• धार जिले से पीएम मोदी की नई पहल: सेवा पखवाड़ा और ‘स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार’ अभियान की शुरुआत

    धार

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सम्पूर्ण राष्ट्र और मध्यप्रदेश स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के संकल्प को साकार करने की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के मध्यप्रदेश प्रवास के संदर्भ में सोशल मीडिया के माध्यम से दिए संदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगामी 17 सितम्बर बुधवार को प्रधानमंत्री धार जिले में पीएम मित्रा पार्क की आधारशिला रखेंगे। यह देश का अपने तरह का पहला पीएम मित्रा पार्क है। यह अवसर हमारे लिए सौभाग्यशाली है। मध्यप्रदेश में 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा भी मनाया जायेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी धार जिले के ग्राम भैंसोला में 17 सितम्बर को स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ करेंगे। अभियान के अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य और पोषण के उद्देश्य से शिविर लगाए जाएंगे। स्वैच्छिक रक्तदान को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्यव्यापी स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एनीमिया, क्षय रोग की स्क्रीनिंग और जांच भी की जाएगी। माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए प्रसव पूर्व जांच और पोषण परामर्श भी दिया जाएगा। किशोरियों के लिए माहवारी स्वच्छता और पोषण पर प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित होंगे। यह पखवाड़ा प्रधानमंत्री के स्वस्थ समाज, सशक्त राष्ट्र के संकल्प को साकार करने का महत्वपूर्ण कदम होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को विकसित भारत 2047 के मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है। हम निरंतर स्वस्थ समाज की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। महिलाओं का स्वास्थ्य और सशक्तिकरण प्रगति का आधार है। प्रधानमंत्री मोदी अपने जन्मदिन के अवसर पर मध्यप्रदेश पधार रहे हैं। वे सेवा पखवाड़ा का शुभारंभ करेंगे और प्रदेशवासियों को संबोधित कर मार्गदर्शन देंगे।

     

  • ग्रामीणों को राहत: 3.32 करोड़ से बनेगा कोकिया नदी पर उच्च स्तरीय पुल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी सौगात

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के लिए एक और बड़ी सौगात दी है। भालूमुंडा से खेजूरघाट मार्ग पर कोकिया नदी पर लगभग 3 करोड़ 32 लाख की लागत से उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण कराया जाएगा। निविदा प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और पूर्ण होने के पश्चात अब शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू जाएगा। क्षेत्र वासियों ने इस कार्य की मंजूरी मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार जताया है।

    सीधे ओडिशा से जुड़ जाएंगे कई गांव
    इस पुल के बनने से फरसाबहार ब्लॉक के कोरंगामाल, भालूमुंडा, पेटामेरा, अंकिरा, खरीबहार, जुड़वाइन, सागजोर, परेवाआरा समेत दर्जनों गांव सीधे ओडिशा राज्य से जुड़ जाएंगे। वहीं रेडेघाट, सोनाजोरी, बनखेता, माटीहेजा जैसे गांव भी विकासखंड मुख्यालय से जुड़कर तेजी से विकास की मुख्यधारा में शामिल होंगे।

    बरसात में हो रही परेशानी से मिलेगी राहत
    ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में कोकिया नदी पार करना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। अक्सर पानी बढ़ जाने से आवाजाही रुक जाती थी, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और कामकाजी लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब पुल बनने से यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और ग्रामीणों को सुरक्षित व सुगम आवागमन का लाभ मिलेगा। साथ ही विकासखंड मुख्यालय एवं ओडिशा राज्य की ओर आवागमन के लिए दूरी कम हो जाएगी।

  • दिव्य दरबार में गूंजेगी भक्ति की गूँज, रायपुर में पं. धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा का आयोजन

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बार फिर बागेश्वर घाम की भक्तिधारा बहेगी। श्रद्धालु आध्यात्म के महासागर में गोते लगाएंगे। गुढ़ियारी में बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री भक्तों को हनुमंत कथा सुनाएंगे। वहीं दिव्य दरबार का भी आयोजन किया जायेगा। यह कार्यक्रम 4 से 8 अक्टूबर तक आयोजित किया जायेगा।

    इस आयोजन के सफल क्रियान्वयन और व्यवस्थाओं को सुचारू रूप देने के लिए विगत दिनों कार्यक्रम कार्यालय का विधिवत पूजन-अर्चन के साथ शुभारंभ किया गया। इस अवसर मुख्य आयोजक चंदन-बसंत अग्रवाल (थान खम्हरिया वाले) ने कहा कि यह कार्यालय आयोजन की तैयारियों का केंद्र बिंदु होगा, जहां से सभी व्यवस्थाओं का संचालन और समन्वय किया जाएगा।

    उद्घाटन के बाद बैठक बैठक में कथा की विभिन्न व्यवस्थाओं जैसे पंडाल, भोजन (भंडारा), जल, सुरक्षा, यातायात, और लाखों भक्तगणों के बैठने की व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा हुई। आयोजन से जुड़े सभी सेवादारों को उनकी योग्यतानुसार जिम्मेदारियां सौंपी गईं, ताकि प्रत्येक व्यवस्था में आसानी हो।

    बसंत अग्रवाल ने कहा कि यह हम सभी छत्तीसगढ़वासियों का परम सौभाग्य है कि गुरुदेव पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी एक बार फिर अपनी अमृतमयी वाणी से रायपुर की धरा को पवित्र करने आ रहे हैं। उनका आगमन प्रदेश के लिए किसी आध्यात्मिक महोत्सव से कम नहीं है। हमारा और हमारी पूरी टीम का यह संकल्प है कि कथा श्रवण के लिए आने वाले प्रत्येक भक्त को एक सहज, सुरक्षित और दिव्य अनुभव प्राप्त हो। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी समाजों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। कार्यालय के उद्घाटन के साथ ही अब तैयारियां और तेज कर दी गई हैं। शहर के भक्तों में कथा को लेकर जबरदस्त उत्साह और प्रतीक्षा का माहौल है।

    कार्यालय शुभारंभ पर सर्व समाज का प्रतिनिधित्व देखने को मिला। इसमें रूपनारायण सिंह,लोकेश कावड़िया,  सिख समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि, किशोर महानंद सहित विभिन्न समाजों के प्रमुख, वरिष्ठजन मौजूद रहे।

  • MP में कपास से कपड़े और फिर एक्सपोर्ट तक! 40% उत्पादन के साथ राज्य बनेगा टेक्सटाइल हब

    इंदौर
     देश में सर्वाधिक कॉटन उत्पादन के लिए चर्चित मालवा निमाड़ अंचल अब देश का प्रमुख टेक्सटाइल हब बनने जा रहा है. जहां पहली बार 2100 एकड़ के व्यवसायिक क्षेत्र में 114 टेक्सटाइल कंपनियां अपनी यूनिट स्थापित करने जा रही हैं. जिससे मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल के साथ अन्य इलाकों में होने वाली कपास की पैदावार से उन्नत किस्म का कपड़ा तैयार किए जाने के बाद देश और दुनिया में एक्सपोर्ट किया जा सकेगा.

    कपास उत्पादन में मध्य प्रदेश का योगदान 40%

    दरअसल, देश के कपास उत्पादन में मध्य प्रदेश का योगदान लगभग 40 प्रतिशत है. इनमें प्रमुख रूप से इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगौन, बड़वानी, खण्डवा और बुरहानपुर शामिल हैं. पिछले 3 वर्षों में कपास उत्पादन की स्थिति अच्छी रही है. वर्ष 2022-23 में 8.78 लाख मीट्रिक टन, 2023-24 में 6.30 लाख मीट्रिक टन और 2024-25 में 5.60 लाख मीट्रिक टन कपास उत्पादन हुआ.

    किसानों का संपर्क अंतरराष्ट्रीय बाजार से होगा

    मध्य प्रदेश के जिनिंग मिलो के जरिए शुद्ध कपास महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों में बेच दिया जाता है. जाहिर है इससे स्थानीय किसानों को उनके उत्पादन का पर्याप्त मुनाफा भी नहीं मिल पाता था. हालांकि अब धार जिले के बदनावर में करीब 2,158 एकड़ में विकसित हो रहे पीएम मित्र पार्क के कारण कपास उत्पादक किसानों का सीधा संपर्क अंतरराष्ट्रीय बाजार से हो जायेगा.

    वहीं, किसानों की उपज खेतों से सीधे वैश्विक बाजार तक पहुँच जायेगी. इसके अलावा खरगोन, बड़वानी, सेंधवा आदि इलाकों में जो जिनिंग मिल अब तक बंद होने की कगार पर आ चुकी थी, उन्हें भी नीचे से शुरू होने वाले व्यापार की संजीवनी मिल सकेगी.

    ग्लोबल मार्केट में पहुंचेगी धार के परिधान

    इधर, राज्य शासन की पहल पर पीएम मित्र पार्क में देश की कई चर्चित कंपनियां यहां 27 हजार 109 करोड़ रुपये के निवेश करने के साथ अपनी यूनिट स्थापित करने जा रही हैं. नतीजतन धार से तैयार वस्त्र और परिधान अब सीधे ग्लोबल मार्केट में पहुंचेंगे. जल्दी ही मध्य प्रदेश की पहचान अब टेक्सटाइल हब के रूप में होने लगेगी.

    अत्याधुनिक कॉटन केंद्र होगा सर्व-सुविधायुक्त

    17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास किए जाने के साथ ही पीएम मित्र पार्क विश्व स्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित होगा. यहां 20 MLD का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, 10 MVA का सौर ऊर्जा संयंत्र, पानी और बिजली की पुख्ता आपूर्ति, आधुनिक सड़कें और 81 प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स जैसी व्यवस्था विकसित की जा रही है. माना जा रहा है कि, यहां पीएम मित्र पार्क से लगभग 70 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर विकसित होंगे. कपास आधारित उद्योगों के विस्तार से किसानों को उनकी फसल का दोगुना मूल्य मिलेगा.

    इन कंपनियों की यूनिट स्थापित होगी

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया, ''पीएम मित्र पार्क के लिए 114 टेक्सटाइल कम्पनियों से 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं. इन प्रस्तावों में से 91 कंपनियों और इकाइयों के आवेदन स्वीकृत किए गए हैं. वहीं, 1294 एकड़ से अधिक भूमि आवंटित किये जाने की अनुशंसा की जा चुकी है. जिन कंपनियों को भूमि आवंटित की गई है, इनमें प्रमुख रूप से वर्धमान टेक्सटाइल्स लिमिटेड 2000 करोड़ रुपये का निवेश कर 190 एकड़ भूमि पर इकाई स्थापित करेगा. जैन कॉर्ड इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड 2515 करोड़ रुपये का निवेश 58 एकड़ भूमि पर इकाई स्थापित करेगा.

    एबी कॉटस्पिन इंडिया लिमिटेड 1300 करोड़ रुपये का निवेश 45 एकड़ भूमि पर, ट्राइडेंट लिमिटेड कंपनी 180 एकड़ भूमि पर 4,881 करोड़ रुपये का निवेश, ऑरा सिक्योरिटीज प्रा.लि. 105 एकड़ भूमि पर 1204 करोड़ रुपये, बेस्ट लाइफस्टाइल अपैरल प्रा.लि. 75 एकड़ भूमि पर 981 करोड़ रुपये का निवेश, नासा फाइबर टू फैशन प्रा.लि. 30 एकड़ भूमि पर 472 करोड़ का निवेश, डोनियर सिंथेटिक लि. 20 एकड़ भूमि पर 220 करोड़ का निवेश, महालक्ष्मी प्रोसेसिंग हाउस प्रा.लि. 30 एकड़ भूमि पर 300 करोड़ रुपये का निवेश, कमर्शियल सिन बैग्स लिमिटेड 8 एकड़ भूमि पर 134 करोड़ रुपये का निवेश और नावकार टेकटेक्स लिमिटेड 8 एकड़ भूमि पर 135 करोड़ रुपये का निवेश करेगी.

    पीएम मित्र पार्क में शार्मनजी यार्न्स प्राइवेट लिमिटेड ने 836.70 करोड़, सनातन पॉलिकॉट प्राइवेट लिमिटेड ने 1000 करोड़, सिद्धार्थ प्योरस्पन प्राइवेट लिमिटेड ने 380 करोड़, फैबियन टेक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड ने 308 करोड़, पासा पॉलिटेक्स प्राइवेट लिमिटेड ने 270 करोड़, दादी मां फाइबर्स ने 280 करोड़, ओसीएम फ्लोरिंग प्राइवेट लिमिटेड ने 250 करोड़, सोनिया सिंथेटिक्स एलएलपी ने 240 करोड़, वंश टेक्नोफैब प्राइवेट लिमिटेड ने 233 करोड़, डोनियर रिटेल प्रा. लिमिटेड ने 240 करोड़, तनमय प्योर स्पन ने 220 करोड़, महाशक्ति टेक्सटाइल मिल्स ने 202 करोड़, जिनेन्द्रम टेक्सस्पिन प्राइवेट लिमिटेड ने 200 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं. इसके साथ ही कई अन्य कंपनियों ने भी बड़े निवेश के प्रस्ताव दिए हैं.

  • सेवा और स्वास्थ्य की पहल: राजभवन में 17 सितंबर को रक्तदान कैंप, मुफ्त मेडिकल जांच भी होगी

    भोपाल
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने रक्तदान और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाने के निर्देश दिए है। रक्तदान और नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन राजभवन के सांदीपनि सभागार में किया जाएगा। शिविर का संचालन प्रातः 11 बजे से अपराह्न 1:30 बजे तक होगा।

    राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि शिविर का आयोजन राजभवन और रेडक्रॉस के संयुक्त तत्वाधान में किया गया है। शिविर अवधि में आमजन स्वेच्छा से रक्तदान कर मानवता के महादान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। शिविर में आमजन की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच स्त्रीरोग और नेत्ररोग विशेषज्ञ करेंगे। श्री कोठारी ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि 17 सितंबर को राजभवन में आयोजित होने वाले शिविर में बड़ी संख्या में भाग लें। शिविर में रक्तदान कर मानवता के सेवा संकल्प में सहयोगी बने। निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का लाभ प्राप्त करें।

     

  • ’22 सितंबर को न निकालें कार’ — महापौर की अनोखी पहल, जानिए इसके पीछे की वजह

     इंदौर
     स्वच्छता में देश भर में अपनी पहचान बना चुका इंदौर अब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और बड़ी मिसाल कायम करने जा रहा है। शहर में 22 सितंबर को तीसरी बार 'नो कार डे' का आयोजन किया जाएगा। इस दिन, शहरवासियों से स्वेच्छा से अपनी कारों का उपयोग न कर सार्वजनिक परिवहन, साइकिल, दोपहिया वाहन या ई-रिक्शा का इस्तेमाल करने की अपील की गई है।

    महापौर ने की जनता से अपील
    महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने एक सोशल मीडिया वीडियो जारी कर इंदौर की जागरूक जनता से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, "इंदौर की जनता ने हमेशा हर पहल को सफल बनाया है। पिछले दो वर्षों के 'नो कार डे' के अनुभव ने यह साबित कर दिया है कि एक दिन के सामूहिक प्रयास से हम ईंधन की खपत और प्रदूषण के स्तर में महत्वपूर्ण कमी ला सकते हैं।"

    पिछले दो आयोजनों की सफलता बनी प्रेरणा
    महापौर भार्गव ने बताया कि पिछले दो 'नो कार डे' के आयोजन बेहद सफल रहे और इनकी चर्चा पूरे देश में हुई। इन दिनों में शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम हुआ, पेट्रोल-डीजल की खपत में लगभग 15% की गिरावट आई और प्रदूषण के स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया। इसी सफलता से प्रेरणा लेकर इस परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।

    केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं
    महापौर ने इस बात पर जोर दिया कि 'नो कार डे' सिर्फ एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भविष्य के इंदौर को पर्यावरण के प्रति और अधिक जिम्मेदार बनाने की एक ठोस पहल है। इसका उद्देश्य लोगों की सोच में बदलाव लाना है, ताकि वे नियमित जीवन में भी निजी वाहनों की जगह साइकिल, ई-रिक्शा और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें। इंदौर इस तरह की पहल को एक परंपरा बनाने वाला देश का पहला शहर है।

    साइकिल, टू-व्हीलर और ई-रिक्शा का करें उपयोग
    महापौर ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि 22 सितंबर को अपनी कारों को घर पर छोड़कर शहर के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा, "आइए, हम सब मिलकर साइकिल, दोपहिया वाहन या ई-रिक्शा से यात्रा करें। यह प्रयास न केवल ट्रैफिक को सुगम बनाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाएगा।" उन्होंने विश्वास जताया कि इंदौर की जनता पिछले दो बार की तरह इस बार भी 'नो कार डे' को सफल बनाकर एक नई मिसाल कायम करेगी।

     

  • 20 हजार करोड़ के निवेश से सजेगा PM मित्रा पार्क, 72 हजार युवाओं को मिलेगा रोज़गार का मौका

    धार 

    धार जिले के बदनावर क्षेत्र के भैंसोला गांव में स्थापति हो रहे देश के पहले पीएम मित्रा पार्क में अपनी इकाइयां लगाने के लिए टेक्सटाइल क्षेत्र की कपंनियां उत्साहित हैं। अभी तक वर्धमान, ट्रांइडेट सहित 91 कंपनियों को 1,294 एकड़ भूमि आवंटित भी कर दी है। ये कंपनियां 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश करेंगी, जिससे 72 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। पार्क में निवेश करने के लिए 114 कंपनियों के प्रस्ताव अभी तक प्राप्त हुए हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि देश की बड़ी टेक्सटाइल कंपनियां पीएम मित्रा पार्क में अपनी इकाइयां लगानी चाहती हैं। सरकार निवेशकों को हर तरह की सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्क के पूर्ण विकसित होने पर रोजगार का आंकड़ा तीन लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यह केवल संख्या नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में आने वाला ठोस बदलाव है।

    अभी तक 23 हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव कपंनियां दे चुकी हैं। इन प्राप्त निवेशों से यार्न, फैब्रिक और गारमेंट उत्पादन की संपूर्ण वैल्यू चेन यहीं विकसित होगी, जिससे प्रदेश का टेक्सटाइल उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। यहां कुल 2158 एकड़ भूमि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 17 सितंबर को भूमिपूजन करने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

    किसान मेले किए जाएंगे आयोजित

    उधर, मुख्यमंत्री ने कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में निर्देश दिए कि कृषि आधारित उद्योगों के प्रचार-प्रसार के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग बहुउद्देशीय कृषि मेले आयोजित करें। इनमें किसानों को उनकी फसल सहित अन्य सहायक उत्पादों के विक्रय एवं मार्केटिंग की जानकारियां भी जाएं।

    पीएम मित्रा पार्क से प्रदेश के कपास और रेशम उत्पादक किसानों की जीवन रेखा बदल जाएगी। छह लाख से अधिक कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। कपास की खपत स्थानीय स्तर पर ही हो जाएगी। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और रॉ-मैटेरियल सप्लाई की एक पूरी चैन तैयार होगी।

  • हम किसी को नाराज नहीं करना चाहते, राज्य सरकार सभी को साथ लेकर चलने के लिये प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सिंहस्थ : 2028 के विकास कार्यों के लिए सभी का मिल रहा है समर्थन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    राज्य सरकार किसानों सहित सभी से संवाद करते हुए लैंड पूलिंग और विकास कार्यों के मार्ग पर है अग्रसर
    हम किसी को नाराज नहीं करना चाहते, राज्य सरकार सभी को साथ लेकर चलने के लिये प्रतिबद्ध
    किसान हित को सर्वोपरि रखते हुये सबकी सहमति के आधार पर होगा अधोसंरचना विकास
    सिंहस्थ : 2028 के लिए उज्जैन को ग्लोबल स्पिरिचुअल सिटी के रूप में विकसित करने की संकल्पना
    वर्षा-आंधी हो या सुरक्षा का प्रबंध, हर स्थिति में व्यवस्था बनाए रखना राज्य शासन का दायित्व

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ : 2028 के विकास कार्यों के लिए हमें सभी का समर्थन मिल रहा है। विकास के क्रम को बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सबके हितों का ध्यान रखते हुए और सभी से संवाद करते हुए राज्य सरकार लैंड पूलिंग सहित सभी प्रकार के विकास कार्यों के मार्ग पर अग्रसर हो रही है। प्रयागराज महाकुंभ के ऐतिहासिक आयोजन में करोड़ों लोगों के आगमन, व्यवस्था और उनके सुरक्षा प्रबंधन के दृष्टिगत केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने स्थायी संरचनाओं के विकास पर बल दिया, इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिला। उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के लिए स्थायी निर्माण के संबंध में किसानों से संवाद जारी है, हम किसी को नाराज नहीं करना चाहते, राज्य सरकार सभी को साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। विकास का क्रम निरंतर जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मीडिया से चर्चा में व्यक्त किए।

    सिंहस्थ का आयोजन प्रदेश के लिए गौरव का विषय

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इतिहास में अब तक के सबसे बड़े सिंहस्थ मेले का आयोजन उज्जैन में वर्ष-2028 में होने जा रहा है। वर्तमान में उज्जैन की अर्थव्यवस्था में महाकाल लोक बनने से भारी वृद्धि हुई है। सिंहस्थ के आयोजन से उज्जैन का आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकास होने से पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा। उज्जैन सिंहस्थ में 30 करोड़ श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की आशा है। सिंहस्थ आयोजन का गौरवशाली इतिहास रहा है, राज्य शासन वर्ष 2028 के सिंहस्थ का आयोजन आस्था, गरिमा और भव्यता के साथ करने के लिये कृत संकल्पित है। यह आयोजन उज्जैन सहित समूचे प्रदेश के लिये अत्यंत गौरव का विषय है।

    सिंहस्थ आयोजन में, स्थानीय किसान बंधुओं का सदैव मिला सहयोग

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सुनिश्चित करना राज्य शासन का कर्तव्य है कि हज़ारों साधु-संतों और करोड़ों श्रद्धालुओं को सिंहस्थ के दौरान उच्च स्तरीय सुविधाएं मिलें और उन्हें कोई परेशानी न हो। पिछले अनुभवों के आधार पर इस प्रकार की अधोसंरचना बनानी आवश्यक है, जिससे वर्षा-आंधी की स्थिति में भी मेले में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो। भव्य और विशाल आयोजन में सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करते हुए संपूर्ण व्यवस्था बनाए रखना शासन का दायित्व है। इस वृहद आयोजन के लिये हज़ारों एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है। सिंहस्थ के आयोजन में, स्थानीय किसान बंधु शासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करते आये हैं। सिंहस्थ : 2016 के दौरान लगभग 650 करोड़ रूपए की लागत से 3000 हेक्टेयर भूमि पर अस्थाई अधोसंरचना निर्माण कार्य किए गए थे, जिन्हें आयोजन उपरांत हटा दिया गया था। सिंहस्थ : 2028 के लिए उज्जैन को ग्लोबल स्पिरिचुअल सिटी के रूप में विकसित करने की संकल्पना की गई है। जिसके तहत किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुये सबकी सहमति के आधार पर अस्थायी के स्थान पर स्थायी अधोसंरचना का विकास किया जायेगा।

     

  • विधानसभा सचिवालय में बड़ा फेरबदल संभव, जल्द होगा नए प्रमुख सचिव का चयन

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रशासनिक बदलाव की आहट तेज हो गई है। मौजूदा प्रमुख सचिव एपी सिंह 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उनके कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाने के संकेत पहले ही मिल चुके हैं। ऐसे में विधानसभा सचिव के रूप में कार्यरत अरविंद शर्मा को अगला प्रमुख सचिव बनाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। वर्तमान प्रमुख सचिव एपी सिंह के कार्यकाल में विस्तार की संभावना नहीं है। ऐसे में 1 अक्टूबर से नए प्रमुख सचिव की नियुक्ति तय मानी जा रही है।

    अरविंद शर्मा सबसे मजबूत दावेदार 
    नरेंद्र सिंह तोमर ने अध्यक्ष बनने के बाद अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश पर लाया और  विधानसभा सचिव बनाया था। बाद में उनका संविलियन भी विधानसभा में हो गया। वर्तमान में वे 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं और नियमों के मुताबिक 62 साल तक सेवा में रह सकते हैं। यदि उन्हें प्रमुख सचिव नियुक्त किया जाता है, तो वे आगामी दो साल तक इस जिम्मेदारी को निभा पाएंगे। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर की पसंद होने के कारण उनकी नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है।

    एपी सिंह का लंबा कार्यकाल अब होगा समाप्त
    एपी सिंह पहले ही 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो चुके थे। उसके बाद उन्हें दो साल का सेवा विस्तार और फिर 6 महीने का संविदा कार्यकाल दिया गया। अब वे 64 वर्ष से अधिक हो चुके हैं। ऐसे में उनका कार्यकाल बढ़ाने की कोई संभावना नहीं रह गई है। हालांकि विधानसभा अधिनियम के मुताबिक अध्यक्ष चाहें तो जिला न्यायाधीश स्तर के अधिकारी को भी प्रमुख सचिव नियुक्त कर सकते हैं। फिलहाल इस पर विचार की संभावना कम है क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में अरविंद शर्मा ही सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।

    सचिव पद की मौजूदा स्थिति
    विधानसभा में सचिव के दो पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में एक पद पर अरविंद शर्मा कार्यरत हैं, जबकि दूसरा पद रिक्त है। प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए यदि शर्मा प्रमुख सचिव बनते हैं, तो सचिव के दोनों पद अस्थायी तौर पर खाली रह सकते हैं और जिम्मेदारियां प्रभार के आधार पर सौंपी जा सकती हैं।

     

  • कटारिया बोले – आयुष्मान योजना में गलत क्लेम करने से भुगतान में होती है देरी, इससे ईमानदारी से काम करने वाले संस्थान भी होते हैं प्रभावित

    आयुष्मान भारत पीएम जन आरोग्य योजना के स्टेकहोल्डर वर्कशाप का आयोजन

    रायपुर,

    आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत आज सोमवार को  न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाईन रायपुर में स्टेकहोल्डर वर्कशॉप का आयोजन किया गया। स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया की परिकल्पना एवं आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं सह मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. प्रियंका शुक्ला  के मागदर्शन में यह वर्कशॉप आयोजित की गई।

    योजनांतर्गत जनवरी 2025 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली में आयोजित बैठक में जानकारी दी गई थी कि छत्तीसगढ़ में देश में सबसे अधिक फ्रॉड क्लेम पाए गए हैं, और ऐसे अस्पतालों की संख्या के मामले में छत्तीसगढ़ चौथे स्थान पर है। वर्कशॉप में अस्पतालों को जानकारी दी गई कि ट्रिगर क्लेम को कैसे कम किया जा सकता है। साथ ही उन्हे जानकारी दी गई कि भविष्य में भी क्लेम, ट्रिगर नहीं हों।

    अमित कटारिया द्वारा यह बताया गया कि आयुष्मान योजना गरीब एवं मध्यम वर्ग के नागरिकों के लिए बहुत सहायक है। इस योजना से उन्हें अपने उपचार के लिए अस्पताल का चुनाव करने का विकल्प मिला है। उन्होने बताया कि गलत क्लेम करने से एक दुविधा की शुरुआत हो जाती है। इससे योजना की छवि धूमिल होती है और जनता व अस्पताल का विश्वास डगमगाता है। इससे वास्तविक मरीज जिसे उपचार मिलना चाहिए, अक्सर वंचित रह जाता है। साथ ही अस्पतालों के सही भुगतान में देरी होती है और ईमानदारी से काम करने वाले संस्थान भी प्रभावित होते हैं। और अंततः इसका सबसे बड़ा नुकसान गरीब और वंचित परिवार को उठाना पड़ता है, जिनके लिए यह योजना जीवनरेखा है।
    साथ ही उनके द्वारा बताया गया कि योजना में अस्पतालों का सही पंजीयन किया जाये और समय-समय पर उनका निरीक्षण किया जाये। शासकीय अस्पतालों द्वारा भी योजना में क्लेम करने के दौरान पूर्ण दस्तावेज़ अपलोड करें जिससे अनावश्यक क्लेम निरस्त न हों। उन्होने आशा जाहिर की कि हमारा राज्य योजना के सकारात्मक मानकों में पूरे देश में प्रथम स्थान पर आए।

    इस वर्कशॉप में पूरे दिन में विभिन्न बिन्दुओ जैसे, योजना की सामान्य जानकारी, आयुष्मान कार्ड कैसे बनाया जाता है, वय वंदना योजना में आयुष्मान कार्ड कैसे बनाए जाएं,  सही तरीके से क्लेम कैसे किए जाएं, दस्तावेज़ कैसे सही तरीके से बनाए जाएं, लिपिकीय त्रुटि कम से कम हों, योजना में क्या करना चाहिए व क्या नहीं करना चाहिए, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन अंतर्गत आभा आई.डी. का उपयोग एवं कम्प्लांएट सॉफ्टवेयर का उपयोग आदि पर जानकारी दी गई। वर्कशॉप में उपस्थित प्रतिभागियों द्वारा अपनी शंकाओं को रखा गया जिसका समाधान, वक्ताओं द्वारा किया गया है।

    इस वर्कशॉप में डॉ. सुरेन्द्र पामभोई, संचालक, राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान, छत्तीसगढ़, श्री टी.एन. सिंह, राज्य सूचना एवं विज्ञान अधिकारी, एन.आई.सी, छत्तीसगढ़, श्री मनीष कोचर, तकनीकी निदेशक, एन.आई.सी, छत्तीसगढ़, डॉ. सुरेन्द्र शुक्ला, चेयरबोर्ड, हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया, छ.ग., सुश्री पूजा शुक्ला मिश्रा, संयुक्त संचालक (वित्त), एवं डॉ धर्मेंद्र गहवई, प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर, राज्य नोडल एजेंसी, छ.ग., राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, भारत सरकार से प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ के समस्त जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, जिला आयुष्मान नोडल अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक एवं अस्पताल सलाहकार एवं जिला रायपुर, दुर्ग एवं बिलासपुर के निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

  • हिंदू संगठनों का आग्रह: नवरात्रि में गरबा का माहौल बनाए रखें शुद्ध और सुरक्षित, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

    रायपुर

    राजधानी रायपुर में नवरात्रि के अवसर पर मंदिरों, दुर्गा पंडालों एवं गरबा नृत्य के आयोजन में मर्यादा बनाए रखने को लेकर हिंदू संगठन बजरंग दल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और नवरात्रि में गरबा के नाम पर फूहड़ता फैलाने वाले आयोजन पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही आयोजन समितियों के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो समितियों एवं गैर-धार्मिक तत्वों पर दंडात्मक कार्रवाई करने बजरंग दल प्रतिबद्ध रहेगा.

    बजरंग दल के पदाधिकारियों ने कहा कि 22 सितंबर से क्वांर नवरात्रि प्रारंभ होने वाली है. नवरात्रि के दौरान शक्ति केंद्रों, मंदिरों एवं दुर्गा पंडालों में भक्त देवी मां को प्रसन्न करने भक्ति और शक्ति के प्रतीक “गरबा नृत्य” का आयोजन करते हैं, यह नृत्य भक्तों की आस्था और भक्ति को व्यक्त करने का एक माध्यम है। मर्यादा में रहकर यह आयोजन होना चाहिए। गरबा के नाम पर फूहड़जा फैलाने वाले आयोजन पर रोक लगनी चाहिए। बजरंग के प्रदेश प्रवक्ता ऋषि मिश्रा ने कहा कि नवरात्रि के अवसर पर नगर में विभिन्न मंदिरों एव दुर्गा पंडालों में गरबा नृत्य का आयोजन किया जाता है. चूंकि ये हिंदुओं का धार्मिक आयोजन है। एक आदर्श गरबा नृत्य के आयोजन के लिए अपनी संस्कृति का ध्यान रखना होगा।

    गरबा को लेकर जारी किए ये दिशा-निर्देश
        गरबा नृत्य का आयोजन किसी भी मंदिर परिसर या दुर्गा पंडालों में ही आयोजित हो, गरबा नृत्य में देवी गीत, धार्मिक गीत, जसगीत ही बजाए जाने की अनुमति हो, किसी भी प्रकार की फिल्मी या अश्लील गाना न बजाया जाए।
        आयोजित किए गए गरबा नृत्य में परंपरागत परिधान और वेशभूषा को ही मान्यता प्रदान की जाए।
        गरबा में हिन्दू समाज की माताएं-बहनें बढ़-चढ़ कर भागीदारी निभाती है, अतः उसके सुरक्षा का ध्यान रखते हुए आयोजन समिति को रात्रि 12 बजे तक ही गरबा नृत्य आयोजन की अनुमति प्रदान की जाए।
        गरबा नृत्य में आयोजन समिति द्वारा प्रवेश द्वार एवं अन्य व्यवस्था के लिए हिन्दू बाउंसर (बॉडीगार्ड) की ही नियुक्ति हो। पार्किंग की सुविधाजनक व्यवस्था हो, पार्किंग स्थल पर नियुक्त किए गए कर्मचारी भी हिंदू समाज से ही संबंधित हो।
        आयोजित गरबा नृत्य में सम्मिलित महिला/पुरुष, लड़ने/लड़कियां गैर हिन्दू समाज से नहीं होना चाहिए।
        आयोजित गरवा मैदान स्थल के आसपास किसी भी प्रकार की नशाखोरी एवं मांसाहार भोजन सामग्री का विक्रय केंद्र न हो।

    दिशा-निर्देशों की अवहेलना करने पर होगी कार्रवाई
    बजरंग दल के पदाधिकारियों ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद बजरंगदल रायपुर महानगर की ओर से जारी दिशा-निर्देशों की अवहेलना किसी भी आयोजन समिति करती है तो विहिप, बजरंग दल रायपुर महानगर अपने स्तर पर समितियों एवं गैर-धार्मिक तत्वों पर दंडात्मक कार्रवाई करने प्रतिबद्ध रहेगा, जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस दौरान प्रांत से ऋषि मिश्रा, विभाग से रमन नायडू, रवि वाधवानी, जिला मंत्री बंटी कटरे, जिला संयोजक विजेंद्र वर्मा, रायपुर महानगर के 14 प्रखंडों के कार्यक्रता उपस्थित थे।

  • वन मंत्री केदार कश्यप ने भारत रत्न विश्वेश्वरैया की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्प किए अर्पित

    अभियंता दिवस के अवसर पर भारत रत्न विश्वेश्वरैया जीवनी का किया उल्लेख

    रायपुर,

    भारत रत्न डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर अभियंता दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप ने घड़ी चौक में स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किया। उन्होंने कहा कि विश्वेश्वरैया ने अपने अद्वितीय योगदान और दूरदर्शी सोच से देश के निर्माण और विकास को नई दिशा दी तथा अभियंताओं की भूमिका और उनके योगदान को याद किया।

         मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया एक सिविल इंजीनियर राजनेता और मैसूर के 19वें दीवान थे, जिन्होंने भारत के योगदान में अतुलनीय योगदान दिया। विश्वेश्वररैया की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियां में से एक मांड्या में कृष्ण राजा सागर बांध है। भारत के प्रथम अभियंता विश्वेश्वररैया को वर्ष 1955 में भारत के सर्वाेच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित किया गया था।

          कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, नगर पालिका अध्यक्ष इंद्र प्रसाद बघेल, छोटेडोंगर सरपंच श्रीमती संध्या पवार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रताप सिंह मण्डावी, जनपद पंचायत अध्यक्ष पिंकी उसेण्डी जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के सदस्य एवं नगर पालिका के पार्षदगण, सर्वआदिवासी समाज के संरक्षक रूपसाय सलाम, कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं, एसडीएम अभयजीत मंडावी, कार्यपालन अभियंता जल संसाधन के अशोक चौधरी, पीएमजीएसवाई के कार्यपालन अभियंता विनय वर्मा सहित जनप्रतिनिधि एवं सभी विभागीय अभियंता उपस्थित थे।

  • सिंहस्थ 2028: ऊर्जा मंत्री तोमर ने MP ट्रांसको को दिया टारगेट, बोले – एक साल पहले पूरी हों विद्युत परियोजनाएं

    भोपाल 

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि सिंहस्थ-2028 के सफल आयोजन को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) उज्जैन में अपनी पारेषण प्रणाली को और सुदृढ़ बनाये। साथ ही सभी कार्य एक वर्ष पूर्व पूरा करने का लक्ष्य तय करें। मंत्री तोमर की मंशानुसार इस संबंध में साउथ जोन इंदौर स्थित एम.पी. ट्रांसको के प्रशासनिक भवन में समीक्षा बैठक हुई। प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि सिंहस्थ के कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और उन्हें समय-सीमा व उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। कार्ययोजना इस प्रकार बनाई जाए कि सिंहस्थ आयोजन से एक वर्ष पूर्व सभी कार्य पूर्ण हो जाएं, जिससे पारेषण तंत्र की स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध हो सके। बैठक में इंदौर और उज्जैन मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    चिंतामन सब स्टेशन का निर्माण कार्य प्रारंभ

    अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजीव अग्रवाल ने जानकारी दी कि सिंहस्थ अवधि में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहले चरण में 132 के.व्ही. चिंतामन सबस्टेशन के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। त्रिवेणी बिहार, उज्जैन में प्रस्तावित सबस्टेशन के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा 220 के.व्ही. शंकरपुर सबस्टेशन पर वर्तमान 20 एम.व्ही.ए. ट्रांसफार्मर को अपग्रेड कर 50 एम.व्ही.ए. का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है।

    400 के.व्ही. ताजपुर सबस्टेशन का विस्तार

    मुख्य अभियंता अग्रवाल ने बताया कि 400 के.व्ही. ताजपुर (उज्जैन) सबस्टेशन में 132 के.व्ही. नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इसमें 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर 33 के.व्ही. के चार नए फीडर निकाले जाएंगे।

     

  • गौरव की बात! इंदौर के सांदीपनि मालव कन्या विद्यालय को मिला सर्वश्रेष्ठ स्कूल का सम्मान

    इंदौर के सांदीपनि मालव कन्या विद्यालय को मिला एक्सीलेंस स्कूल अवार्ड

    फ्यूचर रेडी स्किल श्रेणी प्रतियोगिता में शामिल हुआ था विद्यालय

     इंदौर

    सांदीपनि मालव कन्या विद्यालय ने फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) का एक्सीलेंस राष्ट्रीय स्तर का स्कूल अवार्ड जीता है। अलायंस फॉर री-इमेजिनिंग स्कूल एजुकेशन अवार्ड (अराइज) फिक्की का प्रतिष्ठित अवार्ड है।

    विद्यालय को अवार्ड बच्चों में अकादमिक विषयों से आगे बढ़कर भविष्य के लिये स्किल्स डेव्हलपमेंट के क्षेत्र में नवाचार किये जाने केलिये दिया गया है। विद्यालय के बच्चों को कम्प्यूटर में कोडिंग सिखाई जा रही है। इसी के साथ कम्युनिकेशन और क्रिएटिव की नई तकनीक सिखाई जा रही है। सरकारी स्कूल के बच्चों में स्किल डेवलप कर भविष्य के लिये तैयार किया जा रहा है। नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुए कार्यक्रम में अनेक शिक्षाविद् के साथ हाल ही में भारत से स्पेस स्टेशन पर गये ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी मौजूद थे।

    प्रदेश के लिये गौरव की बात है कि देश के एक हजार स्कूलों में इंदौर के सांदीपनि विद्यालय ने अपने नवाचार कार्यक्रम के जरिये यह पुरस्कार जीता है। पुरस्कार प्राचार्य श्री रामकृष्ण कोरी और उनकी टीम ने प्राप्त किया। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पीपल फाउंडेशन की मदद से बच्चों में कम्प्यूटर में दक्षता के लिये यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। ज्यूरी सदस्यों में केन्द्र सरकार की पूर्व शिक्षा सचिव सुश्री अनीता करवाल और नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन के चेयर पर्सन प्रो. पंकज अरोरा भी शामिल थे।

     

  • मुख्यमंत्री साय बोले – दूरदर्शन ने समाज को वैचारिक रूप से समृद्ध करने और संस्कारों को संवारने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

    रायपुर,

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित दूरदर्शन केंद्र में आयोजित दूरदर्शन के 66वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए और दूरदर्शन परिवार, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं दर्शकों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और इस ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ी अपनी स्मृतियाँ साझा कीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दूरदर्शन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, गीत तथा शास्त्रीय संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। मुख्यमंत्री के समक्ष कलाकारों ने गौर नृत्य, बांस गीत, जवारा नृत्य, सुआ नृत्य और गौरी-गौरा जैसे लोकनृत्य प्रस्तुत किए।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दूरदर्शन ने मनोरंजन के साथ-साथ हमें वैचारिक रूप से समृद्ध करने और संस्कारित करने में भी बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने 1982 में एशियाई खेलों के रंगीन प्रसारण, रामायण और महाभारत जैसे धारावाहिकों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में दूरदर्शन का जादू ऐसा था कि प्रसारण के समय सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “मिले सुर मेरा तुम्हारा” जैसे गीतों के माध्यम से दूरदर्शन ने देश की एकता और सांस्कृतिक एकरूपता का संदेश दिया। समाचारों की गरिमा और भाषा की शुचिता बनाए रखने में दूरदर्शन की परंपरा सदैव सराहनीय रही है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दूरदर्शन के प्रादेशिक केंद्रों ने स्थानीय कलाकारों और प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया है। रायपुर दूरदर्शन ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रमों और विशेषकर “हमर चिन्हारी” के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया तक पहुँचाया है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कृषि दर्शन, महिलाओं से जुड़े कार्यक्रमों और युवाओं के लिए प्रस्तुत विशेष सामग्री के माध्यम से दूरदर्शन ने समाज के हर वर्ग को जोड़ा है। उन्होंने अपनी मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सँभालने के बाद “अपनी बात” कार्यक्रम में दिए गए साक्षात्कार को याद करते हुए कहा कि दूरदर्शन हमेशा स्पष्टता से और विस्तारपूर्वक अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर देता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लाखों हितग्राहियों को मिल रहा है और दूरदर्शन के द्वारा समाज में आने वाले सकारात्मक बदलावों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब किसी एक व्यक्ति की सफलता की कहानी दूरदर्शन पर प्रसारित होती है, तो वह लाखों लोगों के जीवन को बदलने का सशक्त आधार बनती है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दूरदर्शन परिवार को पुनः स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि दूरदर्शन इसी प्रकार आम जनता का मनोरंजन, संस्कार और जागरूकता का प्रमुख माध्यम बना रहेगा।

    संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि दूरदर्शन ने छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में भी दूरदर्शन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक सशक्त रूप से दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा।

    इस अवसर पर रायपुर दूरदर्शन केंद्र के उप महानिदेशक संजय कुमार मिश्र सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।

  • ग्रैंडमास्टर प्रवीण महादेव थिप्से ने मुख्यमंत्री साय से की सौजन्य मुलाकात

    रायपुर,

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में भारत के अंतर्राष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी एवं ग्रैंडमास्टर प्रवीण महादेव थिप्से ने सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने थिप्से की खेल प्रतिभा और उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनकी प्रशंसा की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया सहित संघ के अन्य पदाधिकारी  उपस्थित थे।

    उल्लेखनीय है कि प्रवीण महादेव थिप्से शतरंज में ग्रैंडमास्टर की उपाधि प्राप्त करने वाले खिलाड़ी हैं और राष्ट्रमंडल शतरंज चैंपियनशिप जीतने वाले पहले भारतीय भी हैं। उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।

  • आरडीएसएस में पश्चिम मप्र का 79वां सब स्टेशन ऊर्जीकृत

    भोपाल

    ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण योजना रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) अंतर्गत पश्चिम मप्र का 79वां सब स्टेशन बड़वानी जिले के कोलकी (सेंधवा) में ऊर्जीकृत किया गया। इस ग्रिड की लागत लगभग दो करोड़ एक लाख रूपए है, इससे करीब दो हजार ग्रामीण घरेलू एवं कृषि क्षेत्र के बिजली उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस उपलब्धि पर बधाई दी है।

    मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि आरडीएसएस अंतर्गत कंपनी क्षेत्र में सतत ही ग्रिड तैयार किए जा रहे है, इन्हें समय पर ऊर्जीकृत किया जा रहा हैं, जिससे उपभोक्ताओं को समय पर लाभ मिले। प्रबंध निदेशक श्री सिंह ने बताया कि इंदौर जिले में भी 11 एवं उज्जैन जिले में 11 सब स्टेशन तैयार हुए है। मंदसौर, आगर, रतलाम, धार, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, शाजापुर, आगर, देवास, झाबुआ जिलों में भी 2 से 9 सब-स्टेशन ऊर्जीकृत होकर विद्युत आपूर्ति सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। प्रबंध निदेशक श्री सिंह ने बताया कि आरडीएसएस अंतर्गत इन 5 एमवीए क्षमता के ग्रिडों की स्थापना से कंपनी क्षेत्र मालवा निमाड़ की विद्युत वितरण क्षमता में 395 एमवीए की बढ़ोत्तरी हुई है।

     

  • हमारे सैनिक देश की सुरक्षा के लिए न्यौछावर करते हैं अपना जीवन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    परमवीर चक्र प्राप्त वीर जवानों को मिलेगी 1 करोड़ की अनुग्रह राशि

    रायपुर,

    युद्ध तथा सैनिक कार्यवाही में शहीद  सैनिकों की पत्नी अथवा उनके आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि में वृद्धि करते हुए इसे 20 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही युद्ध तथा सैनिक कार्यवाही में विभिन्न वीरता अलंकरण प्राप्त जवानों को दी जाने वाली राशि में भी वृद्धि की गई है। अब परमवीर चक्र प्राप्त वीर जवानों को 40 लाख रुपये की जगह 1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। यह महत्वपूर्ण निर्णय आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में सम्पन्न राज्य सैनिक बोर्ड की बैठक में लिया गया।

    आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में सैनिक कल्याण विभाग की 6वीं राज्य सैनिक समिति की बैठक सम्पन्न हुई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे सैनिक देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर करते हैं। हम उनके शौर्य और बलिदान को नमन करते हैं। सरकार भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। बैठक में शहीदों की वीर नारियों, भूतपूर्व सैनिकों, विधवाओं एवं उनके आश्रितों के लिए राज्य द्वारा संचालित कई कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा की गई।

    मुख्यमंत्री साय ने समिति की छठवीं बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि 140 करोड़ देशवासियों की सुरक्षा में हमारे वीर जवान दिन-रात तत्पर रहते हैं। भारत माँ की सेवा में अपना जीवन अर्पित करने वाले इन वीर सपूतों का कल्याण करना सबका दायित्व और कर्तव्य है। आज की बैठक में भूतपूर्व सैनिकों, विधवाओं और उनके परिजनों के हित में सार्थक चर्चा हुई है। बैठक में लिए गए निर्णयों का लाभ भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारों तक सीधे पहुंचेगा। भूतपूर्व सैनिकों की बेहतरी के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी सदस्यों द्वारा दिए गए हैं, जिन पर सकारात्मक रूप से विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा।

    बैठक के दौरान भूतपूर्व सैनिकों, विधवाओं एवं उनके आश्रितों के हित में कई महत्वपूर्ण एजेंडा बिंदुओं पर निर्णय लिये गए। इनमें युद्ध तथा सैनिक कार्यवाही में शहीद (बैटल कैजुअल्टी) सैनिकों की पत्नी अथवा आश्रितों को अनुग्रह राशि 20 लाख से बढ़ाकर 50 लाख करना, विभिन्न शौर्य अलंकरण प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली राशि में वृद्धि करना शामिल है। अब परमवीर चक्र प्राप्तकर्ता सैनिक को 40 लाख की जगह 1 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसी प्रकार सैनिकों के माता-पिता को दी जाने वाली जंगी इनाम राशि 5 हजार रुपये प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी गई है। युद्ध तथा सैनिक कार्यवाही में दिव्यांग हुए सैनिकों की अनुदान राशि 10 लाख से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी गई है। साथ ही सेवारत सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों एवं विधवाओं को प्रथम भूमि/गृह क्रय करने पर 25 लाख रुपये तक के स्टाम्प शुल्क में छूट देने का निर्णय लिया गया।
     
    इस अवसर पर मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन अमिताभ जैन ने मुख्यमंत्री को बालवृक्ष भेंट किया। तत्पश्चात् सैनिक कल्याण संचालनालय छत्तीसगढ़ के संचालक एवं राज्य सैनिक समिति के सचिव ब्रिगेडियर विवेक शर्मा, विशिष्ट सेवा मेडल (से.नि) ने राज्य सैनिक बोर्ड, छत्तीसगढ़ की गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने 13 जनवरी 2012 को आयोजित पाँचवीं राज्य सैनिक बोर्ड की बैठक की कार्यवाही विवरण पर प्रगति रिपोर्ट दी और 6वीं बैठक में सम्मिलित एजेंडा बिंदुओं पर चर्चा प्रारम्भ की।

    बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, सांसद रायपुर बृजमोहन अग्रवाल, मध्य भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल पदम सिंह शेखावत (पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम), अपर मुख्य सचिव गृह विभाग मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, केंद्रीय सैनिक बोर्ड नई दिल्ली के सचिव ब्रिगेडियर डी.एस. बसेरा (विशिष्ट सेवा मेडल), कमांडर छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा सब एरिया ब्रिगेडियर तेजिंदर सिंह बावा (सेना मेडल), सचिव वित्त विभाग अंकित आनंद, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग अविनाश चंपावत, मेजर जनरल संजय शर्मा (से.नि), विंग कमांडर ए. श्रीनिवास राव (से.नि), विक्रांत सिंह एवं राजेश कुमार पाण्डेय राज्य सैनिक समिति छत्तीसगढ़ के सदस्यगण उपस्थित थे।

  • प्रदेश में इंजीनियर्स रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट होगा स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

     

    आधुनिक भारत के विश्वकर्मा, भारत रत्न डॉ. विश्वेश्वरैया ने तकनीक को विकास और जनकल्याण का सशक्त माध्यम बनाया
    लोक निर्माण सर्वेक्षण ऐप और लोक परियोजना प्रबंधन प्रणाली का शुभारंभ
    अभियंताओं और संविदाकारों को किया सम्मानित
    लोक निर्माण से लोक कल्याण” की भावना से समाज को गुणवत्तापूर्ण, टिकाऊ और जनकल्याणकारी सुविधाएँ उपलब्ध कराना ही आज की आवश्यकता
    मध्यप्रदेश में तिगरा बांध के निर्माण में विश्वेश्वरैया जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया अभियंता दिवस पर राज्य-स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में अभियंताओं को नवीन तकनीक और कार्यपद्धति का प्रशिक्षण देकर कार्यक्षमता में वृद्धि करने के उद्देश्य से इंजीनियर्स रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट स्थापित किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी पीएम गति शक्ति जैसे अनेक कार्यों से इंजीनियर्स को प्रोत्साहित कर रहे हैं। उन्होंने हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में इंजीनियर्स का उत्साहवर्धन किया है। देश के अभियंताओं ने चिनाब ब्रिज जैसे निर्माण कर हर अवसर पर अपनी उत्कृष्टता सिद्ध की है। प्रदेश में लोक निर्माण विभाग ने लोक कल्याण की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में लोक कल्याण से लोक निर्माण के संकल्प के साथ आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और सर विश्वेश्वरैया के चित्र पर माल्यार्पण किया।

    भारतीय संसद के दोनों भवन मध्यप्रदेश की प्राचीन संरचनाओं से प्रेरित हैं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियंता का अर्थ है आरंभकर्ता और हमारे इंजीनियर शुभारंभकर्ता हैं। सृष्टि का सबसे बड़ा अभियंता ईश्वर है, उन्होंने ही यह संसार रचा है। सृष्टि की इस संरचाना के संचालन को अभियंताओं ने ही संभव बनाया है। भारतीय ज्ञान परम्परा में हमें कई अभियंताओं के योगदान की जानकारी प्राप्त होती है। भगवान विश्वकर्मा को तकनीक और अभियांत्रिकी का आराध्य माना जाता है। भारतीय संसद के दोनों भवन भी मध्यप्रदेश की प्राचीन संरचनाओं से प्रेरित हैं। इंजीनियर्स एक प्रकार से हनुमान जी के समान है, जो कठिन से कठिन कार्य को सरल बनाने की क्षमता और योग्यता रखते हैं। सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ने 20वीं शताब्दी में देश के कठिन समय में अभियांत्रिकी के नए कीर्तिमान गढ़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु के योगदान का भी स्मरण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मानित होने वाले सभी अभियंताओं और संविदाकारों को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    सर विश्वेश्वरैया को भारतीय अभियंता समाज का सदैव मार्गदर्शक माना जाएगा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महान अभियंता, आधुनिक भारत के विश्वकर्मा, 'भारत रत्न' डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ने तकनीक को विकास और जनकल्याण का सशक्त माध्यम बनाया। उनके योगदान से देश को विश्व स्तरीय इंजीनियरिंग दृष्टिकोण प्राप्त हुआ। सर विश्वेश्वरैया को भारतीय अभियंता समाज का सदैव मार्गदर्शक माना जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वेश्वरैया की दूरदर्शिता, परिश्रम एवं अभियांत्रिकी कौशल, सशक्त व समृद्ध राष्ट्र निर्माण के संकल्प के लिए प्रेरणादायी है।

    दो डिजीटल प्लेटफार्म का लोकार्पण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के दो महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म "लोक निर्माण सर्वेक्षण ऐप" और लोक परियोजना प्रबंधन प्रणाली का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग की उपलब्धियों, योजनाओं और नवाचारों पर केंद्रित विभाग के न्यूज लेटर का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्कृष्ट और गुणवत्तापूर्ण कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं और संविदाकारों का सम्मान किया। इसके अंतर्गत लोक निर्माण विभाग के सुनील कौरव तत्कालीन कार्यपालन यंत्री, बुधनी,  प्रीति यादव एवं  प्रमेश कोरी सहायक यंत्री जबलपुर, संजीव कालरा सहायक यंत्री (भवन) रीवा, भुवना जोशी अनुविभागीय अधिकारी सेतु उपसंभाग शिवपुरी, राजीव श्रीवास्तव महाप्रबंधक एमपीआरडीसी, ग्वालियर, दीपक शर्मा सहायक महाप्रबंधक एमपीआरडीसी, उज्जैन तथा विक्रम सोनी, उप महाप्रबंधक मध्यप्रदेश बिल्डिंग कॉरपोरेशन, भोपाल को मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी प्रकार मेसर्स एनसीसी लिमिटेड हैदराबाद, मेसर्स निविक कंस्ट्रक्शन, मेसर्स रानीघाटी इन्फ्राटेक प्रा.लि. गुरूग्राम, मेसर्स हरगोविन्द गुप्ता छतरपुर को विश्वकर्मा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रानी दुर्गावती पर्यावरण हितैषी पुरस्कार डॉ. दीपक पाण्डेय को प्रदान किया गया।

    नियमित निरीक्षण व्यवस्था से पारदर्शिता और जवाबदेही में वृद्धि हुई : मंत्री राकेश सिंह

    लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कहा कि भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया केवल महान अभियंता ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी समाज सुधारक भी थे। उन्होंने सदैव यह संदेश दिया कि अभियंता का दायित्व केवल संरचनाएँ खड़ी करना नहीं, बल्कि एक सशक्त और बेहतर समाज का निर्माण करना भी है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने आधारभूत संरचना के विकास में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। यह पहल न केवल तकनीकी उन्नति की दिशा में एक कदम है, बल्कि जनसुलभता और पारदर्शिता को भी मजबूत बनाने का प्रयास है।

    अभियंता राष्ट्र निर्माण की धुरी हैं

    प्रसिद्ध इंजीनियर एवं लेखक प्रशांत पॉल ने अभियंताओं के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण की धुरी बताया। उन्होंने प्राचीन भारत की इंजीनियरिंग परंपराओं का उल्लेख करते हुए बताया कि हजारों वर्ष पहले हमारे पूर्वजों ने ऐसे चमत्कारिक निर्माण किए जिनकी मिसाल आज भी दुनिया देती है। चाहे वह विशाल मंदिर हों, उन्नत जल प्रबंधन प्रणालियाँ हों या खेल संरचनाएँ। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के सबसे पुराने स्टेडियम और जटिल हाइड्रो पावर प्रणालियाँ भारत में विकसित की गईं। राजा भोज जैसे महान शासकों ने जिस वैज्ञानिक दृष्टि से नगरों और संरचनाओं का निर्माण कराया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है।

    सर विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय विचारों से ओतप्रोत थे

    कार्यक्रम को प्रमुख सचिव लोक निमार्ण सुखवीर सिंह ने संबोधित किया। मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग श्री संजय मसके ने सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में तिगरा बांध के निर्माण में सर विश्वेश्वरैया की महत्वपूर्ण भूमिका बताया। उन्होंने देश में अधोसंरचना विकास में कई उल्लेखनीय कार्य किए। सर विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय विचारों से ओतप्रोत थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन में भारतीयों की उपेक्षा के कारण इंजीनियर की शासकीय नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था। सर विश्वेश्वरैया ने जीवन में कभी स्वाभिमान से समझौता नहीं किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।

     

  • प्रदेश में आदि सेवा पर्व की शुरुआत 17 सितंबर से, आदिवासी विकास के लिए बनेगा विज़न-2030 का खाका

    प्रदेश में आदि सेवा पर्व 17 सितम्बर से दो अक्टूबर तक मनाया जायेगा

    ट्राईबल विलेज विज़न-2030 का रोडमैप होगा तैयार

    भोपाल 

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी 17 सितम्बर को धार जिले के भैसोला में आयोजित कार्यक्रम में आदि कर्म योगी अभियान अंतर्गत “आदि सेवा पर्व” का शुभारंभ करेंगे। जनजातीय गौरव और राष्ट्र निर्माण के संगम का प्रतीक आदि “आदि सेवा पर्व” 2 अक्टूबर तक चलेगा। “आदि सेवा पर्व” के दौरान जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, कौशल विकास, आजीविका संवर्धन, स्वच्छता, जल-संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण जैसी सेवात्मक गतिविधियाँ आयोजित होंगी। हर गतिविधि के केन्द्र में सेवा का भाव और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प होगा ।

    आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत रीजनल प्रोसेस लैब में मध्यप्रदेश के 12 राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स को पहले चरण में तैयार किया गया है। इसी क्रम में स्टेट प्रोसेस लैब में 41 जिलों के 272 डिस्ट्रिक्ट मास्टर ट्रेनर्स, डिस्ट्रिक्ट प्रोसेस लैब में 242 विकासखण्डों के 1210 ब्लॉक मास्टर ट्रेनर्स तैयार किये गये हैं, जिनके माध्यम से ब्लॉक स्तर पर 18150 क्लस्टर मास्टर ट्रेनर्स, 41 जिला स्तरीय एनजीओ पार्टनर्स, 20 विकासखण्ड स्तरीय एनजीओ कर्मी, 56470 आदि सहयोगी (शिक्षक / डॉक्टर / यूथ-लीडर्स / सामाजिक कार्यकर्ता), 203292 आदि साथी (स्वसहायता समूह सदस्य, जनजातीय जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवक, सांस्कृतिक हस्तियां), 22588 आदि विद्यार्थी, इस प्रकार 303233 चेन्ज लीडर्स तैयार करने का लक्ष्य है।

    ट्राईबल विलेज विज़न-2030

    इस अभियान के अंतर्गत “ट्राईबल विलेज एक्शन प्लान एवं ट्राईबल विलेज विज़न 2030” पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक गाँव के लिए विकास का दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया जा रहा है, साथ ही 02 अक्टूबर 2025 को विशेष ग्राम सभा में “विलेज एक्शन प्लान” का अनुमोदन प्राप्त किया जायेगा। ग्राम स्तर पर बनाये जाने वाले आदि सेवा केन्द्रों के माध्यम से सेवा वितरण, संतुष्टिकरण एवं शिकायत निवारण तंत्र का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।

    आदि सेवा पर्व के दौरान कर्मयोगियों के माध्यम से जनजातीय बहुल ग्रामों में जनजातीय कार्य विभाग के अतिरिक्त पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व, वन, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं शिक्षा आदि विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा ग्राम स्तरीय गतिविधियाँ, जनजागरण यात्राएं, क्षेत्र-भ्रमण, ग्रामीणों का उन्मुखीकरण, ग्राम विकास आवश्यकताओं के लिये विषय वार समूह चर्चाएं, ग्राम अपेक्षाओं के प्रदर्शन के लिए दीवार-लेखन, ग्राम विकास योजना तैयार करना, ग्राम विकास योजना के क्रियान्वयन के लिए विभाग वार जिम्मेदारियों का निर्धारण, ग्राम विकास योजना क्रियान्वयन कैलेण्डर का निर्माण, आदि सेवा केन्द्र का निर्धारण, आदि सेवा केन्द्र में शिकायत निवारण पंजी एवं अन्य आवश्यक पंजियों का संधारण आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष ग्राम सभा में ग्राम विकास कार्ययोजना का अनुमोदन भी किया जायेगा।

    आदि-कर्मयोगी अभियान

    भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा इसी वर्ष आरंभ किया गया “आदि कर्मयोगी अभियान” देशभर में जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। इसका उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना और शासन को अधिक उत्तरदायी बनाना है। यह अभियान सेवा, संकल्प और समर्पण जैसे मूल्यों पर आधारित है, जो जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर, जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    अभियान का लक्ष्य लगभग तीन लाख “आदि कर्मयोगियों” को प्रशिक्षित कर तैयार करना है। इन कर्मयोगियों में ग्राम स्तर के युवा, महिलाएँ, शिक्षक, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव और अन्य स्थानीय प्रतिनिधि शामिल हैं। इस अभियान के अंतर्गत “ट्राईबल विलेज विज़न 2030” पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक गाँव के लिए विकास का दीर्घकालिक रोड मैप तैयार किया जा रहा है। इस रोड मैप में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शुध्द पेयजल की उपलब्धता, पोषण संबंधी योजनाओं का क्रियान्वयन, महिला एवं बाल विकास योजनाओं का लाभ, आजीविका के साधनों का सृजन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का पूर्ण कवरेज सुनिश्चित किया जा रहा है।

    आदि सेवा केन्द्र की पहल

    योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए “आदि सेवा केंद्र” जैसी पहल शुरू की गई है। इनके माध्यम से गाँव में ही शिकायत निवारण और सेवा वितरण को समयबद्ध किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत विभिन्न  विभागों – जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल जीवन मिशन, और कृषि विभाग – के बीच समन्वय स्थापित कर योजनाओं के तालमेल पर विशेष बल दिया जा रहा है।

    अभियान से ग्राम स्तर पर नेतृत्व का विकास, सरकारी योजनाओं की जागरूकता में वृद्धि, लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि और विभागों के बीच बेहतर समन्वय होगा। इससे जनजातीय समाज में आत्मविश्वास बढ़ेगा और शासन के प्रति विश्वास गहरा होगा। अभियान का दीर्घकालिक प्रभाव जनजातीय क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन, बालिका शिक्षा में वृद्धि, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी तथा सतत् आजीविका के साधनों में वृद्धि होगा।