• बाघों के शिकार पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नजर, MP-महाराष्ट्र को 4 हफ्ते में देना होगा जवाब

    भोपल 

    सुप्रीम कोर्ट ने  केंद्र सरकार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और अन्य से उस जनहित याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कथित संगठित बाघ शिकार और अवैध वन्यजीव व्यापार रैकेट की सीबीआइ जांच की मांग की गई है।

    भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ वकील गौरव कुमार बंसल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें सक्रिय संगठित शिकार गिरोहों द्वारा बाघों के लिए उत्पन्न गंभीर खतरे पर प्रकाश डाला गया था। बंसल ने कहा कि कम से कम 30 प्रतिशत बाघ निर्दिष्ट बाघ अभयारण्यों के बाहर हैं और उन्होंने बाघों के बड़े पैमाने पर शिकार की खबरों का हवाला दिया।

    इन बिंदुओं पर दायर हुई है याचिका

    महाराष्ट्र सरकार की एसआईटी जांच में शिकारी, तस्करों और हवाला नेटवर्क का संगठित गिरोह सामने आया। यह गिरोह बाघों की खाल, हड्डियां और ट्रॉफी को राज्य की सीमाओं से बाहर और विदेशों तक तस्करी करता है।

    याचिका में रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया है कि बाघों का शिकार अब संरक्षित क्षेत्रों से बाहर वन प्रभागों और कॉरिडोर में ज्यादा हो रहा है, जहां निगरानी और सुरक्षा बेहद कमजोर है। वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) ने इन क्षेत्रों को बाघों के फैलाव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।

    बाघों के अंगों की तस्करी में लगे एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के पर्दाफाश

    पीठ ने केंद्र एवं अन्य प्राधिकारियों की ओर से अदालत में पेश हुईं अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से याचिका पर निर्देश लेने को कहा। याचिका में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बाघों के व्यवस्थित शिकार और राज्यों एवं म्यांमार तक फैले बाघों के अंगों की तस्करी में लगे एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के पर्दाफाश का हवाला दिया गया है।

    याचिका में कहा गया है, ''कई आरोपितों की गिरफ्तारी, बाघों की खाल, हड्डियां, हथियार और वित्तीय रिकार्ड की जब्ती, साथ ही एसआइटी के गठन से यह स्पष्ट हो गया है कि यह समस्या किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि एक गहरे आपराधिक नेटवर्क के अस्तित्व को दर्शाती है जो कानून के शासन को कमजोर करता है।''
    बाघ अभयारण्यों से सटे गैर-संरक्षित प्रादेशिक वन शिकारियों के आसान शिकार

    याचिका में यह भी कहा गया है कि अधिसूचित बाघ अभयारण्यों से सटे गैर-संरक्षित प्रादेशिक वन क्षेत्र बार-बार शिकारियों का आसान निशाना बन गए हैं। इसके फलस्वरूप कार्रवाई करने की वजहें और भी मजबूत हो जाती हैं।

    सीबीआइ जांच की मांग करते हुए याचिका में कहा गया है, ''जब तक यह अदालत हस्तक्षेप नहीं करती और एक व्यापक, स्वतंत्र और समन्वित जांच का निर्देश नहीं देती, तब तक राष्ट्र की पारिस्थितिक सुरक्षा और राष्ट्रीय पशु के अस्तित्व को गंभीर खतरा रहेगा।''

    याचिका में यह भी कहा गया है, ''प्रतिवादियों (केंद्र और अन्य) को एसआइटी की सिफारिशों को तुरंत लागू करने और बाघ अभयारण्यों से सटे बाघ गलियारों और प्रादेशिक वन प्रभागों में प्रभावी सुरक्षा, निगरानी और गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया जाए, और उन्हें मुख्य क्षेत्रों के समान माना जाए।'' याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) और एनटीसीए को पक्ष बनाया गया है।

    बंसल ने अदालत में कहा

    याचिकाकर्ता के वकील बंसल ने कहा कि भारत में 30% से अधिक बाघ संरक्षित क्षेत्रों के बाहर पाए जाते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि तस्करी का यह संगठित नेटवर्क वन गुर्जर समुदाय जैसे आदिवासी समूहों से जुड़े गिरोहों को भी शामिल करता है। उन्होंने अदालत से मांग की कि इस मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़वारा में करेंगे 233 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स का भूमि पूजन और लोकार्पण

    भोपाल 

    मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरूवार 18 सितंबर को कटनी जिले के बड़वारा विकासखंड मुख्‍यालय में बड़वारा और विकासखंड रीठी में नवनिर्मित सांदीपनि स्‍कूल भवनों के लोकार्पण सहित 233.82 करोंड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात देंगे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव यहां 106.18 करोड़ रूपये के 19 विकास कार्यों का लोकार्पण और 127.64 करोड़ रूपये के 14 विकास कार्यों का भूमि-पूजन करेंगे। मुख्यमंत्री हितग्राहियों को हितलाभों का वितरण भी करेंगे।

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव बड़वारा में मुख्‍यमंत्री नि:शुल्‍क स्‍कूटी वितरण योजना, लाड़ली लक्ष्‍मी छात्रवृत्ति राशि, मुख्‍यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, ग्रामीण आजीविका मिशन और ई-कृषि यंत्रीकरण अनुदान योजनांतर्गत हितग्राहियों को लाभान्वित करेंगे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव सेवा पखवाड़ा अभियान की थीम पर आयोजित वृहद प्रदर्शनी का भी अवलोकन करेंगे।

    प्रदर्शनी में राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वोकल फॉर लोकल की भावना को सशक्‍त करने के उद्देश्य से स्‍व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्‍पादों और जिला व्यापार एवं उद्योग केन्‍द्र के द्वारा एक जिला एक उत्‍पाद के तहत कटनी सैंड स्‍टोन से निर्मित कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई जायेगी। इसके अलावा स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा यहां विशेष शिविर लगाकर स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण, आयुष्‍मान कार्ड निर्माण और स्‍वस्‍थ्‍य नारी, सशक्‍त परिवार की थीम पर स्‍वास्‍थ्‍य एवं महिला बाल विकास द्वारा गैर संचारी रोगों की स्‍क्रीनिंग और  अन्‍न से निर्मित उत्‍पादों व खाद्य पदार्थों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। सामाजिक न्‍याय विभाग द्वारा दिव्‍यांगजनों की ई-स्‍क्रीनिंग और कृत्रिम उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई जायेगी।

    नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा ‘स्‍वच्‍छता ही सेवा पखवाड़ा’ के विभिन्‍न घटकों को प्रदर्शित करने वाले क्रियाकलापों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव यहां ‘एक पेड़ मां के नाम’ एवं ‘एक बगिया मां के नाम’ कार्यक्रम के तहत पौधारोपण करेंगे और छात्रों की कक्षा में पहुंच कर चर्चा करेंगे।   

     

  • तेज बारिश से मध्यप्रदेश बेहाल: इंदौर में नाले में बहा बच्चा, उज्जैन में शिप्रा का पानी मंदिरों में घुसा, भोपाल में भी

    इंदौर
    इंदौर शहर में बुधवार रात हुई तेज बारिश में मायाखेड़ी क्षेत्र में ओमेक्स सिटी के करीब एक बच्चा तेज पानी के बहाव में नाले में बह गया। बच्चे का नाम राजवीर मालवीय बताया जा रहा है और उसकी उम्र करीब 8 साल है।

    जानकारी के मुताबिक देर रात तेज बारिश के दौरान राजवीर के पिता राजपाल उसे एक जगह पर खड़े करके अपनी गाड़ी पार्क करने गए, जब वो वापस लौटे तो बच्चा वहां पर नहीं था। रात में ही परिजनों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। अंधेरा होने की वजह से बच्चे को खोजा नहीं जा सका।

    गुरुवार सुबह लसूड़‍िया थाना पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने एक बार फिर सर्चिंग शुरू की तो राजवीर का शव मिला। बच्चे का शव कुछ दूरी पर एक पुल में फंसा हुआ मिला। आशंका जताई जा रही है कि बारिश में फिसलने की वजह से वो नीचे गिर गया और पानी के बहाव में बह गया।

    घटना के बाद राजवीर के माता-पिता सदमे में हैं, वो उनका एकलौता बेटा था। उधर इलाके के लोग नाले के आस-पास सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होने पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वहां दीवार या जाली लगी होती तो बच्चा अंदर नहीं बहता।

    भोपाल में सबसे ज्यादा ढाई इंच पानी गिर गया। शाजापुर में 2.1 इंच, इंदौर में 2 इंच, उमरिया में 1.9 इंच, उज्जैन-सिवनी में 1.8 इंच, रीवा में 1.6 इंच, टीकमगढ़ में 1.3 इंच बारिश दर्ज की गई। गुरुवार सुबह से बादल छाए हुए हैं। कुछ जिलों में हल्की बारिश भी हुई।

    मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून की विदाई के दौरान भी पूरे प्रदेश में तेज बारिश का एक और दौर शुरू हो सकता है। हालांकि, 4 दिन तक तेज बारिश का अलर्ट नहीं है। भोपाल, जबलपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में बूंदाबांदी हो सकती है। इस मानसूनी सीजन में औसत 42.7 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे से 7 इंच ज्यादा है।

    रायसेन, सागर, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दतिया, नर्मदापुरम, ग्वालियर, जबलपुर, बैतूल, सीधी, नरसिंहपुर, गुना, दमोह, पांढुर्णा, डिंडौरी, विदिशा और सीहोर में भी बुधवार को हल्की बारिश दर्ज की गई।

    सीजन में चौथी बार खुले भदभदा डैम के गेट भोपाल में शाम 7:30 बजे से रात 11:30 बजे तक सिर्फ 4 घंटे में लगभग ढाई इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। बड़ा तालाब एक बार फिर लबालब भर गया, जिससे रात में भदभदा डैम का एक गेट खोलकर पानी की निकासी करनी पड़ी। इस मानसून सीजन में चौथी बार डैम का गेट खोला गया है।

    4 दिन प्रदेश में तेज बारिश का अलर्ट नहीं मौसम विभाग ने अगले 4 दिन तक प्रदेश में तेज बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है, लेकिन लोकल सिस्टम की वजह से पानी गिर सकता है। पिछले एक सप्ताह से ऐसा ही हो रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार, आधे राजस्थान से मानसून लौट चुका है। वहीं, गुजरात, पंजाब और हरियाणा के कई जिलों से भी मानसून लौटा है। यदि वापसी की यही रफ्तार रही तो एमपी के भी कई जिलों में अगले हफ्ते ऐसी स्थिति बन सकती है।

    मध्यप्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 42.7 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 35.6 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.1 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है।

  • राज्य पुलिस सेवा से IPS में प्रमोशन की लिस्ट तैयार, 7 अफसरों को मिलेगा नया रुतबा

    भोपाल
    राज्य पुलिस सेवा के पांच अधिकारी इस वर्ष आईपीएस संवर्ग में पदोन्नत हो जाएंगे। अगले वर्ष एक जनवरी 2025 की स्थिति में सात को पदोन्नति मिलनी है। यह सभी 1998 बैच के होंगे। यानी, अभी 27 वर्ष की सेवा के बाद भी वह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) ही हैं।

    बड़े-बड़े बैच, हर पांच वर्ष में काडर रिव्यू नहीं होने सहित कई कारणों से मप्र के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति में अन्य राज्यों से काफी पीछे हैं। वर्ष 2025 में सात पदों के लिए डीपीसी की तैयारी शासन अक्टूबर-नवंबर से प्रारंभ कर सकता है। इनकी डीपीसी लगभग एक वर्ष पीछे चल रही है।
     
    बता दें कि कर्नाटक में 2012, तेलंगाना, गुजरात और आंध्र प्रदेश में 2010 बैच के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी पदोन्नत होकर आइपीएस बन चुके हैं, पर प्रदेश में अभी वर्ष 1998 का ही पूरा बैच पदोन्नत नहीं हो पाया है। उधर, प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के वर्ष 2006 के अधिकारी आईएएस में पदोन्नत हो चुके हैं।

    राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी लंबे समय से शासन से मांग कर रहे हैं कि छोटे जिलों में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी उन्हें दी जाए, पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है, जबकि यह व्यवस्था मध्य प्रदेश में पहले लागू रही है। शशिकांत शुक्ला, रमन सिंह सहित कई अधिकारी दो जिलों में एसपी रहने के बाद आइपीएस बने। अब कई वर्षों से इसे बंद कर दिया गया है।

  • बिजली व्यवस्था मजबूत: ग्वालियर के उपकेंद्रों पर कैपेसिटर बैंक से दूर होगी लो-वोल्टेज दिक्कत

    ग्वालियर
    बिजली उपभोक्ताओं को अब पहले से ज्यादा स्थिर बिजली मिलेगी। उन्हें अब लो-वोल्टेज की समस्या से राहत मिल जाएगी, क्योंकि मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश भर में 417 एक्स्ट्रा हाई टेंशन सब स्टेशनों में से 412 सब स्टेशनों पर विभिन्न क्षमताओं के कैपेसिटर बैंक लगा दिए हैं।

    इन कैपेसिटर बैंकों की मदद से वोल्टेज में स्थिरता लाई जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज और बार-बार उपकरण खराब होने की समस्या से निजात मिलेगी। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ट्रांसमिशन सिस्टम और अधिक मजबूत हो रहा है।
     
    यह होते हैं कैपेसिटर बैंक
    कैपेसिटर बैंक (संधारित्र बैंक) कई कैपेसिटर का एक समूह होता है, जो विद्युत ऊर्जा को संग्रहित और जारी करने के लिए एक साथ समानांतर या श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं। इन्हें विद्युत प्रणालियों की दक्षता में सुधार करने, पावर फैक्टर को सही करने और प्रतिक्रियाशील शक्ति को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है। ग्वालियर जिले में 11 हाई टेंशन सब स्टेशनों पर 222 एमवीएआर क्षमता के कैपेसिटर बैंक क्रियाशील किए गए हैं।

    एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों से विद्युत आपूर्ति के दौरान पावर ट्रांसफार्मर पर प्रायः इंडक्टिव लोड (सिंचाई मोटर एवं घरेलू उपकरण) होता है, जिससे वोल्टेज में कमी आती है और विद्युत गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस समस्या के समाधान के लिए कैपेसिटर बैंक लगाए गए हैं, जो अपने कैपेसिटिव लोड के माध्यम से उस इंडक्टिव प्रभाव को संतुलित कर देते हैं। इसके परिणामस्वरूप पावर फैक्टर में सुधार होता है और उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति होती है।

  • मध्य प्रदेश में फैला खतरनाक संक्रमण ‘मेलिओइडोसिस’, गलत पहचान से बिगड़ रहे हालात

    भोपाल
    प्रदेश में एक नए स्वास्थ्य संकट ने दस्तक दी है। यह जीवाणु (बैक्टीरिया) का संक्रमण है, जिसकी पहचान मेलिओइडोसिस बीमारी के रूप में हुई है। इसके लक्षण बिल्कुल टीबी जैसे होते हैं। अगर मरीज का गलत इलाज हो जाए तो जीवन पर खतरा हो जाता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल का दावा है कि इससे संक्रमित प्रत्येक 10 में से चार मरीजों की मौत हो जा रही है। प्रदेश के 20 जिलों में 130 मरीज इस बीमारी से संक्रमित पाए गए हैं।

    मध्य प्रदेश में दो लाख से अधिक लोग मिले जो सिकल सेल पीड़ित बच्चों को दे सकते थे जन्म
    पिछले दिनों राजधानी के पास रहने वाले एक 45 वर्षीय किसान को एम्स लाया गया था। वह कई महीनों से बार-बार आने वाले बुखार, खांसी और सीने में दर्द से परेशान थे। स्थानीय डाॅक्टरों ने इसे टीबी मानकर इलाज शुरू किया था। महीनों तक दवा खाने के बाद भी जब उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो थक-हारकर उन्हें एम्स भोपाल लाया गया। यहां जब माइक्रोबाॅयोलाजी विभाग ने गहराई से जांच की, तो पता चला कि उन्हें टीबी नहीं, बल्कि मेलिओइडोसिस है। सही बीमारी पकड़ में आने के बाद मरीज ठीक हो गया।

        एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले छह वर्षों से इस बीमारी पर वह नजर बनाए हुए हैं।
        प्रदेश में अब तक 20 जिलों में 130 से ज्यादा मरीजों की पहचान हो चुकी है।
        यह बीमारी अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे प्रदेश में फैल रही है।
        सही समय पर इसकी पहचान न हो पाने के कारण यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
        क्योंकि इसके लक्षण टीबी जैसे होने के कारण अक्सर डाॅक्टर भी धोखा खा जाते हैं।

    यह होता है मेलिओइडोसिस
        मेलिओइडोसिस एक संक्रामक बीमारी है जो 'बर्कहोल्डरिया स्यूडोमल्ली' नामक बैक्टीरिया से होती है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर मिट्टी और पानी में पाया जाता है।
        विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी अब प्रदेश में स्थानिक (एंडेमिक) हो चुकी है, यानी यहीं के वातावरण में स्थायी रूप से मौजूद है।

    किसान और मधुमेह रोगी होते हैं आसान शिकार
        बताया गया कि इसका सबसे अधिक खतरा ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-किसानी से जुड़े लोगों को होता है, क्योंकि उनका सीधा संपर्क मिट्टी और पानी से होता है।
        शहरी इलाकों में डायबिटीज(मधुमेह) के मरीजों और अधिक शराब का सेवन करने वालों को भी यह बीमारी आसानी से अपनी चपेट में ले सकती है।

    डाॅक्टरों को प्रशिक्षित कर रहा एम्स
        एम्स का माइक्रोबायोलाजी विभाग प्रदेश भर के डाॅक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को इस बीमारी की सही और समय पर पहचान के लिए प्रशिक्षित कर रहा है।
        पिछले ढाई सालों में 25 सरकारी और निजी अस्पतालों के 50 से ज्यादा विशेषज्ञों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
        इस प्रशिक्षण का ही नतीजा है कि अब प्रदेश के अन्य अस्पतालों से भी 14 नए मामले सामने आए हैं, जिनका सही इलाज संभव हो पाया है। 

  • इंदौर-उज्जैन के बाद अब जबलपुर की बारी, अगले साल सड़कों पर उतरेंगी सरकारी बसें

    भोपाल
    प्रदेश में लोक परिवहन सेवा अगले वर्ष मार्च-अप्रैल तक सबसे पहले इंदौर, इसके बाद उज्जैन और फिर जबलपुर से प्रारंभ होगी। छह माह के भीतर रीवा, सागर ग्वालियर, भोपाल आदि शहरों से सेवा प्रारंभ करने की तैयारी है। शुरू में 50 से 100 किमी दूर तक के लिए बसें चलाई जाएंगी। इसके बाद सुविधा का परीक्षण कर इसमें विस्तार किया जाएगा। कुछ जगह रूट सर्वे का काम पूरा हो गया है और कई जगह चल रहा है।

    नगरीय निकायों के नियंत्रण में पहले से चल रही बसों को भी संभागीय स्तर पर क्षेत्रीय सहायक कंपनियां बनाकर उसके नियंत्रण में लाया जाएगा। भोपाल शहर में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) बसों का संचालन कर रही है। इसी तरह से इंदौर व अन्य शहरों में बसें निजी ऑपरेटरों की हैं, पर नियंत्रण स्थानीय प्रशासन का होता है। लोक परिवहन सेवा के प्रबंधन के लिए राज्य स्तर पर एक होल्डिंग कंपनी बनाई जा रही है। इसके नीचे सात संभागीय मुख्यालयों के स्तर पर सहायक कंपनियां बनाई जाएंगी।

    उज्जैन में रूट सर्व का काम पूरा
    बस संचालन के लिए उज्जैन में रूट सर्वे का काम लगभग पूरा हो गया है। इंदौर और जबलपुर में श्रेणीवार संचालित बसों की संख्या का अनुमान और रूट सर्वे भी लगभग अंतिम चरण में है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी निजी बस ऑपरेटरों से अनुबंध कर बसें चलाई जाएंगी। आगे चलकर इलेक्ट्रिक बसें चलाने की प्राथमिकता रहेगी। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भी इसके निर्देश दिए हैं।

    सीएम ने इसी महीने की मीटिंग
    बता दें कि मुख्यमंत्री ने इसी माह लोक परिवहन सेवा की तैयारियों को लेकर बैठक की थी। उन्होंने मार्च के पहले बसें चलाने के लिए कहा है, पर समय सीमा एक-दो माह और आगे जा सकती है। इसमें निगरानी, प्रबंधन और यात्रियों की सुविधा के लिए आईटी प्लेटफॉर्म का अधिकाधिक उपयोग किया जाएगा। बड़े शहरों के बाद सरकार की प्राथमिकता उन स्थानों के बीच बसें चलाने की हैं, जहां यात्रियों की संख्या ज्यादा है।

  • 18 साल से कम उम्र के बच्चों की दिव्यांगता की पहचान अब स्क्रीनिंग शिविरों में

    15 सितंबर से 14 नवंबर 2025 तक चलाया जा रहा है अभियान

    भोपाल 

    प्रदेश के बच्चों में दिव्यांगता की पहचान एवं त्वरित दिव्यांगता प्रमाण-पत्र उपलब्ध करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जिला स्तरीय स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किये जा रहे हैं। यह शिविर 15 सितंबर से 14 नवंबर 2025 तक आयोजित किए जाएंगे। चिन्हित बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सुविधाएं और परिचय-पत्र मुहैया कराए जाएंगे।

    प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि मध्यप्रदेश में हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित जुनाईविल जस्टिस कमेटी की अनुशंसा पर 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों में दिव्यांगता की पहचान के लिए शिविर आयोजित किये जा रहे है। शिविरों में जिला मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सूक्ष्म परीक्षण कर प्रमाण-पत्र जारी किए जाएंगे। नव चिन्हित दिव्यांग बच्चों को 30 नवंबर तक यूडीआईडी (UDID) नंबर जारी करने तथा शासन की पेंशन व अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने का लक्ष्य रखा गया है

    श्रीमती वायंगणकर ने बताया कि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में सभी संबंधित विभाग सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा विभाग, जनजाति कल्याण, लोक स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा, आयुष, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग शिविरों के आयोजन में भूमिका निभाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में 7 से 8 पंचायत का तथा शहरी क्षेत्रों में 5 से 6 वार्डों का एक क्लस्टर बनाकर स्क्रीनिंग शिविर आयोजित होंगे। ग्रामीण क्षेत्र के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा शहरी क्षेत्र में आयुक्त नगर निगम को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

     

  • अब बाहर से दिखेगा होटल का फूड टाइप, शाकाहारी या मांसाहारी – एमपी सरकार की नई पहल

    भोपाल
     शाकाहारी व मांसाहारी भोजन परोसने वाले होटलों और उनके मालिकों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने मध्य प्रदेश सरकार ऐसी व्यवस्था करवाने की तैयारी कर रही है ताकि बाहर से ही पता चल जाए कि होटल में भोजन शाकाहारी है या मांसाहारी।

    भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के एक्ट में ऐसा प्रविधान करवाने का प्रयास है कि होटल-रेस्टोरेंट के बाहर लगने वाले बोर्ड में पूर्णतः शाकाहारी के लिए हरा गोल निशान और पूर्णतः मांसाहारी के लिए लाल गोल निशान लगाया जाए।

    क्या है प्रस्ताव?

    खाने के पैकेट पर भी इस तरह के निशान लगाए जाते हैं, जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से समझ लेता है। होटल-रेस्टोरेंट में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का भोजन मिलता है तो आधा हरा और आधा लाल निशान रखने का भी प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त होटल चलाने का लाइसेंस लेने वाले का नाम भी बोर्ड पर लिखना अनिवार्य करवाने का सुझाव दिया गया है।

    मालिक का नाम भी अनिवार्य

    अब एफएसएसएआइ इसका परीक्षण कर ड्राफ्ट जारी करेगा। इसके बाद एफएसएसएआइ के एक्ट में इसे लेकर संशोधन की उम्मीद है। संशोधन होने पर यह व्यवस्था मध्य प्रदेश ही नहीं, देशभर में लागू करना अनिवार्य हो जाएगी। इसके अतिरिक्त कई बार होटल के बोर्ड से उसके मालिक का पता नहीं चलता।

    इस तरह का मामला तब चर्चा में आया था जब कावड़ यात्रा के दौरान इसी वर्ष उत्तर प्रदेश में मेरठ के आसपास कुछ होटलों के बाहर लगे बोर्ड में होटलों के नाम हिंदू रीति-रिवाज वाले थे पर उनके मालिक अन्य समुदाय के थे। इसके बाद उप्र सरकार ने दुकान, रेस्टोरेंट पर मालिक का नाम लिखने का आदेश दिया था।

    सरकार का प्लान

    प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि सरकार यह प्रयास कर रही है कि खाने के पैकेट की तरह होटलों के बोर्ड में भी हरा और लाल निशान रहे। यह कोशिश भी है कि विभिन्न कंपनियों द्वारा घरों में खाने-पीने की चीजें पहुंचाने वाले भी उसी तरह का भोजन करने वाले हों यानी शाकाहारी खाद्य सामग्री पहुंचाने वाले भी शाकाहारी हों।

     

  • विकास प्राधिकरणों की तर्ज पर अब ग्राम पंचायतें भी बसाएंगी कॉलोनियां

    विदिशा
     मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतें भी शहरों में गृह निर्माण मंडल और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों की तरह आधुनिक आवासीय कालोनियां विकसित करेंगी। शुरुआत विदिशा जिले से हो रही है। स्थानीय प्रशासन ने जिले की 12 ग्राम पंचायतों के 14 गांवों को इसके लिए चिन्हित किया है। इन गांवों में कॉलोनी बनाने के लिए पंचायतों को जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    गांवों में आधुनिक आवासीय कालोनियों का विचार जिला प्रशासन का है। तय हुआ कि एकीकृत टाउनशिप नीति के तहत शहरी क्षेत्रों से लगे गांवों में भी इस तरह की सुविधा विकसित की जाए। उसके बाद जिला पंचायत ने जनपद पंचायतों से ऐसे गांवों के नाम मांगे थे, जहां शासकीय भूमि उपलब्ध हो, गांव शहरी सीमा से सटे हों और क्षेत्रफल व आबादी के लिहाज से बड़े हों। इस मापदंड पर 13 गांवों की सूची बनाई गई है, जहां कालोनियां विकसित की जानी है।

    विदिशा से प्रायोगिक परियोजना शुरू हो रही है

    इन गांवों को दो एकड़ से पांच एकड़ तक की जमीन कॉलोनी विकसित करने के लिए आवंटित की गई है। जिन गांवों में ये कालोनियां बननी हैं, उनकी नजदीकी कस्बे से दूरी 500 मीटर से 10 किमी तक है। यहां कॉलोनियों के विकास की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायतों को दी गई है। विदिशा से यह प्रायोगिक परियोजना शुरू हो रही है, जिसमें ग्राम पंचायत प्लाट बेचेंगी। उसपर भवन निर्माण खरीददार ही करेंगे।

    इस योजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां भी हैं। पिपलधार ग्राम पंचायत की सरपंच केसर बाई रामराज सिंह यादव का कहना है कि उनके गांव पट्टन में 0.65 हेक्टेयर जमीन कॉलोनी के लिए आवंटित हुई है। गांव बड़ा है, इस योजना से लोगों को काफी फायदा होगा, लेकिन जो जमीन आवंटित है उसके बड़े हिस्से पर अतिक्रमण है। उसे हटाना हमारे लिए बड़ी चुनौती होगा।

    2000 वर्गफीट तक के भूखंड होंगे

    योजना के मुताबिक इन ग्रामीण कालोनियों में भूखंड का आकार 800 वर्गफीट से लेकर दो हजार वर्गफीट तक होगा। उनकी कीमत ग्राम पंचायत तय करेगी।

    योजनाबद्ध विकास होगा

    इनका विकास योजनाबद्ध होगा। सबसे पहले सड़कों का निर्माण होगा। इसके साथ ही बिजली, पानी और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसकी निगरानी जिला एवं जनपद पंचायतें करेंगी। शुरुआती विकास पंचायत के बजट से होगा और बाद में प्लाट बिकने पर विकास कार्यों की गति बढ़ाई जाएगी।

    इन 14 गांवों में बनेगी पहली कॉलोनी

    गंज पंचायत का पठारी बासौदा, ग्यारसपुर विकासखंड का खुजराहर, सिरोंज का बगरोदा, चौड़ाखेड़ी पंचायत का कमरिया, नटेरन का रुसल्ली, पट्टन और डंगरवाड़ा, कुरवाई का मेहलुआ चौराहा और पठारी, लटेरी का मुरवास तथा विदिशा विकासखंड का ढोलखेड़ी, रंगई, करैयाहवेली और आमखेड़ा हवेली।

    कॉलोनियों में सभी सुविधाएं दी जाएंगी

        पंचायतों में कॉलोनियां बनाने के लिए शहर से सटी और बड़ी पंचायतों का चयन किया गया है। यहां शहरों की तरह बिजली, सड़क और पानी जैसी सभी सुविधाएं दी जाएंगी। भूमि आवंटित कर दी गई है और अब लेआउट डिजाइन पर काम शुरू कर दिया गया है। – ओपी सनोडिया, सीईओ, जिला पंचायत, विदिशा

     

  • इंदौर: नायता मुंडला बस स्टैंड से जल्द शुरू होगी सेवा, नौलखा स्टैंड होगा स्थानांतरित

     इंदौर
     इंदौर में नायता मुंडला बस स्टैंड से बसों का संचालन अब संभव हो सकेगा। मंगलवार को हाईकोर्ट ने बस संचालकों की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे नायता मुंडला से बसों के संचालन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। साथ ही तीन इमली बस स्टैंड को स्थानांतरित करने की याचिका भी कोर्ट ने खारिज कर दी है। अब आने वाले समय में दोनों बस स्टैंड को स्थानांतरित किया जा सकेगा।

    पिछले वर्ष फरवरी में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार इंदौर संभाग ने नायता मुंडला स्थित आईएसबीटी को बस स्टैंड के रूप में अधिसूचित किया था, जबकि नौलखा बस स्टैंड को गैर अधिसूचित घोषित किया गया था। इस निर्णय के अनुसार, डबल चौकी, खातेगांव, चापड़ा, कन्नौद, नेमावर, हरदा, होशंगाबाद, बैतूल आदि शहरों के लिए बसों का संचालन नायता मुंडला से होना था, लेकिन बस संचालकों ने इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके कारण मामला लंबित रहा।

    तीन इमली से चलने वाली बसों को किया जाएगा स्थानांतरित

    अब हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद बसों को नायता मुंडला स्थानांतरित करने की प्रक्रिया फिर से शुरू होगी। तीन इमली से संचालित होने वाली बसों को भी स्थानांतरित किया जाना है, लेकिन यह अभी तय नहीं है कि इन्हें नायता मुंडला भेजा जाएगा या एमआर-10 स्थित आईएसबीटी।

    नौलखा बस स्टैंड से प्रतिदिन 80 से अधिक बसों का संचालन होता है, जिनमें से अधिकांश बसें नेमावर रोड से होकर विभिन्न शहरों के लिए चलती हैं। सुबह से लेकर देर रात तक चलने वाली इन बसों के कारण तीन ईमली से नौलखा तक कई बार जाम की स्थिति उत्पन्न होती है, इसलिए प्रशासन ने इन्हें स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था।

    विरोध के कारण रुकी थी प्रक्रिया

    जिला प्रशासन ने पिछले वर्ष नौलखा और तीन इमली बस स्टैंड को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। नायता मुंडला बस स्टैंड पर नौलखा की बसों को भेजने की तैयारी पूरी हो गई थी, लेकिन बस संचालकों के विरोध के कारण स्थानांतरण की प्रक्रिया रुक गई थी। अब कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी गई है।

    यात्रियों का खर्च बढ़ेगा

    नायता मुंडला में बसों के स्थानांतरण से पहले जिला प्रशासन को लोक परिवहन की व्यवस्था करनी होगी। वर्तमान में यहां से बसों का संचालन नहीं होता है। देर रात आने वाले यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को भी सुनिश्चित करना होगा। शहर के बाहर होने के कारण यात्रियों को ऑटो से आने-जाने में अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है।

    नोटिफिकेशन के अनुसार होगा बसों का संचालन

        नोटिफिकेशन के अनुसार नौलखा से बसों का संचालन कराया जाएगा। यहां से चलने वाली बसों के लिए नायता मुंडला बस स्टैंड अधिसूचित किया गया है। – प्रदीप शर्मा, आरटीओ

     

  • अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट ने लगातार बनाया 350 दिन उत्पादन करने का ऐतिहासिक रिकार्ड

    भोपाल
    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के अभियंताओं व कार्मिकों के समर्पण, कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता से 210 मेगावाट स्थापित क्षमता की यूनिट लगातार 350 दिन तक संचालित होने में सफल हुई। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के इतिहास में यह प्रथम विद्युत उत्पादन यूनिट है जिसने लगातार 350 दिन तक लगातार विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड स्थापित किया। इस बात की पूरी संभावना है कि अगले 15 दिन में यह यूनिट लगातार 365 दिन का सतत् व निर्बाध विद्युत उत्पादन करने का कीर्तिमान बनाएगी।

    अमरकंटक ताप विद्युत 210 मेगावाट क्षमता की यह यूनिट 1 अक्टूबर 2024 से लगातार विद्युत उत्पादन कर रही है। इससे पूर्व इस यूनिट ने इस यूनिट ने 27 अगस्त 2023 से 22 जून 2024 तक 300 दिन सतत् विद्युत उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया था।इस यूनिट के सतत् बिजली उत्पादन करने से प्रदेश की बिजली की आपूर्ति को विश्वसनीय बनाने के पावर जनरेटिंग कंपनी के उद्देश्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    विभिन्न मापदंडों में भी मिली उपलब्धि-210 मेगावाट की यूनिट ने जिस समय 350 दिन सतत् विद्युत उत्पादन करने का कीर्तिमान अर्जित किया तब इसने विभिन्न मापदंडों में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। यूनिट ने 98.71 फीसदी प्लांट उपलब्धता फेक्टर (पीएएफ), 95.97 फीसदी प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ) व 9.18 प्रतिशत ऑक्जलरी कंजम्पशन की उपलब्धि हासिल की।

    ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री नीरज मंडलोई व मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक श्री मनजीत सिंह ने अमरकंटक ताप विद्युत गृह के यूनिट नंबर 5 के अभियंताओं व कार्मिकों को बधाई देते हुए उनकी सराहना करते हुए कहा कि समर्पण, कड़ी मेहनत व प्रतिबद्धता से लक्ष्य अर्जित करने का यह सर्वश्रेष्ठ व अनुकरणीय उदाहरण है।

     

  • मुख्यमंत्री 18 सितम्बर को करेंगे रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर नई सेवा का शुभारंभ

    रायपुर एवं राजिम के मध्य आने-जाने के लिए मिलेगी यात्री सुविधा

    रायपुर
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 18 सितम्बर को रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर नई सेवा का शुभारंभ राजिम रेलवे स्टेशन से प्रातः 10:30 बजे करेंगे। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल एवं श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायक श्री इन्द्रकुमार साहू और श्री रोहित साहू की गरिमामय उपस्थिति रहेगी।

    रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर नई सेवा से यात्रियों को सुगम, सुलभ और किफायती यात्रा का विकल्प उपलब्ध होगा। ग्रामीण अंचलों से राजधानी रायपुर का आवागमन अधिक सुविधाजनक बनेगा। राजधानी आने वाले विद्यार्थी, नौकरीपेशा वर्ग और व्यापारी वर्ग के लिए यह ट्रेन विशेष रूप से उपयोगी होगी। इसके साथ ही इस नई सेवा से छत्तीसगढ़ के प्रयाग—राजिम तक सीधी रेल पहुँच सुनिश्चित होगी, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

    दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर और अभनपुर के मध्य संचालित रायपुर-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन अब राजिम तक विस्तार किया जा रहा है। 19 सितम्बर 2025 से नियमित समय-सारणी के अनुसार गाड़ी संख्या 68766/68767 रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर प्रतिदिन दोनों छोर से—राजिम और रायपुर से—संचालित होगी। इस ट्रेन में 06 सामान्य श्रेणी के डिब्बे तथा 02 पावरकार सहित कुल 08 कोच होंगे।

  • युवाओं से मंत्री सारंग की अपील – सेवा को सर्वोच्च धर्म मानकर समाज निर्माण करें

    भोपाल 
    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत बुधवार को तात्या टोपे खेल स्टेडियम, भोपाल में खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर एवं खिलाड़ियों द्वारा सेवा कार्य कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंत्री श्री सारंग ने स्कूली छात्राओं व खिलाड़ियों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा धार जिले के भैंसोला में पीएम मित्र पार्क का शिलान्यास एवं स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी देखा।

    रक्तदान: जीवनदान का पवित्र कार्य
    रक्तदान शिविर में खिलाड़ियों और युवाओं में काफी उत्साह था। सुबह से ही बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने रक्तदान कर मानवता का संदेश दिया। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि रक्तदान निस्वार्थ सेवा का सर्वोच्च उदाहरण है। यह केवल एक मानवीय कर्तव्य नहीं बल्कि किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने का पवित्र कार्य है। उन्होंने कहा कि आज के दिन खिलाड़ियों ने जिस उत्साह के साथ रक्तदान किया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि नियमित रक्तदान से शरीर में नई रक्त कोशिकाएँ बनने की प्रक्रिया तेज़ होती है। समय-समय पर रक्तदान से शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम होता है। रक्तदान करने से आत्मिक शांति और संतोष की अनुभूति होती है। कहा भी गया है "रक्तदान महादान है।"

    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि खेल और समाजसेवा का यह अनूठा संगम युवाओं को नई दिशा देगा। हमारा उद्देश्य है कि युवा उत्कृष्ट खिलाड़ी के साथ ही समाज के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। जब खेल भावना और सेवा भावना मिलती है, तो राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया और भी सशक्त होती है। कार्यक्रम में छात्राओं और महिलाओं के लिये महिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर की भी शुरुआत की गई, जिसमें प्रशिक्षकों ने आत्मरक्षा की तकनीकें सिखाईं।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जीवन से लें प्रेरणा
    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जीवन सेवाभाव और राष्ट्रहित को समर्पित है। गरीब परिवार में जन्म लेकर कठिन संघर्षों के बाद देश के प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर सभी के लिए अनुकरणीय है। उनके नेतृत्व में भारत ने हर क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं और आज विकसित भारत 2047 के संकल्प की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ‘सेवा पर्मो धर्मः’ की भावना के साथ युवाओं को राष्ट्र सेवा और जनकल्याण के लिए कार्य करना चाहिए। सेवा पखवाड़ा उसी प्रेरणा का प्रतीक है, जो युवाओं को राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय योगदान देने का संदेश देता है।

    महिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास
    कार्यक्रम के अंतर्गत महिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर में छात्राओं और महिलाओं ने मार्शल आर्ट अकादमी के प्रशिक्षकों से आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकें सीखीं। यह प्रशिक्षण महिलाओं में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना भी जगाता है।मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि बहन-बेटियां हर परिस्थिति में सुरक्षित और सशक्त रहें। इस प्रकार के शिविर उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से मजबूत बनाते हैं।

    सेवा पखवाड़ा में विविध आयोजन
    खेल और युवा कल्याण विभाग ने सेवा पखवाड़ा के दौरान कई कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित किया है। इनमें रक्तदान शिविर, महिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण, वृद्धाश्रम और अनाथालय में खिलाड़ियों द्वारा सहयोग और भोजन वितरण, शासकीय अस्पतालों में सेवा कार्य, अनाथाश्रम के बच्चों का स्टेडियम भ्रमण, खेलकूद प्रतियोगिताएं, स्वच्छता अभियान और नमो मैराथन जैसे आयोजन शामिल होंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से खेल, युवा और समाजहित को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने नागरिकों को स्वच्छता की दिलाई शपथ

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर के एम.वाय. हॉस्पिटल परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ स्वच्छता के लिए श्रमदान किया। उन्होंने इस दौरान नगर निगम इंदौर के ई-वेस्ट कलेक्शन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन को प्रदेश में "स्वच्छता ही सेवा" अभियान के रूप में मनाया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए कि एम.वाय.हॉस्पिटल के अंदर और बाहर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि एम. वाय. अस्पताल में विकास कार्यों के लिए प्रदेश सरकार हर तरह की मदद देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थिति नागरिकों को स्वच्छता की शपथ दिलाई और स्वच्छता के प्रति सजग रहकर सप्ताह में 2 घंटे और वर्ष में 100 घंटे स्वच्छता के लिए श्रमदान करने की सभी से अपील की। उन्होंने नागरिकों का आहवान किया कि न तो गंदगी करें और न होने दें। "स्वच्छता ही सेवा अभियान" के लाँचिंग लोगो का विमोचन भी किया।

    इंदौर महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि ई-वेस्ट आज के समय में सबसे गंभीर प्रदूषण कारक अपशिष्ट है, जिसका निपटान यदि वैज्ञानिक पद्धति से न किया जाए, तो यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। नगर निगम इन्दौर द्वारा शहर को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के उद्देश्य से 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक "स्वच्छता ही सेवा अभियान" के तहत ई-वेस्ट संग्रहण अभियान प्रारंभ किया गया है। इस विशेष अभियान के प्रथम चरण में निगम मुख्यालय, नेहरु पार्क स्थित इंदौर स्मार्ट सिटी ऑफिस में ई-वेस्ट ड्रॉप बॉक्स स्थापित किए गए हैं। इन ड्रॉप बॉक्स में निगम के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी अपने घर अथवा कार्यालय से निकलने वाले अनुपयोगी एवं खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे – मोबाइल, चार्जर, पंखे, कंप्यूटर पार्ट्स, बैटरी, टीवी, रिमोट इत्यादि जमा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम न होकर लगातार जारी रहने वाला विशेष अभियान है। अभियान के आगामी चरणों में नागरिकों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि शहर में चिन्हित स्थानों पर ई-वेस्ट ड्रॉप बॉक्स रखे जाएंगे, जहाँ नागरिक अपने अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा कर सकेंगे। साथ ही नगर निगम द्वारा घर- घर से भी वेस्ट कलेक्शन किया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि अभियान में अपने घर, दुकान एवं कार्यालयों से निकलने वाले पुराने एवं खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को निर्धारित स्थानों पर ही जमा करें।

    जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल, सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री मधु वर्मा, विधायक श्री गोलू शुक्ला सहित जनप्रतिनिधि और नागरिक मौजूद थे।

     

  • प्रधानमंत्री मोदी को दी गई भावभीनी विदाई

    भोपाल
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी धार के भैंसोला के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद बुधवार की दोपहर इंदौर से नई दिल्ली के लिए रवाना हुए। इंदौर एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री श्री मोदी को भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर मिनिस्टर इन वेटिंग जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

    एयरपोर्ट पर पूर्व लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, डीजीपी श्री कैलाश मकवाना, विधायक श्री मनोज पटेल, सुश्री उषा ठाकुर तथा श्री मधु वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

     

  • प्रदेश के 9 हजार 307 सरकारी स्कूलों में हुई पीटीएम

    22 लाख से अधिक विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति पर हुई चर्चा

    भोपाल 
    प्रदेश में कक्षा 9 से 12 तक के 22 लाख से अधिक विद्यार्थियों की त्रैमासिक परीक्षा के बाद शैक्षणिक प्रगति के मूल्यांकन के लिये मंगलवार को अभिभावकों और शिक्षकों की मीटिंग (पीटीएम) हुई। त्रैमासिक परीक्षा में 22 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए थे।

    पीटीएम के आयोजन का मुख्य उद्देश्य पालक और विद्यालय के बीच सहयोगात्मक साझेदारी का निर्माण कर विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिये एक सहायक वातावरण निर्मित करना है। पीटीएम के जरिए पालक को अपने बच्चे की शैक्षणिक प्रगति व्यवहार और सामाजिक, भावनात्मक विकास को समझने में सहायता मिली है। पीटीएम के माध्यम से शिक्षकों को भी विद्यार्थियों के पारिवारिक परिवेश के बारे में जानकारी मिली है। यह परस्पर संवाद विद्यार्थियों के विभिन्न आयामों में सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता करता है। इस प्रक्रिया के बाद स्कूल शिक्षा विभाग को विद्यालय में शैक्षिक प्रगति के लिये प्रभावी रणनीति बनाने में सहायता मिलेगी।

    लोक शिक्षण संचालनालय ने पीटीएम व्यवस्था के मूल्यांकन के लिये विभाग के सभी संयुक्त संचालकों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को दल गठित कर न्यूनतम 10-10 विद्यालयो का भ्रमण कर प्रतिवेदन भेजने के निर्देश भी दिए है।

     

  • मुख्य सचिव अमिताभ जैन का नया सफर: बिजली विनियामक आयोग के बनेंगे चेयरमैन

    रायपुर

    प्रदेश के मुख्य सचिव अमिताभ जैन की विदाई की तैयारी शुरू हो गई है. सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें बिजली विनियामक आयोग का चेयरमैन बनाए जाने की खबरें आ रही हैं. यह पद दो दिन बाद खाली हो रहा है. इसके पहले अमिताभ जैन को मुख्य सूचना आयुक्त बनाए जाने की बात कही जा रही थी.

    तीन महीने का एक्सटेंशन समाप्त होने के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगे. उनकी विदाई से पहले ही उनके लिए बिजली विनियामक आयोग का चेयरमैन का सम्मानजनक खाली हो रहा है. ऐसे में उनके खाली रहने की आशंका नहीं है.

    इसके पहले उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त के लिए इंटरव्यू दिया था. ऐसे में माना जा रहा था कि वे मुख्य सूचना आयुक्त बनेंगे. लेकिन जानकार बताते हैं कि इस नियुक्ति में हाईकोर्ट का पेंच फंसा हुआ है. इस वजह से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस पर कोई पहल भी नहीं की जा रही.

    वैसे भी बिजली विनियामक आयोग के चेयरमैन का पद मुख्य सूचना आयुक्त के पद की तुलना में अधिक बेहतर और सम्मानजनक है. बिजली की रेगुलेटरी बॉडी होने की वजह से इस पद का ग्लेमर भी रहता है. 28 में से करीब डेढ़ दर्जन राज्यों में रिटायर नौकरशाह बिजली विनियामक आयोग के चेयरमैन हैं.

    त्रिपुरा जा रहे हैं हेमंत वर्मा
    2021 में बिजली विनियामक आयोग के चेयरमैन बनाए गए हेमंत वर्मा एक साल पहले पद छोड़कर त्रिपुरा जा रहे हैं. जुलाई 2026 में उनका पांच साल होता. मगर हेमंत का त्रिपुरा बिजली विनियामक आयोग में सलेक्शन हो गया है. वे 19 सितंबर को यहां से रिलीव हो जाएंगे. इसके बाद यह पद खाली हो जाएगा.

    सरकार बदलने का असर नहीं
    बिजली विनियामक आयोग के अध्यक्ष पद एक संवैधानिक पद है, जिसे सरकार बदलने के बाद भी हटाया नहीं जा सकता. इसके लिए हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कमेटी चयन करती हैं. नियुक्ति के बाद चेयरमैन का कार्यकाल पांच साल या 65 बरस होता है.

  • प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रसेवा से देश का गौरव बढ़ा: राज्यमंत्री श्रीमती गौर

    भोपाल
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रसेवा में समर्पित कर विश्वपटल पर मां भारती का गौरव बढ़ाया है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर शुरू हुए 'सेवा पखवाड़ा' अंतर्गत गोविंदपुरा विधानसभा के ई सेक्टर बरखेड़ा स्थित श्री गणेश मंदिर परिसर में क्षेत्रवासियों के साथ वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ यह बात कही। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने नोबेल अस्पताल में आयोजित रक्तदान शिविर में सम्मिलित होकर रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन भी किया।

    प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा धार में पीएम मित्र पार्क के भूमिपूजन एवं स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों के साथ देखा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में पीएम मित्र पार्क की सौगात से किसानों के जीवन में बड़े परिवर्तन आयेंगे। इससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा और टेक्सटाइल हब के रूप में मध्यप्रदेश अपनी पहचान को ज़्यादा सुदृढ़ करेगा। 

  • रेल लाइन परियोजना प्रभावित क्षेत्र: अब जमीन की खरीदी-बिक्री होगी मुक्त

    रायपुर

    बलौदाबाजार खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा परियोजना 5वीं एवं 6वीं लाइन (278 कि.मी.) के संबंध भू-अर्जन के लिए राजस्व अनुभाग बलौदाबाजार और पलारी के प्रभावित 36 गांवों के 150 मीटर परिधि के बाहर वाले खसरा नंबर की जमीन के खरीदी-बिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया गया है। सूची अनुसार खसरा नंबरों के चारों ओर 150 मीटर की परिधि के समस्त भू-भाग पर आगामी आदेश तक क्रय-विक्रय, नामांतरण, बंटवारा, व्यपवर्तन (डायवर्जन) निर्माण कार्य और अन्य लाभप्रद कार्यों पर रोक रहेगी। इस संबंध में कलेक्टर बलौदाबाजार के द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है जो तत्काल प्रभावशील होगा।

    कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी बलौदाबाजार के द्वारा जारी आदेशानुसार उप मुख्य अभियंता बिलासपुर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के प्रस्ताव के अनुसार पूर्व में जारी आदेश में संशोधन करते हुए अनुभाग बलौदाबाजार के ग्राम धनगांव, ताराशिव, अमलकुंडा, मिश्राइनडीह, भदरा, सुढ़ेली, सेमराडीह, खैदा, बिटकुली, छुईहा, पनगांव, मगरछबा, सकरी, गोडखपरी, दशरमा, रिसदा, पुरैन, ठेलकी, खम्हरिया, चांपा, पौसरी, भरूवाडीह ग्राम के रोक हटाए गए खसरा नंबरों की सूची राजस्व अनुभाग में उपलब्ध है। संलग्न सूची अनुसार खसरा नंबरों के चारों ओर 150 मीटर की परिधि के सभी भू-भाग पर आगामी आदेश तक क्रय-विक्रय, नामांतरण, बटवारा, व्यपवर्तन (डायवर्जन), निर्माण कार्य और अन्य लाभप्रद कार्यों पर रोक है।

    इसी प्रकार अनुभाग पलारी के ग्राम सैहा, गूमा, गिटकेरा, अमलीडीह, चुचरूगंपुर, छिराही, गाड़ाभाठा, सरकीपार, खपरी, परसवानी, छेरकाडीह, रेंगाडीह, मुसवाडीह, जारा, कुल 36 गांव के संलग्न सूची अनुसार खसरा नंबरों के चारों ओर 150 मीटर की परिधि के समस्त भू-भाग पर आगामी आदेश तक क्रय-विक्रय, नामांतरण, बंटवारा, व्यपवर्तन (डायवर्जन), निर्माण कार्य एवं अन्य लाभप्रद कार्यों पर रोक है। उक्त ग्रामों के शेष खसरा नंबरों पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाया गया है। रोक हटाए गए खसरा नंबरों की सूची राजस्व अनुभाग में उपलब्ध है।