• छत्तीसगढ़ पुलिस में तबादला, कोरबा सीएसपी नियुक्त हुए प्रतीक चतुर्वेदी, कटघोरा एसडीओपी विजय सिंह

    कोरबा

    छत्तीसगढ़ शासन के गृह (पुलिस) विभाग मंत्रालय द्वारा राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों का बड़ा तबादला आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत कुल 95 अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है, जिनमें 35 अधिकारी एडिशनल एसपी व उप सेनानी रैंक के तथा 60 अधिकारी डीएसपी रैंक के शामिल हैं। इस व्यापक तबादला सूची का असर कोरबा जिले पर भी पड़ा है।

    आदेश के अनुसार, कोरबा में पदस्थ सीएसपी भूषण एक्का का तबादला एसडीओपी बेमेतरा के पद पर किया गया है। वहीं, एसडीओपी कटघोरा पंकज ठाकुर को डीएसपी पीटीएस राजनांदगांव के पद पर भेजा गया है। जिला मुख्यालय में पदस्थ डीएसपी प्रतिभा मरकाम को नई पदस्थापना देते हुए डीएसपी एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट बस्तर में पदस्थ किया गया है।

    कोरबा सीएसपी के महत्वपूर्ण पद पर प्रतीक चतुर्वेदी को पदस्थ किया गया है। प्रतीक चतुर्वेदी इससे पहले डीएसपी अजाक/क्राइम कबीरधाम में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वहीं, कटघोरा के नए एसडीओपी के रूप में विजय सिंह राजपूत की नियुक्ति की गई है, जो पूर्व में डीएसपी सुरक्षा जशपुर के पद पर कार्यरत थे।

    इस प्रशासनिक फेरबदल को पुलिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। नई पदस्थापनाओं के बाद जिले में कानून व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक सक्रियता और तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • ड्राफ्ट मतदाता सूची ऑनलाइन और ऑफलाइन उपलब्ध, गहन पुनरीक्षण के तहत आज जारी

     इंदौर
     मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की अगली प्रक्रिया में 23 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर जिले के मतदाता मतदाता सूची में अपना नाम देख सकेंगे।

    जिले के सभी 2625 बूथों पर मतदाता सूची में नाम देखा जा सकेगा। इसके अलावा ऑनलाइन नाम देखने की सुविधा भी मिलेगी। निवार्चन आयोग की साइड पर मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं के अलावा अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृतक मतदाताओं की सूची देखी जा सकेगी।

    निर्वाचन विभाग द्वारा ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन सोमवार को किया जाएगा। इसके साथ ही दावे-आपत्ति लिए जाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो जाएगी। सभी 2625 बूथों पर बूथ लेवल आफिसर (बीएओ) बैठेंगे और दावे आपत्तियों की सुनवाई करेंगे। 22 जनवरी तक दावे आपत्ति लिए जाएंगे। जिन मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हट गया है, वह आपत्ति दर्ज करवा सकेंगे।

    ये अधिकारी करेंगे आपत्तियों की सुनवाई

    रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (इआरओ) और सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एइआरओ) इसकी सुनवाई करेंगे। दस्तावेज की जांच करने के बाद मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए जा सकेंगे।

    राजनीतिक दलों के साथ होगी बैठक

    अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी नवजीवन विजय पंवार ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन मंगलवार को होगा। मतदाता अपना नाम मतदान केंद्र पर सूची में नाम देख सकेंगे। इसके साथ ही राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारियों की बैठक भी होगी। सूची सभी मतदान केंद्रों पर चस्पा की जाएगी तथा संबंधित मतदाताओं को नोटिस देकर सूचना दी जाएगी।

    एक सप्ताह बाद होगी सुनवाई

        ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ ही 2003 की सूची से मैपिंग नहीं होने वाले मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस में सात दिन का समय दिया जाएगा। मैपिंग नहीं होने वाले मतदाताओं की सुनवाई सात दिन बाद ही शुरू हो सकेगी। इआरओ और एइआरओ एक दिन में सिर्फ 50 मतदाताओं की सुनवाई कर सकेंगे।

    जिले में 24 लाख 20 हजार 170 मतदाताओं के फार्म प्राप्त हुए है। इसमें 1.33 लाख मतदाता की मैपिंग नहीं हुई है। 4.66 की मैपिंग नहीं हो सकीजिले में 24 लाख 20 हजार 170 मतदाताओं के फार्म भरकर आए है। इसमें 4.66 प्रतिशत यानी एक लाख 33 हजार 696 मतदाता ऐसे है, जिनकी 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हो सकी है।इन मतदाताओं को निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 11 तरह के दस्तावेज दिखाने होंगे।
    मतदाताओं की जानकारी

    28.67 लाख जिले में मतदाता – 2420 लाख मतदातओं के फार्म प्राप्त- 4.47 लाख मतदाताओं ने फार्म नहीं भरें

  • रीवा-सतना में दृश्यता 50 मीटर तक, कोहरे और ठंड ने बढ़ाई मुश्किलें; ट्रेन सेवाओं में देरी

    भोपाल

    मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड के साथ घने कोहरे का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार सुबह रीवा और सतना में हालात इतने खराब रहे कि ‘ब्लाइंड मॉर्निंग’ जैसी स्थिति बन गई।  प्रदेश के कुछ जिलों में इन दिनों न्यूनतम तापमान में हल्की उछाल देखी जा रही है. इसमें मुख्य रूप से भोपाल संभाग के जिलों में न्यूनतम तापमान बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. पिछले 24 घंटे की बात की जाए तो नरसिंहपुर जिले में शीतल दिन देखा गया. वहीं रीवा, सतना, छतरपुर और दतिया जैसे जिलों में शीतल दिन रहा. नर्मदापुरम के पचमढ़ी हिल स्टेशन में न्यूनतम तापमान सबसे कम 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.

    इस दौरान अधिकतम तापमान अपने निचले स्तर पर रिकॉर्ड हुआ. आगर-मालवा में दिन का अधिकतम तापमान सबसे कम 13.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ. बड़े जिलों की न्यूनतम तापमान की बात करें तो भोपाल और इंदौर में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया. इसके अलावा जबलपुर में 9 डिग्री और ग्वालियर में 11.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के ग्वालियर, चंबल और रीवा संभाग के जिलों में घने कोहरे और ठंड का अलर्ट है.

    कोहरे की वजह से मालवा एक्सप्रेस करीब 4 घंटे देरी से चली, जबकि शताब्दी, सचखंड, पंजाब मेल और झेलम एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों पर भी असर देखा गया।

    रीवा और सतना के अलावा दमोह, खजुराहो, नौगांव, ग्वालियर, मुरैना और सीधी में भी सुबह घना कोहरा छाया रहा। इन जिलों में विजिबिलिटी 50 मीटर से 1 किलोमीटर के बीच दर्ज की गई।

    वहीं भोपाल, दतिया, इंदौर, राजगढ़, उज्जैन, जबलपुर, मंडला, गुना, रायसेन, शिवपुरी, सागर, शाजापुर, भिंड और धार में भी कोहरे का असर देखा गया।

    मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, वर्तमान समय में एक पश्चिमी विक्षोभ ट्रफ के रूप में पश्चिम क्षेत्र में बना हुआ है. साथ ही सब ट्रॉपिकल जेट स्ट्रीम हवाएं उत्तर भारत के राज्यों में चल रही है. प्रदेश के उत्तर पूर्वी जिलों में ठंड के साह ही मध्यम से घने कोहरे और कड़ाके की ठंड की संभावना बनी हुई है. इसमें मुख्य रूप से ग्वालियर, रीवा और शहडोल संभाग के जिले शामिल है.

    इन जिलों में कोहरे का अलर्ट
    मौसम विभाग ने प्रदेश के 14 जिलों में मध्यम कोहरे का अलर्ट जारी किया है. इसमें मुख्य रूप से भिंड, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और मैहर में मध्यम कोहरे की चेतावनी जारी है.

    इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा, पारा 5 डिग्री से नीचे इससे पहले रविवार-सोमवार की रात में कई शहरों में पारे में गिरावट का दौर बना रहा। 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल-इंदौर में 8.8 डिग्री, ग्वालियर में 11.3 डिग्री, उज्जैन में 11.4 डिग्री और जबलपुर में पारा 9 डिग्री रहा। प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री पहुंच गया।

    रीवा में 5.6 डिग्री, शहडोल के कल्याणपुर में 5.9 डिग्री, राजगढ़-खजुराहो में 7 डिग्री, सतना के चित्रकूट में 7 डिग्री, मलाजखंड में 7.4 डिग्री, बैतूल में 7.5 डिग्री, नौगांव में 7.6 डिग्री, खंडवा-सतना में 8 डिग्री, मंडला में 8.2 डिग्री, नरसिंहपुर, खरगोन-उमरिया में 8.4 डिग्री, दमोह में 8.5 डिग्री, रायसेन में 8.8 डिग्री, सागर में 8.9 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री और दतिया में पारा 9.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    MP में इतना रहा तापमान…

    नवंबर-दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर के बाद दिसंबर में भी सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। नवंबर में भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा।

    इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का। दूसरी ओर, दिसंबर में इंदौर में पारा सबसे कम रहा। भोपाल में भी यह 5 डिग्री से नीचे पहुंच चुका है।

    ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं।

    इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है।

    अब जानिए दिसंबर में कैसी रहती है ठंड?

    मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही हो रहा है। शुरुआत से अब तक कई वेस्टर्न डिस्टरबेंस उत्तर भारत को प्रभावित कर चुके हैं। इस वजह से एमपी में कड़ाके की ठंड के साथ शीतलहर का असर है।

    इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी

        ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आ रही हैं। कोहरे का असर भी इन जिलों में ज्यादा देखा जा रहा है। सागर और रीवा संभाग भी प्रभावित है।

        भोपाल संभाग के सीहोर, रायसेन, राजगढ़ और विदिशा में ठंड का जोर है। राजगढ़ में पारा 4 डिग्री तक पहुंच चुका है।

        सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड है।

        जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडौरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड पड़ रही है।

    इस जिले का तापमान सबसे कम
    न्यूनतम तापमान: पचमढ़ी (नर्मदापुरम) – 4.6°C (सबसे कम), रीवा – 5.6°C, कल्याणपुर (शहडोल) – 5.9°C, राजगढ़/खजुराहो (छतरपुर) – 7°C, चित्रकूट (सतना) – 7.1°C
    बड़े शहरों का न्यूनतम तापमान
    उज्जैन – 11.4°C
    ग्वालियर – 11.3°C
    जबलपुर – 9°C
    भोपाल – 8.8°C
    इंदौर – 8.8°C

     

  • छतरपुर में स्वास्थ्य संकट: 8 महीने में 409 बच्चों की मौत, NHM ने रिपोर्ट तलब की

     छतरपुर

    मध्यप्रदेश का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर देशभर में सुर्खियां बटोर रहा है। इस बार चर्चा का मुख्य कारण बच्चों की मौत से जुड़ा है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने आनन-फानन में राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों से रिपोर्ट तलब की है। दरअसल, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के जिला अस्पताल से एक विचलित कर देने वाली घटना उजागर हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 8 महीनों में जिले में 409 बच्चों की मौत हो गई। इस भारी संख्या में हुई मौतों के बाद नेशनल हेल्थ मिशन  विभाग ने स्वास्थ्य प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
     छतरपुर जिले के जिला अस्पताल से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 8 महीनों में जिले में 409 बच्चों की मौत हो गई. इस भारी संख्या में हुई मौतों के बाद नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) विभाग ने स्वास्थ्य प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आरपी गुप्ता ने इस गंभीर स्थिति की पुष्टि की और बताया, ''अप्रैल से अब तक अस्पताल में 409 बच्चों की मौत हो चुकी है और हमें सीनियर अधिकारियों से इन मौतों की जांच करने का नोटिस मिला है. मैंने इसके लिए एक टीम बनाई है. हमने जांच लगभग पूरी कर ली है.''

    कर्मचारियों से हो रही पूछताछ

    सीएमएचओ ने कहा- एसएनसीयू और लेबर रूम के स्टाफ से पूछताछ की जा रही है। हाल ही में लापरवाही बरतने वाले कुछ कर्मचारियों को सिविल सर्जन ने हटा दिया है। हमारी टीम मृत बच्चों की वर्बल आटोप्सी कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि मौतें किस स्तर पर हुईं। उन्होंने यह भी दावा है कि मॉनिटरिंग बढ़ाने के बाद डेथ परसेंटेज में कमी आई है और यह अब 6 फीसदी से नीचे आ गया है।

    जरूरतमंद को नहीं मिल रही एंबुलेंस

    इधर, प्रशासन ने बच्चों की मौतों के लिए कई तकनीकी और सामाजिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने में देरी होना, पेरी-फेरी (बाहरी स्वास्थ्य केंद्रों) से समय पर रेफर न होना या एंबुलेंस की कमी, कुछ बच्चों में जन्म से ही शारीरिक समस्याएं भी मौतों का कारण बन जाती हैं।

    दावा- अब घट गया मौत का प्रतिशत

    वहीं, अस्पताल पहुंचने के बाद आपरेशन या सामान्य प्रसव की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का विलंब भी वजह है। सीएमएचओ ने कहा कि हम इन मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। अभी परिणाम हमारे यहां देखने में मिल भी रहे हैं कि पहले बच्चों की मौतों का प्रतिशत ज्यादा था, अब वो घटकर छह प्रतिशत से कम पर आ गया है।

    CMHO के अनुसार, "SNCU और लेबर रूम के स्टाफ से पूछताछ की जा रही है. हाल ही में लापरवाही बरतने वाले कुछ कर्मचारियों को सिविल सर्जन ने हटा दिया है. हमारी टीम मृत बच्चों की 'वर्बल ऑटोप्सी' कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि मौतें किस स्तर पर हुईं.'' विभाग का दावा है कि मॉनिटरिंग बढ़ाने के बाद डेथ परसेंटेज में कमी आई है और यह अब 6% से नीचे आ गया है.

    प्रशासन ने बच्चों की मौतों के लिए कई तकनीकी और सामाजिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने में देरी होना, पेरी-फेरी (बाहरी स्वास्थ्य केंद्रों) से समय पर रेफर न होना या एंबुलेंस की कमी, कुछ बच्चों में जन्म से ही शारीरिक समस्याएं भी मौतों का कारण बन जाती हैं. वहीं, अस्पताल पहुंचने के बाद ऑपरेशन या सामान्य प्रसव की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का विलंब भी वजह है.

    स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि हम इन मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. और अभी परिणाम हमारे यहां देखने में मिल भी रहे हैं कि पहले बच्चों की मौतों का प्रतिशत ज्यादा था, अब वो घटकर छह प्रतिशत से कम पर आ गया है.

  • अन्नक्षेत्र में बने खास पल: जेपी नड्डा और CM मोहन यादव ने खुद रखी अपनी जूठी थाली

    उज्जैन 
    BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे. उनके साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी थे. दोनों नेताओं ने गर्भगृह में जाकर विधि-विधान से बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया और भगवान महाकाल की आरती उतारी. इस दौरान जेपी नड्डा ने कुछ समय नंदी हाल में बिताया और यहां षोडशोपचार पूजन किया. यह पूजन करने से यश, कीर्ति और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है. 

    महाकाल के आंगन में हर भक्त बराबर है, इसी संदेश को सार्थक करते हुए जेपी नड्डा और मोहन यादव महाकाल मंदिर की ओर से संचालित अन्नक्षेत्र पहुंचे, जहां उन्होंने पोहा-जलेबी का नाश्ता किया. दर्शनार्थियों को भी परोसा और खुद भी ग्रहण किया. प्रसादी ग्रहण करने के बाद केंद्रीय मंत्री नड्डा और सीएम यादव खुद अपनी जूठी थाली उठाकर डस्टबिन में डालने गए. 

    गर्भगृह में दोनों ने महाकाल का अभिषेक किया और पुजारी आकाश ने 20 मिनट तक षोडशोपचार पूजन कराया। यह पूजन यश-कीर्ति के लिए किया जाता है।

    इसके बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री, मध्य प्रदेश के प्रभारी महेंद्र सिंह ने महाकाल मंदिर अन्न क्षेत्र में श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरण की और खुद भी ग्रहण की। प्रसादी में पोहे खाने के बाद वे खुद ही अपनी थाली उठाकर रखने गए। नड्‌डा और सीएम सिंहस्थ में होने वाले कार्यों का भी निरीक्षण करेंगे।

    उन्होंने स्वच्छता अभियान में सभी की सहभागिता निभाते हुए सभी श्रद्धालुओं को भी संदेश दिया कि महाकाल क्षेत्र में सभी श्रद्धालु एक समान हैं. 

    बता दें कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सोमवार की देर रात उज्जैन पहुंच गए थे. रात्रि 10:30 बजे होने वाली शयन आरती से पहले मंदिर पहुंचे नड्डा ने नंदी हाल में बैठकर भगवान महाकाल का ध्यान लगाया और शयन आरती देखी. श्रद्धापूर्वक परंपरागत शयन आरती में सम्मिलित हुए नड्डा ने भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन कर देश व दुनिया की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की.

    भक्ति पूजन के साथ स्वछता का संदेश प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता अभियान का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री ने महाकाल अन्न क्षेत्र में प्रसादी ग्रहण करने के बाद डिस्पोजल को डस्टबिन में डाला। स्वच्छता अभियान मे सभी की सहभागिता निभाते हुए सभी श्रद्धालुओं को भी संदेश दिया कि महाकाल क्षेत्र में सभी श्रद्धालु एक समान है। उन्होंने सबके साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण की और उसके उपरांत नाश्ते की प्लेट को डस्टबिन में स्वयं ले जाकर डाला।

    नड्डा के आगमन को लेकर मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. आम श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित की गई.

    रात्रि में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को बाबा महाकाल की तस्वीर, प्रसाद और शॉल भेंटकर पारंपरिक तरीके से स्वागत व सम्मान किया. इस दौरान क्षेत्रीय भाजपा नेता समेत विधायक भी उपस्थित थे.

    मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि आज दो नए मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी जा रही है. धार और बैतूल में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जाएगा. इसके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा हमारे बीच आए हैं, हमने बाबा महाकाल का पूजन कर आशीर्वाद लिया है.

  • हाईटेक विधानसभा की ओर कदम: भोपाल में विधायकों को पेपरलेस कार्य प्रणाली सिखाई जाएगी

    भोपाल

     मध्य प्रदेश की विधानसभा अब पूरी तरह डिजिटल होने वाली है. सारा कामकाज पेपरलेस होगा. ये व्यवस्था अगले विधानसभा सत्र से लागू की जाएगी. इस नए सिस्टम से प्रदेश के 230 विधायकों को रूबरू कराने के लिए मंगलवार (23 दिसंबर) को ट्रेनिंग दी जाएगी.

    ई-विधान के तहत प्रशिक्षण
    एमपी विधानसभा के मानसरोवर सभागार में मंगलवार (23 दिसंबर) को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक विधायकों को ट्रेनिंग दी जाएगी. ये ट्रेनिंग राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन के तहत दी जाएगी. संसदीय कार्य मंत्रालय के अधिकारी माननीयों को प्रशिक्षण देंगे. देश की विधायी व्यवस्था को मॉडर्न, ट्रांसपेरेंट और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में इस शुरू किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय संसद और देश के सभी राज्यों की विधानसभा को पेपरलेस बनाया जा रहा है.

    भोपाल पहुंचेंगे सभी विधायक 

    एमपी के सभी विधायक आज से भोपाल पहुंचना शुरू हो जाएंगे. क्योंकि विधानसभा मानसरोवर सभागार सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक विधायकों को  संसदीय कार्य मंत्रालय दिल्ली के एक्सपर्ट की तरफ से ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर समेत बीजेपी कांग्रेस के सीनियर विधायक शामिल होंगे. एमपी विधानसभा में ऑनलाइन काम को लेकर नरेंद्र सिंह तोमर लगातार जोर दे रहे हैं. क्योंकि यह आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है. यह परियोजना देश के कई राज्यों की विधानसभाओं में लागू हो रही है, क्योंकि इसके जरिए विधानसभा को पूरी तरह से पेपरलेस बनाना है, ताकि कागज के उपयोग को बचाया जा सके. 

    विधायकों को होगा फायदा 

    एमपी विधानसभा में ऑनलाइन काम से सबसे ज्यादा फायदा विधायकों का ही होने वाला है. विधायकों को कागज के बड़े बंडल अपने साथ नहीं ले जाने होंगे. वहीं प्रस्ताव और चर्चा के लिए प्रश्न आसानी से जाएंगे. पुराने सवालों का जवाब और उसके दस्तावेज एक ही जगह पर आसानी से मिलेंगे. वहीं किसी भी बिल या अन्य मुद्दों पर वोटिंग के लिए भी अपनी आसानी से दे सकेंगे. पर्यावरण संरक्षण यानि कागजों की बचत में भी उपयोगी काम होगा. डिजिटल काम विधायी रिकॉर्ड भी सुरक्षित होगा. वही विधानसभा के काम भी तेजी आएगी और सारी जानकारी आम आदमी को भी ऑनलाइन विधानसभा की साइड पर मिलेगी. 

    मध्य प्रदेश विधानसभा में अगला विधानसभा का सत्र ऑनलाइन ही होगा, ऐसे में पूरी कार्रवाई के लिए लगातार इस प्रक्रिया में काम किया जा रहा है, जिसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से भी लगातार सहयोग हो रहा है. क्योंकि एमपी विधानसभा में ऑनलाइन काम की तैयारियां लंबे समय से चल रही है, जिस पर अब तेजी से अमल किया जा रहा है. जो राज्य सरकार के आम लोगों के लिए भी उपयोगी साबित होगी.  

    कैसे काम करता है NeVA प्लेटफॉर्म
    NeVA यानी नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन एक ऐसा डिजिटल सिस्टम है, जिसमें विधानसभा की पूरी कार्यवाही रियल-टाइम में दर्ज होती है। विधायकों को लॉगिन के माध्यम से सभी दस्तावेज, प्रस्ताव और रिपोर्ट तुरंत उपलब्ध हो जाती हैं। यह परियोजना “वन नेशन, वन एप्लिकेशन” की अवधारणा पर आधारित है, जिससे देशभर की विधानसभाओं में एकरूपता लाई जा सके।

    आगे की योजना
    विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण के बाद चरणबद्ध तरीके से पेपरलेस कार्यप्रणाली को पूरी तरह लागू किया जाएगा। शुरुआती दौर में तकनीकी सहायता टीम भी मौजूद रहेगी, ताकि विधायकों को किसी तरह की असुविधा न हो।

    क्यों अहम है यह पहल
    विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह विधानसभा की कार्यक्षमता और जवाबदेही बढ़ाने में भी सहायक होगा। मध्य प्रदेश विधानसभा का यह डिजिटल बदलाव अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

    इस व्यवस्था से क्या फायदा होगा?
    बजट सत्र से मध्य प्रदेश की विधानसभा को पेपरलेस करने की योजना है, यानी सारे कार्य डिजिटल तरीके से किए जाएंगे. इस व्यवस्था के लागू होने के बाद विधायकों, सचिवालय और आम लोगों को फायदा होगा. विधायकों को कागजों के भारी बंडल से मुक्ति मिलेगी. प्रश्न को आसानी से पूछा जा सकेगा. मतदान और उपस्थिति दर्ज कराने में आसानी होगी.

    वहीं, सचिवालय के कामकाज में तेजी आएगी. फाइल मैनेजमेंट आसान और तेज होगा. कर्मचारियों का समय और मेहनत भी बचेगी. आम जनता को भी इससे लाभ होगा. विधानसभा की कार्यवाही में पारदर्शिता आने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा.

    क्या है ई-विधान प्रोजेक्ट?
    नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (National E-Vidhan Application) एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है. इसकी मदद से संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही को ऑनलाइन और रियल टाइम तरीके से संचालित की जाती है. ये पूरे देश की विधानसभाओं और संसद को एक करती है.

  • मध्यप्रदेश के शहरी विकास को नई गति: भोपाल सहित दो शहरों में मेट्रो ट्रेन संचालित — मुख्यमंत्री

    भोपाल को मेट्रो की सौगात, मध्यप्रदेश के दो बड़े शहरों में चल रही है मेट्रो ट्रेन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रदेश के पहले भोपाल मेट्रोपोलिटन एरिया का मैप भी हुआ लांच, पड़ोसी पांच जिलों का क्षेत्र होगा शामिल
    केंद्रीय गृह मंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में शामिल होंगे
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले सभी मंत्रीगण को किया संबोधित

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बीते सप्ताह मध्यप्रदेश को कई नई सौगातें मिली हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल की विशिष्ट उपस्थिति में न केवल भोपाल में मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ हुआ वरन् प्रदेश के पहले भोपाल महानगरीय क्षेत्र (मेट्रोपोलिटन एरिया) का मैप (मानचित्र) भी लांच कर दिया गया। उन्होंने बताया कि भोपाल मेट्रोपोलिटन एरिया में भोपाल जिले सहित सीमावर्ती 5 जिलों रायसेन, विदिशा, राजगढ़, सीहोर और नर्मदापुरम का क्षेत्र शामिल किया गया है। इस एरिया में कुल 12 नगरीय क्षेत्र और 30 तहसीलें शामिल की गई हैं। मेट्रोपोलिटन एरिया में लगभग 2524 गांव शामिल होंगे और इस क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 12,099 वर्ग किलोमीटर रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रि-परिषद् की बैठक से पहले मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। मध्यप्रदेश को दिन-ब-दिन मिल रही नई-नई सौगातों के लिए सभी मंत्रीगण ने मेंजें थप-थपाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय अभिनंदन कर आभार व्यक्त किया।

    भोपाल को मिली मेट्रो

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि भोपाल को मेट्रो की सौगात मिली है। केन्द्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल द्वारा 20 दिसम्बर को भोपाल में मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ किया गया। पहले चरण में 7 किमी का मेट्रो ट्रेक सुभाष नगर से एम्स तक का है। इसमें कुल 8 स्टेशन हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के दो बड़े शहर इन्दौर और भोपाल अब मेट्रो ट्रेन अल्ट्रा माडर्न पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में शामिल हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने इन्दौर में 3.3 किमी के अंडरग्राउंड मेट्रो ट्रेन ट्रेक के निर्माण के लिए भी स्वीकृति दे दी है। मुख्यमंत्री ने इन सभी सौगातों के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल का आभार व्यक्त किया।

    केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा 23 दिसम्बर को करेंगे धार एवं बैतूल में मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि प्रदेश में पीपीपी मॉडल पर चार मेडिकल कॉलेज तैयार किए जाएंगे। इनमें से धार एवं बैतूल जिले में मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य का भूमिपूजन 23 दिसम्बर को धार एवं बैतूल में सम्पन्न होगा। मंगलवार (23 दिसम्बर) को केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा पीपीपी मॉडल पर बनने वाले दो मेडिकल कॉलेजों का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय मंत्री नड्डा पूर्वान्ह में धार में मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन एवं अन्य विकास कार्यों के लोकार्पण करने के बाद वहीं से बैतूल रवाना होंगे। नड्डा अपरान्ह में बैतूल में मेडिकल कॉलेज एवं अन्य विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सौगातों के लिये भी प्रधानमंत्री मोदी एवं केन्द्रीय मंत्री नड्डा का आभार माना।

    केंद्रीय गृह मंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर एवं रीवा आएंगे

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 25 दिसम्बर को मध्यप्रदेश आएंगे। गृहमंत्री शाह भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती पर ग्वालियर एवं रीवा में होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि गृहमंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर में सुबह 11:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में भाग लेंगे। केंद्रीय मंत्री शाह ग्वालियर में लगभग 2 लाख करोड़ से अधिक के कामों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करने के साथ-साथ निवेशकों को आशय पत्र/आवंटन आदेश का वितरण भी करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री यहां एक मेले का उद्घाटन भी करेंगे। इसके बाद वे रीवा पहुंचेगे और वहां आयोजित कृषि एवं किसान सम्मेलन में भाग लेंगे।

    11वां अंतर्राष्ट्रीय वन मेला

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 11वां अन्तर्राष्ट्रीय वन मेला भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित किया जा रहा है। यह मेला 23 दिसम्बर तक चलेगा। उन्होंने बताया कि इस मेले में नेपाल और भूटान सहित अन्य देशों ने भी अपने स्टॉल लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़ ने भी मेले में सहभागिता की है। इसमें हर्बल एवं आयुर्वेदिक दवाओं के 350 से अधिक स्टॉल लगाये गये है। 80 आयुर्वेदिक डॉक्टर और 100 से अधिक वैद्य सेवाएं दे रहे हैं। वन मेले में 26 फूड स्टॉल भी है। जिसमें आलीराजपुर का दाल पानिया, छिंदवाड़ा की वन रसोई और बांधवगढ़ के गोड़ी व्यंजनों का स्वाद भी आगंतुकों को मिल रहा है।

    मंत्रीगण दे रहे हैं दो साल की उपलब्धियों की जानकारी – 30 दिसम्बर तक मंत्रीगण करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार के दो साल पूरे होने पर प्रदेश के सभी मंत्रीगण दो साल की उपलब्धियों की विभागीय जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जनता तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रेस कांफ्रेंस का यह क्रम 30 दिसम्बर तक चलेगा। अभी तक वित्त एवं वाणिज्यिक कर, जनजातीय कार्य विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, श्रम विभाग, लोक निर्माण विभाग, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, राजस्व विभाग एवं ऊर्जा विभाग की प्रेस कॉन्फ्रेंस हो चुकी है। उन्होंने मंत्रीगण से कहा कि वे अपने-अपने विभागों की सभी उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण भी कर लें और पूरी तैयारी से अपने विभाग की विगत दो सालों की उपलब्धियों को मीडिया को बतायें, ताकि सरकार की उपलब्धियां अधिक से अधिक जन सामान्य तक पहुंचें।

    230 विधानसभा क्षेत्रों में से 193 विधानसभा क्षेत्रों में वृन्दावन ग्राम चयनित

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वृन्दावन ग्राम के संबंध में मंत्रीगण को बताया कि सरकार ने प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में एक-एक वृन्दावन ग्राम बनाने की महती योजना प्रारंभ की है। इसमें ऐसे गांव का चयन करना है, जिसकी वर्तमान जनसंख्या कम से कम 2000 हो और गौवंश की न्यूनतम संख्या 500 तक हो। इन गांवों का चयन हर विधानसभा क्षेत्र में जिला कलेक्टर द्वारा प्रभारी मंत्री एवं विधायकगण से परामर्श लेकर किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि कुल 230 विधानसभा क्षेत्रों में से अबतक 193 विधानसभा क्षेत्रों में का वृन्दावन ग्राम चयनित कर लिए गए हैं। मात्र 37 विधानसभा क्षेत्रों में यह काम होना शेष है। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्री गण से कहा कि वे अपने-अपने प्रभार के जिलों में शेष विधानसभा क्षेत्रों में वृन्दावन ग्राम का चयन शीघ्रातिशीघ्र कर लें। उन्होंने बताया कि इस योजना में जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में एक अनुश्रवण समिति भी है, जिसकी हर तीन माह में एक बैठक करना अनिवार्य है। उन्होंने मंत्रीगण से कहा कि वे यह सुनिश्विचत कर लें कि इस समिति की बैठक नियमित रूप से हों।

    जिला विकास सलाहकार समिति सहित अन्य समितियों की बैठकें जनवरी माह में कर लें

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से कहा कि वे अपने अपने प्रभार के जिलों में जिला विकास सलाहकार समिति सहित अन्य सभी महत्वपूर्ण समितियां (जिनमें जिले के विकास संबंधी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये जाते हैं) की बैठकें आगामी 1 से 24 जनवरी 2026 के दौरान अनिवार्य रूप से कर लें। उन्होंने कहा कि जिलों में विभिन्न महत्वपूर्ण समितियां होती हैं जिनकी अध्यक्षता प्रभारी मंत्री ही करते है। अत: जिला विकास सलाहकार समिति (उपाध्यक्ष के रूप में), रोगी कल्याण समिति (साधारण सभा), जिला शहरी विकास अभिकरण की जिला प्रबंधकारिणी समिति, वृंदावन गांव अनुश्रवण समिति आदि की बैठकें अनिवार्यतः रूप से कर लें। इसके अलावा जिलों में ऐसी कई अन्य समितियां भी होती हैं, जिनमें प्रभारी मंत्री द्वारा सदस्यों का मनोनयन किया जाता है। यदि ऐसे कुछ मनोनयन लंबित हैं, तो प्रभारी मंत्री इसी अवधि में यह कार्य भी कर लें।

    आरोग्य सेवा संकल्प सम्मेलन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण को बताया कि प्रदेश में 18 दिसम्बर को आरोग्य सेवा संकल्प सम्मेलन आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि आरोग्य सेवा संकल्प सम्मेलन में सभी चिकित्सा पद्धतियों के डॉक्टर्स शामिल हुए। इनमें बड़ी संख्या में जनजातीय वर्ग के युवाओं ने सहभागिता की। इस कार्यक्रम में जनजातीय पेसा क्षेत्र में आरोग्य रक्षक वॉलंटियर्स को प्राथमिक उपचार किट वितरण सहित आयुष्मान योजना के तहत चयनित जनजातीय लाभार्थियों से संवाद भी किया गया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रदेश के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण पहल के रूप में जाना जाएगा।

     

  • कौशल विकास और रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सशक्त कदम: मंत्री गौतम टेटवाल

    अभ्युदय मध्यप्रदेश
    कौशल और रोजगार से गढ़ी जा रही आत्मनिर्भरता की नई इबारत : मंत्री गौतम टेटवाल

    आईटीआई में रिकॉर्ड प्रवेश और युवाओं का हुआ वैश्विक प्लेसमेंट

    भोपाल

    कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में पत्रकार वार्ता में विभाग की 2 वर्ष की उपलब्धियां को साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने कौशल और रोजगार के क्षेत्र में ठोस, परिणाममुखी और राष्ट्र स्तर पर प्रशंसित उपलब्धियाँ हासिल की हैं।मंत्री टेटवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग की प्रमुख उपलब्धियाँ और आगामी तीन वर्षों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं के जीवन में वास्तविक परिवर्तन का प्रमाण हैं।

    सत्र 2025 में प्रदेश के आईटीआई में एक लाख से अधिक प्रशिक्षणार्थी परीक्षाओं में सम्मिलित हुए और विभिन्न ट्रेडों में दस प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है। विगत दो वर्षों में शासकीय संभागीय आईटीआई, भोपाल के तीन प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाना तथा शासकीय एकलव्य महिला आईटीआई, बैतूल की प्रशिक्षणार्थी कु. त्रिशा तावड़े को 4 अक्टूबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नई दिल्ली में सम्मानित किया जाना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

    विश्व कौशल प्रतियोगिता 2024 में प्रदेश के प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर 1 गोल्ड, 2 सिल्वर, 4 कांस्य और 11 मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किए तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस (लियॉन) में एक मेडेलियन ऑफ एक्सीलेंस अर्जित किया गया, जो प्रशिक्षण की गुणवत्ता का प्रमाण है। वर्ष 2025 में शासकीय आईटीआई के प्रवेश में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई; कुल सीटें बढ़ाकर 52,248 की गईं और 94.55% सीटें भरी गईं, जो वर्ष 2024 के 86.33% की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्शाती है। महिला आरक्षण बढ़ाकर 35% करने तथा समावेशी प्रवेश नीतियों के कारण महिला प्रशिक्षणार्थियों की संख्या बढ़कर 12,191 हुई, जबकि वर्ष 2024 में यह 9,655 थी।

    समावेशिता और नवप्रवर्तन विभाग की प्राथमिकता है । इस वर्ष 490 दिव्यांग प्रशिक्षणार्थियों और बाल देखरेख संस्थाओं के 16 बच्चों ने आईटीआई में प्रवेश लिया। आठवीं कक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए ट्रेडों की संख्या 5 से बढ़ाकर 10 की गई तथा इन ट्रेडों में 8,041 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। प्रदेश के आईटीआई की गुणवत्ता और आकर्षण का प्रमाण यह है कि इस वर्ष बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और उत्तराखंड सहित आठ राज्यों के विद्यार्थियों ने मध्यप्रदेश के आईटीआई में प्रवेश लिया।

    आईटीआई ग्रेडिंग में प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई ने 10 में से 9 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए और शासकीय संभागीय आईटीआई, उज्जैन ने नौ दशमलव तीन अंक के साथ प्रदेश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। आईआईटी दिल्ली के सहयोग से उज्जैन, भोपाल और जबलपुर में एआई, आईओटी, ब्लॉकचेन तथा एआर-वीआर पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं तथा टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल द्वारा फाइव-जी टेक्नोलॉजी में 400 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत नौ आईटीआई में एआई डेटा लैब्स स्थापित करने के अनुबंध सुनिश्चित किए गए हैं।

    उद्योग-सीएसआर साझेदारी से प्रशिक्षण अवसंरचना सुदृढ़ हुई है; मारुति सुजुकी द्वारा आईटीआई भोपाल व जबलपुर में आधुनिक लैब का निर्माण पाँच करोड़ रु. की लागत से किया गया, सिमेंस ने आईटीआई उज्जैन में साठ लाख रुपए. की मेन्यूफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी लैब स्थापित की, जैगुआर फाउंडेशन ने आईटीआई भोपाल में पंद्रह लाख रु. की प्लम्बिंग स्किल लैब विकसित की तथा श्री-ट्रस्ट ने 20 आईटीआई में इलेक्ट्रिकल, सोलर और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन लैब स्थापित कीं। वाधवानी फाउण्डेशन, क्वेस्ट अलाईंस और इग्नाइट परियोजना के माध्यम से हजारों प्रशिक्षणार्थियों को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इंडस्ट्री-अकादेमिया कंसल्टेशन वर्कशॉप 14 स्थानों पर आयोजित कर प्रशिक्षण एवं उद्योग आवश्यकताओं का बेहतर समन्वय स्थापित किया गया।

    संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में वर्ष 2025 में 1,100 प्रशिक्षणार्थियों का प्रवेश सुनिश्चित किया गया, जिनमें 80% आईटीआई प्रशिक्षणार्थी और 20% पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग प्रशिक्षणार्थी हैं; ग्लोबल स्किल पार्क से अब तक 600 प्रशिक्षणार्थियों का सफल प्लेसमेंट हुआ है जिनमें 29 को विदेशी नियोजन प्राप्त हुआ और यह पार्क उच्च प्लेसमेंट प्रतिशत के साथ प्रदेश की पहचान बन चुका है। विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण, हब-एंड-स्पोक मॉडल और उद्योगों के साथ समन्वय के तहत अधिकारियों तथा अभ्यर्थियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

    विगत दो वर्षों में विभागीय संस्थागत क्षमता मजबूत करने हेतु अनेक नियुक्तियाँ की गईं तथा अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट को प्रोत्साहन देते हुए आईटीआई उत्तीर्ण 113 प्रशिक्षणार्थियों को अबूधाबी, जापान, स्लोवाकिया, कुवैत सहित विदेशों में रोजगार उपलब्ध कराया गया। प्रदेश में युवाओं को स्वरोजगार, रोजगार और अप्रेंटिसशिप से जोड़ने के लिए प्रतिमाह युवा संगम आयोजित किए जा रहे हैं; विगत दो वर्षों में 656 युवा संगमों के माध्यम से कुल 1,56,767 आवेदकों को रोजगार से जोड़ा गया।

    राज्यमंत्री टेटवाल ने जानकारी दी किआगामी तीन वर्षों की समग्र रूपरेखा में प्रदेश के आईटीआई विहीन 51 विकासखंडों में नये शासकीय आईटीआई की स्थापना, रिक्त पदों की पूर्ति, पीएम सेतु योजना के तहत क्लस्टर विकास, सीएसआर सहयोग से आधुनिक स्किल लैब का विस्तार, अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट का बढ़ावा, विश्व कौशल प्रतियोगिताओं में प्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन और प्रशिक्षकों के लिए पुरस्कार प्रोत्साहन प्रमुख उद्देश्य होंगे। साथ ही, ग्रीन एनर्जी और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अनुरूप नए कोर्स और प्रशिक्षण शुरू कर प्रदेश के युवाओं को आने वाले हरित व स्वचालित रोजगार बाजार के लिये तैयार किया जा रहा है।

    राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि ये उपलब्धियाँ हमारे सामूहिक परिश्रम, समर्पण और साझेदारी का नतीजा हैं और कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का उद्देश्य मध्यप्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए प्रदेश को रोजगार का नया मानक बनाना है।

     

  • कुनकुरी नगर के विकास को नई रफ्तार: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 107 करोड़ 32 लाख रुपये के कार्यों की दी मंजूरी

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुनकुरी नगर को दी 107 करोड़ 32 लाख रुपये की ऐतिहासिक विकास सौगात

    दो वर्षों के सुशासन में बदली कुनकुरी की तस्वीर, विकास की लिखी गई नई इबारत

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन के दो वर्षों के दौरान विकास की नई गति देखने को मिल रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले के कुनकुरी नगर पंचायत क्षेत्र को 107 करोड़ 32 लाख रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की स्वीकृति देकर मुख्यमंत्री ने नगर को ऐतिहासिक सौगात दी है। इन योजनाओं से कुनकुरी नगर की आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, पर्यटन, यातायात और नागरिक सुविधाओं में व्यापक और दीर्घकालिक सुधार होगा।

    कुनकुरी नगर में युवाओं को आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 63 करोड़ 84 लाख रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण को मंजूरी दी गई है। यह कॉम्प्लेक्स क्षेत्रीय युवाओं की खेल प्रतिभा को निखारने में मील का पत्थर साबित होगा।
    मुख्यमंत्री साय ने नगर पंचायत क्षेत्र में 53 विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ रुपये की स्वीकृति देकर जनता से किए गए अपने वादे को पूरा किया है। इन कार्यों से नगर के विभिन्न वार्डों और मोहल्लों में बुनियादी सुविधाएं सुदृढ़ होंगी और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुनकुरी को बड़ी सौगात देते हुए 2 करोड़ 62 लाख रुपये की लागत से नेचुरोपैथी भवन निर्माण को मंजूरी दी गई है। इससे प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद और योग को बढ़ावा मिलेगा तथा नागरिकों को बेहतर वैकल्पिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।

    पर्यटन और धार्मिक आस्था को सशक्त करने के लिए छठ घाट के समग्र विकास हेतु 5 करोड़ 17 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। घाट के सौंदर्यीकरण और विकास से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक गतिविधियों मंक वृद्धि होगी।
    कुनकुरी नगर में सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों के लिए 6 करोड़ 67 लाख रुपये की लागत से आधुनिक बहुउद्देशीय ऑडिटोरियम भवन का निर्माण किया जाएगा, जिससे कला, संस्कृति और सामाजिक आयोजनों को नया मंच मिलेगा। शिक्षा के क्षेत्र में मजबूती लाने के उद्देश्य से नालंदा परिसर के 250 सीटर विस्तार के लिए 4 करोड़ 37 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्राप्त होगा।

    नगर के यातायात को सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के लिए 7 करोड़ 26 लाख रुपये की लागत से हाई-टेक बस स्टैंड के निर्माण को मंजूरी मिली है, जिससे यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी और यातायात व्यवस्था सुदृढ़ होगी। इसके साथ ही नगर में बच्चों के मनोरंजन और सुरक्षित खेल के लिए 1 करोड़ 2 लाख रुपये की लागत से रिक्रिएशन चिल्ड्रन पार्क का निर्माण किया जाएगा। वहीं 6 करोड़ रुपये की राशि से वार्ड क्रमांक 1 से 15 तक एलईडी स्ट्रीट लाइट एवं अन्य विकास कार्य किए जाएंगे, जिससे नगर में बेहतर प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

    इन सभी योजनाओं के माध्यम से कुनकुरी नगर तेजी से स्मार्ट सुविधाओं, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, सशक्त शिक्षा, आधुनिक यातायात और समृद्ध सांस्कृतिक गतिविधियों से युक्त एक आदर्श नगर के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में कुनकुरी नगर विकास, विश्वास और भविष्य की नई मिसाल बनता जा रहा है। नगरवासियों ने इन ऐतिहासिक विकास कार्यों के लिए मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।

  • सेवा, संस्कार और सशक्त नेतृत्व का संगम: द्वितीय सोपान टेस्टिंग कैंप का आयोजन

    अनुशासन, सेवा और नेतृत्व की ओर एक सशक्त कदम : द्वितीय सोपान टेस्टिंग कैंप का सफल आयोजन

    ग्वालियर
    पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 5, ग्वालियर में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के तत्वावधान में स्काउट–गाइड द्वितीय सोपान (Dwitiya Sopan) टेस्टिंग कैंप का सफल आयोजन दिनांक 19 एवं 20 दिसंबर 2025 को किया गया। यह द्विदिवसीय कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।
    कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मनीष तिलक के मार्गदर्शन में हुआ। अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने स्काउट–गाइड आंदोलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को अनुशासन, सेवा-भावना, नेतृत्व क्षमता एवं आत्मनिर्भरता जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने हेतु प्रेरित किया।
    इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान स्काउट एवं गाइड विद्यार्थियों को द्वितीय सोपान से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें प्रमुख रूप से—

    स्काउट–गाइड नियम एवं प्रतिज्ञा
    गांठें एवं बंधन
    प्राथमिक उपचार
    ध्वज शिष्टाचार
    टोली व्यवस्था
    सेवा एवं अनुशासन आधारित गतिविधियाँ
    शामिल रहीं।

    कार्यक्रम का कुशल संचालन स्काउट मास्टर श्री मोहन दीक्षित एवं श्री शंकर लाल मीणा के निर्देशन में संपन्न हुआ। वहीं गाइड कैप्टन सुश्री प्रीति सिंह एवं सुश्री सुमन पाल ने गाइड विद्यार्थियों को पूर्ण निष्ठा, समर्पण एवं दक्षता के साथ प्रशिक्षण प्रदान किया।
    सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह एवं अनुशासन के साथ गतिविधियों में भाग लिया तथा स्काउट–गाइड के मूल सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती सुमन पाल द्वारा किया गया।
    समग्र रूप से यह आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, सेवा-भावना, अनुशासन एवं राष्ट्रभक्ति के विकास की दिशा में अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।

  • CG पुलिस में प्रशासनिक बदलाव की बड़ी कार्रवाई: देर रात 95 अधिकारियों के ट्रांसफर, नई कमांड व्यवस्था लागू

    रायपुर
     राज्य शासन ने पुलिस सेवा के एसपी, एएसपी एवं डीएसपी स्तर के अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। इसके आदेश सोमवार को जारी किए गए। इस सूची में रायपुर सहित कई जिलों के 95 पुलिस अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है। 35 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और 60 डीएसपी स्तर के अफसरों का तबदला किया गया।

    वहीं उप सेनानी 6वीं वाहिनी रायगढ़ से सुरेशा चौबे को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जिला कोरिया के पद पर पदस्थ किया गया है। वहीं संजय शर्मा, सहायक पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस मुख्यालय को सेनानी 18वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, मनेंद्रगढ़ जिला कोरिया नियुक्त किया गया है। ज्योति सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जिला बेमेतरा को उप सेनानी 21वीं वाहिनी करकाभाट,जिला बालोद स्थानांतरित किया गया है। रायपुर से कीर्तन राठौर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जिला राजनांदगांव पदस्थ किया गया है।

    इसी तरह रायपुर से वर्षा मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग को उप सेनानी 6वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल रायगढ़ भेजा गया है। अनुराग झा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रोटोकॉल एवं यातायात, जिला रायपुर को सहायक पुलिस महानिरीक्षक, गुप्तवार्ता, पुलिस मुख्यालय रायपुर नियुक्त किया गया है। ममता देवांगन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, महिला विरुद्ध अपराध अन्वेषण शाखा रायपुर को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, महिला विरुद्ध अपराध अन्वेषण शाखा, जिला दुर्ग स्थानांतरित किया गया है। वहीं जितेंद्र कुमार चंद्राकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जिला गरियाबंद को जोनल पुलिस अधीक्षक, विशेष शाखा रायपुर में पदस्थ किया गया है।

    नए एएसपी पदस्थापना

    आकाश मरकाम – ग्रामीण रायपुर

    कीर्तन राठौर – राजनांदगांव

    अनिल सोनी – रायगढ़

    राजेंद्र जायसवाल – जीपीएम

    मधुलिका सिंह – बिलासपुर ग्रामीण

    हरीश यादव – बेमेतरा

    राकेश पाटनवार – जशपुर

    सुरेशा चौबे – कोरिया

    योगेश देवांगन – सूरजपुर

    राहुल देव शर्मा – रायपुर

    ओमप्रकाश चंदेल – कोरबा बटालियन

    अभिषेक महेश्वरी – नारायणपुर बटालियन

    अमृता सोरी, गोपी मेश्राम – डायल-112

    60 डीएसपी भी बदले गए

    डीएसपी स्तर पर भी व्यापक बदलाव किया गया है। रायपुर, राजनांदगांव, कोरबा, दुर्ग, अंबिकापुर, बेमेतरा, सक्ती, नवा रायपुर और पुलिस मुख्यालय सहित कई जिलों और यूनिट्स में नई तैनाती की गई है। ट्रैफिक, पुलिस लाइन, विशेष शाखा और फील्ड पोस्टिंग में संतुलन बनाते हुए अधिकारियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं।

  • भोपाल, रायसेन और विदिशा समेत 6 जिले होंगे मेट्रोपॉलिटन रीजन का हिस्सा, नया आर्थिक हब बनेगा मध्यभारत

    भोपाल 

    भोपाल शहर को मेट्रोपॉलिटन रीजन (बीएमआर) में बदलने की तस्वीर साफ होते ही अब विकास को गति मिलेगी। एक ओर आर्थिक विकास तो दूसरी ओर करीब 10 लाख रोजगार पैदा होंगे। केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीते दिन बीएमआर का मैप जारी किया।

    इसमें साफ हो गया कि करीब 12,099 वर्ग किमी में फैले बीएमआर में 6 जिलों के कुछ हिस्से शामिल होंगे। इनमें 12 नगरीय क्षेत्र, 30 तहसील व 2524 गांव शामिल होंगे। इसमें 15 बड़े औद्योगिक क्षेत्र भी शामिल किए गए हैं। इसके साथ बड़ी संख्या में पर्यटन क्षेत्रों तक इसका विस्तार किया है।

    रोजगार के द्वार खुलेंगे

    इससे औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेगी और पर्यटन स्थल सीधे जुड़ेगे। हालांकि बीएमआर में शामिल 6 जिलों में से किसी भी जिले के सभी नगरों को शामिल नहीं किया है। इससे उन्हें ट्रांसपोर्टेशन और अन्य विकास कार्यों का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन यहां के लोगों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे, क्योंकि इसमें शामिल नगरों में आइटी पार्क व स्पेशल इकोनोमिक जोन का विकास होगा। यह प्रोजेक्ट भोपाल, रायसेन, विदिशा, नर्मदापुरम, सीहोर, राजगढ़ व आसपास के कस्बों को मध्यभारत के प्रमुख आर्थिक केंद्र में बदलेगी।

    ये औद्योगिक क्षेत्र शामिल

    बीएमआर में गोविंदपुरा, अचारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, टेक्सटाइल पार्क, बगरौदा और आइटी पार्क शामिल हैं। सीहोर जिले के बड़ियाखेड़ी, बुधनी, औद्योगिक क्षेत्र और रायसेन जिले के आष्टा एग्रो प्रोसेसिंग, पचामा मंडीदीप व प्लास्टिक पार्क तामोट को शामिल किया है। नर्मदापुरम जिले के फूड पार्क बाबई और मोहासा बाबई एनर्जी पार्क व राजगढ़ के पीलूखेड़ी औद्योगिक और विदिशा का जांबर बांगरी औद्योगिक क्षेत्र को शामिल किया है।

    6 से अधिक एमएसएमई के औद्योगिक पार्क और क्लस्टर शामिल हैं। इससे विनिर्माण, आइटी, लॉजिस्टिक्स, वस्त्र उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, आइटी, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण व पर्यटन क्षेत्रों में करीब 10 लाख रोजगार पैदा होंगे।

    मेट्रोपॉलिटन रीजन में निगम का नया सेटअप

    भोपाल को मेट्रोपॉलिटन रीजन बनाने की दिशा में नगरीय प्रशासन संचालनालय ने एक कदम और आगे बढ़ाया है। संचालनालय ने नगर निगम कमिश्नर को पत्र जारी कर शहर में मौजूद बीएमसी के सभी प्रकार के इंजीनियर्स की लिस्ट तैयार करने कहा है। इंजीनियर वर्ग को मेट्रोपॉलिटन रीजन में अलग-अलग जिम्मेदारी दी जानी हैं। एमपीआर में चार बिल्डिंग परमिशन सेल बनाई जानी है जिसके लिए सिविल कैडर से चार सिटी प्लानर बनेंगे। सीवेज, पार्किंग, रोड, ट्रैफिक, लाइटिंग जैसे कामों के लिए अलग-अलग कार्यपालन यंत्री निर्धारित किए जाएंगे जिनके निर्देशन में टीम काम करेगी।

    केबिनेट में होगी चर्चा

    अभी नगर 85 वार्ड में काम चलाऊ व्यवस्था पर टिका है। नगरीय प्रशासन विभाग के मसौदे पर केबिनेट में चर्चा होगी। मंजूरी मिलते ही इसे नए सिस्टम में शामिल कर लिया जाएगा। इसका सीधा फायदा नगर निगम के लंबित प्रोजेक्ट में तेजी आने के रूप में मिलेगा। नगर निगम में सीएम हेल्प लाइन की शिकायतों में एक बार फिर सबसे नीचे आया है। इसी प्रमुख वजह कम इंजीनियर, विकास कार्य ठप होने को माना जा रहा है। नगर परिषद की बैठक में पार्षदों ने इस बात को प्रमुख से सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया था।

  • एमपी सरकार का बड़ा फैसला: सिंगल फादर को 2 साल की चाइल्ड केयर लीव, घायल होने पर सैलरी के साथ लंबी छुट्टी

    भोपाल 

    प्रदेश सरकार ने 48 साल पुराने सिविल सेवा अवकाश नियम में संशोधन कर दिया है। अब सरोगेट या कमीशनिंग मां (सरोगेसी के माध्यम से पैदा हुई संतान की मां) को मातृत्व और एकल (अकेले) पुरुष शासकीय सेवक को संतान पालन अवकाश मिलेगा।

    दत्तक संतान ग्रहण के लिए 15 दिन का पितृत्व अवकाश की पात्रता रहेगी। शिक्षकों को प्रतिवर्ष 10 अर्जित अवकाश मिलेंगे तो सेवानिवृत्ति के बाद अवकाश नकदीकरण में जो अर्जित अवकाश बच जाते हैं, उनका भी नकदीकरण किया जाएगा। यह प्रविधान एक जनवरी 2026 से लागू होंगे। नए नियमों के मुताबिक अब बीमारी और मातृत्व अवकाश लेना ज्यादा सुविधाजनक होगा, वहीं इनके दुरुपयोग पर भी लगाम लगेगी। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न कर सकें, इसके लिए रोस्टर बनाना अनिवार्य होगा।

    सिविल सेवा अवकाश नियम में संशोधन

    वित्त विभाग ने अवकाश नियम 2025 अधिसूचित कर दिए हैं। अर्जित अवकाश सेवाकाल में 300 दिन से अधिक नहीं होंगे। प्रदेश में मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम 1977 लागू था। इसमें वर्तमान स्थितियों को देखते हुए परिवर्तन किए गए हैं।

    इससे प्रदेश के साढ़े सात लाख नियमित कर्मचारी लाभान्वित होंगे। संतान पालन अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) प्रथम 365 दिन पूर्ण वेतन के साथ मिलेगी। जबकि, दूसरी बार में 80 प्रतिशत वेतन का भुगतान होगा। 18 वर्ष तक के बच्चे के लिए अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।

    सरोगेट और सिंगल पिता को अवकाश

    अभी तक दो साल का अवकाश लेने तक वेतन कटौती का प्रविधान नहीं था लेकिन संशोधित नियम में रखा गया है। एक वर्ष में तीन बार से अधिक अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।

    एकल महिला को एक कैलेंडर वर्ष (एक जनवरी से 31 दिसंबर) में छह बार अवकाश की पात्रता रहेगी। दत्तक संतान ग्रहण अवकाश की पात्रता उस दत्तकग्राही मां को नहीं होगी, जिसकी दत्तक लेते समय एक से अधिक जीवित संतान हो।
    शिक्षकों के लिए अर्जित अवकाश नकदीकरण

    पितृत्व अवकाश पत्नी के प्रसव होने की संभावित तिथि के 15 दिन पूर्व या प्रसव की तारीख से छह माह तक की अवधि में 15 दिनों का स्वीकृत किया जा सकेगा। इस अवधि का वेतन मिलेगा।

    सरोगेसी के द्वारा जन्मे संतान के कमीशनिंग (वह पुरुष जो सरगोसी के माध्यम से संतान का पिता होता है) पिता को भी छह महीने के भीतर 15 दिनों का पितृत्व अवकाश की पात्रता रहेगी।

    असाधारण अवकाश पर रहने किसी भी प्रकार के अवकाश वेतन की पात्रता नहीं रहेगी। इसके तहत चिकित्सकों को पीजी योग्यता प्राप्त करने के लिए 36 माह का अध्ययन अवकाश मिलेगा। इससे सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं आएगा।
    इन पर लागू नहीं होंगे नियम

    आकस्मिक, दैनिक दर या अंशकालीन नियोजन में नियुक्त कर्मचारी- आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारी- कार्यभारित स्थापना में नियुक्त कर्मचारी- संविदा पर नियुक्त कर्मचारी

    जानिए नए नियमों के 10 बड़े बदलाव

    1. साल की शुरुआत में ही खाते में आ जाएगी EL (अर्निंग लीव) यह सबसे बड़ा और सुविधाजनक बदलाव है। अभी तक अर्जित अवकाश (EL) साल भर की नौकरी पूरी होने के बाद कर्मचारी के खाते में दर्ज होता था। अब ऐसा नहीं होगा।

    1 जनवरी को 15 EL: साल की शुरुआत में ही 15 दिन की EL खाते में क्रेडिट हो जाएगी।

    1 जुलाई को 15 EL: साल के मध्य में फिर 15 दिन की EL जुड़ जाएगी।

    नए कर्मचारियों को भी फायदा: नई जॉइनिंग करने वाले कर्मचारी को भी जॉइनिंग के साथ ही आनुपातिक रूप से EL मिल जाएगी। यह सुविधा काम शुरू करने से पहले ही कर्मचारियों को अवकाश की सुरक्षा देगी।

    2. शिक्षकों और प्रोफेसरों को भी मिलेगी 10 दिन की EL अध्यापन कार्य में लगे सरकारी कर्मचारी, जिन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश मिलता है, उन्हें अभी तक अर्जित अवकाश की पात्रता नहीं थी। इससे उन्हें साल के बीच में जरूरी काम आने पर परेशानी होती थी।

    अब मिलेगा 10 दिन का अर्जित अवकाश: नए नियमों के तहत अब इन कर्मचारियों को भी साल में 10 दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा। 5 दिन की EL जनवरी में और 5 दिन की जुलाई में उनके खाते में जुड़ जाएगी।

    4. ड्यूटी पर घायल होने पर 2 साल का विशेष अवकाश प्रदेश में कर्मचारियों और अधिकारियों पर ड्यूटी के दौरान बढ़ते हमलों और दुर्घटनाओं को देखते हुए यह विशेष प्रावधान किया गया है।

    स्पेशल मेडिकल लीव: यदि कोई कर्मचारी कर्तव्य पालन करते हुए हमले या दुर्घटना में घायल होता है, तो उसे मेडिकल ऑफिसर की अनुशंसा पर 2 साल तक का विशेष अवकाश मिल सकेगा।

    वेतन: इस अवकाश के पहले 180 दिनों में पूरा वेतन मिलेगा। शेष अवधि में आधा वेतन मिलेगा। कर्मचारी चाहे तो इस अवधि में अपनी EL समायोजित कराकर पूरा वेतन ले सकता है। यह छुट्टियां कर्मचारी के अवकाश खाते से नहीं काटी जाएंगी।

    5. CL के साथ जुड़ जाएगी मेडिकल लीव अभी तक आकस्मिक अवकाश (CL) के तुरंत बाद मेडिकल लीव लेने पर तकनीकी समस्या होती थी। यदि कोई कर्मचारी बीमार होने पर 1-2 दिन की CL ले लेता है और बाद में उसे मेडिकल लीव की जरूरत पड़ती है, तो उसकी CL बर्बाद हो जाती थी।

    अब मिलेगी राहत: नए नियमों के तहत, कर्मचारी जॉइनिंग के 15 दिन के अंदर अपनी शुरुआती CL को मेडिकल लीव में बदलवा सकेगा। इससे उसकी CL बच जाएगी और पूरी छुट्टी मेडिकल लीव में गिनी जाएगी।

    7. प्रोबेशनर्स के लिए भी स्पष्ट हुए छुट्टी के नियम अभी तक प्रोबेशन पीरियड में रहने वाले कर्मचारियों के लिए अवकाश के नियम स्पष्ट नहीं थे।

    अब मिलेगी पात्रता: नए नियमों में स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रोबेशनर्स को भी नियमानुसार अवकाश की पात्रता होगी। प्रशिक्षु कर्मचारियों को मेडिकल सर्टिफिकेट पर अधिकतम 1 महीने का अवकाश मिल सकेगा।

    8. चाइल्ड केयर लीव: दूसरे साल 80% वेतन चाइल्ड केयर लीव के तहत 730 दिनों के अवकाश की पात्रता पहले की तरह ही रहेगी, लेकिन वेतन के नियम में बदलाव किया गया है।

    पहले 365 दिन: पूरा वेतन मिलेगा।

    अगले 365 दिन: वेतन का 80 प्रतिशत भुगतान होगा।

    10. अवकाश अधिकार नहीं, लेकिन मनमानी भी नहीं नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि अवकाश अधिकार नहीं है और इसे लोकहित में निरस्त किया जा सकता है। हालांकि, इसका उद्देश्य कर्मचारियों के अवकाश के अधिकार को कम करना नहीं है। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न कर सकें, इसके लिए उन्हें कर्मचारियों का रोस्टर भी बनाना होगा। कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी भी परिस्थिति में 5 वर्ष से अधिक अवकाश पर नहीं रह सकता।

     

  • एमपी सरकार का बड़ा फैसला: सिंगल फादर को 2 साल की चाइल्ड केयर लीव, घायल होने पर सैलरी के साथ लंबी छुट्टी

    भोपाल 

    प्रदेश सरकार ने 48 साल पुराने सिविल सेवा अवकाश नियम में संशोधन कर दिया है। अब सरोगेट या कमीशनिंग मां (सरोगेसी के माध्यम से पैदा हुई संतान की मां) को मातृत्व और एकल (अकेले) पुरुष शासकीय सेवक को संतान पालन अवकाश मिलेगा।

    दत्तक संतान ग्रहण के लिए 15 दिन का पितृत्व अवकाश की पात्रता रहेगी। शिक्षकों को प्रतिवर्ष 10 अर्जित अवकाश मिलेंगे तो सेवानिवृत्ति के बाद अवकाश नकदीकरण में जो अर्जित अवकाश बच जाते हैं, उनका भी नकदीकरण किया जाएगा। यह प्रविधान एक जनवरी 2026 से लागू होंगे। नए नियमों के मुताबिक अब बीमारी और मातृत्व अवकाश लेना ज्यादा सुविधाजनक होगा, वहीं इनके दुरुपयोग पर भी लगाम लगेगी। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न कर सकें, इसके लिए रोस्टर बनाना अनिवार्य होगा।

    सिविल सेवा अवकाश नियम में संशोधन

    वित्त विभाग ने अवकाश नियम 2025 अधिसूचित कर दिए हैं। अर्जित अवकाश सेवाकाल में 300 दिन से अधिक नहीं होंगे। प्रदेश में मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम 1977 लागू था। इसमें वर्तमान स्थितियों को देखते हुए परिवर्तन किए गए हैं।

    इससे प्रदेश के साढ़े सात लाख नियमित कर्मचारी लाभान्वित होंगे। संतान पालन अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) प्रथम 365 दिन पूर्ण वेतन के साथ मिलेगी। जबकि, दूसरी बार में 80 प्रतिशत वेतन का भुगतान होगा। 18 वर्ष तक के बच्चे के लिए अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।

    सरोगेट और सिंगल पिता को अवकाश

    अभी तक दो साल का अवकाश लेने तक वेतन कटौती का प्रविधान नहीं था लेकिन संशोधित नियम में रखा गया है। एक वर्ष में तीन बार से अधिक अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा।

    एकल महिला को एक कैलेंडर वर्ष (एक जनवरी से 31 दिसंबर) में छह बार अवकाश की पात्रता रहेगी। दत्तक संतान ग्रहण अवकाश की पात्रता उस दत्तकग्राही मां को नहीं होगी, जिसकी दत्तक लेते समय एक से अधिक जीवित संतान हो।
    शिक्षकों के लिए अर्जित अवकाश नकदीकरण

    पितृत्व अवकाश पत्नी के प्रसव होने की संभावित तिथि के 15 दिन पूर्व या प्रसव की तारीख से छह माह तक की अवधि में 15 दिनों का स्वीकृत किया जा सकेगा। इस अवधि का वेतन मिलेगा।

    सरोगेसी के द्वारा जन्मे संतान के कमीशनिंग (वह पुरुष जो सरगोसी के माध्यम से संतान का पिता होता है) पिता को भी छह महीने के भीतर 15 दिनों का पितृत्व अवकाश की पात्रता रहेगी।

    असाधारण अवकाश पर रहने किसी भी प्रकार के अवकाश वेतन की पात्रता नहीं रहेगी। इसके तहत चिकित्सकों को पीजी योग्यता प्राप्त करने के लिए 36 माह का अध्ययन अवकाश मिलेगा। इससे सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं आएगा।
    इन पर लागू नहीं होंगे नियम

    आकस्मिक, दैनिक दर या अंशकालीन नियोजन में नियुक्त कर्मचारी- आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारी- कार्यभारित स्थापना में नियुक्त कर्मचारी- संविदा पर नियुक्त कर्मचारी

    जानिए नए नियमों के 10 बड़े बदलाव

    1. साल की शुरुआत में ही खाते में आ जाएगी EL (अर्निंग लीव) यह सबसे बड़ा और सुविधाजनक बदलाव है। अभी तक अर्जित अवकाश (EL) साल भर की नौकरी पूरी होने के बाद कर्मचारी के खाते में दर्ज होता था। अब ऐसा नहीं होगा।

    1 जनवरी को 15 EL: साल की शुरुआत में ही 15 दिन की EL खाते में क्रेडिट हो जाएगी।

    1 जुलाई को 15 EL: साल के मध्य में फिर 15 दिन की EL जुड़ जाएगी।

    नए कर्मचारियों को भी फायदा: नई जॉइनिंग करने वाले कर्मचारी को भी जॉइनिंग के साथ ही आनुपातिक रूप से EL मिल जाएगी। यह सुविधा काम शुरू करने से पहले ही कर्मचारियों को अवकाश की सुरक्षा देगी।

    2. शिक्षकों और प्रोफेसरों को भी मिलेगी 10 दिन की EL अध्यापन कार्य में लगे सरकारी कर्मचारी, जिन्हें ग्रीष्मकालीन अवकाश मिलता है, उन्हें अभी तक अर्जित अवकाश की पात्रता नहीं थी। इससे उन्हें साल के बीच में जरूरी काम आने पर परेशानी होती थी।

    अब मिलेगा 10 दिन का अर्जित अवकाश: नए नियमों के तहत अब इन कर्मचारियों को भी साल में 10 दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा। 5 दिन की EL जनवरी में और 5 दिन की जुलाई में उनके खाते में जुड़ जाएगी।

    4. ड्यूटी पर घायल होने पर 2 साल का विशेष अवकाश प्रदेश में कर्मचारियों और अधिकारियों पर ड्यूटी के दौरान बढ़ते हमलों और दुर्घटनाओं को देखते हुए यह विशेष प्रावधान किया गया है।

    स्पेशल मेडिकल लीव: यदि कोई कर्मचारी कर्तव्य पालन करते हुए हमले या दुर्घटना में घायल होता है, तो उसे मेडिकल ऑफिसर की अनुशंसा पर 2 साल तक का विशेष अवकाश मिल सकेगा।

    वेतन: इस अवकाश के पहले 180 दिनों में पूरा वेतन मिलेगा। शेष अवधि में आधा वेतन मिलेगा। कर्मचारी चाहे तो इस अवधि में अपनी EL समायोजित कराकर पूरा वेतन ले सकता है। यह छुट्टियां कर्मचारी के अवकाश खाते से नहीं काटी जाएंगी।

    5. CL के साथ जुड़ जाएगी मेडिकल लीव अभी तक आकस्मिक अवकाश (CL) के तुरंत बाद मेडिकल लीव लेने पर तकनीकी समस्या होती थी। यदि कोई कर्मचारी बीमार होने पर 1-2 दिन की CL ले लेता है और बाद में उसे मेडिकल लीव की जरूरत पड़ती है, तो उसकी CL बर्बाद हो जाती थी।

    अब मिलेगी राहत: नए नियमों के तहत, कर्मचारी जॉइनिंग के 15 दिन के अंदर अपनी शुरुआती CL को मेडिकल लीव में बदलवा सकेगा। इससे उसकी CL बच जाएगी और पूरी छुट्टी मेडिकल लीव में गिनी जाएगी।

    7. प्रोबेशनर्स के लिए भी स्पष्ट हुए छुट्टी के नियम अभी तक प्रोबेशन पीरियड में रहने वाले कर्मचारियों के लिए अवकाश के नियम स्पष्ट नहीं थे।

    अब मिलेगी पात्रता: नए नियमों में स्पष्ट कर दिया गया है कि प्रोबेशनर्स को भी नियमानुसार अवकाश की पात्रता होगी। प्रशिक्षु कर्मचारियों को मेडिकल सर्टिफिकेट पर अधिकतम 1 महीने का अवकाश मिल सकेगा।

    8. चाइल्ड केयर लीव: दूसरे साल 80% वेतन चाइल्ड केयर लीव के तहत 730 दिनों के अवकाश की पात्रता पहले की तरह ही रहेगी, लेकिन वेतन के नियम में बदलाव किया गया है।

    पहले 365 दिन: पूरा वेतन मिलेगा।

    अगले 365 दिन: वेतन का 80 प्रतिशत भुगतान होगा।

    10. अवकाश अधिकार नहीं, लेकिन मनमानी भी नहीं नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि अवकाश अधिकार नहीं है और इसे लोकहित में निरस्त किया जा सकता है। हालांकि, इसका उद्देश्य कर्मचारियों के अवकाश के अधिकार को कम करना नहीं है। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न कर सकें, इसके लिए उन्हें कर्मचारियों का रोस्टर भी बनाना होगा। कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी भी परिस्थिति में 5 वर्ष से अधिक अवकाश पर नहीं रह सकता।

     

  • वंदे भारत ट्रेन के लिए तैयार होगा मेंटनेंस हब, 1000 युवाओं को रोजगार, 13 करोड़ का प्रोजेक्ट लॉन्च

     भोपाल 
    नए साल में शहर के युवाओं को वंदे भारत मेंटेनेंस हब प्रोजेक्ट से रोजगार मिलने का रास्ता साफ हो गया है। भोपाल रेल मंडल के प्रोजेक्ट में कई पदों पर जल्द ही वैकेंसी निकाली जाएंगी। करीब 113 करोड़ के प्रोजेक्ट का निर्माण वंदे भारत के दिल्ली से आने वाले रैंक की सफाई व खराबियों को दूर करने के लिए किया जा रहा है। अभी ये काम दिल्ली में होता है और रानी कमलापति वॉशिंग पिट में गाड़ी की क्लीनिंग का काम किया जाता है।
    एक साथ होगा मेंटनेंस

    मेंटनेंस हब में काम करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों का दल तैनात रहेगा जो कम समय में ट्रेन को दोबारा वापसी की यात्रा के लिए तैयार कर देगा। सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि इस हब के बनने के बाद तीन वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का एक साथ मेंटेनेंस किया जा सकेगा। वर्तमान में वंदे भारत के कोच का फुल मेंटेनेंस चेन्नई भेजा जाता है और इटारसी में केवल छोटा-मोटा काम होता होता है।

    समय और संसाधनों की बचत

    मेंटनेंस हब भोपाल में होने से ट्रेन की बड़ी खराबी पर भी काम हो सकेगा। नवंबर 2024 में वंदे भारत के कोच की स्प्रिंग टूटने से ट्रेन को मरम्मत में 17 घंटे लगे थे।
    3 चरणों में होगा काम

    यह प्रोजेक्ट 113 करोड़ में पूरा होगा। पहला चरण 2026 में पूरा करने की तैयारी है। प्रोजेक्ट के तीन चरणों में 3 से 4 साल लग सकता है। हब बनने के बाद देश की सबसे तेज और आधुनिक वंदे भारत ट्रेनों का नियमित मेंटेनेंस स्थानीय स्तर पर किया जा सकेगा।

  • अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट में अमित शाह, राज्य को 2 लाख करोड़ की औद्योगिक सौगात देंगे

    ग्वालियर
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के मौके पर 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की औद्योगिक परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. यह प्रोजेक्ट लॉन्च इवेंट वाजपेयी के जन्मस्थान ग्वालियर में होगा.

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती को 'सुशासन दिवस' के रूप में मनाया जाता है. राज्य सरकार औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए वाजपेयी की जयंती पर ग्वालियर में 'अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट' का आयोजन कर रही है.

    सीएम यादव ने इंदौर में पत्रकारों से कहा कि केंद्रीय मंत्री शाह इस समिट में शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस में शाह राज्य के अलग-अलग हिस्सों में स्थित 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा औद्योगिक परियोजनाओं का एक साथ शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे.

     इस आयोजन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शामिल होंगे। समिट में देश के अनेक प्रमुख औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि और बिजनेस लीडर भी सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के नागरिकों को नए निवेश के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। इसी क्रम में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट एक अभिनव प्रयास है, जिसके माध्यम से उच्च रोजगार सृजन करने वाले उद्यमियों का सम्मान, औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया जाएगा। यह आयोजन ग्वालियर के मेला ग्राउंड में दोपहर 11.30 बजे से होगा। 

    CM यादव ने कहा, "यह ऐतिहासिक कॉन्फ्रेंस वाजपेयी को समर्पित होगी. वह एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन लोकतंत्र को समर्पित कर दिया. चाहे वह सरकार में रहे हों या विपक्ष में, उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी."

    स्व. प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर “निवेश से रोजगार-अटल संकल्प” विषय पर 45 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में भव्य प्रदर्शनी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी में अटल जी के जीवन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को दर्शाया जाएगा, साथ ही प्रदेश की औद्योगिक परियोजनाओं, सफल स्टार्टअप्स, ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों की जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी। इस अवसर पर प्रोत्साहन राशि वितरण, भूमि आवंटन, ग्वालियर व्यापार मेले का उद्घाटन तथा ई-जीरो एफआईआर प्रणाली का शुभारंभ भी किया जाएगा। समिट में गोदरेज इंडस्ट्रीज, ग्रीनको, वर्धमान समूह, जेके टायर, जुपिटर वैगन्स, मैकेन फूड, डाबर इंडिया, बीपीसीएल सहित अनेक प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। 

  • मंत्री सारंग ने पांढुर्णा के बोरगांव स्थित सेवा सहकारी समिति का किया औचक निरीक्षण

    भोपाल

    सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को जिला पांढुर्णा प्रवास के दौरान बोरगांव स्थित सेवा सहकारी समिति का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने समिति के प्रशासकीय कार्यों का विस्तार से अवलोकन किया तथा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण में लेखाकार द्वारा किए जा रहे संतोषजनक कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया। वहीं समिति के प्रबंधक को सीपीपीपी (को-ऑपरेटिव पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के माध्यम से नए व्यवसायिक अवसर सृजित करने के निर्देश दिए।

    मंत्री सारंग ने कहा कि बोरगांव क्षेत्र में व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं। सहकारिता विभाग के नवाचार सीपीपीपी के तहत औद्योगिक कंपनियों के साथ साझेदारी के अवसर तलाशे जाएं, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकें। उन्होंने कहा कि सीपीपीपी सहकारिता को सशक्त करने और पैक्स को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है।

    मंत्री सारंग ने सहकारिता विभाग के नवाचार सीपीपीपी के माध्यम से औद्योगिक कंपनियों के साथ साझेदारी के अवसर खोजने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीपीपीपी एक ऐसा आयाम है, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। मंत्री श्री सारंग के इस दौरे से सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक संदेश गया है।

    निरीक्षण के बाद मंत्री सारंग ने सुरुचि मसाला के प्रबंधक के साथ बैठक कर किसानों की आय बढ़ाने एवं पैक्स को नए व्यवसायिक अवसरों से जोड़ने को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि किसानों से कच्चा माल क्रय कर उसे सुरुचि मसाला जैसी कंपनियों को उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही अन्य कॉर्पोरेट संस्थाओं का चयन कर पैक्स को नए व्यवसायों से जोड़ने की दिशा में कार्य करने पर बल दिया गया।

    मंत्री सारंग ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है और इस दिशा में ठोस व व्यावहारिक प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।

     

  • हर्षोल्‍लास एवं धूम-धाम के साथ मनाया जाएगा गणतंत्र दिवस

    अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक श्री चंचल शेखर ने बैठक लेकर सौंपी जिम्‍मेदारियाँ

    भोपाल

    हर साल की तरह इस साल भी हर्षोल्‍लास एवं धूम-धाम के साथ गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। प्रदेश का मुख्‍य समारोह 26 जनवरी को जहाँगीराबाद स्थित लाल परेड मैदान में आयोजित होगा। बीटिंग द रिट्रीट समारोह का आयोजन 29 जनवरी को किया जाएगा। इन दोनों आयोजनों की तैयारी के सिलसिले में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एस.ए.एफ श्री चंचल शेखर ने सोमवार को संबंधित अधिकारियों की बैठक ली।

    नवीन पुलिस मुख्यालय केभूतल स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक में श्री शेखर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तैयारियों को गणतंत्र दिवस की गरिमा को ध्‍यान में रखकर अंतिम रूप दें। उन्‍होंने गणतंत्र दिवस परेड के लिए विभिन्‍नईकाईयों से बल बुलाना, परेड मैदान की साफ सफाई, सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, दर्शकों और आमंत्रित अतिथियों की बैठक व्यवस्था सहित झांकी एवं चिकित्सा व्यवस्था आदि के लिए विभिन्न अधिकारियों को जिम्मेदारियाँ सौंपी। बीटिंग द रिट्रीट में बजने वाली धुनों का चयन, आतिशबाजी एवं विद्युत व्यवस्था के संबंध में भी उन्‍होंने आवश्‍यक निर्देश दिए और अधिकारियों को जवाबदेही भी सौंपी।

    बैठक में तय किया गया कि गणतंत्र दिवस समारोह के लिए परेड रिहर्सल 4 जनवरी से शुरू होगी। फुल ड्रेस फायनलरिहर्सल 24 जनवरी को की जाएगी। बैठक मेंपुलिस महानिरीक्षक एसएएफ श्री इरशाद वली, उप पुलिस महानिरीक्षक विसबलमध्‍य क्षेत्र श्री ओमप्रकाश त्रिपाठी, सेनानी 7 वीं वाहिनी श्री हितेश चौधरीसहित पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के पुलिस अधिकारी तथा लोक निर्माण विभाग, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, नगर निगम, महिला बाल विकास के अधिकारी मौजूद थे।

    ’’बीटिंग द रिट्रीट’’ का आयोजन 29 जनवरी को होगा

    ’’बीटिंग दरिट्रीट’’ सैन्य व अर्द्ध सैन्य बलों की प्राचीन परम्परा है। युद्ध के बाद जब सैन्य टुकड़ियाँ वापस अपने कैम्पों में आती थीं तो तनाव कम करने के लिए बैण्ड वादन इत्‍यादि मनोरंजक एवं सांस्‍कृतिक कार्यक्रम रखे जाते थे। भारत में इस कार्यक्रम के साथ ही गणतंत्रदिवस के कार्यक्रमों का औपचारिक समापन होता है। मध्यप्रदेश में गणतंत्र दिवस समारोह का समापन 29 जनवरी को भोपाल के मोतीलाल नेहरु स्टेडियम में ’’बीटिंग द रिट्रीट’’ समारोह आयोजन के साथ होगा।

     

  • तुरंत बदलें पासवर्ड: 68 करोड़ ईमेल आईडी-पासवर्ड लीक होने पर MP साइबर सेल अलर्ट

    भोपाल

    मध्य प्रदेश स्टेट साइबर सेल ने एक गंभीर साइबर अलर्ट जारी किया है। सेल के मुताबिक, देशभर में करीब 68 करोड़ इंटरनेट यूजर्स के ई-मेल आईडी और पासवर्ड के लीक हो चुके है। ऐसे में यूजर्स को अपने ऑनलाइन अकाउंट्स को सुरक्षित रखने के लिए तुरंत पासवर्ड बदलने की सलाह दी गई है।

    साइबर सेल ने चेताया है कि अगर किसी का ई-मेल अकाउंट हैक हो जाता है, तो हैकर को उससे जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स, बैंकिंग ऐप्स और डिजिटल वॉलेट तक भी पहुंच मिल सकती है। इससे वित्तीय नुकसान और पहचान की चोरी का खतरा बढ़ जाता है।

    टू-फैक्टर वेरिफिकेशन जरूरी
    एडवाइजरी में सभी यूजर्स से अपनी ई-मेल आईडी पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करने को कहा गया है। 2FA एक्टिव होने पर, पासवर्ड के अलावा मोबाइल पर आने वाले ओटीपी के बिना अकाउंट एक्सेस नहीं किया जा सकता, जिससे सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ जाती है।

    फर्जी परमिशन से रहें सावधान
    साइबर सेल ने यह भी आगाह किया है कि अगर मोबाइल स्क्रीन पर ई-मेल लॉगिन की परमिशन मांगने वाला कोई नोटिफिकेशन आए, तो “Yes, it’s me” जैसे विकल्प पर बिना जांचे क्लिक न करें। गलती से क्लिक करने पर अकाउंट की पूरी जानकारी हैकर के हाथ लग सकती है। यदि ऐसा हो जाए, तो तुरंत पासवर्ड बदलें।

    हर प्लेटफॉर्म के लिए अलग पासवर्ड
    स्टेट साइबर पुलिस के अनुसार, सभी वेबसाइट्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के लिए अलग-अलग और मजबूत पासवर्ड रखना बेहद जरूरी है। एक ही पासवर्ड कई जगह इस्तेमाल करने से जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। साइबर सेल ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, संदिग्ध लिंक या मैसेज से दूर रहें और समय-समय पर अपनी सुरक्षा सेटिंग्स की जांच करते रहें।

  • ऐलोबेरा, महुआ से बने फेसपैक, तुलसी सीरप, आंवला जूस व बेल शर्बत बने सैलानियों की पसंद

    दोपहर तक लगभग 1.58 करोड़ से अधिक की जड़ी-बूटियों और वन उत्पादों की हुई बिक्री

    आयुर्वेद चिकित्सक एवं पारम्परिक वैद्यों ने कार्यशाला मेंकिया दुर्लभ जड़ी-बूटियों की उपलब्धता पर विचार-विमर्श

    मंत्री डॉ. शाह और राज्य मंत्री वन श्री अहिरवार मंगलवार को करेंगे मेले का समापन

    भोपाल

    अंतर्राष्ट्रीय वन मेले के छठे दिन सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र ऐलोबेरा , महुआ से बने फेशपैक, तुलसी सीरप, आंवला जूस और बेल शर्बत रहे। सैलानियों ने विंध्य हर्बल एम.एफ.पी. पार्क में बने ग्रोविट, च्यवनप्राश, त्रिफला, अर्जुन, चाय, महुआ  फेशपैक और अन्य स्वास्थ्यवर्धक औषधियां भारी मात्रा में खरीदीं। मेले में आयुर्वेदिक चिकित्सकों और पारम्परिक नाड़ी वैद्यों की कार्यशाला का आयो जन किया गया। कार्यशाला में शासकीय आयुर्वेदिक चिकित्सक एवं प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आये पारम्परिक वैद्य शामिल हुये। मेले का समापन 23 दिसंबर मंगलवार को जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह और वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार शाम 5 बजे करेंगे।

    समापन की ओर अग्रसर अंतर्राष्ट्रीय वन मेले के प्रति सैलानियों का उत्साह कम होता नज़र नहीं आ रहा है। सैलानी भारी संख्या में आयुर्वेदिक उत्पाद, निःशुल्क चिकित्सा परामर्श और आकर्षक प्रदर्शनियां देखने पहुंच रहे हैं। सोमवार दोपहर तक 1.58 करोड़ रूपये से अधिक की जड़ी-बूटियों और वन उत्पादों की बिक्री हुई। निःशुल्क चिकित्सा परामर्श के लिये स्थापित ओ.पी.डी. में आज 120 आयुर्वेदिक चिकित्सकों एवं परंपरागत वैद्यों द्वारा आज 500 से अधिक लोगों को निःशुल्क परामर्श देकर लाभान्वित किया गया। निःशुल्क ओ.पी.डी. परामर्श की सुविधा 23 दिसंबर मंगलवार को दोपहर बाद 3 बजे तक संचालित की जायेगी।

    अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में सोमवार को राजधानी भोपाल के विभिन्न आयुर्वेदिक महाविद्यालयों के विद्यार्थी भारी संख्या में सैलानी के रूप में आये। उन्होंने प्रदर्शर्नियों को बड़ी तन्मयता से देखा और जिला यूनियनों, प्राथमिक वनोपज समितियों एवं वन धन केन्द्रों के स्टॉल्स पर उपलब्ध जड़ी बूटियों के बारे में भी जानकारी ली।

    वन मेले में सोमवार को शालेय विद्यार्थियों की इंस्ट्रुमेंटल संगीत की प्रस्तुति, लोक गायन, नुक्कड़ नाटक और आर्केस्ट्रा की प्रस्तुतियां देर शाम तक होती रहीं। प्रतियोगिता में 13 विद्यालयों के लगभग 70 विद्यार्थी ने भाग लिया। प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को वनपज संघ की एमडी डॉ. समीता राजोरा ने पुरस्कार प्रदान किये।