• मध्यप्रदेश की सड़कों में होगा बड़ा बदलाव, तीन साल में बदलेगा पूरा रोड नेटवर्क- मंत्री राकेश सिंह

    अगले तीन वर्षों में बदलेगा मध्यप्रदेश का सड़क मानचित्र : लोक निर्माण मंत्री सिंह

    विभाग की पत्रकार वार्ता में आगामी तीन वर्षों की महत्वाकांक्षी विकासात्मक कार्ययोजना की दी गई जानकारी

    भोपाल

    लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने गुरुवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश की सड़क अवसंरचना की वर्तमान स्थिति तथा आगामी तीन वर्षों (2025–2028) की महत्वाकांक्षी विकासात्मक कार्ययोजना की जानकारी प्रस्तुत की।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश की सड़कें अब केवल आवागमन का साधन नहीं रहीं, बल्कि आर्थिक विकास, निवेश आकर्षण और नए अवसरों की सुदृढ़ आधारशिला के रूप में स्थापित हो रही हैं।

    मंत्री सिंह ने कहा कि प्रदेश में अगले तीन वर्षों में 3,368 किलोमीटर लंबी छह प्रमुख एक्सप्रेस-वे एवं प्रगतिपथ परियोजनाओं का निर्माण किया जाएगा। इनमें नर्मदा प्रगतिपथ, विंध्य एक्सप्रेस-वे, मालवा–निमाड़ विकासपथ, अटल प्रगतिपथ, बुंदेलखंड विकासपथ और मध्य भारत विकासपथ शामिल हैं। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹36,483 करोड़ है और अधिकांश परियोजनाओं को जून 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इनके पूरा होने से यात्रा समय में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार तथा औद्योगिक, कृषि और पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

    राष्ट्रीय राजमार्गों के क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों की जानकारी देते हुए मंत्री सिंह ने बताया कि एनएचएआई द्वारा लगभग ₹28,000 करोड़ की लागत से 948 किलोमीटर नए राष्ट्रीय राजमार्ग विकसित किए जाएंगे। इससे प्रदेश की अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स क्षमता और औद्योगिक निवेश को मजबूती मिलेगी।

    मंत्री सिंह ने 1,770 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और मेगा कॉरिडोर परियोजनाओं को प्रदेश की आर्थिक धारा को गति देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि ग्वालियर–नागपुर, इंदौर–भोपाल, जबलपुर–भोपाल जैसे रणनीतिक कॉरिडोर प्रदेश के विकास को नई दिशा देंगे। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहाँ एनएचएआई के सहयोग से टाइगर कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना सड़क विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का अनूठा उदाहरण बनेगी।

    टाइगर कॉरिडोर की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए मंत्री सिंह ने बताया कि यह देश का पहला राज्य-स्तरीय मल्टी-नेशनल पार्क टाइगर कॉरिडोर है, जिसका विकास एनएचएआई और पीडब्लूडी के समन्वय से किया जा रहा है। इसमें वन क्षेत्रों में अंडरपास, स्लो-ट्रैफिक ज़ोन और वाइल्डलाइफ-सेफ डिज़ाइन को अपनाया जाएगा, जिससे टाइगर मूवमेंट, पर्यटन और स्थानीय कनेक्टिविटी के बीच संतुलन सुनिश्चित होगा। साथ ही इससे इको-टूरिज़्म और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।

    सड़क विकास निगम की परियोजनाओं पर चर्चा करते हुए मंत्री सिंह ने बताया कि अगले तीन वर्षों में HAM मॉडल के अंतर्गत अनेक परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं। इनमें अगले छह महीनों में ही 285 किलोमीटर लंबाई की पाँच प्रमुख परियोजनाएँ शामिल हैं, जिनकी कुल अनुमानित लागत ₹15,000 करोड़ है। ये परियोजनाएँ क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स, कृषि और व्यापार को नई गति प्रदान करेंगी।

    ग्रामीण कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देते हुए मंत्री सिंह ने कहा कि आने वाले तीन वर्षों में 11,310 किलोमीटर लंबी 822 नई ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया जाएगा, ताकि प्रदेश का हर गाँव राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों से जुड़ सके।

    मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सरकार का संकल्प गुणवत्तापूर्ण निर्माण, समयबद्धता और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है। लोक निर्माण विभाग की यह दूरदर्शी कार्ययोजना मध्यप्रदेश में गति, सुरक्षा और समृद्धि के नए युग की नींव रखेगी।

     

  • तकनीकी क्षमता संवर्धन के लिए 36 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदी गई फॉरेंसिक वैन

    • मोबाईल फॉरेसिंक वैन से अपराध अनुसंधान तकनीकी होगी सुदृढ़ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
    • मुख्यमंत्री ने मोबाईल फॉरेंसिक वैन को झंडी दिखाकर किया रवाना
    • तकनीकी क्षमता संवर्धन के लिए 36 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदी गई फॉरेंसिक वैन

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में अपराध अनुसंधान, साक्ष्य संकलन एवं वैज्ञानिक विवेचना की क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए तैयार की गई मोबाइल फॉरेंसिक वैनों को पुलिस मुख्यालय भोपाल से झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि मोबाईल फॉरेसिंक वैन मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में सीन ऑफ क्राइम के इनवेस्टीगेशन में अत्याधिक कारगर साबित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में पुलिस विभाग द्वारा की गई यह पहल फॉरेंसिक-आधारित, त्वरित और सटीक विवेचना को बढ़ावा देगी, जिससे अपराधों के शीघ्र खुलासे, दोषसिद्धि दर में वृद्धि और नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा और सुदृढ़ होगा।

    मध्यप्रदेश पुलिस को कुल 57 मोबाईल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनकी लागत 36 करोड़ 94 लाख 17 हजार 969 रुपए है। राशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदाय की गई है। इनमें से 14 मोबाईल फॉरेंसिक वैन 16 दिसंबर 2025 को प्राप्त हुई है, जिन्हें रवाना किया गया है। शेष मोबाईल फॉरेसिंक वैन भी शीघ्र ही जिलों को उपलब्ध कराई जाएंगी।

    मोबाईल फॉरेंसिक वैन अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हैं, जिनमें स्टीरियो माइक्रोस्कोप, वेइंग बैलेंस, डीएसएलआर कैमरा, मिनी फ्रिज, एलईडी टीवी स्क्रीन, थर्मल प्रिंटर, बॉडी-वॉर्न कैमरा सहित आवश्यक उपकरण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, वैनों में जांच किट, अपराध स्थल सुरक्षा किट, फिंगर प्रिंट, रक्त व बाल पहचान, हाई-इंटेंसिटी फॉरेंसिक लाइट सोर्स, पैर व टायर निशान, आगजनी, साक्ष्य पैकिंग, बुलेट होल, गनशॉट अवशेष, नशीले पदार्थ, विस्फोटक पहचान तथा डीएनए कलेक्शन एवं चेन ऑफ कस्टडी से संबंधित किट भी उपलब्ध हैं।

     

  • सीएम डॉ. यादव और बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह की मुलाकात

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह ने की सौजन्य भेंट

    प्रदेश की खेल प्रोत्साहन गतिविधियों के अध्ययन के लिए बिहार का दल मध्यप्रदेश भ्रमण पर

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह तथा बिहार के खेल महानिदेशक श्री रविंद्रन शंकरन ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्रम तथा स्मृति चिन्ह के रूप में धातु शिल्प के श्री राम दरबार भेंट कर बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह का अभिवादन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सुश्री सिंह ने बोधि वृक्ष की प्रतिकृति तथा अंगवस्त्रम भेंट किया। इस अवसर पर प्रदेश के खेल संचालक श्री राकेश गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भेंट के दौरान मध्यप्रदेश में खेलों के प्रोत्साहन के लिए संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। मध्यप्रदेश में खेल गतिविधियों के विस्तार और खिलाड़ियों की क्षमता – प्रतिभा निखारने तथा राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दृष्टिगत उनके सघन प्रशिक्षण के लिए संचालित गतिविधियों के अध्ययन के लिए बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह के नेतृत्व में बिहार का 5 सदस्यीय दल प्रदेश के दौरे पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के पहले बिहार के दल ने शूटिंग अकादमी, घुड़सवारी अकादमी, वॉटर स्पोर्ट्स सेंटर, टी.टी. नगर स्टेडियम, स्पोर्ट्स साइंस सेंटर आदि का भ्रमण किया। दल ने प्रदेश में ग्राम पंचायत, विकासखंड और जिला स्तर पर संचालित खेल प्रोत्साहन गतिविधियों के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।

     

  • बुरहानपुर में मेडिकल टीम ने किया कमाल, महिला के पेट से निकाला विशाल 8 किलो ट्यूमर

    बुरहानपुर
     स्व नंदकुमार सिंह चौहान जिला अस्पताल में डॉक्टरों को एक जटिल सर्जरी में सफलता मिली है. नागझीरी निवासी 57 वर्षीय महिला मरीज उषा बाई पति संतोष की आठ किलो वजन की बड़ी गठान डॉ. दर्पण टोके के नेतृत्व में सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने निकाली है. इतनी बड़ी और जटिल गठान के कारण मरीज को दर्द सहना पड़ता था, इससे कई बार महिला की तबीयत भी बिगड़ जाती थी.

    जांच में सामने आई थी ट्यूमर की बात
    महिला ने पिछले दिनों जिला अस्पताल में जांच कराई थी, इस जांच में बड़ी गठान की बात सामने आई. इसके बाद डॉक्टरों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद मरीज को सुरक्षित उपचार प्रदान किया, उन्होंने सफलतापूर्वक ऑपरेशन को अंजाम दिया. यह ऑपरेशन सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ. दर्पण टोके के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया. डॉक्टरों द्वारा सर्जरी के दौरान विशेष सावधानियां बरती गई, ताकि मरीज को किसी भी प्रकार की जटिलता से बचा लिया.

    डॉक्टरों ने किया महिला का जटिल ऑपरेशन
    एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. श्वेता शिवहरे ने बेहोशी की प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से संभाला, जिससे ऑपरेशन बिना किसी बाधा के पूरा हो सका. अब महिला मरीज की हालत में सुधार हो रहा है. सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति सामान्य बताई जा रही है और वह अब डॉक्टरों की निगरानी में स्वस्थ हो रही हैं, जिला अस्पताल के लिए यह सर्जरी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जो यहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञता को दर्शाती है.

    इस सफलता पर सीएमएचओ डॉ आरके वर्मा और सिविल सर्जन डॉ प्रदीप मोजेस ने इस ऑपरेशन में शामिल डॉक्टर व नर्सिंग टीम की सराहना की है, उन्होंने सभी को बधाई दी और भविष्य में भी इसी प्रकार जनसेवा के लिए कार्य करते रहने की शुभकामनाएं दी हैं.

    सिविल सर्जन डॉ प्रदीप मोजेस ने बताया कि, ''इस सफल सर्जरी में नर्सिंग ऑफिसर निलिमा नेलसन और गायत्री ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके साथ ही अभय सिंह, हिमांशु एवं अन्य अस्पताल कर्मचारियों ने भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सहयोग प्रदान किया. टीमवर्क और समन्वय का अच्छा उदाहरण पेश किया, जिसने इस जटिल ऑपरेशन को संभव बनाया.''

    महिला को मिली नई जिंदगी
    सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉ दर्पण टोके ने बताया कि, ''महिला के पेट में दर्द होता था, इस दर्द स्व लंबे समय से जूझ रही थी, पिछले दिनों उसने जिला अस्पताल में जांच कराई, हमारी टीम ने ऑपरेशन की सलाह दी, इसके बाद उसके परिजन राजी हो गए. मंगलवार को ऑपरेशन किया, इस ऑपरेशन का मैंने नेतृत्व किया, टीम को सफलता मिली है, महिला को इस जटिल समस्या से निजात दिलाई है.''

  • केंद्रीय संचार ब्यूरो का दफ्तर बंद, कर्मचारियों के अभाव में कामकाज रुका

    केंद्रीय संचार ब्यूरो का कर्मचारी विहीन दफ्तर बंद 

     भोपाल
       केन्द्रीय संचार ब्यूरो, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालयों का केन्द्र में  कांग्रेस की सरकार थी तब पूरे भारत में 1955 में स्थापित कर, जनहित में आमजनों के विकास को देखते हुए संचालित किया गया था।

    मध्यप्रदेश में बालाघाट, छिंदवाडा, मंदसौर, झाबूआ, छतरपुर, रीवा, इन्दौर, ग्वालियर, शहडोल, मण्डला, सागर, जबलपुर इकाईयां एवं भोपाल में प्रादेशिक कार्यालय संचालित हो रहा है, जो पूरे मध्यप्रदेश में 55 जिलों में भारत सरकार व राज्य सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यमों से सुदूर क्षेत्रों के आमजन के बीच जाकर समस्याओं को सुनकर समाधान व उचित मार्ग दर्शन कर जनजागरूकता किया जा रहा था, जो अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण विभाग होने के कारण सरकार और आम जनों को जोड़ने का सशक्त माध्यम है।

    केन्द्र सरकार के कूटनीतियों के कारण आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के उक्त कार्यालयों में से मण्डला बालाघाट, छिंदवाडा, छत्तरपुर, शहडोल, मंदसौर एवं सागर क्षेत्रीय कार्यालय / इकाईयों में विगत 17 दिवस से ताला लगा हुआ है जानकारी मिला है कि कार्यालय बंद कर दिया गया है। जो आम जनों के लिए बहुत ही दुखद गंभीर विषय है. उक्त जिलों के कार्यालय के बंद होने से जो कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में आते है. आज भी पिछड़ा है जन जागरूता की कमी है, इन कार्यालयों को बंद न करते हुए यथावत रखें। ताकि आमजन तक सरकार के महत्वपूर्व योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जा सके। यदि केन्द्र सरकार अपने कूटनीतियों कारण आमजन के हित के लिए सुधार नहीं करती है तो आंदोलन के लिए घेराव करना पड सकता है 2029 चुनाव में भी असर पड़ेगा जो देखा जा सकता है ।

    क्षेत्रीय कार्यालय- गुलाबरा स्थित कार्यालय के अतिरिक्त प्रभार में बेतुल एवं हरदा जिले है। चूंकि छिन्दवाड़ा आदिवासी बहुल्य क्षेत्र है केन्द्र सरकार व राज्य सरकार के योजनाओं से आमजनों को जोडने से विभाग बंद होने से विभाग से मिलने वाले लाभों  से  वंचित रहेंगे ।

  • स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार का संदेश: राजधानी में पांच दिवसीय मेगा हेल्थ कैंप का आगाज

    रायपुर

    राजधानी रायपुर स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज के परिसर में आज मेगा हेल्थ कैंप का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुभारंभ किया. पांच दिनों तक चलने वाले इस मेगा कैंप में 45 से अधिक अस्पताल और देशभर के सुपरस्पेशलिस्ट कैंप से जुड़े हैं.

    मेगा कैंप का आयोजन कर रहे विधायक राजेश मूणत ने कहा कि यह स्वास्थ्य शिविर राजधानी रायपुर को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ने वाला ऐतिहासिक आयोजन होगा. उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन के सभी संबंधित विभाग इस सेवा अभियान में मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान कर रहे हैं, तथा रायपुर की अनेक सामाजिक संस्थाएं भी सक्रिय रूप से सहभागी हैं. भाजपा के सेवाभावी कार्यकर्ता शिविर में मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी संभालेंगे.

    उन्होंने कहा कि दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद सहित देशभर के सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर इस शिविर में सेवाएं देंगे, ताकि किसी भी व्यक्ति को बड़े महानगरों की यात्रा किए बिना उच्चस्तरीय परामर्श और उपचार मिल सके. उन्होंने यह भी बताया कि मेगा हेल्थ कैंप में श्री विनय मित्र मंडल के माध्यम से दिव्यांगों को कृत्रिम जयपुर पैर, हाथ कटे विकलांगों को कृत्रिम हाथ बनाकर दिए जाएंगे, साथ ही श्रवण यंत्र, ट्राइसिकल, वैशाखी भी प्रदान की जाएगी.

    मूणत ने 45 से अधिक सहयोगी अस्पतालों की सूची प्रस्तुत करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर अस्पतालों का एक मंच पर आना अपने आप में एक अनूठी मिसाल है. कैंप में कैंसर, हृदय रोग, नेत्र रोग, स्त्री रोग, अस्थि रोग, बांझपन उपचार, आयुर्वेद और अन्य विधाओं से जुड़े डॉक्टरों की विस्तृत टीम निःशुल्क जांच, परामर्श, उपचार और दवाइयों का वितरण करेगी.

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ने कहा कि मेघा हेल्थ कैंप के लिए राजेश मूणत और पूरी टीम को बधाई देता हूं. छठवीं बार ये कैंप हमने किया है, छत्तीसगढ़ को बने 25 साल हुआ है. छत्तीसगढ़ ने हर क्षेत्र में विकास किया है. हर क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने काम किया है. छत्तीसगढ़ में 15 मेडिकल कॉलेज हो गए हैं. स्वास्थ्य के क्षेत्र में 2 वर्ष में बहुत विकास हुआ है.

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि विधायक राजेश मूणत की पहचान पूरे छत्तीसगढ़ में बन गई है. इसे मैं राष्ट्रीय स्तर का हेल्थ कैंप कह सकता हूं. करीब 100 से ज्यादा चिकित्सक लगे हैं. ये शिविर इलाज से निदान तक पहुंचाने के लिए है. इस शिविर की खासियत है कि 40 से 50 समाजसेवी संगठनों के साथ डाक्टरों की टीम, छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ चिकित्सक यहां मौजूद हैं. इससे पहले मैने कभी नहीं देखा था.

    स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रायपुर और पूरे प्रदेश के लिए आज का पवित्र है. एक तरफ बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती है, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य का महाकुंभ लग रहा है. यहां 300 मीटर तक हॉस्पिटल ही हॉस्पिटल नजर आ रहा है. हमारा उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ में लोग स्वस्थ हों. मैं राजेश मूणत और उनकी टीम की प्रशंसा करता हूं. जांच के बाद इलाज की भी व्यवस्था होगी. आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराएंगे. मुख्यमंत्री स्वास्थ्य के प्रति सजग है.

    आयुर्वेदिक कॉलेज में आयोजित मेगा हेल्थ कैंप के उद्घघाटन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के अलावा मंत्री केदार कश्यप, मंत्री गुरु खुशवंत साहब सहित कई विधायक और जनप्रतिनिधि शामिल हुए.

  • राजा रघुवंशी हत्या केस: आरोपी पत्नी ने मांगी जमानत, परिवार ने कोर्ट में आपत्ति दर्ज कराई

    इंदौर 

    अपने पति की हत्या के आरोप में शिलांग की जेल में बंद सोनम रघुवंशी ने कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी लगाई है। सोनम ने अपने प्रेमी राज व उसके तीन दोस्तों के साथ सात माह पहले राजा की हत्या कर शव को खाई में फेंक दिया था। सोनम की जमानत पर राजा रघुवंशी के परिवार ने आपत्ति ली है। उनका कहना है कि इस केस में गवाहों के बयान चल रहे है। यदि सोनम को जमानत दी जाती है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है।

    कोर्ट ने जमानत पर फैसला नहीं लिया है और अगले माह इस मामले में सुनवाई होगी। राजा के भाई विपिन ने कहा कि सोनम एक शातिर महिला है। उसने राजा की हत्या की योजना बनाई थी और हनीमून के बहाने शिलांग ले जाकर हत्या की थी। 

    देशभर में चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड केस में कोर्ट ने ट्रायल शुरू कर दिया है। पहले राजा के भाई विपिन के तीन दिन तक कोर्ट ने बयान लिए और उसने राजा व सोनम की गुमशुदगी, सोनम के बर्ताव, शादी के बाद बाहर जाने की प्लानिंग सहित अन्य मामलों की जानकारी ली थी। इसके अलावा सोनम की दो सहेलियों के बयान भी कोर्ट में वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए हुए है।

    इस केस में आरोपियों का साथ देने वाले प्राॅपर्टी ब्रोकर, सुरक्षा गार्ड और फ्लैट मालिक फिलहाल जमानत पर बाहर है। शिलांग पुलिस तीनों आरोपियों के खिलाफ अगल से चार्जशीट पेश करेगी। तीनों ने सोनम के फ्लैट से सबूत मिटाने, उसका बैग जलाने और पिस्तौल नाले में फेंकने का काम किया था। राजा के भाई विपिन ने यह आरोप लगाया कि सोनम का भाई गोविंद आरोपियों की मदद कर रहा है,जबकि हत्या के बाद वह हमारे परिवार से मिला था और कहा था कि वह सोनम को सजा दिलवाने में मदद करेगा।

  • सोशल मीडिया पोस्ट के चलते राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता शिक्षक सुनील मेश्राम पर कार्रवाई

    बालाघाट 

    सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी एक शिक्षक को भारी पड़ गई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी करने के आरोप में बालाघाट जिले के एक उच्च श्रेणी शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर मृणाल मीणा के निर्देश पर यह कार्रवाई आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर द्वारा की गई। खास बात यह है कि सुनील मेश्राम राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक हैं। ऐसे में निलंबन की कार्रवाई को लेकर शिक्षा विभाग और जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

    परसवाड़ा के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक सुनील मेश्राम पर आरोप है कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से भारत सरकार और राज्य शासन के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी साझा की थी। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना।

    नोटिस के बाद भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब
    प्रशासन की ओर से चार दिसंबर को शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके जवाब में 8 दिसंबर को मेश्राम ने अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, लेकिन विभागीय स्तर पर इसे स्वीकार नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षक के आचरण से शासन की छवि प्रभावित हुई है, जो सेवा नियमों के विरुद्ध है।

    सेवा नियमों के तहत निलंबन
    पूरे प्रकरण के बाद मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1966 के नियम 9 के अंतर्गत शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

    शिक्षक ने दी सफाई
    निलंबन के बाद सुनील मेश्राम ने कहा कि संबंधित पोस्ट किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़ी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें खेद है। मेश्राम का दावा है कि वह पोस्ट उनकी नहीं थी और उसे उनके फेसबुक अकाउंट से हटा दिया गया है। 

  • खरीदी केंद्रों में धान का अंबार, मिलर उठाव नहीं कर रहे, खरीदी केंद्रों पर संकट

    गरियाबंद

    देवभोग के 10 और गोहरापदर ब्रांच के 17 समेत कुल 27 खरीदी केंद्रों में बफर लिमिट से ढाई गुना ज्यादा धान खरीदी हो गई. वहीं दूसरी ओर मिलरों भी धान उठाने से कतरा रहे हैं. स्थिति को देखते हुए शाखा प्रबंधकों ने उच्च कार्यालय को पत्र लिखकर उठाव की मांग करते हुए धान खरीदी बंद होने की आशंकाओं से अवगत करा दिया है.

    धान उठाव के लिए जिला विपणन अधिकारी को भेजे गए मांग पत्र के मुताबिक देवभोग के 10 खरीदी केंद्र में खरीदी की बफर लिमिट 1 लाख 2000 तय थी, पर यहां 2 लाख 41546 क्विंटल धान की खरीदी हो चुकी है. इसी तरह गोहरापदर ब्रांच के 17 खरीदी केंद्र की बफर लिमिट 1 लाख 69200 क्विंटल की है, लेकिन यहां 3 लाख 45214 क्विंटल धान की खरीदी हो गई है. केंद्रों में अब रखरखाव की समस्या आ रही है.

    देवभोग केंद्र के प्राधिकृत अधिकारी कुंज बिहारी बेहरा ने कहा कि तय लिमिट से कई गुना ज्यादा खरीदी होने से धान की रख-रखाव में समस्या आ रही है. खरीदी सुचारु रूप से चलता रहे उसके लिए उठाव की नितान्त आवश्यकता है. इस हफ्ते उठाव नहीं हुआ तो आने वाले सप्ताह से कई केंद्रों में खरीदी बंद करने की नौबत आ जाएगी.

    देवभोग बीएम अमरसिंह ठाकुर और गोहरापदर बीएम दुष्यन्त इंग्ले ने धान की मात्रा बफर लिमिट से पार होने की पुष्टि किया है. दोनों ब्रांच अफसरों ने बताया कि जिला विपणन और अपने नोडल को पत्र लिख कर समस्या से अवगत कराने की बात कही है.

    करोड़ों का भुगतान अटका, मिलर भी पीछे हट रहे

    संग्रहण केंद्र के अलावा डीओ के जरिए मिलरों से उठाव होता था. जिले में लगभग 60 मिलर थे, इनमें से अब तक 24 ने अनुबंध कराया. 22 ऐसे हैं, जिन्हें अपात्र श्रेणी में रख मॉड्यूल से ही लॉक कर दिया गया है. इसके अलावा फोर्टीफाइड चावल की राशि, पिछले साल हुए परिवहन चार्ज, कस्टम मिलिंग की बिलिंग का करोड़ों रुपए का भुगतान शासन से लंबित है, इसलिए कई मिलर धान उठाव के लिए अनुबंध करने में रुचि नहीं ले रहे हैं.

    सोमवार से शुरू होगी उठाव – डीएमओ

    जिला विपणन अधिकारी किशोर चंद्रा ने कहा कि ट्रांसपोर्टर से अनुबंध के बाद राज्य कमेटी के एप्रूवल की प्रकिया हो रही थी, लेकिन अब पूरी हो गई है. कुछ जगहों पर उठाव शुरू हो चुकी थी. सोमवार से देवभोग क्षेत्र से उठाव करेंगे. मिलरो की संख्या कम है. मौजूद 56 में से 24 ने ही अनुबंध कराया है. ऐसे में पड़ोसी जिले के मिलर से भी जल्द अनुबंध कराया जाएगा, ताकि उठाव प्रकिया तेजी से बढ़ सके. गरियाबंद में कुछ मिलर्स के भौतिक सत्यापन के दौरान कस्टम मिलिंग के लिए दिए गए धान की मात्रा में कमी पाई गई थी, ऐसे में वे अपात्र की श्रेणी में हैं.

  • राज्यपाल डेका ने संत बाबा गुरु घासीदास जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की

    रायपुर,

    राज्यपाल रमेन डेका ने संत बाबा गुरु घासीदास जी की जयंती के अवसर पर लोकभवन में गुरु घासीदास जी के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

    राज्यपाल डेका ने कहा कि गुरु घासीदास जी ने मानव समाज को प्रेम और सद्भावना का संदेश दिया और समाज में व्याप्त भेदभाव एवं असमानता को दूर कर समतामूलक समाज स्थापित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास जी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को एकता और सद्भावना का मार्ग दिखाते हैं।

    इस अवसर पर लोकभवन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी संत बाबा गुरु घासीदास के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

  • भक्तों के लिए आसान हुआ महाकाल दर्शन, मंदिर में ई-वालेट और ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा

    उज्जैन
    विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में देशभर से आने वाले भक्त कैशलेस दान कर रहे हैं। मंदिर समिति ने विभिन्न दान काउंटर तथा मंदिर परिसर में बारकोड लगाए हैं। इनके माध्यम से भक्त बिना किसी परेशानी के दान कर रहे हैं। मंदिर समिति जल्द ही लड्डू प्रसाद काउंटर पर भी कैशलेस सुविधा प्रदान करने वाली है।

    मंदिर समिति महाकाल दर्शन करने आने वाले भक्तों को पूरी तरह कैशलेस सुविधा प्रदान करना चाहती है। भक्तों को भस्म आरती की ऑनलाइन बुकिंग तथा शीघ्र दर्शन टिकट में पहले से ही ई-वालेट की सुविधा दी जा रही है। लड्डू प्रसाद काउंटर, महाकालेश्वर व हरसिद्धि धर्मशाला, अन्न क्षेत्र तथा दान काउंटरों पर कैशलेस सुविधा प्रदान करने की शुरुआत हो गई है। मंदिर के दान काउंटर व परिसर में बारकोड लगाए गए हैं। देशभर से आने वाले दर्शनार्थी मंदिर के किसी भी कोने से बारकोड स्कैन कर दान कर सकते हैं।

    नकद व कैशलेस दोनों सुविधा रहेगी

    महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद काउंटरों पर नगद व कैशलेस दोनों प्रकार की सुविधा उपलब्ध रहेगी। वजह कई बार नेटवर्क समस्या के चलते ई-पैमेंट में परेशानी आती है। कई बार तकनीकी खामी होने से इसमें समय अधिक लगता है। ऐसे में दर्शनार्थियों की सुविधा व व्यवस्था की दृष्टी से नकद भुगतान की सुविधा भी अनिवार्य है।

  • मध्य प्रदेश में मादक पदार्थ तस्करी का भंडाफोड़, 12 किलो MD ड्रग्स और आरोपी की गिरफ्तारी

     नीमच
     केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो मध्य प्रदेश की टीम ने एक कार से 12 किलो एमडी ड्रग पकड़ी है। एक आरोपित को मौके से गिरफ्तार कर कार व एमडी ड्रग जब्त की है। मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है। यह कार्रवाई महू-नसीराबादहाई-वे पर ढोढर के पास टोल टैक्स पर 16 दिसंबर की रात की गई है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो मध्य प्रदेश की टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रतलाम-मंदसौर की ओर से एक गुजरात की ओर मादक पदार्थ की तस्करी की जाने वाली है।

    इस सूचना के बाद टीम ने नाकाबंदी और सर्चिंग करते हुए टोल टैक्स पर चित्तौड़गढ़ पासिंग एक स्विफ्ट कार को रोका और तलाशी ली तो कार से 10 पैकेट में भरी 12 किलो 55 ग्राम एमडी ड्रग मिली। इस पर कार और एमडी ड्रग जब्त कर कार में सवार एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। आरोपित से एमडी ड्रग लाने और ले जाने के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

     

  • भोपाल में नाले ढंकने के प्रोजेक्ट में अनियमितता, 16 हजार किलो लोहा और 13 लाख का भुगतान

    भोपाल
     भोपाल नगर निगम में एक बार फिर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। इस बार आरोप नाले की ड्रेन कवरिंग के काम में भारी अनियमितताओं को लेकर हैं, जहां महज 240 मीटर लंबे नाले पर 16 हजार किलोग्राम से अधिक लोहे का इस्तेमाल किया गया है। इस संदिग्ध माप और बिलिंग के आधार पर करीब 13.34 लाख रुपये का पेमेंट हुआ, जिसने निगम के रिकॉर्ड और इंजीनियरिंग कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    यह मामला गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के जोन-13 अंतर्गत वार्ड 53 का है। कृष्णा आर्केड और वैष्णव कांप्लेक्स, भेल संगम कॉलोनी क्षेत्र में स्थित नाला लगभग तीन फीट चौड़ा और 240 मीटर लंबा है। इतनी सीमित संरचना के बावजूद माप पुस्तिका में 16 हजार किलोग्राम लोहे के उपयोग का उल्लेख किया गया है।

    काम का वर्क ऑर्डर क्रमांक-2400032045 सिविल विभाग द्वारा 25 जून 2025 को जारी किया गया था और निर्माण कार्य हाल ही में पूरा बताया गया है। रिकॉर्ड के अनुसार इस कार्य की माप और सामग्री का विवरण प्रभारी सहायक यंत्री निशांत तिवारी और उपयंत्री रूपांकन वर्मा द्वारा दर्ज किया गया, लेकिन दर्ज की गई लोहे की मात्रा को लेकर अब घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
    कोर कटिंग से खुलेगा गायब लोहे का राज

    मामले की गंभीरता को देखते हुए निगमायुक्त संस्कृति जैन ने आरसीसी ढांचे की कोर कटिंग कराए जाने के आदेश दिए हैं। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से यह जांचना है कि वास्तव में निर्माण में इतनी अधिक मात्रा में लोहा इस्तेमाल हुआ या नहीं। साथ ही जांच दल कथित गायब लोहे की भी पड़ताल कर रहा है।
    ईई की भूमिका पर भी सवाल

    प्रभारी कार्यपालन यंत्री (ईई) बृजेश कौशल पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने निर्माण कार्य की न तो नियमित निगरानी की और न ही एक बार भी मौके पर जाकर निरीक्षण किया। 5 दिसंबर को नोटिस और 8 दिसंबर को साइट निरीक्षण के बावजूद कोर कटिंग रिपोर्ट दबाए रखने के आरोप हैं।
    रिपोर्ट सौंप दी गई

    कोर कटिंग रिपोर्ट समय पर तैयार कर ईई को सौंप दी गई थी। – निशांत तिवारी, सहायक यंत्री ननि
    रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई

    ईई ब्रजेश कौशल की रिपोर्ट अभी तक प्राप्त नहीं हुई है और आयुक्त के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। -सुबोध जैन, अधीक्षण यंत्री, नगर निगम

  • सुकमा में पुनर्वास नीति का असर, माओवादियों को मिला सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन

    रायपुर 
     छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील और दूरदर्शी नक्सल पुनर्वास नीति ज़मीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव का सशक्त उदाहरण बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देशों एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में सुकमा जिले के नक्सल पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई।

    आत्मसमर्पण करने वाल 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट

    इस क्रम में 75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन तथा 25 युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट वितरित की गई। यह कार्यक्रम कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव एवं पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

    75 आत्मसमर्पित नक्सलियों को अत्याधुनिक 5G स्मार्टफोन

    कार्यक्रम के दौरान 75 पुनर्वासित युवाओं को सैमसंग गैलेक्सी M06 5G स्मार्टफोन प्रदान किए गए, जिनमें 50 मेगापिक्सल डुअल कैमरा तथा 5000 mAh फास्ट-चार्जिंग बैटरी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन स्मार्टफोनों के माध्यम से युवा अब डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों, सरकारी योजनाओं तथा देश-दुनिया की जानकारी से सहजता से जुड़ सकेंगे।

    इसके साथ ही 25 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट प्रदान कर निर्माण क्षेत्र में रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पहल प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए कुशल श्रमशक्ति तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    आत्मसमर्पण करने वाले लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने संकल्पित

    जिला प्रशासन ने बताया कि नक्सल पुनर्वास को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रखते हुए इसे आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक समावेशन से जोड़ा जा रहा है। 5G स्मार्टफोन के माध्यम से पुनर्वासित युवा अब ऑनलाइन प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीकों, छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार के नए अवसरों को समझने और अपनाने में सक्षम होंगे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लोगों स्वरोजगार के नए अवसरों उपलब्ध कराने सरकार संकल्पित है।

    पुनर्वासित युवाओं ने साझा किए अनुभव

    पोलमपल्ली निवासी पुनर्वासित पोड़ियम भीमा ने बताया कि वे लगभग 30 वर्षों तक डीवीसी सदस्य के रूप में संगठन से जुड़े रहे। पुनर्वास के बाद उन्हें बेहतर आवास, भोजन और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। उन्होंने बताया कि वे राजमिस्त्री के साथ-साथ इलेक्ट्रीशियन और मैकेनिक का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं।

    पुवर्ती निवासी मुचाकी रनवती ने बताया कि वे 24 वर्षों तक एसीएम सदस्य के रूप में नक्सल संगठन से जुड़ी रहीं। पुनर्वास के बाद उन्होंने सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्तमान में राजमिस्त्री प्रशिक्षण ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने परिजनों से मिलने का अवसर मिला तथा बस्तर ओलंपिक की संभागस्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया।

    डब्बमरका, सुकमा निवासी गंगा वेट्टी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मोबाइल और मेसन किट मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जंगल के जीवन की तुलना में वर्तमान जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक है। शिविर लगाकर उनका आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड एवं जॉब कार्ड बनाया गया तथा शासन की सभी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल रहा है।

    सुकमा में की गई यह पहल इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ शासन की नीति केवल नक्सलवाद से मुकाबले तक सीमित नहीं है, बल्कि भटके हुए युवाओं को विश्वास, अवसर और सम्मान के साथ नया जीवन देने की ठोस कोशिश भी है। यह मॉडल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रख रहा है। इस अवसर पर जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

  • ‘मनखे-मनखे एक समान’ का विचार आज भी प्रासंगिक: गुरु घासीदास जयंती पर CM विष्णुदेव साय

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक बाबा गुरु घासीदास की 18 दिसम्बर को जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास ने अपने दिव्य उपदेशों और आचरण से समाज को सत्य, अहिंसा, समानता और सामाजिक सद्भाव के मार्ग पर अग्रसर किया. उनका अमर संदेश “मनखे-मनखे एक समान” केवल एक विचार नहीं, बल्कि मानवता को जोड़ने वाला ऐसा जीवन-दर्शन है, जो भेदभाव रहित, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज की मजबूत नींव रखता है.

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा गुरु घासीदास ने छत्तीसगढ़ की धरती पर सामाजिक एवं आध्यात्मिक जागरण की सुदृढ़ आधारशिला रखी. उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, असमानताओं और अंधविश्वासों के विरुद्ध चेतना जगाते हुए नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की और जनमानस को आत्मसम्मान एवं मानवीय गरिमा का बोध कराया.

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाबा का जीवन-दर्शन करुणा, सहिष्णुता, प्रेम, सत्यनिष्ठा और परस्पर सम्मान जैसे मानवीय गुणों के विकास का मार्गदर्शक है. उनके विचार और आदर्श समय की कसौटी पर खरे उतरते हुए आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और वर्तमान समाज के लिए प्रेरणा का सशक्त स्रोत बने हुए हैं.

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे बाबा गुरु घासीदास के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा सामाजिक समरसता, शांति और सौहार्द के साथ एक समृद्ध एवं समावेशी छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं.

  • हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर कड़ा रुख अपनाया, सिंगरौली मुआवजे पर भी सख्त टिप्पणी

    जबलपुर 
     मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एनजीटी कमेटी की अनुमति बिना प्रदेश में एक भी पेड़ नहीं काटने के आदेश को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने दिनों पेड़ों की कटाई को लेकर सख्त है और कई मामलों में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रह है. इसी बीच स्ट्रैटटेक मिनरल रिसोर्सेज की एक याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें धिरौली कोल ब्लॉक के लिए 6 लाख पेड़ों की कटाई किए जाने का प्रस्ताव है. इस कोल ब्लॉक के लिए अबतक 20 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं.

    6 लाख पेड़ काटे जाने का प्रस्ताव

    स्ट्रैटटेक मिनरल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड के धिरौली कोल ब्लॉक मामले में कंपनी की ओर से ये याचिका दायर की गई कि पेड़ कटाई के संबंध में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न हो. याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया कि इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 20 हजार पेड़ काटे गए हैं, वहीं 6 लाख पेड़ काटने का प्रस्ताव है. कंपनी की ओर से एक आवेदन पेश कर दलील दी गई कि ये कोल ब्लॉक वन क्षेत्र में आता है और ऐसे में कंपनी के उस प्रोजेक्ट में हस्तक्षेप नहीं किया जाए.

    चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा कि जब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी और ट्री ऑफिसर की अनुमति के आधार पर ही पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है, तो इस व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता। यदि किसी पक्षकार को इससे आपत्ति या परेशानी है, तो वह एनजीटी के समक्ष अपनी बात रखे। कोर्ट ने अगली सुनवाई 14 जनवरी को तय करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    सिंगरौली में 6 लाख पेड़ों की कटाई का मुद्दा भी उठा

    बुधवार की सुनवाई में सिंगरौली के घिरौली कोल ब्लॉक में करीब 6 लाख पेड़ों की कटाई का मामला भी उठाया गया। यह याचिका बैढन जनपद पंचायत की अध्यक्ष सविता सिंह द्वारा दायर की गई है। कंपनी की ओर से कहा गया कि प्रस्तावित कटाई के बदले हर पेड़ का मुआवजा दिया जाएगा।

    इस पर चीफ जस्टिस की बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मुआवजे की राशि सरकार के खजाने में जाएगी, लेकिन उन पेड़ों के कटने से लोगों को मिलने वाली ऑक्सीजन का जिम्मेदार कौन होगा—यह बड़ा सवाल है।

    सरकार के ट्रांसलोकेशन दावे पर सवाल

    सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि काटे गए पेड़ों को भोपाल के चंदनपुरा क्षेत्र में 9.71 हेक्टेयर भूमि पर ट्रांसलोकेट किया गया है। इस पर बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो किया गया है, वह ट्रांसलोकेशन नहीं है।

    भोजपुर रोड और अन्य मामलों पर लिया गया था संज्ञान

    दरअसल, रायसेन जिले के भोजपुर मार्ग पर स्थित 448 पेड़ों की कटाई के मामले में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में सुना था। इसके अलावा भोपाल में विधायकों के आवास निर्माण के लिए 244 पेड़ और रेलवे परियोजना के लिए करीब 8000 पेड़ों की कटाई का मामला भी सामने आया था।

    चीफ जस्टिस की बेंच ने पहले 20 नवंबर को भोपाल में और फिर 26 नवंबर को पूरे मध्यप्रदेश में पेड़ों की कटाई पर सशर्त रोक लगा दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल एनजीटी की एक्सपर्ट कमेटी और ट्री ऑफिसर की अनुमति से ही पेड़ों की कटाई की जा सकती है।

    पेड़ कटाई के कई मामलों में हाईकोर्ट सख्त

    इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पेड़ कटाई के कई मामलों सुनवाई कर रहा है. राजधानी भोपाल के पास भोजपुर-बैरसिया सड़क निर्माण के लिए बिना अनुमति के ही सैकड़ों पेड़ काटने के मामले में हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई की है. वहीं, पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अखबार में प्रकाशित उस खबर पर भी संज्ञान लिया था, जिसमें सागर कलेक्ट्रेट में एक हजार पेड़ काटने का खुलासा किया गया था. कलेक्टर कार्यालय में दो अतिरिक्त कक्ष बनाने के लिए सिर्फ दस घंटे में ये पेड़ काट दिए गए थे.

    इसके अलावा भोपाल में एमएलए क्वार्टर्स निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट में कितने पेड़ काटे गए हैं और कितने और काटे जाने इस संबंध में विधानसभा सचिव को स्टेटस रिपोर्ट पेश कराने के निर्देश दिए गए. याचिका की सुनवाई के दौरान बताया गया कि प्रोजेक्ट के लिए पूर्व में 112 पेड़ काटे गए हैं और 132 पेड़ और काटा जाना है. सरकार ने इन्हें शिफ्ट करने और वृक्षारोपण की कार्ययोजना का प्लान भी प्रस्तुत किया. वहीं, धिरौली कोल ब्लॉक मामले पर अगली सुनवाई 14 जनवरी को निर्धारित की गई है.

  • वंदे मातरम् की अमर गाथा पर मुख्यमंत्री साय का संदेश, हर भारतीय को करता है गौरवान्वित

    रायपुर

    राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  वंदेमातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वंदे मातरम्  देशप्रेम का वह जज्बा था जिसकी गूंज से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह उद्घोष करोड़ों भारतीयों के हृदय में साहस, त्याग और बलिदान की अग्नि प्रज्वलित करता रहा। उन्होंने कहा कि यह वही स्वर था जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति प्रदान की।

    उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारी वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत हमें उस संघर्ष, उस पीड़ा और उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार स्तंभ है।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, जो मानचित्र पर अंकित होती हैं। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं और उन मूल्यों से होती है, जो सदियों से उसके आचार-विचार और जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। भारत की यह सांस्कृतिक निरंतरता विश्व में अद्वितीय है।

    उन्होंने कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा आयोजित करने का उद्देश्य यह भी है कि हम इतिहास की उन गलतियों को कभी न भूलें, जिन्होंने देश को गहरे घाव दिए, जिनकी पीड़ा आज भी हमारे समाज में कहीं-न-कहीं महसूस की जाती है। इतिहास से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं।

    मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के भाव को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमें हमारी विरासत, हमारी सांस्कृतिक चेतना और हजारों वर्षों की सभ्यता से जोड़ता है। यह उन आदर्शों की सामूहिक अभिव्यक्ति है, जिन्हें हमने युगों-युगों में आत्मसात किया है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धरती को माता के रूप में पूजने की भावना रही है, जिसे हम मातृभूमि कहते हैं। वंदे मातरम् इसी भाव का सशक्त और पवित्र स्वरूप है, जो हमें प्रकृति, भूमि और राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध सिखाता है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस विशेष चर्चा के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष तथा सभी  सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • तिरुपति दर्शन के लिए निकली बस पलटी, हादसे में एक यात्री की जान गई

    जगदलपुर

    भानपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम तारागांव में गुरुवार सुबह एक दर्शनार्थी बस अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई. हादसे में राजनांदगांव निवासी तामेश्वर साहू की मौत हो गई, जबकि बस में सवार अन्य दर्शनार्थी घायल हो गए.

    जानकारी के अनुसार, दुर्ग से करीब 30 से अधिक लोगों को लेकर तिरुपति जा रही बस गुरुवार सुबह लगभग 5–6 बजे तारागांव के पास पहुंची थी. इस दौरान चालक को झपकी आने से बस का संतुलन बिगड़ गया और दुर्घटना का शिकार हो गई. घटना की सूचना मिलते ही भानपुरी थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भिजवाया गया. मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज परिजनों को सूचना दे दी गई है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है.

  • BRTS और SIR पर हाईकोर्ट का फोकस, इंदौर प्रशासन को सख्त निर्देश

     इंदौर 

    बीआरटीएस की रेलिंग हटाने, इंदौर के बिगड़ते ट्रैफिक और नियम विरुद्ध प्राइवेट वाहनों में हूटर लगाने के मामले में लगी जनहित याचिकाओं के मामले में बुधवार को हाईकोर्ट की डबल बेंच में सुनवाई हुई। इसमें कमेटी ने बीआरटीएस को लेकर रिपोर्ट पेश की।
    इंदौर बीआरटीएस हटाने का फरवरी 2025 से आदेश होने के बाद भी आज दिनांक तक पूरी तरह नहीं हटा है। इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट ने इसे लेकर सख्त आदेश जारी करना शुरू कर दिए हैं। अधिकारियों को कोर्ट में लगातार तलब किया जा रहा है।

    एक दिसंबर की सुनवाई में 16 दिसंबर तक एक तरफ की रैलिंग हटाने और फिर सुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त दिलीप यादव व डीसीपी ट्रैफिक आनंद कलादगी को पेश होने के लिए कहा गया था, लेकिन अधिकारियों ने आवेदन लगाकर छूट ले ली।

    हाईकोर्ट ने नई तारीख अगले दिन 17 दिसंबर की लगा दी। लेकिन इसके लिए भी फिर SIR (निर्वाचन) काम की व्यस्तता का बोलकर छूट लेने की बात कही गई। इस पर हाईकोर्ट सख्त हुआ और अधिकारियों को दोपहर ढाई बजे उपस्थित होने के आदेश दिए गए। इसके बाद यह अधिकारी डबल बैंच के सामने पेश हुए। 

    सुनवाई के दौरान कमेटी की रिपोर्ट आई

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट द्वारा वकीलों की बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट आई। इसमें यह तो कहा गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद रैलिंग हटाने का काम हुआ है, लेकिन अभी दूसरी ओर की नहीं हटी है। साथ ही जो पेंचवर्क हुआ है वह सही नहीं हुआ है और इससे सड़क अनईवन हो रही है। बस स्टाप के पास सुरक्षा के मानक सही नहीं है। वहां सामान पड़ा हुआ है। इससे रास्ता ब्लाक हो रहा है और दुर्घटना की भी आशंका बनी हुई है। 

    इस तरह हुई बहस, यह दिए आदेश

    हाईकोर्ट बेंच ने इस मामले में एक बार अधिकारियों से पूछा कि भोपाल में नौ दिन में बीआरटीएस हट गया था यहां इतनी देर क्यों हो रही है। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि क्योंकि वह भोपाल था और यह इंदौर है।

    वहीं बागड़िया ने कहा कि रैलिंग एक ओर की हटी है लेकिन दूसरी ओर की नहीं हटी है। इसअधिवक्ता अजय बागड़ियाके चलते रास्ता एक और तो बहुत चौड़ा है वहीं दूसरी ओर तंग है। अभी तक बीच में डिवाइडर नहीं लगे हैं।

    सीमेंट ब्लाक की लागत बहुत ज्यादा, खत्म हो गए

    इस पर जस्टिस ने कहा कि सीमेंट के ब्लाक लगा दिए जाएं, जैसे जीपीओ पर लगाए हैं। इस पर निगमायुक्त दिलीप यादव ने कहा कि इन ब्लाक की लागत बहुत ज्यादा आती है। एक किमी में करीब एक करोड़ होती है। जो अभी थे वह 500 मीटर में लगा दिए हैं। इस पर जस्टिस ने कहा कि जो रैलिंग निकाली है क्या उसका उपयोग कर बीच में डिवाइडर नहीं कर सकते हैं।

    इस पर कलेक्टर ने कहा कि जो टेंडर दिया है वह एजेंसी ही इस निकले माल को रखेगी और इसे ही बेचकर वह टेंडर की राशि भरेगी, इसलिए इनका उपयोग सही नहीं है। इस पर बागड़िया ने कहा कि रस्सी बांधकर या ट्रैफिक पुलिस के बैरिकेडिंग लगाकर व्यवस्था की जाए। इससे अधिकारियों ने एक्सीडेंट होने की आशंका जताई। 

    कोर्ट की सख्ती के बाद उपस्थित हुए आला अफसर फिर ढाई बजे कलेक्टर शिवम वर्मा, निगम कमिश्नर दिलीप यादव, ट्रैफिक डीसीपी आनंद कलांदगी डिवीजन बेंच के सामने पेश हुए। मामले में याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से एडवोकेट अजय बागडिया ने सबसे पहले कोर्ट को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आपके आदेश के कारण ही इतना काम हो पाया है।

    इसके लिए उन्होंने शहर की ओर से भी धन्यवाद दिया। मामले में अब सुनवाई 12 जनवरी को तय की गई है।

    एक ओर की रेलिंग नहीं हटाने से ट्रैफिक बदहाल याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अजय बागडिया ने कहा कि वर्तमान में बीआरटीएस की एक हिस्से की रेलिंग हटाने से सड़क चौड़ी जरूर हुई है। इससे भंवरकुआ से विजय नगर की ओर आने वाले वाहनों चालकों को अब 1/3 हिस्सा मिल भी रहा है।

    दूसरी ओर विजय नगर से भंवरकुआ जाने वाले हिस्से की रेलिंग नहीं हटने से रास्ता काफी संकरा हो गया है, जिससे ट्रैफिक का दबाव वहां ज्यादा है।

    अस्थायी डिवाइडर नहीं लगाए जा सकते याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया कि वहां कि रेलिंग भी हटाकर बीच में डिवाइडर बनाए जाए। इस पर अधिकारियों की ओर से बताया कि इतनी जल्दी डिवाइडर नहीं बन पाएगा क्योंकि अभी हिस्से की रेलिंग को तोड़ा है और यह जगह अभी डिवाइडर के लिए ही छोड़ी गई है।

    इस पर याचिकाकर्ता की ओर से सुझाव दिया गया कि अभी जीपीओ चौराहा से शिवाजी नगर प्रतिमा तक बीच में डिवाइडर के रूप में सीमेंट के जो ब्लॉक लगाए हैं वैसे ही बाकी हिस्से में भी लगा दें। इस पर निगम कमिश्नर ने कहा कि इसकी लागत बहुत ज्यादा है। निगम के पास जो था वह लगा दिया गया है।

    अधिकारी बोले- इससे तो दुर्घटनाएं बढ़ेंगी मामले इसे लेकर याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया कि ऐसे में पुलिस की जो बैरिकेडिंग होती है वह लगा दी जाए या प्लास्टिक बैरिकेड्स भी लगाए जा सकते हैं। अगर ये भी उपलब्ध नहीं हैं तो तब तक बीच में खंभे लगाकर रस्सी बांध दी जाए और दूसरी ओर रेलिंग भी तोड़ी जाए। इस पर अधिकारियों ने कहा कि यह जोखिमपूर्ण होगा और दुर्घटनाएं होंगी। लोग इससे कूदकर दूसरी ओर आएंगे।

    लोग पालन नहीं करते तो दूसरे कैसे जिम्मेदार मामले में याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया कि ये वे लोग हैं जो ट्रैफिक रूल्स का पालन नहीं करते। अगर वे ऐसा करते हैं तो खुद की रिस्क पर करते हैं। अगर कोई घटना होती है तो दूसरा (प्रशासन) कैसे जिम्मेदार होगा। ऐसे लोगों के कारण पूरे शहर के लोग परेशानी क्यों भुगतें। इसलिए बीच में डिवाइडर बनाया जाए जो बहुत जरूरी है।

    अब 12 जनवरी को पेश होगी स्टेटस रिपोर्ट

    सभी तर्क सुनने के बाद हाईकोर्ट बेंच ने कहा कि अधिकारी वकीलों की बनी कमेटी के साथ बैठक कर इसमें और क्या होना चाहिए इस पर बात करें। कमेटी से भी सुझाव लें। साथ ही 12 जनवरी को इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। जो कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है उन समस्याओं को देखें और ठीक करें। 

    हाईकोर्ट में बीती सुनवाई में यह हुआ था

    हाईकोर्ट में  बीती सुनवाई में भी यह मामला उठा था कि भोपाल का बीआरटीएस 9 दिन में हट गया था। लेकिन इंदौर में बीआरटीएस फरवरी से अबतक 10 महीने बाद भी नहीं हटा है। साथ ही कहा गया कि जब किसी मकान, तोड़फोड़ के लिए बुलडोजर चलाना होता है तो देरी नहीं होती है।

  • कर चोरी की जांच तेज: GST टीम ने नवीन इंजीनियरिंग वर्क्स से अहम दस्तावेज किए जब्त

    अंबिकापुर

    शहर के एमजी रोड स्थित नवीन इंजीनियरिंग संस्थान में जीएसटी विभाग ने छापेमार कार्रवाई की है. जीएसटी विभाग के अधिकारी लगातार 12 घंटे तक दस्तावेजों और उपकरणों की जांच करते रहे. जीएसटी विभाग की टीम ने रेड कार्रवाई में फर्म से संबंधित दस्तावेज और बिजली उपकरण ज्बत किया है.

    जानकारी के अनुसार, नवीन इंजीनियरिंग संस्थान मशीन मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ विभिन्न सरकारी विभागों में सामग्री सप्लाई का कार्य करता है. छापेमारी के दौरान विभागीय टीम ने संस्थान से बड़ी मात्रा में बिल, वाउचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं. हालांकि, अधिकारियों ने फिलहाल किसी भी तरह की अनियमितता या कार्रवाई के निष्कर्ष पर टिप्पणी करने से इंकार करते हुए इसे नियमित प्रक्रिया बताया है.

    गौरतलब है कि अंबिकापुर में जीएसटी विभाग द्वारा लगातार जांच और कार्रवाई की जा रही है, जिससे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में हलचल का माहौल बना हुआ है.