• डॉ. यादव ने खजुराहो के प्रसिद्ध पश्चिमी मंदिर समूह में लाइट एंड साउंड कार्यक्रम देखा

    खजुराहो

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभिन्न विभागों की समीक्षा के बाद विश्व धरोहर खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह में आयोजित लाइट एवं साउंड-शो देखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्वप्रथम मंदिर समूह में दिव्यांगजनों के लिए लिफ्ट का शुभारंभ भी किया। लाइट एंड साउंड-शो के माध्यम से खजुराहो के विश्व धरोहर मंदिरों, चंदेलवंश के गौरवशाली इतिहास और बुंदेलखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन बुंदेलखंड की कला-संस्कृति को संरक्षित करने के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय, लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री  लखन सिंह पटेल सहित मंत्रीगण और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदिवर्त संग्रहालय का किया भ्रमण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खजुराहो में सांस्कृतिक गांव एवं जनजातीय लोक कला राज्य संग्रहालय आदिवर्त का भ्रमण किया। इस मौके पर अलीराजपुर एवं डिंडोरी के कलाकारों के दल द्वारा भगोरिया एवं गुदुमबाजा पारंपरिक लोक नृत्य की मनमोहक एवं आकर्षक प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदिवर्त संग्रहालय खजुराहो में नवनिर्मित पारंपरिक कलाओं के गुरुकुल का लोकार्पण भी किया। संग्रहालय में जनजातीय लोक संस्कृति एवं परंपरा पर केन्द्रित विभिन्न लोक कलाओं और नित दिन उपयोग की सामग्री का प्रदर्शन किया गया है।

     

  • छत्तीसगढ़ में तापमान गिरने के आसार, मौसम विभाग ने जताई कड़ाके की सर्दी की संभावना

    रायपुर

    बीते दो दिन से माना और नवा रायपुर का इलाका कड़ाके की ठंड के साथ शीतलहर की चपेट में है. यहां रात और दिन के तापमान में 20 डिग्री का अंतर है. माना एयरपोर्ट के आसपास के इलाके में अंबिकापुर जैसी ठंड पड़ रही है. दोनों शहरों का न्यूनतम तापमान सामान्य से 5-6 डिग्री नीचे जा चुका है.

    दिसंबर के दूसरे सप्ताह में भी मामूली उतार-चढ़ाव के बीच ठंड का प्रभाव बढ़ने की संभावना है. अगले दो दिन यानी सोमवार और मंगलवार को रायपुर जिले के साथ दर्जनभर क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है. पिछले तीन चार दिनों से राज्य में बढ़ती ठंड का प्रभाव रहा है और राज्य के सीमावर्ती इलाकों में तो ठंड चरम पर है. वहां मैनपाट सहित आसपास के इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. सुबह के वक्त पेड़ों की पत्तियों में ओस जमने जैसी स्थिति बन रही है. अंबिकापुर का तापमान 5.2 डिग्री तक पहुंचा है, जो सामान्य से 4.6 डिग्री सेल्सियस कम है. इसी तरह की स्थिति राजधानी रायपुर से करीब 10 किमी दूर माना एयरपोर्ट और उससे लगे नवा रायपुर की है. वहां भी पिछले तीन दिनों से शीतलहर जैसे हालात बने हुए हैं.

    वहां रात का तापमान 8 डिग्री तक पहुंचा है, जो सामान्य से 5.7 डिग्री कम है. वहां दिन और रात के तापमान में 20 डिग्री का अंतर है, जो कड़ाके की ठंड की तरफ इशारा कर रहा है.

    इन इलाकों में शीतलहर का अलर्ट
    मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक रायपुर के अलावा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर, कबीरधाम, मुंगेली, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, बेमेतरा, दुर्ग, मोहला-मानपुर, अंबागढ़ चौकी, बालोद और कोरबा में शीतलहर जैसी स्थिति बन सकती है.

  • हाईकोर्ट ने शादी में बीमारी छिपाने को क्रूरता माना, पति को मिला ज्यूडिशियल सेपरेशन

    जबलपुर
    हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट तथा जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ अपने अहम फैसले में कहा है कि बीमारी की जानकारी छुपाकर विवाह करना और बीमार करने की साजिश करने का आरोप लगाना क्रूरता की श्रेणी में आता है। जीवन साथी की सेहत को लेकर टेंशन में दूसरे पक्ष को ज़िंदगी भर परेशान रहते हुए आर्थिक तथा भावुक नुकसान उठाना पड़ेगा। हाईकोर्ट युगलपीठ ने कुटुम्ब न्यायालय के आदेश को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता पति के पक्ष में ज्यूडिशियल सेपरेशन के आदेश जारी किए हैं।

    मंडला निवासी डॉ. महेन्द्र कुशवाहा की तरफ से दायर अपील में ज्यूडिशियल सेपरेशन के आवेदन को कुटुम्ब न्यायालय द्वारा निरस्त किए जाने को चुनौती दी गई थी। अपील में कहा गया था कि उसकी अनावेदिका पत्नी के साथ अरेंज मैरिज हुई थी। विवाह के पूर्व वह मिर्गी की बीमारी से पीड़ित थी और इस संबंध में उसे जानकारी नहीं दी गई। विवाह के बाद अनावेदिका को जून व जुलाई 2022 में मिर्गी के दौरे आने के बाद अपीलकर्ता ने ज्यूडिशियल सेपरेशन के लिए कुटुम्ब न्यायालय में आवेदन किया था। ज्यूडिशियल सेपरेशन के आवेदन की सुनवाई के दौरान पत्नी ने इस बात से साफ इंकार कर दिया कि वह मिर्गी की बीमारी से पीड़ित है। उसने अपने पति व सास पर बदनीयती से बीमार करने उसे बहुत मीठा खाना खाना दिए जाने के आरोप लगाये थे।

    पत्नी का तर्क, मिर्गी कोई बीमारी नहीं है

    अनावेदक पत्नी की तरफ से तर्क दिया गया कि ज्यूडिशियल सेपरेशन की मंजूरी से उसकी परेशानियां बढ़ जाएंगी। बीमारी के मुश्किल समय में यह उसके साथ क्रूरता होगी। पति को पत्नी की देखभाल करनी चाहिए और कोर्ट में ज्यूडिशियल सेपरेशन की अपील नहीं करनी चाहिए थी। मिर्गी कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसका इलाज नहीं है। उसे यह बीमारी शादी के बाद हुई है।

    कोर्ट ने माना सच छिपाकर धोखा किया गया

    युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि हर इंसान के पास शादी का पार्टनर चुनने का ऑप्शन होता है। वह बायोडाटा देखने, एक-दूसरे से मिलने और परिवार के सदस्यों और दोस्तों से बात करने के बाद एक-दूसरे से शादी करते हैं। अपीलकर्ता को बीमारी के संबंध में जानकारी होती तो शायद वह अनावेदक से शादी नहीं करता। शादी के बाद बीमारी होने के बाद पति का फ़र्ज़ है कि वह पत्नी का ध्यान रखे। सच छिपाकर अपीलकर्ता के साथ धोखा किया गया है।

    मेडिकल रिपोर्ट से स्पष्ट, बीमारी पहले से थी

    मेडिकल दस्तावेज से स्पष्ट है कि अनावेदक को विवाह के पहले से उक्त बीमारी थी। इसके बावजूद भी अनावेदिका ने पति व सास पर साज़िश का झूठा आरोप लगाया गया। अनावेदक का यह बर्ताव क्रूरता के बराबर है, जो हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के सेक्शन 13(1)(पं) के तहत क्रूरता के दायरे में आएगा। युगलपीठ ने कुटुम्ब न्यायालय के आदेश को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता के पक्ष में ज्यूडिशियल सेपरेशन आदेश जारी किए है।

  • Ladli Behna Yojana: 31वीं किस्त की तारीख तय, CM मोहन यादव करेंगे 1500 रुपये ट्रांसफर

    भोपाल 

     मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Madhya Pradesh) ने लाडली बहनों को 12 नवंबर को 'लाडली बहना योजना' की 30वीं किस्त (Ladli Behna Yojana 30th installment) जारी किए थे. 30वीं किस्त 1.26 करोड़ से अधिकर महिलाओं के खाते में आए थे. ऐसे में अब इन लाडली बहनों को दिसंबर यानी 31वें किस्त का बेसब्री से (Ladli Behna Yojana 31th installment) इंतजार है. हालांकि इन महिलाओं का यह इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है. ऐसे में लाड़ली बहना योजना की 31वीं किस्त जारी होने से पहले लिस्ट में अपना नाम चेक कर लें. 

    कब आएगी लाडली बहना योजना की 31वीं किस्त, इस महीने कितनी राशि आएगी? कैसे लिस्ट में अपना नाम चेक करे. यहां जानिए सबकुछ… 
    कब आएगी लाडली बहन योजना की 31वीं किस्त

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले महीने यानी नवंबर माह मे12 तारीख को 1.26 करोड़ महिलाओं के खाते में लाडली बहना योजना की 30वीं किस्त की राशि ट्रांसफर किए थे. इससे पहले अक्टूबर महीने में भी महिलाओं के खाते में 12 तारीख को ही रुपये ट्रांसफर किए गए थे. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि इस महीने भी 12 तारीख तक आपके खाते में 31वीं किस्त की राशि आ जाएंगे. अभी इसकी तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. 

    जानिए किस जिले में कितनी लाड़ली बहनें

        लाड़ली बहना योजना में सबसे अधिक लाभार्थी इंदौर जिले में हैं, जहाँ 4 लाख 40 हजार 723 महिलाओं को योजना का लाभ मिला है। इसके बाद सागर में 4 लाख 19 हजार 903, रीवा में 4 लाख 3 हजार 182, छिंदवाड़ा में 3 लाख 90 हजार 311, धार में 3 लाख 82 हजार 417, जबलपुर 3 लाख 81 हजार 848 ,बालाघाट जिले में 3 लाख 47 हजार 816, उज्जैन में 3 लाख 40 हजार 203, मुरैना में 3 लाख 33 हजार 821 ,छतरपुर में 3 लाख 24 हजार 454, खरगोन में 3 लाख 13 हजार 741, भोपाल में 3 लाख 9 हजार 20 तथा ग्वालियर जिले में 3 लाख 5 हजार 969 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है।

        राजगढ़ में 2 लाख 95 हजार 459, शिवपुरी में 2 लाख 87 हजार 943, देवास में 2 लाख 85 हजार 496, विदिशा में 2 लाख 74 हजार 946, भिंड में 2 लाख 72 हजार 343, बेतूल में 2 लाख 71 हजार 474 ,सिवनी जिले में 2 लाख 68 हजार 187, मंदसौर में 2 लाख 62 हजार 827, रतलाम में 2 लाख 50 हजार 176, रायसेन में 2 लाख 46 हजार 390, दमोह में 2 लाख 45 हजार 143, सीहोर में 2 लाख 42 हजार 717, और कटनी में 2 लाख 41 हजार 302 बहनों को राशि का लाभ मिला है।

        बड़वानी में 2 लाख 37 हजार 60, गुना में 2 लाख 28 हजार 604, खंडवा में 2 लाख 16 हजार 372, नर्मदापुरम में 2 लाख 9 हजार 837, सिद्धी में 2 लाख 9 हजार 706, टीकमगढ़ में 2 लाख 7 हजार 79, नरसिंहपुर में 2 लाख 8 हजार 734 ,सिंगरौली जिले में 1 लाख 97 हजार 4, मंडला में 1 लाख 95 हजार 153, झाबुआ में 1 लाख 92 हजार 511, शहडोल में 1 लाख 88 हजार 729, पन्ना में 1 लाख 82 हजार 220, शाजापुर में 1 लाख 73 हजार 900, नीमच में 1 लाख 57 हजार 658, तथा अशोक नगर में 1 लाख 55 हजार 387 महिलाएँ इस योजना से लाभान्वित हुई हैं।

        दतिया में 1 लाख 44 हजार 239, अनूपपुर में 1 लाख 26 हजार 54, अलीराजपुर में 1 लाख 23 हजार 492, आगर मालवा में 1 लाख 17 हजार 255, उमरिया में 1 लाख 9 हजार 113, श्योपुर में 1 लाख 8 हजार 673, और हरदा जिले में 93 हजार 516 बहनों को योजना की राशि का लाभ मिला है। निवाड़ी जिले में 80 हजार 157 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है।

    2023 में शुरू हुई थी लाड़ली बहना योजना

        मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मई 2023 में लाड़ली बहना योजना शुरू की गई थी।इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।

        लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।

        इसमें रक्षा बंधन पर अगस्त 2023, अगस्त 2024 और अगस्त 2025 में लाभार्थी महिलाओं को 250 रूपये की विशेष सहायता राशि तीन बार प्रदान की गई। 2023 अगस्त में राशि को 1000 से बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया ।

        नवंबर 2025 में राशि में 250 की फिर वृद्धि की गई है और अब इस योजना के तहत 1500 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 18,000 रुपये मिलते हैं।लाड़ली बहनों को जून 2023 से नवंबर 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 30 किश्तों का अंतरण किया गया है।

        इस प्रकार योजना के आरंभ से अब तक 44,917.92 करोड़ रूपये की राशि का सीधा अंतरण लाभार्थी महिलाओं के खातों में किया जा चुका है।प्रदेश के सभी 52 जिलों में कुल 1,26,36,250 (एक करोड़ 26 लाख 36 हजार 250) महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है।

    लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र

        महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।

        अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।

        घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।

        जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।

        जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।

        जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो।

    लाडली बहना योजना में नाम है या कट गया… ऐसे चेक करें लिस्अट में अ पना नाम

    मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 31वीं किस्त जारी होने से पहले लिस्ट में अपना नाम चेक कर लें. ये भी आप ऑनलाइन चेक कर सकते हैं. योजना की ल‍िस्‍ट अपना नाम और भुगतान की स्थिति देखने के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in  पर जाना होगा.  'आवेदन व भुगतान' टैब पर क्‍ल‍िक करें. इसके बाद आपको अंतिम सूची पर क्लिक करना है. अब अपना मोबाइल नंबर और कैप्चा कोड डालकर चेक करें. आपके मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा, उसे दर्ज कर सबिट करें. अब लिस्ट ओपेन हो जाएगा… इसके बाद आप अपना नाम चेक कर सकते हैं. 

    कब हुई थी लाडली बहना योजना की शुरुआत

    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लाडली बहना योजना की शुरुआत की थी. इस योजना का शुभारंभ 10 जून 2023 को किया गया था. इसके तहत 23 से 60 वर्ष की आयु की विवाहित महिलाओं को शुरू में 1,000 रुपये की सहायता दी गई, हालांकि बाद में बढ़ाकर इसे 1,250 रुपये प्रति माह कर दिया गया.अब मोहन सरकार इस योजना के तहत हर महीने 1500 रुपये की सहायता राशि दे रही है. इसके अलावा खाते में पैसा भेजने की तारीख को बदल दिया गया है. 

    लाडली बहना योजना के लिए पात्र कौन, क्या है इसके नियम?

        महिला के परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम हो.
        परिवार में कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी नहीं करता हो.
        इसके अलावा परिवार के पास 5 एकड़ से ज्यादा भूमि या ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो.

     

  • Bhopal Metro: इंदौर मेट्रो के अनुभव से सीखकर बेस फेयर कम रखने पर विचार

    भोपाल
    कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद भोपाल मेट्रो को चलाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। 13 दिसंबर से पहले प्रायोरिटी कारिडोर 7.5 किलोमीटर के सारे काम निपटाए जा रहे हैं। बेस फेयर को लेकर भी गुणा-भाग लगाया जा रहा है। चूंकि इंदौर में मेट्रो के संचालन को शुरू हुए करीब छह महीने से अधिक समय हो गया है और वहां यात्री अभी कम मिल रहे हैं। ऐसे में भोपाल मेट्रो का हाल इंदौर जैसा न हो, इसके मद्देनजर बेस फेयर, शेड्यूल और स्कीम को लेकर मेट्रो प्रबंधन के अधिकारियों के बीच मंथन चल रहा है, ताकि राजधानी में मेट्रो का उपयोग अधिक से अधिक नागरिक कर सकें।

    जानकारी के अनुसार बेस फेयर 20 के बजाय 10 रुपये करने पर मंथन चल रहा है। इसके अलावा महिलाएं, स्टूडेंट्स और सीनियर सिटीजन के लिए अलग-अलग स्कीम पर विचार चल रहा है।

    इंदौर के फार्मूले पर शेड्यूल बनाया जा रहा है। हालांकि इस बारे में मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि सबकुछ पहले से तय है। लोकार्पण की तारीख कंफर्म होते ही शेड्यूल, फेयर और स्कीम पर मुहर लगा दी जाएगी।
    संचालन के समय में भी होगी कटौती

    भोपाल मेट्रो का संचालन सुबह आठ से रात आठ बजे तक करने का प्रस्ताव भी है। बताया जा रहा है कि इंदौर में रात नौ बजे तक मेट्रो चलाई जाती थी, लेकिन कम भीड़ के चलते इसका संचालन एक घंटा कम करना पड़ा। लिहाजा, इसके समय में भी कमी हो सकती है।

    पूरा रूट तैयार होने पर बढ़ाए जाएंगे फेरे

    प्रायोरिटी कारिडोर पर शुरुआती दिनों में हर 30 मिनट में मेट्रो चलाई जाएगी। जब पूरा 16.74 किलोमीटर का आरेंज लाइन रूट एम्स से करोंद तक तैयार हो जाएगा, तब इसकी फ्रीक्वेंसी घटाकर 10 मिनट पर कर दी जाएगी। सुभाष नगर से एम्स और एम्स से सुभाष नगर के बीच प्रतिदिन 25-25 फेरों का संचालन प्रस्तावित है।
    इंदौर की स्कीम भोपाल में हो सकती है लागू

    इंदौर मेट्रो में लागू स्कीम को भोपाल में भी लागू किया जा सकता है। हालांकि भोपाल में महिलाएं, स्टूडेंट्स और सीनियर सिटीजन के लिए किराये पर अलग-अलग छूट दी जा सकती है। इसको लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। ज्ञात हो कि इंदौर में पहले तीन महीने तक 25 प्रतिशत तक बेस फेयर में छूट दी गई थी। भोपाल में भी इसको लागू किया जा सकता है। हालांकि आखिरी निर्णय टिकट फेयर कमेटी लेगी।

    10 दिसंबर का लक्ष्य

    भोपाल मेट्रो कंपनी अपने व्यावसायिक संचालन के बेहद करीब पहुंच चुकी है। 10 दिसंबर तक सभी तैयारियां पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि 13 दिसंबर की तारीख कंफर्म होती है तो उस दिन लोकार्पण में कोई दिक्कत न आए। हालांकि सीएम कार्यालय से अभी लोकार्पण के लिए तारीख कंफर्म नहीं की गई है।

     

  • भोपाल मतदाता सूची में बड़ा बदलाव: 2.28 लाख नाम नागरिकता दस्तावेज न होने पर हट सकते हैं

     भोपाल
     विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए गणना पत्रक जमा करने का काम भोपाल जिले में निर्धारित समय से चार दिन पहले समाप्त हो गया है। इसके लिए 2029 बीएलओ लगे हुए थे। हालांकि बड़ी संख्या में मतदाताओं की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जिले के कुल 21,25,908 मतदाताओं में से 17,17,808 मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान हो चुका है। जबकि 2,28,387 मतदाताओं का नाम 2003 की सूची में नहीं मिला।

    अब उन्हें अपनी भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेज निर्वाचन कार्यालय में प्रस्तुत करने होंगे। बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग ने चार दिसंबर से गणना पत्रकों को एप पर अपलोड करने की तारीख बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दी थी। जबकि भोपाल जिले ने काम सात दिसंबर को ही पूरा कर लिया है। चिंता की बात यह है कि 4,08,106 मतदाताओं के गणना पत्रक बीएलओ के पास वापस नहीं पहुंचे हैं।

    दावा-आपत्ति पेश कर नाम जुड़वा सकते हैं

    शहर की बैरसिया, हुजूर, मध्य, उत्तर, दक्षिण-पश्चिम, गोविंदपुरा, नरेला विधानसभा क्षेत्रों के जिन लोगों के गणना पत्रक नहीं जमा हुए है, उन लोगों की सूची भी कॉलोनियों में चस्पा की गई थीं। इसके बाद भी लोग नहीं पहुंचे। यदि ये मतदाता अगले एक माह के भीतर अपने क्षेत्र के बीएलओ या निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के पास गणना पत्रक के साथ नहीं पहुंचते हैं तो उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर कार्य पूर्ण होने के बाद एक माह तक मतदाता दावा-आपत्ति पेश कर अपने नाम जुड़वा सकते हैं।
    मतदाताओं को जारी किया जाएगा नोटिस

    विधानसभा क्षेत्रों में नरेला, दक्षिण-पश्चिम, मध्य और गोविंदपुरा में गणना पत्रक बड़ी संख्या में जमा नहीं हो पाए हैं, जबकि बैरसिया में सबसे कम मामले सामने आए हैं। जिले में डिजिटाइज्ड मतदाताओं का 10.74 प्रतिशत यानी 2.28 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिन्हें अब नोटिस जारी किया जाएगा।

    सभी को भारतीय नागरिकता से जुड़े प्रमाण दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि निर्धारित अवधि में दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर ऐसे मतदाताओं के नाम आगामी मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे। जिले भर में इस कार्य को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है।
    उत्कृष्ट कार्य के लिये उपेन्द्र कौशल हुए सम्मानित

    भोपाल कलेक्टर कार्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में नरेला विधानसभा अंतर्गत एसआईआर निर्वाचन कार्य में बीएलओ सुपरवाइजर के रूप उत्कृष्ट कार्य के लिये कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने शिक्षक नेता उपेन्द्र कौशल को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उप जिला निर्वाचन अधिकारी एवं एसडीएम भुवन गुप्ता, तहसीलदार, वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी, बीएलओ सुपरवाइजर, बीएलओ एवं निर्वाचन कार्य में संलग्न कर्मचारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
    14 फरवरी को होगा नई मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन

    12 से 15 दिसंबर तक सूची में सुधार आदि कार्य कर ड्राफ्ट रोल तैयार किया जाएगा। इसके बाद 16 दिसंबर को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन किया जाएगा। 16 दिसंबर से 15 जनवरी 2026 तक दावा-आपत्तियां ली जाएंगी।

    16 दिसंबर से सात फरवरी 2026 तक नोटिस चरण (जारी करना, सुनवाई और सत्यापन) पर निर्णय और दावों और आपत्तियों का निपटान रजिस्ट्रीकरण, सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा एक साथ किया जाएगा। 10 फरवरी तक मतदाता सूची के मापदंडों की जांच कर आयोग से अंतिम प्रकाशन के लिए अनुमति लेने के बाद 14 फरवरी को अंतिम प्रकाशन किया जाएगा।

    एक महीने का समय दिया गया है

        बस्तियों की दीवारों पर लगाए गए थे पोस्टर एसआईआर के तहत गणना पत्रक चरण का काम तय समयसीमा से पहले पूरा कर लिया गया। जिन मतदाताओं ने गणना पत्रक वापस नहीं किए हैं, उनके नामों की सूची बीएलओ ने कॉलोनियों और बस्तियों की दीवारों पर लगवाई थी। इसके बाद भी लोगों ने गणना पत्रक जमा नहीं किए। अब ऐसे लोगों को एक महीने का समय दिया गया है। वहीं जिनका रिकॉर्ड साल 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिल रहा है, वो जिला निर्वाचन कार्यालय में कागजात जमा करा सकते हैं। – भुवन गुप्ता, उप निर्वाचन अधिकारी

     

  • लोकतांत्रिक व्यवस्था में कैग की अहमियत: रायपुर में राज्यपाल रमेन डेका का संबोधन

    रायपुर : लोकतांत्रिक ढांचे में कैग की सर्वाेच्च भूमिका – रमेन डेका
    राज्यपाल  रमेन डेका

    ऑडिट पखवाड़ा के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल

    रायपुर

    महालेखाकार कार्यालय के आवासीय परिसर स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  डेका ने अपने उद्बोधन में कहा कि लेखा परीक्षा केवल सरकारी व्यय और राजस्व की जांच तक सीमित नहीं है, यह प्रशासनिक पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन, और जनसेवा में उत्तरदायित्व का एक सशक्त माध्यम है। हमारे लोकतांत्रिक ढांचे मेें भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की सर्वाेच्च भूमिका है। 

    ऑडिट पखवाड़ा के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल

    लेखा परीक्षा को संवैधानिक प्राधिकरण का दर्जा
    राज्यपाल  रमेन डेका आज प्रधान महालेखाकार कार्यालय में ऑडिट पखवाड़ा 2025 के समापन समारोह में शामिल हुए। लेखा परीक्षा दिवस के अवसर पर 20 नवम्बर से 8 दिसंबर 2025 तक यह सप्ताह आयोजित किया गया।  राज्यपाल  डेका ने कहा कि भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग का इतिहास गौरवशाली रहा है। इसकी नीव ब्रिटिश शासन के दौरान 1858 में प्रारंभ हुई लेखा परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी हुई है। स्वतंत्रता के बाद हमारे संविधान निर्माताओं ने इस संस्था की महत्ता को समझते हुए इसे संवैधानिक प्राधिकरण का दर्जा प्रदान किया। 

    कैग की भूमिका प्रशासनिक सुधार, नवाचार एवं पारदर्शिता को प्रोत्साहित करना है 

    ऑडिट पखवाड़ा के समापन समारोह में शामिल हुए राज्यपाल
     डेका ने कहा कि तेजी से बढ़ते डिजिटल प्रशासन के दौर में कैग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। यह संस्था केवल कमियों को उजागर नहीं करती, बल्कि प्रशासनिक सुधार, नवाचार एवं पारदर्शिता को प्रोत्साहित करती है।  यह न केवल सरकारी कार्यों में वित्तीय अनुशासन लाने का कार्य करता है, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने का महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाता है। इस विभाग के अधिकारियों की निष्पक्षता और कर्मठता ने इसे एक सशक्त संस्थान के रूप में स्थापित किया है।

    अधिकारियों की मेहनत और ईमानदारी से जनता का भरोसा मजबूत होगा
    राज्यपाल ने  विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे इस प्रतिष्ठित संस्था की परंपराओं को बनाए रखते हुए निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें। उनकी मेहनत और ईमानदारी से ही जनता का भरोसा और मजबूत होगा। जीवन में एक कार्य ऐसा करें जिसमें लेने का नहीं बल्कि देने का हो, जिससे हमारा देश 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करेगा। 

             कार्यक्रम में स्वागत भाषण प्रधान महालेखाकार  यशवंत कुमार ने दिया। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन महालेखाकार (लेखा परीक्षा)  मोहम्मद फैजान ने किया। इस अवसर पर राज्यपाल  डेका ने सामुदायिक भवन परिसर में वृक्षारोपण किया। कार्यक्रम में महालेखाकार कार्यालय के सभी अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

  • शहर के मुख्य स्टेशन पर दबाव कम करने निशातपुरा रेलवे स्टेशन की तैयारी, जनवरी 2026 से खुलेगा

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को जल्द ही एक और रेलवे स्टेशन की सौगात मिलने वाली है. नए साल यानी जनवरी 2026 में निशातपुरा रेलवे स्टेशन आम लोगों के लिए खुलने जा रहा है. भारतीय रेलवे ने इसके लिए आधिकारिक घोषणा कर दी है. इस स्टेशन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. इस स्टेशन के शुरू होने के बाद भोपाल जंक्शन और रानी कमलापति स्टेशन पर यात्रियों का दबाव कम होगा |

    लाखों यात्रियों को मिलेगी सुविधा

    निशातपुरा रेलवे स्टेशन के चालू होने के बाद से करोंद, भानपुर, मिनाल रेसीडेंसी, हाउसिंग बोर्ड, लांबाखेड़ा, बैरसिया रोड समेत आसपास रहने वाले लाखों यात्रियों को इससे राहत मिलेगी. अक्सर इन इलाकों में रहने वाले लोगों को ट्रेन पकड़ने के लिए ट्रैफिक का सामना भी करना पड़ता था, अब पुराने भोपाल समेत होशंगाबाद रोड पर यातायात का दबाव कम होगा. स्टेशन परिसर में पार्किंग, टिकट व्यवस्था, यात्री सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था का कार्य लगभग पूरा हो गया है|

    स्टेशन शुरू होते ही भोपाल रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे प्लेटफार्म पर भीड़ घटेगी और ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आएगा। इससे करोंद, लालघाटी, गांधी नगर, अयोध्या नगर, आनंद नगर, भीमनगर व आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

    इंजन रिवर्सल की झंझट होगी खत्म

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अगर भोपाल स्टेशन पर समाप्त होने वाली कुछ ट्रेनों का टर्मिनेशन निशातपुरा तक बढ़ाया जाता है, तो इंजन रिवर्सल की जरूरत खत्म हो जाएगी। अभी भोपाल स्टेशन पर इंजन की दिशा बदलने में 30 से 45 मिनट तक का समय लग जाता है, जिससे ट्रेनें देरी का शिकार होती हैं। निशातपुरा से यह समय बचेगा और ट्रेनों को सीधे इंदौर, उज्जैन और रतलाम की ओर रवाना करना आसान होगा।

    निशातपुरा पर इन ट्रेनों को मिलेगा स्टॉपेज

    पहले निशातपुरा रेलवे स्टेशन का उपयोग माल ढुलाई और दूसरे कमर्शियल कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता था. फिलहाल भोपाल में तीन रेलवे स्टेशन हैं, इनमें भोपाल जंक्शन, रानी कमलापति और संत हिरदाराम नगर शामिल हैं | रिपोर्ट के अनुसार शुरुआत में मालवा एक्सप्रेस और जबलपुर-वेरावल (सोमनाथ एक्सप्रेस) को स्टॉपेज की मंजूरी दी गई है |

    इसके बाद कुछ और ट्रेनों के स्टॉपेज को हरी झंडी मिल जाएगी. इनमें जयपुर-चेन्नई एक्सप्रेस, अजमेर-हैदराबाद एक्सप्रेस, इंदौर-हावड़ा, इंदौर-राजेंद्र नगर, विंध्याचल, राज्यरानी, भोपाल-बीना मेमू, बिलासपुर एक्सप्रेस, झांसी-इटारसी पैसेंजर जैसी ट्रेनें शामिल हैं |

    नहीं बदलने होगी इंजन की दिशा

    रेलवे स्टेशन के उपयोग के लिए निशातपुरा को एनएसजी-3 कैटेगरी में शामिल किया गया है. वर्तमान की बात करें तो कुछ ट्रेन ऐसी हैं जिनका स्टॉपेज भोपाल जंक्शन में होता है और फिर इन्हें उज्जैन और इंदौर की ओर जाना जाता है. इस वजह से ट्रेन का इंजन बदलना पड़ता है. इस वजह से फिजूल समय जाता है, अब इससे मुक्ति मिलेगी और इंजन की दिशा नहीं बदलनी पड़ेगी |

    सुविधाएं लगभग तैयार

    स्टेशन परिसर में प्लेटफार्म विस्तार, टिकट घर, प्रतीक्षालय, पार्किंग, सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था का काम अंतिम चरण में है। साथ ही भोपाल आउटर पर ट्रेनों को खड़ा रखने की समस्या को भी इस स्टेशन के जरिए काफी हद तक दूर करने की योजना बनाई गई है।
    इन ट्रेनों को मिल सकता है नया ठहराव

        निशातपुरा स्टेशन से हाल्ट देने की प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है। पहले ही मालवा एक्सप्रेस और जबलपुर-वेरावल (सोमनाथ) एक्सप्रेस का यहां ठहराव नोटिफाई किया जा चुका है। इसके साथ-साथ जिन ट्रेनों को यहां रोकने की तैयारी चल रही है, उनमें जयपुर-चेन्नई एक्सप्रेस, अजमेर-हैदराबाद एक्सप्रेस, इंदौर-हावड़ा एक्सप्रेस, इंदौर-राजेंद्र नगर एक्सप्रेस, विंध्याचल राज्यरानी, भोपाल-बीना मेमू, बिलासपुर एक्सप्रेस और झांसी-इटारसी पैसेंजर शामिल हैं। – नवल अग्रवाल, पीआरओ, भोपाल मंडल

     

  • नक्सलवाद उन्मूलन में छत्तीसगढ़ ने रचा नया इतिहास: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    रायपुर
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजनांदगांव में आयोजित  प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष राज्य के इतिहास में निर्णायक मोड़ साबित हुए हैं।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा निर्धारित लक्ष्य—“31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन”—की दिशा में छत्तीसगढ़ तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और यह अब अंतिम सांसें गिन रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ों में न्यूट्रलाइज हुए, जबकि 4,000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी दी, जो नक्सलवाद के कमजोर पड़ने का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के पराक्रम से बस्तर में दशकों से जमी हिंसा के विरुद्ध निर्णायक बढ़त मिली है।

    उन्होंने राज्य सरकार की नई पुनर्वास नीति की भी विस्तृत जानकारी दी। इसके तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15,000 प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति, 3 वर्षों तक 10,000 रुपये मासिक वित्तीय सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार-संबंधी कार्यक्रम शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि "गोलीबारी की भाषा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ना" अब बस्तर में हकीकत बन रहा है। पंडुम कैफ़े जैसे नवाचार आज सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक हैं।

    उन्होंने कहा कि बस्तर में तेजी से सुरक्षा कैंप खुलने और प्रशासन की पहुंच बढ़ने के साथ ही 400 से अधिक गाँव पुनः आबाद हो चुके हैं। नियद नेल्ला नार  योजना के माध्यम से इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएँ और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाएँ पहुँच रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा—“जहाँ कभी गोलीबारी की आवाज आती थी, आज वहाँ स्कूल की घंटियाँ बज रही हैं। कई गाँवों में वर्षों बाद ध्वजारोहण हुआ, चुनाव में लोग निर्भीक होकर भाग ले रहे हैं और राशन-कार्ड से लेकर मोबाइल नेटवर्क तक की सुविधाएँ अब सुगमता से उपलब्ध हो रही हैं।”

    मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर को भविष्य के विकास का बड़ा केंद्र बताते हुए कहा कि कृषि, सिंचाई, वन-उत्पाद, पशुपालन और छोटे उद्योगों के लिए अभूतपूर्व संभावनाएँ बन रही हैं। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति (2024–30) में नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। वनोपज आधारित वैल्यू एडिशन, प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्थायी आय से जोड़ा जा रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से बस्तर अब वैश्विक नक्शे पर तेजी से पहचान बना रहा है। कुटुमसर गुफा, झरने, अबूझमाड़ के जंगल और जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर विश्व आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। होम-स्टे मॉडल तेजी से फल-फूल रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।

    अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद उन्मूलन की यह ऐतिहासिक प्रगति राज्य के शहीद जवानों, सुरक्षा बलों के अथक परिश्रम और जनता के विश्वास की जीत है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री श्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप बस्तर नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास की मुख्यधारा में शामिल होगा।

  • PM Janman Yojana: सम्मान और सुरक्षित जीवन की ओर बढ़ते कदम

    रायपुर
    किसी भी सरकारी योजना का वास्तविक महत्व तभी सिद्ध होता है, जब उसका लाभ जमीनी स्तर पर आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाए। ऐसी ही एक सशक्त योजना है प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन), जिसका प्रभाव रायगढ़ जिले में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। इस योजना के अंतर्गत लैलूंगा विकासखंड के सुदूर ग्राम कुर्रा के निवासी श्री रतिराम बिरहोर को उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना-पक्का और सुरक्षित आवास-साकार हुआ। 

    जीवन में स्थायित्व, आत्मविश्वास और सम्मान भी लेकर आया पीएम-जनमन
    वर्षों तक कच्चे मकान में रहकर बरसात, ठंड और जहरीले जीव-जंतुओं के खतरे के बीच जीवन-यापन करने वाले रतिराम और उनका परिवार जब पीएम जनमन योजना के तहत स्वीकृत आवास में प्रवेश किया, तो वह क्षण उनके लिए अविस्मरणीय बन गया। आवास स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और निर्धारित समय में पूर्ण भी हुआ। नया पक्का घर न केवल उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि उनके जीवन में स्थायित्व, आत्मविश्वास और सम्मान भी लेकर आया है। 

    जनजातीय समूहों के सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्त्वाकांक्षी मिशन
    रतिराम का कहना है कि पहले जिस घर में रहना मजबूरी था, वहीं अब पक्के मकान में रहना गर्व की अनुभूति देता है। उल्लेखनीय है कि पीएम-जनमन योजना, जिसकी शुरुआत भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023 में की गई, विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के सर्वांगीण विकास के लिए एक महत्त्वाकांक्षी मिशन है। इस अभियान का उद्देश्य आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, बिजली, आजीविका और संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। गौरतलब है कि पीएम जनमन योजना आज केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों के लिए न्याय, समानता और आत्मसम्मान का मजबूत आधार बन चुकी है। ग्राम कुर्रा के रतिराम की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब योजनाएं सही ढंग से लागू होती हैं, तो वे लोगों की तस्वीर ही नहीं, तकदीर भी बदल देती हैं।

  • रबी क्षेत्र बढ़ाने कृषि विभाग करेगा जागरूकता शिविरों का आयोजन

    रायपुर
    प्रधानमंत्री धन.धान्य कृषि योजना (PMDDKY) 2025.26 से शुरू की गई एक सरकारी पहल है, जिसका लक्ष्य कम प्रदर्शन वाले कृषि जिलों में किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाना है, जिसके लिए 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को समन्वित किया गया है।  इसमें सिंचाई, भंडारण, आसान ऋण तथा फसल विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया हैए, ताकि किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके और देश को दालों सहित विभिन्न फसलों में आत्मनिर्भर बनाने के मिशन का समर्थन किया जा सके। प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के अंतर्गत कृषकों को रबी फसल की आधुनिक तकनीक से अवगत कराने तथा मत्स्यपालन, पशुपालन सहित अन्य कृषि-संबद्ध व्यवसायों की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रत्येक समिति में विशेष प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
     
    किसानों आधुनिक खेती से जोडकर लाभान्वित करना है
    शिविरों में जशपुर जिले के ऐसे उत्कृष्ट एवं प्रगतिशील कृषकों को प्रशिक्षक के रूप में जोड़ा गया है, जो आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर खेती में अधिक उत्पादन एवं बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। ये प्रशिक्षक कृषक अपने अनुभव, कठिनाईयों तथा विभागीय योजनाओं से प्राप्त लाभों को अन्य कृषकों के साथ साझा करेंगे, जिससे अधिक से अधिक किसान आधुनिक खेती अपनाकर लाभान्वित हो सकें।

    साथ ही कृषि एवं संबद्ध विभाग के अधिकारी किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, अनुदान प्राप्ति की प्रक्रिया, तथा वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के मार्गदर्शन की जानकारी प्रदान करेंगे। इन शिविरों में कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिक भी शामिल रहेंगे, जो आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार कर किसानों को उन्नत खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

    दलहन-तिलहन उत्पादक कृषकों को समर्थन मूल्य पर उपज बेचने की सुविधा
    जशपुर जिले में कुल 09 आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों का पंजीयन किया गया है, जहाँ दलहन-तिलहन फसलें उगाने वाले कृषक अपनी उड़द, मूंग एवं मूंगफली को बाजार मूल्य कम होने की स्थिति में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विक्रय कर सकते हैं। कृषकों के हित में प्रशासन ने अपील की है कि वे एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन अवश्य कराएँ। पंजीयन कराने में किसी भी प्रकार की सहायता हेतु संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

    किसान बढ़ा सकते हैं अपनी आय कृषक उत्पादक संगठन से जुड़कर 
    शिविर के दौरान जिले के जशपुर जिले के प्रत्येक विकासखंड के कृषक उत्पादक संगठन के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। जिन कृषकों ने अभी तक किसी कृषक उत्पादक संगठन की सदस्यता नहीं ली है, वे शिविर में उपस्थित प्रतिनिधियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सदस्यता हेतु आवेदन कर सकते हैं। कृषक उत्पादक संगठन से जुड़कर किसान न केवल आधुनिक कृषि तकनीक, समूह विपणन और सामूहिक क्रय-बिक्री का लाभ उठा सकते हैं, बल्कि अपनी आय दोगुनी करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकते हैं।

  • कोरिया : जवानों के त्याग और बलिदान से ही हम सुरक्षित हैं-कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी

    कोरिया : जवानों के त्याग और बलिदान से ही हम सुरक्षित हैं-कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी

    सशस्त्र सेना झण्डा दिवस पर हुआ आत्मीय संवाद और सम्मान समारोह

    कोरिया

    सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के अवसर पर आज कलेक्ट्रेट सभागृह, बैकुण्ठपुर में सादगी और गरिमा से परिपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश की रक्षा में जुटे सैनिकों के अदम्य साहस व अनुकरणीय बलिदान को नमन किया गया।

    मुख्य अतिथि कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी ने कहा-हम सभी नागरिक आज सुरक्षित जीवन जी पा रहे हैं तो इसका श्रेय हमारे सेना और सुरक्षा बलों के जवानों को जाता है। उनका त्याग केवल उनका अपना नहीं, बल्कि पूरे परिवार का त्याग होता है। कड़ाके की ठंड हो, बारिश हो या भीषण गर्मी- हमारे जाँबाज़ सैनिक राष्ट्र की सेवा में हर पल तत्पर रहते हैं।

    उन्होंने आगे कहा कि जवानों का समर्पण न केवल राष्ट्र की रक्षा करता है बल्कि नागरिकों के जीवन और भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।

    कार्यक्रम में लेफ्टिनेन्ट कर्नल जितेन्द्र कुमार देवांगन (से.नि.), जिला सैनिक कल्याण अधिकारी द्वारा कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी, अपर कलेक्टर श्री सुरेन्द्र प्रसाद वैद्य, डिप्टी कलेक्टर श्री डी.डी. मंडावी, अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण तथा क्षेत्र के प्रसिद्ध सैन्य-गाथा कवि श्री जी.पी. नेमा, सुबेदार सुनील कुमार सिंह, भूतपूर्व सैनिक और वीर नारियों का लेपल पिन लगाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।

    जिला सैनिक कल्याण कार्यालय द्वारा उपस्थित सभी अधिकारी-कर्मचारी, पूर्व सैनिकों, शहीद परिवारों की विधवाओं, सेवारत सैनिकों एवं उनके आश्रितों को ध्वज लगाकर सम्मानित किया गया। बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और भी अधिक अर्थपूर्ण बनाया।

    सभी अतिथियों ने सैनिकों के अद्वितीय साहस, अनुशासन और बलिदान को सलाम करते हुए उनके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

  • उत्तर बस्तर कांकेर : जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन 12 दिसम्बर से

    उत्तर बस्तर कांकेर : जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन 12 दिसम्बर से

    उत्तर बस्तर कांकेर

    कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार जिले के आम ग्रामीणजनों की आवश्यकताओं, शिकायतों एवं समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन आगामी 12 दिसम्बर से 25 मार्च 2026 तक किया जाएगा। उक्त शिविरों में सभी जिला स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय एवं क्लस्टर स्तर के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने शिविरों के सुचारू रूप से आयोजन के लिए अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री स्टेला खलखो को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।

    प्राप्त जानकारी अनुसार कोयलीबेड़ा विकासखण्ड की ग्राम पंचायत चारगांव में 12 शुक्रवार दिसम्बर को शिविर लगाया जाएगा, जिसमें ग्राम पंचायत चारगांव, छोटेबोदेली, पोरोण्डी, सिकसोड़, सुलंगी, तुरसानी और बदरंगी के ग्रामीण शामिल होंगे। इसी प्रकार अंतागढ़ विकासखण्ड में शुक्रवार 19 दिसम्बर को हाईस्कूल प्रांगण भैंसगांव में ग्राम बैहासाल्हेभाट, फुलपाड़, कोलर, कोसरोण्डा, मंगतासाल्हेभाट, तालाबेड़ा, ताड़ोकी और बोंदानार तथा दुर्गूकोंदल विकासखण्ड में 26 दिसम्बर शुक्रवार को स्कूल ग्राउंड चेमल में चिहरो, गुलालबोड़ी, आमागढ़, हानपतरी, बोदेली, गुदूम, तुमड़ीसुर, भेजर, हिंगनपुरी और मेरेगांव ग्राम पंचायत के ग्रामीण शिविर में शामिल होंगे। इसके अलावा भानुप्रतापपुर विकासखण्ड में बुधवार 07 जनवरी को हायर सेकेण्डरी स्कूल कच्चे में ग्राम पंचायत साल्हे, भैंसाकन्हार, ईरागांव, टेढ़ईकोंदल, भैंसमुण्डी, चौगेल तथा मुल्ला, विकासखण्ड कोयलीबेड़ा में बुधवार 04 फरवरी को हाई स्कूल प्रांगण कौड़ोसाल्हेभाट में ग्राम पंचायत जिरामतराई, दड़वीसाल्हेभाट, उदनपुर, कामतेड़ा, कोयलीबेड़ा, केसेकोड़ी और कड़मे के ग्रामीण शामिल होंगे। इसी प्रकार 13 फरवरी शुक्रवार को दुर्गूकोंदल विकासखण्ड के स्कूल ग्राउण्ड मेड़ो में शिविर लगाया जाएगा, जिसमें ग्राम पंचायत चाहचाड़, हाहालद्दी, सिहारी, खुटगांव, दोड़दे, साधुमिचगांव, पड़गाल, भुसकी, पलाचूर, दुर्गूकांदल एवं भुरकागुदूम में, भानुप्रतापपुर विकासखण्ड में 18 फरवरी को शीतला मंदिर मैदान चिचगांव में ग्राम पंचायत भानबेड़ा, डोंगरकट्टा, बयानार, उंचपानी, कुल्हाड़कट्टा, रानवाही, मुंगवाल, बुदेली, दाबकट्टा, जलीनकसा, चिचगांव और रानीडोंगरी, 26 फरवरी को अंतागढ़ विकासखण्ड के माध्यमिक शाला खेल मैदान सरेवाही में ग्राम पंचायत भैंसासुर, टेमरूपानी, मण्डागांव, हिन्दुबिनापाल, कानागांव, बुलावण्ड, मासबरस, जेठेगांव, अमोड़़ी, कोदागांव तथा 13 मार्च को कांकेर विकासखण्ड के कलमुच्चे चौक में ग्राम पंचायत कलमुच्चे, पीढ़ापाल, मुरागांव, तुलतुली, मांदरी, कुरिष्टीकुर, कोकपुर, मालगांव,कोड़ेजुंगा और बारदेवरी के ग्रामीण शामिल होंगे। इसी तरह 18 मार्च 2026 को चारामा विकासखण्ड के पंडरीपानी हाईस्कूल मैदान में शिविर लगाया जाएगा, जिसमें ग्राम पंचायत हाराडुला, हल्बा, भिलाई, पंडरीपानी, भिरौद, करिहा, जेपरा, गितपहर, भानपुरी, रानीडोंगरी, कुर्रूभाट, टांहकापार, किलेपार, कोटेला एवं तुएगहन तथा 25 मार्च 2026 को नरहरपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत मुसुरपुट्टा मंगल भवन में ग्राम बासनवाही, साईंमुण्डा, मावलीपारा, मांडाभर्री, बांगाबारी, दुधावा, सारवण्डी, मालगांव, दलदली, घोटियावाही, देवडोंगर, शामतरा, धनोरा और भिरौद के ग्रामीण शामिल रहेंगे। उक्त शिविर में कलेक्टर ने अनुभाग स्तर, ब्लॉक स्तरीय एवं क्लस्टर स्तर के अधिकारी-कर्मचारी के अलावा सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहकर विभागीय योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को देने तथा यथासम्भव शिविर स्थल पर प्राप्त आवेदनों का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नेचुरोपैथी भवन निर्माण के लिए दी 2 करोड़ 62 लाख रूपये की सौगात

    रायपुर,

    कई प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, योग केंद्र और वेलनेस हब खुद को नेचुरोपैथी  कहते हैं। जो प्राकृतिक चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान करता है और बापू भवन इसका ऐतिहासिक घर है, जिसे गांधीजी ने अपनाया था। खासकर छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का उद्देश्य प्राकृतिक उपचार, योग, आहार, मिट्टी स्नान और हर्बल दवाओं के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य प्रदान करना है।  जशपुर जिले के कुनकुरी नगर की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नेचुरोपैथी भवन निर्माण के लिए 2 करोड़ 62 लाख रुपए की मंजूरी प्रदान की है।

    निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। भवन तैयार हो जाने के बाद कुनकुरी नगरवासियों को प्राकृतिक चिकित्सा की अत्याधुनिक सुविधा अपने ही नगर में उपलब्ध होगी। यह भवन न सिर्फ लोगों को आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की ओर प्रोत्साहित करेगा, बल्कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उपचार के लिए बड़ी राहत भी देगा। अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर दराज जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नगरवासियों ने इस दूरदर्शी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सुविधा स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई दिशा और नई उम्मीद लेकर आएगी।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई ऊंचाई को छूता जशपुर
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सौगातें मिल चुकी है। मेडिकल कॉलेज के लिए बड़ा कदम उठाते हुए वित्त विभाग से 359 करोड़ की सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है । इसी प्रकार 220 विस्तर अस्पताल के लिए 32 करोड़ की मंजूरी, नर्सिंग महाविद्यालय भवन के 8 करोड़ की मंजूरी, फिजियोथेरेपी महाविद्यालय के 14 करोड़ की मंजूरी, कल्याण आश्रम अत्याधुनिक चिकित्सालय भवन के लिए 35 करोड़ की मंजूरी, ग़िनाबहर में मातृत्व शिशु चिकित्सालय भवन निर्माण के 8 करोड़ की मंजूरी सहित कई सौगातें दी गई है, जो जिले वासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वरदान साबित होंगी।

  • मुख्यमंत्री ने पिछले दो वर्ष में एमएसएमई की 31प्रतिशत ग्रोथ पर दी बधाई

    मेट्रोपॉलिटन सिटी के दृष्टिगत विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को उद्योग जगत के बीच करें प्रचारित : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

    ग्वालियर में लगभग 2 लाख करोड़ निवेश वाली इकाइयों का इस माह के अंत तक होगा भूमिपूजन और शुभारंभ
    मुख्यमंत्री ने पिछले दो वर्ष में एमएसएमई की 31प्रतिशत ग्रोथ पर दी बधाई
    फूड पार्क सहित अन्य ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को एमएसएमई से जोड़ें
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमएसएमई विभाग के दो वर्ष के कार्यों की समीक्षा की

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एमएसएमई विभाग के अधिकारियों से कहा है कि वे इंदौर और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के दृष्टिगत विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को उद्योग जगत के बीच इस तरह से प्रचारित और प्रस्तुत करें, जिससे अधिक से अधिक औद्योगिक इकाइयां स्थापित हों तथा व्यापक निवेश और रोजगार सृजित हो सकें। उन्होंने उद्योग वर्ष के समापन पर इस माह के अंत तक ग्वालियर में लगभग 2 लाख करोड़ निवेश वाली इकाइयों के भूमिपूजन औद्योगिक भूखंड आवंटन, शुभारंभ आदि का व्यापक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने एमएसएमई के पंजीकरण में जबरदस्त 31प्रतिशत की ग्रोथ पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे पिछले दो वर्ष में छोटे उद्योगों के लिए राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए शानदार वातावरण का उदाहरण बताया।

    उन्होंने फूड पार्क सहित अन्य ग्रामीण और कुटीर उद्योगों को भी एमएसएमई से जोड़ने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को खजुराहो में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग के गत 2 वर्ष के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। एमएसएमई मंत्री  चेतन्य कुमार काश्यप, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत दो वर्ष में मध्यप्रदेश में एमएसएमई और स्टार्टअप के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। प्रदेश में इस अवधि में कई लाख करोड़ का निवेश आया है और नवीन औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन और शुभारंभ हुआ है। एमएसएमई इकाइयों को 2780 करोड़ की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई गई है।मुख्यमंत्री ने 2019 से उद्यमों के लिए लंबित प्रोत्साहन राशि के संपूर्ण भुगतान को ऐतिहासिक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग वर्ष के समापन पर यह विभाग की जिम्मेदारी है कि पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के साथ इन उपलब्धियों का मीडिया को भी मौके पर निरीक्षण कराए, जिससे निवेश और रोजगार में हुए कार्य पूरे देश में प्रचारित हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल सहित बड़े शहरों में फ्लैटेड इंडस्ट्रियल पार्क के विकास कार्यों में प्रदेश के विकास प्राधिकरणों को जोड़ें, जिससे मितव्ययता बनी रहे। प्रदेश में एमएसएमई एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार, औद्योगिक संरचना के विकास तथा आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। 

    बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश में 4.51 लाख विनिर्माण उद्यम, 6,340 से अधिक स्टार्टअप और 3,023 से अधिक महिला स्टार्टअप सक्रिय हैं। प्रदेश में 102 से अधिक इन्क्यूबेटर कार्यरत हैं। विनिर्माण क्षेत्र में ₹39,600 करोड़ रूपये का निवेश प्राप्त हुआ है।

    नीतिगत सुधार एवं विभागीय उपलब्धियाँ

    विगत दो वर्षों में विभाग ने नीतिगत सुधार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। एमएसएमई एवं स्टार्टअप के लिए नई नीतियाँ लागू की गईं। प्रदेश में 116 से अधिक कार्यशालाओं के माध्यम से जागरूकता एवं प्रशिक्षण दिया गया। भू-आवंटन एवं अन्य प्रक्रियाओं को फेसलेस ऑनलाइन माध्यम से समयबद्ध सेवा के रूप में लागू किया गया। वित्तीय सहायता के अंतर्गत 4,065 इकाइयों को 2,780.44 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई और  220 सहायता प्रकरणों का राज्य स्तरीय साधिकार समिति द्वारा निराकरण किया गया।

    औद्योगिक अधोसंरचना का विस्तार

    समीक्षा बैठक में बताया गया कि औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। कुल 1,240 भूखंड उद्यमियों को उपलब्ध कराए गए, 13 औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ और 14 नए औद्योगिक क्षेत्रों को स्वीकृति प्रदान की गई। वर्तमान में 31 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास कार्य प्रगति पर है। निजी भूमि पर स्वीकृत 30 औद्योगिक क्षेत्रों में से 12 का विकास कार्य पूर्ण हुआ है। विभाग द्वारा पहली बार गोविंदपुरा, भोपाल में फ्लैटेड इंडस्ट्रियल पार्क का विकास कर नवाचार को प्रोत्साहन दिया गया है।

    वित्तीय समावेशन एवं उद्यम क्रांति योजना

    मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत 15,838 युवाओं को लाभान्वित किया गया और 1,087.27 करोड़ रूपये की ऋण राशि वितरित की गई। प्रदेश की साख योजना के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य 2,45,038 करोड़ रूपये के विरुद्ध सितम्बर 2025 तक 1,93,872 करोड़ रूपये वितरित किए गए, जो पिछले दो वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण वृद्धि है। इससे एमएसएमई क्षेत्र में वित्तीय उपलब्धता और उद्यमिता को मजबूती मिली है।

    फेसिलिटेशन कॉउंसिल की उपलब्धियाँ

    एमएसएमई फेसिलिटेशन काउंसिल द्वारा विलंबित भुगतान के 439 प्रकरणों का निराकरण किया गया और काउंसिल की सुनवाई पूरी तरह डिजिटल माध्यम से सुनिश्चित की गई। ODR पोर्टल के प्रभावी उपयोग के लिए काउंसिल को वर्ष 2025 में राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है।

    निवेश संवर्धन एवं राष्ट्रीय उपलब्धियाँ

    समीक्षा बैठक में बताया गया कि जीआईएस- 2025 के दौरान प्रदेश को 2,279 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनकी कुल राशि 21,000 करोड़ रूपये है। इनमें से 729 प्रस्ताव क्रियान्वित हुए हैं, जिनके माध्यम से 5,075 करोड़ रूपये का वास्तविक निवेश और 21,599 रोजगार सृजित हुए हैं। नई दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में मध्यप्रदेश मंडप को वर्ष 2024 में स्वर्ण पदक तथा 2025 में रजत पदक प्राप्त हुआ।

    विनिर्माण एवं प्रमाणन में प्रगति

    बैठक में बताया गया कि विगत दो वर्षों में 2 लाख से अधिक विनिर्माण इकाइयाँ पंजीकृत हुई हैं, जो 31 प्रतिशत की वृद्धि है। आरएएमपी योजना के अंतर्गत प्रदेश के 5 SME को स्टॉक एक्सचेंज में शामिल कराया गया है। जेडईडी प्रमाणन के क्षेत्र में 16,428 इकाइयाँ प्रमाणित हुई हैं, जबकि पूर्व में यह संख्या मात्र 437 थी। प्रतिदिन अवधि में 30 हजार से अधिक एमएसएमई एवं स्टार्टअप का क्षमता निर्माण किया गया तथा iGOT पोर्टल पर 834 शासकीय सेवक ऑनबोर्ड हुए। ग्वालियर स्टोन एवं छतरपुर वुडन फर्नीचर को दिसंबर 2025 में जीआई टैग प्राप्त हुआ है।

    क्लस्टर विकास एवं भविष्य की औद्योगिक तैयारी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि आगामी तीन वर्ष में 5 हजार से अधिक करोड़ की प्रोत्साहन राशि एमएसएमई इकाइयों को दी जाएगी। इसी तरह क्लस्टर विकास के लिए 30 नए निजी क्लस्टरों और 22 सामान्य सुविधा केंद्रों को स्वीकृति दी गई है। 31 औद्योगिक क्षेत्रों का विकास कार्य पूर्ण हो चुका है तथा आगामी वर्षों में 6,000 से अधिक भूखंडों के आवंटन की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही 100 औद्योगिक क्षेत्रों में CETP की स्थापना की जाएगी, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को पर्यावरणीय संतुलन के साथ बढ़ावा मिलेगा।

    आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना

    मुख्यमंत्री के समक्ष विभागीय मंत्री  चेतन्य कुमार काश्यप ने आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना भी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि 81 विधानसभा क्षेत्रों में नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जाएगा। वर्तमान 6,000 से अधिक स्टार्टअप्स को बढ़ाकर 12,000 से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक जिले में कम से कम एक के साथ 100 नए इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे तथा जनवरी 2026 में राज्य स्तरीय स्टार्टअप कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। 1.5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों का फार्मलाइजेशन किया जाएगा और उन्हें उद्यम पोर्टल से जोड़ा जाएगा।

    स्वरोजगार, जीआई टैगिंग और प्रयोगशाला उन्नयन

    स्वरोजगार योजना के माध्यम से 30,000 उद्यमियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है तथा प्रदेश में 20 लाख से अधिक रोजगार सृजन का उद्देश्य निर्धारित किया गया है। 20 विशिष्ट उत्पादों की पहचान कर उन्हें जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बहादरपुर सहकारी सूत मिल, बुरहानपुर की देनदारियों के निराकरण तथा इंदौर व जबलपुर की परीक्षण प्रयोगशालाओं के उन्नयन का कार्य भी प्राथमिकता से किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने विभाग की उपलब्धियों की सराहना करते हुए निर्देश दिए कि एमएसएमई और स्टार्टअप क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के स्तर तक ले जाने के लिए सभी विभाग समन्वित प्रयास करें। उन्होंने नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और निवेश संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना के त्वरित क्रियान्वयन पर जोर दिया। बैठक में प्रमुख सचिव  राघवेंद्र कुमार सिंह ने प्रस्तुतिकरण दिया।

     

  • वाहनों की सभी लंबित प्रविष्टियाँ शून्य करने वाला पहला राज्य बना MP, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर टैक्स में पूरी छूट

    मध्यप्रदेश बना वाहनों की डिडुप्लीकेशन की लंबित प्रविष्टियों को शून्य करने वाला राज्य

    इलेक्ट्रिक वाहनों में मोटरयान कर में पूर्ण छूट

    भोपाल

    परिवहन विभाग के प्रयासों से मध्यप्रदेश डिडुप्लीकेशन की लंबित प्रविष्टियों को शून्य करने वाला राज्य बन गया है। इस कार्यवाही का फायदा उन समस्त 2 लाख 50 हजार वाहन स्वामियों को मिला है, जो अब परिवहन विभाग की ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग कर पा रहे हैं।

    देश में समस्त राज्यों के परिवहन विभाग द्वारा वाहनों के पंजीयन एवं उनके स्थानान्तरण के संबंध में विभिन्न परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) में समय-समय पर प्रविष्टियां की जाती हैं। पूर्व में कागजों पर संधारित रिकार्ड को डिजिटाइज करने के दौरान दूसरे आरटीओ के अधिकार क्षेत्र में वाहन के स्थानांतरित होने पर पूर्व के आरटीओ द्वारा एंट्री को डिलीट न किये जाने के कारण देश में 35 लाख वाहन ऐसे थे, जिनकी प्रविष्टि एक से अधिक आरटीओ में होने से उन वाहन स्वामियों को परिवहन सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस वर्ष जुलाई 2025 के अंत तक मध्यप्रदेश में करीब 2 लाख 50 हजार ऐसी प्रविष्टियां थीं। परिवहन विभाग द्वारा एक विशेष मुहिम चलाई गई। मुहिम की समीक्षा प्रत्येक पखवाड़े में परिवहन विभाग में वरिष्ठ स्तर पर किये जाने से मध्यप्रदेश में डुप्लीकेट एंट्रियों को सही कर दिया गया है।

    इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटरयान कर में पूर्ण छूट

    पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रदेश में प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश राज्य में पंजीकृत होने वाले समस्त श्रेणी के इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटरयान कर में पूर्णत: छूट प्रदान किये जाने के प्रावधान किये गये हैं। इसके साथ ही प्रदेश में कम्प्रेस्ड् नेचुरल गैस (सीएनजी) वाहनों पर भी राज्य सरकार द्वारा मोटरयान कर में एक प्रतिशत की छूट प्रदान की गई है। इस प्रावधान से प्रदेश में इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।

     

  • CG अफसर ट्रांसफर अपडेट: राज्य में 38 अधिकारियों का स्थानांतरण, GAD की सूची सार्वजनिक

    रायपुर
    छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। राज्य सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के एक साथ अधिकारियों का एक साथ तबादला किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया है। जारी आदेश में कुल 38 अधिकारियों का नाम शामिल है।

    यह आदेश छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) द्वारा जारी किया गया है और इसमें राज्य प्रशासनिक सेवा (State Administrative Service) एवं सचिवालय सेवा (Secretariat Service) के अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला किया गया है।

    छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 38 अधिकारियों का तबादला
    छत्तीसगढ़ शासन ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने आज, 08 दिसंबर 2025 को जारी आदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा एवं सचिवालय सेवा के 38 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से नवीन विभागों में पदस्थ किया है।

    प्रमुख अधिकारियों की नवीन पदस्थापनाएं
    तबादला सूची में शामिल कुछ महत्वपूर्ण अधिकारियों और उनके नए प्रभार निम्नलिखित हैं:

    राजीव अहिरे (संयुक्त सचिव)
    वर्तमान: आवास एवं पर्यावरण विभाग (अतिरिक्त प्रभार- योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग)
    नवीन: कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग

    सूर्यकिरण तिवारी (रा.प्र.से., उप सचिव)
    वर्तमान: कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (अतिरिक्त प्रभार- पशुधन विकास एवं मछली पालन विभाग)
    नवीन: पशुधन विकास एवं मछली पालन विभाग

    दुर्गेश कुमार वर्मा (रा.प्र.से., उप सचिव)
    वर्तमान: सामान्य प्रशासन विभाग (पूल)
    नवीन: योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग

    लवीना पाण्डेय (रा.प्र.से., उप सचिव)
    वर्तमान: आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग एवं पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक विकास विभाग (अति. प्रभार- चिकित्सा शिक्षा विभाग)
    नवीन: चिकित्सा शिक्षा विभाग

    कुसुम एक्का (उप सचिव)
    वर्तमान: योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग
    नवीन: गृह विभाग

    श्रीमती विजया खेस्स (उप सचिव)
    वर्तमान: विमानन विभाग
    नवीन: ग्रामोद्योग विभाग

    अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किए गए अधिकारी

    तबादला सूची में कई अधिकारियों को उनके मौजूदा अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है, जबकि उनका मूल प्रभार यथावत रहेगा-

    • अरूण कुमार मरकाम (रा.प्र.से., उप सचिव) को ग्रामोद्योग विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है।
    • रामप्रसाद चौहान (रा.प्र.से., उप सचिव) को समाज कल्याण विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है।
    • श्रीकांत वर्मा (रा.प्र.से., उप सचिव) को गृह विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है।
    • अंकिता गर्ग (रा.प्र.से., उप सचिव) को श्रम विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है।
    • विभोर अग्रवाल (रा.प्र.से., उप सचिव) को उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है।
    • अन्वेष धृतलहरे (रा.प्र.से., उप सचिव) को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है।

    सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तत्काल नवीन पदस्थापना में कार्यभार ग्रहण करें और पालन प्रतिवेदन सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

  • स्वास्थ्य के क्षेत्र में नेचुरोपैथी भवन निर्माण की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिया तोहफ़ा

    रायपुर
    कई प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, योग केंद्र और वेलनेस हब खुद को नेचुरोपैथी  कहते हैं। जो प्राकृतिक चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान करता है और बापू भवन इसका ऐतिहासिक घर है, जिसे गांधीजी ने अपनाया था। खासकर छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का उद्देश्य प्राकृतिक उपचार, योग, आहार, मिट्टी स्नान और हर्बल दवाओं के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य प्रदान करना है।  जशपुर जिले के कुनकुरी नगर की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नेचुरोपैथी भवन निर्माण के लिए 2 करोड़ 62 लाख रुपए की मंजूरी प्रदान की है।

    निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। भवन तैयार हो जाने के बाद कुनकुरी नगरवासियों को प्राकृतिक चिकित्सा की अत्याधुनिक सुविधा अपने ही नगर में उपलब्ध होगी। यह भवन न सिर्फ लोगों को आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की ओर प्रोत्साहित करेगा, बल्कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को उपचार के लिए बड़ी राहत भी देगा। अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर दराज जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नगरवासियों ने इस दूरदर्शी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सुविधा स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई दिशा और नई उम्मीद लेकर आएगी।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई ऊंचाई को छूता जशपुर 
    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई सौगातें मिल चुकी है। मेडिकल कॉलेज के लिए बड़ा कदम उठातेे हुए वित्त विभाग से 359 करोड़ की सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है । इसी प्रकार 220 विस्तर अस्पताल के लिए 32 करोड़ की मंजूरी, नर्सिंग महाविद्यालय भवन के 8 करोड़ की मंजूरी, फिजियोथेरेपी महाविद्यालय के 14 करोड़ की मंजूरी, कल्याण आश्रम अत्याधुनिक चिकित्सालय भवन के लिए 35 करोड़ की मंजूरी, ग़िनाबहर में मातृत्व शिशु चिकित्सालय भवन निर्माण के 8 करोड़ की मंजूरी सहित कई सौगातें दी गई है, जो जिले वासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए वरदान साबित होंगी।

  • गजराज ने किया हमला, ग्रामीणों में भय का माहौल, मां-बेटी पर हाथी का हमला

    कोरबा

    कोरबा के कटघोरा वनमंडल  के पसान क्षेत्र के गोलाबाहरा गांव में रविवार की देर शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई। आग ताप रहे मां बेटी पर हाथी ने हमला कर दिया। किसी तरह बेटी तो बच गई। लेकिन मां को हाथी ने कुचल कर मार डाला। इस घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और देखते ही देखते ग्रामीण को भीड़ एकत्रित हो गई और इसकी सूचना तत्काल वन विभाग और पुलिस को दी गई।

    बताया जा रहा है कि इंद्रकुंवर और बेटी अपने घर से लगभग 50 मीटर दूर पर खेत स्थित खनियार में धान साफ कर आग ताप रहे थे। इस दौरान अचानक हाथी ने हमला कर दिया जहा 80 वर्षीय वृद्धा इंद्रकुंवर की मौत हो गई।

    स्थानीय लोगों की माने तो हाथी को आते देख महिला घर की ओर भागने लगीं, लेकिन तभी हाथी ने उन्हें पीछे से आ घेरा और बुरी तरह कुचल दिया। घटना स्थल पर ही उनकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है। वन विभाग ने लोगों से जंगल या खेत की ओर अकेले न जाने और सतर्क रहने की अपील की है।

  • राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का भाई भारी मात्रा में गांजा सहित गिरफ्तार, बहनोई पहले से जेल में

    सतना
    जिले के रामपुर बाघेलान थाना पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने एक कार से 46 किलो गांजा जब्त करते हुए दो तस्करों को पकड़ा है। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में मध्यप्रदेश सरकार की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के सगे भाई अनिल बागरी भी शामिल हैं। कार्रवाई थाना प्रभारी संदीप चतुर्वेदी की अगुवाई में की गई।

    गुप्त सूचना पर पुलिस ने रामपुर बाघेलान क्षेत्र में नाकाबंदी की थी। इसी दौरान एक संदिग्ध कार को रोककर जांच की गई, जिसमें भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। मौके से दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान पता चला कि यह नेटवर्क प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय है। पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस को तस्करी में प्रयुक्त कार और छिपाए गए गांजे के ठिकानों के बारे में जानकारी दी, जिसके बाद टीम ने कुल 46 किलो गांजा बरामद किया।

    मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनिल बागरी, पिता जय प्रताप बागरी, निवासी भरहुत नगर हरदुआ, और पंकज सिंह, पिता सतेंद्र सिंह, निवासी मतहा, के रूप में हुई है। इस मामले में पुलिस ने शैलेन्द्र सिंह, पिता सुरेंद्र सिंह, निवासी विराट नगर, को भी आरोपी बनाया है, जो राज्यमंत्री का बहनोई बताया जाता है और फिलहाल बांदा जेल में पहले से बंद है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले वही शैलेन्द्र सिंह गांजे की खेप के साथ बांदा में पकड़ा गया था।

    रामपुर बाघेलान पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। लगातार दूसरे बार राज्यमंत्री के करीबी रिश्तेदार का मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में फंसना राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना हुआ है। फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है और फरार आरोपी शैलेन्द्र सिंह की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है।