• ग्वालियर: ऑनलाइन प्रेमजाल में फंसी डॉक्टर की पत्नी, निजी वीडियो के बदले लुटाए लाखों

    ग्वालियर

    मध्य प्रदेश के ग्वालियर डिजिटल इश्क के चक्कर में पड़ी 34 साल की एक शादीशुदा महिला के साथ जो हुआ, वो सभी के लिए एक चेतावनी है। इश्क और इमोशंस के नाम पर एक अनजान युवक ने एक महिला को इस कदर अपने प्रेमजाल में फंसाया कि उसने अपनी लाखों रुपये के साथ अपनी इज्जत भी दांव पर लगा दी। महिला के पति डॉक्टर हैं। डिजिटल प्लैटफार्म पर हुई दोस्ती मे महिला इस कदर अंधी हो गई कि उसने अपना न्यूड वीडियो तक बनाकर उस अनजान युवक को भेज दिया। उसके बाद ठग ने उसे गिफ्ट भेजने के बहाने उससे 3.76 लाख रुपये भी ठग लिए। इसके बाद जब उस न्यूड वीडियो के नाम पर ब्लैकमेलिंग शुरू की तब महिला थाने पहुंची।

    पीड़ित महिला द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, एक महीने पहले उसके पास 923007507684 से वॉटसऐप कॉल आया था। कॉल करने वाले ने अपना नाम विपिन और खुद को एक एनआरआई बताया था। उसने महिला से कहा था कि वह उससे दोस्ती करना चाहता है। उस दिन के बाद से अपने डॉक्टर पति से छुपकर महिला और युवक के बीच नियमित और लम्बी-लम्बी बातचीत शुरू हो गईं, जो कुछ दिनो में प्रेम से भरी चर्चाओं में बदल गई।

    कथित विपिन ने महिला को लंदन आने के लिए कहा, लेकिन पीड़िता ने इससे इनकार कर दिया। फोन पर परवान चढ़े इस डिजिटल इश्क में आरोपी विपिन ने पीड़िता से उसके फोटो मांगने शुरू कर दिए। पीड़िता ने भी आरोपी युवक पर विश्वास कर उसे अपने कई फोटो भेज दिए। इतना ही नहीं, महिला ने आरोपी युवक की डिमांड पर अपना न्यूड वीडियो बनाकर उसके वॉटसऐप नंबर पर भेज दिया।

    गिफ्ट भेजने के नाम पर ली आधार कार्ड की कॉपी

    वीडियो भेजने के बाद आरोपी युवक ने पीड़ित महिला से गिफ्ट भेजने के नाम पर उसके आधारकार्ड की कॉपी भी वॉट्सऐप पर ले ली। इसके बाद आरोपी युवक ने महिला को बताया कि उसने एक पार्सल भेजा है, उसे तुम ले लेना। पार्सल पर एड्रेस और फोन नंबर भी लिखा होना बताया। अगले दिन महिला के नंबर पर 9459316606 से कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि आपका पार्सल आया है और वह एयरपोर्ट से बोल रहा है। इस पार्सल को लेने के लिए 15 हजार रुपये जीएसटी के चुकाने होंगे। लिहाजा महिला ने 15 हजार का पेमेंट कर दिया। इसके बाद युवक ने डॉलर चेंज करने के नाम पर 46 हजार, गाड़ी आगे बढ़वाने के नाम पर 1 लाख 20 हजार, परमिट कार्ड बनवाने के नाम पर 1 लाख 15 हजार व सामान की रसीद बनवाने के नाम पर 80 हजार पेमेंट अलग-अलग अकाउंट नंबरों व मोबाइल नंबरों पर करने को कहा। पीड़िता ने उसकी बातों में आकर आरोपी विपिन को फोनपे के जरिये 3 लाख 76 हजार का पेमेंट कर दिया।

    17 सितंबर को फिर से आरोपी युवक विपिन ने महिला को फोन किया और 2 लाख 85 हजार रुपये देने की मांग की। महिला ने जब और रुपये देने से इनकार किया तो युवक अपने असली रूप में आ गया, उसने कहा कि पार्सल वाले युवक से बात कर लो। जब महिला ने उससे बात की तो उसने सीधी धमकी दी कि पैसे देने पड़ेंगे, अगर नहीं दिए तो तुम्हारा न्यूड वीडियो वायरल कर देंगे। यकीन दिलाने के लिए अनजान युवक ने वह वीडियो भी महिला को भेजा जो उसने विपिन को भेजा था।

    वह महिला जब पूरी तरह आर्थिक और मानसिक तौर पर टूट गई तब वह साहस जुटाकर पुलिस के पास पहुंची। पीड़ित महिला की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।आशंका जताई जा रही है कि यह अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गैंग हो सकता है।

    इस मामले में सीएसपी रॉबिन जैन का कहना है कि क्राइम ब्रांच टीम मामले की जांच कर रही है। जैन ने कहा कि सोशल मीडिया या फोन पर अनजान लोगों से दोस्ती करना खतरनाक हो सकता है। किसी भी प्रकार के निजी वीडियो या फोटो साझा करने से पहले पूरी तरह पड़ताल कर लेना जरूरी है। अगर किसी से ब्लैकमेलिंग का सामना हो तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें।

  • धीरेंद्र शास्त्री का सशक्त बयान: हम विरोधी नहीं, बल्कि हिन्दुओं को बचा रहे हैं

    छतरपुर 

    हिन्दू राष्ट्र की मांग करने और हिन्दुओं को एक जुट करने , उन्हें जागरूक करने का अभियान चला रहे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्मान्तरण पर बड़ा हमला बोला है, उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में धर्मान्तरण करने वाले लोग सक्रिय हैं इसलिए हम हिन्दुओं को बचाने में लगे हैं। उन्होंने छतरपुर में भी बड़ी साजिश के आरोप लगाये।

    छतरपुर में एक धार्मिक कार्यक्रम में पहुंचे बाबा बागेश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा पिछले दिनों एक दाढ़ी वाला छतरपुर में आया था और वो हमारे बारे में उल्टा सीधा बोलकर गया, आज हम उससे कहना चाहते हैं ” बेटा फंस ना जाना वर्ना ठठरी बार देंगे हम।”

    हमारी किसी से लड़ाई नहीं, हम अपनों को बचाने में लगे 

    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा हम किसी मजहब के विरोधी नहीं हैं, ना हमारी मुसलमानों से लड़ाई है और ना ईसाईयों से लड़ाई है, अरे हमें दूसरों की खेती से क्या लेना देना हम तो अपनी सँभालने में लगे हैं हमारी तो खुद की खेती उजड़ रही, हमारे हिन्दू धर्मान्तरण में फंस रहे हैं।

    धर्मान्तरण में बालाघाट, मंडला के बाद तीसरे नंबर पर छतरपुर!

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा किसी जिले में धर्मान्तरण होता होगा है तो बालाघाट और मंडला के बाद छतरपुर का ही नंबर होगा, धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा यहाँ गाड़ी भरकर किताबें पकड़ी गई थी मीडिया ने सब दिखाया था, जबरदस्ती कर धर्मान्तरण करवाया गया था।

    काली माँ ने हमारी सुन ली, हम अगले महीने कथा करने बंगाल जा रहे  

    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अभी हम पश्चिम बंगाल गए थे वहां काली माता के दर्शन कर प्रार्थना की, हमने माँ से कहा हम पश्चिम बंगाल आते रहेंगे हमें आशीर्वाद दो, और काली माता ने ऐसी लाज रखी कि उसी दिन निर्णय हो गया कि हम अगले महीने बंगाल में कथा सुनायेंगे, हमें लगता है हमारा तो जन्म ही इसीलिए हुआ है।

    छतरपुर यदि हमारे साथ रहेगा तो दुनिया जीत लेंगे

    उन्होंने कहा कि आप लोगों का साथ बना रहे और छतरपुर यदि हमारे साथ रहेगा तो दुनिया जीत लेंगे क्योंकि कहते हैं कि दुनिया जीत लो और यदि घर को ना जीत पाओ तो जीते हुए नहीं माने जाओगे और यदि घर को जीत लो तो दुनिया जीत भी नहीं पाए तो तुम्हें कोई हरा नहीं पायेगा।

  • विवाह विच्छेद के आदेश पर पुनर्विवाह के बाद नहीं चलेगी आपत्ति, हाईकोर्ट ने लगाई रोक

    जबलपुर 

     हाईकोर्ट ने अपने अहम आदेश में कहा है कि पुनर्विवाह हो जाने के बाद विवाह विच्छेद आदेश को चुनौती देने वाली अपील प्रचलन योग्य नहीं है। अपील निर्धारित समय सीमा में दायर की जाती तो सुनवाई योग्य थी। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला ने अपील को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि सुनवाई करने से तीसरे पक्ष के वैवाहिक नागरिक अधिकार खतरे में पड़ सकता है।

    नरसिंहपुर निवासी रजनी पटेल की तरफ से दायर अपील में कुटुम्ब न्यायालय जबलपुर के द्वारा 24 जून 2022 को पारित विवाह विच्छेद आदेश को चुनौती दी गयी थी। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अपीलकर्ता ने तलाक के आदेश को चुनौती देते हुए 6 दिसम्बर 2022 को अपील दायर की थी। अपीलकर्ता ने निर्धारित अवधि के 130 दिन बाद आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। प्रतिवादी ने अपील की निर्धारित अवधि पूर्ण होने के बाद 28 अक्तूबर 2022 को पुनर्विवाह कर लिया है।

    अपीलकर्ता निर्धारित समय अवधि में अपील दायर करती तो हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 15 के अंतर्गत पुनर्विवाह पर प्रतिबंध का प्रावधान था। प्रतिवाद ने अपील दायर करने की निर्धारित समय सीमा पूर्ण होने के बाद वैध रूप से पुनर्विवाह किया है। समय अवधि के लिए क्षमादान प्रदान करने के बावजूद भी अपील में गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने के प्रतिकूल प्रभाव होंगे। इससे तीसरे पक्ष के वैवाहिक नागरिक अधिकार खतरे में पड़ेंगे। युगलपीठ ने अपील को खारित करते हुए निचली अदालत के समक्ष भरण-पोषण के लिए आवेदन प्रस्तुत करने अपीलकर्ता को स्वतंत्रता प्रदान की है। 

     

  • दुर्ग में हाईप्रोफाइल कैश केस: गाड़ियों की सीटों में छिपे थे करोड़ों, मशीन से हुई गिनती

    दुर्ग 
     दुर्ग पुलिस ने कुम्हारी थाना क्षेत्र में दो स्कॉर्पियो वाहनों से 6 करोड़ 60 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। दोनों गाड़ियों में बने गुप्त चेंबर से यह भारी-भरकम राशि बरामद हुई। पुलिस ने मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया है और मामले की जानकारी आयकर विभाग को सौंप दी है।

    कैसे हुआ खुलासा?
    दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल को सूचना मिली थी कि महाराष्ट्र पासिंग दो स्कॉर्पियो में बड़ी मात्रा में नगदी ले जाई जा रही है। निर्देश पर कुम्हारी पुलिस ने तुरंत घेराबंदी कर वाहनों को रोका। तलाशी के दौरान दोनों गाड़ियों के अंदर विशेष रूप से बनाए गए गुप्त चेंबर मिले। इन्हीं से करोड़ों रुपये नकद बरामद हुए।

    आयकर विभाग को सौंपी गई जांच
    बरामद नगदी को लेकर पुलिस ने तत्काल आयकर विभाग को सूचित किया। अब आगे की जांच और कार्रवाई आयकर विभाग कर रहा है। फिलहाल शक जताया जा रहा है कि पकड़े गए लोग हवाला कारोबार से जुड़े हो सकते हैं।

    पूछताछ जारी
    गिरफ्तार चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है। आयकर विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इतनी बड़ी रकम कहां से लाई गई और किस उद्देश्य के लिए ले जाई जा रही थी।

    आयकर विभाग करेगा कार्रवाई

    कार से इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस ने जानकारी आयकर विभाग को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दी है। पुलिस ने चारों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

    बताया जा रहा है कि इतनी बड़ी रकम चुनावी माहौल या अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी हो सकती है। आयकर विभाग जांच में जुटा है। वहीं, स्थानीय लोगों की भीड़ थाने में इकट्ठा हो गई और मामले की चर्चा पूरे क्षेत्र में होने लगी।

    ASP सुखनंदन राठौर ने बताया कि भारी मात्रा में कैश बरामद होने के बाद पुलिस-आयकर विभाग की संयुक्त टीम इस रकम के स्रोत और इस्तेमाल की जांच कर रही है।

  • इंदौर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में फर्जीवाड़ा, 13 महिला आरक्षकों समेत 14 पर कार्रवाई

    इंदौर 
     पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (पीटीसी) इंदौर में प्रशिक्षण ले रहे 14 नवआरक्षकों ने परीक्षा देने की अनुमति लेने के लिए फर्जीवाड़ा किया। इनमें 13 महिलाएं शामिल हैं। नवआरक्षकों ने किसी और के स्वीकृत आवेदन में फर्जी तरीके से अपना नाम जोड़कर प्रस्तुत किया, जो मंजूर भी हो गया।

    यह मामला लगभग डेढ़ माह पहले सामने आया, जब पीटीसी प्रभारी एसपी ने गड़बड़ी पकड़ी और इसकी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी। जांच एडीजी प्रशिक्षण राजाबाबू सिंह के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय के एआइजी से कराई गई। जांच में गड़बड़ी साबित होने पर सभी 14 नवआरक्षकों को प्रशिक्षण से बाहर कर उनके संबंधित जिलों में भेज दिया गया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद एफआईआर दर्ज कर सेवा समाप्त भी की जा सकती है।

    विभागीय जांच

    इधर, ट्रेनिंग स्कूल में पदस्थ दो डीएसपी समेत पांच अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी विभागीय जांच की जा रही है। इन पर आरोप है कि उन्होंने इस फर्जीवाड़े को अनदेखा किया। जांच में यह साफ होगा कि उन्होंने किस स्तर पर लापरवाही की।

  • 90 डिग्री ब्रिज मामले में HC ने जताया गहरा आक्रोश, बोले- बलि का बकरा बाहर

    जबलपुर
    बलि का बकरा बाहर हो गया अब किसी न किसी का तो सर कटेगा, यह तल्ख टिप्पणी की है मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डबल बेंच ने. भोपाल के ऐशबाग में 90 डिग्री ब्रिज के मामले में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगलपीठ ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किए जाने के आदेश को वापस लेने के निर्देश भी दिए हैं.

    याचिका में कहा गया था कि भोपाल के ऐशबाग में बरखेड़ी फाटक पर रेल ओवर ब्रिज बनाने का ठेका उसे 1 मार्च 2023 को मिला था. पुल पर 90 डिग्री का कोण बनने पर पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता ने 4 जुलाई 2025 को टेंडर निरस्त कर याचिकाकर्ता को एक साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया था. याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उसे लोक निर्माण विभाग के द्वारा जो ड्राइंग और डिजाइन दी गई थी उसी के मुताबिक ही निर्माण किया गया. लेकिन इस मामले में विभाग की किरकिरी होने के बाद उसे ही ब्लैक लिस्ट कर अधिकारियों ने अपना दामन बचा लिया है.

    जांच के बाद मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान मैनिट के वरिष्ठ प्रोफेसर ने अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की थी. रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि पुल का मोड़ वास्तव में 90 डिग्री का नहीं है, बल्कि 118 से 119 डिग्री के बीच का है. मैनिट प्रोफेसर की रिपोर्ट में कहा गया कि ब्रिज की ज्यामिति सोशल मीडिया में दिखाई जा रही तस्वीरों से अलग है. पुल का एंगल अधिक तीखा न होकर थोड़ा विस्तृत है. इसके बावजूद संरचना को लेकर जनसुरक्षा की आशंकाएं और तकनीकी खामियों पर सवाल बने हुए हैं.

    7 इंजीनियर हुए थे सस्पेंड
    विवाद गहराने के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने जांच समिति गठित की और 28 जून को पीडब्ल्यूडी के सात इंजीनियर को निलंबित किया. एक सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता पर विभागीय जांच बैठाई गई. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उस समय घोषणा की थी कि निर्माण एजेंसी और डिजाइन सलाहकार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और पुल में सुधार कार्य के लिए समिति बनाई जाएगी. वही लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि दुनिया भर में कई जगह भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए तीखे मोड़ वाले पुल बनाए जाते हैं. भोपाल के इस फ्लाईओवर के मामले में तकनीकी कठिनाई केवल एंगल की वजह से नहीं, बल्कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी के कारण भी हुई. मंत्री ने आश्वासन दिया कि विभाग की ओर से हाईकोर्ट को सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब प्रस्तुत किया जाएगा.

    गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान ही हाईकोर्ट के निर्देश पर मैनिट के प्रोफेसर डॉ एमएस होरा, प्रोफेसर डॉक्टर नितिन डिंडोरकर, प्रोफेसर डॉक्टर एसके कटियार, प्रोफेसर डॉक्टर पीके अग्रवाल और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर प्रियमित्र मुनोथ ने 2 और 3 सितंबर को पीडब्ल्यूडी के आत्मराम मोरे, एसडीओ ब्रिज रंजीत सिंह और सब इंजीनियर सत्यम चौधरी के साथ पुल के विवादित हिस्से की जांच की थी.

    28 अक्टूबर को होगी सुनवाई
    कमेटी ने ठेकेदार पुनीत चड्ढा को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि उसने ड्राइंग के अनुसार ही निर्माण किया. याचिका की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए ठेकेदार की तुलना बलि के बकरे से की है. कोर्ट ने कहा है कि अब बलि का बकरा बाहर हो गया है अब किसी न किसी का सिर तो कटेगा. हाई कोर्ट ने अब पूरे मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की है.

     

  • जनता की हत्या बंद करें, IED हटाएं – तभी होगी बात: नक्सलियों को डिप्टी सीएम का संदेश

    रायपुर 

    नक्सलियों की शांति वार्ता से जुड़े पत्र को लेकर छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि, नक्सलियों को सबसे पहले आम जनता की हत्या बंद करनी होगी।जंगलों में लगाए गए IED को हटाकर उसकी सूचना सार्वजनिक करनी होगी। इन दोनों शर्तों को नक्सली मानेंगे, तभी किसी स्तर पर चर्चा की संभावना बन सकती है। इसे सरकार की ठोस शर्त बताते हुए उन्होंने कहा कि, जनता की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    दो पत्र जारी हुए नक्सलियों की तरफ से

    गृहमंत्री ने बताया कि, नक्सलियों का पहला पत्र सामने आया है, वो पोलित ब्यूरो मेंबर का है, जबकि दूसरा पत्र एक जूनियर कैडर का है, जो तेलंगाना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इन पत्रों में उठाए गए मुद्दे भ्रामक हैं। राज्य सरकार को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।

    अगर नक्सलियों की नीयत साफ है, तो उन्हें सबसे पहले अपने कदमों से इसे साबित करना होगा। हिंसा और धमकी के रास्ते पर रहते हुए बातचीत का कोई औचित्य नहीं है।

    कांग्रेस पर साधा निशाना

    नक्सलियों के पत्र में उठाए सवालों के जवाब में विजय शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय प्रशासन को दबाव में काम करना पड़ा। कई ईमानदार अधिकारी भी उस दौर में फंसाए गए।

    यही वजह है कि आज जांच में रोज-रोज नए खुलासे हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब कारोबार में बाहरी लोगों को संरक्षण मिला और उससे होने वाला पैसा कांग्रेस भवन तक पहुंचता था। इसी दबाव की राजनीति ने व्यवस्था को चरमराया।

    लगातार ऑपरेशन चल रहे

    डिप्टी सीएम ने कहा कि, सरकार नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक मोर्चा खोल चुकी है। सुरक्षा बल लगातार ऑपरेशन चला रहे हैं। विकास को हर गांव तक पहुंचाने की रणनीति पर काम हो रहा है। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें।

    शांति की बात करनी है तो पहले बंदूकें नीचे रखनी होंगी। आम जनता की हत्या और IED की डर की राजनीति बंद होनी चाहिए। इसके बाद ही सरकार संवाद पर विचार कर सकती है।

  • नाबालिग बेटी से रेप के मामले में दोषी पिता को इंदौर कोर्ट ने सुनाई तिहरी उम्रकैद

     

    इंदौर 

    इंदौर जिला कोर्ट ने 12 वर्षीय बालिका से रेप करने वाले पिता (35) को कठोर दंड देते हुए तिहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने फैसले में टिप्पणी की कि आरोपी ने पिता-पुत्री जैसे पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है, इसलिए न्यूनतम दंड विधिपूर्ण नहीं है।

    तलाक के बाद बेटी पिता के पास थी

    21 जुलाई 2024 को पीड़िता की मां ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि 2012 में उसने आरोपी से प्रेम विवाह किया था। विवाह से उन्हें दो संतानें हुईं- 12 वर्षीय बेटी (पीड़िता) और 6 वर्षीय बेटा। वर्ष 2020 में तलाक हो गया, जिसके बाद बेटी पिता के साथ और बेटा मां के साथ रहने लगा।

    अकेले होने पर पिता गलत काम करते

    21 जुलाई 2024 को बालिका अपनी मुंहबोली मौसी के पास रोते हुए पहुंची और आपबीती सुनाई। उसने बताया कि पिता घर पर अकेले होने पर कई बार उसके साथ गलत काम करते हैं। पहली बार यह घटना दो वर्ष पहले नए घर में हुई थी और हाल ही में 15 दिन पहले भी दोबारा रेप किया गया।

    बालिका ने बताया कि उसने दो-तीन बार दादी को भी इस बारे में बताया था, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद पड़ोस में रहने वाली मुंह बोली मौसी ने नानी को फोन कर पूरी घटना बताई। जिसके बाद नानी ने बेटी (बालिका की मां) को बुलाया और थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

    मामले की एक साल तक चली सुनवाई मामले की सुनवाई एक साल तक चली। प्रभारी डीपीओ राजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि जिला अदालत ने 18 सितंबर 2025 को फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6, 5(एन)/6 और 5(एम)/10 में दोषी पाते हुए तीन अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

    साथ ही 15 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर ने पैरवी की। पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत बालिका को शारीरिक व मानसिक क्षति को देखते हुए 3 लाख रुपए दिलाने की अनुशंसा भी की है।

  • रायपुर के छात्रों ने तोड़ा डर का साया, फिजिक्स-केमेस्ट्री और संस्कृत बनी आसान

    रायपुर

    कोरबा जिले के करतला विकासखण्ड अंतर्गत वनांचल ग्राम केरवाद्वारी में स्थित हायर सेकेण्डरी विद्यालय में अब पढ़ाई का माहौल पूरी तरह बदल गया है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लागू की गई युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया ने यहां के विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान दी है।

    विद्यालय में भौतिकी एवं रसायन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के नियमित व्याख्याता न होने से विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अभिभावक भी चाहते थे कि उनके बच्चों को सभी विषयों की नियमित पढ़ाई का अवसर मिले। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत केरवाद्वारी हायर सेकेण्डरी विद्यालय में भौतिकी, रसायन एवं संस्कृत विषय के व्याख्याताओं की पदस्थापना हुई। इससे विद्यालय में न केवल पढ़ाई का माहौल सुधरा है, बल्कि विद्यार्थियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

    कक्षा ग्यारहवीं एवं बारहवीं के विद्यार्थियों ने बताया कि अब उन्हें कठिन लगने वाले प्रश्न भी सरल ढंग से समझ में आने लगे हैं। शिक्षिकाओं द्वारा किताबों के साथ-साथ व्यावहारिक उदाहरणों से पढ़ाने की शैली ने विषयों को रोचक बना दिया है। छात्राओं ने कहा कि शिक्षिकाएँ सहज और सहयोगी वातावरण में पढ़ाती हैं, जिससे सवाल पूछने में झिझक नहीं होती।

    विद्यालय के प्राचार्य  सतीश कुमार गुप्ता ने बताया कि नियमित व्याख्याताओं की पदस्थापना से विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा है और आने वाले वर्षों में और अधिक विद्यार्थी विज्ञान संकाय सहित अन्य विषयों में दाखिला लेंगे। ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इस पहल ने वनांचल के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया है। 

  • छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी अभियान से मातृ स्वास्थ्य को मिलेगी नई दिशा: डॉ. प्रियंका शुक्ला

    रायपुर

    देश में 17 सितंबर से लेकर 2 अक्टूबर तक स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का संचालन किया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्हत छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास विभाग और यूनिसेफ के द्वारा संयुक्त रूप से छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान को लेकर शुक्रवार को दो दिवसीय कार्यशाला की शुरूआत की गयी। 

    स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कार्यशाला के पहले दिन उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मां से ही संपूर्ण सृष्टि का आधार होता है। ऐसे में प्रसव के दौरान किसी माता की मौत हम सभी के लिए दुख की बात होती है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में मातृ मृत्यु की दर 365 थी जो वर्तमान में घटकर 141 हो चुकी है। इसी तरह से राज्य गठन के वक्त शिशु मृत्यु दर 79 थी जो अब 38 हो चुकी है।  जायसवाल ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं और हमारा लक्ष्य है कि आने वाले समय में ये शिशु और मातृ मृत्यु दर शून्य हो जाएं। 

    स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ से ही स्वस्थ भारत बनेगा और देश को विकसित बनाने में स्वास्थ्य की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन और महिला बाल विकास विभाग की बहनों के संयुक्त प्रयास से आने वाले समय में राज्य के स्वास्थ्य आंकड़ों में सुधार जरूर आएगा।

    इस मौके पर आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. प्रियंका शुक्ला ने कहा कि राज्य सरकार ने मातृ स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखते हुए "छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी" नामक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के माध्यम से न केवल माताओं को समय पर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने पर बल दिया जा रहा है, बल्कि राज्य के उन 30 विकासखंडों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है जहाँ मातृ मृत्यु दर सबसे अधिक है। 

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का मानना है कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान और उनकी सतत निगरानी आवश्यक है। इसके साथ ही, सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और इसकी दिशा में सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने को लेकर सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। 

    गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा विकसित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा और निगरानी की जा रही है। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने, समुदाय को मातृ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने, उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने तथा समुदाय की भागीदारी को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    “छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी” अभियान के माध्यम से राज्य में मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने का लक्ष्य तय किया गया है और शासन इस दिशा में हरसंभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • रायपुर में बोले टंक राम वर्मा – शिक्षा नीति 2020 है समृद्ध भारत की आधारशिला

    रायपुर

    पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर एवं एनईपी इम्प्लीमेंटेशन सेल द्वारा किया गया। 

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा और रोजगार में सेतु का कार्य करेगी

    उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को भारत के भविष्य की दिशा और दशा तय करने वाला एक क्रांतिकारी कदम बताया। यह नीति 21वीं सदी के नवभारत की आधारशिला मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित, सक्षम और श्रेष्ठ राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। मंत्री  वर्मा ने कहा कि शिक्षा नीति के प्रथम चरण में हम प्रवेश कर चुके हैं और इसे सफल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। यह नीति केवल ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को नैतिक, मानसिक, भावनात्मक और तकनीकी दृष्टि से भी सशक्त बनाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मुख्य उद्देश्य गुणवत्ता, समानता, समावेशिता और सुलभता सुनिश्चित करना है। नीति के तहत पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन, विषयों के बीच समन्वय, और शिक्षक प्रशिक्षण एवं शोध को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया जा रहा है। साथ ही उद्योग और शिक्षा की भागीदारी को प्रोत्साहित कर युवाओं को कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।    

    मंत्री  वर्मा ने कहा कि सरकार ने प्राध्यापकों की कमी दूर करने के लिए 700 पदों की स्वीकृति दी है। डिजिटल संसाधन, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और ई-लर्निंग सुविधाओं के विस्तार पर भी कार्य हो रहा है। मातृभाषा और स्थानीय सांस्कृतिक संदर्भों को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विषयों की कठोर सीमाओं को समाप्त कर लचीलापन प्रदान करने के साथ ही विद्यार्थियों को सीखने की स्वतंत्रता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करना। आधुनिक तकनीक और रोजगारपरक शिक्षा को प्रोत्साहन देगी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो समयबद्ध योजना बनाकर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नीति के प्रावधानों को लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तन का साधन है। इसका सफल क्रियान्वयन विद्यार्थियों को शिक्षित करने के साथ ही उन्हें सृजनशील, सामाजिक रूप से जागरूक और राष्ट्रभक्ति की भावना से परिपूर्ण बनाएगा। मंत्री  वर्मा ने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं है, बल्कि जीवन को समझने और संवारने का साधन है। इस नई शिक्षा नीति के माध्यम से आने वाले समय में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और शिक्षा व्यवस्था अधिक समग्र तथा विद्यार्थी-केंद्रित होगी। 

    इस अवसर पर विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा की और शिक्षकों को नई शिक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका के बारे में मार्गदर्शन दिया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को एनईपी के क्रियान्वयन की गहन जानकारी प्रदान करना और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई दृष्टि विकसित करना रहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को विषयों की दीवारों से मुक्त कर विज्ञान, वाणिज्य और कला जैसे क्षेत्रों को एक साथ पढ़ने की स्वतंत्रता देना है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा में भागीदारी दर को वर्तमान 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, शोधार्थियों, तथा विभिन्न कॉलेजों से आए शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

  • एमपी के विकास का नया अध्याय: 418 शहरों में 2 लाख करोड़ रुपये निवेश

    भोपाल 
    एमपी में शहरों के विकास के लिए सड़कों पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। सड़कें अर्थव्यवस्था की धुरी बन चुकी हैं जोकि शहरों के सभी क्षेत्रों को एक क्रम में जोड़ती हैं। सड़क निर्माण और उनकी गुणवत्ता के लिए नगरीय निकायों के इंजीनियर पूरा प्रयत्न कर रहे हैं पर टेक्नोलॉजी में आ रहे नित ​नए बदलावों के साथ उन्हें अपनी कार्य प्रणाली में बदलाव की जरूरत है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर विषय पर कार्यशाला आयोजित की। यहां नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि शहरों की सड़कों से विकास को रफ्तार मिलती है। उन्होंने इसके लिए गुणवत्तापूर्ण सड़कों की जरूरत जताई। कार्यशाला में बताया गया कि प्रदेश के नगरीय निकायों में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 2 लाख करोड़ के विकास कार्य किए जाएंगे।

    भोपाल की आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में शुक्रवार को आईआईटी इंदौर, रूड़की, MORTH, CRRI & RODIC के विषय-विशेषज्ञों ने सड़क निर्माण के नए सिस्टम व सड़कों की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के कई तथ्य बताए। सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुई कार्यशाला प्रदेश के 600 इंजीनियरों की क्षमतावर्धन भी की गई।

    सड़क निर्माण कार्य से जुड़े विषय विशेषज्ञों ने कार्यशाला को संबोधित किया। इनमें RODIC के आरएस महालहा और एचसी अरोरा ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट, टेंडर प्रोसेस पर प्रस्तुतिकरण दिया। कंस्ट्रक्शन टेक्निक, क्वॉलिटी कंट्रोल, टेस्टिंग लैब की प्रक्रिया, डिजिटल प्रोजेक्ट मेनेजमेंट, रीयल टाइम मॉनिटरिंग, नगर सड़कों की सुरक्षा, सड़क निर्माण में वेस्ट मटेरियल के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। प्रमुख अभियंता प्रदीप मिश्रा ने प्रदेश की नगरीय अधोसंरचना की जानकारी दी। आयुक्त संकेत भोंडवे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए बताया कि प्रदेश में करीब ढाई करोड़ की आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। यहां की सड़कों पर यातायात का काफी दबाब है। इन सड़कों पर नगरीय क्षेत्र की अन्य अधोसंरचनाओं का भी प्रभाव पड़ता है इसलिये सड़कों की बेहतर गुणवत्ता जरूरी है।
     
    एमपी पुलिस में निकली ‘7500 पदों’ पर सीधी भर्ती, जानें कब से शुरु होंगे आवेदन
    कार्यशाला में एक अहम तथ्य सामने आया। यहां बताया गया कि प्रदेश के सभी 418 शहरों में राज्य और केंद्र सरकार की अनेक योजनाएं चल रहीं हैं। इन नगरीय निकायों की नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत आगामी 5 वर्षों में कायापलट कर दी जाएगी। इस दौरान सभी शहरों में कुल 2 लाख करोड़ रूपए के काम होंगे। केंद्र सरकार की अमृत, स्वच्छ भारत मिशन एवं प्रधानमंत्री आवास योजना, जलप्रदाय, सीवरेज, हरित क्षेत्र विकास और यूज्ड वाटर मेनेजमेंट आदि योजनाएं से प्रदेश के नगरीय निकायों को संवारा जा रहा है।

    कुल 418 नगरीय निकाय
    बता दें कि एमपी में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अंतर्गत कुल 418 नगरीय निकाय हैं। इनमें 5 छावनी परिषदें भी शामिल हैं।

    नगर निगम- 6
    नगर पालिका- 99
    न​गर परिषदें- 298
    छावनी परिषदें- 5
    योग- 418

  • छठघाट तालाब का विकास होगा अब तेज़, मुख्यमंत्री ने दी 5.17 करोड़ की स्वीकृति

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को लगातार विकास की नई सौगातें मिल रही हैं। जिले की जनता की आवश्यकताओं और मांगों को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री  साय अधोसंरचना विकास, स्वास्थ्य तथा शिक्षा क्षेत्र में योजनाबद्ध ढंग से विकास कार्यों को अंजाम देने में लगे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री द्वारा कुनकुरी नगर पंचायत क्षेत्र में छठघाट तालाब के विकास कार्य हेतु 5 करोड़ 17 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।  

    इस राशि से तालाब का सौंदर्यीकरण, किनारों का सुदृढ़ीकरण, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक विकास कार्य किए जाएंगे। कार्य पूर्ण होने के पश्चात छठघाट तालाब धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक भव्य स्वरूप प्राप्त करेगा तथा नगर की पहचान और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प है कि प्रत्येक जिले और नगर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। जशपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर नगरीय अधोसंरचना तक हर क्षेत्र में सुनियोजित रूप से कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छठघाट तालाब का विकास कुनकुरी नगर की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करेगा और आने वाले समय में यह नगरवासियों के लिए गर्व का प्रतीक बनेगा।

    छठघाट तालाब विकास कार्य की स्वीकृति से क्षेत्र में हर्ष का वातावरण है। स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल नगर की पहचान को निखारेगा, बल्कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को भी और अधिक गरिमामय बनाएगा।

  • पिछड़ा वर्ग कल्याण को लेकर विधानसभा समिति ने की अहम बैठक

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश विधानसभा में पिछड़ा वर्ग कल्याण संबंधी विधानसभा समिति की बैठक शुक्रवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता  महेन्द्र हार्डिया ने की। समिति के अध्यक्ष  हार्डिया ने कक्षा 6वीं से 8वीं तक की छात्रवृत्ति राशि बढ़ाकर ₹100 प्रतिमाह करने और छात्रावास में रहने वाले छात्र-छात्राओं को मिलने वाली राशि को बढ़ाकर ₹1500 करने का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए।

    समिति सदस्य  मनोज चौधरी ने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने छात्रावास योजना को जिला स्तर के साथ ब्लॉक एवं नगर पंचायत स्तर पर भी संचालित करने के लिये कार्य योजना बनाने का सुझाव दिया। समिति सदस्य  संदीप जायसवाल ने विभिन्न विभाग में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पदों की विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने आउटसोर्स भर्ती में भी पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लागू करने की मांग रखी। बैठक में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. ई. रमेश कुमार ने सभी आवश्यक जानकारी दीं।

     

  • प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के संकल्प को पूरा करने राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कर रही है काम

    रायपुर : प्रदेश में नक्सलवाद समाप्त कर गढ़ेंगे विकास की राह : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

    बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम के आयोजन से लोगों में बढ़ा सरकार के प्रति विश्वास: मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

    प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के संकल्प को पूरा करने राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कर रही है काम

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने गुरुवार को सुदर्शन चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में साक्षात्कार के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को समाप्त करना, लोगों का विश्वास जीतना और विकास की दिशा में आगे बढ़ना हमारी सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस उद्देश्य को धरातल पर उतारने के लिए नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर को उन्नत बनाने का कार्य कर रही है। अब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के अनेक गांव पुनः आबाद हो चुके हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। नक्सलियों की गतिविधियों से निर्दोष लोगों की मौत हो रही थी, आम लोगों की रक्षा करना सरकार का दायित्व है। हमारी सरकार ने नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। सरकार बनने के बाद ज्वाइंट टास्क फोर्स का गठन कर नक्सलवाद को समाप्त करने का प्रयास जारी है।

    बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम के आयोजन से लोगों में बढ़ा सरकार के प्रति विश्वास

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बस्तर के लोगों को मिल रहा है। वनांचल में तेंदूपत्ता खरीदी का कार्य सहकारी समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। नक्सलवादी विचारधारा से लोगों को बाहर निकालकर विकास की धारा में जोड़ने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम का आयोजन किया गया। बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार लोग शामिल हुए, जिससे यह साबित हुआ कि बस्तरवासी विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

    मुख्यमंत्री ने अपनी विदेश यात्रा के बारे में बताया कि यह यात्रा अत्यंत सफल रही। जापान में छत्तीसगढ़ पवेलियन के माध्यम से 24 से 31 अगस्त तक हमें राज्य की कला, संस्कृति और संभावनाओं को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया गया है और उन्हें नई उद्योग नीति से भी अवगत कराया गया है। नई उद्योग नीति में रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योग की अपार संभावनाएँ हैं। यहाँ प्रचुर प्राकृतिक संपदा उपलब्ध है। आयुर्वेद और हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में भी यहाँ विशाल संभावनाएँ हैं क्योंकि राज्य का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा वनों से आच्छादित है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ वनांचलों में भी स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विकास हुआ है। वर्तमान में प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी सहित कई उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना हो चुकी है।

    मुख्यमंत्री  साय ने लोगों से आग्रह किया कि गायों को लावारिस न छोड़ा जाए। लावारिस पशुओं के कारण सड़क दुर्घटनाएँ हो रही हैं। गौवंश की रक्षा करना हम सबका दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गोचर भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने के लिए सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है।

    विकसित भारत के संकल्प के साथ ही विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प होगा पूरा

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का संकल्प है। यह संकल्प सबकी सहभागिता से ही पूरा होगा और इसे साकार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प के साथ ही अंजोर विजन-2047 (छत्तीसगढ़ विजन) डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य के सर्वांगीण विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि सभी को मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में सहयोग करना चाहिए।

  • प्रमुख मांगें पूर्ण होने पर संघ ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए वापस ली प्रदेशव्यापी हड़ताल

    रायपुर : एनएचएम कर्मचारियों द्वारा हड़ताल समाप्त करने का निर्णय स्वागतयोग्य : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

    मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात

    प्रमुख मांगें पूर्ण होने पर संघ ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए वापस ली प्रदेशव्यापी हड़ताल

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी प्रमुख मांगें पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री  साय का आभार जताते हुए प्रदेशव्यापी हड़ताल वापस लिए जाने के निर्णय से उन्हें अवगत कराया। मुख्यमंत्री  साय को प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कल से प्रदेशभर में एनएचएम कर्मचारी काम पर लौटेंगे।

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों द्वारा हड़ताल समाप्त किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सराहनीय और राज्यहित में उठाया गया कदम बताया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर कर्मचारी को अपने परिवार का हिस्सा मानती है और उनकी जायज़ मांगों के प्रति सदैव संवेदनशील रही है। उन्होंने कहा कि जनता का स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार ने सदैव इस दिशा में ठोस पहल की है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि एनएचएम कर्मचारियों के इस निर्णय से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ और मज़बूत होंगी तथा जनता को उत्कृष्ट और सुलभ चिकित्सा सुविधाएँ मिलेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों से छत्तीसगढ़ एक और बेहतर, स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होगा।

    उल्लेखनीय है कि एनएचएम कर्मचारी अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर गए थे। राज्य सरकार ने इनमें से चार मांगों को पूरा कर दिया है। तीन अन्य मांगों पर समिति गठित कर कार्यवाही प्रारंभ की गई है, जबकि संविलयन, पब्लिक हेल्थ केडर और आरक्षण संबंधी मांगों पर भारत सरकार से निर्णय लिया जाना है।

    इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की पहल पर हड़ताल समाप्त होने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य का प्रत्येक कर्मचारी परिवार का सदस्य है और एनएचएम कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर राज्यहित में सराहनीय निर्णय लिया है।

    इस अवसर पर विधायक  किरण देव, छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ से डॉ अमित मिरी, डॉ रविशंकर दीक्षित,  पूरन दास,  कौशलेश तिवारी,  हेमंत सिन्हा,  दिनेश चंद्र,  संतोष चंदेल,  प्रफुल्ल पाल, डॉ देवकांत चतुर्वेदी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।

  • बड़ी कर चोरी बेनकाब: रायपुर में 170 बोगस कंपनियों से करोड़ों की GST ठगी

    जाँच में 1.64 करोड़ रूपये नकद और 400 ग्राम सोना जब्त

    रायपुर

    मो. फरहान सोरठियाराज्य जीएसटी विभाग ने जीएसटी एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस नेटवर्क तथा जीएसटी प्राईम पोर्टल का उपयोग करके बोगस फर्म और बोगस बिल तैयार करने वाले सिंडिकेट का पता लगाया है। इसका मास्टर माइंड मो. फरहान सोरठिया है, जो जीएसटी के कर सलाहकार के रूप में कार्य करता था। इस सिंडिकेट के कारण राज्य को प्रतिमाह करोड़ों रूपये के कर राजस्व का नुकसान होता था।
    राज्य जीएसटी की बी.आई.यू. टीम इस प्रकरण पर एक माह से कार्य कर रही थी। मास्टर माइंड मो. फरहान सोरठिया के ऑफिस में 12 सितंबर को जांच की गयी। जांच के दौरान यहां से 172 फर्मों के बारे में जानकारियां मिली। फरहान ने अपने 5 ऑफिस स्टॉफ को फर्मों का पंजीयन कराने, रिटर्न फाईल करने और ई-वे बिल तैयार करने के लिये रखा था। इसके अलावा मास्टर माइंड के आफिस से बोगस पंजीयन के लिये किरायानामा, सहमति पत्र, एफिडेविट तैयार करने के भी साक्ष्य मिले हैं।
    26 बोगस फर्मों से ही 822 करोड़ का ई-वे बिल जनरेट किया गया, जबकि रिटर्न में 106 करोड रूपये का ही टर्नओव्हर दिखाया गया है। केवल इन फर्मों से ही राज्य को 100 करोड़ रूपये के जीएसटी का नुकसान होने का प्रारंभिक आंकलन है। यहां से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार राज्य के भीतर और पंजाब, असम, मणिपुर, ओडिसा में भी पंजीयन लिया गया है। पंजीयन के लिए बोगस दस्तावेज जैसे किरायानामा एवं सहमति पत्र भी तैयार किये जाते थे। इन फर्मों के माध्यम से बोगस सप्लाई बिल और ई-वे बिल जारी किए जा रहे थे।

    मो. फरहान के बोगस फर्मों से संबंधित दस्तावेज छुपाये जाने की सूचना पर विभाग ने 17 सितंबर को फरहान के चाचा मो. अब्दुल लतीफ सोरठिया के आवास में सर्च (जांच) किया गया। वहां अधिकारियों को 1 करोड़ 64 लाख रूपये के नोट और 400 ग्राम सोने के 4 बिस्किट मिले। विभाग के अधिकारियों ने इसे जब्त कर के आयकर विभाग को सूचना दे दी है।

    जीएसटी अधिकारियों द्वारा इन फर्मों से करोड़ों रूपए के जीएसटी फ्रॉड की राशि की गणना की जा रही है। इस प्रकरण में कई ब्रोकर, स्क्रैप डीलर और इनपुट टैक्स क्रेडिट के लाभ लेने वाली कम्पनियाँ भी विभाग के जांच के दायरे में है। राज्य कर विभाग द्वारा मामले की गहन जांच की जा रही है और आगे की विधिक कार्यवाही प्रगति पर है।

  • कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने ‘राइजिंग एग्री समिट’ में बढ़ाया छत्तीसगढ़ का मान

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ के पशुधन एवं मछली पालन मंत्री  रामविचार नेताम गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित “राइजिंग एग्री समिट” में शामिल हुए। उन्होंने आनंद जिले के प्रसिद्ध अमूल प्रोसेसिंग प्लांट के डेयरी प्रबंधन, आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीकों और मूल्य संवर्धन की प्रक्रियाओं का अवलोकन भी किया। गुजरात में आयोजित इस समिट में देश-विदेश के विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया। मंत्री  नेताम ने कहा कि गुजरात मॉडल की तर्ज पर ही इस यात्रा से प्राप्त अनुभवों को राज्य की नीतियों और योजनाओं में शामिल कर किसानों और पशुपालकों के लिए नए अवसर सृजित किए जाएंगे।

    मंत्री  नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में सभी प्रकार के किसानों के उन्नति के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने समिट में बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार समर्थन मूल्य के साथ-साथ कृषि उन्नति योजना लाकर किसानों के समृद्धि के लिए काम कर रही है, वहीं भूमिहीन मजदूर किसानों के लिए भी वार्षिक सहायता का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार कृषि विकास के कार्यों के साथ ही पशुपालक और मत्स्य किसानों की सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिए हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाले जनजातीय परिवारों को दुधारु गाय दिए जा रहे हैं। इससे वनांचल में रहने वाले जनजातियों को अतिरिक्त आमदनी हो रही जिससे, उनके जीवन में बदलाव देखने को मिल रहा है। 

    मंत्री  नेताम ने इस मौके पर छत्तीसगढ़ में डेयरी और पशुधन क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए लिए गए फैसलों व बनाए गए नीतियों सहित संचालित योजनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर उनके साथ पशुधन विकास विभाग के निदेशक  चंद्रकांत वर्मा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। 

  • ऑस्कर नॉमिनेशन ने बढ़ाया प्रदेश का मान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    ऑस्कर नॉमिनेशन ने बढ़ाया प्रदेश का मान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल और आस पास के क्षेत्रों में की गई फिल्म ‘होमबाउंड’ की पूरी शूटिंग
    वर्ष 2024 में फिल्म लापता लेडीज पहुंची थी ऑस्कर

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा मंच पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। वैश्विक स्तर पर सराही गई फिल्म 'लापता लेडीज' के बाद, अब राज्य में शूट हुई फीचर फिल्म 'होमबाउंड' को 98वें अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर 2026) की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चयनित किया गया है। गतवर्ष फिल्म लापता लेडीज को भी ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर फिल्म की पूरी टीम को बधाई दी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे प्रदेश में शूट हुई फिल्म होमबाउंड को ऑस्कर के लिए चुना गया है। यह न केवल फिल्म जगत के लिए, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए एक अभूतपूर्व गौरव का क्षण है। मध्यप्रदेश फिल्म पर्यटन नीति-2025 ने सिंगल विंडो सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रिया और अनुमतियों को कम एवं सरल कर फिल्मांकन को आसान बनाया है। साथ ही आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराए हैं। होमबाउंड का मध्यप्रदेश में फिल्माया जाना और उसका अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश तेजी से एक प्रमुख ग्लोबल शूटिंग हब के रूप में स्थापित हो रहा है। यह सफलता हमारे प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और कला के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के उन सभी युवा फिल्म निर्माताओं के लिए प्रेरणा बनेगी जो अपने सपनों को पंख देना चाहते हैं। फिल्म होमबाउंड का चयन भारतीय सिनेमा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है, जो मध्यप्रदेश की कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि होमबाउंड ऑस्कर में भी शानदार सफलता हासिल करेगी और भारत के साथ मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेगी।

    फिल्म होमबाउंड की पूरी शूटिंगवर्ष 2024 में एक बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश के भोपाल और आसपास के क्षेत्र में प्राकृतिक, सांस्कृतिक और शहरी परिवेश में शूट किया गया है। फिल्म की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा राज्य की फिल्म अनुकूल नीतियों और फिल्म की कहानी के अनुसार उपयुक्त लोकेशनों की सफलता का प्रमाण है। गौरतलब है कि होमबाउंड फिल्म, धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनी है। मध्यप्रदेश में शूट होने वाली यह उनकी 5वीं फिल्म है। फिल्म के निर्माता करण जौहर हैं। निर्देशक  नीरज घेवान हैं। इससे पहले उनके निर्देशन में बनी “मसान” फिल्म को भी दर्शकों ने खूब सराहा था। 'होमबाउंड' में कलाकार ईशान खट्टर, विशाल जेठवा और जान्हवी कपूर मुख्य भूमिका में हैं।  

    नई टूरिज्म पॉलिसी ने फिल्मांकन किया आसान

    मध्यप्रदेश की नई फिल्म टूरिज्म पॉलिसी ने निर्माता–निर्देशकों का काम आसान किया है। सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है, वहीं सब्सिडी से निर्माता–निर्देशकों को प्रोत्साहन मिला है। मध्यप्रदेश की फिल्म टूरिज्म पॉलिसी के बाद प्रदेश में 350 से अधिक फिल्में और वेबसीरीज शूट हो चुकी हैं। अब तक 12 हिंदी फिल्में, 1 तेलुगु फिल्म और 6 वेब सीरीज को 24 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय अनुदान दिया जा चुका है। भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश को “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है।

     

  • एमपी में नौकरी की राह आसान! स्पेशल कोर्स के लिए एलएंडटी-आरजीपीवी-एमपीएसईडीसी ने किया करार

    भोपाल 
    देशभर की तरह मध्यप्रदेश में भी लाखों युवा बेरोजगार हैं। ये युवा प्रतिभावान होने के साथ ही उच्च शिक्षित भी हैं पर उन्हें नौकरियां नहीं मिल रही। दरअसल रोजगार परक कोर्स नहीं किए जाने के कारण ये दिक्कत आती है। प्राइवेट कंपनियों और उद्योगपतियों का कहना है कि युवा उच्च शिक्षा जरूर लेते हैं पर उनमें उद्योगों के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल का अभाव पाया जाता है। एमपी में अब यह दिक्कत दूर करने की पहल की गई है। प्रदेश के तकनीकी संस्थानों से निकलनेवाले युवाओं और उद्योगों, कंपनियों के लिए जरूरी कौशल के बीच की खाई पाटने के लिए अहम करार किया गया है। प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी), राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) और एलएंडटी एजूटेक के बीच एक एमओयू किया गया है। इसके अंतर्गत प्रदेश में एलएंडटी द्वारा विकसित स्पेशल कोर्स लांच किए जा रहे हैं। कोर्स पूरा करने पर स्टूडेंट को सर्टिफिकेट मिलेंगे जोकि युवाओं को तुरंत नौकरी दिला सकेंगे।

    मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयीन कोर्स को उद्योगों, कंपनियों की वास्तविक मांगों से जोड़कर इंड्स्ट्री-रेडी इंजीनियर तैयार करने की पहल की गई है। प्रदेश में हर साल 50 हजार से ज्यादा इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी स्नातक नौकरी बाजार में आ रहे हैं। अकादमिक-औद्योगिक तालमेल की जरूरत को देखते हुए एलएंडटी एजूटेक द्वारा विशेष पाठ्यक्रम बनाए गए हैं। पायलट
    प्रोेजेक्ट के रूप में इन्हें आरजीपीवी के माध्यम से लांच किया गया है।

    इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत तकनीकी मानव संसाधनों को वास्तविक परियोजनाओं, वर्चुअल लैब और इंडस्ट्री-लीडरशिप एनेबल्ड सत्रों के माध्यम से सक्षम बनाया जा रहा है। आरजीपीवी के कुलगुरू प्रो. राजीव त्रिपाठी, एमपीएसईडीसी, निवेश संवर्धन प्रभारी अवंतिका वर्मा और एलएंडटी एजूटेक टीम लीड राजा पांचाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।