उसका पाउडर बनाते हैं, बोरे में कूट कर छानते हैं.''

    100 kg फूल में 5kg पाउडर निकलता है. फिर बाइनडर बनाते हैं (नीम बबूल के गोंद को तय टेम्परेचर में गर्म करके बाइनडर बनाते हैं). पाउडर Mix करके साँचा जो कि सिलिकॉन रबर का होता है उसमें डालते हैं, 12 मिनट में प्रोडक्ट बन जाता है. फिर साबुन के पानी में धुलने के लिए रखते हैं, फिनिशिंग और कलर करके तैयार करते हैं. छात्र छात्राओं का दावा है अभी तो जितने भी लोग इस कॉन्सेप्ट पर काम कर रहे हैं वो सिर्फ हार्ड मटेरियल को डीग्रेड (जैसे अगरबत्ती बनाना व अन्य) कर रहे हैं और हम हार्ड प्रोडक्ट बनाकर प्रिजर्वेशन करने का काम कर रहे हैं.

  • मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों का बड़ा प्रोजेक्ट: 8 नगर निगमों को मिलेगी 972 बसें

    भोपाल 

     मध्यप्रदेश के शहरी परिवहन को और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के आठ नगर निगमों को कुल 972 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की मंजूरी प्रदान की है। इन बसों के संचालन से डीजल और पेट्रोल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।  केंद्र से स्वीकृत ई-बसें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, देवास और सतना नगर निगमों को मिलेंगी।

    इनमें भोपाल को 195, इंदौर को 270, ग्वालियर को 100, जबलपुर को 200, उज्जैन को 100, सागर को 32, देवास को 55 और सतना को 20 बसें आवंटित की गई हैं। राज्य सरकार ने सभी नगर निगमों को बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से संबंधित आवश्यक ढांचा निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक नगर निगम में चार्जिंग पॉइंट और परिचालन सुविधाओं का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

    केंद्र और राज्य दोनों खर्च वहन करेंगे 
    ई-बस परियोजना पर होने वाला खर्च केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से वहन करेंगे। बुनियादी ढांचा निर्माण के लिए केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत राशि प्रदान करेगी। वहीं चार्जिंग पॉइंट्स के निर्माण पर केंद्र सरकार 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता देगी। बसों का संचालन जल्द शुरू करने की तैयारी की जा रही है। यह सेवा आम नागरिकों को सस्ती, सुरक्षित और ईको फ्रेंडली परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगी। 

  • स्टेच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया में मनाया जाएगा मध्यप्रदेश दिवस, मुख्यमंत्री डॉ. यादव होंगे शामिल

    भारत पर्व 2025 में मध्यप्रदेश की संस्कृति, पर्यटन और स्वाद का होगा अद्भुत संगम

    भोपाल

    भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर स्टेच्यू ऑफ यूनिटी केवड़िया गुजरात में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक "भारत पर्व" का उत्साहपूर्वक आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विशिष्ट आतिथ्य में भारत पर्व 2025 के अंतर्गत मंगलवार, 11 नवंबर को गुजरात के केवड़िया में मध्यप्रदेश दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के ध्येय को दृष्टिगत रखते हुए देश की विविधता में एकता को प्रदर्शित करना है।

    संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि भारत पर्व के अंतर्गत मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा लगभग 25 वर्गमीटर क्षेत्रफल में एक आकर्षक थीम पेवेलियन तैयार किया गया है, जिसमें राज्य की पर्यटन, संस्कृति और हस्तशिल्प विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया जा रहा है। पेवेलियन में सांची, खजुराहो, भीमबेटका, मांडू, ओरछा, उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के साथ-साथ बांधवगढ़, कान्हा और पेंच जैसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों की झलक प्रस्तुत की जा रही है। साथ ही, राज्य के स्थानीय हस्तशिल्प और हस्तकला जैसे चंदेरी और महेश्वरी वस्त्र, बाघ प्रिंट, डोकरा कला, मिट्टी के बर्तन और गोंड पेंटिंग को भी प्रदर्शित किया जा रहा है।

    अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि भारत पर्व हमारे देश की सांस्कृतिक एकता और विविधता का सुंदर उत्सव है। मध्यप्रदेश ‘भारत का हृदय’ है, और यहां की हर परंपरा, हर स्वाद, हर कला रूप हमारे देश की आत्मा को दर्शाता है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के पर्यटन, हस्तशिल्प, व्यंजनों और संस्कृति की प्रस्तुति के माध्यम से हम देशभर के आगंतुकों को अतुलनीय मध्यप्रदेश की आत्मा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी कोशिश है कि आगंतुक न केवल मध्यप्रदेश के स्वाद और संगीत का आनंद लें, बल्कि उसकी आत्मिक ऊर्जा और जीवंतता का भी अनुभव करें।

    स्टूडियो किचन में मध्यप्रदेश का स्वाद

    मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीएसटीडीसी) द्वारा 11 नवंबर को स्टूडियो किचन की विशेष प्रस्तुति दी जा रही है, जिसमें प्रदेश के पारंपरिक और प्रादेशिक व्यंजन लाइव तैयार कर परोसे जाएंगे। यह प्रस्तुति फ्लेवर्स फ्रॉम द हार्ट ऑफ इंडिया की थीम पर आधारित है। बुंदेलखंड क्षेत्र का खट्टा–तीखा छाछ पर आधारित पेय सन्नाटा, डिंडोरी क्षेत्र का पारंपरिक सूप कंगनी दाल का शोरबा, मालवा का प्रसिद्ध स्नैक भुट्टे की कीस, चना बेसन से बना स्वादिष्ट नमकीन व्यंजन चंबल का थोपा, सीधी क्षेत्र का पारंपरिक नाश्ता बेड़ई धुमना आलू, बघेलखंड क्षेत्र का लोकप्रिय व्यंजन मटर का निमोना और सादी पूरी, शहडोल क्षेत्र की प्रसिद्ध मिठाई कुटकी की खीर आगंतुकों को परोसे जाएंगे। इन व्यंजनों के माध्यम से प्रदेश के विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक स्वादों को प्रदर्शित किया जा रहा है।

    सांस्कृतिक प्रस्तुति – “अमृतस्य मध्यप्रदेश”

    संस्कृति विभाग की ओर से प्रसिद्ध नृत्य संयोजिका मैत्रीय पहाड़ी एवं समूह द्वारा “अमृतस्य मध्य प्रदेश” शीर्षक से एक भव्य नृत्य प्रस्तुति दी जाएगी। यह प्रस्तुति दर्शकों को मध्यप्रदेश की प्राचीन सभ्यता, भक्ति, प्रेम और प्रकृति की लय से जोड़ती है। इस नृत्यगाथा की शुरुआत भीमबेटका की गुफाओं से होती है, जहां मानव सभ्यता की प्रथम झलक दिखाई देती है। आगे खजुराहो के मंदिरों की मूर्तिकला, सांची के स्तूपों की शांति, और चित्रकूट की पवित्र भूमि के भावनात्मक दृश्यों को नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। उज्जैन और ओंकारेश्वर के ज्योतिर्लिंगों की दिव्यता, ग्वालियर किले की ऐतिहासिकता, मांडू की प्रेम गाथा और ओरछा के मंदिरों की भव्यता मंच पर जीवंत होती है। प्रकृति के साथ मनुष्य के संबंध को बांधवगढ़, कान्हा और पेंच के वनों तथा जबलपुर की संगमरमर चट्टानों के दृश्यों से दर्शाया गया है। पारंपरिक महेश्वरी, चंदेरी और बाग प्रिंट वस्त्रों में सजे कलाकार मंच पर राज्य की शिल्प विरासत का गौरव गान करते हैं। नर्मदा आरती के दृश्य के साथ यह यात्रा अपने आध्यात्मिक उत्कर्ष पर पहुंचती है।

  • प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना एक महत्वाकांक्षी योजना, सतत निगरानी की आवश्यकता : मंत्री कुशवाह

    उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियों की समीक्षा

    भोपाल

    उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना एक महत्वाकांक्षी योजना है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित किए जा सकते है। मंत्री श्री कुशवाह ने विभाग की 2 वर्षो की उपलब्धियों की समीक्षा के दौरान पीएमएफएमई योजना की सतत निगरानी ने निर्देश अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 तक योजना की शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति की जाए।

    मंत्री कुशवाह ने कहा कि उद्यानिकी गतिविधियाँ ग्रामीण अंचल से शहरों तक संचालित की जाती है। प्रदेश में उद्यानिकी उत्पादों को लगातार प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिये कि बड़े शहरों के आसपास सब्जी के साथ साथ फूल उत्पादन के क्लस्टर भी विकसित किये जाये। मंत्री कुशवाह कहा कि शहरी क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और मेले भी आयोजित किये जाने चाहिए। उन्होंने एमपी एग्रो तथा उद्यानिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को वितरित किये जाने वाले उपकरण व अन्य सामग्री का भौतिक सत्यापन कराये जाने के निर्देश भी दिये।

    आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण अरविन्द दुबे ने बताया कि प्रदेश में गत 2 वर्षो में उद्यानिकी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज कराई है। इन 2 वर्षो में उद्यानिकी फसलों का रकबा में 2 लाख 43 हैक्टेयर तथा उत्पादन में लगभग 36 लाख मैट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई है। संरक्षित खेती के तहत 1573 हैक्टेयर क्षेत्र का विस्तार किया गया है। आयुक्त दुबे ने बताया कि प्रदेश में उद्यानिकी विकास के लिये 3 सेक्टर आफ एक्सीलेंस मुरैना में आलू, छिंदवाड़ा में नीबूवार्गीय तथा हरदा में आम एवं सब्जी के विकसित किये जा रहे है। उन्होंने बताया कि पीएमएफएमई (PMFME) योजना में चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 3 हजार 113 सूक्ष्म उद्यमियों को 108 करोड़ का अनुदान प्रदान किया जा चुका है। योजना की नियमित समीक्षा की जा रही है। एमपी एग्रो ने समीक्षा के दौरान प्रबंध संचालक श्री दुबे ने बताया कि गत तीन वर्षों में एमपी एग्रो का व्यापार 47 करोड़ से बढ़कर 386 करोड़ हो गया है। इसके और बेहतर करने के प्रयास किये जा रहे है। बैठक में विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

  • भोपाल में 21 वर्षीय मॉडल की संदिग्ध मौत का मामला, प्रेमी से पुलिस की पूछताछ जारी

    भोपाल

    राजधानी भोपाल के भैंसाखेड़ी क्षेत्र में सोमवार सुबह 21 वर्षीय मॉडल की मौत होने का मामला सामने आया है। युवती को उसके दोस्त ने अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक मृतका की पहचान खुशबू अहिरवार के रूप में हुई है। वह पिछले कुछ वर्षों से भोपाल में मॉडलिंग कर रही थी।

    बैरागढ़ क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त आदित्य राज सिंह ने बताया कि खुशबू को उसका दोस्त कासिम और एक बस कंडक्टर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। जानकारी के अनुसार, खुशबू बीए फर्स्ट इयर के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। वह तीन साल से भोपल में रह रही थी। उसके प्राइवेट पार्ट और बॉडी पर चोटों के निशान मिले हैं। परिजनों ने लव जिहाद और हत्या का आरोप लगाया है।

    पुलिस अधिकारी ने बताया कि कासिम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह मामला आत्महत्या, हादसा या कुछ और है। जानकारी सामने आई कि मॉडल गर्भवती थी। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में गर्भवती और उसके कॉम्प्लिकेशन की बात कही जा रही है। फूल पीएम रिपोर्ट मंगलवार को आएगी। जिसके बाद पूरी तरह से मौत का कारण साफ होने की बात कही जा रही है।