• इंदौर नगर निगम की नई मुहिम: ढोल-ताशे और पीले चावल से बकायेदारों को जागरूक करने का अनोखा तरीका

    इंदौर 

    इंदौर में इस बार राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर नगर निगम ने ऐसा तरीका अपनाया है, जिसे देखकर लोग हैरान भी हो रहे हैं और खुश भी। आमतौर पर कर बकायादारों को नोटिस भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार निगम की टीमें ढोल-ताशे बजाते हुए मोहल्लों और बाजारों में घूम रही हैं। कर्मचारियों ने दुकानदारों और करदाताओं को पीले चावल देकर 13 दिसंबर की लोक अदालत में आने का निमंत्रण दिया। राजवाड़ा और किशनपुरा जैसे व्यस्त बाजारों में बुधवार सुबह यह नजारा लोगों के लिए बिल्कुल अलग था। व्यापारियों ने भी नगर निगम की इस अनोखी पहल का स्वागत किया।

    13 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत

    महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि 13 दिसंबर को वर्ष की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होगी। शहर के सभी 22 जोनल कार्यालय, रजिस्टार कार्यालय और निगम मुख्यालय में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में लोग अपना संपत्तिकर (Property Tax), जलकर (Water Tax) और बकाया अधिभार (Surcharge) कम राशि में निपटा सकेंगे। मकसद यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग एक ही दिन में अपने बकाए चुका सकें।

    राजवाड़ा में दुकान-दुकान पहुंचा निगम का न्यौता

    जोन 3 की टीम, सहायक राजस्व अधिकारी अनिल निगम के निर्देशन में, बुधवार को राजवाड़ा और किशनपुरा के बाजारों में निकली। कर्मचारियों ने ढोल-ताशे बजाकर दुकान-दुकान व्यापारियों को बताया कि लोक अदालत में बकाया अधिभार पर बड़ी छूट मिल रही है। व्यापारी भी इस तरीके से काफी प्रभावित दिखे। उनका कहना था कि यह तरीका नोटिस या मैसेज की तुलना में ज्यादा असरदार है, क्योंकि लोग तुरंत ध्यान देते हैं और बात समझ भी जाते हैं।

    महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग काउंटर

    लोक अदालत वाले दिन नगर निगम करदाताओं की सुविधा के लिए खास इंतजाम करेगा। सभी जोनल कार्यालयों में भुगतान के लिए विशेष काउंटर, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग डेस्क, पीने के पानी की सुविधा, बैठने की व्यवस्था रखी जाएगी। इसके अलावा बकाया राशि के बिल और अधिभार में दी जा रही छूट की जानकारी भी वहीं तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी।

    जानिए कितनी मिलेगी छूट
    1. संपत्ति कर पर छूट

    50,000 तक पुरानी बकाया राशि होने पर, आपको ब्याज में पूरी 100% छूट मिलेगी। अगर बकाया राशि 50,000 से 1 लाख के बीच है, तो आपको ब्याज में आधी छूट मिलेगी और अगर बकाया राशि 1 लाख से ज़्यादा है, तो भी आपको ब्याज में 25% की छूट मिलेगी।

    2. जलकर पर छूट

    पानी के बिल की 10,000 तक की बकाया राशि पर, आपको ब्याज में पूरी 100% छूट मिलेगी। अगर बकाया राशि 10,000 से 50,000 के बीच है, तो आपको ब्याज में 75% की बड़ी छूट मिलेगी और अगर बकाया राशि 50,000 से ज़्यादा है, तो भी आपको ब्याज में 50% की छूट मिलेगी। इस बात का ध्यान रखें यह छूट केवल 13 दिसंबर, लोक अदालत वाले दिन ही लागू होगी।

  • मध्य प्रदेश: धर्म और पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाई, श्री राम वनगमन पथ सहित 12 लोक बन रहे हैं

    भोपाल 

    धर्म- अध्यात्म, संस्कृति और पर्यटन के संगम से मध्य प्रदेश में विकास की त्रिवेणी बह रही है। प्रदेश इन क्षेत्रों में नई पहचान बना रहा है। प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उज्जैन में वर्ष 2024 में सात करोड़ पर्यटक आए, जबकि 2023 में यह संख्या पांच लाख थी।

    श्रीमहाकाल महालोक बनने के पहले उज्जैन में प्रतिवर्ष आने वाले पर्यटकों की संख्या 30 से 40 लाख के भीतर रहती थी। यानी महालोक बनने के बाद पर्यटकों की संख्या 20 गुना तक बढ़ गई है। इसमें विदेश पर्यटक भी शामिल हैं। इसी तरह से प्रदेश में 12 लोक और बन रहे हैं, जिससे देश-दुनिया में मप्र की नई पहचान बनेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा धार्मिक पर्यटन बढ़ाने के लिए प्रमुख स्थलों के विकास की है। धर्म, संस्कृति और पर्यटन का सबसे अच्छा गठजोड़ प्रदेश में बन रहे 1,450 किलोमीटर के राम वनगमन पथ में दिखेगा। अभी प्रदेश के 10 ऐसे जिलों के 40 स्थलों को चिह्नित किया गया है, जहां से भगवान श्रीराम वनवास के दौरान गुजरे थे। कुछ ऐसे जिलों को भी शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जो भगवान श्रीराम से जुड़े हैं। इन जिलों को सड़क मार्ग से एक सर्किट की तरह जोड़ा जाएगा।

    वहां सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम होंगे। इस तरह से कृष्ण पाथेय का निर्माण किया जा रहा है। इसका केंद्र उज्जैन का सांदीपनि आश्रम होगा। श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़े स्थलों की पहचान का काम चल रहा है। इससे राजस्थान के सीकर में स्थित खाटू श्माम को भी जोड़ा जाएगा।

    इस तरह कृष्ण पाथेय के रूप में एक बड़ा धार्मिक और पर्यटन सर्किट बनने जा रहा है। राजस्थान सरकार भी इसमें सहयोग कर रही हैं। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच इस विषय पर एक-दूसरे का सहयोग करने की सहमति बन चुकी है।

    कहां कौन सा लोक बन रहा

    ओरछा में रामराजा लोक, पांढुर्णा के जामसावली में हनुमान लोक, सीहोर में सलकनपुर में देवी लोक, सागर में संत रविदास लोक, जबलपुर में रानी दुर्गावती स्मारक और रानी अवंतीबाई स्मारक, अमरकंटक में मां नर्मदा महालोक, खरगोन में देवी अहिल्याबाई लोक, बड़वानी में नागलवाड़ी लोक और ओंकारेश्वर में एकात्म धाम बनाया जा रहा है।

    पीएमश्री पर्यटन वायु सेवा एवं पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा

    मध्य प्रदेश में पर्यटन को बढ़ाने के लिए पीएमश्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा नवंबर 2025 से प्रारंभ की गई है। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए हेलीकाप्टर की सुविधा निजी एजेंसी के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है।

    चीता प्रोजेक्ट

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 मे अपने जन्म दिवस पर श्योपुर में नामीबिया से लाए गए आठ चीते छोड़े थे। इसके बाद मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य को भी चीतों का बसेरा बनाया गया है। अब नौरादेही में भी चीते बसाने की तैयारी है। पर्यटकों की सुविधा के लिए बफर में सफर का कांसेप्ट शुरू किया है। रातापानी और माधव नए टाइगर रिजर्व बनाए गए हैं।

  • हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे पर जताई चिंता, घनी आबादी से दूर लैंडफिलिंग की मांग

    जबलपुर 
     यूनियन कार्बाइड का जहरीला पीथमपुर में नष्ट किए जाने के बाद अब उसकी राख चिंता का विषय बनी हुई है. इस मामले में दायर एक अन्य याचिका की सुनवाई के दौरान बताया गया कि जहरीले कचरे से निकली 900 मीट्रिक टन राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंताजनक हैं. राख में मरक्यूरी है, जिसे नष्ट करने की तकनीक सिर्फ जपान व जर्मनी के पास है. ऐसे में इसकी घनी आबादी के पास लैंडफिलिंग करना भविष्य में खतरनाक साबित हो सकता है.

    यूनियन कार्बाइड की राख को लेकर याचिका

    साल 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा था. पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कचरे के विनष्टीकरण की रिपोर्ट पेश की गई, जिसके बाद हाईकोर्ट ने राख को घनी आबादी के पास लैंडफिल किए जाने पर रोक लगा दी थी. इसी दौरान एक अन्य याचिका दायर की गई, जिसमें राख को भविष्य के लिए खतरनाक बताया गया. इसके बाद हाईकोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई मुख्य याचिका के साथ किए जाने के आदेश जारी किए थे.

    राख को दूर ले जाने पर विचार करे सरकार

    हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को जारी अपने आदेश में कहा था कि जहरीले कचरे की राख की लैंडफिलिंग के आदेश के बावजूद भी सरकार ने दूसरे स्थान के संबंध में जानकारी नहीं दी. सरकार द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया गया है. राख अभी भी जहरीली है और अगर इसे ठीक से नहीं रोका गया तो भूकंप जैसी किसी प्राकृतिक आपदा के कारण उसे रोकने वाला स्ट्रक्चर गिरने पर एक और आपदा हो सकती है. ऐसे में राज्य सरकार को राख ऐसी जगहों पर ले जाने की संभावना पर विचार करना चाहिए जो इंसानी बस्तियों, पेड़-पौधों और पानी के सोर्स से बहुत दूर हों. कंटेनमेंट सिस्टम टूट भी जाए, तो भी इसके बुरे असर बहुत कम हों.

    यूनियन कार्बाइड की राख में मरक्युरी की मात्रा अधिक

    इंटरविनर याचिका में कहा गया है कि जहरीले कचरे में मध्य प्रदेश पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड रिपोर्ट में बताई गई तय लिमिट से मरक्यूरी की मात्रा अधिक है. वहीं, इस मामले में सरकार की ओर से अधिवक्ता ने एक एनिमेटेड वीडियो प्रेजेंटेशन के साथ यह दलील दी कि जहरीली राख को रोकने के लिए जो स्ट्रक्चर बनाया है, सबसे मॉडर्न सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है. हालांकि, हाईकोर्ट इस बात से संतुष्ट नहीं हुआ कि प्रस्तावित कंटेनमेंट स्ट्रक्चर किसी भी तरह की जियो-टेक्टोनिक एक्टिविटी या भूकंप से होने वाले नुकसान से पूरी तरह सुरक्षित है.

    युगलपीठ ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि बारिश में नई सड़कें बह जाती हैं और पुल गिर जाते हैं, और इससे भी बुरा जब ओवरब्रिज 90 डिग्री मोड़ के साथ बनाए जाते हैं, जिससे यह राज्य पूरे देश में मजाक का पात्र बन जाता है. ऐसे राज्य की इंजीनियरिंग की काबिलियत पर पूरा भरोसा करना तबाही को न्योता देना हो सकता है. इस कोर्ट की चिंता को सरकार का मजाक उड़ाने जैसा नहीं समझना चाहिए, बल्कि कोर्ट जो सावधानी बरत रहा है, वह एक बार चोट खाने के बाद दूसरी बार बचने जैसा है.
    कोर्ट ने याद दिलाया भोपाल गैस कांड का वो दिन

    हाईकोर्ट में युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी जारी रखते हुए कहा कि भोपाल में फैक्ट्री तब तक सुरक्षित थी? जब तक कोई मुसीबत नहीं आई और लगभग बीस हजार लोगों की जान एक पल में चली गई. पांच लाख दूसरे लोगों को अपनी बाकी की जिंदगी सांस लेने और कई तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ा रहा है. इसलिए, जब जहरीली राख को रोकने की बात आती है, शायद आखिरी सांस तक, तो कोई भी सावधानी ज्यादा नहीं होती. इसलिए जहरीली राख की लैंडफिलिंग साइट को आबादी के पास रखना कोर्ट को मंजूर नहीं.

    लैंडफिलिंग के लिए अलग जगह चुनें : हाईकोर्ट

    युगलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि जहरीली कचरे की रखा की लैंडफिलिंग के लिए सबसे अच्छी टेक्निकल एक्सपर्टीज पाने ग्लोबल टेंडर निकालाजाए. कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में भी जानकारी प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं.इसके अलावा लैंडफिलिंग के लिए दूसरा स्थान चयन करने के भी निर्देश दिए हैं.
    राख में मरक्यूरी, ये इंसानों के लिए कितनी खतरनाक?

    WHO के मुताबिक, '' मरक्यूरी यानी पारा इंसानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है. आमतौर पर हर व्यक्ति किसी न किसी स्तर पर मरक्यूरी के संपर्क में आता है, हालांकि इसकी मात्रा बहुत कम होती है. लेकिन मरक्यूरी की मात्रा अधिक हो और ये सांस या भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाए तो ये फेफड़े और दिमाग को डैमेज कर देती है. दूषित मछलियों और शेलफिश में भी मरक्यूरी की मात्रा अधिका होती है, जिससे किडनी भी खराब हो सकती हैं. यह प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी बेहद खतरनाक है, क्योंकि ये गर्भ में पल रहे बच्चे और जीवन के शुरुआती दिनों में बच्चे के विकास में बाधा डाल सकती है.''

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव आज देंगे दो साल का लेखा-जोखा, जनता को सरकार की उपलब्धियां बताएंगे

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर 12 दिसंबर को जनता के सामने कार्यकाल का लेखा जोखा पेश करेंगे। इस मौके पर वे भोपाल में पत्रकार वार्ता को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि पत्रकार वार्ता में वे सरकार की दो वर्षों की उपलब्धियों, प्रमुख परियोजनाओं और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से जानकारी साझा करेंगे।

    मुख्यमंत्री की पत्रकार वार्ता के अगले दिन, 13 दिसंबर को, प्रभारी मंत्रीगण अपने-अपने संभागीय और जिला मुख्यालयों में जिला विकास सलाहकार समितियों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद मीडिया को संबोधित कर अपने क्षेत्रों में हुई उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी देंगे। 14 दिसंबर को बाकी जिलों में भी प्रभारी मंत्री जिला सलाहकार समितियों की बैठक कर पत्रकार वार्ता करेंगे। इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे जिला स्तर पर हुए कार्य, उपलब्धियां और आगामी कार्ययोजना की पूरी जानकारी साझा करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही सभी विभागों की समीक्षा कर उनकी उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने, सड़क और पुल निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, शिक्षा क्षेत्र में सुधार, कृषि और उद्योग में नवाचार तथा रोजगार सृजन जैसी प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है। यह आयोजन सरकार की पारदर्शिता और जनता के साथ संवाद को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम होगा। 

  • इंदौर में 14 दिसंबर को सीएम मोहन यादव की बैठक, मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट समेत विकास कार्यों पर चर्चा

     इंदौर 

    इंदौर में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे। रेसीडेंसी कोठी में आयोजित बैठक में मुख्य मुद्दा मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड रुट का रहेगा। पिछले दिनों नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजवर्गीय ने मेट्रो ट्रेन रुट का दौरा किया था। तब उन्होंने मेट्रो रुट बंगाली काॅलोनी से अंडग्राउंड करने पर जोर दिया है। मेट्रो के रुट में बदलाव होगा या फिर पुराना रुट ही रहेगा। इस पर मुख्यमंत्री फैसला ले सकते है।

    इसके अलावा बीआरटीएस की बस रेलिंग हटाने में हो रही देरी को लेकर भी बैठक में चर्चा होगी। 9 माह तक रेलिंग नहीं हटाए जाने पर हाईकोर्ट भी नाराज हो चुका है। बीआरटीएस पर नए ब्रिज भी बनाए जाना है। इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी आ चुकी है। इस पर भी फैसला हो सकता है। इसके अलावा अन्य प्रोजेक्टों पर भी चर्चा होगी।

    बैठक में सभी विभागों के अफसर भी मौजूद रहेंगे। नर्मदा-कालीसिंध लिंक परियोजना और संचालित हो रही नर्मदा-शिप्रा लिंक योजना के बारे में भी बात होगी। सिंहस्थ को लेकर शहर में हो कामों की समीक्षा भी की जाएगी। मास्टर प्लान की 23 सड़कों के लिए काम भी शहर में शुरू हो चुके है, लेकिन कुछ सड़कों के लिए अभी बाधक निर्माण नहीं टूटे है।

     मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशनों का काम शुरू

    इंदौर में मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशनों का काम भी शुरू हो गया है। एमजी रोड के समीप भाऊ शिंदे खेल परिसर में स्टेशन के लिए खुदाई भी शुरू हो गई है। मेट्रो कार्पोरेशन ने खुदाई के लिए मशीनें भी भेज दी है। इसके अलावा दूसरी जगहों पर भी अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए सर्वे हो गया है। आठ से अधिक मेट्रो स्टेशन बनाए जाना है। यदि मेट्रो के अंडरग्राउंड रुट में बदलाव होता है तो उनकी संख्या और बढ़ सकती है।

     

  • म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग को देगा 400 ईव्हीएम

    राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री श्रीवास्तव की उपस्थिति में हुआ एमओयू

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी के तहत किराये पर सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग को 400 ईव्हीएम उपलब्ध करायेगा। इस संबंध में गुरुवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज श्रीवास्तव की उपस्थिति में सचिव मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह और सचिव सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग सुश्री ग्लोरिया नामचू ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये।

    राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री श्रीवास्तव ने कहा कि ईव्हीएम शेयरिंग के मामले में मध्यप्रदेश पॉयनियर स्टेट है। उन्होंने बताया कि ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी के तहत छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग को ईव्हीएम किराये पर दी जा चुकी हैं। इसी तरह जम्मू-कश्मीर एवं महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन को भी ईव्हीएम किराये पर देने के लिये एमओयू हो चुका है। अन्य राज्यों के साथ भी एमओयू की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी को-ऑपरेटिव फेडरेलिजम का बेहतर उदाहरण है। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि मध्यप्रदेश में स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज के एमओयू से सिक्किम और मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के बीच संबंध और सुदृढ़ होंगे।

    सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2014-15 में स्थानीय निर्वाचन में ईव्हीएम का उपयोग शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि ईव्हीएम के माध्यम से चुनाव कराने में सहूलियत होने के साथ ही पारदर्शिता भी बनी रहती है। श्री सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ को 2 हजार ईव्हीएम और महाराष्ट्र को 25 हजार कंट्रोल यूनिट और एक लाख बेलेट यूनिट किराये पर दी गयी हैं।

    सचिव सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग सुश्री नामचू ने इस एमओयू पर कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए ईव्हीएम शेयरिंग पॉलिसी की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी सिक्किम जैसे छोटे राज्यों के लिये बहुत उपयोगी है। सुश्री नामचू ने कहा कि इससे राज्यों का आर्थिक बोझ कम होगा और सरलता से स्थानीय चुनाव कराये जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपयोग की जा रहीं निर्वाचन की अन्य नवीनतम तकनीकों के बारे में भी जानकारी मिलेगी, जिसका उपयोग सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग करेगा।

    ईव्हीएम को किराये पर देने के लिये प्रति कंट्रोल यूनिट 400 एवं प्रति बीयू 200 रुपये की दर निर्धारित है। किराये की राशि अग्रिम रूप से ली जाती है। ईव्हीएम के परिवहन का पूरा व्यय राज्य निर्वाचन आयोग सिक्किम वहन करेगा। ईव्हीएम मशीन आवश्यक सुरक्षा के साथ ले जानी होगी एवं निर्वाचन के बाद स्वयं ही मध्यप्रदेश के संबंधित जिलों में जमा करानी होगी।

    इस दौरान सिक्किम राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव श्री राजेन राय और उप संचालक श्री टी.टी. लेपचा, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव श्री मनोज मालवीय, श्री सुतेश शाक्य, सुश्री संजू कुमारी, श्री मुकुल गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • एम.पी. ट्रांसको चलाएगी ‘रोको-टोको‘ अभियान

    इंदौर की ट्रांसमिशन लाइनों में चायनीज मांझा फँसने से दो वर्षों में 13 बार बिजली बाधित

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने इंदौर शहर में ट्रांसमिशन लाइनों के नजदीक चायनीज मांझे से पतंग उड़ाने के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित दुर्घटनाओं और विद्युत व्यवधानों पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सतर्क व सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कंपनी इंदौर में विशेष ‘‘रोको-टोको ‘‘ अभियान चलाएगी।

    एम.पी. ट्रांसको की कार्यपालन अभियंता श्रीमती नमृता जैन ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में इंदौर क्षेत्र में 13 बार ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब पतंग के साथ चायनीज मांझा ट्रांसमिशन लाइन के संपर्क में आया, जिससे न केवल बिजली आपूर्ति बाधित हुई, बल्कि ट्रांसमिशन लाइनें क्षतिग्रस्त भी हुईं।

    चलाया जायेगा जागरूकता अभियान
    रोको-टोको अभियान के तहत, एम.पी. ट्रांसको ने इंदौर के उन क्षेत्रों को चिन्हित किया है जहाँ बहुतायत में पतंग उड़ाई जाती हैं। इन संवेदनशील क्षेत्रों में नागरिकों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, व्यापक जागरूकता फैलाने के लिए पोस्टर, बैनर और पी.ए. सिस्टम के माध्यम से भी लोगों को सचेत और सतर्क किया जाएगा, ताकि जान-माल की हानि रोकी जा सके और उपभोक्ताओं को व्यापक क्षेत्र में बिजली के अनावश्यक लंबे व्यवधान का सामना न करना पड़े।

    क्यों घातक है चायनीज मांझा
    दरअसल, चायनीज मांझा, जो कि सामान्य सूती धागे से अलग होता है, विद्युत का सुचालक होने के कारण बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आने पर यह न केवल बिजली आपूर्ति में व्यवधान डालता है, बल्कि जान-माल की हानि का कारण भी बन सकता है। जब यह मांझा बिजली के तारों से टकराता है, तो इसमें मौजूद सामग्री के कारण करंट प्रवाहित हो सकता है, जिससे पतंग उड़ाने वाले और आसपास के लोगों को गंभीर खतरा होता है।

    इंदौर में ये क्षेत्र है संवेदनशील
    इंदौर में जिन क्षेत्रों को चायनीज मांझा के साथ पतंग उड़ाने के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है, उनमें मुख्य रूप से लिम्बोदी, मूसाखेड़ी, खजराना, महालक्ष्मी नगर, सुखलिया, गौरीनगर, बाणगंगा, तेजाजी नगर और नेमावर रोड शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अभियान पर विशेष जोर रहेगा। 

  • मध्यप्रदेश पुलिस की मासूमों की सकुशल बरामदगी में त्वरित कार्रवाई

    “विदिशा, सागर और ग्वालियर पुलिस ने अपहृत बच्चों को सुरक्षित दस्‍तयाब कर परिवार से मिलाया

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश पुलिस ने एक बार फिर त्वरित, प्रभावी और संवेदनशील कार्रवाई का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। प्रदेश के तीन जिलों—विदिशा, ग्वालियर और सागर में अपहरण एवं गुमशुदगी से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मामलों में पुलिस ने अद्भुत दक्षता और मानवीय संवेदना का परिचय दिया। दो अपहरण मामलों में मासूम बच्चों को रिकॉर्ड समय में सुरक्षित बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, वहीं सागर में पुलिस की संवेदनशील पहल से 17 वर्ष बाद गुमशुदा बालिका अपने परिवार से पुनः मिल सकी।

    विदिशा पुलिस की बड़ी सफलता — 235 से अधिक सीसीटीवी फुटेज से 48 घंटे में 3 वर्षीय मासूम बरामद
    थाना कोतवाली क्षेत्र से तीन वर्षीय बालिका के अपहरण की सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक श्री रोहित काशवानी के निर्देशन में “ऑपरेशन मुस्कान” के अंतर्गत 8 टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने 235 से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण, 135 से अधिक लोगों से पूछताछ तथा कई इलाकों में सघन तलाशी अभियान चलाया। जिसके परिणामस्‍वरूप ऑटो चालक बृजेश कुशवाहा की पहचान हुई, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुँची। अभियुक्त अर्जुन सिंह पाल, हरिबाई, रवि पाल और जितेंद्र पाल ने बच्ची को सौदे के उद्देश्य से अपहरण करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने बच्ची को सकुशल बरामद कर परिवार को सौंपा।

    ग्वालियर पुलिस की त्वरित कार्यवाही — डेढ़ वर्षीय बच्चा सुरक्षित बरामद
    थाना बहोड़ापुर क्षेत्र से डेढ़ वर्षीय रोहित के गुम होने की सूचना पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह के निर्देशन में त्वरित खोजबीन प्रारंभ की गई। पुलिस टीम ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, मुखबिर तंत्र सक्रिय किया और सतत सर्च अभियान चलाया। मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने नागदेवता मंदिर, ट्रांसपोर्ट नगर से एक महिला को पकड़ा जो बच्चा लेकर घूम रही थी। महिला ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने बच्चा न होने के कारण उसे उठा लिया था। पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया।

    सागर जिला — 17 वर्ष बाद गुमशुदा बालिका को परिवार से मिलाया, परिवार ने कहा – ‘’यह हमारे जीवन का सबसे सुखद पल’’
    11 फरवरी 2008 को चौकी मंडीबामोरा क्षेत्र से 10 वर्षीय बालिका लापता हुई थी। वर्षों तक खोजबीन जारी रहने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। हाल ही में इंस्टाग्राम रील देखते समय उस बालिका, जो अब बालिग है, ने मंडीबामोरा रेलवे स्टेशन का नाम देखा और उसे अपना गृहक्षेत्र याद आ गया। उसने तत्काल अपने पति संग पुलिस चौकी से संपर्क किया। पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसके परिवार को बुलाया। बेटी अपने माता-पिता को तुरंत नहीं पहचान पाई, लेकिन पिता ने उसके माथे पर पुराने घाव के निशान से पहचान लिया। परिवार ने पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “यह हमारे जीवन का सबसे सुखद पल है। ये सभी उदाहरण न केवल प्रदेश पुलिस की दक्षता दर्शाते हैं, बल्कि समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करते हैं।

  • मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 140 नवविवाहित जोड़ों को दिया आशीर्वाद

    रायपुर 
    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज सक्ती जिले के ग्राम हसौद में आयोजित भव्य 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन को आध्यात्मिक एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत संगम बताया। उन्होंने कहा कि “मां महामाया की पावन भूमि हसौद में 251 कुंडों में एक साथ सम्पन्न हो रहा यह महायज्ञ छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक परंपरा को नई ऊंचाई देता है।”

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान मिली है। उन्होंने कहा—“500 वर्षों के बाद अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ, काशी विश्वनाथ धाम का कायाकल्प हुआ। छत्तीसगढ़ तो स्वयं भगवान श्रीराम का ननिहाल है—माता कौशल्या की पावन भूमि है।” उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा सभी वर्गों की उन्नति और कल्याण के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। रामलला दर्शन योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से अब तक 38 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला का दर्शन किया है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 सिद्धियों और शक्तियों के प्रतीक हैं, जो मानव जीवन को ऊर्जा, सदाचार और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के दौरान देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज हरिद्वार के कुलपति डॉ. चिन्मय पण्डया ने मुख्यमंत्री का सम्मान करते हुए उन्हें अभिनंदन पत्र भेंट किया।

    इस अवसर पर कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। साथ ही देशभर से आए अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

    140 नवविवाहित जोड़ों को दिया आशीर्वाद – कन्या विवाह योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि प्रदान
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत हसौद में परिणय-सूत्र में बंधने वाले 140 नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएँ और आशीर्वाद दिया। 

    जैतखाम में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने हसौद प्रवास के दौरान जैतखाम पहुँचकर विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति, कल्याण एवं निरंतर प्रगति की कामना की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास जी के सत्य, अहिंसा, समानता, सामाजिक समरसता तथा ‘मनखे-मनखे एक समान’ के संदेश हमें समाज में सद्भाव और एकता का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने जनसमूह से आह्वान किया कि इन आदर्शों को आत्मसात कर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

  • दीक्षारम्भ; भारत की समृद्ध प्राचीन ज्ञान परम्परा है : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के संकल्प को साकार करने का माध्यम : मंत्री श्री परमार
    युवाओं के पुरुषार्थ एवं परिश्रम से पुनः विश्वगुरु बनेगा भारत : मंत्री श्री परमार
    भाभा विश्वविद्यालय का दीक्षारंभ कार्यक्रम

    भोपाल
    भारत की ज्ञान परम्परा प्राचीन काल से ही सर्वश्रेष्ठ रही है। भारत की अपनी समृद्ध शिक्षा पद्धति थी। नालन्दा विश्वविद्यालय में संपूर्ण विश्व के लोग अध्ययन करने आते थे। भारत शिक्षा एवं स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में विश्वमंच पर सिरमौर था, विश्वगुरु की संज्ञा से सुशोभित था। संपूर्ण विश्व के लोग हमारे यहां शिक्षा एवं स्वास्थ्य लाभ अर्जित करने आते थे। अतीत के विभिन्न कालखंडों में योजनाबद्ध तरीके से, भारत की समृद्ध ज्ञान परम्परा को दूषित कर, हीन भावना भरने का कुत्सित प्रयास किया गया। भारत की अपनी समृद्ध ज्ञान परम्परा पर गर्व का भाव जागृत कर, इस भ्रांति और हीन भावना से मुक्त होने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने अपने पुरुषार्थ, गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के ज्ञान से प्रेरणा लेकर, पुनः भारत केंद्रित शिक्षा के माध्यम से, राष्ट्र के पुनर्निर्माण का सौभाग्यशाली अवसर दिया है। हमें गर्व के भाव के साथ भारतीय दृष्टि से हर क्षेत्र-हर विषय में विद्यमान परम्परागत भारतीय ज्ञान को पुनः विश्वमंच पर स्थापित करना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के संकल्प को साकार करने का सशक्त माध्यम है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में, भारतीय ज्ञान परम्परा का पाठ्यक्रमों में समावेश किया जा रहा है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने गुरुवार को भाभा विश्वविद्यालय में, नवप्रवेशित विद्यार्थियों के दीक्षारम्भ के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता कर कही। मंत्री श्री परमार ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य के लिये शुभकामनाएं दी। उन्होंने विद्यार्थियों के सार्थक एवं सफल दीक्षारंभ के लिए विश्वविद्यालय परिवार को भी शुभकामनाएं दी।

    उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि "दीक्षारम्भ"; भारत की समृद्ध प्राचीन ज्ञान परम्परा है, जो विद्यार्थी के जीवन के सभी आयामों को परिपूर्ण बनाकर समाज, राष्ट्र और विश्व के कल्याण के लिए तैयार करती है। दीक्षारम्भ, भारत की प्राचीनतम ज्ञान परम्परा है, जो विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास, चरित्र निर्माण एवं आत्मबोध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने पेड़, नदी, जल, सूर्य सहित समस्त प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन की दृष्टि से, कृतज्ञता के भाव के साथ समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण आधारित परंपरा स्थापित की थी। यह कृतज्ञता का भाव, भारत की सभ्यता एवं विरासत है। पूर्वजों के इसी स्थापित परंपरागत ज्ञान के आधार पर, स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत पुनः विश्वमंच पर सिरमौर बनेगा। भारत वर्ष 2047 तक, खाद्यान्न एवं ऊर्जा के क्षेत्र में न केवल आत्मनिर्भर बल्कि विश्व के अन्य देशों की पूर्ति करने में सामर्थ्यवान बनेगा। इसके लिए हम सभी की संकल्पित सहभागिता एवं पुरुषार्थ की आवश्यकता है।युवाओं को हीन भावना से मुक्त होकर, भारत के कृतित्व एवं ज्ञान पर गर्व का भाव जागृत करने की आवश्यकता है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि संपूर्ण विश्व एक परिवार है, यह भारत का मूल मंत्र हैं। वसुधैव कुटुंबकम् के इस भारतीय दृष्टिकोण के साथ भारत विश्वमंच पर सिरमौर बनने की ओर अग्रसर है।

    मंत्री श्री परमार ने विश्वविद्यालय परिसर में नवसृजित नक्षत्र वाटिका, नवग्रह वाटिका एवं पंच-पल्लव वाटिका का शुभारम्भ कर वाटिका में तुलसी का पौधा रोपित किया। मंत्री श्री परमार ने विश्वविद्यालय परिसर में फार्मेसी विभाग द्वारा संचालित इंटरप्रेन्योर केंद्र का अवलोकन कर, वहां निर्मित उत्पादों के विद्यार्थियों द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा के शोध आधारित लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन कर, उनके नवाचारों की जानकारी प्राप्त की और उनका उत्साहवर्धन किया।

    मंत्री श्री परमार ने विश्वविद्यालय में बच्चों को मनो-अवसाद से मुक्त करने के लिए परामर्श देने के लिए तैयार एप "अनलोड पिटारा" का शुभारम्भ भी किया। विद्यार्थियों के स्वाभाविक कौशल को निखारने के लिए तैयार अभिव्यक्ति क्लब एवं एड मेड क्लब का भी शुभारंभ किया। साथ ही विश्वविद्यालय के दंतरोग विभाग(डेंटल) के विद्यार्थियों के लिए, नवागत CBCT (सीबीसीटी) मशीन का भी शुभारंभ किया।

    मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सदस्य (प्रशासनिक) श्री महेश चंद्र चौधरी ने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर, उत्कृष्ट शोध संस्कृति की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया।

    दंत चिकित्सा विभाग के विद्यार्थियों के अधिष्ठापन के लिए, "व्हाइट कोट सेरेमनी" में व्हाइट कोट पहनाकर स्वर्णिम भविष्य के लिए प्रेरित कर, उत्साहवर्धन भी किया।

    दीक्षारम्भ के दो सप्ताह के इस शैक्षणिक अभिमुखीकरण कार्यक्रम में विद्यार्थियों के विश्वविद्यालय की शैक्षणिक संरचना, शोध अवसरों, नैतिक मूल्यों, केरियर अभिविन्यास तथा व्यक्तित्व विकास से संबंधित विविध सत्र होंगे। विभागवार आयोजित कार्यशालाओं, विशेषज्ञ व्याख्यानों तथा संवाद सत्रों ने विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के नए आयामों से अवगत कराया।

    कार्यक्रम में आरकेडीएफ समूह के चेयरमैन डॉ. सुनील कपूर, भाभा विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ. साधना कपूर एवं विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. दिलीप कुमार डे सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के डीन, संकाय सदस्य, प्राध्यापकगण, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।

     

  • अमरकंटक और सतपुड़ा ताप विद्युत परियोजना की 660-660 मेगावॉट की नई यूनिट स्थापना की किक-आफ बैठक हुई

    भोपाल
    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई व सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी में 660-660 मेगावॉट क्षमता की नई यूनिट की स्थापना कार्य प्रारंभ करने के लिये ईपीसी कांट्रेक्टर बीएचईएल, परियोजना सलाहकार एनटीपीसी और मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के वरिष्ठ अभियंताओं के मध्य किक-आफ बैठक आयोजित हुई। दो दिवसीय में बैठक में चचाई व सारणी में स्थापित होने वाली नई यूनिट के दायरे, कार्ययोजना एवं समय सीमा पर विस्तृत विमर्श किया गया। बैठक में परियोजना के निर्माण से संबंधित प्रमुख तकनीकी बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। यह बैठक दोनों नई इकाइयों के सफल क्रि‍यान्यवन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना की शुरुआत के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

    बैठक में मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह, डायरेक्टर टेक्न‍िकल सुबोध निगम, डायरेक्टर कॉमर्श‍ियल मिलिन्द भान्दक्कर, मुख्य अभियंता परियोजना विवेक नारद, बीएचईएल की ओर से आशुतोष त्यागी व विकास कुमार और एनटीपीसी की ओर से विजय प्रताप व हीरेन्द्र सोनकर ने परियोजना के संबंध में गहन चर्चा की और यह सुनिश्च‍ित किया कि समय-सीमा में सभी कार्यों को क्रि‍यान्व‍ित कर दोनों यूनिट से विद्युत उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जाए।

     

  • महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया ने गौहर महल में परी बाज़ार हेरिटेज फेस्टिवल का किया उद्घाटन

    विरासत, संस्कृति और महिला सशक्तिकरण का संगम

    11-14 दिसम्बर तक होंगे विभिन्न कार्यक्रम

    भोपाल
    राजधानी के ऐतिहासिक गौहर महल में 11-14 दिसम्बर तक आयोजित "परी बाज़ार हेरिटेज फ़ेस्टिवल-2025" के छठे संस्करण का महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि फेस्टिवल की आत्मा—महिला सशक्तिकरण, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि 'परी बाज़ार हेरिटेज फेस्टिवल' केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भोपाल की ऐतिहासिक पहचान और महिलाओं की प्रगति का जीवंत प्रतिनिधित्व है। उन्होंने बताया कि 150 वर्ष पुरानी महिला बाज़ार की परंपरा को आधुनिक स्वरूप में पुनर्जीवित करने वाला यह फेस्टिवल महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भूमिका को नए अवसर प्रदान करता है।

    मंत्री सुश्री भूरिया ने बेगम ऑफ भोपाल क्लब और डब्लूईईएस की टीम को 2017 से निरंतर महिला सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे कार्यों के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि संस्था द्वारा झुग्गी-बस्तियों की महिलाओं को शिक्षा, कौशल, स्वास्थ्य और सम्मानजनक आजीविका से जोड़ना, समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है।

    मंत्री सुश्री भूरिया ने लाड़ली लक्ष्मी, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, लाड़ली बहना योजना, और लगभग एक लाख आंगनबाड़ियों के माध्यम से मातृ एवं बाल पोषण को मजबूत करने का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश में अग्रणी राज्य है।उन्होंने बताया कि डब्लूईईएस द्वारा 7 आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लिया है और संस्था अब तक 2000 से अधिक महिलाओं और युवतियों को शिक्षा, कौशल और आजीविका के अवसर से जोड़ चुकी है।

    मंत्री सुश्री भूरिया ने इस वर्ष फेस्टिवल में शामिल ट्राइबल फ़ूड फेस्टिवल की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि जनजातीय समाज की पाक–परंपरा न केवल स्वाद का अद्भुत अनुभव देती है, बल्कि प्रकृति–सम्मत जीवन का अनूठा ज्ञान भी समाहित करती है।उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि परी बाज़ार हेरिटेज फेस्टिवल संस्कृति, परंपरा और आधुनिक महिला–शक्ति को एक मंच पर प्रस्तुत करता है। सुश्री भूरिया ने कहा कि भोपाल के नागरिकों का सहयोग इस आयोजन को और अधिक प्रभावी बनाएगा तथा यह फेस्टिवल महिलाओं की क्षमता, मेहनत और उपलब्धियों को नई पहचान देता रहेगा।

    मंत्री सुश्री भूरिया ने गौहर महल परिसर में लगी विभिन्न कला, हुनर, जनजातीय भोजन, हस्तशिल्प और स्वयंसिद्धा महिलाओं की उपलब्धियों को दर्शाने वाली प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा महिला उद्यमियों से संवाद कर उत्साहवर्धन किया।

    कार्यक्रम में मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर समाज को दिशा देने वाली 15 विशिष्ट महिलाओं को इस वर्ष के 'अनुवा सम्मान' से सम्मानित किया। इसके अलावा आर्ट ऑफ पेंटिंग के लिए फैजल मतीन, शामिम अहमद लिट्रेटरी अवॉर्ड इकबाल मसूद, नजीम शमीम स्पोर्ट्स अवॉर्ड ज्योति रात्रे, विक्रमजीत सेठी एन्टरप्रेन्योर अवॉर्ड करण कुकरेजा, मसरूर अनवर मेमोरियल अवॉर्ड सदाफ सोहेल, कुलभूषण दिल्लौरी स्मृति सम्मान मो. साजिद और सुखन-ए-भोपाल अवॉर्ड डॉ. नुसरत मेहंदी और कीर्ति सूद को दिया गया। कार्यक्रम में नाबार्ड की सीएमडी श्रीमती सी सरस्वती, बेगम ऑफ भोपाल क्लब की अध्यक्ष श्रीमती रखशां जाहिद व अन्य उपस्थित थे।

     

  • रायपुर साहित्य उत्सव 2026: आयोजन के लिए नौ सदस्यीय सलाहकार समिति गठित

    नवा रायपुर में 23 से 25 जनवरी तक होगा साहित्य उत्सव

    रायपुर
    अगले वर्ष 23 दिसंबर से नवा रायपुर में होने वाले रायपुर साहित्य उत्सव के लिए राज्य शासन ने सलाहकार समिति का गठन कर दिया है। इस समिति में नौ सदस्य बनाए गए हैं। समिति में सदस्य के रूप में श्री अनंत विजय, डॉ. सुशील त्रिवेदी, श्री सतीश कुमार पंडा, श्रीमती जयमति कश्यप, श्री संजीव कुमार सिन्हा, श्री शंशाक शर्मा, श्री पंकज कुमार झा और श्री विवेक आचार्य को भी शामिल किया गया है। समिति रायपुर साहित्य उत्सव के सफल और प्रभावी आयोजन के लिए विशेष सलाह देगी। इसके साथ ही साहित्यकारों के चयन और आयोजन के विषयों पर भी आयोजकों को सहयोग करेगी। जनसंपर्क संचालनालय के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल समिति के सदस्य सचिव होंगे।

    उल्लेखनीय है कि नए वर्ष की शुरुआत के साथ आगामी महीने रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन नवा रायपुर में 23 से 25 जनवरी तक होगा, जिसमें देश भर से 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल होंगे। राज्य स्थापना के रजत वर्ष पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा इस आयोजन की परिकल्पना की गई थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संकल्पना पर आधारित इस आयोजन की व्यापक कार्ययोजना मात्र दो माह में तैयार की गई है। यह तीन दिवसीय महोत्सव 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को जनजातीय संग्रहालय के समीप आयोजित होगा। इस उत्सव में कुल 11 सत्र शामिल होंगे। इनमें 5 समानांतर सत्र, 4 सामूहिक सत्र, और 3 संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद और विचार-विमर्श होगा।

  • राज्यपाल पटेल ने किया गौवंश का पूजन मुरारीलाल तिवारी गौशाला का किया भ्रमण

    भोपाल
    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने गुरूवार को इंदौर के सांवेर रोड़ स्थित मुरारीलाल तिवारी गौशाला का भ्रमण किया। उन्होंने गौशाला में गौवंश का पूजन किया और गौमाता को लड्डू खिलाये। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि गायों की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। भारत में गौमाता के पूजन की परम्परा वर्षों पुरानी है।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल को विधायक सुश्री उषा ठाकुर और गौशाला संचालकों ने गौशाला की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गौशाला में तीन सौ से अधिक गायों की देख भाल और सेवा की जाती है। उनका पूरा ध्यान रखा जाता है। राज्यपाल श्री पटेल को गौशाला के सचिव श्री सुभाष गोयल ने गौशाला से संबंधित साहित्य भेंट किया।

     

  • चिकित्सक भगवान का दूसरा रूप होता है : राज्यपाल मंगुभाई पटेल

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के 73वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन का किया शुभारंभ

    भोपाल
    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि भगवान सभी जगह नहीं पहुँच पाते हैं, इसलिए उन्होंने चिकित्सक बनायें हैं। भगवान का दूसरा रूप चिकित्सक ही होता है। सम्मेलन आयोजन की सराहना करते हुए अपेक्षा की है कि चार दिवसीय सम्मेलन का निष्कर्ष समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

    राज्यपाल श्री पटेल गुरूवार को न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (NSI) द्वारा आयोजित 73वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने न्यूरोलॉजी विषय पर दो पुस्तकों का लोकार्पण किया। विद्वान चिकित्सकों को सम्मानित किया। विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय मौजूद थे।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि मानव शरीर का मुख्य संचालक मस्तिष्क होता है। मस्तिष्क ही सभी इंद्रियों का नियंत्रणकर्ता है। हमारा मस्तिष्क स्वस्थ और शांत रहे, इस दिशा में न्यूरो सर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट चिकित्सकों की विशेष भूमिका है। न्यूरो सर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट उन्नत चिकित्सा, प्रमाणिक ज्ञान और संवेदनशीलता से मस्तिष्क का ईलाज करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और मन के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक तंदुरूस्ती भी जरूरी है। इसके लिए मस्तिष्क का स्वस्थ और शांत रहना बहुत जरूरी है। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि हम सभी अच्छी सेहत के लिए मोटे अनाज का सेवन करें। खूब पानी पीयें, अच्छी नींद लें और नियमित व्यायाम करें। फास्ट फूड खाने से बचे।

    मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर स्वास्थ्य की राजधानी है। यहाँ के चिकित्सक मरीजों की सेवा में हमेशा तत्पर रहते हैं। सेवा भावना के साथ कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वास्थ्य चिकित्सा के क्षेत्र में लगातार शोध और अनुसंधान हो रहे हैं। चिकित्सा गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में एनएसआइकॉन के ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. वसंत डाकवाले, ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. जे. एस. कठपाल, डॉ. मानस  पाणिगही, अध्यक्ष डॉ. मानस पाणिग्रही,  अध्यक्ष-निर्वाचित डॉ. के. श्रीधर, एजुकेशन एंड ट्रेनिंग कमेटी के चेयरमैन डॉ. लुईस बोर्बा और बड़ी संख्या में न्यूरोसर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट उपस्थित थे।

     

  • धमतरी में रिकॉर्ड रफ्तार से धान खरीदी, किसानों को 409 करोड़ का हुआ भुगतान

    रायपुर
    खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत धमतरी जिले में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन एवं कस्टम मिलिंग कार्य तेजी और पारदर्शिता के साथ जारी है। प्रशासन की सतत मॉनिटरिंग और व्यवस्थित व्यवस्था के कारण किसानों को सुगम, पारदर्शी और त्वरित सेवाएँ मिल रही हैं। जिले में 10 दिसंबर तक 1,72,568.60 मी.टन धान खरीदा गया है, जिसके एवज में किसानों को 409.32 करोड़ रुपये का त्वरित भुगतान किया गया है। कुल 37,084 किसानों द्वारा धान विक्रय किए जाने से कृषि समुदाय को मजबूत आर्थिक संबल मिला है।

    कस्टम मिलिंग में भी तेज प्रगति
    कस्टम मिलिंग हेतु 5,52,336 मी.टन धान की अनुमति प्रदान की गई है, जिनमें से 4,54,272 मी.टन का अनुबंध मिलर्स से किया जा चुका है। अब तक 19,611 मी.टन धान का डी.ओ. जारी होने के साथ समितियों से 7,966 मी.टन धान का उठाव भी पूर्ण किया गया है। समितियों में 1,64,602.60 मी.टन धान शेष है, जिसके त्वरित उठाव के निर्देश दिए गए हैं।

    टोकन सिस्टम से पारदर्शी खरीदी
    टोकन आधारित व्यवस्था ने खरीदी प्रक्रिया को अधिक सुचारू बनाया है। 10 दिसंबर तक 17,134 टोकन जारी किए गए, जिनसे 1,34,59.92 क्विंटल धान का उपार्जन दर्ज हुआ। इसी अवधि में 3,133 कृषकों ने 86.53 हेक्टेयर रकबे से धान बेचा है। लंबित आवेदन केवल 7 हैं, जिनका शीघ्र निराकरण किया जा रहा है।

    अवैध परिवहन पर सख्ती
    प्रशासन द्वारा अवैध धान परिवहन के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा रही है। अब तक 3,652.40 क्विंटल धान एवं 02 वाहन जप्त किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 28 लाख रुपये आँकी गई है।

    फोटो अपलोड एवं सत्यापन 99.68% पूर्ण
    धान बेचने वाले 3,133 किसानों में से 3,123 किसानों ने फोटो अपलोड कर दिया है, जो 99.68 प्रतिशत उपलब्धि दर्शाता है।

    कृषक श्रेणीवार प्रगति
    जिले में सीमांत, लघु और दीर्घ श्रेणी सहित 37,084 किसानों ने धान बेचा है। पंजीकृत 74,611 किसानों में से 18,768 किसानों ने अब तक विक्रय किया है। शेष किसानों को निर्धारित तारीखों के अनुसार टोकन के माध्यम से बुलाया जाएगा।

    कमांड सेंटर से की जा रही है सतत निगरानी
    कलेक्टर के निर्देशन में कमांड सेंटर द्वारा धान उपार्जन, रकबा समर्पण, शिकायत निवारण और फोटो सत्यापन की निरंतर समीक्षा की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र किसान को समय पर टोकन उपलब्ध कराया जाए, खरीदी बिना किसी बाधा के हो और भुगतान शीघ्र किसानों के खातों में पहुँचे। धमतरी जिले में धान खरीदी कार्य पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित और किसानहित में निर्बाध रूप से प्रगति पर है।

  • ग्राफ्टेड बैंगन से बदली खेती की तस्वीर – खरसिया के किसान मुरलीधर साहू ने

    राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना ने दी नई दिशा, कम लागत में लाखों की आय का रास्ता खुला

    आधुनिक तकनीक व उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से 80 क्विंटल से बढ़कर 170 क्विंटल तक पहुँची उपज

    रायपुर
     ग्राफ्टेड बैंगन एक ऐसा पौधा है जो दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों को जोड़कर बनाया जाता है, एक मजबूत जड़ वाला पौधा (रूटस्टॉक) और एक उच्च गुणवत्ता वाला फल देने वाला पौधा (स्कायन)। इस तकनीक से बैंगन की पैदावार बढ़ती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, और मिट्टी से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं।

    रायगढ़ जिले के विकासखण्ड खरसिया के ग्राम करूमौहा के किसान श्री मुरलीधर साहू आज आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। कभी परंपरागत धान की खेती करने वाले श्री साहू को लागत अधिक और लाभ कम होने के कारण खेती में संतुष्टि नहीं थी। इसी बीच उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। यही मार्गदर्शन उनके कृषि जीवन में बड़ा बदलाव साबित हुआ।

    कम लागत में उत्पादन में बड़ा इजाफा
    उद्यानिकी विभाग द्वारा समय-समय पर दी गई तकनीकी सलाह, प्रशिक्षण एवं प्रेरणा से उनका रूझान पारंपरिक खेती से बदलकर उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़ा। विभाग की अनुशंसा पर उन्होंने अपनी एक हेक्टेयर भूमि में ग्राफ्टेड बैंगन फसल का रोपण किया। जैविक खाद और जैविक दवाओं के प्रयोग से लागत भी कम रही और उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा देखने को मिला।
      
    आधुनिक तकनीक से तीन गुना लाभ 
    राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत उन्हें 20 हजार रुपए का अनुदान भी मिला। इससे आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था हुई और खेती की दिशा व दशा दोनों बदली। पहले जहां उपज 80 से 85 क्विटंल उत्पादन होता था वहीं आधुनिक तकनीक अपनाने के बाद उपज बढ़कर 150 से 70 क्विंटल तक पहुँच गई। बाजार भाव अच्छा मिलने पर कुल आय 4.5 लाख रुपए और कुल लाभ लगभग 3 लाख रुपए तक पहुँच गया, जो पहले की तुलना में तीन गुना है।

    जैविक पद्धति और कम लागत में अधिक उत्पादन
    मुरलीधर साहू की सफलता को देखकर आसपास के ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों के किसान भी उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। आधुनिक कृषि तकनीक, जैविक पद्धति और कम लागत में अधिक उत्पादन का संदेश दूर-दूर तक फैल रहा है। उनकी यह सफलता कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और योजनाओं का लाभ लेकर किसान आज आर्थिक रूप से मजबूती की दिशा में बड़े कदम उठा सकते हैं।

    एक हेक्टेयर से बनी मिसाल”, ग्राफ्टेड बैंगन ने बदली आर्थिक स्थिति
    खरसिया के किसान मुरलीधर साहू ने एक हेक्टेयर में ग्राफ्टेड बैंगन की आधुनिक खेती अपनाकर उत्पादन को लगभग दोगुना कर दिया। जैविक विधियों, विभागीय मार्गदर्शन और बागवानी मिशन से प्राप्त अनुदान के सहारे उन्हें इस सीजन में करीब 3 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। इस उपलब्धि ने क्षेत्र के किसानों में नई ऊर्जा और उम्मीद जगाई है।

  • छत्तीसगढ़ में वर्ष 2025-26 की नई गाइडलाइन दरें लागू

    आठ वर्षों बाद बड़े पैमाने पर रेशनलाइजेशन, शहरी–ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में दूर हुई विसंगतियाँ

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ शासन ने स्थावर संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य को प्रतिबिंबित करने और गाइडलाइन दरों में वर्षों से चली आ रही असमानताओं को दूर करने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 की नई गाइडलाइन दरें पूरे राज्य में लागू कर दी हैं। “छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000” के तहत केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड, रायपुर द्वारा अनुमोदित ये दरें 20 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गई हैं। यह संशोधन वर्ष 2018-19 के बाद पहली बार राज्यव्यापी स्तर पर किया गया है।

    राज्य में पिछले आठ वर्षों से गाइडलाइन दरों में कोई वृद्धि नहीं होने के कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन मूल्य के बीच भारी अंतर पैदा हो गया था। इस स्थिति को सुधारने के लिए पूरे प्रदेश में वैज्ञानिक पद्धति से रेशनलाइजेशन कर नई दरें निर्धारित की गई हैं। जिलों की भौगोलिक स्थिति, शहरी संरचना, ग्रामीण बसाहट, सड़क संपर्क और आर्थिक गतिविधियों में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए अनेक जटिलताओं को सरल किया गया है।

    राज्य के विभिन्न नगरीय निकायों में पूर्व में एक ही वार्ड में 10 से 12 प्रकार की कंडिकाएँ लागू थीं, जिससे लोगों को अपने संपत्ति मूल्यांकन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई कंडिकाएँ तो वास्तविक रूप से अस्तित्व में ही नहीं थीं। नई गाइडलाइन दरों में अनावश्यक कंडिकाओं को हटाकर एक समान प्रकृति वाले क्षेत्रों को समाहित करते हुए सरल और पारदर्शी संरचना लागू की गई है। इससे अब एक ही क्षेत्र, समान सड़क या समान मार्ग पर संपत्तियों का मूल्यांकन एकरूपता के साथ होगा।

    इसी रेशनलाइजेशन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण जिला कोण्डागांव में दिखाई देता है, जहाँ शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में भारी सुधार किए गए हैं। नगर पालिका कोण्डागांव के 22 वार्डों में पूर्व की 145 कंडिकाओं को घटाकर मात्र 30 कंडिकाएँ निर्धारित की गई हैं। इसी प्रकार नगर पंचायत फरसगांव में 49 कंडिकाओं को कम कर 15 तथा नगर पंचायत केशकाल में 45 कंडिकाओं को घटाकर 15 कंडिकाओं में समाहित किया गया है। इससे संपत्ति मालिकों को वास्तविक बाजार मूल्य की स्पष्ट समझ मिलेगी।

    राज्य के अनेक जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर बसे वार्डों या ग्रामों के दरों में भारी विसंगतियाँ थीं। उदाहरणस्वरूप, कोण्डागांव में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 से लगे वार्डों में पूर्व दरें एक-दूसरे से काफी भिन्न थीं। वार्ड क्रमांक 22 की एनएच-30 कंडिका का रेट 10,850 रुपये प्रति वर्गमीटर था, जबकि इसी मार्ग के वार्ड क्रमांक 4 में यह 10,000 रुपये था। आमने-सामने स्थित वार्ड क्रमांक 1 और 2 में यह दर क्रमशः 7,800 और 8,700 रुपये नियत थी। नई गाइडलाइन में इन सभी को एक समान कर 12,000 रुपये प्रति वर्गमीटर प्रस्तावित किया गया है। इसी प्रकार केशकाल में एनएच-30 से लगे वार्डों के दरों को भी समायोजित करते हुए एक समान 9,500 रुपये प्रति वर्गमीटर प्रस्तावित किए गए हैं।

    राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में भी दरों में भारी सुधार किया गया है। हजारों ग्रामों में एक ही प्रकार की भूमि या एक ही मार्ग पर लगने के बावजूद दरों में व्यापक असमानता थी। कई ग्रामों में प्रति हेक्टेयर 59,000 रुपये तक की अत्यंत कम दरें थीं, जिससे किसानों को न तो उचित मुआवजा मिल पाता था और न ही भूमि बिक्री में बाजार मूल्य का लाभ। पेरमापाल, हंगवा, तोतर, आमगांव, आदनार, चेमा, छोटेउसरी, छोटेकोडेर, टिमेनार, एहरा और गदनतरई जैसे गांवों में दरों को आसपास के विकसित गांवों के अनुसार समायोजित किया गया है।

    राज्य के अन्य जिलें दुर्ग, रायगढ़, सरगुजा, कोरबा, धमतरी, बिलासपुर, कबीरधाम, कांकेर और बस्तर में भी इसी तरह सड़कों, बाजारों, बसाहटों और विकास की वास्तविक स्थिति का आकलन कर दरों में व्यापक सुधार किए गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और प्रमुख जिला सड़कों के दोनों ओर बसे ग्रामों और बस्तियों को एक समान मानक पर मूल्यांकन करते हुए दरों को संशोधित किया गया है।

    नई गाइडलाइन दरों में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वर्गमीटर की दर समाप्त कर दी गई है। अब सभी प्रकार की आवासीय और कृषि भूमि का मूल्यांकन एक समान हेक्टेयर दर से किया जाएगा। इससे छोटे टुकड़ों की भूमि और कृषि भूमि के बाजार मूल्य में जो असमानता थी, वह समाप्त होगी और किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य व मुआवजा प्राप्त होगा।

    पिछले आठ वर्ष में पूरे राज्य के शहरों और गांवों का तीव्र विकास हुआ है। सड़क, संपर्क, व्यावसायिक परिसर, आवासीय विस्तार और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी से वृद्धि हुई है। नई गाइडलाइन दरों में इन सभी परिवर्तनशील पहलुओं को वैज्ञानिक पद्धति से समाहित किया गया है, ताकि बाजार मूल्य और गाइडलाइन मूल्य के बीच का अंतर समाप्त हो तथा राज्य में संपत्ति आधारित लेनदेन अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बने।

    नई राज्य स्तरीय गाइडलाइन दरें भूमि मालिकों, किसानों, निवेशकों और आम नागरिकों को सही मूल्यांकन की सुविधा उपलब्ध कराएंगी। साथ ही यह कदम राजस्व वृद्धि, ग्रामीण-शहरी विकास और रियल एस्टेट क्षेत्र में स्थिरता एवं विश्वास बढ़ाने की दिशा में राज्य शासन का महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
    ग्राम मसोरा में (विक्रेता– मनुराम चक्रधारी निवासी-गिरोला, क्रेता-शांति देवी कुशवाहा निवासी-कोंडागांव)रकबा 0.032 हेक्टेयर आवासीय भूमि का पूर्व गाइड लाइन के वर्गमीटर दर से गणना करने पर बाजार मूल्य 1,17,000/- पर कुल 12,402/- स्टाम्प व पंजीयन शुल्क होता जबकि नई गाइड लाईन हेक्टेयर दर अनुसार बाजार मूल्य 54,500/- पर स्टाम्प व पंजीयन शुल्क 5,777/- चुकाया गया जिससे पक्षकार को 6,625/- का लाभ हुआ! 

  • दंतेवाड़ा: कलेक्टर दुदावत का नहाड़ी और पोटाली गांवों में निरीक्षण, हालात का किया जायजा

    दंतेवाड़ा : कलेक्टर दुदावत ने नहाड़ी व पोटाली के ग्रामों का किया निरीक्षण

    ग्रामीणों की मांगों और समस्याओं को सुनीं, मलेरिया मुक्त अभियान में सहयोग का आह्वान

    दंतेवाड़ा

    कलेक्टर  कुणाल दुदावत ने जिले के दूरस्थ अंचल नाहाड़ी और पोटाली का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम के सरपंचों, जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी आवश्यकताओं, समस्याओं और लंबित कार्यों की जानकारी ली। कलेक्टर ने ग्रामीणों द्वारा रखे गए प्रत्येक बिंदु को गंभीरता से सुनते हुए अधिकारियों को स्थल पर ही आवश्यक दिशा निर्देश दिए। ग्राम पोटाली में ग्रामीणों ने पंचायत भवन, गांव की सड़क व्यवस्था, आंगनबाड़ी भवन, बाजार शेड, पीडीएस भवन में शेड की व्यवस्था, देवगुड़ी में शेड निर्माण, हैंडपंप की मरम्मत, स्थापना, तार-फेंसिंग तथा पीडीएस भवन परिसर में हाईमास्ट लाइट लगाने की मांग रखी। मौके पर ग्रामीणों ने बताया कि इनमें से अनेक कार्य पहले से स्वीकृत हैं, परंतु अब तक पूर्ण नहीं हो पाए हैं, जिससे दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी लंबित कार्यों की अद्यतन सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए।

     इस दौरान ग्राम नाहाड़ी में ग्रामीणों ने सड़क संपर्क, आंगनबाड़ी भवन तथा स्कूल भवन के निर्माण को प्रमुख मांग के रूप में प्रस्तुत किया। ग्रामीणों ने बताया कि भवनों की स्वीकृति होने के बावजूद निर्माण अधूरा है, जिससे बच्चों व महिलाओं के लिए असुविधा होती है। कलेक्टर  दुदावत ने आश्वासन दिया कि बुनियादी सुविधाओं को हर ग्राम तक पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी अधूरे कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण कराए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य पारा-टोलों से मिली मांगों को जैसे ही संबंधित अधिकारी प्रस्तुत करेंगे, प्रशासन उन पर भी त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। कलेक्टर ने उक्त ग्रामों के सरपंचों से आग्रह किया कि वे स्वीकृत कार्यो को सर्वप्रथम कराने की पहल करे तत्पश्चात अन्य ग्राम संबंधित कार्य प्रारंभ किए जाएगें।

    इसके लिए उन्होंने जनपद पंचायत सहित अन्य विभागों को ग्राम सरपंचों से समन्वय एवं मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रतिदिन अपडेट करें और वास्तविक स्थिति की समीक्षा नियमित रूप से की जाए। निरीक्षण के अंत में कलेक्टर  कुणाल दुदावत ने ग्रामीणों से अपील की कि जिले में 8 दिसंबर से 31 दिसंबर तक ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ शासन द्वारा संचालित किया जा रहा है, इसलिए सभी ग्रामीण अनिवार्य रूप से मलेरिया की जांच कराएं। उन्होंने कहा कि मलेरिया से बचाव के लिए समय पर जांच व उपचार अत्यंत आवश्यक है और ग्रामीणों के सहयोग से ही जिले को मलेरिया मुक्त बनाया जा सकता है। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ  जयंत नाहटा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

  • उप मुख्यमंत्री शुक्ल ग्रीन लॉजिस्टिक कॉनक्लेव-2025 के शुभारंभ सत्र में हुए शामिल

    सतत एवं संवहनीय विकास के लिए ई-मोबिलिटी महत्वपूर्ण : उप मुख्यमंत्री  शुक्ल

    विश्व के नेतृत्व के लिए विकसित भारत के साथ स्वस्थ भारत महत्वपूर्ण
    ग्रीन लॉजिस्टिक कॉनक्लेव-2025 के शुभारंभ सत्र में हुए शामिल
    ई-कॉमर्शियल व्हीकल्स को हरी झंडी दिखाकर स्टेक होल्डर्स को किया प्रोत्साहित

    भोपाल 

    उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेज गति से विकास कर रहा है। वर्ष-2047 तक विश्व का नेतृत्व करने के लिए विकास के सभी आयामों पर कार्य किया जा रहा है। मैनुफैक्चरिंग, सर्विसेज और कृषि सभी क्षेत्रों में सरकार भविष्योन्मुखी योजनाएं ला रही है। विश्व के नेतृत्व के लिए विकसित भारत के साथ स्वस्थ भारत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री  मोदी की प्राथमिकता है कि विकास सतत एवं संवहनीय हो। ई-मोबिलिटी इसका महत्वपूर्ण अंग है। केंद्र सरकार की मंशानुरूप राज्य सरकार ई-लॉजिस्टिक्स को प्रोत्साहन दे रही है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में एमपीआईडीसी और सीआईआई के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ग्रीन लॉजिस्टिक कॉनक्लेव-2025 के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। शुभारंभ सत्र में एमडी एमपीआईडीसी  चंद्रमौली शुक्ला, सीआईआई के वाईस प्रेसीडेंट  महेश पंजवानी, एनएचईवी के प्रतिनिधि सहित इलेक्ट्रिक व्हीकल और लॉजिस्टिक क्षेत्र में कार्य करने वाले औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि प्रदेश व्यापी निरोगी काया अभियान में करोड़ों नागरिकों की निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच की गई। जाँच में 30 प्रतिशत नागरिकों में ब्लड प्रेशर, शुगर, डायबिटीज जैसी बीमारियों का चिन्हांकन यह स्पष्ट करता है कि पर्यावरण अनुकूल विकास ही आगे की राह का मार्गदर्शक बन सकता है। आज ई-व्हीकल महंगे लगते हैं, उनकी ऑपरेटिंग कॉस्ट परम्परागत वाहनों से 70 गुना से भी कम है। साथ ही ई-वाहनों की लाइफ परंपरागत वाहनों से दोगुनी होती है। भविष्य में मांग बढ़ने पर इनकी प्रारंभिक लागत भी कम होगी। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने ई-व्हीकल प्रोत्साहन के लिए सतत जागरूकता का आह्वान किया। ई-मोबिलिटी के प्रोत्साहन के लिए ई-हाईवे और ई-इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं का विकास ई-मोबिलिटी को गति प्रदान करेगा। राज्य शासन इस क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने विभिन्न निर्माताओं के ई-कॉमर्शियल व्हीकल्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    एमडी एमपीआईडीसी  चंद्रमौली शुक्ला ने कहा कि स्टेट लॉजिस्टिक एक्शन प्लान में ई-लोजिस्टिक्स को प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए आवश्यक अधोसंरचनात्मक विकास के लिए सभी स्टेक होल्डर्स के साथ मंथन किया जा रहा है। सिटी एक्शन प्लान भी बनाया जाएगा। उन्होंने समस्त स्टेक होल्डर्स से सुझाव अग्रेषित करने का अनुरोध किया ताकि स्टेट एक्शन प्लान में उन्हें शामिल कर सशक्त ई-मोबिलिटी रणनीति का निर्माण किया जाये। औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने देश, विदेश और प्रदेश में लॉजिस्टिक क्षेत्र में ई-मोबिलिटी की संभावनाओं, अवसरों, अधोसंरचना विकास और पर्यावरण अनुकूल विकास के विभिन्न विषयों पर विचार व्यक्त किए और अपनी अपेक्षाएं व्यक्त की। केंद्र सरकार का नेशनल हाईवे फॉर इलेक्ट्रिक व्हीकल के विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख करते हुए सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सतत संवहनीय विकास में सहयोग की बात कही। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की सकारात्मक योजनाओं के लिए आभार व्यक्त किया।