• मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बयान: रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

    रायपुर : रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित भविष्य गढ़ने में सहायक होगा – मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

    छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेश के 6 विश्वविद्यालयों के साथ किया एमओयू

    देश का पहला पाठ्यक्रम:छात्रों को मिलेगी बाल अधिकार एवं संरक्षण की  जानकारी

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के मध्य “रक्षक पाठ्यक्रम” के लिए एमओयू संपन्न हुआ। बाल अधिकार एवं संरक्षण पर आधारित यह अनूठा पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है। 

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे भूलवश या भ्रमित होकर गलत दिशा में चले जाते हैं क्योंकि वे अबोध होते हैं। ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा कर लिया है। किसानों के बकाया बोनस, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना और सबके लिए आवास जैसे महत्वपूर्ण संकल्पों को साकार किया गया है। उन्होंने कहा कि 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ सुशासन के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है और इसी उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना भी की गई है।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने रक्षक पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड समय में तैयार करने और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।

    महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास, और संवेदनशील मामलों का समाधान—ये सभी अत्यंत चुनौतीपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि “यह पाठ्यक्रम संवेदनशील, सजग और सेवा-भावयुक्त युवा तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।” उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर का नवाचार बताते हुए कहा कि भविष्य में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना जाएगा।

    उच्च शिक्षा मंत्री  टंक राम वर्मा ने पाठ्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आयोग और सभी छह विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम लागू करने हेतु बधाई दी।

    यह एक वर्षीय स्नातकोत्तर “पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन” 

    पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर और  शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग में प्रारम्भ होगा।

    क्या है रक्षक पाठ्यक्रम

    प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था, जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। इस आवश्यकता को देखते हुए आयोग द्वारा “रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम” को विकसित किया गया है। इस पाठ्यक्रम से युवाओं को सैद्धांतिक एवं विधिक ज्ञान, विभागीय योजनाओं, संस्थाओं और प्रायोगिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ, बाल संरक्षण इकाइयों आदि के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध होगी।संवेदनशीलता, जागरूकता और बाल-अधिकारों की आत्मिक समझ विकसित करने वाला यह पाठ्यक्रम युवाओं को इस क्षेत्र में कुशल, समर्पित और प्रभावी मानव संसाधन के रूप में तैयार करेगा। आयोग द्वारा पाठ्यक्रम के संचालन, प्रशिक्षण, परामर्श और मार्गदर्शन की संपूर्ण सुविधा विश्वविद्यालयों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

    कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, ,पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से कुलसचिव प्रो शैलेंद्र पटेल,प्रो ए के वास्तव,संत गहिरा गुरु विश्विद्यालय सरगुजा कुलपति  प्रो राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव  शारदा प्रसाद त्रिपाठी, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एवं रायपुर संभाग आयुक्त  महादेव कावरे, कुलसचिव  सुनील कुमार शर्मा,आंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. टी.रामाराव कुलसचिव डॉ. रूपाली चौधरी, एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. सुरेश ध्यानी, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई दुर्ग चांसलर डॉ.आई.पी. मिश्रा, कुलपति डॉ ए. के झा एवं डॉ जया मिश्रा, आयोग के सचिव प्रतीक खरे सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जयस्तंभ चौक में किया शहीद वीर नारायण सिंह के त्याग और संघर्ष का स्मरण

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जननायक अमर शहीद वीर नारायण सिंह की पुण्यतिथि पर आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित जयस्तंभ चौक पहुँचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह का जीवन त्याग, साहस और न्याय की अनुपम मिसाल है। अंग्रेजी शासन के अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध शहीद वीर नारायण सिंह ने जिस अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया, वह छत्तीसगढ़ की गौरवमयी विरासत का स्वर्णिम अध्याय है। मातृभूमि की रक्षा और समाज के वंचित वर्गों के प्रति उनकी निष्ठा हमारे लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सोनाखान के ज़मींदार परिवार में जन्म लेने के बाद भी शहीद वीर नारायण सिंह का हृदय सदैव आदिवासियों, किसानों और गरीब परिवारों के दुःख-संघर्ष से जुड़ा रहा। वर्ष 1856 के विकट अकाल में जब आमजन भूख से व्याकुल थे, तब उन्होंने मानवता को सर्वोपरि मानते हुए अनाज गोदाम का अनाज ज़रूरतमंदों में बाँटकर करुणा, त्याग और साहस का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कदम केवल विद्रोह नहीं था, बल्कि सामाजिक अन्याय, शोषण और असमानताओं के विरुद्ध एक ऐतिहासिक उद्घोष था।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ की अस्मिता, स्वाभिमान और जनप्रतिरोध की जीवंत प्रेरणा हैं। गरीबों, किसानों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका जीवन-संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को सदैव न्याय, मानवता और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीद वीर नारायण सिंह के आदर्शों और उनके सपनों के अनुरूप छत्तीसगढ़ के विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है।

    इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

  • मध्य प्रदेश पुलिस में नया आदेश: वर्दी में सोशल मीडिया पर ‘हीरो’ बनने का दौर खत्म, DGP की SOP लागू

    भोपाल
    मध्य प्रदेश में अब पुलिसकर्मियों का वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर रील्स, वीडियो या फोटो डालकर ‘हीरो’ बनने का दौर खत्म हो गया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) ने सख्त रुख अपनाते हुए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी कर दी है, जिसके बाद वर्दी में कोई भी निजी कंटेंट सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पूरी तरह बैन कर दिया गया है। नई SOP के अनुसार, पुलिस कर्मी फेसबुक, इंस्टाग्राम, X (ट्विटर), यूट्यूब या व्हाट्सएप पर वर्दी में रहते हुए केवल आधिकारिक कामों से जुड़े पोस्ट ही कर सकेंगे। निजी फोटोशूट, डांस रील्स, ड्यूटी के वीडियो, संवेदनशील जगहों की तस्वीरें या ऐसा कोई भी कंटेंट जो पुलिस विभाग की छवि को चोट पहुंचाए—अब सख्त रूप से प्रतिबंधित है।

    नई SOP के अहम नियम

    वर्दी में कोई भी फोटो, वीडियो, रील, स्टोरी पोस्ट करना पूरी तरह प्रतिबंधित।

    ड्यूटी से जुड़ी संवेदनशील जानकारी/फोटो शेयर करना वर्जित।

    विभाग की छवि, अनुशासन और जनता का विश्वास बनाए रखने पर जोर।

    केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम और संबंधित पुलिस अधिनियमों का पालन अनिवार्य।

    नियम तोड़े तो होगी कड़ी कार्रवाई

    विभागीय जांच

    निलंबन

    वेतन वृद्धि रोकना

    पदावनति

    सेवा से बर्खास्तगी तक

    पुलिस मुख्यालय का कहना है कि हाल के समय में कुछ पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर वर्दी का दुरुपयोग कर अनचाही चर्चा बटोर रहे थे। इससे विभाग की गरिमा प्रभावित हो रही थी। नई SOP का उद्देश्य पुलिस की छवि को मजबूत करना और बल में अनुशासन कायम रखना है। अब देखने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया पर ‘हीरो’ बनने के शौकीन पुलिसकर्मी इस नए नियम का कितनी ईमानदारी से पालन करते हैं।

  • सिविल लाइन में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक, नक्सल उन्मूलन और प्रशासनिक सुधारों को मिली मंजूरी

    रायपुर 
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक में नक्सल उन्मूलन, प्रशासनिक सुधार और बजटीय प्रबंधन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पत्रकारों को कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। बैठक में नक्सल उन्मूलन, प्रशासनिक सुधार और बजटीय प्रबंधन से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

    कैबिनेट ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरणों की समीक्षा और परीक्षण के बाद उन्हें न्यायालय से वापस लेने की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी। इसके लिए मंत्रिपरिषद उप समिति का गठन किया जाएगा, जो प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर कैबिनेट के समक्ष अनुशंसा प्रस्तुत करेगी। यह प्रक्रिया छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ति राहत पुनर्वास नीति-2025 के अनुरूप होगी, जिसमें आत्मसमर्पित नक्सलियों के अच्छे आचरण और उनके योगदान को देखते हुए उनके विरुद्ध दर्ज प्रकरणों के निराकरण का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, जिला स्तरीय समिति भी प्रकरणों की रिपोटर् तैयार कर पुलिस मुख्यालय को भेजेगी। विधि विभाग की राय के बाद मामलों को मंजूरी के लिए कैबिनेट उप समिति के समक्ष भेजा जाएगा। केंद्र सरकार से जुड़े मामलों में आवश्यक अनुमति ली जाएगी।

    कैबिनेट ने 11 विभागों के 14 अधिनियमों में संशोधन के लिए जन विश्वास विधेयक-2025 (द्वितीय संस्करण) के प्रारूप को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य पुराने और जटिल दंडात्मक प्रावधानों को सरल बनाना, छोटे उल्लंघनों पर प्रशासकीय दंड का प्रावधान लाना, न्यायालयों पर भार कम करनाऔर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देना है। यह निर्णय सुशासन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जो जन विश्वास विधेयक का दूसरा संस्करण ला रहा है। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के प्रथम अनुपूरक अनुमान को विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2025 को भी कैबिनेट से मंजूरी मिल गई।  

  • आम जनता के स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय अभियान की घोषणा के साथ रायपुर जन स्वास्थ्य सम्मेलन संपन्न

    रायपुर
    पूरे भारत से 19 से ज़्यादा राज्यों के लगभग 350 प्रमुख स्वास्थ्य नेतृत्वकर्ता, एक्टिविस्ट्स, जनांदोलनों और समुदाय के प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ रायपुर, छत्तीसगढ़ में दो दिवसीय राष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मेलन संपन्न हुआ। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दिनोंदिन गंभीर होती जा रही कठिन स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के साथ-साथ आम जनता के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था में नीतिगत बदलावों की मांग और जमीनी स्तर पर जन स्वास्थ्य आंदोलन को रणनीतिक रूप से मजबूत करना था।

    सम्मेलन की शुरुआत में स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की मौजूदा प्राथमिकताओं और निजीकरण के बढ़ते खतरे की तरफ ध्यान दिलाते हुए जन स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए ठोस पहलकदमी पर जोर दिया गया। हाल ही में नीति आयोग के एक सर्कुलर को लेकर खास चिंता जताई गई, जिसमें जिला अस्पतालों के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को बढ़ावा दिया गया है। प्रतिभागियों ने चिंता जताई कि इससे देश की सबसे कमजोर और जरूरतमंद आबादी के लिए स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक पहुँच मुश्किल हो जाएगी।
    मुख्य वक्ता कम्युनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. रितु प्रिया ने नज़रिए में बड़े बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा, "बहुत लंबे समय से, स्वास्थ्य के बारे में हमारी समझ सिर्फ़ डॉक्टरों और अस्पतालों तक ही सीमित रही है।" "हमें समुदाय के तरीकों, पारंपरिक ज्ञान और हमारी आधी आबादी की सेवा करने वाले इनफॉर्मल डॉक्टरों की ताकत को वैलिडेट और इंटीग्रेट करना होगा। एक सच्चा स्वस्थ समाज ज़मीन से बनता है, ऊपर से नीचे थोपा नहीं जाता।" उन्होंने यह भी कहा कि दशकों से, और खासकर 1990 के दशक से, नवउदारवादी नीतियों ने सुनियोजित तरीके से पब्लिक हेल्थ सिस्टम (जन स्वास्थ्य प्रणाली) को कमज़ोर किया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि मौजूदा सरकार चिकित्सा शिक्षा और सेवा, उपकरणों एवं दवाओं के निजीकरण का व्यापक एजेंडा बना रही है, जिससे हेल्थकेयर असल में अधिकार के बजाय एक बाजार बन गया है।

    ग्रीन नोबेल अवार्डी श्री प्रफुल्ल सामंत्रे ने कहा, "हमारी सरकार का मौजूदा रास्ता सिर्फ़ जनविरोधी नीतियों का निर्माण नहीं है; यह उस संवैधानिक ताने-बाने पर हमला है जो बराबरी और समावेशी मूल्यों का वादा करता है। वे सुनियोजित तरीके से निजी लाभों के लिए जन स्वास्थ्य का व्यापार कर रहे हैं, और आयुष्मान कार्ड जैसी पॉलिसी मरीज़ों से ज़्यादा कॉर्पोरेट घरानों को  फ़ायदा पहुंचाने में काम आ रही है।"

    सम्मेलन के दौरान उठाए गए मुख्य मुद्दों में स्वास्थ्य के लिए सरकारी आवंटन जीडीपी के 1.5% से भी कम है (जो तय न्यूनतम 2.5% से बहुत कम है), विफल स्वास्थ्य बीमा (इंश्योरेंस) मॉडल, पर्यावरणीय और जलवायु परिवर्तन के कारण स्वास्थ्य पर बढ़ते कुप्रभाव, स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण, वंचित समुदायों की स्वास्थ्य सेवाओं की भारी अनदेखी, महिला हिंसा और उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आदि प्रमुख थे। 

    प्रमुख घोषणाएं और निर्णय: –
    1. व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक पखवाड़ा अप्रैल, 2026 में मनाया जाएगा।
    2. व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य सम्मेलन जयपुर में आयोजित किया जाएगा।
    3. स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ और सार्वजनिक स्वास्थ्य की मजबूती के लिए राष्ट्रीय अभियान।
    4. जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए स्वास्थ्य के विभिन्न मुद्दों पर आधारित एक सात दिवसीय कोर्स की शुरूआत मार्च, 2026 तक करना।
    5. देश के 100 जिलों में मजबूत स्वास्थ्य कार्यकर्ता तैयार करना
    6. महिला हिंसा और महिला स्वास्थ्य तथा वंचित समुदायों के स्वास्थ्य के मुद्दों पर पृथक समूह का निर्माण।

    दो दिवसीय सम्मेलन के अंत में सभी प्रतिनिधियों के सामूहिक प्रयासों से तैयार जन स्वास्थ्य घोषणा पत्र जारी किया गया जिसमें जन स्वास्थ्य के मुद्दों का समर्थन करते हुए  जमीनी और राष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक प्रयास करने और सक्रिय गोलबंदी का  संकल्प लिया गया।  इस सम्मेलन में जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन कर राष्ट्रीय और राज्य कन्वेनर भी बनाए गए और एक राष्ट्रीय सलाहकार समूह का भी गठन किया गया। 

    सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्थाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण और दवाओं के मुद्दों पर आधारित पुस्तकों का प्रकाशन भी किया गया। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में विषय विशेषज्ञों अमितावा गृह, ऋतु प्रिया, डॉ. सुनीलम, प्रफुल्ल सामंतरा, कैलाश मीना, राजकुमार सिन्हा एवं समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ ही पीड़ित और प्रभावित दिनेश रायसिंग, चुन्नी जी आदि ने विभिन्न सत्रों में अपने-अपने अनुभव साझा किए।
     
    अभियान  के बारे में :
    जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, जमीनी कार्यकर्ताओं, जन आंदोलनों और नागरिकों का एक राष्ट्रीय समन्वय है जो संविधान द्वारा गारंटीकृत सभी भारतीयों के लिए समान और सुलभ स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है। यह अभियान एक मजबूत, सरकारी वित्त पोषित (पब्लिक फंडेड) देखभाल व्यवस्था की वकालत करता है और ज़रूरी सेवाओं के निजीकरण का विरोध करता है।
     

  • आस्था महिला बैंक द्वारा आस्था कनेक्ट श्रृंखला का शुभारंभ

    भोपाल
    आस्था महिला नागरिक सहकारी बैंक मर्यादित, भोपाल द्वारा महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास को समर्पित नई विशेष श्रृंखला “आस्था कनेक्ट” का शुभारंभ किया गया। इस श्रृंखला का उद्घाटन माननीय श्रीमती किरन अग्रवाल, अध्यक्ष, सेज ग्रुप एवं वन बंधु परिषद, भोपाल चैप्टर महिला समिति की अध्यक्ष, के करकमलों द्वारा कि या गया। इस अवसर पर वन बंधु परिषद के कार्यकारिणी सदस्य एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    बैंक की संस्थापक श्रीमती आरती बिसारिया ने बताया कि वर्ष 1997 से सक्रिय आस्था महिला बैंक, महिलाओं को वित्तीय सेवाओं, उद्यमिता प्रोत्साहन तथा शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्यरत है। “आस्था कनेक्ट” श्रृंखला इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए समुदाय को जागरूकता, संवाद और सहयोग के एक नए मंच से जोड़ने का प्रयास है।

    कार्यक्रम का आयोजन 9 दिसंबर को आस्था महिला बैंक परिसर, भोपाल में किया गया, जिसमें महिला उद्यमी एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि सम्मिलित हुए।
    श्रीमती बिसारिया ने कहा कि आस्था महिला बैंक को विश्वास है कि “आस्था कनेक्ट” समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

     

  • रजिस्ट्री के नए नियम सारंगढ़ बिलाईगढ़ में 08 दिसंबर से लागू, सरल हुई मूल्यांकन प्रक्रिया

    सारंगढ़ बिलाईगढ़ : रजिस्ट्री के नई गाइडलाइन दर 08 दिसंबर से लागू

    इंक्रीमेंटल प्रणाली समाप्त, मूल्यांकन प्रक्रिया हुई सरल

    सारंगढ़ बिलाईगढ़

    राज्य में 20 नवंबर 2025 से लागू नई गाइडलाइन दरों के संबंध में प्राप्त सुझावों, ज्ञापनों और आपत्तियों पर विचार करने हेतु मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश पर केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक 07 दिसंबर 2025 को आयोजित की गई। बैठक में पंजीयन एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और जनहितैषी बनाने के उद्देश्य से कई व्यापक निर्णय लिए गए, जो 08 दिसंबर से तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

    बैठक में नगरीय क्षेत्रों में भूमि मूल्यांकन के लिए लागू इंक्रीमेंटल आधार पर गणना की व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया गया। अब पुनः पूर्व प्रचलित स्लैब आधारित प्रणाली ही लागू रहेगी, जिसके अनुसार नगर निगम में 50 डेसिमल, नगर पालिका में 37.5 डेसिमल और नगर पंचायत में 25 डेसिमल तक स्लैब दर से मूल्यांकन किया जाएगा। इससे नगरीय क्षेत्रों में मूल्यांकन की जटिलता कम होगी और नागरिकों को सीधी राहत मिलेगी।

    बहुमंजिला भवनों में फ्लैट, दुकान अथवा कार्यालय के अंतरण के समय अब मूल्यांकन सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय बिल्ट-अप एरिया के आधार पर होगा। यह प्रावधान लंबे समय से मांग में था, जिससे वर्टिकल डेवलपमेंट को गति मिलेगी और शहरी भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। साथ ही बहुमंजिला एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट और प्रथम तल पर 10 प्रतिशत तथा द्वितीय तल एवं उससे ऊपर के तल पर 20 प्रतिशत की छूट के साथ मूल्यांकन करने का निर्णय लिया गया है, जिससे मध्यम वर्ग को किफायती दरों पर आवासीय एवं व्यावसायिक इकाइयाँ उपलब्ध होंगी।

    कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों में मुख्य मार्ग से 20 मीटर दूरी पर स्थित संपत्तियों के लिए भूखंड की गाइडलाइन दर में 25 प्रतिशत की कमी करने का भी निर्णय लिया गया है। यह दूरी कॉम्प्लेक्स के मुख्य सड़क की ओर स्थित निर्मित हिस्से से मापी जाएगी, जिससे वास्तविक बाज़ार स्थिति के अनुरूप मूल्यांकन संभव होगा।

    केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने यह भी निर्देश दिए कि हाल ही में बढ़ाई गई दरों पर प्राप्त सभी ज्ञापनों और सुझावों का परीक्षण कर जिला मूल्यांकन समितियाँ 31 दिसंबर 2025 तक अपने संशोधित प्रस्ताव भेजें। इन प्रस्तावों के आधार पर राज्य में आगे की गाइडलाइन दरों की संरचना तैयार की जाएगी।

    इस बैठक के साथ ही राज्य सरकार द्वारा गाइडलाइन दरों में किए गए कई जनहितैषी सुधार भी लागू हो चुके हैं। नजूल, आबादी और परिवर्तित भूमि पर पहले वर्गमीटर दर लागू होती थी, जिसे अब कृषि भूमि की तरह हेक्टेयर दर पर लागू किया जाएगा। इससे भूमि मूल्य में भारी कमी आई है और नागरिकों को वास्तविक राहत मिली है। उदाहरणस्वरूप रायपुर के वार्ड 28 में एक एकड़ भूमि का मूल्य पहले 78 करोड़ रुपये आंका जाता था, जो अब नए प्रावधानों के अनुसार केवल 2.4 करोड़ रुपये होगा।

    ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। परिवर्तित भूमि पर सिंचित भूमि के ढाई गुना मूल्य जोड़ने का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। दो फसली भूमि पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत मूल्य जोड़ने, ट्यूबवेल, कुएं, वाणिज्यिक फसलों तथा वृक्षों के मूल्य को भूमि मूल्य में जोड़ने की व्यवस्था भी हटा दी गई है। कांकेर में दर्ज एक उदाहरण में 600 वृक्षों के 78 लाख रुपये मूल्य को अब रजिस्ट्री में शामिल नहीं किया गया, जिससे खरीदार को लगभग 8.58 लाख रुपये की सीधी राहत मिली और पेड़ों की कटाई रोकने में भी यह कदम सहायक सिद्ध होगा।

    शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में अब 25 से 37.5 डिसमिल तक की कृषि भूमि का मूल्यांकन वर्गमीटर के बजाय हेक्टेयर दर से किया जाएगा। बरौदा (रायपुर) में 37.5 डिसमिल भूमि का मूल्य पहले 26.75 लाख रुपये था, जो अब नए प्रावधानों के अनुसार मात्र 6.30 लाख रुपये होगा। तालाब अथवा मछली टैंक वाली भूमि पर 1.5 गुना दर लगाने का प्रावधान तथा बाउंड्री वॉल और प्लिंथ लेवल के मूल्य जोड़ने की व्यवस्था भी हटा दी गई है।

    नगरीय निकाय क्षेत्रों में पहले निर्मित संपत्तियों के लिए 21 प्रकार की दरें लागू थीं, जिन्हें घटाकर अब केवल दो प्रकार की दरें कर दिया गया है, जिससे मकानों का मूल्यांकन करना अब आम नागरिकों के लिए अत्यंत आसान हो गया है। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के इन निर्णयों एवं व्यापक सुधारों से राज्य में पंजीयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और नागरिकों के हितों के अनुरूप बन गई है।

     

     

  • किशोर वाधवानी पर 2002 करोड़ टैक्स डिमांड, सेंट्रल जीएसटी की बड़ी कार्रवाई, 1784 करोड़ सेस और 76.67 करोड़ एक्साइज ड्यूटी

    इंदौर 

    गुटखा कारोबारी किशोर वाधवानी और उससे जुड़े विभिन्न प्रतिष्ठानों पर सेंट्रल जीएसटी एंड एक्साइज कमिश्नरेट इंदौर ने बड़ी कार्रवाई की। विभाग ने इन्हें 2002 करोड़ रुपए की टैक्स डिमांड वाला नोटिस जारी किया है। माना जा रहा है कि यह प्रदेश में अब तक जारी की गई सबसे बड़ी टैक्स डिमांड है। यह कार्रवाई साल 2020 में तलाशी और जांच कार्रवाई के आधार पर की गई है।

    नोटिस वाधवानी तक सीमित नहीं है, टैक्स डिमांड एलोरा टोबेको, दबंग दुनिया पब्लिकेशन, श्याम खेमानी, अनमोल मिश्रा, धर्मेन्द्र पीठादिया, राजू गर्ग, शिमला इंडस्ट्रीज प्रालि, देवेंद्र द्विवेदी, विनायका फिल्टर्ड प्रालि और विनोद बिदासरिया सहित कई अन्य संस्थानों और व्यक्तियों को भी जारी किया गया है। इसके अलावा टीएएन इंटरप्राइजेज, एसआर ट्रेडिंग, निश्का इंटरप्राइजेज, इंक फ्रूट, एमएन इंटरप्राइजेस, रानी प्रेस प्रालि, जौहर हसन, एनजी ग्राफिक्स एंड क्लॉक मेकर्स के नाम भी इसमें शामिल हैं।

    टैक्स डिमांड नोटिस जारी होने में देरी का मुख्य कारण वाधवानी समूह द्वारा की गई लंबी कानूनी लड़ाई रही। मामला पहले इंदौरहाईकोर्ट में पहुंचा, जहां अदालत ने समूह की याचिका को न केवल निराधार बताया, बल्कि उन पर दो लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि याचिका का उद्देश्य सिर्फ जांच और टैक्स प्रक्रिया को लटकाने का प्रयास है। इसके बाद समूह ने इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर किया। 

    2 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रशासन को टैक्स डिमांड नोटिस जारी करने का रास्ता साफ हो गया और लंबे समय से लंबित यह कार्रवाई अब पूरी हो गई है। अब संबंधित फर्मों और व्यक्तियों को तय समय सीमा में विभाग को अपना जवाब देना होगा। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर विभाग आगे वसूली की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

  • बस्तर और सरगुजा में परिवहन क्रांति, ग्रामीण बस योजना का विस्तार

    रायपुर : मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का दूसरा चरण शुरू, 180 नए गांव जुड़े बस सुविधा से

    ग्रामीण परिवहन को नई रफ्तार: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने किया योजना के द्वितीय चरण का शुभारंभ

    बस्तर और सरगुजा में परिवहन क्रांति, ग्रामीण बस योजना का विस्तार

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा अंचल के सुदूर वनांचलों में ग्रामीण परिवहन को नई दिशा देने वाली मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने आज एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की। 

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से योजना के द्वितीय चरण का औपचारिक शुभारंभ किया तथा वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर बसों को रवाना किया।

    दूसरे चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग के 10 जिलों के 23 मार्गों पर 24 नई बसों का संचालन प्रारंभ हुआ है, जिससे 180 गांव सीधे बस सुविधा से जुड़ गए हैं।

    कार्यक्रम के द्वितीय चरण में शामिल अनेक ग्रामीण उसी बस में सवार होकर पहुंचे, जिसे योजना के प्रथम चरण में प्रारंभ किया गया था। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से आत्मीय चर्चा करते हुए बताया कि अब दूरस्थ इलाकों से ब्लॉक मुख्यालयों तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी सहज और सुगम हो गया है। 

    सुकमा–दोरनापाल–कोंटा मार्ग से पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि वे लगभग 110 किलोमीटर की यात्रा बस से कर कार्यक्रम तक पहुंचे, जबकि पूर्व में यह यात्रा बेहद कठिन और समयसाध्य थी।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी गांव विकास की मुख्यधारा से अलग न रहे। यह योजना न केवल परिवहन सुविधा बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीणों को शहरों और सेवा संस्थानों से जोड़ते हुए सामाजिक एवं आर्थिक समानता को भी मजबूती प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में यह योजना एक मील का पत्थर सिद्ध हो रही है, जिससे लोगों को सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक यात्रा का अवसर मिल रहा है। 

    मुख्यमंत्री  साय ने योजना से लाभान्वित होने वाले 180 गांवों के सभी ग्रामीणों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बेहतर यातायात सुविधाएँ अब उनके जीवन को पहले से अधिक सुगम बनाएंगी और तरक्की के नए मार्ग खोलेंगी।

    परिवहन मंत्री  केदार कश्यप ने बताया कि जिन दुर्गम और वनांचल क्षेत्रों तक कभी यातायात की सुविधा नहीं पहुंची थी, वहाँ भी अब बस सेवाएँ प्रारंभ हो रही हैं। यह योजना विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा के जनजातीय बहुल इलाकों के लिए एक वरदान के रूप में उभर रही है। 

    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के प्रथम चरण की शुरुआत 04 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह द्वारा की गई थी, जिसके अंतर्गत 250 गांवों को बस सेवाओं से जोड़ा गया था। अब द्वितीय चरण की शुरुआत के साथ इस संख्या में और वृद्धि हुई है तथा 180 गांव और जुड़ गए हैं।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री  अरुण साव सहित मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, परिवहन विभाग के सचिव  एस. प्रकाश सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में लिए गए अहम फैसले

    रायपुर
    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए – 

    1. मंत्रिपरिषद ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध पंजीबद्ध आपराधिक प्रकरणों के निराकरण/वापसी संबंधी प्रक्रिया को अनुमोदित किया है। 

             मंत्रिपरिषद ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध दर्ज प्रकरणों की समीक्षा एवं परीक्षण के लिए, जिन्हें न्यायालय से वापस लिया जाना है, मंत्रिपरिषद उप समिति के गठन को स्वीकृति दी है। यह समिति परीक्षण उपरांत प्रकरणों को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत करेगी। यह निर्णय छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 के प्रावधानों के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पित नक्सलियों के अच्छे आचरण तथा नक्सलवाद उन्मूलन में दिए गए योगदान को ध्यान में रखकर उनके विरुद्ध दर्ज प्रकरणों के निराकरण पर विचार का प्रावधान है।

            आत्मसमर्पित नक्सलियों के प्रकरण वापसी की प्रक्रिया के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन का प्रावधान किया गया है। यह समिति आत्मसमर्पित नक्सली के अपराधिक प्रकरणों की वापसी के लिए रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को प्रस्तुत करेगी। पुलिस मुख्यालय अभिमत सहित प्रस्ताव भेजेगा। शासन द्वारा विधि विभाग का अभिमत प्राप्त कर मामलों को मंत्रिपरिषद उप समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उपसमिति द्वारा अनुशंसित प्रकरणों को अंतिम अनुमोदन हेतु मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। केंद्रीय अधिनियम अथवा केंद्र सरकार से संबंधित प्रकरणों के लिए भारत सरकार से आवश्यक अनुज्ञा प्राप्त की जाएगी। अन्य प्रकरणों को न्यायालय में लोक अभियोजन अधिकारी के माध्यम से वापसी की प्रक्रिया हेतु जिला दण्डाधिकारी को प्रेषित किया जाएगा।

    2. मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के विभिन्न कानूनों को समयानुकूल और नागरिकों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से 14 अधिनियमों में संशोधन हेतु छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। 

           उल्लेखनीय है कि कई अधिनियमों में उल्लंघन पर जुर्माना या कारावास के प्रावधान होने से न्यायिक प्रक्रिया लंबी हो जाती है, जिससे आम नागरिक और व्यवसाय दोनों अनावश्यक रूप से प्रभावित होते हैं। ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने के लिए इन प्रावधानों का सरलीकरण आवश्यक है। इससे पहले, राज्य सरकार द्वारा 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में संशोधन करते हुए छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। अब 11 विभागों के 14 अधिनियमों के 116 प्रावधानों को भी सरल और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह विधेयक लाया जाएगा। 

            इस विधेयक में छोटे उल्लंघनों के लिए प्रशासकीय शास्ति का प्रावधान रखा गया है, जिससे मामलों का त्वरित निपटारा होगा, न्यायालयों का बोझ कम होगा और नागरिकों को तेजी से राहत मिल सकेगी। साथ ही, कई अधिनियमों में दंड राशि लंबे समय से अपरिवर्तित होने के कारण प्रभावी कार्यवाही बाधित होती थी, इस विधेयक से वह कमी भी दूर होगी। इन संशोधनों से सुशासन को बढ़ावा मिलेगा।

             उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां जन विश्वास विधेयक का द्वितीय संस्करण लाया जा रहा है। 

    3. मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रथम अनुपूरक अनुमान वर्ष 2025-2026 का विधानसभा में उपस्थापन बावत् छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2025 का अनुमोदन किया गया। 

  • लव ट्रैप में फंसी DSP कल्पना वर्मा, बिजनेसमैन पर ₹2 करोड़ लुटाने का आरोप

    दंतेवाड़ा/रायपुर  

    छत्तीसगढ़ के एक बिजनेसमैन ने DSP कल्पना वर्मा पर 'लव रिलेशनशिप' में फंसाकर 2 करोड़ रुपए से ज्यादा हड़पने का आरोप लगाया है. साथ ही फरियादी ने एक हीरे की अंगूठी, सोने की चेन और एक कार की उगाही करने का भी दावा किया है.

    बिजनेसमैन का यह भी दावा है कि उन पर महिला पुलिस अधिकारी के भाई के नाम पर एक होटल प्रॉपर्टी रजिस्टर करने का दबाव डाला गया था.दीपक टंडन और बरखा टंडन नाम के कपल ने रायपुर के खमतराई पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद DSP के भाई ने भी बिजनेसमैन के खिलाफ काउंटर तहरीर दी है.

    बिजनेसमैन का आरोप है कि साल 2021 से ब्लैकमेल, धमकियां और बार-बार पैसे की मांग की जा रही है. उनका दावा है कि महिला पुलिस अधिकारी ने बाद में होटल को अपने नाम पर ट्रांसफर करवाने के लिए 30 लाख रुपए का निवेश किया. कपल ने सबूत के तौर पर चैट के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं.

    उधर, DSP कल्पना वर्मा ने सभी आरोपों से इनकार किया है. आरोपों को झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताया है. और कहा है कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं.

    हालांकि, वह इस समय संपर्क से बाहर हैं. इस मामले से पुलिस विभाग में काफी हलचल मच गई है और दोनों पक्षों की शिकायत पर जांच चल रही है. पुलिस फिलहाल इस मामले में कुछ भी कहने से बच रही है. 

  • चिरायु योजना से बच्चों के चेहरे पर लौटी मुस्कान, माता-पिता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का किया आभार व्यक्त

     रायपुर : चिरायु योजना बच्चों के लिए भी बनी वरदान

    तीनों बच्चों के चेहरे की लौटी मुस्कान, माता-पिता के जीवन में जगी नई उम्मीद

    परिजनों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति जताया आभार

    रायपुर

    राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम व चिरायु योजना में शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, मोतियाबिंद, कटेफटे होट, टेढेमेढे हाथ-पैर समेत 44 की गंभीर बीमारियों के इलाज का पूरा खर्च शासन द्वारा उठाया जाता है। इसमें स्वास्थ्य विभाग का चिरायु दल बच्चों  की स्क्रीनिंग कर शासन को रिपोर्ट भेजता हैं, जिसके आधार पर बच्चों के इलाज के लिए फंड जारी होता है। ऐसे बच्चे जिनका इलाज निःशुल्क किया जाना है, स्वजन स्वास्थ्य विभाग से भी संपर्क कर सकते हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चिरायु योजना बच्चों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। इस योजना ने न केवल कई मासूम बच्चों को नई जिंदगी दी है, बल्कि गरीब परिवारों के चेहरों पर भी फिर से मुस्कान लौटा दी है। जिले में बीमारी की पुष्टि होने पर 3 बच्चों को रायपुर ले जाकर उनका सफल एवं निःशुल्क ऑपरेशन कराया गया। तीनों बच्चे स्वस्थ हैं और उनके मासूम चेहरों की मुस्कान माता-पिता के जीवन में नई उम्मीद और सुकून भर रही है। 

    चिरायु टीम द्वारा स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में जन्मजात हृदयरोग, कटे-फटे होंठ एवं तालू  से पीड़ित बच्चों की जॉच खोज

                  कलेक्टर जशपुर के निर्देश पर चिरायु टीम जिले के विभिन्न स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सक्रिय रूप से जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रही है। गंभीर बीमारी या जन्मजात विकृति पाए जाने पर उन्हें बेहतर स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला नोडल अधिकारी चिरायु के मार्गदर्शन में विकासखंड पत्थलगांव की चिरायु टीम के द्वारा अलग-अलग स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर जन्मजात हृदयरोग, कटे-फटे होंठ एवं तालू तथा अन्य शल्य-चिकित्सा योग्य बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान की गई। 

    तीनों बच्चों के चेहरे की लौटी मुस्कान, माता-पिता के जीवन में जगी नई उम्मीद
             बीमारी की पुष्टि होने पर 3 बच्चों को रायपुर ले जाकर उनका सफल एवं निःशुल्क ऑपरेशन कराया गया। इनमें आंगनबाड़ी केंद्र गौटियापारा, कोतबा में जांच के दौरान 4 वर्षीय समीर खड़िया जन्मजात हृदयरोग से पीड़ित पाए गए। चिरायु टीम ने उन्हें रायपुर भेजकर निःशुल्क हृदय ऑपरेशन कराया। इसी प्रकार प्राथमिक शाला धनुपारा, मुड़ाबहला में 8 वर्षीय स्तुति तिर्की में जन्मजात हृदयरोग पाया गया, जिनका सफल उपचार कराया गया और आंगनबाड़ी केंद्र कार्राडांड, चिकनीपानी के 01 वर्षीय जॉन्सन टोप्पो के होंठ एवं तालू में विकृति पाए जाने पर उनका भी रायपुर में निःशुल्क ऑपरेशन किया गया। आज तीनों बच्चे स्वस्थ हैं और उनके मासूम चेहरों की मुस्कान माता-पिता के जीवन में नई उम्मीद और सुकून भर रही है। 

    जांच के बाद 44 प्रकार की बीमारियों और विकृतियों की पहचान कर श्रेष्ठ अस्पतालों में कराया जाता है उपचार

              परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और चिरायु टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब परिवारों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार ने उनकी पीड़ा को समझकर बच्चों का उपचार निःशुल्क कराकर उन्हें नया जीवन दिया है। उल्लेखनीय है कि चिरायु योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों की संपूर्ण स्वास्थ्य जांच की जाती है। जांच के बाद 44 प्रकार की बीमारियों और विकृतियों की पहचान कर आवश्यकता अनुसार बच्चों को देशभर के श्रेष्ठ अस्पतालों में भेजकर उनका उपचार कराया जाता है।

    बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, मोतियाबिंद, कटेफटे होट, टेढेमेढे हाथ-पैर के इलाज का पूरा खर्च शासन

            राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम व चिरायु योजना में शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, मोतियाबिंद, कटेफटे होट, टेढेमेढे हाथ-पैर समेत 44 की गंभीर बीमारियों के इलाज का पूरा खर्च शासन द्वारा उठाया जाता है। इसमें स्वास्थ्य विभाग का चिरायु दल बच्चों  की स्क्रीनिंग कर शासन को रिपोर्ट भेजता है, जिसके आधार पर बच्चों के इलाज के लिए फंड जारी होता है। ऐसे बच्चे जिनका इलाज निल्क किया जाना है, स्वजन स्वास्थ्य विभाग से भी संपर्क कर सकते हैं।

  • दो वर्षों में विभाग ने गति, गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार के नए आयाम स्थापित किए: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    हर सड़क, हर पुल, हर परियोजना—जनता के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने की हमारी संकल्पना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की लोक निर्माण विभाग की समीक्षा
    दो वर्षों में विभाग ने गति, गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार के नए आयाम स्थापित किए
    विभागीय न्यूज़ लेटर और पर्यावरण से समन्वय ब्रोशर का विमोचन किया
    एमपीआरडीसी और एमपीबीडीसी के संचालक मंडल की बैठक संपन्न

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि विकास, रोज़गार, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामाजिक-सांस्कृतिक प्रगति का आधार हैं। विभाग का उद्देश्य प्रत्येक निर्माण कार्य को सिर्फ एक तकनीकी परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि जनता के जीवन स्तर को सुधारने वाले साधन के रूप में देखना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और नवाचार के साथ प्रत्येक परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, यही प्रयास "लोक निर्माण से लोक कल्याण" की भावना को साकार करते हैं। यह निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिये।

    मुख्यमंत्री डॉ यादव ने विभाग द्वारा "लोक निर्माण से लोक कल्याण" की भावना को धरातल पर उतारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की आधारभूत संरचना का विकास ही जनकल्याण का आधार है और विभाग ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि हर सड़क, हर पुल, हर परियोजना जनता के जीवन को सरल और सुरक्षित बनाने की हमारी संकल्पना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि मेट्रोपॉलिटन एरिया और समीपवर्ती क्षेत्रों में राजमार्गों का घनत्व बढ़ायें। पूरे प्रदेश को समावेशित कर समग्र विकास पर कार्य करें। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही जबलपुर और ग्वालियर को भी मेट्रोपोलिटन क्षेत्र घोषित किया जाएगा। शहरी, ग्रामीण एवं औद्योगिक क्षेत्रों सभी को अधोसंरचना विकास का लाभ प्राप्त हो इस आधार पर प्रस्ताव की परिकल्पना की जाये। उन्होंने कहा कि राजमार्गों का घनत्व राष्ट्रीय स्तर के समीप ले जाने के लिए विज़न डॉक्यूमेंट के आधार पर प्रस्ताव तैयार करें। प्रस्ताव में स्थानीय मांगों और सुझावों को यथोचित स्थान दिया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपर मुख्य सचिव क्षेत्रों के समग्र विकास अनुसार कार्ययोजना का निर्धारण करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि शहरी विकास की इंटीग्रेटेड पॉलिसी के निर्माण में लोक निर्माण विभाग को भी शामिल किया जाये। उन्होंने कहा कि अधोसंरचना विकास में पर्यावरण समन्वय का विशेष ध्यान रखा जाये। सतत संवहनीय विकास के लिए सूरत के डायमंड पार्क की तर्ज में भवनों का निर्माण ग्रीन बिल्डिंग संकल्पना पर किया जाये। बिजली और पानी की बचत सुनिश्चित की जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भवन निर्माण में वास्तु-विज्ञान का ध्यान रखा जाये। ताकि सूर्य की रोशनी, हवा अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित हो और ऊर्जा की बचत की जा सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक्सप्रेस-वे आधुनिक समय की मांग है। इन अधोसंरचनाओं के विकास में ग्रामीण क्षेत्र की सुविधाओं का ध्यान रखा जाये। आवश्यकतानुसार फ्लाई-ओवर, अंडर-पास, सर्विस लेन को प्रस्ताव में शामिल करें। बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ-2028 के कार्य प्राथमिकता से किए जा रहे हैं। प्रस्तावित कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जा चुकी है। दिसम्बर माह के अंत तक कार्य प्रारंभ हो जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि कार्यों को जून-2027 तक पूर्ण किया जाये।

    बैठक में बताया गया कि लोकपथ ऐप में प्राप्त 12 हज़ार 212 शिकायतों में से 12 हज़ार 166 का निराकरण किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकपथ ऐप के उत्कृष्ट उपयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोकपथ ऐप में रियल टाइम सड़क की स्थिति को भी अपडेट किया जाये। साथ ही इसका प्रचार प्रसार सुनिश्चित किया जाये ताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने बताया कि लोकपथ ऐप में आगे स्थलों के बीच की दूरी, समस्त वैकल्पिक मार्ग, पर्यटन स्थल, चिकित्सा सेवाएं, ब्लैक स्पॉट, टोल का शुल्क अन्य सुविधाओं को भी मैप किया जाएगा। यह स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ आगंतुकों के लिए भी उपयोगी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय एवं राज्य के राजमार्गों में सतत संधारण सुनिश्चित किए जाये। प्रकाश, ग्रीनरी और सावधानी मार्कर्स मानक अनुसार रहें यह भी सुनिश्चित किया जाये।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) और मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (बीडीसी) के संचालक मंडल की बैठक हुई। एमडी एमपीआरडीसी  भरत यादव ने एमपीआरडीसी के चल रहे कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। इसी प्रकार एमडी बीडीसी  सिवी चक्रवर्ती ने भवन विकास निगम के कार्यों और आगामी कार्ययोजना का विवरण दिया।

    बैठक में प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी  सुखवीर सिंह ने कहा कि विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों, पीएम गतिशक्ति पोर्टल के उपयोग से रोड प्लानिंग, BISAG-N के माध्यम से समय सीमा का निर्धारण और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग के कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ पर्यावरण से समन्वय, वृक्षारोपण, ट्री-शिफ्टिंग, लोक सरोवर, सौर ऊर्जा के कार्य भी विकास कार्यों में शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पीएम गतिशक्ति के उत्कृष्ट उपयोग पर विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, एसीएस  नीरज मंडलोई, एसीएस  मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव लोकनिर्माण  सुखवीर सिंह, एमडी एमपीआरडीसी  भरत यादव, एमडी बीडीसी  एमसीबी चक्रवर्ती सहित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

    दो वर्ष की उपलब्धियाँ

    •              दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने 12 हजार किमी सड़क निर्माण, उन्नयन और सुदृढ़ीकरण कर अभूतपूर्व रिकॉर्ड स्थापित किया है, जिससे राज्य का 77 हजार 268 किमी का सड़क नेटवर्क देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है।
    •              वित्तीय वर्ष 2024–25 में विभाग ने 99% तक वित्तीय लक्ष्य हासिल कर समयबद्ध क्रियान्वयन और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
    •              "लोक पथ" मोबाइल ऐप के माध्यम से 12,212 शिकायतों में से 12,166 शिकायतों का निवारण कर 99.6% समाधान दर प्राप्त की, जिससे विभाग की पारदर्शिता और जनसहभागिता मजबूत हुई।
    •              जबलपुर में प्रदेश के सबसे लंबे 6.9 किमी के दमोह नाका–मदनमहल–मेडिकल रोड एलिवेटेड कॉरिडोर ,राजधानी भोपाल में डॉ. अम्बेडकर फ्लाईओवर (2.73 किमी) और 15.1 किमी लंबा श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर मार्ग जैसे बड़े शहरी कॉरिडोर के कार्य पूरे किए गए।
    •              प्रदेश में 3 नए मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा कर स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूती प्रदान की गई।
    •              136 विद्यालय भवनों का निर्माण पूरा किया गया, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए उत्कृष्ट बुनियादी ढाँचा उपलब्ध हुआ।
    •              ग्वालियर और रीवा में दो नए जिला एवं सत्र न्यायालय भवनों का निर्माण पूरा हुआ।
    •              केंद्रीय सहायता से 421 स्वीकृत सड़कों में से 378 कार्य पूर्ण हुए और 18 पुलों का निर्माण प्रगतिरत रहा, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी सुदृढ़ हुई।
    •              पूरे प्रदेश में 506 "लोक कल्याण सरोवर" का निर्माण किया गया, जिससे सड़क निर्माण के साथ-साथ जल संरक्षण का अभिनव मॉडल स्थापित हुआ।
    •              गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण प्रणाली लागू की गई जिसमें 52 ठेकेदारों को नोटिस और 15 को ब्लैकलिस्ट किया गया, जो गुणवत्ता के प्रति शून्य सहनशीलता नीति को दर्शाता है।
    • नवाचार
    •              विभाग ने पीएम गतिशक्ति आधारित जीआईएस मास्टर प्लान को अपनाते हुए सड़क योजना प्रक्रिया को पूर्णतः वैज्ञानिक, बहु-स्तरीय डेटा विश्लेषण पर आधारित और पारदर्शी बनाया।
    •              लोक परियोजना प्रबंधन प्रणाली (LPMS) विकसित कर सभी परियोजनाओं—सर्वेक्षण, स्वीकृति, डीपीआर, निर्माण प्रगति और भुगतान—को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया गया।
    •              लोक निर्माण सर्वे ऐप के माध्यम से सभी सड़कों, पुलों और भवनों का जियो-मैपिंग पूरा कर विभाग के पास 100% डिजिटल एसेट इन्वेंटरी उपलब्ध हुई।
    •              एरियल डिस्टेंस आधारित सड़क योजना की तकनीक को पहली बार लागू किया गया, जिससे एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी कॉरिडोर का चयन अधिक सटीक और किफायती हुआ।
    •              सड़क निर्माण में एफडीआर, जेट पैचर, इंफ्रारेड रिपेयर जैसी आधुनिक मरम्मत तकनीकें अपनाकर टिकाऊ, तेज़ और कम लागत वाले समाधान लागू किए गए।
    •              जीपीएस -लॉक्ड बिटुमेन टैंकर प्रणाली और केंद्रीकृत गुणवत्ता प्रयोगशालाओं की स्थापना से सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित की गई।
    •              विभागीय भवनों में सौर ऊर्जा अपनाकर 10 भवनों में 269 kW क्षमता के प्लांट लगाए गए और 689 भवनों में 6.5 MW क्षमता की स्थापना की प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
    •              सड़क किनारे वृक्षारोपण के लिए जुलाई–अगस्त 2025 में 2.57 लाख पौधे लगाए गए, जिससे हरित आवरण बढ़ा और कार्बन फुटप्रिंट कम हुआ।
    •              ट्री ट्रांसप्लांटेशन तकनीक अपनाकर 1271 पेड़ों को सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया, जिसकी 85% जीवित रहने की दर विभाग की पर्यावरणीय संवेदनशीलता दर्शाती है।
    •              सॉफ़्टवेयर आधारित औचक निरीक्षण प्रणाली से निर्माण की निगरानी में पारदर्शिता आई और रियल-टाइम प्रमाणन मॉडल स्थापित हुआ।
    • आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना
    •              प्रदेश में पहली बार राज्य वित्त पोषित एक्सप्रेसवे मॉडल के तहत उज्जैन–इंदौर, इंदौर–उज्जैन और भोपाल पूर्वी बायपास जैसे बड़े हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
    •              उज्जैन–सिंहस्थ 2028 के लिए 52 प्रमुख कार्यों पर 12 हज़ार करोड़ रुपये व्यय कर धार्मिक पर्यटन, आस्था स्थलों और शहरी कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जाएगा।
    •              प्रदेश में 6-लेन एवं 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का व्यापक नेटवर्क विकसित कर औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों, लॉजिस्टिक ज़ोन्स और प्रमुख शहरों को तेज़ गति से जोड़ा जाएगा।
    •              एनएचएआई के सहयोग से सतना–चित्रकूट, रीवा–सीधी, बैतूल–खंडवा–इंदौर, जबलपुर–झलमलवाड़ जैसे राष्ट्रीय महत्व के हाईवे का विस्तार किया जाएगा।
    •              अगले तीन वर्षों में 600 नए "लोक कल्याण सरोवर" का निर्माण कर सड़क निर्माण से उत्पन्न मिट्टी का वैज्ञानिक उपयोग और जल-संरक्षण को एकीकृत मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा।
    •              विभागीय भवनों में 100% सौर ऊर्जा अपनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ऊर्जा लागत में भारी कमी और हरित भवन अवधारणा को बढ़ावा मिलेगा।
    •              सड़क सुरक्षा पर केंद्रित रोडसाइड एमेनिटीज़, ब्लैकस्पॉट सुधार और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।
    •              जीआईएस आधारित रोड मास्टर प्लान को पूर्ण रूप से लागू कर भविष्य की सड़क परियोजनाओं का चयन वैज्ञानिक विश्लेषण, यात्रा दूरी, औद्योगिक आवश्यकताओं और यातायात घनत्व के आधार पर किया जाएगा।
    •              निर्माण कार्यों की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और सख्त किया जाएगा, जिसमें मोबाइल लैब, त्वरित परीक्षण, AI आधारित रिपोर्टिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग शामिल होगी।
    •              शहरी क्षेत्रों में नए आरओबी,फ्लाईओवर, बायपास और स्मार्ट कॉरिडोर विकसित कर शहरों के ट्रैफिक प्रेशर को कम करने और कम्यूटिंग समय घटाने का लक्ष्य निर्धारित है।
    •              अगले तीन वर्षों में पूरी विभागीय एसेट इन्वेंटरी को 100% डिजिटल, जियो-रेफरेंस्ड और ऑटो-अपडेटिंग सिस्टम में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे योजना, बजट निर्धारण और फील्ड मॉनिटरिंग अधिक प्रभावी होगी।

     

  • 799 पीएमश्री स्कूलों में 4.80 लाख विद्यार्थियों को मिलने लगी अध्ययन की सुविधा

    प्रदेश के 799 पीएमश्री स्कूलों में 4.80 लाख विद्यार्थियों को मिली अध्ययन की सुविधा

    पीएमश्री स्कूल अपने क्षेत्र के स्कूलों का कर रहे हैं नेतृत्व

    भोपाल 
    प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष-2020 के अनुरूप 799 स्कूलों को पीएमश्री विद्यालय के रूप में संचालित किया जा रहा है। इन पीएमश्री विद्यालयों में 4 लाख 80 हजार विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पीएमश्री स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएँ, लायब्रेरी, खेल उपकरण और कला कक्ष जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित कराकर इनको आधुनिक रूप दिया गया है। ये पीएमश्री स्कूल अपने क्षेत्र के अन्य स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता सुधार के लिये नेतृत्व कर रहे हैं।

    व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास

    पीएमश्री स्कूलों में अध्ययन करने वाले छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास में दक्ष किया जा रहा है। उन्हें कॅरियर काउंसिलिंग से भविष्य में रोजगार के अवसरों की जानकारी दी जा रही है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में पीएमश्री योजना में 124 स्कूलों में कॅरियर काउंसलर और 137 स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर नियुक्त किये गये हैं। कक्षा 9 से 12 तक के करीब 2 लाख 41 हजार बच्चों को कॅरियर विकल्प का मार्गदर्शन दिया गया है। पीएमश्री स्कूलों में सोलर पैनल, एलईडी लाइट, प्राकृतिक खेती, पोषण उद्यान, अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त परिसर, जल और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित परम्पराओं की जानकारी देते हुए हरित स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    पीएमश्री स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को आईआईएम इंदौर, रायपुर और टीआईएसएस मुम्बई में शिक्षण कला की विधाओं का प्रशिक्षण भी दिलाया गया है। कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों के लिये टीचिंग, लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) तैयार करने के लिये 544 पीएमश्री स्कूलों का चयन किया गया है। समस्त पीएमश्री स्कूलों में मैथ्स और साइंस सर्किल गतिविधियाँ नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं, जिससे विद्यार्थियों में 21वीं सदी के कौशल, रचनात्मक सोच और टीम वर्क को प्रोत्साहित किया जा सके। कक्षा 6 से 12 तक के करीब एक लाख 27 हजार 300 से अधिक छात्रों के लिये एक्सपोजर विजिट आयोजित की गई। इन एक्सपोजर विजिट से बच्चों को शिक्षण से जुड़ी उन्नत तकनीकों की जानकारी दी गयी है।

     

  • रायपुर : मंत्री अग्रवाल ने लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज से भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना एवं उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की

    रायपुर

    प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने रायपुर के एक निजी अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे लुंड्रा विधायक  प्रबोध मिंज से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। मंत्री  अग्रवाल ने विधायक के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। 

    इस मुलाकात के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल और महिला बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े भी मौजूद थे। उन्होंने विधायक प्रबोध मिंज के स्वास्थ्य सुधार की प्रक्रिया पर डॉक्टरों से चर्चा की और उनके शीघ्र स्वस्थ होकर विधानसभा में लौटने की कामना की है।

  • उत्तर बस्तर कांकेर : ग्राम पंचायत चारगांव में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर 12 दिसम्बर को

    उत्तर बस्तर कांकेर 

    कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार जिले के आम नागरिकों की आवश्यकताओं, शिकायतों एवं समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में आगामी 12 दिसम्बर शुक्रवार को कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत चारगांव में जनसमस्या निवारण शिविर शिविर लगाई जाएगी, जिसमें ग्राम पंचायत चारगांव, छोटेबोदेली, पोरोण्डी, सिकसोड़, सुलंगी, तुरसानी और बदरंगी इत्यादि ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल होंगे। शिविर में शासन की लोक कल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया जाएगा, साथ ही योजनाओं का लाभ उठाने में कोई कठिनाई आ रही हो तो उसका समाधान भी शिविर में किया जाएगा। कलेक्टर ने जनसमस्या निवारण शिविर में सभी जिला स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय एवं क्लस्टर स्तर के अधिकारी-कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

  • राष्ट्रीय जनजाति आयोग ने संजय पाठक की जांच का आदेश दिया, कलेक्टर से आदिवासी जमीन खरीदी पर रिपोर्ट तलब

    भोपाल 

    विधायक संजय पाठक से जुड़ा आदिवासी भूमि खरीद का विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने उनके विरुद्ध दर्ज शिकायत को गंभीर मानते हुए मध्यप्रदेश के पांच जिलों कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के कलेक्टरों को जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी कलेक्टर एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें, अन्यथा समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाएगा। आयोग ने यह भी चेताया है कि समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने की स्थिति में वह संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों का उपयोग करेगा। 

    कर्मचारियों के नाम पर खरीदी गई जमीन होने का आरोप
    आयोग को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संजय पाठक ने अपने कुछ अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के नाम पर आदिवासी क्षेत्रों में जमीन खरीदी है। आयोग ने 5 दिसंबर को सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को पत्र भेजते हुए इस पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता दिव्यांशु मिश्रा का आरोप है कि डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, उमरिया और सिवनी जिलों में बैगा जनजाति के लोगों के नाम पर बड़े पैमाने पर बेनामी भूमि खरीदी गई है, जिसकी अनुमानित कीमत अरबों रुपये बताई जा रही है।

    NCST ने लिया संज्ञान

    इस पर संज्ञान में लेते हुए आयोग ने इन जिलों के कलेक्टरों से कहा है कि सभी कलेक्टर पत्र मिलने के बाद एक माह के अंदर प्रकरण में तथ्य और टिप्पणियां राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को व्यक्तिगत रूप से या अन्य संचार माध्यमों से उपलब्ध कराएंगे। आयोग के निर्देश पर डिंडोरी कलेक्टर ने जांच कर जानकारी भेज दी है, लेकिन चार कलेक्टरों जबलपुर, सिवनी, कटनी और उमरिया के कलेक्टर ने जानकारी नहीं दी है। इस पर आयोग ने उन्हें अंतिम चेतावनी दी है।

    शिकायत के बाद आयोग की सख्ती

    कटनी निवासी दिव्यांशु मिश्रा अंशु द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में दावा किया गया कि विजय राघवगढ़ से विधायक संजय पाठक ने अनुसूचित जनजाति के अपने कर्मचारियों के नाम पर जमीन खरीदी। आयोग ने 5 दिसंबर को कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के कलेक्टरों को पत्र भेजकर कहा कि वे बैगा जनजाति के साथ धोखाधड़ी कर की गई भूमि खरीद के पूरे मामले की जांच कर तथ्य आयोग को उपलब्ध कराएं। आयोग ने पत्र में उल्लेख किया कि अरबों रुपए की बेनामी खरीद इन जिलों में बताई जा रही है, इसलिए प्रत्येक कलेक्टर एक माह के भीतर पूरे प्रकरण पर अपनी टिप्पणियां और दस्तावेज व्यक्तिगत रूप से या आवश्यक संचार माध्यमों से आयोग को भेजें।

    कलेक्टरों को आयोग की चेतावनी

    आयोग के अनुसार पांच में से सिर्फ डिंडौरी कलेक्टर ने अपनी रिपोर्ट भेजी है, जबकि सिवनी, जबलपुर, कटनी और उमरिया कलेक्टरों ने अब तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इस पर आयोग ने चारों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय पर रिपोर्ट नहीं आई तो संविधान के अनुच्छेद 338 क के तहत उपलब्ध सिविल कोर्ट की शक्तियों का उपयोग कर उन्हें या उनके प्रतिनिधियों को आयोग के समक्ष बुलाया जाएगा। आयोग ने माना कि यह मामला जनजातीय अधिकारों और भूमि सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे टालना स्वीकार्य नहीं होगा।

    795 एकड़ जमीन पर खनन की तैयारी का दावा
    शिकायत में यह भी कहा गया है कि कटनी जिले के चार आदिवासी कर्मचारियों के नाम पर डिंडौरी जिले में करीब 795 एकड़ जमीन खरीदी गई है। यह जमीन बजाग तहसील के पिपरिया माल, बघरेली सानी, सरई टोला और हर्रा टोला क्षेत्रों में स्थित है। जमीन खरीद वर्ष 2025 के बाद से होना बताया गया है। शिकायत के अनुसार यह भूमि रघुराज सिंह गौड़, नत्थू कोल, राकेश सिंह गौड़ और प्रहलाद कोल के नाम दर्ज है तथा यहां बाक्साइट खनन की तैयारी की जा रही है। उन्होंने सभी संबंधित खातों की वित्तीय जांच की भी मांग की है।

    कलेक्टरों को आयोग ने अंतिम चेतावनी जारी की 
    शिकायतकर्ता ने बताया कि 15 सितंबर को आयोग को शिकायत सौंपी गई थी। इसके बाद आयोग के निर्देश पर केवल डिंडौरी कलेक्टर ने जांच कर रिपोर्ट भेजी है। जबकि कटनी, जबलपुर, उमरिया और सिवनी के कलेक्टरों से अब तक जानकारी नहीं मिली है। इस पर आयोग ने चारों जिलों को अंतिम चेतावनी जारी कर दी है।

    विधायक अलावा ने सीएम सचिवालय को दी शिकायत 
    इस प्रकरण में कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखित शिकायत दी है। उनके पत्र के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके क्रम में जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त ने डिंडौरी कलेक्टर को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा है। अपर आयुक्त द्वारा जारी पत्र में उल्लेख है कि बजाग तहसील के संरक्षित बैगा बहुल क्षेत्र में करीब 1200 एकड़ आदिवासी भूमि के कथित बेनामी सौदों की विस्तृत जांच आवश्यक है। 

    बैगा आदिवासियों की 795 एकड़ जमीन खरीदी गई

    शिकायतकर्ता के अनुसार बैगा आदिवासियों को धोखे में रखकर लगभग 795 एकड़ जमीन खरीदी गई और इस भूमि का उपयोग आगे चलकर बॉक्साइट खदानों के लिए किया जाना प्रस्तावित है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन कर्मचारियों के खातों में हुए लेन-देन और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में भूमि खरीद उनकी वास्तविक आर्थिक क्षमता से मेल नहीं खाती। यह संदेह पैदा करता है कि जमीन वास्तव में बेनामी तरीके से खरीदी गई हो सकती है।

    आयोग को सितंबर में की गई इस शिकायत पर केवल डिंडौरी कलेक्टर ने ही अपनी रिपोर्ट भेजी है, जबकि सिवनी, जबलपुर, कटनी और उमरिया के कलेक्टरों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। आयोग ने इसे अत्यंत गंभीर माना है और चारों जिलों के कलेक्टरों को अंतिम चेतावनी जारी की है। आयोग की इस कड़ी प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि आदिवासी जमीन से संबंधित मामलों में लापरवाही को वह किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं करेगा, खासकर तब जब मामला बैगा जैसे विशेष पिछड़ी जनजाति की जमीन से जुड़ा हो, जिनकी सुरक्षा के लिए कानून में विशेष प्रावधान मौजूद हैं।

    इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस मामले की लिखित शिकायत कर चुके हैं। उनकी शिकायत के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने जनजातीय कार्य विभाग को जांच के निर्देश दिए, जिसके बाद विभाग ने डिंडौरी कलेक्टर को पत्र जारी कर आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। डॉ. अलावा ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि डिंडौरी जिले के बजाग तहसील में बैगा बहुल क्षेत्र की लगभग 1200 एकड़ जमीन बेनामी तरीके से गरीब आदिवासियों के नाम पर खरीदी गई है। यह आरोप न केवल भूमि अधिग्रहण के कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि विशेष जनजातियों के संरक्षण को लेकर बनाए गए संवैधानिक दायित्वों की भी अवहेलना है।

    मामले की जड़ में आदिवासी जमीन के संरक्षण से जुड़े वे कानून हैं, जो बैगा जैसी जनजातियों की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं। इन कानूनों के तहत ऐसे क्षेत्रों में गैर-आदिवासियों को जमीन खरीदने पर प्रतिबंध है, और किसी भी प्रकार का हस्तांतरण अत्यंत सख्त प्रक्रिया के बाद ही संभव होता है। लेकिन शिकायत में जिन तरीकों का उल्लेख है, वे संकेत देते हैं कि कानून को चकमा देकर बड़ी मात्रा में भूमि का हस्तांतरण किया गया हो सकता है। स्थानीय समुदायों के लिए यह जमीन न केवल आजीविका का आधार है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान से भी गहराई से जुड़ी है, इसलिए इस प्रकार के विवाद सामाजिक तनाव को भी जन्म दे सकते हैं।

    शिकायत में लगाए गए विस्तृत आरोप

    शिकायतकर्ता के अनुसार विधायक संजय पाठक ने अपने चार आदिवासी कर्मचारियों के नाम पर डिंडौरी जिले में करीब 795 एकड़ जमीन बैगा आदिवासियों से लेकर खरीदी। उनके नाम रघुराज सिंह गौड़, नत्थू कोल, राकेश सिंह गौड़ और प्रहलाद कोल बताए गए हैं। भूमि खरीद डिंडौरी के बजाग तहसील अंतर्गत पिपरिया माल, बघरेली सानी, सरई टोला और हर्रा टोला गांवों में वर्ष 2015 के बाद से अब तक हुई। शिकायत में यह भी आरोप है कि इन जमीनों पर आगे चलकर बाक्साइट खदानें स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। शिकायतकर्ता ने संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों और लेनदेन की जांच करने की मांग भी रखी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन की खरीद के लिए भुगतान कहां से आया।

    जानिए क्या है पूरा मामला?

    यह प्रकरण मूल रूप से आदिवासी जमीन की कथित बेनामी खरीद से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि बीजेपी विधायक संजय पाठक ने अपने ही अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के नाम पर डिंडौरी जिले के बैगा आदिवासियों से लगभग 795 एकड़ जमीन खरीदवाई है। शिकायतकर्ता दिव्यांशु मिश्रा अंशु का कहना है कि बैगा समुदाय को धोखे में रखकर जमीन हस्तांतरित कराई गई, जबकि कानून ऐसे क्षेत्रों में गैर-आदिवासियों को जमीन खरीदने की अनुमति नहीं देता। आरोप यह भी है कि इन जमीनों का उपयोग आगे चलकर बॉक्साइट खनन के लिए किया जाना है और पूरी प्रक्रिया बेनामी लेन-देन का हिस्सा हो सकती है।

    शिकायत मिलने के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के कलेक्टरों को जांच का आदेश दिया है और एक माह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। केवल डिंडौरी कलेक्टर ने जवाब भेजा है, जबकि बाकी चार जिलों ने कोई जानकारी नहीं दी, जिसके बाद आयोग ने उन्हें अंतिम चेतावनी जारी की है। इधर कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने भी मामले को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया है, जिसके बाद जनजातीय कार्य विभाग ने उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। पूरा मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गंभीर रूप ले चुका है।

  • रक्षक पाठ्यक्रम का शुभारंभ, छत्तीसगढ़ में 6 विश्वविद्यालयों ने किया एमओयू, भविष्य निर्माण की ओर कदम

    रायपुर
     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के मध्य “रक्षक पाठ्यक्रम” के लिए एमओयू संपन्न हुआ। बाल अधिकार एवं संरक्षण पर आधारित यह अनूठा पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है। 

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे भूलवश या भ्रमित होकर गलत दिशा में चले जाते हैं क्योंकि वे अबोध होते हैं। ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा कर लिया है। किसानों के बकाया बोनस, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना और सबके लिए आवास जैसे महत्वपूर्ण संकल्पों को साकार किया गया है। उन्होंने कहा कि 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ सुशासन के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है और इसी उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना भी की गई है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रक्षक पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड समय में तैयार करने और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।

    महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास, और संवेदनशील मामलों का समाधान—ये सभी अत्यंत चुनौतीपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि “यह पाठ्यक्रम संवेदनशील, सजग और सेवा-भावयुक्त युवा तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।” उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर का नवाचार बताते हुए कहा कि भविष्य में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना जाएगा।

    उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने पाठ्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आयोग और सभी छह विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम लागू करने हेतु बधाई दी।

    यह एक वर्षीय स्नातकोत्तर “पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर और श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग में प्रारम्भ होगा।

    क्या है रक्षक पाठ्यक्रम

    प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था, जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। इस आवश्यकता को देखते हुए आयोग द्वारा “रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम” को विकसित किया गया है। इस पाठ्यक्रम से युवाओं को सैद्धांतिक एवं विधिक ज्ञान, विभागीय योजनाओं, संस्थाओं और प्रायोगिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ, बाल संरक्षण इकाइयों आदि के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध होगी।संवेदनशीलता, जागरूकता और बाल-अधिकारों की आत्मिक समझ विकसित करने वाला यह पाठ्यक्रम युवाओं को इस क्षेत्र में कुशल, समर्पित और प्रभावी मानव संसाधन के रूप में तैयार करेगा। आयोग द्वारा पाठ्यक्रम के संचालन, प्रशिक्षण, परामर्श और मार्गदर्शन की संपूर्ण सुविधा विश्वविद्यालयों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

    कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, ,पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से कुलसचिव प्रो शैलेंद्र पटेल,प्रो ए के श्रीवास्तव,संत गहिरा गुरु विश्विद्यालय सरगुजा कुलपति  प्रो राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव शारदा प्रसाद त्रिपाठी, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एवं रायपुर संभाग आयुक्त श्री महादेव कावरे, कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा,आंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. टी.रामाराव कुलसचिव डॉ. रूपाली चौधरी, एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. सुरेश ध्यानी, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई दुर्ग चांसलर डॉ.आई.पी. मिश्रा, कुलपति डॉ ए. के झा एवं डॉ जया मिश्रा, आयोग के सचिव प्रतीक खरे सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • उत्तर बस्तर कांकेर : लिंग आधारित हिंसा समाप्ति पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजित

    उत्तर बस्तर कांकेर 

    कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास अधिकारी द्वारा महिला सशक्तिकरण केन्द्र (हब) एवं ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजनांतर्गत लिंग आधारित हिंसा समाप्ति पर 16 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान के अंतर्गत चारामा परियोजना के महिला कलस्टर संगठन ग्राम हल्बा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम मंे लिंग आधारित हिंसा कारण एवं दुष्प्रभाव तथा इसे समाप्त करने में हमारी भूमिका बारे में जानकारी दी गई। साथ ही महिलाओं एवं बालिकाओं को उपलब्ध विशेष अधिकारों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर बाल विवाह मुक्त अभियान के तहत शपथ भी दिलाई गई एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, महिला हेल्पलाइन 181, सखी वन स्टॉप सेन्टर, सखी निवास, शक्ति सदन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, घरेलू हिंसा, सी बॉक्स पोर्टल, पोक्सो एक्ट, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, बाल विवाह एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई। जागरूकता रैली के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा लागाते हुए प्रचार-प्रसार किया गया। उक्त कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य श्रीमती तेजेश्वरी सिन्हा, श्री महंत टांडिया, महिला सशक्तिरण केन्द्र (हब) से जिला मिशन समन्वयक, जेण्डर विशेषज्ञ, वित्तीय साक्षरता समन्वय विशेषज्ञ, चाइल्ड लाइन समन्वयक, चैतन्य संस्था से जेण्डर समन्वयक, पुलिस चौकी थाना प्रभारी व टीम हल्बा एवं बिहान समूह की महिलाएं उपस्थित थीं।

  • फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाकर फरार हुए दो बांग्लादेशी, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरी

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दो विभागों की गंभीर लापरवाही के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि, यहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दो बांग्लादेशियों ने पासपोर्ट बनवा लिया और फरार भी हो गए। इस मामले के सत्यापन में बड़ी चूक हुई है। अब इस मामले में पासपोर्ट डिपार्टमेंट और भोपाल पुलिस सवालों के घेरे में आ गई है। वहीं, दूसरी तरफ अवैध पासपोर्ट बनवाने वाले दोनों आरोपियों की भी तलाश शुरू कर दी गई है। ये सनसनीखेज मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध घुसपैठ से जुड़ा होने के कारण वरिष्ठ अधिकारियों खुद जांच करने मैदान में उतर गए हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजधानी भोपाल के कोलार इलाके में दो बांग्लादेशी किराए के मकान में रह रहे थे। दोनों ने बड़ी ही चालाकी से सबसे पहले फर्जी आधार कार्ड बनवाया। इसकी सहायता से मतदाता परिचय पत्र बनवाया गया। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों की मदद सेउन्होंने पासपोर्ट बनवा लिया और जानकारी ये भी सामने आई है कि, दोनों फरार हो गए हैं। ऐसे में अब कोलार पुलिस और पासपोर्ट विभाग में हड़कंप मच गया है। सत्यापन में चूक करने के चलते दोनों सवालों के घेरे में आ गए हैं।

    साइबर पुलिस और क्राइम ब्रांच में जांच में जुटी

    वहीं, जांच के बाद सुरक्षा एवं गुप्तवार्ता के पत्र के बाद कोलार पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल, कोलर पुलिस दोनों बांग्लादेशियों की सरगर्मी से तलाश में जुट गई है। पुलिस के आला अफसर भी बारीकी से जांच पड़ताल में जुट गए हैं। साइबर पुलिस और क्राइम ब्रांच की भी सहायता ली जा रही है।