• प्रधानमंत्री मोदी करेंगे सेवा पखवाड़ा अभियान का शुभारंभ, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की तैयारियों की समीक्षा

    नागरिकों की सेवा ही हमारा धर्म, 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा सेवा पर्व : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी करेंगे सेवा पखवाड़ा अभियान का शुभारंभ
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की तैयारियों की समीक्षा

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में आगामी 17 सितम्बर से सेवा पर्व मनाया जाएगा। सेवा पर्व का समापन 2 अक्टूबर गांधी जयंती को होगा। इस दौरान प्रदेश में नागरिक सेवाओं और सुविधाओं की बेहतरी और इन्हें सहज रूप से नागरिकों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सरकार जनहितकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को सेवा पर्व के रूप में मनाकर नागरिकों तक सेवाओं के सुगम प्रदाय की व्यवस्था करेगी। इस दौरान जिलों में भी सेवा गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। पर्व के दौरान सरकार सुशासन का लाभ जन-जन तक पहुंचाने के लिए शासकीय सेवाओं की रिस्पॉन्सिबल डिलेवरी सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस अभियान में जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि, सामाजिक, राजनैतिक एवं धार्मिक संगठन सभी अपनी भागीदारी करेंगे। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर्स से कहा कि वे आपसी तालमेल से सेवा पर्व का आयोजन करें और समाज के सभी वर्गों की बेहतरी के लिए जनसामान्य को भी इस अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि इस अभियान की थीम 'स्वच्छोत्सव' है। अभियान का केन्द्रीय विषय 'स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा' है, इसलिए पूरे अभियान के दौरान रक्तदान शिविर लगाने सहित स्वच्छता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में 17 सितम्बर से प्रदेश में शुरू होने वाले सेवा पखवाड़ा अभियान (सेवा पर्व) के संदर्भ में की जा रही तैयारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस अभियान में जनता से जुड़े 7 प्रमुख विभागों की महती जिम्मेदारी है। स्वच्छता ही सेवा पखवाड़े को जन-जन का अभियान बनाने के लिए सभी तैयारियां करें। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण अभियान के दौरान वे स्वयं जिलों के भ्रमण में रहेंगे और हेलीकॉप्टर से किसी भी जिले में औचक रूप से उतरकर वहां हो रहे सेवा पर्व कार्यक्रम में शामिल होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागरिकों की सेवा ही हमारा मूल धर्म है। प्रदेश में सुशासन हमारा संकल्प है। इस दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 17 सितम्बर से हम अपने इस संकल्प को पर्व के रूप में मनाएंगे। सेवा पर्व को जन-जन का अभियान मनाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी नागरिकों को उनकी जरूरत के अनुसार सेवाओं और सुविधाओं का त्वरित प्रदाय ही सेवा पर्व का परम लक्ष्य है। दो अक्टूबर (गांधी जयंती) को इस पर्व का समापन समारोहपूर्वक किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा पर्व के दौरान 17 से 24 सितम्बर तक रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे। इसी दौरान स्वास्थ्य शिविर भी लगेंगे। एक पेड़ मां के नाम एवं मां की बगिया के तहत पौधरोपण भी किया जाएगा। पर्व के दौरान नए नमो पार्क, नमो बाग, नमो वन, नमो उपवन बनाए जाएंगे। 27 सितम्बर को नमो मैराथन आयोजित की जाएगी। पर्व के दौरान विकास मेले एवं प्रदर्शनी के अलावा विद्यार्थियों की प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उन्होंने कहा‍कि सेवा पखवाड़ा आयोजन का उद्देश्य नागरिकों को सुशासन का लाभ दिलाना है। इस दौरान रोजगार आधारित कामों का प्रचार-प्रसार किया जाए और समाज के सभी वर्गों के लोगों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को प्रोत्साहित भी किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्व के दौरान ही 22 सितम्बर को नवरात्रि पर्व और 02 अक्टूबर को विजयादशमी पर्व मनाया जाएगा। इसलिए इन पर्वों के दौरान भी सेवा पखवाड़ा अभियान में जनसहभागिता बढ़ाने पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्व के दौरान किसानों के हित में सरकार द्वारा की जा रही गतिविधियों के बारे में भी बताया जाए। किसानों को खाद वितरण, आपदा राहत वितरण की जानकारी दी जाए। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।

    प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य गुलशन बामरा ने बताया कि भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार 17 सितम्बर से 02 अक्टूबर तक पूरे देश में आदि कर्मयोगी अभियान चलाया जायेगा। साथ ही आदि सेवा पर्व भी मनाया जाएगा। आदि सेवा पर्व के दौरान सभी जनजातीय बहुल गांव के लोग अपनी-अपनी ग्राम पंचायत में गांव के विकास के बारे में चर्चा-परिचर्चा करेंगे। गांव की विकास योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार जनजातीय बहुल ग्राम पंचायतों में आदि सेवा केन्द्र बनाए जाएंगे। इन सेवा केन्द्रों को जनसमस्या/जनशिकायत निवारण केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा। दो अक्टूबर को ग्राम सभा की बैठक आयोजित कर विकास योजना का अनुमोदन किया जाएगा। बैठक में उपस्थित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी संपूर्ण सेवा पखवाड़ा अभियान के दौरान उनके विभाग द्वारा की जाने वाली गतिविधियों एवं सेवा कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

    बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला, सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • 16 मध्य प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों को IAS का प्रतिष्ठित सम्मान, केंद्र ने दी मंजूरी

    भोपाल 
    मध्य प्रदेश के 16 राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) अफसरों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में प्रमोशन मिला है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने वर्ष 2023 और 2024 में खाली हुए IAS पदों के विरुद्ध यह अवार्ड जारी किया। वर्ष 2023 और 2024 के प्रत्येक आठ-आठ अफसरों को इस अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।

    मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के 16 अफसरों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में प्रमोशन दिया गया है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने वर्ष 2023 और 2024 में उपलब्ध IAS पदों के लिए यह निर्णय लिया है। इसका  नोटिफिकेशन सोमवार को जारी किया गया। वर्ष 2023 के आठ और 2024 के आठ अधिकारियों को आईएएस अवॉर्ड हुआ है। हालांकि इस आदेश के साथ ही यह भी शर्त जोड़ी गई है कि यह नियुक्तियां मध्य प्रदेश सरकार बनाम कमल नागर और अन्य संबंधित प्रकरणों में जबलपुर हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी। 

    वर्ष 2023 के IAS अवार्ड प्राप्त अधिकारियों में नारायण प्रसाद, नामदेव, डॉक्टर कैलाश बुंदेला,  नंदा भलावे कुशरे, अनिल कुमार डामोर, सविता झानिया,  सारिका भूरिया, कमल सोलंकी, जितेंद्र सिंह चौहान शामिल है। वहीं, वर्ष 2024 के IAS अवार्ड प्राप्त अधिकारियों में संतोष कुमार टिगोर, निशा डामर, राकेश कुशरे, शैली कनाश, रोहन सक्सेना, कविता बतुला, सपना अनुराग जैन औरआशीष कुमार पाठक है। 

     

  • मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 14 IAS अफसरों के तबादले – उज्जैन को मिला नया कमिश्नर

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश सरकार ने सोमवार (8 सितंबर) की देर रात प्रशासनिक सेवा में बड़ा फेरबदल किया है. रात में एमपी के 14 आईएएस अफसरों का तबादला कर दिया गया. नए ड्यूटी पर तैनात हुए अफसरों की लिस्ट भी जारी हो गई है. इससे कुछ ही घंटे पहले 20 IPS अफसरों के तबादले किए गए थे. 

    सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार, 5 जिलों के कलेक्टर बदल दिए गए हैं. इनमें इंदौर, जबलपुर, कटनी, बड़वानी और आगर मालवा शामिल हैं.

    जबलपुर के कलेक्टर अब बने जनसंपर्क आयुक्त
    सबसे अहम बदलाव जनसंपर्क विभाग में हुआ है. जनसंपर्क आयुक्त डॉ. सुदाम पंढरीनाथ खाड़े को हटा दिया गया है. उनकी जगह जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना को जनसंपर्क आयुक्त बनाया गया है.

    किसे कहां मिली जिम्मेदारी?
    डॉ. सुदाम पंढरीनाथ खाड़े को इंदौर संभागा का आयुक्त बनाया गया है. दीपक सिंह मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के सह सचिव बने हैं. अभिषेक सिंह एमपी शासन गृह विभाग के सचिव नियुक्त किए गए हैं. वहीं, आशीष सिंह को उज्जैन संभाग के सह आयुक्त पद की जिम्मेदारी मिली है. इसके अलावा, अतिरिक्त प्रभार के तौर पर उन्हें सिंहस्थ मेला के लिए उज्जैन मेला अधिकारी बनाया गया है.

    दीपक कुमार सक्सेना को एमपी जनसंपर्क का सह आयुक्त नियुक् किया गया है. एमरी माध्यम के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है.

    नए कलेक्टरों की नियुक्ति
    शिवम वर्मा इंदौर के नए कलेक्टर बने हैं. राघवेंद्र सिंह को जबलपुर का कलेक्टर नियुक्त किया गया है. दिलीप यादव इंगौर नगर पालिक निगम के आयुक्त बनाए गए हैं. साथ ही उन्हें मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कंपनी लिमिटेड इंदौर का अतिरिक्त प्रभार मिला है.

    आशीष तिवारी को कटनी के कलेक्टर पद की जिम्मेदारी मिली है. जयति सिंह बड़वानी कलेक्टर पद पर नियुक्त हुई हैं. प्रीति यादव आगर मालवा की कलेक्टर बनी हैं. डॉ. परिक्षित संजयराव झाड़े को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, इंदौर विकास प्राधिकरण, इंदौर बनाया गया है. रामप्रकाश अहिरवार को जबलपुर नगर पालिक निगम का आयुक्त बनाया गया है.

    इन 5 जिलों में कलेक्टर बदले
    इंदौर – शिवम वर्मा को कलेक्टर बनाया गया है। वर्मा अभी इंदौर नगर निगम में कमिश्नर हैं।
    जबलपुर – राघवेन्द्र सिंह को कलेक्टर बनाया गया हैं। राघवेंद्र सिंह अभी आगर-मालवा जिले के कलेक्टर हैं।
    कटनी – आशीष तिवारी को कलेक्टर बनाया गया हैं। तिवारी अभी मुख्य सचिव कार्यालय में उपसचिव हैं।
    बड़वानी – जयति सिंह को कलेक्टर बनाया गया हैं। जयति अभी उज्जैन जिला पंचायत की सीईओ हैं।
    आगर-मालवा – प्रीति यादव को कलेक्टर बनाया गया हैं। प्रीति अभी जबलपुर नगर निगम में कमिश्रर हैं।

  • ईवी मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने की क्षमता है मध्यप्रदेश में- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    विश्व ईवी दिवस 9 सितम्बर

    मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन नीति बनाने वाला देश का पहला राज्य-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    इलेक्ट्रिक वाहन संवर्धन बोर्ड का होगा गठन- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    ईवी मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने की क्षमता है मध्यप्रदेश में- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन परिवहन के भविष्य का प्रतिनिधित्व करने के लिये तैयार हो रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन नीति बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है। जलवायु परविर्तन से लड़ने के वैश्विक जनादेश और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण लक्ष्यों को हासिल करना मध्यप्रदेश की प्राथमिकता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व ईवी दिवस पर लोगों से कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया है। इलेक्ट्रिक वाहन जनसहयोग से कार्बन उत्सर्जन को कम करने में तेजी लाने के लिए सबसे प्रभावी समाधान हैं।

    मध्यप्रदेश में जल्दी ही इलेक्ट्रिक वाहन संवर्धन बोर्ड का गठन किया जायेगा। यह अंतर विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने और विभिन्न मुददों का समाधान निकालने के लिए जिम्मेदार होगा। मध्यप्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग में आदर्श राज्य बनाने और इस क्षेत्र में उत्कृष्ट उदाहरण स्थापित करने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं।

    मध्यप्रदेश की इलेक्ट्रिक वाहन नीति में रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिये वित्तीय प्रोत्साहन दिया जायेगा। चार्जिंग और स्वैपिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर लगाने में तेजी लाने के प्रयासों को भी प्रोत्साहन दिया जायेगा।

    ईवी और ईवी संबंधित पाठयक्रम होंगे शुरू

    प्रदेश में ईवी उदयोग के लिए आवश्यक कौशल के साथ कार्यबल तैयार करने के लिए नीति में इंजीनयिरिंग कालेजों और आईटीआई में ईवी और ईवी संबंधित पाठयक्रम भी शुरू किये जायेंगे। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में स्थापित किया जायेगा।

    मध्यप्रदेश का लक्ष्य है कि 2070 तक भारत को अपने शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग करे और स्वयं को कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने वाले राज्यों में पहला स्थान हासिल करे।

    प्रदेश में वायु गुणवत्ता  के सुधार एवं पेट्रोल, डीजल वाहनों पर निर्भरता को कम करने तथा इलेक्ट्रिक चार्जिंग अधोसंरचना के निर्माण के लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा मध्य्प्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीरकल नीति-2025 का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत वर्ष 2030 तक प्रदेश में कुल पंजीकृत 02 पहिया, 03 पहिया, चार पहिया वाहन एवं बस के लिये इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकृत के लिए क्रमश: 40%, 80%, 15% एवं 40% का लक्ष्य रखा गया है।

    इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टे्शन जैसे:- स्माल, मीडियम और लार्ज चार्जिंग स्टेशन के लिए 10 लाख रूपये तक, अनुसंधान, नवाचार एवं कौशल विकास के लिए 2 करोड़ रूपये, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के लिये 5 लाख रूपये तक और 02 पहिया, 03 पहिया एवं कार के लिए रेट्रोफिटिंग अंतर्गत 25 हजार रूपये तक के वित्तीय प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग तथा मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थांन भोपाल द्वारा 9 सितंबर को विश्व ईवी दिवस पर लोगों में जागरूकता लाने ईवी कार्यशाला विद्युत 25 और इलेक्ट्रि‍क आटो एक्सपो का आयोजन मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल में किया जा रहा है।

    ईवी उद्योग के विकास को बढ़ावा देने में मध्यप्रदेश अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है। ईवी सेगमेंट को बढ़ता देख आम लोगों में उत्साह है कि भविष्य में मध्यप्रदेश ईवी मैन्यूफैक्चरिंग हब बनेगा। मध्यप्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण का केंद्र बनने की क्षमता है। यहां सभी प्रकार की सहयोगी अधोसंरचनाएं मौजूद हैं। निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर की मौजूदगी जरूरी है, जिसमें बैटरी निर्माण सुविधाएं, असेंबली प्लांट और सप्लाई चैन नेटवर्क शामिल हैं। मध्यप्रदेश में इसकी भरपूर सभावनाएं हैं।

    भारत में लिथियम खनन का काफी विकास हुआ है। देश के भीतर लिथियम की उपलब्धता से मौजूदा हालात पूरी तरह बदल सकते हैं। यह इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। भारत में हाल ही में खोजे गए लिथियम के भंडार से आयात पर निर्भरता में कमी आने के साथ-साथ पूरे ईवी सप्लाई चैन को मजबूती मिलने की संभावना है। इसका सबसे बड़ा लाभ मध्यप्रदेश को होगा।

    ईवी का उपयोग न केवल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और उपयोग  की लागत को कम करता है बल्कि वितरण दक्षता भी बेहतर बनाता है। प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण के लिए ईवी को अपनाना प्रासंगिक है। मध्यप्रदेश में इसके रूझान दिख रहे हैं। समुदायों और ग्राहकों में जागरूकता बढ़ रही है।

    भारत दुनिया में दो पहिये वाले वाहनों का सबसे बड़ा निर्माता हैं। विद्युत वाहन इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ़्टवेयर का मिश्रण है और मध्यप्रदेश का इन दोनों में अच्छा प्रदर्शन है। मध्यप्रदेश में प्रतिभा, अच्छा वातावरण और सरकार के समर्थन से इलेक्ट्रिक वाहन हब बनने को तैयार हो रहा है।

     

  • CM डॉ. यादव का बड़ा ऐलान: श्रमिक परिवारों को मिलेंगे 175 करोड़ रुपये, सीधे खातों में जाएगी सहायता राशि

    CM डॉ. यादव का बड़ा ऐलान: श्रमिक परिवारों को मिलेंगे 175 करोड़ रुपये, सीधे खातों में जाएगी सहायता राशि

    श्रमिक परिवारों के लिए खुशखबरी, मुख्यमंत्री डॉ. यादव अंतरित करेंगे 175 करोड़ की आर्थिक मदद

    अनुग्रह सहायता के 7953 प्रकरणों में लाभान्वित होंगे हितग्राही

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 9 सितम्बर को मंत्रालय भोपाल में संबल योजना अंतर्गत, अनुग्रह सहायता के 7953 प्रकरणों में 175 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक से हितग्राहियों के खातों में अंतरित करेंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल भी उपस्थित रहेंगे।

    संबल योजना के अंतर्गत प्रारम्भ से अब तक 7 लाख 60 हजार 866 प्रकरणों में 7046 करोड़ रूपये से अधिक के हितलाभ वितरित किये जा चुके है। संबल योजना, प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। अनुग्रह सहायता के अंतर्गत दुघर्टना में मृत्यु होने पर 4 लाख रूपये एवं सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रूपये प्रदान किये जाते हैं। इसी प्रकार स्थायी अपंगता पर 2 लाख रूपये एवं आंशिक स्थायी अपंगता पर 1 लाख रूपये और अंत्येष्टि सहायता के रूप में 5 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। संबल योजना में महिला श्रमिक को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रूपये, श्रमिकों के बच्चों को महाविद्यालय शिक्षा प्रोत्साहन योजना में उच्च शिक्षा का सम्पूंर्ण शिक्षण शुल्क राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

    गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स का पंजीयन प्रारंभ

    भारत सरकार के नीति आयोग की पहल पर प्रदेश के गिग एवं प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबंल योजना में सम्मिलित किया जाकर इनका पंजीयन प्रारम्भ किया गया है। इन्हें भी संबल योजना के सभी लाभ प्रदान किये जा रहे हैं। संबल हितग्राहियों को खाद्यान्न पात्रता पर्ची भी प्राप्त होती है जिससे वे केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा रियायती दरों पर राशन प्राप्त कर रहे हैं।

    राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के लाखों निर्माण श्रमिकों के लिये निर्माण मंडल के माध्यम से कई योजनाएँ भी संचालित की जाती हैं। इनमें निर्माण श्रमिकों की मृत्यु होने पर अनुग्रह सहायता तथा स्थायी एवं आंशिक अपंगता पर सहायता भी सम्मिलित है। सभी संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना अंतर्गत पात्र श्रेणी में चिन्हित किया गया है। अब वे भी 5 लाख रूपये वार्षिक नि:शुल्क चिकित्सा प्राप्त कर रहे है।

    प्रदेश सरकार द्वारा प्रारंभ से अब तक 1 करोड़ 77 लाख से अधिक श्रमिकों का संबल योजना के अंतर्गत पंजीयन किया गया है, पंजीयन प्रक्रिया निरंतर जारी है।

     

  • स्वच्छ पर्यावरण से ही स्वस्थ और समृद्ध बनेगा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    पर्यावरण की स्वच्छता के लिए समाज और सरकार करें साझा प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    उज्जैन और जबलपुर में जू कम रेस्क्यू सेंटर के निर्माण में लाएं गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
    स्वच्छ पर्यावरण से ही स्वस्थ और समृद्ध बनेगा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
    भोपाल में बॉयो डायवर्सिटी पार्क की स्थापना की तैयारी
    मुख्यमंत्री ने की पर्यावरण विभाग की गतिविधियों की समीक्षा

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पर्यावरण की शुचिता बनाये रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण से ही प्रदेश के हर नागरिक का जीवन स्वस्थ और समृद्ध बनेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी विभाग आपसी सामंजस्य और सहयोग के साथ कारगर कदम उठाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल एवं वायु की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए। इन दो विशेष घटकों की शुद्धता पर ही संपूर्ण पर्यावरण की स्वच्छता निर्भर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मंत्रालय में पर्यावरण विभाग की गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन और जबलपुर में जू कम रेस्क्यू सेंटर की स्थापना होनी है। इस कार्य में गति लाएं और जल्द से जल्द इस कार्य को अंजाम दिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यावरण की शुद्धता से ही हम सबका जीवन सुरक्षित रह सकता है और यह संदेश समाज तक भी पूरी जिम्मेदारी से पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की बेहतरी केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज को भी आगे आना होगा। समाज और सरकार के साझा प्रयास ही पर्यावरण को स्वच्छ और संरक्षित बनाए रख सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े तालाब में डल झील की तरह शिकारे चलाने की कार्यवाही जल्द से जल्द पूरी की जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन एक वृहद विषय है। इसके लिए कार्ययोजना बनाकर लक्ष्य आधारित कार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भोपाल, इंदौर, उज्जैन एवं ग्वालियर के अलावा जबलपुर, रीवा, सागर एवं खजुराहो में भी हीट कंट्रोल के लिए एक्शन प्लान बनाकर उसे क्रियान्वित किया जाए। मुख्यमंत्री ने हर्ष जताते हुए कहा कि प्रदेश में अमरकंटक, पचमढ़ी और पन्ना पहले से ही यूनेस्को बायोस्फियर रिजर्व घोषित हैं। इसके अलावा अब कान्हा, पेंच एवं बांधवगढ़ को भी यूनेस्को बायोस्फियर रिजर्व घोषित कराने के लिए समुचित कार्यवाही की जाए।

    अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण अशोक वर्णवाल ने भोपाल के शाहपुरा क्षेत्र में करीब 100 हेक्टेयर क्षेत्र में स्टेट ऑफ द आर्ट के सहयोग से बॉयो डायवर्सिटी पार्क की स्थापना करने की विभागीय योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह संभवत: देश का पहला बॉयो डायवर्सिटी पार्क होगा। यह अहम जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसे देश का मॉडल बॉयो डायवर्सिटी पार्क बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भोपाल शहर को जैव विविधता के संरक्षण के मामले में एक नई पहचान देने वाले इस नवाचार के लिए सभी कार्यवाहियां तेजी से पूरी की जाएं।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण वर्णवाल ने बताया कि बड़े तालाब में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही मानसून अवधि के बाद की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रदूषण फैलाने वाले अर्थात् लाल श्रेणी के उद्योगों की संख्या घट गई है, इससे पर्यावरण और बेहतर हुआ है। उन्होंने बताया कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत प्रदेश के पहले से शामिल 7 शहरों के अलावा 3 नए शहरों मंडीदीप, सिंगरौली और पीथमपुर को भी इस प्रोग्राम में शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन स्थित विक्रम उद्योगपुरी में भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने बताया कि पिछले छह माह में विभाग द्वारा यूनियन कार्बाइड के अपशिष्ट का सुरक्षित रूप से भस्मीकरण कराया गया। रियल टाइम क्रॉप बर्निंग मॉनीटरिंग के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित कर इसका डाटा पब्लिक पोर्टल पर प्रसारित किया गया। प्रदेश के सभी जिलों के लिए राज्य पर्यावरण योजना एवं जिला पर्यावरण योजना का अपडेट पोर्टल उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रदूषणकारी उद्योगों एवं संक्रामक कचरे (बॉयो मेडिकल वेस्ट) के समुचित निपटान के लिए हर माह एक सप्ताह में विशेष अभियान चलाया जाएगा, गड़बड़ी मिलने पर संबंधितों पर कार्यवाही भी की जाएगी।

    अपर मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण वर्णवाल ने बताया कि मध्यप्रदेश राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण के अंतर्गत जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के माध्यम से प्रदेश की 5 रामसर साइट क्रमश: भोज वेटलैण्ड भोपाल, सिरपुर, यशवंत सागर इंदौर, तवा जलाशय नर्मदापुरम एवं साख्य सागर शिवपुरी में उपलब्ध सभी जैव विविधताओं का सर्वे कर विधिवत दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हरित मध्यप्रदेश मिशन के तहत विभाग अगले तीन माह में एक मिशन डाक्यूमेंट तैयार कर शासन को प्रस्तुत करेगा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मिशन में पर्यावरण विभाग के साथ-साथ वन एवं कृषि विभाग को भी जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कहाकि प्रदेश में करीब 247 नदियां हैं, इन सभी नदियों का भी दस्तावेजीकरण कराया जाए।

    बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री के आगमन एवं भैसोला में होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा बैठक की

    प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर को धार जिले के भैसोला गांव में देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का करेंगे शिलान्यास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति हमारे लिए प्रेरणा भी है और आनंद भी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रधानमंत्री का धार प्रवास प्रदेश के विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगा
    स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ भी करेंगे

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री के आगमन एवं भैसोला में होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा बैठक की

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 सितंबर को मध्यप्रदेश आएंगे। प्रधानमंत्री मोदी धार जिले की बदनावर तहसील के ग्राम भैसोला में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ, सेवा पखवाड़ा तथा यहां देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से प्रदेश के जनजातीय बहुल मालवा अंचल में किसानों को एक बहुत बड़ी सौगात मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश का धार, झाबुआ, उज्जैन और निवाड़ का खरगोन, बड़वानी सबसे बड़ा कपास उत्पादक क्षेत्र है। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से मध्यप्रदेश में कॉटन आधारित बड़े इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना होने जा रही है, यह देशभर में मंजूर 7 पीएम मित्रा पार्क में से पहला पार्क है जिसका भूमि-पूजन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क से 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष, कुल मिलाकर 3 लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार में पीएम मित्र पार्क का शिलान्यास प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने वाला गौरवशाली क्षण होगा। हम सब प्रदेशवासी मिलकर प्रधानमंत्री मोदी के आत्मीय एवं भव्य स्वागत के लिए तैयारी करें। यह दौरा प्रदेश के विकास के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की देश के पहले पीएम मित्रा पार्क के भूमिपूजन अवसर पर मध्यप्रदेश में उपस्थिति हम सबके प्रेरणा भी और आनंद का अवसर भी है, उनकी उपस्थिति में हमें उत्साह देती है। उनके मार्गदर्शन में हमारी सरकार पीएम मित्रा पार्क को देश का मॉडल पार्क बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को मंत्रालय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 17 सितंबर को ग्राम भैसोला, बदनावर जिला धार में आगमन सहित वहां आयोजित अन्य कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

    प्रधानमंत्री स्वस्थ नगरी, सशक्त परिवार अभियान का करेंगे शुभारंभ

    बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 17 सितम्बर को 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार' अभियान का शुभारंभ 'सुमन सखी' चैटबॉट को लांच करेंगे। पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। जनजातीय स्व-सहायता समूहों से स्वदेशी उत्पादों की खरीद और यूपीआई से भुगतान, सेवा पर्व एवं आदि कर्मयोगी अभियान का शुभारंभ करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी "एक बगिया मां के नाम" अभियान के तहत महिला लाभार्थियों को पौधों का वितरण, एक करोड़ सिकल सेल कार्ड के वितरण सहित स्वदेशी पखवाड़े का शुभारंभ भी करेंगे। कार्यक्रम में लाड़ली बहनें, स्व-सहायता समूह के सदस्य, स्वास्थ्य एवं स्वावलंबन योजना के हितग्राही सहित टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र के प्रमुख उद्यमी, युवा उद्यमी, महिला उद्यमी एवं हितग्राही उपस्थित रहेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को कार्यक्रम की रूपरेखा की विस्तार से जानकारी देकर कहा कि सभी अधिकारी आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी तैयारियों को अंतिम रूप दें। आयोजन स्थल पर कैम्प करें और वहीं से आपसी समन्वय एवं सहयोग से व्यवस्थाओं को अंजाम दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर एवं उज्जैन संभाग के जिले आवश्यक तैयारी कर लें। महिला प्रतिभागियों को आयोजन स्थल तक पहुंचने में कोई कठिनाई न होने पाए।

    प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कार्यक्रम की समन्वित तैयारियों की सिलसिलेवार जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए 11 विभाग अपनी गतिविधियां प्रारंभ कर चुके हैं। कार्यक्रम स्थल का लेआउट सहित मीडिया प्लान भी तैयार कर लिया गया है। बैठक में कलेक्टर धार ने पीपीटी प्रेजेन्टेशन के जरिए अब तक की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल ग्राम भैसोला तक पक्की एप्रोच रोड तैयार की जा रही है। चारों दिशाओं से प्रतिभागियों का आगमन होगा, इसलिए परिवहन व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

    बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े सहित संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव उपस्थित थे।

  • उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने मंत्रालय में की विभागीय समीक्षा

    भोपाल 
    उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने सोमवार को मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष में, उच्च शिक्षा विभाग की बैठक लेकर विविध विभागीय गतिविधियों एवं कार्यों के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की।

    उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने फॉलन आउट अतिथि विद्वानों को, जो मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित सहायक प्राध्यापकों की पदस्थापना से या स्थानांतरण से प्रभावित हुये है, ऐसे अतिथि विद्वानों के प्रकरणों में विचार करते हुये पृथक से विकल्प भरने का अंतिम अवसर प्रदान करने के निर्देश दिये। परमार ने सार्थक पोर्टल पर अनाधिकृत रूप से उपस्थिति दर्ज करने वाले अतिथि विद्वानों के प्रकरणों में विचार करते हुये, संबंधित द्वारा इस प्रकार की पुनरावृत्ति न होने की प्रतिबद्धता के साथ, शीघ्र निराकृत करने को कहा।

    मंत्री परमार ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न महाविद्यालयों में एकल संकाय से बहुसंकाय एवं स्नातक से स्नातकोत्तर किए जाने को लेकर भी विस्तृत चर्चा कर, आवश्यक निर्देश दिए। परमार ने विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर, परफॉमेंस इंडेक्स तैयार करने की कार्ययोजना पर क्रियान्वयन करने को कहा। मंत्री परमार ने नकल पर नकेल कसने, परीक्षा पद्धति को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली एवं विधि महाविद्यालय से जुड़े विषयों सहित अन्य बिंदुओं पर व्यापक चर्चा कर, आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन एवं आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • अपनी दक्षता और क्षमता से नागरिकों को दिलायें सुशासन और योजनाओं का लाभ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सुशासन का मिले सबको लाभ, यही हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    अधिकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये करें बेहतर प्रबंधन
    अपनी दक्षता और क्षमता से नागरिकों को दिलायें सुशासन और योजनाओं का लाभ
    समाधान ऑनलाइन में नागरिक सेवाओं में लापरवाही बरतने वालों के विरूद्ध हुई कड़ी कार्रवाई
    मुख्यमंत्री ने समाधान ऑनलाइन में की 12 जिलों के आवेदकों की सुनवाई

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के हर नागरिक और जरूरतमंद को सुशासन का सीधा लाभ मिले, यही सरकार का मूल लक्ष्य है। इसलिए प्रदेश के हर नागरिक को सुशासन का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें। हरसंभव तरीके से अपनी दक्षता और क्षमता बढ़ायें। जिले में लंबित प्रकरणों पर पैनी नजर रखें। योजनाओं का समय-सीमा में क्रियान्वयन सुनिश्चित हों, इसके लिए बेहतर से बेहतर प्रबंधन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय से समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाधान ऑनलाईन में आए प्रदेश के 12 जिलों के विभिन्न श्रेणी के प्रकरणों की सीधी सुनवाई की और आवेदकों से रू-ब-रू बात कर उनके मामले के निराकरण की स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिक सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिये।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स सरकार की योजनाओं के डिलेवरी सिस्टम की बेहतरी और मजबूती के लिये सतत् प्रयास करें। नागरिकों के काम समय पर हों और उन्हें अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिये यहां-वहां भटकना न पड़े, यह हर हाल में सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि आवेदकों की समस्याएं रूटीन कोर्स में जिला स्तर पर ही निराकृत हो जाएं, आवेदकों को सीएम हेल्पलाईन में शिकायत करने की स्थिति ही नहीं आनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीएम हेल्पलाईन में प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों का तय समय-सीमा में ही निराकरण किया जाये। यदि कोई मसला समाधान ऑनलाईन तक आ रहा है, तो यह गंभीर विषय है। सुशासन के तहत स्थानीय स्तर पर ही आवेदकों को उनकी समस्या का निदान मिल जाये, यह सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर्स एवं पुलिस अधीक्षक अपने-अपने जिलों में नागरिकों को बेहतर प्रशासन एवं व्यवस्थाओं को जनहितैषी (कस्टमर फ्रेंडली) बनाकर उनका विश्वास हासिल करें।

    समाधान ऑनलाईन में आये ये मामले

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाधान ऑनलाईन में बालाघाट, उमरिया, देवास, भिण्ड, पन्ना, शहडोल, मऊगंज, कटनी, पांढुर्णा, टीकमगढ़, रायसेन एवं दमोह जिले के 12 प्रकरणों में सीधी सुनवाई की।

    बालाघाट के डीएफओ को एससीएन

    बालाघाट जिले के आवेदक झुन्ना लाल पनकू ने वन विभाग द्वारा उसे बांस कटाई की मजदूरी की राशि पांच साल से न दिए जाने की शिकायत की गयी थी। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पांच साल बहुत लंबा अरसा होता है, दोषियों पर कार्यवाही होनी चाहिए। इस पर अपर मुख्य सचिव सचिव वन अशोक वर्णवाल ने बताया कि आवेदक को उसकी मजदूरी की राशि दे दी गई है और देरी के लिए जिम्मेदार संबंधित वन मंडलाधिकारी को कारण बताओ नोटिस देकर अन्य पर भी कार्यवाही की गई है।

    लंबित स्वत्वों का हुआ भुगतान

    उमरिया जिले के में एक सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी स्व. धीरज प्रसाद कोल के पुत्र ने शिकायत की कि उन्हें पेंशन नहीं मिल रही है। स्व. कोल जनजातीय कार्य विभाग में पदस्थ थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से जवाब मांगा तो आयुक्त कोष एवं लेखा ने बताया कि सेवानिवृत्त कर्मचारी का पीपीओ संबंधित बैंक से गुम हो जाने के लिए कारण विलंब हुआ। अब सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारी के परिजन को पेंशन के साथ लंबित स्वत्वों का भुगतान कर दिया गया है।

    तत्कालीन सिविल सर्जन एवं वर्तमान सीएमएचओ देवास की रोकी वेतनवृद्धि

    देवास जिले की आवेदिका श्रीमती प्रियंका पत्नी हिमांशु दीक्षित ने कहा कि उसे प्रसूति सहायता के 12 हजार रुपए नहीं मिले, तो उसने सीएम हेल्पलाईन में शिकायत की थी। अब उसे राशि मिल गई है। कलेक्टर देवास ने जानकारी दी कि प्रसूति सहायता की राशि आवेदिका को उपलब्ध करा दी गई है। इस मामले में विलम्ब के लिए जिम्मेदार आउटसोर्स कम्प्यूटर ऑपरेटर और तत्कालीन संविदा लेखापाल की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं और बहुउद्देशीय कार्यकर्ता को सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही जिला चिकित्सालय के सहायक अस्पताल प्रबंधक की दो वेतनवृद्धियां रोकी गई हैं। वर्तमान संविदा लेखापाल को शोकॉज नोटिस जारी कर 10 दिन का वेटन काटा गया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक को भी शोकॉज नोटिस देकर 7 दिन का वेतन काटा गया है। तत्कालीन सिविल सर्जन-सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक एवं वर्तमान सीएमएचओ देवास की एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी गई है।

    4 पटवारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई

    भिण्ड जिले के आवेदक रामरतन ने उसकी खसरा ऑनलाईन अपडेट नहीं किए जाने की शिकायत की थी। बताया गया कि इस मामले में देरी के लिए जिम्मेदार तत्समय से अब तक के 4 पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है और तत्समय से अब तक के 4 तहसीलदारों के विरूद्ध कार्यवाही का प्रस्ताव भेजा गया है।

    पन्ना जिले के आवेदक अनिल लाटोलिया ने उसे प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की राशि नहीं मिलने की शिकायत की थी। समाधान में आने के बाद अब उसे यह राशि मिल गई है।

    शहडोल जिले के आवेदक छात्र शिवम पनिका ने उसे छात्रवृत्ति न मिलने की शिकायत की थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्र से बात की अब उसे छात्रवृत्ति की राशि मिल गई है।

    मऊगंज जिले के आवेदिका सुराजकुमारी ने उसके गांव में नल-जल योजना का ग्राम पंचायत को हस्तांतरण न होने के कारण उन्हें पेयजल आपूर्ति में हो रही परेशानी की शिकायत की थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रमुख सचिव पीएचई से जवाब मांगा। प्रमुख सचिव ने बताया कि आवेदिका के गांव में केवल 42 घर हैं। पीएचई के मैकेनिकल विंग द्वारा मामले का समाधान कर दिया गया है। शिकायत हल हो गई है।

    कटनी जिले के आवेदक जावेद अफ्तार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत मकान न मिलने की शिकायत की थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आवेदक से चर्चा कर समस्या की जानकारी ली। अपर मुख्य सचिव नगरीयविकास ने बताया कि आवेदक को 26 अगस्त को ही उसके द्वारा चाहा गया मकान नंबर – 45 दे दिया गया है।

    पांर्ढुणा जिले की आवेदिका कुमारी दिव्यांशी निरापुरे ने उसके क्षेत्र में कठिन परिस्थितियों में निवास कर रही महिलाओं के आर्थिक/सामाजिक उन्नयन/प्रशिक्षण/आवासीय व्यवस्था न होने की शिकायत की थी। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी ने बताया कि आवेदिका द्वारा संदर्भित महिला को आवास आवंटित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटी-छोटी जरूरतों के लिए आवेदकों को परेशान न होना पड़े अन्यथा जिले के वरिष्ठतम अधिकारियों पर भी कार्यवाही की जाएगी।

    देरी के लिए संबंधित उपायुक्त पर भी हो कार्रवाई

    टीकमगढ़ जिले के एक आवेदक ने सीएम हेल्पलाईन में शिकायत की थी, उसके पत्नी के साथ दुराचार हुआ था। अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत उसे एक लाख रूपए की राहत राशि तो दे दी गई है, परंतु शेष तीन लाख रूपए राहत राशि के लिए उसे परेशान होना पड़ा। अब जाकर उसे यह राशि मिल गई है। प्रमुख सचिव अनुसूचित जाति कल्याण ने बताया कि संबंधित दोषी अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। जिला संयोजक पर भी कार्यवाही प्रस्तावित की गई है। कलेक्टर ने बताया कि आवेदक ने यह मामला पहले भी सीएम हेल्पलाईन में लगाया था, जो लेवल-3 तक पहुंचा था, परंतु तत्समय की संभागीय उपायुक्त ने यह कहकर इस मामले को क्लोज कर दिया था कि यह मामला मांग/सुझाव श्रेणी में आता है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देरी के लिए जिम्मेदार संबंधित उपायुक्त पर भी कार्यवाही की जाए।

    रायसेन जिले की आवेदिका श्रीमती विनीता बाई रैकवार ने कहा कि उसकी नाबालिग बच्ची बीते दिनों गुम हो गई थी। परंतु अब वह अहमदनगर (महाराष्ट्र) से बरामद हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से जवाब मांगा। डीजीपी ने बताया कि इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक विभाग द्वारा 8 हजार 621 गुम बच्चों को खोज कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुम बच्चों की तलाशी के लिए अभियान चलाएं।

    जूनियर इंजीनियर की रोकी 2 वेतनवृद्धि

    दमोह जिले के आवेदक करण सिंह लोधी की पत्नी श्रीमती सुमन्तरा लोधी ने बिजली बिल में गड़बड़ की शिकायत की थी। उसने कहा कि उसका बिल 9 हजार 976 रूपए आया था, जबकि वास्तविक बिल 214 रूपए था। इस पर अपर मुख्य सचिव ऊर्जा ने बताया कि मीटर रीडर द्वारा रीडिंग लेने में त्रुटि की गई थी। इसलिए उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। संबंधित जूनियर इंजीनियर की दो वेतनवृद्धि रोक दी गई हैं। संबंधित परिक्षेत्र के अधीक्षण अभियंता पर भी कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री ने आवेदिका से चर्चा की। आवेदिका ने कहा कि समाधान ऑनलाईन में आने के बाद ही उसके मामले का हल हो गया है। आवेदिका ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देकर कहा कि उसे प्रधानमंत्री आवास भी चाहिए। मुख्यमंत्री ने समाधान ऑनलाईन से ही श्रीमती सुमन्तरा को प्रधानमंत्री आवास मंजूर होने की जानकारी दी।

    समाधान ऑनलाइन में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह शिव शेखर शुक्ला, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव उपस्थित थे।

     

  • MP के विश्वविद्यालयों में अब सीख सकेंगे तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और उड़िया, शुरू होंगे स्पेशल कोर्स

    भोपाल 

    महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में भाषाई विवाद चर्चा का विषय है. भाषा को लेकर पैदा हो रहे तनाव और सामाजिक असंतुलन को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ने एक बड़ी पहल की घोषणा की है. प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था अब केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें भारतीय भाषाओं से जुड़े विशेष कोर्स भी शामिल किए जाएंगे. इसके जरिए न सिर्फ छात्रों को नई भाषाओं का ज्ञान मिलेगा, बल्कि देश की विविधता में एकता का संदेश भी जाएगा.

     मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा, ''मध्य प्रदेश अब भाषाई एकता का केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का युवा देश के किसी भी राज्य या क्षेत्र में जाए तो वहां के निवासियों से सहजता और आत्मीयता से संवाद कर सके. भारत में कुल 12 राष्ट्रीय और 22 क्षेत्रीय भाषाएं हैं. इनमें से 12 से 15 भाषाओं को विश्वविद्यालयों में पढ़ाने की प्रक्रिया इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू कर दी जाएगी.''

    मंत्री का कहना है कि भाषा के आधार पर उत्पन्न संघर्षों को रोकने और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. इसके साथ ही एमपी देश में एक आदर्श के रूप में उभरकर अन्य राज्यों के लिए मार्गदर्शक बनेगा.

    सरकारी पहल का उद्देश्य
    इस योजना के पीछे सरकार की मंशा स्पष्ट है– भारतीय विविधता को सम्मान देना और संवाद की भाषा के रूप में भाषा को जोड़ने का माध्यम बनाना. प्रदेश में ऐसे युवाओं की बड़ी संख्या है जो नौकरी, व्यवसाय या शिक्षा के लिए अन्य राज्यों में जाना चाहते हैं, लेकिन भाषा की बाधा के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इस पहल के माध्यम से प्रदेश के छात्र न सिर्फ अपनी मातृभाषा में पढ़ाई कर सकेंगे बल्कि अन्य राज्यों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं से परिचित होंगे. इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि आपसी विश्वास और संवाद भी मजबूत होगा.

    विपक्ष का विरोध
    हालांकि, इस योजना का विरोध भी शुरू हो गया है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह योजना केवल चुनावी लाभ के लिए लाई गई है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश में दूसरी भाषाओं को पढ़ाने से व्यावहारिक लाभ नहीं होगा. उनका आरोप है कि इससे छात्रों को वास्तविक फायदा नहीं मिलेगा और यह योजना केवल प्रचार का हिस्सा है. कांग्रेस का यह भी कहना है कि पहले से चल रही हिंदी माध्यम की योजनाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ा, ऐसे में नई योजना भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी.

  • MP के पांढुर्णा जिले का देवनाला रैयत गांव, शराबबंदी लागू, लोगों ने लिया स्वच्छ और सशक्त कदम

    पांढुर्णा

     तहसील के देवनाला रैयत गांव ने नशा मुक्ति के लिए बड़ा कदम उठाया है। रविवार को हुई ग्रामसभा में गांव के सभी लोगों ने सर्वसम्मति से शराब निर्माण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया। साथ ही इसका उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी तय किया गया।

    ग्रामसभा में लिया गया कड़ा निर्णय

    ग्रामसभा में तय हुआ कि गांव में यदि कोई व्यक्ति शराब बनाएगा या बेचेगा तो उस पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, नशे की हालत में किसी भी व्यक्ति का अपमान करने पर 505 रुपए अर्थदंड भरना होगा। यह निर्णय गांव को नशामुक्त बनाने और सामाजिक समरसता कायम करने के उद्देश्य से लिया गया।

    ग्रामीणों ने खुद की पहल

    निर्णय के बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर गांव के आसपास नाले और जंगलों में बने अवैध कच्ची शराब के ठिकानों को खुद ही ध्वस्त कर दिया। इस दौरान गांव के दिनेश उईके, देवराम भलावी, अनिल मर्सकोले, देवीलाल तुमदाम, पूनाजी तड़ाम, सम्पिलाल उईके, गणेश उईके सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एकमत से संकल्प लिया कि अब गांव में किसी भी प्रकार का नशे का कारोबार नहीं होने दिया जाएगा।

    पुलिस ने की पहल की सराहना

    थाना प्रभारी अजय मरकाम ने देवनाला रैयत के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय समाज में जागरूकता और अनुशासन का उदाहरण है। गांव की इस पहल से क्षेत्र के अन्य गांवों को भी प्रेरणा मिलेगी। थाना प्रभारी ने भरोसा दिलाया कि किसी भी समस्या या चुनौती की स्थिति में पुलिस गांव का पूरा सहयोग करेगी।

    सामाजिक दृष्टि से ऐतिहासिक कदम

    गांव के बुजुर्गों का कहना है कि नशे ने कई परिवारों को बर्बाद किया है। युवा पीढ़ी गलत राह पर जा रही थी। अब इस प्रतिबंध से गांव में माहौल सुधरेगा और बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा। ग्रामीण महिलाएं भी इस फैसले से काफी खुश हैं। उनका कहना है कि अब घरों में झगड़े और कलह की स्थिति खत्म होगी।

     

  • धार में PM मोदी का महिला सशक्तिकरण संदेश, लाड़ली बहनों को मिलेगा विशेष उपहार

    धार 

    मध्यप्रदेश के दौरे पर आ रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की महिलाओं और परिवारों को स्वास्थ्य समृद्धि का मंत्र दे सकते हैं। सबकुछ ठीक रहा तो प्रधानमंत्री मध्यप्रदेश से 'सशक्त नारी, समृद्ध अभियान' को हरी झंडी देंगे। लक्ष्य महिलाओं की सेहत की चिंता करना, उनके लिए शारीरिक आहार व पोषण व्यवस्था को मजबूत बनाना और समग्र देखभाल को मजबूत करना होगा, ताकि महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से लड़ने में सक्षम बनाया जा सके। जब महिलाएं स्वस्थ रहेंगी तो स्वाभाविक है कि बच्चे भी तंदुरुस्त होंगे। जब जच्चा-बच्चा दोनों अच्छे होंगे तो आधी से अधिक परेशानियां तो वैसे ही खत्म हो जाएंगी। इस तरह लाखों परिवार संकट से बाहर रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने आगामी मध्यप्रदेश दौरे पर महिलाओं और परिवारों को स्वास्थ्य समृद्धि का मंत्र देने वाले हैं। चर्चा है कि वे यहां से ‘सशक्त नारी, समृद्ध अभियान’ की शुरुआत करेंगे। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं की शारीरिक सेहत, आहार और पोषण व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि वे स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सकें। जब महिलाएं स्वस्थ होंगी तो बच्चों का विकास भी बेहतर होगा और लाखों परिवारों की परेशानियां कम हो जाएंगी। जच्चा-बच्चा की सेहत में सुधार अपने आप में समाज की मजबूती का आधार बनेगा।

    पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास भी होगा

    प्रधानमंत्री मोदी का दौरा 17 सितंबर को प्रस्तावित है। कार्यक्रम की जगह धार जिले के बदनावर को माना जा रहा है। यहीं से वे देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास करेंगे। यह पार्क टेक्सटाइल क्षेत्र में रोजगार और निवेश की नई संभावनाओं को जन्म देगा। खास बात यह है कि यह भारत में बनने वाला पहला ऐसा पार्क होगा जो सबसे पहले तैयार भी होगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और प्रदेश को औद्योगिक बढ़त मिलेगी।
    पहले भी मध्यप्रदेश से मिले हैं बड़े तोहफे

    यह पहला मौका नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश से कोई बड़ा अभियान शुरू करने जा रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने कई राष्ट्रीय कार्यक्रम यहीं से लॉन्च किए थे। उदाहरण के तौर पर, सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन अभियान, किसानों के लिए फसल बीमा योजना की सौगात, महिलाओं को सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर, छोटे व्यापारियों के लिए स्वनिधि योजना और नदी जोड़ो अभियान की शुरुआत मध्यप्रदेश की धरती से हुई थी। इन पहलों ने देशभर के लोगों को सीधा लाभ पहुंचाया।

    महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष आह्वान

    भोपाल के जंबूरी मैदान से प्रधानमंत्री मोदी पहले भी महिलाओं के सर्वांगीण सशक्तिकरण का संदेश दे चुके हैं। यह आयोजन देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर हुआ था। उस समय भी उन्होंने महिलाओं की भूमिका और उनकी ताकत को देश की प्रगति से जोड़ा था। अब एक बार फिर मध्यप्रदेश से नया अभियान शुरू करके वे महिलाओं की सेहत और परिवारों की मजबूती पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

    इन अभियानों, कार्यक्रमों को दे चुके हरी झंडी

    मोदी देश को मध्यप्रदेश से पहले भी कई सौगात दे चुके हैं। उन्होंने सिकलसेल एनीमिया के खात्मे की शुरुआत का आह्वान यहीं से किया था। किसानों को फसल बीमा की सौगात, महिलाओं को सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों का तोहफा, स्वनिधि का पहला कार्यक्रम और नदी जोड़ो अभियान की नींव भी इसी धरती से रखी थी। भोपाल के जंबूरी मैदान से मोदी देशभर की महिलाओं को हर दृष्टि से सशक्त बनाने का आह्वान कर चुके हैं। आयोजन देवी अहिल्या बाई की 300वीं जयंती पर किया गया था।

  • वाहनों की सुरक्षा पर बड़ी चूक: MP में 73% कारों पर हाई-सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं

    भोपाल 

    कहने को तो भोपाल प्रदेश की राजधानी है, लेकिन यहां पर नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। भोपाल में पिछले 15 साल में करीब 19 लाख गाड़ियां रजिस्टर्ड हुई हैं, लेकिन अब तक करीब 5 लाख में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) नहीं लग पाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विभाग ने इस अभियान को प्राथमिकता में रखते हुए 3 महीने में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। लेकिन लगता नहीं कि यह पूरा हो पाएगा।

    इस मामले में परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना एचएसआरपी नंबर प्लेट वाले वाहन मालिक अब कोई भी परिवहन संबंधी महत्वपूर्ण कार्य नहीं करा पाएंगे। जिन वाहनों में यह नंबर प्लेट नहीं लगी है उनके पीयूसी, फिटनेस सर्टिफिकेट, आरसी बदलाव, परमिट नवीनीकरण और अन्य सेवाएं ठप हो जाएंगी। यह प्रक्रिया आसान है और ऑनलाइन बुकिंग के बाद तय समय पर नंबर प्लेट लगाई जा सकती है।

    वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) को लेकर परिवहन विभाग और पुलिस महकमा लगातार प्रयासरत है। लेकिन मप्र के वाहन मालिक हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगवाने को राजी नहीं हैं।

    मध्यप्रदेश में कुल 2.45 करोड़ से अधिक पंजीकृत वाहन हैं, जिनमें से केवल 65.72 लाख वाहनों पर HSRP लगी है। यानी प्रदेश के 1.79 करोड़ से अधिक वाहन (73.24%) अब भी बिना सुरक्षा नंबर प्लेट के सड़क पर दौड़ रहे हैं।

    सबसे फिसड्डी राज्यों में एमपी चौथे नंबर पर देश में HSRP न लगवा पाने वाले राज्यों में मप्र देश के सबसे फिसड्‌डी राज्यों में चौथे नंबर का प्रदेश है। HSRP लगवाने वाले टॉप स्टेट में जम्मू कश्मीर पहले नंबर पर है। J&K में मात्र 6.63% वाहन ऐसे हैं जिन पर HSRP लगना बाकी है। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगाने में अव्वल राज्यों में टॉप-5 में शामिल है। ये जानकारी लोकसभा में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी के सवाल के जवाब में दी गई है।

    एचएसआरपी क्यों जरूरी है परिवहन विभाग का कहना है कि एचएसआरपी नंबर प्लेट हाई-क्वालिटी, टेम्पर-प्रूफ होती है और इसमें एक यूनिक लेजर-कोड होता है, जिससे चोरी या फर्जी नंबर प्लेट लगाने जैसी घटनाओं पर रोक लगती है। साथ ही यह सड़क पर लगे कैमरों से वाहन की सही पहचान में मदद करती है, जिससे ट्रैफिक नियमों का पालन और अपराध नियंत्रण आसान हो जाता है।

    क्या है हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट? यह एक होलोग्राम स्टिकर है। इस पर वाहन के चेसिस और इंजन के नंबर दर्ज होते हैं। इस खास तरह के स्टिकर को वाहन की नंबर प्लेट पर चिपकाया जाता है। प्लेट पर नंबर उभारकर बनाए जाते हैं, ताकि कोई उनमें छेड़छाड़ न करने पाए।

    इस पूरी प्लेट को वाहनों की सुरक्षा के लिहाज से तैयार किया गया है। एक बार प्लेट वाहन में फिट हो जाए तो उसे निकालना भी आसान नहीं हो पाता। HSRP नंबर को प्रेशर मशीन की मदद से लिखा जाता है। इस नंबर से वाहन की पूरी कुंडली सामने आ सकती है।

    राज्य कुल रजिस्टर्ड वाहन HSRP लगे वाहन HSRP बाकी HSRP बाकी%
    लक्षद्वीप 21497 508 20989 97.64%
    आंध्र प्रदेश 18486709 2071421 16415288 88.80%
    केरल 18502182 4709555 13792627 74.55%
    मध्य प्रदेश 24556837 6572040 17984797 73.24%
    अंडमान निकोबार द्वीप समूह 178660 50846 127814 71.54%

     

    कैसे करता है काम ?
    एचएसआरपी नंबर प्लेट एक होलोग्राम स्टिकर है। इस पर वाहन के चेसिस और इंजन के नंबर दर्ज होते हैं। इस खास तरह के स्टिकर को वाहन की नंबर प्लेट पर चिपकाया जाता है। प्लेट पर नंबर उभारकर बनाए जाते हैं, ताकि कोई उनमें छेड़छाड़ न करने पाए। इस पूरी प्लेट को वाहनों की सुरक्षा के लिहाज से तैयार किया गया है। एक बार प्लेट वाहन में फिट हो जाए तो उसे निकालना भी आसान नहीं हो पाता। इसमें HSRP नंबर को प्रेशर मशीन की मदद से लिखा जाता है। इस नंबर से वाहन की पूरी जानकारी सामने आ जाती है।

    ऐसे करें आवेदन

        सबसे पहले ऑटोमोबाइल डीलर्स की संस्था SIAM की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

        “Book HSRP” ऑप्शन पर क्लिक करें, जिससे एचएसआरपी रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुलेगा।

        फॉर्म में अपना पूरा नाम, ईमेल एड्रेस, स्टेट (मध्य प्रदेश), व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर, मोबाइल नंबर और डिस्ट्रिक्ट भरें।

        “I Agree” पर टिक करें और सबमिट करें।

        इसके बाद “Select Your Vehicle Type” में अपनी गाड़ी का प्रकार चुनें (जैसे कार/SUV)।

        वाहन निर्माता कंपनी (जैसे Tata Motors) चुनें और “Order Your HSRP Now” पर क्लिक करें।

        “Fitment Location” में “Dealer Premises” सेलेक्ट करें।

        “HSRP Order Type” में “Old Vehicle HSRP Kit” चुनें।

        व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस नंबर के आखिरी 5 डिजिट और इंजन नंबर के आखिरी 5 डिजिट भरें।

        सिटी और नजदीकी डीलर चुनें।

        अपॉइंटमेंट डेट और स्लॉट सेलेक्ट करें।

        बिलिंग एड्रेस भरें, मोबाइल नंबर वेरीफाई करें और ऑनलाइन पेमेंट करें।

        पेमेंट के बाद तय तारीख पर डीलर के पास जाकर नंबर प्लेट फिट कराएं।

        एचएसआरपी की कुल लागत ₹696.20 है (₹540 प्लेट लागत + ₹50 सुविधा शुल्क + ₹16 GST)।

    भोपाल में 18.5 लाख वाहन रजिस्टर्ड

    भोपाल जिले में इस वक्त 18.5 लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं जिनमें से 40 प्रतिशत के पास अभी भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं है। ऐसे वाहन मालिक फिलहाल घर बैठे ही सुविधाओं को अपडेट करवा सकते हैं। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (High Security Number Plate) मंगवाने और मोबाइल नंबर को अपडेट करने के लिए आरटीओ के वाहन पोर्टल या सारथी एप के जरिए आवेदन किए जा सकेंगे। ओटीपी के आधार पर मोबाइल नंबर गाड़ी की डिटेल्स के साथ लिंक हो जाएगा। एचएसआरपी नंबर प्लेट नजदीकी डीलर के यहां से फिट करवा सकेंगे।

    मध्यप्रदेश में 15 साल पुराने वाहन

    कार-88,529

    मोपेड – 20,162

    जीप – 21,607

    ट्रैक्टर -74,794

    आटो रिक्शा – 46,999

    गुड्स ट्रक -72, 502

    बस – 14,813

    टैक्सी -1,098

    बाइक -2,08054

    स्कूटर -76,188

    इसलिए जरूरी मोबाइल नंबर

    ये मुहिम इसलिए चलाई जा रही है क्योंकि बड़े पैमाने पर व्हीकल रजिस्ट्रेशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड में दर्ज नंबर में भिन्नता पाई जा रही थी। ऐसी स्थिति में किसी भी गाड़ी को किसी भी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर आसानी से करवाया जा सकता था। कई ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें असल गाड़ी मालिक ने बगैर अनापत्ति प्रमाण पत्र के जबरन दूसरे पक्ष पर गाड़ी अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लेने के आरोप भी लगाए। मोबाइल नंबर अपडेट होने के बाद अब जब तक आवेदक वन टाइम पासवर्ड नहीं बताएगा तब तक किसी भी प्रकार के आवेदन पर कार्रवाई पूरी नहीं मानी जाएगी।

    15 साल पुराने सरकारी वाहन हटेंगे

    15 साल पुराने सरकारी वाहनों के रजिस्ट्रेशन खत्म होते ही हटाने की व्यवस्था की गई है। नागरिकों के लिए स्क्रेप पॉलिसी और फिटनेस प्रमाण पत्र देकर री-रजिस्ट्रेशन कराने के विकल्प उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

    – जितेंद्र शर्मा, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी

     

  • किराये और कब्जे पर नियंत्रण के लिए मध्यप्रदेश में जल्द लागू होगा नया कानून

    भोपाल 

     किरायेदार और मकान मालिक दोनों को सुरक्षित करने के लिए सरकार मॉडल किराएदारी बिल (Model Tenancy Bill) लागू करने जा रही है। बिल को अंतिम रूप देने के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने फिर कवायद शुरू की है। विभाग ने संचालनालय से प्रदेश में बनाए बिल के ड्राफ्ट, लागू कानून और केंद्र के मॉडल किराएदारी एक्ट की तुलनात्मक रिपोर्ट मांगी है। नए कानून के ड्राफ्ट में किराएदार और मकान मालिक दोनों के हितों की रक्षा की व्यवस्था है। मकान पर कब्जा होने से रोकने के प्रावधान हैं। एग्रीमेंट खत्म होने पर किराएदार के मकान खाली न करने पर उसे पहले दो माह में दोगुना और तीसरे महीने से चार गुना किराया देना होगा। मकान भी प्रशासन खाली कराएगा। किराएदार की सुरक्षा के लिए मालिक द्वारा घर का नल कनेक्शन, गैस सप्लाई, मार्ग, लिफ्ट, सीढिय़ां, पार्किंग आदि बंद करने पाबंदी लगाई गई है।

    नगरीय विकास विभाग मॉडल किराएदारी बिल को दे रहा अंतिम रूप

    नगरीय विकास विभाग मॉडल किराएदारी बिल को अंतिम रूप देने के लिए बैठकें कर रहा है। अफसरों का कहना है, बिल जल्द वरिष्ठ सचिव समिति के पास भेजा जाएगा। वहां से अनुमति के बाद कैबिनेट में पेश होगा। बता दें, अभी प्रदेश में किराएदारी अधिनियम 2010 लागू है। यह सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। नया एक्ट ग्रामीण-शहरी, व्यावसायिक सभी प्रॉपर्टी पर लागू होगा। शासकीय, धार्मिक संस्थान, ट्रस्ट या वक्फ बोर्ड के अधीन परिसरों पर लागू नहीं होगा।

    विवाद सुलझाने कोर्ट जाने की जरूरत नहीं

    • -नए नियमों के तहत किराएदारी विवाद सुलझाने कोर्ट नहीं जाना होगा।
    • – जिले में किराया प्राधिकारी डिप्टी कलेक्टर स्तर के अफसर होंगे। किराया अतिरिक्त कलेक्टर कोर्ट होगा।
    • – अपील के लिए जिला जज की अध्यक्षता में रेंट ट्रिब्यूनल गठित होगा।
    • – किराएदारी की पूरी जानकारी रखने के लिए अलग पोर्टल बनेगा।
    • – मकान मालिक और किराएदार के बीच के एग्रीमेंट की सूचना किराया प्राधिकारी को 60 दिन में देनी होगी।
    • – प्राधिकारी इसे पोर्टल पर अपलोड करेंगे। किराया वृद्धि या मकान खाली करने जैसी सूचना यहीं अपडेट होंगी।

    विवाद घटेंगे, भरोसा बढ़ेगा

    मध्यप्रदेश में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 27.7 फीसदी आबादी शहरों में रहती है। यह 40 फीसदी पहुंचने का अनुमान है। लोग बड़ी संख्या में पढ़ाई, नौकरी, व्यापार, बेहतर सुविधा के लिए शहरों में आ रहे हैं। कई लोग किराएदारों के विवाद से बचने के लिए खाली आवास होने के बावजूद किराए पर नहीं देते। लोग अपने कार्यस्थल के पास ही अफॉर्डेबल राशि का भुगतान कर किराए पर आवास लेना चाहते हैं। कई बार मकान मालिक मनमाना किराया मांगते हैं। अभी कानून (Model Tenancy Bill) में इसके प्रावधान नहीं हैं। नए कानून में मकान मालिक अधिकतम दो माह का एडवांस किराया ही ले सकेंगे।

    मनमानी पर रोक, क्षेत्र के हिसाब से किराया

    नए एक्ट में जहां मकान मालिक के हितों की रक्षा करने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं. वहीं किराए पर दी जाने वाली संपत्तियों पर मनमानी किराया वसूलने से भी रोक लगाई गई है. इसमें क्षेत्र के आधार पर किराया तय किया जाएगा. जिससे किराएदारों को भी राहत मिलेगी और उन्हें मुंहमांगा किराया नहीं चुकाना पड़ेगा. वर्तमान में शहरों में संपत्ति कर के लिए अलग-अलग स्लैब हैं, इसी आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों पर किराए की दर भी निर्धारित की जाएगी.

    अतिरिक्त निर्माण पर रोक, क्षतिपूर्ति देनी होगी

    एमटीए के तहत अब किराएदार संबंधित संपत्ति में अतिरिक्त निर्माण नहीं करा सकेगा. यदि वह ऐसा कराता है, तो उसके साथ बेदखली की कार्रवाई भी की जा सकेगी. इसके साथ उसके द्वारा किराए के लिए जमा की गई एडवांस राशि में से ही अतिरिक्त निर्माण को हटाने के साथ मकान को व्यवस्थित किया जाएगा. मकान या दुकान में टूट-फूट होने पर भी यही प्रावधान लागू होंगे. यानि क्षतिपूर्ति किराएदार को चुकानी होगी.

    एमटीए में एजेंट को मिलेगा कानूनी दर्जा

    मकान मालिक और किराएदारों के बीच में बड़ा रोल एजेंटो का भी होता है, लेकिन अब तक इनको एक्ट में नहीं लिया गया था, लेकिन नए मॉडल टेनेंसी एक्ट में एजेंटों को भी एक्ट के दायरे में लाया गया है. इनको हर साल अपना पंजीयन कराना होगा. एजेंट संबंधित जिले में कलेक्टर कार्यालय में जाकर अपना पंजीयन करा सकेंगे. इसके लिए एजेंटो को मामूली शुल्क भी चुकाना होगा. ऐसे में अब एजेंटो को भी कानूनी दर्जा मिलेगा.

    ट्रिब्यूनल के बाद ही सिविल कोर्ट में होगी सुनवाई

    बता दें कि नए एक्ट के तहत मकान मालिक और किराएदार के बीच आपसी विवाद निपटाने के लिए किराया प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. इसकी अध्यक्षता अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारी करेंगे. वहीं अलग से एक रेंट कोर्ट भी होगी, जिसमें अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट मामले की सुनवाई करेंगे. इसी प्रकार रेंट ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा. जिसमें अतिरिक्त जिला न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश सुनवाई करेंगे. वहीं रेंट ट्रिब्यूनल में विवाद नहीं सुलझ पाने के बाद ही इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होगी.

    ग्रामीण क्षेत्रों की संपत्तियां भी एक्ट के दायरे में

    साल 2010 में जो किराएदारी का एक्ट बना था. उसमें केवल शहरी क्षेत्रों को लिया गया था, यानि ग्रामीण क्षेत्रों में यह कानून लागू नहीं होता था. लेकिन अब नया कानून शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू होगा. खास बात यह है कि अब तक दूतावास, बहु राष्ट्रीय कंपनियां, आयोग और अंतराष्ट्रीय संगठन समेत कुछ संस्थाओं को इस एक्ट से छूट थी, लेकिन अब नए किराएदारी के एक्ट में इन सबको अधिनियम के तहत प्रावधानों का पालन करना होगा. अन्यथा इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

    विवाद निपटाने के लिए न्यायालय और ट्रिब्यूनल का गठन

    नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश में अब तक किराएदारी अधिनियम 2010 का पालन किया जा रहा है. लेकिन इसमें कई विसंगतियां है. ऐसे में अब नए एक्ट एमटीए बनाया गया है. इस एक्ट में कई बातें स्पष्ट हैं, जिससे मकान मालिक और किराएदार के बीच बार-बार विवाद की नौबत नहीं बनेगी. वहीं यदि ऐसा हुआ तो इसके लिए भी एक्ट में न्यायालय और ट्रिब्यूनल का प्रावधान है. यानि कि एक्ट के लागू होते ही मध्य प्रदेश में किराएदारी के विवाद निपटाने के लिए न्यायालय या ट्रिब्यूनल की स्थापना की जाएगी.

    विधानसभा सत्र में रखा जाएगा मॉडल टेनेंसी एक्ट

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि "किराएदारी को लेकर नया माडल टेनेंसी एक्ट तैयार कर लिया गया है. अब इसका विविध स्तर पर मूल्यांकन किया जा रहा है. इसके बाद इस एक्ट को प्रमुख सचिव की बैठक में रखा जाएगा. इसके बाद फाइनल ड्राफ्ट तैयार होगा, जिसे बाद पीएस की अनुमति के बाद विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा.

    मालिक को कवच

    एग्रीमेंट खत्म (Model Tenancy Bill) होने पर किराएदार के मकान खाली न करने पर उसे पहले दो माह में दोगुना और तीसरे माह से 4 गुना किराया देना होगा। प्रशासन मकान खाली कराएगा। आवास के लिए किराया लेने पर अधिकतम दो व कारोबार के लिए 6 माह का एडवांस किराया देना होगा। किराएदार एक ही परिसर में दूसरे किराएदार को नहीं रख सकेगा। यदि किराएदार की मौत हो जाए तो उत्तराधिकारी को देनदारी चुकाएंगे।

  • मध्य प्रदेश में सड़क हादसों की दर देश में उच्च, मौतों में चौथे स्थान पर

    भोपाल 

     केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर में वर्ष 2023 में हुए सड़क हादसों की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। अगस्त के अंतिम हफ्ते में जारी इस रिपोर्ट से मध्य प्रदेश में सड़कों की बदहाली और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की बदइंतजामी खुलकर सामने आ गई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, उक्त अवधि में देश में सबसे ज्यादा सड़क हादसों में तमिल नाडु के बाद मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर रहा। हादसों में सबसे ज्यादा मौत उत्तर प्रदेश और तमिल नाडु में हुईं, जबकि मध्य प्रदेश चौथे नंबर पर रहा। इतना ही नहीं, देश में तेज रफ्तार की वजह से हुए हादसों में मध्य प्रदेश पहले स्थान पर रहा।

    रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में पूरे देश में चार लाख 80 हजार 583 सड़क हादसे हुए। इनसे एक लाख 72 हजार 890 लोगों की मौत हुई और चार लाख 62 हजार 825 लोग घायल हुए। देश में हुए कुल हादसों में से 14 प्रतिशत हादसे तमिल नाडु, 11.5 प्रतिशत मध्य प्रदेश, 10 प्रतिशत केरल, 9.39 प्रतिशत उप्र और 9 प्रतिशत हादसे कनार्टक में हुए। देश में यही पांच राज्य टाप-फाइव की सूची में शामिल हैं।

    टाप-पांच राज्य : कहां कितने हादसे

        तमिलनाडु – 67 हजार 213
        मध्य प्रदेश – 55 हजार 327
        केरल – 48 हजार 091
        उत्तर प्रदेश – 44 हजार 534
        कर्नाटक – 43 हजार 440

    सड़क हादसों में मौत : टाप-फाइव राज्य

        उप्र – 23 हजार 652
        तमिल नाडु – 18 हजार 347
        महाराष्ट्र – 15 हजार 366
        मप्र – 13 हजार 798
        कर्नाटक – 12 हजार 321

    नेशनल हाइवे पर हादसे

        उत्तर प्रदेश – 8446
        तमिलनाडु – 6258
        मध्य प्रदेश – 5780

    ट्रैफिक नियम तोड़ने के कारण सबसे ज्यादा हादसे मप्र में

        रिपोर्ट में सड़क हादसों की अलग-अलग वजहों का भी विश्लेषण किया गया है। सामने आया है कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा हादसे ट्रैफिक नियम तोड़ने की वजह से हुए।

        प्रदेश में ट्रैफिक नियम न मानने की वजह से 44 हजार 592 हादसे हुए। वहीं तेज रफ्तार की वजह से हुए हादसों में मरने वालों की संख्या मप्र में 11 हजार 380 रही, जो देश में सबसे ज्यादा है।

        देश में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में जबलपुर तीसरे नंबर पर है, जहां हादसों में 545 लोगों ने जान गंवाई है। दिल्ली 1457 मौत के साथ पहले नंबर पर है।

    टाप-10 शहर…जहां सबसे ज्यादा हादसे

        दिल्ली – 5834
        बेंगलुरु – 4974
        जबलपुर – 4205
        चेन्नई – 3653
        इंदौर – 3566
        मल्लपुरम – 3253
        हैदराबाद – 2943
        जयपुर – 2915
        भोपाल – 2906
        कोच्चि – 2803

    शाम 6 से 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे, मरने वालों में दो पहिया वाले ज्यादा

    रिपोर्ट में वर्ष 2020 से लेकर 2023 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। सामने आया कि शाम 6 से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे हुए। 2023 में इस समयावधि में 99 हजार 945 हादसे हुए हैं। यह कुल हादसों का 20.8 प्रतिशत है।

    ऐसे हादसों में जान गंवाने वाले सबसे ज्यादा दो पहिया सवार हैं। 2023 में सात हजार 591 दो पहिया सवारों की मौत हुई, जबकि पैदल चलने वालों की संख्या चार हजार 604 के साथ दूसरे नंबर पर है। एक हजार 593 कार सवारों की मौत हुई।

  • उद्योग और रोजगार को बढ़ावा, बस्तर में 11 सितंबर को आयोजित होगा इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम

    रायपुर

    क्षेत्रीय विकास को नई गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन का वाणिज्य एवं उद्योग विभाग आगामी 11 सितंबर 2025 को बस्तर में इन्वेस्टर कनेक्ट का आयोजन करने जा रहा है। यह प्रमुख निवेश संवर्धन पहल इससे पहले दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, रायपुर तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टोक्यो, ओसाका और सियोल में सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी है। इन आयोजनों के माध्यम से नवंबर 2024 से अब तक ₹6.65 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार अब छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट के माध्यम से निवेश संभावनाओं को बस्तर तक ले जा रही है, जो प्रदेश के सबसे गतिशील और संभावनाशील क्षेत्रों में से एक है।

    बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट राज्य सरकार की छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के अंतर्गत संतुलित क्षेत्रीय विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस नीति का उद्देश्य रोजगार सृजन, उद्यमिता को बढ़ावा और स्थानीय समुदायों का सशक्तिकरण है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि बस्तर की समृद्ध जनजातीय धरोहर और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण भी हो।

    छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के अंतर्गत ₹1000 करोड़ से अधिक निवेश करने वाली अथवा 1000 से अधिक रोजगार सृजित करने वाली परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। इस नीति में औषधि निर्माण, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र उद्योग, आईटी एवं डिजिटल तकनीक, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस व डिफेंस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। पर्यटन को भी उद्योग का दर्जा प्रदान किया गया है, जिसके तहत बस्तर में होटल, इको-टूरिज़्म, वेलनेस सेंटर, एडवेंचर स्पोर्ट्स और खेल सुविधाओं जैसी परियोजनाओं पर 45 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। उल्लेखनीय है कि बस्तर के 88 प्रतिशत ब्लॉक ग्रुप-3 श्रेणी में आते हैं, जिससे निवेशकों को अधिकतम नीति लाभ सुनिश्चित हो सकेगा।

    समावेशन को बढ़ावा देने के लिए इस नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत एससी/एसटी उद्यमियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी, वहीं नक्सलवाद से प्रभावित परिवारों और व्यक्तियों को भी 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा। यह सरकार की सामाजिक पुनर्वास और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एक अभिनव पहल के रूप में, नई औद्योगिक इकाइयों में आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार देने पर पाँच वर्षों तक उनके वेतन पर 40 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम ₹5 लाख प्रतिवर्ष) उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही, बस्तर में स्टील सेक्टर की इकाइयों को 15 वर्षों तक रॉयल्टी रीइम्बर्समेंट की सुविधा प्रदान की जाएगी, जिससे निवेशकों को दीर्घकालिक भरोसा मिलेगा और औद्योगिक विकास को स्थिरता प्राप्त होगी।

    सरकार को उम्मीद है कि बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट में देश-विदेश से 200 से अधिक प्रमुख निवेशक, उद्योग जगत के दिग्गज और स्थानीय उद्यमी शामिल होंगे। यह आयोजन सहयोग और विकास का एक उच्च-स्तरीय मंच साबित होगा। इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है, जो बस्तर की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव सिद्ध होंगे।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार बस्तर के युवाओं को वह कौशल और अवसर देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिसके वे अधिकारी हैं और जिनसे वे छत्तीसगढ़ की विकास गाथा के सक्रिय सहभागी बन सकेंगे। औद्योगिक नीति की प्रत्येक पहल स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और समृद्धि को घर-घर तक पहुँचाने के उद्देश्य से सोच-समझकर तैयार की गई है।

    बस्तर में छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट का आयोजन बस्तर के समग्र विकास को साकार करने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित होगा। यह बस्तर को सतत् और समावेशी विकास का प्रतीक बनाएगा, जिसकी जड़ें क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना में गहराई से जुड़ी हैं। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि अवसरों और लाभों का प्रवाह सीधे स्थानीय जनता तक पहुँचे।

  • कल होगी साय सरकार की पहली कैबिनेट बैठक, कांग्रेस का हमला- काम नहीं, चाय-बिस्किट तक सीमित

    रायपुर

    पीसीसी चीफ दीपक बैज ने आगामी कैबिनेट मीटिंग समेत कई मुद्दों पर सरकार पर निशाना साधा है. बैज ने कहा कि सरकार 2 सालों से सो रही है. अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ. किसानों के लिए DAP-यूरिया तो मिला नहीं, युवाओं के लिए रोजगार भी नहीं मिला. कर्मचारी सड़कों पर हैं. स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है. क्या इन सब विषय पर बात होगी.? बैज ने कहा कि ये सब कैबिनेट मीटिंग में बैठकर केवल चाय और बिस्किट खाते हैं.

    कांग्रेस कल बिलासपुर में “वोट चोर गद्दी छोड़” कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है. पीसीसी चीफ दीपक बैज इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बिलासपुर दौरे पर रहेंगे. कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट समेत तीनों सह प्रभारी भी शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि पूरे देश में भारतीय लोकतंत्र को बचाने के लिए कांग्रेस लड़ाई लड़ रही है.

    बीते दिन एक वीडियो सामने आया जिसमें मंत्री केदार कश्यप के बंगले के एक कर्मचारी ने मंत्री पर मारपीट करने का आरोप लगाया और न्याय की मांग की. वीडियो वायरल होते ही प्रदेश की सियासत गर्म हो गई. इस मामले को लेकर आज कांग्रेस मंत्री केदार कश्यप के बंगले का घेराव करने जा रही है.

    मंत्री को कर्मचारी से माफी मांगनी चाहिए : PCC चीफ
    इस मामले को लेकर पीसीसी चीफ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री इसे कांग्रेस का षडयंत्र बता रहे हैं. लेकिन क्या कांग्रेस ने मां की गाली देने बोला था ? मंत्री को कर्मचारी से माफी मांगनी चाहिए.

    यहां 2 कानून है : पीसीसी चीफ
    उन्होंने आगे कहा कि सरकार मंत्री के ऊपर कार्यवाही नही करेगी. इसलिए माफी मांग लेना चाहिए. घटना के एक घण्टे पहले और बाद का सीसीटीवी वीडियो जारी करना चाहिए. क्या मुख्यमंत्री उस कर्मचारी से बात की ? दोनों पक्षों को सुनना चाहिए. किसी भी छोटे कर्मचारियों की इतनी हिम्मत नही होती कि ऐसी हरकत करे, यहां दो कानून हैं- बड़े अधिकारी के लिए कुछ और गरीब के लिए कुछ और है.

    धर्मांतरण सरकार की प्री प्लानिंग : पीसीसी चीफ
    प्रदेश में धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को लेकर PCC चीफ बैज ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यह सरकार की बड़ी विफलता है. पहले कांग्रेस के ऊपर आरोप लगा रही थी. आज बीजेपी की सरकार में कितनी घटनाएं घट रही.?  मुद्दों का ध्रुवीकरण और राजनीति कर रही सरकार. धर्मांतरण सरकार की प्री प्लानिंग थी.

  • दीक्षांत, शैक्षणिक यात्रा की पूर्णता के साथ, समाज और राष्ट्र की सेवा यात्रा का शुभारंभ अवसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    माता-पिता, गुरुजनों के योगदान के प्रति हमेशा रहें कृतज्ञ : राज्यपाल पटेल

    दीक्षांत, शैक्षणिक यात्रा की पूर्णता के साथ, समाज और राष्ट्र की सेवा यात्रा का शुभारंभ अवसर
    विश्वविद्यालयों में कृषि संकाय, फैशन डिजाइनिंग जैसे रोजगारपरक कोर्स संचालन के लिए हो रही है विशेष पहल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
    दीक्षांत समारोह सिर्फ डिग्री प्राप्त करने का उत्सव नहीं, विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और गुरुजनों के मार्गदर्शन का है प्रतिफल
    राज्यपाल पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों को उपाधि और स्वर्ण पदक प्रदान किए
    राज्यपाल पटेल ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को ग्लोबल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में प्रदेश के एकमात्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थान प्राप्त करने पर दी बधाई
    राज्यपाल पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्वलित कर दीक्षांत समारोह का किया शुभारंभ
    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के 78 हजार विद्यार्थियों को मिली पीएचडी, स्नातकोत्तर सहित अन्य उपाधि
    कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ बरकतउल्ला विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह

    भोपाल

    राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने कहा कि विद्यार्थी अपने माता-पिता और गुरूजनों के योगदान के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहें। सफलता के बाद भी उनका हमेशा सम्मान करें। दीक्षांत शपथ का प्रतिदिन मनन करें और जीवन भर उसका अनुसरण भी करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नए, डिजिटल और "विकसित भारत" के सपने को साकार करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। दीक्षांत, वह अवसर है जब शैक्षणिक यात्रा की पूर्णता के साथ, समाज और राष्ट्र की सेवा यात्रा का शुभारंभ होता है। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का उत्सव नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के वर्षों की मेहनत, अनुशासन और गुरुजनों के सफल मार्गदर्शन का प्रतिफल है। राज्यपाल पटेल सोमवार को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण कर समारोह का शुभारंभ किया। विश्वविद्यालयीन स्मारिका और पुस्तक का लोकार्पण भी किया। राज्यपाल व कुलाधिपति पटेल तथा मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अगुवाई में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की शोभा यात्रा ने मंत्रोच्चार के बीच सभागार में प्रवेश किया। राज्यपाल पटेल का विश्वविद्यालय के कुलगुरु सुरेश कुमार जैन ने पौधा, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। कुलगुरु जैन ने दीक्षित विद्यार्थियों को दीक्षांत उपदेश दिया और दीक्षांत शपथ दिलाई।

    डिग्री और स्वर्ण पदक प्राप्त कर खिले विद्यार्थियों के चेहरे

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं के लिए उनके कौशल, रुचि और क्षमता के अनुसार शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर अनेक अवसर विद्यमान है। आज देश में कृषि, खाद्य, फिजिकल एजुकेशन, साइबर सिक्योरिटी, फोरेंसिक साइंस, ड्रोन तकनीक और विधि आदि विषयों में कैरियर की संभावनाएं तेजी से बढ़ी है। राज्यपाल पटेल ने युवाओं से अपने ज्ञान और कौशल से समाज और राष्ट्र उत्थान के लिए आगे आने का आह्वान किया है। राज्यपाल पटेल ने समारोह में विद्यार्थियों को डिग्री और स्वर्ण पदक प्रदान किए। दीक्षित विद्यार्थियों और स्वर्ण पदक प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने विश्वविद्यालय को शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के बेहतर प्रयासों के लिए नैक से "ए" ग्रेड प्राप्त करने और ग्लोबल वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिग में प्रदेश के एक मात्र विश्वविद्यालय के रूप में स्थान बनाने के लिए शुभकामनाएं दी।

    दीक्षांत समारोह अब भारतीय परंपरा के अनुरूप आयोजित किए जा रहे हैं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारतीय अपनी क्षमता से विश्व में पहचान बना रहे हैं। अतीत की गलतियों को सुधारते हुए दीक्षांत समारोह अब भारतीय परंपरा के अनुरूप आयोजित किए जा रहे हैं। प्रदेश में सबसे पहले वर्ष 2020 में शिक्षा नीति लागू की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सभी भाषाओं के अध्ययन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी राज्यों में बोली जाने वाली भाषाएं हमारी राष्ट्रभाषा हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रभाषा हिंदी में मेडिकल की पढ़ाई कराने की पहल की है, जिसे काफी सराहना मिल रही है। शिक्षा को केवल नौकरियों से न जोड़ा जाए, यह समाज में ज्ञान के सतत प्रसार का माध्यम है। राज्य में कुलपति को कुलगुरु की नई संज्ञा मिली है, जिसे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली ने भी अपनाया है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में नवाचारों के साथ कृषि संकाय और फैशन डिजाइनिंग जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम की पढ़ाई कराई जा रही है।

    नए मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में विश्वविद्यालयों की बड़ी भूमिका

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के माध्यम से आज 54 हजार से अधिक विद्यार्थियों को स्नातक, 23 हजार विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर, 190 विद्यार्थियों को पीएचडी, 21 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, इस प्रकार कुल 78 हजार विद्यार्थियों के सपने साकार हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्राइवेट कॉलेज और शासकीय विश्वविद्यालयों को मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने के लिए सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है। देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर के सहयोग से जनजातीय बहुल झाबुआ जिले में मेडिकल कॉलेज खुलने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में सुशासन की नई बयार आई है। देश के युवा, किसान, गरीब सभी वर्गों के कल्याण के साथ सरकार आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी देश के स्वाभिमान और समाज के सभी वर्गों के हितरक्षक हैं। 21वीं सदी भारत की होगी और भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा।

    प्रदेश के विश्वविद्यालयों में डिजिटल वैल्यूएशन होगा शुरू : मंत्री परमार

    तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि आज विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। हमें जीवनभर समाज और परिवार का ऋण उतारने के लिए कार्य करना चाहिए। देश में भारतीय परंपरा के अनुसार दीक्षांत समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए सबसे पहले प्रदेश में शिक्षा नीति लागू की गई। राज्य सरकार सभी विश्वविद्यालयों में डिजिटल मूल्यांकन शुरू करेगी। विद्यार्थियों को ऑनलाइन कॉपी उपलब्ध कराएंगे। शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के साथ प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में 1 या 2 भाषाओं की पढ़ाई शुरू करेंगे। मध्यप्रदेश हृदय प्रदेश है। यहां भाषाओं को जोड़ने का कार्य शुरू होगा।

    विद्यार्थी अपनी ऊर्जा राष्ट्र और समाज के कल्याण में लगाएं

    कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन ने विद्यार्थियों को शपथ दिलाते हुए कहा कि आप कही भी जाएं अपने विश्वविद्यालय और अपने शहर को कभी न भूलें। हमेशा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलें और स्वाध्याय करें। साथ ही अपनी ऊर्जा समाज और राष्ट्र के कल्याण में लगाएं। दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को डी.लिट, पीएचडी और स्नातकोत्तर की उपाधि प्रदान की गईं। इस दौरान विभिन्न संकायों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल भी प्रदान किए गए।

    कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, आयुक्त प्रबल सिपाहा, कुल सचिव अनिल शर्मा, कार्यपरिषद के सदस्य, विभिन्न संकायों के अध्यक्ष, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहें।

     

  • सुप्रीम कोर्ट ने तय किया मुआवजे का स्तर, दुर्घटना में घायल या दिव्यांग बच्चों को कुशल श्रमिक के अनुसार देंगे

    इंदौर

    सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक दुर्घटना क्लेम मामले में सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या उसके स्थायी रूप से दिव्यांग होने पर क्षतिपूर्ति की गणना उसे कुशल श्रमिक मानते हुए की जाएगी। राज्य में दुर्घटना के समय कुशल श्रमिक का जो न्यूनतम वेतन होगा, उसे ही बच्चे की आय माना जाएगा। दावेदार व्यक्ति को न्यायाधिकरण के समक्ष न्यूनतम वेतन के संबंध में दस्तावेज पेश करने होंगे।

     सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक दुर्घटना क्लेम मामले में सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसका असर देशभर में होगा। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या स्थायी रूप से दिव्यांग होने पर क्षतिपूर्ति की गणना अब बच्चे को कुशल श्रमिक मानते हुए की जाएगी। राज्य में दुर्घटना के समय कुशल श्रमिक का जो न्यूनतम वेतन होगा, उसे ही बच्चे की आय माना जाएगा।

    दावेदार व्यक्ति को न्यायाधिकरण के समक्ष न्यूनतम वेतन के संबंध में दस्तावेज पेश करने होंगे, अगर वह ऐसा नहीं कर पाता है तो इन दस्तावेजों को पेश करने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होगी। फैसले की प्रति सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों को भेजी जाए, ताकि निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके।

    बता दें, अब तक दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या स्थायी दिव्यांग होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति की गणना नोशन इंकम (काल्पनिक आय, वर्तमान में 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष) के हिसाब से की जाती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब राज्य में कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति मिलेगी। वर्तमान में मप्र में कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 14,844 मासिक, यानी 495 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है।

    साल 2012 में हुई थी दुर्घटना, ऐसे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

    14 अक्टूबर 2012 को इंदौर निवासी आठ वर्षीय हितेश पटेल पिता के साथ सड़क पर खड़ा था, तभी गुजर रहे वाहन ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में हितेश को गंभीर चोट आई। यह कहते हुए कि उसे स्थायी दिव्यांगता आई है, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (जिला न्यायालय) के समक्ष दस लाख रुपये का क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया। जिला न्यायालय ने यह मानते हुए कि हितेश को 30 प्रतिशत दिव्यांगता आई है, उसे तीन लाख 90 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने के आदेश बीमा कंपनी को दिए।

    इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि चूंकि हितेश की आयु सिर्फ आठ वर्ष है, क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाकर आठ लाख 65 हजार रुपये कर दिया। इस फैसले से असंतुष्ट होकर सुप्रीम कोर्ट में अपील हुई। इसे स्वीकारते हुए कोर्ट ने क्षतिपूर्ति की राशि 35 लाख 90 हजार रुपये कर दी।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या?

    बता दें कि अब तक दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु या उसके स्थायी दिव्यांग होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति की गणना नोशन इनकम (काल्पनिक आय, वर्तमान में 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष) के हिसाब से की जाती है।

    अब राज्य में कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति मिलेगी। वर्तमान में मध्य प्रदेश में कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन 14844 मासिक यानी 495 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है।

        कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन को ही मानें बच्चे की आय
        कोर्ट ने फैसले की प्रति सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों को भेजने का दिया निर्देश

    ऐसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला?

    14 अक्टूबर 2012 को इंदौर निवासी आठ वर्षीय हितेश पटेल पिता के साथ सड़क पर खड़ा था, तभी एक वाहन ने उसे टक्कर मार दी। हितेश को गंभीर चोट आई। यह कहते हुए कि उसे स्थायी दिव्यांगता आई है, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के समक्ष 10 लाख रुपये का क्षतिपूर्ति दावा प्रस्तुत किया गया।

    न्यायालय ने यह मानते हुए कि हितेश को 30 प्रतिशत दिव्यांगता आई है, उसे तीन लाख 90 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश बीमा कंपनी को दिया। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि चूंकि हितेश की आयु सिर्फ आठ वर्ष है, क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ाकर आठ लाख 65 हजार रुपये कर दिया।

    ऐतिहासिक फैसला, देशभर में लागू होगा

        सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। पहली बार बच्चों की मृत्यु या स्थायी दिव्यांग होने पर उन्हें कुशल श्रमिक मानते हुए कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से क्षतिपूर्ति के लिए हकदार माना है। फैसले का असर पूरे देश में चल रहे क्लेम प्रकरणों पर पड़ेगा। -राजेश खंडेलवाल, दुर्घटना क्लेम प्रकरण के वकील

     

  • फर्जी GST बिलिंग का पर्दाफाश, मोक्षित कॉरपोरेशन समेत 85 फर्मों पर DGGI की बड़ी कार्यवाही

    रायपुर

    डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI), रायपुर जोनल यूनिट ने मेसर्स मोक्षित कारपोरेशन और उससे जुड़ी 85 फर्मों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 162.22 करोड़ रुपये के कर योग्य मूल्य पर 28.46 करोड़ रुपये के अनुचित इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का नोटिस जारी किया है.

    फरवरी 2024 से शुरू हुई जांच में पता चला कि मोक्षित कारपोरेशन ने फर्जी इनवॉइस के जरिए बड़े पैमाने पर GST अपवंचन किया. जांच के दौरान विभागीय टीमों ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कई फर्मों के ठिकानों पर तलाशी और निरीक्षण किया. इस दौरान खुलासा हुआ कि फर्म के पार्टनर शशांक चोपड़ा ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर दर्जनों फर्जी फर्में स्थापित की थीं, जिनके जरिए अनुचित ITC का दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियां संचालित की गईं. इन गतिविधियों के लिए 200 से अधिक बैंक खातों का उपयोग किया गया. जांच के बाद मोक्षित कारपोरेशन पर 28.46 करोड़ रुपये की कर मांग की गई है, साथ ही संबद्ध 85 फर्मों को दंड नोटिस जारी किए गए हैं. यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर चल रहे GST फर्जीवाड़े को उजागर करने और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

    गौरतलब है कि DGGI ने फरवरी 2024 में जांच शुरू की थी, जिसके बाद ACB-EOW ने भी शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार किया. प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर ने भी इस मामले में कार्रवाई की है.