• मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में महिलाओं आजीविका का नया अवसर

    मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में महिलाओं आजीविका का नया अवसर

    रायपुर

    महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा के मामले में एक और उपलब्धि छत्तीसगढ़ ने आज दर्ज की है। सूरजपुर जिले में एक नए पूरक पोषण आहार निर्माण संयंत्र की शुरूआत हुई है। यह सयंत्र सूरजपुर जिले के भैयाथान विकासखंड के दर्रीपारा में आकांक्षा स्व सहायता समूह द्वारा संचालित होगा। इस संयंत्र का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने किया और महिला समूहों से जुड़ी सदस्य महिलाओं को इस के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    सूरजपुर जिले के दर्रीपारा में शुरू हुए इस पूरक पोषण आहार निर्माण संयंत्र से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राज्य में पूरक पोषण निर्माण में महिला स्व-सहायता समूहों की सहभागिता की गारंटी को पूरा करने की दिशा में एक और कदम है। यहां यह उल्लेखनीय है कि राज्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार द्वारा मोदी जी के गारंटी को पूरा करने के लिए पूरक पोषण आहार निर्माण की सर्वप्रथम जवाबदारी महिला समूहों को रायगढ़ जिले में सौंपी गई थी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी की मौजूदगी 17 अगस्त 2025 को कोतरलिया में सर्वप्रथम पूरक पोषण आहार निर्माण संयंत्र का शुभारंभ हुआ था। इसके पश्चात बस्तर और दंतेवाड़ा में पूरक पोषण आहार निर्माण संयंत्र के संचालन की जिम्मेदारी महिला समूहों को सौंप दी गई है। सूरजपुर के दर्रीपारा में शुरू हुआ यह चौथा पूरक पोषण आहार है।

    इस अवसर पर मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सूरजपुर के दर्रीपारा में शुरू हुए इस आधुनिक संयंत्र से मीठा शक्ति आहार एवं नमकीन पौष्टिक दलिया का उत्पादन होगा, जिसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और पोषक पूरक आहार उपलब्ध कराना है। यह व्यवस्था प्रधानमंत्री मोदी की कुपोषण मुक्त भारत की प्रतिबद्धता और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पोषण युक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने में मददगार साबित होगा। उन्होंने आगे कहा कि दर्रीपारा में शुरू हुए इस संयंत्र के माध्यम से भैयाथान परियोजना के अंतर्गत आने वाले 366 आंगनबाड़ी केंद्रों को नियमित रूप से मीठा शक्ति आहार एवं पौष्टिक दलिया उपलब्ध कराया जाएगा। इससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार होगा, आपूर्ति व्यवस्था सुव्यवस्थित होगी।

    मंत्री मती राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार महिला समूहों के विस्तार, प्रशिक्षण और तकनीकी सुविधाओं के लिए हरसंभव सहयोग देगी। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य अखिलेश प्रताप सिंह, जनपद उपाध्यक्ष राजीव प्रताप सिंह, मंडल अध्यक्ष सुनील साहू, एसडीएम मती चांदनी कंवर, तहसीलदार शिवनारायण राठिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी शुभम बंसल तथा बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

    यहां यह उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा पूरक पोषण आहार उत्पादन का दायित्व पुनः महिला स्व सहायता समूहों को सौंपे जाने के लिए प्रथम चरण में राज्य के 6 जिले चयनित किए गए हैं, जिसमें रायगढ़, कोरबा, बलौदाबाजार, बस्तर, दंतेवाड़ा और सूरजपुर शामिल हैं। 4 जिलों में पूरक पोषण आहार संयंत्र का शुभारंभ हो चुका है। जल्द ही बलौदाबाजार और कोरबा में भी पूरक पोषण आहार निर्माण संयंत्र शुरू होगा। इससे महिला समूहों के लिए नए रोजगार और आजीविका अर्जन का नया अवसर मिलेगा।

  • लोक सेवा आयोग परीक्षा-2024 में सफलता पर मुख्यमंत्री साय ने प्रतिभागियों को दी शुभकामनाएँ

    रायपुर,
    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) परीक्षा-2024 में सफलता प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि युवा शक्ति की कड़ी मेहनत, अनुशासन, निरंतर तैयारी और समर्पित प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को प्रदेश की सेवा में एक नई शुरुआत के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की युवा पीढ़ी ने हमेशा उत्कृष्टता, साहस और लगन का परिचय दिया है। इस परीक्षा में सफल हुए सभी प्रतिभागियों ने अपने धैर्य और लक्ष्य

    के प्रति प्रतिबद्धता  से यह सिद्ध किया है कि प्रदेश की नई पीढ़ी प्रशासनिक सेवाओं में एक सशक्त स्थान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि निरंतर मेहनत और दृढ़ निश्चय से प्राप्त यह सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

    मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि ये नवचयनित अधिकारी सुशासन, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन की नई ऊँचाइयों को स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को जनोन्मुखी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, और इन नई नियुक्तियों से शासन-प्रशासन में नई ऊर्जा का संचार होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि  सभी युवा अधिकारी छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, सामाजिक न्याय, गरीबी उन्मूलन, महिला-शिक्षा सशक्तिकरण और ग्रामीण उन्नति जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देंगे।

    मुख्यमंत्री  साय ने यह भी कहा कि इन सफल प्रतिभागियों की उपलब्धि प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने कहा कि यह सफलता संदेश देती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और अनुशासन के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे निरंतर सीखते रहें, स्वयं को बेहतर बनाते रहें और जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं।

    मुख्यमंत्री ने सभी सफल अभ्यर्थियों को उज्ज्वल, सुखद एवं सफल जीवन की मंगलकामनाएँ देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार उनके साथ है और हर स्तर पर एक संवेदनशील, पारदर्शी और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने में उनका सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

  • मुख्यमंत्री साय का बयान: जनता की आकांक्षाओं को साकार करने के लिए सरकार कर रही है निरंतर प्रयास

    रायपुर : प्रदेशवासियों के सपनों को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कर रही है कार्य: मुख्यमंत्री  साय

    मुख्यमंत्री "छत्तीसगढ़ 25 साल बेमिसाल” कार्यक्रम में हुए शामिल

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय  राजधानी रायपुर में आयोजित “छत्तीसगढ़ 25 साल बेमिसाल” कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने राज्य की 25 वर्ष की स्वर्णिम विकास यात्रा पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि छत्तीसगढ़ की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की अहम भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों के सपनों को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने बस्तर सहित पूरे प्रदेश में विकास में बाधक नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं। सुरक्षा कैंप स्थापित किए जाने से सुदूर और दुर्गम क्षेत्रों में भी विकास की पहुंच सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन में किए जा रहे प्रयासों से नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर अपने मूल स्वरूप में भयमुक्त होकर प्रदेश के विकास में बेहतर भागीदारी देगा।  साय ने कहा कि बस्तर ओलम्पिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के माध्यम से बस्तर की संस्कृति और प्रतिभा को दुनिया ने देखा है। बस्तर में शांति, समृद्धि और खुशहाली के नए युग का आरंभ हो चुका है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के प्रति हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति पूरी दृढ़ता से लागू है। पूर्व में जो अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुए, उस पर कड़ा प्रहार किया गया है, जिसका परिणाम भी सभी देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने भूखमरी जैसे अभिशाप को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए थे, जिसके तहत गरीब परिवारों को अनाज उपलब्ध कराया गया। साथ ही, जरूरतमंद परिवारों को आज आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के सुशासन के सपनों को साकार करने की दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की लगभग सभी गारंटियों को पूरा कर दिया गया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण ‘चरण पादुका योजना’ को भी पुनः प्रारंभ किया गया है। 

    मुख्यमंत्री ने नई उद्योग नीति के आकर्षक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में निवेश लगातार बढ़ रहा है। अब तक राज्य सरकार को पौने आठ लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिससे आने वाले वर्षों में रोजगार और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास में योगदान देने वाले विभिन्न संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, मुख्यमंत्री के सलाहकार  पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी  अलोक सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • श्रम सुधारों के बड़े क्रियान्वयन पर CM विष्णु देव साय की सराहना, PM मोदी-मांडविया के नेतृत्व को श्रेय

    रायपुर : प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में श्रम सुधारों का ऐतिहासिक क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने दी बधाई

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  देश में चार श्रम संहिताओं के ऐतिहासिक क्रियान्वयन पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की है। 

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि श्रम सुधारों का यह महत्वपूर्ण निर्णय देश के 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों के अधिकार, सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की एक अभूतपूर्व गारंटी है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का दिन भारत के श्रम क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर है। चारों श्रम संहिताओं के लागू होने से न्यूनतम वेतन का अधिकार, महिलाओं को समान वेतन का प्रावधान, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, प्रत्येक श्रमिक के लिए सामाजिक सुरक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा और ओवरटाइम पर डबल वेतन जैसी व्यवस्थाएँ पूरे देश में सुनिश्चित होंगी। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से न केवल श्रमिक वर्ग को लाभ मिलेगा, बल्कि औद्योगिक वातावरण अधिक पारदर्शी, संतुलित और श्रमिक-हितैषी होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने जिस समावेशी और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया है, श्रम संहिताओं का लागू होना उस दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम है। उन्होंने कहा कि भारत की कार्यशील जनसंख्या राष्ट्र की उत्पादन शक्ति और आर्थिक समृद्धि की आधारशिला है, और उनके अधिकारों का संरक्षण किसी भी सशक्त राष्ट्र की प्राथमिकता है। यह संहिताएँ देश की श्रम शक्ति को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण प्रदान करेंगी।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले इस निर्णय के लिए वह प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के प्रति आभार प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुधार नई अर्थव्यवस्था, बेहतर औद्योगिक संबंधों और मजबूत श्रम बाजार का आधार साबित होगा।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन से देशभर में रोजगार, उत्पादन, निवेश और औद्योगिक विकास की गति और अधिक मजबूत होगी, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।

  • मरीज की निजता सर्वोपरि: HIV रिपोर्ट संभालने के लिए डॉक्टरों को ही दी गई विशेष अनुमति

    रायपुर

    शासन ने अस्पताल में इलाज के दौरान एचआईवी मरीजों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए गाइडलाइन जारी की है. यह गाइडलाइन तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दी गई है. अब एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी इलाज करने वाले डॉक्टर या नियंत्रण अधिकारी के पास ही रहेगी. यही नहीं फाइल, रजिस्टर, कंप्यूटर रिकार्ड लेवल पर अलग से कोई चिह्न नहीं बनाया जाएगा.

    भारत सरकार के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) की 2018 में जारी अधिसूचना के अनुसार एचआईवी, एड्स से ग्रसित लोगों की चिकित्सीय, व्यक्तिगत एवं पहचान संबंधी सभी जानकारी पूर्णत: गोपनीय रखी जानी है. स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया ने छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेज, जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल अस्पताल एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को गाइडलाइन जारी कर पालन करने को कहा है.

    सर्जरी या डिलीवरी के समय ऑपरेशन करने वाली टीम को सुरक्षा के बतौर नाम उजागर किए बिना मरीज की जानकारी दी जा सकती है. यही नहीं, मरीज की स्थिति की जानकारी इलाज करने वाले डॉक्टर व जरूरी स्टाफ तक सीमित रहेगी. किसी भी परिस्थिति में मरीज की स्थिति को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित, चर्चा या प्रचारित नहीं किया जाएगा. एचआईवी-एड्स मरीजों से संबंधित दस्तावेज, रजिस्टर व रिपोर्ट सुरक्षित स्थान पर रखे जाएंगे. सिर्फ अधिकृत अधिकारी की अनुमति से ही उपलब्ध कराए जाएंगे.

    गोपनीयता का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. संक्रमण से बचाव के लिए सभी स्वास्थ्य कर्मी यूनिवर्सल प्रकाशन का पालन करेंगे. रक्त, सुई, ब्लेड या किसी भी शारीरिक द्रव के संपर्क से बचाव के लिए डिस्पोजेबल दस्ताने, मॉस्क, एप्रन, सेफ्टी गॉगल्स आदि का इस्तेमाल किया जाए. इस्तेमाल के बाद सुइयों को निडिल डेस्ट्रोयर या शॉर्प कंटेनर में ही नष्ट किया जाए. सभी को सुई या ब्लेड का दोबारा उपयोग नहीं करने को कहा गया है. ताकि संभावित संक्रमण से बचा जा सके.

    बायो मेडिकल वेस्ट नियम का पालन जरूरी

    गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि अस्पतालों में सभी उपकरणों का उचित स्टरलाइजेशन किया जाए. साथ ही बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम का पालन किया जाए. ब्लड ट्रांसफ्यूजन केवल स्क्रीन किए गए रक्त से किया जाएगा. ऑपरेशन थियेटर, लेबर रूम एवं ड्रेसिंग रूम में संक्रमण नियंत्रण के सभी प्रोटोकॉल लागू करें. यही नहीं इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी हर माह निरीक्षण कर जरूरी रिपोर्ट तैयार करें.

    एचआईवी मदर, 2 लाख का मुआवजा

    आंबेडकर अस्पताल में हाल ही में एक शिशु के बेड के सामने एचआईवी मदर का बोर्ड टांग दिया गया था. मीडिया में मामला आने के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अस्पताल को पीड़ित महिला को दो लाख का मुआवजा देने को कहा. कॉलेज प्रबंधन ने बिना देरी करते हुए अगले ही दिन महिला को दो लाख रुपए का चेक भी दे दिया.

  • MP Police Recruitment: जॉइनिंग से दूरी बना गए 900 अभ्यर्थी, विभाग ने 50 पर की कानूनी कार्रवाई

    भोपाल
    सरकारी नौकरियों में भर्ती को लेकर मारामारी के बीच मामला चौंकाता है। मध्य प्रदेश पुलिस की भर्ती में चयन होने के बावजूद भी 900 अभ्यर्थियों ने ज्वॉइन नहीं किया। अब पुलिस विभाग इसकी वजह पता कर रहा है। यह भी गौरतलब है कि पुलिस भर्ती में फर्जीवाड़ा भी सामने आ चुका है, जिसमें अब तक 50 अभ्यर्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।

    पुलिस महकमे के अधिकारी भी हैरत में
    बता दें कि वर्ष 2023 में 7500 पदों के लिए शुरू हुई भर्ती में ओबीसी आरक्षण का मामला अदालत में होने के कारण 13 प्रतिशत पद रोके जाने के बाद 6400 पदों के लिए नियुक्ति आदेश जारी किए गए थे। इसमें 900 चयनितों का ज्वॉइन न करना चौंकाता है। पुलिस महकमे के अधिकारी हैरत में हैं। इन अभ्यर्थियों के ज्वॉइन न करने को लेकर सवाल भी खड़े हो गए हैं। हालांकि यह भी कहा जा रह है कि इन चयनित अभ्यर्थियों को और कहीं अच्छी नौकरी मिल गई हो, इसलिए उन्होंने ज्वाइन न किया हो, लेकिन एक पहलू यह भी है कि ज्वॉइनिंग न लेने वालों में वे 50 चयनित अभ्यर्थी भी सम्मिलित हैं, जिन्होंने अपनी जगह दूसरे अभ्यर्थी को बैठाकर परीक्षा पास की और सत्यापन के दौरान पकड़े गए।
     
    पकड़े गए अभ्यर्थियों ने आधार कार्ड में फर्जी तौर पर बायोमैट्रिक (फिंगर प्रिंट और फोटो) अपडेट कराकर सॉल्वर को लिखित परीक्षा में बैठाया था। ऐसे में, यह आशंका भी है कि फर्जीवाड़ा में कई अभ्यर्थियों के पकड़े जाने के बाद 900 में से बहुत सारे अभ्यर्थी ज्वॉइनिंग लेने नहीं आए हैं। इनमें फर्जीवाड़ा करने वाले शामिल हैं या नहीं, यह तभी पता लगेगा, जब ज्वॉइनिंग के बाद इनका सत्यापन होगा। बता दें कि इसी वर्ष ज्वाइनिंग के दौरान नौ जिलों में अभ्यर्थियों का फर्जीवाड़ा सामने आया था। सभी जगह अभ्यर्थी, साल्वर और कुछ जगह कियोस्क संचालकों (कंप्यूटर केंद्र) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

    जांच में 50 लोगों के नाम आए सामने
    इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले को राज्य साइबर मुख्यालय को जांच के लिए भेज दिया था। जांच के बाद पचास लोगों के नाम सामने आए। अभी तक 200 से अधिक एफआईआर इस मामले में हो चुकी हैं। साइबर मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि जो अभ्यर्थी ज्वॉइन करने नहीं आए हैं, वे भी जांच की परिधि में हैं। सहमति लेकर उनके आधार अद्यतन कराए जाने की भी जानकारी निकाली जा रही है। भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद से बार-बार आधार कार्ड में बायोमैट्रिक अपडेट कराने वाले संदेह के घेरे में हैं। उनसे पूछताछ की जाएगी।

    वहीं, सॉल्वरों से पूछताछ में अन्य राज्यों में दूसरी परीक्षाओं में भी सॉल्वर बैठाने का भी राजफाश संभव है। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने कहा कि आरक्षित वर्गों में विभिन्न श्रेणियों में अभ्यर्थी प्रतीक्षा सूची से भी नहीं मिल पाए हैं। इस कारण 325 पद ही भरे जा सके हैं।

  • इंदौर कॉलेज में रैगिंग की शर्मनाक घटना: छात्र को घंटों बंधक बनाकर किया टॉर्चर, 4 आरोपी स्टूडेंट्स पर गिरी गाज

    इंदौर
    एमजीएम मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला सामने आया है। सीनियर ने धोखे से जूनियरों को अपने निजी फ्लैट पर बुलाया। उनसे मारपीट की और तीन घंटे तक बंधक बनाए रखा। जूनियरों को शराब व सिगरेट पीने पर मजबूर किया गया। इस मामले में एमबीबीएस 2025 बैच के विद्यार्थियों ने यूजीसी की नेशनल एंटी-रैगिंग सेल में शिकायत की है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 बैच के सीनियर छात्रों ने बंधक बना कर उनके साथ ये हरकत की।

    4 सीनियर छात्र निलंबित
    मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि यूजीसी में शिकायत 18 नवंबर को दर्ज कराई थी। 20 नवंबर को कॉलेज की एंटी-रैगिंग सेल ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए और चार सीनियर मेडिकल छात्रों को एक-एक माह के लिए निलंबित कर दिया है।
     
    करीब तीन घंटे तक बंधक बनाकर रखा
    शिकायत में जूनियरों ने बताया है कि उनके ही एक बैच मेट ने उन्हें झांसे में लेकर फ्लैट तक पहुंचाया। उन्हें यह नहीं पता था कि फ्लैट में सीनियर रहते हैं। इस कारण वे लोग सीनियरों के जाल में फंस गए। उन्हें करीब तीन घंटे तक वहीं रोके रखा गया। मारपीट की गई। जूनियर इतना डरे हुए हैं कि उन्होंने शिकायत में यह भी लिखा है कि कृपया हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करें और कार्रवाई करें।

    दो वर्षों में रैगिंग के सात मामले सामने आए
    बता दें कि इससे पहले अक्टूबर माह में भी रैगिंग की घटना सामने आई थी। जिसमें स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में प्रथम वर्ष की पीजी छात्रा ने आरोप लगाया था कि वह इतना परेशान हो गई कि वह मानसिक रूप से प्रताड़ित होकर 14 दिन की छुट्टियों पर अपने घर चली गई। यह भी आरोप लगाया था कि इससे चार माह में उसका वजन 22 किलो कम हो गया था। हालांकि बाद में उसने अपनी शिकायत वापस ले ली थी। इस मेडिकल कालेज में दो वर्षों में रैगिंग के सात मामले सामने आ चुके हैं।

  • स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: सरकारी अस्पताल में मरीजों की जगह आराम फरमाते दिखे कुत्ते

    खंडवा
    मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में अस्पतालों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के किल्लोद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मेल वार्ड में पलंग पर आराम करते लावारिस कुत्तों का चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अस्पताल प्रशासन की भारी लापरवाही उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

    अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा ताक पर
    अस्पताल के वार्ड में कुत्ते बेखौफ घूमने और पलंग पर झुंड में आराम करने का यह वीडियो कर्मचारी के स्वजन ने ही बनाया है। बताया जाता है कि अस्पताल में इलाज तो दूर सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों में अविश्वास के चलते मरीज मजबूरी में ही उपचार के लिए आते हैं।

    ग्रामीणों को आरोप है की छोटी सी समस्या होने पर भी मरीज को 70 किलोमीटर दूर खंडवा रेफर कर दिया जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सफाई पर भी कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे संक्रमण की आशंका बनी रहती है। वार्ड बाय, नर्सिंग स्टाफ से लेकर चिकित्सक भी समय पर नहीं मिलने की शिकायत ग्रामीणों ने की है।

    अस्पताल बना आरामगाह
    अस्पताल के मेल वार्ड के दो पलंग पर तीन-तीन कुत्तों का आराम करना दर्शाता है कि अस्पताल प्रशासन, बीएमओ और सुरक्षा कर्मचारियों की लापरवाही किस हद तक बढ़ चुकी है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डीएस शर्मा ने बताया कि अस्पताल में इस मामले में लापरवाही के लिए ड्यूटी डॉक्टर ,नर्स और सफाई कर्मी को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। किल्लोद में स्वास्थ्य सेवा और सुविधाओं की पोल खोल रहा यह वीडियो सामने आने के बाद सीएमएचओ डा. ओपी जुगतावत ने जांच के आदेश दिए हैं। 

  • मध्यप्रदेश की विरासत से विकास की झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र

    भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में अभ्युदय मध्यप्रदेश के दर्शन, लोक नृत्यों की रही धूम

    मध्यप्रदेश की विरासत से विकास की झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र

    मध्यप्रदेश के लोक नृत्यों की रही धूम

    भोपाल

    प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अग्रसर है। सूक्ष्म, लघु एवं उद्यम मध्यम उद्योग मंत्री  चैतन्य काश्यप ने 44वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में मध्यप्रदेश दिवस के अवसर पर यह बाते कहीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 18 नई नीतियां बनाई है, जो निवेशमित्र है और निवेशकों को आकर्षित करती हैं। मंत्री  काश्यप ने मध्यप्रदेश मंडप का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर मंडप का भ्रमण किया। इस अवसर पर मंदसौर की सांसद  सुधीर गुप्ता, और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

    अभ्युदय मध्यप्रदेश के दर्शन प्रगति मैदान दिल्ली में चल रहे भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में किए जा सकते हैं। 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' थीम पर 14 से 27 नवंबर तक चलने वाले मेला में मध्यप्रदेश की विरासत से विकास की अद्भुत झांकी, एक जिला-एक उत्पाद और परम्परागत कलाकृतियों आगंतुकों को आकर्षित कर रही है।

    मध्यप्रदेश मण्डप

    मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है। यहां कि ऐतिहासिक धरोहर, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल, लोक परम्पराओं की समृद्धि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के संकल्प "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" को न केवल पूरी कर रही है अपितु विश्व पर्यटन मानचित्र पर इसे अग्रणी स्थान दिला रही है। अमेरिका से प्रकाशित एक प्रतिष्ठित पत्रिका ने विगत वर्ष मध्यप्रदेश को दुनिया के टॉप 10 टूरिज्म डेस्टिनेशन में शामिल किया जो गौरव का विषय है। इस सन्दर्भ का उल्लेख प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा 25 दिसम्बर को खजुराहो में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई की जयंती कार्यक्रम में किया गया था

    44वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में मध्यप्रदेश मण्डप ग्वालियर किला के रूप में तैयार किया गया है। मण्डप के केन्द्र में 64 योगिनी मन्दिर मुरैना के दर्शन होते है। मण्डप को मेले की थीम 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के अनुरूप सजाया गया है। लुटियन्स ने जब भारतीय संसद भवन का डिजाइन तैयार किया था तब उन्होंने भारत वर्ष की प्रसिद्ध इमारतों के डिजाईन बुलवाये थे, जिसमें से उन्होने मुरैना जिले के 64 योगिनी मन्दिर का चयन कर भारतीय संसद भवन का निर्माण कराया था। मण्डप में मध्यप्रदेश की विश्व धरोहार खजुराहों, सांची स्तूप एवं भीमबेटका के साथ प्रस्तावित धरोहर स्थलों, विभिन्न सांस्कृतिक माहोत्सव, हस्तशिल्प, हाथकरघा, जी.आई. ओ.डी.ओ.पी. उत्पादों को भी सजाया गया है।

    मंडप में इन उत्पादों को होलोग्राफिक इमेज से भी प्रदर्शित किया जा रहा है। इन उत्पादों की बिक्री भी हो रही है। इसमें राज्य शासन की विभिन्न नीतियों एवं उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। मण्डप में औद्योगिक विकास के साथ पर्यटन की भी पूर्ण जानकारी प्रदर्शित की गयी है। मण्डप में सिंहस्थ-2028 की तैयारी को भी दर्शाया गया है। इन्दौर के जी.आई. उत्पाद, चमड़े के खिलौने एवं टेराकोटा के उत्पाद भी प्रदर्शित किये गये है। स्टार्ट-अप भी अपने उत्पादों का प्रचार और विक्रय कर रहे हैं। मध्यप्रदेश मण्डप, निर्मित विरासत, सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय विरासत एवं वन्य जीवन को आकर्षक रूप से प्रदर्शित करता है। मण्डप जहां एक ओर प्रदेश की गौरवशाली विरासत को प्रदर्शित कर रहा है वही दूसरी ओर सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का संदेश भी दे रहा है। यही कारण है कि मेले में इस बार फिर मध्यप्रदेश मण्डप दर्शकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। यहां अभ्युदय मध्यप्रदेश की झलक स्पष्ट देखी जा सकती है।

    मध्यप्रदेश के लोक नृत्य की धूम

    मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध लोक नृत्यों की धूम पूरे अंतर्राष्ट्रीय मेले में मची हुई है। मटकी लो नृत्य, पनिहारी लोक नृत्य और बघेली लोक गायन जैसे पारंपरिक नृत्यों ने लोगों का मन मोह लिया है। मटकी लोक नृत्य में महिलाएं रंग-बिरंगे पारंपरिक वेशभूषा में चेहरे पर घूंघट डाले, ढोल की थाप पर एक खास लय में नृत्य करती हैं। यह नृत्य आड़ा-खड़ा और रजवाड़ी के नाम से भी जाना जाता है। पनिहारी लोक नृत्य महिलाओं के जीवन को चित्रित करता है, जो पानी के घड़े दूर से लाती हैं। इसके गीत भी पानी और बारिश के महत्व के बारे में हैं। मती शीला बरनाठी बघेली लोक गायन की प्रसिद्ध लोक गायिका बघेली लोक गायन मध्यप्रदेश के रीवा, सतना, शहडोल, सीधी, अनुग्रह और उमरिया जिलों में प्रचलित है।

     

  • डकैत प्रभावित घोषित हुए MP के नौ जिले, ग्वालियर-चंबल में योगेंद्र गुर्जर गिरोह की दहशत बरकरार

    भोपाल
    मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल को डकैत मुक्त करने के दावों के बीच सच्चाई यह है कि अब भी प्रदेश के नौ जिले डकैतों से प्रभावित हैं। इनमें महाकोशल-विंध्य के जिले भी शामिल हैं। डकैत प्रभावित जिले ग्वालियर, शिववुरी, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, रीवा, सतना और पन्ना हैं। मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम 1981 प्रदेश के इन जिलों के कुछ थानों, क्षेत्रों में अभी भी लागू है। इनमें से छह जिलों का संपूर्ण क्षेत्र डकैतों से प्रभावित है।

    ग्वालियर-चंबल में योगेंद्र गुर्जर का गिरोह है सक्रिय
    ग्वालियर-चंबल अंचल में योगेंद्र गुर्जर का गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह के सरगना योगेंद्र पर राजस्थान और मप्र पुलिस ने 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। प्रदेश में सीमावर्ती राज्यों से अंतरराज्यीय डकैत गिरोह की सक्रियता बढ़ी है। इनमें दस्यु प्रभावित क्षेत्रों में डकैती की घटनाएं अधिक होती है। वर्ष 2020 से लेकर वर्ष 2024 तक डकैती के 300 से अधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। वर्तमान जो डकैत गिरोह सक्रिय हैं वह अन्य राज्यों से आकर डकैती और लूट की घटनाओं को अंजाम देने वालों का समूह है। जिनके विरुद्ध पांच साल में अलग-अलग प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं।
     
    योगेंद्र गिरोह दो राज्यों के लिए बना मुसीबत
    ग्वालियर-चंबल में योगेंद्र गुर्जर का गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह ने मध्य प्रदेश के साथ ही राजस्थान में भी डकैती की है। पुलिस के साथ इस गिरोह की मुठभेड़ भी हो चुकी है, योगेंद्र व उसके साथी फरार हैं। हालांकि योगेंद्र के गिरोह में शामिल डकैत तहसीला गुर्जर ने राजस्थान के धौलपुर में सरेंडर कर दिया था। वह धौलपुर के मौरोली का रहने वाला है। तहसीला के विरुद्ध धौलपुर के अलावा मध्य प्रदेश के थाना सरायछौला मुरैना, तिघरा ग्वालियर, सेसईपुरा श्योपुर में लूट, अपहरण, हत्या का प्रयास, फिरौती व पुलिस मुठभेड़ के कई मामले दर्ज हैं।

    डकैती प्रभावित जिले व क्षेत्र
    जिला–जिले का प्रभावित क्षेत्र
    ग्वालियर– संपूर्ण जिला ग्वालियर
    शिवपुरी– संपूर्ण जिला शिवपुरी
    मुरैना– संपूर्ण जिला मुरैना
    भिंड– संपूर्ण जिला भिंड
    श्योपुर– संपूर्ण जिला श्योपुर
    दतिया– संपूर्ण जिला दतिया
    रीवा– थाना डभौरा, अतरैला, पनवार, जवा, जनेह, सेमरिया, सिरमौर।
    सतना– थाना सिंहपुर, चित्रकूट (नया गांव), सभापुर, बरौधा, मझगवां, धारकुंडी।
    पन्ना– थाना अजयगढ़, धरमपुर, बृजपुर, मडला।
    नोट- इसमें रेल थाना भी है। जीआरपी ग्वालियर बीजी, ग्वालियर एनजी, जीआरपी मुरैना।

  • स्टेशन पर ऑटो चालकों की लूटखसोट: 3 किमी सफर के लिए 100 रुपए तक की मांग

    रायपुर

     रेलवे स्टेशन परिसर में खड़े रहने वाले ऑटो चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं. यहां प्री-पेड बूथ होने के बाद भी ऑटो चालक यात्रियों से तय रेट से ज्यादा किराया ले रहे हैं. कई ऑटो चालक किराए को लेकर यात्रियों से अभद्रता भी कर रहे हैं. ऑटो चालक यात्रियों के ट्रेन से उतरते ही परिसर में उन्हें घेर लेते हैं और ज्यादा किराए की डिमांड करते हैं. तीन किलोमीटर दूरी तक जाने के लिए ऑटो वाले 80 से 100 रुपए की मांग करते हैं.

    वहीं सात किलोमीटर की दूरी के लिए 200 से 225 रुपए तक किराया मांगते हैं. यात्रियों की शिकायत मिलने पर जब इसकी पड़ताल की तो ऑटो चालकों द्वारा यात्रियों से ज्यादा किराया वसूल किए जाने की बात सामने आई.

    यह है रेट लिस्ट

    स्थान दिन रात

    अग्रसेन चौक 60 75

    आंबेडकर चौक 60 75

    अवंती बाई चौक 100 120

    अनुपम नगर 120 150

    डीडी नगर 120 150

    इंद्रप्रस्थ कॉलोनी 200 240

    उरकुरा 190 230

    टाटीबंध 130 150

    तेलीबांधा 100 120

    बुढापारा 100 120

  • देश का सबसे लंबा रेल फ्लाईओवर निर्माणाधीन, CG-MP ट्रेनों के लिए आसान सफर, कुछ रूट रहेंगे प्रभावित

    कटनी 

    1800 करोड़ की लागत से मध्य प्रदेश के कटनी के झलवारा स्टेशन से न्यू मझगवां फाटक तक रेलवे द्वारा रेल फ्लाईओवर (ग्रेड सेपरेटर) का निर्माण कराया जा रहा है। अप और डाउन ट्रेक में बनाए जा रहे ग्रेड सेपरेटर के करीब 15.85 लंबे अप ट्रैक का कार्य पूरा हो चुका है। इस अपट्रेक को अब बिलासपुर की ओर से आने वाली थर्ड लाइन से जोड़ने का कार्य रेलवे द्वारा शुरु कराया गया है। इसके लिए एनकेजे यार्ड में सी-केबिन के समीप ब्लॉक लेकर प्री-एएनआई वर्क शुरु कर दिया गया है। आगामी दिनों में एनआई वर्क कर कनेक्टिविटी दी जाएगी, जिससे ट्रेनों का आवागमन भी प्रभावित होगा।

    अब तक हो चुका इतना काम

    जानकारी के अनुसार, झलवारा से न्यू मझगवां फाटक तक बने ग्रेड सेपरेटर को सिंगरौली की ओर से आने वाले रेलखंड से दो माह पूर्व ही जोड़ा जा चुका है वहीं अब बिलासपुर की ओर से आने वाली ट्रेनों को ग्रेड सेपरेटर से जोड़ने कार्य शुरु किया गया है। वर्तमान में सिर्फ सिंगरौली की ओर से आने वाली ट्रेनें ही इसमें आगे बढ़ पाती है वहीं अब बिलासपुर लाइन जुड़ने से मालगाड़ियां एनकेजे को बाइपास करते हुए सीधे बीना रेलखंड पर रवाना होंगी। इसके लिए यार्ड रिमॉडलिंग भी की जा रही है। नये सिंग्नल सहित अन्य जरूरी कार्य कराए जाएंगे।

    ऐसे हुआ है ग्रेड सेपरेटर का निर्माण

    कटनी ग्रेड सेपरेटर परियोजना (Katni Grade Separator project) की कुल लागत लगभग 1800 करोड़ रुपए है। यह ग्रेड सेपरेटर भारत का सबसे लंबा रेलवे वायाडक्ट बनने जा रहा है, जो न केवल संरचनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि रेलवे संचालन में भी नई संभावनाओं के ‌द्वार खोलेगा। परियोजना की कुल लंबाई 33.40 किमी है, जिसमें डाउन ग्रेड सेपरेटर 17.52 किमी और अप ग्रेड सेपरेटर 15.35 किमी शामिल हैं।

    अप साइड 1570 फाउंडेशन और 264 पियर्स व डाउन साइड 2592 फाउंडेशन और 425 पियर्स का निर्माण कराया गया है। उल्लेखनीय है कि अप्रैल माह में रेलवे ने ग्रेड सेपरेटर के अप ट्रेक में कार्य पूरा होने के बाद कटंगी खुर्द स्टेशन से न्यू मझगवां स्टेशन तक रेलगाड़ी का सफल परिचालन किया था और अब लगातार ग्रेड सेपरेटर से मालगाड़ी दौड़ रही हैं।

    बरगवां मेमू उमरिया तक जाएगी

    जानकारी के अनुसार इस ब्लॉक के कारण गाड़ी संख्या 68747/48 बिलासपुर-कटनी-बिलासपुर मेमू व गाड़ी संख्या 61603/04 कटनी-बरगवां-कटनी मेमू का संचालन प्रभावित होगा। ये दोनों ट्रेर्ने 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक कटंगीखुर्द स्टेशन से ही शुरू होंगी और खत्म होंगी। हालांकि इस दौरान यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ेगा।

    डाउन ट्रैक पर धीमा कार्य, 2026 तक होगा पूरा

    एक ओर जहां अप ट्रैक का कार्य पूरा हो चुका है तो वहीं डाउन ट्रैक पर निर्माण एजेंसी का कार्य धीमी गति से चल रहा है। आलम यह है कि 17.52 किमी लंबे इस ट्रेक पर कई स्थानों पर पिलर भी बनकर तैयार नहीं हुए है। बताया जा रहा है कि डाउन ट्रैक का कार्य इस वर्ष पूरा होना मुश्किल है।

    कटनी-चिरमिरी पैसेंजर निरस्त रहेगी

    जानकारी के अनुसार ब्लॉक के चलते कटनी-चिरमिरी पैसेंजर को रद्द किया जा रहा है। गाड़ी संख्या 61609 कटनी-चिरमिरी 26 नवंबर से 2 दिसंबर तक व गाड़ी संख्या 61602 चिरमिरी-कटनी मेमू 27 नवंबर से 3 दिसंबर तक निरस्त रहेगी।

    ग्रेड सेपरेटर परियोजना से यह होंगे फायदे

        बीना-कटनी रेल खंड में मालगाड़ियों की संख्या और गति में वृद्धि होगी।
        कटनी से बिलासपुर और सिंगरौली के लिए अतिरिक्त रेल लाइन जुड़ जाएगी, जिससे न्यू कटनी, कटनी मुड़वारा जैसे व्यस्त क्षेत्रों को बायपास किया जा सकेगा।

  • मध्य प्रदेश में आधुनिक फायर स्टेशन परियोजना, 400 करोड़ की लागत से 36 स्टेशन होंगे तैयार

    भोपाल 

     अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों में 36 आधुनिक फायर स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके लिए 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर फंड आवंटित किया गया है। फायर स्टेशन बनाने के साथ नई फायर गाड़ियां खरीदी जाएंगी और उपकरण भी आधुनिक तकनीक के होंगे, ताकि आग लगने की घटनाओं पर जल्दी और प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सके। इसके साथ ही सरकार राज्य स्तरीय फायर कंट्रोल रूम भी बनाएगी, जहां से पूरे प्रदेश के सभी फायर स्टेशनों को जोड़ा जाएगा। इससे आगजनी की घटनाओं पर त्वरित निगरानी और समन्वय सुनिश्चित होगा। नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिया है, जिसकी मंजूरी के बाद काम शुरू हो जाएगा। 

    कहां बनेंगे फायर स्टेशन
    फायर स्टेशन 8 नगर निगमों – रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, रतलाम, मुरैना, खंडवा, इंदौर और उज्जैन में बनाए जाएंगे। इसके अलावा नए बने जिलों – मऊगंज, पांढुर्रा, मैहर, अनूपपुर, निवाड़ी सहित अन्य जिलों में भी स्टेशन स्थापित होंगे। साथ ही 4 औद्योगिक क्षेत्रों – पीथमपुर (धार), मंडीदीप (रायसेन), बामोर (मुरैना) और मेघनगर (झाबुआ) को भी शामिल किया गया है।

    दो एकड़ जमीन में बना स्टेशन 
    हर फायर स्टेशन लगभग 2 एकड़ जमीन में बनेगा। एक स्टेशन पर दो दमकल गाड़ियां रहेंगी। एक बड़ी और एक छोटी। प्रति स्टेशन निर्माण पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें फायर स्टेशन + फायर गाड़ियां    पर 119 करोड़, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पर 20 करोड़, आधुनिक फायर उपकरण पर 178 करोड़, कंट्रोल रूम सुदृढ़ीकरण पर 20 करोड़, अन्य विशेष आवश्यकताएं पर 59 करोड़ खर्च होंगे। यानी कुल 398 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें  
    75% राशि लगभग 297 करोड़ केंद्र सरकार और 25% राशि करीब 100 करोड़ राज्य सरकार देगी। 
     

  • नई व्यवस्था लागू: जबलपुर में HSRP न होने पर सीधे जारी होगा ई-चालान

    जबलपुर

     मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर भी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) न होने पर सीधे ई-चालान जारी किया जाएगा। परिवहन विभाग टोल प्लाजा में लगे सीसीटीवी कैमरों को अपने पोर्टल से लिंक कर रहा है। नई व्यवस्था जनवरी से लागू होने की संभावना है। इसका उद्देश्य है कि सभी वाहनों में एचएसआरपी अनिवार्य रूप से लगाई जाए।
    क्यों की जा रही सख्ती

    जानकारी के अनुसार सभी टोल प्लाजा पर 24 घंटे सीसीटीवी चल रहे हैं। इन्हें पोर्टल से जोड़ने पर वाहन का नंबर प्लेट सीधे स्कैन होगा। यदि नंबर प्लेट मानक के अनुरूप नहीं है या वाहन पर एचएसआरपी नहीं लगी है, तो सिस्टम तुरंत ही गाड़ी मालिक को ई-चालान भेज देगा।

    बता दें कि अप्रेल 2019 से नए बिकने वाले सभी वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य है। पुराने (2019 से पहले रजिस्टर्ड) वाहनों के लिए भी एचएसआरपी लगवाना जरूरी किया गया है। इसके बावजूद इसकी गति धीमी है।

    दिसंबर तक लगवा लें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट

    परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों को दिसंबर तक का समय दिया है। इसके बाद बिना एचएसआरपी वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और चालान की राशि भी बढ़ाई जाएगी।
    ऐसी होगी नई व्यवस्था

    टोल प्लाजा के सीसीटीवी कैमरे परिवहन विभाग के पोर्टल से जुड़े। गाड़ियों के गुजरने के समय हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन किया जाएगा। जिसमें पोर्टल पर तुरंत पूरा रिकॉर्ड खुलकर आ जाएगा। एचएसआरपी न होने या अन्य कमियों पर तत्काल ई-चालान जारी कर दिया जाएगा। 

  • डिजिटल डिपेंडेंसी का डरावना सच: मोबाइल की लत ने 73% लोगों को किया प्रभावित

     इंदौर
     एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग द्वारा मोबाइल की लत से परेशान 500 लोगों पर किए गए अध्ययन के बेहद परेशान करने वाले निष्कर्ष सामने आए हैं। इसके अनुसार मोबाइल अब सिर्फ एक तकनीकी उपकरण नहीं रह गया, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अध्ययन के अनुसार 73 प्रतिशत लोग मोबाइल की लत यानी डिजिटल डिपेंडेंसी से पीड़ित पाए गए।

    अत्यधिक मोबाइल उपयोग के कारण लोग बिना एहसास किए मूक अवसाद (साइलेंट डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं। 80 प्रतिशत प्रतिभागियों में हल्का लेकिन लगातार चलने वाला अवसाद देखा गया। औसतन लोग प्रतिदिन सात घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं। यानी साल भर में करीब 1800 घंटे यानी पूरे 75 दिन मोबाइल पर निकल जाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल न मिलने पर घबराहट (नोमोफोबिया), नींद में कमी, तनाव बढ़ना और बार-बार फोन चेक करने की मजबूरी जैसे व्यवहारगत लक्षण बढ़ते जा रहे हैं। बच्चों और किशोरों में इसका असर और भी गंभीर है। किशोरों में अवसाद का खतरा बढ़ रहा है और 10–14 वर्ष के बच्चों में दिमागी विकास प्रभावित हो रहा है।

    मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकराल रूप ले लेंगी

    अत्यधिक मोबाइल चलाने के कारण किशोरों में आत्मविश्वास में कमी और वास्तविक जीवन से दूरी बढ़ रही है। चूंकि, यह उम्र सीखने, समझने और सामाजिक कौशल विकसित करने की होती है, ऐसे में अत्यधिक स्क्रीन टाइम उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके लिए स्कूलों में एक मॉडल बनाने की आवश्यकता है। समय रहते यदि मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो जल्द मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकराल रूप ले लेंगी।
    उपाय

        फोन पार्किंग जोन बनाएं
        रोजाना मोबाइल उपयोग का समय तय करें।
        अनावश्यक एप्स के नोटिफिकेशन बंद कर दें। इससे बार-बार फोन देखने की आदत कम होगी।
        इंटरनेट मीडिया एप दिन में 2-3 बार ही खोलें। इनके उपयोग के लिए टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं।
        रात में सोते समय मोबाइल को अपने बिस्तर से दूर रखें।
        दिनभर में कुछ ऐसा समय तय करें, जब मोबाइल से दूर रहेंगे। जैसे खाना खाते समय, पढ़ाई के समय या परिवार के साथ बैठते समय।
        खाली समय में मोबाइल के बजाय किताब पढ़ें, संगीत सुनें, वाक पर जाएं।
        घर में एक फोन पार्किंग जोन बनाएं, जहां सभी फोन रख दें और बार-बार हाथ में न लें।

    इन 5 तरीकों से छुड़ाएं बच्चे की फोन लत

    बच्चों की इन गलतियों को न करें नज़रअंदाज, तुरंत टोके वरना हाथ से निकल जाएगा आपका बच्चा

    स्क्रीन टाइम करें कंट्रोल 

    अपने बच्चे के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने के लिए एक सीमित समय निर्धारित करें. उदाहरण के लिए, आप उन्हें दिन में केवल 1-2 घंटे के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने की परमिशन दे सकते हैं.

    स्मार्टफोन-फ्री एरिया बनाएं

    अपने घर में एक स्मार्टफोन-फ्री एरिया बनाएं. उदाहरण के लिए, आप अपने डाइनिंग या बेडरूम में स्मार्टफोन का उपयोग बिल्कुल न करें. 

    ऑफलाइन एक्टिविटीज पर ध्यान दीजिए

    अपने बच्चे के लिए ऑप्शनल एक्टिविटीज का ऑप्शन दीजिए, जो उन्हें स्मार्टफोन से दूर रखें. उदाहरण के लिए, आप उन्हें खेल, बुक रीडिं, या कला बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं.

    निगरानी रखें

    अपने बच्चे के स्मार्टफोन का उपयोग करने पर निगरानी रखें. आप फोन में पैरेंट्ल कंट्रोल एप्लीकेशन इंस्टॉल कर सकते हैं जिससे आपका बच्चा फोन पर क्या देख रहा है, इसको आसानी से ट्रैक कर सकते हैं. 

    रात में फोन चलाने से रोकें

    अपने बच्चे के साथ बातचीत करें और उन्हें स्मार्टफोन की लत के बारे में समझाएं. इसके अलावा रात के समय बच्चे को फोन बिल्कुल न दें. इससे बच्चे की आंख और स्किन दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है. 

    फोन की लत से होने वाले नुकसान 

        नींद की कमी
        अवसाद
        चिड़चिड़ापन
        ध्यानकेंद्रित करने में परेशानी
        आत्मसम्मान की कमी

     

  • उच्च शिक्षा विभाग की पहल: MP में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य हेतु स्टेट टास्क फोर्स बनी

    भोपाल 

    कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर देशभर में बढ़ रही चिंता बढ़ रही है, इसे देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने इसे प्राथमिकता पर रखा है, उच्च शिक्षा विभाग ने इस दिशा में ठोस और व्यापक कदम उठाने की शुरुआत कर दी है। प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल टास्क फोर्स (NTF) के निर्देशों के बाद स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन कर उसे सक्रिय कर दिया है, जो अब पूरे राज्य में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी और सुधार की रूपरेखा तय कर रही है।

    उल्‍लेखनीय है कि NTF द्वारा आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहल केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि “राज्य के विद्यार्थियों के लिए एक सुरक्षित, सहयोगी और दबावमुक्त शैक्षणिक माहौल” तैयार करने की दिशा में सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रयास है।

    STF के हाथ में मानसिक स्वास्थ्य सुधार की कमान

    NTF के निर्देशों के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने एक स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है । यह राज्य में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं और रोकथाम उपायों पर केंद्रित नीतिगत हस्तक्षेपों के लिए योजना एवं निर्देश जारी कर रही है। एसटीएफ के अध्‍यक्ष आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा है। ओएसडी डॉ. उषा के. नायर को इसका सदस्य सचिव नियुक्‍त किया गया है। एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है । यह एक बहु-विभागीय तंत्र है जो विद्यार्थियों की चुनौतियों को व्यापक दृष्टि से देखेगा।
    स्टेट टास्क फोर्स (STF) क्या करेगी?

    राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श से जुड़े उपायों की निगरानी, NTF के निर्देशों के अनुपालन का मूल्यांकन, कोचिंग व कॉलेज परिसरों का मानसिक स्वास्थ्य ऑडिट, हेल्पलाइन, काउंसलिंग, मनोसामाजिक समर्थन की व्यवस्था को मजबूत करना, जिला स्तरीय DTF को दिशा देना और उनकी रिपोर्ट की समीक्षा, आत्महत्या रोकथाम से जुड़े जोखिम कारकों की पहचान और सुधार को बढ़ावा, राज्य सरकार को नियमित सिफारिशें और नीतिगत सुझाव
    शैक्षणिक संस्‍थानों में नोडल अधिकारियों की होगी नियुक्ति

    सभी सुधारों के समन्वय प्रभावी हो, इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी शासकीय एवं निजी शैक्षणिक संस्‍थानों को नोडल अधिकारी नियुक्‍त करने के निर्देश दिए हैं। इसमें सरकारी विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालकों एवं सभी शासकीय महाविद्यालय शामिल हैं।
    जिला स्तरीय टास्क फोर्स (DTF) का गठन अनिवार्य

    राज्य स्तर के प्रयास प्रभावी रूप से जिलों तक पहुँचे इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय टास्क फोर्स (DTF) का गठन भी अनिवार्य कर दिया है। डीटीएफ की अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे, जबकि अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी और तकनीकी, चिकित्सा तथा स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे।
    ये जिम्मेदारी रहेगी डीटीएफ की 

        कोचिंग संस्थानों के पंजीयन की निगरानी करना।
        परामर्श सेवाओं की उपलब्धता कराना।
        STF–NTF निर्देशों के क्रियान्वयन कराना।
        शैक्षणिक परिसरों की सुरक्षा पर निगरानी रखना।

    कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन अनिवार्य 

    उच्च शिक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी जिले में बिना पंजीयन के कोई भी कोचिंग संस्था संचालित न हो। यह कदम विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, अनियमित प्रबंधन और अनुशासनहीन वातावरण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    इसलिए जरूरी हैं ये कदम

    देशभर में मानसिक तनाव और परीक्षा दबाव से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि समस्या केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि संस्थागत संरचना से भी जुड़ी है, जहाँ गाइडलाइन, परामर्श, निगरानी और संवाद की कमी विद्यार्थियों को अकेला कर देती है। एसटीएफ और डीटीएफ का गठन इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।

     

  • मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी मूल्य बढ़ाएगी नई कलेक्टर गाइडलाइन, जिलों से जिला समितियों को भेजे जाएंगे प्रस्ताव

    भोपाल
    मध्य प्रदेश में एक बार फिर से प्रापर्टी की दरें बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन (प्रापर्टी की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव) बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इस संबंध में महानिरीक्षक पंजीयन अमित तोमर ने बुधवार को आदेश जारी किया है।

    आदेश के अनुसार नई गाइडलाइन का प्रस्ताव पहले सभी जिलों की उप जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा बनाकर 15 जनवरी 2026 तक जिला मूल्यांकन समितियों को भेजना होगा। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति प्रस्तावित गाइडलाइन को लेकर अधिसूचना जारी कर लोगों व राजनीतिक दलों से सुझाव लेगी।

    31 मार्च से नई दरें लागू होंगी

    इन सुझावों पर चर्चा के बाद आवश्यकता होने पर संशोधन कर 30 जनवरी तक प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा। सभी जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा 15 फरवरी तक गाइडलाइन का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज दिया जाएगा। इस प्रस्ताव पर बोर्ड शासन से चर्चा के बाद 31 मार्च से प्रदेशभर में प्रापर्टी की नई दरें लागू कर देगा।

    जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब एक लाख 12 हजार में से 74 हजार स्थानों पर प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त अधिक होती है। विभिन्न जिलों में इन स्थानों का पंजीयन और राजस्व अधिकारियों द्वारा एआई सहित अन्य माध्यमों से सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे के बाद ही तय होगा कि कितने स्थानों पर प्रापर्टी की दरों में वृद्धि की जानी है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 60 हजार स्थानों पर प्रापर्टी की दरों में वृद्धि की गई थी। हालांकि आवासीय आरसीसी निर्माण और सभी क्षेत्रों में आरबीसी, टिनशेड, कच्चा कवेलू के लिए प्रचलित निर्माण दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई थी।

    इन बिंदुओं का ध्यान रखना होगा

        स्थानों में दरें निर्धारित करने (यथावत, वृद्धि या कमी) नये स्थान व कालोनी जोड़े जाने की स्थिति में दरें प्रस्तावित किए जाने के लिए आवश्यक अनुमतियों की जानकारी एवं दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हों।

        ऐसे स्थान जहां भूमि अधिग्रहण हो रही है या होने की संभावना है तो स्थानों व अधिग्रहण भूमि के आसपास के क्षेत्रों में होने वाले संभावित विकास को दृष्टिगत रखते हुए दरें प्रस्तावित की जाएं।

        मूल्य सूचकांक तथा नगर व ग्राम में हुए और प्रस्तावित विकास को दृष्टिगत रखना होगा।

        दरें यथासंभव वास्तवित रूप से प्रचलित दरों के अनुरूप हों।

        पिछले सालों की निर्माण के लिए तय लागत दरों को ध्यान में रखते हुए प्लाट आदि की दरें निर्धारित की जाएं।

     

  • नई गाइडलाइन पर शिक्षा जगत असहमत: प्राचार्यों पर बढ़े बोझ को लेकर विरोध तेज

    रायपुर

    आवारा कुत्तों पर नियंत्रण को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा जारी नए निर्देशों का शिक्षकों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्कूल परिसरों में कुत्तों की एंट्री रोकने की जिम्मेदारी सीधे प्राचार्यों पर डाल दी गई है, जिसे शिक्षक संघ ने “अतिरिक्त और अव्यावहारिक बोझ” बताते हुए वापस लेने की मांग की है.

    दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों को सुरक्षा उपायों के निर्देश दिए हैं. इसके बाद छत्तीसगढ़ शासन ने आधा दर्जन से अधिक विभागों की जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधित पत्र जारी किया है.

    राज्य शासन ने सभी विभागों को आदेश जारी करते हुए सरकारी व प्राइवेट स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की एंट्री रोकने के काम में लगा दिया है. इसके लिए 7 दिन के भीतर ऐसे स्थानों की पहचान कर फेंसिंग, गेट और अन्य सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएंगे, जहां आवारा कुत्ते घुस जाते हैं. हर स्थान के लिए एक नोडल अफसर की नियुक्ति भी की जाएगी.

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बड़ा अभियान
    पहले चरण में स्कूलों के प्राचार्य, अस्पतालों के सीएमओ/अधीक्षक, बस स्टैंड/स्टेशन के मैनेजर अपने परिसर में कुत्तों की एंट्री के रास्तों की पहचान करेंगे और उन्हें रोकने के उपाय करेंगे. जरूरत पड़ने पर अन्य शासकीय विभागों से सहयोग भी लिया जाएगा. नोडल अफसर इस बात की निगरानी करेंगे कि कुत्तों की एंट्री पूरी तरह बंद रहे और वे परिसर के आसपास भी न भटकें.

    विभागों की जिम्मेदारी तय:
    पशुधन विकास विभाग

        आवारा कुत्तों की नसबंदी
        आरक्षित आश्रय स्थलों पर पशु चिकित्सक की नियुक्ति

    स्वास्थ्य विभाग

        सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन व इम्यूनोग्लोबुलिन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराना

    लोक निर्माण विभाग (PWD)

        कुत्तों की एंट्री वाले स्थानों की पहचान
        फेंसिंग, बाउंड्रीवॉल और गेट का निर्माण

    शिक्षा विभाग

        सभी स्कूलों में छात्रों व कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था
        कुत्तों के काटने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराना

    नगर निगम/नगर पालिका/पंचायत

        हर तीन महीने में निरीक्षण कर कुत्तों की एंट्री बंद होने की पुष्टि
        आवारा कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी की व्यवस्था
        कुत्तों के लिए बाड़ा, चिकित्सक और देखभाल कर्मचारियों की नियुक्ति
        प्रत्येक वार्ड में कुत्तों के लिए भोजन स्थलों की व्यवस्था
        लोगों को स्ट्रीट डॉग गोद लेने के लिए प्रेरित करना

    खेल मैदान प्रबंधन

        आवारा कुत्तों की एंट्री रोकने सुरक्षा या ग्राउंड कीपिंग स्टाफ की तैनाती

    शिक्षकों पर नई जिम्मेदारी, संगठन ने जताया कड़ा विरोध

    इन निर्देशों में स्कूल प्राचार्यों को परिसर में आवारा कुत्तों की एंट्री रोकने, फेंसिंग की निगरानी, साफ-सफाई से लेकर अप्रिय घटना होने पर जिम्मेदारी संभालने जैसे कार्य सौंपे गए हैं. इस पर शालेय शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध जताया है.

    संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा- “शिक्षकों पर पहले से ही शैक्षणिक कार्यों के अलावा कई गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां हैं. अब आवारा कुत्तों को भगाने और सुरक्षा उपायों की जिम्मेदारी देना न सिर्फ अव्यवहारिक है, बल्कि शिक्षकों पर अनावश्यक बोझ डालने जैसा है. किसी अप्रिय घटना की स्थिति में संस्था प्रमुख को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत है.”

    उन्होंने मांग की कि यह निर्णय तुरंत वापस लिया जाए और आवारा कुत्तों के नियंत्रण की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपी जाए, जो इसका विशेषज्ञ विभाग है.

  • भोपाल में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट शिविर का हुआ सफल आयोजन

    बड़ी संख्या में एम.पी. ट्रांसको के पेंशनर्स ने उठाया शिविर का लाभ

    भोपाल
    भारत सरकार के डिजिटल इंडिया विजन के तहत ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के निर्देश पर मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा पेंशनर्स की सुविधा के लिए 20 नवंबर को भोपाल स्थित एम.पी. ट्रांसको के प्रशासनिक भवन, बिजली नगर, गोविंदपुरा में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। एम.पी. ट्रांसको के मुख्य वित्तीय अधिकारी मुकुल मेहरोत्रा ने बताया कि शिविर में पेंशनर्स को लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया समझाई गई। इससे उपस्थित पेंशनर्स को आधुनिक डिजिटल सुविधाओं का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ। शिविर का मुख्य उद्देश्य पेंशनर्स को डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जनरेट करने की सरल एवं त्वरित प्रक्रिया से अवगत कराना और उन्हें एक ही स्थान पर सहज सेवाएँ उपलब्ध कराना था।

     

  • भोपाल आबकारी विभाग द्वारा लगातार की जा रही कार्यवाही

    मैं एक और उल्लेखनीय कार्यवाही जिसमे हाई ब्रांड की भारी मात्र मैं विदेशीमदिरा बरामद 
     भोपाल 

    आबकारी आयुक्त श्री अभिजीत अग्रवाल ,कलेक्टर भोपाल श्री कोशलेंद्र विक्रम सिंह *के निर्देशन पर सहायक आबकारी आयुक्त श्री वीरेंद्र धाकड़ * के मार्गदर्शन और नियंत्रण कक्ष प्रभारी राम गोपाल भदौरिया के नेतृत्व में भोपाल जिले के आबकारी विभाग द्वारा आज दिनांक 21.11.25 को मुखबिर की सूचना के आधार पर गिन्नौरी मोहल्ला मैं मस्जिद के सामने से आरोपी राहुल यादव के रहवासी मकान से हाई ब्रांड विदेशी मदिरा की कुल  98पेटिया  जिसमे ब्लेंडर्सप्राइड ,ग्लेनलिविट ब्लैवकलेबल, रेडलबेल , जेम्सन, रणथम्भौर, जागरमास्टर,सिग्नेचर ऐब्सलूट वोडका , आइकोनिक, ग्रेगोस, बकार्डी,रॉयल चैलेंज ,हंड्रेडपाइपर,ब्लैकडॉग , इम्पीरियल ब्लू , ब्लैक न वाइट एलसीज़न, ओल्ड मोंक,बैकबेंचर,मैजिक्मोमेंट, ऑफ़िसर्चोईस, ब्लेंडर,मैकडॉवेल मार्क प्यूरिटी आदि ब्रांड शामिल है जप्त की गई है । मदिरा का कुल अनुमानित मूल्य 2060000/-( बीस लाख साठ हज़ार )लाख है मौके पर आरोपित गायत्री यादव को गिरफ्तार कर मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)क 34(2) के तहत प्रकरण कायम कर विवेचना मैं लिया गया है उक्त कार्यवाही व्रत प्रभारी नीरज कुमार दूबे द्वारा कायम किया गया जिसमे भोपाल के सभी मैदानी अधिकारियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा ।आरोपिया का बेटा राहुल यादव के विरुद्ध पूर्व मैं भी 34(2)का प्रकरण दर्ज किया गया है ।सहायक आबकारी आयुक्त श्री वीरेंद्र धाकड़ द्वारा बताया गया की  जिले के आबकारी बल द्वारा निरंतर महत्वपूर्ण कार्यवाहियां की जा रही है जो आगे भी लगातार जारी रहेगी ।