• ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अपडेट: मिट्टी परीक्षण समाप्त, अब तेजी से बनेगा सिक्स लेन हाईवे

    ग्वालियर
    ग्वालियर से आगरा के बीच 4613 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित सिक्स लेन एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के निर्माण का ठेका लेने वाली कंपनी जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स ने मृदा परीक्षण का काम पूरा कर लिया है। गत अप्रैल माह में कंपनी को ठेका मिल गया था और उसे छह माह का समय संसाधन जुटाने के साथ ही अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के लिए दिया गया था। अब कंपनी अक्टूबर माह में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अपने तीन बेस कैंप तैयार करेगी और तीन ही स्थानों से एक्सप्रेस वे के निर्माण की शुरूआत की जाएगी।

    फोरलेन हाईवे का होगा निर्माण
    हालांकि निर्माण कार्य नवंबर माह से शुरू होगा और 30 माह के अंदर कंपनी को यह काम पूरा करना होगा। नए एक्सप्रेस वे के निर्माण के साथ ही कंपनी द्वारा वर्तमान फोरलेन हाईवे के पुनर्निर्माण का कार्य भी किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का ठेका लेने वाली जीआर इंफ्रा कंपनी को अक्टूबर तक का समय निर्माण कार्य के लिए दिया गया है। इस बीच कंपनी ने आगरा, धौलपुर, मुरैना जिलों में साइल टेस्टिंग (मृदा परीक्षण) का काम पूरा कर लिया है, ताकि निर्माण कार्य शुरू होने पर कोई अड़चन ना आए। इसके अलावा अलाइनमेंट ठीक रहे और सारे पुल-पुलियों का काम बेहतर तरीके से हो सके, इसके लिए कंपनी द्वारा तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में एक साथ काम की शुरूआत की जाएगी। इसके लिए कंपनी द्वारा तीन बेस ऑफिस भी तैयार किए जाएंगे।

    काम की शुरूआत भी जल्द ही जाएगी
    वर्तमान में धौलपुर में एक बेस ऑफिस का काम लगभग अंतिम चरण में है। यहां जमीन पर बाउंड्रीवॉल तैयार कर ली गई है और अंदर अस्थायी कैंप कार्यालय बनाया जाएगा। इसके अलावा भूमि के अधिग्रहण के बदले मुआवजा वितरण की प्रक्रिया भी लगभग पूरी होने को है। भूमि अधिग्रहण पूरा हो जाने के बाद एनएचएआइ को पजेशन दिया जाएगा। सरकारी रिकार्ड में भी एनएचएआइ के नाम पर एंट्री की प्रक्रिया की जाएगी। ऐसे में अक्टूबर तक कंपनी को जमीन भी एनएचएआइ उपलब्ध करा पाएगा। एनएचएआइ के अधिकारियों के अनुसार कंपनी ने बेस ऑफिस बनाने शुरू कर दिए हैं और काम की शुरूआत भी जल्द ही जाएगी।

    ग्वालियर व मुरैना में भी बनेंगे कार्यालय
    कंपनी को नए एक्सप्रेस वे के साथ ही वर्तमान हाईवे की मरम्मत का भी काम करना है। ये हाईवे निरावली रायरू तक आता है। इसके अलावा नए एक्सप्रेस वे का अलाइनमेंट भी सुसेरा गांव के पास होगा। ऐसे में कंपनी द्वारा ग्वालियर व मुरैना में भी कार्यालय बनाए जाएंगे ताकि एक ही स्थान से दोनों प्रोजेक्टों की निगरानी व संचालन में दिक्कत ना आए। 

    31 पुल तैयार होंगे, छह फ्लाइओवर व एक आरओबी बनेगा
    इस पूरे प्रोजेक्ट के अंतर्गत 31 पुल तैयार किए जाएंगे। इसमें आठ बड़े पुल और 23 छोटे पुल शामिल हैं। इसके अलावा 192 कलवर्ट यानी पुलिया भी तैयार की जाएंगी। इसके अलावा छह फ्लाइओवर और एक रेल ओवरब्रिज भी तैयार किया जाएगा। ये ओवरब्रिज जाजऊ स्टेशन के पास बनाया जाएगा। इसके अलावा चंबल नदी पर 300 मीटर लंबा हैंगिंग ब्रिज बनाया जाएगा। इस ब्रिज का कोई भी पिलर नदी में खड़ा नहीं किया जाएगा, बल्कि नदी के किनारों पर पिलर तैयार होंगे। नदी के ऊपर पूरा पुल झूलता रहेगा।

    ये है प्रोजेक्ट
    ग्वालियर से आगरा के बीच 88.400 किलोमीटर लंबे ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जाएगा। इस एक्सप्रेस वे का एनएच नंबर 719डी रखा गया है। एक्सप्रेस वे बनने के बाद आगरा से ग्वालियर पहुंचने में एक से सवा घंटा लगेगा। इस एक्सप्रेस वे के निर्माण का ठेका जीआर इंफ्रा कंपनी को दिया गया है।  

  • एमपीएसईडीसी, आरजीपीवी और एलएंडटी एजूटेक के बीच हुआ एमओयू

    • आरजीपीवी-एलएंडटी एजूटेक की साझेदारी से तैयार होंगे इंडस्ट्री-रेडी इंजीनियर्स
    • नवाचारों के हब बनेंगे टियर-2 शहर, मजबूत होगा औद्योगिक ईकोसिस्टम
    • एमपीएसईडीसी, आरजीपीवी और एलएंडटी एजूटेक के बीच हुआ एमओयू

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के तकनीकी संस्थानों से तैयार होने वाले मानव संसाधन और उद्योगों के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल के बीच की खाई पाटने के लिये निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग,मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी), राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) और एलएंडटी एजूटेक के बीच एक एमओयू किया गया है। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद अब तकनीकी कौशल और औद्योगिक प्रशिक्षण में नवाचार की दृष्टि से एलएंडटी द्वारा विकसित विशेष पाठ्यक्रम आरजीपीवी के माध्यम से प्रदेश के इंजीनियंरिंग संस्थानों में लाँच किये जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश में औद्योगिक-ईकोसिस्टम सशक्त बनेगा। साथ ही भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे टियर-2 शहर नवाचार के नए केंद्र बनेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विगत वर्षों में प्रदेश के विश्वविद्यालयीन पाठ्यक्रमों को उद्योग की वास्तविक मांगों से जोड़कर इंड्स्ट्री-रेडी इंजीनियर तैयार करने की पहल की गई है। प्रदेश में प्रति वर्ष 50 हजार से अधिक इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी स्नातक नौकरी बाजार में आ रहे हैं। अकादमिक-औद्योगिक तालमेल को आवश्यक मानते हुए एलएंडटी एजूटेक द्वारा विशेष रूप से विकसित पायलट पाठ्यक्रम आरजीपीवी के माध्यम से लाँच किये गये हैं। इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत तकनीकी मानव संसाधनों को वास्तविक परियोजनाओं, वर्चुअल लैब और इंडस्ट्री-लीडरशिप एनेबल्ड सत्रों के माध्यम से सक्षम बनाया जा रहा है। आरजीपीवी के कुलगुरू प्रो. राजीव त्रिपाठी, एमपीएसईडीसी, निवेश संवर्धन प्रभारी अवंतिका वर्मा और एलएंडटी एजूटेक टीम लीड राजा पांचाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये है। एलएंडटी एजुटेक तकनीकी और शैक्षणिक सामग्री तथा ट्रेनर-सपोर्ट प्रदान करेगी, आरजीपीवी अकादमिक समन्वय एवं विद्यार्थी चयन में भूमिका निभाएगा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग वित्तीय व तकनीकी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगा।

    एलएंडटी एजूटेक आरजीपीवी में दो पायलट कोर्स आरम्भ करेगी जो पांचवें सेमेस्टर से पढ़ाये जाएंगे। इनमें ‘डेटा हैंडलिंग के लिए पायथन’ और फ्रंट-एंड यूआई/यूएक्स शामिल हैं। एलएंडटी एजूटेक के पायलट पाठ्यक्रम के प्रारम्भिक बैच में 100 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जायेगा। पाठ्यक्रम में 75 घंटे का संरचित कार्यक्रम शामिल होगा। विद्यार्थियों को ‘ऑनलाइन कंटेंट + लाइव एक्सपर्ट सेशंस + प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग + वर्चुअल लैब’ से प्रशिक्षण दिया जायेगा। इस पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले पात्र विद्यार्थियों को ई-सर्टिफिकेट प्रदान किए जाएंगे। पाठ्यक्रम में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक अनुभव बढ़ाया जायेगा। प्रारंभिक बैच में आरजीपीवी में चयनित विद्यार्थियों को शामिल किया जायेगा। फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप, इंडस्ट्री-इंटर्नशिप मॅचमेकिंग, एडवांस्ड स्पेशलाइजेशन मॉड्यूल और राज्यस्तरीय रोलआउट टाइमलाइन। एमपीएसईडीसी द्वारा नियमित प्रगति रिपोर्ट और परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा ताकि नीतिगत स्तर पर उपयुक्त निर्णय लिए जा सकें। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एक पायलट पाठ्यक्रम है, परिणाम सकारात्मक आने पर इसे प्रदेश के दूसरे टेक्निकल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा।

    प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों के मूल्यांकन में परियोजना-आधारित आकलन, ऑनलाइन टेस्ट, प्रशिक्षक-आधारित फीडबैक और वर्चुअल लैब प्रोजेक्ट की प्रस्तुति शामिल की जायेगी। पाठ्यक्रम पूर्ण होने पर एलएंडटी एजूटेक तथा आरजीपीवी के सम्मिलित मानदंडों के अनुरूप ई-सर्टिफिकेट जारी किए जाएँगे।

     

     

  • अब सूरज सिर्फ विटामिन D नहीं, बनेगा जीवन का आधार — रायपुर में पीएम सूर्यघर से रोशन होंगे घर

    रायपुर
    देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने और हर घर तक स्वच्छ, सस्ती एवं निरंतर बिजली पहुँचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल नागरिकों को बिजली बिल से हमेशा के लिए राहत दिला रही है, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण में भी क्रांतिकारी योगदान दे रही है। छत्तीसगढ़ में इस योजना का क्रियान्वयन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में अत्यंत प्रभावी और संवेदनशील ढंग से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में सौर ऊर्जा को अपनाने की गति तेज हुई है। 

    देश की “पावर कैपिटल” कहलाने वाले कोरबा जिले में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का प्रभाव विशेष महत्व रखता है। यहाँ अनेक परिवार इस योजना का लाभ उठाकर हर महीने बचत कर रहे हैं और बिजली बिल आने जाने के झमेले से मुक्त हो रहे हैं। इन्हीं में से एक प्रेरक उदाहरण हैं नकटीखार, कोरबा निवासी रंजीत कुमार है, जिन्होंने अपने परिवार के जीवन में ऊर्जा क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया है।

     रंजीत कुमार जो एसईसीएल, कुसमुंडा में डंपर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं, मेहनतकश व्यक्ति हैं।  हर महीने आने वाला बिजली बिल, परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें और बच्चों की पढ़ाई के खर्चों के बीच बिजली बिल अक्सर उनके बजट को बिगाड़ देते थे। यही कारण था कि जब प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत आवेदन कर इसका लाभ उठाने का निश्चय किया। दो माह पहले आवेदन करके उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल सिस्टम लगवाया। जिसकी कुल लागत लगभग 2 लाख 10 हजार रुपए रही, 78 हजार रुपए केंद्र सरकार की सब्सिडी पहले ही मिल चुकी है। शेष राशि में उन्होंने सस्ती व आसान दर पर लोन लेकर तथा कुछ नकद भुगतान देकर किया। सिर्फ कुछ हफ्तों में ही यह निवेश उनके जीवन के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित हुआ। पहले जहां उनके घर का बिजली बिल हर महीने एक हजारों रुपए तक पहुँच जाया करता था, वहीं अब सौर ऊर्जा से चल रहे घर का मासिक बिल मात्र 130 रुपए आ रहा है।

    प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण की भी बड़ी मित्र है। सौर ऊर्जा से न केवल कोयला और डीज़ल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होती है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी भारी कमी आती है। कोरबा जैसे औद्योगिक जिले में, जहाँ कोयला आधारित बिजली उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, वहां सौर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग पर्यावरण संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान है। परिवारों को बिजली बिल से मुक्तिमिल रही है, घरों में रोशनी और उपकरणों का संचालन संभव हो रहा है, लोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।

     कुमार और उनके परिवार ने बताया “अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। सौर पैनल ने हमारी जिंदगी आसान बना दी है। बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होती और घर के उपकरण भी बिना रुकावट चलते हैं। 
    आज उनका घर न केवल रोशन है बल्कि ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक आदर्श भी बन गया है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के सशक्त क्रियान्वयन से आमजन का जीवन बदल रहा है। यह योजना उन हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो अब तक बिजली का स्थाई उपाय ढूंढ रहें थे। पीएम सूर्यघर योजना ने उन्हें आत्मनिर्भरता, आर्थिक मजबूती और स्वच्छ ऊर्जा की राह दिखाई है।

  • मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती 2025: टैटू को लेकर सख्त नियम, एग्जाम से पहले टाइट चेकिंग

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में 2022 में पटवारी भर्ती परीक्षा और 2023 में हुई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर बड़े सवाल उठे थे. एक बार फिर मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 8589 पदों पर पुलिस भर्ती कराई जा रही है. पिछली परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी से बड़ा सबक लेते हुए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल इस बार खास सर्तकता बरत रहा है. गड़बडी रोकने के लिए अभ्यार्थियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना होगा.

    मुन्नाभाईयों पर नकेल कसने के लिए इस बार सिर्फ आधार वेरिफिकेशन और थंप इंप्रेशन से काम नहीं चलेगा, बल्कि एआई तकनीक से अभ्यर्थियों के चेहरे का मिलान भी किया जाएगा. उधर फिजिकल के लिए भी पुलिस मुख्यालय नियम तैयार कर रहा है. इस बार शरीर पर टैटू बनवाने वालों को भर्ती प्रक्रिया से अलग किया जा सकता है.
    अब सिर्फ फिंगर प्रिंट से नहीं चलेगा काम

    मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में सिर्फ आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट मिलान से ही काम नहीं चलेगा. इसके अलावा कई सुरक्षा फीचर्स का उपाए इस बार किया जाएगा. मध्य प्रदेश में 2023 में पुलिस भर्ती परीक्षा से सबक लेकर यह किया गया है. 2023 में पुलिस भर्ती परीक्षा में मुन्नाभाई फिल्म की तर्ज पर भर्ती में फर्जीवाड़ा किया गया था. अभ्यर्थियों ने अपने स्थान पर मुन्नाभाईयों को परीक्षा में बैठाकर एग्जाम पास किया था.

    इस परीक्षा में शामिल होने वाले एग्जाम सेंटर पहुंचने वाले अभ्यर्थियों के थंब इंप्रेशन का मिलान किया गया था, लेकिन कई अभ्यर्थियों ने सांठगांठ कर आधार कार्ड में फिंगर प्रिंट ही अपडेट करा लिए और अपने स्थान पर मुन्नाभाई को परीक्षा केन्द्र में पहुंचा दिया. हालांकि जब ज्वाइनिंग का मौका आया तो फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया. 2022 में हुई पटवारी परीक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे. इसमें मेरिटी लिस्ट के 10 में से 7 टॉपर एक ही सेंटर से परीक्षा देने वाले थे.

    दो परीक्षाओं के बाद यह लिया निर्णय

    मध्य प्रदेश में अब हो रही 8589 पदों पर भर्ती को लेकर एमपी कर्मचारी चयन मंडल ने 3 बड़े बदलाव किए हैं, ताकि मुन्नाभाईयों को परीक्षा में बैठने से रोका जा सके.

    पुलिस भर्ती परीक्षा में इस बार सिर्फ आधार कार्ड, फिंगर प्रिंट मिलान से काम नहीं चलेगा. परीक्षा सेंटर पर पहुंचने वाले अभ्यर्थियों का आधार कार्ड में लगाए गए फोटो से अभ्यर्थियों के चेहरे का मिलान किया जाएगा. इसके लिए सभी सेंटर पर फेस रिकग्नीशन कैमरे लगाए जाएंगे.

    परीक्षा सेंटर पर पहुंचने वाले सभी अभ्यर्थियों के फिंगर प्रिंट का मिलान तो होगा ही, साथ ही अभ्यर्थियों की आंखों की पुतली के पैटर्न का भी मिलान करेगा, ताकि यदि कोई फिंगर प्रिंट चैंज भी करा ले, तो आंखों की पुतली से उसे पकड़ा जा सके.

    इस बार परीक्षा सेंटर बनाने में भी विशेष सर्तकता बरती जा रही है. इस बार 11 प्रमुख शहरों में ही परीक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे. भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, सीधी और उज्जैन में ही ऑनलाइन परीक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे. पूर्व में विवादित हो चुके शहरों में परीक्षा केन्द्र नहीं बनाए गए हैं. मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के संचालक साकेत मालवीय कहते हैं कि "परीक्षा पारदर्शी तरीके से हो, इसके लिए इस बार आंखों की पुतली की स्कैनिंग और एआई के उपयोग जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं."

    टैटू बनवाने से बचें अभ्यर्थी

    उधर पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को फिजिकल टेस्ट से भी गुजरना होगा. इसमें अभ्यर्थियों का मेडिकल टेस्ट और फिजिकल टेस्ट भी होगा. इसमें ऐसे उम्मीदवारों को परेशानी आ सकती है, जिनके शरीर पर किसी तरह के फैशनेबल टैटू बने होंगे. आमतौर पर नवरात्री में गरबा जैसे आयोजन में हिस्सा लेने के पहले युवा शरीर पर आकर्षक टैटू बनवा लेते हैं. पुलिस भर्ती में सिलेक्शन में ऐसे टैटू परेशानी बन सकते हैं.

    एडीजी चयन एवं भर्ती शाहिद अबसार कहते हैं कि "सेना में आमतौर पर नियम होता है कि शरीर पर किसी तरह का टैटू आदि नहीं होना चाहिए, जो उनके शिष्टाचार के नियम को तोड़े. मध्य प्रदेश पुलिस में भी शिष्टाचार का विशेष ध्यान रखा जाता है. पुलिस भर्ती को लेकर शासन स्तर से इसको लेकर नियम आए तो ऐसे अभ्यर्थियों को समस्या हो सकती है."

  • 4400 किलोमीटर का अद्भुत सफर: बलौदाबाजार के दो युवाओं की बाइक चारधाम यात्रा की प्रेरक कहानी

    बलौदाबाजार
     कभी केवल आस्था का केंद्र समझी जाने वाली चारधाम यात्रा अब साहस और रोमांच का प्रतीक भी बन रही है. बलौदाबाजार नगर के दो युवाओं ने साहस और आस्था का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ा दिया है. नगर के शालीन साहू और हरि पटेल ने बाइक से 16 दिनों में करीब 4400 किलोमीटर की कठिन यात्रा पूरी कर उत्तराखंड स्थित चार धाम – केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन किए. इससे पहले भी ये दोनों युवा अपनी साहसिक यात्राओं के लिए जाने जाते रहे हैं. वे उत्तरप्रदेश के प्रयाग कुंभ, महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और आंध्रप्रदेश के श्री शैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की लंबी यात्राएं बाइक से पूरी कर चुके हैं.

    सोनपुरी मंदिर से शुरू हुई यात्रा: दोनों युवाओं ने अपनी यात्रा 2 सितम्बर को बलौदाबाजार के सोनपुरी स्थित श्री सिद्धेश्वर मंदिर से आशीर्वाद लेकर शुरू की. रास्ते में छत्तीसगढ़ के मुंगेली, पंडरिया, मध्यप्रदेश के शहडोल और कटनी होते हुए उत्तरप्रदेश के कई शहरों को पार किया. इसके बाद हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचे और वहां से उत्तराखंड के सोन प्रयाग तक बाइक से सफर किया. केदारनाथ की यात्रा उन्होंने पैदल पूरी की, क्योंकि यहां तक पहुंचने के लिए करीब 22 किलोमीटर दुर्गम चढ़ाई करनी पड़ती है. बाकी धामों के दर्शन बाइक से ही किए.

    बलौदाबाजार के युवाओं ने रचा इतिहास 

    16 दिन, 4400 किलोमीटर और रोज 200 से 250 किलोमीटर का सफर: इस यात्रा में दोनों युवाओं ने करीब 16 दिन में 4400 किलोमीटर की दूरी तय की. रोजाना लगभग 200 से 250 किलोमीटर बाइक चलाकर वे आगे बढ़ते थे. सुबह 8 बजे यात्रा शुरू होती, दोपहर में भोजन और विश्राम के लिए रुकते और शाम तक शिविर डालकर विश्राम करते. यात्रा के दौरान उनके पास स्वयं का टेंट और भोजन बनाने का सामान और बाकी जरूरत के सामान थे. वे जहां रुकते, वहीं टेंट लगाकर रात बिताते और खुद ही भोजन तैयार करते.

    बाइक से 4400 किलोमीटर का सफर
    "चलचित्र देखने जैसी नहीं, उसका हिस्सा बनने जैसी होती है यात्रा": यात्रा के अनुभव साझा करते हुए शालीन साहू ने कहा,"जब हम किसी यात्रा पर बाइक से निकलते हैं तो वह सिर्फ देखने भर की चीज नहीं रहती, बल्कि हम खुद उस यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं. उसका रोमांच और आनंद बिल्कुल अलग होता है. चारधाम यात्रा का सबसे खास अनुभव यह है कि यहां आप एक साथ भारत के सभी मौसम – गर्मी, सर्दी और बरसात का एहसास कर पाते हैं."

    बाइक से चारधाम यात्रा 

    युवाओं के लिए संदेश: शालीन साहू ने युवाओं से आह्वान किया कि भारत जैसे आध्यात्मिक देश में ऐसी साहसिक यात्राएं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यात्रा सिर्फ दर्शन नहीं, बल्कि आत्म अनुशासन, साहस और धैर्य सिखाती है. युवाओं को इस तरह की यात्राओं के लिए आगे आना चाहिए.

  • ISRO के वी. नारायणन के साथ 4 दिवसीय विज्ञान मेला, युवा वैज्ञानिकों के लिए खास कार्यक्रम

    भोपाल
    राजधानी भोपाल में 12 वें विज्ञान मेले का आयोजन किया जा रहा है. इसमें पहली बार राजधानी के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय को भी आयोजन में पार्टनर बनाया गया है. अब तक इसका आयोजन विज्ञान भारती और मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तत्वावधान में किया जाता था. लेकिन इस बार बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय को भी शामिल किया गया है.

    इसरो निदेशक से संवाद करेंगे युवा वैज्ञानिक
    मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक अनिल कोठारी ने बताया कि, ''इस बार विज्ञान मेला में जो भी बच्चे सम्मिलित होंगे, उनको देश और प्रदेश के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से बात करने का मौका मिलेगा.'' कोठारी ने बताया कि, ''अभी इसरो के निदेशक डॉ. वी. नारायणन ने इस संवाद में शामिल होने की सहमति दी है. इनके अलावा भोपाल में भी 16 शोध संस्थान हैं, उनके वैज्ञानिक भी संवाद में शामिल होंगे.''

    4 दिन तक बीयू परिसर में लगेगा मेला
    विज्ञान की नवीनतम उपलब्धियों और नवाचारों का भव्य विज्ञान मेला का आयोजन किया जा रहा है. बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय (बीयू) के मैदान एवं ज्ञान विज्ञान भवन परिसर में 12वां विज्ञान मेला 26 से 29 सितंबर तक आयोजित होगा. इस आयोजन में देश के विभिन्न अंचलों से विज्ञानी, शोधकर्ता, विद्यार्थी और शिक्षक शामिल होंगे. इस मेले का उद्देश्य नवाचार और संवाद के माध्यम से समाज के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत करना है.

    विज्ञान मेले में ये रहेगा खास
    इस आयोजन में प्रमुख आकर्षण अत्याधुनिक विज्ञान प्रदर्शनी, टेक्नोलॉजी शो और इनोवेशन स्टॉल होंगे. इसमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थान इसरो, एनटीपीसी, एम्प्री सहित अन्य सस्थानों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी. इसमें सरकारी, निजी, गैर सरकारी संगठन, संस्थान, कंपनियां, सामाजिक संगठन और स्कूल-कालेज सक्रिय रूप से भाग लेंगे. पंजीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है. इच्छुक प्रतिभागी निर्धारित पोर्टल पर पंजीयन कर सकते हैं.

    कार्यशालाएं, व्याख्यान और विशेष सत्र होंगे
    इस विज्ञान मेले में कार्यशालाएं, व्याख्यान और विशेष सत्र होंगे. नवाचार संगम में कृषि, पर्यावरण से संबंधित सामाजिक समस्याओं पर तकनीकी समाधान के नवाचार पर आधारित इस प्रतियोगिता में आमंत्रित किए गए हैं. इसमें 315 पंजीकरण हुए हैं. वहीं ज्ञान सेतु में विज्ञान शिक्षक कार्यशाला, उपस्थित विज्ञान शिक्षकों को विज्ञान प्रयोग किट का वितरण किया जाएगा.

    वहीं भारतीय ज्ञान परंपरा संगोष्ठी में विविध राष्ट्रीय एवं राज्य के शोध एवं शिक्षा संस्थानों से करीब 200 विज्ञानी एवं प्राध्यापक रहेंगे. इस गोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा-राष्ट्रीय प्रकोष्ठ के संयोजक आईआईटी इंदौर के प्रोफेसर गंटी सूर्यनारायण मूर्ती का मार्गदर्शन भी मिलेगा. सीधा संवाद कार्यक्रम में 300 विद्यार्थी प्रतिदिन विज्ञानियों से संवाद का अवसर पाएंगे. इसके अलावा स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक एवं विशेष प्रस्तुतियां होंगी.

     

  • भोपाल मेट्रो में जेब पर हल्का सफर! ₹20 से ₹80 तक किराया, पहले 7 दिन फ्री और तीन महीने तक राहत

    भोपाल 
    भोपाल में अक्टूबर से लोग मेट्रो ट्रेन में सफर कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाने राजधानी आ सकते हैं। इससे पहले डिपो और गाड़ी को देखने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी। 

    मेट्रो की किराया सूची पर भी मंथन किया जा रहा है। अफसरों की मानें तो 7 दिन तक लोग मेट्रो में फ्री सफर कर सकेंगे। वहीं, 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। छूट खत्म होने के बाद सिर्फ 20 रुपए में मेट्रो का सफर किया जा सकेगा। इसका अधिकतम किराया 80 रुपए होगा। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था।

    भोपाल में ऑरेंज लाइन के पहले फेज में मेट्रो सुभाषनगर से एम्स तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक है। हालांकि, इसका काम अगले 2 से 3 साल में पूरा हो सकेगा।

    15 दिन में काम पूरा करने का टारगेट अगला स्टेशन एम्स है। दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों…इस तरह का अनाउंसमेंट आपको अक्टूबर में सुनाई देने लगेगा। मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा।

    हालांकि, अभी एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम किए जा रहे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट है।

    30 से 80 किमी प्रति घंटा रहेगी मेट्रो की स्पीड भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (RKMP) और इंदौर के गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर तक मेट्रो कोच को ट्रैक पर दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। बीच-बीच में 100 से 120 किमी की रफ्तार से भी मेट्रो दौड़ाई जा रही है। सिग्नल लग चुके हैं। इनकी टेस्टिंग भी हो रही है।

    ट्रेन की तर्ज पर मेट्रो में भी टिकट लेनी पड़ेगी मेट्रो का टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होकर मैन्युअल ही रहेगा। जैसे आप ट्रेन में टिकट लेकर सफर करते हैं, वैसे ही मेट्रो में भी कर सकेंगे। इंदौर में अभी यही सिस्टम है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ से काम छिनने और नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह स्थिति बनेगी।

    बता दें कि असिस गार्ड का मामला पिछले 4 महीने से सुर्खियों में था। आखिरकार अगस्त में असिस गार्ड का टेंडर कैंसिल कर दिया गया। नई कंपनी के लिए टेंडर भी कॉल किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है।

    मैन्युअल टिकट ही एक मात्र ऑप्शन अफसरों ने बताया कि असिस गार्ड कंपनी इंदौर में स्टेशनों पर भी सिस्टम लगा रही थी, लेकिन विवाद के बाद इंदौर में मैन्युअल टिकट ही ऑप्शन बचा था।

    पिछले साढ़े 3 महीने से इंदौर में ट्रेन जैसा ही सिस्टम है। इसमें मेट्रो के कर्मचारी ही तैनात किए गए हैं। यही ऑप्शन अब भोपाल मेट्रो के लिए भी बचा है। दरअसल, 'असिस गार्ड’ के जिम्मे ही सबसे महत्वपूर्ण ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन यानी किराया लेने की पूरी प्रक्रिया का सिस्टम तैयार करने का काम था। जिसमें कार्ड के जरिए किराया लेने के बाद ही गेट खुलना भी शामिल है। यह कंपनी सिस्टम का पूरा मेंटेनेंस भी करती।

    अब अनुबंध खत्म होने पर नई कंपनी काम करेगी, लेकिन उसे टेंडर और फिर अन्य प्रक्रिया से गुजरने में समय लगेगा। इसलिए मेट्रो कॉर्पोरेशन भोपाल में भी मैन्युअली टिकट सिस्टम ही लागू कर सकता है। अफसरों के अनुसार, मैन्युअली सिस्टम के लिए अमला तैनात किया जा रहा है।

  • लगभग 4.8 लाख पेंडिंग केस, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जमानत अपीलों के लिए 10 जज करेंगे सुनवाई

    जबलपुर
     मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पहली बार 10 जज केवल जमानत याचिकाओं की सुनवाई करने के लिए बैठेंगे. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने एक प्रशासनिक आदेश दिया है, जिसे हाई कोर्ट की वेबसाइट पर देखा जा सकता है. इसमें शनिवार को 10 जज अपनी-अपनी अदालत में बैठेंगे. वे केवल जमानत याचिकाओं की सुनवाई करेंगे.

    एमपी हाई कोर्ट में फिलहाल जमानत याचिकाओं के 3000 से ज्यादा मामले लंबित हैं. इन्हीं मामलों में लोगों को न्याय देने के लिए हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था की है. हमारी न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया में जमानत का प्रावधान है. जस्टिस अचल कुमार पालीवाल, जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल, जस्टिस देवनारायण मिश्रा, जस्टिस दीपक खोत, जस्टिस अजय कुमार निरंकारी, जस्टिस हिमांशु जोशी, जस्टिस रामकुमार चौबे, जस्टिस रत्नेशचंद्र सिंह बिसेन, जस्टिस बीपी शर्मा और जस्टिस प्रदीप मित्तल कल 20 सितंबर को केवल जमानत याचिकाएं सुनेंगे.

    जबलपुर की मुख्य पीठ में फिलहाल जमानत याचिकाओं के लंबित हैं 3000 से ज्यादा मामले

    मान लीजिए किसी के खिलाफ किसी थाने में कोई एफआईआर दर्ज होती है. जिसके बाद पुलिस आरोपी को पकड़ती है. पकड़ने के बाद पुलिस आरोपी के ऊपर लगे आरोप का एक चालान तैयार करती है, जिसे कोर्ट में पेश किया जाता है. धाराओं के आधार पर यह तय होता है कि उसे कौन सी कोर्ट जमानत दे सकती है. गंभीर धाराओं में मामला हाईकोर्ट तक पहुंचता है.

    जमानत की प्रक्रिया में आरोपी को अपने किसी ऐसे जानकार को पेश करना होता है, जिसके पास कोई स्थाई संपत्ति हो. स्थाई संपत्ति के कागजात के आधार पर आरोपी को जमानत दे दी जाती है. जमानत में यह शर्त होती है कि आरोपी को हर पेशी पर कोर्ट में आना होगा. इसके बाद ट्रायल चलती है. आरोपी पर लगे आरोप को गवाह और सबूत के आधार पर सिद्ध किया जाता है और इसके बाद सजा होती है या आरोपी बेगुनाह साबित होता है.

    जुर्म तय नहीं होने तक आरोपी को जेल में बंद रखना सही नहीं

    न्याय व्यवस्था की प्रक्रिया सरल है लेकिन सबूत और गवाह को इकट्ठा करने में काफी समय लगता है. इतने दिनों तक किसी भी आरोपी को जेल में बंद रखना सही नहीं है, क्योंकि अब तक यह तय नहीं होता कि उसने ही जुर्म किया है. इसलिए हमारी न्याय व्यवस्था जमानत का प्रावधान देती है. इसमें आरोपी को अपने परिचय के किसी ऐसे आदमी को कोर्ट में लेकर आना होता है जिसके पास कोई स्थाई संपत्ति हो. संपत्ति के कागजात के आधार पर आरोपी को जमानत मिल जाती है लेकिन उसे समय-समय पर कोर्ट में आना पड़ता है. इसके बाद यदि उसे सजा होती है तो वह जेल जाता है और आरोप सिद्ध नहीं होने पर वह जेल से छूट जाता है.

    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग पेंडिंग हैं चार लाख 80 हजार केस

    यह प्रक्रिया सुनने में या पढ़ने में जितनी सरल लगे लेकिन उतनी सरल है नहीं. क्योंकि हमारी अदालतों में लाखों केस पेंडिंग हैं. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग चार लाख 80 हजार केस पेंडिंग हैं. ऐसी स्थिति में यदि किसी आरोपी को पुलिस ने पकड़ा और उसे जेल भेज दिया गया. यदि वह जमानत के लिए हाई कोर्ट में जमानत याचिका लगाता है. लेकिन हाई कोर्ट में महज 41 जज हैं और रोज उनके पास सैकड़ो मामले होते हैं. ऐसी स्थिति में जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को जमानत याचिका पर सुनवाई ही नहीं हो पाती.

    स्पेशल कोर्ट से हजारों लोगों को मिलेगा जमानत का फायदा

    एमपी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील एडवोकेट दीपक ने बताया कि यह प्रक्रिया यदि लगातार चलती रही तो हजारों लोगों को जमानत का फायदा मिलेगा और न्याय की प्रक्रिया तेज होगी. इसके साथ ही जिलों को भी राहत मिलेगी. क्योंकि हमारी जेलों में भी अभी क्षमता से ज्यादा कैदी बंद है.

     

  • बारिश में खराब हुई सड़कों की मरम्मत के लिए ग्वालियर में शुरू हुई तैयारी, 42 सड़कें रेड, यलो और ग्रीन जोन में बांटी जाएंगी

    ग्वालियर

    शहर की बदहाल सड़कों से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। नगर निगम अब 32.55 करोड़ रुपये खर्च कर शहर की 42 सड़कों का कायाकल्प करने जा रहा है। इन सड़कों का निर्माण डामर और सीसी से किया जाएगा। जल्द ही इन सड़कों पर काम शुरू हो जाएगा। शहर की प्रमुख सड़कों के साथ-साथ गलीमोहल्लों की सड़कें भी गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। लोग रोज हादसों के खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं। इसी बदहाल स्थिति से निपटने के लिए निगम ने यह कदम उठाया है।

    निगम ग्रामीण क्षेत्र में 9 किलोमीटर लंबी 8 सड़कें 7.19 करोड़ रुपये की लागत से बनाएगा। ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में 10.50 किलोमीटर लंबी 10 सड़कें 8.69 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगी। दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 11 किलोमीटर लंबी 10 सड़कों का निर्माण 11.26 करोड़ रुपये से किया जाएगा। वहीं पूर्व विधानसभा क्षेत्र में 8 किलोमीटर लंबी 14 सड़कों को 5.41 करोड़ रुपये में डामरीकरण से बनाया जाएगा।

    सड़क पर ठेकेदार की जिम्मेदारी तय

    इन सड़कों के कार्यों की विस्तृत योजना बनाई गई है, जिसमें सड़कों की लंबाई, उनकी संख्या और अनुमानित लागत, अधिकारी व ठेकेदार की जिम्मेदारी भी तय की गई है। इतना ही नहीं, इन सड़कों को बनाने के बाद ठेकेदार द्वारा इनमें बोर्ड भी लगाया जाएगा, जिसमें उस सड़क के निर्माण की राशि, ठेकेदार और गारंटी पीरियड सहित अन्य सभी पैरामीटर को दर्शाया जाएगा। सड़क के तय मानकों की जांच के बाद ही ठेकेदार का भुगतान किया जाएगा।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश पर रेड, यलो और ग्रीन जोन में सड़कों को बांटने की कवायद नगर निगम ने शुरू कर दी है। गुरुवार को दक्षिण व पूर्व की 12 सड़कोंं को चिह्नित किया है। यह सड़कें पूरी तरह से खराब हैं। रेड जोन में इन्हें शामिल किया जा सकता है।

    इसमें हजीरा चौराहा से बिरला नगर पुल 283 लाख, हजीरा चौराहा से चार शहर का नाका 59.65, नौ नंबर पुलिया से 50 क्वाटर तक 46.16, लक्ष्मीपुरम में डामरीकरण एवं नाली निर्माण 225, पप्पू राय जिम से गिर्राज मंदिर तक डामरीकरण व नाला निर्माण 160 व शील नगर कशिश वाटिका के सामने मुख्य मार्ग तक डामरीकरण 100 लाख सहित कुल 873.81 करोड़ के विकास कार्य को लिस्ट तैयार की है साथ ही दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में मांढरे की माता से कस्तूरबा तिराहा तक 3.43 करोड़, महाराज बाड़ा से सराफा होकर गस्त का ताजिया तक 1.02 करोड़, माधौगंज थाना से हेमसिंह की परेड 68 लाख रुपए खर्च होंगे।

    वहीं पारख जी का बाड़ा से जूता मार्केट दही मंडी 59 लाख, छप्पर वाला पुल से शान-ओ-शौकत तक 31 लाख और नहर पट्टर रोड 26 लाख सहित 6 करोड़ 32 लाख रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है। हालांकि अभी यलो और ग्रीन जोन वाली सड़कों को चिह्नित करने की बात अफसरों द्वारा बताई जा रही है।

    ये टीम करेगी जांच

    सड़कों की जांच के लिए अपर आयुक्त, अधीक्षण यंत्री, सीसीओ व जेडओ लेवल पर टीम भी गठित की जाएगी, जो कि रोजाना निरीक्षण कर रिपोर्ट आयुक्त को देगी।

    बारिश से जर्जर सड़कें बनाने का प्रस्ताव तैयार

    बारिश से जर्जर हुई ग्वालियरशहर की सड़कों को बनाने के लिए 30 करोड़ से अधिक राशि का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें चारों विधानसभा की सड़कें को शामिल किया है। जल्द ही सड़कों का कार्य शुरू कराया जाएगा। शासन से भी सड़कों के संबंध में राशि की मांग की गई है।

    -संघप्रिय, आयुक्त नगर निगम

  • नक्सलियों का आत्मसमर्पण क्यों बढ़ा? सुरक्षा बलों की सख्ती और ये 5 वजह बनीं हथियार छोड़ने की वजह

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था लेकिन अब यहां फोर्स की गतिविधियां बढ़ गई हैं। फोर्स नक्सलियों के उन ठिकानों में पहुंच गई है जिसे सबसे सुरक्षित माना जाता था। जिसके बाद माओवादी संगठन बैकफुट पर हैं।  नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी ने सरकार के सामने सरेंडर करने और हथियार डालने को लेकर लेटर लिखा है। यह लेटर CPI (माओवादी) के द्वारा जारी किया गया है। जो लेटर सामने आया है उस लेटर के सत्यता की जांच की जा रही है। आइए जानते हैं वो पांच कारण जिस कारण से नक्सलियों ने हथियार छोड़ने का फैसला किया है।

    ताबड़तोड़ एनकाउंटर से टूटी कमर
    छत्तीसगढ़ में बीते डेढ़ सालों में सुरक्षाबल के जवानों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। सुरक्षाबल के जवानों बस्तर और नक्सल प्रभावित जिलों में लगातार एनकाउंटर कर रहे हैं। एनकाउंटर के कारण नक्सलियों की रीढ़ टूट गई है। सुरक्षाबल के जवान केवल बस्तर ही नहीं उस सभी जिलों में कार्रवाई कर रहे हैं जहां नक्सली गतिविधियों की जानकारी मिल रही हैं। छत्तीसगढ़ में इस साल अलग-अलग मुठभेड़ों में 244 नक्सली मारे जा चुके हैं। इनमें से 215 नक्सली बस्तर संभाग में मारे गए। जबकि 27 गरियाबंद जिले में मारे गए। इसके अलावा दुर्ग संभाग के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में दो नक्सली मारे गए हैं।

    आपूर्ति को किया प्रभावित
    छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों के उन ठिकानों पर भी धावा बोला जो उनके लिए सुरक्षित माने जाते हैं। सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों की आपूर्ति को प्रभावित किया है। जिस कारण से नक्सली संगठनों तक हथियार और राशन नहीं पहुंच पा रहा है। सुरक्षाबलों ने माओवादियों द्वारा छिपाए गए भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद किया है। हथियारों की बरामदगी माओवादियों के खिलाफ बड़ा झटका मानी जा रही है। जवानों ने माओवादियों द्वारा छिपाए गए हथियारों, विस्फोटक सामग्री और रसद के बड़े डंप का पता लगाकर उन्हें जब्त किया है। जवानों ने नक्सलियों के ठिकानों से बीजीएल लांचर, मजल लोडिंग बंदूक, बीजीएल सेल, बैरल पाइप, बैटरी, इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, डायरेक्शनल माइंस, पिठ्ठू बैग, बीजीएल पोच, माओवादी वर्दी, केरिपु पैटर्न की कॉम्बैट ड्रेस, बेल्ट, बेडशीट, माओवादी साहित्य, पटाखे और राशन सामग्री बरामद की है।

    नियद नेल्लानार योजना का प्रभाव
    छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ जहां सुरक्षाबल के जवान नक्सलियों के साथ सीधे तौर पर मुकाबला कर रहे हैं वहीं, सरकार भी रणनीति तौर पर बड़ी तैयारी कर रही है। नक्सल प्रभावित गांवों में विकास पहुंचाने के लिए सरकार ने नियद नेल्लानार योजना की शुरुआत की है। इस योजना का लाभ बस्तर जिले के नक्सल प्रभावित लोगों को मिल रहा है। जिस कारण से ग्रामीणों ने नक्सलियों के खिलाफ आवाज उठाई है। जिन इलाकों में विकास नहीं पहुंचा था वहां जिला प्रशासन, सुरक्षाबल के जवान के माध्यम से सरकार योजनाएं तेजी से पहुंच रही हैं। लोगों के आधारकार्ड बनाए जा रहे हैं। उनको अलग-अलग योजनाओं का लाभ मिल रहा है जिससे नक्सलवाद के खिलाफ उनका मोहभंग हुआ है और सुरक्षाबल के जवानों को सहयोग दे रहे हैं।

    बड़े लीडरों के मारे जाने से संगठन कमजोर
    छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबल के जवानों ने रणनीति बदली है। जवानों ने नक्सलियों के टॉप लीडरों को टारगेट करते हुए ऑपरेशन शुरु किए हैं। सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों के कई टॉप लीडरों को मार गिराया है। जिन लीडरों को मारा गया है उनमें माओवादी संगठन का महासचिव भी शामिल है। सुरक्षाबल के जवानों ने सेंट्रल कमेटी मेंबर मोडेम बालकृष्ण, डेढ़ करोड़ के इनामी बसवाराजू, सेंट्रल कमेटी मेंबर जयराम उर्फ चलपति, सेंट्रल रीजनल ब्यूरो रेणुका जैसे नक्सलियों का एनकाउंटर किया है। नक्सली संगठनों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पालित ब्यूरो का मेंबर और डेढ़ करोड़ रुपये का इनामी बसवाराजू मारा गया है।

    माओवादी विचारधारा छोड़ रहे हैं नक्सली
    एक तरफ जहां नक्सलियों के खिलाफ जवान सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं वहीं, दूसरी तरफ बड़ी संख्या में माओवादी सरेंडर भी कर रहे हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को नई सरेंडर पॉलिसी के तहत नई शुरुआत करने का मौका दिया जा रहा है। जिसके बाद बस्तर इलाके में बड़े पैमाने पर नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। नक्सलियों के सरेंडर और नए कैडरों की भर्ती में कमी के कारण भी नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में 2023 में नई सरकार के गठन के बाद से अभी तक 1704 माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- औद्योगिक निवेश से विन्ध्य एवं त्योंथर को विकास की नई गति मिलेगी

    नवम्बर में बनारस में होगी इंडस्ट्रियल समिट

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि औद्योगिक निवेश से विन्ध्य एवं त्योंथर को विकास की नई गति मिलेगी। उद्योगपति रोजगारपरक उद्योग लगायें सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बनारस से आये उद्यमियों के आग्रह पर घोषणा की कि नवम्बर माह में काशी विश्वनाथ की नगरी में इंडस्ट्रियल समिट का आयोजन होगा। बनारस के उद्यमियों ने भी विन्ध्य क्षेत्र में एक हजार करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा जिले के चाकघाट में उद्यमियों से वन-टू-वन चर्चा के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुरूप हम स्वदेशी के मूलमंत्र को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। आप सभी उद्यमी अपने उद्योग स्थापित करने के लिये आगे आयें, राज्य शासन द्वारा आपको हर संभव मदद दी जायेगी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में हम देश में उच्चतम स्तर पर होंगे। उन्होंने उद्यमियों को पराली से संबंधित व फूड प्रोसेसिंग से संबंधित उद्यम के साथ अन्य क्षेत्र में भी उद्योग स्थापना के लिये आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा जिले में मऊगंज व त्योंथर विधानसभा क्षेत्रों में पर्याप्त भूमि की उपलब्धता है। औद्योगिक क्षेत्र विकास की योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि यदि उद्यमी स्वयं अपने पूंजी निवेश से परिसर बनाकर उद्योग स्थापित करते हैं तो उन्हें हम पूरी सुविधा व मदद देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने त्योंथर में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट के भूमिपूजन की बधाई दी और अपेक्षा की कि इससे स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा। पराली की समस्या से निजात मिलेगी तथा जैविक विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के जन्म-दिवस के अवसर पर 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री अपने जन्म-दिवस पर मध्यप्रदेश में उपस्थित रहे और उन्होंने पीएम मित्र पार्क के माध्यम से इंडस्ट्रियल क्षेत्र को सौगात दी, जो रोजगार उपलब्धता में मील का पत्थर साबित होगा।

    बनारस रामनगर में उद्योगपति करेंगे एक हजार करोड़ का निवेश
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्यमियों को प्रदेश में निवेश के लिये आमंत्रित किया। बनारस रामनगर के 17 उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों ने कहा कि रीवा जिले में एक हजार करोड़ का निवेश करेंगे। उद्यमियों के वन-टू-वन चर्चा में रामनगर उद्योग एसोशियेसन ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अंगवस्त्रम व काशी विश्वनाथ मंदिर की प्रतिकृति भेंट की। डी.एस. मिश्रा अध्यक्ष रामनगर उद्योग संघ वाराणसी, राकेश जायसवाल, दिलीप सिंह अध्यक्ष म.प्र. चावल संघ तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्यम योजनान्तर्गत उद्यमी अमित गौतम ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद किया। उद्यमियों ने कहा कि प्रदेश की आकर्षक उद्योग नीति से उत्साहित होकर हम प्रदेश में निवेश करेंगे और यह क्षेत्र उद्योग के क्षेत्र में ऊंची उड़ान भरेगा। सांसद श्री जनार्दन मिश्रा, विधायक त्योंथर श्री सिद्धार्थ तिवारी, पूर्व महापौर श्री वीरेन्द्र गुप्ता, डॉ. अजय सिंह, पूर्व सांसद श्री देवराज सिंह, कमिश्नर श्री बीएस जामोद सहित बड़ी संख्या में बनारस, प्रयागराज, मिर्जापुर और रीवा से आये उद्यमी शामिल हुए।

  • ऑनलाइन मोहब्बत ने दी बड़ी ठगी: डॉक्टर की पत्नी फंसी लाखों के चक्कर में

    ग्वालियर
    मध्य प्रदेश के ग्वालियर डिजिटल इश्क के चक्कर में पड़ी 34 साल की एक शादीशुदा महिला के साथ जो हुआ, वो सभी के लिए एक चेतावनी है। इश्क और इमोशंस के नाम पर एक अनजान युवक ने एक महिला को इस कदर अपने प्रेमजाल में फंसाया कि उसने अपनी लाखों रुपये के साथ अपनी इज्जत भी दांव पर लगा दी। महिला के पति डॉक्टर हैं। डिजिटल प्लैटफार्म पर हुई दोस्ती मे महिला इस कदर अंधी हो गई कि उसने अपना न्यूड वीडियो तक बनाकर उस अनजान युवक को भेज दिया। उसके बाद ठग ने उसे गिफ्ट भेजने के बहाने उससे 3.76 लाख रुपये भी ठग लिए। इसके बाद जब उस न्यूड वीडियो के नाम पर ब्लैकमेलिंग शुरू की तब महिला थाने पहुंची।

    पीड़ित महिला द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, एक महीने पहले उसके पास 923007507684 से वॉटसऐप कॉल आया था। कॉल करने वाले ने अपना नाम विपिन और खुद को एक एनआरआई बताया था। उसने महिला से कहा था कि वह उससे दोस्ती करना चाहता है। उस दिन के बाद से अपने डॉक्टर पति से छुपकर महिला और युवक के बीच नियमित और लम्बी-लम्बी बातचीत शुरू हो गईं, जो कुछ दिनो में प्रेम से भरी चर्चाओं में बदल गई।

    कथित विपिन ने महिला को लंदन आने के लिए कहा, लेकिन पीड़िता ने इससे इनकार कर दिया। फोन पर परवान चढ़े इस डिजिटल इश्क में आरोपी विपिन ने पीड़िता से उसके फोटो मांगने शुरू कर दिए। पीड़िता ने भी आरोपी युवक पर विश्वास कर उसे अपने कई फोटो भेज दिए। इतना ही नहीं, महिला ने आरोपी युवक की डिमांड पर अपना न्यूड वीडियो बनाकर उसके वॉटसऐप नंबर पर भेज दिया।

    गिफ्ट भेजने के नाम पर ली आधार कार्ड की कॉपी
    वीडियो भेजने के बाद आरोपी युवक ने पीड़ित महिला से गिफ्ट भेजने के नाम पर उसके आधारकार्ड की कॉपी भी वॉट्सऐप पर ले ली। इसके बाद आरोपी युवक ने महिला को बताया कि उसने एक पार्सल भेजा है, उसे तुम ले लेना। पार्सल पर एड्रेस और फोन नंबर भी लिखा होना बताया। अगले दिन महिला के नंबर पर 9459316606 से कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि आपका पार्सल आया है और वह एयरपोर्ट से बोल रहा है। इस पार्सल को लेने के लिए 15 हजार रुपये जीएसटी के चुकाने होंगे। लिहाजा महिला ने 15 हजार का पेमेंट कर दिया। इसके बाद युवक ने डॉलर चेंज करने के नाम पर 46 हजार, गाड़ी आगे बढ़वाने के नाम पर 1 लाख 20 हजार, परमिट कार्ड बनवाने के नाम पर 1 लाख 15 हजार व सामान की रसीद बनवाने के नाम पर 80 हजार पेमेंट अलग-अलग अकाउंट नंबरों व मोबाइल नंबरों पर करने को कहा। पीड़िता ने उसकी बातों में आकर आरोपी विपिन को फोनपे के जरिये 3 लाख 76 हजार का पेमेंट कर दिया।

    17 सितंबर को फिर से आरोपी युवक विपिन ने महिला को फोन किया और 2 लाख 85 हजार रुपये देने की मांग की। महिला ने जब और रुपये देने से इनकार किया तो युवक अपने असली रूप में आ गया, उसने कहा कि पार्सल वाले युवक से बात कर लो। जब महिला ने उससे बात की तो उसने सीधी धमकी दी कि पैसे देने पड़ेंगे, अगर नहीं दिए तो तुम्हारा न्यूड वीडियो वायरल कर देंगे। यकीन दिलाने के लिए अनजान युवक ने वह वीडियो भी महिला को भेजा जो उसने विपिन को भेजा था।

    वह महिला जब पूरी तरह आर्थिक और मानसिक तौर पर टूट गई तब वह साहस जुटाकर पुलिस के पास पहुंची। पीड़ित महिला की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।आशंका जताई जा रही है कि यह अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गैंग हो सकता है।

    इस मामले में सीएसपी रॉबिन जैन का कहना है कि क्राइम ब्रांच टीम मामले की जांच कर रही है। जैन ने कहा कि सोशल मीडिया या फोन पर अनजान लोगों से दोस्ती करना खतरनाक हो सकता है। किसी भी प्रकार के निजी वीडियो या फोटो साझा करने से पहले पूरी तरह पड़ताल कर लेना जरूरी है। अगर किसी से ब्लैकमेलिंग का सामना हो तो तुरंत पुलिस से संपर्क करें।

  • एमपी में बेशकीमती हीरे की खोज और अचानक अदृश्य होने का मामला!

    पन्ना 
    मध्यप्रदेश की हीरा नगरी पन्ना से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक हीरा खदान मालिक ने दावा किया है कि उसकी खदान से 'कोहिनूर' जैसा बेशकीमती हीरा निकला था लेकिन हीरा मिलने के बाद उसके पार्टनर की नीयत खराब हो गई। लालच में खदान के पार्टनर ने रातों रात उस बेशकीमती हीरे को गायब कर दिया है। हीरा खदान मालिक का दावा है कि जो बेशकीमती हीरा पार्टनर ने गायब किया है वो 150 कैरेट का है। इतना ही नहीं उसने एक तस्वीर भी पुलिस को दिखाई है जिसमें हाथ में 150 कैरेट का हीरा नजर आ रहा है।

    'कोहिनूर' जैसा बेशकीमती हीरा
    मैहर के रहने वाले जयबहादुर सिंह ने पन्ना के हीरा कार्यालय व पुलिस थाने में लिखित शिकायत की है। अपनी शिकात में उन्होंने बताया है कि उनकी कृष्णा कल्याणपुर पट्टी की हीरा खदान से 150 कैरेट का हीरा निकला था। यह हीरा उनके पार्टनर दयाराम पटेल के पास मौजूद है। उन्होंने हीरा हाथ में रखकर फोटो खिंचवाई थी और एक अन्य पार्टनर को भेजी थी। लेकिन अब पार्टनर दयाराम की नीयत खराब हो गई है और उसने नायाब हीरे को रातों-रात गायब कर दिया है। इतना ही नहीं हीरा गायब करने के बाद वो खुद नई हीरा खदान का पट्टा लेने की फिराक में है। खदान संचालक जयबहादुर सिंह ने पुलिस से गुहार लगाई है कि उसे पार्टनर से वो हीरा वापस दिलाया जाए।
     
    दावा सही तो ये 'कोहिनूर' के बाद
    खदान संचालक जयबहादुर ने पुलिस को बताया है कि उसने फरवरी महीने में कृष्णा कल्याणपुर पट्टी में हीरा खदान का पट्टा लिया था। इसमें दयाराम पटेल, किशोर खेड़े, नरेंद्र कुमार सेन, महेंद्र सिंह गौंड़ व प्रकाश पटेल उसके पार्टनर थे। करीब 6 महीने बाद उनकी खदान से अब तक का सबसे बड़ा हीरा निकला है, जिसे दयाराम ने गायब कर दिया है और अब वो अपने रिश्तेदार के नाम से नई खदान लेने की कोशिश कर रहा है जिससे की उस खदान से उस नायाब हीरे का निकलना बताकर उसे हीरा कार्यालय में जमा करा सके। बताया गया है कि अगर जयबहादुर के दावे में सच्चाई है और सच में 150 कैरेट का हीरा मिला है तो ये पन्ना खदान के इतिहास का सबसे बड़ा हीरा है। अगर कोहिनूर हीरे की बात करें तो करीब 800 साल पहले आंध्रप्रदेश की गोलकुंडा हीरा खदान में कोहिनूर मिला था तब उसका वजन 186 कैरेट था और तराशने के बाद वर्तमान में उसका वजन 105.6 कैरेट है।

  • नगर की सड़कों से विकास को मिलेगी रफ्तार

    सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर विषय पर हुई कार्यशाला

    भोपाल 
    आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोंडवे ने कहा है कि नगरीय क्षेत्र की सड़कों से विकास को रफ्तार मिलती है और इसके लिये जरूरी है कि सड़के गुणवत्तापूर्ण हो। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों से जुड़े हुए इंजीनियरों की जवाबदारी है कि वे सड़कों के निर्माण और संधारण पर पूरा ध्यान रखें। आयुक्त श्री भोंडवे शुक्रवार को आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी भोपाल में सस्टेनेबल रोड इंफ्रास्ट्रक्चर विषय पर हुई कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

    आयुक्त श्री भोंडवे ने कहा कि प्रदेश में करीब ढाई करोड़ की आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। शहरी क्षेत्र की सड़कों पर यातायात का दबाब काफी है। इन सड़कों पर नगरीय क्षेत्र की अन्य अधोसंरचनाओं का भी प्रभाव पड़ता है इसलिये जरूरी है कि सड़कों को बेहतर गुणवत्ता के साथ बनाया जाये। कार्यशाला में बताया गया कि नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत आगामी 5 वर्षों में 2 लाख करोड़ रूपये के काम होंगे। इसी के साथ केन्द्र सरकार की अमृत, स्वच्छ भारत मिशन एवं प्रधानमंत्री आवास योजना, जलप्रदाय, सीवरेज, हरित क्षेत्र विकास और यूज्ड वाटर मेनेजमेंट आदि कार्यों का क्रियान्वयन भी किया जा रहा है। सड़के हमारी अर्थव्यवस्था की धुरी हैं, जो नगरीय निकायों के समस्त क्षेत्रों को एक साथ जोड़ती हैं। नगरीय क्षेत्रों की सड़कों की गुणवत्ता सीधे तौर पर हमारी कार्य कुशलता को दर्शाती है। नगरीय निकायों के यंत्री अपने कार्य क्षेत्र में पूर्ण योगदान दे रहे हैं किंतु टेक्नोलॉजी में आ रहे परिवर्तन के साथ उन्हें अपनी कार्य प्रणाली में बदलाव की जरूरत है। कार्यशाला का उद्देश्य भी यही है। कार्यशाला में आईआईटी इंदौर, रूड़की, MORTH, CRRI & RODIC के विषय-विशेषज्ञों द्वारा सड़क निर्माण की नवीन प्रणाली तथा सड़कों की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने पर प्रस्‍तुतिकरण दिया गया।

    विषय विशेषज्ञों ने दी जानकारी
    कार्यशाला में सड़क निर्माण कार्य से जुड़े विषय विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों को संबोधित किया। इनमें RODIC के श्री आरएस महालहा और श्री एचसी अरोरा ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट, टेंडर प्रोसेस, आईआईटी इंदौर, रूडकी, MORTH, CRRI के विषय विशेषज्ञों ने सड़क निर्माण की नवीन प्रणाली तथा सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर प्रस्तुतिकरण दिया। कार्यशाला में कंस्ट्रक्शन टेक्निक, क्वॉलिटी कंट्रोल, टेस्टिंग लैब की प्रक्रिया, डिजिटल प्रोजेक्ट मेनेजमेंट, रीयल टाइम मॉनिटरिंग, नगर सड़कों की सुरक्षा, सड़क निर्माण में वेस्ट मटेरियल के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रमुख अभियंता श्री प्रदीप मिश्रा ने प्रदेश की नगरीय अधोसंरचना के बारे जानकारी दी। कार्यशाला में प्रदेश के 600 यंत्रियों का क्षमतावर्धन किया गया।

     

  • प्रधानमंत्री मोदी के आहवान पर दुकानदारों ने शुरू किया स्वदेशी जागरण अभियान

    मंत्री सारंग ने अभियान में की सहभागिता
    दुकानदारों ने विदेशी सामग्री के स्वदेशी विकल्प की भी लगाई सूची

    भोपाल
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “स्वदेशी अपनाओ” के आहवान को जनआंदोलन बनाने की दिशा में नरेला विधानसभा में अनूठी पहल शुरू हुई है। शुक्रवार को वार्ड क्रमांक 58 स्थित गौतम नगर मार्केट के स्थानीय दुकानदारों के आग्रह पर सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने “स्वदेशी अभियान” में सहभागिता की।

    मंत्री श्री सारंग की मौजूदगी में दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर “हमारे यहां स्वदेशी सामान मिलता है” के स्टीकर लगाए साथ ही ग्राहकों को स्वदेशी सामान खरीदने के लिये प्रेरित किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं भी स्वदेशी सामान की खरीदारी कर यूपीआई के माध्यम से भुगतान किया।

    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का यह आहवान आत्मनिर्भर भारत की नींव को और मजबूत करने वाला है। स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर हम न केवल देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में योगदान देंगे, बल्कि स्थानीय उद्यमों और श्रमिकों को भी नई ताकत प्रदान करेंगे।

    स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का संदेश उन्हें नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और व्यापारी उपस्थित रहे। वातावरण में उत्साह और स्वदेशी के समर्थन का जोश स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था। दुकानदारों और ग्राहकों ने एक स्वर से संकल्प लिया कि वे अब स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देंगे।

    उल्लेखनीय है कि नरेला विधानसभा में दुकानदारों ने विदेशी उत्पादों के स्थान पर उपलब्ध स्वदेशी विकल्पों की सूची भी प्रदर्शित की, जिससे ग्राहकों को जागरूक किया जा सके। दुकानदार स्वयं भी ग्राहकों को प्रेरित कर रहे हैं कि विदेशी उत्पादों के बजाय स्वदेशी सामान खरीदें। 

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की त्योंथर में विंध्य विकास संकल्प सम्मेलन में सहभागिता

    त्योंथर में न्यू आईटीआई सहित 400 एकड़ में बनाया जाएगा नया औद्योगिक प्रक्षेत्र
    त्योंथर में तमस नदी के किनारे बनेगा रिवर कॉरीडोर
    त्योंथर का सिविल हॉस्पिटल 100 बेडेड किया जाएगा
    राम वन गमन पथ के साथ बना रहे हैं श्रीकृष्ण पाथेय
    विकास का कारवां आगे भी यूं ही चलता रहेगा
    त्योंथर में 162 करोड़ रूपए के निर्माण कार्यों का किया भूमिपूजन
    125 करोड़ लागत के निजी कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट का शिलान्यास

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में विकास यज्ञ चल रहा है। विकास का यह कारवां अब रूकेगा नहीं, बल्कि और तेजी से यूं ही चलता रहेगा। विंध्य के विकास में सरकार कोई कसर नहीं रखेगी और हम सब मिलकर विकास परियोजनाओं के जरिए इस क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विंध्य क्षेत्र के विकास के लिए त्योंथर में 400 एकड़ उपलब्ध भूमि पर नया औद्योगिक प्रक्षेत्र बनाने, त्योंथर के सिविल अस्पताल को 50 बेड से बढ़ाकर 100 बेडेड करने, त्योंथर में आईटीआई का निर्माण और तमस नदी के तट पर रिवर कॉरिडोर बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने निवेशक फर्म आईओसीजीपीएस रिन्युएबल प्रायवेट लिमिटेड द्वारा करीब 125 करोड़ रूपए की लागत से स्थापित किए जाने वाले कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट का भूमिपूजन भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा सड़क दुर्घटना में मृत जीना वर्मा के परिजन को सरकार की ओर से 4 लाख रुपए की सहायता राशि देने की भी घोषणा की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को रीवा जिले के त्योंथर विधानसभा के चाकघाट कृषि उपज मंडी में आयोजित 'विंध्य विकास संकल्प' सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलन एवं कन्या पूजन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने भूतपूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्री श्रीनिवास तिवारी की जयंती पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विंध्य क्षेत्र न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश को रोशन करने में अग्रणी है। इस क्षेत्र ने विद्युत उत्पादन, सोलर पॉवर प्रोडक्शन और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। ऊर्जा उत्पादन में धनी यह क्षेत्र सच्चे अर्थों में देश की ऊर्जा धानी बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास की गतिविधियां तेजी से जारी हैं। बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिए त्योंथर को भी उद्योगों की सौगात मिल रही है। आज त्योंथर में 162 करोड़ रूपए से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन हुआ है। उन्होंने तीन उद्योगपतियों को उद्योग लगाने के लिये भूमि आवंटन पत्र प्रदान किये। हमारी सरकार प्रदेश के भविष्य को सुरक्षित करते हुए विद्यार्थी बच्चों को यूनिफार्म, किताबें, साइकिल, लैपटॉप और स्कूटी सहित स्कॉलरशिप भी दे रही है। डबल इंजन की सरकार में प्रदेश के हर वर्ग के कल्याण का बखूबी ध्यान रखा जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि शेरों का बल, बीरबल की बुद्धि और विंध्य की वाणी हम सभी ने तुलसीदास जी के माध्यम से सुनी है। यहां इन्वेस्टर श्री विनोद अग्रवाल भी आए हैं। ये 125 करोड़ लागत से कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगा रहे हैं। ये किसानों से पराली भी खरीदेंगे। अब किसानों को उनकी खेत में फसल अपशिष्ट (कचरा) से भी आय बढ़ेगी। खेत भी साफ हो जाएगा और पैसे भी मिल जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े गणराज्य के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत तेज गति से प्रगति कर रहा है। वे ग्लोबल लीडर हैं, उन्होंने अपना जन्मदिन मध्यप्रदेश के जनजातीय अंचल धार में मनाया। यहां कपास उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए कपास से कपड़ा बनाने के लिए देश के सबसे बड़े पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन किया। राज्य सरकार महिलाओं और युवाओं को विंध्य की धरती पर ही रोजगार दिलाएगी, अब उन्हें कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार ने लाड़ली बहनों को रक्षाबंधन पर 1500 रुपए दिए। आने वाली दीपावली के बाद भाईदूज से हर माह 1500 रुपए देंगे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार अन्नदाता किसानों के कल्याण के लिए उन्हें भी सहायता राशि दे रही है। पीएम किसान सम्मान निधि में राज्य सरकार भी राशि मिलाकर किसानों को हर साल 12 हजार रूपए दे रही है। यह किसानों के आर्थिक स्वावलंबन में एक बड़ी सौगात है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने के लिए "एक बगिया मां के नाम" योजना शुरू की है। स्व-सहायता समूह की महिलाओं को बगिया विकसित करने के लिए प्रति हितग्राही 3 लाख रुपए की सहायता राशि देगी। राज्य सरकार दूध उत्पादन को भी बढ़ावा दे रही है। दूध उत्पादन में प्रदेश को नंबर वन राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर कामधेनु योजना में 25 गायें खरीदने पर हमारी सरकार पशुपालक को 10 लाख रुपए का अनुदान देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सड़क हादसों के घायलों की सहायता के लिए राहवीर योजना और एयर एंबुलेंस की शुरुआत की है। यह सरकार की संवेदनशीलता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में सांदीपनि विद्यालयों की स्थापना की जा रही है। चित्रकूट सहित प्रदेश के जिस स्थान पर भगवान श्रीराम के चरण पड़े, उन्हें राम वन गमन पथ के रूप में विकसित किया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण की लीला स्थलों पर तीर्थ बनाने के साथ हम प्रदेश के हर नगर में गीता भवन भी बनाने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन में आईं माताओं-बहनों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।

    रीवा सांसद श्री जनार्दन मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज त्योंथर को 162 करोड़ रुपए लागत के विकास कार्यों की सौगात दी है। इसमें 28 करोड़ की लागत का चिल्लावाला पुल का निर्माण भी शामिल है। यहां छोटे-बड़े नदी-नालों सबमें 39 से अधिक पुल बने हैं। नए बायोगैस प्लांट से किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी।

    विधायक त्योंथर श्री सिद्धार्थ तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के विकास के लिए दिन-रात एक कर रोजाना नई सौगातें दे रहे हैं। त्योंथर को कई नए पुल सहित तीन सांदीपनि विद्यालय भी दिए हैं। त्योंथर विधानसभा क्षेत्र में गांव हो या शहर, सभी जगह सड़कों का जाल बिछ रहा है। क्षेत्र की दो नगर पालिकाओं को विकास कार्यों के लिए 2-2 करोड़ की अतिरिक्त मदद मुख्यमंत्री ने दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक युगपुरूष की तरह त्योंथर को औद्योगिक विकास की सौगात दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा रीवा में हुई रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव के 11 महीने के अंदर ही विंध्य क्षेत्र का पहला प्लांट त्योंथर में लगाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि त्योंथर में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर क्षेत्र के विकास को नए पंख लग जाएंगे।

    कार्यक्रम में सतना सांसद श्री गणेश सिंह, विधायक गुढ़ श्री नागेंद्र सिंह, विधायक श्री नरेंद्र प्रजापति, विधायक श्री प्रदीप पटेल, विधायक श्री शरद कौल, विधायक पवई श्री प्रह्लाद सिंह लोधी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कौल, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

  • आरजीपीवी-एलएंडटी एजूटेक की साझेदारी से तैयार होंगे इंडस्ट्री-रेडी इंजीनियर्स

    नवाचारों के हब बनेंगे टियर-2 शहर, मजबूत होगा औद्योगिक ईकोसिस्टम
    एमपीएसईडीसी, आरजीपीवी और एलएंडटी एजूटेक के बीच हुआ एमओयू

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश के तकनीकी संस्थानों से तैयार होने वाले मानव संसाधन और उद्योगों के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल के बीच की खाई पाटने के लिये निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग,मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी), राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) और एलएंडटी एजूटेक के बीच एक एमओयू किया गया है। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद अब तकनीकी कौशल और औद्योगिक प्रशिक्षण में नवाचार की दृष्टि से एलएंडटी द्वारा विकसित विशेष पाठ्यक्रम आरजीपीवी के माध्यम से प्रदेश के इंजीनियंरिंग संस्थानों में लाँच किये जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में प्रदेश में औद्योगिक-ईकोसिस्टम सशक्त बनेगा। साथ ही भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे टियर-2 शहर नवाचार के नए केंद्र बनेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विगत वर्षों में प्रदेश के विश्वविद्यालयीन पाठ्यक्रमों को उद्योग की वास्तविक मांगों से जोड़कर इंड्स्ट्री-रेडी इंजीनियर तैयार करने की पहल की गई है। प्रदेश में प्रति वर्ष 50 हजार से अधिक इंजीनियरिंग और अन्य तकनीकी स्नातक नौकरी बाजार में आ रहे हैं। अकादमिक-औद्योगिक तालमेल को आवश्यक मानते हुए एलएंडटी एजूटेक द्वारा विशेष रूप से विकसित पायलट पाठ्यक्रम आरजीपीवी के माध्यम से लाँच किये गये हैं। इन पाठ्यक्रमों के अंतर्गत तकनीकी मानव संसाधनों को वास्तविक परियोजनाओं, वर्चुअल लैब और इंडस्ट्री-लीडरशिप एनेबल्ड सत्रों के माध्यम से सक्षम बनाया जा रहा है। आरजीपीवी के कुलगुरू प्रो. राजीव त्रिपाठी, एमपीएसईडीसी, निवेश संवर्धन प्रभारी अवंतिका वर्मा और एलएंडटी एजूटेक टीम लीड राजा पांचाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये है। एलएंडटी एजुटेक तकनीकी और शैक्षणिक सामग्री तथा ट्रेनर-सपोर्ट प्रदान करेगी, आरजीपीवी अकादमिक समन्वय एवं विद्यार्थी चयन में भूमिका निभाएगा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग वित्तीय व तकनीकी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेगा।

    एलएंडटी एजूटेक आरजीपीवी में दो पायलट कोर्स आरम्भ करेगी जो पांचवें सेमेस्टर से पढ़ाये जाएंगे। इनमें ‘डेटा हैंडलिंग के लिए पायथन’ और फ्रंट-एंड यूआई/यूएक्स शामिल हैं। एलएंडटी एजूटेक के पायलट पाठ्यक्रम के प्रारम्भिक बैच में 100 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जायेगा। पाठ्यक्रम में 75 घंटे का संरचित कार्यक्रम शामिल होगा। विद्यार्थियों को ‘ऑनलाइन कंटेंट + लाइव एक्सपर्ट सेशंस + प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग + वर्चुअल लैब’ से प्रशिक्षण दिया जायेगा। इस पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले पात्र विद्यार्थियों को ई-सर्टिफिकेट प्रदान किए जाएंगे। पाठ्यक्रम में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक अनुभव बढ़ाया जायेगा। प्रारंभिक बैच में आरजीपीवी में चयनित विद्यार्थियों को शामिल किया जायेगा। फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप, इंडस्ट्री-इंटर्नशिप मॅचमेकिंग, एडवांस्ड स्पेशलाइजेशन मॉड्यूल और राज्यस्तरीय रोलआउट टाइमलाइन। एमपीएसईडीसी द्वारा नियमित प्रगति रिपोर्ट और परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा ताकि नीतिगत स्तर पर उपयुक्त निर्णय लिए जा सकें। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह एक पायलट पाठ्यक्रम है, परिणाम सकारात्मक आने पर इसे प्रदेश के दूसरे टेक्निकल विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा।

    प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों के मूल्यांकन में परियोजना-आधारित आकलन, ऑनलाइन टेस्ट, प्रशिक्षक-आधारित फीडबैक और वर्चुअल लैब प्रोजेक्ट की प्रस्तुति शामिल की जायेगी। पाठ्यक्रम पूर्ण होने पर एलएंडटी एजूटेक तथा आरजीपीवी के सम्मिलित मानदंडों के अनुरूप ई-सर्टिफिकेट जारी किए जाएँगे।

     

  • भारत सेतु अभ्यास के दूसरे दिन साइबर सुरक्षा जागरूकता और सुदृढ़ता पर केंद्रित

    भोपाल
    भारत सेतु अभ्यास का दूसरा दिन राज्य विभिन्न विभागों के CISO अधिकारियों और वरिष्ठ शासकीय  अधिकारियों को व्यावहारिक साइबर सुरक्षा ज्ञान और कौशल प्रदान करने के लिए समर्पित रहा। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न सरकारी संगठनों को प्रभावित करने वाली साइबर सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की गई और प्रतिभागियों को विभागीय तथा संगठनात्मक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रभावी रणनीतियां दी गईं।

    श्री शशांक गुप्ता, वैज्ञानिक 'डी', CERT-In, ने "नीति से व्यवहार में प्रभावी साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम तैयार करना" विषय पर जानकारी दी। उन्होंने इनसाइडर थ्रेट्स और शासकीय विभागों की साइबर हमलों के प्रति संवेदनशीलता जैसे उच्च मूल्य वाले डेटा, मानव त्रुटियां, सोशल इंजीनियरिंग खतरे, और सीमित साइबर कौशल को रेखांकित किया। 

    श्री गुप्ता ने बताया कि वैश्विक स्तर पर 75% प्रशिक्षण साइबर सुरक्षा पर केंद्रित है, जो इसकी अंतरराष्ट्रीय महत्ता को दर्शाता है। उन्होंने साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण के लाभ कमजोरियों की पहचान, सुरक्षा स्थिति में सुधार, खतरे की त्वरित पहचान और समाधान को स्पष्ट किया और सभी CISOs को विभागीय एवं जिला स्तर पर नियमित साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रशिक्षण पर ज़ोर दिया।

    श्री मोहित कटारिया, वैज्ञानिक 'सी', CERT-In, ने शासकीय विभागों के लिए नियमित, समग्र साइबर सुरक्षा ऑडिट्स के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने CERT-In के साइबर सुरक्षा ऑडिट नीति दिशानिर्देशों के बारे में बताते हुए कहा कि साल में कम से कम एक बार बाहरी ऑडिट कराना अनिवार्य है। सभी ऑडिटेड अनुप्रयोगों का समग्र एसेट इन्वेंट्री, संस्करण नियंत्रण एवं परिवर्तन प्रबंधन सुनिश्चित करना, ताकि साइबर खतरे और हमलों की संभावना कम हो सके। उन्होंने बताया कि CERT-In ने सॉफ़्टवेयर बिल ऑफ मटेरियल्स (SBOM) के लिए एक वैश्विक साझा दृष्टि में भाग लिया है, जिससे साइबर सुरक्षा प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।

    संयुक्त सत्र में, श्री शशांक गुप्ता और श्री मोहित कटारिया ने साइबर सुरक्षा थ्रेट सिमुलेशन और इन्शिडेंट रिस्पांस पर एक व्यावहारिक कार्यशाला का संचालन किया, जिसमें प्रतिभागियों को "अवंती" नामक काल्पनिक राज्य पर विभिन्न साइबर हमलों की स्थिति सुलझाने का अनुभव कराया गया। इस अभ्यास ने जोखिम सिमुलेशन की सर्वोत्तम विधियों और चुस्त इन्शिडेंट रिस्पांस व्यवस्था के महत्व को उजागर किया।

    CISO अधिकारियों और अन्य प्रतिभागियों ने MP-CERT की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि, कार्यशाला के बाद अब तकनीकी ज्ञान को समझना और लागू करना कहीं अधिक आसान हो गया है। कार्यशाला ने तकनीकी अंतराल को दूर करने एवं साइबर सुरक्षा जागरूकता को नए स्तर तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

    श्री वैभव श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक, एमपी-सीईआरटी ने प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी और विभिन्न सरकारी विभागों में साइबर सुरक्षा को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता की सराहना की। श्री श्रीवास्तव ने यह भी जोर दिया कि साइबर सुरक्षा मुख्य रूप से सामान्य बुद्धि और रोजमर्रा की गतिविधियों के एन्क्रिप्शन पर आधारित है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कुछ भी मुफ्त नहीं मिलता, इसलिए मुफ्त सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल न करें।

    श्रीमती रश्मि गुप्ता एवं TCU टीम की सराहनीय योगदान रहा । भारत सेतु अभ्यास अनुकूल सहयोगी ज्ञान, क्षमता निर्माण एवं साइबर सुरक्षा में सर्वोत्तम अभ्यासों को प्रोत्साहित करने का सतत प्रयास करता है।

     

  • आवास योजना एवं आयुष्मान योजना के हितग्राहियों को किए स्वीकृति पत्र वितरित

    राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण

    सीहोर जिले के इछावर में सेवा पखवाड़ा एवं स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान में हुए शामिल

    भोपाल
    राजस्व मंत्री श्री करणसिंह वर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में देश एवं प्रदेश का निरंतर विकास हो रहा है और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है।जब हमारी माताएं और बहनें स्वस्थ रहेंगी तो निश्चित ही परिवार, समाज, प्रदेश और देश समृद्ध होगा। राष्ट्र के निर्माण में हमारी माताओं और बहनों का महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए हमारी सरकार द्वारा उन्हें स्वस्थ और सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा जन भागीदारी, स्वच्छता, सेवा और जन कल्याणकारी कार्यक्रमों को व्यापक स्वरूप देने एवं नागरिकों में स्वच्छता, सेवा, स्वास्थ्य और सामुदायिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “सेवा पखवाड़ा” एवं “स्वस्थ नारी सशक्त परिवार” अभियान संचालित किया जा रहा है।महिलाओं एवं किशोरियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरकार द्वारा प्रदेश में स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान संचालित किया जा रहा है। मनुष्य का जीवन सभी श्रेणियों में सर्वोच्च है और सेवा ही मानव का धर्म है। यह बात राजस्व मंत्री श्री वर्मा ने "सेवा पखवाड़ा" एवं "स्वस्थ नारी सशक्त परिवार" अभियान के तहत सीहोर जिले के इछावर सिविल अस्पताल में आयोजित रक्तदान शिविर एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में कही।

    राजस्व मंत्री श्री वर्मा ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधरोपण किया और झाडू लगाकर नागरिकों को स्वच्छता का संदेश दिया।उन्होंने कार्यक्रम में रक्तदान शिविर में भाग लेने वाले नागरिकों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए।स्वच्छता कर्मियों को सम्मानित किया और आवास योजना एवं आयुष्मान योजना के हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र वितरित किए।

    मंत्री श्री वर्मा ने सिविल अस्पताल इछावर में आयोजित स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने नागरिकों की समस्याएं सुनी और अधिकारियों को निराकरण के निर्देश दिए।स्वास्थ्य शिविर में 629 नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। इसके साथ ही रक्तदान शिविर में 49 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। इस अवसर पर अधिकारी,जनप्रतिनिधि, एवं नागरिक उपस्थित रहे।

     

  • प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के संकल्प को पूरा करने राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कर रही है काम

    रायपुर
    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को सुदर्शन चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में साक्षात्कार के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को समाप्त करना, लोगों का विश्वास जीतना और विकास की दिशा में आगे बढ़ना हमारी सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस उद्देश्य को धरातल पर उतारने के लिए नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर को उन्नत बनाने का कार्य कर रही है। अब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के अनेक गांव पुनः आबाद हो चुके हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। नक्सलियों की गतिविधियों से निर्दोष लोगों की मौत हो रही थी, आम लोगों की रक्षा करना सरकार का दायित्व है। हमारी सरकार ने नक्सलवाद को 31 मार्च 2026 तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। सरकार बनने के बाद ज्वाइंट टास्क फोर्स का गठन कर नक्सलवाद को समाप्त करने का प्रयास जारी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बस्तर के लोगों को मिल रहा है। वनांचल में तेंदूपत्ता खरीदी का कार्य सहकारी समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। नक्सलवादी विचारधारा से लोगों को बाहर निकालकर विकास की धारा में जोड़ने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम का आयोजन किया गया। बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार लोग शामिल हुए, जिससे यह साबित हुआ कि बस्तरवासी विकास की राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

    मुख्यमंत्री ने अपनी विदेश यात्रा के बारे में बताया कि यह यात्रा अत्यंत सफल रही। जापान में छत्तीसगढ़ पवेलियन के माध्यम से 24 से 31 अगस्त तक हमें राज्य की कला, संस्कृति और संभावनाओं को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया गया है और उन्हें नई उद्योग नीति से भी अवगत कराया गया है। नई उद्योग नीति में रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योग की अपार संभावनाएँ हैं। यहाँ प्रचुर प्राकृतिक संपदा उपलब्ध है। आयुर्वेद और हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में भी यहाँ विशाल संभावनाएँ हैं क्योंकि राज्य का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा वनों से आच्छादित है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ वनांचलों में भी स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विकास हुआ है। वर्तमान में प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज, आईआईटी, एनआईटी, आईआईएम, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी सहित कई उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना हो चुकी है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने लोगों से आग्रह किया कि गायों को लावारिस न छोड़ा जाए। लावारिस पशुओं के कारण सड़क दुर्घटनाएँ हो रही हैं। गौवंश की रक्षा करना हम सबका दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गोचर भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने के लिए सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है।

    विकसित भारत के संकल्प के साथ ही विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प होगा पूरा
    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है। यह संकल्प सबकी सहभागिता से ही पूरा होगा और इसे साकार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प के साथ ही अंजोर विजन-2047 (छत्तीसगढ़ विजन) डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य के सर्वांगीण विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि सभी को मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में सहयोग करना चाहिए।