• कोविड के बाद MP में दिल की बीमारियों से बच्चों की मौत में भारी उछाल, महापंजीयक रिपोर्ट में खुलासा

    भोपाल 

    देश के दिल कहलाने वाले मध्य प्रदेश के लोगों का दिल लगातार कमजोर होता जा रहा है। यह बात मह नहीं कह रहे हैं, बल्कि केंद्रीय महापंजीयक कार्यलय की एमसीसीडी की 2022 तक की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। 

    राज्य में खेल-कूद की उम्र के बच्चों और युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। जून 2025 में जारी भारत के महापंजीयक की रिपोर्ट-2022 के अनुसार, कोविड-19 के बाद दिल की बीमारियों से मौतों में अचानक वृद्धि देखी गई है। यह आंकड़ा राज्य में चिंता का विषय बन चुका है, क्योंकि पहले के मुकाबले इन मौतों की संख्या में भारी वृद्धि हो रही है

    कोविड से पहले वर्ष 2018 में 1 से 4 आयु वर्ग में ऐसी मौतें केवल 0.6% थीं, जो कोविड बाद 2022 में 14.1% हो गईं। इन चार वर्षों में 2250% की अविश्वसनीय वृद्धि दर्ज हुई। 5 से 14 आयु वर्ग में इन्हीं चार साल में यह आंकड़ा 3.7 से बढ़कर 18.6 हो गया, यानी 403% की वृद्धि। 15 से 24 आयु वर्ग में ऐसी मौतें 39.64% बढ़ी हैं। प्रदेश में हर तीसरी मेडिकल सर्टिफाइड मौत दिल संबंधी बीमारियों से हो रही है। संकेत है- दिल को संभालिए।

    कोरोना के बाद से युवा पीढ़ी में भी बढ़ी हार्ट संबंधी समस्या

    -डॉ.गौरव कवि भार्गव, कार्डियोलॉजिस्ट, जेएएच

    ग्वालियर और चंबल संभाग के मरीजों में यह देखने में आ रहा है कि युवा पीढ़ी में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। कोरोना से पहले युवाओं में हार्ट संबंधी परेशानी 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखने आती है, लेकिन कोरोना के बाद युवा पीढ़ी में इन मामलों भी तेजी से देखी जा रही है। स्थिति यह है कि अब 18 वर्ष के युवा में भी देखने में आ रही है। इसके बचाव के लिए नियमित व्यायाम करें,ध्रूम्रपान नहीं करें। सीने में दर्द और घबराहट हो तो विशेषज्ञ को दिखाएं। 

    मध्य प्रदेश में कोविड के बाद आयु-वर्ग के अनुसार मृत्यु दर (प्रति लाख)

    मेडिकल सर्टिफाइड प्रति 100 के हिसाब से प्रतिशत में

    आयु वर्ग 2018 2022 वृद्धि/कमी (%)
    1-4 0.6 14.1 +2250%
    5-14 3.7 18.6 +403%
    15-24 16.9 23.6 +39.64%
    25-34 32.8 28.7 -12.8%
    35-44 48.2 32.2 -33.19%
    45-54 56.4 38.5 -31.73%
    55-64 62.3 43.3 -30.39%
    65-69 66.3 48.3 -27.15%
    70+ 65.7 48.6 -26.03%
    कुल 42 33.9 -19.28%

    हृदय रोगों से होने वाली मौतों का प्रतिशत (राज्य और वर्ष के अनुसार)

    राज्य 2008 2013 2022
    मध्य प्रदेश 19.2% 24.6% 33.9%
    छत्तीसगढ़ 20.7% 50.7% 27.2%
    बिहार 34.8% 29.7% 44.9%
    गुजरात 21.2% 45.2%
    हरियाणा 28.3% 26.3%
    राजस्थान 20.6% 18.5% 24.4%
    पंजाब 23.9% 24.7% 40.8%
    देश में कुल औसत 27% 29% 47.1%

    मप्र में हार्ट अटैक के मामलों में वृद्धि 

    मध्यप्रदेश के ग्वालियर और चंबल संभाग में युवा पीढ़ी में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से पहले 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोग हार्ट अटैक का शिकार होते थे, लेकिन कोविड के बाद अब 18 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। रिपोर्ट से साफ हो गया है कि एमपी में कोविड के बाद दिल की बीमारी से मौतें बढ़ीं हैं। बच्चे को हार्ट अटैक आना बढ़ा है। साथ ही, युवाओं में हार्ट अटैक के केस बढ़े हैं।

     जेएएच कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ. गौरव कवि भार्गव ने कहा कि यह स्थिति अब चिंता का विषय बन चुकी है। युवाओं में बढ़ती दिल की समस्याओं के कारण नियमित व्यायाम, धूम्रपान से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जा रही है।

    हार्ट अटैक के कारण और जोखिम 

    हार्ट अटैक का मुख्य कारण जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं जैसे गलत आहार, मानसिक तनाव, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी हो सकती है। कोविड-19 के बाद की स्थिति में मानसिक तनाव और अनियमित जीवनशैली ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल से जुड़ी बीमारियों का पूर्वानुमान लगाना कठिन होता है क्योंकि इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। कई बार इसके कुछ दिनों पहले कोई संकेत नहीं मिलता और अचानक ही यह समस्या उत्पन्न हो जाती है। 

    दिल की बीमारियों से बचाव के उपाय

    1. नियमित व्यायाम: शारीरिक गतिविधि दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है और रक्त संचार को बेहतर बनाती है।

    2. स्वस्थ आहार: दिल को स्वस्थ रखने के लिए सही आहार जैसे फल, हरी सब्जियां, ओमेगा-3 से भरपूर आहार और कम वसा वाला आहार लेना चाहिए।

    3. धूम्रपान से बचाव: धूम्रपान दिल की बीमारियों का एक प्रमुख कारण है, इसलिए इससे बचना चाहिए।

    4. मानसिक तनाव से बचना: मानसिक तनाव को कम करने के लिए योग, प्राणायाम और ध्यान जैसी गतिविधियां अपनानी चाहिए। 

    बच्चों और युवाओं के लिए सुझाव

    विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और युवाओं को अपनी जीवनशैली को सुधारने की जरूरत है। कोविड-19 ने हमें यह सिखाया है कि सही आहार और व्यायाम से हम कई बीमारियों से बच सकते हैं। बच्चों को खेलने और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। इसके अलावा मानसिक तनाव को कम करने के लिए बच्चों को खेलों में हिस्सा लेने और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। 

    एम्स भोपाल के कार्डियोलॉजिस्ट ने क्या कहा

    एम्स भोपाल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह ने कहा कि 2023 से 2024 के बीच कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक और चलते-चलते गिरने के मामलों में वृद्धि देखी गई थी। हालांकि, अब परिस्थितियाँ बदल रही हैं और अब सामान्य आयु के मरीज भी सामने आ रहे हैं।

    डॉ. शाह के अनुसार, हार्ट अटैक का पूर्वानुमान लगाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि इसके एक या दो दिन पहले कोई स्पष्ट लक्षण नहीं मिलते। उन्होंने बताया कि यदि किसी को सीने में दर्द महसूस हो और यह दर्द गले तथा हाथों तक फैल जाए, तो तुरंत जांच और इलाज कराना बेहद जरूरी होता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हार्ट अटैक से बचाव के लिए सही जीवनशैली और पूरी नींद लेना सबसे प्रभावी तरीका है।

     विभिन्न राज्यों में हृदय रोग से मृत्यु का प्रतिशत (2022)

    स्त्रोत- केंद्र के महापंजीयक कार्यलय की एमसीसीडी की 2022 तक की रिपोर्ट

    राज्य प्रतिशत (%)
    लक्षद्वीप 70.3
    असम 62.7
    आंध्र प्रदेश 60.3
    तमिलनाडु 52.9
    उत्तर प्रदेश 52.0
    महाराष्ट्र 47.0
    जम्मू-कश्मीर 46.3
    पंजाब 45.8
    गुजरात 45.2
    बिहार 44.9
    दिल्ली 21.2
    राजस्थान 24.4
    छत्तीसगढ़ 27.2
    मिजोरम 15.8
    नागालैंड 16.3
    मणिपुर 19.3

     

  • मध्यप्रदेश में खेती सिकुड़ी, पर खाद का इस्तेमाल बढ़ा — किसानों की बढ़ती निर्भरता चिंताजनक

    भोपाल
    मध्य प्रदेश में खेती का रकबा हर साल घटने के बावजूद रासायनिक खाद की खपत लगातार बढ़ती जा रही है। जैविक खेती के मामले में देश में पहले स्थान पर होने के बाद भी किसानों की रासायनिक खाद पर बढ़ती निर्भरता चिंताजनक है। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि जिस तरह से अधिक उत्पादन के लिए मृदा की गुणवत्ता से खिलवाड़ किया जा रहा है, वह खतरनाक है।

    रासायनिक खाद के बढ़ते उपयोग से हर फसल सीजन में खाद की किल्लत की सूचनाएं आम हो चली हैं। वर्ष 2022-23 में 149.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलें बोई गई थीं जो 2025-26 में 146 लाख हेक्टेयर रह गईं। इससे उलट इस अवधि में खाद का उपयोग 29 लाख टन से बढ़कर 33.29 लाख टन (सितंबर प्रथम सप्ताह) पहुंच चुका है।
    जैविक फसल उत्पादन में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत

    देश में जैविक खेती के मामले में मध्य प्रदेश सबसे आगे है। कुल जैविक उत्पादन में 40 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश से आता है। देश में 65 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती होती है जिसमें 16 लाख हेक्टेयर मध्य प्रदेश का है फिर भी विरोधाभास यह है कि किसानों की रासायनिक खाद पर निर्भरता बढ़ रही है। वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच खरीफ फसल का क्षेत्र साढ़े तीन लाख हेक्टेयर घट गया लेकिन खाद की खपत 4.29 लाख टन बढ़ गई।

    रासायनिक खाद-कीटनाशकों के नुकसान को देखते हुए वर्ष 2011 में तत्कालीन शिवराज सरकार ने जैविक खेती को प्रोत्साहित करने विशेष नीति बनाई थी। इसका लाभ यह हुआ कि मध्य प्रदेश जैविक उत्पादन के मामले में नंबर एक पर पहुंच गया।

    विशेषज्ञों की राय : दूरगामी परिणाम ठीक नहीं

        उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान अधिक खाद का उपयोग करता है। तात्कालिक रूप से भले ही इससे लाभ मिलता है लेकिन दूरगामी परिणाम ठीक नहीं होते। मृदा की उर्वरा शक्ति तो प्रभावित होती ही है, भूजल पर भी असर पड़ता है। जो उपज होती है, उसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं होती। – डॉ. जीएस कौशल, पूर्व कृषि संचालक, मध्य प्रदेश

    शरीर का हर अंग होता है प्रभावित

        रासायनिक खाद के माध्यम से एक सीमा से अधिक रसायन मानव शरीर में पहुंचने पर हर सिस्टम पर असर होता है। सबसे अधिक दुष्प्रभाव पेट पर पड़ता है। पेट संबंधी कई बीमारियों के बाद इसका प्रभाव अन्य अंगों पर भी होने लगता है। पोषक तत्व घटने से शरीर में विटामिन व मिनरल्स की कमी होती है। किडनी पर भी असर होता है। कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। – डॉ. आर.आर. वर्डे, सह प्राध्यापक, मेडिसिन

     

  • शहर को सुरक्षित बनाने की पहल, इंदौर के दो थानों में दो-दो थाना प्रभारी की नियुक्ति

    इंदौर
     शहर में लगातार हो रहीं आपराधिक घटनाओं को देखते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर ने एक थाने में 2 थाना प्रभारियों की पोस्टिंग की है. इसको लेकर एक आदेश में जारी किया गया है ताकि शहर में आपराधिक गतिविधियों पर रोकथाम लगाई जा सके. इंदौर में कमिश्नर सिस्टम लागू हुए 2 साल से अधिक हो चुके हैं. लेकिन अभी भी शहर में आपराधिक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. जिससे एक थाने में 2 थाना प्रभारियों की पोस्टिंग की गई है.

    2 थानों में 2 टीआई की नियुक्ति

    इंदौर शहर में अपराध के ग्राफ को कम करने के लिए करीब 2 साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया गया था. लेकिन 2 साल बीतने के बाद भी इंदौर में अपराध के ग्राफ में लगातार इजाफा हो रहा है. इसी कड़ी में इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने आपराधिक घटनाओं पर लगाम कसने के लिए इंदौर के 2 स्थानों पर 2 थाना प्रभारी की नियुक्ति की है.

    काफी बड़ा है इन दोनों थाना क्षेत्र का एरिया

    इसको लेकर एक आदेश भी जारी किया गया है कि, शहर में अपराध पर रोक लगाने के लिए 2 थाना प्रभारी नियुक्त किए गए हैं. जिसमें इंदौर के लसूडिया और विजयनगर थाने पर 2 थाना प्रभारी को तैनात किया गया है. इंदौर के विजय नगर और लसुड़िया थाने का एरिया काफी बड़ा है. इन क्षेत्रों में काफी रहवासी क्षेत्र आते हैं. इसी के चलते दोनों थानों पर सबसे पहले 2 थाना प्रभारी को इंदौर पुलिस कमिश्नर के द्वारा तैनात किया गया है.

    इन थानों के टीआई बदले गए

    इंदौर के विजय नगर और लसुड़िया थाना के अलावा द्वारकापुरी, आजाद नगर, हीरानगर, छत्रीपुरा, और सराफा समेत कई थानों के टीआई बदले गए हैं. विजयनगर में टीआई चंद्रकांत पटेल की पोस्टिंग है. वहीं, उनकी मदद के लिए मीना बौरासी को भी विजयनगर थाने में नियुक्त किया गया है. वहीं, लसूड़िया थाना में नीतू सिंह की नियुक्ति हुई है. तारेफ सोनी पहले से यहां टीआई हैं.

    लॉ एंड ऑर्डर पर रखेंगे निगरानी

    इन दोनों थाने का मूल काम क्षेत्र में लॉ एंड ऑर्डर पर निगरानी रखने और आपराधिक घटनाओं पर तत्काल प्रभाव से करवाई करना रहेगा. 2 थाना प्रभारी की तैनाती होने के बाद क्षेत्र में अपराध के ग्राफ में कमी आने की पूरी संभावना है. इसके साथ ही इंदौर प्रदेश का ऐसा जिला बन गया है, जहां एक थाने पर 2 थाना प्रभारियों को नियुक्त किया गया है.

     

  • भोपाल मेट्रो का तोहफा यात्रियों को, जानें रूट, किराया और फ्री ट्रायल की डिटेल्स

    भोपाल
     अगला स्टेशन है…दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों। इंदौर को मेट्रो की सौगात मिलने के बाद भोपाल के यात्रियों के मन में भी कुछ इस तरह के ख्यालात आ रहे होंगे। लोग पिछले एक साल से मेट्रो ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं। अब ऐसे लोगों के लिए अक्टूबर का महीना खुशखबरी लेकर आ सकता है।

    दरअसल, मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले चरण की मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं। यात्रियों को पहले 7 दिन तक फ्री में सफर करने का मौका मिलेगा। वहीं, कुछ दिनों तक किराए में डिस्काउंट में टिकट मिलने के बाद 20 रुपये की शुरूआती कीमत में लोग यात्रा कर पाएंगे।

    सीएमआरएस टीम पहुंची भोपाल
    मेट्रो ट्रेन शुरू करने से पहले कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी। मेट्रो के लिए सीएमआरएस का दौरा सबसे खास होता है। इसकी 'ओके' रिपोर्ट मिलने के बाद कमर्शियल रन शुरू होती है। यह टीम डिपो और गाड़ी को जांचेगी। साथ ही ट्रैक के नट-बोल्ट से लेकर सिग्नल तक देखेगी। यह टीम 25 और 26 सितंबर को निरीक्षण करेगी। यह शेड्यूल आने के बाद एमपी मेट्रो के अधिकारी तैयारियों में जुट गए हैं। इस जांच के बाद एक और केंद्रीय टीम भी आएगी। फाइनल रिपोर्ट के बाद मेट्रों को दौड़ाया जा सकता है।

    ऐसा रहेगा मेट्रो किराया
    भोपाल मेट्रो के अफसरों के अनुसार शुरुआती 7 दिन तक यात्री मेट्रो में फ्री सफर कर पाएंगे। इसके बाद 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। यह छूट खत्म होते ही 20 रुपए का टिकट लेकर लोग मेट्रो का सफर कर पाएंगे। भोपाल के सभी चरण प्रारंभ होने के बाद अधिकतम किराया 80 रुपए रखने का विचार है। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था।

    फिलहाल यह बाधा
    बताया जाता है कि जिस लाइन पर पहले मेट्रो चलेगी उसके एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम अधूरे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट तय किया गया है।

    पहला चरण ही पूरा हुआ
    आपको बता दें कि राजधानी भोपाल में पहले चरण के तहत ऑरेंज लाइन में एम्स साकेत नगर से सुभाष नगर डिपो तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी की लाइन बनाई गई है। इसके बाद दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक के लिए कार्य चल रहा है। इसमें करीब 2 से 3 वर्ष लगने का अनुमान है। फिलहाल भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन ट्रैक पर मेट्रो दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है।

    आनलाइन नहीं मिलेगा टिकट
    भले ही दिल्ली सहित कई शहरों में टिकट प्रणाली आनलाइन हो गई है। लेकिन भोपाल में आपको मैन्युअल टिकट से यात्रा करना पड़ेगा। बता दें कि ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ का टेंडर सरकार ने निरस्त कर दिया है। इसकी वजह है तुर्किए ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को ड्रोन देकर मदद की थी।

  • मध्यप्रदेश में बाघों के लिए खुशखबरी: 4 टाइगर रिजर्व को जोड़ेगा नया वाइल्डलाइफ कॉरिडोर

    सागर
     वन्यजीव संरक्षण के लिए तरह-तरह के संरक्षित वन स्थापित किए जाते हैं. जिनमें टाइगर रिजर्व, वाइल्डलाइफ सेंचुरी और नेशनल पार्क जैसे संरक्षित वन क्षेत्र की स्थापना की जाती है. लेकिन वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एक नये आयाम के तौर पर तेजी से उभरा है. वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि वन्य प्राणियों के संतति विकास के लिए जरूरी है कि उन्हें लंबे समय तक संरक्षित वन क्षेत्र में न रखा जाए. किसी भी प्राकृतिक क्षेत्र को लंबे समय तक बांधकर नहीं रखा जा सकता है. क्योंकि इससे कई तरह के नुकसान होते हैं. ऐसे में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का नया कॉन्सेप्ट सामने आया है.

    इसके तहत संरक्षित वन क्षेत्र को आपस में इस तरह से जोड़ा जाता है कि वन्य प्राणी एक दूसरे संरक्षित वन में आसानी से आ जा सकते हैं. मध्य प्रदेश में पिछले 2 सालों के भीतर 2 नए टाइगर रिजर्व अस्तित्व में आने से वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनने की संभावना बढ़ी है. दरअसल नौरादेही, रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद 4 टाइगर रिजर्व को जोड़कर वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर की संभावना है. जिसमें रातापानी, नौरादेही, पन्ना और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व शामिल हैं.

    संरक्षित वन क्षेत्र की समस्याएं

    वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वन क्षेत्र को ज्यादा समय तक बांध के रखने से उसमें रहने वाले वन्यजीवों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. साथ ही साथ वन्य जीव संरक्षण के उद्देश्य भी फलीभूत नहीं हो पाते हैं. क्योंकि लंबे समय तक एक ही तरह के माहौल और वातावरण में रहने के कारण वन्य जीवों की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है. वन्य जीवों के बीच में जेनेटिक फ्लो रुकता है, जिससे वन्य जीव की संतति विकास पर असर पड़ता है. इसके साथ ही वन्य जीवों की संख्या बढ़ने के कारण पॉपुलेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आने के साथ-साथ वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष बढ़ता है. 

    वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एक नया आयाम

    संरक्षित वन क्षेत्र की इन समस्याओं के चलते वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का तेजी से नाम सामने आया है. विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षित वन क्षेत्र को इस तरह है आपस में जोड़ा जाए कि उनमें रहने वाले वन्य जीव एक दूसरे संरक्षित वन क्षेत्र में आसानी से विचरण कर सके. एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र में जाने से जहां वन्य क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ रही संख्या को नियंत्रित किया जा सकेगा, वहीं वन जीवन की संतति विकास में मदद मिलने के साथ-साथ एक संरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों के बीच होने वाले आपकी संघर्ष को रोकने में मदद मिलती है. जानकारों की मानें तो वाइल्ड लाइफ लाइफ कॉरिडोर से इन समस्याओं पर काबू करने में मदद मिलती है.

    अंतः प्रजनन अवसाद दूर करता है कॉरिडोर 
    कोई भी जीव लगातार निकट संबंधियों से प्रजनन करके अपनी संतति का विकास करता है तो भावी पीढ़ी पर कई तरह के दुष्परिणाम को देखने मिलते हैं. उनके जीवन जीने की क्षमता पर असर पड़ता है. उनसे जो संतति पैदा होती है, वह कमजोर होती है. इसके अलावा प्रजनन क्षमता भी गिरती है. लेकिन अगर जीव एक वन क्षेत्र से दूसरे वन क्षेत्र में विचरण करते हैं, तो अपने ही तरह के दूसरे अनुवांशिक गुणों वाले जीवों से प्रजनन करके संतति विकास करते हैं.

    कॉरिडोर जीन प्रवाह में करता है मदद 

    अनुवांशिकी में जेनेटिक फ्लो यानि जीन प्रवाह का विशेष महत्व है. कोई भी जीव जब एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करता है तो भले ही एक ही संतति के जीव हो लेकिन उनकी आनुवंशिकी में अंतर पाया जाता है. ऐसे में जब वन्य जीव दूसरे वन क्षेत्र में जाकर प्रजनन करते हैं, तो उनकी संतति विविधता लिए होती है और नई पीढ़ी अच्छी और तंदुरुस्त नस्ल की होती है.

    वन्यजीव संघर्ष पर काबू 

    संरक्षित वन क्षेत्र में लगातार वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के कारण पॉपुलेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आती है और वन्यजीवों के बीच में आपसी संघर्ष बढ़ता है. ऐसी स्थिति में वाइल्डलाइफ कॉरिडोर काफी मददगार साबित होता है. क्योंकि किसी संरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीवों की संख्या बढ़ती है तो उन्हें दूसरे संरक्षित क्षेत्र में वहां विस्थापित किया जा सकता है. जहां उनके लिए जीवन यापन की पर्याप्त व्यवस्था हो.

    'कॉरिडोर बनाने की कोशिश में लगा है वन विभाग'

    नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए ए अंसारी कहते हैं कि "ये वन्य जीव संरक्षण का नया आयाम है. वाइल्डलाइफ कॉरिडोर से वन्यजीवों को कई तरह के फायदे हैं और उनके संरक्षण में काफी मदद मिलती है. क्योंकि किसी संरक्षित क्षेत्र को अनंत काल तक बांधकर नहीं रख सकते हैं. जब जानवर एक संरक्षित क्षेत्र से दूसरे संरक्षित क्षेत्र में आसानी से बिना बाधा के आ जा सकते हैं तो पॉपुलेशन मैनेजमेंट में आसानी होती है और जेनेटिक फ्लो में मदद मिलती है.

    इसके अलावा इनब्रीडिंग डिप्रेशन कम होता है. अच्छे और तंदुरुस्त नस्ल के जानवर हमें मिलते हैं. सबसे बड़ा फायदा ये है कि वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष कम होता है. यदि हमारे संरक्षित वन क्षेत्र आपस में जुड़े रहेंगे तो जानवर इधर से उधर प्राकृतिक तरीके से आ जा सकेंगे. लेकिन किसी संरक्षित वन क्षेत्र को ज्यादा समय तक बंद रखा जाएगा तो एक समय के बाद डिप्रेशन मैनेजमेंट में दिक्कत आएगी."

    उन्होंने आगे कहा, "नौरादेही टाइगर रिजर्व के कारण संभावित कॉरिडोर अस्तित्व में आया है. नौरादेही के एक तरफ रातापानी, दूसरी तरफ पन्ना टाइगर रिजर्व हैं. इसके अलावा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भी कनेक्टिविटी है. वन विभाग इसको आईडेंटिफाई करने में लगा हुआ है. जब यह अस्तित्व में आ जाएगा तो वन्यजीव प्रबंधन आसान हो जाएगा."

  • सड़क विकास की ओर MP का बड़ा कदम, 2 लाख करोड़ से बदलेगा 35 हजार किमी नेटवर्क

    भोपाल 

     प्रदेश में करीब ढाई करोड़ की आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। राज्य में लगभग 35 हजार किलोमीटर सड़कें हैं। शहर की सड़कें हाइवेज से अलग हैं। उन पर यातायात का काफी दबाव होता है। इसलिए जरूरी है कि नगरीय सड़कों को बेहतर गुणवत्ता के साथ बनाया जाए। नगरीय विकास विभाग अगले 5 वर्षों में 2 लाख करोड़ से सड़क विकास के काम कराएगा। यह जानकारी आयुक्त नगरीय प्रशासन संकेत भोंडवे ने  सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर पर आयोजित कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा, इंजीनियर्स सड़क निर्माण तकनीकों को समझें, इसलिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    600 इंजीनियर्स जुड़े

    सड़क निर्माण तकनीक पर आधारित कार्यशाला में प्रदेशभर की निकायों के 600 इंजीनियर्स जुड़े। इसमें आइआइटी इंदौर और रुड़की के अलावा अन्य रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने सड़क की गुणवत्ता को लेकर नई तकनीकों और सुधार पर जानकारी दी।

    शहर में बिछेगा नया सीवेज नेटवर्क

    वहीं बारिश में पूरा भोपाल शहर जल प्लावन ग्रस्त होने के बाद नगर निगम ने शहर में नया सीवेज नेटवर्क बिछाने के लिए 545 करोड रुपए का फंड मंजूर किया है। इससे नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए जाएंगे ताकि बड़ा तालाब, छोटा तालाब, शाहपुरा झील जैसे जल स्रोत में गंदा पानी मिलने से बचाया जा सके। गुरुवार को महापौर परिषद की बैठक में यह प्रस्ताव मंजूर किया गया है।

  • सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक: ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान तेज

    राज्यमंत्री हिरवार ने किया वृक्षारोपण

    भोपाल 
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में 2 अक्टूबर 2025 तक ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। अभियान की 17 सितम्बर को शुरूाआत हुई थी। सेवा पखवाड़ा अभियान में मैदानी अधिकारी, कर्मचारी नागरिकों और ग्रामवासियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

    शहडोल जिले में अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायत बुढ़ार के गांव गिरवा में ग्रामवासियों को सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नही करने की समझाइश दी गई। स्वच्छता का संदेश देने के लिए गांव में जागरूकता रैली भी निकाली गई। जनपद पंचायत के स्वच्छता समन्वयक श्री सचिन श्रीवास्तव ने व्यापारियों को सिंगल यूज प्लास्टिक से पर्यावरण को हो रहे नुकसान के प्रति जागरुक बनाकर इसका उपयोग बंद करने की अपील की। जैतपुर और चरखरी गांवों में स्वच्छता मित्रों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। गोहपारू जनपद पंचायत के उप स्वास्थ्य केन्द्र लफदा में ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार’ अभियान के अंतर्गत 8 महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क दवाईयां प्रदान की गईं। ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार’ अभियान के तहत शहडोल जिले मे 19 सितम्बर तक 4627 से अधिक महिलाओं एवं बच्चों की हीमोग्लोबिन की जांच की गई है।

    अनूपपुर के प्रभारी मंत्री श्री दिलीप अहिरवार ने जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के प्रांगण में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने आह्वान कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माँ के नाम एक पेड़ अवश्य रोपे, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ मातृ सम्मान का संदेश समाज में प्रसारित हो सके।

    जैविक खेती को अपनाएं किसान, हुई एकदिवसीय कार्यशाला
    अनूपपुर के पीएम कॉलेज आफ एक्सीलेंस शासकीय तुलसी महाविद्यालय में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत जैविक खेती पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के सेमीनार हॉल में आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रुप में श्री चन्दन कुमार यादव ने जैविक खेती और इसके प्रशिक्षण कार्य का अपना लंबा अनुभव साझा किया। महाविद्यालय के रसायन विभागाध्यक्ष प्रो. ऋषिकेश चंद्रवंशी ने विद्यार्थियों को जैविक खेती की महत्ता और इसके लाभों की विस्तृत जानकारी दी।

    छतरपुर में स्वच्छता की शपथ
    छतरपुर जिले में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत ग्राम एवं निकाय स्तर पर ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान में स्वच्छता कार्य किए जा रहे हैं। नागरिकों से अपने घरों, दुकानों के आस-पास साफ सफाई बनाए रखने एवं घरों एवं प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को पृथक पृथक गीला एवं सूखा कचरा रखकर कचरा गाड़ी में डालने की अपील के साथ ही उपस्थित नागरिकों को स्वच्छता बनाए रखने और गंदगी न फैलाने की शपथ भी दिलाई गई।

    गांवों को साफ-सुथरा रखने के लिये श्रमदान
    नर्मदा पुरम में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान एवं ‘स्वच्छ भारत’ मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत जिले की 49 ग्राम पंचायतों में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता के कार्य किये जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के साथ व्यक्ति की आदतों में परिवर्तन करना है, जिससे स्वच्छता स्थायी रूप से बना रहे। अभियान के अंतर्गत नर्मदापुरम जिले के सभी गांवों में प्रचार-प्रसार कर ग्रामवासियों से साफ-सफाई के लिये श्रमदान का आह्वान किया गया।

    हरदा जिले में ‘सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत जिले के ग्राम आमसागर, प्रताप पुरा, जूना पानी, मकड़ई, रिजगांव, अबगाव खुर्द और बाला गांव कई गांवो में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। शिविर में स्वास्थ्य विभाग के दल ने निशुल्क स्वास्थ्य परामर्श दिया, आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी निर्माण और असंचारी रोग स्कैनिंग, एनीमिया और सिकल सेल रोगों समेत विभिन्न रोगों के लिए की गई।। इस अवसर पर रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया।

    बैतूल जिले में स्वछता टीम द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा’ अभियान के अंतर्गत स्कूलों में नशा मुक्ति अभियान चलाया गया। अभियान में बच्चों को नशा संबंधी सभी चीजों से दूर रहने एवं जागरूक बनाने के लिए रैली निकाली गई।

     

  • MP कांग्रेस बैठक: जिला अध्यक्षों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे प्रदेश प्रभारी और PCC चीफ

    भोपाल 
    कांग्रेस के नवनियुक्त जिला अध्यक्षों की पहली बैठक राजधानी भोपाल कांग्रेस मुख्यालय में रविवार 21 सितंबर से मंगलवार 23 सितम्बर तक आयोजित की जाएगी। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी जिला अध्यक्षों से वन टू वन चर्चा करेंगे।

    मध्य प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त जिला अध्यक्षों की पहली बैठक राजधानी भोपाल कांग्रेस मुख्यालय में रविवार 21 सितंबर से मंगलवार 23 सितम्बर तक आयोजित की जाएगी। शुरुआती दौर में  6 संभागों की अलग-अलग समय में बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में पिछले 1 महीने में अध्यक्षों द्वारा किए गए काम का हिसाब मांगा जाएगा। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी जिला अध्यक्षों से वन टू वन चर्चा करेंगे।

    नियुक्ति के बाद पहली बार हो रही बैठक 
    जानकारी के लिए बता दें कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद पहली बार भोपाल में बैठक बुलाई गई है। ब्लॉक अध्यक्ष और जिला कार्यकारिणी को लेकर रिपोर्ट ली जाएगी। कार्यकारिणी और ब्लॉक अध्यक्ष को लेकर एक महीने की जिला अध्यक्षों को डेडलाइन दी गई थी।

    कामकाज को मजबूत करना उद्देश्य
    बतादें के एमपी कांग्रेस 2028 में होने वाले चुनाव की अभी से तैयारी शुरू कर दी। इसी बीच संगठ को मजबूत करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने बताया कि इस बैठक का उद्देश्य जिला अध्यक्षों को संगठन सृजन अभियान के तहत अपने कामकाज को मजबूत करने और आगामी चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना है।
     
    बैठक की तारीखें और समय
    – 21 सितंबर: भोपाल संभाग (सुबह 10 बजे), नर्मदापुरम संभाग (दोपहर 3 बजे) और सागर संभाग (दोपहर 12 बजे)
    – 22 सितंबर: ग्वालियर चंबल संभाग (सुबह 10 बजे) और इंदौर संभाग (दोपहर 3 बजे)
    – 23 सितंबर: उज्जैन संभाग (सुबह 10 बजे) 

  • सरकार की नई दिशा: सीएम डॉ. यादव बोले- जनकल्याण और विकास में कोई समझौता नहीं

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों की उपस्थिति में सेवा पखवाड़ा के संबंध में हुई बैठक में कहा कि  राज्य सरकार विकास, जनकल्याण और सुराज के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से प्रदेश में सेवा पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश में अब सेवा पखवाड़ा की गतिविधियो ंको सत्ता और संगठन मिलकर तेज गति देंगे। इसको लेकर शनिवार को मुख्यमंत्री निवास में बैठक हुई। 

    बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार विकास, जनकल्याण और सुराज के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में 17 सितंबर से सेवा पखवाड़ा आरंभ किया गया है। साथ ही आमजन को जीएसटी  रिफॉर्म्स के लाभ दिलाने तथा आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के अंतर्गत जन-जन को स्वदेशी अभियान में शामिल करने के उद्देश्य से भी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान में आमजन की सक्रिय भागीदारी से सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास और सबका प्रयास तथा वोकल फॉर लोकल की भावना के अनुरूप गतिविधियां जारी हैं। 

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक वार्ड और ग्राम स्तर तक गतिविधियों का प्रभावी व्यवस्थित और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'स्वच्छता ही सेवा अभियान', 'एक बगिया मां के नाम' और 'एक पेड़ मां के नाम' के अंतर्गत पौधरोपण, नमो पार्क तथा नमो उपवन विकसित करने, विद्यालय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन, जनसामान्य को स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प सामग्री खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने जैसी गतिविधियां जनभागीदारी से संचालित की जा रही हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों में 'विकसित भारत' थीम पर निबंध, वाद-विवाद और चित्रकला प्रतियोगिताएं तथा संगोष्ठियां भी हो रही हैं।

    बैठक में उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खण्डेलवाल सहित शिवप्रकाश और हितानंद शर्मा उपस्थित थे।
     

  • कान्हा टाइगर रिजर्व में हुआ इंग्लिश स्पीकिंग प्रशिक्षण

    भोपाल
    कान्हा टाइगर रिजर्व मण्डला में खटिया परिक्षेत्र अंतर्गत ईको सेंटर में कान्हा टाइगर रिजर्व के गाइड्स के लिये 14 दिवसीय इंग्लिश स्पीकिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। प्रशिक्षण में टाइगर रिजर्व के जी-1 श्रेणी के 58 गाइड शामिल हुए। प्रशिक्षण मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड भोपाल द्वारा कराया गया।

    प्रशिक्षण का उद्देश्य गाइड्स को अंग्रेजी भाषा में दक्ष बनाना, जिससे आवश्यकता अनुसार गाइड बेहतर प्रकार से पर्यटकों के अनुरूप अंग्रेजी भाषा को समझकर उसी भाषा में जानकारी दे सकें। इससे गाइड्स में आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और पर्यटकों से कुशलतापूर्वक संवाद से वन एवं वन्य-जीव सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य को भी बेहतर किया जा सकेगा।

    प्रशिक्षण में प्रशिक्षकों द्वारा गाइड्स को अंग्रेजी भाषा में संवाद करने के तरीके, शारीरिक भाषा, वन, वन्य-जीव एवं पर्यावरण से संबंधित शब्दों के अंग्रेजी अर्थ एवं संवाद के लिये आवश्यक व्याकरण तथा शब्द कोष के विषय में प्रस्तुतिकरण एवं प्रेक्टिकल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में क्षेत्र संचालक, उप संचालक कोर, बफर, सहायक संचालक बंजर और परिक्षेत्र अधिकारी खटिया भी उपस्थित रहे।

     

  • इंदौर में 12वें विजन फार्मा राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल हुए मंत्री परमार

    भोपाल
    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और आयुष मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि फार्मेसी के सेक्टर में ज्यादा से ज्यादा काम करते हुए अपनी स्वदेशी औषधियों के व्यापार को बढाने और इसके उत्पादन पर ध्यान देने लिए और अधिक मेहनत और परिश्रम करने की जरूरत है। आज दुनिया के कई देश हमारे देश में उत्पादित स्वदेशी दवाओें का उपयोग करते हैं। हमारा लक्ष्य है कि दुनिया के ज्यादा से ज्यादा देश हमारे देश की उत्पादित औषधियों का उपयोग करें।

    मंत्री श्री परमार शनिवार को इंदौर के ऑक्सफोर्ड इन्टरनेशनल कॉलेज में “इंडियन फार्मासिस्ट इनावेशन टू इम्पेक्ट फॉर विकसित भारत-2047” की थीम पर आयोजित दो दिवसीय 12वें विजन फार्मा राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ कर सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर परिषद के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी डॉ. छगनभाई पटेल, फार्मा विजन के राष्ट्रीय संयोजक श्री अनिकेत सेल्के, श्री वीरेन्द्र सोलंकी, ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल कॉलेज के चेयरमेन श्री अक्षांशु तिवारी, कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. प्रिया जैन, फार्मा विजन की स्टेट कॉन्वेनर सुश्री कामाक्षा गौड़ विशेष रूप से मौजूद थे।

    मंत्री श्री परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करते हुए कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों से अपील की है कि विकसित भारत के संकल्प को अपना संकल्प मानते हुए कार्य करें। देश की ताकत और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में फार्मेंसी के विद्यार्थी निश्चित रूप से बड़ा योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश 2047 तक ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होगा और दुनिया के कई देशों में भी ऊर्जा की पूर्ति करने वाला देश बनेगा। उन्होंने कहा कि किसानों ने अन्न और खाद्यान्न के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बना दिया है। किसानों ने अन्न के भण्डार भरे हैं। भारत 2047 तक अन्य देशों के भरण-पोषण करने की सामर्थ्य रखने वाला देश बनेगा।

    मंत्री श्री परमार ने कहा कि शीघ्र ही फार्मेंसी के सिलेबस में आयुर्वेद के सिलेबस को भी जोड़ने का काम किया जायेगा। इस पर एक्सपर्ट द्वारा विचार-विमर्श किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आवश्यकता के अनुसार फार्मेंसी के साथ एलोपैथिक , होम्योपेथिक और आयुर्वेदिक के लिये एक कॉमन सिलेबस तैयार किया जायेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में 11 नये आयुर्वेदिक कॉलेज खोलने का संकल्प लिया गया था, जिसमें से 8 कॉलेजों की भारत सरकार द्वारा मान्यता दे दी गई है। अगले वर्ष से ही नये कॉलेज प्रारंभ किये जाएंगे।

    मंत्री श्री परमार ने बताया कि आने वाले समय में परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिये सभी परीक्षाओं का डिजिटल वेल्यूवेशन किया जायेगा , जिससे परीक्षार्थी ऑनलाईन अपनी कापी देख सकेंगे। श्री परमार ने कहा कि भारत फिर से विश्वगुरू बनने की ओर अग्रसर है। ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. प्रिया जैन ने बताया कि दो दिवसीय 12वें विजन फार्मा राष्ट्रीय अधिवेशन में फार्मा से संबंधित कई सत्र होंगे। सुश्री कामाक्षा गौड़ ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में देश के विभिन्न कॉलेजों के फार्मेसी विद्यार्थी उपस्थित थे।

  • हरदा में कहा शिवराज सिंह चौहान ने: किसानों की सोयाबीन अब समर्थन मूल्य पर बिकेगी

    हरदा
    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को हरदा पहुंचे। उन्होंने खिरकिया ब्लाक के बावड़िया गांव में एक शोकाकुल परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त कर पौधारोपण किया। मीडिया के सोयाबीन को समर्थन मूल्य पर खरीदने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह निर्णय राज्य सरकार का है। इस संबंध में राज्य सरकार से प्रस्ताव मिलने पर समर्थन मूल्य पर सोयाबीन खरीदने की अनुमति दी जाएगी।

    इससे पहले जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि यंत्रों पर दरें कम हो रही हैं। 22 सितंबर से कृषि यंत्रों की दरों में पांच प्रतिशत की कमी आएगी, जिससे किसानों को इन्हें खरीदने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई किसान 35 एचपी का ट्रैक्टर खरीदता है तो उसे सीधे 63 हजार रुपये की बचत होगी। इसी तरह बागवानी के लिए जो किसान ट्रैक्टर खरीदता है उस पर उसे 23 हजार रुपये तक की बचत होगी।

    कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि एक दिन पहले शुक्रवार को उन्होंने कृषि यंत्र बनाने वाली विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। प्रतिनिधियों से कहा कि जीएसटी की दरों का सीधा लाभ किसानों को मिलना चाहिए ताकि उन्हें खेती के कार्यों में मदद मिले और उनका आर्थिक विकास हो सके।

    कई जगह हुआ स्वागत, महिलाओं ने बताई समस्या
    कृषि मंत्री कार के माध्यम से जिले में पहुंचे। जिले में प्रवेश करते ही छीपानेर में उन्होंने कुछ महिलाओं से मिलाकात की।
    उन्होंने महिलाओं से पूछा कि उन्हें लाड़ली बहना योजना का लाभ मिल रहा है या नहीं तो महिलाओं ने कहा कि उन्हें हर माह राशि प्राप्त हो रही है।
    कुछ महिलाओं ने कहा कि उन्हें राशि नहीं मिल रही है, जिस पर उन्होंने मामले की जांच कराकर समाधान निकालने का आश्वासन दिया।
    अबगांवखुर्द में कृषि मंत्री का किसानों और जनप्रतिनिधियों ने स्वागत किया।

     

  • देश की पहली ‘सोलर-प्लस-स्टोरेज’ परियोजना बनी मिसाल, मिला ऐतिहासिक न्यूनतम 2.70 रुपये प्रति यूनिट टैरिफ रेट

    पीक-ऑवर्स में 440 मेगावॉट की सप्लाई होगी सुनिश्चित

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। मुरैना की यह परियोजना ‘सेवा पखवाड़ा’ के दौरान राष्ट्र को समर्पित है। उन्होंने कहा कि ”मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना से पूरे देश में ग्रीन ऊर्जा उत्पादन और स्टोरेज की नई राह खुलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुरैना परियोजना में प्राप्त की गई सफलता के आधार पर लंबे समय की ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के लिए संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परियोजना में प्राप्त किया गया कम टैरिफ प्रदर्शित करता है कि नवकरणीय ऊर्जा भी डिस्कॉम के लिए अधिक किफायती हो सकता है।

    मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में गत् दिवस प्राप्त निविदा में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। मुरैना में विकसित हो रही प्रदेश की पहली ‘सोलर-प्लस-स्टोरेज’ परियोजना में 2.70 रुपये प्रति यूनिट, अब तक की सबसे कम टैरिफ दर प्राप्त हुई है। यह देश की पहली परियोजना है, जिसमें 3 रुपये प्रति यूनिट से कम पर फर्म और डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी उपलब्ध होगी। यह परियोजना 95 प्रतिशत वार्षिक उपलब्धता के साथ भारत की पहली ‘सोलर-प्लस-स्टोरेज’ परियोजना बन गई है। अब तक देशभर की परियोजनाओं में केवल 50% पीक ऑवर्स उपलब्धता और 85% वार्षिक उपलब्धता सुनिश्चित हो पाती थी। मुरैना परियोजना इस ट्रेंड को बदलते हुए पीएम ऑवर्स में 95% आपूर्ति के नए मानक स्थापित करेगी।

    परियोजना की संरचना और क्षमता
    मुरैना सोलर पार्क को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड द्वारा क्रियान्वित किया गया है, जिसने पहले भी प्रतिष्ठित नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित किया है। मुरैना परियोजना से उत्पादित बिजली राज्य द्वारा खरीदी जाएगी। मुरैना सोलर पार्क में 2 यूनिट स्थापित की जा रही हैं, प्रत्येकइकाई से तीनों चरणों में 220 मेगावॉट क्षमता ऊर्जा का उत्पादन होगा।

            पहला चरण: वास्तविक समय पर सौर ऊर्जा (220 मेगावॉट तक)
            दूसरा चरण: शाम के पीक ऑवर्स में 2 घंटे (बैटरी में संचित सौर ऊर्जा से)
            तीसरा चरण: सुबह के पीक ऑवर्स में 2 घंटे (रात्रि में ग्रिड से चार्ज बैटरी से)

    इस नवाचार से बैटरी का उपयोग दिन में दो बार संभव होगा, जिससे लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। कुल मिलाकर सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में 440 मेगावॉट सप्लाई सुनिश्चित होगी।

    मुरैना परियोजना दो परियोजनाओं का मिश्रण है, जिसमें पहलाएक सामान्य सिंगल-चार्ज कम्पोजिट सोलर प्रोजेक्ट,जिसमें बैटरी को सोलर एनर्जी से चार्ज जाता है।दूसरा स्टोरेज एज ए सर्विस प्रोजेक्ट है, जिसमें अतिरिक्त ग्रिड पॉवर से रात के समय बैटरी दोबारा चार्ज की जाएगी। इससे सुबह के पीक ऑवर्स की आपूर्ति की जाएगी। इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि बैटरी, दिन में दो बार उपयोग की जाएगी। यह परियोजना सुनिश्चित करती है कि राज्य ग्रिड में उपलब्ध रात के समय अतिरिक्त बिजली का उपयोग सुबह की पीक ऑवर्समें विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।

    मुरैना परियोजना पीक ऑवर्सऔर दिन के समय में समान स्तर की आपूर्ति (प्रत्येक इकाई से 220 मेगावाट) के लिए एक बेंचमार्क स्थापित करती है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह द्वारा नियोजित भविष्य की परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त करता है जो दिन और रात के समय एक फ्लेटप्रोफाईलकी बिजली की आपूर्ति करते हुए एक ऐसीपरियोजना की आधारशिला रखेगी जो पूरे 24 घंटों के लिए समान स्तर की बिजली की आपूर्ति करे। यह नवकरणीय ऊर्जा को पारंपरिक ऊर्जा के समान निश्चितता प्रदान करेगा और इसे तकनीकी और व्यावसायिक रूप से समतुल्य बना देगी

    वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा
    ई-रिवर्स नीलामी 19 सितंबर, 2025 को 25 वर्षों के लिए निर्धारित2.70 रूपये प्रति यूनिटके ऐतिहासिक टैरिफ के साथ संपन्न हुई, नीलामी प्रक्रिया लगभग 12 घंटे चली। यह पूरे भारत में एफडीआरईनिविदाओं के लिए एक मील का पत्थर है,परियोजना के ई-रिवर्स ऑक्शन में 16 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया। यह क्षमता की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक सब्सक्रिप्शन था। ऑक्शन में अडानी रिन्यूएबल्स, एनटीपीसी रिन्यूएबल्स, रिन्यू सोलर, एसीएमई, एंजी एनर्जी, दिलीप बिल्डकॉन, एमबी पॉवर जैसी कंपनियाँ शामिल थीं।

        यूनिट-1 के लिए Ceigall India Ltd ने 2.70 रूपये प्रति यूनिट।
        यूनिट-2 के लिए Acme Solar Holding Ltd ने 2.764 रूपये प्रति यूनिट की दर पर यह निविदा हासिल की।इस ऑक्शनमें प्राप्त टैरिफ से स्पष्ट है कि डिस्पेजेबल नवकरणीय ऊर्जा (बैटरी भंडारण के साथ सौर ऊर्जा के संयोजन से सक्षम) कोयला आधारित बिजली की तुलना में अधिक किफायती हो गई है।

    निवेशकों के लिए भरोसेमंद मॉडल
    परियोजना का विकास रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जिसने रीवा और आगर जैसी परियोजनाओं को सफलतापूर्वक विकसित किया है।

    RUMSL द्वारा  परियोजना को निविदा से पहले निवेश के लिए तैयार किया गया। International Finance Corporation द्वारा Transaction Advisor के रूप में मध्यप्रदेश में तैयार की गई जोखिम मुक्त परियोजनाओं ने समय-समय पर साबित किया है कि बैंकेएबल अनुबंध, पूरी तरह से भूमि एकत्रीकरण, सक्रिय पारेषण योजना, वित्तपोषण और अनुबंध सहित साइट तैयार करना, पर्यावरण और सामाजिक जोखिमों को पर्याप्त रूप से कम करना, साथ ही एक पारदर्शी और विकासक अनुकूल निविदा प्रक्रिया के परिणामस्वरूप बेहतर मूल्य निर्धारण से उल्लेखनीय बचत होती है।

    पार्क डेवलपर के रूप में RUMSL भूमि और आंतरिक बिजली निकासी का बुनियादी ढांचा प्रदान करेगा, जबकि MP Transco परियोजना के लिए आवश्यक बाहरी विद्युत निकासी हेतु बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है। इस परियोजना में एक मजबूत 3-स्तरीय payment security mechanism है, जिसमें बेहतर bankability के लिए राज्य गारंटी शामिल है तथा procurer default और assured procurement of excess energy के लिए उचित termination compensation और reduced offtake तथा ग्रिड अनुपलब्धता के लिए compensation दिया गया है।

    परियोजना, चंबल क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण
    नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला ने चंबल क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए मुरैना परियोजना को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र के औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    एनर्जी ट्रांजिशन में मील का पत्थर
    मुरैना भारत की एनर्जी ट्रांजिशनमें एक नया मोड़ है; उम्मीद है कि इस तरह के उत्साहजनक परिणाम देश को कोयला आधारित बिजली की तुलना में नवकरणीय ऊर्जा सहित ऊर्जा भंडारण का चयन करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, जिससे देश के स्वच्छ ऊर्जा के भविष्य को बल मिले। यह परियोजना न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश को ऊर्जा सुरक्षा, किफायती दरों और पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में सशक्त बनाएगी। नवकरणीय ऊर्जा अब पारंपरिक ऊर्जा के समान तकनीकी और व्यावसायिक रूप से प्रतिस्पर्धी बन चुकी है। 

  • 10 साल सेवा की शर्त नहीं, कोर्ट ने विधवा को तुरंत नौकरी का हक दिया

    ग्वालियर
    हाई कोर्ट की ग्वालियर पीठ ने एक शासकीय सेवक की विधवा को पारिवारिक पेंशन दिए जाने का आदेश सुनाया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि नियमित सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर विधवा को पारिवारिक पेंशन मिलनी चाहिए। दस वर्ष से कम सेवा अवधि की शर्त नहीं लगाई जा सकती है।

    याचिकाकर्ता कमलीबाई के पति की 1998 में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। उनकी कुल शासकीय सेवा अवधि सात साल छह माह आठ दिन थी। विभाग ने 10 साल की सेवा पूरी नहीं होने का हवाला देकर पेंशन देने से मना कर दिया था। कोर्ट ने पेंशन नियम 1976 की धारा 47 का हवाला दिया। इसके अनुसार सेवा में रहते हुए मृत्यु होने पर परिवार को पेंशन का अधिकार है।
     
    नियम सिर्फ सेवानिवृत्ति पर लागू होता है- कोर्ट
    कोर्ट ने कहा कि नियम 43(2) सिर्फ सेवानिवृत्ति पर लागू होता है। सेवा में मृत्यु की स्थिति में नियम 47 लागू होगा। कोर्ट ने विभाग के दो जुलाई 2012 के आदेश को रद कर दिया है। कोर्ट ने दो माह के भीतर याचिकाकर्ता की पेंशन तय करने और भुगतान का आदेश दिया है। साथ ही बकाया पेंशन पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया है।

     

  • वायरल ऑडियो में फंसे डांसिंग कॉप रंजीत सिंह, लोगों में उबाल

    इंदौर 
    इंदौर के प्रसिद्ध 'डांसिंग कॉप' रंजीत सिंह से जुड़ा विवाद और गहरा गया है, क्योंकि आरोप लगाने वाली युवती राधिका सिंह ने शनिवार को एक नया ऑडियो क्लिप जारी किया है जिसमें रंजीत पर एक अन्य महिला से पैसे मांगने का आरोप है। 

    इंदौर के ट्रैफिक हवलदार और 'डांसिंग कॉप' के नाम से मशहूर रंजीत सिंह पर गंभीर आरोप लगाने वाली युवती राधिका सिंह ने मामले को एक नया मोड़ दे दिया है, जिससे रंजीत की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। राधिका ने शनिवार तड़के लगभग 5:30 बजे इंस्टाग्राम पर दो नई पोस्ट साझा कीं, जिनमें एक ऑडियो क्लिप भी शामिल है। इन पोस्ट के जरिए राधिका ने रंजीत पर एक अन्य महिला से पैसे मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। इसी बीच, शुक्रवार को तबीयत बिगड़ने के बाद रंजीत सिंह को शहर के शेल्बी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।

    युवती ने ऑडियो पोस्ट कर लगाए नए आरोप
    राधिका ने शनिवार सुबह एक वीडियो के साथ ऑडियो क्लिप साझा करते हुए लिखा, "ये तुम्हारा फेमस सेलेब्रिटी… हाथ जोड़कर पैसे मांग रहा है, किसी और औरत से… उसने शेयर किया है। ऑडियो रिकॉर्डिंग भी है इसकी… ऐसी भीख मांग कर चला रहा था यह अपनी जिंदगी। ऑडियो सुनकर और मजा आया। मुझे यह किसी अन्य महिला ने भेजा है।" राधिका ने यह भी दावा किया है कि जिस महिला से पैसे मांगे गए, वह भी जल्द ही रंजीत के खिलाफ सामने आएगी।
     
    अस्पताल में भर्ती रंजीत सिंह, हालत स्थिर
    शेल्बी अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. विवेक जोशी ने रंजीत सिंह के स्वास्थ्य पर जानकारी देते हुए बताया, "रंजीत सिंह को गुरुवार को सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था। उनका ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ था। अब उनकी हालत ठीक है और बीपी भी सामान्य है। आज (शनिवार) उन्हें आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो कल (रविवार) उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।"

    कई और लड़कियों को धमकी देने का दावा
    अपनी दूसरी पोस्ट में राधिका ने दावा किया कि रंजीत सिंह से पीड़ित और भी कई लड़कियां हैं। उसने लिखा, "और कई लड़कियां हैं। कुछ तो मैरिड हैं, इसलिए सामने नहीं आना चाहतीं। कुछ को इसने (रंजीत) पुलिस की धमकी दी है। अब सब खुश हैं कि सीखो इससे सबक।" 

  • आयुष विभाग को ई-मॉनिटरिंग सिस्टम एवं नागरिक सेवाओं के सशक्तिकरण के लिए मिला स्कॉच अवार्ड

    भोपाल 
    नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में शनिवार को आयोजित एक गरिमामयी समारोह में स्कॉच फाउंडेशन द्वारा आयुष विभाग के अपर सचिव श्री संजय मिश्रा को, विभाग की उत्कृष्ट पहलों के लिए प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान विशेष रूप से ई-मॉनिटरिंग सिस्टम के विकास और नागरिक सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में किए गए विभागीय प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है।

    डिजिटल नवाचार की पहल
    अपर सचिव आयुष श्री संजय मिश्रा ने बताया कि विभाग में सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से ई-मॉनिटरिंग सिस्टम की परिकल्पना एवं कार्यान्वयन की पहल की। इस प्रणाली के माध्यम से प्रदेशभर के अस्पतालों की गतिविधियों की नियमित निगरानी, आंकड़ों का वास्तविक समय पर संकलन एवं विश्लेषण तथा सेवा प्रदायगी की स्थिति पर सतत नियंत्रण संभव हो पाया। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ी, बल्कि अस्पतालों में नागरिकों को समय पर और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकीं।

    ओपीडी संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि
    अपर सचिव आयुष श्री मिश्रा के नेतृत्व में आरंभ की गई इस डिजिटल निगरानी व्यवस्था और नागरिक-केंद्रित सुधारों के परिणामस्वरूप प्रदेश के आयुष अस्पतालों में ओपीडी संख्या मात्र एक वर्ष में 8 लाख प्रतिमाह से बढ़कर 22 लाख प्रतिमाह तक पहुँच गई। यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि सुदृढ़ प्रबंधन और तकनीक का सही उपयोग किया जाए तो पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ भी आधुनिक समय में अत्यंत प्रासंगिक और प्रभावी हो सकती हैं।

    अधोसंरचना और सेवाओं का विस्तार
    विभागीय प्रयासों से प्रदेश के 2 हजार 250 आयुष संस्थानों में आधारभूत संरचना को सशक्त किया गया। अस्पतालों में आवश्यक उपकरणों, औषधियों और मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। साथ ही, ई-मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से सेवा प्रदायगी की गुणवत्ता को निरंतर उन्नत किया गया, जिससे नागरिकों का विश्वास और संतोष दोनों बढ़े।

    सामूहिक प्रयासों का परिणाम
    श्री मिश्रा ने कहा कि यह सम्मान केवल मेरा व्यक्तिगत गौरव नहीं है, बल्कि पूरे आयुष विभाग, मध्यप्रदेश की टीम भावना और समर्पण का परिणाम है। मैं इस पुरस्कार को प्रदेश के सभी आयुष चिकित्सा अधिकारियों और समस्त आयुष कार्मिकों को समर्पित करता हूँ, जिनके अथक परिश्रम से यह सफलता संभव हुई।

    यह उपलब्धि, हमें माननीय आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार जी, प्रमुख सचिव, आयुक्त आयुष तथा विभागीय टीम के सक्रिय मार्गदर्शन और सहयोग से प्राप्त हुई है, जिनकी प्रेरणा और नेतृत्व ने इस नवाचार को गति प्रदान की।

    भविष्य की राह
    श्री मिश्रा ने कहा कि इस सम्मान ने मुझे और मेरी टीम को नई ऊर्जा और संकल्प दिया है। भविष्य में हमारा लक्ष्य है कि आयुष स्वास्थ्य सेवाएँ प्रत्येक नागरिक तक सुलभ और गुणवत्तापूर्ण रूप से पहुँचें तथा मध्यप्रदेश को एक राष्ट्रीय वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित किया जा सके।

     

  • सशक्तिकरण की ओर: जागरूकता संगोष्ठी का सेलम इंग्लिश स्कूल, रायपुर में भव्य एवं सफल आयोजन

    रायपुर
    चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया, छत्तीसगढ़ डायोसीज़ के तत्वावधान में सेलम इंग्लिश स्कूल, मोती बाघ, रायपुर में आज “सशक्तिकरण की ओर: जागरूकता संगोष्ठी” का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समाज में शिक्षा, अवसर और आत्मनिर्भरता की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हुआ। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों को केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी एवं शैक्षिक योजनाओं की जानकारी देना तथा बच्चों और युवाओं को एक उज्ज्वल भविष्य की ओर प्रेरित करना था। “बच्चों का भविष्य शिक्षा और आत्मनिर्भरता से ही सुरक्षित होगा। योजनाएं तभी सफल होंगी जब हम उनका लाभ समय पर उठाएँ।”

    सशक्तिकरण का संकल्प
    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं समुदाय के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने एक स्वर से शिक्षा को जीवन का सबसे बड़ा हथियार मानते हुए इन योजनाओं का लाभ उठाने का संकल्प लिया।

    इस अवसर पर गेस्ट स्पीकर्स के रूप में आमंत्रित श्री अल्बर्ट कुजूर और श्रीमती शालिनी टोप्पो ने विस्तार से विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। विशेष रूप से उन्होंने PM-VIKAS (प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन) योजना की उप-योजनाओं – सीखो और कमाओ, नई रोशनी, नई मंजिल, उस्ताद और हमारी धरोहर – पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि ये योजनाएं न केवल कौशल विकास और रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराती हैं बल्कि भारत की पारंपरिक कलाओं और शिल्पों को भी नई ऊर्जा देती हैं। “गरीबी शिक्षा की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए। सरकार ने रास्ता दिखाया है, अब हमें आगे बढ़कर उसका लाभ लेना है।”

    छात्रवृत्तियों से शिक्षा के नए आयाम
    कार्यक्रम में प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
    कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति – ₹5,000/- तक।
    स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति – ₹7,000/- तक।
    व्यावसायिक पाठ्यक्रमों हेतु – ₹10,000/- तक की सहायता।

    यह संदेश बच्चों और अभिभावकों दोनों के लिए अत्यंत उत्साहवर्धक रहा। वक्ताओं ने कहा कि “गरीबी शिक्षा की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए। सरकार ने रास्ता दिखाया है, अब हमें आगे बढ़कर उसका लाभ लेना है।”

    आयोजकों की गरिमामयी उपस्थिति
    कार्यक्रम में सीएनआई डायोसीज़ की बिशप, द राइट रेव. डॉ. सुषमा कुमार और डायोसीज़ सेक्रेटरी श्री नितिन लॉरेंस की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। उनके प्रेरक विचारों ने उपस्थित जनसमूह के भीतर विश्वास और आत्मबल का संचार किया।

    सेलम स्कूल की प्रभारी प्राचार्य, श्रीमती रुपिका लॉरेंस, ने मंच से छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा –
    “आज का यह आयोजन केवल एक संगोष्ठी नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। अगर हमारे बच्चे शिक्षित होंगे, आत्मनिर्भर होंगे, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत होगा। हमें इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपने बच्चों को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाना है।”
    “हमारा लक्ष्य है कि हर बच्चा पढ़े, सीखे और अपनी प्रतिभा से समाज को रोशन करे। यह संगोष्ठी उसी दिशा में एक मजबूत कदम है।”

    भविष्य की दिशा
    आयोजकों ने घोषणा की कि इस तरह की संगोष्ठियां आगे भी निरंतर आयोजित की जाएंगी, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय जागरूक होकर शिक्षा और सरकारी योजनाओं से अधिकतम लाभ उठा सके।

    सेलम इंग्लिश स्कूल ने इस पहल को सफल बनाने के लिए चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया, छत्तीसगढ़ डायोसीज़ का विशेष आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों, गेस्ट स्पीकर्स, वक्ताओं और उपस्थित लोगों का हार्दिक आभार प्रकट किया गया। “शिक्षा ही वह दीपक है जो अंधकार मिटाकर हर घर में उजाला कर सकती है।”

    जनहित का संदेश
    यह संगोष्ठी वास्तव में समुदाय के सशक्तिकरण, शिक्षा और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है।
    इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि “शिक्षा ही वह दीपक है जो अंधकार मिटाकर हर घर में उजाला कर सकती है।”

  • गुरु श्री तेगबहादुर सिंह जी ने धर्म की रक्षा के लिए दी अपनी शहादत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    मुख्यमंत्री गुरु श्री तेगबहादुर सिंह जी की 350वीं शहादत शताब्दी पर नगर कीर्तन यात्रा में हुए शामिल

    रायपुर
     मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के सेरीखेड़ी में गुरु श्री तेगबहादुर सिंह जी की 350वीं शहादत शताब्दी के अवसर पर आयोजित नगर कीर्तन यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुरु श्री तेगबहादुर सिंह जी ने देश और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। यह हमारा सौभाग्य है कि आज छत्तीसगढ़ की धरती पर आयोजित कीर्तन यात्रा का दर्शन कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी की अगुवाई कर रहे पंच प्यारों का सम्मान भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को पवित्र सिरोपा और कृपाण भेंट की गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए बड़े सौभाग्य और गर्व का विषय है। आज हम नगर कीर्तन यात्रा के दर्शन कर रहे हैं, जो गुरु तेगबहादुर जी की 350वीं शहादत शताब्दी के अवसर पर असम के गुरुद्वारा धुबरी साहिब से प्रारंभ होकर देश के अनेक स्थानों से होते हुए छत्तीसगढ़ पहुँची है। लगभग 10 हजार किलोमीटर की यात्रा तय कर यह नगर कीर्तन यहां पहुँचा है। हमारे प्रदेशवासियों के लिए यह ऐतिहासिक क्षण और पुण्य अवसर है कि हमें इस यात्रा का स्वागत करने और इसमें भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुरु तेगबहादुर जी की शहादत के बारे में हम सभी भलीभांति जानते हैं। वे मुगलों के सामने कभी नहीं झुके और अपने धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। आज भी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित गुरुद्वारा शीशगंज साहिब गुरु तेगबहादुर जी की शहादत का अमर प्रतीक है। हम गुरु तेगबहादुर जी को नमन करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों की शहादत भी अद्वितीय है। साहिबजादों ने मुगलों के सामने झुकने के बजाय धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने साहिबजादों की इस वीरता को नमन करते हुए हर वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी वीर बाल दिवस को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है।

    इस अवसर पर विधायक श्री सुनील सोनी, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत सिंह छाबड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कांवड़िया, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, पूर्व विधायक श्री कुलदीप जुनेजा, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, श्री बलदेव सिंह भाटिया, श्री गुरचरण होरा, गुरुद्वारा कमेटियों के प्रमुखजन सहित बड़ी संख्या में सिख धर्म के अनुयायी एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजयोगिनी बी.के. अवधेश दीदी के किए अंतिम दर्शन

    राजयोग भवन पहुंचकर की श्रद्धांजलि अर्पित

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजयोगिनी बी.के. अवधेश दीदी के अवसान पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजयोग भवन (एकांत पार्क के पास) पहुंचकर अवधेश दीदी के अंतिम दर्शन कर, पुष्पांजलि अर्पित की और मौन धारण कर शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मानवता के लिए समर्पित अवधेश दीदी ने लंबे समय तक ब्रह्माकुमारी संस्थान और समाज का मार्गदर्शन किया, उनका जाना आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी समृतियां सदैव हमारे साथ रहेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा ब्रह्माकुमारीज़ को यह असीम दु:ख सहन करने की क्षमता प्रदान करने की प्रार्थना की। राजयोगिनी बी.के. अवधेश दीदी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय संस्थान की वरिष्ठ राजयोगिनी और भोपाल जोन की क्षेत्रीय निदेशिका रही है।

     

  • एम्स में क्रांतिकारी ब्रेस्ट कैंसर उपचार, जागरूकता न होने से कई मरीज अभी भी जोखिम में

    भोपाल 
    एम्स हॉस्पिटल में ब्रेस्ट कैंसर का नई तकनीकी से इलाज किया जा रहा है। इस तकनीकी में ब्रेस्ट कैंसर होने पर महिलाओं का स्तन हटाने की जरूरत नहीं पड़ रही है, बल्कि जिस हिस्से में बीमारी डिटेक्ट होती है उसी का इलाज किया जाता है। एम्स के चिकित्सकों का कहना है कि बीमारी की आधुनिक इलाज में बारे में जागरूकता की कमी है। राजधानी भोपाल के एम्स हॉस्पिटल में ब्रेस्ट कैंसर का नई तकनीकी से इलाज किया जा रहा है। इस तकनीकी में ब्रेस्ट कैंसर होने पर महिलाओं का स्तन हटाने की जरूरत नहीं पड़ रही है, बल्कि जिस हिस्से में बीमारी डिटेक्ट होती है उसी का इलाज किया जाता है। एम्स के चिकित्सकों का कहना है कि बीमारी की आधुनिक इलाज में बारे में जागरूकता की कमी है। अक्सर महिलाएं स्तन में गांठ महसूस होने पर भय और गलतफहमी के कारण समय पर चिकित्सकीय मदद लेने से हिचकिचाती हैं।

    इन तकनीकों का किया जा रहा है उपयोग 
    एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि एक समय था जब स्तन कैंसर का मतलब पूरे स्तन को हटाना होता था। लेकिन अब समय बदल गया है। आज इसका इलाज बहु-आयामी पद्धति से किया जाता है। जिसमें कीमोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी, सर्जरी, इम्यूनोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का संयोजन होता है। कई मामलों में केवल ट्यूमर को हटाकर और उन्नत ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी से पुनर्निर्माण करके स्तन को सुरक्षित रखा जा सकता है। एम्स के कैंसर सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि यह अत्याधुनिक तकनीक एम्स भोपाल में की जा रही है और इसके उक्तृष्ट परिणाम मिल रहे हैं।
     
    ये हैं उन्नत तकनीकें 
    – ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी: इस तकनीक के माध्यम से स्तन कैंसर के ट्यूमर को हटाकर स्तन को पुनर्निर्माण किया जा सकता है, जिससे स्तन को सुरक्षित रखा जा सकता है।
    – इंडोसाइनिन ग्रीन (ICG) डाई तकनीक: इस तकनीक के माध्यम से लसीका ग्रंथियों को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है और लिम्फेडेमा के खतरे को कम किया जा सकता है।
    – रेडियोथेरेपी: इस तकनीक के माध्यम से कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जा सकता है और ऑपरेशन की जरूरत को कम किया जा सकता है।
    – लीनियर एक्सेलेरेटर: यह एक आधुनिक मशीन है जो कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए उच्च ऊर्जा वाली एक्स-रे का उपयोग करती है ¹।

    सर्जरी के बाद होने वाली लिम्फेडेमा बड़ी परेशानी
    डॉ. विनय कुमार ने बताया कि स्तन कैंसर की सर्जरी के बाद होने वाली चुनौतियों में से एक लिम्फेडेमा है हाथ में एक दर्दनाक सूजन जो महीनों या साल बाद भी दिखाई दे सकती है। इस जोखिम को कम करने के लिए एम्स भोपाल में अब इंडोसाइनिन ग्रीन (ICG) डाई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस डाई को ट्यूमर में इंजेक्ट किया जाता है और इन्फ्रारेड कैमरे से देखने पर यह उन लसीका ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) को स्पष्ट करता है, जो स्तन से बगल तक फैलते हैं। इन ग्रंथियों को निकालकर तुरंत फ्रोजन सेक्शन तकनीक से जांचा जाता है। यदि इनमें कैंसर कोशिकाएं नहीं पाई जातीं, तो हाथ की सामान्य लसीका नलिकाओं को सुरक्षित रखा जाता है जिससे लिम्फेडेमा का खतरा बहुत कम हो जाता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है। 
      
    एम्स भोपाल की पहल
    – एम्स भोपाल ने स्तन कैंसर के इलाज के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है, जिसमें अनुभवी डॉक्टर और विशेषज्ञ शामिल हैं।
    – अस्पताल में स्तन कैंसर के इलाज के लिए उन्नत तकनीकों और उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।