• महू में इन्फेंट्री कमांडर्स’ कांफ्रेंस की शुरुआत, भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों पर होगी विचार-विमर्श

    महू
     इन्फेंट्री स्कूल महू में 38वीं इन्फेंट्री कमांडर्स’ कांफ्रेंस का शुभारंभ किया गया। तीन दिवसीय यह सम्मेलन  11 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें इन्फेंट्री के परिचालन, प्रशिक्षण और प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी।

    सम्मेलन में सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम सहित देशभर से आए वरिष्ठ इन्फेंट्री अधिकारी भाग ले रहे हैं। इसमें फार्मेशन कमांडर, विभिन्न रेजीमेंटों के कर्नल, रेजीमेंटल सेंटर कमांडेंट और चयनित कमांडिंग आफिसर शामिल हैं। आयोजन महू में मुख्य रूप से हो रहा है, जबकि कई सैन्य केंद्र वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े हैं।

    हथियारों का शक्ति प्रदर्शन होगा

        कांफ्रेंस के दौरान इन्फेंट्री में हाल ही में शामिल अत्याधुनिक हथियारों और उपकरणों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। नई हथियार प्रणालियों और शस्त्रास्त्रों का शक्ति प्रदर्शन कर उनकी क्षमता और उपयोगिता प्रस्तुत की जाएगी।

        आधुनिकीकरण, पुनर्गठन, मानव संसाधन प्रबंधन और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने की रणनीतियों पर यह सम्मेलन विशेष रूप से केंद्रित है। चर्चा का उद्देश्य इन्फेंट्री को भविष्य की चुनौतियों के लिए और अधिक सशक्त बनाना तथा संचालन क्षमता को नई तकनीकों के अनुरूप उन्नत करना है।

     

  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विवाहेतर संबंध के मामले में कुटुंब न्यायालय का फैसला ठहराया सही

    जबलपुर
     विवाहेतर यौन संबंध में 65 बी सर्टिफिकेट के बिना तस्वीरों के आधार पर दिया गया तलाक का फैसला सही है. हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट और जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने अहम फैसले में कहा है कि शादी के मामले में इंडियन एविडेंस एक्ट पूरी तरह से लागू नहीं होता है. युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि 65-बी सर्टिफिकेट के बिना कुटुंब न्यायालय के द्वारा तस्वीर को देखते हुए विवाहेतर यौन संबंध के आधार पर तलाक की डिक्री जारी करने में कोई गलती नहीं की है. युगलपीठ ने इस आदेश के साथ दायर अपील को खारिज कर दिया.
    कुटुंब न्यायालय के फैसले को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

    बालाघाट निवासी महिला की तरफ से कुटुंब न्यायालय के द्वारा तलाक की डिक्री जारी किये जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. अपील में कहा गया था कि उसका विवाह साल 2006 में अनावेदक के साथ हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार हुआ था. अनावेदक पति ने एक अन्य व्यक्ति के साथ उसकी आपत्तिजनक फोटो के साथ कुटुंब न्यायालय ने तलाक के लिए आवेदन किया था. फोटो के साथ इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत प्रमाणिता के लिए 65-बी सार्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं किया गया था.

    अपील में सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि एविडेंस एक्ट, 1872 के सेक्शन 65-बी का पालन करना जरूरी है. अपीलकर्ता के मोबाइल में यह तस्वीर गलती से अनावेदक पति के मोबाइल पर ट्रांसफर हो गई थी. जिसके बाद पति ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया. एविडेंस एक्ट की सेक्शन 65-बी के तहत बिना प्रमाणिता सार्टिफिकेट के कुटुंब न्यायालय द्वारा पारित आदेश निरस्त करने योग्य है.

    'पति के पास पत्नी के मोबाइल फोन पर उसके एडल्टरी के थे सबूत'

    हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट और जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि "अपीलकर्ता ने इस बात से इनकार नहीं किया है कि वह तस्वीरों में नहीं थी. सिर्फ यह कहा गया है कि तस्वीरें किसी ट्रिक का इस्तेमाल करके बनाई गई हैं. नकली तस्वीरें किसने और किस तरीके से क्यों बनाई हैं, इसका भी उल्लेख नहीं किया है.

    अपीलकर्ता ने अपने बयान में कहा था कि तस्वीरें उसके मोबाइल से पति के मोबाइल में ट्रांसफर की गईं, फिर पति ने उसका मोबाइल तोड़ दिया. पति के पास पत्नी के मोबाइल फोन पर उसके एडल्टरी के सबूत थे. कोई भी इंसान नहीं चाहेगा कि उसकी पत्नी एडल्टरी करती रहे. इसलिए पति ने गुस्से में पत्नी का मोबाइल फोन तोड़ दिया. जिससे उसकी अपने पार्टनर से बातचीत बंद हो जाए. जिस फोटोग्राफर ने फोटो खींची थी उससे भी कोर्ट में पूछताछ की गई थी."

    'इंडियन एविडेंस एक्ट शादी के मामलों में पूरी तरह लागू नहीं होता'

    युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि "इंडियन एविडेंस एक्ट शादी के मामलों में पूरी तरह लागू नहीं होता है. फैमिली कोर्ट एक्ट के सेक्शन 14 के मुताबिक कुटुंब न्यायालय को सच्चाई का पता लगाने के लिए सबूत के तौर पर कोई भी रिपोर्ट, बयान, डॉक्यूमेंट्स लेने का अधिकार दिया गया है. कुटुंब न्यायालय ने इन तस्वीरों पर भरोसा करके विवाहेतर यौन संबंध के आधार पर तलाक की डिक्री जारी करके कोई गलती नहीं की. युगलपीठ ने इस आदेश के साथ महिला की अपील को खारिज कर दिया.

  • मध्यप्रदेश में बढ़ेगा निवेश, मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में 5 औद्योगिक इकाइयों को मिली मंजूरी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में खजुराहो में हुई निवेश संवर्धन पर मंत्रि-परिषद समिति की बैठक

    5 औद्योगिक इकाइयों को मिली मंजूरी
    आर्थिक संपन्नता की ओर मध्यप्रदेश, होगा निवेश-बढ़ेंगे रोजगार

    भोपाल 

    राज्य में निवेश संवर्धन और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खजुराहो में 9 दिसंबर को निवेश संवर्धन पर मंत्रि-परिषद समिति (CCIP) की अहम बैठक ली। बैठक में 5 औद्योगिक इकाइयों के निवेश प्रकरणों को मंजूरी दी गई। साथ ही प्रदेश के जिलों में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं को दी जाने वाली वित्तीय सुविधाओं के संबंध में अहम निर्णय लिए गए। बैठक में उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा, एमएसएमई मंत्री  चैतन्य काश्यप, कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  गौतम टेटवाल, संस्कृति-पर्यटन-धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव  अनुराग जैन सहित प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे।

    जे.के. सीमेंट के साथ 1850 करोड़ का विस्तार, 800 लोगों को रोजगार

    मंत्रि-परिषद समिति की बैठक में जे.के. सीमेंट कंपनी के निवेश प्रकरण पर चर्चा हुई। कंपनी वर्तमान में पन्ना जिले में 2600 करोड़ रुपये के इंटीग्रेटेड क्लिंकर और सीमेंट प्रोडक्शन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और 6 हजार से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रही है। जे.के. सीमेंट भविष्य में 1850 करोड़ रूपये से अधिक के अतिरिक्त निवेश से यूनिट का विस्तार कर रही है, जिससे 800 लोगों को रोजगार मिलेगा।

    अल्केम लैबोरेट्रीज का उज्जैन में 500 करोड़ का निवेश

    बैठक में अल्केम लैबोरेट्रीज कंपनी का निवेश प्रकरण भी रखा गया। यह कंपनी फार्मा क्षेत्र में फार्मूलेशन-एपीआई और बल्क ड्रग प्रोडक्शन कर रही है। इस कंपनी ने मुंबई में हुए रोड-शो के दौरान 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की इच्छा जताई थी। कंपनी ने उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी में टैबलेट, कैप्सूल, ड्राई सिरप और ड्राई पाऊडर इंजेक्शन के निर्माण के लिए यूनिट की स्थापना का प्रस्ताव दिया है। इससे 500 लोगों को रोजगार मिलेगा।

    नई अर्थव्यव्स्था को मजबूत करने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में बड़ा निवेश

    राज्य में डिजिटल अवसंरचना, क्लाउड सेवाओं तथा डेटा-आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में मेसर्स कंट्रोल एस डेटा सेंटर लिमिटेड द्वारा बड़वई आईटी पार्क, भोपाल में लगभग 500.20 करोड़ रूपये के निवेश से डेटा सेंटर सुविधा विकसित की जा रही है। परियोजना से प्रदेश में लगभग 870 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसरों का सृजन होगा। यह निवेश प्रदेश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय डेटा नीति, एवं मध्यप्रदेश आईटी और ईएसडीएम निवेश संवर्धन नीति-2023 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाएगा।

    ग्वालियर में 327.10 करोड़ सीसीएल मेन्युफेक्चरिंग यूनिट

    राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, ई.एस.डी.एम. (Electronic System Design and Manufacturing) सेक्टर को प्रोत्साहन प्रदान करने एवं स्थानीय उत्पादन क्षमताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केदारा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा ग्वालियर, मध्यप्रदेश में लगभग 327.10 करोड़ रूपये के निवेश सेकॉपर क्लैड लैमिनेट (CCL) निर्माण इकाई स्थापित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया। परियोजना से राज्य में लगभग 220 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे।

    फूड प्रोसेसिंग में उज्जैन को मिलेगी नई पहचान

    विश्व की सबसे बड़ी पोटेटो फ्लेक्स निर्माताओं में शामिल अहमदाबाद की इस्कॉन बालाजी फूड्स ने उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी में 110 करोड़ रूपये के निवेश से यूनिट स्थापित कर उत्पादन शुरू कर दिया है। इससे 350 लोगों को रोजगार मिला है।

    औद्योगिक नीति के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक अनुमोदन

    बैठक में मंत्री मंडलीय समिति ने सभी प्रस्तावित एवं संचालित परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक अनुमोदन दिया। इसके तहत प्रचलित उद्योग संवर्धन समितियों में उपलब्ध प्रावधानों के साथ ही अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने पर सहमति बनी। इस निर्णय से न केवल प्रदेश में औद्योगिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा बल्कि युवाओं के लिये बड़े पैमाने पर रोजगार अवसर भी उपलब्ध होंगे।

     

  • शिक्षकों की डिजिटल क्षमता को बढ़ावा, स्कूल शिक्षा में सुधार के लिए दिए गए टैबलेट

    स्कूल शिक्षा में डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर बढ़ाने पर दिया गया विशेष ध्यान

    शिक्षकों की डिजिटल क्षमता के लिये प्रदान किये गये टैबलेट

    भोपाल

    प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये शिक्षकों को डिजिटल उपकरण प्रदान कर सक्षम बनाया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में डिजिटल टेक्नोलॉजी के विकास और स्कूल के सभी स्तरों पर प्रौद्योगिकी के उभरते हुए भविष्य को देखते हुए डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर, ऑनलाइन शिक्षण मंच और उपकरणों की उपलब्धता की सिफारिश की गयी है। प्रदेश में प्राथमिक एवं माध्यमिक शासकीय विद्यालयों के 2 लाख 43 हजार शिक्षकों को टैबलेट प्रदान किये गये हैं। विभाग ने सरकारी हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों के 44 हजार शिक्षकों को भी टैबलेट उपलब्ध कराये हैं। शिक्षक इन टैबलेट का उपयोग बच्चों की शिक्षण व्यवस्था में कर रहे हैं।

    रोबोटिक्स लैब

    विभाग ने प्रदेश के 52 सांदीपनि विद्यालयों में रोबोटिक्स लैब स्थापित किये हैं। इस वर्ष विभाग ने 458 पीएम स्कूलों में अटल टिकरिंग लैब विकसित की हैं। राज्य के 100 प्रतिशत जनशिक्षा केन्द्र, जिनकी संख्या 3063 है, उन केन्द्रों में हाई परफार्मेंस पीसी प्रिंटर और यूपीएस की उपलब्धता सुनिश्चित की है। शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छात्रों को विज्ञान एवं गणित विषय के डिजिटल ई-कंटेंट उपलब्ध कराये गये हैं।

    व्यावसायिक शिक्षा

    नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिये जाने की सिफारिश की गयी है। प्रदेश के 3367 सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दिये जाने की व्यवस्था की गयी है। प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम में 17 ट्रेड मंजूर किये गये हैं। पिछले वर्ष 4 लाख से अधिक छात्रों का नामांकन कक्षा-9 से 12 तक किया गया था। इस वर्ष नामांकित छात्रों की संख्या करीब 6 लाख है। पिछले 2 वर्षों में 690 शासकीय विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है।

    प्रदेश में कॅरियर सप्ताह का आयोजन

    सरकारी स्कूलों के बच्चों को पढ़ाई के दौरान कॅरियर संबंधी सलाह के लिये इस वर्ष कॅरियर सप्ताह का आयोजन किया जा चुका है। सप्ताह के दौरान 4311 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के 2 लाख विद्यार्थियों को कॅरियर चयन संबंधी सलाह दी गयी है।

     

  • वोटर लिस्ट में लाखों मृत मतदाता, SIR ने किया खुलासा – 8.13 लाख मृत मतदाताओं की पहचान की गई

    भोपाल 

     मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम लगातार जारी है। जिसके तहत एन्युमरेशन फॉर्मों को डिजिटलाइज करने का काम जारी है। निर्वाचन सदन के मुताबिक 99 प्रतिशत से ज्यादा फॉर्म डिजिटलाइज किए जा चुके है। जिसके तहत मध्यप्रदेशमें अब तक 8.13 लाख मृत मतदाताओं की पहचान की जा चुकी है। 2,43 लाख ऐसे मतदाता मिले हैं। जिनके दो जगह नाम मिले है।

    10 दिसंबर तक बैठकें आयोजित

    निर्वाचन सदन द्वारा फॉर्म प्रकाशन और प्राप्ति के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की पहचान और सत्यापन के लिए बैठकें होंगी। सभी मतदान केंद्रों पर 6 दिसंबर से 10 दिसंबर तक बीएलओ बीएलए और अन्य सहयोगियों की बैठकें आयोजित की जाएगी।

    चुनाव आयोग के निर्देश पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय सभी जिलों में एसआईआर प्रक्रिया तेजी से करवा रहा है और दिन में तीन बार कलेक्टरों से रिपोर्ट ले रहा है। 27 अक्टूबर को वोटर लिस्ट फ्रीज होने के बाद 4 नवंबर से एसआईआर का कार्य शुरू हुआ था, जिसका प्रारूप परिणाम 16 दिसंबर को प्रकाशित होगा। अभी शिफ्टेड मतदाताओं की सूची प्राप्त नहीं हुई है, जो प्रकाशन से पहले स्पष्ट की जाएगी।

    फार्म नहीं भरा तो कट सकता है वोट

    मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं को एसआईआर फार्म मिला है, उन्हें 2003 की एसआईआर के आधार पर परिजनों/खुद की जानकारी देना अनिवार्य है। यदि कोई मतदाता बीएलओ के लगातार प्रयासों के बाद भी फार्म जमा नहीं करता, तो उसका नाम भी 16 दिसंबर की सूची से हटाया जा सकता है। संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन ने अपील की है कि सभी मतदाता समय रहते फार्म जमा करें, ताकि नाम कटने की स्थिति से बचा जा सके।

    किन जिलों में सबसे अधिक मृत वोटर्स?

    सूत्रों के अनुसार जबलपुर और सागर में मृत मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा, जबकि सीहोर और पन्ना में सबसे कम पाई गई है। हालांकि आयोग ने इन आंकड़ों को अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है।

    10 दिसंबर तक होगा सत्यापन

    एसआईआर कार्यवाही के तहत अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डबल-एंट्री वाले मतदाताओं की पहचान के लिए 10 दिसंबर तक हर मतदान केंद्र पर BLO–BLA की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। प्रदर्शित सूचियों का राजनीतिक दलों से अवलोकन कराने और 11 दिसंबर तक आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा तय की गई है, ताकि BLO ऐप के माध्यम से समय पर संशोधन किया जा सके।

    जबलपुर और साग्र में सबसे ज्यादा मामले

    एसआइआर से मिले अब तक के आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा मृत मतदाता प्रदेश के जबलपुर और सागर जिले में चिह्नित हुए हैं। और सबसे कम सीहोर और पन्ना में मिले है। हालांकि एसआइआर प्रक्रिया अभी जारी होने से आंकड़ों में बढ़ोत्तरी संभव है। इन नामों को सूची से बाहर किया जाएगा। वहीं गणना पत्रक प्राप्त होने पर अनुपस्थित स्थानांतरित, मृत एवं वोहरी प्रविष्टि को छोड़कर अन्य के नाम प्रारूप सूची में शामिल होंगे।

  • खंडवा में वक्फ प्रॉपर्टी का दावा ठुकराया, गैरकानूनी निर्माणों पर गरजा बुलडोजर

    खंडवा 
    एमपी के खंडवा जिले के सिहाड़ा गांव में मंगलवार को तब हड़कंप मच गया जब प्रशासन ने दरगाह पीर मौजा परिसर के आसपास अवैध कब्जों पर बुलडोजर चला दिया। इस दौरान 6 थाने की पुलिस मौजूद रही। इससे पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई। दरगाह कमेटी में इस जमीन को वक्फ की बताया था। कमेटी में जिस खसरा नंबर पर दावा किया था वह खसरा पूरे गांव का खसरा था। खसरे के मुताबिक पूरे गांव की जमीन को वक्फ प्रॉपर्टी बता दिया गया था। इसको लेकर हड़कंप मच गया था।

    मामले की शुरुआत तब हुई जब सिहाड़ा ग्राम पंचायत ने सरकारी जमीन पर दुकान निर्माण के लिए दरगाह कमेटी को नोटिस भेजा था। सिहाड़ा ग्राम पंचायत सरपंच प्रतिनिधि हेमंत सिंह चौहान का कहना है कि जिस जगह पर अवैध कब्जा किया गया है। वह सरकारी जमीन है। ग्राम पंचायत ने जमीन पर बाजार बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए ग्राम पंचायत ने फरवरी में संबंधित पक्ष को नोटिस दिया था। कब्जाधारी पक्ष की ओर से कहा गया कि जमीन वक्फ की है आप वहां बाजार नहीं बना सकते हैं। इसके बाद सिहाड़ा ग्राम पंचायत ने तहसीलदार से गुहार लगाई थी।

    तहसीलदार की ओर से भी कब्जाधारियों को नोटिस जारी किया गया था लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बजाए दरगाह कमेटी ने दुकान की जमीन समेत पूरे सिहाड़ा गांव की 14.500 हेक्टयर भूमि (जिस पर गांव बसा है) को वक्फ की बता दिया था। इतना ही नहीं कब्जाधारियों ने पूरे गांव को वक्त की संपत्ति बताकर भोपाल वक्फ ट्रिब्यूनल में अपील तक कर दी थी। इधर जिस रकबे पर पूरा गांव बसा है उसे वक्फ का बताए जाने को लेकर सिहाड़ा के लोगों में खलबली मच गई थी।

    हालांकि समिति ने बाद में कहा कि देखिए जी खसरा नंबर में टाइपो एरर होने के चलते यह स्थिति बन गई है। फिर वक्फ ट्रिब्यूनल में सुनवाई शुरू हो गई। वक्फ ट्रिब्यूनल ने ग्राम पंचायत को नोटिस जारी किया था। साथ ही वक्फ बोर्ड से भी दावे के पक्ष में दस्तावेज मांगे थे। वक्फ बोर्ड को इसके लिए टाइम दिया गया था। सरपंच प्रतिनिधि हेमंत चौहान ने भी अपने अधिवक्ता के माध्यम से गांव का पक्ष रखा। आखिरकार ट्रिब्यूनल का फैसला आया और उसने कब्जाधारियों के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वक्फ बोर्ड ने निर्धारित समय में अपने दावे के पक्ष में जरूरी दस्तावेज पेश नहीं किए हैं इसलिए उनका दावा खारिज किया जाता है।

    ग्राम पंचायत ने सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने के लिए जिला प्रशासन को आवेदन दिया था। फैसला आते ही प्रशासन का अमला पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुंचा और अवैध कब्जे के खिलाफ ऐक्शन शुरू कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि फैसले के बाद दरगाह पीर मौजा परिसर के आसपास का अतिक्रमण हटाया गया। दरगाह पीर मौज परिसर में दुकान तक बना दी गई गई थी जिसे बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। एक शौचालय और तार फेंसिंग को भी बुलडोजर चलाकर हटा दिया गया।

    बताया जाता है कि दरगाह परिसर में ही सामुदायिक भवन था। गौर करने वाली बात यह कि इस सामुदायिक भवन में मदरसा चलाया जा रहा था। प्रशासन के ऐक्शन के बाद मदरसे का संचालन बंद करा दिया गया है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान राजस्व और पुलिस के आला अधिकारी मौजूद रहे। खंडवा एसडीएम बजरंग बहादुर ने बताया कि ग्राम सिहाड़ा में कुछ लोगों ने सरकार की जमीन को वक्फ की संपत्ति बता कर अवैत तरीके से कब्जा कर लिया था। दुकान बना ली गई थी। प्रशासन ने बुलडोजर लगाकर अवैध कब्जों को हटा दिया है। दरगाह क्षेत्र से पूरे अतिक्रमण को हटा दिया गया है। 

  • मध्यप्रदेश–महाराष्ट्र पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से बड़ी सफलता

    6 वर्षीय मासूम बालिका महाराष्ट्र के ट्यूशा गांव से सकुशल बरामद

    भोपाल
    पुलिस की सतत मॉनिटरिंग और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर बैतूल पुलिस टीम ने महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से संयुक्त कार्रवाही कर महाराष्ट्र राज्य के ट्यूशा गांव (मोर्शी क्षेत्र) से 6 वर्षीय मासूम बालिका को सुरक्षित दस्‍तयाब कर परिजनों के सुपुर्द किया।

    फरियादी ने 07 दिसंबर 2025 को सूचना दी कि उसकी बालिका घर के सामने खेल रही थी, तभी गांव का ही एक आदतन अपराधी उसे मोटरसाइकिल से ले गया। परिजनों द्वारा तलाश के बाद भी बालिका नहीं मिली। सूचना पर थाना कोतवाली में प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक नर्मदापुरम जोन श्री मिथिलेश शुक्ला, उप पुलिस महानिरीक्षक नर्मदापुरम श्री प्रशांत खरे, पुलिस अधीक्षक बैतूल श्री वीरेंद्र जैन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमला जोशी ने स्वयं निरीक्षण कर आवश्यक दिशा–निर्देश जारी किए।

    शुरुआती जांच में अनिल कुशराम निवासी खड़का जामगांव, जिला अमरावती (महाराष्ट्र) पर शंका व्यक्त की गई, जो हाल ही में अमरावती जेल से पैरोल पर रिहा हुआ है। आरोपी के विरुद्ध पूर्व में हत्या, दुष्कर्म एवं चोरी जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं।

    वरिष्‍ठ अधिकारियों के निर्देशन में मुलताई, आमला, आठनेर, बोरदेही एवं मासौद चौकी की पुलिस टीमों को तत्काल सक्रिय किया गया। आरोपी के महाराष्ट्र की ओर भागने की संभावना को देखते हुए महाराष्ट्र पुलिस को भी तुरंत सूचना दी गई और संयुक्त टीम गठित कर दी गई। संयुक्त सर्च ऑपरेशन में तकनीकी टीमों, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और सर्चिंग पार्टियों को सक्रिय किया गया।

    लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप आरोपी की लोकेशन महाराष्ट्र के मोर्शी क्षेत्र में ट्रेस हुई, जिसके बाद ट्यूशा गांव में बालिका को सुरक्षित दस्‍तयाब किया गया। बालिका पूरी तरह सुरक्षित है और उसे परिजनों के सुपुर्द किया जा चुका है।

    आरोपी अनिल कुशराम घटना के बाद फरार है। उसकी गिरफ्तारी हेतु बैतूल पुलिस की विशेष टीम लगातार महाराष्ट्र एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में खोज कर रही है।

     

  • मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी सफलता

    रीवा और ग्वालियर में दो अपराधों का खुलासा कर 57 लाख से अधिक की संपत्ति जब्‍त कर 62 घटनाओं में लिप्‍त गिरोह पकड़े गए

    भोपाल
    मध्यप्रदेश पुलिस ने संगठित आपराधिक नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई करते हुए रीवा और ग्वालियर जिलों में दो बड़ी सफलताएँ हासिल की हैं। रीवा पुलिस ने विगत दो वर्षों से सक्रिय विद्युत तार चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 50 लाख रुपये मूल्य का माल बरामद किया, जबकि ग्वालियर पुलिस ने मैरिज गार्डन में हुई चोरी का त्वरित खुलासा कर 7 लाख 80 हजार रूपए नगद बरामद किए गए।

    रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई — अंतरराज्यीय विद्युत तार चोरी गिरोह का पर्दाफाश
    रीवा पुलिस ने एमपीईबी विभाग के विद्युत तार चोरी एवं सोलर पावर प्लांट से कॉपर केबल चोरी की कुल 62 घटनाओं का खुलासा करते हुए 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पुलिस ने लगभग 50 लाख रुपये मूल्य के एल्यूमिनियम और कॉपर तार, पाँच वाहन तथा चोरी में इस्तेमाल उपकरण (कटर, इलेक्ट्रिक डिटेक्टर, सीढ़ी आदि) बरामद किए हैं। पुलिस ने 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के विश्लेषण के साथ उत्तर प्रदेश और अन्य जिलों की पुलिस से समन्वय स्थापित किया। जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य पूर्व में बिजली विभाग के ठेकेदारों से जुड़े थे और चोरी का माल कबाड़ियों को बेचते थे। इस कार्रवाई से जिले में लंबे समय से जारी विद्युत संरचना चोरी की घटनाओं पर निर्णायक अंकुश लगा है।

    ग्वालियर के थाना महाराजपुरा क्षेत्र स्थित अभिनंदन वाटिका में एक लगुन
    कार्यक्रम के दौरान 11 लाख की चोरी हुई थी। क्राइम ब्रांच और थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपी संतोष सिसोदिया को गिरफ्तार किया, जिसके पास से 7 लाख 80 हजार रूपए नगद बरामद हुए। पूछताछ में खुलासा हुआ कि चोरी शिवा सिसोदिया और एक विधिविरुद्ध बालक ने की थी और राशि संतोष को छिपाने हेतु सौंपी थी।

    रीवा और ग्वालियर की इन प्रभावी कार्यवाहियों ने यह साबित किया है कि मध्यप्रदेश पुलिस संगठित अपराध, सार्वजनिक संपत्ति की चोरी और नेटवर्क आधारित आपराधिक गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलेरेंस की नीति पर कार्य कर रही है।

     

  • स्कूल शिक्षा में डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर बढ़ाने पर दिया गया विशेष ध्यान

    शिक्षकों की डिजिटल क्षमता के लिये प्रदान किये गये टैबलेट

    भोपाल 
    प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये शिक्षकों को डिजिटल उपकरण प्रदान कर सक्षम बनाया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में डिजिटल टेक्नोलॉजी के विकास और स्कूल के सभी स्तरों पर प्रौद्योगिकी के उभरते हुए भविष्य को देखते हुए डिजिटल इन्फ्रॉस्ट्रक्चर, ऑनलाइन शिक्षण मंच और उपकरणों की उपलब्धता की सिफारिश की गयी है। प्रदेश में प्राथमिक एवं माध्यमिक शासकीय विद्यालयों के 2 लाख 43 हजार शिक्षकों को टैबलेट प्रदान किये गये हैं। विभाग ने सरकारी हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूलों के 44 हजार शिक्षकों को भी टैबलेट उपलब्ध कराये हैं। शिक्षक इन टैबलेट का उपयोग बच्चों की शिक्षण व्यवस्था में कर रहे हैं।

    रोबोटिक्स लैब
    विभाग ने प्रदेश के 52 सांदीपनि विद्यालयों में रोबोटिक्स लैब स्थापित किये हैं। इस वर्ष विभाग ने 458 पीएमश्री स्कूलों में अटल टिकरिंग लैब विकसित की हैं। राज्य के 100 प्रतिशत जनशिक्षा केन्द्र, जिनकी संख्या 3063 है, उन केन्द्रों में हाई परफार्मेंस पीसी प्रिंटर और यूपीएस की उपलब्धता सुनिश्चित की है। शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छात्रों को विज्ञान एवं गणित विषय के डिजिटल ई-कंटेंट उपलब्ध कराये गये हैं।

    व्यावसायिक शिक्षा
    नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिये जाने की सिफारिश की गयी है। प्रदेश के 3367 सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दिये जाने की व्यवस्था की गयी है। प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम में 17 ट्रेड मंजूर किये गये हैं। पिछले वर्ष 4 लाख से अधिक छात्रों का नामांकन कक्षा-9 से 12 तक किया गया था। इस वर्ष नामांकित छात्रों की संख्या करीब 6 लाख है। पिछले 2 वर्षों में 690 शासकीय विद्यालयों में एग्रीकल्चर ट्रेड प्रारंभ किया गया है।

    प्रदेश में कॅरियर सप्ताह का आयोजन
    सरकारी स्कूलों के बच्चों को पढ़ाई के दौरान कॅरियर संबंधी सलाह के लिये इस वर्ष कॅरियर सप्ताह का आयोजन किया जा चुका है। सप्ताह के दौरान 4311 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के 2 लाख विद्यार्थियों को कॅरियर चयन संबंधी सलाह दी गयी है।

     

  • मध्य प्रदेश कैबिनेट: आठ चीते 26 जनवरी को बोत्सवाना से मध्य प्रदेश पहुंचेंगे, सरकार ने दी जानकारी

    खजुराहो
    मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) से कुछ चीतों को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। राज्य सरकार ने यह महत्वपूर्ण कदम बोत्सवाना (दक्षिण अफ्रीका) से चीतों के नए जत्थे के अगले महीने मध्य प्रदेश पहुंचने से लगभग एक महीने पहले उठाया। चीतों को केएनपी में क्वारंटाइन किया जाएगा। मध्य प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री दिलीप अहिरवार ने मंगलवार को खजुराहो में कैबिनेट की बैठक के बाद प्रेस को जानकारी देते हुए कहा कि बोत्सवाना से आठ चीतों का नया जत्था 26 जनवरी को मध्य प्रदेश पहुंचेगा।

     मंत्री अहिरवार ने कहा कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान से कुछ चीतों को नौरादेही स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य, जिसका नाम हाल ही में वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखा गया है, अब कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद राज्य में चीतों के लिए तीसरा आवास होगा। श्योपुर के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 'प्रोजेक्ट चीता' की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीतों और उसके बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित करने के साथ की गई थी। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दो समूहों में कुल 20 चीते छोड़े गए थे, जिनमें से नौ वयस्क चीतों की मृत्यु हो चुकी है। हालांकि लगातार मौतों के बावजूद, वर्तमान में चीतों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है, जिनमें पांच नवजात शावक भी शामिल हैं। पिछले तीन दिनों में दो और शावकों की मौत हो गई।

  • छत्तीसगढ़ का गर्व: हीराबाई झरेका बघेल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिया राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार

    रायपुर 

    छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धातुकला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की प्रसिद्ध ढोकरा–बेलमेटल शिल्पकार श्रीमती हीराबाई झरेका बघेल को आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह सम्मान केवल श्रीमती हीराबाई झरेका बघेल का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के हर शिल्पकार का सम्मान है। हमारा राज्य अपनी कला, संस्कृति और हस्तशिल्प पर गर्व करता है। राज्य सरकार कला-संरक्षण, प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और बाजार विस्तार के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है, ताकि ग्रामीण व वनवासी क्षेत्रों की प्रतिभाएं लाभान्वित हों और विश्व मंच पर अपनी पहचान बना सकें।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ग्राम पंचायत बैगीनडीह जैसे वनांचल क्षेत्र से निकलकर अपनी विशिष्ट शिल्पकला के माध्यम से देशभर में छत्तीसगढ़ की पहचान को नई ऊँचाइयाँ देने वाली श्रीमती बघेल की उपलब्धि हमारे प्रदेश की समृद्ध लोककला, परंपरा और ग्रामीण प्रतिभा की अद्भुत चमक को राष्ट्रीय मंच पर पुनर्स्थापित करती है। ढोकरा कला सदियों पुरानी धरोहर है, और श्रीमती बघेल जैसी शिल्प कलाकार इन परंपराओं को आधुनिक समय के अनुरूप जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रही हैं।

  • प्रसंस्करण केन्द्र के उत्पादों की ब्रांडिग मार्केटिंग कर बढ़ाएं सेल : अशोक बर्णवाल

    भोपाल 
    अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने कहा है कि वनों में बांस भिर्रा कटाई-सफाई का कार्य प्रतिवर्ष नियमित कराया जाये। लघुवनोपज आधारित प्रजातियों का पौधारोपण अधिक संख्या में हो। उन्होंने प्रसंस्करण केन्द्र में तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और विपणन पर जोर देते हुए कहा कि विक्रय बढ़ाने के लिये समन्वित प्रयास किये जायें।

    अपर मुख्य सचिव श्री बर्णवाल सोमवार को पन्ना में त्रिफला प्रसंस्करण केन्द्र आंवला उद्यान सकरिया में ग्राम वन समिति हीरापुर के सदस्यों की बैठक में शामिल हुए। बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही.एन. अम्बाड़े भी उपस्थित रहे। अपर मुख्य सचिव श्री बर्णवाल ने पन्ना में त्रिफला प्रसंस्करण केन्द्र में तैयार आंवला मुरब्बा, आंवला कैण्डी, आंवला सुपाड़ी, आंवला अचार का निरीक्षण किया। उन्होंने बीट गढ़ी पड़रिया के एन.पी.व्ही. कैम्पा मिश्रित रोपण (वर्ष 2024 रकवा 40 हेक्टे.), आर.डी.एफ. रोपण (वर्ष 2025 रकवा 50 हेक्टे.) और एन.पी.व्ही. कैम्पा मिश्रित रोपण (वर्ष 2021 रकवा 50 हेक्टे.) का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वन संरक्षक श्री नरेश यादव, डीएफओ (उत्तर पन्ना) श्री गर्वित गंगवार, डीएफओ (साउथ पन्ना) श्री अनुपम शर्मा, आईएफएस प्रशिक्षु श्री अक्षत जैन उपस्थित रहे।

     

  • विगत 3 नवंबर से शुरू हुई समाधान योजना 2025-26 का लाभ हजारों बकायादार उपभोक्‍ता उठा रहे

    भोपाल 
    विगत 3 नवंबर से शुरू हुई समाधान योजना 2025-26 का लाभ हजारों बकायादार उपभोक्‍ता उठा रहे हैं। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुरैना वृत्‍त में अब तक कुल 7,795 उपभोक्‍ताओं ने अपना पंजीयन कराया है। कंपनी के खाते में 33 करोड़ 30 लाख रूपए मूल राशि जमा हुई है तथा 28 करोड़ 01 लाख रूपए सरचार्ज माफ किया गया है। इस तरह से अभी तक मुरैना वृत्‍त समाधान योजना में कंपनी कार्यक्षेत्र सहित मध्‍यप्रदेश में भी सर्वाधिक राशि जमा करवाने में अव्‍वल रहा है। मुरैना वृत्‍त के महाप्रबंधक श्री सुरेश कुमार ने बताया कि हाल ही में समाधान योजना का लाभ उठाते हुए गैर घरेलू उपभोक्‍ता श्रीमती सवीना बेगम पर कुल बकाया राशि 10,57,401 रुपए थी। जिसमें से 5,12,379 रूपये की सरचार्ज में छूट मिली। उन्‍हें केवल 5,45,022 रुपए जमा करने पड़े और उनका बिल निराकृत हो गया। इसी तरह घरेलू उपभोक्‍ता श्री बलराम शर्मा पर कुल बकाया राशि 9,80,077 रुपए में से 7,52,284 रूपये की सरचार्ज में छूट मिली। उन्‍हें केवल 2,27,793 रुपए जमा करने पड़े। कृषि पंप उपभोक्‍ता श्री जय सिंह पर कुल बकाया राशि 1,14,655 रुपए थी जिसमें से उन्‍हें 55,590 रूपये की सरचार्ज में छूट मिली और उन्‍हें केवल 59,065 रुपए ही जमा करने पड़े। मुरैना वृत्‍त के महाप्रबंधक श्री सुरेश कुमार ने अन्य सभी बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाते हुए अपने बकाया बिल को जमा करायें, साथ ही उन्होंने अपने सभी अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे तीन माह से अधिक के बकायदार उपभोक्ताओं को इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें।

    मध्य प्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025- 26 के लागू होने से ऐसे अनेक उपभोक्‍ता हैं जो बकाया बिल जमा कर रहे हैं और एकमुश्‍त बकाया जमा राशि जमा करने पर अधिकतम छूट का लाभ ले रहे हैं। कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने कंपनी के बकायादार उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि वे प्रथम चरण में ही एकमुश्‍त भुगतान कर इस योजना में शामिल होकर सरचार्ज में अधिकतम छूट का लाभ उठाएं। उन्‍होंने कहा कि यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाधान योजना के प्रथम चरण में सरचार्ज में 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमुश्‍त अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है।

    समाधान योजना 2025-26 : एक नजर में
    समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्‍त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। इस योजना में उपभोक्ता को प्रथम चरण में एकमुश्‍त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ होगा जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कम होता जाएगा। यह योजना दो चरणों में प्रारंभ होकर प्रथम चरण की शुरुआत 3 नवंबर से 31 दिसंबर 2025 तक रहेगी जिसमें 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। इसी तरह द्वितीय और अंतिम चरण में जो कि एक जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी, इसमें 50 से 90 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। प्रथम चरण में एकमुश्‍त राशि जमा कराने पर अधिकतम लाभ होगा। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल हेतु portal.mpcz.in पर पंजीयन कराना होगा। कंपनी के उपाय ऐप पर भी पंजीयन की सुविधा उपलब्‍ध है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं। 

  • गाईडलाइन दरों को लेकर फैल रहे भ्रम पर राज्य सरकार ने दी व्यापक स्पष्टता

    कांकेर सहित पूरे प्रदेश में सरल, वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रणाली लागू

    रायपुर
    वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड छत्तीसगढ़ द्वारा स्वीकृत नई गाईडलाइन दरों को लेकर आमजन के बीच उत्पन्न हो रहे भ्रम को दूर करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने विस्तृत जानकारी जारी की है। शासन ने स्पष्ट किया है कि नई गाईडलाइन दरें न केवल अधिक सरल और वैज्ञानिक हैं, बल्कि इनके माध्यम से पुराने वर्षों से चली आ रही विसंगतियों का समाधान भी किया गया है।

    सरकार ने बताया कि कुछ स्थानों पर यह गलत भ्रम फैलाया जा रहा है कि गाईडलाइन दरों में अत्यधिक वृद्धि की गई है या दस्तावेज पंजीयन प्रक्रिया बाधित हो गई है, जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि नवीन गाईडलाइन 20 नवंबर 2025 से प्रभावी हो चुकी है और इस अवधि में कांकेर जिले में लगभग 98 दस्तावेजों का पंजीयन सुचारू रूप से किया जा चुका है। जिले के सभी उप-पंजीयक कार्यालयों में पूर्ववत नियमित रूप से पंजीयन का कार्य जारी है।

    नगरीय क्षेत्रों में व्यापक सरलीकरण
    पूर्व में एक ही वार्ड में कई कंडिकाओं के कारण समान भौगोलिक और व्यावसायिक स्थिति होने के बावजूद दरों में अंतर पाया जाता था, जिससे नागरिकों में असंतोष था। नवीन सर्वे, भौतिक सत्यापन तथा युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के बाद इन कंडिकाओं को कम किया गया है और दरों को समान किया गया है। कांकेर नगर पालिका के 21 वार्डों में पहले 56 कंडिकाएं थीं, जिन्हें घटाकर 26 कर दिया गया है। इसी प्रकार नगर पंचायत चारामा, नरहरपुर, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ और पंखाजूर की कुल 253 कंडिकाओं को कम कर 105 किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे गाईडलाइन अब अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हो गई है।

    दर वृद्धि संबंधी भ्रांति का समाधान
    राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में अंतिम बार गाईडलाइन दरों का पुनरीक्षण वर्ष 2019-20 में किया गया था। छह वर्षों बाद किए जा रहे इस पुनरीक्षण में नगरीय क्षेत्रों में मात्र 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह वृद्धि स्वाभाविक और तार्किक है। यदि दरों को हर वर्ष बढ़ाया जाता, तो वर्तमान दरें कहीं अधिक होतीं। अतः अत्यधिक वृद्धि की बात निराधार है।

    ई-पंजीयन प्रणाली पूरी तरह सुचारू
    कुछ लोगों द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि नई गाईडलाइन ऑनलाईन अपडेट न होने से दस्तावेज पंजीयन ठप हो गया है, जबकि तथ्य यह है कि जिले के सभी उप-पंजीयक कार्यालयों में पंजीयन का कार्य निर्बाध रूप से चल रहा है और किसी भी प्रकार की व्यवधान की स्थिति नहीं है।

    दर पुनरीक्षित न होने से होने वाली समस्याओं का उल्लेख
    सरकार ने कहा है कि पुरानी गाईडलाइन दरें जारी रहने से काले धन के लेनदेन को प्रोत्साहन मिलता है। कई बार वास्तविक सौदा मूल्य अधिक होने के बावजूद पंजीयन पुरानी गाईडलाइन दरों पर किया जाता है, जिसके कारण अंतर की राशि काला धन बनती है और बाद में विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। इसी प्रकार पुरानी दरों के कारण संपत्तियों का मूल्यांकन कम होता है, जिससे खरीदारों को ऋण पात्रता भी कम मिलती है।

    मुआवजे के निर्धारण में भी विसंगतियां सामने आती हैं। सरकारी अधिग्रहण की स्थिति में पुराने दरों के आधार पर मुआवजा तय होने से भूमि मालिकों, विशेषकर किसानों को उनकी संपत्ति का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इसलिए नई गाईडलाइन दरें अधिक युक्तियुक्त और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप हैं।

    आमजन से अपील
    राज्य शासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या भ्रम में न आएं। गाईडलाइन दरों से संबंधित किसी भी सूचना या शंका के निराकरण के लिए नागरिक अपने निकटस्थ पंजीयन कार्यालय में संपर्क कर वास्तविक और प्रमाणिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

    नई गाईडलाइन दरों को प्रदेश में रियल एस्टेट लेनदेन को पारदर्शी बनाने, टैक्स चोरी रोकने और जमीन संबंधी मूल्यांकन को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • सूरजपुर : कलेक्ट्रेट में 01 जनवरी से बायोमेट्रिक डिवाइस से अधिकारियों, कर्मचारियों का लगेगा अटेंडेंस

    सूरजपुर : कलेक्ट्रेट में 01 जनवरी से बायोमेट्रिक डिवाइस से अधिकारियों, कर्मचारियों का लगेगा अटेंडेंस

    समय-सीमा की बैठक में आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली के क्रियान्वयन के संबंध में कलेक्टर ने दिये आवश्यक दिशा-निर्देश

    सूरजपुर

    शासन द्वारा निर्णय लिया गया है कि 01 जनवरी 2026 से  कलेक्टोरेट में आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली प्रारम्भ किया जाना है। आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) के सुव्यवस्थित क्रियान्वयन हेतु उन्होंने उपस्थित जिला स्तरीय अधिकारियों को उनके अधीनस्थ अधिकारी व कर्मचारीगण का रजिस्ट्रेशन ऑफिशल वेबसाइट  https://chhattisgarh.attendance.gov.in 
    मंव  सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये। उन्होंने सभी का पंजीयन 01 जनवरी से पूर्व कराने के निर्देश दिए ताकि सभी आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का हिस्सा बन सके।
    कलेक्टर ने कहा गुड गवर्नेंस के तहत वर्किंग कल्चर दरूस्त करने हेतु यह निर्णय लिया गया है।जिसका अनुपालन हम सभी को सुनिश्चित करना है और समय पर सभी को अपनी उपस्थिति दर्ज करानी है।
    उन्होंने स्पष्ट किया कि  बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम का रेगुलर मॉनिटरिंग किया जायेगा इसलिये समस्त अधिकारी व कर्मचारी ऑफिस आने पर व जाने के समय बायोमेट्रिक अटेंडेंस लगाना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें। विदित हो कि शुरुआत में आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली संयुक्त जिला कार्यालय में संचालित समस्त विभाग में लागू होगी, जो कि निकट भविष्य में ही समस्त सरकारी संस्थाओं में लागू की जायेगी।
                     इसके साथ ही उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी निर्माण विभाग को जून तक युद्धस्तर पर निर्माण संबंधित कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
          बैठक में डीएफओ श्री डी पी साहु, जिला पंचायत सीईओ श्री विजेन्द्र पाटले, अपर कलेक्टर श्री जगन्नाथ वर्मा, संयुक्त कलेक्टर श्री पुष्पेंद्र शर्मा, सर्व एसडीएम व अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

  • रायपुर : रोजगार दिवस से बदली तस्वीर — 107 पंचायतों में मनरेगा जानकारी अब QR कोड पर

    रायपुर : रोजगार दिवस से बदली तस्वीर — 107 पंचायतों में मनरेगा जानकारी अब QR कोड पर

    छुईखदान में हर माह 07 तारीख को रोजगार दिवस, आजीविका डबरी से आय बढ़ाने की पहल

    ग्रामीणों को डिजिटल रूप से सशक्त कर रहा रोजगार दिवस — जियोफेंसिंग व e-KYC पर जोर

    रायपुर 

    खैरागढ़ जिले के छुईखदान विकासखंड की सभी 107 ग्राम पंचायतों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशानुसार प्रत्येक माह की 07 तारीख को मनरेगा आधारित रोजगार दिवस का आयोजन किया जा रहा है। वनांचल से मैदानी पंचायतों तक आयोजित हो रहे इन शिविरों में मनरेगा से जुड़े दिशा-निर्देशों, प्रक्रियाओं और अधिकारों की विस्तृत जानकारी ग्रामीणों तथा जॉब कार्डधारियों को दी जा रही है। रोजगार सहायक मौके पर ही मनरेगा में संधारित सात रजिस्टर व वर्क/केस फाइल प्रस्तुत करते हैं, साथ ही जॉब कार्ड प्रविष्टियों को अद्यतन कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक श्रमिक तक तथ्यात्मक एवं पारदर्शी जानकारी पहुंचे। ग्रामीणों को नए परिवारों का पंजीयन, जॉब कार्ड में सदस्यों के नाम जोड़ने, अपूर्ण आवासों की पूर्णता, मातृत्व भत्ता, क्षतिपूर्ति सहित विभिन्न लाभों के बारे में भी स्पष्ट रूप से बताया जा रहा है।

    इस वर्ष रोजगार दिवस की विशेष पहल के रूप में QR कोड आधारित सूचना प्रणाली को जोड़ा गया है। अब कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से QR कोड स्कैन कर मनरेगा योजना से संबंधित संपूर्ण जानकारी—जैसे पिछले वर्षों के श्रमिक बजट, स्वीकृत कार्य, लागत, व्यय और प्रगति—एक ही स्थान पर देख सकता है। यह व्यवस्था न केवल जानकारी को सुलभ बना रही है, बल्कि योजना क्रियान्वयन में पारदर्शिता भी दृढ़ कर रही है।

    रोजगार दिवस के माध्यम से ग्रामीणों को केवल जानकारी ही नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें आजीविका उन्नयन की दिशा में भी प्रेरित किया जा रहा है। प्रोजेक्ट उन्नति 2.0 के तहत राज मिस्त्री सहित तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं ताकि ग्रामीण आत्मनिर्भर बनें और मनरेगा श्रमिक से कुशल श्रमिक बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें। इसके साथ ही बड़ी संख्या में आजीविका डबरी निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे किसान मछली पालन और पूरक कृषि गतिविधियों से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए श्रमिक बजट का निर्माण युक्तधारा के माध्यम से किया जा चुका है। परिसंपत्तियों के जियो टैगिंग कार्य को अब जियोफेंसिंग तकनीक के जरिए लागू किया जाएगा, साथ ही e-KYC के महत्व की विस्तृत जानकारी भी ग्रामीणों को दी गई है। नियमित रूप से आयोजित हो रहा यह रोजगार दिवस ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने, उन्हें योजनाओं से सीधे जोड़ने और सतत आर्थिक मजबूती की दिशा में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है।

  • फर्जी डिजिटल अरेस्ट का खेल खत्म: रियल पुलिस स्क्रीन पर आई तो स्कैमर्स भागे

    जबलपुर
    स्कूल से सेवानिवृत्त प्राचार्य सायबर ठगी का शिकार होने से बच गई। ठगों ने सेवानिवृत्त प्राचार्य और उनके बुजुर्ग पति को तीन दिन तक डिजिटल अरेंस्ट में रखा। आरोपितों ने पुलवामा में हुए आतंकी हमले से नाम जोड़कर दंपत्ति को डराया।

    ठग एटीएस अफसर बनकर मोबाइल पर वीडियो काॅल पर बात कर रहे थे। उनका आरोप था कि दंपत्ति के खाते में पुलवामा हमले के लिए हुई फंडिंग के 70 लाख रुपये आए हैं। फर्जी अफसरों ने दंपंति को एकाउंट को सेनेटाइज करने और पूरी रकम आरबीआई के एकाउंट में ट्रांसफर करने को कहा।
     
    महिला मंगलवार को रकम ट्रांसफर करने घर से निकली, लेकिन अ​धिवक्ता के पास पहुंच गई। अधिवक्ता उन्हें पुलिस के पास लेकर पहुंचे। फिर पुलिस के साथ घर लौटे, तो देखा कि आरोपित वीडियो काॅल पर थे। जैसे ही असल पुलिस अफसर ने बात की, तो आरोपितों ने फोन कट कर दिया। यह घटना बाई का बगीचा इलाके मे हुई। पुलिस एकाउंट नम्बर और फोन नंबर के आधार पर आरोपितों की जानकारी जुटाने में लगी है।
     
    वीडियो काॅल में बताया एटीएस के अफसर
        बाई का बगीचा निवासी अमिता ग्रेब्रियल (63) स्कूल से सेवानिवृत्त प्राचार्य है। वे अपने पति एंथोनी ग्रेब्रियल (65) के साथ रहती है। उनके बच्चे विदेश में है।
        छह दिसम्बर की सुबह उनके फोन पर वीडियो काॅल आया। अमिता ने काल उठाया । बात करने वाले ने खुद को एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड) का अफसर बताया।
        धमकाया कि पुलवामा आतंकी हमले में 70 करोड़ रुपए की रा​शि का लेनदेन करने की बात कही। इसमें से 10 प्रतिशत याने 70 लाख उनके एकांउंट में आए थे। अमिता घबरा गई।
        इसके बाद आरोपियों ने घर के ​खिड़की दरवाजे बंद कराए। पर्दे लगवाए और कहा कि वे डिलीटल अरेस्ट हो गए है। कहीं भी आने-जाने और किसी से भी बातचीत पर रोक लगा दी।
        आरोपियों ने गिरफ्तारी वारंट समेत अन्य फर्जी दस्तावेज अमिता को भेजा। उन्हें सिग्नल नाम के एक ऐप में जोड़ा, जिसमें फर्जी एटीएस अफसर जुड़े थे।

    एकाउंट नम्बर दिया, घर से निकलीं, कागज में लिखकर बताया
    आरोपियों ने अमिता को सोमवार को एक एकाउंट नम्बर दिया। कहा कि वह आरबीआई का एकाउंट है। पूरे 70 लाख रुपए उसमें ट्रांसफर करें। वरना जेल जाना पड़ सकता है। अमिता घबराई हुई घर से निकलीं। पति वीडियोकॉल पर ही थे। अमिता सीधे अ​धिवक्ता अनिल मिश्रा के पास पहुंची। उनका फोन चालू था। तब अमिता ने कागज में लिखकर अ​धिवक्ता को आपबीती बताई।
     
    अ​धिवक्ता अमिता को लेकर एसपी आफिस में एएसपी क्राइम ब्रांच जितेन्द्र सिंह के पास पहुंचे। महिला घबराई हुई थी। पूरी बात बताई। इसके बाद वे महिला के साथ उनके घर पहुंचे। जहां पति वीडियोकॉल पर ही थे। एएसपी ने पहले रिश्तेदार बनकर बातचीत की। आरोपी रुपए मांगते रहे, तब उन्होने बताया कि वे एएसी बोल रहे हैं, तो कॉल डिस्कनेक्ट हो गया और दंप​त्ति ठगी का ​शिकार होने से बच गए।

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ला के स्वास्थ्य लाभ की कामना की

    रायपुर
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज शाम राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पहुँचे और वहां उपचाररत भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ला से मुलाकात कर  उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त की और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री विनोद कुमार शुक्ल भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी सृजनशीलता, संवेदना और सरल भाषा में गहन अनुभूतियों की अभिव्यक्ति देश और प्रदेश—दोनों को गौरवान्वित करती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा एवं छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा उपस्थित थे।

  • रायपुर : डबरी निर्माण से बढ़ा जल संरक्षण, ग्रामीणों के लिए खुल रहे आय के नए रास्ते

    रायपुर : डबरी निर्माण से बढ़ा जल संरक्षण, ग्रामीणों के लिए खुल रहे आय के नए रास्ते

    मनरेगा से बनी ‘आजीविका डबरी’ बन रही आय का स्थायी साधन

    रायपुर

    महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अब केवल रोजगार उपलब्ध कराने का साधन भर नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में बेहद प्रभावी माध्यम साबित हो रही है। मनरेगा से निर्मित टिकाऊ परिसंपत्तियाँ न सिर्फ ग्रामीणों के लिए जल संरक्षण को मजबूत कर रही हैं, बल्कि उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर भी प्रदान कर रही हैं। वर्षा आधारित खेती पर निर्भर किसानों के लिए डबरी निर्माण एक नई उम्मीद बनकर उभरा है, जिससे खेती के अलावा अन्य आजीविका के विकल्प भी विकसित हो रहे हैं।

    डबरी निर्माण के लिए जिला प्रशासन  खैरागढ़ द्वारा विकासखंड छुईखदान में निजी भूमियों पर व्यापक रूप से स्वीकृतियाँ प्रदान की गई हैं। उद्देश्य यह कि किसान वर्षा जल संरक्षित कर सकें, सिंचाई क्षमता बढ़े और जल संकट की स्थिति में भी खेती प्रभावित न हो।

    बेलगांव के राजकुमार जंघेल की ‘आजीविका डबरी’ बनी परिवर्तन की मिसाल

    विकासखंड छुईखदान के ग्राम पंचायत खैरानवापारा के आश्रित ग्राम बेलगांव में किसान राजकुमार जंघेल की निजी भूमि पर मनरेगा निधि से 2.672 लाख रुपये की लागत से डबरी निर्माण कराया गया। इस कार्य से ग्रामीणों को 1359 मानव दिवस का रोजगार प्राप्त हुआ।

    पूर्व में राजकुमार जंघेल पूरी तरह बारिश आधारित खेती पर निर्भर थे, जिससे उत्पादन कम और आय सीमित रहती थी। डबरी के निर्माण ने परिस्थितियाँ बदल दीं। अब वे बरसाती पानी संरक्षित कर मछली पालन कर रहे हैं, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष 1.5 से 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। डबरी की मेड़ पर अरहर जैसी फसलें लगाकर वे घर के उपयोग हेतु आवश्यक अनाज भी प्राप्त कर लेते हैं।

    राजकुमार जंघेल ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा—
    “डबरी ने न सिर्फ पानी बचाया, बल्कि हमारी आमदनी भी बढ़ाई। यह हमारे लिए सचमुच आजीविका डबरी साबित हुई है।”

    प्रशासनिक प्रयास दे रहे परिणाम

    कलेक्टर श्री इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के मार्गदर्शन में जिले में ग्रामीणों की आजीविका सुधार हेतु निरंतर पहल की जा रही है। मनरेगा के माध्यम से पात्र परिवारों को डबरी, पशु शेड, बकरी शेड, मुर्गी शेड एवं कुआँ जैसे हितग्राही मूलक कार्यों की स्वीकृति प्रदान की जा रही है, जिससे खेती के साथ विविध व्यवसायों का विस्तार हो रहा है और ग्रामीण आय में वृद्धि सुनिश्चित हो रही है।

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अमर शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान दिवस पर किया नमन

    रायपुर
    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 10 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा के ऐसे महान जननायक थे, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा, अन्याय के प्रतिरोध और वंचित वर्गों की सेवा को अपने जीवन का ध्येय बनाया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सोनाखान के ज़मींदार परिवार में जन्म लेकर भी शहीद वीर नारायण सिंह का जीवन सदैव आदिवासियों, किसानों और गरीब परिवारों के संघर्षों से जुड़ा रहा। वर्ष 1856 के विकट अकाल में जब आमजन भूख से त्रस्त थे, तब उन्होंने मानवता को सर्वोपरि रखते हुए अनाज गोदाम का अनाज गरीबों में वितरित कर त्याग, करुणा और साहस की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह ने छत्तीसगढ़ की जनता में देशभक्ति, स्वाभिमान और एकता की लौ प्रज्वलित की। उनका संघर्ष केवल अंग्रेजी शासन के विरुद्ध नहीं था, बल्कि हर प्रकार के अन्याय, दमन और सामाजिक शोषण के खिलाफ था।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह का बलिदान छत्तीसगढ़ की अस्मिता, वीरता और बलिदान की गौरवशाली परंपरा का प्रेरक अध्याय है। वे गरीबों, किसानों और वंचितों के सच्चे रक्षक थे और उनकी गाथा सदैव आने वाली पीढ़ियों को न्याय एवं मानवता के लिए खड़े होने की प्रेरणा देती रहेगी।