• इंदौर में 1450 बेड वाला अस्पताल बनेगा, मोहन यादव ने भूमिपूजन किया, फ्री होंगे बोन मैरो और किडनी ट्रांसप्लांट

    इंदौर
     1952 से लेकर अब तक सेंट्रल इंडिया का सबसे बड़ा इंदौर का महाराजा यशवंत राव हॉस्पिटल अब नए स्वरूप में 1450 बेड के साथ अपग्रेड होने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने  773.007 करोड़ की लागत से बनने जा रहे अस्पताल के नवीन भवन का भूमि पूजन किया. इंदौर का महाराजा यशवंत राव हॉस्पिटल सात मंजिला इमारत है, जिसे अब नए सिरे से बनाया जा रहा है. करीब 70 साल पुराना यह अस्पताल महाराजा यशवंत राव होलकर द्वारा बनवाया गया था. जो सेंट्रल इंडिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य केंद्र रहा है. अब यहां अस्पताल की नई बिल्डिंग बनने जा रही है.

    प्रदेश में स्वास्थ सुविधाओं में वृद्धि
    इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, ''प्रदेश की स्वास्थ सुविधाओं में पिछले 11 वर्षों से लगातार वृद्धि हो रही है. मध्य प्रदेश में नए-नए मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज कॉलेज खोले रहे हैं. प्रदेश सरकार नागरिकों की सुविधाओं में वृद्धि के लिए दिन-रात प्रयास कर रही है. पिछले वर्षों में प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार आया है.'' कार्यक्रम में प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल भी मौजूद थे.

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि, ''जिस तरह इंदौर शहर हमारे प्रदेश का गौरव है, उसी तरह इंदौर के एमवाय अस्पताल की भी मध्य प्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान है.'' उन्होंने कहा कि, ''इंदौर में 1450 बिस्तरीय अस्पताल बन जाने से न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि हमारे पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती जिलों के मरीजों को भी यहां बेहतर स्वास्थ सुविधाएं उपलब्ध होगी. इंदौर के एमवाय अस्पताल में बोनमेरो ट्रांसप्लांट और किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है.'' उन्होंने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को नए अस्पताल भवन के निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए.

    ऐसा होगा नए अस्पताल का सेट अप
    मध्य प्रदेश भवन विकास निगम द्वारा निर्मित किए जाने वाले नए अस्पताल भवन में मेडिसिन वार्ड में कुल 330 बिस्तर, सर्जरी विभाग में 330 बिस्तर, ऑर्थोपेडिक्स विभाग में 180 बिस्तर, शिशु रोग सर्जरी विभाग में 60, शिशु रोग वार्ड में 100, न्यूरो सर्जरी में 60, नाक कान गला विभाग में कुल 30, दंत रोग विभाग में 20, त्वचा रोग विभाग में कुल 20, मातृ एवं शिशु वार्ड में 100, नेत्र वार्ड में 80 तथा इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए 180 बिस्तरीय सुविधा उपलब्ध रहेगी.

    नए अस्पताल भवन में कुल 1450 बिस्तरीय वार्डों के निर्माण पर कुल 528 करोड़ रुपए व्यय होंगे. इसके अलावा 550 बिस्तरीय नर्सिंग हॉस्टल के निर्माण पर 21.37 करोड रुपए, 250 सीटर मिनी ऑडिटोरियम के निर्माण पर 1.60 करोड. रुपए व्यय किए जाएंगे. इसके अलावा सार्वजनिक पार्किंग के निर्माण पर 31.50 करोड़ रुपए, विद्युतीकरण, बाउंड्रीवॉल एवं सोलर पैनल स्थापना पर 25.53 करोड रुपए तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, प्लंबिंग एवं वाटर सप्लाई संबंधी कार्यों कार्य पर लगभग 10 करोड़ रुपए लागत आएगी.

  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सर सह कार्यवाह श्री मुकुंदा जी ने किया अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय भोपाल का भ्रमण

    भोपाल

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय  सर सह कार्यवाह मुकुंदा जी ने अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय भोपाल का भ्रमण किया एवं अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के  राज्य नेतृत्व के साथ शैक्षणिक एवं सामाजिक विषयों पर चर्चा की उनके साथ इस सार्थक चर्चा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक श्रीमान विमल जी गुप्ता एवं मध्यभारत के प्रांत कार्यवाह हेमंत जी सेठिया की भी उपस्थिति  रही  अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की और से इस चर्चा में  कुलपति गौतम पांडे स्टेट हेड अभिषेक राठौर एवं राज्य नेतृत्व्य के सभी सदस्य उपस्थित थे.

  • ग्वालियर में तानसेन संगीत समारोह की धूम, CM डॉ. मोहन यादव आज करेंगे 101वीं बार शुरुआत

    ग्वालियर
    संगीतधानी ग्वालियर की फिजाएं एक बार फिर सुरों की बारिश से सराबोर होने जा रही हैं। विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत का सबसे बड़ा आयोजन 101वां तानसेन संगीत समारोह आज से शुरू हो रहा है। हजीरा स्थित तानसेन समाधि स्थल पर आयोजित इस समारोह का शुभारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इस बार मंच ग्वालियर के प्रसिद्ध चतुर्भुज मंदिर (शून्य मंदिर) की तर्ज पर तैयार किया गया है, जो आयोजन को और भी भव्य बना रहा है। 

    15 से 19 दिसंबर तक चलने वाले इस पांच दिवसीय समारोह में देश-विदेश के विश्वविख्यात शास्त्रीय संगीत कलाकार सुर सम्राट मियां तानसेन को स्वरांजलि अर्पित करेंगे। समारोह के पहले दिन शाम 6 बजे से राष्ट्रीय तानसेन अलंकरण और राजा मानसिंह तोमर सम्मान वितरण समारोह होगा। इसमें मूर्धन्य संगीतज्ञ पंडित राजा काले (2024) और पंडित तरुण भट्टाचार्य (2025) को तानसेन अलंकरण से विभूषित किया जाएगा। वहीं साधना परमार्थिक संस्थान समिति मंडलेश्वर और रागायन संगीत समिति ग्वालियर को राजा मानसिंह तोमर सम्मान प्रदान किया जाएगा।

  • 19 साल की सेवा पर पड़ा भारी एक गलत कदम, महिला कलेक्टर ने सहायक ग्रेड-3 को पदावनत कर चपरासी बना दिया

     बड़वानी

    मध्यप्रदेश में अब “चल जाएगा” वाली बाबूगिरी पर सीधी चोट हो रही है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी पैसे से खेल किया तो कुर्सी नहीं बचेगी. पहले बुरहानपुर में और अब बड़वानी में महिला कलेक्टर के एक फैसले ने सरकारी दफ्तरों में बैठे कर्मचारियों की नींद उड़ा दी है. बड़वानी जिले में कलेक्टर जयति सिंह ने वित्तीय अनियमितता के गंभीर मामले में बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए सहायक ग्रेड-3 (क्लर्क) को उसके पद से हटाकर सीधे भृत्य यानी चपरासी बना दिया. यह कार्रवाई तहसील न्यायालय बड़वानी में पदस्थ रहे कर्मचारी प्रकाश डुडवे पर की गई है.

    शासकीय पैसे में हाथ डाला, मामला हुआ भारी
    जांच में सामने आया कि प्रकाश डुडवे ने शासकीय वसूली की राशि 3 लाख 2 हजार 266 रुपये सरकारी खजाने में जमा नहीं की. यह साफ तौर पर शासकीय धन का दुरुपयोग माना गया. कलेक्टर ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का गंभीर उल्लंघन माना.

    जवाब नहीं दे पाए, जांच में फंसे
    मामला सामने आने के बाद 16 अप्रैल 2024 को कर्मचारी को निलंबित कर स्पष्टीकरण मांगा गया. जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो 14 जून 2024 को अपर कलेक्टर को विभागीय जांच अधिकारी नियुक्त किया गया. जांच के दौरान कर्मचारी ने खुद स्वीकार किया कि उससे वित्तीय अनियमितता हुई है. उसने 5 जून 2024 को 1 लाख 43 हजार रुपये ऑनलाइन चालान के जरिए जमा भी किए, लेकिन तब तक मामला पूरी तरह पकड़ में आ चुका था.

    सुनवाई में कबूलनामा, फिर गिरी गाज
    4 मार्च 2025 को हुई अंतिम सुनवाई में कर्मचारी ने विभागीय जांच में लगे सभी आरोप स्वीकार कर लिए. कलेक्टर ने 19 साल से अधिक की सेवा को ध्यान में रखते हुए सहानुभूति दिखाई, लेकिन संदेश भी साफ दिया कि गलती की सजा मिलेगी. इसके बाद आदेश जारी हुआ कि सहायक ग्रेड-3 को पदावनत कर तहसील कार्यालय पानसेमल में भृत्य (चपरासी) के पद पर पदस्थ किया जाए.

    पहले भी दिख चुकी है सख्ती
    इससे पहले जनवरी 2025 में बुरहानपुर की तत्कालीन कलेक्टर भव्या मित्तल ने भी रिश्वतखोरी के मामले में सहायक ग्रेड-3 को चपरासी बना दिया था. अब वही सख्ती बड़वानी में भी देखने को मिली है. इस कार्रवाई के बाद साफ हो गया है कि अब फाइलों में खेल नहीं चलेगा, वरना बाबू से चपरासी बनने में देर नहीं लगेगी.

  • उज्जैन महाकाल मंदिर में 20 साल बाद बदलाव, नए चांदी के द्वार में उकेरी गईं अद्भुत आकृतियां

    उज्जैन
     मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में बड़ा बदलाव किया गया है। यह बदलाव रविवार के दिन किया गया है। गर्भगृह में  25 किलो चांदी का द्वार लगाया गया है।  इसे विधि विधान से संध्या आरती करने के समय स्थापित किया गया।

    महाकाल मंदिर के पुजारी भूषण व्यास के अनुसार, लगभग 20 वर्षों के बाद गर्भगृह के द्वार को बदला गया है। इसके द्वार का निर्माण जयपुर के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार किया गया है। गर्भगृह का आंतरिक और बाहरी परिसर पत्थर का बना हुआ है। इसके कारण नए दरवाजे की माप के आधार पर तैयारी की गई।

    कोलकाता की भक्त ने बनवाया
    महाकाल के गर्भगृह के बदले द्वार को कोलकाता की निवासी भक्त निभा प्रकाश ने बनवाया है। उन्होंने लकड़ी पर चांदी की मढ़ाई कराकर इसे बनवाया है। उन्होंने सभामंडप में नए द्वार का विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद द्वार को गर्भगृह के बाहर स्थापित किया गया। चांदी की आज के बाजार भाव के हिसाब से बात करें दो द्वार बनाने की अनुमानित कीमत 50 लाख से अधिक बताई जा रही है।

    द्वार में उकेरी गई हैंये आकृतियां
    मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि द्वार के शीर्ष पर दो नंदी की आकृतियां है। इसके साथ ही उनके नीचे ॐ, त्रिशूल और सबसे निचले हिस्से में कलश की आकृति उकेरी गई है। आपको बता दें कि महाकाल के परम भक्त मंदिर में आकर ऐसे दान करते रहते हैं। करीब 4 महीने पहले ही बाबा महाकाल को सवा किलो चांदी का मुकुट दान किया गया था। यह दान यूपी के गाजियाबाद के भक्त सुनील कुमार यादव ने किया था।

     

  • सीएम मोहन यादव ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की, सरकार के दो साल के कामकाज पर दी जानकारी

    भोपाल 

    प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मुख्यमंत्री पद पर दो साल का कार्यकाल पूरा होने के एक दिन बाद, रविवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से आधिकारिक मुलाकात की। दोनों नेताओं की बैठक को अहम माना जा रहा है। 

    बताया जा रहा है कि सीएम यादव ने बैठक में अमित शाह को प्रदेश की विकास योजनाओं, कानून‑व्यवस्था और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रगति के बारे में जानकारी दी। इस मुलाकात का समय विशेष महत्व रखता है क्योंकि मुख्यमंत्री यादव ने हाल ही में अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए नक्सलवाद को राज्य से पूरी तरह समाप्त करने जैसी बड़ी सफलता को अपनी अवधि की प्रमुख उपलब्धि बताया। 

    मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार

    मुख्यमंत्री ने हाल ही में सभी मंत्रियों की समीक्षा की है। मीडिया के सामने कुछ नहीं कहा गया लेकिन सरकारी सूत्र कहते हैं कि, श्री अमित शाह के निर्देश पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सभी मंत्रियों की फाइल बनाई है। इसमें सबके पॉजिटिव और नेगेटिव है। विजय शाह जैसे मंत्रियों के बारे में भी फैसला लेना है। और फिर सबको एडजस्ट भी करना है। वर्तमान में मुख्यमंत्री के पास 15 विभाग है। गृह मंत्रालय को फुल टाइमर मंत्री की जरूरत है। इसके अलावा निगम मंडल की जो लिस्ट तैयार हो गई है, इसकी घोषणा भी करनी है। दोनों के बीच बातचीत का यह सबसे प्रमुख मुद्दा रहा होगा। 

    शिवराज सिंह चौहान
    पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान अपने आप में एक बड़ा मुद्दा बन गए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री होने के बावजूद वह नियमित रूप से मध्य प्रदेश में एक्टिव है और अपने नेटवर्क के संपर्क में है। पिछले दिनों उन्होंने अपने समाज के सम्मेलन में "यह सरकार मैंने बनाई, मुख्यमंत्री मुझे बनना चाहिए था" जैसा कुछ बोल गए थे। हाल ही में उन्होंने, केंद्रीय नेतृत्व से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की शिकायत की है। कहा तो यह भी जा रहा है कि उन्होंने बिल्कुल लास्ट मिनट पर भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि बनूँगा तो मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनूँगा, नहीं तो कृषि मंत्री ही ठीक हूं। यही कारण है कि, चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई और नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनना पड़ा। 

    राज्य के विकास और केंद्र से सहयोग पर चर्चा
    पिछली कई मुलाकातों में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, सहकारिता, नक्सल मुक्ति जैसी उपलब्धियों की समीक्षा और केंद्र से फंडिंग/प्रोजेक्ट्स पर बात हुई है। हाल ही में मध्य प्रदेश को नक्सल-मुक्त घोषित किया गया है, जिसे सीएम ने अमित शाह और पीएम मोदी की नीतियों का श्रेय दिया है। अब इसका फायदा भी उठाना है।

    ज्योतिरादित्य सिंधिया
    दूसरे केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पिछले कुछ दिनों में काफी तेजी से एक्टिव हुए हैं। पिछले दिनों उन्होंने अपनी पॉलिटिकल टेरिटरी का ऐलान कर दिया था। इसमें लगभग 30% मध्य प्रदेश आता है। ग्वालियर में प्रभारी मंत्री के नाम पर बैठक बुलाई जाती है और फिर स्वयं बीच की कुर्सी पर बैठकर एक महाराज की तरह अधिकारियों को दिशा निर्देश देते हैं। इस समस्या का समाधान भी चाहिए। 

    बढ़ता हुआ विरोध और उसका समाधान
    पिछले दिनों स्वयं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा था, वह मार्गदर्शन के लिए अक्सर दिल्ली जाते हैं। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में मोहन सरकार का विरोध बढ़ रहा है। इस आग को भड़काने वालों में श्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के अलावा श्री शिवराज सिंह चौहान, श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ प्रचारक और भारतीय जनता पार्टी के कुछ बड़े नेताओं के नाम सामने आए हैं। मध्य प्रदेश में खुले तौर पर कहा जा रहा है कि 2028 का विधानसभा चुनाव डॉ मोहन यादव की लीडरशिप में नहीं लड़ा जाएगा।

  • गौतम रिसॉर्ट में सब्जी खाने से 4 कर्मचारियों की मौत, होटल का लाइसेंस निलंबित, कलेक्टर ने लिया एक्शन

    खजुराहो 

    खजुराहो के गौतम होटल्स एंड रिसॉर्ट्स में भोजन कर बीमार पड़े नौ कर्मचारियों में से चार की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया है। होटल का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी वेद प्रकाश चौबे को नोटिस दिया है। पूछा है कि वीवीआइपी कार्यक्रम होने के बाद भी होटल में फूड सैंपलिंग में लापरवाही क्यों बरती गई? कलेक्टर ने 15 दिसंबर तक जवाब मांगा है।
    कलेक्टर के निर्देश पर बड़ा फैसला

    मामले में सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने बताया कि होटल में चार लोगों की मौत के बाद कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में यह फैसला लिया गया। एक टीम होटल की जांच के लिए भेजी गई है। रिपोर्ट के बाद तय होगा कि खाने में जहरीला पदार्थ था या नहीं। फिलहाल फूड पॉइजनिंग के आधार पर होटल का लाइसेंस निलंबित किया गया है। खजुराहो में थी सरकार खजुराहो में कैबिनेट मीटिंग के चलते सीएम, मंत्री और प्रदेश के शीर्ष अधिकारी भी थे।

    रिपोर्ट आने के बाद हकीकत सामने आ सकेगी
    घटना के बाद मृतकों के विसरा और केमिकल सैंपल लिए गए थे, जिनको जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही लोगों की मौत की हकीकत सामने आ सकेगी।

    लंबे समय से होटल के पिछले हिस्से में रहते थे
    यह कर्मचारी लंबे समय से होटल के पिछले हिस्से में रहते थे और होटल में हाउस कीपिंग व गार्डनिंग का काम करते थे। इलाज के दौरान ग्वालियर में 20 साल के हार्दिक ने शनिवार को दम तोड़ दिया था। इससे पहले रामस्वरूप कुशवाह, प्रागीलाल कुशवाह, गिरिजा रजक की पहले ही मौत हो गई थी। 

    अपर कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी वेद प्रकाश चौबे को जिले में लगातार वीवीआइपी मूवमेंट होने के बावजूद खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग की कार्रवाई के संबंध में लापरवाही पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही अपर कलेक्टर ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी से 15 दिसंबर 2025 को शाम चार बजे तक स्पष्टीकरण भी मांगा है। 

  • जबलपुर: सात संदिग्ध जमाती पकड़े गए, छिपते हुए जा रहे थे पठानी मोहल्ला, पुलिस ने थाने में की पूछताछ

    जबलपुर
     पनागर में रविवार को सात जमाती मिले। उनके पास बड़े-बड़े कई बैग थे, जिनके अंदर मुस्लिम धर्म से संबंधित साहित्य रखे थे। हिंदू संगठनों ने जमातियों को छिपते हुए पनागर पहुंचते देखा। गतिविधि संदिग्ध प्रतीत होने पर बातचीत का प्रयास किया। उनका व्यवहार और भाषा अजीब लगने पर हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने पुलिस को बुलाया। पुलिस जमातियों को पकड़कर थाने ले गई। उनके बैग के सामान, पहचान पत्र की जांच की गई है।

    पूछताछ में जमातियों ने दिल्ली से जबलपुर आने और फिर पन्ना जाने की जानकारी दी। उनके प्रवास के दौरान गतिविधियों के बारे में और वे जबलपुर और पनागर में किनसे मिले हैं, इसके बारे में पूछताछ की जा रही है।

    एक साइकिल और 20 से ज्यादा बड़े बैग

    बजरंग दल के कार्यकर्ता रविवार को दोपहर में पनागर के शिशु मंदिर के पास एक गोशाला में थे। तभी उन्होंने देखा कि पठानी मोहल्ला की ओर से सात लोग जा रहे हैं। इनके पास एक पुरानी साइकिल और 20 बड़े थैले थे। अपरिचित चेहरे और बड़े-बड़े थैले देखकर संगठन के कार्यकर्ताओं ने रोका। आरोप है कि पनागर में उनका कोई कार्यक्रम नहीं था। फिर भी पठानी मोहल्ले पहुंचे थे। जमातियों की भाषा भी अजीब है।
    गोहलपुर की मस्जिद में ठहरे, पन्ना जा रहे थे

    पुलिस पूछताछ में जमातियों ने बताया कि वे दिल्ली से बस से झांसी पहुंचे थे। उसके बाद सागर और फिर शुक्रवार को जबलपुर पहुंचे थे। जबलपुर में जमाती गोहलपुर की एक मस्जिद में रुके थे। जिन जमातियों से पूछताछ की गई है उनमें मोहम्मद इमरान, शाहिद अली, मोहम्मद उमर, सुहैल अरशी, मोहम्मद अरशद, शाहबुद्दीन और महमूद खान शामिल हैं। इनमें से कुछ ने स्वयं को पूर्वी दिल्ली और कुछ ने झांसी का निवासी होना बताया है।

  • डॉ. रश्मि का आत्महत्या प्रयास, AIIMS भोपाल में हाई डोज एनेस्थीसिया से दिल 7 मिनट तक बंद रहा, यूनुस को HOD पद से हटाया

    भोपाल 

    राजधानी भोपाल में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रश्मि वर्मा द्वारा आत्महत्या का प्रयास करने के मामले में संस्थान में हड़कंप मचाकर रख दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई लेवल कमेटी गठित की गई है, जो इस पूरे मामले की जांच करेगी। साथ ही, ट्रॉमा एवं इमरजेंसी विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट (HOD) डॉ. यूनुस को उनके पद से हटा दिया गया है।

    आपको बता दें कि, ये हैरान कर देने वाली घटना 11 दिसंबर की रात की है। यहां डॉ. रश्मि वर्मा ड्यूटी पूरी कर घर लौटने के बाद एनेस्थीसिया की हाई डोज खुद को इंजेक्ट कर लिया था। इससे उनका दिल करीब 7 मिनट तक बंद रहा, जिससे उनके दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचा है। एमआरआई रिपोर्ट में ग्लोबल हाइपोक्सिया ब्रेन डैमेज की पुष्टि हुई है। मौजूदा समय में डॉ. रश्मि वर्मा वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। इलाज में जुटे चिकित्सकों की मानें तो उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

    HOD पद से हटाए गए डॉ. यूनुस

    एम्स प्रबंधन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच आपात बैठक हुई, जिसमें मामले की गहन जांच के निर्देश दिए गए। बैठक के दौरान चर्चा हुई कि, डॉ. यूनुस पर पहले भी डॉक्टरों को प्रताड़ित करने के आरोप लग चुके हैं, जिसके चलते उन्हें पद से हटाया गया है। संस्थान के सूत्रों के अनुसार, कार्यस्थल पर तनाव और प्रताड़ना के आरोपों की जांच की जा रही है। एम्स प्रबंधन ने मामले पर संवेदनशीलता दिखाते हुए सभी पक्षों से जानकारी जुटाई जा रही है।

  • मंडीदीप में हाई टेंशन लाइन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, नहार स्पिनिंग मिल्स के खिलाफ लोग एकजुट

    भोपाल के पास मंडीदीप में हाई टेंशन लाइन को लेकर विरोध, नहार स्पिनिंग मिल्स के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन

    मंडीदीप,रायसेन 
    नहार स्पिनिंग मिल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपनी दूसरी यूनिट खोलने की तैयारी के तहत नेशनल हाईवे नंबर 46 को क्रॉस करते हुए हाई टेंशन पावर लाइन ले जाए जाने का स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। इस प्रस्तावित हाई टेंशन लाइन को लेकर क्षेत्र के मजदूरों और रहवासियों ने अपनी जान को खतरा बताते हुए आपत्ति जताई है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे के ऊपर से और रिहायशी इलाके के नजदीक से गुजरने वाली हाई टेंशन लाइन से हमेशा हादसे की आशंका बनी रहेगी। इसी चिंता को लेकर आज मंडीदीप इलाके में नहार कंपनी के खिलाफ मजदूरों और स्थानीय नागरिकों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया।

    प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने अपने हाथों में तिरंगा झंडा लेकर वंदे मातरम के नारे लगाए और देशभक्ति गीत गाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कंपनी इस हाई टेंशन लाइन को वैकल्पिक और सुरक्षित मार्ग से ले जाए या फिर स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस योजना पर पुनर्विचार करे।

     इस पूरे मसले पर नहार कंपनी से बात करनी चाही तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से बचते हुए मिलने से ही इनकार कर दिया.

    सवाल ये है कि क्या किसी भी फैक्ट्री के ऊपर से हाइ पावर एक्सटेंशन लाइन ले जाई जा सकती है..?
    अगर भविष्य में इससे कोई दुर्घटना होती है तो जिम्मेदार कौन होगा..?
    क्या इसके लिए नेशनल हाइवे ऑटोरिटी और पावर डिपार्टमेंट से परमिशंस ली गई हैं..?
    क्या जिस प्राइवेट लैंड पर विशालकाय गड्ढे किए जा रहे हैं उन लैंड ओवर्स की परमिशन ली गई हैं..? 
    और सबसे बड़ा सवाल अलग फैक्ट्री डालने के लिए कंपनी अलग पावर स्टेशन क्यों नहीं बना रही है.??

    इस तरह के कई सवाल हवा में तैर रहे हैं और जल्द ही इन सवालों की जवाबदेही तय नहीं हुई तो भविष्य में इस हाइटेंशन लाइन की वजह से संभावित हादसों की आशंका बढ़ती हुई नजर आ रही है.

    प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से भी हस्तक्षेप की मांग की है ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से पहले इस मामले का समाधान निकाला जा सके। फिलहाल विरोध शांतिपूर्ण रहा और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति नहीं बनी…!

  • MP में कोहरे की शुरुआत, मुरैना-रायसेन में विजिबिलिटी 50 मीटर, अगले 3 दिन शीतलहर नहीं चलेगी

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड के साथ अब घना कोहरा भी अपना असर दिखाने लगा है। सोमवार सुबह प्रदेश के कई जिलों में सीजन का पहला घना कोहरा देखने को मिला, जिससे विजिबिलिटी काफी कम हो गई और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    मुरैना ज़िले में कँपकँपाती सर्द हवाओं के बीच घने कोहरे ने डेरा डाल दिया, जहाँ दृश्यता घटकर मात्र 50 मीटर रह गई। यहाँ न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस मापा गया। इसी तरह, रायसेन ज़िले में भी कोहरे की मोटी चादर बिछ गई, जिससे दृश्यता 50 मीटर तक सिमट गई और सड़कों पर वाहनों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर धीमी गति से चलना पड़ा। राजधानी भोपाल समेत टीकमगढ़ में भी तेज ठंड के माहौल में कोहरे का आगमन दर्ज किया गया।

    इस बीच, मौसम विभाग ने आगामी घंटों के लिए चेतावनी जारी की है। ग्वालियर, चंबल, सागर, जबलपुर और रीवा संभाग के कुल 14 ज़िलों में घने कोहरे का अलर्ट घोषित किया गया है। अलर्ट वाले जिलों में ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली शामिल हैं। इससे एक दिन पहले, रविवार को भी प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में कोहरा छाया रहा। वहीं, प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन, पचमढ़ी, 5.2 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के साथ राज्य में सबसे ठंडा स्थान बना रहा।

    मुरैना जिले में सुबह से ही सर्द हवाओं के साथ घना कोहरा छाया रहा। यहां विजिबिलिटी घटकर करीब 50 मीटर रह गई। जिले में न्यूनतम तापमान 9 डिग्री और अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    वहीं रायसेन में भी इस मौसम का पहला घना कोहरा देखने को मिला। कोहरे के कारण वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। राजधानी भोपाल में भी ठंड के साथ कोहरे की दस्तक हुई, जबकि टीकमगढ़ में भी मौसम का पहला कोहरा दर्ज किया गया।

    दूसरी ओर, तापमान में भी खासी गिरावट दर्ज की गई। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में भोपाल सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इंदौर में 6.6 डिग्री, ग्वालियर में 9.1 डिग्री, उज्जैन में 9.3 डिग्री और जबलपुर में न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रहा।

    प्रदेश में सबसे ठंडे स्थान पचमढ़ी और राजगढ़ रहे, जहां तापमान 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।इसके अलावा बैतूल में 5.8 डिग्री, उमरिया में 7 डिग्री, रीवा में 7.5 डिग्री, रायसेन में 7.6 डिग्री, मलाजखंड और नौगांव में 7.8 डिग्री, खजुराहो में 8.1 डिग्री, नरसिंहपुर में 8.2 डिग्री, दमोह और मंडला में 8.5 डिग्री, छिंदवाड़ा में 8.6 डिग्री, टीकमगढ़ में 8.9 डिग्री, सतना में 9.6 डिग्री और गुना में 9.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    17 दिसंबर से फिर नया सिस्टम, ठंड बढ़ेगी मौसम विभाग के अनुसार, नए नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) 17 दिसंबर की रात से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करने की संभावना है। जिसका असर एमपी में अगले दो-तीन दिन में दिखाई देने लगेगा। इससे ठंड का असर फिर से बढ़ जाएगा।

    पचमढ़ी सबसे ठंडा

    रविवार को भी प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में कोहरा छाया रहा। प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    17 दिसंबर से फिर बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग के मुताबिक, 17 दिसंबर की रात से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करेगा। इसका असर अगले दो-तीन दिनों में मध्यप्रदेश में दिखाई देगा, जिससे ठंड और बढ़ने की संभावना है।

    पचमढ़ी-कल्याणपुर सबसे ठंडे, भोपाल में 7 डिग्री पहुंचा पारा मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार-रविवार की रात में प्रदेश के अधिकांश शहरों में पारा 10 डिग्री से कम रहा। 5 बड़े शहरों में इंदौर सबसे ठंडा रहा। यहां तापमान 6.4 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 7 डिग्री, जबलपुर में 9.4 डिग्री, ग्वालियर-उज्जैन में 9.8 डिग्री सेल्सियस रहा।

    वहीं, पचमढ़ी प्रदेश में सबसे ठंडा रहा और यहां तापमान 5.2 डिग्री दर्ज किया गया। राजगढ़-कल्याणपुर में 5.6 डिग्री, शाजापुर में 6.1 डिग्री, मंदसौर में 6.7 डिग्री, रीवा-उमरिया में 7.2 डिग्री, मलाजखंड में 7.4 डिग्री, खजुराहो में 8.2 डिग्री, नौगांव में 8.3 डिग्री, रायसेन-दतिया में 8.4 डिग्री, मंडला में 8.5 डिग्री, बैतूल में 8.7 डिग्री, नरसिंहपुर, टीकमगढ़-दमोह में 9 डिग्री, खंडवा में 9.4 डिग्री और सतना में 9.6 डिग्री दर्ज किया गया।

  • भोपाल बनेगा शहरी विकास का केंद्र, केंद्रीय मंत्री खट्टर की मौजूदगी में तैयार होंगी नई योजनाएं

    भोपाल
    मध्य प्रदेश सहित पांच राज्यों में शहरी विकास की नई योजनाएं भोपाल में बनाई जाएंगी। इसे लेकर 20 दिसंबर को भोपाल में क्षेत्रीय बैठक बुलाई गई है। इसमें केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर शामिल होंगे।

    यहां आयोजित की गई है बैठक
    कुशाभाऊ ठाकरे सभागार भोपाल में आयोजित बैठक में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के शहरी विकास का रोडमैप तैयार कर चुनौतियों व समाधान पर भी बात होगी।

    मध्य प्रदेश की ओर से दिया जाएगा ये ब्योरा
    इन पांच राज्यों के अधिकारी और मंत्री बैठक में शामिल होंगे। बैठक में पांचों राज्य अपने नवाचार और शहरी विकास में क्या काम किए, यह भी बताएंगे। मध्य प्रदेश की ओर से पीएम आवास, लीगेसी वेस्ट जैसी केंद्र सरकार की योजनाओं में अब तक कितना काम हुआ और शहरी विकास में राज्य सरकार ने क्या काम किए, इनका ब्योरा दिया जाएगा।

    20 दिसंबर से भोपाल में भी मेट्रो आम लोगों के लिए दौड़ने लगेगी
    वहीं, भूमि विकास नियम में संशोधन के साथ ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट और मेट्रोपॉलिटन सिटी की प्रगति के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। 20 दिसंबर से भोपाल में भी मेट्रो आम लोगों के लिए दौड़ने लगेगी।

    लोकार्पण कार्यक्रम मिंटो हॉल में होगा
    इसका लोकार्पण कार्यक्रम मिंटो हॉल में ही होगा। इसके बाद केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुभाष नगर मेट्रो डिपो या एम्स मेट्रो स्टेशन जाकर मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

    एमपी मेट्रो कारर्पोरेंशन के एमडी एस. कृष्ण चैतन्य ने बताया कि 20 दिसंबर को भोपाल मेट्रो का लोकार्पण किया जाएगा। शासन ने लोकार्पण की तारीख आधिकारिक रूप से तय कर दी है और मेट्रो प्रबंधन को इसकी औपचारिक सूचना भेज दी गई है। लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन मिंटो हाल में दिन के समय होगा।
     
    7.5 किलोमीटर प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो चलाई जाएगी
    बता दें कि पहले चरण में ऑरेंज लाइन के 7.5 किलोमीटर प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो चलाई जाएगी। यह रूट एम्स मेट्रो स्टेशन से लेकर सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन तक रहेगा। इस रूट के शुरू होने से हजारों यात्रियों को रोजाना राहत मिलेगी और दोनों प्रमुख स्टेशनों के बीच यात्रा समय भी काफी घटेगा।

    पीएम मोदी कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हो सकते हैं
    वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम मध्य प्रदेश मेट्रो कार्पोरेशन द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

  • रीवा में संजय गांधी अस्पताल में नवजात जलकर मरा, प्रशासन ने 11 घंटे तक घटना छिपाई, अधीक्षक ने कहा- मृत पैदा हुआ था बच्चा

    रीवा

     रीवा में संजय गांधी अस्पताल में एक गंभीर घटना सामने आई है. यहां अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में आग लग गई. आग लगने के दौरान सर्जरी के बाद ऑपरेशन थिएटर में रखे एक नवजात बच्चे का शव आग की लपटों में घिर गया और बुरी तरह जल गया, जिससे उसकी मौत हो गई. आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने लगभग 11 घंटे तक इस घटना को छिपाए रखा और परिवार को इसकी जानकारी नहीं दी.

    अस्पताल के ओटी में लगी आग
    दरअसल, रविवार को दोपहर करीब 1 बजे संजय गांधी अस्पताल के गायनेकोलॉजी वार्ड में आग लग गई, जिससे अफरा-तफरी और दहशत फैल गई. अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में एक नवजात बच्चा बुरी तरह जल गया. सूत्रों के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने इस गंभीर घटना को करीब 11 घंटे तक छिपाए रखा और बच्चे का शव परिवार को नहीं सौंपा. आधी रात के आसपास जब मामला ऊंचे अधिकारियों तक पहुंचा तब अस्पताल प्रशासन ने पुष्टि की कि नवजात का शव जल गया था. अस्पताल के अधीक्षक ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ था. इसी बीच OPD एरिया में भी आग लग गई, जिससे पूरे अस्पताल में दहशत फैल गई.

    वहीं संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि नवजात मृत अवस्था में पैदा हुआ था। उनके अनुसार, मृत बच्चे को पॉलिथीन में रखा जा रहा था, तभी शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। इस घटना में नवजात का शव झुलस गया। अस्पताल प्रशासन ने किसी भी प्रकार की जनहानि से इनकार किया है।

    आधी रात सच्चाई उजागर

    गोविंदगढ़ के गहरा गांव की निवासी कंचन साकेत का आपरेशन किया गया था। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी लापरवाही छिपाने की कोशिश की और बच्चे के शव को चादर में छिपाकर ले जाया गया। जब मामला सामने आया और उच्च स्तर तक पहुंचा, तब देर रात सच्चाई उजागर हुई।

    डिप्टी सीएम बोले- बच्चे की जानकारी नहीं दी  

    इधर, डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें केवल आग लगने की सूचना दी थी। नवजात के शव के जलने की जानकारी नहीं दी गई। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। खास बात यह है कि संजय गांधी अस्पताल के पास फायर एनओसी नहीं होने की जानकारी डिप्टी सीएम तक को थी। इसके बावजूद समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस लापरवाही ने अस्पताल प्रबंधन की भूमिका को और संदिग्ध बना दिया है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। आग लगने के कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

    अस्पतालों की सुरक्षा पर सवाल

    इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। संजय गांधी अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और गांधी स्मारक अस्पताल इन तीनों के पास फिलहाल फायर एनओसी नहीं है। ये तीनों ही अस्पताल नगर निगम के फायर सेफ्टी मानकों को पूरा नहीं करते हैं। 

    परिजनों के आरोप, मामला पहुंचा उच्च स्तर तक जानकारी के मुताबिक, गोविंदगढ़ के गहरा गांव की निवासी कंचन साकेत का ऑपरेशन किया गया था। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी लापरवाही छिपाने की कोशिश की और बच्चे के शव को चादर में छिपाकर ले जाया गया। जब मामला सामने आया और उच्च स्तर तक पहुंचा, तब देर रात सच्चाई उजागर हुई।

    डिप्टी सीएम बोले- नवजात के शव की जानकारी नहीं दी गई मामले में डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें केवल आग लगने की सूचना दी थी। नवजात के शव के जलने की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। आग लगने के कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केवल जांच से जिम्मेदारी तय होगी या लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।

    निगमायुक्त बोले- हादसा हुआ तो हमारी जिम्मेदारी नहीं नगर निगम आयुक्त सौरभ सोनवड़े पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि निगम की ओर से अस्पताल प्रबंधन को कई बार नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन अब तक फायर एनओसी के पैमाने पूरे नहीं किए गए। उनका कहना है कि चेतावनी दी जा चुकी है, इसलिए आगजनी की स्थिति में नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं होगी।

  • प्रभारी मंत्री परमार की अध्यक्षता में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक हुई संपन्न

    दमोह जिले के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार : प्रभारी मंत्री परमार

    मंत्री परमार ने जिले के विकास कार्यों में गति लाने के दिए निर्देश

    प्रभारी मंत्री परमार की अध्यक्षता में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक हुई संपन्न

    समिति के सदस्यों ने रखे अपने महत्वपूर्ण सुझाव, प्रभारी मंत्री ने दिए आवश्यक निर्देश

    भोपाल

    दमोह जिले में नरवाई प्रबंधन के लिए जनप्रतिनिधियों ने तीन गांव बोतराई, सदगुवां और लुहर्रा गांव को चयनित किया है और यहां पर नरवाई प्रबंधन पर कार्य किया जाएगा। जिले में प्लंबर का प्रशिक्षण शुरू कराया जाये और इसका प्रस्ताव दिया जाये, सोलर की भी ट्रेनिंग प्रारंभ कराई जाये। पॉलिटेक्निक और आईटीआई दोनों जगह, इस पर काम प्रारंभ कराये जायें। आने वाला समय सोलर एनर्जी का ही रहेगा। आगामी बैठक सिंचाई और पेयजल पर रखी जाये, जिसमें यह सुनिश्चित किया जायेगा की हर जगह अंतिम छोर तक पानी की व्यवस्था सुनिश्चित रहे। इस आशय की बात प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार ने रविवार को, कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में कही।

    जिले के प्रभारी मंत्री परमार ने जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक में जिले में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन व समयबद्ध सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार के सफलतम 2 वर्ष पूर्ण होने पर जिले के विकास के लिये किये गये प्रयासों, उपलब्धियों पर गहन चर्चा की गई, निर्देशानुसार कार्यवाई की जाये।

    प्रभारी मंत्री परमार ने कहा पीजी कॉलेज में एक उन्नत लाइब्रेरी बनाई जाये और इसकी राशि उपलब्ध करा दी जाएगी, इसका तत्काल प्रस्ताव बनाकर भेजा जाये। इस लाइब्रेरी में महाविद्यालय के विद्यार्थियों के अलावा जो विद्यार्थी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, वह भी आकर यहां अध्ययन कर सकेंगे। उन्होंने जिले में महिलाओं के लिए दोना पत्तल के काम समूह से जोड़कर कराए जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा दोना पत्तल की आज हर जगह काफी डिमांड है, इस दिशा में तेजी से काम प्रारंभ किए जायें, प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित किया जाये, लोगों में जन जागृति पैदा की जाये और प्लास्टिक के नुकसान से अवगत कराया जाये। परमार ने कहा प्लास्टिक से गंभीर बीमारियां पैदा हो रही है।

    बैठक में बताया गया अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के युवा जो शिक्षक, प्राध्यापक बनना चाहते हैं, उन्हें कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाये ताकि वह सफल हो सके, विशेष कर मैथ्स इंग्लिश के बड़ी संख्या में पद खाली है, उन्हें भरा जा सकेगा । जिले के जिन स्कूलों में पहुंचने में वर्षा के दिनों में बच्चों को दिक्कतें पहुंचती है वहां पर ग्रेवल सड़क प्राथमिकता से बनवा दी जाए। दमोह शहर में पेयजल लाइन डालने के लिए जहां सड़के खोदी गई है, पुर्ननिर्माण का कार्य तेजी से कराये जाये नगर पालिका अधिकारी इसे तत्काल सुनिश्चित करायें।

    उन्होंने बैठक के दौरान समिति के सदस्यों से कहा खाद वितरण की टोकन व्यवस्था जिले में प्रारंभ की गई है, इसका किस तरह का रिस्पांस है। बैठक में मौजूद सदस्यों ने बताया कि यह प्रणाली बहुत अच्छी है, जबसे टोकन मिला है लाइन में लगने से मुक्ति मिल गई है, व्यवस्था बेहतर है। प्रभारी मंत्री ने प्रत्येक गांव की सिंचाई की मैपिंग के संबंध में कहा यह काम तेजी से किया जाये जिस पर जिला कलेक्टर द्वारा बताया गया की कार्य मैपिंग का शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया केन बेतवा परियोजना के तहत सर्वे का काम तेज गति से चल रहा है अगले तीन माह में डीपीआर और सर्वे हो जायेगा।

    बैठक में पूर्व वित्तमंत्री एवं दमोह विधायक जयंत कुमार मलैया ने सड़कों पर सब्जी बाजार के संबंध में अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। उन्होंने कहां 15-15 लाख की लागत से पांच प्रसाधन के निर्माण के लिए राशि शासन से मिली है, इसके टेंडर किए जाकर शीघ्र निर्माण सुनिश्चित करने चाहिए। बैठक में सतेंद्र सिंह लोधी ने 7 से 11 जनवरी तक आयोजित होने वाले फिल्म फेस्टिवल की विस्तार से जानकारी दी।

    बैठक के प्रारंभ में कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने बताया कि सागर-दमोह मार्ग की स्वीकृति हाल ही में मंत्रिपरिषद की बैठक में दी गई है, जिसके तहत 2059.85 करोड़ रुपए से फोर लाइन मार्ग बनाया जायेगा। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के तीसरे रहवास के रूप में विकसित किया जायेगा। कोचर ने बताया मेडिकल कॉलेज दमोह के लिए 330 नियमित और 205 आउटसोर्स पर पद स्वीकृत किए गए हैं, साथ ही झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना 165.006 करोड़ की स्वीकृति दी गई है, इससे तेंदूखेड़ा तहसील के 17 गांवों में सिंचाई होगी।

    कलेक्टर कोचर ने बताया कि पीएम सूर्य घर योजना अंतर्गत जिले में 829 लाख सब्सिडी से पीएम सूर्य घर योजना अंतर्गत 1063 घरों में सोलर यूनिट स्थापना का कार्य नवंबर 2025 में किया गया, जिसमें स्वयं की बिजली बनाकर घरेलू उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा विगत दो वर्षों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत 6 पुलों का निर्माण कार्य किया गया है। यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत संपर्क विहीन सर्वे कार्य पूर्ण किया गया है, जिसमें 241 संपर्क विहीन बसाहटों का चिंन्हांकन किया गया है। मुख्यमंत्री मजरा टोला योजना तहत 100 तक की आबादी का संपर्क विहीन बसाहटों का सर्वे की भी किया गया है ,जिसमें कुल 82 संपर्क विहीन बसाहटें शामिल की गई है।

    कलेक्टर कोचर ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि जिले में 2023 में निर्मित सीतानगर सिंचाई परियोजना द्वारा 16200 हेक्टर सिंचाई क्षेत्र में सिंचाई की गई है, जिसके माध्यम से दमोह एवं पथरिया तहसील के 51 ग्रामों में एक हेक्टर तक के चक में पाइप लाइन के माध्यम से पानी पहुंच रहा है। जिले में परियोजना का कार्य 95% पूर्ण हो गया है, आगामी तीन-चार माह में पूर्ण प्रस्तावित है, इसके माध्यम से 7620 सेक्टर क्षेत्र में सिंचाई पाइपलाइन के माध्यम से होगी।

    कलेक्टर कोचर ने बताया कि लाडली लक्ष्मी योजना अंतर्गत 91000 से अधिक बेटियां लाभान्वित हो रही है और लाड़ली बहन योजना अंतर्गत 245000 से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही है। औद्योगिक निवेश और कौशल विकास तथा रोजगार के संबंध में कलेक्टर ने बताया युवा संगम के माध्यम से 7000 से अधिक युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर दिलाकर जिला प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा हैl यह भी बताया कि स्टेट बैंक की ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा दो वर्षों में लगभग 2000 ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के लिए आवश्यक कौशल प्रशिक्षण दिया गया।

    बैठक के दौरान कलेक्टर श्रीकोचर ने बताया दमयंती बेलाताल पार्क में अटल बिहारी वाजपेई जी की मूर्ति की स्थापना 25 दिसंबर को की जाएगी, जिसकी तैयारी कर ली गई है। कलेक्टर कोचर ने सुशासन की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखें।

    इस अवसर पर हटा विधायक श्रीमती उमादेवी खटीक, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रंजीता गौरव पटैल, श्याम शिवहरे, श्रीमती मंजु धर्मेन्द्र कटारे, वनमंडलाधिकारी ईश्वर जरांडे, एडीशनल एसपी सुजीत सिंह भदौरिया खासतौर पर उपस्थित थे। साथ ही जनपद पंचायत दमोह अध्यक्ष श्रीमती प्रीति राजू कमल ठाकुर, जनपद पंचायत हटा अध्यक्ष गंगाराम पटैल, नरेन्द्र बजाज, लोकेन्द्र सिंह पटैल (लकी भैया),सतेन्द्र सिंह लोधी सहित जिला विकास सलाहकार समिति के सदस्यगण, विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • अल्पकालीन सहकारी संरचना के सुधार पर नाबार्ड के महाप्रबंधक सुरेश कुमार साहू ने की चर्चा

    भोपाल 
    अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कालेज, भोपाल में अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता की अध्यक्षता, नाबार्ड के महाप्रबंधक सुरेश कुमार साहू, उप महाप्रबंधक नन्दू नायक,अपेक्स बैंक के प्राचार्य पी.एस.तिवारी, वि.क.अ अरुण मिश्र, उप महाप्रबंधक के.टी.सज्जन, सहायक महाप्रबंधक अरविंद बौद्ध, विषय विशेषज्ञ अमूल राहंणेकर, चार्टड अकाउंटंट की उपस्थित में *नाबार्ड की साफ्टकेब पालिसी के अन्तर्गत अपेक्स बैंक के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए सहकारी बैंकों पर लागू सभी कराधान पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं कांफ्रेंस हाल का उद्घाटन किया ।

    अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता ने कहा कि आप लोग सचमुच भाग्यवान हैं कि आपको प्रदेश के किसानों की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है, इसलिए आप सभी आज के इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूर्ण मनोयोग से ज्ञान अर्जित कीजिए,  यदि किसी प्रकार की जानकारी आप चाहते हैं तो उसे जरूर पूछिये, ताकि विषय विशेषज्ञ आपको उसकी जानकारी से अवगत करा सकें।

    गुप्ता ने कहा कि हमारा प्रयास इस प्रशिक्षण संस्थान को देश में सर्वश्रेष्ठ बनाने का है।  हमारा प्रयास बेहतर माहौल व आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण वातावरण में आप सभी को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करना है, इसी कड़ी में आज इस कांफ्रेंस हाल का उद्घाटन हुआ है। आपसे अपेक्षा है कि आप पैक्स के सुदृढ़ीकरण हेतु व्यवसाय के विविधीकरण पर सार्थक प्रयास करेंगे ।

    नाबार्ड के महाप्रबंधक सुरेश कुमार साहू ने प्रदेश में अल्पकालीन सहकारी संरचना को सुदृढ़ीकरण बनाने के प्रयास करने पर जोर दिया।

    आरंभ में अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कालेज के प्राचार्य पी.एस.तिवारी अतिथियों का स्वागत एवं आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए अवगत कराया कि प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक के दूरदर्शी व सकारात्मक दृष्टिकोण व नाबार्ड के सहयोग से प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर व संख्या दुगनी होने में हमें सफलता प्राप्त हुई है और नाबार्ड के लखनऊ स्थित संस्थान "बर्ड" ने हमें "ए" एक्रिडेशन प्रदान किया है ।

    आभार प्रदर्शन संकाय सदस्य आर.के.दुबे ने किया।

  • क्षेत्रीय उपलब्धियों की जानकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव तक पहुंचाएंगे सांसद–विधायक, पत्र के जरिए देंगे विवरण

    भोपाल
    मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार की दो वर्ष उपलब्धियां जनता को बताई जाएंगी। प्रभारी मंत्रियों ने शनिवार को अपने-अपने जिलों में पत्रकारवार्ता कर बताया कि मोहन सरकार ने दो साल में क्या काम किए गए हैं इसकी जानकारी जनता को दी जाएगी। सरकार की उपलब्धियों के अलावा मंत्री अपने-अपने विभागों के कामकाज का ब्योरा भी जनता के बीच रखेंगे। इसके अलावा सांसदों और विधायकों ने अपने क्षेत्रों में दो साल में क्या काम किए हैं इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अवगत कराएंगे।
     
    सीएम ने चार साल का रोडमैप बनाने के लिए कहा था
    दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधायकों को चार साल का रोडमैप बनाने के लिए कहा था। वहीं विधायकों ने अपनी निधि का जनकल्याण में कितना उपयोग किया, इसकी रिपोर्ट भी तैयार की गई है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
    भाजपा के मोर्चा प्रकोष्ठों की भी जिम्मेदारी तय की गई कि वे मोहन सरकार द्वारा किसान, युवा, महिला, एससी, एसटी और अन्य वर्गों के लिए किए गए कार्यों को उन वर्गों के बीच जाकर बताएं।

    25 दिसंबर तक चलेगा कार्यक्रम
    पार्टी कार्यकर्ता जन-जन तक भाजपा सरकार की उपलब्धियों को बैठकों, संगोष्ठियों और संपर्क अभियान के जरिए पहुंचाएंगे। यह कार्यक्रम 25 दिसंबर तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती तक चलेगा। भाजपा इस वर्ष को देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का शताब्दी वर्ष के रूप में मना रही है।
    उनके जन्मदिवस 25 दिसंबर को प्रदेश भर में बूथ स्तर पर सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाएगा। 25 सितंबर से 25 दिसंबर तक आयोजित ‘आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान’, जो पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती से जुड़ा है, उसको भी बूथ स्तर पर मजबूत रूप से मनाया जाएगा।

    बताएगी भाजपा, वर्षों कांग्रेस की सरकार रही पर कुछ नहीं किया
    डॉ. मोहन यादव सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में तय किया गया है कि पार्टी कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर बताएंगे कि आजादी के बाद से वर्षों तक मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकारें रही हैं, लेकिन विकास के कोई कार्य नहीं किए गए। वहीं मप्र में वर्ष 2003 में भाजपा की सरकार बनने के बाद ही विकास की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने अद्वितीय और अकल्पनीय विकास कार्य किए हैं।

    बूथ स्तर तक होंगे कार्यक्रम
    युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा, अजा-अजजा मोर्चा ने मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार का धन्यवाद ज्ञापित कर इन दो वर्षों में हुए जनहितैषी कार्यों को पारदर्शिता और तत्परता के साथ जनता तक पहुंचाने के लिए बूथ स्तर तक जाने का संकल्प लिया।
    इस बार ‘मन की बात’ कार्यक्रम के पश्चात 15 मिनट तक प्रदेश सरकार एवं केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा की जाएगी। केंद्र व राज्य सरकार के जनकल्याणकारी कार्यों की एक विस्तृत पीपीटी और पीडीएफ रिपोर्ट तैयार की गई है, इसे बूथ स्तर तक बताया जाएगा। 

  • शिकारा कारोबार पर कब्जे की जंग! भोपाल में नाव माफिया कर रहे पर्यटकों को भ्रमित

    भोपाल
    बड़े तालाब की अथाह जलराशि पर इस महीने की शुरुआत में शुरू हुई शिकारा सेवा माफिया के जाल में फंस गई है। पहले से तालाब पर नावों का संचालन कर रहा यह गिरोह पूरी योजना को पलीता लगा रहा है। इनकी वजह से शिकारा का आनंद लेने पहुंचे लोग बेहद खराब अनुभव से दो-चार हो रहे हैं। नवदुनिया ने शनिवार को इसकी पड़ताल की तो इस बदमाशी की तस्वीर सामने आई।

    निजी नाव संचालकों के लोग गेट पर ही खड़े रहते हैं। बोट क्लब में घुसने वालों को अपनी नावों की ओर ले जाने में जुट जाते हैं। एक दूसरा समूह बोट क्लब प्रबंधक की मौजूदगी में टिकट खिड़की के सामने ही पर्यटकों को भ्रमित करता है। वे अपनी नावों को शिकारा बताकर पर्यटकों को ले जाते हैं। ऐसा करने पर उन्हें पर्यटन विकास निगम के लोग टोकते भी नहीं। इसकी वजह से पर्यटक उनकी बात को सच मान लेते हैं।

    शिकायत करने पर विवाद
    यह सब मिलीभगत से चल रहा है। कोई पर्यटक उनकी अनदेखी कर शिकारा का टिकट लेकर उसमें बैठ जाता है तो उसे दूसरी असुविधा का सामना करना पड़ता है। 300 रुपये के टिकट पर 20 मिनट की शिकारा राइड उपलब्ध है। लेकिन शिकारा चलाने वाले पांच-सात मिनट तालाब के किनारों को घुमाकर पर्यटकों को उतार देते हैं। शिकायत करने पर विवाद हो रहा है। यह सब रोकने वाला कोई नहीं है।

    पर्यटक ने हाथ जोड़कर कहा-मेरी ही गलती है, जो बोट क्लब आया
    शनिवार शाम करीब पौने चार बजे एक पर्यटक बोट क्लब के प्रबंधक वसीम के पास पहुंचा। उसने शिकायत कि शिकारा चालक उसे सिर्फ किनारे घुमाकर वापस छोड़ गया। प्रबंधक ने पर्यटक को जेट्टी पर संचालन देख रहे दीक्षित के पास जाने काे कहा। पर्यटक ने कहा, दीक्षित ने ही आपके पास भेजा है, तो मैनेजर ने हाथ खड़े कर दिए। कहा कि वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। अंततः पर्यटक ने हाथ जोड़कर कहा-मेरी ही गलती है जो मैं बोट क्लब आया।

    प्रबंधक वसीम का कहना है, शिकारा की संख्या कम है और शाम को पर्यटक ज्यादा आते हैं। इन दिनों अंधेरा जल्दी हो रहा है, इसलिए संचालन बंद करना पड़ता है। इसी वजह से पर्यटकों को शिकारा नहीं मिल पाता। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्तमान में शिकारा चलाने वाले वही लोग हैं जो यहां नाव चला रहे थे। वे शिकारा को अपने धंधे पर चोट की तरह देख रहे हैं। इसलिए यह सब हो रहा है।
     
    चारों तरफ निजी नाव संचालकों का कब्जा
    बोट क्लब परिसर में चारों ओर निजी नाव संचालकों का कब्जा है। मुख्य द्वार पर ही दो-तीन लोग खड़े रहते हैं, जो अंदर आने वाले पर्यटकों से कहते हैं-"बोटिंग करनी है तो उधर बोट है।" इसके बावजूद अगर कोई पर्यटक टिकट विंडो तक पहुंच भी जाता है, तो वहां भी इनके लोग मौजूद रहते हैं, जो पर्यटकों को भ्रमित कर निजी बोटों की ओर ले जाते हैं।

    जल पर्यटन की महत्वाकांक्षी परियोजना
    मप्र पर्यटन विकास निगम बोट क्लब पर जल पर्यटन बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है। निगम ने कश्मीरी शिकारा के रूप में 20 नए शिकारे लगभग 48 लाख रुपये की लागत से खरीदे। ये शिकारे पर्यावरण-अनुकूल फाइबर री-इन्फोर्स्ड पालीयूरिथेन सामग्री से तैयार किए गए हैं। चार दिसंबर को ही इसका लोकार्पण हुआ है।

    निगम के पास जवाब नहीं
    मप्र पर्यटन विकास निगम के जनसंपर्क अधिकारी विकास खरे से जब इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा-पता करके बताता हूं, थोड़ा समय दीजिए। इसके बाद उनका कोई जवाब नहीं आया।

     

  • ग्वालियर व्यापार मेला: ऑटोमोाइल से आगे बढ़ा आकर्षण, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की भी होगी बड़ी पेशकश

    ग्वालियर
    ग्वालियर व्यापार मेला 120 साल से अधिक पुराना हो चुका है और देश के बड़े मेलों में शामिल है। इसकी खास बात यह है कि इस मेले में घर में उपयोग होने वाली सुई से लेकर मोटर कार तक छूट के साथ मिलती हैं। इसलिए इस मेले में खरीदारी करने के लिए देश भर से लोग आते हैं। जब जीएसटी लागू नहीं था तब समान रूप से सभी चीजों पर 50 प्रतिशत वाणिज्यकर में छूट मिलती थी। लेकिन एक जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद मेले की चमक कुछ फीकी पड़ गई। लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर में सरकार ने रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दे दी।

    इसके बाद मेले में ऑटोमोबाइल सेक्टर तो चमका, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक सहित अन्य सेक्टर में कारोबार उतना अच्छा नहीं रहा। लेकिन इस बार जीएसटी कम होने से ऑटोमोबाइल सेक्टर के साथ इलेक्ट्रॉनिक व अन्य सेक्टरों में अच्छा कारोबार होने की उम्मीद है। क्योंकि जीएसटी कम होने के साथ कंपनियां भी अपने प्रोडक्ट पर तगड़ी छूट देंगी। ऐसे में खरीदारी करने वालों को फायदा होगा। यहां बता दें कि 2024-25 मेले में 3327 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ। इसमें 900 करोड़ से अधिक का कारोबार केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर में हुआ।
     
    1937 में टर्नओवर था 5-6 लाख रुपये
    मेले से जुड़े लोगों के मुताबिक इस मेले के कारोबार की अगर बात करें तो 1937 में इसका टर्नओवर लगभग 5-6 लाख रुपये था। 1984-85 में जहां मेले में करों की छूट मिलने के बाद टर्नओवर 84 लाख 86 हजार 730 रुपये था वहीं 1990-91 में यह बढकऱ 70 करोड़ 36 लाख रुपये हो गया। 1984 में व्यापार मेले का दर्जा मिलने पर इलेक्ट्रॉनिक और ऑटोमोबाइल सेक्टर इसका प्रमुख आकर्षण बन गए।

    इस आकर्षण के पीछे इन सेक्टरों में मेले में दी जाने वाली पचास फीसदी विक्रय कर की छूट थी। इसके चलते उस समय सभी बड़ी कंपनियां मेले में भागीदारी करती थीं। 1998 में मेले का कारोबार 350 करोड़ और सैलानियों की संख्या 40 लाख तक जा पहुंची थी। वहीं 2018 में मेले के ऑटोमोबाइल सेक्टर में रोड टैक्स में 50 फीसदी छूट मिलने के बाद इसका टर्नओवर 500 करोड़ के पार हो गया था।

    इसलिए चमकेगा इलेक्ट्रॉनिक सहित अन्य सेक्टर का कारोबार
    22 सितंबर से जीएसटी की दरों में सरकार ने कमी की है। जीएसटी कम होने का असर कारोबार के सभी सेक्टरों पर है और चीजें सस्ती हुई हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर में रोड टैक्स की छूट मिलती है। इसलिए कार व बाइक कंपनियां अपनी तरफ से कम ही छूट देती हैं। लेकिन अभी तक इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर सहित अन्य सेक्टरों में कंपनियां ही छूट दे रही थी। लेकिन इस बार जीएसटी कम होने व कंपनियों से मिलने वाले डिस्काउंट की वजह से ये चीजें मेले में सस्ती मिलेंगी। इसलिए ऑटोमोबाइल सेक्टर सहित अन्य सेक्टरों में कारोबार अच्छा होने की उम्मीद कारोबारियों को है।

  • इंदौर से धार तक ट्रेन सेवा मार्च 2026 तक, 17 साल बाद इंदौर-धार यात्रा होगी आसान

    इंदौर
     अगले वर्ष 2026 में आदिवासी बहुल क्षेत्र धार जिले में पहली बार ट्रेन दौड़ेगी। इंदौर-दाहोद नई ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना (204.76 किमी) का भूमिपूजन वर्ष 2008 में हुआ था। 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद रेलवे दावा कर रहा है कि इंदौर से धार नए रूट पर मार्च-2026 तक ट्रेन चलाई जाएगी। हालांकि निर्माण कार्य की गति और जमीनी हकीकत को देखकर लग रहा है कि ट्रेन शुरू होने में छह महीने का और समय लग सकता है।

    वहीं, रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फरवरी-2026 तक टनल का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे हैं। हर दिन की समय सीमा तय की है, क्योंकि पहले ही इस प्रोजेक्ट में टनल की वजह से देरी हो चुकी है।

    इंदौर और वड़ोदरा के बीच सीधा संपर्क

    उक्त परियोजना वड़ोदरा और इंदौर के बीच सीधा संपर्क देकर यात्रा समय कम करेगी। अभी रतलाम होकर वड़ोदरा आना-जाना पड़ता है। परियोजना की अनुमानित कुल लागत लगभग 1873 करोड़ रुपये है। वर्तमान स्थिति में इंदौर से टीही (21 किमी) और दाहोद से कटवारा (11.30 किमी) खंड का कुल 32.30 किमी भाग शुरू हो चुका है। टीही से धार के बीच ट्रैक लिंकिंग और मोबिल फ्लैश वेल्डिंग कार्य प्रगति पर है। खंड का सीआरएस निरीक्षण फरवरी 2026 के लिए लक्षित है। टीही टनल (2.9 किमी) कार्य भी तेज गति से चल रहा है।

    2.95 किमी टनल में से 1.87 किमी हिस्से का काम पूरा कर दिया है। टनल के अंदर दीवारों पर फिनिशिंग की जा रही है। पानी निकलने के लिए लोहे की 150 व 400 एमएम की लाइन बिछाई जा रही है। पूरी टनल में हर 50 मीटर पर कुल 30 मेन होल बनाए गए हैं। इनके माध्यम से टनल में एकत्रित होने वाला पानी लगातार बाहर निकाला जाएगा।

    ट्रैक बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है

    पाइप चोक होने की स्थिति में मशीन से हवा का प्रेशर दिया जाएगा, जिससे पाइप साफ हो जाएंगे और पानी नहीं रुकेगा। इसके बाद इस हिस्से में ट्रैक बिछाने का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। टनल के अंदर रेलवे बैलास्ट लैस ट्रैक बिछाएगा। रेलवे जनसंपर्क अधिकारी खेमराज मीणा ने दावा किया कि टनल का काम अंतिम चरण में चल रहा है। अगले साल मार्च 2026 तक इंदौर से धार के बीच ट्रेन चलने लगेगी। हम ट्रेन चलाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

    टनल में मटेरियल लाने-ले जाने के लिए दोनों एंड पर छोड़ा था काम

    टनल के दोनों एंड पी-1 और पी-2 पर मटेरियल लाने-ले जाने के लिए रेलवे ने दोनों हिस्से में टनल का काम छोड़ा था। एक हिस्से में 170 मीटर जबकि दूसरे हिस्से में 50 मीटर से ज्यादा हिस्सा था। दोनों टनल के बीच भी 60 मीटर का हिस्सा बचा हुआ है। अब इस हिस्से में भी रेलवे काम शुरू करेगा। प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने कहा- अगले दो महीने में इस हिस्से को भी पूरा करने का लक्ष्य है।

    इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट

        2008 में प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ
        2013 में काम शुरू हुआ
        1873 करोड़ से अधिक लागत वर्तमान में
        204.76 किमी लंबी लाइन

    इसलिए खास है यह परियोजना, इंदौर-मुंबई की दूरी कम होगी

    रेल परियोजना के पूरा होने से इंदौर और मुंबई के बीच रेल मार्ग की दूरी लगभग 55 किमी घट जाएगी। गुजरात-महाराष्ट्र से एमपी की बेहतर कनेक्टिविटी: यह नई रेल कड़ी इंदौर को गुजरात और महाराष्ट्र से सीधे जोड़ेगी, जिससे न केवल यात्री, बल्कि माल-ढुलाई में भी सुविधा बढ़ेगी।
    औद्योगिक विकास व माल भाड़ा सस्ता

    इस मार्ग से औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर पीथमपुर को लाभ होगा। माल को रेल से सीधे मुंबई व अन्य बंदरगाहों तक भेजना आसान और कम लागत वाला होगा।
    पिछड़े व आदिवासी क्षेत्रों को रेल सुविधा

    इस लाइन से प्रदेश के धार, झाबुआ जैसे क्षेत्रों को पहली रेल-कनेक्टिविटी मिलेगी। विकास, रोजगार, आवाजाही जैसे सामाजिक-आर्थिक लाभ होंगे।

     

  • महाकाल लोक के बाद उज्जैन में बनेगा ‘शनि लोक’, 140 करोड़ की मंजूरी, सिंहस्थ 2028 से पहले तैयार होगा

    उज्जैन 

    बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है। वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महाकाल लोक का लोकार्पण किए जाने के बाद यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो आज भी लगातार बनी हुई है। इसी विकास यात्रा में अब उज्जैन एक और भव्य धार्मिक स्थल का साक्षी बनने जा रहा है। महाकाल लोक की तर्ज पर शनि लोक का भव्य निर्माण किया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 140 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं।

    जानिए कहां दिखेगा शनि लोक का खूबसूरत नजारा 
    महाकाल की नगरी में अति प्राचीन शनि मंदिर है. यहां यह खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलेगा. जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा. यह वह प्रसिद्ध स्थान है, जहां शनि महाराज शिवलिंग स्वरूप में भक्तों को दर्शन देकर भक्तों के कष्ट हरते हैं. इतना ही नहीं, इस मंदिर की और भी कई खासियतें हैं.

    शिव के रूप में शनिदेव 
    मंदिर के पुजारी राकेश बैरागी ने बताया, यह मंदिर 2000 वर्ष पुराना है. राजा विक्रमादित्य की जब साढ़ेसाती खत्म हुई थी, तब शनि महाराज राजा पर प्रसन्न हुए और यहां सारे ग्रह एक साथ प्रकट हुए. इसे शनि मंदिर में एक साथ विराजमान हुए, तभी से इस मंदिर में लोगों की आस्था है. यहां पर मुख्य शनिदेव की प्रतिमा के साथ-साथ ढैय्या शनि की भी प्रतिमा स्थापित है. बताया जाता है कि राजा विक्रमादित्य का इतिहास भी इस मंदिर से जुड़ा है. यही नहीं, यह शनि मंदिर पहला मंदिर है, जहां शनिदेव शिव रूप विराजमान हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाते हैं. कहा जाता है कि यहां साढ़ेसाती और ढैय्या की शांति के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाया जाता है.

    शनि लोक का अद्भुत स्वरूप आएगा नजर
    उज्जैन स्थित अति प्राचीन शनि मंदिर में शनि लोक का भव्य नजारा जल्द ही दिखाई देगा। शीघ्र ही इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। यह वही स्थान है, जहां शनि महाराज शिवलिंग स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और उनके कष्ट हरते हैं। इस मंदिर को लेकर कई मान्यताएं और विशेषताएं प्रसिद्ध हैं।

    शिव के स्वरूप में विराजमान हैं शनिदेव
    मंदिर के पुजारी राकेश बैरागी के अनुसार यह मंदिर लगभग 2000 वर्ष पुराना है। मान्यता है कि जब राजा विक्रमादित्य की साढ़ेसाती समाप्त हुई, तब शनि महाराज प्रसन्न होकर यहां प्रकट हुए और सभी ग्रहों ने एक साथ दर्शन दिए।

    यह देश का पहला ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां शनिदेव शिवरूप में विराजमान हैं। यहां मुख्य शनिदेव की प्रतिमा के साथ ढैय्या शनि की प्रतिमा भी स्थापित है। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति और शांति के लिए शनिदेव पर तेल चढ़ाने आते हैं।

    140 करोड़ में बनेगा भव्य शनि लोक
    सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। शनि लोक का निर्माण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

    गौरतलब है कि नवग्रह शनि मंदिर पर शनिवार व शनिश्चरी अमावस्या के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां शनि लोक निर्माण के लिए मुख्यमंत्री ने 140 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

    सिंहस्थ से पहले पूरा होगा निर्माण
    कलेक्टर  ने बताया कि सीएम के निर्देशानुसार विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और सिंहस्थ 2028 के दौरान यहां भारी भीड़ आने की संभावना है।

    इसी कारण शनि लोक निर्माण के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है और लक्ष्य है कि सिंहस्थ से पहले शनि लोक का निर्माण पूरा हो जाए।