• सीएम साय की अगुवाई में कैबिनेट की बैठकों का दौर शुरू, नीति निर्णयों पर नजर

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय, महानदी भवन में मंत्रिपरिषद की बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण नीतिगत और प्रशासनिक मुद्दों पर अहम निर्णय लिए जा सकते हैं। बैठक के बाद कैबिनेट की आधिकारिक ब्रीफिंग मंत्रालय के भू-तल स्थित कक्ष S0-12 में आयोजित की जाएगी।

    पिछली बैठक में लिए गए फैसले
    बता दें कि इससे पहले 14 नवंबर को हुई कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए थे। जिनमें- मंत्रिपरिषद द्वारा खरीफ एवं रबी विपणन मौसम में दलहन-तिलहन फसल के उपार्जन हेतु पूर्व वर्ष की भांति ‘‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान‘‘ प्राईस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत उपार्जन किए जाने का निर्णय लिया गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान अंतर्गत खरीफ विपणन मौसम में अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली एवं सोयाबीन तथा रबी मौसम में दलहन-तिलहन फसल जैसे चना, सरसों, मसूर का उपार्जन समर्थन मूल्य पर किया जाता है। दलहन-तिलहन का समर्थन मूल्य पर उपार्जन की व्यवस्था प्रदेश की मंडियों में होने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बनी रहती है, जिसके कारण कृषकों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होने की संभावना होती है।

    मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन करते हुए सार्वजनिक उपक्रम विभाग को वाणिज्य और उद्योग विभाग में और बीस सूत्रीय कार्यान्वयन विभाग का संविलियन योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग में करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। यह निर्णय शासकीय कार्य में सुशासन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य ‘‘मिनिमम गवर्मेंट मैक्सिमम गवर्नेंस‘‘ का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।

    मंत्रिपरिषद ने राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं हेतु स्वीकृत 15 हजार करोड़ रुपये की शासकीय प्रत्याभूति को खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए पुनर्वेधीकरण करने के साथ ही विपणन संघ को अतिरिक्त शासकीय प्रत्याभूति राशि रुपए 11,200 करोड़ प्रदाय किए जाने का निर्णय लिया।

    मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य प्रवर्तित दीनदयाल आवास योजना, अटल आवास योजना, अटल विहार योजना एवं नवा रायपुर मुख्यमंत्री आवास योजना के लिए पूर्व में जारी नियम एवं शर्तों में पात्रता के लिए निम्नलिखित अतिरिक्त प्रावधानों का समावेश कर विक्रय की अनुमति प्रदान की गई।

    अ) ईडब्ल्यूएस एवं एलआईजी भवनों, फ्लैटों के विक्रय हेतु 3 बार विज्ञापन होने के पश्चात अविक्रित भवनों को, पात्र हितग्राही के अतिरिक्त किसी भी आय वर्ग के हितग्राही को विक्रय किया जा सकता है, परंतु ऐसे हितग्राहियों को शासन द्वारा स्वीकृत अनुदान की पात्रता नही होगी। अनुदान की पात्रता केवल निर्धारित आय वर्ग के हितग्राही को ही होगी।

    ब) ईडब्ल्यूएस एवं एलआईजी भवनों, फ्लैटों के विक्रय हेतु 03 बार विज्ञापन होने के पश्चात अविक्रित भवनों को एकल व्यक्ति या शासकीय/अर्धशासकीय अथवा निजी संस्थाओं द्वारा एक से अधिक संपत्ति क्रय करने का (Bulk Purchase) प्रस्ताव दिया जाता है, तो एकल व्यक्ति या शासकीय/अर्धशासकीय अथवा निजी संस्था के नाम पर एक से अधिक भवनों को मांग अनुसार विक्रय किया जा सकेगा, परन्तु इन्हें शासन द्वारा स्वीकृत अनुदान की पात्रता नही होगी। इस निर्णय का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक हितग्राहियों को इसका लाभ मिले।

    शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम नवा रायपुर अटल नगर को दीर्घकालीन पूर्णतः संचालन और विकास कार्याें के लिए छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ को अनुबंध के अनुसार लीज पर देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस निर्णय से राज्य के उदीयमान क्रिकेट खिलाड़ियों को उच्च स्तर का प्रशिक्षण और तकनीकी सुविधाएं प्राप्त होगी। इस निर्णय से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के और अधिक क्रिकेट मैच का आयोजन सुनिश्चित होगा।

  • कोल्ड वेव ने बढ़ाई ठंड, MP के इन जिलों में मौसम विभाग का अलर्ट जारी

    भोपाल
     मध्य प्रदेश में नवंबर महीने के लास्ट में शुरू हुए सर्दी का असर दिसंबर के महीने में भी देखने को मिल रहा है। यहां लगातार मौसम बदल रहा है। उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाओं के चलते 2-3 डिग्री की गिरावट हो सकती है। बुधवार के दिन मौसम शुष्क रहेगा। इसके बाद न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट होगी।

    मौसम विभाग की मानें तो अगले 24 घंटे में मौसम साफ रहेगा। इसके चलते न्यूनतम तापमान में गिरावट हो सकती है। इसकी वजह है बंगाल की खाड़ी में बनने वाला चक्रवर्ती तूफान दितवाह है। यह तूफान उत्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं,एक अन्य साइक्लोनिक सर्कुलेशन पंजाब के आसपास सक्रिय है। इसके चलते अगले 24 घंटे में शीतलहर का दौर होगा। इसके साथ ही 5 दिसंबर से शीतलहर तेज हो सकती है।

    तापमान लगातार सामान्य से कम

    इन दिनों भी शहर में तापमान लगातार सामान्य से कम बने हुए हैं। सर्द हवा के कारण तेज सर्दी का अहसास हो रहा है। मंगलवार को भी भोपाल में न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री रहा, जबकि पचमढ़ी में 7.2 डिग्री दर्ज किया गया। इंदौर में 8.6 डिग्री दर्ज किया गया। प्रदेश के चार महानगरों में भी भोपाल सबसे सर्द रहा।

    दो दिन सामान्य

    वरिष्ठ मौसम विज्ञानी एचएस पांडे का कहना है अभी दो दिन तापमान इसी तरह रहने की संभावना है। इस समय एक प्रतिचक्रवात मध्यभारत के ऊपर बना हुआ है, इसके कारण उत्तरी हवा में रूकावट हो रही है, हांलाकि पूर्वी और मध्यक्षेत्र तक हवा पहुंच रही है। इसलिए भोपाल में इस समय अन्य शहरों के मुकाबले ज्यादा सर्दी है। अगले दो दिनों में यह प्रतिचक्रवात कमजोर पडऩे की संभावना है। 5 दिसंबर के आसपास तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते आगे बर्फबारी होने की भी संभावना है।

    वेस्टर्न डिस्टर्बेंस करेगा प्रभावित
    वेस्टर्न डिस्टर्बेंस 5 दिसंबर के दिन से वेस्टर्न हिमालयी एरिया को प्रभावित करेगा। इसके चलते प्रदेश में दिन और रात के तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज होगी। इसके चलते नवंबर के आखिरी दिनों में मिली राहत ज्यादा समय तक नहीं रहेगी। दिसंबर में इस बार ठंड पिछले कई सालों से ज्यादा पड़ सकती है। देश के हिमालयी क्षेत्रों में जल्दी बर्फबारी के कारण मध्य प्रदेश में ठंडी हवाओं का असर बढ़ा है।

    वर्तमान स्थिति: 12 शहरों में पारा 10°C से नीचे

    पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहले भी प्रदेश में कड़ाके की ठंड जारी है। सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात में प्रदेश के 12 शहरों में न्यूनतम तापमान 10°C से नीचे रहा। प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी 7.2°C के साथ सबसे ठंडा रहा। भोपाल और इंदौर में भी पारा 9°C  से नीचे दर्ज किया गया।

    मंगलवार को दिन के तापमान में भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा और सुबह के समय कई स्थानों पर कोहरा छाया रहा। ग्वालियर में विजिबिलिटी 500 से 1,000 मीटर तक दर्ज की गई, जबकि भोपाल और दतिया में भी दृश्यता 1,000 मीटर तक रही।
    नवंबर में टूटा था रिकॉर्ड

    वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल नवंबर में सर्दी ने कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त किए हैं। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो साल 1931 के बाद शीतलहर के सबसे ज्यादा दिन का रिकॉर्ड है। वहीं, 17 नवंबर की रात में पारा $5.2°C  तक पहुंच गया था, जो ओवरऑल रिकॉर्ड रहा।

    पिछले पांच सालों में दिसंबर में सबसे कम न्यूनतम तापमान

    -16 दिसंबर 2024 – 3.3 
    20 दिसंबर 2023 – 8.8

    -8 दिसंबर 2022 – 8.6

    -20 दिसंबर 2021 – 3.4

    -20 दिसंबर 2020 – 6.7

  • रायपुर में आधुनिक खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण, 1.5 एकड़ में कैंपस तैयार

    रायपुर : नवा रायपुर में डेढ़ एकड़ के कैंपस में होगा इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण

    मुख्य बजट 2025-26 की एक और बड़ी घोषणा पूर्ण, 46.49 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशा के अनुसार नवा रायपुर में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला सह एफडीए भवन के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 46 करोड़ 49 लाख 45 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। मुख्य बजट 2025-26 के प्रावधान के अनुरूप इस महत्वपूर्ण परियोजना से प्रदेश में खाद्य एवं औषधि परीक्षण क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

    नवीन इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला तथा नवीन एफ.डी.ए. भवन का रायपुर में स्थापना करने हेतु शासन द्वारा नया रायपुर में 1.5 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। रायपुर स्थित वर्तमान प्रयोगशाला लगभग 5 हजार वर्ग फीट (भूतल, प्रथम एवं द्वितीय तल) में संचालित है। प्रस्तावित नवीन प्रयोगशाला अत्याधुनिक उपकरणों (ड्रग एवं इनफोर्समेंट) से सुसज्जित होगा तथा 30 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में (भूतल, प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तल) में निर्मित होगा। इसके निर्माण से रासायनिक परीक्षणों की जांच क्षमता 500–800 नमूने प्रतिवर्ष से 7000–8000 नमूने प्रतिवर्ष हो जाएंगी। माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण (इंजेक्शन, आई ड्रॉप आदि) 2000 नमूने प्रतिवर्ष होंगे, मेडिकल डिवाइसेस (हाथ के दस्ताने, कैथेटर आदि) जिनका वर्तमान में परीक्षण नहीं किया जा रहा है उनका भी 500 नमूने प्रतिवर्ष लिए जाएंगे। इसके साथ ही  फार्मास्यूटिकल्स नमूनों की जांच 50 से बढ़कर 1000 नमूने प्रतिवर्ष हो जाएंगे। 

    स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रयोगशाला राज्य में खाद्य सुरक्षा के ढांचे को और मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि इससे जांच प्रक्रिया अधिक आसान, पारदर्शी और प्रभावी होगी। सरकार जनता को शुद्ध, प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद एवं दवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
    स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में बनने वाली यह आधुनिक प्रयोगशाला राज्य के लिए एक आदर्श प्रयोगशाला के रूप में विकसित होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर की अध्यक्षता

    रायपुर : अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस : मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मुख्य आतिथ्य में सूरजपुर में भव्य राज्यस्तरीय समारोह

    रायपुर

    अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर 03 दिसंबर को सूरजपुर जिले में भव्य राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े शामिल होंगी। सुरजपुर नगर पालिका परिषद कार्यालय के समीप स्थित रंगमंच में आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम दिव्यांगजनों के अधिकारों, सम्मान, समान अवसर और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता खाद्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री दयाल दास बघेल करेंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा, सरगुजा सांसद श्री चिन्तामणि महाराज, प्रेमनगर विधायक श्री भूलन सिंह मराबी, प्रतापपुर विधायक श्रीमती शकुंतला पोर्ते, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणी पैकरा, जनपद अध्यक्ष सूरजपुर श्रीमती स्वाति सिंह सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे।

    राज्यस्तरीय इस समारोह में दिव्यांगजनों के लिए विशेष सहायता कार्यक्रम, जानकारीपरक गतिविधियाँ, जागरूकता सत्र और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल की जाएंगी। कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगजनों की सामाजिक भागीदारी को सुदृढ़ करना और उनके लिए संवेदनशील तथा समावेशी वातावरण को बढ़ावा देना है।

  • रायपुर में पाञ्चजन्य कॉनक्लेव, CM साय ने दो साल के सुशासन अनुभवों का परिचय दिया

    रायपुर : ‘पाञ्चजन्य कॉनक्लेव – दंतेश्वरी डायलॉग’ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने साझा किए सुशासन के दो वर्षों के अनुभव

    रायपुर

    राजधानी नया रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिसॉर्ट में आयोजित पाञ्चजन्य कॉनक्लेव ‘दंतेश्वरी डायलॉग’ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राज्य सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल, बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों में विकास, नक्सल उन्मूलन, औद्योगिक निवेश, महिला सशक्तिकरण तथा नई टेक्नोलॉजी आधारित विकास मॉडल सहित अनेक विषयों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विभिन्न सवालों के सरल और स्पष्ट उत्तर देकर सरकार की योजनाओं और आगामी रोडमैप की जानकारी दी।

    महिला सशक्तिकरण सबसे बड़ी उपलब्धि

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दो वर्षों में महतारी वंदन योजना महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम बनी है।70 लाख महिलाओं को हर महीने 1000 रुपए की सम्मान राशि दी जा रही है, जिससे परिवारों में पोषण, बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में सकारात्मक बदलाव आया है।

    टेक-ड्रिवन छत्तीसगढ़ – नई औद्योगिक नीति में विशेष प्रावधान

    उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में नई उद्योग नीति लागू की गई है, जिसमे रोजगार को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही नई औद्योगिक नीति में निवेश को आकर्षित करने के लिए आकर्षक अनुदान,सिंगल विंडो सिस्टम,250 से अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार को भी शामिल किया गया है। इसी का परिणाम है कि अभी तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। नई औद्योगिक नीति में आईटी, एआई, ग्रीन टेक व सेमीकंडक्टर जैसी नई पीढ़ी की इंडस्ट्री को प्रोत्साहन दिया गया है।नवा रायपुर को आईटी हब, सेमीकंडक्टर प्लांट, और एआई डेटा सेंटर पार्क के रूप में विकसित करने का काम जारी है।

    बस्तर का विकास – स्थानीय पहचान और आधुनिक अवसरों का संतुलित मॉडल

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर का विकास स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के संतुलन के आधार पर होगा। कृषि, सिंचाई, जैविक खेती, वनोपज प्रसंस्करण, पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

    वनोपज संग्राहकों के लिए बेहतर सुविधा

    प्रधानमंत्री वनधन योजना और वनोपज आधारित प्रसंस्करण के विस्तार से संग्राहकों की आय में वृद्धि हो रही है।

    नक्सलवाद के विरुद्ध ‘सामाजिक मनोवैज्ञानिक मोड़’

    मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली जाकर नक्सल पीड़ितों द्वारा अपनी बात रखना ऐतिहासिक कदम है। इससे बस्तर के लोगों में बड़ा आत्मविश्वास आया और देश के सामने माओवादी हिंसा का वास्तविक चेहरा उजागर हुआ।

    मतांतरण पर सख्त कार्रवाई और सांस्कृतिक सुरक्षा पर जोर

    उन्होंने कहा कि प्रलोभन या दबाव से होने वाले मतांतरण रोकने के लिए लगातार कड़ी कार्रवाई हो रही है।इसके लिए विधानसभा में विधेयक लाने की भी तैयारी की जा रही है।

    जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य व डिजिटल कनेक्टिविटी में तेजी से सुधार

    मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर और सरगुजा में मोबाइल टावरों की स्थापना, स्कूलों का पुनः संचालन और युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षा गुणवत्ता में तेजी से वृद्धि हुई है।

    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और सुविधाओं का विस्तार

    नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, KCC कार्ड, बिजली, पानी, सड़क और अन्य सुविधाएँ तेजी से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    दो वर्षों में गारंटियों का सफल क्रियान्वयन

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित अधिकांश गारंटियाँ पूरी की जा चुकी हैं। इनमें 18 लाख आवास स्वीकृत,किसानों को बेहतर समर्थन मूल्य,महतारी वंदन योजना,तेंदूपत्ता संग्राहकों की बढ़ी हुई राशि,भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता आदि शामिल है। इसके अलावा प्रदेश में माओवाद पर निर्णायक प्रहार किया गया है।

  • राष्ट्र में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व क्षमता सराहनीय: मुख्यमंत्री यादव

    प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र बदल रहा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री ने जनजातीय हस्तियों और प्रतिभाओं को किया सम्मानित

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं तक भारतीय संस्कृति से जुड़ने का संदेश पहुंचाया। हमारा जनजातीय समाज भी भगवान कृष्ण की मुरली और मयूर पंख के उपयोग के साथ संपूर्ण समाज से जुड़कर समरस भाव से रहता आया है। भारतीय सिनेमा ने भी राष्ट्र भक्ति के विचार को सशक्त बनाना प्रारंभ किया है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में एक सुखद परिवर्तनशील वातावरण को हम देख रहे हैं। राष्ट्र बदल रहा है। कोरोना के कठिन दौर में नागरिकों को जीवन रक्षा के लिए वैक्सीन की व्यवस्था की गई। भारत दुनिया की आर्थिक शक्ति बना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में एक निजी टीवी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 'जनजातीय प्रज्ञा' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से चैनल के मैनेजिंग एडीटर मध्यप्रदेश  प्रवीण दुबे और मैनेजिंग एडिटर छत्तीसगढ़  विश्वेश ठाकुर ने बातचीत की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में जनजातीय वर्ग के कल्याण और सम्मान, स्वास्थ्य क्षेत्र, पर्यावरण और वन्य प्राणी संरक्षण सहित अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय समाज से जुड़ी प्रदेश के विभिन्न हस्तियों और प्रतिभाओं को सम्मानित किया। इनमें पद्म  अर्जुन धुर्वे डिंडोरी, फुलझरिया बाई, डिंडोरी,  सूर्यभान मरावी बालाघाट, साक्षी भवड़िया अलीराजपुर, प्रियंका अलीराजपुर, रोहित वैशाखी बड़वानी और बसंती देवी अनूपपुर शामिल हैं।

    प्रमुख बिन्दु

        प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं तक भारतीय संस्कृति से जुड़ने का संदेश पहुंचाया।

        जनजातीय समाज भी भगवान कृष्ण की मुरली और मयूर पंख के उपयोग के साथ संपूर्ण समाज से जुड़कर समरस भाव से रहता आया है।

        भारतीय सिनेमा ने भी राष्ट्र भक्ति के विचार को सशक्त बनाना प्रारंभ किया है।

        प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में एक सुखद परिवर्तनशील वातावरण को हम देख रहे हैं।

        राष्ट्र बदल रहा है।

        भारत दुनिया की आर्थिक शक्ति बना है।

        प्रदेश में जनजातीय वर्ग के कल्याण और सम्मान, स्वास्थ्य क्षेत्र, पर्यावरण और वन्य प्राणी संरक्षण सहित अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख किया।

        जनजातीय समाज से जुड़ी प्रदेश के विभिन्न हस्तियों और प्रतिभाओं को सम्मानित किया।

     

  • प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल पर होगी प्रदेश की सिंचाई योजनाओं की समीक्षा: मुख्यमंत्री डॉ.यादव

    प्रदेश में दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

    प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हैक्टयर तक बढ़ाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ.यादव

    प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल पर होगी प्रदेश की सिंचाई योजनाओं की समीक्षा: मुख्यमंत्री डॉ.यादव

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी। प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पार्वती-काली-सिंध और चम्बल अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना, केन-बेतवा अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना की स्वीकृति और केंद्र सरकार के सहयोग को राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

    बैठक में जल संसाधन विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि इस दिशा में राज्य में अध्ययन और सर्वेक्षण का कार्य किया गया है। राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया है। इस सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी। सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे।

    राज्य की नदियों में बाढ़, जल प्रबंधन, जल के समुचित उपयोग नदी कछारों में पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन 13 नवम्बर 2024 को किया गया था ।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के इस मॉडल का प्रदर्शन करने के निर्देश भी विभाग को दिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जानकारी दी गई कि राज्य में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

    बैठक में बताया गया कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसकी भौतिक प्रगति 48 प्रतिशत है। इसी तरह कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। इस परियोजना की भौतिक प्रगति 42 प्रतिशत है। सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है।

    बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    प्रमुख बिन्दु

        प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित।

        प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी।

        प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य।

        प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी।

        राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश।

        राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया।

        सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी।

        इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी।

        सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे।

        राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन 13 नवम्बर 2024 को किया गया।

        भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर कार्य करने के निर्देश।

        सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसकी भौतिक प्रगति 48 प्रतिशत है।

        कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। इस परियोजना की भौतिक प्रगति 42 प्रतिशत है।

        सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है।

     

  • कौशल विकास और कृषि शिक्षा को व्यावसायिक शिक्षा के साथ जोड़ने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जोर

    व्यावसायिक शिक्षा के साथ कौशल विकास और कृषि शिक्षा भी बने प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    स्कूल शिक्षा विभाग की गतिविधियों की हुई समीक्षा

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र र्में सुविधाओं का निरंतर विस्तार हो रहा है। विद्यार्थियों को प्रोत्साहन के लिए विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। प्रदेश में विगत 2 वर्षों में ड्रॉप आउट रेट 21.4 प्रतिशत से घटकर मात्र 16.8 प्रतिशत रह गया है। इसे और भी कम करने की दिशा में कार्य किया जाए। प्रोत्साहन योजनाओं का अधिक से अधिक विद्यार्थियों को लाभ दिलवाया जाए। विगत 2 वर्ष में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुसार हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी द्वितीय परीक्षा आयोजित कर समय सीमा में परिणाम घोषित किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति में व्यवसायिक शिक्षा देने की दिशा में प्रयास बढ़ाए जाएं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में स्कूल शिक्षा विभाग की गतिविधियों की जानकारी ली और कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि अच्छे परीक्षा परिणाम लाने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग की गतिविधियों की जानकारी ली और कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "भवन एक कक्षाएं अनेक" की तर्ज पर एक विद्यालय भवन में शेष खाली समय में महाविद्यालय की कक्षाएं संचालित करने की व्यवस्था प्रारंभ करने पर विचार कर कार्रवाई करने को कहा।

    बैठक में मुख्य रूप से पाठ्य पुस्तकों के नि:शुल्क प्रदाय, स्कूटी वितरण और साइकिल वितरण योजना के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि बालिका शिक्षा एवं छात्रावास का लाभ विद्यार्थियों को दिया जा रहा है। सेनिटेशन और हाइजिन किट का वितरण 19 लाख बालिकाओं को प्रति बालिका 300 रुपए के मान से डीबीटी द्वारा किया गया है। छात्रावासों में वाशिंग मशीन, रोटी मेकर, मैट्रेस जैसी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाभियान योजना में 210 छात्रावास स्वीकृत हुए हैं। शालाओं के सुदृढ़ीकरण का कार्य भी सुनिश्चित किया गया है। सांदीपनि और पीएम  विद्यालयों का लाभ विद्यार्थियों को मिल रहा है। परीक्षा परीणामों में सुधार के प्रयासों को सफलता मिल रही है। वर्ष 2024-25 के प्रथम परीक्षा परिणामों में कक्षा दसवीं 74 प्रतिशत और कक्षा 12वीं 76 प्रतिशत से अधिक परिणाम मिले हैं। प्रथम और द्वितीय परीक्षा में क्रमश: औसत 87 और 82 प्रतिशत परिणाम रहा है। इसी तरह शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज हुई है।

    विभागीय समीक्षा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश-

        किताबों का वितरण प्रत्येक स्तर तक सुनिश्चित करें।

        साइकिल मैन्यूफ़ैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिये योजना बनाई जाये।

        नवोदय विद्यालय की तर्ज़ पर सांदीपनि आश्रम विद्यालय बनायें जायें।

        व्यवसायिक शिक्षा पर ज़ोर दिया जाये।

        विद्यालयों में कृषि की शिक्षा भी दी जाये।

        रूचि अनुसार कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाये।

        अच्छा परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों को राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जाये।

        विद्यालय पहुँच मार्ग में यदि दिक़्क़त है तो उसे अन्य विभागों से समन्वय कर सुव्यवस्थित किया जाये।

        आवश्यकता वाले दूरस्थ क्षेत्रों में निजी निवेश पर निजी विद्यालयों को प्रोत्साहित करने की नीति बनाई जाये।

        शिक्षा विभाग के पोर्टल और ऐप पर काम किये जायें, शिक्षकों की परेशानी कम करें।

     

  • प्रदेश के सोलर पार्क से भारतीय रेल को मिलती है बिजली: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियां सराहनीय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुरैना सोलर सह स्टोरेज अपने तरह की पहली परियोजना होगी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
     प्रदेश के सोलर पार्क से भारतीय रेल को मिलती है बिजली: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों का स्तर काफी अच्छा है। ऊर्जा और नवकरणीय ऊर्जा दोनों विभागों को कार्यों का स्तर श्रेष्ठ से श्रेष्ठतम की ओर ले जाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऊर्जा और नवकरणीय ऊर्जा विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। नवीन और नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला, मुख्य सचिव  अनुराग जैन और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पारम्परिक ऊर्जा उत्पादन के साथ नवीन और नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रदेश में हो रहे कार्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की। बैठक में बताया कि अक्टूबर 2024 में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर परियोजना स्थापित की गई है। आगर,शाजापुर और नीमच के सोलर पार्क से उत्पन्न बिजली का उपयोग भारतीय रेल्वे द्वारा भी किया जा रहा है। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की इन परियोजनाओं से स्थानीय नागरिकों को रोजगार मिला है और 60 मिलियन टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है।

    बैठक में जानकारी दी गई कि मुरैना सोलर सह स्टोरेज परियोजना राज्य की पहली स्टोरेज परियोजना होगी, जिससे सालाना 180 करोड़ रुपए की बचत होगी। वर्ष 2027 में परियोजना के कार्य पूरे हो रहे हैं। प्रदेश में किसानों के लिए सोलर पंप योजना, सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना, कुसुम अ योजना पर बैठक में चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि कुल 15 विकासकों को जिलों का आवंटन किया गया है। लगभग 1300 भवनों पर 48 मेगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। प्रदेश के नागरिकों द्वारा भी घरेलू छतों पर बड़ी संख्या में उपकरण स्थापित कर रूफटॉप योजना का लाभ लिया जा रहा है। प्रदेश में 76 हजार से अधिक आवासीय इकाईयां कार्य कर रही हैं। इनकी स्थापित क्षमता लगभग 3 लाख किलोवाट है। प्रधानमंत्री जनमन योजना में 11 जिलों में एक हजार से अधिक घरों में सौर्य संयंत्र बैटरी सहित स्थापित किए जा चुके हैं। 

        ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों का स्तर काफी अच्छा।

        ऊर्जा और नवकरणीय ऊर्जा दोनों विभागों को कार्यों का स्तर श्रेष्ठ से श्रेष्ठतम की ओर ले जाना है।

        मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पारम्परिक ऊर्जा उत्पादन के साथ नवीन और नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रदेश में हो रहे कार्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की।

        अक्टूबर 2024 में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर परियोजना स्थापित।

        आगर,शाजापुर और नीमच के सोलर पार्क से उत्पन्न बिजली का उपयोग भारतीय रेल्वे द्वारा भी किया जा रहा।

        नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की इन परियोजनाओं से स्थानीय नागरिकों को रोजगार मिला।

        60 मिलियन टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है।

        मुरैना सोलर सह स्टोरेज परियोजना राज्य की पहली स्टोरेज परियोजना होगी, जिससे सालाना 180 करोड़ रुपए की बचत होगी।

        वर्ष 2027 में परियोजना के कार्य पूरे हो रहे हैं। प्रदेश में किसानों के लिए सोलर पंप योजना, सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना, कुसुम अ योजना पर बैठक में चर्चा हुई।

        सभी 55 जिलों के लिए रूफटॉप सौर योजना में सर्वे कार्य हो रहा है।

        प्रदेश में 76 हजार से अधिक आवासीय इकाईयां कार्य कर रही हैं। इनकी स्थापित क्षमता लगभग 3 लाख किलोवाट है।

        प्रधानमंत्री जनमन योजना में 11 जिलों में एक हजार से अधिक घरों में सौर्य संयंत्र बैटरी     सहित स्थापित किए जा चुके हैं।

     

  • टीबी के बढ़ते मामलों से हेल्थ सिस्टम पर दबाव, 76 हजार मरीज और इंदौर में 1,833 मौतों का खुलासा

    इंदौर 

     प्रधानमंत्री द्वारा साल 2025 तक टीबीमुक्त भारत बनाने की घोषणा के सात वर्ष बाद भी इंदौर में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 2018 में अभियान शुरू होने से अब तक इंदौर में 76,549 नए टीबी मरीज सामने आ चुके हैं, जो यह संकेत देता है कि लक्ष्य काफी पीछे छूट गया है। हर साल औसतन 7–8 हजार नए रोगी मिल रहे हैं। इनमें से 1,833 मरीजों की मौत भी दर्ज की जा चुकी है, जो अभियान की सफलता पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपलब्ध इलाज और साधनों के बावजूद मौतों का यह आंकड़ा बेहद गंभीर है।

    देशभर में बढ़ता टीबी का बोझ, इंदौर का योगदान भी बड़ा
    इंदौर सहित पूरे देश में टीबीमुक्त भारत अभियान चलने के बावजूद राष्ट्रीय टीबी आंकड़ों में लगातार वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2021 में जहां 21 लाख मरीज थे, वहीं 2022 में 28 लाख, 2023 में 25 लाख, 2024 में 26 लाख और 2025 में अब तक 26 लाख मरीज दर्ज किए जा चुके हैं। डाक्टरों की मानें तो वर्ष के अंत तक यह संख्या 30 लाख तक पहुंच सकती है। इन बढ़ते आंकड़ों में इंदौर का योगदान भी बड़ा है, क्योंकि यहां हर वर्ष हजारों मरीज सामने आ रहे हैं। उपलब्ध दवाएं और सुविधा केंद्र होने के बावजूद 1,833 मौतें अभियान को लगभग असफल साबित कर रही हैं।

    टीबी जांच के 44 केंद्र सक्रिय, इलाज और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध
    इंदौर में सामान्य टीबी की जांच 44 माइक्रोस्कोपी सेंटरों में की जाती है। अभियान शुरू होने से अब तक 76,549 सामान्य टीबी मरीज मिले हैं। जांच से लेकर इलाज तक का सारा खर्च सरकार वहन करती है। साथ ही उपचार अवधि के दौरान मरीजों को 6 महीने तक हर माह 1,000 रुपये की सहायता भी दी जाती है। चिकित्सकों के अनुसार यदि मरीज बिना नागा 6 महीने तक नियमित दवा लेते रहें तो वे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। इसके बावजूद लापरवाही के कारण कई मरीज इलाज अधूरा छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।

    एमडीआर टीबी के 1,745 मरीज, सबसे ज्यादा मौतें इसी श्रेणी में
    सामान्य टीबी के अतिरिक्त इंदौर में 1,745 एमडीआर (मल्टीड्रग रेजिस्टेंस) मरीज भी मिले हैं। यह टीबी का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है, जो आमतौर पर उन्हीं मरीजों में विकसित होता है जो बीच में दवा छोड़ देते हैं या इलाज पूरा नहीं करते। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी से होने वाली कुल मौतों में सबसे अधिक मौतें एमडीआर टीबी के कारण होती हैं। साल 2018 से 2025 तक मिलने वाले सामान्य और एमडीआर मरीजों के आधिकारिक आंकड़े भी यही दिखाते हैं कि बीमारी पर रोक नहीं लग सकी। सरकार का उद्देश्य यह है कि कोई भी मरीज बिना जांच और बिना इलाज के न रहे, न कि शहर में टीबी पूरी तरह खत्म हो।

    बड़ी संख्या में ठीक हो रहे मरीज
    जिला क्षय अधिकारी डाक्टर शैलेंद्र जैन ने बताया कि टीबीमुक्त भारत अभियान का मतलब यह नहीं है कि इंदौर में एक भी मरीज नहीं मिलेगा। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी मरीज बिना इलाज और बिना जांच के न रहे। इसके लिए हम हर तरह की सुविधा दे रहे हैं। बड़ी संख्या में मरीज ठीक हो रहे हैं और भविष्य में जल्द ही इस पर पूरी तरह से लगाम कसने में भी मदद मिलेगी।  

  • मुंबई सेंट्रल ट्रैक ब्लॉक: रतलाम मंडल की अहम ट्रेनें शॉर्ट-टर्मिनेट, सूची जरूर देखें

    रतलाम

    मुंबई सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 4 पर ट्रैक नवीनीकरण कार्य के चलते 23 नवंबर, 2025 से 60 दिनों का ब्लॉक लिया जा रहा है। इस ब्लॉक के कारण पश्चिम रेलवे की कई ट्रेनें प्रभावित होंगी। इस अवधि के दौरान, पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया जाएगा या आंशिक रूप से रद्द किया जाएगा। यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं की हैं।

    ये ट्रेन हो रहीं प्रभावित
    प्रभावित होने वाली ट्रेनों में निम्नलिखित शामिल हैं: ट्रेन संख्या 22210 हजरत निजामुद्दीन – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होगी और दादर तथा मुंबई सेंट्रल के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी। इसी प्रकार, ट्रेन संख्या 09086 इंदौर – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस भी दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होगी और दादर-मुंबई सेंट्रल के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी।

    ये ट्रेन भी रहेंगी रद्द
    अन्य प्रभावित ट्रेनों में ट्रेन संख्या 09076 काठगोदाम – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस और ट्रेन संख्या 09186 कानपुर अनवरगंज – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस शामिल हैं। ये दोनों ट्रेनें भी दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होंगी तथा दादर और मुंबई सेंट्रल स्टेशनों के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेंगी।

    मेंटिनेंस की वजह से ये रूट भी प्रभावित
    उत्तर पश्चिम रेलवे के चूरू-आसलू-दुधवाखारा स्टेशन के चूरू-सादुलपुर सेक्शन में पैच डबलिंग और ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के कारण पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से होकर गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। ब्लॉक कार्य के चलते कई ट्रेनों के मार्ग में परिवर्तन किया गया है और कुछ स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव भी दिए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रभावित ट्रेनों का विवरण जारी किया गया है।

    इन ट्रेनों का बदला गया रूट
    20497 रामेश्वरम – फिरोजपुर एक्सप्रेस: 06, 13, 20 और 27 जनवरी, 2026 को रामेश्वरम से चलने वाली यह ट्रेन सीकर-लोहारू-सादुलपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। इसे झुंझुनू और लोहारू स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव दिया गया है।

    20498 फिरोजपुर – रामेश्वरम एक्सप्रेस: 24 जनवरी, 2026 को फिरोजपुर से चलने वाली यह ट्रेन सादुलपुर-लोहारू-सीकर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। इसे लोहारू और झुंझुनू स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव दिया गया है।

    04711 बीकानेर – बांद्रा टर्मिनस स्पेशल: 21 जनवरी, 2026 को बीकानेर से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन बीकानेर, मेरटा रोड बाईपास – जयपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। नोखा, नागौर, मेरटा रोड बाईपास, डेगाना, मकराना और फुलेरा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे।

    04712 बांद्रा टर्मिनस – बीकानेर स्पेशल: 22 जनवरी, 2026 को बांद्रा टर्मिनस से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन जयपुर – मेरटा रोड बाईपास – बीकानेर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। फुलेरा, मकराना, डेगाना, मेरटा रोड बाईपास, नागौर और नोखा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे।

    04715 बीकानेर – साईंनगर शिर्डी स्पेशल: 24 जनवरी, 2026 को बीकानेर से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन बीकानेर, मेरटा रोड बाईपास – जयपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। नोखा, नागौर, मेरटा रोड बाईपास, डेगाना, मकराना और फुलेरा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे।

     

  • भाजपा प्रदेश कार्यालय में मिलेगा अवसर, कार्यकर्ताओं को मंत्रियों से मिलने अब नहीं लगेंगे चक्कर

    भोपाल
     कार्यकर्ताओं को क्षेत्र के काम से अब मंत्रियों से मिलने के लिए बंगले या मंत्रालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सोमवार से शुक्रवार तक प्रदेश भाजपा कार्यालय में दो मंत्री दोपहर एक से तीन बजे तक बैठेंगे। कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी समस्या का यथासंभव समाधान करेंगे। सत्ता और संगठन में समन्वय के लिए गठित समन्वय टोली की बैठक में हुए निर्णय के बाद इसकी शुरुआत भी सोमवार एक दिसंबर से हो गई।
    उप मुख्यमंत्री और राज्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से किया संवाद

    उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने कार्यालय में कार्यकर्ताओं से संवाद किया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों की उपलब्धता से संगठन और शासन के बीच समन्वय और मजबूत होगा तथा समस्याओं का समाधान त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। यह प्रयास संगठनात्मक गति, कार्यकर्ता संपर्क और समस्या-निराकरण को नई दिशा देगा।

    समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा

    वहीं, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मंत्री-दिन प्रणाली का उद्देश्य कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। सोमवार को हमने और गौतम टेटवाल ने कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुना और समाधान भी कराया। प्राप्त आवेदनों को सूचीबद्ध कर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिन समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हो सका, उनका फालोअप किया जाएगा। समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा।
    यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी

    कार्यकर्ताओं से मिलने की यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। केवल बड़े आयोजनों या विशेष कार्यक्रमों की स्थिति में ही इसे समायोजित किया जाएगा। इस निर्णय से भाजपा कार्यकर्ता भी बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र के कई कार्य ऐसे हैं जिनके लिए मंत्री से मिलना जरूरी होता है। इस व्यवस्था से अब सीधे मंत्री से मिलकर क्षेत्र की समस्या उठाई भी जा सकती है और उसका समाधान भी किया जा सकेगा।
    कब कौन मंत्री रहेगा कार्यालय में उपलब्ध

        2 दिसंबर- राकेश सिंह, दिलीप अहिरवार
        3 दिसंबर- विश्वास सारंग, लखन पटेल
        4 दिसंबर- कैलाश विजयवर्गीय, प्रतिमा बागरी
        5 दिसंबर- विजय शाह, नरेंद्र शिवाजी पटेल

     

  • कर्ज में बढ़ोतरी: मोहन सरकार का 3 हजार करोड़ उधार लेने का निर्णय, आंकड़ा 49,600 करोड़ तक पहुँचा

    भोपाल 

     मध्यप्रदेश की मोहन सरकार शीतकालीन सत्र के दौरान दूसरा अनुपूरक बजट पेश करने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार एक बार फिर 3,000 करोड़ का कर्ज नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से लेने जा रही है, जिसका भुगतान बुधवार को किया जाएगा। ये सभी कर्ज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के जरिए लिए जा रहे हैं, और इनका ब्याज हर छह महीने में 3 जून और 3 दिसंबर को चुकाया जाएगा। इस नए कर्ज के साथ चालू वित्तीय वर्ष में राज्य का कुल कर्ज बढ़कर 49,600 करोड़ पहुंच जाएगा।

    पहला कर्ज 1 हजार करोड़ रुपए का होगा

    वित्त विभाग के द्वारा नोटिफिकेशन जारी किया गया। जिसके अनुसार, पहला कर्ज एक हजार करोड़ रुपए का होगा। जिसका भुगतान सरकार के द्वारा आठ साल में किया जाएगा। इसके बाद एक हजार करोड़ का दूसरा कर्ज भी लिया जाएगा। जिसको सरकार 13 साल में चुकाएगी। तीसरे कर्ज की राशि भी 1 हजार करोड़ रुपए होगी। जिसका भुगतान ब्याज के साथ 23 साल में किया जाएगा। इन कर्जों का ब्याज जून और दिसंबर महीने में अदा किया जाएगा।

    नवंबर में सरकार ने लिया था कर्ज

    इससे पहले सरकार ने 11 नवंबर को ऑक्शन के बाद सरकार ने 12 नवंबर को 1500-1500 सौ करोड़ के दो कर्ज और 1 हजार करोड़ का दूसरा कर्ज लिया था। जो कि 16 साल, 22 साल और 19 साल के लिए हैं। इनके ब्याज का भुगतान सरकार को 6-6 महीने की अवधि में करना होगा। ऐसे ही 28 अक्टूबर को 5200 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। उसमें पहली राशि 2700 करोड़ की थी, जो कि 21 साल के लिए ली गई थी। वहीं, दूसरी राशि 2500 करोड़ की, जो 22 साल के लिए ली गई थी।

    कर्ज लेने की लिमिट बरकरार

    सरकार ने अपनी रेवेन्यू को लेकर कहा है कि वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार 12487.78 करोड़ के रेवेन्यू सरप्लस में थी। इसमें आमदनी 234026.05 करोड़ और खर्च 221538.27 करोड़ रहा। इसके विपरीत वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार की रिवाइज्ड आमदनी 262009.01 करोड़ और खर्च 260983.10 करोड़ बताया है। इस तरह पिछले वित्त वर्ष में भी सरकार की आय 1025.91 करोड़ सरप्लस बताई गई है, जो भी कर्ज लिया जा रहा है वह लोन की लिमिट के भीतर है।

    ऐसे ही 30 सितंबर को 1500-1500 करोड़ के दो कर्ज लिए थे। जिसका भुगतान एक अक्टूबर को हुआ था। ये कर्ज 20 साल और 23 साल के अवधि के लिए हैं। इसका भुगतान एक अक्टूबर हो हुआ था। 

  • छत्तीसगढ़ की नई होमस्टे नीति लागू, ग्रामीणों को 1 लाख की सहायता और पर्यटन से आय बढ़ाने का अवसर

    रायपुर 

    छत्तीसगढ़ सरकार ने होमस्टे पॉलिसी लागू कर दी है,  सरकार ने 2025-30 के लिए नई छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025‑30 बनाई है, जिसका सबसे ज्यादा फायदा ग्रामीणों को मिलने वाला है, खास तौर पर बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस दिशा में और काम किया जा रहा है. इस पॉलिसी का मकसद प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों, विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभागों में होने वाली होमस्टे में और इजाफा करने की तैयारी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक इस दिशा में आ सके. 

    होम-स्टे की सुविधा बढ़ेगी 

    छत्तीसगढ़ सरकार की इस पॉलिसी के तहत ग्रामीण परिवारों को प्रोत्साहन मिलेगा जो अपना घर पर्यटकों के ठहरने के लिए होम-स्टे के रूप में उपलब्ध कराएंगे. सरकार होम-स्टे सेट-अप की सुविधा देने के लिए वित्तीय मदद देगी, जिससे परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा. यानि अब जो इस दिशा में का करना चाहते हैं उन्हें इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. नए होम‌स्टे पर 1 लाख रुपए तक की मदद भी सरकार की तरफ से मिलेगी, जिसके लिए रिनोवेशन पर 50 हजार और 100 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी भी ग्रामीणों को मिलेगी. 

    दरअसल, नीति के अनुसार होम-स्टे के लिए घर अपग्रेड करने के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता दी जाएगी. क्योंकि इससे स्थानीय लोग अपने घर को होम-स्टे में बदलकर स्थायी आय अर्जित कर सकेंगे, युवाओं, महिलाओं और स्थानीय कारीगरों के लिए स्वरोजगार व रोजगार के अवसर खुलेंगे. होम-स्टे की मदद से पर्यटक गांव की सादगी, प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, लोक-कला, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन आदि का अनुभव ले सकेंगे, जिससे स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा. 

     ग्रामीणों और पर्यटकों को फायदा कैसे

    रियल सरगुजिहा फीलिंग: सैलानियों को अब सरगुजा में रियल सरगुजिहा फीलिंग मिल सकेगी. जिस जंगल, पहाड़, गांव, घर खेत खलिहान, आदिवासी संकृति को देखने सैलानी यहां आते हैं. अब वो इन सबमें समाहित होकर उसका आनंद ले सकेंगे, क्योंकि सरकार की इस नीति के बाद सैलानियों को शहर के महंगे एसी वाले होटल में नहीं ठहरना पड़ेगा.

    पर्यटकों को मिलेगा होम स्टे का फायदा: होम स्टे के तहत पर्यटक गांव में ही ग्रामीणों के घर में रह सकेंगे. उनका खाना, उनकी चारपाई, खेत खलिहान, कुएं का पानी सहित तमाम लोकल कल्चर का आनंद उठा सकेंगे. सरकार होम स्टे को प्रमोट करने के लिए नीति बना चुकी है. इसे चरण बद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. सरकार होम स्टे के लिए प्रोत्साहन राशि और लोन लेने पर ब्याज में भी छूट की योजना बना चुकी है.

    पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा: सरगुजा के पर्यटक स्थलों और लोक संकृति पर शोध करने वाले अजय कुमार चतुर्वेदी कहते हैं कि होम स्टे से प्रदेश के दो संभाग बस्तर और सरगुजा के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. सरगुजा का पर्यटन, धार्मिक, साहित्यिक सभी दृष्टि से समृद्ध है. यहां रामगढ़ है, डीपाडीह है, मैनपाट, सोमरसोत, तमोर पिंगला अभयारण्य, ओडगी में कूदरगढ़, गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व के कई इलाके हैं.

    बस्तर में होम स्टे कल्चर:  प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने होम स्टे के सम्बन्ध में पूरी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बस्तर के कुछ गांव में होम स्टे कल्चर विकसित हो चुका है. इसे देखते हुए सरकार ने होम स्टे नीति बनाई है. पर्यटक हमारे घर के एक कमरे में हमारे साथ रहेगा, जो हम खायेंगे वही खायेगा. हमारे खेत बाड़ी घूमेगा. विदेशों में ये कल्चर कई जगह है.

    सरकार करेगी मदद: मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि पर्यटन विभाग ने चिन्हांकन का काम शुरू कर दिया है. हम एक कमरे पर एक लाख रुपये प्रोत्साहन देंगे. पहले वर्ष 50 हजार, फिर अगले वर्ष 30 हजार और तीसरे वर्ष 20 हजार दिया जाएगा. आप चाहें तो लोन भी ले सकते हैं. उसमें सरकार इंटरेस्ट सब्सिडी देगी. एक व्यक्ति 6 कमरे तक बना सकता है.

    पर्यटकों और ग्रामीणों को होगा फायदा: बहरहाल सरकार की नीति का फायदा सीधे तौर पर पर्यटकों और स्थनीय ग्रामीणों को होगा. गांव के कच्चे के मकान का कमरा किराये पर देकर ग्रामीण पैसा कमा सकेंगे. ना सिर्फ कमरा बल्कि खाना व अन्य सुविधाओं का भी चार्ज वो सैलानियों से कर सकेंगे. सैलानियों के लिए भी ये सुनहरा अवसर होगा, क्योंकि जिस संस्कृति को वो दूर से देखने और फोटो क्लिक करने आते थे, अब वो उसी संस्कृति में रह सकेंगे.

    सैलानियों का खर्च बचेगा: पर्यटक सरगुजा का लोकल जीराफूल, लाकरा की चटनी, पूटू, जंगली साग, कुएं का पानी, चारपाई में पैरावट का बिस्तर जैसे अनुभव को जी सकेंगे. इससे सैलानियों के बजट में भी कमी आयेगी क्योंकि सरगुजा घूमने के लिए वो पहले अंबिकापुर आकर किसी महंगे होटल में ठहरते हैं और फिर यहां से कैब बुक करके घूमने जाते हैं. शाम को वापस आते हैं और अगले दिन फिर निकलते हैं. इस तरह सैलानियों का ट्रेवलिंग और स्टे का खर्च काफी अधिक हो जाता है, लेकिन होम स्टे में वो उसी गांव में रुक सकेंगे, जहां उनको घूमना है.

    छत्तीसगढ़ में बढ़ा होम स्टे 

    बता दें कि बीते कुछ सालों में छत्तीसगढ़ में भी होम स्टे पर्यटन में तेजी से बढ़ावा आया है, क्योंकि राज्य के बस्तर और सरगुजा संभागों के जंगली इलाकों और ग्रामीण इलाकों में होम स्टे का कल्चर बढ़ा है, बाहर से आने वाले लोग शहर की थकान से दूर गांवों की शांति और सुकून में रहना पसंद करते हैं, ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है, ताकि पर्यटन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति को भी बढ़ावा दिया जा सके. 

  • देश में 67,000 करोड़ रु. अनक्लेम्ड, भोपाल में 230 करोड़; आसान क्लेम प्रक्रिया के लिए RBI कैंप चालू

    भोपाल 

    राजधानी के 5 लाख 63 हजार 659 खाताधारकों ने करीब 10 साल अपने बैंक खातों में कोई ट्रांजेक्शन नहीं किया है। लेनदेन नहीं होने की वजह से निष्क्रिय पड़े इन खातों में करीब 230 करोड़ रुपए पड़े हैं। यदि आपका या आपके परिवार का पैसा पिछले दस साल से बैंक में जमा है और उसमें कोई लेनदेन नहीं किया है तो ऐसे पैसे खाते से निकाले जा सकते हैं। इसके लिए अब वित्तीय संस्थान ही आगे आ रहे हैं। जगह-जगह कैंप लगाकर लाभार्थियों को पैसा निकालने की सलाह दी जा रही है। रिजर्व बैंक ने ऐसे पैसे वापस करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक का समय दिया है। इसमें बैंक, बीमा कंपनी सहित अन्य वित्तीय संस्थान शामिल है।

    कैसे मिलेगी राशि

    बैंकर्स का कहना है कि इस प्रकार की राशि को प्राप्त करने के लिए बैंक में आवेदन देना होगा साथ ही खाते का केवायसी (खाताधारक का आधार, पेन नंबर) आदि देना होगा। यदि खाताधारक नहीं है और नामिनी बनाया है तो राशि नामिनी को मिलेगी अन्यथा विधिक वारिस को मिलेगी। ये पैसा जमाकर्ता एवं उतराधिकारियों की वैद्य संपत्ति है।

    सरकारी बैंकों में 20 करोड़, 210 करोड़ रुपए प्राइवेट बैंकों में जमा

    2518 करोड़ रुपए जमा हैं मप्र के निष्क्रिय खातों में

    लेनदेन बंद... डीईए फंड में जाती है राशि बैंक अधिकारियों के मुताबिक सेविंग, रैकरिंग, करंट या इंश्योरेंस समेत किसी भी खाते में 10 साल तक लेनदेन नहीं होने पर खाता निष्क्रिय हो जाता है। इसके बाद जमा राशि आरबीआई के डीईए (डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस) फंड में ट्रांसफर होती है। इसके ब्याज से आरबीआई जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम चलाता है।

    देश में 67,000 करोड़ अनक्लेम्ड पड़े

    देश के लाखों लोगों की करीब 67,000 करोड़ रुपये की रकम (जून 2025 तक) बैंकों में लावारिस पड़ी है. यह वही धन है जिसे लोग पुराने खातों में छोड़कर भूल गए, या फिर उनके परिवार के सदस्यों को इन खातों की जानकारी ही नहीं मिली. कई मामलों में नॉमिनी जानकारी के अभाव, दस्तावेजों के गुम होने या जागरूकता की कमी के कारण परिवार इस जमा रकम को वर्षों तक क्लेम नहीं कर पाते.

    अनक्लेम्ड राशि बढ़ने की असली वजह
    भारतीय परिवारों में वित्तीय संवाद की कमी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है. लोग निवेश करते तो हैं, लेकिन उसके बारे में परिवार को बताते नहीं. ऐसे में निवेशक की अनुपस्थिति या जानकारी के अभाव में धन वर्षों तक निष्क्रिय पड़ा रह जाता है.

    RBI की बड़ी पहल – पूरे देश में विशेष सहायता कैंप
    रिज़र्व बैंक ने 31 दिसंबर 2025 तक देशभर में विशेष सहायता कैंप शुरू किए हैं. इनका उद्देश्य है जनता तक भूला हुआ पैसा पहुंचाना, क्लेम प्रक्रिया आसान बनाना, वित्तीय जागरूकता बढ़ाना. कैंप में ग्राहकों को फ़ॉर्म भरने, दस्तावेज़ सत्यापन, नॉमिनी अपडेट और फॉलो-अप में सहायता दी जा रही है ताकि लोग आसानी से अपना पैसा वापस पा सकें.

    निष्क्रिय खाता क्या होता है?
    बचत या करंट अकाउंट में यदि दो साल तक कोई लेन-देन नहीं होता, तो वह निष्क्रिय (Inactive) मान लिया जाता है. पैसे सुरक्षित रहते हैं, लेकिन कई सेवाएं बंद हो जाती हैं. अगर 10 साल तक खाते में कोई गतिविधि न हो, तो उसमें मौजूद राशि ब्याज सहित RBI के DEA Fund में ट्रांसफर हो जाती है. अच्छी खबर यह है कि, ग्राहक या कानूनी वारिस कभी भी अपना पैसा क्लेम कर सकते हैं. कोई समयसीमा नहीं है.

    उद्गम पोर्टल से खातों की खोज

    उद्गम पोर्टल से कई बैंकों के खातों की खोज की सुविधा दी जा रही है। इससे प्रत्येक बैंक के दावे या निपटान प्रक्रिया की जानकारी मिलती है। हालांकि जमा राशि का दावा केवल संबंधित बैंक से ही किया जा सकता है।

    पैसे वापस कैसे पाएं?

        अपने बैंक की किसी भी शाखा में जाएं
        KYC दस्तावेज (आधार, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि) दें
        क्लेम फॉर्म भरें
        नॉमिनी/कानूनी वारिस से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत करें
        राशि (ब्याज सहित, जहाँ लागू हो) प्राप्त करें

    अनक्लेम्ड जमा ढूंढने के लिए RBI का UDGAM पोर्टल

        वेबसाइट पर जाएं: udgam.rbi.org.in
        मोबाइल नंबर या आधार से रजिस्टर करें
        नाम, जन्मतिथि, मोबाइल आदि विवरण भरें
        पोर्टल आपके नाम से जुड़े निष्क्रिय खाते या FDs की जानकारी दिखाएगा
        बैंक का नाम और UDRN नंबर भी दिखाई देगा

    अब तक 30 बैंक इस पोर्टल से जुड़े हैं, जो कुल अनक्लेम्ड जमाओं का लगभग 90% कवर करते हैं.

    बैंकों को मिलेगा इनाम — RBI की नई योजना
    1 अक्टूबर 2025 से लागू नई योजना के तहत—

        4 साल निष्क्रिय खाते वापस दिलाने पर बैंक को 5% या 5,000 रु (जो कम हो)
        10 साल निष्क्रिय खाते के भुगतान पर 7.5% या 25,000 रु (जो कम हो)
        RBI हर तिमाही दावों की जांच कर 30 दिनों में इनाम जारी करेगा.

    इसका उद्देश्य है—

        बैंकों को पुराने निष्क्रिय खातों के निपटान के लिए प्रोत्साहित करना
        भविष्य में अनक्लेम्ड जमा की संख्या कम करना

    भविष्य में ऐसी परेशानी से बचने के उपाय

        अपने सभी बैंक खाते, PPF, बीमा, म्यूचुअल फंड आदि की सूची बनाकर रखें
        परिवार के सदस्यों को इसके बारे में जानकारी दें
        हर खाते में नॉमिनी अपडेट करें
        दस्तावेज सुरक्षित रखें
        समय-समय पर खातों में लेन-देन करते रहें

  • खोज अभियान फेल: 500 पुलिसकर्मी व ड्रोन भी न कर सके मदद, स्वजन ने ‘महादेव’ के सामने 11 लोगों से दिलाई शपथ

    ग्वालियर
    मुरार के मोहनपुर से 32 दिन पहले संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुआ तीन वर्षीय मासूम रितेश पाल को पुलिस ढूंढ नहीं सकी। 32 दिन से करीब 500 पुलिसकर्मी जंगल से लेकर हाइवे और गांव में परिचित, रिश्तेदारों के घर तक खंगाल चुके हैं। लेकिन असफलता ही हाथ लगी, पुलिस को स्वजनों पर शक है। फिर भी अब तक खाली हाथ है।

    जब पुलिस बच्चे को ढूंढ नहीं सकी तो समाज के लोग आगे आए। रितेश के ननिहाल और दादा पक्ष के लोगों को महाराजपुरा के गिरगांव स्थित मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में ले जाया गया। पहले पंचायत लगी, फिर 11 लोगों ने शिवलिंग पर हाथ रखकर कसम खाई। कहा, "रितेश को गायब करने में न हम शामिल हैं न कोई षड़यंत्र है।"
     
    महादेव पर छोड़ दिया फैसला
    अब फैसला महादेव पर छोड़ दिया गया है। 6 दिसंबर शाम 6 बजे तक का समय पंचायत ने दिया है। अगर इस समय किसी भी पक्ष का कोई नुकसान नहीं हुआ तो यह दोषमुक्त होंगे। अब सभी को महादेव के फैसले का इंतजार है।

    यहां बता दें कि गिरगांव महादेव की अदालत पूरे अंचल में निष्पक्ष फैसले के लिए जानी जाती है। मंदिर के मुख्य द्वार पर ही लिखा है- मजिस्ट्रेट महादेव। अब तक यहां पैसों के लेनदेन और जमीनों के विवाद से जुड़े मामले ही आते थे। पहली बार ऐसा अवसर है- जब किसी अपहरणकांड में मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत लगी है।

    यह है पूरा मामला
        एक नवंबर को तीन वर्षीय रितेश पाल पुत्र दलवीर पाल अपने ननिहाल से लापता हो गया था। वह घर के बाहर खेल रहा था। ननिहाल मुरार थाना क्षेत्र के अंतर्गत मोहनपुर गांव में है। रितेश अपनी मां सपना के साथ ननिहाल में रहता है। जबकि बड़ा भाई पिता दलवीर के साथ उपनगर ग्वालियर में रहता है। सपना व दलवीर में झगड़ा रहता है। इसके कारण दोनों अलग रहते हैं।
        पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज किया और बालक की तलाश शुरू की। सपना व उसके मायके वाले पति और ससुराल पक्ष पर आरोप लगा रहे थे।जबकि पति दलवीर का कहना था- सपना ने अपने मायके वाले और परिचितों के साथ मिलकर बच्चे को गायब करा दिया है।
        खुद एसएसपी धर्मवीर सिंह, तीन एएसपी, चार सीएसपी, तीन टीआइ और करीब 500 पुलिसकर्मी अब तक तलाश में लग चुके हैं। ड्रोन से भी जंगल में सर्चिंग कराई गई, लेकिन बच्चे का सुराग नहीं लगा।
        पुलिस ने करीब 50 संदेहियों से पूछताछ कर ली, सुई आखिर में स्वजनों पर ही आकर रुक जाती है। पुलिस इन पर ही संदेह कर रही है, इसके चलते इनसे पूछताछ भी हुई। जब बच्चा नहीं मिला तो समाज के लोग आगे आए और मजिस्ट्रेट महादेव के सामने ले गए।

    मंदिर में पंचों के सामने हुई चर्चा, फिर खाई कसम
    सपना, उसका भाई राजू, भाभी ज्योति व दो अन्य लोग और दलवीर के साथ उसका भाई, पिता व अन्य स्वजन पहुंचे। दोनों पक्षों से 11 लोग पंचायत में शामिल हुए। यहां करीब दो घंटे तक चर्चा हुई। फिर महादेव के सामने ले जाया गया, यहां दोनों पक्षों ने कसम खाकर कहा- वह निर्दोष हैं।

    हमने गायब किया हो तो तीनों बेटे मर जाएं: दलवीर के पिता रामवीर ने कहा कि अगर उसका या उसके स्वजनों का हाथ रितेश को गायब कराने में हो तो उसके तीनों बेटे मर जाएं। इसी तरह अन्य लोगाें ने भी कसम खाई। सपना ने कहा कि उसका ससुर गलत नियत रखता है, इसलिए वह पति से अलग रहती है।

    5 दिन में आ जाएगा फैसला
    पंचों ने कहा कि 6 दिसंबर शाम 6 बजे तक फैसला आ जाएगा। अगर इस दौरान किसी भी पक्ष के यहां चोरी, किसी की मृत्यु, पशु की मृत्यु या कोई हादसा होता है तो वह पक्ष दोषी माना जाएगा। अपराध स्वीकार करने पर सजा दी जाएगी।
     

     

  • नवा रायपुर में डेढ़ एकड़ के कैंपस में होगा इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण

    रायपुर,

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशा के अनुसार नवा रायपुर में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला सह एफडीए भवन के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 46 करोड़ 49 लाख 45 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। मुख्य बजट 2025-26 के प्रावधान के अनुरूप इस महत्वपूर्ण परियोजना से प्रदेश में खाद्य एवं औषधि परीक्षण क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

    नवीन इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला तथा नवीन एफ.डी.ए. भवन का रायपुर में स्थापना करने हेतु शासन द्वारा नया रायपुर में 1.5 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। रायपुर स्थित वर्तमान प्रयोगशाला लगभग 5 हजार वर्ग फीट (भूतल, प्रथम एवं द्वितीय तल) में संचालित है। प्रस्तावित नवीन प्रयोगशाला अत्याधुनिक उपकरणों (ड्रग एवं इनफोर्समेंट) से सुसज्जित होगा तथा 30 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में (भूतल, प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तल) में निर्मित होगा। इसके निर्माण से रासायनिक परीक्षणों की जांच क्षमता 500–800 नमूने प्रतिवर्ष से 7000–8000 नमूने प्रतिवर्ष हो जाएंगी। माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण (इंजेक्शन, आई ड्रॉप आदि) 2000 नमूने प्रतिवर्ष होंगे, मेडिकल डिवाइसेस (हाथ के दस्ताने, कैथेटर आदि) जिनका वर्तमान में परीक्षण नहीं किया जा रहा है उनका भी 500 नमूने प्रतिवर्ष लिए जाएंगे। इसके साथ ही  फार्मास्यूटिकल्स नमूनों की जांच 50 से बढ़कर 1000 नमूने प्रतिवर्ष हो जाएंगे।

    स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रयोगशाला राज्य में खाद्य सुरक्षा के ढांचे को और मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि इससे जांच प्रक्रिया अधिक आसान, पारदर्शी और प्रभावी होगी। सरकार जनता को शुद्ध, प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद एवं दवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
    स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में बनने वाली यह आधुनिक प्रयोगशाला राज्य के लिए एक आदर्श प्रयोगशाला के रूप में विकसित होगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • दिव्यांगजन को दया नहीं, समान अवसर की आवश्यकता है : प्रमुख सचिव वायंगणकर

    विश्व दिव्यांग दिवस का गरिमापूर्ण आयोजन

    भोपाल 
    विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण श्रीमती सोनाली वायंगणकर के मुख्य आतिथ्य में संचालनालय सभागार में कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें दिव्यांगजनों के अधिकार, समानता और सशक्तिकरण के लिए विभाग की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया। इस अवसर पर आयुक्‍त नि:शक्तजन डॉ. अजय खेमरिया भी उपस्थित थे।

    प्रमुख सचिव श्रीमती वायंगणकर ने कहा कि दिव्यांगजन किसी दया या सहानुभूति के नहीं, बल्कि समान अवसर, गरिमा और अधिकार के अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगजन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

    श्रीमती वायंगणकर ने कहा कि विभाग कार्यस्थलों को पूर्णतः सुगम्य और दिव्यांग-अनुकूल बनाने की दिशा में ठोस प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में, कार्यक्रम के दौरान Atypical Advantage संस्था के साथ रोजगार पुनर्वास के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता (MOU) किया गया। इस साझेदारी से निजी क्षेत्र में दिव्यांगजनों के लिए नौकरी के अवसर बढ़ाने, उचित स्किल-मैपिंग एवं प्लेसमेंट, और प्रतिभा के अनुरूप कार्यस्थल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    कार्यक्रम में विभाग की पूर्व उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाओं का विस्तार, सुगम्य भवन एवं प्रक्रियाएँ, पारदर्शी और सुलभ व्यवस्था, तथा रोजगार-परक प्रयास शामिल हैं।

    कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय तैराकी प्रतियागिता में इंग्लिश चेनल में स्विमिंग करने वाले दो राष्ट्रीय खिलाड़ी दिव्यांग तैराक श्री सतेन्द्र लोहिया और श्री रामवरण को 5-5 लाख रूपये राशि के चेक भी प्रदान किये गये।

     

  • पॉवर जनरेटिंग कम्पनी के परियोजना उत्पादन और सिविल इंजीनियरिंग कार्यालय को मिला आईएसओ सर्टिफिकेशन

    अब तक 12 कार्यालय को मिला आईएसओ प्रमाणन

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के जबलपुर मुख्यालय स्थित परियोजना उत्पादन व सिविल इंजीनियरिंग कार्यालय को अंतर्राष्ट्रीय क्वालिटी स्टैण्डर्ड आईएसओ 9001: 2015 सर्टि‍फिकेशन प्राप्त हो गया। पावर जनरेटिंग कंपनी द्वारा कार्यप्रणालियों के सतत् मानकीकरण व दक्षता वृद्धि की दिशा में यह उपलब्धि एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान में पॉवर जनरेटिंग कंपनी के कुल 12 कार्यालय इस अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस उपलब्धि पर पूरे स्टॉफ को बधाई दी है।

    पूर्व में कम्पनी के दस कार्यालयों में मुख्य अभियंता उत्पादन भंडार, मुख्य अभियंता संचालन संधारण- जल विद्युत,मुख्य अभियंता फ्यूल मैनेजमेंट, कार्यपालक निदेशक इंजीनियरिंग, ज्वाइंट डायरेक्टर सीओजीएचएस कार्यालय, प्रबंध संचालक कार्यालय, डायरेक्टर टेक्निककल, मुख्य अभियंता कारपोरेट सर्विसेस, मुख्य अभियंता मटेरियल मैनेजमेंट व मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) को अंतर्राष्ट्रीय क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम 9001:2015 प्रमाणीकरण प्राप्त हो चुका है। यह सभी 12 कार्यालय अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मानदंडों का पालन करते हुए कार्य कर रहे हैं।

     

  • गणित एवं विज्ञान विषय के ओलम्पियाड का आयोजन, विकासखण्ड स्तरीय परीक्षा 7 दिसम्बर को

    भोपाल 
    प्रदेश में ऐसे विद्यार्थी जिन्होंने गणित एवं विज्ञान विषय में कक्षा 9वीं एवं 10वीं में ओलम्पियाड में भाग लेने के लिये पंजीयन किया था। उन विद्यार्थियों की विकासखण्ड स्तरीय परीक्षा 7 दिसम्बर 2025 रविवार को प्रात: 11 से दोपहर एक बजे तक विज्ञान विषय एवं दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक गणित विषय की परीक्षा आयोजित की गई है। परीक्षा का आयोजन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किया जा रहा है।

    ओलम्पियाड परीक्षा में कोई भी विद्यार्थी दोनों ही परीक्षा में भाग ले सकता है। इस परीक्षा से संबंधित प्रश्नपत्र विद्यार्थियों के रोल नम्बर, परीक्षा केन्द्र आदि की जानकारी मध्यप्रदेश राज्य ओपन स्कूल द्वारा अलग से भेजी जा रही है। विकासखण्ड स्तरीय परीक्षा का परिणाम 18 दिसम्बर 2025 के पूर्व घोषित कर दिया जाएगा। इस परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थी संभाग स्तरीय ओलम्पियाड 21 दिसम्बर 2025 दिन रविवार को भाग ले सकेंगे।