• धान की खेती बढ़ी तो यूरिया पर संकट गहराया, प्रदेशभर में किसानों की लंबी कतारें

    सतना
    इस खरीफ सीजन की बुवाई के बाद यूरिया की मांग में भारी वृद्धि देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण दलहन फसलों की जगह धान की खेती के रकबे में लगातार बढ़ोतरी है। साथ ही धान को सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने से भी इसके प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। इस तरह एक तरफ धान की बढ़ती बुवाई ने यूरिया की खपत बढ़ा दी, वहीं दूसरी तरफ इस वर्ष देश में यूरिया का उत्पादन सीमित रहा और आयात की मात्रा भी हर साल घटती जा रही है। सरकार हर वर्ष दलहन व तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए अनुमानित लक्ष्य तय करती है, लेकिन किसानों की रुचि गेहूं व धान की फसलों की ओर ज्यादा है। यही वजह है कि एक बोरी यूरिया के लिए किसान रात-रात भर लंबी कतारों में लगा रहता है।
     
    धान का रकबा 35 लाख हेक्टेयर
    केंद्रीय कृषि कल्याण एवं विकास विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में धान का क्षेत्रफल इस बार 1039.81 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 1002.41 लाख हेक्टेयर था। यानी लगभग 37 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं दलहन का रकबा बहुत मामूली बढ़ा है। इस बार दलहन फसलों का कुल क्षेत्रफल 109.52 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष से केवल 1.14 लाख हेक्टेयर अधिक है। मूंग और उड़द में हल्की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अरहर में 1.34 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज हुई है।

    धान में यूरिया की होती है अधिक खपत
    कृषि विभाग सतना के उपसंचालक आशीष पांडे बताते हैं कि दलहन फसलों में यूरिया की आवश्यकता बहुत कम होती है, क्योंकि वे स्वयं नाइट्रोजन का स्रोत होती हैं। इसके विपरीत धान की बुवाई और जर्मिनेशन के दौरान यूरिया की भारी मात्रा में जरूरत होती है।

    वहीं कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां के विज्ञानी डॉ. अखिलेश कुमार का कहना है कि किसानों को धान और गेहूं की जगह दलहन व तिलहन फसलों की ओर ध्यान देना चाहिए। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी, बल्कि खाद की समस्या से भी राहत मिलेगी। हालांकि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान व गेहूं की सरकारी खरीद होने से किसान इन्हीं फसलों पर निर्भर हैं।

    यूरिया का आयात घटा, आपूर्ति में कमी
        हर साल यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ती जा रही है, जबकि उत्पादन और आयात दोनों घट रहे हैं।
        आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, बीते चार वर्षों में भारत में आयातित यूरिया की मात्रा में लगातार गिरावट आई है।
        इसकी वजह वैश्विक भी हो सकती है। चीन, सऊदी अरब, ओमान से यूरिया आयात होता है।

    तिलहन फसलों में गिरावट
    दलहन की तरह तिलहन फसलों का रकबा भी घटा है। इस बार तिलहनों की बुवाई 178.64 लाख हेक्टेयर दर्ज हुई, जो पिछले वर्ष से 6.74 लाख हेक्टेयर कम है। सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख तिलहन फसलों में गिरावट देखी गई है।

  • मंडला में 300 मीटर दूर स्कूल, पास में गांव… और बीच में मिला विस्फोटकों से भरा ‘लावारिस गोदाम’

    बालाघाट
    सर्चिंग के दौरान जवानों को अक्सर नक्सली डंप में डेटोनेटर, जिलेटिन जैसे घातक विस्फोटक मिलते आए हैं, लेकिन नक्सलियों तक ये विस्फोटक कैसे और किस माध्यम से पहुंच रहे हैं, पुलिस इसकी तफ्तीश में जुटी है। जांच की कड़ी को जोड़ते हुए बालाघाट पुलिस मंडला के बीजाडांडी अंतर्गत डूंगरिया के जंगल में खेत पर बने उस गोदाम तक पहुंची है, जिसके संचालन में सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही थी।

    2023 में स्थापित इस गोदाम में भारी मात्रा में एक्सपायर हो चुका विस्फोटक भंडारित मिला है। विस्फोटक अधिनियम के जो सुरक्षा नियम होते हैं, उन नियमों का यहां पालन नहीं हो रहा था। गोदाम, लावारिस हालात में है, जहां पुलिस को न सुरक्षा गार्ड मिला, न सीसीवीटी कैमरे, न ही बाउंड्रीवाल। दो साल में ही खंडहर में बदल चुके इस गोदाम के चारों तरफ झाड़ियां हैं। डीएसपी (हाकफोर्स) आशीष पटेल ने बताया कि गोदाम से महज 300 मीटर की दूरी पर स्कूल है। डेढ़ किमी पर गांव है।
     
    बगैर सुरक्षा के भारी मात्रा में रखा विस्फोटक कभी भी बड़ी घटना का कारण बन सकता था। नक्सली, गोदाम लूट भी सकते थे। इसलिए पुलिस ने गोदाम को सील किया है। पुलिस ने नर्मदा इंटरप्राइजेस के मालिक तथा लाइसेंस धारक हरजिंदर सिंह गुजराल, मैनेजर प्रदीप झारिया और गार्ड प्रमोद कुमार दाहिया से पूछताछ शुरू कर दी है। बता दें कि गोदाम में 3075 किलो जिलेटिन, 6995 नग डेटोनेटर, समेत अन्य घातक विस्फोटक हैं, जिसे सील कर दिया गया है।

    नागपुर की सोलर इंडस्ट्री से मांगी डीलरों की लिस्ट
    पुलिस जानकारी के अनुसार, 2023 से नर्मदा इंटरप्राइजेस डीलर के रूप में बोरवेल खनन, स्टोन क्रशर कंपनी, माइंस या अन्य ब्लास्टिंग करने वाले कंपनियों को विस्फोटक बेचता आ रहा है। नर्मदा इंटरप्राइजेस में नागपुर की सोलर इंडस्ट्री से विस्फोटकों की खरीदारी होती है। सोलर इंडस्ट्री बड़ी फर्म है, जो मप्र सहित महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे राज्यों में विस्फोटकों की वैध तरीके से सप्लाई करती है।

    पुलिस ने सोलर इंडस्ट्री से भी पत्राचार कर उन डीलर की सूची मांगी है, जिसे विस्फोटकों की सप्लाई की जाती है। जांच में सामने आया है कि नर्मदा इंटरप्राइजेस मंडला में तीन विक्रेताओं को विस्फोटक क्रय करता है। इसमें कुलदीप गुप्ता, दादा थनथनपाल स्टोन क्रशर और हीरक इन्फ्रा माइन है।

    अब मंडला प्रशासन की निगरानी में गोदाम
    बालाघाट पुलिस की सीलबंद कार्रवाई के बाद गोदाम की निगरानी अब मंडला जिला प्रशासन के अधीन है। अब बड़ा सवाल खड़ा एक्सपायर हो चुके इन विस्फोटकों को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाएगा या नहीं। डीएसपी पटेल ने बताया कि इस संबंध में नागपुर की सोलर इंडस्ट्री और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गनाइजेशन (पीईएसओ) से संपर्क कर गोदाम में भंडारित विस्फोटकों को लेकर निर्णय लिया जाएगा। दस्तावेजों की जांच से स्पष्ट हुआ है कि नर्मदा इंटरप्राइजेस द्वारा खपत से अधिक विस्फोटक भंडारित किया गया है। पुलिस इसी बिंदू पर जांच करेगी कि आखिर खपत से अधिक विस्फोटक रखने का मकसद क्या है।

    कल आठ सितंबर को गढ़ी पुलिस जांच से जुड़े अन्य तथ्य जुटाएगी।
    मंडला के बाद अब जबलपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्ना में भी जांच होगी।
    बालाघाट में एचसीएल, मायल व अन्य माइंस सीधे कंपनी से विस्फोटक खरीदते हैं।
    गोदाम में सोलर प्राइम गोल्ड, इको पावर सोलर, डेटोनेटर, जिलेटिन, सोलर कोर्ड हैं।

    एक्सपायर विस्फोटक हो सकता है घातक
    विस्फोटक अधिनियम के अनुसार विस्फोटकों के उपयोग की निश्चित वैधता होती है। वैधता समाप्त होने के बाद आमतौर पर विस्फोटक का प्रभाव कम होता है, लेकिन कई बार ये घातक भी हो सकते हैं। इनके रख-रखाव में चूक या विद्युतीकरण से संपर्क में आने से विस्फोटक में ब्लास्ट भी हो सकता है। इसलिए एक्सपायर हो चुके विस्फोटक हमेशा के लिए निष्क्रिय या प्रभावहीन हो गए हैं, ऐसा आंकलन करना, जानलेवा भूल हो सकती है।

  • खाद्य सुरक्षा की लापरवाही: स्कूल में कीड़े, प्रिंसिपल को नोटिस जारी

    रायगढ़
    सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक व स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, दूसरी ओर स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के कारण बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। ताजा मामला घरघोड़ा विकासखंड के संकुल केंद्र टेरम स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है। यहां आकस्मिक निरीक्षण पर पहुंचे अधिकारी को मध्याह्न भोजन में कीड़े मिले हैं। मामले में बीईओ ने प्राचार्य को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
     
    प्रिंसिपल को मिला नोटिस
    टेरम स्कूल के प्राचार्य किशोर देवांगन पर यह आरोप है कि उनकी सीधी निगरानी में बच्चों को गंदा भोजन परोसा जा रहा था। यह आचरण न सिर्फ घोर लापरवाही है बल्कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का भी खुला उल्लंघन है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने इस गंभीर लापरवाही पर प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शासन द्वारा समय-समय में जारी साफ-सफाई, सावधानी एवं सतर्कता बरतने संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देशों को रसोईयों एवं स्व सहायता समूहों को आपके द्वारा निर्देशित नहीं किया गया।

    इससे प्रतीत होता है कि बच्चों के सेहत का कोई ख्याल नहीं रखते हुए बिना साफ-सफाई कर भोजन तैयार किया जा रहा है तथा अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाही व अनुशासनहीनता बरती जा रही है जो कि छ०ग० सिविल सेवा आचरण अधिनियम-1965 के नियम-3 के विपरीत है। इस कृत्य के लिए क्यों न वरिष्ठ कार्यालय को आपके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु प्रस्तावित किया जाए।

    बहरहाल तीन दिवस के भीतर शालेय कार्यावधि के पश्चात अधोहस्ताक्षरकर्ता के समक्ष स्वतः उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण अनिवार्यतः प्रस्तुत करना सुनिश्चित करने का निर्देश दिए है। वहीं, स्पष्टीकरण संतोषजनक स्थिति नहीं पाये जाने पर आगामी माह का वेतन लंबित रखते हुए खिलाफ एकपक्षीय कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।

    सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं के निर्देश से मचा हड़कंप
    स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी नोटिस में कई तथ्यों का उल्लेख किया गया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि बच्चों की जान से खिलवाड़ किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों की इस सख्त चेतावनी और निर्देश से अन्य स्कूलों के प्रचार्य एवं प्रधान पाठकों में हड़कंप मच गया है। वही देखना यह भी होगा कि इस निर्देश और सख्ती बातों का कितना असर पड़ता है।

    क्या कहते हैं विकासखंड शिक्षा अधिकारी
    इस विषय मे जानकारी लेने जब हमने विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी संतोष सिंह से बच्चों के खाने में कीड़े निकलने पर उनके द्वारा जारी नोटिस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा मेरे ध्यान में नही है,अभी थोड़ा व्यस्त हूं। 

  • उज्जैन में बड़ा हादसा! कार सहित नदी में गिरे पुलिस अधिकारी, दो शव मिले, एक लापता

    उज्जैन
    उज्जैन में शिप्रा के बड़े पुल से शनिवार रात 9. 30 बजे एक कार नीचे नदी में गिर गई थी। कार में उन्हेल टीआई अशोक शर्मा, एसआई मदनलाल निनामा और एक महिला आरक्षक आरती पाल बैठे थे। 11 घंटे चले रेस्क्यू के बाद टीआई शर्मा का शव मंगलनाथ क्षेत्र से मिला है। वहीं भैरवगढ़ क्षेत्र में एसआई निनामा का शव मिला है। महिला आरक्षक की तलाश जारी है।

    एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि ग्राम गुराड़िया सांग से एक महिला लापता हुई थी। इसकी तलाश में उन्हेल टीआई अशोक शर्मा, एसआई निनामा और महिला आरक्षक चिंतामण क्षेत्र की ओर जा रहे थे। इस दौरान शिप्रा नदी का बड़ा पुल पार करते समय कार नीचे गिर गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू शुरू किया। शिप्रा के बढ़े हुए जलस्तर, तेज बहाव और मटमैले पानी के कारण रेस्क्यू में परेशानी हुई।
      
    लगातार सर्चिंग अभियान के बीच रविवार सुबह उन्हेल टीआई और दो अन्य पुलिसकर्मियों के मोबाइल बंद मिले। इनकी आखिरी लोकेशन घटनास्थल के पास पाई गई। इस बीच मंगलनाथ के समीप शिप्रा नदी में पुलिस यूनिफार्म में एक शव मिला। शव उन्हेल टीआइ अशोक शर्मा का है। इसके बाद एसआई का शव मिला।
    सर्चिंग में दो ड्रोन भी लगाए गए हैं

    देर रात कार नदी में गिरने की सूचना मिलने पर महाकाल टीआई गगन बादल व होमगार्ड के जवान मौके पर पहुंचे गए थे। रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है। सर्चिंग के लिए दो ड्रोन भी लगाए गए हैं।

    टीआई बादल ने बताया कि शनिवार रात को बड़नगर रोड पर शिप्रा नदी पर बने बड़े पुल से एक कार गिरने की सूचना मिली थी। कार सवार लोग चक्रतीर्थ की ओर से कार्तिक मेला मैदान तरफ जाते समय पुल पर रैलिंग नहीं लगी होने के कारण कार सीधे नदी में गिर गई।

    जिले व आसपास के क्षेत्रों में कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। पुलिस का कहना है कि गोताखोरों की मदद से कार निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    एक दिन पहले ही पुल पर निरीक्षण करने पहुंचे थे एसपी
        शुक्रवार रात को ही पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा बड़े पुल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने 24 घंटे पुलिस बल तैनात रहने के निर्देश दिए थे।
        जिससे किसी भी आपात स्थिति में आमजन को तत्काल सहायता उपलब्ध हो सके। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के पास प्राथमिक उपचार किट एवं लाइफ जैकेट भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहे।
        पुलिस टीम द्वारा नियमित पेट्रोलिंग करते हुए स्थिति पर सतत निगरानी रखने को भी कहा था। वहीं आवश्यक बैरिकेडिंग एवं सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए थे।
        इसके अतिरिक्त, वर्षा एवं बाढ़ जैसी परिस्थितियों में रेस्क्यू कार्यवाही के लिए पुलिसकर्मियों को रस्सी, टार्च एवं वायरलेस सेट उपलब्ध कराने को कहा था।

  • मिशन वात्सल्य भर्ती अपडेट: पात्र और अपात्र उम्मीदवारों की सूची जारी, 10 सितंबर तक दर्ज करें आपत्ति

     बालोद

    जिले में मिशन वात्सल्य योजना अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन और किशोर न्याय बोर्ड के संचालन के लिए संविदा पदों को लेकर प्रक्रिया एक बार फिर सुर्खियों में है। कुल 16 पदों (जिला बाल संरक्षण इकाई 8 और चाइल्ड हेल्पलाइन 8) पर की जा रही भर्ती में पात्र-अपात्र सूची जारी कर दी गई है।

    महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि आवेदन पत्रों का पुनः परीक्षण कर सूची प्रकाशित की गई है, जिसे विभागीय कार्यालय के सूचना पटल के साथ-साथ जिला बालोद की आधिकारिक वेबसाइट balod.gov.in पर देखा जा सकता है।

    अब विभाग ने अभ्यर्थियों को अपनी पात्रता साबित करने का पुनः अवसर दिया है। यदि किसी आवेदक को जारी सूची पर आपत्ति है, तो वह प्रमाण और साक्ष्य संलग्न करते हुए 10 सितंबर 2025 को शाम 5 बजे तक अपनी आपत्ति भेज सकता है। आपत्ति केवल स्पीड पोस्ट, कुरियर या रजिस्टर्ड डाक से ही स्वीकार की जाएगी।

    जिला कार्यक्रम अधिकारी ने साफ कहा है कि कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से आवेदन स्वीकार नहीं होंगे और न ही अंतिम तिथि के बाद मिले अभ्यावेदन पर विचार किया जाएगा। इस घोषणा के बाद संविदा पदों के दावेदारों में फिर से हलचल मच गई है। कई अभ्यर्थी दस्तावेज जुटाने में लगे हैं, तो वहीं सूची में नाम न आने से असंतुष्ट उम्मीदवार आपत्ति की तैयारी कर रहे हैं। अब देखना होगा कि 10 सितंबर के बाद पात्र उम्मीदवारों की अंतिम सूची में किसका नाम शामिल होता है।

  • MP से पंजाब बाढ़ राहत में हाथ, अशोकनगर सिख समाज ने राशि एकत्रित कर बांटी

    अशोकनगर
     उत्तर भारत में मानसून ने तबाही मचा रखी है। पूरा पंजाब बाढ़ और तबाही से जूझ रहा है। हजारों परिवार बर्बाद हो गए हैं। केंद्र और स्थानीय सरकार तो मदद कर ही रही है। की सिख समाज ने भी बाढ़ग्रस्त इलाके के दुखी और बेघर लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। पहल अशोकनगर सिख समाज ने की है, जिसने अभी तक 35 लाख एकत्रित कर लिए हैं। जल्द ही यहां से एक प्रतिनिधि मंडल पंजाब जाकर मदद देगा।

    देश के पंजाब में तेज बारिश से आई बाढ़ मे तबाह हुए लोगों के लिए अब जिले की सिख समाज आगे आई है जहां समाज के द्वारा ग्राम ग्राम जाकर सिख समाज के लोगों से धनराशि एकत्रित की जा रही है वहीं गुरुद्वारों से भी पंजाब के लोगों की मदद के लिए मदद मांगी गई तो महज चार दिन में ही 35 लाख रुपए इकट्ठे हो गए।

    उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों पंजाब में आई बाढ़ के बाद कई जिलों में हालात बेहद खराब हैं। बाढ़ न केवल किसानों की फसलें बल्कि घर और मवेशी के साथ जान माल का भी भारी नुकसान हुआ है। कई इलाकों का पानी तो अभी उतरा भी नहीं है, जिसके बाद पंजाब की इस दुख की घड़ी में मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की सिख समाज आगे आई है। पंजाब में बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए पैसा एकत्र किया जा रहा है। सिख समाज के लोग सामूहिक रूप से गांव गांव तक पहुंच रहे हैं। सिख परिवार एवं गुरुद्वारे से भी मदद मांग रहे हैं जिसके चलते लोगों ने दिल खोल कर दान दिया है।
    मदद लेकर समाज के लोग पंजाब जाएंगे

    सिख समाज के लोगों के अनुसार पंजाब में बाढ़ पीड़ितों के लिए चार दिन पहले ही यह अभियान शुरू किया था, जिसके बाद लोगों ने खूब सहयोग मिला और चार दिन के अंदर ही 35 लाख रुपए एकत्रित कर लिए हैं। बताया जा रहा है कि यह अभियान 7 दिन और चलाया जाएगा और एक बड़ी धनराशि एकत्रित कर सिख समाज के 25 से 30 लोग पंजाब जाएंगे। वहां स्थानीय प्रशासन से मिलकर वास्तविक नुकसान वाले पीड़ित परिवारों के लिए यह धनराशि दी जाएगी, फिर चाहे वह किसी भी समाज या धर्म के लोग हो।

  • भोपाल में तेज हुई मुहिम, अवैध कब्जेदारों पर टूटेगी सरकार की गाज

    भोपाल
     शहर में शासकीय भूमि पर पक्के स्थायी निर्माण कर लाभ कमाने वाले भूमाफिया तो जेल जाएंगे ही, साथ ही जिन अधिकारियों के संरक्षण में ये पनप रहे हैं वह भी नपेंगे।पिछले दिनों कोकता ट्रांसपोर्ट नगर और हथाईखेड़ा डैम के आसपास स्थित पशुपालन विभाग की 99 एकड़ जमीन के सीमांकन में 80 से अधिक पक्के अतिक्रमण मिले थे।

    यदि समय रहते विभाग सीमांकन करवाता और प्रशासन, नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी खसरा, खतौनी, बंटान आदि दस्तावेजों की जांच करवाते तो करोड़ों की जमीन पर कब्जे नहीं होते।ऐसे में इन अवैध कब्जों के लिए SDM, तहसीलदार, आरआइ, पटवारी सहित अन्य अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। अब उनकी जांच होनी चाहिए और दोष सिद्ध होने पर कार्रवाई की जानी चाहिए। यह बात प्रदेश के पशुपालन मंत्री लखन पटेल और भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कही है।

    गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा की टीम द्वारा पशुपालन विभाग की 99 एकड़ जमीन का सीमांकन किया गया तो यहां पर करीब सात एकड़ से अधिक जमीन पर अतिक्रमण निकला।इसमें नगर निगम की 50 दुकानें, एसटीपी प्लांट आदि भी विभाग की जमीन पर बनाए गए हैं। ये दुकानें तत्कालीन निगमायुक्त केवीएस चौधरी कोलसानी के समय पर बनवाई गईं थीं। तब तत्कालीन भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया थे और प्रशासन ने सीमांकन कर जमीन नगर निगम को सौंपी थीं।

    विभाग की जमीन पर निगम की दुकानें आने के बाद से सवाल खड़े हो रहे हैं कि रिकार्ड में जब पशुपालन का रकबा था तो आरआइ, पटवारी ने किस आधार पर यह जमीन निगम की बता दी। ऐसे में अब दोनों विभागों के बीच नोकझोंक की स्थिति बनी हुई है। यही कारण है कि पशुपालन विभाग ने जिला प्रशासन को जमीन अतिक्रमणमुक्त करवाकर सौंपने के लिए कहा है।

    सभी अतिक्रमणकारियों को जारी होंगे नोटिस

    विभाग की जमीन पर पेट्रोल पंप, स्कूल, रिसार्ट, शादी हाल, फार्म हाउस, 20 मकान, 50 दुकान, एसटीपी प्लांट, डायमंड सिटी, कोर्टयार्ड प्राइम, कोर्टयार्ड कस्तूरी, राजधानी परिसर आदि का अतिक्रमण है। इन सभी को तहसीलदार द्वारा संभवत: प्रकरण बनाकर सोमवार से नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस सीमा के दौरान यदि ठोस दस्तावेज न्यायालय में नहीं दिए गए तो पक्के निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जाएगी।

    निगम की 100 एकड़ से ज्यादा जमीन

    तत्कालीन निगमायुक्त केवीएस चौधरी कोलसानी ने बताया कि मेरे समय दुकानों का निर्माण कराया गया था, यह निगम की जमीन है। इसी से लगी हुई पशुपालन विभाग की जमीन है।

    अब सीमांकन में दुकानें उनकी जमीन में बताई गई हैं जो समझ नहीं आ रहा है। कोकता ट्रांसपोर्ट नगर में नगर निगम भोपाल के पास 100 एकड़ से अधिक जमीन और कई दुकानें हैं।

    आलोक शर्मा (भाजपा सांसद) ने कहा, वर्जन राजधानी में शासकीय जमीनों पर भूमाफिया ने जमकर कब्जे किए हैं और यह एक दो नहीं बल्कि 50 से 100 एकड़ में कब्जे हैं।

    मछली हो या मगरमच्छ सभी के कब्जे से शासकीय भूमि मुक्त करवाई जाएगी। वहीं, जिन एसडीएम, तहसीलदार, आरआइ, पटवारी के रहते यह सब अतिक्रमण हुए हैं, उनकी जांच होनी चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    लखन पटेल (राज्यमंत्री, पशुपालन एवं डेयरी विभाग) ने बताया, कोकता ट्रांसपोर्ट नगर के पास स्थित पशुपालन विभाग की जमीन का सीमांकन पूरा कर लिया गया है।

    मुझे जानकारी मिली है यहां पर लोगों ने अतिक्रमण किए हैं। उनके दस्तावेज तक बनाए गए हैं। सभी बिंदुओं पर जांच कराई जा रही है। भूमाफिया पर कार्रवाई होगी, साथ ही अधिकारियों पर भी सख्ती बरती जाएगी।

  • होटल लेक व्यू अशोका का मेकओवर: 3-स्टार से 7-स्टार में बदलने की तैयारी

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम का प्रतिष्ठित होटल लेक व्यू अशोका(Lake View Ashoka Hotel Bhopal) अब शहर के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है। श्यामला हिल्स स्थित यह होटल, जो फिलहाल 3-स्टार श्रेणी में आता है। इसे अब 7-स्टार होटल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर क्रियान्वित किया जाएगा, जिसके लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। इस पहल का उद्देश्य भोपाल में लग्जरी पर्यटन को बढ़ावा देना और निगम के लिए राजस्व का एक स्थायी स्रोत सुनिश्चित करना है।

    निजी पार्टनर की तलाश एक साल से जारी

    होटल के इस महत्वाकांक्षी कायाकल्प के लिए पर्यटन निगम ने एक साल से प्राइवेट पार्टनर की तलाश कर रहा है। योजना के अनुसार पीपीपी मॉडल के तहत पूरा प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा, जिसमें पार्टनर होटल का विकास और संचालन करेगा, जबकि इसका मालिकाना हक पर्यटन निगम के पास ही रहेगा।

    150 से अधिक होंगे रूम

    वर्तमान में 7.16 एकड़ में फैले इस होटल में 4 सुइट्स, 39 डीलक्स रुम, एक स्वीमिंग पूल और एक रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं हैं। 7-स्टार बनने के बाद इसमें 150 से अधिक रूम होंगे और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यहां से बड़े तालाब का खूबसूरत नजारा दिखता है, जो इसे और भी खास बनाता है।

    स्पेशल पर्पज व्हीकल के निगरानी में होगा डेवलपमेंट
    यह निर्णय सात साल पहले ही किया गया था, जब होटल अशोक के शेयर निगम को ट्रांसफर किए गए थे। लेक व्यू अशोक के संचालन के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) कंपनी बनाई गई थी। इसी कंपनी के जरिए होटल के डेवलपमेंट की पूरी याजना को अंजाम दिया जाएगा। इसे लेकर निगम ने पूरा खाका तैयार कर लिया है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। इस प्रोजेक्ट को लेकर गुरुवार (5 सितंबर) को मंत्रालय में बैठक भी हुई। जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट में पेश किया जाएगा।

    अभी 3 स्टार कैटेगरी में शामिल है होटल
    श्यामला हिल्स स्थित यह होटल फिलहाल 3 स्टार की कैटेगरी में शामिल है। यह 7.16 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें 4 सुइट, 39 डीलक्स रूम, स्वीमिंग पूल और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। होटल के कैंपस में एक बड़ा बैंक्वेट हॉल है, जिसमें 180 लोग एक साथ आ सकते हैं। साथ ही, होटल में 8135 मीटर बिल्ट अप का एरिया लेक व्यू रेसिडेंसी कैम्पस में मौजूद है। इसमें 82 लोग बैठ सकते हैं। बड़े तालाब के पास मौजूद होने के कारण यहां से बहुत ही शानदार नजारा देखने को मिलता है। वहीं इस नई योजना के बाद होटल लेक व्यू का भविष्य सुनहरा नजर आ रहा है।

    40 साल पुराना है होटल
    अशोक होटल की शुरुआत 40 साल पहले लगभग 1985-86 के आसपास हुई थी। तब इसके लिए जमीन को 30 साल की लीज पर दिया गया था। होटल की शुरुआत के समय इसमें 51 प्रतिशत साझेदारी केंद्र सरकार की और 49 प्रतिशत शेयर मध्य प्रदेश सरकार के थे। बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से होटल की सारी इक्विटी खरीद ली थी। अब इसमें केंद्र सरकार की कोई साझेदारी नहीं है। होटल का लीज 2016 में समाप्त होने के बाद इसकी लीज की फाइल पेंडिंग चल रही थी। पांच साल पहले सरकार 350 करोड़ के बाजार मूल्य के साथ अशोक होटल को निजी हाथों में सौंपना चाहती थी लेकिन किसी प्राइवेट कंपनी ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। 

    पहले भी हुई थी कोशिश

    यह पहला मौका नहीं है जब इस होटल को निजी हाथों में में सौंपने की कोशिश की गई हो। करीब 6 साल पहले भी इसे निजी कंपनियों को देने का प्रयास किया गया था। तब इसकी कीमत लगभग 350 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन उस समय कोई भी निजी कंपनी इसे लेने के लिए तैयार नहीं हुई थी। होटल लेक ब्यू अशोका वर्तमान में पूरी तरह से निगम के नियंत्रण में है। हाल ही में इस प्रोजेक्ट पर समीक्षा बैठक भी हुई थी।– डॉ. इलैया राजा टी. एमडी एमपी टूरिज्म

  • भोपाल के मरीजों के लिए राहत: AIIMS में अब छाती कैंसर का इलाज संभव

    भोपाल
     अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने कैंसर के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के सर्जिकल आंकोलाजी विभाग में अब विशेष रूप से छाती के कैंसर (फेफड़ों और भोजन नली) के इलाज के लिए एक 'समर्पित थोरासिक आंकोलाजी सुविधा' शुरू की गई। अब मध्य भारत के कैंसर रोगियों के लिए यह सुविधा मिलती रहेगी, अब इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।

    इस नई सुविधा की शुरुआत के साथ ही एक बेहद जटिल आपरेशन को अंजाम दिया गया है। डॉक्टरों ने एक मरीज की भोजन नली (इसोफेगस) के कैंसरग्रस्त हिस्से को निकाला। इसके बाद पेट के एक हिस्से से एक नई नली बनाकर उसे गले तक जोड़ा गया। यह पूरी सर्जरी दूरबीन और कैमरे वाली अत्याधुनिक थोरोस्कोपिक और लैप्रोस्कोपिक तकनीक से की गई।

    इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें मरीज को बड़े चीरे नहीं लगाए जाते, जिससे दर्द कम होता है और वह जल्दी ठीक हो पाता है। एम्स भोपाल का सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग पहले से ही मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों के लगभग 20 हजार कैंसर मरीजों का हर साल इलाज करता है।

    अब तक छाती से जुड़े जटिल कैंसर के ऑपरेशन के लिए मरीजों को दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता था, जो काफी खर्चीला और मुश्किल होता था। अब यह विश्वस्तरीय सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से हजारों मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
    विशेषज्ञ नेतृत्व और मजबूत टीम

    इस महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व प्रो. डॉ. माधवानंद कर रहे हैं, जो न केवल एक बेहतरीन सर्जन हैं, बल्कि एक कुशल शिक्षक भी हैं। उन्होंने देश के कई एम्स संस्थानों का मार्गदर्शन किया है और लगातार युवा डाक्टरों को प्रशिक्षित करते रहते हैं। उनके नेतृत्व में डॉ. विनय कुमार (विभागाध्यक्ष, सर्जिकल आंकोलाजी), डॉ. अंकित, डॉ. वैशाली, डॉ. जैनब और डॉ. शिखा सहित एक विशेषज्ञ टीम ने पहली जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।

  • एमपी में पर्यावरण और ऊर्जा दोनों का समाधान, प्लास्टिक कचरे से बनेगा डीजल

    शिवपुरी
     कचरे में मौजूद प्लास्टिक से पायरोलिसिस प्रक्रिया को अपनाकर डीजल बनाने का प्लांट शहर में लगाया जाएगा। यह मध्यप्रदेश का पहला ऐसा प्लांट होगा, जहां प्लास्टिक से डीजल बनेगा। यह प्लांट शिवपुरी में लगाया जाएगा जिसके लिए टेंडर रविवार को खुलेंगे। सबकुछ सही रहा तो 3-4 माह में प्लांट शुरू हो जाएगा। अभी तक देश में इस तरह के 3-4 प्लांट हैं।

    ऐसा ही प्लांट उत्तरप्रदेश के मथुरा में है। शिवपुरी का प्लांट पीपीई मोड पर होगा। नगर पालिका के बड़ौदी स्थित ट्रेंचिंग गाउंड में फर्म को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी को कम से कम 15 साल के लिए प्लांट चलाने की शर्त होगी। प्लांट लगाने में 3-4 करोड़ खर्च होंगे। कंपनी अपना लाभ निकालने के साथ ही नगर पालिका को भी तय रकम हर माह या सालाना देगी। इस डीजल का प्रयोग वाहनों में कम, बल्कि जनरेटर और हैवी मशीनरी को चलाने में ज्यादा किया जाता है।

    इस तरह तैयार होगा डीजल

    प्लास्टिक कचरे को रियक्टर में 350 से 450 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म किया जाता है। इसमें हाइड्रो कार्बन बनते हैं। इससे पेट्रोल, डीजल व कार्बन गैस का उत्पादन होता है। एक टन प्लास्टिक कचरे से 150 से 200 लीटर डीजल बन सकता है।

    यह हैं तकनीक के अविष्कारक

    मेट्रो अटलांटा के 21 वर्षीय अश्वेत आविष्कारक जूलियन ब्राउन ने प्लास्टोलाइन नामक तकनीक विकसित की है, जो माइक्रोवेव पायरोलिसिस का उपयोग कर सौर ऊर्जा से चलने वाला रिएक्टर है। यह प्लास्टिक कचरे को गैसोलीन, डीजल व जेट ईंधन जैसे ईंधन में परिवर्तित करता है। नगर पालिका स्वास्थ्य अधिकारी योगेश शर्मा ने कहा कि प्लास्टिक से पायरोलिसिस प्रक्रिया के तहत डीजल बनाने का प्लांट जल्द लगेगा। इसमें दो-तीन फर्म ने रुचि दिखाई है।

    केले के छिलके और प्लास्टिक के कचरे से बनेंगे डीजल

    वैज्ञानिकों ने कमाल का काम किया है। जिस केले के छिलके और प्लास्टिक के कचरे को कम फेक देते थे, उनसे यहां के वैज्ञानिकों ने डीजल बनाने का तरीका खोज निकाला है। यह डीजल सस्ता होगा। साथ ही पर्यावरण के लिए भी अच्छा होगा। इसके लिए वैज्ञानिकों ने को-पैरोलीसिस तकनीक का इस्तेमाल किया है। इससे बायोडीजल तैयार होगा।

    डीजल वाहनों में अच्छे से काम करेगा

    वैज्ञानिकों का दावा है कि यह बायो-डीजल, डीजल वाहनों में भी अच्छे से काम करेगा। यह खोज कचरे को उपयोगी बनाने के लिए की गई है। साथ ही स्वच्छ भारत मिशन को इससे आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    केमिकल इंजीनियरिंग विभाग ने की खोज

    यह रिसर्च आइसर भोपाल के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शंकर चाकमा के नेतृत्व में हुई। उनके साथ बबलू अलावा और अमन कुमार ने भी इस रिसर्च में भाग लिया। वैज्ञानिकों ने केले के छिलके और प्लास्टिक कचरे को 25:75 के अनुपात में मिलाया। फिर उन्होंने इसे एक खास तापमान पर गर्म करके पायरो-ऑयल (तरल ईंधन) प्राप्त किया।

    ऐसे होगा इस्तेमाल

    रिसर्च में पता चला कि इस ईंधन को डीजल के साथ 20 प्रतिशत तक मिलाकर गाड़ी में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस रिसर्च को जर्नल ऑफ द एनर्जी इंस्टीट्यूट और एनर्जी नेक्सस में भी छापा गया है। रिसर्च करने वालों के अनुसार, एक किलोग्राम केले के छिलके और प्लास्टिक कचरे से लगभग 850 ग्राम तरल पदार्थ, 140 ग्राम गैस और 10 ग्राम चारकोल मिलता है। गैस का इस्तेमाल खाना बनाने में किया जा सकता है, जबकि चारकोल का इस्तेमाल पानी को साफ करने के लिए किया जा सकता है। तरल ईंधन को डीजल के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है।

    क्या होता है पायरो आयल

    वहीं, यह जो पायरो-आयल है, उसमें कई तरह के हाइड्रोकार्बन होते हैं। जैसे कि ओलेफिन, पैराफिन, एरोमैटिक्स, एस्टर और अल्कोहल। इसमें लगभग 12 प्रतिशत ऑक्सीजन वाले यौगिक और लंबी श्रृंखला वाले एस्टर भी पाए जाते हैं। इससे इसकी ऊष्मा (हीट) देने की क्षमता लगभग 55 मेगाजूल प्रति किलोग्राम तक बढ़ जाती है। यह सामान्य डीजल से कहीं ज्यादा गर्मी देता है।इसके अलावा, यह ईंधन ठंडे मौसम में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योंकि इसका पोर पाइंट -25 डिग्री सेल्सियस तक है. साथ ही, इसका फ्लैश पाइंट भी 4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा पाया गया है, जिससे यह ज्यादा सुरक्षित भी है।

    ईंधन की खपत कम हुई

    इस वैकल्पिक ईंधन को डीजल इंजनों में भी टेस्ट किया गया। टेस्ट में पाया गया कि इससे ईंधन की खपत कम हुई और बीटीई (ब्रेक थर्मल एफिशिएंसी) में भी काफी सुधार हुआ। इससे यह साबित होता है कि यह ईंधन डीजल से न केवल सस्ता है, बल्कि प्रदर्शन के मामले में भी बेहतर है।

  • एक क्लिक में मदद: CM मोहन यादव ने बाढ़ पीड़ित किसानों को पहुँचाई 20 करोड़ की राहत

    भोपाल
    मध्यप्रदेश की सरकार हर संकट में किसानों के साथ खड़ी है। इस स्पष्ट संदेश के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 6 सितंबर को अतिवृष्टि-बाढ़ से क्षतिग्रस्त फसलों के लिए राहत राशि का वितरण किया। उन्होंने एक क्लिक के माध्यम से किसानों को 20 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। मध्यप्रदेश सरकार साल 2025-26 तक 188 करोड़ 52 लाख रुपये आपदा प्रभावित लोगों को ट्रांसफर कर चुकी है। प्रदेश सरकार का कहना है कि इन दिनों मौसम असंतुलित हो गया है। इसलिए सरकार किसानों की हर संभव मदद के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार का मानना है कि किसानों की मुस्कान ही राज्य की ताकत है।

    गौरतलब है कि सीएम डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से कई जिलों के किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात की। उन्होंने किसानों से उनका हालचाल जाना और सरकार का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि किसानों के जीवन में मौसम की मार से परेशानी आई है। इस परेशानी का सरकार ने समाधान कर दिया है।

    खेतों में किसान और सीमा पर जवान दोनों आंधी-तूफान और कष्टों के बीच अपनी मौजूदगी से, मेहनत से, जान की बाजी लगाकर देश के लोगों की सेवा करते हैं। प्रदेश में कहीं-कहीं बहुत ज्यादा बारिश हुई और कहीं-कहीं कम बारिश भी हुई। इस असंतुलन की कीमत हमें थोड़ी-थोड़ी चुकानी पड़ रही है। सरकार हर परेशानी में किसान के साथ है। हमारी सरकार बाढ़ के दौरान भी जनता के बीच गई। सरकार किसानों के हर संकट में साथ खड़े रहने के लिए प्रतिबद्ध है।

    किसानों को सरकार पर पूरा भरोसा
    सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज 11 जिलों के 12 हजार हेक्टेयर से ज्यादा बड़े क्षेत्र में 17500 भाई-बहनों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 20 करोड़ रुपये की राशि दे रहे हैं। किसान हमारी सरकार पर पूरा भरोसा करता है। किसानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है। उनके नेतृत्व में हमारी सरकार लगातार जनकल्याण के काम कर रही है। इससे पहले हमने 30 करोड़ की राहत राशि ट्रांसफर की थी। 2025-26 में अभी तक 188 करोड़ 52 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।

    मिलकर आपदा से मुकाबला करेंगे
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं हर किसान को आश्वासन देना चाहता हूं कि संकट की घड़ी में हमारी सरकार सदैव आपके साथ खड़ी है। किसानों की मुस्कान ही मध्यप्रदेश की ताकत है। किसान अपनी मेहनत से एक फिर जीवन के मैदान में उतरेंगे। हमें आशा है कि अगली फसल इस नुकसान की भरपाई कर देगी। हम सब मिलकर इस आपदा से मुकाबला करेंगे। किसान कभी हार नहीं मानता, वह जीवटता के साथ आने वाले कल की तैयारी करता है। आइए हम सब मिलकर एक बार फिर कामना करें कि एक बार फिर धरती माता हमारे अन्न के भंडार भरेगी।

  • वन विहार में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध दिवस, हुए जागरूकता कार्यक्रम

    गिद्ध संरक्षण पर हुई एक दिवसीय कार्यशाला

    भोपाल
    वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इण्डिया, बीएनएचएस के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के अवसर पर विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन शनिवार को वन विहार स्थित विहार वीथिका में किया गया। इसका उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों की महत्त्वपूर्ण भूमिका और उनके संरक्षण की तात्कालिक आवश्यकता के बारे में आमजन को जागरूक करना था। अंर्तराष्ट्रीय गिद्ध दिवस प्रतिवर्ष माह सितम्बर के प्रथम शनिवार को मनाया जाता है।

    वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में स्थित विहार वीथिका में अंर्तराष्ट्रीय 'गिद्ध दिवस' के अवसर पर 'गिद्ध संरक्षण एवं संर्वधन' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई, जिसमें 30 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। इसमें गिद्ध संरक्षण एवं संर्वधन विषय पर जानकारी के साथ गायों के उपचार में डायक्लोफेनिक दवा का उपयोग न करने एवं अन्य विषयों पर विषय-विशेषज्ञों द्वारा जानकारी उपलब्ध कराई गई। सहायक संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल डॉ. रूही हक द्वारा कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया। भोपाल बर्ड्स के मो. खालिक, डॉ. संगीता राजगीर तथा सहायक वन्‍यप्राणी चिकित्‍सक वन विहार डॉ. हमजा नदीम फारूकी ने प्रस्तुतिकरण के माध्‍यम से गिद्ध प्रजाति एवं उनके महत्व और पारिस्थितिकीय तंत्र में गिद्धों की महत्‍वपूर्ण भूमिका तथा गायों के उपचार में डायक्लोफेनिक दवा का उपयोग से होने वाली हानियों की जानकारी दी गई। सहायक संचालक द्वारा गिद्धों के संरक्षण के लिये प्रतिभागियों से चर्चा की।

    'पन्नी से पक्षी' विषय पर होगी राज्य स्तरीय कला प्रतियोगिता
    कार्यक्रम में संरक्षण को सतत विकास से जोड़ने और गिद्धों के स्वास्थ्य के लिए प्लास्टिक प्रदूषण से खतरे पर प्रकाश डाला गया। वन विभाग द्वारा राज्य-स्तरीय कला प्रतियोगिता “पन्नी से पक्षी” की भी घोषणा की। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों और कलाकारों को प्लास्टिक कचरे से गिद्धों के मॉडल बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिन्हें वन्यप्राणी सप्ताह-2025 के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा।

    विद्यार्थियों के लिए पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता
    कार्यशाला में विभिन्न महाविद्यालयों के स्नातक विद्यार्थियों के लिए पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसका विषय “गिद्धों की पारिस्थितिक सेवाएँ” था। “वल्चर्स ऑफ मध्यप्रदेश” शीर्षक से एक उपयोगी फील्ड गाइड का लोकार्पण भी किया गया, जो राज्यभर में कार्यरत वन अमले को गिद्ध प्रजातियों की पहचान और निगरानी में सहायता करेगी।

    वल्चर थीम पर ड्राइंग प्रतियोगिता
    इसी कड़ी में बीएनएचएस संस्‍था द्वारा वल्चर थीम पर स्कूली बच्चों के लिए ड्राइंग कॉम्पिटिशन का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के विजेताओं (प्रथम, द्वितीय व तृतीय) को पुरूस्कृत किया गया। श्री सेमसंग, प्रबंधक, गिद्ध संवर्धन केन्द्र केरवा, भोपाल एवं श्री संकल्‍प किसनानी, भोपाल द्वारा वन विहार में भ्रमण करने आए पर्यटकों के साथ वल्‍चर थीम पर एक "ऑन द स्पॉट क्विज" का भी आयोजन किया गया जिसमें पर्यटकों से गिद्धों के सम्‍बन्‍ध प्रश्‍न पूछे गए जिन पर्यटकों ने सही उत्‍तर दिया उन्‍हें पुरूस्‍कृत भी किया गया। कार्यशाला में गिद्धों के संरक्षण एवं बचाव के बारे जानकारी देकर जागरूक किया।

    इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री शुभरंजन सेन, मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक श्री आर. श्रीनिवास मूर्ति, पूर्व संचालक श्रीमती संगीता सक्‍सेना, डॉ. स्‍वाति मोघे, संचालक, डब्‍ल्‍यू.डब्‍ल्‍यू.एफ., भोपाल और सहायक संचालक वन विहार डॉ. रूही हक उपस्थित रहे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव मऊगंज को देंगे 241.33 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

    मऊगंज में संयुक्त जिला कार्यालय भवन का करेंगे भूमिपूजन

    देवतालाब में होगा मुख्य कार्यक्रम, हितग्राही होंगे लाभान्वित

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 सितम्बर को मऊगंज को 241.33 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात देंगे। इसमें प्रमुख रूप से मऊगंज के संयुक्त जिला कार्यालय भवन का शिलान्यास शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 37 करोड़ 50 लाख रूपये के 16 विकास कार्यों का लोकार्पण और 203 करोड़ 83 लाख रूपये के 6 विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मऊगंज प्रवास के दौरान बहुती प्रपात का अवलोकन करेंगे और देवतालाब में स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे। देवतालाब स्टेडियम में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं में हितलाभ वितरण भी करेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, सांसद श्री जनार्दन मिश्र और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक श्री गिरीश गौतम भी संबोधित करेंगे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव से फिल्म अभिनेता विंदु दारा सिंह ने की सौजन्य भेंट

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शनिवार को समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में फिल्म अभिनेता श्री विंदु दारा सिंह ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री विंदु दारा सिंह का शाल ओढ़ाकर अभिनन्दन किया और प्रदेश की फिल्म निर्माण नीति की जानकारी दी।

    श्री विंदु दारा सिंह इन दिनों मध्यप्रदेश के प्रवास पर हैं। उन्होंने जय वीर हनुमान (1995), विष्णु पुराण (2000) और अयोध्या की रामलीला (2020)  में हनुमान जी की भूमिका निभाई है। इसके अलावा अनेक फिल्मों में अभिनय भी किया है।

  • मरीजों के परिजनों के लिए एम्स रायपुर में बनेगा सर्व-सुविधायुक्त परिजन निवास : मुख्यमंत्री साय

    रायपुर,

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित टाटीबंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मध्य भारत के शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों के प्रथम रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम ‘देव हस्त’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “रोबोटिक सर्जरी छत्तीसगढ़ में चिकित्सा सुविधाओं के विकास में एक नया आयाम है। यह ऐतिहासिक क्षण प्रदेश की जनता को अत्याधुनिक और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।”

    मुख्यमंत्री  साय ने स्वयं ‘देव हस्त’ पर पहला ड्राई लैब डिसेक्शन कर इस अत्याधुनिक तकनीक की औपचारिक शुरुआत की। यह सिस्टम मध्य भारत के किसी शासकीय स्वास्थ्य संस्थान में स्थापित होने वाला पहला रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम है।

    मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर एम्स रायपुर में छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भर्ती होने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने की सुविधा हेतु एम्स रायपुर में सर्व-सुविधायुक्त परिजन निवास निर्माण की घोषणा भी की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि “डॉक्टरों को धरती पर भगवान का रूप माना जाता है क्योंकि वे हमें जीवन प्रदान करते हैं। आज जिस रोबोटिक सर्जरी सिस्टम का शुभारंभ हो रहा है, उसे ‘देव हस्त’ नाम दिया गया है। इसका लाभ न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि एम्स रायपुर में भर्ती होने वाले अन्य राज्यों के मरीजों को भी मिलेगा। एम्स रायपुर उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में लगातार मील का पत्थर साबित हो रहा है।”

    मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एम्स रायपुर से मुझे विशेष लगाव है। उन्होंने कहा कि “जब रायपुर एम्स के निर्माण को स्वीकृति मिली, उस समय मैं सांसद था और प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी से छत्तीसगढ़ में एम्स की शाखा स्थापित करने का आग्रह किया था। यह आवश्यक था ताकि दिल्ली स्थित एकमात्र एम्स पर मरीजों का दबाव कम हो और अन्य राज्यों के लोगों को भी उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उनके राज्य में ही उपलब्ध हो। हमारा सौभाग्य है कि जिन छह राज्यों में एम्स स्थापित करने की स्वीकृति मिली, उनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल था।”

    मुख्यमंत्री  साय ने परिजन निवास की घोषणा करते हुए कहा कि “दूर-दराज से आने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने की सुविधा कितनी आवश्यक है, यह मैं भली-भांति समझता हूं। सांसद रहते हुए दिल्ली स्थित मेरे आवास को लोग ‘मिनी एम्स’ कहते थे क्योंकि वहां मैं मरीजों के परिजनों की रुकने की व्यवस्था करता था। जनसेवा का यह कार्य मेरे दिल के बेहद करीब है। 2014 से 2019 के संसदीय कार्यकाल में मैंने लगभग 12 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष से मरीजों को दिलवाए थे। रायपुर में भी कुनकुरी सदन में मरीजों के परिजनों की व्यवस्था की गई है, जिसका लाभ पूरे प्रदेश के लोग उठाते हैं।”

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 20 महीनों में सरकार बनने के बाद राज्य में पाँच नए मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति मिली है और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नवा रायपुर में 5,000 बिस्तरों की क्षमता वाली मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय मात्र एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। उन्होंने कहा कि जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में वृद्धि हुई है और इनका इलाज भी महंगा होता है। इसी वजह से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना प्रारंभ की, जिसके अंतर्गत गरीब वर्ग के लोगों को पाँच लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध है। अब वय वंदन योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वर्गों के मरीजों को भी यह सुविधा प्रदान की जा रही है।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि समय के साथ जहाँ चिकित्सा सुविधाएँ बढ़ रही हैं, वहीं बीमारियों का दायरा भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रोबोटिक सर्जरी का विशेष महत्व है। इसके माध्यम से चिकित्सकीय क्षमता और गुणवत्ता में कई गुना वृद्धि की जा सकती है। छत्तीसगढ़ को ‘देव हस्त’ रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम का अत्यधिक लाभ मिलेगा और शीघ्र ही राजधानी रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।”

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने ‘देव हस्त’ के नामकरण हेतु आयोजित प्रतियोगिता की विजेता सुश्री ज्योत्स्ना किराडू को पाँच हजार रुपये की पुरस्कार राशि भेंट की। कार्यक्रम में एम्स रायपुर के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) डॉ. अशोक जिंदल, विभागाध्यक्ष डॉ. देवज्योति मोहंती, बड़ी संख्या में चिकित्सा छात्र और गणमान्यजन उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री साय बोले – छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेज रायपुर में 65 करोड़ की लागत से बनेगा छात्रावास

    बस्तर–सरगुजा सहित दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का फोकस

    कैंसर के शोध, रोकथाम और इलाज में उपयोगी साबित होगी एरोकॉन 2025 संगोष्ठी

    रायपुर,

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता का स्वास्थ्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रदेशवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में वित्तीय संसाधन कभी बाधा नहीं बनेंगे। मुख्यमंत्री  साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सभागार में ‘एरोकॉन 2025’ छत्तीसगढ़–मध्यप्रदेश चैप्टर के दो दिवसीय आयोजन का शुभारंभ कर विशेषज्ञों और उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने मेडिकल कॉलेज रायपुर के छात्रों के लिए 65 करोड़ रुपये की लागत से नए छात्रावास निर्माण की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हजारों मरीज आज विशेषज्ञ चिकित्सकों के परिश्रम और नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों के कारण संजीवनी प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीते दो दशकों में कैंसर की प्रारंभिक पहचान और उपचार के क्षेत्र में हुए शोध से भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रत्येक जिले में कैंसर डे-केयर सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं और छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत प्रदेश में अनेक मरीजों का इलाज संभव हुआ है। जीएसटी में कैंसर की दवाइयों और उपकरणों को सस्ता किए जाने से मरीजों को बड़ी राहत मिली है।  साय ने बताया कि राज्य के अस्पतालों में कैंसर उपचार के लिए अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं और आज ही एम्स रायपुर में रोबोटिक सर्जरी सिस्टम का शुभारंभ किया जा रहा है, जो यह प्रमाणित करता है कि सरकारी अस्पताल नवीनतम तकनीक अपनाने में अग्रणी हैं। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कैंसर की पहचान में बेहद उपयोगी सिद्ध हो रही है और राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में इसे तेजी से शामिल कर रही है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरकार लगातार स्वास्थ्य बजट में वृद्धि कर रही है और नये मेडिकल कॉलेज खोल रही है। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में 5,000 बिस्तरों की क्षमता वाली मेडिसिटी का निर्माण किया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार हर विकल्प पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सरगुजा, धरमजयगढ़ और बस्तर में नये अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एरोकॉन 2025 संगोष्ठी कैंसर की रोकथाम और उपचार की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी।

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एरोकॉन 2025 के सातवें आयोजन में कैंसर उपचार से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक मंच पर आए हैं। इससे इस बीमारी के इलाज में नये आयाम खुलेंगे। उन्होंने कहा कि रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि मध्यभारत के अन्य राज्यों के मरीजों के लिए भी प्रमुख उपचार केंद्र है। भविष्य में अत्याधुनिक तकनीकों और मशीनों के माध्यम से यहां चिकित्सा सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मेडिकल कॉलेज रायपुर राज्य का सबसे बड़ा कैंसर सेंटर है, जहाँ आधुनिकतम सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि आने वाले समय में प्रदेश में छह फिजियोथेरेपी कॉलेज स्थापित होंगे, बस्तर और सरगुजा में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रारंभ होंगे, मानसिक रोगियों के लिए पृथक चिकित्सालय और नेचुरोपैथी कॉलेज खोले जाएंगे। मेकाहारा में 232 करोड़ रुपये की लागत से 700 बिस्तरों की वृद्धि की जाएगी तथा रोबोटिक सर्जरी और आईवीएफ सेंटर जैसी नवीनतम सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।

    इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, मेडिकल कॉलेज रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. विवेक चौधरी, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. पात्रा, विशेषज्ञ चिकित्सकगण, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

     

  • 8 सितम्बर से चिरमिरी-नागपुर रेल प्रोजेक्ट के लिए भूमि सर्वेक्षण, छह गांव प्रभावित

    एमसीबी

    कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (रा०) मनेंद्रगढ़ द्वारा सर्वसाधारण आमजनता, ग्रामीणजन और कृषकजनों को सूचित किया गया है कि चिरमिरी-नागपुर रोड हाल्ट रेल परियोजना (17 किलोमीटर) हेतु प्रस्तावित ग्राम बंजी, चिरईपानी, चित्ताझोर (तहसील चिरमिरी), खैरबना, सरोला और सरभोका में भूमि अधिग्रहण के संबंध में धारा 20E का प्रकाशन किया जा चुका है। अधिसूचना के उपरांत रेल अधिनियम 1989 की धारा 20(च) अंतर्गत मुआवजा निर्धारण हेतु आवश्यक सर्वेक्षण कार्य संपन्न किया जाएगा। इस सर्वेक्षण में प्रस्तावित भूमि पर स्थित संरचनाओं, भूमि उपयोग प्रवर्ग, पेड़, कुआं, नलकूप आदि का पंचनामा, फोटोग्राफ और अक्षांश-देशांतर सहित प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा।

    संयुक्त सर्वे टीम द्वारा यह सर्वेक्षण 08 सितम्बर 2025, सोमवार को प्रातः 11 बजे ग्राम बंजी से प्रारंभ किया जाएगा। सर्वेक्षण में लगने वाला समय प्रत्येक ग्राम में प्रभावित खसरों और उनमें निर्मित संरचनाओं की संख्या पर निर्भर करेगा। ग्राम बंजी की 56 प्रभावित खसरा और सरोला की 11 प्रभावित खसरा का सर्वेक्षण 08 से 12 सितम्बर 2025 तक होगा। इसके साथ ग्राम चिरई पानी की 45 प्रभावित खसरा एवं सरभोका की 14 प्रभावित खसरा का सर्वेक्षण 15 से 20 सितम्बर 2025 तक होगा। वहीं ग्राम खैरबना की 57 प्रभावित खसरा एवं चित्ताझोर की 23 प्रभावित खसरा का सर्वेक्षण 22 से 26 सितम्बर 2025 तक किया जाएगा। कुल मिलाकर इन छह ग्रामों में 206 खसरे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में प्रभावित होंगे।

    इस संबंध में सभी भूमि स्वामी, सह-स्वामी और कृषकगण को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने भूमि संबंधी दस्तावेज जैसे खसरा, बी-1, ऋण पुस्तिका, विक्रय पत्र, नामांतरण, डायवर्जन, न्यायालयीन प्रकरणों से संबंधित जानकारी एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों सहित स्थल पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर सहयोग प्रदान करें। यदि कोई भूमिस्वामी सर्वेक्षण के समय अनुपस्थित रहता है और आवश्यक तथ्य प्रस्तुत नहीं करता तो भविष्य में वादबहुल्यता की स्थिति में उसकी स्वयं की जिम्मेदारी होगी। ऐसे मामलों में आगे की कार्यवाही स्थल जांच और उपलब्ध राजस्व अभिलेखों सहित अन्य आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर ही की जाएगी।

  • नक्सलवाद से निपटने की रणनीति तैयार, पुलिस अधिकारियों ने 26 मार्च को बड़े कदम की रूपरेखा बनाई

    जगदलपुर

     नक्सलवाद के खात्मे के लिए बस्तर में पुलिस और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों की आज बड़ी बैठक हुई. बैठक में नक्सल प्रभावित तमाम राज्यों के अधिकारी शामिल हुए.

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश-प्रदेश से मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की समय सीमा तय किए हुए हैं. इस कड़ी में छत्तीसगढ़ सहित अन्य नक्सलवाद से प्रभावित राज्यों में सुरक्षाबल स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई को अंजाम दे रही है.

    इस कड़ी में जगदलपुर में हुई बैठक में एंटी नक्सल ऑपरेशन के लिए अलग-अलग राज्यों की फोर्स के बीच समन्वय को लेकर छत्तीसगढ़ के साथ महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा के पुलिस अधिकारियों के साथ सीआईएसएफ के उच्च अधिकारियों ने चर्चा की.

  • स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से मनेंद्रगढ़ के लोगों की बड़ी मांग पूरी होने की कगार पर

    चिरमिरी नागपुर रोड हॉल्ट परियोजना के लिए रेल मंत्रालय ने दावा आपत्ति के बाद 198 भूखंडों के अधिग्रहण के लिए जारी किया अधिसूचना

    अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण,  जल्द ही शुरू होगा मुआवजा वितरण का कार्य

    रायपुर,

     स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल का प्रयास जिले में यात्री सुविधाओं और रेल परियोजनाओं के विस्तार के लिए  रंग ला रहा है। उनकी कोशिशों से रेल मंत्रालय ने चिरमिरी नागपुर हॉल्ट रेल परियोजना के लिए दावा आपत्ति के बाद भू अर्जन की प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। रेल मंत्रालय ने इसके लिए एक अधिसूचना जारी की है।

     केंद्रीय सरकार ने रेल अधिनियम 1989 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में चिरमिरी नागपुर रोड हाल्ट रेल परियोजना (17 किलोमीटर) के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना के अंतर्गत 36.392 हेक्टेयर रकबे की कुल 198 भूमि खंडों को परियोजना के लिए अधिग्रहित करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही अब शीघ्र ही प्रभावितों को मुआवजा वितरण का कार्य शुरू किया जाएगा।

    केंद्र सरकार ने सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट पर सहमति प्रदान करते हुए अंतिम रूप से भूमि अधिग्रहण की घोषणा की है। अधिसूचना के अनुसार, यह भूमि अब भारत सरकार (रेल मंत्रालय) के नाम दर्ज होगी और परियोजना कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी।

    रेल मंत्रालय (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस परियोजना को वर्ष 2018-19 में मंजूरी दी गई थी। भूमि अर्जन की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित समयावधि में कुल 32 आपत्तियां प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 5 आपत्तियां सही पाई गईं। सक्षम प्राधिकारी द्वारा शेष आपत्तियों का निराकरण कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी गई।

  • कोर्ट ने हाईप्रोफाइल ड्रग्स केस में नव्या मलिक और विधि अग्रवाल को 15 सितंबर तक जेल भेजा

    रायपुर

    हाईप्रोफाइल ड्रग्स मामले में आरोपी नव्या मलिक और विधि अग्रवाल की 2 दिन की रिमांड खत्म होने बाद उन्हें विशेष कोर्ट में पेश किया गया. सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 15 सितंबर तक की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है. हाईप्रोफाइल ड्रग्स केस में अब तक गिरफ्तार नव्या मलिक, अयान परवेज, विधि अग्रवाल, ऋषिराज टंडन, सोहेल खान, जुनैद अख्तर, हर्ष आहूजा और मोनू विश्नोई को एक साथ 15 सितंबर को कोर्ट में पेश किया जाएगा.

    पूछताछ में हुए बड़े खुलासे
    पुलिस सूत्रों के अनुसार, नव्या और विधि हर माह मुंबई और गोवा का दौरा करती थीं, जहां संभ्रांत घरानों के युवक-युवतियां रातभर चलने वाली इन पार्टियों में शामिल होते थे. दोनों ने रायपुर, नवा रायपुर, मंदिर हसौद, वीआईपी रोड और चंद्रखुरी के होटल, रिसॉर्ट, क्लब और फार्महाउस की जानकारी दी, जहां ये पार्टियां आयोजित होती थीं. विधि की इवेंट कंपनी ‘बिहाइंड द सीन्स’  रायपुर के बड़े होटल, क्लब और मैरिज पैलेस में न्यू ईयर सेलिब्रेशन सहित कई इवेंट्स आयोजित करती थी.

    पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये पार्टियां 25-30 लोगों के ग्रुप के साथ शुरू होती थीं, लेकिन रात 1 बजे के बाद करीब 10-15 लोग ही रुकते थे. इन फार्महाउस में ड्रग्स के साथ अश्लील गतिविधियां  भी होती थीं. तीनों का संपर्क बड़े उद्योगपतियों, कारोबारियों, सीए, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से था, जिनके साथ पार्टी करने की बात भी कबूल की गई है.

    पुलिस को आरोपियों के मोबाइल से चैट्स मिले हैं, जिनके आधार पर ड्रग्स खरीदने वालों की सूची तैयार की जा रही है. इन लोगों को काउंसिलिंग के लिए बुलाया जाएगा और उनके परिजनों को भी सूचित किया जाएगा, क्योंकि कई माता-पिता को अपने बच्चों की गतिविधियों की जानकारी नहीं है. पुलिस अब इन फार्महाउस और क्लब के मालिकों को पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी में है.

    ऑपरेशन निश्चय में पुलिस को मिली सफलता
    गंज थाने में दर्ज ड्रग्स केस में पुलिस की कार्रवाई जारी है. मामले में गिरफ्तार नव्या और अयान परवेज की निशानदेही पर गुरुवार को 4 और ड्रग पैडलर्स को गिरफ्तार किया गया. इनमें विधि अग्रवाल, ऋषिराज टंडन, सोहेल खान और जुनैद अख्तर के नाम शामिल हैं. विधि अग्रवाल और ऋषिराज टंडन शहर की पार्टियों में बतौर इवेंट मैनेजर सक्रिय थे और मुख्य चेहरे थे. वहीं सोहेल खान और जुनैद अख्तर नव्या और अयान के करीबी सहयोगी बताए जा रहे हैं. इस मामले में अब तक कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

    पहले इन लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
    इस मामले में सबसे पहले हर्ष आहूजा, मोनू विश्नोई और दीप धनोरिया को पकड़ा गया था. इनके पास से 27.58 ग्राम एमडीएमए, 85,300 रुपये नगद, एक कार और 5 मोबाइल फोन बरामद हुए थे. इसके बाद नव्या मालिक और अयान परवेज को भी गिरफ्तार किया गया. ताजा कार्रवाई में 4 और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय से पुलिस अभिरक्षा में लेकर उनसे बैकवर्ड एवं फॉरवर्ड लिंकेज के संबंध में पूछताछ की जा रही है. साथ ही इन्हीं लिंकेज के आधार पर अन्य आरोपियों के बारे में भी विस्तृत पूछताछ जारी है.

    ऐसे सामने आया था मामला
    यह पूरा मामला 23 अगस्त 2025 को सामने आया था, जब एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा गंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने देवेंद्र नगर ओवरब्रिज के पास एक कार को रोककर कार्रवाई की थी. कार में सवार तीन आरोपियों हर्ष आहूजा (23 वर्ष) निवासी रायपुर, मोनू विश्नोई (29 वर्ष) निवासी हिसार (हरियाणा) और दीप धनोरिया (41 वर्ष) निवासी रायपुर को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने इनके कब्जे से 27.58 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स, सोनेट कार (सीजी 04 क्यूजे 5466), 85,300 रुपये नगद और 5 मोबाइल फोन बरामद किए थे. जब्त की गई संपत्ति की कुल कीमत करीब 20 लाख रुपये आंकी गई थी. इसी आधार पर गंज थाने में धारा 21(सी), 29 नारकोटिक एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया.