• मुख्यमंत्रीडॉ. यादव ने विश्व पर्यटन दिवस पर दी बधाई

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'विश्व पर्यटन दिवस' की समस्त प्रदेशवासियों और पर्यटन प्रेमियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत, जीवंत लोक संस्कृति, कला और ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध मध्यप्रदेश, वास्तव में भारत का हृदयप्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  शिक्षा, शौर्य और संस्कार की इस अतुल्य धरा, 'नदियों के मायके' में विश्व भर के पर्यटन प्रेमियों का हार्दिक अभिनंदन किया है। 

  • मुख्यमंत्री ने सेवा पखवाड़ा अंतर्गत सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम को किया संबोधित

    सीट बेल्ट लगाए और तेज रफ्तार से वाहन न चलाएं
    यातायात नियमों का पालन कर बनें जिम्मेदार नागरिक
    सड़क दुर्घटनाओं को रोकने आधुनिक संसाधन के साथ प्रदेश में चल रहा है अभियान
    सड़क दुर्घटना में घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने शुरू की गई मानवीय संवेदनाओं की राहवीर योजना
    युवाओं को वितरित किये 2100 नि:शुल्क हेलमेट
    दो पहिया वाहन जागरूकता रैली को दिखाई हरी झंडी

    भोपाल 
    जीवन का सुरक्षा कवच है हेलमेट

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हेलमेट न पहनने की छोटी सी लापरवाही का नुकसान पूरा परिवार भुगतता है। आंकड़े बताते हैं कि देश में अप्राकृतिक मौतों का सबसे बड़ा कारण सड़क दुर्घटनाएं हैं। इसमें भी अधिकांश मौतें लापरवाही या तेज गति से वाहन चलाने, हेलमेट न पहनने या सीट बेल्ट नहीं लगाने से होती हैं। जिम्मेदार नागरिक होने के साथ परिवार के महत्व और दायित्व को समझते हुए अपनी स्वयं की सुरक्षा के लिए सभी वाहन चालकों का सचेत रहना जरूरी है। दोपहिया वाहन चालक हेलमेट अवश्य पहने, इस आशय का प्रण हमें लेना होगा। हेलमेट हमारे जीवन का सुरक्षा कवच है, यह सड़क हादसे में आपकी जान बचा सकता है। शारदीय नवरात्र के दिनों में जीवन रक्षा के प्रति जागरूकता के लिए आरंभ की गई सड़क सुरक्षा जागरूकता सप्ताह की पहल अनुकरणीय है। प्रदेशवासी हेलमेट पहने और सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियों का पालन करें, सभी से यही अपेक्षा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए शनिवार को सेवा पखवाड़ा अंतर्गत अटल पथ पर आयोजित नि:शुल्क हेलमेट वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और दो पहिया वाहन रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में युवाओं को 2100 हेलमेट वितरित किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतीक स्वरूप पांच दो पहिया वाहन चालकों मनोज निगम, संदीप बिसेन, सुमित प्रधान, एनसीसी कैडेट सुश्री सान्या सिद्दीकी और अंजली सिंह को हेलमेट पहनाकर जीवन का संदेश दिया।

    अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना युवाओं का है दायित्व
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए सड़क सुरक्षा सप्ताह मना रही है। आज 2100 युवाओं को हेलमेट वितरित किए जा रहे हैं। भारत विश्व का सबसे युवा देश है, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी युवा शक्ति ने विश्व के सम्मुख कई क्षेत्रों में विशेष पहचान बनाई है। अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना भी युवाओं का दायित्व है। यह आवश्यक है कि सड़कों पर तेज गति से वाहन न चलाएं और यातायात नियमों का पालन करें, यही एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य भी है।

    राहवीर योजना में 25 हजार रुपए के प्रोत्साहन की व्यवस्था
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष पहल की गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेस-वे पर पेट्रोलिंग दस्ते, चेकपोस्ट, सैंसर चेकपोस्ट के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। चालान बनाने के लिए डिजिटल चालान, स्पीडगन, लाइव ट्रेफिक मॉनीटरिंग, फास्टटैग जैसे संसाधनों से भविष्य में होने वाली घटनाओं को रोकने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। दुर्घटना की स्थिति में तत्परतापूर्वक आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गई है। मानवीय संवेदनाओं को दृष्टिगत रखते हुए सड़क हादसे के किसी घायल को अस्पताल पहुंचाने पर राज्य सरकार उस जिम्मेदार नागरिक को राहवीर योजना के अंतर्गत 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है। साथ ही प्रदेश में सुरक्षित यात्रा और यातायात नियमों के पालन से संबंधित विशेष अभियान संचालित किए गए हैं। राज्य सरकार प्रदेश के हर नागरिक की बेहतरी के लिए प्रयासरत है, इसी के दृष्टिगत प्रदेश में सुशासन पर केन्द्रित सेवा पखवाड़ा मनाया जा रहा है।

    37 चौराहों को लेफ्ट टर्न फ्री करने का कार्य जारी : पुलिस आयुक्त श्री मिश्र
    भोपाल पुलिस आयुक्त श्री हरिनायणचारी मिश्र ने कहा कि भोपाल में ट्रैफिक को सुचारू बनाने के लिए शहर के 37 चौराहों को लेफ्ट टर्न फ्री करने का कार्य हो रहा है। नगर निगम भोपाल के सहयोग से नगर के चौराहों को अतिक्रमण मुक्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की भावना के अनुरूप आरंभ किया गया सड़क सुरक्षा जागरूकता सप्ताह का संदेश, प्रदेश के सभी नगरों और ग्रामों तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि देश में वर्ष 2024 में 1 लाख 80 लोगों की सड़क हादसे में जान गई है और 3 लाख लोग सड़क दुर्घटना में घायल हुए है। इससे सड़क दुर्घटना में होने वाली घटनाओं के प्रति गंभीरता बरती जाना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से आहवान किया कि वे हेलमेट पहने, चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट अवश्य लगाए और वाहन तेज गति से न चलाए।

    त्वरित सहायता के लिए डायल-112
    प्रदेशवासियों की सुरक्षा और उन्हें त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने 'डायल 112' वाहन सेवाएं शुरू की गई हैं। इस सेवा के अंतर्गत हाल ही में आधुनिक तकनीक से लैस 1200 फास्ट रिस्पांस व्हीकल पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं। इन वाहनों का उपयोग जरूरतमंदों तक तत्काल सेवा उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, विधायक श्री भगवानदास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी सहित जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी सहित बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

  • अशासकीय विद्यालयों की मान्यता नवीनीकरण की तिथि बढ़ी

    भोपाल
    प्रदेश में शिक्षण सत्र 2025-26 में अशासकीय विद्यालयों के मान्यता नवीनीकरण की तिथि में वृद्धि की गई है। अब अशासकीय विद्यालय मान्यता नवीनीकरण के लिये विशेष विलंब शुल्क 10 हजार रूपये की राशि सहित आवेदन कर सकेंगे। मान्यता नवीनीकरण का पोर्टल 29 सितम्बर से प्रारंभ किया जा रहा है। इसकी अंतिम तिथि 10 अक्टूबर निर्धारित की गई है। उक्त जानकारी स्कूल शिक्षा के अंतर्गत संचालित राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा दी गई है।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- गरीब कल्याण और प्रदेश के चहुँमुखी विकास के लिये हो रहे हैं योजनाबद्ध तरीके से कार्य

    किसानों के लिये शुरू की भावांतर योजना
    राज्य सरकार के पास किसानों की बेहतरी के लिये राशि की कोई कमी नहीं
    विदिशा जिले के कुरवाई में दी 258 करोड़ के विकास कार्यों की सौगातें
    कुरवाई में आयोजित कार्यक्रम एवं रोड-शो में हुए शामिल

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गरीब कल्याण के साथ चहुँमुखी विकास के लिये राज्य सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। प्रदेशवासियों का जीवन बेहतर बनाने और किसानों की बेहतरी के लिये राशि की कमी नहीं होने दी जायेगी। आज बदलते दौर में भारत और भारत की ताकत को दुनिया देख रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास के हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विदिशा जिले के कुरवाई में शनिवार आयोजित हिनौता सिंचाई परियोजना अंतर्गत जाजपोन पुनर्वास कॉलोनी एवं विभिन्न निर्माण कार्यों के लोकार्पण- शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कुरवाई एवं विदिशा जिले के विकास के लिए 258 करोड रुपए की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने 92 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत के 46 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं 165 करोड रुपए की लागत के 34 कार्यों का लोकार्पण किया। इसमें 7 करोड़ 36 लाख रुपए की महत्वपूर्ण हिनौता बांध परियोजना भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर प्रदर्शित केन-बेतवा लिंक परियोजना के मॉडल का अवलोकन भी किया।

    किसानों के लिए जो कहते हैं वह करके दिखाते हैं
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से चर्चा कर प्रदेश में भावांतर योजना लागू कर दी गई है। इस साल सोयाबीन की फसल की बिक्री पर 5328 रुपए प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी। किसानों को अंतर की राशि सरकार देगी, जिसका भुगतान उनके बैंक खातों में 15 दिन के अंदर कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विदिशा जिले में खराब हुई किसानों की फसलों का सर्वे कराया जाएगा। किसानों को राहत राशि, बीमा आदि का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि हम किसानों के लिए जो कहते हैं वह करके दिखाते हैं। किसानों को सिंचाई के लिए कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। केन- बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से सिंचाई और उद्योगों को पानी मिलेगा।

    भाई-दूज पर बहनों को मिलेगा विशेष उपहार
    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि राज्य सरकार लाड़ली बहना योजना में दीपावली के बाद भाई दूज पर लाड़ली बहनों को 1500 रुपए की राशि देगी। राज्य सरकार बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए भी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। बच्चों को स्कूटी, नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, साईकिल, छात्रवृत्ति सहित छात्रावास की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय भी अच्छे बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा से दोस्ती निभाकर गरीब -अमीर की मित्रता की शिक्षा दी थी। भगवान श्रीकृष्ण की जहां लीलाएं हुई उन्हें तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    स्वदेशी को दें प्रोत्साहन
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने हमें स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग करने का मंत्र दिया है, जिसे प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जीएसटी कम करने से कई वस्तुएं सस्ती हुई हैं। प्रदेश में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है। किसी घायल की जान बचाने के लिए सरकार ने राहवीर योजना में 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया है। गंभीर रोगियों के उच्च स्तरीय उपचार के लिए प्रदेश में एयरलिफ्ट की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।

    प्रबुद्धजन से संवाद और हितलाभ वितरण
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय प्रबुद्धजनों से संवाद भी किया। संवाद के दौरान उन्होंने ग्राम विकास से संबंधित विषयों पर सुझाव भी लिये। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, कृषक कल्याण योजना और महिला एवं बाल विकास की योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ, मार्गदर्शिका का विमोचन और हितग्राहियों को नियुक्ति-पत्र वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित एवं कन्या पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनी का विभिन्न स्टालों पर जाकर अवलोकन किया। कुरवाई प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव रोड-शो में भी शामिल हुए और नागरिकों का पुष्प वर्षा कर अभिवादन किया। स्थानीय नागरिकों ने भी पूरे उत्साह के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

    कार्यक्रम में विदिशा जिले के प्रभारी मंत्री श्री लखन सिंह पटेल, सांसद श्रीमती डॉ. लता वानखेड़े, विधायक गण श्री हरि सिंह सप्रे, श्री सूर्य प्रकाश मीणा, श्री हरि सिंह रघुवंशी, श्री उमाकांत शर्मा, श्री मुकेश टंडन सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन मौजूद थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएं
        नगर परिषद कुरवाई के विकास कार्यों के लिए 2 करोड़ की राशि दी जाएगी।
        पठारी में महाविद्यालय खोला जाएगा।
        कुरवाई में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन कर 50 बिस्तर का बनाया जाएगा।
        बीना रिफाइनरी के सहायक उत्पादों के लिए औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जाएगा।
        कुरवाई, लटेरी और नटेरन में 50-50 बिस्तर के नए छात्रावास खोले जाएंगे।
        कुरवाई और विदिशा में 10 करोड़ की लागत से जनपद पंचायत भवन बनाए जाएंगे।
        सिरोंज एवं अन्य स्थानों पर 6 करोड़ की लागत से हाई स्कूल भवन बनाए जाएंगे।
        लटेरी और ग्यारसपुर में 87 करोड रुपए की लागत से सांदीपनि स्कूल एवं क्रिटिकल केयर अस्पताल खोले जाएंगे।

     

  • स्वामी रामभद्राचार्य पर भी टिप्पणी, अब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद कानूनी मुश्किल में

    जबलपुर
    मध्यप्रदेश की जबलपुर जिला अदालत ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को तलब करते हुए 12 नवंबर को न्यायालय में पेश होने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति और जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ अभद्र और भ्रामक टिप्पणी करने के मामले में आया है।

    जानकारी के अनुसार, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “गौ हत्यारा” बताया था। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति के आदेशों पर सवाल खड़े किए थे और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बारे में भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप भी उन पर लगाया गया है। इस मामले में रिटायर्ड कर्मचारी नेता रामप्रकाश अवस्थी ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि शंकराचार्य ने न केवल प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पर अभद्र टिप्पणी की, बल्कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ भी गलत जानकारी फैलाई। अदालत ने इस मामले में धारा 256, 399, 302 और आईटी एक्ट 66A व 71 के तहत सुनवाई करते हुए समन जारी किया है। अब 12 नवंबर को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अदालत में हाजिर होना होगा।

     

  • शहरी विकास को बढ़ावा: नगरीय निकायों में आदर्श सुविधा केंद्र स्थापित होंगे, केंद्र ने 50 करोड़ की मंजूरी दी

    पहले चरण में सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं में शुरू होगी सुविधा

    सभी सेवाओं के लिए एकीकृत केन्द्र की तरह कार्य करेगा आदर्श सुविधा केंद्र, नागरिकों को होगी सहूलियत

    रायपुर.

    उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव की विशेष पहल पर केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्य के नगरीय निकायों में आदर्श सुविधा केंद्र खोलने के लिए 50 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। पहले चरण में सभी 14 नगर निगमों और सभी 55 नगर पालिकाओं में ये केंद्र प्रारंभ किए जाएंगे। ये सुविधा केंद्र नागरिकों को विभिन्न तरह के प्रमाण पत्र और लाइसेंस प्राप्त करने तथा पंजीयन व शिकायत निवारण जैसी सेवाओं के लिए एकीकृत केंद्र की तरह काम करेंगे। भारत सरकार ने नगरीय निकायों से जुड़ी सभी तरह की सेवाओं पर आधारित आदर्श सुविधा केन्द्र खोलेने के लिए म्यूनिसिपल शेयर्ड सर्विसेस सेंटर (Municipal Shared Services Centre) के अंतर्गत सिटीजन एक्सपिरियंस सेंटर (Citizen Experience Centre) के लिए यह राशि मंजूर की है।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नगरीय निकायों में आदर्श सुविधा केंद्र स्थापित किए जाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर मंजूरी देने के लिए केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह पहल हमारी सुशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत हम प्रदेश के नागरिकों को पारदर्शी, समयबद्ध और सुगम सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध हैं। छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक को बेहतर सुविधाएँ और जीवन स्तर प्राप्त हो, यह हमारी सरकार का लक्ष्य है। आदर्श सुविधा केंद्र इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो नगरीय प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

    उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुसार मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सुशासन की सरकार नगरीय निकायों के नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सुनियोजित कार्ययोजना बनाकर कार्य कर रही है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के माध्यम से केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा प्रदेश में सिटीजन एक्सपिरियंस सेंटर स्थापित करने के लिए म्यूनिसिपल शेयर्ड सर्विसेस सेंटर के अंतर्गत प्रस्ताव प्रेषित किया गया था। भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के इस प्रस्ताव को स्वीकृति एवं अनुशंसा प्रदान करते हुए इसके लिए 50 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। ये सिटीजन एक्सपीरियंस सेंटर नगरीय निकायों से संबंधित सेवाओं (म्यूनिसिपल सर्विसेस) के लिए वन-स्टॉप हब के रूप में काम करेंगे।  साव ने प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करने के लिए केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री  मनोहर लाल को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए प्रदेश के नागरिकों को बधाई दी है।
            
    उप मुख्यमंत्री  साव ने बताया कि आदर्श सुविधा केंद्रों (Citizen Experience Centers) के माध्यम से ‘‘वन स्टेट – वन पोर्टल‘‘ सिंगल प्लेटफार्म की तर्ज पर नागरिकों को जन्म, मृत्यु, विवाह जैसे आवश्यक प्रमाण पत्र, व्यापार, वेंडिंग, विज्ञापन के लिए लाइसेंस सेवाएं, संपत्ति कर, जल/सीवरेज, ठोस अपशिष्ट सेवाएँ, नगर निगम संपत्ति बुकिंग के लिए  पंजीकरण, शिकायत निवारण की सुविधा तथा डिजिटल समावेशन सेवाओं का लाभ सुलभ और समयबद्ध रूप से प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि ये केन्द्र नागरिक सेवाओं को सरल और मानकीकृत करने के साथ ही प्रशासनिक बाधाओं को भी दूर करेगी, जिससे लोगों और नगरीय निकायों के अधिकारियों के मध्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इसके साथ ही यह पहल पूरे राज्य में समावेशिता को बढ़ावा देगी तथा इज ऑफ लिविंग (Ease of Living) में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित करेगी।

    क्या है आदर्श सुविधा केन्द्र

    आदर्श सुविधा केन्द्र नगरीय निकायों में जनसुविधाओं से संबंधित समस्त सेवाओं के लिए एकीकृत केन्द्र की तरह कार्य करेगी। इस केन्द्र के माध्यम से नगरीय निकायों में नागरिकों को आवश्यक दस्तावेज व सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही प्रदेश में संचालित अन्य नागरिक सुविधा पोर्टल जैसे निदान-1100, मोर संगवारी, संपत्ति कर तथा नगरीय प्रशासन से संबंधित अन्य सेवाओं व सुविधाओं को भी आदर्श सुविधा केन्द्र के साथ जोड़ा जाएगा।

    कैसे मिलेगी नागरिकों को सुविधाएं

    आदर्श सुविधा केन्द्र के माध्यम से सेवाएं प्राप्त करने के लिए नागरिकों को अपनी इच्छित सेवाओं से संबंधित आवेदन सुविधा केन्द्र में जाकर दर्ज/जमा करानी होगी। नागरिकों से प्राप्त आवेदन की प्रकृति एवं गुण-दोष के आधार पर नगरीय निकाय द्वारा आदर्श सुविधा केन्द्र के माध्यम से निराकरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन प्रणाली से जुड़ी होगी और इसकी मॉनिटरिंग राज्य शहरी विकास अभिकरण में स्थापित राज्य स्तरीय कमाण्ड एंड कण्ट्रोल सेंटर के माध्यम से की जाएगी।

     

  • बुद्धि पर अंकुश? 10 साल के बच्चे के 9वीं में दाख़िले को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

    जबलपुर
    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 10 साल के एक बच्चे को 9वीं कक्षा में दाखिला देने से इनकार करने पर सीबीएसई की कड़ी आलोचना की। कोर्ट की पीठ ने सीबीएसई से कहा कि आपकी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

    लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रतिभाशाली बच्चों के लिए नीति पर केंद्र सरकार का रुख पूछा है। कोर्ट ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ सीबीएसई द्वारा दायर अपील पर सुनवाई की। इसमें 10 साल के लड़के को 9वीं कक्षा में अस्थायी प्रवेश देने का निर्देश दिया गया था।

    बच्चे के पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दावा किया था कि उनके प्रतिभाशाली बेटे ने कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई पूरी कर ली है, लेकिन सीबीएसई नियमों के तहत उम्र संबंधी प्रतिबंधों के कारण उसे कक्षा 9 में प्रवेश नहीं दिया गया। एकल पीठ ने अस्थायी प्रवेश की अनुमति तो दे दी, लेकिन सीबीएसई ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का हवाला देते हुए इस आदेश को चुनौती दी। एनईपी 9वीं कक्षा में 10 साल के बच्चे के प्रवेश की अनुमति नहीं देता है।

    सीबीएसई की याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सीबीएसई के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने कहा, "तो आपने प्रतिभाशाली बच्चों के बारे में नहीं सुना जो 14 साल की उम्र में एमबीबीएस डॉक्टर बन जाते हैं। आप बुद्धिमत्ता पर अंकुश लगाना चाहते हैं? आप उसे 9वीं कक्षा में नहीं चाहते?"

    पीठ ने उल्लेख किया कि असाधारण छात्र विश्व स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हैं। अगर ऐसे छात्रों को जल्दी पदोन्नत किया जाता है तो सरकार पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

    सीबीएसई की ओर से पेश हुए वकील ने तर्क दिया कि उक्त नीतियां विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई थीं। इन नीतियों के पीछे एक उद्देश्य और तर्क था। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में सात साल की उम्र में एक व्यक्ति सर्जन बन जाता है। फिर 12 साल की उम्र में एक भारतीय शतरंज का ग्रैंडमास्टर बन जाता है। 13 साल की उम्र में एक व्यक्ति ने एक लॉजिस्टिक कंपनी स्थापित की।

    पीठ ने सीबीएसई से कहा कि आपकी राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने स्कूली दिनों में दोहरी पदोन्नति के उदाहरणों को भी याद किया। जब पूछा गया कि बच्चे को कब तक इंतजार करना होगा, तो सीबीएसई ने जवाब दिया कि दो साल। इस पर कोर्ट ने कहा कि दुनिया भर में प्रतिभाशाली बच्चे हैं। आप इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

    कोर्ट ने नोटिस जारी कर केंद्र सरकार से पूछा है कि कृपया हमें बताएं कि आप प्रतिभाशाली बच्चों के बारे में क्या करना चाहते हैं। आप बुद्धिमत्ता पर अंकुश लगाना चाहते हैं। कोर्ट ने नोटिस का जवाब 6 अक्टूबर तक देने को कहा है।

     

  • दिव्यांगजन स्वास्थ्य एवं सहायता: रजत जयंती महोत्सव एवं सेवा पखवाड़ा के अवसर पर शिविर सम्पन्न

    सूरजपुर,

    रजत जयंती महोत्सव एवं सेवा पखवाड़ा दिवस के अवसर पर आज शनिवार को जनपद पंचायत सूरजपुर के साधु राम सेवा कुंज में दिव्यांगजन एवं वृद्धजनों हेतु विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर का आयोजन किया गया।

    शिविर में जिला अस्पताल से मेडिकल बोर्ड तथा पीपीआरसी रायपुर के विशेषज्ञों द्वारा दिव्यांगजनों की जांच की गई। इस दौरान 7 कृत्रिम अंगों का मापन, 39 मेडिकल प्रमाण पत्र जारी किए गए तथा कुल 89 पंजीयन सम्पन्न हुए।

    कार्यक्रम में जनपद पंचायत सूरजपुर की अध्यक्ष माननीय श्रीमती स्वाति सिंह, अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

    शिविर में दिव्यांगजनों और वृद्धजनों को 17 सहायक उपकरण वितरित किए गए, जिनमें 4 ट्रायसायकल, 3 व्हीलचेयर, 3 श्रवण यंत्र एवं 7 छड़ियां शामिल हैं।

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के रजत जयंती कार्यक्रम में राज्यपाल डेका और सीएम साय ने की शिरकत

    संविधान का व्याख्याकार, नागरिक अधिकारों का संरक्षक और न्याय का सजग प्रहरी बनकर खड़ा है उच्च न्यायालय : राज्यपाल डेका

    इन्फ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की उपलब्धता के साथ समय पर न्याय उपलब्ध कराने राज्य सरकार कटिबद्ध : मुख्यमंत्री साय

    आमजनों का विश्वास प्राप्त करना न्यायपालिका का सर्वाेत्तम उद्देश्य : न्यायाधीश  माहेश्वरी

    रायपुर,

    छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की स्थापना का रजत जयंती समारोह’ का आयोजन महामहिम राज्यपाल  रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने मुख्य अतिथि राज्यपाल  रमेन डेका एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू को पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर स्वागत एवं अभिनंदन किया। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव एवं  विजय शर्मा, वित्त मंत्री  ओपी चौधरी, विधि मंत्री  गजेन्द्र यादव, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस भी इस अवसर पर  मौजूद रहे। कार्यक्रम में रजत जयंती समारोह पर केंद्रित स्मारिका का विमोचन भी किया।

        मुख्य अतिथि राज्यपाल  डेका ने कहा कि इस गौरवशाली अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की रजत जयंती समारोह में आप सभी को संबोधित करना मेरे लिए अत्यंत सम्मान और गर्व का विषय है। 1 नवम्बर 2000 को जब छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना हुई, तब शासन के साथ-साथ न्याय के क्षेत्र में भी एक नई शुरुआत हुई। इस राज्य के जन्म के साथ ही इस महान संस्था छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर की स्थापना हुई। तभी से यह न्यायालय संविधान का व्याख्याकार, नागरिक अधिकारों का संरक्षक और न्याय का प्रहरी बनकर खड़ा है। राज्यपाल  रमेन डेका ने लोक अदालत के अंतर्गत लंबित मामलों के हो रहे त्वरित निराकरण के लिए न्यायपालिका की सराहना की। उन्होंने न्यायपालिका में नैतिकता, सुदृढ़ीकरण और न्यायपालिका के लंबित मामलों को कम कर आम जनों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि न्याय केवल सामर्थ्यवान लोगों के लिए ही उपलब्ध नहीं हो बल्कि गांव गरीब एवं आमजनों के लिए भी सर्व सुलभ न्याय उपलब्ध हो तभी इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका की भूमिका सार्थक बनेगी।

        राज्यपाल  डेका ने कहा कि हम उन दूरदर्शी व्यक्तित्वों और संस्थापकों को कृतज्ञतापूर्वक नमन करते हैं, जिन्होंने इस न्यायालय की नींव रखी। प्रथम मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति डब्ल्यू.ए. शिशक और उनके उत्तराधिकारियों ने इस नवगठित न्यायालय को गरिमा, विश्वसनीयता और सशक्त न्यायिक परंपरा प्रदान की। इसी प्रकार अधिवक्ताओं, न्यायालय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की निष्ठा और परिश्रम ने इस संस्था को पच्चीस वर्षों तक सुदृढ़ बनाए रखा। इन वर्षों में न्यायालय ने संवैधानिक नैतिकता, नागरिक स्वतंत्रता, आदिवासी अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, सुशासन और सामाजिक न्याय जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय दिए। इसने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचानदृउसके जंगल, खनिज, संस्कृति और वंचित समुदायों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया। विकास और अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए इसने यह सुनिश्चित किया कि प्रगति कभी भी न्याय की कीमत पर न हो।

        समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि हमारा प्रदेश छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना की रजत जयंती मना रहा है। यह शुभ अवसर हमारे हाईकोर्ट की रजत जयंती का भी है। यह वर्ष हमारी विधानसभा का रजत जयंती वर्ष भी है। इन सभी शुभ अवसरों पर मैं आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूँ।. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर की नगरी को एक नई पहचान दी है। इस शुभ अवसर पर हम भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री एवं हमारे राज्य के निर्माता श्रद्धेय  अटल बिहारी वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिनकी दूरदर्षिता से छत्तीसगढ़ राज्य एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की स्थापना संभव हो सकी।

        मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की उपलब्धता के साथ ही हम किसी भी हालत में समय पर न्याय उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध हैं। इसी क्रम में हमने वर्ष 2023-24 की तुलना में विधि एवं विधायी विभाग के बजट में पिछले साल 25 प्रतिशत और इस वर्ष 29 प्रतिशत बढ़ोतरी की है। यह पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि इस पीठ के न्यायाधीश जस्टिस ए.एम. खानविलकर, जस्टिस  नवीन सिन्हा, जस्टिस  अशोक भूषण, जस्टिस  भूपेश गुप्ता और जस्टिस  प्रशांत कुमार मिश्रा जैसे न्यायाधीश देश की सर्वाेच्च अदालत तक पहुँचे। न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्चुअल कोर्ट और लाइव स्ट्रीमिंग जैसे डिजिटल नवाचारों को बढ़ावा दिया है। साथ ही डिजिटल रिकॉर्ड रूम, आधार आधारित सर्च और न्यायिक प्रशिक्षण के नए माड्यूल भी अपनाये जा रहे हैं। अपने 25 वर्षों की इस गौरवशाली यात्रा में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ऐसे उल्लेखनीय फैसले दिये हैं जो देश भर में नजीर के रूप में प्रस्तुत किये जाते हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की स्थापना के बाद छत्तीसगढ़ के युवाओं में लॉ प्रोफेशन की ओर भी रुझान बढ़ा है। इससे उन्हें करियर के नये अवसर मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री नेा कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी ने अंग्रेजों के समय की दंड संहिता को समाप्त कर भारतीय न्याय संहिता को लागू किया। अंग्रेजों के समय भारतीय दंड संहिता का जोर दंड पर था। भारतीय न्याय संहिता का जोर न्याय पर है। माननीय प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी का प्रयास है कि लोगों को आधुनिक समय के अनुरूप आये नये तकनीकी बदलावों को भी शामिल किया गया है। इसमें फॉरेंसिक साइंस से जुड़ी पहलुओं का काफी महत्व है। लोगों को त्वरित और सुगम न्याय मिल सके, इसके लिए न्यायपालिका को मजबूत करने समय-समय पर जो अनुशंसाएँ की गईं, उनका बीते एक दशक में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रभावी क्रियान्वयन हुआ है।

        उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश  जे.के. माहेश्वरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यह धान्य पूर्णता की ओर ली जाती है। जहां धर्म है वहां विजय है। हमार सच्चा कर्म और विचार ही धर्म है। चेतना ही सहज धर्म से जोड़ती है। अगले 25 साल में हम न्यायपालिका को कहां रखना चाहते है इस पर विचार और योजना बनाने का समय है। आम आदमी कोर्ट के दरवाजे पर एक विश्वास के साथ आता है उस मूल भावना के साथ कार्य करें। उन्होंने न्याय व्यवस्था से जुड़े बेंच, बार और लॉयर को विजन के साथ आगे बढ़ने प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सभी समेकित विजन बनाएं ताकि न्यायपालिका अपने जनकल्याण के अंतिम उद्वेश्य तक पहुंच सके। न्यायाधीश  माहेश्वरी ने कहा कि भारत के संविधान में रूल ऑफ लॉ की भावना पूरी हो इसके लिए सभी कार्य करें और अंतिम पायदान तक खड़े व्यक्ति तक न्याय पहंुचे इस सोच के साथ आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि आमजनों का विश्वास प्राप्त करना न्यायपालिका का सर्वाेत्तम उद्देश्य है। हाईकोर्ट की स्थापना के साक्षी रहे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश  प्रशांत कुमार मिश्रा ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजत जयंती कार्यक्रम के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी और न्यायालय से जुड़े अपने संस्मरण साझा किया।

        रजत जयंती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू ने कहा कि आज केवल न्यायपालिका के 25 वर्षों की यात्रा का उत्सव नहीं है बल्कि न्यायपालिका की उस सुदृढ़ परंपरा का सम्मान है जिसने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा में अपना निरंतर योगदान दिया है। पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने न्याय की पहुंच को आम जनता तक सरल बनाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और तकनीकी को क्रांति की तरह अपनाने में अभूतपूर्व कार्य किए हैं।

        छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश  रमेश सिन्हा ने स्वागत भाषण दिया। न्यायालय की स्थापना के रजत जयंती अवसर पर सभी अतिथियों और उपस्थित जनों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का रजत जयंती कार्यक्रम निश्चित रूप से हम सभी के लिए गौरवशाली क्षण है। पिछले 25 वर्षों में न्यायालय ने विधि के शासन को स्थापित करने बेहतर कार्य किया है। उन्होंने न्यायालय की स्थापना से लेकर अब तक उपलब्धि एवं कामकाज में आए सकरात्मक बदलाव से सभा को अवगत कराया।  

        समारोह के अंत में न्यायाधीश  संजय के अग्रवाल ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  अरूण साव,  विजय शर्मा, वित्त मंत्री  ओपी चौधरी, विधि विधायी मंत्री  गजेन्द्र यादव, मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश  एम.एम. श्रीवास्तव, तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी सैम कोसी, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश  यतीन्द्र सिंह, पूर्व राज्यपाल  रमेश बैस, मुख्य सचिव  अमिताभ जैन, डीजीपी  अरूणदेव गौतम, महाधिवक्ता  प्रफुल्ल भारत, विधायक धरमलाल कौशिक,  अमर अग्रवाल, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष  चंदेल सहित अन्य न्यायाधीश, अधिवक्ता, जन प्रतिनिधिगण तथा न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी उपस्थित थे।

     

     

  • आदिवासी समाज का विरोध: कांकेर में गिरफ्तार दो बांग्लादेशियों पर फर्जी दस्तावेज बनाने वालों पर कार्रवाई की मांग

    कांकेर

    जिले के पखांजूर क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे 2 बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी समाज मोर्चा खोलने वाला है. समाज लंबे समय से पखांजूर क्षेत्र में बांग्लादेशियों के अवैध रूप से रहने का लगातार मुद्दा उठाते आ रहा है. इस बीच पखांजूर क्षेत्र में 2 बांग्लादेशियों ने अवैध रूप से रहते जन्म प्रमाण पत्र बनवा लिया था. हालांकि तहसीलदार की शिकायत पर दोनों बांग्लादेशियों को गिरफ्तार कर वीजा जब्त कर लिया गया है.

    सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष कन्हैया उसेंडी ने कहा कि हम लगातार आवाज उठाते आए हैं कि पखांजूर क्षेत्र में अवैध रूप से बांग्लादेशी रह रहे हैं और यहां के निवासी बनने की कोशिश कर रहे हैं. प्रशासन को क्षेत्र में जांच करनी चाहिए और उन पर कार्रवाई करनी चाहिए. अभी दो लोग गिरफ्तार हुए हैं, उनके जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले संलिप्त व्यक्तियों और अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए.

    गौरतलब हो कि प्रशांत बैरागी एवं उसके पुत्र सुकृक्ति बैरागी ग्राम पीव्ही 127 अनुपपुर अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं. जांच के दौरान पता चला कि दोनों आरोपी प्रशांत बैरागी एवं सुकृति वैरागी वीजा अवधी समाप्त होने के पश्चात भी अवैध रूप से ग्राम पीव्ही 127 अनुपपुर तहसील पखांजूर में निवासरत थे. प्रशांत बैरागी अपने पुत्र सुकृति बैरागी का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने तहसील न्यायालय पखांजूर को गुमराह करते हुए गलत जानकारी दी और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए थे. वीजा को पुलिस ने जब्त कर लिया है. आरोपी प्रशांत वैरागी एवं सुकृति बैरागी निवासी ग्राम औसखली पोस्ट कंचन नगर थाना बोटियाघाट जिला खुलना (बांग्लादेश) को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है.

  • परिवार से मिलने की पंजाब जा रहे अमन बाजवा और उनकी मां की मौत

    कोरबा

    गेवरा–दीपका क्षेत्र के प्रमुख कोल ट्रांसपोर्टर और व्यवसायी अमन बाजवा उर्फ तलविंदर सिंह (34) की सड़क हादसे में मौत हो गई. इस दर्दनाक दुर्घटना में उनकी मां की भी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके मौसा गंभीर रूप से घायल हैं. अमन बाजवा अपने पत्नी और बच्चों से मिलने पंजाब जा रहे थे, इसी दौरान मध्य प्रदेश के चित्रकूट के पास बुंदेलखंड नेशनल हाईवे पर वे हादसे का शिकार हो गए.

    पंजाब परिवार से मिलने जा रहे थे अमन
    जानकारी के अनुसार, अमन बाजवा अपनी मां और मौसा के साथ स्कॉर्पियो कार से पंजाब जा रहे थे. परिवार से मिलने की खुशी में वे सफर पर निकले थे, लेकिन रास्ते में हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली. बताया गया कि उनकी पत्नी और बच्चे फिलहाल पंजाब में रह रहे हैं, जहां से उन्हें लाने के लिए वे रवाना हुए थे.

    मौके पर ही मां-बेटे की मौत
    चित्रकूट के समीप नेशनल हाईवे पर हुए इस हादसे में गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. टक्कर इतनी भीषण थी कि अमन और उनकी मां ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. उनके मौसा को गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

    कोयलांचल क्षेत्र में शोक की लहर
    अमन बाजवा दीपका थाना क्षेत्र के झाबर निवासी थे और कोरबा के नामी ट्रांसपोर्ट व्यवसायी माने जाते थे. उनकी असामयिक मृत्यु की खबर मिलते ही गेवरा–दीपका क्षेत्र के ट्रक मालिक एसोसिएशन और कोयला कारोबारियों में शोक की लहर दौड़ गई.

  • न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी: ‘मैं अपनी मातृभाषा हिंदी में ही बात करूंगा’

     

    बिलासपुर

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की रजत जयंती का अवसर सोमवार को इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया. न्याय और आस्था के इस संगम को और गरिमामय बनाने मंच पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस प्रशांत मिश्रा, तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पी. सैम कोशी तथा पूर्व जज मनींद्र मोहन श्रीवास्तव की उपस्थिति रही. इस कार्यक्रम को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी ने संबोधित करते हुए कहा कि मैं छत्तीसगढ़ आया हूं तो हिंदी में ही बोलूंगा…

    जस्टिस माहेश्वरी का आत्मीय संबोधन
    जस्टिस जे.के. माहेश्वरी ने अपने संबोधन में कहा कि “मैं छत्तीसगढ़ आया हूं तो हिंदी में ही बोलूंगा. मैं मध्यप्रदेश का हूं और छत्तीसगढ़ से मेरा आत्मीय जुड़ाव है. बेंच और बार एक रथ के दो पहिए हैं, और कर्म ही सच्चा धर्म है.”  उन्होंने आगे कहा- “न्यायालय इमारतों से नहीं, बल्कि आम जनता को मिलने वाले न्याय से पहचाना जाएगा. आने वाले 25 वर्ष न्यायपालिका की उपलब्धियों और सबकी सहभागिता से तय होंगे.”

    चीफ जस्टिस सिन्हा ने गिनाई उपलब्धियां
    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने रजत जयंती अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि बीते 25 वर्षों में हाईकोर्ट ने लंबित मामलों को घटाने और न्यायिक ढांचे को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं.

    जनता की आस्था अटूट रहेगी: तोखन साहू
    समारोह में केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने भरोसा जताया कि न्यायपालिका पर जनता की आस्था हमेशा अटूट रहेगी. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने 25 वर्षों की यात्रा में जिस तरह से न्याय के नए आयाम गढ़े हैं, वह आने वाले समय में और भी प्रेरणादायी साबित होंगे.

  • गृह प्रवेश कार्यक्रम में अफरातफरी: अनियंत्रित कार ने तोड़ा पंडाल, कई लोग घायल

    सरगुजा

    छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले में गृह प्रवेश कार्यक्रम में बड़ा हादसा हो गया. गृह प्रवेश की पूजा के बाद शाम को रिसेप्शन पार्टी चल रही थी. रिश्तेदार और मोहल्लेवासी खाना खा रहे थे, इसी बीच तेज रफ्तार कार घर में घुसी और पंडाल को तोड़ते हुए कई लोगों को रौंद दिया. इस हादसे में चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. यह घटना शुक्रवार शाम 8 बजे की है. पूरा मामला गांधीनगर थाना क्षेत्र के डेरी फार्म रोड वार्ड क्रमांक 3 का है.

    गृह प्रवेश की पार्टी में मोहल्लेवासी सहित रिश्तेदार पहुंचे थे. हादसे के बाद घटना स्थल पर अफरा-तफरी मच गई. वहीं आरोपी चालक मौके से फरार हो गया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पतला पहुंचाया. सभी घायलों का निजी अस्पताल में इलाज जारी है. पुलिस घटना की जांच में जुटी है.

  • पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: रायपुर में सोलर पैनलों से हो रही ऊर्जा बचत

    रायपुर के घरों में पीएम सूर्यघर योजना के तहत सोलर पैनलों से मुफ्त बिजली सुविधा

    पर्यावरण संरक्षण और बचत का साधन बनी पीएम सूर्यघर योजना

    रायपुर

    पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: सोलर पैनलों से मिल रही बड़ी राहतपीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से छत्तीसगढ़ में बिजली उपभक्ताओं को बिजली बिल में बड़ी राहत मिल रही है। सौलर पैनल लगवाने के बाद बिजली बिल या तो शून्य या बहुत कम हो जाता है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिल रहा है और स्वच्छ ऊर्जा से लोग आत्मनिर्भर बन रहे हैं। योजना के लाभार्थियों ने बताया कि सोलर पैनल लगाने से उन्हें आर्थिक बचत हुई है और कुछ परिवारों ने अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी अर्जित कर रहे हैं।  

        बिलासपुर शहर के राधिका विहार फेस 2 निवासी  क्रांति कुमार शर्मा ने बताया कि एक साल पहले उन्होंने पीएम सूर्यघर योजना के अंतर्गत 5 किलोवॉट का सोलर पैनल लगवाया था। पैनल लगने के पहले बिजली बिल लगभग 6 हजार रूपए प्रतिमाह आता था। सोलर पैनल लगवाने के बाद बिजली बिल अब शून्य हो गया है। एक भी रूपए खर्च नहीं करने पड़ रहे है। सोलर पैनल स्थापित करवाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार से उन्हें सब्सिडी भी मिली है। उन्होंने सभी निवेदन किया कि वे इस योजना का लाभ अवश्य उठाएं। शहर के एक अन्य निवासी  गुरमुख दास मूलचंदानी ने बताया कि उन्होंने अपने पिताजी के नाम पर योजना के तहत अपनी छत पर सोलर पैनल स्थापित करवाया है। पहले लगभग 5 हजार रूपए प्रतिमाह बिजली बिल आता था। पैनल लगने के बाद अब उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। योजना से मिल रहे लाभ से वे बहुत ही खुश है। केंद्र एवं राज्य सरकार से भी सब्सिडी मिली है। वैभव कुमार अग्रवाल ने बताया कि योजना के अंतर्गत सोलर पैनल लगाने से उन्हें बिजली बिल में बहुत राहत मिली है। यह योजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देती है। 

        पीएम सूर्यघर योजना में एक बार निवेश करने पर 25 वर्षों तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है और इस पर कोई विशेष मेंटेनेंस खर्च भी नहीं है। साथ ही अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में सप्लाई कर आय अर्जित करने का अवसर भी मिलता है। यह योजना  पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा बड़ा कदम है। योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने पर केन्द्र सरकार से 78 हजार रुपये तक सब्सिडी और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपये तक सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही सरकार 300 यूनिट प्रतिमाह मुफ्त बिजली प्रदान कर रही है।योजना के तहत ऋण का भी प्रावधान है जिसमें एक बार निवेश पर 25 वर्षों तक मुफ्त और सतत बिजली पाई जा सकती है।

  • इंदौर में महिलाओं के पुतला दहन पर हाईकोर्ट की रोक, सोनम की मां की याचिका पर सुनवाई

    इंदौर 

     मध्य प्रदेश के इंदौर में होने वाले विजयादशमी पर शूर्पणखा के पुतला दहन पर एमपी हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. बता दें कि 2 अक्टूबर को होने वाले शूर्पणखा के पुतला दहन पर रोक लगा दी है. बता दें कि सोनम की मां संगीता रघुवंशी ने एक शूर्पणखा के खिलाफ एक याचिका दायर की थी. इस पर शुक्रवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए शूर्पणखा के पुतला दहन पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं. इस आदेश की कॉपी शनिवार को सामने आई है. 

    शिलांग हनीमून हत्याकांड की आरोपी सोनम रघुवंशी सहित अन्य 11 महिलाओं का दशहरे के दिन पुतला जलाने की तैयारी की जा रही थी. सोनम रघुवंशी की मां द्वारा इसके खिलाफ इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. अब हाईकोर्ट ने इस पुतला दहन पर रोक लगा दी है. इंदौर की 'पौरुष संस्था' द्वारा जबसे इस पुतला दहन की घोषणा की गई थी तभी से इसको लेकर विवाद शुरू हो गया था. लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई थीं. कुछ लोग जहां इसके समर्थन में थे, वहीं तमाम लोगों का इसको लेकर विरोध था.

    सोनम सहित 11 महिलाओं का जलाया जाना था पुतला

    बीते दिन पौरुष नामक संस्था द्वारा ऐलान किया गया था कि इस दशहरा पर इंदौर महालक्ष्मी नगर मेला ग्राउंड में उन महिलाओं या युवतियों की पुतला दहन किया जाएगा, जिनके ऊपर हाल में अपने पति या प्रेमी की नृशंस तरीके से हत्या का आरोप लगा है. इसमें राजा रघुवंशी की शिलांग में हत्या के आरोप में जेल में बंद सोनम रघुवंशी भी शामिल थीं. साथ ही मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड की आरोपी मुस्कान रस्तोगी सहित कुल 11 महिलाएं शामिल थीं. इस पुतला दहन को 'शूर्पणखा दहन' का नाम दिया गया था. इसमें सोनम को शूर्पणखा दिखाया जाना था.

    इंदौर हाईकोर्ट ने पुतला दहन कार्यक्रम पर लगाई रोक

    इस पुतला दहन की जानकारी लगने के बाद सोनम की मां संगीता रघुवंशी ने इंदौर हाईकोर्ट में इसके खिलाफ एक याचिका दायर की थी. संगीता का कहना था कि जिन महिलाओं के पुतले जलाए जा रहे हैं अभी तक उन पर सिर्फ आरोप है. दोष सिद्ध नहीं हुआ है. साथ ही वह किसी के घर की बेटी और किसी की बहन है. ऐसे में उनका सार्वजनिक अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं मिलना चाहिए. इंदौर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस पुतला दहन कार्यक्रम पर रोक लगा दी. जस्टिस प्रणव वर्मा ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया.

    रघुवंशी समाज लगातार पुतला दहन का कर रहा था विरोध

    ऐसी जानकारी सामने आई थी कि ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी का परिवार इस शूर्पणखा दहन कार्यक्रम के समर्थन में था. इसके लिए तैयारियां भी तेजी से चल रही थीं और 11 सिरों वाला पुतला तैयार किया जा रहा था. पुतले पर सोनम सहित 11 अन्य महिलाओं के चित्र लगाए जा रहे थे.

    रघुवंशी समाज पहले ही दिन से इसके खिलाफ में था और लगातार विरोध कर रहा था. समाज ने इस पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर को आवेदन भी दिया था. उनका कहना था कि सोनम रघुवंशी का नाम और चेहरा दर्शाना न केवल गलत है, बल्कि पूरे समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम है.

  • विद्यार्थियों के लिए आधार अभियान का दूसरा चरण अक्टूबर से शुरू, Cup Final के साथ पड़ेगी शुरुआत

    दूसरे चरण में 26 लाख विद्यार्थियों के किये जायेंगे आधार अपडेट

    भोपाल 

    प्रदेश में 26 लाख विद्यार्थी अब तक अपने आधार में आवश्यक बायोमेट्रिक अपडेट नहीं करा पाए हैं। अपडेट विद्यार्थियों के 5 वर्ष और 15 वर्ष की आयु पूरी होने पर अनिवार्य होता है। आधार में नवीनतम बायोमेट्रिक दर्ज होने के बाद ही विद्यालय प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों को सहज रूप से मिल सकेगा।

    विद्यार्थियों को शासकीय योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईएडीएआई) और स्कूल शिक्षा विभाग ने 18 अगस्त 2025 को ‘विद्यार्थी के लिए "आधार, अब विद्यालय के द्वार" अभियान प्रारंभ किया था। अभियान के अंतर्गत सरकारी विद्यालयों में आधार नामांकन एवं अपडेट शिविर लगाए गए थे। अब प्रदेश के सभी जिलों में एक अक्टूबर से इस अभियान का दूसरा चरण प्रारंभ किया जा रहा है। दूसरे चरण में उन विद्यालयों को प्राथमिकता दी गई है, जहाँ सबसे अधिक विद्यार्थियों के बायोमेट्रिक अपडेट लंबित हैं। साथ ही, ऐसे बड़े विद्यालयों का भी चयन किया गया है, जिनके आसपास अन्य विद्यालय भी संचालित होते हैं, जिससे अधिकाधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल सके।

    यूआईएडीएआई और शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के आधार का बायोमेट्रिक स्टेटस देखने के लिये यू-डाइस+ पोर्टल पर विशेष सुविधा विकसित की है। इसके माध्यम से विद्यालय आसानी से उन विद्यार्थियों की पहचान कर सकेंगे जिनका अपडेट लंबित है।

    अभियान के सफल संचालन के लिए 26 सितम्बर को जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रोग्रामर, ब्लॉक रिसोर्स सेंटर, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और शासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रशिक्षित किया गया। इससे पूर्व यूआईएडीएआई आधार ऑपरेटरों को भी प्रशिक्षित कर चुका है।

    विद्यालय प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे यू-डाइस+ पोर्टल से लंबित विद्यार्थियों की सूची प्राप्त करें। सूची में शामिल विद्यार्थियों को पूर्व सूचना दें और शिविर के लिए रोस्टर तैयार करें। साथ ही, विद्यार्थियों को नजदीकी आधार सेवा केंद्रों में भी बायोमेट्रिक अपडेट कराने के लिए प्रेरित करें।

     

  • रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना ने प्रतिकूल मौसम में भी किसानों को दी राहत और मुनाफा

    रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना ने प्रतिकूल मौसम में भी किसानों को दी राहत और मुनाफा

    पड़ोसी को देख पड़ोसी ने लगवाया अपनी छत पर भी सोलर पैनल

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाने और उसका उपयोग करने की प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस योजना से घरों के बिजली बिलों में कटौती तो हो ही रही है, इसके साथ-साथ अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर मुनाफा भी हो रहा है। गरमी, उमस भरी बरसात या ठंड जैसे प्रतिकूल मौसम में भी इस योजना से बिजली की आबाध आपूर्ति के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी हो रहा है। कोरबा जिले के कटघोरा में पड़ोसी ने पड़ोसी को देखकर अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाया है। 

    कटघोरा कस्बे में श्रीमती ज्योति अनंत और श्री गोरे सिंह राजपूत आसपास रहते हैं। श्रीमती ज्योति ने अपनी घर की छत पर सोलर पैनल लगवाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया। उन्होंने बताया कि अब उनके घर के सभी उपकरण निर्बाध रूप से चल रहे हैं और घर की ऊर्जा का उत्पादन पूरी तरह आत्मनिर्भर है। “पहले गर्मी का मौसम चुनौतीपूर्ण लगता था, अब वही मौसम राहत और मुनाफा लेकर आता है। हम अपनी जरूरत की बिजली स्वयं बना रहे हैं और अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजकर आर्थिक लाभ भी अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने योजना की सबसे बड़ी खासियत यह बताई कि यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित और हरित ऊर्जा के लिए लाभकारी है। उनकी छत केवल बिजली उत्पादन का केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित छत्तीसगढ़ में योगदान का प्रतीक बन गई है।
     
    पड़ोसी से प्रेरित होकर श्री गोरे सिंह राजपूत ने भी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाया। उन्होंने बताया कि योजना के माध्यम से उनके घर की छत पर तीन किलोवाट का सोलर पैनल इंस्टॉल हुआ, जिसकी कुल लागत एक लाख 95 हजार रुपये थी और केंद्र सरकार की 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। उन्होंने बताया कि अब उनका मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है और घर की विद्युत आपूर्ति के लिए वे पूरी तरह आत्मनिर्भर है। श्री राजपूत ने कहा, “सौर ऊर्जा अपनाकर हम न केवल अपने खर्च में संतुलन ला रहे हैं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी योगदान दे रहे हैं। इस योजना से हमारा जीवन आसान और आर्थिक रूप से सशक्त हुआ है। यह अनुभव अन्य स्थानीय निवासियों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।”

    प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री श्री साय ने इस योजना के माध्यम से नागरिकों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराई है। इस पहल से परिवारों में आत्मनिर्भरता, आर्थिक स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है। श्रीमती ज्योति और श्री गोरे सिंह राजपूत ने योजना के लिए अपना हृदय से धन्यवाद व्यक्त किया और भविष्य में इस तरह की योजनाओं के निरंतर लाभ की उम्मीद जताई।

    प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना देश के आम नागरिकों के लिए स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बन चुकी है। योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को हरित ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना, घरेलू खर्च में संतुलन लाना और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाना है। इस योजना के तहत रियायती दरों पर सोलर पैनल उपलब्ध कराए जाते हैं और केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपये की सब्सिडी और राज्य सरकार से रूपये 30 हजार की राशि लाभार्थियों को प्रदान की जाती है। इससे न केवल आर्थिक राहत मिलती है, बल्कि परिवारों को उनकी बिजली की जरूरतों के लिए स्वतंत्रता भी मिलती है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का लाभ लेने के लिए नागरिक सरल प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। योजना की वेबसाइट और स्थानीय प्रशासन कार्यालय इसके लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह योजना पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा के प्रति नागरिकों में जागरूकता भी बढ़ा रही है। इससे सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा भी मिल रहा है।

  • एनएसई कार्यशाला : आईपीओ अवसरों का उद्घाटन (RAMP पहल के अंतर्गत)

    भोपाल

    विश्व बैंक समर्थित रेज़िंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (RAMP) पहल के अंतर्गत आज भोपाल में “आईपीओ अवसरों का उद्घाटन” विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई।

    कार्यक्रम की शुरुआत राज्य नोडल अधिकारी (RAMP) श्री अनिल थागले के स्वागत व उद्घाटन संबोधन से हुई। उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने और उद्यमियों को पूंजी बाज़ार से जोड़ने में RAMP पहल के महत्व पर प्रकाश डाला। तथा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के एमएसएमई के लिए आईपीओ और पूंजी बाज़ार से जुड़ने के अवसरों पर विशेष मार्गदर्शन दिया।

    ईवाई एसपीआईयू टीम ने RAMP योजना की मुख्य विशेषताओं एवं उद्देश्यों की प्रस्तुति दी। इसके बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट श्री कृष्णन अय्यर ने एमएसएमई एक्सचेंज लिस्टिंग की प्रक्रिया और लाभों पर जागरूकता सत्र लिया।

    मर्चेंट बैंकर ने एमएसएमई के लिए आईपीओ यात्रा की चरणबद्ध जानकारी दी। साथ ही, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) विशेषज्ञों ने आईपीआर के पंजीकरण और सुरक्षा पर विस्तृत सत्र आयोजित किया तथा बताया कि यह व्यवसाय के मूल्यांकन और प्रतिस्पर्धात्मकता में कैसे सहायक है।

    कार्यक्रम का समापन मध्यप्रदेश की सूचीबद्ध एमएसएमई इकाइयों को चेक वितरण समारोह के साथ हुआ, जिसमें उनकी पूंजी बाज़ार में सफल भागीदारी का उत्सव मनाया गया। अंत में संयुक्त संचालक श्री अम्ब्रीश अधिकारी द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।

  • भाभी को भगा ले गई ननद, भाई को नहीं लगी भनक — चैटिंग ने किया पर्दाफाश

    जबलपुर

    आमतौर पर ननद-भाभी के रिश्ते में खटपट की कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन जबलपुर में सामने आए एक मामले ने सबको चौंका दिया है. यहां एक ननद अपनी ही भाभी की खूबसूरती पर फिदा हो गई और दोनों के बीच इश्क परवान चढ़ गया. हालात ऐसे बने कि ननद और भाभी अपने घर-परिवार को छोड़कर रफूचक्कर हो गईं है. 

    मामला अमरपाटन इलाके का है, जहां आशुतोष नाम के युवक ने करीब 7 साल पहले संध्या से लव मैरिज की थी. दोनों की शादीशुदा जिंदगी सामान्य चल रही थी और दोनों का 5 साल का बेटा भी है. इस दौरान आशुतोष अपने बच्चे की पढ़ाई के सिलसिले में पत्नी समेत जबलपुर शिफ्ट हो गया. 

    जबलपुर में घर पर आशुतोष की ममेरी बहन यानी पत्नी की ननद मानसी का आना-जाना लगा रहता था और ननद-भाभी में काफी बातचीत भी होती थी. कई बार दोनों साथ में बाज़ार भी जाती थीं. लेकिन ननद-भाभी का पारिवारिक रिश्ते के चलते किसी को कोई शक भी नहीं था. सब कुछ सामान्य था. 

    इसी बीच, अचानक 12 अगस्त को आशुतोष की पत्नी संध्या अचानक घर से लापता हो गई और अगले दिन वह जबलपुर रेलवे स्टेशन पर मिली और फिर कुछ समय तक पति और बेटे के साथ रही. लेकिन 22 अगस्त को वह अपना मोबाइल घर पर छोड़कर बाहर गई तो वापस नहीं लौटी और अब तक लापता है. 

    पति अपनी लापता पत्नी के लिए परेशान था लेकिन उसे कभी शक भी नहीं हुआ कि उसकी पत्नी और बहन के बीच रिश्ता महज पारिवारिक नहीं है. पत्नी के लापता होने के कुछ दिन बाद जब पति ने घर पर रखा पत्नी का फोन खंगाला तो उसमें ननद के साथ पत्नी की रोमांटिक चैटिंग मिली जिसे देखकर पति के पैरों तले जमीन खिसक गई. 

    एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि पीड़ित पति की ओर से जबलपुर ग्रामीण के घमापुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है. क्योंकि पत्नी अपने साथ फोन नहीं ले गई है इसलिए इसकी लोकेशन ट्रेस करने में समस्या आ रही है हालांकि, कुछ तकनीकी साक्ष्य पुलिस को मिले हैं जिसके आधार पर लापता पत्नी की तलाश की जा रही है. 

  • सीमेंट सस्ता हुआ, लेकिन ग्राहक हैं मायूस

    रायपुर

    केंद्र सरकार ने सीमेंट पर जीएसटी की दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. यानी सीमेंट पर जीएसटी की दरें 10 प्रतिशत कम हो गई हैं. राजधानी रायपुर में सीमेंट की कीमत होलसेल में 310-305 रुपए व रिटेल में 320-330 रुपए प्रति बैग थी. जीएसटी दर में कटौती के बाद सीमेंट अब प्रति बैग लगभग 20 से 25 रुपए तक सस्ता होना चाहिए था, लेकिन रिटेलर अभी भी पुरानी कीमत पर ही उपभोक्ताओं को सीमेंट बेच रहे हैं.

    बताया गया है कि जीएसटी की नई दर लागू होने के बाद सीमेंट कंपनियों ने सीमेंट की कीमत 20 से 25 रुपए तक कम कर दी है, लेकिन रिटेलरों द्वारा अभी भी पुरानी दरों में ग्राहकों को सीमेंट बेचा जा रहा है. इसके चलते आम उपभोक्ताओं को सीमेंट पर जीएसटी दर में कटौती का सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है.

    निर्माण लागत में कमी सीमेंट की कीमत घटने से ग्रामीण व शहरी इलाके के सभी वर्ग के उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा. वहीं, निर्माण लागत पर सीधा असर पड़ेगा. मकानों की निर्माण लागत में कमी आएगी और आम लोग आसानी से मकान बना पाएंगे. सीमेंट की कीमत में प्रति बैग 20 से 25 रुपए तक की कमी आने से आम उपभोक्ताओं को काफी राहत मिल सकती है.