• 48 घंटों में छत्तीसगढ़ में तापमान में बड़ी गिरावट की चेतावनी

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ में ठिठुरन और बढ़ने वाली है। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार अगले 48 घंटों में प्रदेश के न्यूनतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। फिलहाल प्रदेश भर में मौसम शुष्क है और अगले दो दिनों तक किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।

    मौसम सारांश

    प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा। छत्तीसगढ़ में गुरुवार को दर्ज सबसे अधिक अधिकतम तापमान 30.2°C दुर्ग में रहा। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 6.9°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया। वर्षा के सभी प्रमुख आंकड़े निरंक रहे। मौसम प्रणाली भी निरपेक्ष बताई गई है।

    आज का पूर्वानुमान

    मौसम विभाग के अनुसार, 5 दिसंबर को भी प्रदेश में शुष्क मौसम की स्थिति बनी रहेगी। कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

    रायपुर का स्थानीय पूर्वानुमान

    राजधानी रायपुर में 5 दिसंबर को धुंध छाए रहने की संभावना है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 28°C और 13°C के आसपास रहने की संभावना है।

  • पंजीयन प्रक्रिया सुदृढ़ करने 8 दिसंबर को जन्म–मृत्यु व विवाह पर प्रशिक्षण सह कार्यशाला

    भोपाल 
    आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय,मध्यप्रदेश एवं यूनिसेफ,मध्यप्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में जन्म मृत्यु एवं विवाह पंजीयन के संबंध में प्रशिक्षण सह कार्यशाला 8 दिसम्बर को आयोजित होगी। आयुक्त एवं मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) आर्थिक एवं सांख्यिकी, श्री विकास मिश्रा ने बताया कि कार्यशाला सुबह 10 बजे से आर.सी. नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल में होगी।

    आयुक्त एवं मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) आर्थिक एवं सांख्यिकी श्री मिश्रा ने बताया कि बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र उसकी एक पहचान है जो उसकी जन्म दिनांक एवं जन्म के स्थान को दर्शाती है। अक्टूबर 2023 से जन्म प्रमाण पत्र एक मात्र दस्तावेज जो हर क्षेत्र में मान्य किया जायेगा, चाहे वह स्कूल में एडमिशन हो नौकरी हो पासपोर्ट बनवाना हो इत्यादि। मृत्यु प्रमाण पत्र किसी भी व्यक्ति की मृत्यु का प्रमाण है जो यह बतलाता है कि वह अब इस दुनिया में नहीं है एवं उससे जुड़े समस्त क्लेम आदि उसके उत्तराधिकारी को दिए जा सकते है, का एक प्रमाणिक दस्तावेज है।

    मध्यप्रदेश विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण नियम 2008 के अनुसार विवाह रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य है, जो दो नवदम्पति की शादी का प्रमाण होता है, जिसके अभाव में व्यक्ति को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है| इन दस्तावेजो की आवश्यकता एवं महत्ता को देखते हुए तथा इसकी उपलब्धता को आमजन तक पहुचाने एवं इसकी प्रक्रिया को सरल करने के सम्बन्ध में आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के द्वारा लगातार अथक प्रयास किये जा रहे है। इस सम्बन्ध में यूनिसेफ तथा आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय के संयुक्त तत्वाधान में जिला रजिस्ट्रार (ज.मृ.) रजिस्ट्रार(ज.मृ.)- शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नगर पालिक निगम, चयनित खंड चिकित्सा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उप रजिस्ट्रार(ज.मृ.)- पंचायत सचिव इसके अतिरिक्त महिला बाल विकास विभाग से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम संगठन से चयनित महिला पदाधिकारी को भी इस कार्यशाला में आमंत्रित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जन-जन तक जन्म मृत्यु एवं विवाह प्रमाण पत्र का लाभ सुगमता से प्रदाय करना है।

     

  • DAVV में टीचिंग क्राइसिस: नियमित प्रोफेसरों की कमी, विजिटिंग पर टिकी पढ़ाई

    इंदौर
    देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में शिक्षकों का अभाव बना हुआ है। बरसों से रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है। इनकी कमी अब विभागों में महूसस होने लगी है, क्योंकि वरिष्ठ प्राध्यापक लगातार सेवानिवृत्त हो रहे है। ऐसे में विभागों की शैक्षणिक, परीक्षा और रिजल्ट से जुड़े गतिविधियां प्रभावित होती है। विजिटिंग फैकेल्टी के भरोसे 90 फीसद विभाग टीके हुए है। इन दिनों जनवरी से शुरू होने वाले सेमेस्टर को लेकर तैयारी चल रही है। आधा दर्जन से ज्यादा विभागों ने विजिटिंग फैकल्टी के लिए आवेदन मांगवाएं है। अधिकारियों के मुताबिक कई विभागों में नियमित व सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों के पद नहीं है।
     
    हर साल विभागों को सालभर में दो मर्तबा विजिटिंग फैकेल्टी की भर्तियां करना पड़ती है। मई और दिसंबर में आवेदन मांगवाए जाते है। 11 महीने की अवधि रखी जाती है। इन दिनों वाणिज्य, सांख्यिकी, कम्प्यूटर साइंस, सोशल साइंस, फिजिक्स सहित अन्य विभागों ने विज्ञापन निकाला है। विभाग स्तर पर आवेदनों की स्क्रूटनी की जाएगी। उसके बाद उम्मीदवारों के लिए साक्षात्कार रखे जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक प्रत्येक विभाग की आवश्यकता अनुसार विजिटिंग फैकेल्टी रखी जाएगी। इन विभागों में पांच से लेकर आठ शिक्षकों को रखा जाएगा।

    180 पद हैं अभी रिक्त
    विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में प्राध्यापक, असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, रीडर व लेक्चरार के 450 से अधिक पद है। 270 पद पर शिक्षक कार्यरत है, जिसमें 112 प्रोफेसर, 54 रीडर, 43 लेक्चरार, 60 एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर है। 2009 के बाद 2022 में रिक्त पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था। उस दौरान 45 सेल्फ फाइनेंस और 47 बैंकलाग पदों पर भर्तियां की गई। उसके बाद अभी 180 पद पर नियुक्तियां होना बाकी है। इन्हें भरने को लेकर अभी विश्वविद्यालय ने कोई प्रक्रिया नहीं शुरू की है।

     

  • मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा: सुरक्षा और संवेदनशीलता में एक नई मिसाल

    मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 की संवेदनशील एवं त्वरित कार्यवाही

    तीन अलग-अलग घटनाओं के दौरान आत्महत्या का प्रयास कर रहे व्यक्तियों को समय रहते बचाया

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में डायल-112 की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली लगातार आम जन की सुरक्षा और जीवन रक्षा में प्रभावी भूमिका निभा रही है। बीते दिनों रायसेन, देवास और छिंदवाड़ा जिलों में तीन अलग-अलग घटनाओं के दौरान आत्महत्या का प्रयास कर रहे व्यक्तियों को समय रहते बचाने में डायल-112 के पुलिसकर्मियों ने तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीयता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

    रायसेन जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र में मखनी गाँव में एक 35 वर्षीय व्यक्ति द्वारा स्वयं को कमरे में बंद कर आत्महत्या के उद्देश्‍य से फाँसी लगाने का प्रयास कर रहा था। जिसकी सूचना राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम, डायल-112 भोपाल में प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही डायल-112 वाहन घटना स्थल के लिए रवाना हुआ। आरक्षक संजय श्रीवास्तव एवं पायलेट रोहित कुमार ने मौके पर पहुँचकर स्थानीय लोगों की मदद से गेट तोड़ कर पीड़ित व्यक्ति को तत्काल फंदे से उतारा। डायल 112 जवानों ने पीड़ित व्यक्ति को एफआरव्ही वाहन से लेकर तत्काल जिला शासकीय चिकित्सालय रायसेन में भर्ती करवाया।

    दूसरी घटना देवास जिले के थाना भौंरासा क्षेत्र की है, जहाँ एक 21 वर्षीय महिला ने पारिवारिक विवाद के चलते आत्महत्या का प्रयास किया। यह सूचना प्राप्त होते ही आरक्षक अरुण रावत और पायलट अनुराग चौधरी मौके पर पहुँचे। उन्होंने समझाइश, संवाद और संवेदनशील व्यवहार के माध्यम से महिला को आत्मघाती कदम उठाने से रोका और उसे सुरक्षित थाना भौंरासा लाया गया।

    तीसरी घटना छिंदवाड़ा जिले के थाना अमरवाड़ा क्षेत्र में हुई, जहाँ 24 वर्षीय युवक ने अज्ञात कारणों से जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। सूचना प्राप्त होते ही सैनिक गेंदालाल यादव एवं पायलट उमेश पुरी गोस्वामी ने युवक को तुरंत सिविल अस्पताल अमरवाड़ा पहुँचाकर उपचार शुरू कराया। युवक का इलाज जारी है।

    डायल-112 की इन लगातार त्वरित और प्रभावी कार्रवाइयों ने यह सिद्ध किया है कि मध्यप्रदेश पुलिस की यह सेवा आपात पुलिस सहायता के साधन के साथ मानव जीवन की रक्षा करने वाली ‘जीवन-रेखा’ बनती जा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस सभी नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव, अवसाद या संकट की स्थिति में स्वयं को नुकसान पहुँचाने के बजाय सहायता के लिए पुलिस या अपने निकटवर्ती लोगों से संपर्क करें।

     

  • मध्यप्रदेश में होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा स्थापना दिवस का आयोजन, 6 दिसंबर को

    मध्यप्रदेश में 6 दिसंबर को ‍होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा स्थापना दिवस का आयोजन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होंगे मुख्य अतिथि

    आपदा में वीरता दिखाने वाले जवानों को मिलेगा पहली बार प्रारंभ “मुख्यमंत्री अदम्य साहस पुरस्कार”

    भोपाल 

    मध्यप्रदेश में होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा संगठन का स्थापना दिवस 6 दिसंबर 2025 को पूरे उत्साह और सम्मान के साथ मनाया जाएगा। मुख्य कार्यक्रम का आयोजन जहांगीराबाद, भोपाल स्थित होमगार्ड्स परेड ग्राउंड में प्रातः 10 बजे से किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स, आपदा मित्र तथा बड़ी संख्या में होमगार्ड अधिकारी-सैनिक उपस्थित रहेंगे।

    ,होमगार्ड संगठन प्रतिवर्ष 6 दिसंबर को स्थापना दिवस मनाता है। यह कार्यक्रम राजधानी सहित प्रदेश के सभी जिलों में भी आयोजित किया जाता है। संगठन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ बाढ़, दुर्घटनाओं, आगजनी, प्राकृतिक आपदा और आपातकालीन परिस्थितियों में प्रशासन का महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है। संकट की घड़ी में फँसे लोगों की सहायता करने में होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस ने सदैव अद्वितीय साहस और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है।

    पहली बार मिलेगा मुख्‍यमंत्री अदम्‍य साहस पुरस्‍कार
    इस वर्ष राज्य शासन द्वारा पहली बार “मुख्यमंत्री अदम्य साहस पुरस्कार” प्रारंभ किया गया है। यह पुरस्कार उन होमगार्ड सैनिकों, एसडीईआरएफ सदस्यों और सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को प्रदान किया जाएगा, जिन्होंने आपदा के समय स्वयं की परवाह किए बिना नागरिकों की जान बचाई। मुख्यमंत्री चयनित बहादुर जवानों को राज्यस्तरीय समारोह में सम्मानित करेंगे। विभिन्न जिलों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर इंदौर, सिवनी, गुना, रतलाम, मंडला, नरसिंहपुर, रीवा, छतरपुर, टीकमगढ़ और उज्जैन की कुल 10 टीमों को 51-51 हजार रूपए की राशि वितरित की जाएगी।

    मुख्‍यमंत्री को परेड की सलामी दी जाएगी
    कार्यक्रम के दौरान परेड द्वारा मुख्‍यमंत्री को सलामी दी जाएगी। इसके बाद परेड का निरीक्षण, मार्च-पास्ट एवं मुख्य अतिथि का उद्बोधन होगा। एसडीईआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमों द्वारा आपदा के दौरान किए जाने वाले रेस्क्यू कार्यों का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया जाएगा। स्थापना दिवस पर होमगार्ड की सशस्त्र प्लाटून और सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की टुकड़ी भी मुख्यमंत्री को सलामी देगी।

    मेधावी छात्र-छात्राओं का होगा सम्‍मान
    स्थापना दिवस समारोह में होमगार्ड सैनिकों के मेधावी छात्र-छात्राओं को भी प्रशस्ति पत्र एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी में 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से लेकर डिप्लोमा, स्नातक, तकनीकी शिक्षा और स्नातकोत्तर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 10 मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन राशि 5 हजार रूपए से 30 हजार रुपए तक प्रदान की जाएगी।
    कार्यक्रम में होमगार्ड नागरिक सुरक्षा के अधिकारी सैनिकों और उनके परिजनों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यकम, खेल गतिविधि और महिलाओं संबंधी इवेंट भी आयोजित किए जाएंगे।
     

  • एमपी में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: 32,000 से ज्यादा स्कूल बंद, 61,000 शिक्षक व 54 लाख छात्र कम—CBI जांच की मांग

    भोपाल
     प्रदेश में वर्ष 2013-14 की तुलना में 2025-26 तक शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 2013-14 में सरकारी स्कूलों की संख्या 1,14,972 थी, जो घटकर 82,128 रह गई। यानी 32,844 विद्यालय कम हुए। इसी अवधि में शिक्षकों की संख्या 2,91,992 से घटकर 2,33,817 रह गई, जो कुल 61,175 की कमी है।

    क्या कहा मंत्री ने

    मंत्री ने बताया कि 2025-26 में 21,193 शासकीय माध्यमिक विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें 20 से कम विद्यार्थी हैं। वहीं 29,486 स्कूलों में छात्रों की संख्या 40 से कम है। प्रदेश के 8,533 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जबकि 28,716 स्कूलों में सिर्फ दो शिक्षक हैं।

    बढ़ा बजट

    वर्ष 2010-11 में स्कूल शिक्षा विभाग का बजट 6,374.25 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 36,581.64 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं शासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक विद्यार्थियों की संख्या 2010-11 में 133.66 लाख थी, जो घटकर 2025-26 में 79.39 लाख रह गई। यानी कुल 54.27 लाख विद्यार्थियों की कमी हुई है।

    मंत्री ने बजट बढ़ने के कारण के रूप में सातवें वेतनमान और महंगाई भत्ते को वजह बताया। जबकि विद्यालय और शिक्षक संख्या में कमी के पीछे शालाओं के मर्ज होने और शिक्षकों की सेवानिवृत्ति को कारण बताया गया। हालांकि, विद्यार्थियों की संख्या में भारी कमी को लेकर कोई कारण नहीं बताया गया।

    वहीं मीडिया से बातचीत में विधायक प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि वर्ष 2014-15 में 82 लाख विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति दी गई थी, जो 2025-26 में घटकर 58 लाख रह गई। वर्ष 2013-14 में 93.7 लाख बच्चों को निश्शुल्क पाठ्यपुस्तकें और गणवेश वितरित किए गए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 56.82 लाख रह गई। मध्यान्ह भोजन के लाभार्थी 75.75 लाख से घटकर 37.23 लाख और निश्शुल्क साइकिल योजना के लाभार्थी 3.29 लाख से घटकर 1.63 लाख रह गए।

    सीबीआई जांच की मांग

    ग्रेवाल ने सवाल उठाया कि स्कूल, शिक्षक, छात्र और सभी योजनाओं के लाभार्थी कम हो रहे हैं, फिर भी बजट कई गुना कैसे बढ़ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों को बंद कर निजी स्कूलों को संरक्षण दे रही है और शिक्षा व्यवस्था शिक्षा माफिया के हाथों में जाती दिख रही है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

  • इंदौर में जैविक खेती और स्वाद का मेला, 12 से 14 दिसंबर तक होगा भव्य महोत्सव

    इंदौर 

    स्वस्थ तन, समृद्ध किसान और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए इंदौर एक बार फिर तैयार है। शहर में 12, 13 और 14 दिसंबर को एक भव्य जैविक महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। यह तीन दिवसीय मेला इंदौर के ढक्कनवाला कुआं स्थित ग्रामीण हाट बाजार में लगेगा। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में होने वाले इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है।

    चार विशेष भागों में बंटा होगा मेला
    आगंतुकों की सुविधा के लिए मेले को चार आकर्षक भागों में विभाजित किया गया है।

    पहला भाग: श्री अन्न प्रदर्शनी
    मेले का पहला हिस्सा मिलेट्स यानी श्री अन्न पर आधारित होगा। यहां कोदो, कुटकी, कंगनी, रागी और सामा जैसे पारंपरिक और पोषक तत्वों से भरपूर अनाज प्रदर्शित किए जाएंगे। लोग न केवल इनके फायदे जान सकेंगे, बल्कि इन्हें खरीद भी सकेंगे।

    दूसरा भाग: तिलहन और शुद्ध तेल
    दूसरे हिस्से में सरसों, तिल्ली, मूंगफली, अलसी और सूरजमुखी जैसे तिलहनों की प्रदर्शनी लगेगी। खास बात यह है कि यहां घानी से निकाला गया शुद्ध तेल उपलब्ध रहेगा, जिससे लोगों को स्वदेशी तेलों की शुद्धता और लाभों का पता चलेगा।

    तीसरा भाग: ज्ञान सत्र
    किसानों और जिज्ञासु लोगों के लिए विशेष ज्ञान सत्र आयोजित होंगे। इसमें विशेषज्ञ स्वदेशी तेलों के लाभ, तिलहन खेती, मिलेट्स के नए प्रयोग और प्राकृतिक खेती की तकनीकों पर मार्गदर्शन देंगे।

    चौथा भाग: स्वाद और सेहत
    मेले का सबसे आकर्षक हिस्सा इसका फूड जोन होगा। यहां जैविक उत्पादों से बने पारंपरिक व्यंजन जैसे दाल-पानिया, मिलेट्स की खिचड़ी, मिलेट्स के पोहे और गिर गाय के दूध से बनी जलेबी का आनंद लिया जा सकेगा। इस आयोजन का मकसद नागरिकों को जैविक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

    आयोजन के मुख्य सहयोगी
    यह मेला आत्मा परियोजना, किसान कल्याण एवं कृषि विभाग, मां रेणुका फूड्स, आनंदम ऑर्गेनिक और शगुन नैचुरल के संयुक्त प्रयासों से आयोजित किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि इंदौर स्वच्छता के साथ-साथ अब स्वस्थता के क्षेत्र में भी देश में अपनी अलग पहचान बनाए। 

  • मध्यप्रदेश में 329 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज, विधानसभा में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी

    भोपाल
     मध्यप्रदेश की विधानसभा में आज एक अहम और बड़ी जानकारी निकलकर सामने आई है। जनता के रखवाले खाकी वर्दी वालों पर भी मामले दर्ज हैं। कानून तोडऩे में पुलिस वाले भी पीछे नहीं हैं। विधानसभा में एक सवाल में सरकार ने जो जानकारी दी है वो खाकी पर सवाल खड़े करने वाली है। दरअसल पिछले दो साल में विभिन्न थानों में 329 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कई धाराओं में प्रकरण दर्ज किए गए हैं।

    पुलिसवालों के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले भोपाल शहर में है, जहां 48 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं। वहीं फिर ग्वालियर जिला आता है। विधानसभा में विधायक बाला बच्चन के सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने यह जानकारी साझा की है। जानकारी में बताया गया है कि  पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज 61 प्रकरणों में अभी विवेचना चल रही है, जबकि 259 मामलों में चालान पेश किया जा चुका है।

    ज्यादा प्रकरण भोपाल शहर, ग्वालियर, इंदौर, गुना, सिवनी, बालाघाट में दर्ज किए गए हैं । विभिन्न  मामलो की बात करें तो भोपाल शहर में 48, ग्वालियर में 27, गुना में 17, बालाघाट में 13 तो सिवनी में 18 और इंदौर शहर और देहात में17-17 मामले पुलिस वालों पर दर्ज है।

    गौर करने वाली बात है कि  इंदौर और भोपाल में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद भी लूट, चोरी जैसे अपराधों में बढ़ोतरी हुई है जो सोचने वाली बात है।

  • रेलवे की बड़ी घोषणा: दिसंबर में शुरू होंगी कई स्पेशल ट्रेनें, रूट-शेड्यूल जारी; अजमेर–रांची स्पेशल की अवधि बढ़ी

    भोपाल 

     रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है। भारतीय रेलवे ने दिसंबर में छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार और यूपी के रास्ते स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इसके अलावा रांची-अजमेर साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन के परिचालन की अवधि बढ़ा दी गई है। गाड़ी संख्या 09619 अजमेर-रांची स्पेशल पांच दिसंबर से 26 दिसंबर तक संचालित की जाएगी। गाड़ी संख्या 09620 रांची- अजमेर स्पेशल का सात दिसंबर से 28 दिसंबर तक परिचालन किया जाएगा।

    दिसंबर में चलेगी 14 स्पेशल ट्रेन

        गाड़ी संख्या 09633 रेवाड़ी-रींगस स्पेशल 6, 7, 13, 14, 15, 20, 21, 25, 27, 28, 29, 30 और 31 दिसंबर को रेवाड़ी से सुबह 10:50 बजे रवाना होकर दोपहर 1:35 बजे रींगस पहुंचेगी। वापसी में रींगस-रेवाड़ी स्पेशल 5, 7, 8, 14, 15, 16, 21, 22, 26, 28, 29, 30, 31 दिसंबर और 1 जनवरी 2026 को दोपहर 2:20 बजे रींगस से रवाना होकर शाम 5:20 बजे रेवाड़ी पहुंचेगी। मार्ग में अटेली, नारनौल, डाबला, नीम का थाना, कावंट व श्रीमाधोपुर स्टेशनों पर ठहराव होगा।

        गाड़ी संख्या 09634 रेवाड़ी-रींगस स्पेशल 6, 7, 13, 14, 15, 20, 21, 25, 27, 28 और 31 दिसंबर को रेवाड़ी से 11:45 बजे रवाना होकर 2:45 बजे रींगस पहुंचेगी। वापसी में उन्हीं तिथियों पर दोपहर 3:05 बजे रींगस से रवाना होकर शाम 6:20 बजे रेवाड़ी पहुंचेगी।

        गाड़ी संख्या 08243 बिलासपुर-वलसाड शीतकालीन स्पेशल ट्रेन बिलासपुर से 18 दिसम्बर 2025 से 08 जनवरी 2026 तक प्रत्येक गुरुवार को तथा गाड़ी संख्या 08244 वलसाड-बिलासपुर शीतकालीन स्पेशल ट्रेन वलसाड से 19 दिसम्बर 2025 से 09 जनवरी 2026 तक प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी।

        गाड़ी संख्या 06007 एम.जी. रामचंद्रन (चेन्नई सेन्ट्रल)-बनारस विशेष 06 दिसम्बर 2025 को एम.जी.रामचंद्रन सेंट्रल (चेन्नई सेन्ट्रल) से 04.15 बजे प्रस्थान कर, दूसरे दिन नागपुर, इटारसी, जबलपुर, कटनी, सतना, प्रयागराज छिवकी और बनारस 23.15 बजे पहुंचेगी।

    06008 बनारस से 11 दिसम्बर को 23.00 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन प्रयागराज छिवकी , सतना ,कटनी जं. जबलपुर जं., इटारसी, आमला, नागपुर, तीसरे दिन विजयवाड़ा से होते हुए एम.जी.रामचंद्रन (चेन्नई सेन्ट्रल) 23.30 बजे पहुंचेगी।

        गाड़ी संख्या 06181 कोयम्बटूर-जयपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस स्पेशल 18 से 25 दिसंबर तक (02 ट्रिप) कोयम्बटूर से प्रत्येक गुरुवार को 2.30 बजे रवाना होकर शनिवार को 13.25 बजे जयपुर पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 06182, जयपुर-कोयम्बटूर साप्ताहिक एक्सप्रेस स्पेशल 21 से 28 दिसंबर तक (02 ट्रिप) जयपुर से प्रत्येक रविवार को 22.05 बजे रवाना होकर बुधवार को 8.30 बजे कोयम्बटूर पहुंचेगी।

        गाड़ी नंबर 07117 सिरपुर कागजनगर से कोल्लम जंक्शन 13 दिसंबर शनिवार और 07119 चेर्लापल्ली से कोल्लम जंक्शन से 17 और 31 दिसंबर को चलेगी।
        गाड़ी नंबर 07121 चेर्लापल्ली से कोल्लम जंक्शन से 20 दिसंबर को और 07123 एचएस नांदेड़ से कोल्लम जंक्शन से 24 दिसंबर को चलेगी।
        गाड़ी नंबर 07118 कोल्लम जंक्शन से चेर्लापल्ली से 15 दिसंबर और 07120 कोल्लम जंक्शन से चेर्लापल्ली19 दिसंबर और 2 जनवरी को चलेगी.
        गाड़ी नंबर 07122 कोल्लम जंक्शन से चेर्लापल्ली 22 दिसंबर और 07124 कोल्लम जंक्शन से एचएस नांदेड़ 26 दिसंबर को चलेगी।

    दिसंबर से फरवरी तक रद्द रहेगी ये ट्रेन

        गाड़ी संख्या 15620 कामाख्या-गया एक्सप्रेस 8, 15 , 22 , 29 दिसंबर, 5, 12 , 19 , 26 जनवरी, 2 , 9 , 16 और 23 फरवरी को रद्द
        गाड़ी संख्या 15619 गया-कामाख्या एक्सप्रेस दिसंबर से 24 फरवरी तक शनिवार को रद्द ।
        गाड़ी संख्या 68728 रायपुर-बिलासपुर मेमू पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर  रद्द।
        गाड़ी संख्या 68734 बिलासपुर-गेवरा रोड मेमू पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर रद्द।
        गाड़ी संख्या 68733 गेवरा रोड -बिलासपुर- मेमू पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर रद्द
        गाड़ी संख्या 68719 बिलासपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर रद्द
        गाड़ी संख्या 58203 कोरबा-रायपुर पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर रद्द
        गाड़ी संख्या 58204 रायपुर- कोरबा- पैसेंजर 07 और 08 दिसम्बर 2025 रद्द
        गाड़ी संख्या 58205 रायपुर- नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी) पैसेंजर 6 व 7 दिसम्बर रद्द ।
        गाड़ी संख्या 58206 नेताजी सुभाष चंद्र बोस (इतवारी)-रायपुर पैसेंजर 07 और 08 दिसम्बर रद्द
        गाड़ी संख्या 68746 रायपुर-गेवरा रोड मेमू पैसेंजर 06 और 07 दिसम्बर को रद्द
        गाड़ी संख्या 68745 गेवरा रोड -रायपुर मेमू पैसेंजर 07 एवं 08 दिसम्बर को रद्द
        गाड़ी संख्या 22198 वीरांगना लक्ष्मीबाई (झांसी)-कोलकाता एक्सप्रेस- 05.12.25 से 27.02.206 तक
        गाड़ी संख्या 22197 कोलकाता-वीरांगना लक्ष्मीबाई (झांसी) एक्सप्रेस- 07.12.25 से 01.03.26 तक
        गाड़ी संख्या 14003 मालदा टाउन-नई दिल्ली एक्सप्रेस- 06.12.25 से 28.02.26 तक

    जनवरी में भारत गौरव पर्यटन ट्रेन,  कराएगी दक्षिण भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों का दर्शन 

        इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) ”भारत गौरव पर्यटक ट्रेन 18 जनवरी 2026 को बिहार के बेतिया से चलेगी।
        पर्यटन ट्रेन का रूट बेतिया से शुरू होकर रक्सौल, सीतामढ़ी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, हाजीपुर, पाटलिपुत्र, पटना जंक्शन, बख्तियारपुर, किऊल और जसीडीह सहित बिहार के प्रमुख शहरों से लोग सवार हो सकते हैं और वापसी में उतर भी सकते हैं।

        यात्रा में श्रद्धालुओं को तिरुपति बालाजी, पद्मावती मंदिर, रामेश्वरम स्थित रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग, मदुरै का मीनाक्षी अम्मन मंदिर, कन्याकुमारी मंदिर और विवेकानंद रॉक मेमोरियल, तिरुवनंतपुरम के पद्मनाभस्वामी मंदिर, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग और पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ धाम का दर्शन कराया जायेगा।

        यात्रियों को कुल 14 रात और 15 दिन का पैकेज मिलेगा।इकानमी क्लास का किराया 27,535/ रुपये है, जिसमें स्लीपर ट्रेन यात्रा, नान-एसी होटल, शाकाहारी भोजन और नान-एसी परिवहन शामिल है।स्टैंडर्ड क्लास का किराया 37,500 रुपये है, जिसमें 3 एसी ट्रेन यात्रा, एसी होटल, शाकाहारी भोजन और नान-एसी वाहन से भ्रमण की सुविधा मिलेगी। कम्फर्ट क्लास का किराया 51,405 रुपये है, जिसमें 2 एसी ट्रेन यात्रा, एसी होटल, शाकाहारी भोजन और एसी वाहन से दर्शन शामिल है।

     

     

  • कॉलेज में अब एक और भाषा का कोर्स, छात्र, परिवार और मित्र मिलकर सीखेंगे, पूरा करने पर मिलेगा माइक्रो-प्रमाणपत्र

    ग्वालियर
     देश के उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एक रोचक पहल शुरू की जा रही है। भारतीय भाषा समिति ने 'एक और भारतीय भाषा सीखें' पहल के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें सभी छात्र अब कम से कम तीन भाषाओं का ज्ञान लेंगे। यानि छात्रों को अपनी मातृभाषा के अलावा कम से कम एक स्थानीय और एक अतिरिक्त भारतीय भाषा सिखाना है।

    यह आदेश यूजीसी के द्वारा जारी किया गया है, इसमें खास बात यह है कि इसमें सिर्फ छात्र के लिए नहीं बल्कि उनके मित्र और स्वजन भी शामिल हो सकेंगे। इसके लिए शिक्षार्थियों को नामांकन करवाना होगा। पढ़ाई माध्यम ऑनलाइन भी होगा, साथ ही इसमें प्रवेश और निकास दोनों ही सुलभ होंगे। बता दें कि कोर्स पूरा करने वालों को माइक्रो प्रमाणपत्र और डिजिटल बैज भी दिया जाएगा।

    पाठ्यक्रम में खास

        उच्च शिक्षण संस्थान कम से कम तीन भारतीय भाषाओं (एक स्थानीय भाषा और दो अन्य 22 अनुसूचित भाषाओं में से) में योग्यता संवर्धन पाठ्यक्रम (एईसी), क्रेडिट पाठ्यक्रम, या ऑडिट पाठ्यक्रम प्रदान करेंगे।

        पाठ्यक्रम को बेसिक, इंटरमीडिएट और एडवांस जैसे तीन स्तरों में विभाजित किया जाएगा, जिसमें आसान प्रवेश और निकास की सुविधा होगी। आप अपनी सुविधानुसार किसी भी स्तर पर प्रवेश कर सकते हैं और बाहर निकल सकते हैं।
        इन स्तरों को नए क्रेडिट ढांचे के तहत तीन माइनर के रूप में पेश किया जा सकता है, जिससे आपकी प्रतिलिपि (ट्रांस्क्रिप्ट) पर ये क्रेडिट दर्ज होंगे और क्रेडिट पोर्टेबिलिटी की अनुमति मिलेगी।

        इन पाठ्यक्रमों का मुख्य फोकस बोलने, पढ़ने और लिखने में प्रभावी संचार कौशल विकसित करना होगा।

    दोस्त, परिवार, रिश्तेदार भी होंगे शामिल

    इस प्रक्रिया में सभी स्नातक, स्नातकोत्तर और डाक्टरेट छात्र इस पहल के मुख्य लाभार्थी होंगे। इसके अलावा छात्रों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे अपने मित्रों, अभिभावकों और रिश्तेदारों को भी इन भाषा पाठ्यक्रमों में शामिल होने के लिए आमंत्रित करें। स्थानीय समुदाय के इच्छुक व्यक्ति भी इन पाठ्यक्रमों में नामांकन करा सकते हैं। बता दें कि यदि पाठ्यक्रम ऑनलाइन पेश किए जाते हैं, तो ये दुनियाभर के शिक्षार्थियों के लिए खुले होंगे।

    माइक्रो प्रमाण-पत्र मिलेंगे

    इस प्रक्रिया में पाठ्यक्रम पूरा करने वाले शिक्षार्थियों (छात्र और उनके स्वजन व मित्र) को माइक्रो-प्रमाणपत्र मिलेंगे। जो लोग नई भारतीय भाषाएं सीखते हैं, उन्हें भाषा बंधु, भाषा मित्र, लिपि गौरव, भाषादूत जैसी मानद उपाधियां प्रदान की जा सकती हैं।

    नई भाषा सीखने वालों को उस राज्य की सांस्कृतिक और शैक्षिक 'सम्मान यात्रा' कराई जाएगी, जहां वह भाषा बोली जाती है। इसके अलावा अतिरिक्त भाषा सीखने वाले छात्रों को अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय दौरों में प्राथमिकता दी जाएगी।

    बता दें कि हर साल 11 दिसंबर को ऐसे योग्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भारतीय भाषा उत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा छात्रों को 'प्रमाणित भाषा दूत-2025' जैसे डिजिटल बैज जारी किए जाएंगे, जिन्हें वे अपने डिजिटल प्रोफाइल और सोशल मीडिया पर प्रदर्शित कर सकते हैं।

  • दतिया में महापुरुषों और संतों की प्रतिमाओं के सामने पोस्टर-बैनर लगाने पर रोक, नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त

    दतिया 
    देश के विभिन्न प्रदेशों की तरह ही मध्य प्रदेश में भी चौराहों, तिराहों पर महापुरुषों, संतों आदि की मूर्तियाँ स्थापित हैं, इनकी स्थापना के समय बहुत ही सम्मान के साथ इनका यशगान किया जाता हैं लेकिन कुछ समय बाद ही इन प्रतिमाओं को विज्ञापनों, बैनरों, पोस्टरों आदि से पाट दिया जाता है लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा, दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने उनके जिले में ये प्रतिबंधित कर दिया है।

    दतिया कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट स्वप्निल वानखड़े ने शहर की सुंदरता और महापुरुषों के सम्मान को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण और सख्त आदेश जारी किया है। अब जिले में संतों और महापुरुषों की प्रतिमाओं के सामने किसी भी प्रकार के होर्डिंग, फ्लैक्स या बैनर लगाने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

    यह सार्वजनिक मर्यादा और प्रशासनिक आदर्शों के विपरीत”

    आदेश में कलेक्टर ने लिखा, जिला प्रशासन के संज्ञान में आया था कि शहर और जिले के विभिन्न स्थानों पर स्थापित प्रतिमाओं के आगे निजी और संस्थागत प्रचार सामग्री लगा दी जाती है। इससे न केवल प्रतिमाएं स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं, बल्कि यह सार्वजनिक मर्यादा और प्रशासनिक आदर्शों के भी विपरीत है। कलेक्टर ने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं प्रेरणा और सम्मान का प्रतीक हैं, इसलिए उनके सामने अनधिकृत विज्ञापन लगाना अनुचित है।
    आदेश में दतिया शहर के प्रमुख 15 स्थानों का जिक्र  

    आदेश में दतिया शहर की 15 प्रमुख जगहों और प्रतिमाओं का विशेष उल्लेख किया गया है, जहाँ अक्सर यह समस्या देखी जाती है। जिनमें स्वामी विवेकानंद पटवा तिराहा, महात्मा गांधी गांधी पार्क किला चौक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, किला चौक, महाराज भवानी सिंह किला चौक भवानी पार्क, महाराज गोविन्द सिंह किला चौक गोविन्द पार्क, मैथिलीशरण गुप्त राजगढ़ चौराहा पीताम्बरा मंदिर के पास, महाराज अग्रसेन बम-बम महादेव बस स्टैण्ड़ के पास, रामचेरे प्रजापति समाज बस स्टैण्ड के पास, अवंतिका बाई लोधी, भाण्ड़ेर रोड़ देहात थाना के पास, देवी अहिल्या बाई पुलिस कंट्रोल रूम के पास सिविल लाईन, सरदार वल्लभ भाई पटेल मेडीकल कॉलेज के पास एनएच-44, बाल्मीकि समाज पार्क गहोई वाटिका के सामने, संत गाडगे बाबा गहोई वाटिका के सामने, डॉ. भीम राव अम्बेडकर अम्बेडकर पार्क एनएच-44 के नाम शामिल है।
    आदेश का उल्लंघन करने वालों पर एक्शन के निर्देश 

    कलेक्टर ने स्थानीय निकाय, पुलिस प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वर्तमान में प्रतिमाओं के सामने लगी किसी भी प्रकार की प्रचार सामग्री को तत्काल हटाया जाए। साथ ही भविष्य में प्रतिमाओं के समक्ष होर्डिंग/बैनर लगाने की अनुमति न दी जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए। यह आदेश दतिया शहर सहित सम्पूर्ण जिले की राजस्व सीमा में स्थापित सभी प्रतिमाओं पर लागू होगा।

  • ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पर बड़े अपडेट: किसानों को मुआवज़ा बांटते ही जनवरी से काम शुरू, ग्वालियर–आगरा सफर होगा डेढ़ घंटे का

    मुरैना
     ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे का काम जनवरी से शुरू करने का गणित बनाया जा रहा है। अभी तक अधिग्रहित जमीन का पैसा 65 फीसदी किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जा चुका है। चूंकि निर्माण एजेंसी 90 फीसदी जमीन यानि 475 हेक्टेयर जमीन मिलने के बाद काम शुरू कराएगी, इसलिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण शेष भूमि से जुड़े किसानों से जमीन लेने के प्रयास कर रहा है। एनएचएआई की मानें तो प्रोजेक्ट वर्क शुरू होने के ढाई साल की समयावधि में अनुबंधित निर्माण एजेंसी को आगरा से ग्वालियर के बीच सिक्सलेन-वे बनाकर तैयार करना होगा।

    नया रूट मिलने के बाद ग्वालियर के लोग आगरा की 88.4 किमी की दूरी डेढ़ घंटे में तय सकेंगे। ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे बनाने पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 4612 करोड़ रुपये खर्च करेगा। एनएचएआई को मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश में 550 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें किसानों की निजी भूमि से लेकर सरकारी व वन भूमि शामिल है। इसमें से अभी तक 65 फीसदी जमीन एनएचएआई को राजस्व विभाग उपलब्ध करा चुका है।

    जमीन इस प्रोजेक्ट में देने को तैयार नहीं

    नियम के मुताबिक, निर्माण एजेंसी को इस प्रोजेक्ट के लिए 550 हेक्टेयर भूमि का 90 फीसदी हिस्सा चाहिए इसलिए अभी 25 प्रतिशत निजी भूमि और उपलब्ध होने के बाद जीआर इंफ्रा प्रालि सिक्सलेन-वे बनाने का काम शुरू करा सकेगी। ऐसा माना जा रहा है कि जनवरी में इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य का श्रीगणेश करा दिया जाएगा। अभी एक तिहाई किसान जमीन अधिग्रहण के बदले चार गुना मुआवजा देने की मांग को लेकर अपनी बेशकीमती जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए देने में ना-नुकुर कर रहे हैं।
    कलेक्टर रेट से दोगुना मुआवजा होने से दिक्कत

    किसी भी प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद दिए जाने वाले मुआवजे के लिए उत्तर प्रदेश व राजस्थान सरकार का गुणांक दो होने से वहां जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को कलेक्टर रेट से चार गुना मुआवजा देने का प्राविधान है। मप्र में कलेक्टर रेट से दोगुना राशि का मुआवजा मिलता है।

    उप्र-राजस्थान की मुआवजा दरों की जानकारी मुरैना जिले के किसानों को अच्छे से है, ऐसे में किसान राज्य सरकार से गुणांक बदलकर दो करने व मुआवजा की राशि चार गुना देने की जिद पर अड़े हैं। इसलिए ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे के लिए अभी बड़ी संख्या में किसान अपनी खेती की जमीन देने से मुंह मोड़े हुए हैं। यहां बता दें कि कलेक्टर ने भी ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे प्रभावित क्षेत्र की जमीनों की गाइडलाइन दो साल से नहीं बढ़ाई है, जबकि पूरे जिले की प्रमुख साइटों के रेट दो बार 20-20 प्रतिशत बढ़ा दिए गए।

    • एक नजर प्रोजेक्ट पर
    •     आगरा से ग्वालियर के बीच सिक्सलेन-वे की लंबाई की 88.4 किलोमीटर होगी।
    •     ग्वालियर से आगरा के बीच सफर में लगने वाला समय एक घंटा 30 मिनट होगा।
    •     ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे के बीच बड़े पुल की संख्या 08 और छोटे पुल की संख्या 23 रहेगी।
    •     फ्लाईओवर की संख्या छह, आरओबी की संख्या एक और वायोडक्ट की संख्या पांच रहेगी।

     

  • वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में देरी, उम्मीद पोर्टल की धीमी गति पर समय सीमा बढ़ाने की मांग

     खंडवा

    देशभर में इस समय वक्त संपत्तियों को लेकर मुस्लिम समाज परेशान दिख रहा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट से जारी निर्देशों के बाद केंद्र सरकार के द्वारा सभी वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने के लिए एक केंद्रीय कृत वेब पोर्टल बनाया गया है, जिसका नाम उम्मीद पोर्टल है। हालांकि यही उम्मीद पोर्टल मुस्लिम समाज जन को न उम्मीद करता दिख रहा है और बीते कुछ दिनों से लगातार इस पोर्टल का सर्वर स्लो चलने के चलते वक्फ संपत्तियां इस पर दर्ज नहीं हो पा रही हैं । वहीं] मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां 15 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियां मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दर्ज हैं, जबकि इनमें से लगभग 6 हजार वक्फ संपत्ति ही इस समय तक केंद्रीयकृत वेब पोर्टल उम्मीद पर दर्ज हो पाई हैं और इसकी अंतिम समय सीमा 5 दिसंबर तय की गई हैं, ऐसे में बची हुई संपत्तियां दर्ज हो पाना नामुमकिन है।

    वहीं इसको लेकर मध्य प्रदेश के खंडवा सहित प्रदेश और देश भर में वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने की समय सीमा बढ़ाये जाने को लेकर आवाज उठाई जा रही है। इसी बीच खंडवा के मुस्लिम समाज ने भी गुरुवार शाम जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंप कर तारीख आगे बढ़ाई जाने की मांग की है। यही नहीं खंडवा शहर काजी और मुस्लिम जनप्रतिनिधि एवं समाज के वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं ने उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को दर्ज किए जाने की समस्या के चलते राष्ट्रपति और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरण रिजजू से गुहार लगाई है कि वे इस समस्या को देखते हुए अंतिम समय सीमा को लगभग 6 माह तक आगे बढ़ाएं, जिससे कि सभी वक्फ संपत्तियां दर्ज की जा सकें।

    इस दौरान ज्ञापन देने पहुंचे शहर काजी सैयद निसार अली ने बताया कि वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने वाला उम्मीद पोर्टल या तो चल ही नहीं रहा है या फिर इतना स्लो चल रहा है कि एक-एक संपत्ति को दर्ज करने में पूरा-पूरा दिन ही निकल जा रहा है। हालात यह हैं कि अब तक मात्र 30 प्रतिशत वक्फ संपत्तियां ही इस पोर्टल पर दर्ज हो पाई हैं, ऐसे में अल्पसंख्यक और खासकर मुस्लिम समाज के अधिकारों और उनकी वक्फ संपत्तियों की रक्षा करने हेतु अंतिम समय सीमा बढ़ाई जाना चाहिए, और इसको लेकर ही उन्होंने राष्ट्रपति के साथ ही देश के पीएम नरेंद्र मोदी से भी इस समय सीमा को बढ़ाये जाने की गुहार लगाई है। 

  • स्मार्ट मीटर पर स्पष्ट रुख: MP सरकार बोली—उपभोक्ता की सहमति अनिवार्य नहीं

    भोपाल
    प्रदेशभर में स्मार्ट मीटरों को लेकर उठ रहे सवालों और शंकाओं को लेकर सरकार ने विधानसभा में जवाब दिया कि स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ता की सहमति लिया जाना आवश्यक नहीं है। बिजली कंपनियों द्वारा चेक मीटरों को लगाया जा रहा है, अभी तक बिजली वितरण कंपनियों ने 31335 चेक मीटर लगाए हैं।

    स्मार्ट मीटरों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक कैलाश कुशवाह, राजन मंडलोई, दिलीप परिहार द्वारा लगाए गए प्रश्नों के उत्तर में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह जानकारी दी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि भविष्य में स्मार्ट मीटरों की स्थापना के लिए जारी होने वाली निविदाओं में पांच प्रतिशत चेक मीटर लगाए जाने का प्रविधान रखा जाना है।
     
    स्मार्ट मीटरों के संबंध में भी शिकायत प्राप्त होने पर चेक मीटर लगाकर उपभोक्ता की शिकायत का संतुष्टिपूर्वक निराकरण किया जा रहा है। स्मार्ट मीटर लगाए जाने से विद्युत उपभोक्ताओं को विभिन्न लाभ यथा विद्युत खपत एवं जिलों में पारदर्शिता, रियल टाइम खपत की निगरानी, शासन की सब्सिडी योजनाओं का लाभ पात्र उपभोक्ताओं को प्राप्त होगा।

    सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक 20 प्रतिशत की छूट निम्न दाब उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर स्थापित कराए जाने पर दिन के समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। उक्त स्मार्ट मीटरों में नेट मीटरिंग की उपलब्धता होने के दृष्टिगत सोलर का विकल्प लेने वाले उपभोक्ताओं को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इसका लाभ प्राप्त हो रहा है।

    वर्तमान में बिजली कंपनियों को निजी हाथों में बेचने संबंधी कोई भी कार्रवाई प्रचलन में नहीं है। ऊर्जा विभाग अंतर्गत कार्यरत तीनों बिजली वितरण कंपनियों में से पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा ही दो निविदाओं के माध्यम से स्मार्ट मीटर क्रय किए गए है। स्मार्ट मीटरों की स्थापना का कार्य डिजायन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन आपरेट ट्रांसफर माडल पर किया जा रहा है।

    ऊर्जा मंत्री ने बताया-पांच नहीं शत प्रतिशत मीटरों की हो रही जांच
        ऊर्जा मंत्री ने जानकारी में बताया कि प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में पांच प्रतिशत मीटर नहीं शत प्रतिशत लगाए जा रहे मीटरों की जांच लैबोरेटरी में कराई जा रही है।
        शहरी क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना व मध्यप्रदेश विद्युत प्रदाय संहिता-2021 के अध्याय-8 "विद्युत मापन तथा बिलिंग" के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में आरडीएसएस योजना के अंतर्गत पारदर्शी बिलिंग, मीटर रीडिंग प्रणाली में सुधार और सटीक ऊर्जा लेखाकंन के लिए लगाए जा रहे हैं। 

  • उमा भारती का बड़ा खुलासा: शादियां बनती हैं नेताओं के दो नंबर के पैसे को खपाने का जरिया

    टीकमगढ़
    नेता अक्सर दो नंबर का पैसा खपाने के लिए शादियों में फिजूलखर्ची करते हैं। आजकल अधिकांश शादियां मैरिज गार्डन में हो रही हैं और इनमें अत्यधिक खर्च किया जा रहा है। बड़े-बड़े उद्योगपति शादियों में करोड़ों रुपये देकर मंच सजाकर डांसर बुलाते हैं। इतने रुपयों में हजारों गरीब बेटियों के विवाह कराए जा सकते हैं। अगर हम सीमित साधनों में काम चलाना शुरू कर दें तो यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक क्रांति होगी। पहले 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' कहा था, अब 'भ्रष्टाचारी भारत में रहो, लेकिन सुधर जाओ' कहना होगा।'

    यह बात पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने टीकमगढ़ में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अगले दस वर्षों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पद पर रहना आवश्यक है। गौरतलब है कि मप्र की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी मां के नाम यात्रा निकालने के बाद मीडिया से चर्चा की। जहां पर उन्होंने जनप्रतिनिधियों और उद्योगपतियों की शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची को लेकर बयान दिया। उन्होंने नेताओं से बार-बार आग्रह किया कि वे दिखावा न करें, क्योंकि उनकी इज्जत पहले से ही है।
     
    बच्चे हीन भावना से ग्रस्त हो रहे हैं
    चर्चा के दौरान उमा भारती ने कहा कि उन्होंने उद्योगपतियों की शादियों में जाना बंद कर दिया है और अपने गार्ड को ऐसे निमंत्रण पत्र स्वीकार न करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि देश में यह प्रतिस्पर्धा आ गई है कि किसके पास ज्यादा सुविधाएं हैं। इससे बच्चे हीन भावना से ग्रस्त हो रहे हैं कि वह कमजोर हैं। यह देखकर माता-पिता प्रतिस्पर्धा करते हैं और बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए भ्रष्टाचार करना शुरू कर देते हैं, जबकि सीमित साधनों में भी काम चलाया जा सकता है। पूर्व सीएम ने ऐसे में नेताओं से शादियों में फिजूलखर्ची बंद करने की सलाह दी है।

  • स्वास्थ्य तंत्र पर बड़ा सवाल: एमपी में बच्चों के लिए खतरनाक निकला कफ सिरप, 42% डीईजी पाया गया

    भोपाल
    मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सीरप के तीन और सैंपल अमानक पाए गए हैं। इनमें डायथिलीन ग्लाइकाल (डीईजी) की मात्रा 42 प्रतिशत पाई गई है। जबकि निर्धारित मानक के अनुसार, किसी भी कफ सीरप में डीईजी की मात्रा 0.1 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। ये तीनों उन बाटल के सैंपल हैं, जो बच्चों द्वारा पीने के बाद बच गए थे। इनके सैंपल की जांच मध्य प्रदेश में विषाक्त कफ सीरप से 24 बच्चों की मौत के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने राज्य औषधि लैब से कराई है। इससे साफ है कि बच्चों की मौत अधिक डीईजी मिश्रित कोल्ड्रिफ कप सीरप पीने से ही हुई।
     
    दरअसल, अधिक मात्रा में डीईजी का सेवन किडनी फेल कर देता है। बता दें कि इसके पहले तमिलनाडु औषधि प्रशासन की जांच में कोल्ड्रिफ सीरप में डीईजी की मात्रा 48.6 प्रतिशत और मध्य प्रदेश औषधि प्रशासन विभाग की जांच में 46.2 प्रतिशत मिली थी। उल्लेखनीय है कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप बैच नंबर एसआर-13 के अतिरिक्त, खांसी का ही सीरप रिलाइफ बैच नंबर एलएसएल 25160 और रेस्पीफ्रेस टीआर-आर 01जीएल 2523 भी अमानक मिला था। इनमें डीईजी की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक थी।
     
    चार दवाएं भी अमानक मिलीं
    वहीं, मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया है कि कफ सीरप से बच्चों की मौत के बाद प्रदेश भर में कफ सीरप के जितने सैंपल लिए गए थे, उनमें इनमें 109 मानक के अनुरूप और तीन अमानक मिले हैं। इसके अतिरिक्त बच्चों के उपयोग में आने वाली चार दवाएं अमानक मिली हैं, जिनमें पेट के उपचार के लिए उपयोग होने वाला हेप्साडिन सीरप, चिटेम-एमडी, फेरस एस्कार्बेट टैबलेट, पेट में कीड़े मारने की अलबेंडाजोल टैबलेट शामिल है। उप मुख्यमंत्री ने यह जानकारी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

  • तकनीक का इस्तेमाल कर बेहतर उपज लेने के लिए ग्राम स्तर पर सघन गतिविधियां संचालित की जाएं: मुख्यमंत्री

    किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच करें सुनिश्चित
    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लखपति दीदी के समान लखपति बीघा का लक्ष्य रखते हुए एक बीघा से एक लाख रूपए की कमाई करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया जाए। किसानों को बिचौलियों से बचाने और उन्हें बाजार में अपनी उपज का सीधे लाभ दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था हो। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने और अद्यतन तकनीक का इस्तेमाल कर बेहतर उपज लेने के लिए ग्राम स्तर पर सघन गतिविधियां संचालित की जाएं। हर संभाग की नर्सरियों को आदर्श रूप में विकसित किया जाए। नरवाई प्रबंधन के लिए तीन वर्ष की कार्ययोजना विकसित की जाए। साथ ही किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन तकनीक का उपयोग करते हुए कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान ये निर्देश दिए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

    बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों तथा नवाचारों का प्रस्तुतिकरण किया गया और आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि –
        प्रदेश दालो, तिलहन और मक्का उत्पादन में देश में प्रथम तथा खाद्यान्न, अनाज एवं गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है।
        उर्वरक वितरण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 38.10 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 21.41 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. वितरित किया गया। वर्ष 2025-26 में 29.77 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 30 नवम्बर तक 19.42 मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. का वितरण हुआ।
        प्रधानमंत्री फसल बीमा में वर्ष 2023-24 में 1 करोड़ 77 लाख बीमित कृषकों को 961.68 करोड़ रूपए और वर्ष 2024-25 में 1 करोड़ 79 लाख बीमित कृषकों को 1275.86 करोड़ रूपए के दावे का भुगतान किया गया।
        मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 4,687 करोड़ रूपए, वर्ष 2024-25 में 4,849 करोड़ रूपए और वर्ष 2025-26 में 3,374 करोड़ की सहायता राशि वितरित की गई।
        प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना लागू हो चुकी है। इस उपलब्धि के लिए स्कॉच गोल्ड अवार्ड भी प्राप्त हुआ।
        मंडी बोर्ड द्वारा एमपी फार्म गेट ऐप से किसान अपने दाम पर, अपने घर, अपने खलिहान और गोदामा से अपनी कृषि उपज बेचने में सक्षम हुआ। इस नवाचार को स्कॉच सिल्वर अवार्ड प्राप्त हुआ।
        पराली प्रबंधन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 1312, वर्ष 2024-25 में 1757 और वर्ष 2025-26 में 2479 नरवाई कृषि यंत्र वितरित किए गए।
        कृषि यंत्रीकरण के अंतर्गत भोपाल और इंदौर में ड्रोन पायलट स्कूल आरंभ हुए।
        ई-विकास पोर्टल से उर्वरक वितरण का पायलट प्रोजेक्ट विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में क्रियान्वित किया गया। इसे सम्पूर्ण प्रदेश में लागू करने की योजना है।

    आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना
        प्रदेश के सभी 363 नगरपालिका, नगर पंचायतों में साप्ताहिक जैविक/प्राकृतिक हाट बाजार लगाए जाएंगे।
        पर ड्रॉप मोर क्रॉप – दबाव सिंचाई प्रणाली के तहत वर्ष 2025-26 में 25 हजार, वर्ष 2026-27 में एक लाख और वर्ष 2027-28 में दो लाख हेक्टेयर का लक्ष्य है।
        नरवाई (पराली) प्रबंधन के अंतर्गत पराली जलाने की घटनाओं में वर्ष 2027-28 तक 80 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य रखा है।
        आगामी दो वर्षों में सभी मंडियों का हाईटेक बनाया जाएगा।
        तिलहन, दलहन फसलों में आत्मनिर्भरता के लिए क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।
        कृषि में अनुसंधान कार्ययोजनाओं को प्रोत्साहन देते हुए प्रयोगशाला से खेत की दूरी को कम किया जाएगा।

    बैठक में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की समीक्षा के दौरान हाईटेक नर्सरी, सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, कृषकों और उद्यमियों की क्षमता संवर्धन के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के संबंध में जानकारी दी गई।

     

  • मेहनत पर पानी फिरा! केले के नहीं मिले दाम, बड़वानी के किसान पहुंचे इस हद तक

    बड़वानी
    क्षेत्र में केला उत्पादक किसानों को इन दिनों फसल के दाम नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। केले के कम दाम मिलने से गुस्साए किसान फसल को काटकर मवेशियों को केले खिला रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे अपनी फसल को खेत से उखाड़कर फेंकने को मजबूर हैं।

    दरअसल, नर्मदा पट्टी क्षेत्र में केला उत्पादन बेहतर होता है। यहां पर उत्पादित केला कई राज्यों को भेजा जाता है। इसमें राजस्थान, गुजरात, हरियाणा व दिल्ली शामिल है। वहीं इस बार कम दाम व खराब हालात के कारण किसानों को अपनी फसल नष्ट करनी पड़ रही है। किसानों के अनुसार यदि केले के दाम नहीं मिलेंगे तो कैसे चलेगा।
     
    दाम तो दूर मजदूरी की लागत भी नहीं निकल पा रही है। ग्राम बगूद के किसान अनिल जाट का कहना है कि केले का भाव थोक में दो रुपये प्रति किलो मिल रहा है जबकि उत्पादन लागत 5 से 6 रुपये प्रति किलो आ रही है। ऐसे में किसानों के सामने फसल को नष्ट करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। किसानों ने उचित दाम दिए जाने की मांग की है।

  • प्रदेश में पहली बार ऑनलाइन हुई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की भर्ती

    ऑनलाइन भर्ती की यह पहल करने वाला पहला राज्य बना मध्यप्रदेश
    मध्यप्रदेश की पूर्ण ऑनलाइन पारदर्शी चयन प्रणाली बनी राष्ट्रीय मॉडल

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं से कहा कि आपकी जिम्मेदारी यशोदा मैया की तरह है, जिस प्रकार उन्होंने गोपाल कृष्ण का पालन-पोषण कर उन्हें संस्कार प्रदान किए, उसी तरह आप भी आंगनवाड़ी में आने वाले हर बच्चे की देखभाल श्रीकृष्ण की तरह करें। नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र के रूप में बच्चों की मुस्कुराहट, पोषण और माताओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने का वचन पत्र सौंपा जा रहा है। हमें विश्वास है कि हमारी बहनें अपना दायित्व पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता से निभाएंगी और प्रदेश को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में विजय दिलवाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया से नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को विधानसभा के समिति कक्ष में हुए कार्यक्रम में नियुक्ति-पत्र प्रदान कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। कार्यक्रम में महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, विधायक तथा पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई और विभाग की सचिव सुश्री जी.वी. रश्मि विशेष रूप से उपस्थित थीं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतीक स्वरूप तीन नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विधायक श्रीमती अर्चना चिटनीस ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को अपने कार्य दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करने, विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में हर संभव योगदान देने और सुपोषित मध्यप्रदेश के निर्माण में अपने दायित्व का पूर्णत: पालन करने की शपथ दिलाई। नवनियुक्त आँगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने विधानसभा संचालन की प्रक्रिया भी देखी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज भी गांवों में आंगनवाड़ी वाली दीदी को जो सम्मान मिलता है, उतना किसी और को नहीं मिलता। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका परिवार की सदस्य बन जाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि न्यू इंडिया की मजबूत नींव मातृ शक्ति से ही बनती है। हमारी आंगनवाड़ी की बहनें इसे सार्थक कर रही हैं। यह बहनें केवल कार्यकर्ता नहीं अपितु गांव की पहली गुरू और पहली पोषण दूत हैं। इनकी वजह से लाखों बच्चों में कुपोषण कम हो रहा है और गर्भवती माताओं में जागरूकता बढ़ रही है। स्कूलों में ड्रापआऊट रेट में भी कमी आयी है। राज्य सरकार बहनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। नगरीयनिकायों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा में वृद्धि की गई है। साथ ही बहनों के रोजगार के लिए उद्योग समूहों को भी राशि उपलब्ध कराई जा रही है।

    महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां पहली बार आंगनवाड़ी स्तर पर भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई। प्रदेश में अब तक 1091 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 10 हजार 984 सहायिकाओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए हैं। शेष पद भरने के लिए भी तेजी से प्रक्रिया जारी है। उल्लेखनीय है कि ऑनलाइन पोर्टल पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 2077 पदों के विरुद्ध 81 हजार 704 आवेदन आए और सहायिकाओं के 17 हजार 477 पदों के लिए 31 हजार 7627 आवेदन प्राप्त हुए। कार्यक्रम में प्रतीक स्वरूप 50 नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आभार स्वरूप धन्यवाद पत्र सौंपा गया।

    प्रमुख बिन्दु

        आंगनवाड़ी में आने वाले हर बच्चे की देखभाल श्रीकृष्ण की तरह करें।

        नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र के रूप में बच्चों की मुस्कुराहट, पोषण और माताओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने का वचन पत्र सौंपा जा रहा है।

        हमारी बहनें अपना दायित्व पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता से निभाएंगी और प्रदेश को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में विजय दिलवाएंगी।

        मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतीक स्वरूप तीन नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान किए।

        विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में हर संभव योगदान देने और सुपोषित मध्यप्रदेश के निर्माण में अपने दायित्व का पूर्णत: पालन करने की शपथ दिलाई।

        नवनियुक्त आँगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने विधानसभा संचालन की प्रक्रिया भी देखी।

        आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिक परिवार की सदस्य बन जाती हैं।

        न्यू इंडिया की मजबूत नींव मातृ शक्ति से ही बनती है।

        बहनें केवल कार्यकर्ता नहीं अपितु गांव की पहली गुरू और पहली पोषण दूत हैं।

        लाखों बच्चों में कुपोषण कम हो रहा है और गर्भवती माताओं में जागरूकता बढ़ रही है।

        स्कूलों में ड्राप-आऊट रेट में भी कमी आयी है।

        नगरीयनिकायों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा में वृद्धि की गई है।

        बहनों के रोजगार के लिए उद्योग समूहों को।

        राशि उपलब्ध कराई जा रही है।

        मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां पहली बार आंगनवाड़ी स्तर पर भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई।

        प्रदेश में अब तक 1091 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 10 हजार 984 सहायिकाओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए।

     

  • राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय एवं पंचायत उपनिर्वाचन कार्यक्रम घोषित

    मतदान 29 दिसम्बर 2025 को

    भोपाल 
    राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के उप निर्वाचन का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। मतदान 29 दिसम्बर 2025 को होगा। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री दीपक सिंह ने जानकारी दी है कि उप निर्वाचन के लिए निर्वाचन की सूचना का प्रकाशन और नाम निर्देशन पत्र प्राप्त करने का कार्य 8 दिसम्बर 2025 से शुरू होगा। नाम निर्देशन पत्र 15 दिसम्बर तक लिये जायेंगे, नाम निर्देशन पत्रों की जांच 16 दिसम्बर को होगी। नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 18 दिसम्बर है। इसी दिन निर्वाचन प्रतीकों का आबंटन होगा। नगरीय निकायों में मतदान 29 दिसम्बर को सुबह 7.00 बजे से शाम 5.00 बजे तक होगा। मतगणना और निर्वाचन परिणामों की घोषणा 31 दिसम्बर को सुबह 9.00 बजे से होगी।

    पंचायतों में मतदान 29 दिसम्बर को सुबह 7.00 बजे से अपरान्ह 3.00 बजे तक होगा। पंच पद के लिये मतगणना मतदान के तुरंत बाद मतदान केन्द्र पर ही होगी। सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य की विकास खण्ड मुख्यालय पर ई.व्ही.एम. से की जाने वाली मतगणना 2 जनवरी को सुबह 8.00 बजे से होगी। इसी दिन सरपंच एवं जनपद पंचायत सदस्य के निर्वाचन परिणामों की घोषणा की जायेगी। जिला पंचायत सदस्यों एवं पंच पद के लिए परिणामों की घोषणा 5 जनवरी 2026 को प्रात: 10.30 बजे से की जायेगी।

    1 अध्यक्ष और 8 पार्षदों का होगा उप निर्वाचन

    जिला सीधी के नगरपरिषद मझौली के अध्यक्ष और विभिन्न नगरीय निकायों में 8 पार्षदों के लिये उप निर्वाचन होगा। नगरपालिक निगम सिंगरौली के वार्ड 34, नगर पालिका परिषद मण्डला के वार्ड 8, नगर पालिका परिषद लहार के वार्ड 5 और नगर परिषद मौ के वार्ड 4, मेहगांव के वार्ड 5, आलमपुर के वार्ड 13, सतवास के वार्ड 9 और पानसेमल के वार्ड 2 में पार्षद पद के लिये उप निर्वाचन होगा।

    जिला पंचायत के 4, जनपद पंचायत के 14 और सरपंच के 67 पदों के लिये होगा निर्वाचन
    पंचायत उप निर्वाचन के तहत जिला पंचायत सदस्य के 4, जनपद पंचायत सदस्य के 14, सरपंच के 67 और 3872 पंच पद के लिये निर्वाचन होगा।