• मध्य प्रदेश का इंदौर रियल एस्टेट में कर रहा है रिकॉर्ड तोड़, नवंबर में 43% अधिक रजिस्ट्री हुई

    इंदौर 

    मध्य प्रदेश का आर्थिक शहर इंदौर अब रियल एस्टेट के क्षेत्र में भी रिकॉर्ड तोड़ रहा है। नवंबर 2025 में इंदौर जिले में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पिछले साल की तुलना में 43 प्रतिशत तक बढ़ गया। शहर के चारों उप पंजीयन कार्यालयों में यह तेजी साफ नजर आई, जिनमें सबसे ज्यादा उछाल इंदौर-4 में दर्ज किया गया। कुल मिलाकर अप्रेल से नवंबर 2025 तक जिले में पिछले साल की तुलना में 1091 रजिस्ट्रियां ज्यादा हुई हैं।

    नवंबर महीने में जिले में कुल 14,140 संपत्तियों का पंजीयन हुआ, जबकि नवंबर 2024 में यह संख्या 9905 थीं। इसमें इंदौर-1 में पिछले साल की तुलना में 1262 अधिक रजिस्ट्रियां हुईं। इंदौर-2 में 822, इंदौर-3 में 934 और इंदौर-4 में रिकॉर्ड 1225 रजिस्ट्रियों का उछाल देखने को मिला। यह रुझान बताता है कि खरीदारों का भरोसा अब भी मजबूत है और बाजार की गति तेज होती जा रही है।
    इंदौर 2, 3 और 4 में खरीद-बिक्री बढ़ी

    अप्रेल से नवंबर की अवधि में जिले में कुल 1,12,588 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 1,11,497 थी। इंदौर-2, इंदौर-3 और इंदौर-4 क्षेत्रों में खरीद-बिक्री बढ़ी है, वहीं इंदौर-1 में कुछ गिरावट दर्ज की गई। बावजूद पूरे जिले में प्रॉपर्टी बाजार ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।

    विशेषज्ञों ने बताई प्रॉपर्टी खरीद में तेजी की वजह

    इंदौर में प्रॉपर्टी खरीद में आई इस तेजी के कई कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में लगातार होती इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, नए मार्गों और रिंग रोड के विस्तार, मेट्रो प्रोजेक्ट की प्रगति और सुदृढ़ होती कनेक्टिविटी ने रियल एस्टेट को मजबूती दी है।

    प्रॉपर्टी बाजार बढ़ने के कई और भी कारण

    1- रोजगार, स्टार्टअप और आइटी कंपनियों में तेजी

    शहर में आइटी पार्क, स्टार्टअप इकॉनमी और मल्टीनेशनल कंपनियों की मौजूदगी ने युवाओं और प्रोफेशनल्स का आवागमन बढ़ाया है। इससे मकान, फ्लैट और कमर्शियल स्पेस की मांग लगातार बढ़ रही है।

    2- लगातार विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर

    सुपर कॉरिडोर, रिंग रोड, बीआरटीएस, मेट्रो प्रोजेक्ट, नए फ्लाइओवर और कनेक्टिविटी में सुधार ने शहर को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना दिया है।

    3- सेफ और ग्रोथ-ओरिएंटेड सिटी की छवि

    स्वच्छता में लगातार देश का नंबर-1 शहर रहने से लोगों का विश्वास बढ़ा है। बाहर से आने वाले परिवार इंदौर में बसना पसंद कर रहे हैं, जिससे मकान और प्लॉट की खरीद बढ़ी है।

    4- निवेशकों का भरोसा, रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट ज्यादा

    शहर में प्रॉपर्टी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन फिर भी मेट्रो शहरों की तुलना में सस्ती दरें मिलती हैं। यही कारण है कि लोग इसे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के रूप में सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।

    5- नई टाउनशिप, हाई-राइज और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की भरमार

    सुपर कॉरिडोर, पीथमपुर रोड, स्कीम नंबर 94, 114 और बायपास क्षेत्रों में बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट तेजी से विकसित हो रहे हैं। नई टाउनशिप्स की बढ़ती संख्या से लोगों को सुविधाजनक और प्रीमियम आवास विकल्प मिल रहे हैं।

  • मध्यप्रदेश में 10% बिजली दर वृद्धि का प्रस्ताव, नए साल में बढ़ सकती हैं बिजली की कीमतें

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश में नए साल की शुरुआत बिजली उपभोक्ताओं को बिजली का करंट लग सकता है। राज्य की पावर जनरेशन कंपनी ने मप्र विद्युत नियामक आयोग के समक्ष बिजली दरों में 10 प्रतिशत तक इजाफे का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। आयोग इस प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां लेने के लिए जन सुनवाई आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। नियामक आयोग जन सुनवाई के दौरान आम जनता और हितधारकों की आपत्तियाँ सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय देगा। फिलहाल प्रस्ताव ने उपभोक्ताओं में नए साल के बिलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    कंपनी ने बढ़ोतरी को बताया अनिवार्य
    नियामक आयोग मुख्यालय में दायर याचिका में कंपनी ने दावा किया कि लगातार बढ़ रहे लाइन लॉस और वित्तीय दबाव के कारण दरों में संशोधन आवश्यक हो गया है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित बढ़ोतरी की सीमा 10% तक हो सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय जन सुनवाई के बाद ही होगा।

    15 दिसंबर से हो सकती है सुनवाई 
    आयोग के सूत्रों का कहना है कि कंपनी के प्रस्ताव पर प्रारंभिक अध्ययन के बाद आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। पहली सुनवाई 15 दिसंबर को होने की संभावना है, हालांकि आयोग की ओर से इसका औपचारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

    आठ महीने पहले ही बढ़े थे बिजली के दाम
    इस साल अप्रैल से ही उपभोक्ता पहले से बढ़े हुए टैरिफ का भुगतान कर रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष में कंपनियों ने 7.52% बढ़ोतरी की मांग की थी, लेकिन आयोग ने केवल 3.46% वृद्धि की मंजूरी दी थी। यही कारण है कि घरेलू, गैर-घरेलू और कृषि श्रेणियों में प्रति यूनिट दरें कुछ पैसों की वृद्धि के साथ लागू हुईं और फिक्स चार्ज भी बढ़ाए गए।

    चुनावी वर्षों में मिली थी राहत
    पिछले दो वर्ष 2024 में लोकसभा और 2023 में विधानसभा चुनाव हुए, जिसके चलते आयोग ने दर बढ़ोतरी पर सख्ती दिखाई थी। 2024 में 3.86% बढ़ोतरी की मांग के मुकाबले मात्र 0.7% और 2023 में 3.20% की तुलना में केवल 1.65% बढ़ोतरी को मंजूरी मिली थी। 
    प्रदेश में सहकारिता चुनाव भी प्रस्तावित हैं, ऐसे में राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आयोग बड़ी राहत देने की संभावना कम लग रही है। सूत्रों का अनुमान है कि नई दरें 4 से 6% की सीमा में तय की जा सकती हैं। इसके बाद भी उपभोक्ताओं के लिए नए साल में बिजली बिल बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। 

  • इंदौर में 6 करोड़ से बनेगा रणजीत लोक, महाकाल लोक की तर्ज पर, सिंहस्थ से पहले तैयार होगा

    इंदौर

    इंदौर में रणजीत हनुमान मंदिर का कायापलट होने जा रहा है। यहां रणजीत लोक बनाकर मंदिर का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस पर कुल 6  करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्लान तैयार हो चुका है, टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है।

    मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने कहा- रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है।

    मंदिर प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया कि रणजीत लोक तैयार होने के बाद श्रद्धालु मंदिर के पास बने बड़े मैदान से प्रवेश करेंगे। वहां से एक पाथ-वे के माध्यम से छोटी पार्किंग तक पहुंचेंगे। पाथ-वे में जिग-जैग पैटर्न पर रेलिंग लगाई जाएंगी। इनकी संख्या भीड़ के अनुसार घटाई या बढ़ाई जा सकेगी।इसके बाद श्रद्धालु दत्त मंदिर से होते हुए दर्शन की मुख्य लाइन में पहुंचेंगे। भगवान के दर्शन कर वहीं से वापस बाहर निकलेंगे।

    पाथ-वे की दीवारों पर रामायण और सुंदरकांड की झलक मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- यहां सभी तरह के मौसम के मुताबिक व्यवस्थाएं जुटाई जाएंगी ताकि सर्दी, गर्मी और बारिश में भक्तों को परेशानी न हो। बैठने के लिए नई बेंच लगेंगी। बाउंड्रीवाल भी बनाई जाएगी।25 फीट का पाथ-वे बनेगा, इसकी दीवारों पर पत्थरों से भगवान हनुमान से जुड़े दृश्य उकेरे जाएंगे। रामायण और सुंदरकांड को तस्वीरों में दर्शाया जाएगा।

    छत पर कशीदाकारी, बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी रोशनी रणजीत लोक की छत पर भी कशीदाकारी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा। मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे।मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी।

    भक्त पाथ-वे के जरिए दर्शन करने जाएंगे। यहां एलईडी पर भगवान के लाइव दर्शन होंगे।स्मार्ट सिटी संभाल रहा निर्माण की जिम्मेदारी मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- रणजीत लोक निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते इसका काम शुरू किया जा चुका है।

    पांचवीं पीढ़ी संभाल रही पूजा-अर्चना का काम वर्तमान पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा स्व. पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई।

    इंदौर स्मार्ट सिटी के पास जिम्मेदारी मंदिर प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया- रणजीत लोक निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा।

    परिसर में पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम बनेगा रणजीत लोक की छत पर भी कशीदाकारी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा। मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे।मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी।

    1960 में गर्डर-फर्शी से पक्का बनाया, 1992 में छत डाली मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। पं. व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई।

    व्यास के अनुसार, होलकर राजा जब भी युद्ध के लिए जाते थे तो यहां पूजा-हवन करते थे। विजय की कामना के साथ यहां आते और फिर युद्ध के लिए जाते थे इसलिए मंदिर का नाम रणजीत हनुमान पड़ा।

    उन्होंने कहा- पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर यहां रणजीत अष्टमी मनाई जाती है। सुबह 5 बजे प्रभात फेरी निकाली जाती है। दिनभर पूजा-अर्चना और विशेष आरती की जाती है। 21 लाख रुपए के रथ पर सवार होकर रणजीत हनुमान नगर भ्रमण करते हैं।
    महाकाल लोक के बाद अब मध्यप्रदेश में हनुमान लोक नजर आएगा। इसका निर्माण सौंसर के जाम सांवली में होगा। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड 314 करोड़ की लागत से करीब 30 एकड़ में इसका निर्माण करवा रहा है। उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर 6 फेज में हनुमान लोक कॉरिडोर का काम होगा। फर्स्ट फेज में 35 करोड़ की लागत से एंट्रेंस प्लाजा से हनुमान लोक तक का काम किया जाएगा।

    हर साल इसलिए निकलती है प्रभात फेरी पुजारी पं. दीपेश व्यास का कहना है कि सीताजी के हरण के बाद वानर राज सुग्रीव के आदेश पर वानर सेना उनका पता लगाने गई थी। हनुमान जी उनका पता लगाकर लौटे थे। यह खबर जब भगवान राम ने सुनी तो उन्होंने कहा कि हनुमान तुम रण को जीतकर आए हो। लंका को जलाकर आए हो इसलिए आज से मैं तुम्हें रणजीत नाम प्रदान करता हूं। इसके बाद वहां लाखों वानरों ने हनुमान जी को कंधे पर बैठाकर पूरे जंगल में परिभ्रमण कराया था। इसी के प्रतीकात्मक स्वरूप पौष अष्टमी पर यह यात्रा निकलती है।

     

  • श्री महाकालेश्वर मंदिर में उज्जैन महाकाल महोत्सव 2026, 5 दिन में शिव और शैव संस्कृति की शानदार धारा

    उज्जैन
     दुनिया के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष एक अनोखी सांस्कृतिक शुरुआत होने जा रही है। मंदिर परिसर के शक्ति पथ पर 14 से 18 जनवरी 2026 तक भव्य महाकाल महोत्सव आयोजित किया जाएगा। पाँच दिनों का यह आयोजन पूरी तरह भगवान शिव और शैव परंपरा को समर्पित होगा, जिसमें देशभर से चुनिंदा कलाकार अपनी कला के माध्यम से शिव दर्शन का अलौकिक अनुभव कराएंगे।

    महोत्सव को लेकर मंगलवार को हुई तैयारी बैठक में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, महाकाल महोत्सव समिति सदस्य पद्मश्री भगवतीलाल राजपुरोहित तथा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक मौजूद रहे। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा और सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई।

    महोत्सव के दौरान नृत्य, संगीत, नाट्य और विभिन्न कला विधाओं की प्रस्तुतियाँ होंगी, जो भगवान शिव की महिमा, शैव इतिहास और आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाएंगी। साथ ही एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी जिसमें शिव के विविध स्वरूप, प्रमुख शैव तीर्थों और शैव संतों के जीवन से जुड़ी झलकियाँ प्रस्तुत की जाएंगी।

    आयोजन समिति के अनुसार, देश के बड़े कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया जाएगा, ताकि उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया जा सके। महाकाल महोत्सव 2026 को शहर की सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा देने वाला आयोजन माना जा रहा है।

  • देवास में घूसखोरी का भंडाफोड़: 5 हजार की रिश्वत लेते अफसर को लोकायुक्त ने पकड़ा

    देवास
    अंचल के बागली तहसील के महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं बढ़ाने के नाम पर वहां के परियोजना अधिकारी ने 2 महीने की सैलरी मांगी। दो किस्तों में 9-9 हजार रुपये देने की बात तय हुई। इसी बीच कंप्यूटर ऑपरेटर प्रितेश तंवर ने लोकायुक्त उज्जैन में शिकायत कर दी।

    लोकायुक्त टीम ने धर दबोचा
    कुछ दिन पहले उसने 4000 रुपये दे दिए थे और बाकी के 5000 देने की बात तय हुई थी। बुधवार को देवास में कलेक्टर कार्यालय में मीटिंग में आए परियोजना अधिकारी रामप्रवेश तिवारी ने उज्जैन रोड पर जैसे ही 5000 की राशि ली, वैसे ही पहले से तैयार लोकायुक्त टीम सक्रिय हो गई। पकड़े जाने की शंका देखकर परियोजना अधिकारी ने अपनी कार भगाई, लेकिन कुछ दूर पीछा करने के बाद टीम ने दबोच लिया।
     
    परियोजना अधिकारी पर केस दर्ज
    इसके बाद कार्रवाई के लिए परियोजना अधिकारी को पकड़कर टीम मीठा तालाब के समीप स्थित रेस्ट हाउस पहुंची। यहां कागजी कार्रवाई पूरी की गई। लोकायुक्त डीएसपी दिनेश पटेल ने बताया मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जा रहा है।

  • जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंच एवं स्व-सहायता समूहों को किया जाएगा सम्मानित

    प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
    जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल मिलने से रोकने की बनायें कार्य-योजना
    एकल नल-जल योजना में 93 प्रतिशत कार्य पूर्ण
    योजनाओं के संचालन एवं संधारण की करें समुचित व्यवस्था
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग की समीक्षा में दिये निर्देश

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जल स्रोतों में सीवरेज का दूषित जल किसी भी स्थिति में नहीं मिले और इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन मध्यप्रदेश इस कार्य को मार्च 2027 तक पूर्ण कर राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल पेश करेगा। उन्होंने कहा कि मिशन के संचालन-संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में जल आपूर्ति प्रभावित न हो।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि जल जीवन मिशन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों और महिला समूहों को राज्य, संभाग, जिला और ग्राम स्तर पर सम्मानित किया जाए। विगत 10 वर्षों में जिन ग्रामों को जल संकट का सामना करना पड़ा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उन क्षेत्रों में जल प्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल की उपलब्धता के अनुसार जल वितरण का समय तय किया जाए, जिससे नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। मिशन के प्रभाव का विश्लेषण अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के माध्यम से कराए जाने की बात भी कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गाँव के ऐसे ट्यूबवेल की सूची बनवाएं, जिनमें हमेशा पानी रहता हो और ट्यूबवेल मालिक सेवाभावी हों। जरूरत पड़ने पर इनके ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति कराने का प्रयास करें।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने जल जीवन मिशन के कार्यों के समुचित संचालन-संधारण के लिये प्रभावी योजना बनाने की बात कही।
    बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री श्री नीरज मण्डलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी और प्रबंध संचालक जल निगम श्री के.वी.एस. चौधरी भी उपस्थित थे।

    प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने बताया कि अब तक प्रदेश में 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं और मिशन की कुल प्रगति 72.54 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा किया गया है और वर्ष 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं।

    बोरवेल दुर्घटना रोकने कानून बनाने वाला पहला राज्य
    बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश बोरवेल दुर्घटना रोकने के लिए कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य है। साथ ही “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में प्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान मिला है।

    वर्ष 2024-25 में 12,990 करोड़ रु. का व्यय कर 92.89 प्रतिशत वित्तीय लक्ष्य हासिल किया गया है। वर्ष 2025-26 में 6,016 करोड़ रु. का व्यय किया गया है, जो 30 सितंबर 2025 तक 35.11 प्रतिशत की प्रगति दर्शाता है। प्रदेश में 21,552 ग्राम “हर घर जल” घोषित किए जा चुके हैं तथा 15,026 ग्रामों को प्रमाणित किया जा चुका है। समूह नल जल योजनाओं के माध्यम से 3,890 ग्रामों में नियमित जल आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी है और एकल नल जल योजनाएँ 93 प्रतिशत प्रगति के साथ तेजी से पूर्णता की ओर अग्रसर हैं।

    विभाग द्वारा तकनीकी और डिजिटल मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। जल रेखा मोबाइल ऐप के माध्यम से योजनाओं की सतत निगरानी की जा रही है। राज्य की सभी 155 प्रयोगशालाओं को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हो चुकी है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से डिजिटल जल कर संग्रह व्यवस्था लागू की गई है। इंदौर में IoT (इंटरनेट ऑफ थिंक्स) आधारित जल आपूर्ति मॉडल सफलतापूर्वक लागू किया गया है और इसे अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जा रहा है।

    ऊर्जा प्रबंधन को देखते हुए 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना PPP मॉडल पर स्वीकृत की गई है, जिससे आने वाले 25 वर्षों तक सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके अतिरिक्त 60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना पर भी कार्ययोजना तैयार की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए जलदर्पण पोर्टल संचालित है तथा शिकायत निवारण हेतु कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। अभी 64 ग्रामों में 24×7 जल आपूर्ति पायलट रूप में सफल रही है, जिसे आगे और विस्तृत किया जाएगा।

    बैठक में भविष्य के विजन पर जानकारी देते हुए बताया गया कि आगामी तीन वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक सुरक्षित नल-जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जल स्रोतों के संरक्षण, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, डिजिटल प्रबंधन, तकनीकी क्षमता संवर्धन और ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नए ग्राम, बसाहट, विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य संस्थान और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों में पेयजल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश जल प्रदाय व्यवस्था में देश का अग्रणी राज्य बन सके।

    महत्वपूर्ण बिन्दु

        जल स्रोतों में सीवरेज का प्रदूषित जल मिलने से रोकने के लिये समुचित कार्य योजना बनाये।

        जल जीवन मिशन के कार्य पूरा करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर 2028 तक का लक्ष्य दिया गया है।

        प्रदेश में तय समय सीमा से पहले मार्च 2027 में ही जल जीवन मिशन के कार्यों को पूर्ण कर लिया जाएगा।

        जल जीवन मिशन में किए गए कार्यों की अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा इंपैक्ट एनालिसिस कराएं।

        प्रत्येक नागरिक को गुणवत्ता युक्त जल उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है ।

        जल जीवन मिशन के तहत सरपंच, महिला समूह द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यो के लिए उन्हें राज्य स्तर, संभाग, जिला एवं ग्राम स्तर पर पुरस्कृत किया जाए।

        जल जीवन मिशन के कार्यों के संचालन एवं संधारण की समुचित योजनाएं बनाएं ताकि किसी भी स्थिति में जल की नियमित आपूर्ति हो सके।

        विगत 10 सालों में जिन गांवों में जल संकट रहा है, उनकी रिपोर्ट तैयार कर उनमें जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की कार्य योजना बनाएं।

        पानी की आपूर्ति और उपलब्धि के अनुसार जल वितरण का समय निर्धारित करें, जिससे नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    1. प्रमुख उपलब्धियाँ

        अब तक 80 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन (FHTC) प्रदान किए गए।

        जल जीवन मिशन की कुल प्रगति 72.54% है।

        एकल नलजल योजनाएँ दिसम्बर 2025 तक और समूह नलजल योजनाएँ मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य। वर्तमान में 93 प्रतिशत प्रगति।

        वर्ष 2024-25 में 8.19 लाख कनेक्शन का 100% लक्ष्य पूरा।

        वर्ष 2025-26 में अब तक 5.50 लाख कनेक्शन प्रदान किए गए।

        बोरवेल में दुर्घटना रोकने हेतु कानून बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य।

        “स्वच्छ जल से सुरक्षा अभियान” में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर।

    2. वित्तीय एवं भौतिक प्रगति

        वर्ष 2024-25 में विभाग ने 12,990 करोड़ का व्यय कर 92.89% वित्तीय लक्ष्य प्राप्त किया।

        वर्ष 2025-26 में 6,016 करोड़ का व्यय, 35.11% प्रगति (30 सितंबर 2025 तक)।

        FHTC भौतिक प्रगति के अंतर्गत 2025-26 में 4.56 लाख कनेक्शन (29.06%) उपलब्धि।

    3. जल जीवन मिशन – प्रगति विवरण

        कुल लक्षित FHTC: 1.11 करोड़ से अधिक।

        अब तक 80 लाख से अधिक घरों तक जल पहुँचा।

        21,552 ग्राम “हर घर जल” घोषित, 15,026 ग्राम “हर घर जल” प्रमाणित।

        गाँवों की 100% geotagging पूर्ण।

        SVS (एकल नलजल योजना) की प्रगति 93% तक पहुँची।

        MVS (समूह नलजल योजना) के अंतर्गत 3,890 ग्रामों में जल आपूर्ति प्रारंभ।

    4. डिजिटल मॉनिटरिंग और तकनीकी सुधार

        जल रेखा मोबाइल ऐप से समूह नलजल योजनाओं की सतत निगरानी।

        Borewell/Tubewell की खुदाई और पंप स्थापना की डिजिटल मॉनिटरिंग हेतु मोबाइल ऐप विकसित।

        सभी 155 प्रयोगशालाएँ NABL मान्यता प्राप्त।

        सभी स्रोत, भंडारण और सूचना बोर्ड की 100% जियो टैगिंग।

        निर्माण सामग्री की निगरानी हेतु ऑनलाइन इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम विकसित।

    5. संचालन एवं संधारण (O&M) सुधार

        राज्य स्तरीय संचालन एवं संधारण नीति तैयार और लागू।

        इंदौर जिले में IOT आधारित उपकरणों से नियमित दबाव पर जल आपूर्ति सुनिश्चित करने का सफल मॉडल।

        पंचायत दर्पण पोर्टल से ग्राम पंचायतें सीधे डिजिटल जल कर संग्रह कर रही हैं।

    6. ऊर्जा प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा

        100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना PPP मॉडल पर ₹2.09 प्रति यूनिट की रिकॉर्ड न्यूनतम दर पर स्वीकृत।

        25 वर्षों तक सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

        60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना की कार्ययोजना तैयार।

    7. ई–गवर्नेंस और पारदर्शिता

        ई–ऑफिस संचालन में जल निगम प्रदेश के सभी विभागों में प्रथम स्थान पर।

        निजी एजेंसियों के चयन में पारदर्शिता हेतु Screening Test—503 अभ्यर्थी चयनित।

        “ई–बंधन” प्लेटफॉर्म से 100% डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू।

    8. सेवा गुणवत्ता और नागरिक सुविधा

        64 ग्रामों में 24×7 सतत जल आपूर्ति पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सफल।

        जल जीवन मिशन योजनाओं की वास्तविक स्थिति व शिकायत समाधान के लिए Jaldarpan Portal संचालित।

        शिकायतों और सुझावों के लिए कॉल सेंटर स्थापित।

    9. समूह नलजल योजनाएँ (MVS) – स्थिति

        कुल 147 समूह नलजल योजनाएँ—60,786 करोड़ लागत।

        46 योजनाएँ पूर्ण, 92 प्रगति पर, 9 प्रारंभिक चरण में।

        3,890 ग्रामों में समूह योजनाओं से नियमित जल आपूर्ति शुरू।

    आगामी 03 वर्षों का विजन

        ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक परिवार तक नल-जल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना।

        वंचित एवं प्राथमिकता वाले परिवारों को शीघ्रता से नल-जल कनेक्शन प्रदान करना।

        जल प्रदाय योजनाओं का नियमित संचालन तथा जल आपूर्ति को प्रमाणित और सुचारु बनाए रखना।

        निर्माण कार्यों में गुणवत्तापूर्ण सामग्री व मानकों का पालन सुनिश्चित करना।

        सभी जल स्रोतों की सतत उपलब्धता और उनका संरक्षण व संवर्धन करना।

        भुगतान और संचालन-प्रबंधन में मोबाइल ऐप व सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली लागू करना।

        तकनीकी आवश्यकता के अनुसार विभाजन स्तरीय प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन केंद्र स्थापित करना।

        जल योजनाओं की ऊर्जा आवश्यकता हेतु सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करना

        जल गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं को NABL मान्यता दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना।

        नए ग्राम, बसाहट, विद्यालय, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल सुविधाओं का विस्तार करना।

    राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय उपलब्धियाँ

        मध्यप्रदेश जल निगम ई-ऑफिस के अंतर्गत फाइल मूवमेंट में प्रथम स्थान पर रहा।

        पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर योजनाओं एवं पाइप लाइन नेटवर्क को रेखांकित करने में मध्यप्रदेश ने देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।

        नल-जल योजनाओं में शत-प्रतिशत स्रोतों एवं पानी की टंकियों की जियो टेगिंग की गयी है।

        ट्यूबवेल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के तहत नवीन नलकूप की जानकारी संकलन, जियो टेगिंग एवं मॉनीटरिंग के लिये ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गयी है।

        इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के तहत विभाग के सभी भंडारों से सामग्री के आदान-प्रदान की ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गयी है।

     

  • मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस लागू: शिक्षकों ने याचिका वापस ली, सामने आया यह बड़ा कारण

    जबलपुर
    प्रदेश के शासकीय स्कूलों में ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को लेकर दायर की गई याचिका बुधवार को वापस ले ली गई। याचिकाकर्ता शिक्षकों की ओर से कोर्ट में निवेदन किया गया कि वे नए तथ्यों के साथ नई याचिका दायर करना चाहते हैं। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान करते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में जिस नियम को हवाला दिया जा रहा है, वह नई याचिका में ही दिया जा सकता है। पुरानी याचिका में जो आधार दिए गए थे, उन आधारों पर दूसरे मुकदमों के फैसले हो चुके है।

    दरअसल, प्रदेश सरकार के हमारे शिक्षक ई ऐप को चुनौती देते हुए प्रदेश के 27 शिक्षकों की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें कहा गया था कि हमारे शिक्षक ई-एप सुरक्षित नहीं है, इससे डेटा लीक होने और साइबर फ्राड की घटनाएं सामने आई हैं।
     
    जबलपुर निवासी शिक्षक मुकेश सिंह बरकड़े सहित विभिन्न जिलों के 27 शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस के विरुद्ध हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हमारे शिक्षक ऐप से प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज कराने में गंभीर तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने दलील दी कि सरकार यह ऐप एक निजी संस्था से चलवा रही है और वही संस्था शिक्षकों का डेटा कलेक्ट कर रही है। केंद्र सरकार के निजी डेटा कलेक्शन नियम इस पर लागू होते हैं, पर ऐप में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।

    शिक्षकों ने कोर्ट को यह भी बताया था कि प्रदेश में पांच-छह शिक्षकों के खातों से रुपए निकाल लिए गए और उनकी निजी जानकारी लीक हुई। कई जिलों के शिक्षा अधिकारियों ने इसकी शिकायत करते हुए पत्र भी लिखे। डीपीआई ने इन शिकायतों को स्वीकार करते हुए माना कि कुछ शिक्षकों के साथ फ्रॉड की घटनाएं हुई हैं और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा था कि ई-अटेंडेंस सिस्टम पहले भी सही साबित किया गया है। सरकार का कहना है कि ऐप के लिए डेटा सेफ्टी सर्टिफिकेट लिया गया है और न तो सर्वर की समस्या है, न नेटवर्क की।

  • मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध मादक पदार्थों एवं शराब पर प्रभावी कार्रवाही

    विगत दो दिनों में 1 करोड़ 85 लाख रुपये से अधिक की अवैध शराब एवं मादक पदार्थ जब्त, 12 तस्कर गिरफ्तार

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश पुलिस ने पिछले दो दिनों में अवैध शराब परिवहन, नशे की तस्करी तथा डोडाचूरा/स्मैक/एमडी पाउडर जैसे मादक पदार्थों के विरुद्ध सघन अभियान के अंतर्गत अनेक महत्वपूर्ण कार्रवाहियां की हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस टीमों ने आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए मादक पदार्थों की बड़ी खेप, अवैध शराब और तस्करी में प्रयुक्त वाहन जब्त किए हैं। सभी कार्यवाहियों में कुल 1 करोड़ 85 लाखरुपये की संपत्ति जब्‍त की है।

    विभिन्न जिलों में प्रमुख कार्रवाईयाँ
    धार जिले में अवैध शराब तस्करी पर बड़ी कार्रवाई:धार पुलिस ने इंदौर-अहमदाबाद हाईवे पर कार्रवाई करते हुए एक ट्रक से 1499 पेटी अंग्रेजी शराब जब्त की। बरामद सामग्री और वाहन की कीमत 1 करोड़ 24 लाख 43 हजार 700 रुपएआँकी गई है। पुलिस ने ट्रक चालक बबलू पिता जियालालवरकडे और परिचालक दुर्गेश पिता शिव नरेश राजपूत, दोनों निवासी इंदौर को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

    भोपाल: क्राइम ब्रांच द्वारा MD ड्रग्स के साथ तस्कर गिरफ्तार:भोपाल पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नशे के विरुद्ध अपनी कार्रवाई को जारी रखते हुए ईदगाह हिल्स क्षेत्र से एक तस्कर शिफत पिता दिलशाद अहमद को गिरफ्तार किया है।उसके कब्जे से 11.05 ग्राम एमडी पाउडर (कीमत लगभग 3 लाख 45 हजार रूपए) और दो मोबाइल जब्त किए गए। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएसएक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कर विवेचना जारी है।

    गुना पुलिस का नशा तस्करों के नेटवर्क पर लगातार प्रहार:गुना पुलिस ने 'नशा मुक्त गुना जिला' अभियान के अंतर्गत लगातार दो बड़ीकार्रवाईयाँ की हैं। कैंट थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 7.2 ग्राम स्मैक पाउडर (कीमत 72हजार रूपए) के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। वहीं, मृगवास थाना पुलिस ने पहले राजस्थान के स्मैक तस्कर सोनू मीना को 104.35 ग्राम स्मैक और तस्करी में प्रयुक्त मोटरसाइकिल (कीमत 11 लाख20 हजार रूपए) सहित गिरफ्तार किया। इसके मात्र 24 घंटे के भीतर ही उसके सप्लायरघीसालाल मीना निवासी मोतीपुरा, राजस्थान को भी गिरफ्तार किया।

    नीमच जिले में 221 किलोग्राम डोडाचूरा जब्त:जिले के जावद थाना पुलिस ने नयागांव क्षेत्र में मारुति वैन से 221 किलोग्राम डोडाचूरा जब्त किया। जिसकी अनुमानित कीमत 33 लाख 15 हजार रूपए है। आरोपी वैन चालक सुखदेव गुर्जर को भी गिरफ्तार किया गया है।

    इंदौरपुलिस की ब्राउन शुगर तस्कर पर कार्रवाई:पुलिस थाना आजाद नगर ने अवैध मादक पदार्थों की गतिविधियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए एक ब्राउन शुगर तस्कर तनवीर उर्फ तन्नू अब्दुल गफ्फार को न्यू आरटीओ रोड क्षेत्र से गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से 13.51 ग्राम ब्राउन शुगर लगभग 1लाख 30हजार रूपए कीजब्त की गई।

    मुरैना और मैहर में अवैध शराब पर शिकंजा:मुरैनाके सिविल लाइन थाना पुलिस ने अवैध शराब के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही करते हुए 170 पेटी अवैध देशी शराब एवं तस्करी में प्रयुक्त 01 टाटा पिकअप गाड़ी सहित कुल 10 लाख रूपएसे अधिक कीमत की सामग्री जब्त की है।

    वहीं मैहर पुलिस ने अवैध शराब विक्रेताओं के विरुद्ध बड़ी कार्यवाही करते हुए दो अलग-अलग प्रकरणों में 1लाख 12हजार रुपये मूल्य की 198 लीटर अवैध शराब जब्त की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    मध्यप्रदेश पुलिस अवैध शराब, नशे के कारोबार, तस्करी नेटवर्क और संगठित अपराध के विरुद्धजीरो टॉलेरेंसकी नीति पर निरंतर और दृढ़ता से कार्य कर रही है।इन संयुक्त कार्यवाहियों में मध्‍यप्रदेश पुलिस ने ताबड़तोड़, सटीक और साहसिक अभियानों के माध्यम से विगत दो दिनों में 1 करोड़ 85 लाख रुपये से अधिक की अवैध शराब एवं मादक पदार्थ जब्तकिए हैं। साथ ही 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 

  • जल आवर्धन योजना में अनियमितता बरतने पर 2 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई

    नगरीय प्रशासन ने जारी किये आदेश

    भोपाल 
    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नगरीय निकायों में जल आवर्धन योजना में पाइप लाइन बिछाने के कार्य में पाई गई अनियमितताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की है। नगरीय विकास आयुक्त ने विभागीय जाँच के आधार पर 2 पूर्व अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के आदेश जारी किये हैं।

    जाँच अधिकारी की रिपोर्ट तथा विभाग के प्रमुख अभियंता के अभिमत के आधार पर नीमच जिले की रामपुरा नगर परिषद के तत्कालीन प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी लीलाकृष्ण सोलंकी और तत्कालीन उपयंत्री ओ.पी. परमार के विरुद्ध दण्डात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किये गये हैं। इस प्रकरण से जुड़े हुए लीलाकृष्ण सोलंकी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके विरुद्ध 2 वर्ष तक पेंशन पर महँगाई राहत की 5 प्रतिशत राशि रोके जाने का निर्णय लिया गया है। जाँच में दोषी पाये गये दूसरे अधिकारी ओ.पी. परमार जुलाई-2025 में सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी सेवा अवधि के दौरान आर्थिक क्षति की राशि 9 लाख 25 हजार 385 रुपये उनकी सेवानिवृत्ति लाभों से वसूल कर नगर परिषद रामपुर में जमा कराई जायेगी। इसी के साथ उनकी पेंशन पर देय महँगाई राहत की 10 प्रतिशत राशि आगामी 2 वर्ष तक स्थगित करने के आदेश जारी किये गये हैं। आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि नगरीय प्रशासन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमिता और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

     

  • कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (यू.के.) में अत्‍याधुनिक पुलिसिंग के गुर सीख रहे हैं प्रदेश के 30 अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक

    राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों का मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में जारी है

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश पुलिस का "मिड कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम" (MCTP) राज्य के भावी पुलिस नेतृत्व को नई सोच, नई दिशा और आधुनिक पुलिसिंग के व्यापक दृष्टिकोण से सशक्त बना रहा है। यह कार्यक्रम पुलिस अधिकारियों को समकालीन कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के अनुरूप बेहतर, उत्तरदायी और प्रभावी पुलिस नेतृत्व के लिए तैयार कर रहा है। राज्य पुलिस सेवा के 30 अधिकारियों का मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम का शुभारंभ 27 नवंबर को मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के निदेशक श्री मोहम्मद शाहिद अबसार के मुख्य आतिथ्य में किया गया, इस अवसर पर अकादमी के उपनिदेशक डॉ. संजय कुमार अग्रवाल भी उपस्थित रहे।

    चार हफ्ते से भी अधिक अवधि का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के चार संस्थानों में आयोजित किया गयाहै। राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों का यह पांचवां मिड-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसमें उन्हें पुलिस से संबंधित महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य से परिचित कराया जाएगा। बारह वर्ष का सेवाकाल पूर्ण कर चुके राज्य पुलिस सेवा के कुल 30 पुलिस अधिकारी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

    इन अधिकारियों ने 27 नवंबर से 29 नवंबर तक मध्यिप्रदेश पुलिस अकादमी में  प्रशिक्षण प्राप्तं किया। इसके बाद 01 से 02 दिसंबरतक आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में तथा 04 से 06 दिसंबर तक नेशलन लॉ यूनिवर्सिटी नई दिल्लीढ में प्रशिक्षण प्राप्तम किया। जिसमें सोशल लेजिसलेशन, ई-गवर्नेंस, पब्लिक ऑर्डर एवं विक्टिमोलॉजी के साथ-साथ अन्य विभागों से समन्वय तथा इससे जुड़े अधिनियम आदि का प्रशिक्षण दिया गया।

     दिनांक 08 दिसंबर से यह प्रशिक्षण कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (यूके) में जारी है जहां प्रशिक्षण के अतिरिक्तभ ब्रिटिश पुलिस संस्थानों का भ्रमण कराया जाएगा।  इस दौरान क्राईम हार्म इंडेक्सा, प्रीडिक्टिव पुलिसिंग, महिलाओं के विरूद्ध अपराध आदि विषयों की बारीकियां सिखाईं जाएंगी। अंत में 30 दिसंबर को डी ब्रीफिंग के साथ प्रशिक्षण का समापन होगा।

     

  • खजुराहो केबिनेट में बुंदेलखंड को हजारों करोड़ की मिली विकास कार्यों की बड़ी सौगातें: मंत्री राजपूत

    भोपाल
    खजुराहो में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। बुंदेलखंड के लिए केबिनेट बैठक का दिन स्वर्णिम रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर को महत्वपूर्ण विकास कार्यों की सौगातें देकर सागर के विकास की नई इबारत लिखी। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि केबिनेट में बुंदेलखंड एवं सागर के लिए हजारों करोड़ की सौगातें दी हैं, जिससे सागर विकास के नये आयामों को छुएगा। यहां के युवाओं को रोजगार से जोड़कर विकास की नई कहानी लिखी जायेगी, वहीं पर्यटन के क्षेत्र में नया इतिहास रचने की घोषणा भी हुई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में सागर में 608.93 हेक्टेयर भूमि पर 25 हजार करोड़ की लागत से नया उद्योग क्षेत्र स्थापित किया जायेगा। इससे 30 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं दूसरी ओर नौरादेही अभयारण्य में जुलाई माह में 4 चीतों को बसाया जायेगा। इससे क्षेत्र में स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

    मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि सागर से दमोह फोरलेन सड़क, छतरपुर तथा दमोह में नये मे‍डिकल कॉलेज के लिये नये पदों का सृजन किया जायेगा। साथ ही बीना में 100 बिस्तरीय अस्पताल बनेगा। इससे सागर विकास की ऊँचाइयों तक पहुँचेगा। मंत्री श्री राजपूत ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का धन्यवाद और आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सागर तथा बुंदेलखण्ड के लिये दी गई सौगातें विकास के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगी।

    25 हजार करोड़ से विकसित होगा नया औद्यौगिक क्षेत्र
    मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि उद्योगों के लिए भी सागर को विशेष पैकेज प्रदान किया गया है। इसके तहत रिछोड़ा के पास 25 हजार करोड़ की लागत से नया औद्यौगिक क्षेत्र विकसित किया जायेगा, जिसमें लगभग 30 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। मसवासी ग्रंट औद्योगिक क्षेत्र के लिये स्वीकृत विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज में भूमि टोकन शुल्क मात्र एक रुपये प्रति वर्गमीटर, किराया और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूर्ण छूट एवं बिजली दरों में रियायत शामिल है।

    जुलाई माह में आयेंगे नौरादेही में 4 चीते
    मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि जब प्रधानमंत्री कूनो में चीता लेकर आये थे तो पूरे देश को बड़ी खुशी हुई थी और अब बुंदेलखंड में पहली बार मुख्यमंत्री डॉ. यादव जुलाई माह में नौरादेही अभयारण्य में 4 चीते छोड़ेंगे, यह हमारे लिए गर्व की बात है। इससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी सागर जिले को बड़ी उपलब्धि है। नौरादेही अभयारण्य को प्रदेश का तीसरा चीता आवास के रूप में विकसित करने की सैद्धांतिक सहमति दी गई है। यह क्षेत्र में पर्यावरणीय संरक्षण और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की सकारात्मक पहल है।

    सागर-दमोह फोरलेन निर्माण को 2059 करोड़ मंजूर
    मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि केबिनेट बैठक में सागर-दमोह मार्ग को 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ विकसित करने के लिए 2059.85 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। 76.680 किमी लंबे इस मार्ग का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के अंतर्गत किया जाएगा। परियोजना में 13 अंडरपास, 3 फ्लाईओवर, 9 मिडियन, 1 आरओबी तथा 13 पुल-पुलिया निर्माण का प्रावधान है। भूमि अर्जन और अन्य कार्यों पर 323.41 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इससे सागर दमोह भोपाल जबलपुर जाने वालों के लिए आवागमन सुलभ होगा।

    100 बेड का होगा बीना अस्पताल, पद सृजन को मंजूरी
    स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए बीना सिविल अस्पताल की क्षमता 50 से 100 बिस्तर तक बढ़ाने और नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। इससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलेंगी।

  • मध्यप्रदेश में जलवायु वित्त जुटाने पर भोपाल में कार्यशाला का आयोजन

    भोपाल
    राज्य की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप जलवायु वित्त समाधान विकसित करने और राज्य स्तरीय जलवायु वित्त रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से, WRI इंडिया ने पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) और क्लाइमेट पॉलिसी इनिशिएटिव (CPI) के सहयोग से बुधवार को भोपाल में “मध्यप्रदेश में जलवायु वित्त जुटाने पर भोपाल में कार्यशाला” विषय पर सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शासकीय विभाग, शोध संस्थानों, वित्तीय संस्थानों, अकादमिक संगठन और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने राज्य के जलवायु वित्त परिदृश्य, जलवायु अनुकूल विकास के लिए व्यावहारिक रणनीतियों और प्रमुख क्षेत्रों में उभरते अवसरों पर चर्चा की।

    अपर मुख्य सचिव पर्यावरण श्री अशोक बर्णवाल ने कहा कि “जलवायु वित्त अब उन राज्यों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सक्षम साधनों में से एक बन गया है, जो मध्यप्रदेश की तरह बढ़ते जलवायु जोखिमों का सामना कर रहे हैं। इस विकास पथ को उच्च-उत्सर्जन मार्ग पर जाने से रोकने के लिए हमें जलवायु वित्त तक पहुंच को मजबूत करना होगा और सभी क्षेत्रों में नीतिगत रूप से सक्षम परियोजनाएँ विकसित करनी होंगी। विभागों के बजट अभ्यासों में जलवायु वित्त को शामिल करना आवश्यक है और इसके लिए उच्च गुणवत्ता की परियोजनाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमें न केवल शासकीय विभागों और निजी क्षेत्र, बल्कि आमजन की क्षमताओं की वृद्धि और उनकी संवेदनशीलता बढ़ाने की भी आवश्यकता है। मिशन लाइफ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक साबित हो सकता है।”

    कार्यपालन संचालक एप्को श्री दीपक आर्या ने कहा कि हाल ही में जारी किया गया राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना एक महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत है, लेकिन वित्तीय अंतर अब भी बहुत बड़ा है। अनुकूलन और शमन प्रयासों के लिए लगभग 97 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता का अनुमान है। केवल सार्वजनिक बजट इस अंतर को पूरा नहीं कर सकते, इसलिए राज्य में प्रभावी जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए निजी निवेश, मिश्रित वित्त, कार्बन बाज़ारों और बहुपक्षीय जलवायु कोषों को जुटाना अत्यंत आवश्यक है। एप्को प्रत्येक हितधारक को उच्च गुणवत्ता की परियोजनाएँ विकसित करने और उपलब्ध जलवायु वित्त अवसरों का लाभ उठाने के लिए हर प्रकार का सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    समन्वयक, जलवायु परिवर्तन ज्ञान प्रबंधन केन्द्र एप्को श्री लोकेन्द्र ठक्कर ने कहा कि एप्को ने विभिन्न वित्तपोषण योजनाओं का उपयोग करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं और राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन पर रणनीतिक ज्ञान मिशन (NMSKCC), राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) और सेंटर फॉर क्लीन एयर पॉलिसी (CCAP) के तहत सफलतापूर्वक धनराशि जुटाई है, जिसके माध्यम से उप-राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु कार्रवाई और परियोजनाओं को लागू किया गया है।

    WRI इंडिया के एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर श्री सारांश बाजपेयी ने कहा कि सब-नेशनल क्लाइमेट फाइनेंस को मजबूत करना अति आवश्यक है, क्योंकि राज्यों की अहम भूमिका है कि वे इसे लागू करने में आगे आएं और यह सुनिश्चित करें कि क्लाइमेट एक्शन समुदायों और संवेदनशील इलाकों तक पहुंचे। फसल उत्पादन में एक बड़ा योगदान देने वाले और देश में सबसे ज़्यादा जंगल और पेड़ वाले इलाके के तौर पर मध्यप्रदेश को ज़मीन के उपयोग में जलवायु के परस्पर बदलावों को आगे बढ़ाने में अधिक जोखिम का सामना करना पड़ता है।

    मध्यप्रदेश में जलवायु वित्त परिदृश्य पर चर्चा की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए प्रोग्राम लीड, जलवायु वित्त, डब्ल्यूआरआई इंडिया सुश्री नेहा मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक, निजी, अंतर्राष्ट्रीय और मिश्रित स्रोतों से जलवायु वित्त जुटाना समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है। आगामी जलवायु से संबंधित कार्यों के लिए सही पूंजी, मजबूत परियोजना क्षमताएँ और ठोस नीतिगत समर्थन जरूरी हैं। एप्को के नेतृत्व में राज्य जिस प्रकार समन्वित प्रयास कर रहा है, वह प्रभावी जलवायु कार्रवाई की शक्ति को दर्शाता है, और डब्ल्यूआरआई इंडिया राज्य के साथ इस महत्वपूर्ण कार्य में सहयोग करते हुए हर्षित है।

    तकनीकी सत्रों में सतत कृषि, वानिकी, जलवायु-अनुकूल क्रियाएं और शहरी प्रणालियों के लिए उपयुक्त वित्तीय समाधानों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का समापन इस आग्रह के साथ हुआ कि मध्यप्रदेश के लिए ऐसे जलवायु वित्त रणनीतियाँ विकसित की जाए जो आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ जलवायु-अनुकूल भी हो। इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिए श्री पियूष त्रिपाठी मो.- 8294154887, Piyush.Tripathi@wri.org एवं श्री रौशन मिश्रा मो.- 7903157371, Roushan.Mishra@wri.org से संपर्क किया जा सकता है।

    डब्ल्यूआरआई इंडिया एक स्वतंत्र चैरिटी संस्था, जो इंडिया रिसोर्सेज ट्रस्ट के रूप में विधिवत पंजीकृत है, पर्यावरणीय रूप से सुदृढ़ और सामाजिक रूप से न्यायसंगत विकास को बढ़ावा देने के लिए निष्पक्ष जानकारी और व्यावहारिक सुझाव प्रदान करती है। अनुसंधान, विश्लेषण और सिफारिशों के माध्यम से, डब्ल्यूआरआई इंडिया पृथ्वी की सुरक्षा, आजीविका को सुदृढ़ करने और मानव कल्याण को बढ़ाने वाले रूपांतरकारी समाधानों को व्यवहार में लाने का कार्य करती है।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के ब्रोशर एनआरएम-2026 का विमोचन किया

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के ब्रोशर "एनआरएम-2026" का विमोचन किया। नेशनल रिसचर्स मीट-2026 का आयोजन 12 से 14 फरवरी को भोपाल में होगा। ब्रोशर विमोचन पर संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति श्री विजय मनोहर तिवारी और वीर भारत न्यास के ट्रस्टी श्री श्रीराम तिवारी मौजूद रहे।

     

  • दो वर्षों में विभाग ने गति, गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार के नए आयाम स्थापित किए

    विभागीय न्यूज़ लेटर और पर्यावरण से समन्वय ब्रोशर का विमोचन किया
    एमपीआरडीसी और एमपीबीडीसी के संचालक मंडल की बैठक संपन्न

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, रोज़गार, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रगति का आधार हैं। विभाग का उद्देश्य प्रत्येक निर्माण कार्य को सिर्फ एक तकनीकी परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि जनता के जीवन स्तर को सुधारने वाले साधन के रूप में देखना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और नवाचार के साथ प्रत्येक परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, यही प्रयास "लोक निर्माण से लोक कल्याण" की भावना को साकार करते हैं। यह निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिये।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने विभाग द्वारा "लोक निर्माण से लोक कल्याण" की भावना को धरातल पर उतारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की आधारभूत संरचना का विकास ही जनकल्याण का आधार है और विभाग ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि हर सड़क, हर पुल, हर परियोजना जनता के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने की हमारी संकल्पना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि मेट्रोपॉलिटन एरिया और समीपवर्ती क्षेत्रों में राजमार्गों का घनत्व बढ़ायें। पूरे प्रदेश को समावेशित कर समग्र विकास पर कार्य करें। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही जबलपुर और ग्वालियर को भी मेट्रोपोलिटन क्षेत्र घोषित किया जाएगा। शहरी, ग्रामीण एवं औद्योगिक क्षेत्रों सभी को अधोसंरचना विकास का लाभ प्राप्त हो इस आधार पर प्रस्ताव की परिकल्पना की जाये। उन्होंने कहा कि राजमार्गों का घनत्व राष्ट्रीय स्तर के समीप ले जाने के लिए विज़न डॉक्यूमेंट के आधार पर प्रस्ताव तैयार करें। प्रस्ताव में स्थानीय मांगों और सुझावों को यथोचित स्थान दिया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपर मुख्य सचिव क्षेत्रों के समग्र विकास अनुसार कार्ययोजना का निर्धारण करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि शहरी विकास की इंटीग्रेटेड पॉलिसी के निर्माण में लोक निर्माण विभाग को भी शामिल किया जाये। उन्होंने कहा कि अधोसंरचना विकास में पर्यावरण समन्वय का विशेष ध्यान रखा जाये। सतत संवहनीय विकास के लिए सूरत के डायमंड पार्क की तर्ज में भवनों का निर्माण ग्रीन बिल्डिंग संकल्पना पर किया जाये। बिजली और पानी की बचत सुनिश्चित की जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भवन निर्माण में वास्तु-विज्ञान का ध्यान रखा जाये। ताकि सूर्य की रोशनी, हवा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित हो और ऊर्जा की बचत की जा सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक्सप्रेस-वे आधुनिक समय की मांग है। इन अधोसंरचनाओं के विकास में ग्रामीण क्षेत्र की सुविधाओं का ध्यान रखा जाये। आवश्यकतानुसार फ्लाई-ओवर, अंडर-पास, सर्विस लेन को प्रस्ताव में शामिल करें। बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ-2028 के कार्य प्राथमिकता से किए जा रहे हैं। प्रस्तावित कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जा चुकी है। दिसम्बर माह के अंत तक कार्य प्रारंभ हो जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि कार्यों को जून-2027 तक पूर्ण किया जाये।

    बैठक में बताया गया कि लोकपथ ऐप में प्राप्त 12 हज़ार 212 शिकायतों में से 12 हज़ार 166 का निराकरण किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकपथ ऐप के उत्कृष्ट उपयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोकपथ ऐप में रियल टाइम सड़क की स्थिति को भी अपडेट किया जाये। साथ ही इसका प्रचार प्रसार सुनिश्चित किया जाये ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें। लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने बताया कि लोकपथ ऐप में आगे स्थलों के बीच की दूरी, समस्त वैकल्पिक मार्ग, पर्यटन स्थल, चिकित्सा सेवाएं, ब्लैक स्पॉट, टोल का शुल्क अन्य सुविधाओं को भी मैप किया जाएगा। यह स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ आगंतुकों के लिए भी उपयोगी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय एवं राज्य के राजमार्गों में सतत संधारण सुनिश्चित किए जाये। प्रकाश, ग्रीनरी और सावधानी मार्कर्स मानक अनुसार रहें यह भी सुनिश्चित किया जाये।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) और मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (बीडीसी) के संचालक मंडल की बैठक हुई। एमडी एमपीआरडीसी श्री भरत यादव ने एमपीआरडीसी के चल रहे कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। इसी प्रकार एमडी बीडीसी श्री सिवी चक्रवर्ती ने भवन विकास निगम के कार्यों और आगामी कार्ययोजना का विवरण दिया।

    बैठक में प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी श्री सुखवीर सिंह ने कहा कि विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों, पीएम गतिशक्ति पोर्टल के उपयोग से रोड प्लानिंग, BISAG-N के माध्यम से समय सीमा का निर्धारण और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग के कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ पर्यावरण से समन्वय, वृक्षारोपण, ट्री-शिफ्टिंग, लोक सरोवर, सौर ऊर्जा के कार्य भी विकास कार्यों में शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पीएम गतिशक्ति के उत्कृष्ट उपयोग पर विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, एसीएस श्री नीरज मंडलोई, एसीएस श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव लोकनिर्माण श्री सुखवीर सिंह, एमडी एमपीआरडीसी श्री भरत यादव, एमडी बीडीसी श्री एमसीबी चक्रवर्ती सहित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

    दो वर्ष की उपलब्धियाँ

                 दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने 12 हजार किमी सड़क निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण कर अभूतपूर्व रिकॉर्ड स्थापित किया है, जिससे राज्य का 77 हजार 268 किमी का सड़क नेटवर्क देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है।

                 वित्तीय वर्ष 2024–25 में विभाग ने 99% तक वित्तीय लक्ष्य हासिल कर समयबद्ध क्रियान्वयन और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

                 "लोक पथ" मोबाइल ऐप के माध्यम से 12,212 शिकायतों में से 12,166 शिकायतों का निवारण कर 99.6% समाधान दर प्राप्त की, जिससे विभाग की पारदर्शिता और जनसहभागिता मजबूत हुई।

                 जबलपुर में प्रदेश के सबसे लंबे 6.9 किमी के दमोह नाका–मदनमहल–मेडिकल रोड एलिवेटेड कॉरिडोर ,राजधानी भोपाल में डॉ. अम्बेडकर फ्लाईओवर (2.73 किमी) और 15.1 किमी लंबा श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर मार्ग जैसे बड़े शहरी कॉरिडोर के कार्य पूरे किए गए।

                 प्रदेश में 3 नए मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा कर स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूती प्रदान की गई।

                 136 विद्यालय भवनों का निर्माण पूरा किया गया, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए उत्कृष्ट बुनियादी ढाँचा उपलब्ध हुआ।

                 ग्वालियर और रीवा में दो नए जिला एवं सत्र न्यायालय भवनों का निर्माण पूरा हुआ।

                 केंद्रीय सहायता से 421 स्वीकृत सड़कों में से 378 कार्य पूर्ण हुए और 18 पुलों का निर्माण प्रगतिरत रहा, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी सुदृढ़ हुई।

                 पूरे प्रदेश में 506 "लोक कल्याण सरोवर" का निर्माण किया गया, जिससे सड़क निर्माण के साथ-साथ जल संरक्षण का अभिनव मॉडल स्थापित हुआ।

                 गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण प्रणाली लागू की गई जिसमें 52 ठेकेदारों को नोटिस और 15 को ब्लैकलिस्ट किया गया, जो गुणवत्ता के प्रति शून्य सहनशीलता नीति को दर्शाता है।

    नवाचार

                 विभाग ने पीएम गतिशक्ति आधारित जीआईएस मास्टर प्लान को अपनाते हुए सड़क योजना प्रक्रिया को पूर्णतः वैज्ञानिक, बहु-स्तरीय डेटा विश्लेषण पर आधारित और पारदर्शी बनाया।

                 लोक परियोजना प्रबंधन प्रणाली (LPMS) विकसित कर सभी परियोजनाओं—सर्वेक्षण, स्वीकृति, डीपीआर, निर्माण प्रगति और भुगतान—को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया गया।

                 लोक निर्माण सर्वे ऐप के माध्यम से सभी सड़कों, पुलों और भवनों का जियो-मैपिंग पूरा कर विभाग के पास 100% डिजिटल एसेट इन्वेंटरी उपलब्ध हुई।

                 एरियल डिस्टेंस आधारित सड़क योजना की तकनीक को पहली बार लागू किया गया, जिससे एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी कॉरिडोर का चयन अधिक सटीक और किफायती हुआ।

                 सड़क निर्माण में एफडीआर, जेट पैचर, इंफ्रारेड रिपेयर जैसी आधुनिक मरम्मत तकनीकें अपनाकर टिकाऊ, तेज़ और कम लागत वाले समाधान लागू किए गए।

                 जीपीएस -लॉक्ड बिटुमेन टैंकर प्रणाली और केंद्रीकृत गुणवत्ता प्रयोगशालाओं की स्थापना से सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित की गई।

                 विभागीय भवनों में सौर ऊर्जा अपनाकर 10 भवनों में 269 kW क्षमता के प्लांट लगाए गए और 689 भवनों में 6.5 MW क्षमता की स्थापना की प्रक्रिया प्रारंभ की गई।

                 सड़क किनारे वृक्षारोपण के लिए जुलाई–अगस्त 2025 में 2.57 लाख पौधे लगाए गए, जिससे हरित आवरण बढ़ा और कार्बन फुटप्रिंट कम हुआ।

                 ट्री ट्रांसप्लांटेशन तकनीक अपनाकर 1271 पेड़ों को सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया, जिसकी 85% जीवित रहने की दर विभाग की पर्यावरणीय संवेदनशीलता दर्शाती है।

                 सॉफ़्टवेयर आधारित औचक निरीक्षण प्रणाली से निर्माण की निगरानी में पारदर्शिता आई और रियल-टाइम प्रमाणन मॉडल स्थापित हुआ।

    आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना

                 प्रदेश में पहली बार राज्य वित्त पोषित एक्सप्रेसवे मॉडल के तहत उज्जैन–इंदौर, इंदौर–उज्जैन और भोपाल पूर्वी बायपास जैसे बड़े हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।

                 उज्जैन–सिंहस्थ 2028 के लिए 52 प्रमुख कार्यों पर 12 हज़ार करोड़ रुपये व्यय कर धार्मिक पर्यटन, आस्था स्थलों और शहरी कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जाएगा।

                 प्रदेश में 6-लेन एवं 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का व्यापक नेटवर्क विकसित कर औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों, लॉजिस्टिक ज़ोन्स और प्रमुख शहरों को तेज़ गति से जोड़ा जाएगा।

                 एनएचएआई के सहयोग से सतना–चित्रकूट, रीवा–सीधी, बैतूल–खंडवा–इंदौर, जबलपुर–झलमलवाड़ जैसे राष्ट्रीय महत्व के हाईवे का विस्तार किया जाएगा।

                 अगले तीन वर्षों में 600 नए "लोक कल्याण सरोवर" का निर्माण कर सड़क निर्माण से उत्पन्न मिट्टी का वैज्ञानिक उपयोग और जल-संरक्षण को एकीकृत मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा।

                 विभागीय भवनों में 100% सौर ऊर्जा अपनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ऊर्जा लागत में भारी कमी और हरित भवन अवधारणा को बढ़ावा मिलेगा।

                 सड़क सुरक्षा पर केंद्रित रोडसाइड एमेनिटीज़, ब्लैकस्पॉट सुधार और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।

                 जीआईएस आधारित रोड मास्टर प्लान को पूर्ण रूप से लागू कर भविष्य की सड़क परियोजनाओं का चयन वैज्ञानिक विश्लेषण, यात्रा दूरी, औद्योगिक आवश्यकताओं और यातायात घनत्व के आधार पर किया जाएगा।

                 निर्माण कार्यों की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और सख्त किया जाएगा, जिसमें मोबाइल लैब, त्वरित परीक्षण, AI आधारित रिपोर्टिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग शामिल होगी।

                 शहरी क्षेत्रों में नए आरओबी,फ्लाईओवर, बायपास और स्मार्ट कॉरिडोर विकसित कर शहरों के ट्रैफिक प्रेशर को कम करने और कम्यूटिंग समय घटाने का लक्ष्य निर्धारित है।

              

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दमोह के जनप्रतिनिधियों ने माना आभार

    खजुराहो मन्त्रि-परिषद की बैठक में दमोह को मिली अभूतपूर्व सौगातें

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दमोह के जनप्रतिनिधियों ने बुंदेलखंड सहित दमोह जिले को दी गई अभूतपूर्व सौगातों के लिए जनता की ओर से आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मंत्रालय में भेंट कर दमोह के जनप्रतिनिधि श्री श्याम शिवहरे ने अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि खजुराहो में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में सागर से दमोह के 76 किलोमीटर फोर लेन सड़क मार्ग के लिए 2059 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दमोह के तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ रुपए से अधिक राशि की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही दमोह मेडिकल कॉलेज के लिए नियमित और आउटसोर्स के पदों की भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

     

  • 101 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन

    मुख्यमंत्री सोनाखान में आयोजित शहीद वीर नारायण सिंह की शहादत दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में हुए शामिल

    रायपुर 
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि शहीद वीर नारायण सिंह का बलिदान छत्तीसगढ़ के आत्मगौरव, संघर्ष और स्वाभिमान का अमर प्रतीक है। वे आज सोनाखान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को नमन करने पहुंचे, जहां उन्होंने शहीद के वंशजों को सम्मानित किया और क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। मुख्यमंत्री ने सोनाखान में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना अंतर्गत बस सेवा प्रारंभ करने, नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन निर्माण हेतु 75 लाख रुपये, सियान सदन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये तथा मड़ई मेला स्थल में शौचालय निर्माण के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सोनाखान में इको-टूरिज्म विकास और सड़क निर्माण हेतु आवश्यक प्रावधान आगामी बजट में शामिल किए जाएंगे जिससे इस ऐतिहासिक स्थल को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार एवं सुविधाओं में वृद्धि होगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह अंग्रेजी शासन के अत्याचार के विरुद्ध गरीबों, किसानों और वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए खड़े हुए एक ऐसे वीर सपूत थे, जिन्होंने भीषण अकाल के समय गरीबों में अनाज बांटकर मानवता की ऐतिहासिक मिसाल पेश की। अंग्रेजी हुकूमत ने 10 दिसंबर 1857 को उन्हें फांसी दे दी, किंतु उनका बलिदान सदियों से संघर्ष, स्वाभिमान और अन्याय के प्रतिकार की प्रेरणा देता आया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ‘गारंटी’ के तहत अधिकांश वादों को पूरा किया है और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर काम कर रही है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि आज ही के दिन अंग्रेजी हुकूमत ने रायपुर के जयस्तंभ चौक में वीर नारायण सिंह को फांसी दी थी। वे अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहीद हुए और उनका बलिदान पीढ़ियों तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने राज्य सरकार की जनहितैषी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि विकास और कल्याण के लिए सरकार सतत् कार्यरत है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कुल 101.44 करोड़ रुपये की लागत के 119 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण के 10 हितग्राहियों को घरों की चाबियाँ सौंपी तथा ‘हम होंगे कामयाब’ कार्यक्रम के अंतर्गत 37 युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। आदिवासी समाज के पाँच प्रतिभावान छात्रों को भी मंच पर सम्मानित किया गया। समारोह में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े तथा शहीद वीर नारायण सिंह के वंशज श्री राजेंद्र दीवान सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय  द्वारा जिन कार्यों का लोकार्पण किया गया उनमें ग्राम ओड़ान, खरतोरा, सकरी (स) और दतान (ख) में 9.88 करोड़ रुपये की लागत से रेट्रोफिटिंग नल-जल प्रदाय योजनाएँ तथा गोरधा में एकल नल-जल प्रदाय योजना शामिल है। जिन कार्यों का भूमिपूजन किया गया उनमें अर्जुनी में 5.84 करोड़ रुपये की लागत से जोंक शीर्ष जीर्णोद्धार एवं तटबंध निर्माण, लवन शाखा नहर के तिल्दा, करदा लाटा एवं सिरियाडीह माइनर के 3.63 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण, मटिया नाला में 3.36 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉपडैम निर्माण, परसाडीह के खोरसीनाला में 2.99 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉपडैम निर्माण और लाहोद में 2.60 करोड़ रुपये की लागत से निरीक्षण कुटीर एवं आवासीय भवन निर्माण कार्य मुख्य रूप से शामिल हैं।

  • छत्तीसगढ़ में नई गाइडलाइन दरें लागू : ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दरों का वैज्ञानिक युक्तिकरण, निवेश और पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ शासन ने वर्ष 2025-26 के लिए भूमि की नई गाइडलाइन दरें जारी कर दी हैं। महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक के निर्देश पर केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा अनुमोदित ये दरें 20 नवंबर 2025 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गई हैं। वर्ष 2019-20 के बाद छह वर्ष के अंतराल पर किया गया यह पुनरीक्षण ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए व्यापक एवं जनहितैषी सुधार लेकर आया है।

    नई गाइडलाइन दरों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य को परिलक्षित करना तथा वर्षों से चली आ रही दरों की विसंगतियों को दूर करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य मार्ग पर औसतन 109 प्रतिशत और मुख्य मार्ग से अंदर औसतन 105 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि अचानक बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि विभिन्न ग्रामों के बीच दरों के वैज्ञानिक रेशनलाइजेशन का परिणाम है।

    बलरामपुर जिले में कई ऐसे गांव सामने आए हैं जहाँ पूर्व गाइडलाइन की दरें वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम थीं। उदाहरण स्वरूप वर्ष 2019-20 में ग्राम ताम्बेश्वरनगर का मुख्य मार्ग दर 6,28,677 रुपये प्रति हेक्टेयर था, जबकि समीपस्थ ग्राम आरागाही का दर 34,27,200 रुपये प्रति हेक्टेयर था। दोनों गांव एनएच-343 के समीप स्थित हैं। दरों के युक्तिकरण के बाद ताम्बेश्वरनगर का मुख्य मार्ग दर 51,52,000 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया गया, जिससे 719 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह, कई अन्य ग्रामों में भी दरों में 300 प्रतिशत से अधिक वृद्धि रिकार्ड की गई है।

    ग्राम लूरघुट्टा में मुख्य मार्ग पर 711 प्रतिशत एवं अंदर की ओर 413 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई है। इसी प्रकार ग्राम नावाडीह में मुख्य मार्ग पर 568 प्रतिशत तथा अंदर 326 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। दोनों ही गांव एनएच-343 से लगे हुए हैं और तातापानी जैसे पर्यटन एवं व्यवसायिक क्षेत्र के समीप स्थित होने के कारण निवेश की संभावनाओं को देखते हुए दरों का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक था।

    ग्राम भवानीपुर में भी मुख्य मार्ग पर 554 प्रतिशत तथा अंदर 411 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह गांव निवेश क्षेत्र में आता है तथा वर्ष 2019-20 में इसका बाजार मूल्य समीपस्थ ग्राम नवाडीह खूर्द की तुलना में काफी कम था। दोनों गांवों का रेशनलाइजेशन करने पर यह वृद्धि स्वाभाविक रूप से सामने आई है। इसी तरह, रामचन्द्रपुर, जो विकासखण्ड मुख्यालय है तथा स्टेट हाईवे से होकर गुजरता है, वहां भी मुख्य मार्ग पर बाजार मूल्य में 300 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। यहां सर्वे दर भी प्रति हेक्टेयर 42,45,000 रुपये होने के कारण मूल्य संशोधन आवश्यक था।

    शहरी क्षेत्रों में भी इस वर्ष गाइडलाइन दरों का व्यापक पुनरीक्षण किया गया है। बलरामपुर जिले के सभी नगरीय निकायों में मुख्य मार्ग तथा अंदरूनी क्षेत्रों में औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। बलरामपुर नगर में अधिकांश वार्ड NH-343 से लगे हुए हैं। वर्ष 2019-20 में कई वार्डों में एक ही मार्ग पर बाजार मूल्य में बड़ा अंतर पाया गया था, जो स्पष्ट रूप से विसंगतिपूर्ण था। इस विसंगति को दूर करने के लिए नगर पालिका एवं संबंधित हल्का पटवारियों द्वारा नए परिसीमन के आधार पर वार्डवार गाइडलाइन दरों का पुनर्निर्धारण किया गया।

    उदाहरणस्वरूप, वार्ड 01 (रविन्द्र प्रताप सिंह वार्ड) में प्रति वर्गमीटर दर 5740 रुपये था, जबकि इसी मुख्य मार्ग पर स्थित वार्ड 03 में यह दर मात्र 1830 रुपये प्रति वर्गमीटर था। नई गाइडलाइन में इन त्रुटियों को पूरी तरह दूर कर दोनों वार्डों की दरों को वास्तविक बाजार स्थिति के अनुरूप बनाया गया है।

    पिछले पाँच वर्षों में बढ़ती जनसंख्या, आवासीय भूखंडों की बढ़ती मांग, व्यवसायिक गतिविधियों का विस्तार और शहरीकरण के तेज़ी से बढ़ते असर को ध्यान में रखते हुए बलरामपुर जिले के नगरीय क्षेत्रों में दरों के पुनरीक्षण की आवश्यकता महसूस की गई। इसके लिए नगर पालिका के कर्मचारियों, पटवारियों और गूगल मैप के आधार पर वार्डवार नई कण्डिकाएँ तैयार की गईं।

    नगरीय क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेषकर बलरामपुर नगर में बढ़ती आबादी, नए व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार के कारण बाजार मूल्य में स्वाभाविक बढ़ोतरी हुई, जो अब गाइडलाइन दरों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नई गाइडलाइन दरें छत्तीसगढ़ के भूमि बाजार को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और निवेश-अनुकूल बनाएंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को भूमि अधिग्रहण के समय सही मुआवजा मिलेगा, वहीं शहरी क्षेत्रों में सुव्यवस्थित विकास को गति मिलेगी। भूमि मूल्य का यह वैज्ञानिक रेशनलाइजेशन राज्य के समग्र आर्थिक विकास को एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।

  • DSP पर प्रेम जाल का आरोप: कारोबारी से वसूले करोड़ों, केस दर्ज होते ही पुलिस सक्रिय

    रायपुर
    रायपुर में पुलिस विभाग की साख पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक कारोबारी दीपक टंडन ने महिला DSP कल्पना वर्मा पर रिश्वत लेने, ब्लैकमेलिंग करने और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का दावा है कि डीएसपी ने प्यार और शादी का झांसा देकर उससे करोड़ों रुपये, महंगी गाड़ियां और कीमती गहने ऐंठ लिए। 
     
    कारोबार‌री का आरोप- ‘शादी का झांसा देकर करोड़ों ले गईं’
    दीपक टंडन के मुताबिक उनकी मुलाकात साल 2021 में DSP से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच नज़दीकियां बढ़ीं। आरोप हैं कि डीएसपी ने लगातार पैसों की मांग की, कारोबारी ने दो करोड़ रुपये से ज्यादा रकम दी, 12 लाख की हीरे की अंगूठी, 5 लाख की सोने की चेन व टॉप्स, 1 लाख का ब्रेसलेट भी गिफ्ट किया। एक इनोवा क्रिस्टा कार भी डीएसपी को दी। DSP ने अपने भाई के नाम पर कारोबारी के रायपुर VIP रोड स्थित होटल की रजिस्ट्री करवा ली और बाद में लगभग 30 लाख खर्च कर उसे अपने नाम करवा लिया। कारोबारी का कहना है कि जब उसने यह सब देने से इंकार किया, तो DSP ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
     
    पुलिस को दिए सबूत
    पीड़ित दीपक टंडन का दावा है कि उन्होंने खम्हारडीह थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए व्हाट्सऐप चैट, CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य पुलिस को सौंपे हैं। वह कहते हैं कि जब उन्होंने शिकायत वापस नहीं ली, तो डीएसपी ने उन्हें फर्जी मामलों में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी।
     
    DSP का जवाब- यह बदनाम करने की साज़िश
    मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए DSP कल्पना वर्मा ने सभी आरोपों को झूठा और निराधार बताया। उनका कहना है कि यह पूरी कहानी उन्हें बदनाम करने की साज़िश है, वह किसी भी तरह की जांच का सामना करने को तैयार हैं।
     
    पुलिस जांच शुरू
    उच्च पुलिस अधिकारियों ने मामले का संज्ञान ले लिया है और जांच प्रारंभ कर दी है। मामले की सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • बस्तर और सरगुजा में परिवहन क्रांति, ग्रामीण बस योजना का विस्तार

    रायपुर 
    छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा अंचल के सुदूर वनांचलों में ग्रामीण परिवहन को नई दिशा देने वाली मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने आज एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से योजना के द्वितीय चरण का औपचारिक शुभारंभ किया तथा वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर बसों को रवाना किया। दूसरे चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग के 10 जिलों के 23 मार्गों पर 24 नई बसों का संचालन प्रारंभ हुआ है, जिससे 180 गांव सीधे बस सुविधा से जुड़ गए हैं।

    कार्यक्रम के द्वितीय चरण में शामिल अनेक ग्रामीण उसी बस में सवार होकर पहुंचे, जिसे योजना के प्रथम चरण में प्रारंभ किया गया था। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से आत्मीय चर्चा करते हुए बताया कि अब दूरस्थ इलाकों से ब्लॉक मुख्यालयों तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी सहज और सुगम हो गया है। 

    सुकमा–दोरनापाल–कोंटा मार्ग से पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि वे लगभग 110 किलोमीटर की यात्रा बस से कर कार्यक्रम तक पहुंचे, जबकि पूर्व में यह यात्रा बेहद कठिन और समयसाध्य थी।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी गांव विकास की मुख्यधारा से अलग न रहे। यह योजना न केवल परिवहन सुविधा बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीणों को शहरों और सेवा संस्थानों से जोड़ते हुए सामाजिक एवं आर्थिक समानता को भी मजबूती प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में यह योजना एक मील का पत्थर सिद्ध हो रही है, जिससे लोगों को सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक यात्रा का अवसर मिल रहा है। 

    मुख्यमंत्री श्री साय ने योजना से लाभान्वित होने वाले 180 गांवों के सभी ग्रामीणों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बेहतर यातायात सुविधाएँ अब उनके जीवन को पहले से अधिक सुगम बनाएंगी और तरक्की के नए मार्ग खोलेंगी।

    परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप ने बताया कि जिन दुर्गम और वनांचल क्षेत्रों तक कभी यातायात की सुविधा नहीं पहुंची थी, वहाँ भी अब बस सेवाएँ प्रारंभ हो रही हैं। यह योजना विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा के जनजातीय बहुल इलाकों के लिए एक वरदान के रूप में उभर रही है।

    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के प्रथम चरण की शुरुआत 04 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह द्वारा की गई थी, जिसके अंतर्गत 250 गांवों को बस सेवाओं से जोड़ा गया था। अब द्वितीय चरण की शुरुआत के साथ इस संख्या में और वृद्धि हुई है तथा 180 गांव और जुड़ गए हैं।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव सहित मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस. प्रकाश सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • छत्तीसगढ़ के युवाओं को मिला वैश्विक स्टेज: टेकस्टार्स स्टार्टअप वीकेंड से स्टार्टअप संस्कृति को नई रफ्तार

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ में युवाओं के नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत आधार देने की दिशा में धमतरी जिले ने ऐतिहासिक पहल की है। विश्वस्तरीय स्टार्टअप एक्सीलरेटर टेकस्टार्स के सहयोग से जिला प्रशासन धमतरी तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा 28 से 30 नवंबर 2025 तक तीन दिवसीय टेकस्टार्स स्टार्टअप वीकेंड धमतरी का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन पहली बार प्रदेश के किसी गैर-महानगरीय जिले में आयोजित हुआ, जिसने धमतरी को उभरते स्टार्टअप हब के रूप में नई पहचान दिलाई है। स्टार्टअप वीकेंड में 100 से अधिक युवा प्रतिभागियों, 50 संभावित स्टार्टअप टीमों, 20 अनुभवी मेंटर्स और 10 से अधिक निवेशकों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों को 54 घंटों तक सतत कार्य करते हुए अपने विचारों को निवेश योग्य मॉडल में बदलने, बिजनेस मॉडल बनाने, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मार्केट एनालिसिस, पिच डेक निर्माण और स्केलिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। मेंटर्स ने टेक्नोलॉजी, फूड प्रोसेसिंग, एग्री-इनोवेशन, हेल्थकेयर, ई-कॉमर्स, पर्यटन, डिजिटलीकरण और एंटरटेनमेंट सेक्टर के स्टार्टअप आइडियाज पर विशेष मार्गदर्शन दिया। कई अभिनव विचार निवेशकों की विशेष रुचि का केंद्र बने।

    जिला प्रशासन की पहल—धमतरी को स्टार्टअप मैप पर स्थापित करने का लक्ष्य
    जिला कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने आयोजन को धमतरी के नवाचार तंत्र के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि हमारा  उद्देश्य है कि धमतरी के युवाओं को बड़े शहरों जैसी सभी स्टार्टअप सुविधाएँ और अवसर यहीं मिलें। स्टार्टअप वीकेंड ने सिद्ध किया कि यहां के युवा न केवल रचनात्मक हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखते हैं। यह आयोजन आगे भी प्रत्येक वर्ष जारी रहेगा, जिससे जिले में उद्यमिता का मजबूत इकोसिस्टम स्थापित होगा  एआईसी महिंद्रा के सीईओ और कार्यक्रम फैसिलिटेटर श्री इस्माइल अकबानी ने इसे छत्तीसगढ़ में अब तक का सबसे बड़ा और सुव्यवस्थित स्टार्टअप वीकेंड बताया।

    ग्लोबल एक्सीलरेटर टेकस्टार्स से स्थानीय प्रतिभाओं को लाभ
    टेकस्टार्स के बारे में जानकारी देते हुए विकासगढ़ के संस्थापक श्री मेराज मीर ने बताया कि 2006 से विश्वभर में स्टार्टअप्स को गति देने वाले इस प्लेटफॉर्म की विशेषज्ञता अब सीधे धमतरी के युवाओं तक पहुंच रही है, जिससे उन्हें व्यापक नेटवर्किंग और निवेश अवसर मिलेंगे। जिला प्रशासन ने बताया कि   स्टार्टअप संस्कृति को संस्थागत रूप देने के लिए धमतरी में आगे भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से होते रहेंगे। इससे युवाओं को निरंतर मेंटरशिप, फंडिंग एक्सपोज़र और बिजनेस नेटवर्क प्राप्त होंगे।