• रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में जुलाई 2026 में छोड़े जाएंगे चीते, सीएम डॉ मोहन की घोषणा के बाद शुरू हुई तैयारियां

    सागर
     मध्य प्रदेश के रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में जुलाई 2026 में चीते छोड़े जाएंगे। हाल ही में खजुराहो में हुई मोहन कैबिनेट पर यह फैसला लिया गया था। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताया था कि रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीता पुनर्वास योजना में शामिल किया गया है। जिसके तहत आगामी वर्ष में यहां चीते लाये जाएंगे। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के अनुकूल बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिए गए है।

    बुंदेलखंड के विकास की दिशा में यह एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार वन क्षेत्र संरक्षण, पर्यटन विकास और प्राकृतिक धरोहरों को बचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। चीता पुनर्वास योजना न केवल जैव विविधता को मजबूत करेगी बल्कि रोजगार और पर्यटन के नए अवसर भी पैदा करेगी। रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जो सागर, दमोह, छतरपुर और नरसिंहपुर जिले के हिस्सों में फैला है, अब देश के उन चुनिंदा वन क्षेत्रों में शामिल होने जा रहा है, जहां चीते पुनर्वास योजना लागू होगी।

    रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के DFO डॉ ए.ए अंसारी के अनुसार, रिजर्व क्षेत्र में चीता परियोजना के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। इसमें क्वारंटीन जोन, मॉनिटरिंग व्यवस्था, ट्रेकिंग सिस्टम और प्रशिक्षु टीम शामिल होगी। रोजगार और पर्यटन को इस परियोजना के लागू होने के बाद रफ्तार मिलेगी। स्थानीय लोगों के लिए पर्यटन और गाइडिंग सेवाओं में रोजगार बढ़ेगा। होटल-रिसॉर्ट और अन्य सेवाओं में निवेश बढ़ने की संभावना के साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र की पहचान मजबूत होगी।

  • बच्‍चों की लघु नाटिका प्रस्‍तुत: अंगुलियों और अंगूठें की लड़ाई में हथेली की समझाइश

    भोपाल
    लघु नाटिका की शुरुआत पांच उंगलियों से हुई जो आपस में बहस कर रही थीं, प्रत्येक कह रही थी कि मैं महान हूँ। "मैं महान हूँ!" "नहीं, मैं महान हूँ!" उंगलियाँ अपनी सामूहिक शक्ति से अनजान, बहस करती रहीं। तभी हथेली वहाँ आई और इस हलचल को देखकर मुस्कराई। नर्म मुस्कान के साथ, हथेली ने उंगलियों को धीरे से समझाया कि वे व्यक्तिगत रूप से महान नहीं हैं, बल्कि एक साथ मिलकर एक शक्तिशाली मुट्ठी बनाती हैं। "तुम साथ में काम करने पर मजबूत हो, अलग-अलग नहीं," इस बात पर जोर दिया।
    उंगलियों ने अपनी गलती का एहसास किया और अपनी सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक साथ जुड़ गईं। दर्शकों ने ताली बजाई जब छोटे कलाकारों ने एकता की शक्ति का प्रदर्शन किया।
    यह लघु नाटिका मंचित की गई रातीबड मार्ग स्थित शारदा विद्या मंदिर परिसर में, जहां स्‍कूल के केजी टू-बी के छोटे बच्चों ने अंगुलियों और हथेलियों के माध्‍यम से यह विचारोत्तेजक लघु नाटिका प्रस्तुत की और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। "एकता में शक्ति" नामक इस प्रदर्शन ने एक टीम के रूप में मिलकर काम करने के महत्व पर प्रकाश डाला।
    लघु नाटिका ने प्रभावी ढंग से यह संदेश दिया कि जब व्यक्ति अपने मतभेदों को अलग रखकर एक साथ काम करते हैं, तो वे महान चीजें हासिल कर सकते हैं। केजी 2-बी के छात्रों ने अपनी रचनात्मकता, टीम वर्क और इस मूल्यवान सबक की समझ का प्रदर्शन किया। ऐसी अर्थपूर्ण और मनोरंजक लघु नाटिका प्रस्तुत करने के लिए सभी बच्‍चों और उनके मेंटर्स को बधाई दी गई. 
     

  • पीएमसी के एमडी गढ़पाले जब कन्ट्रोल रूम में निरीक्षण कर रहे थे तब बिजली की मांग 19000 मेगावॉट के शीर्ष पर पहुंची

    भोपाल
    मध्यप्रदेश के ऊर्जा सचिव व एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक श्री विशेष गढ़पाले ने आज शक्तिभवन में पावर मैनेजमेंट कंपनी के कन्ट्रोल रूम का सुबह 11 बजे जिस वक्त निरीक्षण कर रहे थे उसी समय मध्यप्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक बिजली की मांग 19113 मेगावाट दर्ज हुई। मध्यप्रदेश में बिजली की मांग पहली बार 19000 मेगावॉट की शीर्ष मांग पर पहुंची है। ऊर्जा सचिव ने कन्ट्रोल रूम में रियल टाइम में बिजली की मांग और उसकी शतप्रतिशत सप्लाई को मॉनीटर पर देखा।

    एमडी श्री गढ़पाले ने भविष्य में बिजली की मांग 20 हजार मेगावॉट तक पहुंचने की संभावना को देखते हुए निर्देश दिया कि बिजली की इस प्रकार शेड्यूलिंग की जाए जिससे कि ऐसी स्थि‍ति‍में प्रदेश में शतप्रतिशत बिजली की सप्लाई संभव हो। इस अवसर पर पावर मैनेजमेंट कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक श्री पी.के. जैन व मुख्य महाप्रबंधक मानव संसाधन व प्रशासन राजीव गुप्ता सहित अभियंता उपस्थि‍त थे।

    एमडी श्री गढ़पाले ने कन्ट्रोल रूम की कार्यप्रणाली का गहन निरीक्षण करते हुए प्रत्येक बिन्दु का विश्लेषण किया। उन्होंने मेरिट आर्डर सिद्धांत के आधार पर किस प्रकार बिजली की शेड्यूलिंग की जाती है उसे प्रत्यक्ष तौर पर देखा। ऊर्जा सचिव ने रियल टाइम में पॉवर मैनेजमेंट की कार्यपणाली को देख कर उचित निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनी में हो रही विद्युत सप्लाई को मॉनीटर पर अवलोकन किया।

     

  • रेल सुरक्षा रिकॉर्ड सुधार में वृद्धि : वार्षिक दुर्घटनाएं 2004-14 के औसत 171 से घटकर 2025-26 में अब तक 11 रह गई हैं

    सुरक्षा बजट लगभग तीन गुना बढ़कर 2013-14 के 39,463 करोड़ रूपए से चालू वित्त वर्ष में 1,16,470 करोड़ रूपए हो गया है

    अश्विनी वैष्णव ने कहा- कोहरे से बचाव के उपकरणों की संख्या 288 गुना बढ़ी है — 2014 के 90 से बढ़कर 2025 में 25,939 हो गई है

    जबलपुर
    भारतीय रेल में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। किसी भी असामान्य घटना की रेलवे प्रशासन द्वारा गहन जांच की जाती है। तकनीकी कारणों के अलावा किसी अन्य कारण की आशंका होने पर राज्य पुलिस की सहायता ली जाती है।
       कुछ मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से भी मार्गदर्शन लिया जाता है। हालांकि, जांच का प्राथमिक माध्यम राज्य पुलिस ही है। यह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है। इसके अंतर्गत आपराधिक गतिविधियों की जांच, कानून व्यवस्था बनाए रखना और पटरियों, पुलों, सुरंगों आदि रेलवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
       वर्ष 2023 और 2024 में रेलवे ट्रैक से छेड़छाड़/तोड़फोड़ की सभी घटनाओं में, राज्यों की पुलिस/जीआरपी और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा मामले दर्ज किए गए। इसके बाद जांच, अपराधियों की गिरफ्तारी की गई और उन पर मुकदमा चलाया गया।
       रेलवे द्वारा राज्य पुलिस/जीआरपी के साथ बेहतर समन्वय, ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए समन्वित कार्रवाई और निगरानी के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:

    * चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों और असुरक्षित इलाकों में रेलकर्मियों, रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और सिविल पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से लगातार गश्त की जा रही है।
    * उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों, असुरक्षित इलाकों में गश्त करने और खतरों को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने हेतु विशेष दल गठित किए गए हैं।
    * रेलवे पटरियों के पास पड़ी सामग्री को हटाने के लिए नियमित अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका उपयोग शरारती तत्व रेलवे ट्रैक पर रखकर अवरोध उत्पन्न करने के लिए कर सकते हैं।
    * रेलवे ट्रैक के पास रहने वाले लोगों को ट्रैक पर अवांछित सामग्री रखने, रेल घटकों को हटाने के बाद होने वाली संभावित घटनाओं के परिणामों के बारे में जागरूक किया जा रहा है और उनसे सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने का अनुरोध किया जा रहा है।
    * रेलवे राज्य स्तरीय सुरक्षा समिति (एसएलएससीआर) की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इनका गठन प्रत्येक राज्य में सम्बंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस महानिदेशक/पुलिस आयुक्त की अध्यक्षता में किया गया है। इसमें रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और खुफिया इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल हैं। अपराध पर नियंत्रण, मामलों के पंजीकरण, उनकी जांच और रेलवे परिसर के साथ-साथ चलती ट्रेनों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरपीएफ द्वारा राज्य पुलिस/जीआरपी अधिकारियों के साथ सभी स्तरों पर सक्रिय रूप से घनिष्ठ संपर्क स्थापित किया जाता है। इसमें तोड़फोड़ की घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है और खुफिया जानकारी साझा की जाती है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। उपरोक्त के अलावा, स्थिति के अनुसार एनआईए और सीबीआई जैसी विशेष एजेंसियां ​​भी शामिल हैं।
    * केंद्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियों के अलावा, आरपीएफ की खुफिया इकाइयां, यानी सीआईबी और एसआईबी को नियमित रूप से जागरूक किया जाता है और उन्हें निर्देश दिए जाते हैं कि वे खुफिया जानकारी एकत्र करें और पुलिस अधिकारियों के समन्वय से तोड़फोड़ के प्रयासों का पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें।
     
     ट्रेन संचालन में सुरक्षा सुधारने के लिए भारतीय रेल द्वारा कई उपाय किए गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में उठाए गए विभिन्न सुरक्षा उपायों के परिणामस्वरूप, दुर्घटनाओं की संख्या में भारी कमी आई है। नीचे दिए गए ग्राफ में दर्शाए अनुसार, परिणामी ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 2014-15 में 135 से घटकर 2024-25 में 31 हो गई है।

     गौरतलब है कि 2004-14 की अवधि के दौरान परिणामी रेल दुर्घटनाओं की संख्या 1711 थी (औसतन 171 प्रति वर्ष), जो 2024-25 में घटकर 31 और 2025-26 में (नवंबर 2025 तक) और भी घटकर 11 रह गई।

    रेल संचालन में सुरक्षा बढ़ाने के लिए अपनाए गए विभिन्न सुरक्षा उपाय इस प्रकार हैं:-

    1) भारतीय रेल में सुरक्षा सम्‍बंधी गतिविधियों पर व्यय में पिछले कुछ वर्षों में वृद्धि हुई है।
    2) मानव विफलता के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के लिए 31.10.2025 तक 6,656 स्टेशनों पर बिंदुओं और संकेतों के केंद्रीकृत संचालन के साथ विद्युत/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाए गए हैं
    3) लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेटों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए 31.10.2025 तक 10,098 लेवल क्रॉसिंग गेटों पर इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है।
    4) विद्युत माध्यम से ट्रैक की उपलब्धता की पुष्टि करके सुरक्षा बढ़ाने के लिए 31.10.2025 तक 6,661 स्टेशनों पर पूर्ण ट्रैक सर्किटिंग की व्यवस्था की गई है।
    5) कवच एक अत्यंत तकनीकी रूप से उन्नत प्रणाली है। इसके लिए उच्चतम स्तर के सुरक्षा प्रमाणन की आवश्यकता होती है। कवच को जुलाई 2020 में राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली के रूप में अपनाया गया था। कवच को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। प्रारंभ में, कवच संस्करण 3.2 को दक्षिण मध्य रेलवे के 1465 आरकेएम और उत्तर मध्य रेलवे के 80 आरकेएम पर तैनात किया गया था। कवच विनिर्देश संस्करण 4.0 को आरडीएसओ द्वारा 16.07.2024 को मंजूरी दी गई थी। व्यापक और विस्तृत परीक्षणों के बाद, कवच संस्करण 4.0 को दिल्ली-मुंबई मार्ग पर पलवल-मथुरा-कोटा-नागदा खंड (633 किमी) और दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर हावड़ा-बर्दवान खंड (105 किमी) पर सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है।  

  • रायपुर : प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना ने बदली किसानों की किस्मत

    रायपुर 

    प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY)  2025-26 से शुरू की गई, जिसका लक्ष्य 100 कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों में 1.7 करोड़ किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाना है, जिसके लिए 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को समन्वित किया गया है। इसे सिंचाई, भंडारण, आसान ऋण तथा फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके

    किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी

               खेती-किसानी आधारित जिले जशपुर में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की कृषि-उन्मुख नीतियों और प्रदेश में योजनाओं की तेज गति से क्रियान्वयन के कारण किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज, सिंचाई सहायता और कृषि विभाग के निरंतर मार्गदर्शन का व्यापक लाभ मिल रहा है। इससे किसान अब कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। जिले के बगीचा विकासखंड के किसान श्री सुधीर लकड़ा (उरांव) इस योजना के प्रत्यक्ष लाभार्थी के रूप में सामने आए हैं।

    उत्पादकता में हुआ सुधार 

             श्री सुधीर लकड़ा के पास कुल 3.400 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें उन्हें समय-समय पर शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। आत्मा योजना के तहत ग्रीष्मकालीन मक्का कार्यक्रम, डीएमएफ मद से ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की उपलब्धता तथा सौर सुजला योजना के अंतर्गत सोलर सिंचाई सुविधा ने उनकी खेती को सुगम और कम लागत वाला बनाया है। कृषि विभाग के सहयोग से उन्हें खेती के आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाने का अवसर मिला, जिससे उनकी उत्पादकता में सुधार हुआ।

    किसान की आय में हुई बढ़ोत्तरी 

             प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा उन्हें धान के स्थान पर प्री-बीज ग्रेड मक्का की खेती करने की सलाह दी गई। विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए गए 08 किलोग्राम मक्का बीज से उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल लगाई। उचित देखरेख, पोषक तत्व खाद, दवाइयों और तकनीकी मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप उन्हें लगभग 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे उनकी कुल आय करीब 15,000 रुपये तक पहुँची।

    कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग को  मिल रहा बढ़ावा

            (PMDDKY)योजना के माध्यम से क्षेत्र में फसल उत्पादन में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, भंडारण क्षमता विकास तथा कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। यह योजना अनाज, दलहन, तिलहन में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ ही मशीनीकरण, जैविक खेती और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद

              श्री सुधीर लकड़ा बताते हैं कि इस योजना ने उनकी खेती का स्वरूप बदल दिया है। विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण, उन्नत बीज और समय पर सलाह ने उनकी फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई यह किसान-हितैषी योजना और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र को मिल रहा समर्थन उनकी आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

    कृषि आधारित रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ज़ोर 

             प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को आधुनिक और सशक्त बनाते हुए किसानों की आय को वर्ष 2030 तक दोगुना करना है। योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीक के माध्यम से उत्पादन में 20-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी, अनाज-दलहन- तिलहन में आत्मनिर्भरता, ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई से मानसून पर निर्भरता में कमी, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को 5 प्रतिशत तक घटाने हेतु भंडारण क्षमता का विस्तार, जैविक कृषि और मशीनीकरण को बढ़ावा देने जैसे कदम शामिल हैं। साथ ही महिलाओं और युवाओं को डेयरी, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों में सहयोग देकर उन्हें कृषि आधारित रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ज़ोर दिया गया है।

  • रायपुर : डबरी निर्माण से ग्रामीण आजीविका को मिल रही नई दिशा

    रायपुर

    महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है। इसी कड़ी में डबरी निर्माण कार्य न सिर्फ ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि उनकी आजीविका का सशक्त जरिया भी बन रहा है। वर्तमान में जल संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देते हुए  कोंडागांव जिले में डबरी निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवार कई तरह से लाभान्वित हो रहे हैं।

    डबरी निर्माण से जल भराव की सुविधा बढ़ती है, जिससे वर्षभर कृषि कार्य, सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और बतख पालन जैसे आयमूलक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। यह स्थानीय स्तर पर जल संचयन को मजबूत करता है और ग्रामीणों को अतिरिक्त आजीविका स्रोत प्रदान करता है। मनरेगा के तहत नवीन डबरी निर्माण ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव एवं मांग के आधार पर स्वीकृत किए जा रहे हैं। निर्माण से पूर्व वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप भूमि की जांच की जा रही है, ताकि निर्माण उपरांत पानी का पर्याप्त भराव सुनिश्चित हो सके।

    जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अविनाश भोई ने जानकारी दी कि जिले में इस वर्ष अब तक कुल 384 डबरियों की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रति ग्राम पंचायत 5 से 10 डबरी निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जो मांग एवं उपलब्ध स्थल के आधार पर स्वीकृत किए जाएंगे। इस पहल से ग्रामीणों की आय में वृद्धि होगी तथा “मोर गाँव-मोर पानी” महाभियान का उद्देश्य भी पूरा होगा।

  • रायपुर : बुजुर्गों को अब पेंशन राशि सीधे आश्रम में ही उपलब्ध होगी

    रायपुर : बुजुर्गों को अब पेंशन राशि सीधे आश्रम में ही उपलब्ध होगी

    आशा निकेतन के बुजुर्गों के लिए बड़ी राहत

    रायपुर

    वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक और सहज जीवन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल की है। वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन के लिए अब वरिष्ठ नागरिकों को बैंक तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि सीएससी प्रबंधक आश्रम आकर उन्हे पेंशन की राशि का भुगतान करेंगें। रायगढ़ जिले के राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित पेंशन योजनाओं का लाभ आशा निकेतन वृद्धाश्रम, कौहाकुण्डा में निवासरत पात्र बुजुर्गों को नियमित रूप से मिलता है, लेकिन पेंशन राशि प्राप्त करने के लिए उन्हें अब तक बैंक जाकर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। बढ़ती उम्र, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ और आवागमन की कठिनाइयाँ इस प्रक्रिया को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रही थीं।

    सीएससी प्रबंधक द्वारा आधार आधारित भुगतान व्यवस्था 
              वरिष्ठ नागरिकों के इन कठिनाइयों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर रायगढ़ के मार्गदर्शन में समाज कल्याण विभाग ने तत्काल पहल करते हुए सीएससी प्रबंधक को निर्देशित कर पत्र जारी किया कि प्रतिमाह 10 तारीख तक आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से ही वृद्धाश्रम परिसर में पेंशन राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। निर्देश मिलते ही सीएससी प्रबंधक एवं संबंधित वीएलई द्वारा आधार आधारित भुगतान व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू कर दिया गया है।

      आश्रम परिसर में ही उपलब्ध करा दी जाएगी पेंशन की राशि
             नई व्यवस्था लागू होने के साथ ही अब वृद्धाश्रम के वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन निकालने के लिए बैंक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। हर माह निर्धारित तिथि पर पेंशन राशि सीधे आश्रम परिसर में ही उपलब्ध करा दी जाएगी। यह व्यवस्था न केवल समय और ऊर्जा की बचत करेगी, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और सुरक्षा को भी प्राथमिकता देगी।

    समाज कल्याण विभाग के उप संचालक श्री शिवशंकर पांडे ने बताया कि विभाग का उद्देश्य वरिष्ठजनों को सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सरल, सुरक्षित और बिना किसी परेशानी के उपलब्ध कराना है। पेंशन भुगतान की यह नई व्यवस्था उसी दिशा में उठाया गया एक प्रभावी कदम है, जो बुजुर्गों के जीवन में राहत और सकारात्मक बदलाव सुनिश्चित होगी।

  • मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियों की जानकारी वाली पुस्तकों का किया विमोचन

    मध्यप्रदेश हुआ नक्सल मुक्त
    42 दिन में 42 नक्सलवादियों ने किया सरेंडर
    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वेच्छा से सेवाएं देने वाले बहादुर पुलिस अधिकारियों को दी बधाई
    नदी जोड़ो अभियान का क्रियान्वयन तेज
    अगले पांच साल में 100 लाख हेक्टेयर रकबे को सिंचित करने का लक्ष्य
    प्रदेश का बदला औद्योगिक परिदृश्य
    हम वेस्ट को वैल्यू में बदल रहे हैं, मध्यप्रदेश में कचरे और पराली से हो रहा है ऊर्जा उत्पादन

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में हुए विकास कार्यां की जनता साक्षी है। मात्र दो वर्ष के अल्प कार्यकाल में राज्य सरकार ने प्रदेश के विकास का परिदृश्य बदल दिया है। इन दो सालों में प्रदेश में हुआ विकास अद्भुत है, अकल्पनीय है। दो साल में ही मध्यप्रदेश दशकों से चली आ रही नक्सलवाद की समस्या से पूरी तरह मुक्त हो गया है। इससे प्रदेश के विकास की एक बड़ी बाधा दूर हो गई है। नक्सलवादियों के एमएमसी जोन (महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़) 42 दिन में 42 नक्सलवादियों ने समर्पण कर विकास की धारा से जुड़कर जीवन को चुना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लाल सलाम के खात्मे के लिए हमारे बहादुर पुलिस अधिकारियों ने जो प्रतिबद्धता दिखाई है, वह नि:संदेह अद्भुत है। उन्होंने स्वयं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ड्यूटी मांगी और अपना टारगेट तय कर उसे अचीव भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने सभी क्षेत्रों में कार्य करने का प्रयास किया। सभी विभागों के दो साल के कार्यों की समीक्षा और आगामी 3 साल के टारगेट पर चर्चा की गई है। सभी मंत्रियों ने अपने विभाग के प्रेजेंटेशन दिए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विकास और सेवा का संकल्प लिए हम आगे बढ़ रहे हैं। दुनिया में वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां और अवसर भी हमारे लिए अनुकूल होते जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में विकास और सेवा के दो साल (सरकार की उपलब्धियां) पर केन्द्रित प्रेस वार्ता में मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। केन-बेतवा, पीकेसी के बाद ताप्ती मेगा ग्राउण्ड वाटर रिचार्ज परियोजना की ओर हम तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा परियोजना के अंतर्गत ही मंदाकिनी-चित्रकूट के नाम पर उप परियोजना का नया प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इससे चित्रकूट धाम के आसपास भी पर्याप्त जल उपलब्ध होगा, साथ ही बिजली उत्पादन भी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी जोड़ो परियोजना के अंतर्गत सरकार अगले पांच साल में 100 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि रकबे को सिंचित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 1988-90 से नक्सलियों की गतिविधियों की शुरुआत हुई थी। कभी ऐसी भी स्थिति रही कि राज्य में पुलिस की बसों को आग के हवाले कर दिया गया। उन्हीं के एक मंत्री की नक्सलियों ने हत्या कर दी। जबकि केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। आज हमें गर्व है कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में तय की गई डेडलाइन के अंदर ही राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश की भूमि से नक्सलियों को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। मध्यप्रदेश 35 साल बाद नक्सल मुक्त हुआ। इस अभियान में कुछ जवानों को शहादत भी हुई। पिछले साल प्रमोशन मिलने के बाद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा शहीद हुए। कल दो नक्सलियों के सरेंडर के साथ मध्य प्रदेश में नक्सलियों की संख्या शून्य हो गई है। राज्य सरकार ने नक्सलियों के पुनर्वास के लिए योजना बनाई। पिछले 42 दिन में 42 सरेंडर हुए और 10 नक्सलियों को ढेर किया गया है। हम ऐसा तंत्र विकसित करेंगे, जिससे दोबारा नक्सलवादी मूवमेंट स्थापित न हो पाए। राज्य सरकार ने सभी पड़ोसी राज्यों के साथ आवश्यक समन्वय किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के माध्यम से प्रदेश में जल संरक्षण का बड़ा अभियान शुरू हुआ है। पार्वती-कालीसिंध और चंबल परियोजना के समझौते के बाद अब मध्यप्रदेश और राजस्थान को पर्याप्त जल मिल रहा है। महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर ताप्ती वॉटर रीचार्ज परियोजना पर भी कार्य हो रहा है। एक लाख करोड़ की पीकेसी परियोजना में 90 हजार करोड़ भारत सरकार दे रही है। इसी प्रकार ताप्ती परियोजना के लिए भी 70 हजार करोड़ केंद्र सरकार दे रही है। उज्जैन में पहले सिंहस्थ हुए, लेकिन श्रद्धालुओं को गंभीर नदी के जल से स्नान कराया गया। वर्ष 2016 में नर्मदा के जल से स्नान का प्रबंध कराया, लेकिन आगामी 2028 के सिंहस्थ के लिए हमने 800 करोड़ लागत से नई योजना बनाई है। अब श्रद्धालु क्षिप्रा के जल से स्नान करेंगे। राज्य के अंदर पहली बार दो नदियों- गंभीर और कान्ह को अंडर डक्ट के माध्यम से लिंक किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले भोपाल में जीआईएस नहीं होती थी। भूतो न भविष्यति इसी साल फरवरी में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस) हुई। रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव के माध्यम से भी निवेश आया है। इसी का परिणाम है कि निवाड़ी जैसे छोटे जिले में इस्पात कारखाना खुल रहा है। झाबुआ में खाद बनाया जा रहा है। नीमच में भारत ही नहीं दुनिया का पंप स्टोरेज बना है, जिसका कार्य दो साल में पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश में स्वीकृत 7 पीएम मित्र पार्क में से पहला पार्क का अपने जन्मदिन के अवसर पर मध्यप्रदेश के धार में भूमिपूजन किया है। राज्य सरकार ने इसमें भूमि आवंटन भी कर दिया है। विक्रम उद्योगपुरी में दवा कंपनियों ने इंडस्ट्री लगाकर उत्पादन शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से 55 पीएम एक्सीलेंस कॉलेज खोले गए हैं। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज की संख्या निरंतर बढ़ाई जा रही है। अब प्रदेश में सरकारी-निजी कुल मिलाकर 52 मेडिकल कॉलेज हो गए हैं। राज्य सरकार पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज और चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने के लिए 1 रुपए लीज पर जमीन दे रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन दो सालों में ही हमने हुकुमचंद मिल के मजदूरों के बकाये का विवाद खत्म कराया। भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को न्याय दिलाते हुए जहरीले कचरे का निष्पादन कराया। इंदौर-उज्जैन, भोपाल-नर्मदापुरम को मेट्रोपोलिटन एरिया बनाने की योजना बनाई गई। हमारे औद्योगिक केंद्र मेट्रोपोलिटन एरिया के विकास के मुख्य आधार बनेंगे। उन्होंने कहा कि हम प्रदेश में नई एविएशन पॉलिसी लेकर आए हैं। इसके तहत प्रदेश में पहली बार इंटर स्टेट और इंट्रा स्टेट एयर सर्विसेज शुरू की गई हैं। रीवा से इंदौर और दिल्ली के लिए हवाई सेवा उपलब्ध हो गई है। प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं का विकास तेजी से जारी है। चित्रकूट धाम और ओरछा धाम के विकास कार्य जारी हैं। हमने एक बगिया मां के नाम और गंगोत्री योजना शुरू की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में सबसे सस्ती बिजली मध्यप्रदेश दे रहा है। ओंकारेश्वर, नीमच में सोलर प्लांट स्थापित किए गए हैं। मुरैना में स्थापित हो रहा सोलर प्लांट मध्यप्रदेश के साथ-साथ उत्तरप्रदेश को भी बिजली उपलब्ध कराएगा। केन्द्र सरकार ने साइबर तहसील का पहला पुरस्कार मध्य प्रदेश को दिया है। बटवारा, ई-नामांतरण जैसी सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध है। जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू किया। सड़कों के किनारे मुरम खुदाई से बने गड्डों को हम जल संचयन संरचना के रूप में विकसित कर रहे हैं। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां 250 से अधिक नदियां बहती हैं। हम बूंद-बूंद पानी को सहेजने की योजना बना रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौ संरक्षण के लिए नई योजना शुरू की गई है। दूध उत्पादन को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। गोपालकों को 10 लाख रुपए तक अनुदान दिया जा रहा है। बड़ी गोशालाएं खोलने पर भी अनुदान मिलेगा। गोशालाओं के लिए 125 एकड़ भूमि भी दी जाएगी। हम वेस्ट को वैल्यू में बदल रहे हैं। प्रदेश में कचरे और पराली से ऊर्जा उत्पादन किया जा रहा है। इस क्षेत्र में कई नामी कम्पनियों ने भी रूचि व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग कॉलेजों के अंदर आईटी पार्क बनाए जा रहे हैं। आईटी सिटी और एआई सिटी तैयार करने की योजना है। प्रदेश में जल्द ही ई-बसें भी शुरू की जाएंगी। गरीब कल्याण के लिए अनेक निर्णय लिए हैं। बजट को 5 साल में दोगुना करने का लक्ष्य है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय को 1 लाख 54 हजार रुपए तक बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि 2600 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा, सोयाबीन की खरीद के लिए भावांतर योजना लॉन्च की गई। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत बहनों को दी जाने वाली मासिक राशि भी बढ़ा दी गई है। अब हमारी बहनों को हर माह 1500 रुपए दिए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनसम्पर्क विभाग द्वारा प्रकाशित विकास और सेवा के दो वर्ष – विभागवार उपलब्धियां, जिलों की विकास गाथा, जिलों की सफलता की कहानियां और नई राहें-नए अवसर (सरकार की सभी योजनाओं की जानकारी) का विमोचन भी किया।

    प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मीडिया प्रतिनिधियों के साथ खुला संवाद हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का बड़ी ही कुशलतापूर्वक जवाब देकर सरकार की उपलब्धियों की जानकारी दी।

    उप मुख्यमंत्री वित्त एवं वाणिज्यिक कर श्री जगदीश देवड़ा ने मध्यप्रदेश सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विकास भी, विरासत भी और सबका साथ-सबका विकास के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृत-संकल्पित हैं। राज्य सरकार मध्यप्रदेश को विकास की श्रेणी में अग्रणी बनाने के लिए प्राण-प्रण से काम कर रही है। सभी क्षेत्रों में विकास के अभूतपूर्व काम हुए हैं। दो वर्ष का हमारा कार्यकाल अनेकानेक उपलब्धियों से भरा हुआ है।

    वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल ने विकास और सेवा के सफलतम दो वर्ष पूर्ण होने पर सरकार के मंत्रियों और प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विकास नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है। सरकार ने सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार निरोधी कदम उठाए हैं। प्रदेश में गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य हुए हैं। राज्य सरकार 2047 के विकसित मध्यप्रदेश के लिए कार्य कर रही है। जनजातीय कल्याण के लिए 40 हजार करोड़ की राशि का बजट में प्रावधान किया है। जनजातीय नायकों की प्रतिमाएं स्थापित करने के साथ उनके नाम पर कैबिनेट की गई। प्रदेश में एक लाख सरकारी नौकरियों के पद भरे गए। धार में प्रधानमंत्री मित्र पार्क की सौगात मिली है। राजधानी में सम्राट विक्रमादित्य और राजाभोज के नाम पर प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं। प्रदेश में आरोग्य मंदिरों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश में एयर एंबुलेंस की शुरुआत की गई है।

    प्रेस वार्ता में उप मुख्यमंत्री लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री राजेन्द्र शुक्ल, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई एवं पदाधिकारी श्री आशीष ऊषा अग्रवाल भी उपस्थित थे। प्रेस वार्ता का कुशल संचालन आयुक्त जनसम्पर्क श्री दीपक कुमार सक्सेना ने किया।

    बीते दो वर्ष की प्रमुख उपलब्धियां

    औद्योगिक विकास –

        नया इकोसिस्टम – 18 नई नीतियों को मंजूरी

        इन्वेस्टर मीट – ₹32 लाख करोड़ से अधिक का निवेश

        ₹8.57 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव धरातल पर

        निवेश सरल, तेज और पारदर्शी – ‘एमपी इंवेस्ट पोर्टल 3.0 लॉच’

    गरीब कल्याण –

        मध्यप्रदेश को गरीबी मुक्त बनाने के लिए गरीब कल्याण मिशन शुरू

        1 करोड़ 33 लाख परिवारों को नि:शुल्क खाद्यान्न वितरण

        इंदौर की हुकुमचंद मिल के 4,800 श्रमिक परिवारों को ₹224 करोड़ की राशि का सरकार ने किया भुगतान

    कमजोर वर्ग कल्याण जनजातीय कल्याण

        जनजातीय वर्ग के समग्र विकास और कल्याण के लिए 40 हजार 804 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान, पिछले बजट की तुलना में 23.4% की बढ़ोतरी

        तेंदूपत्ता संग्राहकों का संग्रहण पारिश्रमिक 3,000 रुपये प्रति मानक बोरा से बढ़कर 4,000 हजार रुपये किया

        पीएम जनमन योजना अंतर्गत 21 जिलों में 66 मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रारंभ

        पीएम जन-मन योजना अंतर्गत लगभग 50 हजार आवास पूरे किए गए

        पीएम जनमन कार्यक्रम अंतर्गत आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण में म.प्र. देश में अव्वल

        पचमढ़ी अभयारण्य का नाम राजा भभूत सिंह के नाम पर किया गया

        जबलपुर एयरपोर्ट और मदन महल फ्लाईओवर का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर किया गया

        विशेष पिछड़ी जनजातीय के युवाओं को पुलिस, सेना एवं होमगार्ड में भर्ती कराने के लिये प्रशिक्षण हेतु बैगा, भारिया एवं सहरिया बटालियन गठित होगी

        विशेष सशस्त्र पुलिस बल (SAF) की 35वीं बटालियन, मण्डला का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर होगा।

     

    महिला कल्याण

        लाड़ली बहना योजना की राशि ₹1,250 से बढ़कर ₹1,500 प्रतिमाह

        शासकीय सेवाओं में महिलाओं के आरक्षण को बढ़ाकर किया 35 प्रतिशत

        प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के क्रियान्वयन में देश में अग्रणी मध्यप्रदेश, 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को ₹512 करोड़ से अधिक का भुगतान

        चयन पोर्टल के माध्यम से देश में पहली बार ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के 2,027 और सहायिकाओं के 17,477 पदों पर भर्ती

        5 लाख स्व- सहायता समूहों के माध्यम से 62 लाख ग्रामीण बहनें हुईं आत्मनिर्भर

        महिला उद्यमियों के प्रोत्साहन हेतु 850 एमएसएमई इकाइयों को 275 करोड़ रुपए का अंतरण

        रेडीमेट गारमेट इंडस्ट्री में प्रति महिला श्रमिक 5,000 के मान से प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय

        प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान अंतर्गत ‘सुमन सखी’ चैटबॉट की शुरुआत

    किसान कल्याण

        मध्यप्रदेश दलहन, तिलहन, मक्का, टमाटर उत्पादन में देश में प्रथम

        खाद्यान्न, अनाज और गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर

        कृषक कल्याण मिशन मंजूर – 6 विभाग करेंगे काम

        2025-26 से 2030-31 तक आत्मनिर्भरता हेतु दाल मिशन को मंजूरी

        वर्ष 2024-25 में 35 लाख 3 हजार कृषकों को 21 हजार 232 करोड़ रुपए का फसल ऋण वितरित, पिछले वर्ष की तुलना में 1,286 करोड़ रुपए अधिक

        प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में वित्तीय वर्ष 2023-24 में बीमा क्लेम के रूप में 961.68 करोड़ रुपयों का, जबकि 2024-25 में 1,275.86 करोड़ की राशि का भुगतान हुआ

        आपदा प्रभावित 24 लाख 14 हज़ार से अधिक किसानों को 2,106 करोड़ 64 लाख से अधिक की राशि प्रदान

        गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,425 रुपये पर किसानों के हित में 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया गया

        धान उत्पादकों को बोनस के स्थान पर प्रति हेक्टेयर 4,000 रुपए की अनुदान राशि 6 लाख 69 हजार से अधिक धान उत्पादक किसानों के खाते में 337 करोड़ रुपए से अधिक राशि का अंतरण

    सिंचाई एवं पेयजल

        दिसंबर 2024 तक लगभग 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर तक सिंचाई क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य

        माइक्रो सिंचाई में देश में अग्रणी मध्यप्रदेश

        प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की पहली नदी-जोडो केन-बेतवा लिंक परियोजना का भूमि-पूजन, पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना को लेकर त्रिपक्षीय समझौता और तापी बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना के लिए महाराष्ट्र के साथ एमओयू

        केन बेतवा लिंक परियोजना, संशोधित पार्वती कालीसिंध परियोजना और नर्मदा घाटी विकास विभाग की अन्य प्रस्तावित महत्वपूर्ण परियोजनाओं से 19.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ेगी

        ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के उद्देश्य की पूर्ति के लिए 133 वृहद एवं मध्यम प्रेशराइज्ड सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली आधारित परियोजनाएं निर्माणाधीन

        2 हजार 489 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से तराना में नर्मदा-क्षिप्रा बहुउद्देशीय माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का लोकार्पण हुआ इससे 100 ग्रामों की 30 हजार 218 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

    पशुपालन एवं डेयरी विभाग

        “स्वावलंबी गो-शाला कामधेनु स्थापना नीति-2025” स्वीकृत

        दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने म.प्र. सरकार और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच एमओयू हुआ

        दुग्ध उत्पादन प्रोत्साहन के लिए ‘डॉ. भीमराव अम्बेडकर विकास योजना’ प्रारंभ

        गो-वंश के बेहतर आहार के लिये प्रति गो-वंश मिलने वाली 20 रुपये की राशि बढ़ाकर 40 रुपये करने का निर्णय

        घायल गायों के लिये हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहन की व्यवस्था

        ग्वालियर स्थित आदर्श गौ-शाला में देश के पहले 100 टन क्षमता वाले सीएनजी प्लांट की स्थापना

        4 ज़िलों आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर, एवं उज्जैन में आदर्श गौशालाएं स्थापित, भोपाल, जबलपुर और सागर में आदर्श गोशालाओं के निर्माण कार्य प्रगतिरत

        हर माह लगभग 50 करोड़ की राशि गो-शालाओं के खाते में DBT के माध्यम से सीधे गौशाला के बैंक के खाते में हो रही अंतरित

     

    अधोसंरचना विकास

        नगरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ प्रारम्भ होगी

        भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन एवं सागर में प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत 550 से अधिक शहरी ई-बसों का होगा संचालन

        हवाई यात्रा

        रीवा, दतिया और सतना हवाई अड्डे के लोकार्पण बाद प्रदेश में हवाई अड्डों की संख्या 8 हुई

        विंध्यवासियों को सौगात, रीवा-दिल्ली, रीवा-इंदौर हवाई सेवा का शुभारंभ

        उज्जैन हवाई अड्डे के विकास अनुबंध पर हस्ताक्षर

    रेल सेवा

        मध्यप्रदेश में बनेगा रेल मैन्युफैक्चरिंग सेंटर

        भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को सौंपा गया भूमि-आवंटन पत्र, रायसेन के उमरिया में होगी स्थापना

    मेट्रो सेवा

        इंदौर में मेट्रो सेवा शुरू, भोपाल में 21 दिसंबर से शुरू होगा संचालन

    सड़क परिवहन

        वर्ष 2025-26 में 4078 कि.मी. लंबी सड़कों के निर्माण का लक्ष्य, ₹11,159 करोड़ से अधिक की राशि का प्रावधान

        अगले 5 वर्ष में 1 लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण होगा

        ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकरण और मध्यप्रदेश के बीच ₹1 लाख करोड़ का एमओयू हुआ, इससे 4,010 किलोमीटर सड़कें बनेंगी

        मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत 8,565 गांव 19378 किलोमीटर लंबी सड़कों से जुड़े

        अप्रैल 2025 में केंद्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश को 4,300 करोड़ रुपये से अधिक की 4 महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति

        उज्जैन-जावरा के मध्य 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे निर्माण के लिए 5,017 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति

    नगरीय विकास

        मध्यप्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम- 2025 को स्वीकृति इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर मेट्रोपॉलिटन सिटी बनेंगे

        दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र, पहला- इंदौर-उज्जैन-देवास-धार दूसरा- भोपाल-सीहोर-रायसेन-विदिशा-ब्यावरा विकसित होंगे

        नगरीय विकास एवं आवास विभाग की एकीकृत टाउनशिप नीति-2025 को मंजूरी

        स्वच्छ सर्वेक्षण में 14 निकायों को राष्ट्रीय सम्मान, इनमें इंदौर प्रथम और जबलपुर दूसरे स्थान पर

        पीएम आवास योजना (शहरी) 2.0 में बन रहे 10 लाख आवास

        विगत दो वर्षों में 2 लाख 65 हजार से अधिक हितग्राहियों के खाते में ₹1,749 करोड़ से अधिक की राशि सीधे अंतरित

        दीनदयाल रसोई केंद्रों का विस्तार, 56 से बढ़ाकर 191 किया

        शहरी क्षेत्रों में 10 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह गठित, 1 लाख से अधिक गरीब परिवारों को लाभ

        पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत दो वर्षों में 2 लाख 90 हजार पथ विक्रेताओं को 1,122 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण राशि वितरित

    ग्रामीण विकास

        हर ग्राम पंचायत में पीएम किसान समृद्धि केंद्र की होगी स्थापना

        2,472 ग्राम सेवा सदन (पंचायत भवन), 106 अटल सुशासन भवन (जनपद पंचायत भवन) और 5 अटल जिला सुशासन भवन (जिला पंचायत भवन) स्वीकृत

        855 करोड़ रुपए लागत के 3,560 सामुदायिक भवन निर्माण को स्वीकृति

        प्रत्येक विधानसभा में मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना के अंतर्गत 155 विधानसभा क्षेत्रों में ग्रामों का चयन

        एक बगिया मां के नाम अंतर्गत 750 करोड़ रुपए लागत से 31,142 कार्य किए गए

        "कैच द रेन" अभियान के अंतर्गत खरगौन जिले को “नेशनल वाटर अवार्ड-2024” प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ

        राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत लखपति दीदी की श्रेणी में 11 लाख 27 हजार 37 परिवार पिछले दो वर्ष में दर्ज

        आजीविका मिशन के अंतर्गत 19,995 ग्रामीण युवाओं को रोजगार के लिए कौशल प्रशिक्षण तथा 16,975 युवाओं को रोजगार दिया गया

        2 लाख 36 हजार 214 समूहों को 5 हजार 658 करोड़ रूपए से अधिक का बैंक लिंकेज प्रदान किया गया और 3,395 स्व-सहायता समूहों को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर ऑनबोर्ड किया गया

        प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत 11 लाख 46 हजार आवास स्वीकृत, देश में प्रथम

        21,186 ग्रामों को ओडीएफ प्लस मॉडल घोषित किया गया है

        ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के अंतर्गत मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना में 21 हजार 630 करोड़ रुपये लागत की 30 हजार 900 कि.मी. सड़कों की स्वीकृति

        नक्सल प्रभावित जिलों में विकेंद्रीकृत कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ

     

    स्कूल शिक्षा विभाग

        दो वर्षों में उच्च-माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक स्तर पर व्यापक भर्ती प्रक्रिया

        लगभग 76,000 अतिथि शिक्षकों को सत्र प्रारंभ से उपलब्ध कराया गया

        24,000 से अधिक शिक्षकों को उच्च पद-प्रभार देकर विद्यालयों में प्रशासनिक मजबूती लाई गई

        ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से ई-अटेंडेंस लागू

        पीएम-जनमन और अन्य योजनाओं के तहत 210 से अधिक छात्रावासों को अनुमोदन

        ई-होस्टल मैनेजमेंट ऐप तैयार, रियलटाइम ट्रैकिंग की सुविधा

        पीएम श्री विद्यालयों का विस्तार, 799 मॉडल स्कूल, इनमें 4.8 लाख से अधिक विद्यार्थी नामांकित

        सांदीपनि स्कूलों में रोबोटिक्स लैब और 458 पीएम श्री स्कूलों में ATL लैब

        3,367 स्कूलों में व्यावसायिक कोर्स शुरू

        हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम पिछले 15 वर्षों में सर्वश्रेष्ठ हाईस्कूल में 76.22 प्रतिशत और हायर सेकेण्डरी में 74.48 प्रतिशत रहा।

        सेनेटरी पैड हेतु 20 लाख से अधिक बालिकाओं के खाते में ₹61.12 करोड़ से अधिक की राशि का अंतरण

        राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य

        नामांकन में ऐतिहासिक वृद्धि, वर्ष 2025-26 में कक्षा 1 में 120 प्रतिशत और कक्षा 9 से 12 में 104 प्रतिशत नामांकन वृद्धि

        ड्रॉपआउट रेट में तेज गिरावट, कक्षा 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का सर्वे एवं चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम लागू

        22 लाख से अधिक बच्चों का सर्वे, 6 लाख 18 हजार बच्चे दोबारा स्कूलों में जोड़े गए

        निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण में सुधार, सत्र 2025-26 में सभी छात्रों को सत्र के पहले ही दिन से किताबें उपलब्ध

        75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम के सिर्फ 1 माह में लैपटॉप वितरण

        2025-26 में प्रथम चरण में ही निःशुल्क स्कूटी वितरण पूरा

        55 लाख विद्यार्थियों को गणवेश खरीदने 330 करोड़ रुपए की राशि का अंतरण

        बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए सांदीपनि विद्यालयों का संचालन, वर्तमान में 369 सांदीपनि विद्यालय

        इंदौर के सांदीपनि मालव कन्या विद्यालय को मिला एक्सीलेंस स्कूल अवॉर्ड

        अगस्त 2025 से सत्र के शुरू में ही निःशुल्क साइकिल वितरण प्रारंभ

        प्रदेश के 20,000 से अधिक निजी विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत पढ़ने वाले 8.50 लाख बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति की गई

        समेकित छात्रवृत्ति योजना 2025 के अंतर्गत प्रदेश के 52 लाख विद्यार्थियों के खातों में ₹300 करोड़ की राशि का सिंगल क्लिक से अंतरण

        प्रदेश के दो सांदीपनि विद्यालयों को देश में सर्वश्रेष्ठ 10 स्कूलों में चुना गया

    उच्च शिक्षा विभाग

        प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम उषा) के अंतर्गत प्रदेश के 8 विश्वविद्यालयों में अधोसंरचना तथा अन्य विकास कार्यों के लिए 400 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत

        विश्वविद्यालयों के कुलपति अब कुलगुरु कहे जाएँगे

        जनजाति एवं स्वतंत्रता आंदोलनों के नायकों के नाम पर 3 नए विश्वविद्यालयों की स्थापना

        हर जिले में 1, प्रदेश में 55 चिह्नित कॉलेजों का पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के रूप में उन्नयन

        रोजगार मेलों और प्लेसमेंट ड्राइव्स के माध्यम से 52,119 युवाओं का प्रारंभिक चयन कर लेटर ऑफ इंटेंट प्रदान

        गांव की बेटी प्रोत्साहन योजना, प्रतिभा किरण प्रोत्साहन योजना, विदेश अध्ययन योजना, पीएचडी शोध छात्रवृति आदि योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियों का मिल रहा लाभ

        एमपी बोर्ड 12वीं में 75 प्रतिशत अंक पाने वाले स्टूडेंट्स को लैपटॉप के लिए ₹25,000 दिए जा रहे हैं

        महाविद्यालयों के लिए 2 हजार से अधिक नवीन पद सृजित

        राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मूल भावना के अनुरूप समस्त विश्वविद्यालय/ महाविद्यालयों में "भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ" की स्थापना

     

    लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग

        12,655 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 448 मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक और 72 मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित

        2 वर्ष में 84 लाख पात्र हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बनाए, आयुष्मान भारत योजना में 34 लाख नि:शुल्क उपचार

        उज्जैन में प्रदेश की पहली मेडिसिटी और मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन

        मई 2024 में शुरू “पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा” से 109 जरूरतमंदों को एयरलिफ्ट किया

        सिकल सेल में अभी तक 1 करोड़ 25 लाख से अधिक स्क्रीनिंग

        2 वर्ष में 6 शासकीय मेडिकल कॉलेज खोले गए, आगामी 3 साल में 6 और कॉलेज खोले जाएंगे, शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 19 और निजी कॉलेजों की संख्या बढ़कर 14 हुई

        4 जिलों कटनी, धार, पन्ना और बैतूल में पीपीपी मोड पर बनेंगे नए मेडिकल कॉलेज, शासकीय एवं निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटें बढ़कर कुल 5,550 सीटें हुईं

        3 नए जिला चिकित्सालय मैहर, मऊगंज और पांडुर्ना स्वीकृत व 5 जिला चिकित्सालयों का उन्नयन

        देहदान करने वाले 38 मृतकों को सरकार की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया

        जिला स्तर पर एकीकृत उपचार केंद्रों की स्थापना एवं 2 सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस भोपाल एवं इंदौर में एवं प्री नेटल जांच हेतु एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस चिकित्सा महाविद्यालय रीवा में स्थापित

    आयुष विभाग

        800 आयुष आरोग्य मंदिर का संचालन प्रारंभ

        512 आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों को नियुक्ति-पत्रों का वितरण, 22 जिलों में आयुष चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए 213 पदों का सृजन

        सागर, मुरैना, शहडोल, बालाघाट नर्मदापुरम में ₹350 करोड़ की लागत से खुलेंगे आयुर्वेदिक कॉलेज

        मध्यप्रदेश के 12 जिलों में आयुष अस्पताल खोले जाएंगे

    ऊर्जा विभाग

        मुरैना में पहली सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना के माध्यम से 2 रुपए 70 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली प्राप्त

        उद्योगों सहित सभी गैर-कृषि उपभोक्ताओं को 24 घंटे तथा कृषि उपभोक्ताओं को प्रतिदिन औसतन 10 घंटे बिजली प्रदाय है

        वर्तमान में कुल विद्युत उपलब्ध क्षमता 24,108 मेगावॉट है मध्यप्रदेश विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सरप्लस की स्थिति में है

        2,000 मेगावाट सौर पार्क व 1,000 मेगावाट कंपोजिट ऊर्जा भंडारण परियोजना स्थापित किए जाने की स्वीकृति

        गुणवत्तापूर्ण व विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति के लिए रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) का हो रहा क्रियान्वयन

        ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्रोजेक्ट ने प्रथम चरण में 278 मेगावॉट की पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन करना किया प्रारंभ

        880 मेगावॉट क्षमता की आगर और नीमच सौर परियोजना प्रारंभ

        बिजली उपभोक्ताओं की सुगमता के लिए समाधान योजना योजना का प्रारंभ

    खेल एवं युवा कल्याण

        सरकारी नौकरियों के लिए चयनित लगभग 11,000 उम्मीदवारों को सौंपे नियुक्ति-पत्र

        अन्य विभागों के लिए चयनित 362 शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र वितरित

        कर्मचारी चयन आयोग और लोक सेवा आयोग की भर्ती आरंभ 2.5 लाख भर्तियों का लक्ष्य

        स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में सहभागिता के लिए ₹50,000 से लेकर ₹1.5 लाख तक वित्तीय सहायता

        'रोजगार दिवस' के अवसर पर रिकार्ड 7 लाख युवाओं को 5 हज़ार करोड़ रुपये का स्व-रोजगार ऋण वितरित

        अप्रैल 2023 से जून 2024 अब तक कुल 616 जॉब फेयर आयोजित किये गये व लगभग 61 हजार आवेदकों को निजी क्षेत्र में नियुक्ति हेतु ऑफर लेटर प्रदाय

        ग्वालियर में नवनिर्मित श्रीमंत माधवराव सिंधिया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का उद्घाटन

        12 जनवरी 2025 को युवा दिवस के अवसर पर स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन की शुरुआत

        भारतीय सेना,पैरा मिलिट्री और पुलिस में भर्ती से पहले के प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए पार्थ योजना की शुरुआत

        पैरा-ओलम्पिक में पदक विजेता खिलाड़ियों को 50 लाख रूपये की अतिरिक्त राशि दिये जाने का अनुमोदन, कुल सम्मान राशि 1 करोड़ रुपये हो जाएगी

        सभी 55 जिलों में खेल स्टेडियम का निर्माण होगा

        इस वर्ष 22 नए आईटीआई होंगे प्रारंभ, प्रत्येक संभाग में आईआईटी की तर्ज पर मध्यप्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की स्थापना का लक्ष्य

     

    पुलिस और सैन्य कल्याण

        नक्सल विरोधी अभियानों में सफलता, 16 मुठभेड़ों/एक्सचेंज ऑफ फायर में 13 नक्सली ढेर, 1 गिरफ्तार

        2 करोड़ 36 लाख की इनामी राशि के 10 नक्सलियों ने बालाघाट में किया सरेंडर

        इंडियन मुजाहिदीन, ISIS समर्थक नेटवर्क और टेरर–फंडिंग–चरस कनेक्शन पर कार्रवाई करते हुए 20 आरोपी गिरफ्तार, बहु-राज्यीय मॉड्यूल टूटे

        मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का बड़ा खुलासा, 1,300 संदिग्ध खातों के माध्यम से ₹2,000 करोड़ के अवैध लेन-देन का पर्दाफाश

        पुलिस में शीघ्र ही 20 हजार से अधिक पदों पर भर्ती होगी, नक्सल प्रभावित जिले बालाघाट, मण्डला एवं डिण्डोरी के लिए विशेष सहयोगी दस्ते के 850 पद स्वीकृत

        2,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को मिला उनकी पात्रतानुसार उच्च पद का प्रभार

        साइबर पुलिसिंग में रिकॉर्ड उपलब्धि, ₹997 करोड़ के साइबर फ्रॉड में से ₹127 करोड़ सुरक्षित

        पुलिसकर्मियों के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 5,700 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से 25 हजार मकान बनाने का लक्ष्य, 10 हजार से अधिक आवास पूर्ण

        जिलों में पुलिस बैंड की स्थापना के लिए 932 नवीन पदों और होमगार्ड के 4,657 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चरणबद्ध रूप से प्रारंभ

        किसी जवान के शहीद होने पर दी जाने वाली सहायता राशि में से 50% शहीद की पत्नी और 50% राशि माता-पिता को दी जाएगी

        डायल-112 एकीकृत सेवा प्रारंभ

    श्रम विभाग

        श्रम कानूनों में सरलीकरण के लिए तीन श्रम कानूनों में संशोधन

        ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से 1.91 करोड़ असंगठित श्रमिकों का हुआ पंजीयन

        ई-श्रम पंजीयन में देश में चौथा स्थान

        कारखानों में फ्लेक्सी वर्क ऑवर्स का प्रावधान प्रक्रियाधीन और एक तिमाही में 125 घंटे के स्थान पर 144 घंटे के ओवरटाइम की अनुमति प्रक्रियाधीन

        श्रम विभाग की 50 सेवाएं लोक सेवा गारंटी में शामिल होने से निर्धारित समय-सीमा में प्रदान हो रही सेवा

    खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग

        2 वर्षों में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 5.25 करोड़ से अधिक हितग्राहियों को 22,800 करोड़ का 66.25 लाख मीट्रिक टन नि:शुल्क अनाज वितरित किया।

        7.25 लाख नए ई-श्रमिक परिवारों को राशन पात्रता देकर नि:शुल्क राशन का मिला लाभ

        गेहूं उपार्जन पर किसानों को ₹29,558 करोड़ MSP + ₹1,965 करोड़ बोनस दिया गया

        धान उपार्जन पर ₹19,208 करोड़ MSP + ₹337 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि

        खाद्यान्न की कुल क्षमता 422 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाई

        दो साल में लाड़ली बहना और उज्ज्वला योजना की महिलाओं को 616.97 लाख नि:शुल्क गैस सिलेंङर रिफिल

        राशन वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाते हुए लाभार्थी को SMS अलर्ट से राशन वितरण के हर स्तर की सूचना

    खनिज

        पन्ना के विश्वविख्यात हीरे को मिला GI टैग

        सर्वाधिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर देश में प्रथम

        वित्तीय वर्ष 2024-25 में 31 खनिज ब्लॉक नीलाम, एक वित्तीय वर्ष में नीलाम खनिज ब्लॉकों की सर्वाधिक संख्या

        खनिज राजस्व में हर वित्तीय वर्ष में लगातार बढ़ोतरी

        स्ट्रेटेजिक एवं किट्रिकल मिनरल वर्ग के अंतर्गत रोफाईट के 3, रॉकफास्फेट के 1 ब्लॉक नीलाम

        41 क्षेत्रों पर अन्वेषण पूरा, 83 क्षेत्रों पर अन्वेषण कार्य जारी

        GIS 2025 में खनन क्षेत्र में ₹3.22 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त

    प्रकृति और जैव विविधता

        कान्हा देश का सर्वश्रेष्ठ टाइगर रिजर्व घोषित, शाकाहारी वन्य जीवों की संख्या में मध्यप्रदेश देश में अव्वल, भोपाल की पहचान अब टाइगर राजधानी के रूप में होगी

        ₹5,500 करोड़ की लागत से बनेगा टाइगर कॉरीडोर, एक ही रोड से जुड़ेंगे कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच टाइगर रिजर्व

        चीता प्रोजेक्ट सफल, वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में 27 और गांधी सागर अभयारण्य में 3 चीते मौजूद

        वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व नौरादेही, सागर को चीतों के तीसरे रहवास के रूप में विकसित करने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति

        लेपर्ड स्टेट मध्यप्रदेश में 3,907 तेंदुए जो देश में सर्वाधिक

        डॉ. विष्णु वाकणकर रातापानी अभयारण्य प्रदेश का 8वां, माधव राष्ट्रीय उद्यान 9वां टाइगर रिजर्व बना

        ओंकारेश्वर वन्य जीव अभयारण्य देवास-खंडवा, डॉ भीम राव अम्बेडकर अभयारण्य सागर, जहानगढ़ अभयारण्य श्योपुर और प्रदेश के प्रथम ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व का गठन

        स्व-सहायता समूह की 30,000 से अधिक महिलाओं की 30,000 एकड़ निजी भूमि पर

        ‘एक बगिया माँ के नाम’ परियोजना के अंतर्गत पौधरोपण

        अविरल निर्मल नर्मदा योजना अंतर्गत नर्मदा नदी के 10 कि.मी. की परिधि में आने वाले 12 वन मण्डलों में 5,600 हेक्टेयर में से 5,222.75 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण एवं भू-जल प्रबंधन

    दुनिया को भा रहा हृदय प्रदेश का पर्यटन

        पिछले एक वर्ष में 13 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन

        मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए “पर्यटन नीति-2025”, निवेश एवं रोजगार के अवसर उत्पन्न करने मध्यप्रदेश “फिल्म पर्यटन नीति-2025” को मंजूरी

        ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने 121 गांवों में 241 होम-स्टे तैयार, 1,000 का लक्ष्य

        प्रतिष्ठित ट्रेवल एंड टूरिज्म कॉन्क्लेव एंड अवार्ड्स में “बेस्ट टूरिज्म स्टेट ऑफ द ईयर” का सम्मान

        ‘पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा’ प्रारम्भ, 8 शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, ग्वालियर, सिंगरौली और खजुराहो को हवाई सेवा से जोड़ा गया

        ‘पीएम श्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा’ का संचालन प्रारंभ

        राजधानी भोपाल के तालाब में कश्मीर की डल झील की तर्ज पर 20 शिकारा (नौका) का शुभारंभ

        पर्यटन के क्षेत्र में 18 अवॉर्ड्स प्राप्त, साथ ही टूरिज्म बोर्ड देश का बेस्ट टूरिज्म बोर्ड बना

       

  • नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प तेजी से हो रहा साकार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    सुकमा में 10 माओवादी कैडरों ने किया आत्मसमर्पण, पुनर्वास से पुनर्जीवन की नई शुरुआत

    रायपुर 
    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज सुकमा जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” कार्यक्रम के तहत दरभा डिवीजन कमेटी सहित विभिन्न नक्सली संगठनों से जुड़े 10 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण को ऐतिहासिक और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बताया। उल्लेखनीय है कि इनमें 6 महिला माओवादी भी शामिल हैं, जिन पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प अब केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि तेजी से साकार होती वास्तविकता बन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर है।

    मुख्यमंत्री  श्री साय ने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि बस्तर में अब हिंसा, भय और भटकाव की विचारधारा कमजोर पड़ रही है, जबकि विकास, विश्वास और संवाद की राह मजबूत हो रही है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हिंसा के रास्ते पर न वर्तमान सुरक्षित होता है और न ही भविष्य। छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष पुनर्वास नीति आत्मसमर्पण करने वालों को सम्मान, सुरक्षा, आजीविका और समाज में पुनर्स्थापना की ठोस गारंटी देती है। मुख्यधारा में लौटकर ये लोग अपने परिवारों के साथ एक स्थायी, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत कर सकते हैं।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य पूरी तरह स्पष्ट है— छत्तीसगढ़ को पूर्णतः नक्सलवाद मुक्त बनाना और बस्तर को विकास, विश्वास और अवसरों की नई पहचान देना।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के निर्णय का स्वागत करते हुए अन्य भटके युवाओं से भी अपील की कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।

    उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार के समन्वित प्रयासों से सुरक्षा बलों की सशक्त कार्रवाई, विकास योजनाओं का विस्तार और पुनर्वास आधारित मानवीय दृष्टिकोण—तीनों मिलकर बस्तर में परिवर्तन की नई कहानी लिख रहे हैं।

  • बीएड योग्यताधारी नवनियुक्त शिक्षकों के लिये सूचना

    बीएड योग्यताधारी नवनियुक्त शिक्षकों के लिये सूचना

    भोपाल 

    लोक शिक्षण संचालनालय ने जानकारी दी है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील और उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा पारित आदेशों के क्रम में प्राथमिक शिक्षक पात्र परीक्षा वर्ष 2020 के परिणाम के आधार पर नियुक्त बीएड योग्यताधारी प्राथमिक शिक्षकों के लिये नेशनल ओपन स्कूल (एनआईओएस) द्वारा ब्रिज कोर्स की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।

    संबंधित शिक्षक 25 दिसम्बर 2025 तक एनआईओएस के पोर्टल पर https://bridge.nios.ac.in समय-सीमा में रजिस्ट्रेशन न कराने वाले अथवा निर्धारित समय-सीमा में ब्रिज कोर्स उत्तीर्ण न करने वाले प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुसार जारी नहीं रखी जा सकेंगी।

     

  • पी.एच.डी शोध छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन आमंत्रित

    शिक्षण सत्र 2025–26 के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
    अनुसूचित जाति-जनजाति एवं सभी वर्ग के दिव्यांग विद्यार्थी नवीन एवं नवीनीकरण के लिए कर सकेंगे आवेदन

    भोपाल 
    उच्च शिक्षा विभाग ने शिक्षण सत्र 2025-26 में पी.एच.डी. शोध छात्रवृत्ति योजना अंतर्गत विश्वविद्यालयों में अध्ययरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं सभी वर्गों के दिव्यांग शोधार्थियों से नवीन एवं नवीनीकरण के लिए आवेदन मंगाए हैं। योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों को 5 जनवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से आवेदन जमा करना होगा। नवीन आवेदन कार्यालय आयुक्त उच्च शिक्षा, सतपुड़ा भवन, भोपाल एवं नवीनीकरण के लिए कार्यालय क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक में जमा करने होंगे। इसके साथ ही उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट www.highereducation.mp.gov.in पर अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

    पात्रता नियम

        शोधार्थी मध्यप्रदेश का मूल निवासी हो, जिसका प्रमाण पत्र निर्धारित प्रारूप में देना आवश्यक होगा।

        किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में अनुसूचित जाति/जनजाति/दिव्यांग वर्ग, जो पी.एच. डी. अनुसंधान के लिए पंजीकृत हो।

        SC/ST वर्ग के आवेदकों के लिए माता-पिता/अभिभावक की वार्षिक आय रूपये 8,00,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए।

        दिव्यांग वर्ग के सभी आवेदकों के लिए भी अभिभावक की आय सीमा रूपये 8,00,000 निर्धारित है।

        सभी वर्गों के दिव्यांग आवेदकों के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र अनिवार्य है।

        एक समय में केवल एक ही छात्रवृत्ति प्राप्त की जा सकेगी। पहले से किसी अन्य छात्रवृत्ति का लाभ उठा रहे शोधार्थी दोहरी छात्रवृत्ति नहीं ले सकेंगे।

    चयन प्रक्रिया

    शोधार्थियों का चयन मेरिट लिस्ट (Merit List) के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक विषय के लिए सीटों का निर्धारण अलग-अलग किया गया है। SC/ST शोधार्थियों के लिए कुल 156 सीटें तथा दिव्यांग वर्ग के लिए 10 सीटें निर्धारित हैं। प्रत्येक चयनित शोधार्थी को ₹16,000 प्रतिमाह या शासन द्वारा निर्धारित दर के अनुसार छात्रवृत्ति दी जाएगी।

    आवेदन के साथ ये लगेंगे दस्तावेज

    शोध पंजीयन प्रमाण पत्र, मूल निवासी प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र (SC/ST), दिव्यांगता प्रमाण पत्र (यदि लागू), माता-पिता की आय प्रमाण पत्र (नवीनतम), शोध कार्य की प्रगति रिपोर्ट (यदि नवीनीकरण हेतु आवेदन), बैंक पासबुक की प्रति और आधार कार्ड।

     

  • पंचायत एवं नगरीय निकाय उप निर्वाचन संबंधी प्रशिक्षण संपन्न

    भोपाल
    राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आगामी पंचायत एवं नगरीय‍ निकाय के उप निर्वाचन के संबंध में संबंधित जिलों के उप निर्वाचन अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। उनकी शंकाओं का भी समाधान किया गया। उप सचिव श्री मनोज मालवीय ने कहा कि नियमानुसार चुनाव प्रक्रिया का संचालन करें। उप सचिव श्रीमती संजू कुमारी ने इंटीग्रेटेड इलेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हर चुनाव महत्वपूर्ण होता है, तैयारियों में कोई कोताही नहीं बरतें।

    विधिक अधिकारी श्री प्रदीप शुक्ला ने नगरीय निकाय निर्वाचन की विभिन्न प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय मझौली जिला सीधी और सेमरिया जिला रीवा के अध्यक्ष पद का चुनाव सीधे मतदाता करेंगे। उन्होंने कहा कि मतदाता सामग्री का आकलन कर डिमांड पत्र भेंजे। सुरक्षा इंतजाम के बारे में भी चर्चा हुई। निर्वाचन संबंधी प्रशिक्षण पर भी जोर दिया गया।

    उल्लेखनीय है कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के उप निर्वाचन का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। मतदान 29 दिसम्बर 2025 को होगा। उप निर्वाचन के लिए निर्वाचन की सूचना का प्रकाशन और नाम निर्देशन पत्र प्राप्त करने का कार्य 8 दिसम्बर 2025 से शुरू हो चुका है। नाम निर्देशन पत्र 15 दिसम्बर तक लिये जायेंगे, नाम निर्देशन पत्रों की जांच 16 दिसम्बर को होगी। नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 18 दिसम्बर है। इसी दिन निर्वाचन प्रतीकों का आवंटन होगा। नगरीय निकायों में मतदान 29 दिसम्बर को सुबह 7.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक होगा। मतगणना और निर्वाचन परिणामों की घोषणा 31 दिसम्बर को सुबह 9.00 बजे से होगी।

    पंचायतों में मतदान 29 दिसम्बर को सुबह 7.00 बजे से अपरान्ह 3.00 बजे तक होगा। पंच पद के लिये मतगणना मतदान के तुरंत बाद मतदान केन्द्र पर ही होगी। सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य की विकास खण्ड मुख्यालय पर ई.व्ही.एम. से की जाने वाली मतगणना 2 जनवरी को सुबह 8.00 बजे से होगी। इसी दिन सरपंच एवं जनपद पंचायत सदस्य के निर्वाचन परिणामों की घोषणा की जायेगी। जिला पंचायत सदस्यों एवं पंच पद के लिए परिणामों की घोषणा 5 जनवरी 2026 को प्रात: 10.30 बजे से की जायेगी।

    2 अध्यक्ष और 9 पार्षदों का होगा उप निर्वाचन

    जिला सीधी के नगरपरिषद मझौली और रीवा जिले के सेमरिया के अध्यक्ष और विभिन्न नगरीय निकायों में 9 पार्षदों के लिये उप निर्वाचन होगा। नगरपालिक निगम सिंगरौली के वार्ड 34, नगर पालिका परिषद मण्डला के वार्ड 8, नगर पालिका परिषद लहार के वार्ड 5 और नगर परिषद मौ के वार्ड 4, मेहगांव के वार्ड 5, आलमपुर के वार्ड 13, सतवास के वार्ड 9, सेमरिया के वार्ड 3 और पानसेमल के वार्ड 2 में पार्षद पद के लिये उप निर्वाचन होगा।

    जिला पंचायत के 4, जनपद पंचायत के 14 और सरपंच के 67 पदों के लिये होगा निर्वाचन

    पंचायत उप निर्वाचन के तहत जिला पंचायत सदस्य के 4, जनपद पंचायत सदस्य के 14, सरपंच के 67 और 3872 पंच पद के लिये निर्वाचन होगा। 

  • झाबुआ-निमाड़ में आज बरस रहा है आनंद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    श्रीकृष्ण पाथेय में जोड़ेंगे धार-झाबुआ में मौजूद भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित स्थानों को
    समोई (झाबुआ) के श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म महोत्सव में भोपाल से वर्चुअली हुए शामिल

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि धार और झाबुआ में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियों से संबद्ध स्थानों को श्रीकृष्ण पाथेय में शामिल कर तीर्थ स्थलों के रूप में विकसित किया जायेगा। उन्होंने झाबुआ के ग्राम समोई में आयोजित श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म महोत्सव में उपस्थित श्रृद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज झाबुआ-निमाड़ में आनंद बरस रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म महोत्सव में भोपाल से वर्चुअली शामिल हुए। समोई में कार्यक्रम स्थल पर संतों के साथ अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, धार-झाबुआ सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

    मुख्यमत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन अद्भुत रहा है। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया। भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानने वाले प्रणामी सम्प्रदाय के द्वारा आयोजित श्रीकृष्ण प्रणामी महोत्सव सर्वधर्म संभाव और सनातन मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि 400 वर्ष पूर्व सद्गुरू श्री देवचन्द्र जी महाराज के द्वारा प्रारंभ किये गये प्रणामी संप्रदाय के लिये वे आज अखण्ड सनातन परंपरा का प्रकाश स्तंभ है। प्रणामी सम्प्रदाय का व्यापक प्रचार-प्रसार प्राणानाथ स्वामी और उनके शिष्य महाराज छत्रसाल ने किया था। प्रणामी संप्रदाय के प्रमुख 3 धामों में से एक धाम पद्मावती पुरी है, जो कि हमारे प्रदेश के पन्ना शहर में है। श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म एक ऐसा मार्ग है, जो कृष्ण भक्ति, आध्यात्मिक ज्ञान और सार्वभौमिक भाईचारे के सिद्धांतों पर आधारित है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह महोत्सव परंपरा, भक्ति, समाज सुधार और आध्यात्मिक एकता का अद्भुत संगम है। उन्होंने प्रणामी सम्प्रदाय के अनुयायियों औरसमाज के लोगों को धर्म महोत्सव की शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना की कि भगवान श्रीकृष्ण, श्यामाजी महारानी, सद्गुरू देवचन्द्र, स्वामी प्राणनाथ, वृंदावन दास महाराज और नटवरदास महाराज की सदैव सभी पर कृपा बनी रहे।

    प्रमुख बिन्दु

                 धार और झाबुआ में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियों से संबद्ध स्थानों को श्रीकृष्ण पाथेय में शामिल कर तीर्थ स्थलों के रूप में विकसित किया जायेगा।

                 समोई में कार्यक्रम स्थल पर संतों के साथ अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, धार-झाबुआ सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान मौजूद रही।

                 भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानने वाले प्रणामी सम्प्रदाय के द्वारा आयोजित श्रीकृष्ण प्रणामी महोत्सव सर्वधर्म संभाव और सनातन मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है।

                 400 वर्ष पूर्व सद्गुरू श्री देवचन्द्र जी महाराज के द्वारा प्रारंभ किये गये प्रणामी संप्रदाय के लिये सद्गुरू महाराज जी अखण्ड सनातन परंपरा का प्रकाश स्तंभ है।

                 प्रणामी सम्प्रदाय का व्यापक प्रचार-प्रसार प्राणानाथ स्वामी और उनके शिष्य महाराज छत्रसाल ने किया था।

                 प्रणामी संप्रदाय के प्रमुख 3 धामों में से एक धाम पद्मावती पुरी है, जो कि हमारे प्रदेश के पन्ना शहर में है।

                 यह महोत्सव परंपरा, भक्ति, समाज सुधार और आध्यात्मिक एकता का अद्भुत संगम है।

     

  • बिलासपुर जिले का कोपरा जलाशय अब छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट बना

    रायपुर
    बिलासपुर जिले का कोपरा जलाशय अब छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट बन गया है। इसकी घोषणा के बाद पूरे प्रदेश में प्रसन्नता का माहौल है। यह दर्जा उन आर्द्रभूमियों को दिया जाता है जो जैवविविधता, जल संरक्षण और पर्यावरणीय महत्व के लिए वैश्विक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

    वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि कोपरा जलाशय की यह सफलता छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि जलाशय की विशिष्ट पारिस्थितिकी, स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की विविधता तथा जल परितंत्र की समृद्धि ने इसे रामसर मान्यता के योग्य बनाया है।

    वन मंत्री श्री कश्यप ने राज्य वेटलैंड प्राधिकरण, पर्यावरणविदों, वन विभाग के अधिकारियों, शोधकर्ताओं और स्थानीय समुदायों को भी धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि सभी की संयुक्त मेहनत और संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता से यह उपलब्धि संभव हो सकी है।

    मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 20 वेटलैंड्स को रामसर साइट का दर्जा दिलाने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कोपरा जलाशय के रामसर साइट घोषित होने से प्रदेश में वेटलैंड संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और इको-टूरिज्म के नए अवसर भी विकसित होंगे। इससे स्थानीय समुदायों को रोजगार मिलेगा और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि वेटलैंड्स का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मजबूत प्राकृतिक विरासत छोड़ने का संकल्प भी।

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में विकास की बयार, मिली अभूतपूर्व सौगातें

    रायपुर : विशेष लेख : दो साल का सुशासन – जशपुर में विकास की नई पहचान

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को मिली अभूतपूर्व सौगातें

    रायपुर

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्ष जशपुर जिले के लिए विकास के स्वर्णिम अध्याय साबित हुए हैं। 13 दिसंबर को उनके कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, और इस अवधि में जशपुर जिले ने वह प्रगति हासिल की है, जिसने न सिर्फ जिले की दिशा बदली, बल्कि विकास की नई परिभाषा भी गढ़ी। राज्य की जनता से किए वायदों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन श्री साय ने दृढ़ इच्छाशक्ति, पारदर्शी प्रशासन और संवेदनशील नेतृत्व के बल पर इन चुनौतियों को विकास के अवसर में बदल दिया।

    गरीबों को मिली जीवनभर की सुरक्षा पक्का मकान बना खुशियों की बुनियाद

    मुख्यमंत्री बनने के साथ ही श्री साय की पहली बड़ी प्राथमिकता थी—हर गरीब को पक्का घर। कैबिनेट की पहली बैठक में 18 लाख गरीब परिवारों को घर देने के वादे को स्वीकृति मिली।

    जशपुर जिले में 52,760 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए, जिससे हजारों परिवारों का वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ। आज ये परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

    महिलाओं को मिली आर्थिक मजबूती – आत्मनिर्भरता की नई राह

    महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की 70 लाख महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपए प्रदान करने की घोषणा को श्री साय ने पूरे दृढ़ संकल्प के साथ लागू किया।

    जशपुर जिले में 2 लाख से अधिक महिलाओं को 448 करोड़ 97 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। यह राशि महिलाओं के जीवन में वास्तविक सशक्तिकरण का आधार बनी है–चाहे वह बचत हो, छोटे व्यवसाय हों या परिवार की ज़रूरतें।

    किसानों के जीवन में खुशियों की बहार – बोनस, खरीदी और सम्मान निधि से बढ़ा विश्वास

    पिछली सरकार के बकाया दो साल के धान बोनस का भुगतान कर मुख्यमंत्री ने किसानों का भरोसा और मजबूत किया। जिले के 50 हजार से अधिक किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की गई।

    इसके साथ ही 1,23,168 किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि में 308 करोड़ 30 लाख 76 हजार रुपए दिए गए। इन कदमों ने कृषि को स्थिरता, किसानों को सुरक्षा और खेती को निरंतरता प्रदान की।

    स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक परिवर्तन — आधुनिक चिकित्सालय की स्वीकृति

    जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नए अत्याधुनिक चिकित्सालय भवन को मंजूरी मिली है।

    इससे मरीजों को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता कम होगी। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को नए उपकरण, डॉक्टर, नर्स और संसाधन उपलब्ध कराए गए। साथ ही जिले में अतिरिक्त 108 संजीवनी एक्सप्रेस व शव वाहन की व्यवस्था से आपातकालीन सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार आया है।

    सड़कें बनी प्रगति का मार्ग –कनेक्टिविटी में आया व्यापक सुधार

    जिले में सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए करोड़ों रुपए मंजूर हुए। पहले दुर्गम माने जाने वाले क्षेत्रों में भी पक्की सड़कें पहुंचीं, जिससे व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान हुई। स्थानीय लोगों के लिए आवागमन आज पहले से कहीं अधिक सुगम है।

    ऊर्जा व्यवस्था में नई शक्ति — उपकेंद्रों से मजबूत हुई बिजली आपूर्ति

    जिले में अनेक नए विद्युत उपकेंद्रों की स्वीकृति से बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में बड़ा सुधार हुआ है।

    लो-वोल्टेज की समस्या में कमी आई है और गांवों में ट्रांसफार्मर व लाइन सुधार कार्य गति से जारी हैं।

    बेहतर बिजली ने उद्योग, शिक्षा और घरेलू जिंदगी को नई ऊर्जा दी है।

    शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार — युवाओं के लिए बढ़े अवसर

    जशपुर को शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ी सौगातें मिली हैं। जिले में दो नए महाविद्यालयों की स्वीकृति से छात्रों को अब उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

    स्कूलों में भवन निर्माण, स्मार्ट क्लास, छात्रावास और अधोसंरचना उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मार्ग और मजबूत हुआ है।

    पर्यटन विकास को मिली गति — जशपुर की पहचान को मिला नया आयाम

    जिले की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मद में विशेष बजट स्वीकृत हुआ है। पर्यटक स्थलों के सौंदर्यीकरण, सड़क सुधार और सुविधाओं के विकास से जशपुर पर्यटन के नए मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है।

    सिंचाई परियोजनाओं से खेतों में लौटी हरियाली

    जिले में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी देकर किसानों की वर्षों पुरानी मांग पूरी की गई। नलकूप खनन, एनीकट, तालाब निर्माण और अन्य योजनाओं से किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलेगी। फसल उत्पादन बढ़ेगा और किसान आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सकेंगे।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले ने इन दो वर्षों में वह प्रगति हासिल की है, जिसकी कल्पना वर्षों से की जा रही थी। गरीबों के लिए घर, महिलाओं के लिए सम्मान, किसानों के लिए सुरक्षा, युवाओं के लिए अवसर और हर वर्ग के लिए विकास—इन्हीं उपलब्धियों ने जशपुर को नई पहचान दी है। आगे आने वाले वर्षों में यह गति और मजबूत होगी, यही विश्वास जशपुरवासियों के दिलों में है।

      श्रीमती नूतन सिदार,सहायक संचालक (जनसंपर्क)

     सुनील त्रिपाठी,सहायक संचालक (जनसंपर्क)

     

  • प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना ने बदली किसानों की किस्मत

    रायपुर 
    प्रधानमंत्री धन.धान्य कृषि योजना ;च्डक्क्ज्ञल्द्ध 2025.26 से शुरू की गई, जिसका लक्ष्य 100 कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों में 1.7 करोड़ किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाना है, जिसके लिए 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को समन्वित किया गया है। इसे सिंचाई, भंडारण, आसान ऋण तथा फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके

    किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी
    खेती-किसानी आधारित जिले जशपुर में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की कृषि-उन्मुख नीतियों और प्रदेश में योजनाओं की तेज गति से क्रियान्वयन के कारण किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज, सिंचाई सहायता और कृषि विभाग के निरंतर मार्गदर्शन का व्यापक लाभ मिल रहा है। इससे किसान अब कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। जिले के बगीचा विकासखंड के किसान श्री सुधीर लकड़ा (उरांव) इस योजना के प्रत्यक्ष लाभार्थी के रूप में सामने आए हैं।

    उत्पादकता में हुआ सुधार 
    श्री सुधीर लकड़ा के पास कुल 3.400 हेक्टेयर भूमि है, जिसमें उन्हें समय-समय पर शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। आत्मा योजना के तहत ग्रीष्मकालीन मक्का कार्यक्रम, डीएमएफ मद से ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की उपलब्धता तथा सौर सुजला योजना के अंतर्गत सोलर सिंचाई सुविधा ने उनकी खेती को सुगम और कम लागत वाला बनाया है। कृषि विभाग के सहयोग से उन्हें खेती के आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाने का अवसर मिला, जिससे उनकी उत्पादकता में सुधार हुआ।

    किसान की आय में हुई बढ़ोत्तरी 
    प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा उन्हें धान के स्थान पर प्री-बीज ग्रेड मक्का की खेती करने की सलाह दी गई। विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए गए 08 किलोग्राम मक्का बीज से उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल लगाई। उचित देखरेख, पोषक तत्व खाद, दवाइयों और तकनीकी मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप उन्हें लगभग 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिससे उनकी कुल आय करीब 15,000 रुपये तक पहुँची।

    कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग को  मिल रहा बढ़ावा
    (PMDDKY)योजना के माध्यम से क्षेत्र में फसल उत्पादन में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं में सुधार, भंडारण क्षमता विकास तथा कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। यह योजना अनाज, दलहन, तिलहन में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ ही मशीनीकरण, जैविक खेती और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद
    श्री सुधीर लकड़ा बताते हैं कि इस योजना ने उनकी खेती का स्वरूप बदल दिया है। विभाग से प्राप्त प्रशिक्षण, उन्नत बीज और समय पर सलाह ने उनकी फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई यह किसान-हितैषी योजना और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र को मिल रहा समर्थन उनकी आमदनी बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

    कृषि आधारित रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ज़ोर 
    प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को आधुनिक और सशक्त बनाते हुए किसानों की आय को वर्ष 2030 तक दोगुना करना है। योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीक के माध्यम से उत्पादन में 20-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी, अनाज-दलहन- तिलहन में आत्मनिर्भरता, ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई से मानसून पर निर्भरता में कमी, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को 5 प्रतिशत तक घटाने हेतु भंडारण क्षमता का विस्तार, जैविक कृषि और मशीनीकरण को बढ़ावा देने जैसे कदम शामिल हैं। साथ ही महिलाओं और युवाओं को डेयरी, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों में सहयोग देकर उन्हें कृषि आधारित रोजगार से जोड़ने पर भी विशेष ज़ोर दिया गया है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले: झाबुआ-निमाड़ में आज खुशियों की बारिश हो रही है

    झाबुआ-निमाड़ में आज बरस रहा है आनंद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    श्रीकृष्ण पाथेय में जोड़ेंगे धार-झाबुआ में मौजूद भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित स्थानों को

    समोई (झाबुआ) के श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म महोत्सव में भोपाल से वर्चुअली हुए शामिल

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि धार और झाबुआ में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियों से संबद्ध स्थानों को श्रीकृष्ण पाथेय में शामिल कर तीर्थ स्थलों के रूप में विकसित किया जायेगा। उन्होंने झाबुआ के ग्राम समोई में आयोजित श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म महोत्सव में उपस्थित श्रृद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज झाबुआ-निमाड़ में आनंद बरस रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म महोत्सव में भोपाल से वर्चुअली शामिल हुए। समोई में कार्यक्रम स्थल पर संतों के साथ अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, धार-झाबुआ सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

    मुख्यमत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन अद्भुत रहा है। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया। भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानने वाले प्रणामी सम्प्रदाय के द्वारा आयोजित श्रीकृष्ण प्रणामी महोत्सव सर्वधर्म संभाव और सनातन मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि 400 वर्ष पूर्व सद्गुरू श्री देवचन्द्र जी महाराज के द्वारा प्रारंभ किये गये प्रणामी संप्रदाय के लिये वे आज अखण्ड सनातन परंपरा का प्रकाश स्तंभ है। प्रणामी सम्प्रदाय का व्यापक प्रचार-प्रसार प्राणानाथ स्वामी और उनके शिष्य महाराज छत्रसाल ने किया था। प्रणामी संप्रदाय के प्रमुख 3 धामों में से एक धाम पद्मावती पुरी है, जो कि हमारे प्रदेश के पन्ना शहर में है। श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म एक ऐसा मार्ग है, जो कृष्ण भक्ति, आध्यात्मिक ज्ञान और सार्वभौमिक भाईचारे के सिद्धांतों पर आधारित है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह महोत्सव परंपरा, भक्ति, समाज सुधार और आध्यात्मिक एकता का अद्भुत संगम है। उन्होंने प्रणामी सम्प्रदाय के अनुयायियों औरसमाज के लोगों को धर्म महोत्सव की शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कामना की कि भगवान श्रीकृष्ण, श्यामाजी महारानी, सद्गुरू देवचन्द्र, स्वामी प्राणनाथ, वृंदावन दास महाराज और नटवरदास महाराज की सदैव सभी पर कृपा बनी रहे।

    प्रमुख बिन्दु

                 धार और झाबुआ में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियों से संबद्ध स्थानों को श्रीकृष्ण पाथेय में शामिल कर तीर्थ स्थलों के रूप में विकसित किया जायेगा।

                 समोई में कार्यक्रम स्थल पर संतों के साथ अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, धार-झाबुआ सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान मौजूद रही।

                 भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानने वाले प्रणामी सम्प्रदाय के द्वारा आयोजित श्रीकृष्ण प्रणामी महोत्सव सर्वधर्म संभाव और सनातन मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है।

                 400 वर्ष पूर्व सद्गुरू श्री देवचन्द्र जी महाराज के द्वारा प्रारंभ किये गये प्रणामी संप्रदाय के लिये सद्गुरू महाराज जी अखण्ड सनातन परंपरा का प्रकाश स्तंभ है।

                 प्रणामी सम्प्रदाय का व्यापक प्रचार-प्रसार प्राणानाथ स्वामी और उनके शिष्य महाराज छत्रसाल ने किया था।

                 प्रणामी संप्रदाय के प्रमुख 3 धामों में से एक धाम पद्मावती पुरी है, जो कि हमारे प्रदेश के पन्ना शहर में है।

                 यह महोत्सव परंपरा, भक्ति, समाज सुधार और आध्यात्मिक एकता का अद्भुत संगम है।

     

  • राज्यपाल पटेल ने दिए निर्देश, दवा वितरण मोबाइल यूनिट रूट चार्ट से हो, पीएम आवास में विद्युत की उपलब्धता सुनिश्चित करें

    मोबाइल यूनिट रूट चार्ट के अनुसार दवा वितरित करें : राज्यपाल  पटेल

    प्रधानमंत्री आवास में विद्युत की उपलब्धता सुनिश्चित हो: राज्यपाल

    राज्यपाल  पटेल ने की जनमन अभियान की समीक्षा

    भोपाल

    राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा वितरित किए जाने वाली दवा की मात्रा मोबाइल यूनिट रूट चार्ट के अनुसार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि रोगी को दवा की आवश्यकता और मेडिकल यूनिट के पुन: आगमन की अवधि की गणना के अनुसार दवा का वितरण होना चाहिए, जिससे यूनिट के दोबारा आने तक रोगी के पास दवा की उपलब्धता बनी रहे।

    राज्यपाल  पटेल शुक्रवार को लोक भवन में जनजातीय प्रकोष्ठ की पीएम जनमन योजना की समीक्षा बैठक में जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष  दीपक खांडेकर एवं अन्य सदस्य भी मौजूद थे।

    राज्यपाल  पटेल ने कहा कि जनमन योजना के तहत हितग्राहियों को मिले आवास में विद्युत कनेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। आवास वार विद्युत कनेक्शनों की उपलब्धता की जानकारी संकलित कर, जिन घरों में विद्युत कनेक्शन नहीं है, उनको चिह्नित किया जाए। विद्युत कनेक्शन कराने की व्यवस्था की जाए। राज्यपाल  पटेल को बताया गया कि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जनमन योजना अंतर्गत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा 9 लाख 52 हजार से अधिक रोगियों का पंजीकरण किया गया है। इनमें 4 लाख 75 हजार 375 पी.व्ही.टी.जी. हितग्राही और 4 लाख 76 हजार 647 अन्य हितग्राही शामिल हैं। यूनिट द्वारा 95 हजार 360 सिकल सेल और 15 हजार 811 की टी.बी. स्क्रीनिंग की गई। 7 लाख से अधिक रोगियों की डायग्नोस्टिक जाँच भी की है।

    बैठक में बताया गया है कि पीएम जनमन योजना, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक प्रदेश के 24 जिलों में संचालित है। योजना के तहत पी.व्ही.टी.जी. की 6 हजार से अधिक बसाहटों के 13 लाख 43 हजार से अधिक पी.व्ही.टी.जी. आबादी को लाभान्वित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत हितग्राही मूलक सात योजनाओं आधार कार्ड, जनधन बैंक खाता, आयुष्मान भारत, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि और राशन कार्ड में सैचुरेशन की स्थिति है। कुल 1 लाख 30 हजार 521 प्रधानमंत्री आवास पूर्ण हो गए है। मध्यप्रदेश जल निगम द्वारा वर्तमान में 147 समूह जल प्रदाय योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। पीएम जनमन कार्यक्रम के अंतर्गत 48 समूह जल प्रदाय योजनाओं में से अनूपपुर एवं बालाघाट जिले की योजनाओं का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। संचालन एवं संधारण के शेष कार्यों को समय सीमा में पूर्ण कर लिया जायेगा। दतिया, कटनी, सिवनी एवं उमरिया जिले की 6 योजनाओं के कार्य लगभग पूर्ण हो चुके है। शेष कार्य समय सीमा में पूर्ण किये जाने के कार्य प्रगतिरत है। बैठक में हर घर नल से जल, बहुउद्देशीय केन्द्र, आंगनवाड़ी निर्माण, छात्रावास, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, हर घर बिजली, हर घर बिजली-ऑफ ग्रिड, वनधन विकास केन्द्र और मोबाइल नेटवर्क कार्यों की प्रगति की जानकारी दी है।

    इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य विभाग  गुलशन बामरा, आयुक्त एवं संचालक, जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना  सतेन्द्र सिंह, राज्यपाल के अपर सचिव  उमाशंकर भार्गव एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

  • रायपुर: वित्तमंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने छात्रों को दिया तनाव मुक्त होकर पढ़ाई करने का सुझाव

    रायपुर : तनाव मुक्त होकर स्वस्थ मन से पढ़ाई करें – वित्तमंत्री श्री ओ.पी.चौधरी

    परीक्षा तैयारी पर दिए महत्वपूर्ण टिप्स कक्षा 10 वीं-12 वीं के विद्यार्थियों से किया संवाद

    शासकीय हाई स्कूल झलमला में स्मार्ट क्लासरूम का किया लोकार्पण

    रायपुर

    रायगढ़ विधायक एवं वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि विद्यार्थी तनाव मुक्त होकर स्वस्थ मन से पढ़ाई करें। उन्होंने कहा कि “परीक्षा कभी भी जीवन से बड़ी नहीं होती, इसलिए घबराएं नहीं, बल्कि सही समय पर मेहनत शुरू करें। वित्त मंत्री ने रायगढ जिले के पुसौर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम झलमला स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 10 वीं और 12 वीं के “बच्चों से चर्चा 2025” कार्यक्रम में संवाद कर रहे थे। इस अवसर पर श्री चौधरी ने विद्यालय में अत्याधुनिक स्मार्ट क्लासरूम का उद्घाटन कर विद्यार्थियों को तकनीकी व नवीन शिक्षण संसाधनों का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

    परीक्षा तैयारी पर दिए महत्वपूर्ण टिप्स कक्षा 10 वीं-12 वीं के विद्यार्थियों से किया संवाद

    विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान आत्मविश्वास और अनुशासन की दी सलाह 

              वित्त मंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि दिसंबर से परीक्षा तक के आगामी तीन महीने सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि नियमित रूप से प्रतिदिन 7 से 8 घंटे पढ़ाई करें और छुट्टी के दिनों में 10 घंटे अध्ययन का लक्ष्य रखें। उन्होंने कहा कि एक भी दिन खराब नहीं करना है। यदि आप आने वाले तीन महीनों तक ईमानदारी और संकल्प के साथ पढ़ाई करेंगे तो बेहतर तैयारी और उत्कृष्ट परिणाम निश्चित हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।

    सफलता का मूल मंत्र अनुशासन, निरंतर प्रयास और सकारात्मक सोच 

               वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे प्रतिभा से भरपूर होते हैं। उन्हें केवल बेहतर मार्गदर्शन, संसाधन और सुरक्षित वातावरण की जरूरत है। उन्होंने शिक्षकों व अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों की रुचि और क्षमता के अनुसार अवसर प्रदान करें। वित्त मंत्री ने सफलता के लिए अनुशासन, निरंतर प्रयास और सकारात्मक सोच को मूल मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। 

    मेधावी छात्रों को एक लाख का पुरस्कार

             वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य की मेरिट सूची में यदि जिले का कोई विद्यार्थी स्थान प्राप्त करता है, तो उसे एक लाख रुपए पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उन्होनं कहा कि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और बेहतर भविष्य देना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। कार्यक्रम में पूर्व विधायक श्री विजय अग्रवाल, श्री उमेश अग्रवाल, जिला पंचायत सदस्य बृजेश गुप्ता, जनपद अध्यक्ष पुसौर श्रीमती हेमलता चौहान, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती भाग्यवती नायक, सीईओ जिला पंचायत श्री अभिजीत बबन पठारे, एसडीएम रायगढ़ श्री महेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, छात्र एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

  • भोपाल मेट्रो में 21 दिसंबर से फ्री सफर, एक हफ्ते तक मिलेगा बिना टिकट यात्रा का मौका, पीएम और मंत्री खट्टर करेंगे हरी झंडी

    भोपाल 

    भोपाल में मेट्रो का कमर्शियल रन 21 दिसंबर को होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इवेंट में वर्चुअली जुड़ेंगे। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर मेट्रो का उद्घाटन करेंगे। वे फूलों से सजी 3 कोच की मेट्रो से भोपाल को देखेंगे। 

    कमर्शियल रन की तारीख में बदलाव भी हो सकता है। 21 की जगह 20 दिसंबर को ही मेट्रो की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, सीएम डॉ. मोहन यादव खजुराहो के कन्वेंशन सेंटर में 21 दिसंबर को मेट्रो की शुरुआत करने की बात कह चुके हैं। इससे पहले कमर्शियल रन के कार्यक्रम को लेकर बीजेपी संगठन, सरकार और अफसरों के बीच मंथन का दौर जारी है।

    कौन-कौन से स्टेशन में होगा स्टॉपेज
    अधिकारियों ने बताया कि सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स शामिल हैं। हालांकि स्टेशनों पर फिनिशिंग का कुछ काम शेष है, लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि इससे मेट्रो के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भोपाल अब उस क्लब में शामिल होने जा रहा है जहां आधुनिक यातायात प्रणाली न केवल समय बचाएगी, बल्कि शहर के प्रदूषण और जाम की समस्या से भी निजात दिलाएगी।

    कितना होगा किराया
    मेट्रो का किराया पहले से ही तय कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो संचालन के पहले 7 दिन तक लोग मेट्रो में फ्री सफर कर सकेंगे। उसके बाद लोग अगले तीन महीने तक कम छूट पर मेट्रो का सपर कर सकते हैं।

    CMRS दे चुकी ग्रीन सिग्नल, अब सिर्फ हरी झंडी का इंतजार बता दें कि कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर के लिए ग्रीन सिग्नल दे दिया है। सीएमआरएस टीम 12 नवंबर को भोपाल पहुंची थी। 13, 14 और 15 नवंबर को टीम ने डिपो से लेकर ट्रैक और ट्रेन तक निरीक्षण किया था। कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता के साथ टीम ने मेट्रो के नट-बोल्ट भी देखे थे।

    अफसर बोले- काम बचा, लेकिन कमर्शियल रन पर असर नहीं भोपाल मेट्रो से जुड़े अफसरों का कहना है कि ऑरेंज लाइन के कमर्शियल रन के लिए वे सभी काम पूरे हो चुके हैं, जो जरूरी है। स्टेशनों का कुछ काम जरूर बचा है, लेकिन उससे कमर्शियल रन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

    हालांकि, स्टेशन के बाहर जरूरी काम निपटाए जा रहे हैं। बुधवार को सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन के बाहर सड़क निर्माण किया गया। ऐसा ही रानी कमलापति, एमपी नगर, केंद्रीय स्कूल, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स में भी बाकी बचे कामों पर फोकस रहा।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम, प्राइवेट गार्ड तैनात मेट्रो के कमर्शियल रन और पीएम मोदी के आने की खबरों के चलते सभी मेट्रो स्टेशनों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मेट्रो ने स्टेशनों पर प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए हैं।

    किराया तय, 7 दिन फ्री सफर मेट्रो में सफर के लिए किराया भी लगभग तय किया जा चुका है। एमपी नगर स्टेशन पर तो किराया सूची भी चस्पा कर दी गई है। हालांकि, मेट्रो कॉर्पोरेशन ने आधिकारिक रूप से किराए का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इंदौर जैसा मॉडल ही अपनाए जाने की बात कही जा रही है।

    अफसरों की मानें तो 7 दिन तक लोग मेट्रो में फ्री सफर कर सकेंगे। वहीं, 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। छूट खत्म होने के बाद सिर्फ 20 रुपए में मेट्रो का सफर किया जा सकेगा। अधिकतम किराया 80 रुपए होगा। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था।

    अधिकतम 80 रुपए किराया तब होगा, जब ऑरेंज लाइन के रूट का काम पूरा हो जाएगा।

    30 से 80 किमी प्रति घंटा रहेगी मेट्रो की स्पीड भोपाल के सुभाष नगर से एम्स तक मेट्रो कोच को ट्रैक पर दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। बीच-बीच में 100 से 120 किमी की रफ्तार से भी मेट्रो दौड़ाई जा रही है।

    ट्रेन की तर्ज पर मेट्रो में भी मैनुअल टिकट लेनी पड़ेगी मेट्रो का टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होकर मैनुअल ही रहेगा। जैसे आप ट्रेन में टिकट लेकर सफर करते हैं, वैसे ही मेट्रो में भी कर सकेंगे। इंदौर में अभी यही सिस्टम है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ से काम छिनने और नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह स्थिति बनेगी।

    बता दें कि असिस गार्ड का मामला पिछले 4 महीने से सुर्खियों में था। आखिरकार अगस्त में असिस गार्ड का टेंडर कैंसिल कर दिया गया। नई कंपनी के लिए टेंडर भी कॉल किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है।