• शिक्षक भर्ती परीक्षा-2024 का परिणाम जारी, चयनित अभ्यर्थियों की सूची देखें

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने माध्यमिक शिक्षक एवं प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2024 का परिणाम जारी कर दिया है। यह परीक्षा मध्यप्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत कुल 9,882 पदों पर शिक्षकों की सीधी भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। अभ्यर्थी अपना परिणाम ई.एस.बी की वेबसाइट http://www.esb.mp.gov.in/ से डाउनलोड या मुद्रित कर सकते हैं।

    उल्लेखनीय है कि चयन परीक्षा का आयोजन 20 अप्रैल 2025 से 29 अप्रैल 2025 तक मध्यप्रदेश के 11 प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, सीधी एवं उज्जैन में किया गया था। परीक्षा विभिन्न विषयों हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, खेल, संगीत (गायन-वादन) एवं नृत्य में आयोजित की गई थी।

    कुल 1,85,065 अभ्यर्थियों ने विभिन्न विषयों में पंजीकरण कराया था, जिनमें से 1,60,360 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए।

     

  • प्रशासनिक सक्रियता से ही सुलझेंगी जनता की समस्याएँ: मुख्यमंत्री साय

    रायपुर

     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में 2024 बैच के 13 एवं 2021 बैच के एक अधिकारी शामिल थे।

    मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रशासन की धुरी हैं। जनता की समस्याओं को हल करने में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ-साथ आपको प्रबुद्ध नागरिक के रूप में समाज की भी चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक बेहतर समाज के निर्माण में आप सभी अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी अधिकारियों को पदेन दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने के लिए शुभकामनाएँ दीं।

    छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक टी.सी. महावर ने मुख्यमंत्री  साय को अवगत कराया कि इन अधिकारियों का 7 अप्रैल 2025 से प्रारंभ हुआ इंडक्शन कोर्स अब समाप्त हो रहा है। इसके बाद ये सभी अधिकारी राज्य के विभिन्न जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में सेवा देंगे, जहाँ वे शासन के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को समझेंगे।

    मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके प्रशिक्षण के अनुभव भी जाने। उन्होंने कहा कि यह आपका सौभाग्य है कि आपको राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला है। यह अवसर सभी को नहीं मिलता। पूरे मनोयोग से इस अवसर का लाभ उठाते हुए निष्ठा और समर्पण के साथ अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करें।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन का काम जनहित की नीतियाँ बनाना है, लेकिन उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर ही रहती है। छत्तीसगढ़ एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ प्रचुर मात्रा में खनिज और वन संपदा है, मिट्टी उर्वरा है और पावर सेक्टर बहुत मजबूत है। राज्य के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी रुकावट था, जो अब अपनी अंतिम साँसें गिन रहा है। हमारे जवान पूरी मुस्तैदी से नक्सलियों का मुकाबला कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल समस्या का उन्मूलन कर दिया जाएगा। हमारे बहादुर जवान डटकर मुकाबला कर रहे हैं। इस लक्ष्य की प्राप्ति के बाद छत्तीसगढ़ और तेजी से विकसित होगा। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के रूप में आपकी जिम्मेदारी भी और अधिक बढ़ जाएगी। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज को आगे लाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता लाना हमारी प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जहाँ सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में  ई-ऑफिस प्रणाली भी लागू की गई है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति निवेशकों को आकर्षित कर रही है। अब तक हमें साढ़े 7 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्य बनाने में आप सभी की भूमिका होगी।

    मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राजस्व मामले सीधे जनता से जुड़े होते हैं। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों की एक छोटी-सी पहल से भी लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राजस्व मामलों के समयबद्ध निराकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। राजस्व प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर सरल बनाया जा रहा है।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संयुक्त संचालक प्रणव सिंह तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • छत्तीसगढ़ प्रशासन में बड़ा फेरबदल: विकासशील बने नए मुख्य सचिव, 4 IAS अफसरों को मिला झटका

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ सरकार ने सीनियर आईएएस अधिकारी विकासशील को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है. वे छत्तीसगढ़ के 13वें मुख्य सचिव होंगे और मुख्य सचिव अमिताभ जैन की जगह लेंगे. विकासशील 30 सितंबर को पदभार ग्रहण करेंगे. शासन ने उनका आदेश जारी कर दिया है. वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 सितंबर को रिटायर होंगे. 

    सीनियर अधिकारियों को किया सुपरसीड
    आईएएस विकासशील की नियुक्ति में 4 सीनियर अधिकारियों को सुपरसीड किया गया है. इन अफसरों में रेणु पिल्ले, सुब्रत साहू, अमित अग्रवाल और मनोज कुमार पिंगुआ शामिल हैं. पदभार ग्रहण करने के बाद वे करीब पौने चार साल तक मुख्य सचिव रहेंगे. बतां दे कि मध्यप्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ में अब तक 12 मुख्य सचिव रह चुके हैं. विकासशील 13वें मुख्य सचिव होंगे. 

    30 सितंबर को लेंगे पदभार
    वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं. इसी दिन शाम को वे विकास शील को औपचारिक रूप से पदभार सौंपेंगे. पदभार के बाद विकासशील मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे. परंपरा के अनुसार, जिस दिन नया मुख्य सचिव पदभार ग्रहण करता है, उस दिन कोई बड़ी मीटिंग नहीं होती, सिर्फ सीएम से मुलाकात होती है. अगले दिन मंत्रालय में अफसरों की बैठक आयोजित की जाएगी. 

    जानिए कौन है IAS विकासशील
    विकासशील का जन्म 10 जून 1969 को उत्तरप्रदेश में हुआ था. उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीई, बाद में एमई किया. 4 सितंबर को 1994 में IAS सर्विस जॉइन की. उस समय मध्यप्रदेश कैडर के अफसर थे. बाद में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद उन्होंने कैडर छत्तीसगढ़ चुन लिया. वे बिलासपुर और रायपुर के कलेक्टर भी रह चुके हैं. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में कई अहम पदों पर काम भी कर चुके हैं. 2018 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. स्वास्थ्य कल्याण विभाग में अतिरिक्त सचिव रहे. जल शक्ति मंत्रालय में पेयजल और स्वच्छता विभाग में जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक रहें. जनवरी 2024 से एशियन डेवलपमेंट बैंक में कार्यकारी निदेशक के सलाहकार पद पर पोस्टेड थे. 

    पौने चार साल का होगा कार्यकाल

    नए मुख्य सचिव विकास शील का जन्म जून 1969 में हुआ था। इस हिसाब से जून 2029 में वे 60 साल के होंगे। यानी 30 सितंबर को पदभार ग्रहण करने के बाद वे करीब 3 साल 9 महीने तक मुख्य सचिव रहेंगे। लंबे कार्यकाल की दृष्टि से वे छत्तीसगढ़ के तीसरे मुख्य सचिव होंगे।

    सबसे लंबा कार्यकाल अमिताभ जैन का रहा है, जिन्होंने चार साल 10 महीने तक यह जिम्मेदारी संभाली। उनके बाद विवेक ढांड ने 3 साल 11 महीने तक पद पर काम किया था।

    विकासशील की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबा कार्यकाल मिलने के कारण उनसे शासन की योजनाओं और नीतियों को निरंतरता और स्थायित्व मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सीएस की रेस में शामिल रहे इन 4 अफसरों को पछाड़ा-

    CS पद के लिए क्या होती है योग्यता ?

    मुख्य सचिव बनने के लिए 30 से 33 साल की प्रशासनिक सेवा की आवश्यकता होती है। आमतौर पर मुख्यमंत्री राज्य के सबसे सीनियर आईएएस अधिकारी को मुख्य सचिव के पद पर नियुक्त करते हैं। इस पद के लिए कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता है।

    इस दौरान कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। मुख्य सचिव की नियुक्ति के लिए राज्य के मुख्यमंत्री की मंजूरी की आवश्यकता होती है।

  • सशक्त परिवार की ओर कदम: सरोजनी नायडू कॉलेज में 4,500+ छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण

    भोपाल
    उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सरोजनी नायडू शासकीय कन्या महाविद्यालय भोपाल में छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार” अभियान का मूल किशोरियों और युवतियों का संपूर्ण स्वास्थ्य है। स्वस्थ परिवार की आधारशिला महिलाओं का स्वास्थ्य है। उन्होंने कहा कि हीमोग्लोबिन जांच, पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर जीवन के लक्ष्यों को सहजता से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे निकटतम शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में जाकर नियमित स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएँ, जहाँ जांच, परामर्श और उपचार निःशुल्क उपलब्ध है। स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत सरोजनी नायडू शासकीय कन्या महाविद्यालय भोपाल में विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कुल 4,518 छात्राओं की स्वास्थ्य जांच की गई। साथ ही, विषय विशेषज्ञों ने छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की गयीं।

    लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने छात्राओं से कहा कि अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को छुपाने से वे और गंभीर हो सकती हैं। इसलिए बेझिझक होकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं या संस्थाओं से परामर्श लेना चाहिए। विधायक भगवानदास सबनानी, माननीय महापौर श्रीमती मालती राय, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना सहित स्वास्थ्य विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

    शिविर में हीमोग्लोबिन, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, सिकल सेल स्क्रीनिंग, क्षय रोग तथा नेत्र रोग की जांच कर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परामर्श दिया गया। छात्राओं ने ‘खुल के पूछो’ कार्यक्रम में पोषण, मासिक धर्म स्वच्छता, त्वचा व सौंदर्य संबंधी प्रश्न पूछे जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया। स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों के अंतर्गत स्वास्थ्य खेल, जुम्बा सत्र (थोड़ी सेहत, थोड़ी मस्ती) का आयोजन किया गया। कई छात्राओं ने स्वैच्छिक रक्तदान भी किया।

    शिविर में आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ आईडी एवं आयुष्मान कार्ड भी बनाए गए। कुल 439 आभा और आयुष्मान कार्ड बनाए गए, 459 छात्राओं का दंत परीक्षण, 152 को मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, 381 को आयुष एवं पोषण सेवाएँ तथा 120 की सिकल सेल टेस्टिंग की गई। साथ ही, 20 यूनिट रक्तदान भी हुआ।

     

  • 30 अक्टूबर तक करें आवेदन: व्यावहारिक ज्योतिर्विज्ञान में एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स

    भोपाल 

    स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान एक वर्षीय व्यवहारिक ज्योतिर्विज्ञान (ज्योतिष) और व्यावहारिक वास्तु शास्त्र डिप्लोमा कोर्स शुरू कर रहा है। डिप्लोमा के लिये एमपी ऑनलाइन के माध्यम से 25 सितंबर से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। आवेदन 30 अक्टूबर 2025 तक किये जा सकेंगे। इसके लिये न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता माध्यमिक शिक्षा मंडल अथवा मान्यता प्राप्त बोर्ड से कक्षा 12वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है।

    कक्षाएं एक नवम्बर 2025 से ऑनलाइन प्रारंभ की जायेंगी। ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से ज्योतिर्विज्ञान कक्षाओं का संचालन सप्ताह में 3 दिवस सोमवार, बुधवार, शुक्रवार एवं व्यावहारिक वास्तु शास्त्र कक्षाओं का संचालन सप्ताह में 3 दिवस मंगलवार, गुरूवार, शनिवार को किया जायेगा। ऑनलाइन कक्षाओं का केन्द्र महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान भोपाल के सेकण्ड स्टॉप स्थित संस्कृत भवन रहेगा। पाठ्यक्रम से संबंधित नियम तैयार कर लिये गये हैं। पाठ्यक्रम विवरण, प्रश्न पत्र एवं अन्य जानकारी संस्थान की वेबसाइट https://www.mpssbhopal.org पर उपलब्ध हैं।

     

  • भिण्ड में सड़क निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप, अधिकारीयों पर सख्त कार्रवाई

     भिण्ड

    नगर पालिका भिण्ड में डब्ल्यूबीएम (WBM) रोड के निर्माण कार्यों में अनियमितता की शिकायत लोकायुक्त के माध्यम से नगरीय विकास एवं आवास विभाग को प्राप्त हुई थी। इस शिकायत के आधार पर विभाग द्वारा अधीक्षण यंत्री स्तर पर एक जांच समिति गठित की गई। जांच समिति की रिपोर्ट में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री हरीश बाबू शाक्यवार, तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) वीरेन्द्र तिवारी तथा उपयंत्री अमित कुमार शर्मा को दोषी पाया गया है। दोष सिद्ध होने पर हरीश बाबू शाक्यवार एवं वीरेन्द्र तिवारी की आगामी एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकी गई है।

    उपयंत्री अमित कुमार शर्मा मूलत: नगर निगम मुरैना के कर्मचारी है अतएव उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के लिये आयुक्त नगरीय प्रशासन  संकेत भोंडवे द्वारा आयुक्त नगर निगम मुरैना को निर्देशित किया गया है। आयुक्त  भोंडवे ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये विभाग निरंतर सक्रिय है। स्थानीय निकायों में किसी भी स्तर पर अनियमितता की शिकायत मिलने पर दोषी व्यक्ति के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।

     

  • बच्चों के लिए खुशखबरी: रायपुर दक्षिण में 10 नई आंगनबाड़ी भवनों की तैयारी शुरू

    रायपुर 

    दक्षिण विधानसभा में 10 नए आधुनिक आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाएंगे। इसके पश्चात अन्य वार्डों में भी आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाने हैं। शासन से प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। यह बात दक्षिण विधानसभा के भाजपा विधायक सुनील सोनी ने कही।

    हमारा रायपुर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र विकास की नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है। क्षेत्र में लगातार ऐसे विकास कार्य हो रहे हैं, जिससे सीधे आमजन को लाभ मिल रहा है।

    उन्होंने कहा कि दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के ब्राह्मणपारा वार्ड और महंत लक्ष्मीनारायण दास वार्ड, पुरानी बस्ती में आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए 23,38000 रुपए की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके लिए उन्होंने समस्त क्षेत्रवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम लगातार समस्याओं के समाधान और सुविधाओं के विस्तार के साथ क्षेत्र के चहुंमुखी विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं जिससे क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। इसी प्रकार आगे बढ़ते हुए हम निश्चित ही एक विकसित विधानसभा क्षेत्र के निर्माण में सफल होंगे।

  • मध्य प्रदेश के सरकारी आयुर्वेद अस्पताल में पहली बार ओजोन थेरेपी, कैंसर मरीजों को मिल सकती है बड़ी राहत

    भोपाल
     कैंसर रोगियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रेडिएशन से होने वाली पीड़ा कम करने के लिए आयुर्वेद चिकित्सकों ने ओजोन थेरेपी की शुरुआत की है। इंदौर के आयुर्वेद शासकीय अस्तपताल में प्रयोग के तौर पर यह थेरेपी शुरू कर दी गई है। इसके सकारात्मक परिणाम देख प्रदेश भर के शासकीय आयुर्वेद अस्पतालों में शुरू करने की तैयारी है। दरअसल आयुष मंत्रालय ने ही इस तरह की थेरेपी का सुझाव दिया था, जिसके बाद इसे शुरू किया गया है।

    आयुर्वेद में ओजोन थेरेपी नई प्रक्रिया है, जिसे पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के संतुलित मेल से विकसित किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह प्रक्रिया शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाकर कैंसर कोशिकाओं को कमजोर करती है। वहीं शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए तैयार करती है। इसमें आयुर्वेदिक औषधियों का ही इस्तेमाल होता है। एक महीने पहले इंदौर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय अस्पताल में प्रायोगिक तौर पर इसे शुरू किया गया था।

    50 रोगियों पर हुआ इसका प्रयोग

    50 रोगियों पर इसका प्रयोग हुआ। उनमें दर्द, सूजन में कमी और जीवन स्तर में सुधार दिखा है। उसके बाद इसे कारुण्य कार्यक्रम में शामिल किया गया है, जो कैंसर, अल्जाइमर और पार्किंसन जैसे रोगों में सहायक उपचार के लिए वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के इस्तेमाल के लिए है। अधिकारियों का कहना है कि इसी महीने से भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय अस्पताल में इसकी सुविधा मिलने लगेगी। उसके बाद प्रदेश के सभी सात शासकीय आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज-अस्पतालों में इसकी सुविधा मिलेगी।

    ऐसे काम करती है ओजोन थेरेपी

    विशेषज्ञों के मुताबिक ओजोन ऑक्सीजन का सक्रिय रूप है। इसे शरीर में अलग-अलग तरीकों से पहुंचाया जाता है। इसे अंतःशिरा (आईवी), इंजेक्शन, ऑटोहेमोथेरेपी, ओजोन साना और ओजोनेटेड तेल या पानी का उपयोग कर शरीर में पहुंचाया जाता है। इसका असर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, संक्रामक तत्वों को रोकने, दर्द और सूजन कम करने तथा कोशिकाओं के पुनर्जन्म को बढ़ावा देने में दिखता है।

    दूसरी बीमारियों में भी उपयोगी

    कैंसर के अलावा ओजोन थेरेपी का प्रयोग गठिया, घुटनों और कमर दर्द, त्वचा रोग, मधुमेह, हृदय रोग और घाव भरने की प्रक्रिया में भी कारगर पाया गया है।

    इंदौर में शुरू किया गया है उपचार

        ओजोन थेरेपी से कैंसर के मरीजों का उपचार इंदौर में शुरू किया गया है। प्रयास है कि आने वाले समय में प्रदेश के सभी प्रमुख आयुर्वेद अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। हम भी इसकी तैयारी कर रहे हैं। – डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय भोपाल।

     

  • सड़क दुर्घटनाएं बनीं बड़ी चुनौती, MP में शहरी के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में ज्यादा जानें गईं

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में तेज रफ्तार वाहन चलाने वालों पर अंकुश लगाया जाए तो हर साल 10 हजार से अधिक लोगों की जान बच सकती है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 75 प्रतिशत मामले तेज रफ्तार के रहे। पुलिस ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीटीआरआई) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2024 में 14 हजार 791 लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में हुई है, जबकि 2023 से 13 हजार 798 लोगों की जान चली गई थी।ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर हुई मौतों की संख्या शहरी क्षेत्र की तुलना में दोगुना से भी अधिक है।

    ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर दुर्घटनाओं से लगभग नौ हजार लोगों की मौत हुई है। पिछले चार वर्ष से यह संख्या आठ हजार से नौ हजार के बीच है। इसका कारण यह है कि भीड़ नहीं होने के कारण लोग तेज गति से वाहन चलाते हैं। दूसरा यह की सड़कों पर संरक्षा (सेफ्टी) मापदंडों का पालन भी ठीक से नहीं हो पाता।

    अंधेरा, अंधा मोड़, संकरी सड़क जैसे ब्लैक स्पाट भी यहां दुर्घटनाओं की वजह बनते हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुल मौतों में शराब पीकर और मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने के कारण 500 से अधिक लोगों की मौत हुई है। पुलिस मुख्यालय अब इस रिपोर्ट के आधार पर सभी जिलों और संबंधित एजेंसियों को दुर्घटनाएं रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने के लिए निर्देशित करने जा रहा है।
    ये है दुर्घटनाओं की बड़ी वजह

        मध्य प्रदेश में ट्रैफिक पुलिस का अमला मात्र साढ़े तीन हजार है, जबकि जिस तरह से वाहनों की संख्या बढ़ रही है उससे इसका दोगुना पुलिस बल चाहिए।

        मध्य प्रदेश में ब्लैक स्पाट यानी दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की संख्या घटने की जगह बढ़ रही है। इनकी संख्या 400 से अधिक है। स्थायी तौर पर इस समस्या को हल करने के लिए जिम्मेदार एजेंसिया रुचि नहीं ले रही हैं।

    पुलिस की चेकिंग के दौरान चालान की कार्रवाई में सबसे अधिक ध्यान हेलमेट और सीट बेल्ट नहीं लगाने वालों पर रहता है। दोनों को मिला लें तो प्रतिवर्ष आंकड़ा औसत 10 लाख के ऊपर रहता है, जबकि तेज गति से वाहन चलाने वालों में 50 हजार के विरुद्ध भी कार्रवाई नहीं होती।
    वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी

        यह सही है कि सड़क हादसों की बड़ी वजह तेज गति से वाहन चलाना है। सभी को गति सीमा का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सड़कें बेहतर होने से रफ्तार भी बढ़ी है। दुर्घटनाएं रोकने के लिए विशेष अभियान चलाकर भी यातायात नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। – शाहिद अबसार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पीटीआरआई)।

     

  • जीएसटी छूट में असमानता, मोहल्ले की दुकानों को नहीं मिल रही राहत

     ग्वालियर
     जीएसटी कम होने के बाद मंगलवार को कांच मिल क्षेत्र के निवासी बीपी श्रीवास्तव ने दुकान से घी का पैकेट खरीदा। घी का पैकेट 595 रुपए में दुकानदार ने दिया। पहले भी उन्हें घी का पैकेट इतनी ही कीमत में मिलता था। जब उन्होंने दुकानदार से जीएसटी कम करके घी देने के लिए कहा तो उसने कहा कि अभी तो पुरानी रेट में ही मिलेगा। जब हमें कम कीमत पर मिलेगा तब हम भी आपको कम कीमत पर देंगे।

    ऐसा केवल एक व्यक्ति के साथ नहीं हो रहा है, बल्कि शहर में बड़े सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर को छोड़ दें, गली मोहल्लों सहित अन्य जगहों की दुकानों पर जीएसटी कम होने के बाद भी सामान पुरानी कीमत या एमआरपी पर ही मिल रहा है।

    बिस्किट हो, चिप्स का पैकेट हो या अन्य ऐसी ही कोई पैक्ड सामग्री हो, उपभोक्ताओं को जीएसटी की छूट लागू होने के दो दिन बाद भी एमपीआरपी पर ही मिल रहे है। ऐसे में अभी लोगों को जीएसटी कम होने से कम ही राहत मिल पा रही है।

    सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर पर क्यों मिल रही है छूट

        सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर न केवल जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं, बल्कि वे बिलिंग भी सॉफ्टवेयर से करते हैं। ऐसे में उनके साफ्टवेयर में जीएसटी कम कर दिया गया है। इसलिए इन स्टोर पर लोगों को कम कीमत में सामान मिल रहा है।

    जबकि छोटी व गली मोहल्लों की दुकानों में से अधिकतर जीएसटी में रजिस्टर्ड ही नहीं है, साथ ही इन दुकानों पर बिलिंग के लिए किसी तरह का साफ्टवेयर भी उपयोग नहीं करते। ऐसे में ये दुकानदार अभी भी जीटएसटी कम होने के बाद भी पुरानी एमआरपी पर ही चीजें बेच रहे हैं।
    शहर में अधिकतर दुकानदारों को सामान डिस्ट्रीब्यूटर या उनके एजेंट ही सप्लाई करते हैं। ये लोग सीधे सीधे कच्चे बिल पर ही माल सप्लाई करते हैं। ऐसे में दुकानदारों का कहना है कि एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर को तो हम माल के पैसे दे चुके हैं, अब वो वापस नहीं करेगा। इसलिए जब तक पुराना माल है तब तक पुरानी ही कीमत में बेचेंगे।

    जिन मेडिकल स्टोरों पर कंप्यूटर से बिलिंग हो रही है वहां पर लोगों को दवाओं पर जीएसटी से राहत मिल रही है। हालांकि मेडिकल स्टोर वाले अब पहले जो 10 से 15 प्रतिशत डिस्काउंट दवा पर देते थे, वह नहीं दे रहे हैंं।
    ऑनलाइन ग्रोसरी का सामान बेचने वाली कंपनियों ने भी कीमत घटाई

    ऑनलाइन ग्रोसरी सहित अन्य आयटम बेचने वाली कंपनियों ने अपने यहां सभी सामग्रियों की कीमतों को जीएसटी कटौती के मुताबिक घटा दिया है। आर्डर मिलने के बाद वे तुरंत डिलेवरी भी दे रही हैं। ऐसे में लोग अब दुकानों से पुरानी दरों की जगह ऑनलाइन चीजें मंगा रहे हैं।

    दुकानदारों की यह भी समस्या

    गोले का मंदिर चौराहे पर एक दुकानदार से जब 5 रुपए का बिस्किट पैकेट और एक 10 रुपये का चिप्स का पैकेट लिया गया और उससे जीएसटी कम करने की बात की तो उसने कहा कि माल नहीं बेच पाएंगे, क्योंकि आप तो 5 और 10 का सिक्का या नोट दोगे। बिस्किट पर 20 पैसे कम होंगे और चिप्स पर 40 पैसे। ऐसे में अब 60 पैसे मैं कहां से लाउंगा। ये सिक्के तो अब चलन में भी नहीं है। इस वजह से 5 से लेकर 50 रुपये की चीजें पुरानी कीमतों पर ही बिक रही हैं।

    क्या कहते हैं दुकानदार

        पांच से दस रुपये या सौ रुपये तक के पैकेट पर जीएसटी कम करके बेचें भी, लेकिन छोटे सिक्के चलन में नहीं है। ऐसे में इन चीजों को एमआरपी पर ही बेचना पड़ रहा है। जिन चीजों पर 20 से 30 या अधिक राशि छूट की होती है उसमें जरूर कम करते हैं। – प्रमोद जैन, किराना दुकानदार

    जब नया स्टॉक आएगा तभी कम करेंगे

        अभी तक घर के उपयोग की जो भी चीजें खरीदी हैं, उन वे सभी एमपीआरपी या पुरानी दर पर मिल रही थी, उसी पर मिल रही हैं। दुकानदार कह देते हैं, जब नया स्टॉक आएगा तभी ही कम पर मिलेंगी। – सुधीर झा, निवासी मुरार

    क्या कहते हैं व्यापारी संघ के पदाधिकारी

        जब भी नई व्यवस्था होती है तो उसमें स्थिरता आने में समय लगता है। वर्तमान में जीएसटी का फायदा 5 हजार रुपये से अधिक की खरीदारी पर ही दिखेगा। दुकानदारों के पास 10 से 15 दिन या एक महीने का ही स्टाक होगा। तब तक छोटे आयटमों पर ही जीएसटी का फायदा आम आदमी को नहीं मिलेगा। लेकिन एक महीने में यह व्यवस्था पूरी तरह से सेटल हो जाएगी। इसके बाद सभी को राहत मिलेगी और बचत होगी। – प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष चैंबर ऑफ कॉमर्स

     

  • सांसद चंद्रशेखर के खिलाफ रोहिणी घावरी की शिकायत, शोषण और धमकी के बीच बढ़ी विवाद की स्थिति

    इंदौर
     भीम आर्मी के संस्थापक और यूपी के नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद चंद्रशेखर पर इंदौर की एक महिला ने यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पीएचडी स्कॉलर डॉ रोहिणी घावरी ने बुधवार को धमकी दी है कि उन्हें अगर न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेंगी. इसे लेकर उन्होंने सोशल मीडिया एक्स अकाउंट पर कई पोस्ट किए हैं. डॉ रोहिणी घावरी इंदौर की रहने वाली हैं और वर्तमान में वह स्विटजरलैंड में रह रहीं हैं. सोशल मीडिया पर उनकी आत्महत्या की बात से इंदौर में रहने वाले उनके माता-पिता परेशान हैं और अपनी बेटी से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. उनका अब तक उनकी बेटी रोहिणी से संपर्क नहीं हो पाया है.

    सांसद चंद्रशेखर पर शारीरिक और मानसिक शोषण का आरोप

    इंदौर की रहने वाली डॉ रोहिणी घावरी ने नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण पर कई दिनों तक शारीरिक और मानसिक रूप से शोषण का आरोप लगाया है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि इस मामले की शिकायत वह कई बार दिल्ली पुलिस को कर चुकी हैं. अधिकारियों से मिलकर कई सबूत भी दे चुकी हूं लेकिन पुलिस ने इस मामले में किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की.

    3 महीने पहले लगाए थे रोहिणी ने आरोप

    डॉ रोहिणी घावरी ने चंद्रशेखर पर 3 महीने पहले गंभीर आरोप लगाए थे. पुलिस के साथ उन्होंने महिला आयोग में भी शिकायत की थी और कहा था कि यह स्वाभिमान और आत्मसम्मान की लड़ाई है और वह अब पीछे नहीं हटेंगी. महिला आयोग में की गई शिकायत में उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर से उनकी मुलाकात 2020 में हुई थी. 2024 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उनका व्यवहार बदल गया.

    इंदौर में रहने वाले माता-पिता परेशान

    सोशल मीडिया पर उनकी आत्महत्या वाली पोस्ट देखकर इंदौर में रहने वाले उनके माता-पिता परेशान हैं. पिता शिव घावरी का कहना है कि "उन्हें भी सोशल मीडिया के द्वारा अपनी बेटी के द्वारा इस तरह के कदम उठा लेने की जानकारी मिल रही है. वह पिछले कई घंटों से लगातार अपनी बेटी रोहिणी से संपर्क करने में लगे हुए हैं लेकिन अभी तक उसने हमसे भी कोई बात नहीं की है. जिसके चलते हम काफी डिप्रेशन में आ चुके हैं."

    '2020 में रोहिणी से हुई थी जान-पहचान'

    रोहिणी के पिता शिव घावरी ने भी चंद्रशेखर उर्फ रावण पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उनकी बेटी की शिकायत पर सुनवाई नहीं हो रही है. चंद्रशेखर से 2020 में उसकी जान पहचान हुई थी. चंद्रशेखर ने रोहिणी को यह आश्वासन दिया था कि वह अविवाहित है और उससे शादी कर लेगा. इसके चलते दोनों काफी दिनों तक साथ में भी रहे.

    कौन हैं रोहिणी घावरी

    इंदौर की रहने वाली वाली रोहिणी घावरी बाल्मिकी समुदाय से आती हैं और उनके पिता सफाईकर्मी हैं. 2019 में मध्य प्रदेश सरकार की स्कॉलरशिप से स्विट्जरलैंड में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं. उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी किया है. इसके पहले रोहिणी ने इंस्टिट्यूट ऑफ कॉमर्स से फॉरेन ट्रेड में बीबीए किया है. उसके बाद इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से मार्केटिंग में एमबीए किया है. वह अपना एक एनजीओ भी चलाती हैं और दलित समुदाय के उत्थान के लिए काम करती हैं. 

  • रायपुर नगर निगम की सख्त कार्रवाई: बकायेदारों की संपत्तियों पर लगा ताला

    रायपुर

     नगर निगम के अमले ने वर्षों से संपत्तिकर जमा नहीं करने वाले बड़े बकायादारों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आज व्यावसायिक परिसरों में ताला लगाकर सीलबंद की कार्रवाई की.

    जिन परिसरों में तालाबंदी की कार्रवाई की गई, उनमें संत रविदास वार्ड 70 स्थित पार्थिवी प्रोविन्स – डॉ. शैलेष वर्मा, वीर सावरकर नगर वार्ड-01 स्थित राहुल धारीवाल पिता राजेंद्र धारीवाल, लीलावती देवी सिंग पति-अशोक सिंग, ओमप्रकाश तिवारी पिता-आर.ए. तिवारी, सुरेन्दर सिंग, गुरविन्दर सिंग पिता-प्रीतम सिंग, नीलम मिश्रा पति-संजय मिश्रा, राजेश चन्द्राकर पिता-गंगा प्रसाद और हरभजन सिंग पिता-टहल सिंग शामिल हैं.

  • सतना: सीवर सफाई के दौरान बड़ा हादसा, एक मजदूर की मौत, दो की हालत नाज़ुक

    सतना

    जिला में मैला सफाई के दौरान एक मजदूर की जान गवाने का मामला सामने आई है। सतना नगर निगम क्षेत्र कृपालपुर में सफाई के लिए तीन मजदूर सीवर लाइन की पाइप में उतरें। लेकिन पाइप के अंदर अंदर मीथेन गैस के रिसाव के प्रभाव में आकर तीनों मजदूर अंदर ही बेहोश हो कर फस गए। जिसकी जानकारी लगते ही स्थानीय लोगों द्वारा तीनों मजदूरों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। लेकिन उनमें से एक मजदूर अमित कुमार कि तब तक जान जा चुकी थी। जबकि दो गंभीर रूप से घायल हैं।

    इनकी कोई पहचान नहीं हो सकीं। इस दौरान लोगों ने शहर सरकार के ऊपर गंभीर आरोप लगाए कि इस घटना की जानकारी लगते ही मौके पर जुटे लोगो ने 112, फायर, नगर निगम, महापौर सभी को इसकी जानकारी दी लेकिन मौके ओर कोई नही पहुंचा। जिससे नाराज लोगो ने मजदूरों की जनन बचने और उन्हें बाहर निकलने की जद्दोजहद में जुट गए और पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने लगे।

    इसके बाद नगर निगम के अभियंताओं से लेकर महापौर तक सब घटनास्थल पर पहुच गए। हालंकि इस घटना के बाद मजदूरों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्थानीय नागरिक सौरभ सिंह ने कोलगवां थाने में लिखित शिकायत करते हुए संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का शिकायती आवेदन भी दिया है।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो 2019 से 2024 के बीच सीवर और सेप्टिक टैंक में उतरने के कारण दिल्ली में ही 37 लोगों की मौत हो चुकी है। ये मौतें तब हुईं, जब सरकार मशीनों से सफाई कराने का दावा करती रही है। वहीं 2019 से अब तक देश भर में 430 लोगों की मौत हो चुकी है। वो भी तब जब बिना उपकरणों के सफाई कराने के खिलाफ कानून मौजूद हैं।

    चार दिन में दूसरा हादसा लगातार दूसरी घटना से दहशत का माहौल

    सीवर चेंबर में जहरीली गैस से कर्मचारियों की तबीयत बिग?ने का ये दूसरा मामला है। इससे पहले 22 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे महादेव रोड पर क्रिस्तुकुला स्कूल के पास आदर्श शुक्ला और किशन वर्मा सीवर लाइन की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान जहरीली गैस के कारण दोनों बेहोश होकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत अधिकारियों को सूचना दी। दोनों कर्मचारियों को बाहर निकाला। एसडीएम राहुल सिलडय़िा मौके पर पहुंचे और अपनी गाड़ी से दोनों कर्मचारियों को जिला अस्पताल ले गए थे।

    यह हादसा बीते सप्ताह हुई समान घटना के बाद सामने आया है, जिसने सफाईकर्मियों और उनके परिजनों में भारी दहशत फैला दी है। सवाल यह है कि लाखों रुपए खर्च कर खरीदी गई सुरक्षा किट मजदूरों तक क्यों नहीं पहुंचाई जा रही?

    2 घायल गायब, पीडि़त के स्वजनों को 50 लाख मुआवजे की मांग

    घटना के बाद जिला कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ता जिला चिकित्सालय पहुंच गए। जहां उन्हें हादसे में घायल दो मजदूर नदारद मिले, जिनकी जानकारी किेसी भी प्रशासनिक अमलें को नहीं थी। जिसके बाद सभी कांग्रेसियों ने मजदूर के पीडि़त स्वजनों को पचास लाख मुआवजा देने की मांग पर अड़ गए।

    कांग्रेसियों ने मौके पर ही दो अन्य घायलों को ठेकेदार पर गायब कराने का आरोप लगाया। जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा ने कहा, कलेक्टर से हुई है चर्चा। मामले के सभी दोषियों पर प्रकरण दर्ज कराने और मृतक को मुआवजा दिलाने की मांग रखी गई है । ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

     

  • बालाघाट की शिक्षा व्यवस्था पर कलंक: शिक्षक-प्राचार्य के बीच विवाद से छात्रों में हुआ बवाल

    बालाघाट
    लालबर्रा के नेवरगांव स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां एक व्यवसायिक शिक्षक ने प्रभारी प्राचार्य की सिर्फ इसलिए बेरहमी से पिटाई कर दी, क्योंकि प्रभारी प्राचार्य ने शिक्षक को नियत समय पर ही स्कूल से जाने कहा था। जल्दी छुट्टी न देने पर व्यवसायिक शिक्षक वीरेंद्र ब्रम्हे इतना आक्रोशित हो उठा कि उसने मौका पाते ही प्रभारी प्राचार्य नवीन लोढ़ा की बस में पिटाई कर दी।

    प्राचार्य को आईं गंभीर चोटें

    हाथ-मुक्कों से पिटाई से नवीन को गंभीर चोटें आई हैं। वह जिला अस्पताल में भर्ती हैं। शिक्षक ने प्रभारी प्राचार्य को जान से मारने की धमकी देकर गाली-गलौच की। घटना बुधवार शाम की है। जानकारी लगते ही गुरुवार सुबह स्कूली विद्यार्थी आक्रोशित हो गए। उन्होंने दोपहर डेढ़ बजे तक स्कूल में प्रदर्शन किया। कक्षाएं नहीं लगने दीं और जमकर नारेबाजी की।

    फिर से शुरू किया गया स्कूल का संचालन

    तहसीलदार, बीआरसी, बीईओ की समझाइश के बाद विद्यार्थियों ने प्रदर्शन समाप्त किया और स्कूल का संचालन किया गया। प्रभारी प्राचार्य की शिकायत पर लालबर्रा पुलिस ने आरोपित शिक्षक वीरेंद्र ब्रम्हे के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। इस घटना की आजाद अध्यापक संघ ने कड़ी निंदा की है।

  • रीवा BJP की नई कार्यकारिणी में ब्राह्मणों का दबदबा, साथ में 5 महिला सदस्यों का भी चयन

    रीवा
     मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपनी कार्यकारिणी की घोषणा कर रही है। 62 संगठनात्मक जिलों में से अब तक 30 से ज्यादा जिलों की कार्यकारिणी घोषित हो चुकी है। अब रीवा के लिए अपनी नई जिला स्तरीय नेतृत्व टीम को घोषित कर दिया है। यह कदम आने वाले समय की राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। चुनौतियों के पहले संगठनात्मक ताकत को मजबूत किया जा सके।

    इन नियुक्तियों को बीजेपी प्रेदश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने मंजूरी दी। इसकी औपचारिक घोषणा रीवा बीजेपी के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार गुप्ता ने की। उन्होंने बताया कि यह टीम अनुभवी नेताओं और युवा चेहरों का मिश्रण है, जिसका मकसद जिले में पार्टी की पकड़ और मजबूत करना है।
    इनको मिली जिम्मेदारी
    पार्टी ने एक बयान में कहा कि इस घोषणा में सात जिला उपाध्यक्ष, तीन महासचिव, सात सचिव और दो वित्त संबंधी पद शामिल हैं। उपाध्यक्षों में प्रबोध व्यास, मनीषा पाठक, अशोक सिंह गहरवार, शरद साहू, राजेश प्रताप सिंह, मनीष चंद्र शुक्ला और संध्या कोल (गौटिया) को जिम्मेदारी दी गई है।
    ये बनाए गए महासचिव
    नियुक्त महासचिवों में उमाशंकर पटेल, विवेक गौतम और जीवनलाल साकेत शामिल हैं। वहीं, सचिवों में कल्पना पटेल, रविराज विश्वकर्मा, प्रणेश ओझा, गीता मांझी, बृजेंद्र गौतम, सुमन शुक्ला और बाबूलाल यादव शामिल हैं। वित्त विभाग में वासुदेव थारवानी को जिला कोषाध्यक्ष और अलकनरायन केशरवानी को सहायक कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

    5 महिलाओं को भी मिली जिम्मेदारी
    इस कार्यकारिणी में पांच महिला नेताओं मनीषा पाठक, संध्या कोल, कल्पना पटेल, गीता मांझी और सुमन शुक्ला को भी शामिल किया गया है। इससे साफ होता है कि भाजपा महिला नेतृत्व और लैंगिक संतुलन पर जोर दे रही है।

    जिला अध्यक्ष ने किया संबोधित
    जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ने कहा कि नई टीम का गठन प्रदेश नेतृत्व की सहमति से किया गया है। उम्मीद है कि नई कार्यकारिणी अनुशासन बनाए रखते हुए पार्टी के कार्यक्रमों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने और संगठन की पकड़ मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवनियुक्त पदाधिकारी पार्टी के मूल्यों को बनाए रखेंगे और क्षेत्र में पार्टी के विकास में सार्थक योगदान देंगे।

    नई टीम का गठन ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ रही है। भाजपा का यह कदम आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर अपनी संगठनात्मक तैयारी को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

  • मध्य प्रदेश में प्रमोशन आरक्षण केस की सुनवाई स्थगित, अब 16 अक्टूबर को होगी पुनः सुनवाई

    जबलपुर 

    मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई 16 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। आज दिनांक 25/9/25 को कोर्ट न. 01 मे सीरियल क्र.32 से 32.38 पर समय 11:30 बजे से सुनवाई थी,लेकिन सुबह एडिशनल एडवोकेट जनरल हरप्रीत रूपराह ने मेंशन करके दिनांक 16/10/25 की तारीख़ लगवाई है। आज शासन की ओर से अधिकृत सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता वैद्धांनाथन उपलवध नहीं होने का हवाला दिया गया।

    अजाक्स संघ सहित अनेक कर्मचारियों एवं अधिकारियो की ओर से प्रमोशन कानून के पक्ष मे अनेक हतक्षेप याचिकाए दाखिल की गईं है,उक्त सभी आवेदनों को पिछली तारीख 16/9/2025 मे अलाउ कर दिया गया है तत्पष्यात हतक्षेप कर्ताओ की ओर से प्रमोशन नियम 2025 को चुनौती देने वाले याचिका कर्ताओ की लोकस एवं याचिकाओं की विचारणशीलता पर आवेदन दाखिल कर आपत्ति दर्ज कराई गईं है।

    एवं अजाक्स संघ द्वारा नियम 2025 प्रकाशित होने के पूर्व याचिका क्रमांक 16383/2025 दाखिल की गईं है,जिसकी आज प्रथम सुनवाई हेतु सीरियल क्रमांक 32.38 पर सूचिवद्ध है,लेकिन मुख्य केस मे सरकार की ओर से 16/10/25 को सुनवाई किए जाने का समय ले लिया गया है जिसके कारण उक्त याचिका की भी सुनवाई 16/10/25 को होगी।
    पदोन्नति नियम को लेकर हाई कोर्ट में लगी याचिका के महत्‍वपूर्ण बिंदु

        पदोन्नति नियम को लेकर हाई कोर्ट जबलपुर में गुरुवार को सुनवाई हुई। सरकार ने हाई कोर्ट के निर्देश पर नियम के संबंध में विस्तृत जानकारी दी है। इसके साथ ही यह भी कहा है कि प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण सशर्त पदोन्नति दी जाएगी।

    पदोन्नति नियम को सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने चुनौती है। याचिका में कहा गया है कि जब सरकार ने नए नियम बना लिए हैं तो यह स्पष्ट है कि 2002 के नियम निरस्त करने का निर्णय सही था।
    ऐसे में इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका को वापस क्यों नहीं लिया जा रहा है। इससे भ्रम की स्थिति बन रही है।
    दरअसल, पुराने नियम से जो पदोन्नतियां हुई हैं, उन्हें सरकार वापस नहीं लेना चाहती है इसलिए याचिका वापस नहीं ली जा रही है। इससे स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।
    जबकि, सरकार नौ वर्ष से रुकी पदोन्नति प्रारंभ करना चाहती है। नए नियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा विभिन्न मामलों में दिए गए निर्देशों की रोशनी में तैयार किए गए हैं। इसमें सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा गया है।

     

  • मंडला का रिश्वत कांड: अधिकारी और पत्नी रिश्वत लेते हुए धर दबोचे गए

    मंडला
    जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) अरविंद विश्वकर्मा को रिश्वत लेते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा है। पत्नी के हाथों रुपये का लिफाफा रिलायंस पेट्रोल पंप पर लेते ही दोनों को मौके पर ही ईओडब्ल्यू ने पकड़ कार्रवाई शुरू कर दी। इस मामले में एपीसी को भी सह आरोपित बनाया गया है।

    डीपीसी ने मांगी थी एक लाख 20 हजार की मदद

    बताया गया है कि डीपीसी ने विद्या निकेतन ग्राम ककैया स्कूल को मान्यता देने के नाम पर एक लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। जिसके एवज में दूसरी क़िस्त की राशि 60 हजार रुपये स्कूल संचालक द्वारा देते ही ईओडब्ल्यू टीम ने पकड़ लिया। जानकारी अनुसार स्कूल का भवन पूरा नहीं होने से मान्यता समाप्त हो गई थी।

    दोबारा मांगी गई थी रिश्वत

    पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए स्कूल संचालक रविकांत नंदा से एक लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही थी। पहली किश्त 50 हजार रुपये डीपीसी को स्कूल संचालक कुछ दिन पहले दे चुका था। 60 हजार रुपये की मांग पुनः की गई थी।

    इस पर स्कूल संचालक रविकांत नंदा यह राशि देने बिंझिया स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप पहुंचा। जहां राशि का लिफाफा डीपीसी को देने पर उन्होंने पत्नी को देने कहा। लिफाफा पत्नी के हाथों में आते ही ईओडब्ल्यू ने रंगे हाथों पकड़ लिया। ईओडब्ल्यू डीएसपी स्वर्ण जीत सिंह धामी व टीम के द्वारा पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में कार्रवाई की जा रही है।

     

  • जटिल हृदय उपचारों में छत्तीसगढ़ बना देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री साय

    एसीआई में देश का छठा और सरकारी संस्थान का पहला बैकमैन टोटल फिजियोलॉजिकल पेसिंग केस : छत्तीसगढ़ को मिली ऐतिहासिक सफलता

    प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा आधुनिकता और विश्वास का बन रहा है प्रतीक : स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल

    राइट एट्रियम या बैकमैन बंडल में लीड लगाने का पहला मामला

    रायपुर,

     प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की उत्कृष्टता का प्रतीक, प्रदेश का सबसे पुराना और सबसे बड़ा पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय तथा इससे संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के डॉक्टरों की टीम ने जटिल उपचारों में लगातार ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं जिन पर हर किसी को गर्व हो सकता है। ताज़ा उदाहरण एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट (एसीआई) के कार्डियोलॉजी विभाग में हुआ, जहाँ 68 वर्षीय महिला मरीज पर देश का छठा और किसी भी सरकारी संस्थान का पहला बैकमैन टोटल फिजियोलॉजिकल पेसिंग सफलतापूर्वक किया गया।

    डॉक्टरों के अनुसार यह जटिल प्रक्रिया अब तक एम्स दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ जैसे शीर्ष संस्थानों में भी नहीं की गई थी। बैकमैन टोटल फिजियोलॉजिकल पेसिंग का अर्थ है – हृदय की धड़कन को पूरी तरह प्राकृतिक कंडक्शन सिस्टम (conduction system) के जरिए नियंत्रित करना, ताकि मरीज को लंबे समय तक स्थिर और सुरक्षित हृदय गति मिल सके।

    यहां ध्यान देने योग्य है कि अब तक एसीआई और अन्य सरकारी कार्डियक संस्थानों में लेफ्ट बंडल या हिज़ बंडल में लीड लगाने के कई केस हो चुके हैं, लेकिन राइट एट्रियम यानी बैकमैन बंडल में लीड लगाने का यह पहला मामला है। इससे हृदय के दोनों चैम्बर्स की धड़कनें प्राकृतिक विद्युत मार्ग से संचालित होती रहती हैं।

    एसीआई के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि रायपुर निवासी यह मरीज सिक साइनस सिंड्रोम नामक गंभीर हृदय रोग से पीड़ित थी। इस रोग में हृदय को धड़कन देने वाली कोशिकाएँ (पेसमेकर कोशिकाएँ) क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और धड़कन अनियमित हो जाती है। सामान्यतः ऐसे मामलों में वेंट्रिकुलर या लेफ्ट बंडल पेसिंग की जाती है, लेकिन इस मरीज का हृदय कमजोर था और एट्रियल रिद्म भी अनियमित थी। केवल वेंट्रिकुलर पेसिंग करने से हार्ट फेल्योर और तेज धड़कन का खतरा था।

    इसी कारण एसीआई की टीम ने बैकमैन टोटल फिजियोलॉजिकल पेसिंग का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में हृदय की प्राकृतिक विद्युत संरचना के एट्रियम भाग में पेसमेकर की लीड लगाई गईं। यह तकनीक हृदय को उसके स्वाभाविक ढंग से धड़कने में मदद करती है और हार्ट फेल्योर का जोखिम बेहद कम कर देती है।

    इस तरह संपन्न हुई प्रक्रिया

    सबसे पहले लेफ्ट बंडल की स्थिति का इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी मैपिंग किया गया। फिर ठीक उसी तरह राइट एट्रियम के बैकमैन बंडल की मैपिंग कर लीड इंप्लांट की गई। इस तरह पूरा पेसिंग सिस्टम प्राकृतिक ढंग से काम करने लगा।

    उपचार करने वाली टीम में कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव, डॉ. एस. के. शर्मा, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. अनुराग कुजूर और डॉ. वेद प्रकाश शामिल थे। यह उपचार मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत किया गया, जिसमें योजना का लाभ दिलाने में मेडिको सोशल वर्कर खोगेंद्र साहू का विशेष योगदान रहा।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट द्वारा किया गया यह सफल उपचार छत्तीसगढ़ की चिकित्सा सेवाओं के उच्च स्तर और निरंतर प्रगति का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल अब केवल सामान्य उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वस्तरीय जटिल प्रक्रियाओं को भी सफलतापूर्वक अंजाम दे रहा है। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों की टीम को साधुवाद देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल मरीजों के जीवन को नई आशा देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी संस्थान चिकित्सा विज्ञान में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।

    स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट, रायपुर द्वारा किया गया यह जटिल उपचार प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती और चिकित्सकों की उत्कृष्ट क्षमता का परिचायक है। उन्होंने कहा कि अब छत्तीसगढ़ के मरीजों को अत्याधुनिक कार्डियक प्रक्रियाओं के लिए महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर नागरिक को मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से निःशुल्क और उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हों। स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सक दल को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय चिकित्सा मानचित्र पर और अधिक प्रतिष्ठित करेगी।

    उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022-23 में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी के सर्वाधिक मामलों के उपचार में एसीआई देशभर में पाँचवें स्थान पर रहा है।

  • मुख्यमंत्री साय बोले – जनता की समस्याएँ हल करने में अधिकारियों की अहम भूमिका

    रायपुर,

     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में 2024 बैच के 13 एवं 2021 बैच के एक अधिकारी शामिल थे।

    मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रशासन की धुरी हैं। जनता की समस्याओं को हल करने में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के साथ-साथ आपको प्रबुद्ध नागरिक के रूप में समाज की भी चिंता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक बेहतर समाज के निर्माण में आप सभी अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी अधिकारियों को पदेन दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने के लिए शुभकामनाएँ दीं।

    छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक टी.सी. महावर ने मुख्यमंत्री  साय को अवगत कराया कि इन अधिकारियों का 7 अप्रैल 2025 से प्रारंभ हुआ इंडक्शन कोर्स अब समाप्त हो रहा है। इसके बाद ये सभी अधिकारी राज्य के विभिन्न जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में सेवा देंगे, जहाँ वे शासन के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को समझेंगे।

    मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके प्रशिक्षण के अनुभव भी जाने। उन्होंने कहा कि यह आपका सौभाग्य है कि आपको राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला है। यह अवसर सभी को नहीं मिलता। पूरे मनोयोग से इस अवसर का लाभ उठाते हुए निष्ठा और समर्पण के साथ अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करें।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन का काम जनहित की नीतियाँ बनाना है, लेकिन उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर ही रहती है। छत्तीसगढ़ एक अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ प्रचुर मात्रा में खनिज और वन संपदा है, मिट्टी उर्वरा है और पावर सेक्टर बहुत मजबूत है। राज्य के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी रुकावट था, जो अब अपनी अंतिम साँसें गिन रहा है। हमारे जवान पूरी मुस्तैदी से नक्सलियों का मुकाबला कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल समस्या का उन्मूलन कर दिया जाएगा। हमारे बहादुर जवान डटकर मुकाबला कर रहे हैं। इस लक्ष्य की प्राप्ति के बाद छत्तीसगढ़ और तेजी से विकसित होगा। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के रूप में आपकी जिम्मेदारी भी और अधिक बढ़ जाएगी। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज को आगे लाने में आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता लाना हमारी प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जहाँ सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में  ई-ऑफिस प्रणाली भी लागू की गई है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति निवेशकों को आकर्षित कर रही है। अब तक हमें साढ़े 7 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्य बनाने में आप सभी की भूमिका होगी।

    मुख्यमंत्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा कि राजस्व मामले सीधे जनता से जुड़े होते हैं। कई बार प्रशासनिक अधिकारियों की एक छोटी-सी पहल से भी लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राजस्व मामलों के समयबद्ध निराकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। राजस्व प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर सरल बनाया जा रहा है।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संयुक्त संचालक प्रणव सिंह तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

  • रेडीमेड घटिया वर्दी के विरोध में कोटवार संगठन पहुंचा जनसुनवाई

    जबलपुर/ मण्डला

    बताया बिचौलियों के द्वारा घटिया कपड़े से बनी रेडीमेड जोकर जैसी रेडीमेड वर्दी नहीं लेंगे पहले की तरह कोटवारों के खाते में जमा हो पैसे,कोटवार खुद पसंद के कपड़े खरीदकर सिलाई कराकर पहनेंगे।

                    घटिया से घटिया कपड़े से बने रेडीमेड अनफिट वर्दी एवं घटिया सामग्रियां जबरन न थोपे जाने कोटवारों ने जनसुनवाई में आवेदन दिया है। जिसमें यह भी चाहा गया है,कि जिस तरह दो साल पहले इन सामग्रियों को खरीदने के लिए राशि कोटवारों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती रही है,उसी तरह अब भी जमा कराए जाने का निवेदन किया है। कोटवार संगठन के जिला उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता शंकर दास पड़वार,जिला अध्यक्ष रंजीत पड़वार और संगठन मंत्री कुंवर दास धार्वैया ने संयुक्त रूप से यह भी बताया है,कि कोटवारों को घटिया क्वालिटी के कपड़े से बने ढीली-ढाली जोकर के पहनावे जैसी वर्दी बांटने को लेकर जिले के समस्त तहसीलदारों के लिए हाल ही में कलेक्टर मण्डला के द्वारा आदेश जारी हुआ है।

    जिसको सोशल मीडिया पर वायरल होते देख जोकर जैसी वर्दी जबरेन थोपे जाने की प्रक्रिया को लेकर जिले भर के साढ़े सात सौ कोटवारों में आक्रोश की लहर दौड़ गई। जगह-जगह कोटवारों की चिंतन बैठकों का दौर चल गया और मंगलवार 23 सितंबर को जनसुनवाई पहुंच गए। जहां पर निवेदन किया गया है,कि इस संबंध में प्रदेश संगठन के द्वारा हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई है।जो विचाराधीन है। जिस पर निर्णय आते तक वर्दी नहीं दिए जाने चाहिए। जबरेन थोपने पर समस्त कोटवार पुरजोर विरोध करेंगे।जनसुनवाई में कलेक्टर के द्वारा दिए गए जवाब से कोटवार संगठन और अधिक चिंताग्रस्त हो गया है।

    कलेक्टर ने कहा है,कि शासन के द्वारा प्राप्त दिशानिर्देश का पालन जिला प्रशासन को करना है।जबकि कोटवारों का बस इतना सा निवेदन था,कि पूर्व वर्षों की भांति वर्दी एवं सामग्रियां (दो जोड़ वर्दी, गरम कोट, जूता एवं टॉर्च) की राशि कोटवारों के सीधे बैंक खाते में हस्तांतरण किया जाए।जबकि लगभग एक साल से इस मुद्दे को लेकर जिले से लेकर राज्य स्तर तक ज्ञापन,भेंट और आंदोलनों का दौरा चलाया गया पर सरकार है जो मानने से रही और बिचौलियों को फायदा दिलाने कोटवारों का शोषण करने उतारू हो गई है।इस निवेदन पर कोटवार के पक्ष में सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है,और इसके बाद भी रेडीमेड वर्दी लेने मजबूर करने पर जिले के साढ़े सात सौ कोटवार सारे शासकीय काम बंद करके कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठकर काम बंद हड़ताल करने मजबूर हो जाएंगे ।

     जिसकी संपूर्ण जवाबदेही शासन प्रशासन की होगी।इस मौके पर मुख्य रूप से कोटवार संगठन के मार्गदर्शक पी.डी.खैरवार,जिला अध्यक्ष रंजीत पड़वार, जिला संगठन प्रभारी कुंवर दास धार्वैया, कोषाध्यक्ष धीरज बैरागी, सचिव मनोज झारिया सहित बड़ी संख्या में जिले भर के कोटवार पहुंचे।