• गैर-दलितों के बहिष्कार पर मंत्री का मानवीय कदम, दलित परिवार संग भोजन कर दिया मजबूत संदेश

    रायसेन 

     रायसेन में जिस दलित परिवार के यहां भोजन करने वालों का सामाजिक बहिष्कार हुआ था, मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने उसी परिवार के घर भोजन कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया. 

    दरअसल, जिले के पिपरिया पुंआरिया गांव में अनुसूचित जाति (SC) के संतोष परते के घर एक कार्यक्रम में भोजन करने वाले गैर दलितों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था. जब यह बात स्थानीय विधायक और प्रदेश के स्वास्थ्य राज्यमंत्री मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल को पता चली, तो वे अगले दिन पिपरिया पुंआरिया पहुंचे और संतोष परते के घर भोजन करने चले गए. 

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में नरेंद्र शिवाजी पटेल संतोष के परिवार के साथ बैठकर भोजन करते दिख रहे हैं.

    मंत्री ने कहा कि वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 'एकात्म मानववाद' में विश्वास रखते हैं. ताकि अंतिम छोर पर खड़े शख्स की चिंता हो सके. वहीं, दलित समाज से आने वाले संतोष ने कहा, "हमारे लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण क्या हो सकता है कि प्रदेश सरकार के मंत्री हमारे घर भोजन करने आए."

  • रायपुर में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की उपस्थिति, स्वास्थ्य शिविर और अग्रसेन जयंती में भाग लिया

    रायपुर

    महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज भटगांव विधानसभा अंतर्गत भैयाथान में कई कार्यक्रमों में भाग लेकर क्षेत्रवासियों से संवाद स्थापित किया और विभागीय गतिविधियों की समीक्षा की।

    मंत्री श्रीमती राजवाड़े इस दौरान ग्राम बंजा के उपस्वास्थ्य केंद्र में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि, चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को निःशुल्क परामर्श एवं उपचार की सुविधा दी गई, जिससे लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला।

    मंत्री भैयाथान स्थित मंगल भवन में आयोजित अग्रसेन जयंती समारोह में भाग ली। समाज के प्रबुद्धजनों एवं नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्य रूप दिया। इस अवसर पर मंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा, “अग्रसेन महाराज के आदर्शों को जीवन में अपनाकर हम समाज में भाईचारे, समानता और सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत कर सकते हैं। हमें समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।”

    भैयाथान प्रवास के दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय, जनपद कार्यालय, विकासखंड कार्यालय एवं शिक्षा अधिकारी कार्यालय का निरीक्षण भी किया। उन्होंने अधिकारियों-कर्मचारियों से विभिन्न कार्यों की जानकारी ली और विभागीय गतिविधियों की समीक्षा की।

  • इंदौर हादसा: 3 मंजिला इमारत गिरी, दो की मौत, 12 घायल — चार की हालत गंभीर

    इंदौर
    सेंट्रल कोतवाली थाना क्षेत्र के कोष्टी मोहल्ले में सोमवार की रात करीब 10 बजे एक 3 मंजिला इमारत अचानक से धराशाई हो गया. इस घटना में एक युवती सहित 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 लोग घायल हो गये हैं. इनमें से 4 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है. घटना के वक्त मकान में कई लोग मौजूद थे. रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी इंदौर नगर निगम और पुलिस की टीम ने घायलों को इलाज के लिए एमवाय अस्पताल पहुंचाया है, जहां उनका इलाज जारी है.

    देर रात भरभराकर गिरी बिल्डिंग

    कोष्टी मोहल्ले में शब्बू अंसारी का करीब 15 साल पुराना यह 3 मंजिला मकान था. इस बिल्डिंग में 4 परिवार रहते हैं. घटना के समय इनमें से 9 लोग रिश्तेदार के यहां गए हुए थे, जबकि मलबे में 14 लोग दब गए. बताया जा रहा है बारिश के कारण बिल्डिंग में दरारें पड़ गई थीं. साथ ही बिल्डिंग के तलघर में पानी भरा रहता था, इसी वजह से ये धंस गई.

    हादसे की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस और प्रशासन को दी गई। इमारत 8 से 10 साल पुरानी बताई जाती है। दमकल विभाग और नगर निगम की टीमें बचाव के काम में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि पहली प्राथमिकता फंसे लोगों को निकालने की है। जेसीबी मशीनें मलबा हटाने में लगी हैं। घटनास्थल को सील कर दिया गया है। वरिष्ठ अधिकारी बचाव के काम की निगरानी कर रहे हैं।

    अधिकारी मौके पर जमा भीड़ को दूर कर रहे हैं। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के साथ कलेक्टर शिवम वर्मा भी मौके पर डटे हैं। हादसे के वक्त इमारत में कई लोगों के होने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों की मानें तो इमारत के बेसमेंट में पानी भरा था। मौके पर पहुंचे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि इमारत का कुछ हिस्सा पड़ोस की बिल्डिंग पर भी गिरा है। बचाव के काम के चलते रानीपुरा क्षेत्र की बिजली काट दी गई है।

    जर्जर हालत में थी बिल्डिंग

    जैसे ही मामले की जानकारी पुलिस और इंदौर नगर निगम की टीम को लगी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव और इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू कार्य शुरू कराया. इस दौरान प्रारंभिक तौर पर घटनाक्रम में घायल हुए 10 लोगों को रात 12 बजे तक निकलकर इंदौर के एमवाय हॉस्पिटल में पहुंचा दिया गया, जबकि 3 लोग मलबे में नीचे तक दबे थे. उन्हें बाहर निकालने के लिए देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला.

    घायलों का इलाज जारी

    हादसे पर कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि "घटनाक्रम की जैसे ही जानकारी लगी तुरंत मौके पर पहुंचे. मलबे में दबे कई घायलों को रेस्क्यू कर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है. प्रारंभिक तौर पर किसी की भी मौत की सूचना नहीं मिली थी. मलबे में दबे सभी लोगों को मंगलवार की सुबह करीब 4 बजे तक बाहर निकाल लिया गया है. बाद में इनमें से 2 लोगों के मौत की सूचना मिली थी." इस पर इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह का कहना है कि " घायलों को एमवाय अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज कराया जा रहा है."

    अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी

    घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय भाजपा विधायक गोलू शुक्ला सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे. इस हादसे पर भाजपा विधायक ने चिंता जताई. साथ ही उनका कहना है कि "इस क्षेत्र में मौजूद अवैध अतिक्रमण को हटाने को लेकर कई बार इंदौर नगर निगम को पत्र लिख चुके हैं. अब इतनी दर्दनाक घटना घटित हो चुकी है. इसके चलते क्षेत्र में मौजूद अवैध अतिक्रमणों पर कार्रवाई कल से शुरू कर दी जाएगी."

     

  • पिछड़ा वर्ग को न्याय दिलाने के लिए कृतसंकल्प है मध्य प्रदेश सरकार: सीएम यादव

    पिछड़ा वर्ग आरक्षण के संबंध में प्रतिबद्ध मध्य प्रदेश सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    नई दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल और केंद्रीय मंत्री से मुलाकात

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को नई दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल श्री तुषार मेहता और केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राजभूषण चौधरी से भेंट की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के संबंध में राज्य सरकार द्वारा प्रतिबद्धता के साथ कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस संबंध में विस्तार से विमर्श किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश भवन में सांसदगण से भी मुलाक़ात की। 

    हर घर जल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश सरकार

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिल्ली प्रवास के दौरान केन्द्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राजभूषण चौधरी से भेंट कर मध्यप्रदेश के लिये पेयजल संबंधी योजनाओं के संबंध में चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय राज्यमंत्री श्री चौधरी को बताया की जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में सभी जिलों में कार्य हो रहा है। प्रदेश सरकार नागरिकों के लिए घर-घर तक जल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में क्रियान्वित कार्यों की नियमित समीक्षा भी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र सरकार के अधिकारीगण से भी चर्चा की। 

     

  • रामलला के दर्शन अब आसान, तीर्थ यात्रा योजना से लाभान्वित हो रहे श्रद्धालु: रायपुर में बोले वित्त मंत्री

    रायगढ़ जिले के 1200 से अधिक श्रद्धालुओं ने उठाया योजना का लाभ

    रायपुर

    रायगढ़ जिला प्रशासन द्वारा नगर निगम ऑडिटोरियम में रामलला दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में शामिल वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान में भव्य सम्मेलन आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने भगवान राम की छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। रामायण आरती के साथ वातावरण राममय हो उठा।

     चौधरी ने श्रद्धालुओं का चरणस्पर्श कर आशीर्वाद लिया और कहा कि यह योजना वास्तव में बुजुर्गों के सपनों को साकार करने वाली योजना है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी का भगवान राम से गहरा नाता है। माता कौशल्या छत्तीसगढ़ की बेटी थीं, इसलिए भगवान राम को हम भांजा मानते हैं। उन्होंने कहा कि त्रेतायुग में 14 वर्षों का वनवास समाप्त हुआ था, लेकिन कलियुग में राममंदिर निर्माण के लिए 500 वर्षों का संघर्ष करना पड़ा। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक अयोध्या का भव्य मंदिर आज साकार हुआ है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि श्रद्धालुओं को रामलला और प्रमुख तीर्थों का दर्शन कराया जाएगा। आज रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना हजारों परिवारों के लिए आशीर्वाद बन चुकी हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने गांवों में राम के आदर्शों और उनके चरित्र का संदेश जन-जन तक पहुंचाएं।

    यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं

    जिला पंचायत सीईओ  जितेंद्र यादव ने बताया कि तीर्थयात्रियों के लिए आवास, भोजन, परिवहन और चिकित्सा की संपूर्ण व्यवस्था की जाती है। प्रत्येक यात्री को विशेष पहचान पत्र भी प्रदान किया गया। इच्छुक श्रद्धालु आगामी यात्राओं के लिए जिला पंचायत और नगर निगम कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

    श्रद्धालुओं ने साझा किए अनुभव

    जिले के विभिन्न विकासखण्डों से अब तक 1206 श्रद्धालु (745 पुरुष एवं 461 महिलाएं) अयोध्या, काशी और अन्य तीर्थों का दर्शन कर चुके हैं। सम्मेलन में श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया।

    पुसौर निवासी  खगेश्वर पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, वर्तमान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के प्रयास से ही यह संभव हुआ। राजकुमारी साव ने यात्रा को सहज और सुखद बताते हुए कहा कि पूरी यात्रा परिवार जैसे वातावरण में पूरी हुई। उमेश सिंह सिदार ने कहा कि सरकार वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान हेतु लगातार कार्य कर रही है। वहीं सावित्री भगत ने कहा कि अयोध्या दर्शन उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। सुनील थवाईत ने बताया कि यात्रा में स्वच्छ भोजन, सुरक्षा और स्वागत की उत्कृष्ट व्यवस्था रही। काशी और अयोध्या के दर्शन उनके जीवन के सबसे सुखद क्षण रहे।

    सम्मेलन में योजनाओं से जुड़ी अविस्मरणीय स्मृतियों को समेटे हुए वीडियो प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक ग्रुप फोटो लिया गया। श्रद्धालुओं को स्मृति स्वरूप रामचरितमानस की पुस्तक, शाल, फल और यात्रा के फोटोग्राफ भेंट किए गए। इस अवसर पर नगर निगम रायगढ़ महापौर  जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  दीपक सिदार, नगर निगम सभापति  डिग्रीलाल साहू, जिला पंचायत सदस्य मती सुषमा खलखो सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कलेक्टर  मयंक चतुर्वेदी, जिला पंचायत सीईओ  जितेंद्र यादव और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

  • राज्यपाल ने वितरित किए सिकल सेल जेनेटिक कार्ड

    नारी स्वस्थ होगी तो परिवार भी होगा स्वस्थ : राज्यपाल  पटेल

    प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया अभियान में देश में सर्वाधिक एक करोड़ से अधिक की हुई स्क्रीनिंग
    राज्यपाल ने वितरित किए सिकल सेल जेनेटिक कार्ड

    भोपाल

    राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि नारी स्वस्थ होगी तभी परिवार स्वस्थ रहेगा। घर में, माँ स्वस्थ हो तो पूरे परिवार की देखभाल अच्छे से  कर सकती है। राज्यपाल  पटेल राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत सोमवार को मुरार सर्किट हाउस में  आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। आयोजन स्वच्छता ही सेवा पखवाड़े के तहत किया हुआ। उन्होंने कार्यक्रम में सिकल सेल जेनेटिक कार्डों का वितरण भी किया।

    राज्यपाल  पटेल ने कहा कि सिकल सेल स्क्रीनिंग में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य है, जहाँ एक करोड़ से अधिक व्यक्तियों की स्क्रीनिंग का कार्य किया गया है। आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कार्ड वितरण कार्य भी प्रदेश में अनुकरणीय तरीके से हुआ है। उन्होंने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन अभियान अमृत काल का यह एक महत्वपूर्ण अभियान है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया मुक्त मिशन का वर्ष 2023 में शुभारंभ किया था। देश से वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन के लिए अभियान के रूप में तेज गति कार्य किये जा रहे हैं  है। वर्तमान में देश के 17 राज्यों के 278 जिलों का चयन कर सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन का कार्य हो रहा है।  प्रदेश के जबलपुर में अनुसंधान प्रबंधन एवं नियंत्रण केन्द्र प्रारंभ किया गया है।

    राज्यपाल  पटेल ने समारोह में आह्वान किया है कि सिकल सेल एनीमिया की जाँच सभी को कराना चाहिए। खासतौर से महिलाओं को इसकी जाँच अवश्य कराना चाहिए। स्वच्छता ही सेवा पखवाड़े के तहत देश भर में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाकर नि:शुल्क दवाओं का वितरण किया जा रहा है। इस अभियान का लाभ उठाकर सभी लोगों को अपने स्वास्थ्य की जाँच अवश्य कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने सम्पूर्ण देश में लगभग 15 हजार जन औषधि केन्द्र शुरू करायें हैं।  केन्द्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती और अच्छी दवायें उपलब्ध हो रही हैं।

    राज्यपाल ने युवाओं को प्रदान किए हेलमेट

    राज्यपाल  मंगुभाई पटेल सोमवार को परिवहन विभाग द्वारा मुरार सर्किट हाऊस में आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल हुए। उन्होंने वाहन चलाते समय सुरक्षा के समुचित प्रबंध करने पर बल दिया। सड़क दुर्घटनाओं से बचने के लिए चालक के साथ ही सहयात्री को भी हेलमेट पहनने का परामर्श दिया। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना से बचाव का प्रभावी तरीका हेलमेट पहनकर वाहन चलाना है। राज्यपाल ने कार्यक्रम में 10 युवाओं को हेलमेट का वितरण भी किया। समारोह में जनप्रतिनिधि और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे।

     

  • दिव्यांग खिलाड़ियों और पूर्व नक्सलियों के लिए खुला दरवाज़ा, बस्तर ओलंपिक 2025-26 का आगाज़, पंजीयन शुरू

    रायपुर

    बस्तर अंचल के युवाओं को खेलों की मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी छिपी हुई प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा “बस्तर ओलंपिक 2025-26” का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए खिलाड़ियों का पंजीयन शुरू हो गया है। सरकार ने सभी संभागायुक्त और जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर बस्तर ओलंपिक प्रतियोगिता में अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    खेल एवं युवा कल्याण विभाग इस आयोजन का मुख्य आयोजन विभाग होगा जबकि गृह (पुलिस) विभाग को नोडल विभाग नियुक्त किया गया है। विकासखण्ड स्तर पर आयोजन समिति का गठन संबंधित कलेक्टरों द्वारा किया जाएगा। जिला और संभाग स्तरीय समितियां सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार गठित की गई हैं। जिला स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत या किसी वरिष्ठ राज्य प्रशासनिक अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।

    शुभंकर एवं लोगो
    बस्तर ओलंपिक का शुभंकर और लोगो पिछले वर्ष की तरह इस बार भी “वन भैंसा” और “पहाड़ी मैना” होंगे। इनका उपयोग व्यापक प्रचार-प्रसार में किया जाएगा। शासन ने सभी जिलों को प्रतियोगिता में अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने, पंजीयन सुविधा और अन्य तैयारियाँ तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए है। यह आयोजन बस्तर क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को पहचान दिलाने, युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और शासन एवं जनता के बीच संबंध मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल सिद्ध होगी।

    राज्य शासन की मंशा है कि इस आयोजन के माध्यम से बस्तर अंचल की खेल प्रतिभाओं को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिले तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा मिले। इस आयोजन की खासियत यह है कि नक्सल हिंसा में दिव्यांग हुए प्रतिभागियों एवं आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों को सीधे संभाग स्तर पर प्रतिभागिता का अवसर दिया जाएगा। इससे उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त होगा। वेटलिफ्टिंग और हॉकी की प्रतियोगिताएं जिला स्तर से होंगी जबकि अन्य खेलों में विकासखण्ड से लेकर संभाग स्तर तक मुकाबले आयोजित किए जाएंगे।

    इस प्रतियोगिता का आयोजन त्रिस्तरीय स्वरूप में विकासखण्ड, जिला और संभाग स्तर पर किया जाएगा। आयोजन में 11 खेल होंगे जिसमें एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराते, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और रस्साकशी जैसे खेल शामिल होंगे। प्रतियोगिता जूनियर एवं सीनियर वर्ग में होगी।

    प्रतियोगिता में शामिल खेल
    आयोजन में एथलेटिक्स के अंतर्गत 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊँची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो और 4×100 मीटर रिले रेस का आयोजन होगा। तीरंदाजी में इंडियन राउंड 30 और 50 मीटर, वेटलिफ्टिंग में जूनियर व सीनियर वर्गों के लिए अलग-अलग भार वर्ग और कराते में आयु एवं वजन के आधार पर वर्ग निर्धारित किए गए हैं। कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल और फुटबॉल में भी खिलाड़ियों को व्यापक अवसर मिलेगा। रस्साकशी केवल महिला सीनियर वर्ग के लिए प्रदर्शनात्मक खेल के रूप में आयोजित होगी।

    पंजीयन 22 सितंबर से 20 अक्टूबर तक
    प्रतियोगिता के लिए पंजीयन प्रक्रिया 22 सितंबर से 20 अक्टूबर 2025 तक चलेगी। इसके बाद 25 अक्टूबर से 5 नवम्बर तक विकासखण्ड स्तरीय, 5 से 15 नवंबर तक जिला स्तरीय और 24 से 30 नवंबर तक संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। प्रतियोगिता दो आयुवर्गों में होगी, जूनियर वर्ग 14 से 17 वर्ष तक तथा सीनियर वर्ग जिसमें कोई आयु सीमा नहीं रहेगी।

  • भोपाल से अब सीधी उड़ान, 26 अक्टूबर से गोवा, अहमदाबाद और रायपुर के लिए फ्लाइट शेड्यूल जारी

     भोपाल 
    राजाभोज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हवाई यात्रियों के लिए एक बार फिर अच्छी खबर आई है। इंडिगो एयरलाइंस ने भोपाल एयरपोर्ट से गोवा, अहमदाबाद, रायपुर जैसे शहरों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट सुविधा दोबारा शुरू कर दी है। पिछले साल इन शहरों के लिए संचालित उड़ानों को यात्रियों की कमी का हवाला देकर बंद कर दिया गया था। पिछले 12 महीने से लगातार उठ रही डिमांड और हाल ही में किए गए यात्री सर्वे के बाद बेहतर पैसेंजर रिस्पांस के बाद इंडिगो एयरलाइंस ने 26 अक्टूबर से इन तीनों शहरों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट सुविधा दोबारा शुरू करने का ऐलान कर दिया है।

    भोपाल एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी ने बताया कि भोपाल हवाई अड्‌डे ने यात्रियों के लिए अपनी हवाई कनेक्टिविटी को और मजबूत किया है। अहमदाबाद, रायपुर, गोवा रूट पर डायरेक्ट फ्लाइट सेवा शुरू होने के बाद भोपाल एयरपोर्ट से प्रतिदिन उड़ानों की संख्या 36 दर्ज की जाएगी। 26 अक्टूबर से गोवा और अन्य शहरों के लिए सीधी उड़ान सेवा शुरू की जा रही है। इंडिगो एयरलाइंस गोवा के लिए दोपहर 2:40 पर विमान सेवा संचालित करेगी। गोवा से दोपहर 2:40 पर आने वाली फ्लाइट 3:30 पर दोबारा गोवा के लिए उड़ान भरेगी।

    राजा भोज एयरपोर्ट से 4 नई उड़ानें शुरू

    राजधानी भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट से 4 नई उड़ानें शुरू हुई हैं। 15 सितंबर से इंडिगो बेंगलुरु के लिए नई फ्लाइट शुरू की। 16 सितंबर से दिल्ली के लिए नई उड़ान शुरू हई। इसके बाद अहमदाबाद के लिए 21 सितंबर से सुबह और हैदराबाद के लिए 22 अक्टूबर से रात की नई फ्लाइट शुरू हुई। 

  • सफर पर असर! MP में कई ट्रेनें रद्द और रूट डायवर्ट, नए साल से पहले रेलवे ने किया बदलाव – देखें डिटेल

    ग्वालियर
     पुराने साल की विदाई और नए साल के स्वागत को लेकर सैर-सपाटे की योजना बनाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं। वीरंगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म तीन पर वाशेबल एप्रन हटाकर गिट्टी रहित पटरी बिछाने का काम होने के कारण डेढ़ माह तक कई ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। 25 नवंबर से आठ जनवरी के बीच ग्वालियर होकर चलने वाली पांच जोड़ों ट्रेनों को रेलवे ने रद्द (Cancelled Train in MP) किया है, जबकि कई ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से संचालित किया जाएगा।

    ये ट्रेनें रहेंगी रद्द

    – ट्रेन क्रमांक 11901-11902 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-आगरा कैंट एक्सप्रेस 25 नवंबर से लेकर नौ जनवरी तक रद्द रहेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 11903-11904 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-इटावा एक्सप्रेस 25 नवंबर से नौ जनवरी तक रद्द रहेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 05073-05074 बेंगलुरु सिटी-लालकुआं साप्ताहिक ट्रेन को 29 नवंबर से छह जनवरी तक रद्द किया गया है।

    – ट्रेन क्रमांक 07363-07364 योगनगरी ऋषिकेश-हुबली साप्ताहिक ट्रेन 27 नवंबबर से पांच जनवरी तक रद्द रहेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 06597-06598 योगनगरी ऋषिकेश-यशवंतपुर को 27 नवंबर से एक जनवरी तक रद्द किया गया है।
    परिवर्तित मार्ग से चलेंगी ये ट्रेनें

    – ट्रेन क्रमांक 22456 कालका-साईनगर शिरडी एक्सप्रेस को 27 नवंबर से चार जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना होकर चलाया जाएगा।

    – ट्रेन क्रमांक 16318 श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा-कन्याकुमारी एक्सप्रेस 24 नवंबर से पांच जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 20494 चंडीगढ़-मदुरै एक्सप्रेस 28 नवंबर से पांच जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 16032 श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा-चेन्नई सेंट्रल 25 नवंबर से छह जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 16788 श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा-तिरुनेलवेली एक्सप्रेस 27 नवंबर से एक जनवरी तक मथुरा-बयाना-सागरिया-रूठियाई-बीना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 14314 बरेली-लोकमान्य तिलक टर्मिनस 29 नवंबर से तीन जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी।

    – इसी प्रकार ट्रेन क्रमांक 14320 बरेली-इंदौर एक्सप्रेस 26 नवंबर से सात जनवरी तक तक अपने बदले हुए मार्ग ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 12162 आगरा कैंट-एलटीटी लश्कर एक्सप्रेस 29 नवंबर से तीन जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 22706 जम्मूतवी-तिरुपति 28 नवंबर से दो जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 12752 जम्मूतवी-नांदेड़ 30 नवंबर से चार जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 22408 हजरत निजामुद्दीन-अंबिकापुर एक्सप्रेस 25 नवंबर से छह जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 11078 जम्मूतवी-पुणे झेलम एक्सप्रेस 24 नवंबर से सात जनवरी तक ग्वालियर-गुना-बीना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 09466 दरभंगा-अहमदाबाद एक्सप्रेस एक दिसंबर से पांच जनवरी तक बदले हुए मार्ग कानपुर से इटावा-ग्वालियर-गुना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 09465 अहमदाबाद-दरभंगा एक्सप्रेस 28 नवंबर से दो जनवरी तक कानपुर-इटावा-ग्वालियर-गुना के रास्ते चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 11123 ग्वालियर-बरौनी मेल 25 नवंबर से आठ जनवरी तक ग्वालियर से इटावा होते हुए कानपुर तक जाएगी।

    – ट्रेन क्रमांक 11124 बरौनी-ग्वालियर मेल 24 नवंबर से सात जनवरी तक कानपुर-इटावा होते हुए ग्वालियर आएगी।

    – ट्रेन क्रमांक 04137 ग्वालियर-बरौनी एक्सप्रेस 26 नवंबर से सात जनवरी तक ग्वालियर-इटावा होते हुए गोविंदपुरी जाएगी।

    – ट्रेन क्रमांक 04138 बरौनी-ग्वालियर 24 नवंबर से पांच जनवरी तक ग्वालियर-इटावा होते हुए गोविंदपुरी के बीच संचालित होगी।
    इन ट्रेनों के बदले स्टेशन

    – ट्रेन क्रमांक 19665 खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी 26 नवंबर से नौ जनवरी तक आगरा कैंट से शुरू होगी।

    – ट्रेन क्रमांक 19666 उदयपुर-खजुराहो इंटरसिटी 24 नवंबर से सात जनवरी तक आगरा कैंट तक संचालित की जाएगी।

    – ट्रेन क्रमांक 12279-12280 ताज एक्सप्रेस 25 नवंबर से आठ जनवरी तक ग्वालियर से दिल्ली के बीच संचालित की जाएगी।
    देरी से चलेंगी ये ट्रेनें

    – ट्रेन क्रमांक 22196 बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी मंगलवार और बुधवार को 25 नवंबर से एक जनवरी 2026 तक उत्तर मध्य रेलवे पर 90 मिनट विलंब से चलेगी।

    – ट्रेन क्रमांक 02200 बांद्रा टर्मिनस-वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी शनिवार को 29 नवंबर से तीन जनवरी 2026 तक उत्तर मध्य रेलवे पर 90 मिनट देरी से जाएगी।

  • मध्यप्रदेश में प्रशासनिक सुधार की तैयारी, कई अधिकारियों को मिल सकता है नया जिम्मा

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव दशहरे के बाद मातहतों को सुशासन, न्याय और बेहतर कानून व्यवस्था का पाठ पढ़ाएंगे। उससे पहले बड़ी प्रशासनिक सर्जरी तय है। इसमें मुख्यमंत्री कार्यालय के उन अधिकारियों को बदला जा सकता है, जिन्हें उम्मीदों के साथ लाया गया था लेकिन बेहतर परफॉर्मेंस नहीं कर पा रहे। कई कलेक्टरों पर भी गाज गिरनी तय है। ऐसे जिलों की बारी आएगी, जहां के प्रशासनिक मुखिया या तो विवादों में रहे हैं या काम अव्वल दर्जे का नहीं दिखा पाए। नए आइएएस अफसरों व राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों में जिला पंचायत सीईओ बनाकर राहत की पोस्टिंग दी जा सकती है।

    पहली बार कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस

    असल में मोहन सरकार में पहली बार कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस होनी है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के पूर्व होनी थी, लेकिन तमाम विषयों को देखते हुए नहीं कर सके। अब नवरात्र और दशहरा पर्व नजदीक है, इसलिए कॉन्फ्रेंस को आगे खिसका दिया है। इसमें कलेक्टर, संभागायुक्त, एसपी पुलिस कमिश्नर समेत संभागों के आइजी-डीआइजी शामिल होंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित कॉन्फ्रेंस में सीएस अनुराग जैन भी मौजूद रहेंगे।

    जिन जिलों में जिला पंचायत सीईओ ने नहीं हैं, उनमें कटनी, डिंडौरी, अनूपपुर, ग्वालियर, श्योपुर, छतरपुर, रतलाम, सिंगरौली, मंडला, शाजापुर, सीहोर, राजगढ़, हरदा, सीधी. शहडोल, सिवनी, बुरहानपुर शामिल है। सूत्रों के मुताबिक सरकार इन जिलों में सीईओ की कमान जल्द नए अफसरों को दे सकती है। हालांकि अभी इन जिलों में सीईओ का प्रभार दूसरे अफसरों को दे रखा है।

    कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव एजेंडे के साथ बैठेंगे। अलग-अलग सत्रों में अलग-अलग विषयों पर बातचीत होगी। शुरुआत जिलों की कमान संभाल रहे अफसरों के कामकाज पर आधारित रिपोर्ट से होगी। सूत्रों के मुताबिक संबंधितों को बताया जाएगा कि उन्होंने कहां अच्छा किया और कहां मुसीबत पैदा करने वाले काम किए। इस आधार पर ऐसे अधिकारियों को सीख दी जाएगी।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर को बूस्ट! जबलपुर से रायपुर तक बनेगी 150 किलोमीटर की फोरलेन सड़क

    जबलपुर
     जबलपुर से रायपुर की सड़क की दशा जल्द बदलेगी। इस सड़क के कुछ हिस्से पर वाहन चालक चलने से घबराते हैं। इस सड़क को अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण फोरलेन बनाने जा रहा है। सड़क की न सिर्फ चौड़ाई बढ़ेगी बल्कि नए तरह से निर्माण किया जाएगा। जबलपुर से चिल्पी तक करीब 150 किलोमीटर के हिस्से का निर्माण एनएचएआइ करेगा। इस मार्ग के निर्माण में 4500 करोड़ का व्यय होगा। फिलहाल सडक निर्माण के लिए कंसल्टेंसी नियुक्त करने का प्रयास हो रहा है ताकि इसकी डिटेल प्रोजेक्ट बनाकर केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जा सके। सब कुछ ठीक रहा तो यह सड़क जो अभी एमपी रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के पास है, इसे वापस एनएचएआइ सड़क का हस्तातंरण करेगा।

    न्य जीवों के लिए सुरक्षित मार्ग

    जबलपुर से चिल्पी के बीच मंडला क्षेत्र में आने वाला कान्हा नेशनल पार्क का कोर एरिया आता है। जहां वन्यजीवों की घनी आबादी विचरण करती है। ऐसे में एनएचएआई मार्ग में जगह-जगह अंडरपास और ओवर ब्रिज का निर्माण करेंगा ताकि वाहन निकलने से वन्य जीवों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। कई जगह साउंड प्रूफ उपकरण भी लगाए जाएंगे जिससे बंदरों और अन्य जीवों को वाहनों की आवाजाही खलल न पैदा करें। बता दें करीब 25 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की लागत आ रही है।

    फोरलेन बनने से बढ़ेगी रफ्तार

    फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग 30 जबलपुर से रायपुर के बीच दो लेन है। इस वजह से वाहनों की आवाजाही में थोड़ी परेशानी होती है। मौसम खराब होने पर वाहनों की लंबी कतार सड़क पर लग जाती है। आवागमन भी बाधित होता है। यहां कुछ जगह लैंड स्लाइडिंग की भी समस्या बनी हुई है इसके लिए लगातार एमपीआरडीसी को शिकायत होती है लेकिन वहां से कोई भी राहत नहीं मिल पा रही है। 

    एमपीआरडीसी द्वारा इस सड़क का निर्माण गुणवत्ताहीन तरीके से कराया जा रहा था। वर्षों से यह सड़क बेहद खराब स्थिति में है जिससे आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब इस सड़क को सरकार फोरलेन में तब्दील होगी तो बड़े स्तर पर राहत मिलने की संभावना है।

    इस सड़क के लिए गडकरी ने मांगी थी माफी

    जबलपुर मंडला की यह वही सड़क है जिसके लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को सड़क की खराब गुणवत्ता के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी थी। गडकरी 2022 में मध्य प्रदेश दौरे पर आए थे। तब उन्होंने मध्य प्रदेश को छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे की इस बदहाल सड़क को देखा। उन्होंने शर्मिंदगी महसूस की। सड़क की स्थिति को देखते हुए मंच से ही माफी मांगी थी। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने ये बयान सात नवंबर 2022 को मध्य प्रदेश के मंडला में दिया था। गडकरी ने जबलपुर से मंडला के बीच नेशनल हाईवे के टेंडर रद्द कर सड़क के इस हिस्से को फिर से बनवाने के निर्देश दिए थे। बाद में इस मार्ग को सुधारने के लिए 53 करोड़ रुपये की लागत से सुधार का काम हुआ था।

    2015 में शुरू हुआ था निर्माण

    राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 251 करोड़ की लागत से जबलपुर से मंडला के बीच इस राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लिए मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन को निर्माण एजेंसी बनाया था। तीन फेस में बनने वाली इस सड़क का काम साल 2015 में शुरू हुआ था, जिसे दिसंबर 2016 तक पूरा हो जाना था। लेकिन, अब तक हाईवे का निर्माण अधूरा है और जहां हाईवे बना वो घटिया निर्माण से टूट-फूट का शिकार है।

    एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जबलपुर से चिल्पी के बीच करीब 150 किमी की सड़क को फोरलेन बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए कंसल्टेंसी की तलाश हो रही है। हम जल्द डीपीआर बनाकर केंद्र को भेजेंगे यदि मंजूरी मिली तो एमपीआरडीसी से यह सड़क लेकर एनएचएआई निर्माण कराएंगा।

  • कमिश्नरी सिस्टम से रायपुर में होगा कानून व्यवस्था सुधार, जानिए क्या है यह सिस्टम

    रायपुर
     कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की तैयारी है। सीएम विष्णुदेव साय के बाद राज्य के गृहमंत्री और डेप्युटी सीएम विजय शर्मा ने भी कमिश्नरी सिस्टम को लेकर अहम जानकारी दी है। विजय शर्मा ने कहा कि हम कमिश्नरी प्रणाली लेकर आ रहे हैं, जिससे पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित होगी और पुलिस त्वरित निर्णय ले सकेगी। जीरो पॉइंट पर निर्णय लेने के लिए प्रैक्टिस चल रही है।

    क्या है कमिश्नरी सिस्टम
    पुलिस कमिश्नरी सिस्टम एक प्रशासनिक व्यवस्था है। इस व्यवस्था के अंतर्गत पुलिस आयुक्त के पास कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से संबंधित सभी शक्तियां होती हैं। ज्यादा शक्तियां होने से पुलिस को तेजी से निर्णय ले सकती है। इस सिस्टम के तहत पुलिस आयुक्त के पास जिला मजिस्ट्रेट जैसी शक्तियां हो जाती हैं।

    कई जगहों पर लागू है यह सिस्टम
    पुलिस कमिश्नरी सिस्टम देश के कई राज्यों में बड़े शहरों में लागू है। जिले का एसपी पुलिस का मुखिया होता है। कानून व्यवस्था को कंट्रोल करना एसपी की अहम जिम्मेदारी होती है। लेकिन यह सिस्टम लागू होने के बाद एसपी, एसएसपी की जगह पुलिस कमिश्नर होता है। पुलिस कमिश्नर किस रैंक के अधिकारी को बनाया जाएगा यह फैसला राज्य सरकार करती है। राज्य सरकार डीआईजी से लेकर एडीजी स्तर तक के अधिकारी को यह जिम्मेदारी दे सकती है।

    जिस अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाती है वह अनुभवी अफसर होते हैं। राज्य सरकार उसके अधिकारों को लेकर नोटिफिकेशन जारी करती है। कौन-कौन से अधिकार देने हैं यह राज्य सरकार तय करती है। यह जरुरी नहीं है कि सारे अधिकार डिस्ट्रिक मैजिस्ट्रेट के जैसे हों।

    क्या बदलाव होंगे
    कमिश्नरी बन जाने से सबसे बड़ा फर्क यह पड़का है कि जिला पुलिस का मुखिया एक अनुभवी और ऊंचे रैंक वाला अधिकारी होता है। बहुत सारे काम उसकी मंसा के अनुरुप होते हैं। पुलिसिंग व्यवस्था प्रभावी बनती है। जरुरत के मुताबिक पुलिस फोर्स मिल सकती है। इसका फायदा आम जनता को भी मिलता है। छोटे मोटे दंड वाले अपराधों की तफ्तीस का अधिकार हेड कांस्टेबल को मिल जाता है। जिससे अपराध को नियंत्रण पर में मदद मिलती है। अभी ऐसे मसलों का निपटारा एसएआई या एसआई रैंक के अधिकारी करते हैं।

  • जबलपुर की शान को मिलेगा वैश्विक दर्जा! भेड़ाघाट और लम्हेटाघाट में छिपे हैं 2200 करोड़ साल पुराने प्रमाण

    जबलपुर
     भेड़ाघाट व लम्हेटाघाट की चट्टानें यूनेस्को के विश्व धरोधर सूची में शामिल होने के करीब पहुंच गई हैं। जिसके बाद नर्मदा तट पर बसे जबलपुर की प्राचीन धरा को अब पूरी दुनिया में पहचान मिलेगी। भूगर्भ शास्त्र के अनुसार दो हजार करोड़ वर्ष पुरानी जबलपुर के नर्मदा तट की चट्टानें सदियों से पृथ्वी की कई संरचनाओं के निर्माण की गवाह रही हैं।

    कुछ वर्ष पहले यूनेस्को ने भेड़ाघाट और लम्हेटाघाट (भूगर्भशास्त्र में लमेटा फार्मेशन के नाम से विख्यात) की चट्टानों को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का निर्णय किया और वर्ष 2021 में लम्हेटा यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल हुआ। संगमरमर के पत्थरों को चीरकर निकलती नर्मदा के इस तट को दुनिया के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की सूची में लाने के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ), जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया, मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड समेत राष्ट्रीय स्तर की अन्य एजेंसी कार्य कर रही हैं।

    विशेषज्ञों के दल ने किया दौरा

    विशेषज्ञों का एक दल ने भेड़ाघाट, लम्हेटा का दौरा किया और इस बात पर सहमति जताई कि यह स्थल अगले दो वर्ष के अंदर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थायी रूप से नाम दर्ज करवा लेगा। डब्ल्यूआइआइ के विषय विशेषज्ञ भूमेश सिंह भदौरिया ने बताया कि यह साइट प्राकृतिक श्रेणी में भूगर्भ के महत्व के लिहाज से देश की पहली अति प्राचीन धरोहर होगी।

    इधर, डब्ल्यूआईआई द्वारा तैयार प्रारंभिक मूल्यांकन को यूनेस्को ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। आगे यूनेस्को से प्रारंभिक मूल्यांकन की रिपोर्ट आने के बाद नामांकन डोजियर यूनेस्को को सौंपा जाएगा। डोजियर जमा होने के बाद यूनेस्को के इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन आफ नेचर (आइयूसीएन) का मूल्यांकन दल स्थल का निरीक्षण करेगा। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग दो वर्ष का समय लगेगा।

    क्या है भूगर्भीय महत्व

    भेडाघाट और इसके निकट दो हजार से बाइस सौ करोड़ वर्ष पुरानी चट़टानों से लेकर पंद्रह लाख वर्ष पुरानी चट्टानें मौजूद हैं। इस समयावधि के बीच पृथ्वी में हुई भू वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रमाण यहां मौजूद हैं। यहां की इगनिंग बराइट नाम की चटटानें इस बात का प्रमाण हैं कि यहां कभी ज्वालामुखी फटने जैसी घटनाएं भी हुई थीं।

    यहां नर्मदा नदी का प्रवाह के परिवर्तन प्रमाण में देखने मिलते हैं जिसे नदी अपहरण कहा जाता है। नर्मदा के इस तट को पूरे विश्व में लमेटा फार्मेशन के नाम से जाना जाता है। भूगर्भ शास्त्रियों के लिए यह स्थल बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यहां विभिन्न समय कालखंड की चट़टानों के साथ-साथ डायनासोर के अंडों के फासिल भी मिले हैं।

    केंद्र के निर्देश पर चल रही प्रक्रिया

    केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निर्देश पर शुक्रवार को विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भेड़ाघाट, लम्हेटाघाट के स्थलों का निरीक्षण किया। दल में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के विज्ञानी डा. गौतम तालुकदार, विषय विशेषज्ञ भूमेश सिंह भदौरिया, प्रोजेक्ट एसोसिएट दीपिका सायरे एवं स्नेहा पांडे, जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया के डा. सुहेल अहमद, सर्वे आफ इंडिया के जयप्रकाश पाटीदार, कुलदीप सिंह बागरी, हेमंत तथा भेडाघाट नगर परिषद के सीएमओ विक्रम सिंह तथा मध्य प्रदेश टूरिज्म कार्पोरेशन के मार्केटिंग प्रमुख योगेंद्र रिछारिया, जीएम अमित सिंह आदि शामिल थे।

    2200 करोड़ साल पुरानी हैं चट्टानें

        लम्हेटाघाट में 2200 करोड़ साल पुरानी चट्टानें हैं इन्हें महाकोशल राक कहा जाता है। करोड़ों साल पहले यहां समुद्र था जिसके किनारे नमी में डायनासोर प्रजनन करते थे। अंडे देते थे। करीब 65 करोड़ साल पहले लम्हेटा में ज्वालामुखी फटा जिसका लावा ठंडा होकर लम्हेटाघाट की चट्टानों में बदल गया। प्राकृतिक रूप से यह अदभुत है कि यहां की चट्टानों में खड़े हो तो एक पैर जिस चट्टान पर होगा वह 22 करोड़ साल पुरानी होगी वहीं दूसरा पैर जिस पर रखा होगा वह 65 करोड़ साल पुरानी। ये बेहद दुर्लभ है। देश में प्राकृतिक श्रेणी में भूगर्भीय महत्व वाली यह पहली साइट है। – भूमेश सिंह भदौरिया, विषय विशेषज्ञ, वर्ल्ड हेरिटेज

    नर्मदा घाटी रहस्य समेटे हुए है

        मां नर्मदा पृथ्वी पर सबसे प्राचीन और पवित्र नदियों में से एक हैं। नर्मदा घाटी अपने आप में अनेक रहस्य समेटे हुए है जो मानव सभ्यता के उन अनजान पहलुओं से अवगत कराती है जिसकी खोज में आधुनिक मानव निरंतर प्रयत्नशील है। नर्मदा मैया के तट पर संगमरमर की चट्टानें करोडों वर्ष के भूगर्भीय परिवर्तन की मूक गवाह हैं जो मानव मात्र को अचंभित कर देती है। जबलपुर का लम्हेटा और भेड़ाघाट यूनेस्को की विश्व धरोहरों की स्थायी सूची में अपना गहरा हस्ताक्षर दर्ज कराने की कगार पर है। इस स्थल को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन निरंतर प्रयत्नशील है।- शिव शेखर शुक्ल, पर्यटन सचिव, एमडी मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड

     

  • एमपी शिक्षा विभाग की योजना: शिक्षकों के लिए हर जिले में 100 आवास बनेंगे

    भोपाल 

    स्कूलों में नियमित पढ़ाई हो सके इसके लिए मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग स्कूलों के पास शिक्षकों को मकान बनाकर देगा। यह महिला शिक्षकों(Government Teacher) के लिए होंगे। लोक शिक्षण संचालनालय इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेगा। यह रिपोर्ट जिलों से मिली जानकारी के आधार पर बनेगी। आवास ऐसे स्कूलों के आसपास बनेंगे जहां आवाजाही मुश्किल होती है। लोक शिक्षण ने सभी जिलों को इसके लिए निर्देश भेजे थे। जिलों से जमीन तलाश करने के बाद उसकी रिपोर्ट मांगी थी। बारिश के कारण इस काम में रुकावट आई। इसे अब फिर शुरू किया जाएगा। विभाग के निर्देश के तहत हर जिले में 100 आवास बनेंगे। महिला शिक्षकों के लिए प्राथमिकता होगी।

    तीन से पांच एकड़ में बहुमंजिला इमारत

    इस प्रोजेक्ट के तहत फ्लैट दिए जाने हैं। यानि विभाग बहुमंजिला इमारतें तैयार कराएगा। हर जिले से इन इमारतों के लिए तीन से पांच एकड़ जमीन को चिन्हित कर रिपोर्ट मांगी गई थी। यह पहला चरण है। हर विकासखंड मुख्यालय पर 100 आवास बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए 3 से 5 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक डीएस कुशवाहा ने इसके संबंध में निर्देश जारी किए गए थे। जिलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर अब समीक्षा होना है।

    इन्हें मिलेगा लाभ

    मध्यप्रदेश में 94 हजार स्कूल हैं। इनमें एक लाख से अधिक महिला शिक्षक(Government Teacher) हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इनकी संख्या 25 हजार से अधिक है। वहीं फिलहाल मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार गांवों और छोटे जिलों के स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों के लिए ही घर का निर्माण कराने की तैयारी कर रहा है।

  • मध्य प्रदेश में करोड़ों की एयर एंबुलेंस सेवा, उपयोग बेहद कम — क्या है वजह?

    भोपाल

     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की महत्वाकांक्षी योजना 'पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा' की उपयोगिता पर सवाल उठाने लगे हैं। इस सेवा के उपयोग में न जनता रुचि ले रही, न ही जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। मई 2024 में प्रारंभ हुई इस सेवा से अभी तक 85 रोगियों को ही प्रदेश के भीतर या दूसरे राज्य में उपचार के लिए पहुंचाया गया है। खास बात यह है कि एंबुलेंस का उपयोग हो या नहीं, पर सरकार की तरफ से एंबुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी को प्रतिमाह नियत घंटों के किराये का भुगतान करने की शर्त है।

    सरकार हेलीकाप्टर का 40 घंटे और हवाई जहाज का 60 घंटे का फिक्स किराया कंपनी को देती है, पर इतने घंटे भी सेवा नहीं ले पा रही है। हेलीकाप्टर का किराया प्रतिघंटे सवा तीन लाख रुपये और हवाई जहाज का दो लाख रुपये है। यानी एक करोड़ 30 लाख रुपये हेलीकाप्टर और एक करोड़ 20 लाख रुपये हवाई जहाज का किराया सरकार प्रति माह चुका रही है, जबकि प्रतिमाह औसतन पांच रोगी ही योजना का लाभ उठा रहे हैं।

    लाभ उठाने वालों में सबसे ज्यादा रीवा के

    कुल 85 मरीजों ने अब तक योजना का लाभ उठाया है, जिनमें सबसे ज्यादा रीवा के 30 (35 प्रतिशत) रोगी हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि रीवा उप मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राजेन्द्र शुक्ल का गृह जिला है। वह यहां बैठकों और आम सभाओं में सेवा का उपयोग करने के लिए अपील करते रहे हैं। इस तरह लगभग 16 माह में प्रदेश के 55 में से 17 जिलों के रोगियों को ही इसका लाभ मिला है। यह स्थिति तब है जब खुद मुख्यमंत्री इस सेवा का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करते रहे हैं।

    ऐसे ले सकते हैं मदद

    आयुष्मान योजना के हितग्राहियों के लिए यह सेवा निश्शुल्क मिलती है। अन्य मरीजों को निर्धारित दर पर भुगतान करना होता है। जरूरत के मुताबिक, रोगी को एक शहर से दूसरे शहर या दूसरे राज्य एयरलिफ्ट किया जाता है। दूसरे राज्य के अस्पताल भेजने के लिए सीएमएचओ की अनुशंसा पर कलेक्टर अनुमति देते हैं।

    रीवा दूर होने के कारण लोग इस सेवा की मदद ले रहे हैं

        भौगोलिक रूप से रीवा दूर होने के कारण त्वरित उपचार के लिए लोग इस सेवा की मदद ले रहे हैं। दूसरा यह कि लोगों में वहां जागरूकता भी अच्छी है। अन्य जिलों के अधिकारियों को भी प्रचार-प्रसार के लिए लगातार कहा जा रहा है। – तरुण राठी, आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा

     

  • रायपुर में कुलियों की नाराज़गी, बैटरी वाहनों को लेकर DRM ऑफिस में विरोध-प्रदर्शन

    रायपुर

    राजधानी रायपुर के रेल यात्रियों को आज रेलवे स्टेशन में कुली नहीं मिले। क्योंकि रायपुर रेलवे स्टेशन पर कुलियों ने अपनी मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया। रायपुर रेलवे स्टेशन पर बैटरी वाहनों के आने को लेकर कुलियों ने जोरदार विरोध किया। कुलियों का कहना है कि पहले ही चक्के वाली ट्रॉली के कारण काम नहीं मिलता था। स्टेशन में बैटरी वाले वाहनों के आने से उनका काम पूरी तरह से बंद हो जाएगा।

    इस मामले में कुलियों का कहना है कि भाटापारा, तिल्दा, दुर्ग रेलवे स्टेशनों में बैटरी कार का परिचालन किया जाना है। बैटरी कार के परिचालन से हम लाइसेंसी पोर्टर्स के बचे-खुचे कार्य पर प्रभाव पड़ेगा और आमदनी कम होने से परिवार चलाना मुश्किल होगा। विदित हो कि पूर्व में भी एस्केलेटर, लिफ्ट, रैंप एवं बैटरी गाड़ी (निःशुल्क) इत्यादि के कारण लगभग 80 प्रतिशत कार्य पहले ही कम हो चुका है। इसके लिए हमारे द्वारा किसी भी प्रकार का विरोध नहीं किया गया था, क्योंकि हमारा रेलवे स्टेशन संपूर्ण सुविधाओं से परिपूर्ण रहना चाहिए।

    लेकिन बैटरी कार के परिचालन से समस्त कुली परिवार प्रभावित होंगे। कुलियों का कार्य कम होने से आर्थिक संकट गहरा जाएगा। कुलियों के समक्ष अपने परिवार के भरण-पोषण की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। बैटरी कार का परिचालन रायपुर, भाटापारा और दुर्ग में नहीं किया जाए, जिससे कि लाइसेंसी कुली अपने-अपने परिवार का भरण-पोषण बिना किसी मानसिक दबाव के कर सकें।

  • पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृह सारनी की यूनिट 10 ने 200 दिन तक किया लगातार उत्पादन

    भोपाल

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी(MPPGCL) के सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी (STPS) की 250 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 10 ने अभियंताओं व तकनीकी कर्मियों के असाधारण समर्पण व कड़ी मेहनत की बदौलत 200 दिन तक सतत् और निर्बाध विद्युत उत्पादन करने में सफलता हासिल की है। यह यूनिट इस वर्ष 5 मार्च से अभी तक लगातार विद्युत उत्पादन कर रही है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सारनी की यूनिट नंबर 10 के अभियंताओं व तकनीकी कर्मियों को इस गौरवशाली उपलब्ध‍ि पर बधाई दी है।

    पिछले 12 वर्षों में रचे नए कीर्तिमान

    सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की 250 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 10 की कमीशनिंग 18 अगस्त 2013 को हुई थी। पिछले बारह वर्षों में इस यूनिट ने विद्युत उत्पादन और ऑपरेशन के नए कीर्तिमान रचे। यूनिट नंबर 10 ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में 305 दिन तक लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया था। वर्ष 2023-24 में इस यूनिट ने क्रमश: 170 व 200 दिनों तक लगातार विद्युत उत्पादन करने का कीर्तिमान बनाया था।

    यूनिट ने अर्जित किया 98.34% पीएएफ

    सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी की यूनिट नंबर 10 ने जब 200 दिनों तक लगातार विद्युत उत्पादन करने में सफलता हासिल की तब यूनिट का प्लांट अवेलेबिलिटी फेक्टर (पीएएफ) 98.34 फीसदी, प्लांट लोड फेक्टर 84.23 फीसदी व ऑक्जलरी कंजम्पशन 8.94 प्रतिशत रहा।

     

  • ग्रामीण अंचल के अंतिम छोर और अंतिम किसान तक पहुंचे कृषि नवाचार के फायदे

    ‘डिजिटल-कृषि’ नवाचार से सीमांत किसानों को सशक्त बनाने की पहल
    आईआईटी इंदौर में हुई ‘एग्रीकनेक्ट’ कार्यशाला

    भोपाल

    कृषि नवाचार के फायदे ग्रामीण अंचल के अंतिम छोर और अंतिम किसान तक पहुंचने चाहिए तभी खेती को लाभ का सौदा बनाकर किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा। डिजिटल कृषि के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आईआईटी इंदौर में सी-डैक पुणे, आईसीएआर-एनएसआरआई इंदौर और आईसीएआर-सीआईएई भोपाल के सहयोग से दो दिवसीय एग्रीकनेक्ट कार्यशाला का आयोजन किया गया।

    कार्य़शाला में एमईआईटीवाई के संयुक्त सचिव श्री के. के. सिंह ने बताया कि किसानों को सशक्त बनाने में डिजिटल कृषि नवाचार की भूमिका महत्वपूर्ण है। कार्याशाला के तकनीकी सत्रों में फसल सुधार, सटीक कृषि, ड्रोन अनुप्रयोग, और एआई-संचालित कीट व रोग निदान जैसे विषयों पर प्रकाश डाला गया। आईसीएआर-आईएएसआरआई, नई दिल्ली के डॉ. अनिल राय ने डिजिटल डिसीडन-सपोर्ट-सिस्टम को अपनाये जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे सीमित संसाधनों वाले किसानों को सही निर्णय लेने में सहयोग मिलेगा।

    कार्यशाला में गैर-सरकारी संगठन, उद्योग प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) एवं कामदार ग्रुप और हाईमीडिया लैब जैसे स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। इंटरैक्टिव गोलमेज बैठकों में नकली उर्वरकों की पहचान, किफायती तकनीकों, और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

    पीआई, एग्रीहब, आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर अरुणा तिवारी ने कृषि नवाचारों को गांव-गांव और प्रत्येक किसान तक पहुंचाये जाने की आवश्यकता जताई। कार्यशाला में आये प्रतिभागियों सहमित जताई कि एग्रीहब मॉडल, कृषि नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और किसान सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय अधो-संरचना के रूप में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

     

  • राज्य स्तरीय वन खेल-कूद प्रतियोगिता-2025 का समापन

    अखिल भारतीय वन खेल-कूद प्रतियोगिता में विजेता खिलाड़ी करेंगे प्रदेश का नेतृत्व

    भोपाल

    राज्य स्तरीय 28वीं वन खेल-कूद प्रतियोगिता का समापन रविवार को टी.टी. नगर स्टेडियम, भोपाल में हुआ। प्रतियोगिता में विजेता खिलाड़ी उत्तराखण्ड में 12 से 16 नवम्बर तक 28वीं अखिल भारतीय वन खेल-कूद प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रदेश का नेतृत्व करेंगे।

    अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को मेडल एवं प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत किया। प्रतियोगिता में बेस्ट एथलेटिक्स का पुरस्कार प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ डॉ. समिता राजौरा को दिया गया।

    अखिल भारतीय वन खेल-कूद प्रतियोगिता में शामिल होने के लिये भोपाल में एक अभ्यास शिविर का आयोजन किया गया। समापन समारोह में पुलिस बैण्ड पार्टी द्वारा शानदार प्रस्तुति दी गयी और खिलाड़ियों द्वारा मार्चपास्ट किया गया। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन बल प्रमुख श्री व्ही.एन. अंबाड़े और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

     

  • गरबा में एंट्री को लेकर विवाद: पोस्टर में गैर-हिंदुओं के लिए चेतावनी, सोशल मीडिया पर मचा हंगामा

    भोपाल 
    मध्य प्रदेश में नवरात्रि से पहले गरबा उत्सवों को लेकर सनातनी संगठनों का सख्त रुख देखने को मिल रहा है. राजधानी भोपाल में श्रीकृष्ण सेवा समिति ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर चेतावनी जारी की है. कमेटी ने पंडालों पर पोस्टर लगाए हैं, जिनमें लिखा है कि गैर-हिंदू यदि गरबा में आएंगे तो उनकी 'घर वापसी' कराई जाएगी. 

    पोस्टर पर जूते-चप्पल, लट्ठ की फोटो के साथ 'जिहादियों की उचित व्यवस्था की जाएगी' का संदेश दिया गया है. कमेटी के कार्यकर्ता हाथों में लट्ठ लेकर पंडालों पर तैनात रहेंगे.

    श्रीकृष्ण सेवा समिति के अध्यक्ष गोपाल ठाकुर ने कहा, "हम गरबा देखने आने वालों को गंगाजल पिलाएंगे और गौमूत्र छिड़केंगे." पूछने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ता आत्मरक्षा के लिए लट्ठ लेकर नजर रखेंगे.

    हाथों में लट्ठ लेकर तैनात रहेंगे समिति के कार्यकर्ता.

    उधर, गरबा पंडालों पर मुस्लिम लोगों की एंट्री को लेकर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जिस तरह सनातन हिंदू विचारधारा के लोग हज यात्रा में नहीं जाते, उसी तरह उनके लोगों को भी गरबा में नहीं आना चाहिए. उन्होंने गरबा के मुख्य दरवाजे पर गोमूत्र रखने की सलाह भी दी.