• राज्य गंगा समिति में 5 विशेषज्ञ सदस्य नामांकित

    भोपाल

    प्रदेश में प्रवाहित गंगा की सहायक नदियों में जल का सतत् पर्याप्त प्रवाह सुनिश्चित करने एवं उनमें प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण एवं उपशमन के लिए राज्य शासन ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ''राज्य गंगा समिति मध्यप्रदेश में 5 विशेषज्ञ सदस्य नामांकित किये गये है।

    सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार समिति में डॉ अभय सक्सेना, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, म.प्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल को विषय विशेषज्ञ प्रदूषण अनुश्रवण,  कार्तिक सप्रे, समन्वयक, नर्मदा समग्र एनजीओ, भोपाल को नदी संरक्षण, प्रो. एस.पी. गौतम, पूर्व अध्यक्ष केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली को पर्यावरण संरक्षण,  सुनील चतुर्वेदी, संचालक, विभावरी संस्थान को जल संरक्षण और डॉ, जे.पी. शुक्ला, से.नि. प्रिंसिपल सांईटिस्ट, सी.एस.आई.आर./एमपी को वॉटर रिसोर्स मैनेजमेंट के लिए नामांकित किया गया है।

    नामित सदस्यों का कार्यकाल 2 वर्ष की अवधि के लिए होगा। नामित सदस्यों को यात्रा भत्ता/दैनिक भत्ता और सिटिंग फीस राज्य सरकार के नियमों के अनुसर देय की जायेगी।

     

  • अति उच्च दाब ट्रांसमिशन लाइन के लिए निजी भूमि मालिकों को बढ़ी हुई प्रतिपूर्ति, टॉवर भूमि का 200% मिलेगा मुआवजा

    अति उच्च दाब ट्रांसमिशन लाइन बिछाने पर निजी भूमि स्वामियों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि

    टॉवर लगाने के लिये उपयोग में ली गई भूमि के बाजार मूल्य की 200 प्रतिशत मिलेगी क्षतिपूर्ति राशि

    भोपाल 

         ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि राज्य शासन द्वारा प्रदेश में 66 केव्ही या उससे अधिक क्षमता के विद्युत टॉवर लगाने तथा विद्युत पारेषण के लिये टॉवर लाइन बिछाने के लिये उपयोग में ली जाने वाली भूमि के प्रतिपूर्ति के संबंध में नये निर्देश जारी किये गये हैं। अब भूमि पर टॉवर लाइन बिछाने में हुई क्षति के लिये दी जाने वाली क्षतिपूर्ति के अतिरिक्त भूमि स्वामी को टॉवर की स्थापना के लिये उपयोग में ली गई भूमि के क्षेत्रफल के प्रचलित बाजार मूल्य का 200 प्रतिशत क्षतिपूर्ति राशि के रूप में दिया जायेगा। क्षतिपूर्ति के संबंध में भूमि निर्धारण के लिये टॉवर के 4 लेग के भीतर की भूमि के अतिरिक्त प्रत्येक ओर एक मीटर भूमि मुआवजे के लिये पात्र होगी। जिला कलेक्टर क्षतिपूर्ति राशि के निर्धारण के लिये प्राधिकृत होंगे। विद्युत पारेषण लाइन के नीचे टॉवर के दोनों ओर के मार्गाधिकार (Row) में स्थित भूमि के क्षेत्रफल के बाजार मूल्य (कलेक्टर गाइड लाइन) की 30 प्रतिशत प्रतिपूर्ति राशि दी जायेगी।

        विद्युत पारेषण लाइन के मार्गाधिकार के भीरत किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं होगी। विशेष मामलों में निर्माण से पहले विद्युत निरीक्षक एवं विद्युत निरीक्षकालय के सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन प्राप्त करना जरूरी होगा। ऐसे प्रकरण जिनमें वैकल्पित क्षतिपूर्ति निगम/निकाय के माध्यम से प्राप्त होने वाली हो अथवा प्राप्त हो गई हो, के संबंध में निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान निगम/निकाय को किया जायेगा। क्षतिपूर्ति भुगतान डिजिटल माध्यम से एक बार ही किया जायेगा। यह क्षतिपूर्ति राशि प्राप्त करने के बाद भी भूमि पूर्ववत भूमिस्वामी के नाम पर दर्ज रहेगी। मात्र कैफियत कॉलम में ट्रांसमिशन टॉवर-लाइन का विवरण दर्ज किया जायेगा। यह निर्देश केवल विद्युत पारेषण लाइन के लिये प्रभावी होंगे। इसके अंतर्गत विद्युत उप पारेषण एवं वितरण लाइन शामिल नहीं है। यह निर्देश 14 नवम्बर 2025 से प्रभावशील हो चुके हैं।

     

  • भोपाल में सब्जियों की कीमतों में आग, एक हफ्ते में टमाटर-मटर के दाम तीन गुना बढ़े

    भोपाल
     मौसम में बदलाव के साथ ही इसका असर सब्जियों व फलों पर देखने को मिल रहा है. राजधानी भोपाल की अलग-अलग सब्जी मंडी में सब्जियों के दाम में इजाफा देखा गया है. मध्यप्रदेश में बेमौसम बारिश ने सब्जी उत्पादक किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है, जिसका सीधा असर प्रदेश भर को मंडियों में दिखाई दे रहा है. भोपाल की मंडी से सब्जियों के ताजा भाव.

    थोक व्यापारियों का कहना है कि टमाटर, मटर, धनिया, पालक, मेथी और लौकी जैसी हरी व मौसमी सब्जियों के दाम एक सप्ताह में दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं. शहर की मंडी में पहुंच रही ज्यादातर सब्जियां दूसरे जिलों से मंगवानी पड़ रही है. सप्लाई कम और मांग स्थिर रहने से दामों में और उछाल बना हुआ है. व्यापारी अनुमान लगा रहे हैं कि कीमतें अगले 15-20 दिन तक इसी स्तर पर रह सकती हैं.

     बिट्टन मार्केट सब्जी बाजार में सब्जी की दुकान लगाने वाले पप्पू कुरैशी ने बताया कि बीते दिनों हुई बारिश के चलते मंडी में सब्जियों की आवक कम हो रही है. ऐसे में बारिश का असर दाम में उछाल के रूप में देखने को मिला है. पिछले तीन दिनों के अंदर ही टमाटर के दाम करीब ₹300 कैरेट तक बढ़ गए. पहले जो टमाटर 1,000-1,200 रुपए में बिक रहा था. वहीं अब ₹1,400 कैरेट पहुंच चुका है.

    बता दें, इन दिनों करोद मंडी में नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, नरसिंहपुर, रायसेन, विदिशा और सीहोर से आने वाली सब्जियों की आवक कम है. पंजाब में बाढ़ से आलू की फसल खराब होने से आवक बेहद कम है. मटर की अभी लोकल आवक नहीं है, जो भी मटर आ रहा है वह दूसरे राज्यों से आ रहा है. आवक कमजोर होने से सब्जियों के दाम बढ़े है.

    इन सब्जियों के दाम बढ़े
    सब्जी दाम
    मुनगा ₹200/किलो
    मटर ₹150/किलो
    धनिया ₹125/किलो
    ग्वारफली ₹70/किलो
    भिंडी ₹70/किलो
    गिलकी ₹60/किलो

  • गुना हादसा: तेज रफ्तार कार ट्रक से टकराई, तीन युवकों की मौत

    गुना 

     गुना में गुरुवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। जहां बजरंगगढ़ थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार कार ट्रक से टकरा गई। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए। जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    दरअसल, गुना-आरोन रोड पर बजरंगगढ़ गांव के पास यह हादस सुबह करीब 3 बजे हुई। जब सात दोस्त एक कार में सवार होकर आरोन से गुना की तरफ निकले थे। इसी दौरान उनकी कार ट्रक से भिड़ गई। टक्कर इतनी भीषण थी की कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। वहीं, तीन दोस्तों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

    क्या बोले अधिकार?

    इस घटना को लेकर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़ित एक शादी में शामिल होने के लिए आरोन से गुना आ रहे थे, जब उनकी कार आगे चल रहे एक ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार में सवार तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

    दो की हालत गंभीर

    अधिकारी ने बताया कि पुलिस को अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल करना पड़ा। उन्होंने बताया कि चार घायलों में से दो की हालत गंभीर है। उन्हें इलाज के लिए भोपाल रेफर किया गया है। 

  • माओवादी मुठभेड़ के शहीद आशीष शर्मा को दी गई आखिरी सलामी, बालाघाट के अधिकारी और जवानों ने जताया दुख

     बालाघाट

     बुधवार को माओवादी मुठभेड़ में सर्वोच्च बलिदान देने वाले हाकफोर्स निरीक्षक आशीष शर्मा की गुरुवार सुबह श्रद्धांजलि यात्रा निकाली गई। यह यात्रा शहर के आंबेडकर चौक से पुलिस लाइन तक निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में हाकफोर्स, सीआरपीएफ, कोबरा और जिला पुलिस बल के जवानों के साथ कलेक्टर मृणाल मीना, राजनेता व आम लोग भी शामिल हुए।

    बलिदानी आशीष की पार्थिव देह फूलों से सजे शव वाहन में रखकर पुलिस लाइन तक लाई गई। इस दौरान जवानों के चेहरे पर जाबांज साथी को खोने का दुख झलक रहा था। बलिदानी आशीष के परिजनों के साथ कई जवान भी रो पड़े।

    पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा भी खुद को नहीं संभाल सके और अपने साहसी, निर्भीक और वीरता पदक विजेता जवान को खोने पर उनके भी आंसू छलक पड़े। जवानों ने एसपी के गले लगकर एक-दूसरे को ढांढस बांधा। पुलिस लाइन में बलिदानी आशीष शर्मा को सभी ने बारी-बारी से पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

    राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

    जानकारी के अनुसार, बालाघाट पहुंचे बलिदानी के परिजन श्रद्धांजलि यात्रा के बाद आशीष शर्मा का शव अपने साथ पैतृक गांव बोहानी (नरसिंहपुर) ले गए। यहीं, उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे।

    बता दें कि दो बार के वीरता पदक विजेता निरीक्षक आशीष शर्मा 19 नवंबर को छत्तीसगढ़ के बोरतालाब के जंगल क्षेत्र में माओवादियों से हुई मुठभेड़ में बलिदान हो गए थे। वह बालाघाट की किन्ही चौकी के प्रभारी थे। बुधवार को हुए ज्वाइंट ऑपरेशन को आशीष शर्मा ही लीड कर रहे थे।

    जनवरी में होनी थी शादी… 29 की उम्र में 2 बार मिल चुके थे गैलेंट्री अवॉर्ड

    छत्तीसगढ़-MP बॉर्डर पर नक्सलियों के साथ एनकाउंटर में मध्य प्रदेश के पुलिस इंस्पेक्टर आशीष शर्मा शहीद हो गए. हॉकफोर्स की बालाघाट यूनिट के इंस्पेक्टर नरसिंहपुर के बोहानी गांव के निवासी थे. जनवरी में आशीष की शादी होनी थी. 

    बालाघाट में पदस्थ DSP संतोष पटेल ने लिखा, ''नमन है उस मां को जो कल तक शाम को बेटे से बात करती रही होगी कि एक माह बाद शादी में क्या करेंगे..बहू का स्वागत ऐसे करेंगे और आज रो रही होंगी.''

    शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा (29) के पिता देवेंद्र शर्मा किसान हैं और शर्मिला शर्मा गृहणी. छोटा भाई अंकित शर्मा पढ़ाई कर रहा है. 2016 में SAF में बतौर उप निरीक्षक (SI) भर्ती हुए आशीष 2018 में हॉकफोर्स में आए थे और नक्सलियों के खिलाफ कई सफल ऑपरेशन कर चुके थे. 

    साल 2022 में बालाघाट के हर्राटोला जंगल में इनामी नक्सली रूपेश उर्फ हुंगा का एनकाउंटर करने पर आशीष को गैलेंट्री मेडल से नवाजा गया.

    इसके अलावा, 2023 में कुख्यात नक्सली महिला सरिता और सुनीता को ढेर करने का खिताब भी उनके नाम दर्ज है. इसी साल फरवरी में तीन महिला नक्सलियों को मार गिराने के बाद आशीष को 'आउट ऑफ टर्न' प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर बनाया गया था. फिलहाल, इंस्पेक्टर आशीष शर्मा बालाघाट की किरनापुर थाना इलाके की कीन्ही चौकी में पदस्थ थे. 

    राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) रेंज के IG अभिषेक शांडिल्य ने बताया, MMC यानी महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ जोन में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर दोनों राज्यों के सुरक्षाकर्मियों की एक जॉइंट टीम एंटी-नक्सल ऑपरेशन पर निकली थी.  इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर यह ऑपरेशन शुरू किया गया था.  

    छत्तीसगढ़ के बोरतलाव इलाके से सटे कंघुर्रा के जंगल में फायरिंग हुई. इस दौरान MP पुलिस की हॉक फोर्स के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा गोलीबारी में घायल हो गए. पुलिस के मुताबिक, उन्हें इलाज के लिए छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ एयरलिफ्ट किया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. 

    शहीद के भाई को नौकरी देगी MP सरकार 

    MP के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शर्मा की मौत पर दुख जताया और कहा कि नियमों के मुताबिक उनके परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी.

    उन्होंने कहा, "हमें नरसिंहपुर जिले के हमारे बहादुर सैनिक आशीष शर्मा के बारे में बहुत दुखद खबर मिली, जो छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ एक जॉइंट ऑपरेशन के दौरान शहीद हो गए. सरकार इस दुख की घड़ी में उनके दुखी परिवार के सदस्यों के साथ है."

    CM यादव ने रिपोर्टर्स से कहा, "शहीद सैनिक के छोटे भाई को सरकारी नौकरी में भर्ती किया जाएगा और परिवार को सरकारी पॉलिसी के अनुसार सभी सुविधाएं और मदद दी जाएगी."

     लेकिन उन्होंने कहा कि यह घटना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने से सरकार को नहीं रोक पाएगी.

  • मध्य प्रदेश के शहडोल में सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं, भिंडी और टमाटर सबसे महंगे

    शहडोल
     नवंबर का महीना चल रहा है और कड़ाके की ठंड भी पड़ रही है. इन दिनों हरी सब्जियों के बढ़े हुए दामों ने आम जनता की जेब ढीली कर दी है. अचानक ही सब्जियों के बढ़े हुए दामों से लोगों का हाल-बेहाल है. जिस सीजन में हरी सब्जियों की भरमार होती है, आखिर अचानक से सब्जियों के दाम कैसे बढ़ गए, आईए जानते हैं.

    हरी सब्जियों के बढ़ गए दाम

    इन दिनों हरी सब्जियों के दाम अचानक ही बड़े हुए हैं. जिससे आम जनता का हाल बेहाल है. सर्दियों के सीजन में काफी संख्या में हरी सब्जियां आती हैं, लेकिन इस बार सब्जियों के दाम काफी चढ़े हुए हैं. सब्जी खरीदने बाजार आए रिंकू तिवारी बताते हैं कि, ''अब तक तो काफी हरी सब्जियां मंडी में आने लगती हैं. लेकिन इन दिनों अचानक सब्जियों के दाम काफी हाई हो गए हैं जिससे आम इंसान को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. क्योंकि हर सब्जी काफी महंगी हो चुकी है. कुछ सब्जियों को छोड़ दें तो ज्यादातर सब्जी यहां 50 रुपए किलो पर ही है. 

    जिससे रसोई का बजट बिगड़ गया है.''

    आसमान छू रहे सब्जियों के दाम

    शहडोल में पिछले कई सालों से सब्जी बेचकर अपना घर परिवार चलाने वाले राम प्रताप साहू बताते हैं कि, ''वर्तमान में सब्जियों के दाम अचानक ही बढ़ गए हैं, इसका असर ये हुआ है कि जो ग्राहक हर दिन दो किलो से लेकर 5 किलो तक सब्जियों की खरीदी करते थे, वो ग्राहक भी अब एक पाव आधा किलो में आ गए हैं, अभी दो-तीन दिन पहले ही टमाटर अचानक से एक-दो दिन के लिए ₹80 प्रति किलो तक बिका है, लेकिन फिर एक दो दिन में ही दाम ₹20 तक दाम घट भी गए और अभी वर्तमान में खुले रेट में टमाटर ₹60 किलो बिक रहा है.

    बदलते मौसम ने सब्जियों के दाम कर दिए हाई

    आखिर अचानक ही हरी सब्जियों के दाम क्यों बढ़ गए, सब्जी व्यापारी अमित गुप्ता बताते हैं कि "इन दिनों सब्जी खाने वालों के लिए आलू प्याज ही एक बड़ा सहारा बने हुआ है, क्योंकि पिछले कई महीनों से आलू और प्याज के दाम स्थिर हैं. आलू जहां वर्तमान में खुले रेट में 25 रुपए किलो की दर से बिक रहा है, वहीं प्याज 20 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रही है, इस बार आलू प्याज के दाम नहीं बढ़े हैं. लेकिन हरी सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं."

    सब्जियों की क्वालिटी में गिरावट

    पिछले कई सालों से सब्जियों की खेती करने वाले किसान राम सजीवन कचेर बताते हैं कि "अचानक से हरी सब्जियों के दाम बढ़ने की वजह ये है कि पिछले कुछ दिनों में जो बारिश हुई है, उससे मौसम में परिवर्तन हुआ है. उससे किसानों की सब्जियों की फसल में फर्क पड़ा है, सब्जियां भी अधिक मात्रा में और अच्छी क्वालिटी में आ नहीं रही हैं, जिससे सब्जियों के दाम बढ़े हुए हैं. एक तरह से कहा जाए तो लोकल सब्जियां भी उतनी मात्रा में आ नहीं पा रही हैं."

    सब्जी मंडी में बारिश का कहर

    अचानक इस बदले हुए मौसम और बारिश की वजह से खेतों में पानी भर गया है. फसल पर तरह-तरह के कीटों का अटैक हुआ है. जिससे किसानों की फसल का नुकसान तो हुआ ही है, साथ ही जो किसान सुबह-सुबह अलग-अलग वैरायटी की कई सब्जियां लेकर आ जाते थे. वह किसान अब ठंड से बचते नजर आ रहे हैं. फसलों में भी उनकी कमी आई है."

    सब्जी मंडी में बारिश का कहर

    अचानक इस बदले हुए मौसम और बारिश की वजह से खेतों में पानी भर गया है. फसल पर तरह-तरह के कीटों का अटैक हुआ है. जिससे किसानों की फसल का नुकसान तो हुआ ही है, साथ ही जो किसान सुबह-सुबह अलग-अलग वैरायटी की कई सब्जियां लेकर आ जाते थे. वह किसान अब ठंड से बचते नजर आ रहे हैं. फसलों में भी उनकी कमी आई है.

  • मध्य प्रदेश में पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा की शुरुआत, कल से आम यात्री भी हेलीकाप्टर से उड़ान भर सकेंगे

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को नई गति देने के उद्देश्य से PM श्री हेली पर्यटन सेवा का शुभारंभ आज से हो गया। इस सेवा के माध्यम से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक कम समय में सुरक्षित और सुगम यात्रा की सुविधा मिलेगी। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा शुरू की गई इस पहल के साथ प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने इंटर-स्टेट हेलीकॉप्टर टूरिज़्म सेवा शुरू की है। 

    तीन रूटों पर होगी हेलीकॉप्टर सेवा
    हेली पर्यटन सेवा फिलहाल तीन सेक्टरों में प्रारंभ की गई है और यह सप्ताह में पांच दिन उपलब्ध रहेगी। यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी होने से यात्रियों को अत्यधिक लाभ मिलेगा। उज्जैन में महाकाल दर्शन कुछ ही मिनटों में होंगे। वहीं, भोपाल से पंचमढ़ी करीब 1 घंटे और उज्जैन – ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग यात्रा 20–40 मिनट का समय लगेगा।  पंचमढ़ी में जॉय राइड सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। एक हेलीकॉप्टर में 6 यात्री यात्रा कर सकेंगे।  सेवा की बुकिंग www.flyola.in, https://air.irctc.co.in/flyola  और https://transbharat.in/ पर उपलब्ध होगी। 

    मध्यप्रदेश में पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा की शुरुआत आज, गुरुवार से हो गई है। टूरिस्ट 3 टाइगर रिजर्व- कान्हा, बांधवगढ़-STR (सतपुड़ा टाइगर रिजर्व) के साथ ईको टूरिज्म सेक्टर और स्पिरिचुअल सेक्टर में हेलिकॉप्टर से जा सकेंगे। सप्ताह में 5 दिन तक उड़ान रहेंगी।

    1 नवंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सेवा की औपचारिक शुरुआत कर दी थी, लेकिन नियमित उड़ानें 20 नवंबर से शुरू होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस कार्यक्रम में 20 नवंबर से हेलिकॉप्टर सेवा की शुरुआत करने की बात कही थी, लेकिन शेड्यूल में आज का दिन शामिल नहीं है। इसलिए आम व्यक्तियों के लिए बुकिंग नहीं की गई है।

    डबल इंजन वाले हेलिकॉप्टर नई हेलिकॉप्टर सेवा में शामिल सभी हेलिकॉप्टर डबल इंजन वाले हैं। ताकि, उसमें बैठे यात्री सुरक्षित रह सके। सुरक्षा के पैमाने जानने के लिए जनप्रतिनिधियों को पहले भोपाल से पचमढ़ी, मढ़ई के लिए सांसद दर्शनसिंह चौधरी, राज्यसभा सांसद माया नारोलिया, विधायक ठाकुर दास नागवंशी, विजय पाल सिंह आदि ने सफर किया। बकायदा, इनका वजन कितना है? यह भी जांचा गया। ताकि, हेलिकॉप्टर में ज्यादा वजन न हो। छोटे-छोटे रूट्स बनाए गए हैं। ताकि इमरजेंसी लैंडिंग की सुविधा हो। यही बैकअप स्थान चिन्हित किए गए हैं।

    पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
    पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि हेलि पर्यटन सेवा पर्यटन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम है। इससे तीर्थयात्रियों को आसान यात्राएं मिलेंगी और प्रदेश के धार्मिक, वन्य एवं एडवेंचर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला के अनुसार इस सेवा से पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पर्यटकों को शानदार और यादगार यात्रा अनुभव मिलेगा। पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, हेलि पर्यटन सेवा से मध्यप्रदेश धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का प्रमुख हब बनने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ गया है।

    जबलपुर में मंत्री ने किया सफर एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में पीएमश्री पर्यटन हेलिकॉप्टर सेवा शुरू हो गई है। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट से लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने सुबह 11.20 बजे इस सेवा का शुभारंभ किया। अब जबलपुर से कान्हा, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, धार्मिक स्थल मैहर, चित्रकूट और अमरकंटक पहुंचना आसार होगा। यह सेवा सप्ताह में पांच दिन रहेगी। केंद्रीय विमानन मंत्रालय और मप्र पर्यटन बोर्ड की देखरेख में फ्लाई ओला कंपनी इसका संचालन करेगी। जबलपुर से सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को पर्यटक उड़ान भर सकेंगे।

    टूरिस्ट हब है महाकौशल इस मौके पर मंत्री सिंह ने कहा कि महाकौशल टूरिस्ट हब है। जहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। हवाई सेवा के माध्यम से यहां आने वाले पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिल गई है। बहुत ऐसे पर्यटक आते हैं, जो कम समय में ज्यादा से ज्यादा स्थानों पर घूमना चाहते हैं, लेकिन सड़क मार्ग से यह मुमकिन न था।

    पीएमश्री हेलिकॉप्टर सेवा ने इस समस्या को खत्म कर दिया है। इससे जहां कम समय में ज्यादा से ज्यादा स्थानों तक पहुंचना आसान हो गया है, वहीं रोजगार भी बढ़ेगा। कंपनी के अधिकारी ने बताया कि भेड़ाघाट के पास हेलीकॉप्टर का बेस बनाया है। जहां से पर्यटकों को उनके पसंद के पर्यटन स्थल ले जाया जाएगा।

    इस सेवा के लिए अलग-अलग दूरी के हिसाब से किराया तय किया गया है। जबलपुर से सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को पर्यटक उड़ान भर सकेंगे। सभी पर्यटन स्थलों में कंपनी ने हैलीकॉप्टर की सफल लैडिंग के लिए बेस बनाया है। पर्यटकों को पर्यटन स्थल के आसपास उतारने की व्यवस्था है। पर्यटक कंपनी के ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी ले सकते हैं।

    आध्यात्मिक सेक्टर
    आध्यात्मिक सेक्टर के अंतर्गत इंदौर–उज्जैन– ओंकारेश्वर मार्ग को जोड़ा गया है। इंदौर से उज्जैन तक 20 मिनट की उड़ान का अनुमानित किराया 5 हजार रूपये, उज्जैन से ओंकारेश्वर तक 40 मिनट की उड़ान का किराया 6 हजार 500 और ओंकारेश्वर से इंदौर लौटने का किराया लगभग 5 हजार 500 रूपये रखा गया है। इस सेक्टर के माध्यम से श्रद्धालु एक ही दिन में महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर दोनों ज्योर्तिलिंगों के दर्शन आसानी से कर सकेंगे।

    इको टूरिज्म सेक्टर 
    इको टूरिज्म सेक्टर में भोपाल से मढ़ई तक 40 मिनट की उड़ान का अनुमानित किराया 4 हजार रूपयेतथा मढ़ई से पचमढ़ी तक 20 मिनट की उड़ान का किराया 3 हजार रूपयेहै। इसके अतिरिक्त भोपाल से पचमढ़ी के लिए एक घंटे की सीधी उड़ान भी उपलब्ध रहेगी, जिसका किराया 5 हजार रूपयेप्रति यात्री है। पचमढ़ी में जॉय-राइड्स का विकल्प भी उपलब्ध होगा, जिससे प्रकृति–आधारित अनुभव और भी आकर्षक बनेगा।

    वाइल्डलाइफ़ सेक्टर 
    वाइल्डलाइफ़ सेक्टर में जबलपुर को कान्हा और बांधवगढ़ और से जोड़ा गया है। इनमें जबलपुर से मैहर की उड़ान का किराया 5 हजार रूपये,मैहर से चित्रकूट 2500 रूपये, जबलपुर से कान्हा 6,250 रूपये, बांधवगढ़ 3750 रूपये तथा अमरकंटक के लिए एक घंटे की उड़ान का किराया 5 हजार रूपये होगा। इस तेज कनेक्टिविटी से पर्यटक कम समय में अधिक स्थलों का भ्रमण कर सकेंगे। 

  • जल प्रदूषण और फ्लाई ऐश डंपिंग पर प्रशासन सख्त, विभागों को जांच के निर्देश

    ​जांजगीर-चांपा

    जिले के बिरगहनी ग्राम पंचायत में चूना पत्थर खदान संचालकों द्वारा किए जा रहे अवैध खनन से भूजल प्रदूषण और भूजल स्तर में भारी गिरावट के साथ उत्पन्न गंभीर पर्यावरणीय और जन स्वास्थ्य संकट पर जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है. ​खनिज अधिकारी ने कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग और क्षेत्रीय अधिकारी, पर्यावरण संरक्षण मंडल को शीघ्र जांच कर की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है.

    जिला प्रशासन ने यह कार्रवाई आरटीआई कार्यकर्ता विकास शर्मा द्वारा राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के सलाहकार को भेजे गए ई-मेल के संदर्भ में की है. इस ई-मेल में चूना पत्थर खदान संचालकों द्वारा अवैध खनन के साथ ही फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग से हो रहे गंभीर पर्यावरणीय खतरों का उल्लेख किया गया था.

    ​प्रमुख कार्रवाई और निर्देश
    कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग, जांजगीर-चांपा को चूना पत्थर खदान संचालकों द्वारा अवैध खनन, भूजल प्रदूषण और भूजल स्तर में गिरावट से संबंधित बिंदुओं की शीघ्र जांच कर की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है.

    वहीं ​क्षेत्रीय अधिकारी, पर्यावरण संरक्षण मंडल, बिलासपुर को अवैध खनन और फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग से उत्पन्न पर्यावरणीय संकट के बिंदुओं पर शीघ्र जांच करने और विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी खनिज शाखा को प्रेषित करने का निर्देश दिया है.

    ​खनिज अधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे जल्द से जल्द अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि मामले में वैधानिक और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके और जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोका जा सके.

  • जनजातीय उत्थान पर फोकस: सीएम साय ने कहा—छत्तीसगढ़ को मिला राष्ट्रीय सम्मान समुदाय के विकास का परिणाम

    अंबिकापुर

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। यह भव्य कार्यक्रम पीजी कॉलेज ग्राउंड में चल रहा है। इसे बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जुएल ओरांव, राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित अन्य गणमान्य उपस्थित हैं।

    जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू मुख्यमंत्री ग्राम अखरा विकास योजना का शुभारंभ करेंगी। इसके साथ ही जनजातीय समुदाय के प्रमुखों का सम्मान और जनजातीय विद्रोहों के नायकों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों को भी सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में जनजातीय विकास प्रदर्शनी और क्राफ्ट मेले का भी आयोजन किया गया है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ के नक्सल पीड़ित लोगों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की थी और यह देखकर वे बहुत खुश थे। ऐसे लोग जो पहले रायपुर नहीं देख पाए थे, वे राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में लगातार जनजातीय समुदाय के विकास के लिए काम किया जा रहा है। पीएम जनमन योजना में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य को सम्मान भी मिला है। बस्तर इलाके में नक्सलवाद की कमर टूट गई है। वहां सुदूर इलाकों में सड़क बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं मिल रही है।

  • चुनाव ड्यूटी पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आदेश, हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इंकार

    जबलपुर 

    चुनाव कार्य से खुद को अलग रखने के लिए हाई कोर्ट गए मध्य प्रदेश के करीब 10 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तगड़ा झटका लगा है, हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने उनकी याचिका को ख़ारिज कर दिया और कहा कि उन्हें भी क्चुनव ड्यूटी करनी होगी।

    मध्य प्रदेश के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की याचिका को ख़ारिज करते हुए हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर सभी विभागों के कर्मचारी चुनाव ड्यूटी करने से मना करेंगे तो चुनाव कैसे होगा, इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को चुनाव ड्यूटी करनी होगी।

    बता दें चुनाव में ड्यूटी लगाने के सरकारी आदेश के विरोध में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और शासकीय एकता यूनियन ने हाई कोर्ट में एक याचिका लगाई थी जिसमें आज सुनवाई हुई, सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की याचिका को खारिज कर दिया।
    कर्मचारी चुनाव ड्यूटी करने से मना करेंगे तो चुनाव कैसे होगा?

    याचिका में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने  चुनाव ड्यूटी ना लगाने की मांग की थी यानि वे चुनाव ड्यूटी से राहत चाहते थे , जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया और सख्त टिप्पणी करते हुए कहा अगर सभी विभागों के कर्मचारी चुनाव ड्यूटी करने से मना करेंगे तो चुनाव कैसे होगा।
    10 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर पड़ेगा असर 

    हाई कोर्ट ने कहा सरकारी विभागों के कर्मचारी सिस्टम का हिस्सा है उन्हें जिम्मेदारी निभानी होगी, हाई कोर्ट के फैसले का असर प्रदेश की 10 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर पड़ेगा।

  • राष्ट्रपति मुर्मु का अंबिकापुर में आत्मीय स्वागत

    रायपुर,

    राष्ट्रपतिद्रौपदी मुर्मु के अंबिकापुर आगमन पर गांधी स्टेडियम हेलीपेड में राज्यपाल रमेन डेका ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी उपस्थित थे।

  • अल फलाह चेयरमैन के घर नोटिस चस्पा, बुलडोजर कार्रवाई के लिए मिली 3 दिन की मोहलत

    इंदौर

    दिल्ली ब्लास्ट की जांच के बीच अल फलाह समूह के चेयरमैन और ट्रस्ट प्रमुख जवाद अहमद सिद्दीकी और उसके भाई हमूद सिद्दीकी के महू स्थित चार मंजिला मकान पर बुलडोजर ऐक्शन का खतरा मंडराने लगा है। महू छावनी परिषद ने मकान पर बड़ा नोटिस चस्पा करते हुए 3 दिन में कब्जाधारी को खुद निर्माण हटाने का आदेश थमा दिया है। नोटिस में कहा गया है कि निर्माण अवैध है। इसे निर्माणकर्ता खुद गिरा दें अन्यथा कैंट बोर्ड खुद इस ध्वस्त कर देगा। यही नहीं मकान को ध्वस्त करने का खर्च भी निर्माणकर्ताओं से ही वसूला जाएगा।

    अवैध घोषित किया निर्माण

    अल फलाह समूह के चेयरमैन और ट्रस्ट प्रमुख जवाद अहमद सिद्दीकी और उसके भाई हमूद सिद्दीकी का चार मंजिला यह मकान महू के मुकेरी मोहल्ला में स्थित है। कैंट बोर्ड ने इस निर्माण को अवैध घोषित कर दिया है। बोर्ड ने दस्तावेजों की जांच के बाद मकान पर बड़ा नोटिस चस्पा कर दिया है।

    पहले ही कर चुके हैं इंफॉर्म

    बोर्ड के नोटिस में कहा गया है कि मकान नंबर 1371, सर्वे नंबर 245/1245 में आपके द्वारा अवैध निर्माण किया गया है। इसमें आपको कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 23 अक्टूबर 1996 को जारी किया जा चुका है।

    अनाधिकृत निर्माण आज तक नहीं हटाया

    आपको छावनी अधिनियम 1924 की धारा 186 का सूचना पत्र 2 नवबर 1996 (छावनी अधिनियम 2006 की धारा 248) एवं छावनी अधिनियम 1924 की धारा 256 का सूचना पत्र दिनांक 27 मार्च 1997 (छावनी अधिनियम 2006 की धारा 320) विभाग की ओर से अनाधिकृत निर्माण को हटाने के संबंध में जारी किया गया था लेकिन उसके अनुपालन में आज तक आपके की ओर से अनाधिकृत निर्माण हटाने को लेकर कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

    3 दिन के भीतर हटाएं अवैध निर्माण

    नोटिस में आगे कहा गया है कि आपको निर्देशित किया जाता है कि पत्र मिलने के 3 दिन के भीतर मकान नंबर 1371, सर्वे नंबर 245/1245 में उक्त अनाधिकृत निर्माण हटाकर कार्यालय को सूचित करें अन्यथा विभाग की ओर से उक्त अनाधिकृत निर्माण को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही छावनी अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत हर्जा-खर्चा भी आप से ही वसूला जाएगा। आप कब्जाधारी को तीन दिन में खुद निर्माण हटाना होगा। गौरतलब है कि ईडी अल फलाह ट्रस्ट प्रमुख जवाद अहमद सिद्दीकी को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

  • सोयाबीन के लिए भावांतर योजना में नया मॉडल रेट तय, बढ़कर हुआ 4,267 रुपए

    भोपाल 

    भावांतर योजना 2025 के अंतर्गत  सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए आज 20 नवंबर को 4267 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी।

    सोयाबीन के मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी है। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए, 15 नवंबर को 4225 रुपए, 16 नवंबर को 4234 रुपए, 17 नवंबर को 4236 रुपए, 18 नवंबर को 4255 रुपए और 19 नवंबर को 4263 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी हुआ था। राज्य सरकार की गारंटी है कि किसानों को हर हाल में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य की 5328 रुपए   प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी।

  • छत्तीसगढ़ में दूरस्थ गांवों का भविष्य बदलेगा, PMGSY-IV से बनेंगी 2,426 किमी लंबी 774 सड़कें

    रायपुर
     प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान कायम की है। योजना के विभिन्न चरणों में छत्तीसगढ़ को अब तक कुल 9,722 सड़कें (48,594 किमी) और 669 पुल स्वीकृत हुए हैं। इनमें से 8,753 सड़कें (43,380 किमी) और 470 पुलों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।

    भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर जानकारी दी कि  ग्रामीण सड़क संपर्क को और सुदृढ़ करते हुए PMGSY-IV के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को 774 नई सड़कें (कुल लंबाई 2,426.875 किमी) स्वीकृत की गई हैं। यह पहली बार है जब इस चरण में पात्र संपर्क-विहीन बसावटों को ‘बारहमासी सड़क संपर्कता’ प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस स्वीकृति से छत्तीसगढ़ की दूरस्थ और वंचित बसावटों तक सर्व मौसम सड़क सुविधा पहुँचाने का मार्ग खुल गया है।

    भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्णय की जानकारी देते हुए कहा गया है कि बारहमासी सड़क संपर्कता से इन बसावटों को बाज़ार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पोषण, आपदा प्रबंधन और दैनिक आवागमन में व्यापक सुविधा मिलेगी। इससे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में तेजी, ग्रामीण आजीविका में वृद्धि और जन-कल्याणकारी सेवाओं तक सुगम पहुँच सुनिश्चित होगी।

    केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने लगातार अग्रणी प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए छत्तीसगढ़ के लोगों, पीएमजीएसवाई टीम, इंजीनियरों और मैदानी अमले को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस योजना का लाभ लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए प्रयास निरन्तर जारी रहेगा और छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास की गति में तेजी आएगी।

  • स्वास्थ्य सेवाओं में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग: दो ऐतिहासिक उपलब्धियाँ दर्ज

    इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) जिला अस्पताल पंडरी बना देश का सबसे पहला और इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) जिला अस्पताल बलौदाबाजार बना देश का दूसरा क्वालिटी सर्टिफाइड लैब

    मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई: कहा – यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र में आ रहे व्यापक, वैज्ञानिक और संरचनात्मक सुधारों का प्रमाण

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिला अस्पताल पंडरी रायपुर और जिला अस्पताल बलौदाबाजार की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (IPHL) को भारत सरकार के नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस कार्यक्रम (NQAS) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर का गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। इनमें पंडरी रायपुर की IPHL देश की प्रथम, जबकि बलौदाबाजार की IPHL देश एवं राज्य की द्वितीय प्रमाणित लैब बनी है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और वैज्ञानिक मानकों पर आधारित लैब सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को प्रमाणित करती है।

    राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयासों का यह सीधा परिणाम है कि जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच राज्य की कुल 832 स्वास्थ्य संस्थाओं का राष्ट्रीय मानकों के आधार पर मूल्यांकन और प्रमाणीकरण किया गया है। इनमें दंतेवाड़ा के दूरस्थ क्षेत्र चिंतागुफा जैसे दुर्गम इलाकों के स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि देश में पहली बार किसी राज्य में लैब्स की इतनी बड़ी और व्यवस्थित श्रृंखला का मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण हुआ है, जिसने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट स्थान दिलाया है।

    दोनो लैब्स का मूल्यांकन भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा नामित विशेषज्ञ मूल्यांकनकर्ताओं की टीमों ने किया। पंडरी रायपुर की IPHL का मूल्यांकन 10 सितंबर 2025, जबकि बलौदाबाजार की IPHL का मूल्यांकन 11 सितंबर 2025 को किया गया। दोनों टीमों ने लैब की कार्यप्रणाली, मरीज केंद्रित सेवाएँ, गुणवत्ता नियंत्रण, समयबद्ध रिपोर्टिंग और सुरक्षा प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा की। मूल्यांकन उपरांत, पंडरी रायपुर IPHL को 90% और बलौदाबाजार IPHL को 88% स्कोर के साथ प्रमाणन प्राप्त हुआ। यह स्कोर स्वास्थ्य गुणवत्ता के राष्ट्रीय मानकों में उत्कृष्ट श्रेणी में आता है।

    इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब की अवधारणा का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को एक ही छत के नीचे पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित सभी प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे न केवल जांच की गति और विश्वसनीयता बढ़ती है, बल्कि लोगों को महंगी निजी जांच लैब्स पर अनावश्यक निर्भरता से भी राहत मिलती है। एकीकृत मॉडल होने के कारण, मरीजों को एक ही स्थान पर किफायती और सटीक जांच रिपोर्ट उपलब्ध हो पाती है।

    पंडरी रायपुर की IPHL पूरे राज्य का मॉडल लैब बन चुकी है। यहां प्रतिदिन 3,000 से अधिक जांचें की जाती हैं और 120 से अधिक प्रकार की जांच सेवाएं उपलब्ध हैं। यह लैब ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल पर कार्य करते हुए रायपुर जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से प्राप्त सैंपल की भी जांच करती है। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में यह लैब मेडिकल कॉलेज और अन्य जिलों से आए नमूनों की जांच भी करती रही है, जिससे इसकी क्षमता और उपयोगिता दोनों प्रमाणित होती हैं।

    बलौदाबाजार की IPHL भी सेवा गुणवत्ता के मामले में तेजी से उभरती हुई लैब है। यहां प्रतिदिन 1,000 से 1,200 जांचें की जाती हैं और 100 से अधिक प्रकार की लैब टेस्टिंग उपलब्ध है। लैब में अत्याधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षित तकनीशियनों और समयबद्ध रिपोर्टिंग की वजह से जिले के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है। ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को अब जांच के लिए शहर या निजी लैब्स में जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

    स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पूर्व में भी पंडरी रायपुर IPHL के मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की जा चुकी है। देश के 13 से अधिक राज्यों की टीमें उक्त लैब का निरीक्षण कर इसकी कार्यप्रणाली का अवलोकन कर चुकी हैं। इतना ही नहीं, भारत सरकार द्वारा इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स हेतु जारी की गई विस्तृत गाइडलाइन के मुख्य पृष्ठ पर रायपुर IPHL की फोटो प्रकाशित की गई है। इस मॉडल को PM–ABHIM के अंतर्गत पूरे देश में स्थापित किए जा रहे IPHL नेटवर्क के मार्गदर्शक स्वरूप में अपनाया गया है।

    छत्तीसगढ़ में गुणवत्ता आधारित मूल्यांकन की यह प्रक्रिया केवल प्रमाणीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य प्रणाली में स्थायी सुधार की दिशा में एक ठोस कदम है। NQAS के मानकों में साफ-सफाई, सुरक्षा, रोगी संतुष्टि, रिकॉर्ड प्रबंधन, तकनीकी गुणवत्ता, उपकरण कैलिब्रेशन, बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और स्टाफ क्षमता निर्माण जैसे बिंदुओं का कड़ाई से पालन अनिवार्य है। दोनों लैब्स ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि अर्जित की है।

    आयुक्त सह संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि NQAS कार्यक्रम भारत सरकार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयास है, जिसके जरिए सरकारी अस्पतालों में गुणवत्ता सुधार को संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम में निर्धारित चेकलिस्ट बेहद व्यापक है और प्रमाणन तभी मिलता है जब कोई संस्थान सभी मानकों पर सतत् उत्कृष्टता प्रदर्शित करे।छत्तीसगढ़ की दोनों IPHL लैब्स ने जिस दक्षता और अनुशासन के साथ सभी मापदंडों को पूरा किया है, वह राज्य के स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ गुणवत्ता सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस प्रक्रिया में लैब तकनीशियनों, चिकित्सकों और प्रबंधन टीमों ने बड़े समर्पण और परिश्रम के साथ कार्य किया है। पंडरी रायपुर और बलौदाबाजार IPHL की उपलब्धि पूरे राज्य के लिए प्रेरक है और आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी इसी मॉडल को सुदृढ़ता से लागू किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा दोनों जिला अस्पतालों की IPHL टीमों—चिकित्सकों, तकनीशियनों और स्टाफ—को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं, और IPHLs के राष्ट्रीय प्रमाणन से राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को नई विश्वसनीयता और मजबूती मिली है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित मानव संसाधन से लैस कर रही है। IPHL जैसी उच्च गुणवत्ता वाली लैब्स ग्रामीण, आदिवासी और पिछड़े इलाकों में समय पर स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आने वाले वर्षों में राज्य भर के जिला अस्पतालों और प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों को इसी मॉडल पर अपग्रेड किया जाएगा।

    यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य प्रणाली के लिए केवल प्रमाणन नहीं, बल्कि यह संकेत भी है कि राज्य अब राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता केंद्रित स्वास्थ्य प्रबंधन की दिशा में अग्रसर है। IPHL मॉडल के विस्तार से रोगियों की जाँच सेवाएँ और अधिक सुलभ, तीव्र और विश्वसनीय होंगी। इसका सीधा लाभ लाखों नागरिकों को मिलेगा और राज्य के स्वास्थ्य सूचकांकों में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। दोनों IPHL लैब्स की सफलता यह प्रमाणित करती है कि जब वैज्ञानिक मानकों, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक तकनीक और शासन की दृढ़ इच्छाशक्ति का संगम होता है, तब स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव संभव है। यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल है और आने वाले समय में स्वास्थ्य गुणवत्ता सुधार की दिशा में नए मानक स्थापित करेगी।

    "पंडरी रायपुर और बलौदाबाजार जिलों की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स को देश की प्रथम और द्वितीय क्वालिटी सर्टिफाइड IPHL बनने पर स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को बधाई। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र में आ रहे व्यापक, वैज्ञानिक और संरचनात्मक सुधारों का प्रमाण है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं, और राष्ट्रीय स्तर के इस प्रमाणन ने राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को नई विश्वसनीयता और मजबूती प्रदान की है। IPHL मॉडल ने ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों तक विश्वसनीय जांच सेवाएँ पहुँचाने का मार्ग मजबूत किया है, और आने वाले समय में राज्य के सभी जिला अस्पतालों को आधुनिक, दक्ष और मानकीकृत मॉडल पर अपग्रेड किया जाएगा।"  – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय  

    "पंडरी रायपुर और बलौदाबाजार IPHL के देश की प्रथम और द्वितीय क्वालिटी सर्टिफाइड इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब बनने पर प्रदेशवासियों और पूरी स्वास्थ्य टीम को बधाई। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य प्रणाली में आए ऐतिहासिक बदलाव का परिणाम है। राज्य सरकार प्राथमिक से लेकर जिला स्तर तक सभी स्वास्थ्य संस्थानों को आधुनिक उपकरणों, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सशक्त गुणवत्ता तंत्र से लैस कर रही है। IPHL मॉडल ने जांच सेवाओं को तेज, सटीक और किफायती बनाकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच को मजबूत किया है। आने वाले समय में इसी उच्च गुणवत्ता मॉडल का विस्तार पूरे प्रदेश में किया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवा गुणवत्ता का अग्रणी राज्य बनेगा।" – स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल

  • पुलिस मुख्यालय का सख्त निर्देश: थाने के मालखाने में गड़बड़ी के लिए टीआई होंगे जिम्मेदार

    भोपाल
    मध्य प्रदेश के
    कई थानों में थाना प्रभारी स्थानांतरित होने के बाद बिना प्रभार सौंपे चले जाते हैं। इसकी बड़ी वजह थाने के मालखाने में रखी जब्त सामग्री के हिसाब में गोलमाल भी रहता है। दो माह पहले बालाघाट के कोतवाली थाने में मालखाना प्रभारी राजीव पंद्रे ने 55 लाख रुपये गायब कर दिए। उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की गई तो पता चला कि वह जुआ में यह राशि हार गया था।

    पुलिस ने यह रकम जब्त कर ली। घटना की जांच में यह भी सामने आया कि यहां पूर्व के थाना प्रभारी ने प्रभार ही नहीं सौंपा था। अन्य जिलों के थानों में भी इसी तरह के मामलों की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने अब सभी पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रभार नहीं दिया तो थाने के मालखाने के भंडार में किसी चीज की कमी मिलने पर प्रभार नहीं देने वाला थाना प्रभारी जिम्मेदार माना जाएगा। उसके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।

    हिसाब में कोई गड़बड़ी तो नहीं

    उसके बाद उस क्षेत्र एसडीओपी या सीएसपी और एडिशनल एसपी को भी जिम्मेदार माना जाएगा। यानी, अब उनकी भी जिम्मेदारी यह देखने की रहेगी कि थाना प्रभारी ने प्रभार सौंपा है या नहीं। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने कहा कि ज्वाइन करने वाले नए थाना प्रभारी की भी यह जिम्मेदारी है कि प्रभार ले, पर ज्यादा गलती जाने वाली की है। इससे यह साफ रहेगा मालखाने में क्या-क्या सामग्री या नकदी रखी है।

    हिसाब में कोई गड़बड़ी तो नहीं है। विशेष पुलिस महानिदेशक सीआईडी पवन श्रीवास्तव ने बताया कि सभी जोनल आईजी, पुलिस आयुक्त और एसपी को निर्देश जारी कर इसका कड़ाई से पालन कराने के लिए कहा गया है।

  • मध्यप्रदेश में ठंड का कहर जारी, छह जिलों में शीतलहर के मद्देनजर अलर्ट जारी

    भोपाल 
    नवंबर के आखिरी पखवाड़े में मध्य प्रदेश में शीतलहर का अलर्ट जारी है. यहां के कई शहरों में आने वाले दो दिनों तक ठंडी हवाएं चलेंगी. इसकी वजह से ठिठुरन और भी ज्यादा बढ़ेगी. आइए जानते हैं किन जिलों के लिए शीत लहर का अलर्ट जारी किया गया है.. 
    इन शहरों के लिए जारी है अलर्ट 

    प्रदेश की राजधानी भोपाल से लेकर कई शहरों में शीत लहर का ऑरेंज अलर्ट है. भोपाल के अलावा सीहोर ,राजगढ़ ,इंदौर, शाजापुर में तीव्र शीतलहर का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. जबकि खंडवा, खरगोन, बड़वानी, देवास, शिवपुरी, सतना, शहडोल, उमरिया, जबलपुर, छतरपुर में शीतलहर का यलो अलर्ट जारी किया गया है.इन जिलों में अगले दो दिनों तक शीतलहर की संभावना बनी रहेगी. 

    इस बार नवंबर के पहले सप्ताह से ही प्रदेश में कड़ाके की ठंड है। स्थिति यह है कि रात का पारा लगातार नीचे जा रहा है। इस वजह से भोपाल में नवंबर की सर्दी का पिछले 84 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। वहीं, इंदौर में 25 साल में सबसे ज्यादा सर्दी है।

    मौसम विभाग ने पूरे नवंबर में तेज ठंड का दौर बरकरार रहने का अनुमान जताया है। अगले दो दिन तक प्रदेश में शीतलहर का अलर्ट है। फिर शीतलहर से थोड़ी राहत मिल सकती है।

    10 डिग्री से नीचे चल रहा पारा मंगलवार-बुधवार की रात प्रदेश के 15 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया गया। राजगढ़ सबसे ठंडा रहा। यहां पारा 6.5 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल और इंदौर में पारे में फिर गिरावट हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल में 7.8 डिग्री, इंदौर में 6.9 डिग्री, ग्वालियर में 10.7 डिग्री, उज्जैन में 9.5 डिग्री और जबलपुर में 9.9 डिग्री रहा। इसी तरह पचमढ़ी में 6.6 डिग्री, नौगांव में 8 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री, खरगोन में 9.4 डिग्री, छिंदवाड़ा-मलाजखंड में 9.6 डिग्री और रीवा में 9.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बाकी शहरों में 10 से 13 डिग्री के बीच पारा टिका रहा।

    आज इन जिलों में शीतलहर चलेगी गुरुवार को भोपाल, इंदौर, देवास, सीहोर, शाजापुर और राजगढ़ में शीतलहर का अलर्ट है। इससे पहले भोपाल, राजगढ़, इंदौर, शाजापुर, सीहोर, खंडवा, खरगोन, शहडोल और जबलपुर में शीतलहर चली। शाजापुर का दिन कोल्ड डे दर्ज किया गया।

    22 नवंबर को लो प्रेशर एरिया एक्टिव होगा 22 नवंबर से देश के दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दबाव का क्षेत्र) एक्टिव हो रहा है। इससे पहले प्रदेश में अगले 2 दिन तक शीतलहर का अलर्ट है।

    इस बार नवंबर में पहले सप्ताह में ही तेज ठंड प्रदेश में नवंबर में पिछले 10 साल से ठंड के साथ बारिश का ट्रेंड भी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम है। आम तौर पर दूसरे सप्ताह में कड़ाके की ठंड पड़ती है, लेकिन इस बार पहले सप्ताह से ही तेज ठंड का असर है। वहीं, बारिश के लिहाज से अक्टूबर का महीना उम्मीदों पर खरा उतरा है। इस महीने औसत 2.8 इंच पानी गिर गया, जो सामान्य 1.3 इंच से 121% ज्यादा है।

    जानिए, नवंबर में 5 बड़े शहरों का मौसम…

    भोपाल: इस बार टूट गया ओवरऑल रिकॉर्ड नवंबर में भोपाल में रात का तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। पिछले 10 साल से ऐसा ही ट्रेंड रहा है। इस बार पहले सप्ताह से ही तेज ठंड का असर रहा। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल में नवंबर में रात का तापमान 6.1 डिग्री तक पहुंच चुका है। यह 30 नवंबर 1941 को दर्ज किया गया था, लेकिन इस साल 16 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री रहा। इस तरह नवंबर की सर्दी का ओवरऑल रिकॉर्ड बन गया है।

    यहां इस महीने बारिश होने का ट्रेंड भी है। 10 साल में तीन बार बारिश हो चुकी है। साल 1936 में महीने में साढ़े 5 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है।

    गिरवर में सबसे कम तापमान 

    प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 28. 7°C नर्मदापुरम में दर्ज किया गया है. जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 6.4°C गिरवर (शाजापुर) में दर्ज किया गया है. यहां ठिठुरन बहुत अधिक है. अब आगे और भी ज्यादा ठंड बढ़ेगी. इधर बढ़ती हुई ठंड को देखते हुए प्रदेश के जिलों में प्रशासन भी मुस्तैद है. कई जगहों में स्कूलों की टाइमिंग में भी बदलाव कर दिया गया है. 

    इंदौर: 5.6 डिग्री तक जा चुका न्यूनतम पारा इंदौर में नवंबर में ठंड का असर रहता है। खासकर दूसरे सप्ताह से पारा तेजी से गिरता है। इस वजह से रातें ठंडी हो जाती हैं और टेम्प्रेचर 10 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। 25 नवंबर 1938 को पारा 5.6 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है।

    इंदौर में कभी-कभार बारिश भी हो जाती है। दिन में 31 से 33 डिग्री के बीच तापमान रहता है

    ग्वालियर: 1927 में 3 इंच पानी गिरा था पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो नवंबर में ग्वालियर में पारा 8 डिग्री तक पहुंच चुका है। 54 साल पहले वर्ष 1970 में टेम्प्रेचर 3 डिग्री गया था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। 2 नवंबर 2001 को दिन का तापमान 37.3 डिग्री तक रहा, जबकि यह सामान्य तौर पर 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है।

    ग्वालियर में इस महीने बारिश भी होती है। 1927 में पूरे महीने 3 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। 10 साल में 3 बार ऐसा ही मौसम रह चुका है।

    जबलपुर: 1946 में 6 इंच से ज्यादा बारिश जबलपुर में पिछले 10 साल में 2022 में न्यूनतम पारा 7.8 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है। ओवरऑल रिकॉर्ड 12 नवंबर 1989 को दर्ज किया गया था, तब टेम्प्रेचर 3.9 डिग्री तक पहुंच गया था।

    1946 में पूरे महीने 6 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। 10 साल में दो बार बारिश हो चुकी है। दिन में 30 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान रहता है

    उज्जैन: न्यूनतम तापमान 10-11° के बीच उज्जैन में 30 नवंबर 1974 को रात का तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 6 नवंबर 2008 को दिन का तापमान 36.5 डिग्री रहा था। पिछले 10 साल की बात करें तो न्यूनतम तापमान 10-11 डिग्री के बीच रहा है, जबकि दिन में यह 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है।

  • अधिकारियों ने कहा कार्रवाई झूठी, हिंदू संगठन ने बताया बड़ी करवाई: सिवनी मंदिर शेड मामले में FIR

    सिवनी 

    सिवनी में 14 नवंबर को अतिक्रमण बताकर मंदिर का शेड तोड़ने का मामला वन विभाग के गले की फांस बन गया है। हिंदू संगठन का आरोप है कि कार्रवाई सिर्फ कुंठा निकालने के लिए की गई। विभाग के पास इसका कोई लिखित आदेश नहीं था।  बरघाट परियोजना मंडल के एसडीओ, रेंजर, नाकेदार समेत 16 लोगों पर एफआइआर दर्ज किया है।

    शुक्रवार को बरघाट थाना क्षेत्र के ग्राम बेहरई वन डिपो के पास स्थित लगभग 50 वर्ष पुराने प्राचीन हनुमान मंदिर में तोड़फोड़ का आरोप लगाते हुए विश्व हिन्दू परिषद सहित अन्य हिन्दू संगठन ने विरोध जताया था। देर रात तक संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, ग्रामीण थाना में डटे रहे। आरोप है कि मप्र राज्य वन विकास लि. बरघाट परियोजना मंडल के अधिकारियों ने कुछ लोगों के साथ मिलकर मंदिर में तोड़फोड़ की। 
    ये है मामला

    ग्रामीणों के अनुसार बीते कुछ माह से मंदिर परिसर में एक बाबाजी निवास कर रहे थे। आरोप है कि 14 नवंबर को वन विभाग के एसडीओ अनिल क्षत्रिय, रेंजर दिनेश झारिया, रवि गेडाम, पिचले, शैलेन्द्र परते, डिप्टी रेंजर सहित नाकेदारों व चौकीदारों की टीम मंदिर पहुंची और पूजन सहित मंदिर की सामग्री अपने कब्जे में ले लिया। साथ ही पुजारी को अभिरक्षा में ले लिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग ने न तो राजस्व विभाग को सूचना दी और न ही पुलिस को अवगत कराया। मौके पर अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज के भी आरोप लगाए गए हैं।

    इन पर हुई एफआईआर

    मंदिर में तोड़फोड़ के आरोप को लेकर पुलिस ने मप्र राज्य वन विभाग लि. बरघाट परियोजना मंडल के एसडीओ अनिल क्षत्रिय, रेंजर दिनेश झारिया, रवि गेडाम, पिचले, शैलेन्द्र परते, डिप्टी रेंजर, नाकेदार, चौकीदार समेत विभाग के १६ लोगों पर बीएनएस सहित अन्य धारा में एफआईआर दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

    विधायक ने लगाई फटकार

    घटना की जानकारी मिलने पर विधायक कमल मर्सकोले मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को फटकार लगाई। कहा कि बिना विभागीय समन्वय और धार्मिक सम्मान का ध्यान रखे कार्रवाई करना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने मंदिर को पूर्व स्थिति में बहाल करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। घटना से नाराज विहिप सहित अन्य संगठनों ने बरघाट थाना प्रभारी को जापन सौंपा और संबंधित वन अधिकारियों, कर्मचारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की।

    वन विकास निगम के मंडल प्रबंधक डेविड चनाप का कहना है कि विभागीय जाच करने क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक (RGM) को पत्र लिखा गया है। वरिष्ठ अधिकारियों को संज्ञान में लाए बिना एसडीओ अनिल कुमार क्षत्रिय, रेंजर रवि गढ़ाम व दिनेश इयरिया ने कार्रवाई की। तीनों अधिकारियों के निलंबन का प्रस्ताव भेजा गया है। तीन चौकीदार व कर्मचारियों को भी हटाया गया है। इसके अलावा, एसडीओ, चार रेंजर समेत वन विभाग के 16 कर्मचारियों व चौकीदार पर बरघाट थाने में धार्मिक स्थल को क्षति पहुंचाने का प्रकरण दर्ज किया है।

    सड़क किनारे 50 साल पुराना मंदिर पर लोगों की आस्था

    सिवनी जिला मुख्यालय से बालाघाट रोड पर डामर की सिंगल रोड है। यह पूरा एरिया बरघाट वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आता है। 42 किलोमीटर आगे चलकर बहरई नाके से करीब दो किलोमीटर आगे सड़क किनारे हनुमान जी का छोटा सा मंदिर बना है। यही से करीब दो किलोमीटर आगे वन विभाग का लकड़ियों का डिपो भी है। मुख्य मंदिर का चबूतरा 6 बाय 6 का होगा। ऊपर छोटा सा गुंबद भी है। अंदर हनुमान जी की मूर्ति है। समय के साथ जब भक्तों की तादाद बढ़ी, तो गांव वालों ने बारिश से बचने के लिए करीब 10 बाय 10 के एरिया में चारों ओर बाउंड्री कर ऊपर छत डाल ली। मंदिर के सामने छोटा सा टीन शेड लगा लिया था। पुजारी के रुकने के लिए मंदिर के पीछे आसपास जालियों का शेड लगा लिया था।

    दोपहर करीब 3 बजे का वक्त था। यहां मंदिर के पुजारी जटाशंकर पांडे बैठे थे। मंदिर में कुछ श्रद्धालु भी मौजूद थे। लोग मंदिर में माथा टेक कर जा रहे थे। पास ही नारियल और पूजा सामान बेचने की छाेटी सी दुकान थी। तिरपाल डालकर चाय की छोटी सी गुमटी भी थी। जटाशंकर बताते हैं कि मंगलवार और शनिवार को यहां ज्यादा लोग आते हैं। यह मंदिर करीब 50 साल से ज्यादा पुराना है।

    पुजारी बोले– जानवरों से बचने के लिए लगाए जाली और टीनशेड

    पुजारी बताते हैं कि यहां तीन महीने पहले ही आए हैं। मंदिर में आई चढ़ोतरी से गुजारा चलता है। गांव के लोग भी खाना दे जाते हैं। लोगों के साथ जंगली जानवरों का भी आना–जाना रहता है। इनसे बचने के लिए लोहे की जाली लगा ली थी। पुजारी ने बताया कि 14 नवंबर की दोपहर करीब 3 बजे वन विभाग के कर्मचारियों की टीम आई थी। करीब 40 से ज्यादा लोग रहे होंगे। वे गाली–गलौज करने लगे। तोड़फोड़ शुरू कर दी। कहा कि आपने अतिक्रमण कर लिया है, इसे हटा रहे हैं। हम और गांव वाले बोलते रहे कि अतिक्रमण नहीं कर रहे। उन्होंने एक नहीं सुनी।

    उड़नदस्ता वाली गाड़ी से रस्सी बांधकर शेड का पोल गिराया। मंदिर के अंदर का सामान तहस–नहस किया। यहां लगे घंटे को भी तोड़ दिया। करीब एक घंटे तक गदर मचाते रहे। रात में विश्व हिंदू परिषद वाले मंदिर पहुंचे। यहां देखकर वरघाट थाने गए। वे केस दर्ज करने पर अड़ गए। तब कहीं जाकर केस दर्ज किया गया।

    लोग बोले– आस्था को ठेस पहुंचाई गई मंदिर पर आने वाले श्रद्धालु चंदन लाल गौतम ने बताया कि मूर्ति करीब 50 साल पुरानी है। लोगों के सहयोग से छोटा सा मंदिर बना लिया गया। यह वह चारों तरफ से खुला था। जंगल क्षेत्र होने के कारण आजू–बाजू में लोहे की जाली और दरवाजा बना लिया गया था। वह विभाग के लोगों ने हटा दिए।

    बाबू लाल पाराशर का कहना है कि कई साल से मंदिर में दर्शन करने आ रहे हैं। यहां से लोगों की आस्था जुड़ी है। इस 50 साल पुराने मंदिर में लोग पूजन करने आते हैं। शनिवार–मंगलवार को भीड़ अधिक होती है। यहां 40 से अधिक वन विभाग के लोग आए थे, जिन्हें ने गलत तरीके से मंदिर को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया। गाली गलौज की।

    अफसर बाेले– अधिकारियों ने बोलने से मना किया मामले में वन विभाग के अफसर मीडिया से बात करने से बच रहे हैं। एक अफसर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर दैनिक भास्कर बताया कि अपने वरिष्ठ अधिकारी के मौखिक आदेश पर अतिक्रमण हटाने गए थे। मंदिर के आसपास लोगों ने अतिक्रमण कर लिया गया था। उसे ही तोड़ा था। गांव वालों ने विरोध जताया। हिंदू संगठनों के दबाव में गलत एफआईआर की गई है। यह झूठ और प्रोपेगंडा है। वरिष्ठ अधिकारियों ने हमें इस मामले में बोलने से मना किया है। मामले को ज्यादा आगे नहीं बढ़ाना है, इसलिए इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकते।

  • सीएम मोहन यादव ने बधाई दी, कूनो में चीता मुखी ने पांच शावकों को जन्म देकर रिकॉर्ड बनाया

    श्योपुर
     मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से चीता संरक्षण के क्षेत्र में एक और बड़ी खुशखबरी आई है। भारत में जन्मी पहली मादा चीता ‘मुखी’ ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही 33 महीने की उम्र में मुखी अब भारत में जन्म लेने वाली पहली चीता बन गई है, जिसने सफलतापूर्वक प्रजनन किया है। कुनो नेशनल पार्क के अधिकारियों के अनुसार, मादा चीता मुखी और उसके नवजात पांचों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। यह शावक नामीबिया से लाई गई चीता ‘सिया’ (Siyaya) और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए नर चीता ‘अग्नि’ की संतान हैं। 

    मुखी स्वयं सितंबर 2022 में शुरू हुए प्रोजेक्ट चीता के तहत लाए गए चीतों की पहली भारतीय पीढ़ी का हिस्सा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा,“कुनो से बहुत बड़ी खुशखबरी! भारत में जन्मी हमारी चीता मुखी ने 5 शावकों को जन्म दिया है। यह प्रोजेक्ट चीता की अब तक की सबसे बड़ी सफलता है। माँ और सभी शावक स्वस्थ हैं। मध्यप्रदेश और देश के लिए यह गर्व का क्षण है। 

    यह पहली बार है जब भारत में जन्मी किसी मादा चीता ने देश की धरती पर सफल प्रजनन किया है। लगभग 33 महीने की मुखी अब 'प्रोजेक्ट चीता' की पहली ऐसी मादा बन गई है, जिसने पांच शावकों को जन्म देकर संरक्षण प्रयासों की सफलता को मजबूती दी है।

    कूनो में चीता प्रजनन सफल, सीएम ने टीम को बधाई दी

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह सफल प्रजनन इस बात का महत्वपूर्ण संकेत है कि चीते भारतीय आवासों में तेजी से अनुकूल हो रहे हैं। उनका स्वास्थ्य और व्यवहार प्राकृतिक परिस्थितियों में संतोषजनक पाया गया है।

    यह उपलब्धि भारत में एक आत्मनिर्भर, स्थिर और आनुवंशिक रूप से विविध चीता जनसंख्या स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे देश के दीर्घकालिक संरक्षण लक्ष्यों को बल मिलेगा और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भारत की वैश्विक छवि मजबूत होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस खबर को सोशल मीडिया के जरिए से साझा किया। उन्होंने कूनो की टीम और वन विभाग को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई दी।

    भारत में 32 तो कूनो नेशनल पार्क में चीता की संख्या 29 हुई

    ​वर्तमान में, भारत में चीतों की कुल संख्या 32 हो गई है, जिसमें से 29 चीते मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में और 3 चीते गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में रखे गए हैं। यह संख्या चीता पुनर्वास परियोजना की स्थिरता को प्रदर्शित करती है। नामीबियाई मादा चीता 'ज्वाला' (सियाया) की संतान 'मुखी' (जिसे ज्वाला की बेटी होने के कारण मुखी नाम दिया गया) का सफल प्रजनन इस उपलब्धि का केंद्र है। मुखी द्वारा पांच शावकों को जन्म देना न केवल संख्या बढ़ाता है, बल्कि यह भी स्थापित करता है कि भारत में जन्मी चीता यहां के पर्यावरण में सफलतापूर्वक प्रजनन कर सकती है। यह उपलब्धि भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो देश में चीता के दीर्घकालिक भविष्य के लिए आशा जगाती है।

    यह तीसरी पीढ़ी यहां के मौसम के प्रति ज्यादा अनुकूलन करेगी

    ​'मुखी' (ज्वाला की संतान) द्वारा पाँच शावकों को जन्म देना 'प्रोजेक्ट चीता' के लिए एक अभूतपूर्व पीढ़ीगत छलांग है। यदि ज्वाला को पहली पीढ़ी (आयातित) मानें, तो मुखी दूसरी पीढ़ी है, और मुखी के शावक तीसरी पीढ़ी हैं।

    कूनो नेशनल पार्क के अधिकारियों के अनुसार, ये तीसरी पीढ़ी के शावक भारत की धरती पर पैदा हुई मां मुखी की संतान है, जो इन्हें भारतीय वातावरण के साथ बेहतर तालमेल बिठाने में मदद करेगी, क्योंकि वह जन्म के साथ यहां के मौसम से अनुकूलन कर रही है। इनका प्राकृतिक रूप से यहाँ जन्म लेना, चीता प्रोजेक्ट की बढ़ी सफलता है।

  • उमंग’ पोषण देखरेख कार्यक्रम को मजबूत बनाने हेतु राज्य स्तरीय पोषक परिवार सम्मेलन और कार्यशाला सम्पन्न

    रायपुर : 'उमंग' पोषण देखरेख कार्यक्रम को सुदृढ़ बनाने राज्य स्तरीय पोषक परिवार सम्मेलन एवं कार्यशाला संपन्न

    मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बच्चों को पारिवारिक वातावरण देने समाज से किया आह्वान

    उमंग' पोषण देखरेख कार्यक्रम को मजबूत बनाने हेतु राज्य स्तरीय पोषक परिवार सम्मेलन और कार्यशाला सम्पन्न

    रायपुर

    महिला एवं बाल विकास विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में राजधानी रायपुर स्थित होटल मेरियट कोटयार्ड में “उमंग—पोषण देखरेख (Foster Care)” कार्यक्रम को सुदृढ़ बनाने हेतु राज्य स्तरीय पोषक परिवार सम्मेलन एवं कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पोषण देखरेख व्यवस्था को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और व्यापक बनाना था, ताकि संस्थागत देखरेख में रह रहे बच्चों को सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

    कार्यक्रम का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े द्वारा किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि गरीबी, बीमारी, पारिवारिक संकट अथवा सामाजिक चुनौतियों के कारण कई बच्चे संस्थागत देखरेख में रह रहे हैं, जबकि किसी भी बालक का संपूर्ण विकास परिवार और समाज के बीच ही संभव है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विभाग ने महिलाओं एवं बच्चों के लिए कई कल्याणकारी कदम उठाए हैं। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 तथा यथा संशोधित नियम 2021 के अनुरूप राज्य में गैर संस्थागत देखरेख को बढ़ावा देने हेतु “उमंग” कार्यक्रम प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है।

    मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने संदेश में कहा कि फॉस्टर केयर ऐसा मॉडल है जो संस्था के बाहर बच्चों को पारिवारिक वातावरण प्रदान करता है। इससे बच्चे भावनात्मक, सामाजिक और मानसिक रूप से विकसित होते हैं तथा समाज की मुख्यधारा से जुड़ पाते हैं। उन्होंने समाज के सभी वर्गों, स्वयंसेवी संस्थाओं और नागरिकों से मिशन वात्सल्य के तहत अधिक से अधिक बच्चों को पारिवारिक माहौल देने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर बच्चे का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    राज्य में वर्तमान में 11 जिलों के 51 बच्चे पोषण देखरेख योजना के अंतर्गत स्वीकृत हैं, जिनमें 30 बालक और 21 बालिकाएँ शामिल हैं। इन बच्चों को प्रतिमाह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसके लिए 90 से अधिक पोषक परिवार राज्य में पंजीकृत हैं। वर्ष 2024–25 में यूनिसेफ, CEAC और विभागीय सहयोग से रायपुर, धमतरी, दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, कोरबा, सरगुजा, रायगढ़, बस्तर और कोंडागांव जिलों में कार्यक्रम को और सुदृढ़ किया गया है, तथा आगामी वर्ष 2025–26 में इसे अन्य जिलों में विस्तार देने की तैयारी की जा रही है।

    कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि दो वर्ष तक संस्थागत देखरेख में रह चुके बच्चों को पोषक परिवार में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। “उमंग” कार्यक्रम पर आधारित शिक्षात्मक फिल्म “I Am Home” का भी निर्माण किया जा रहा है, जिसे Curley Street Media Private Limited द्वारा निर्मित किया जा रहा है। इस फिल्म का उद्देश्य समाज में फोस्टर केयर के प्रति जागरूकता को बढ़ाना है।

    कार्यशाला में यूनिसेफ, CEAC, राज्य परियोजना प्रबंधक (SPM), जिला अधिकारी, स्वयंसेवी संगठनों, बाल संरक्षण विशेषज्ञों और पोषक परिवारों ने भाग लिया। इस अवसर पर बाल संरक्षण अधिकार आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, महिला एवं बाल विकास की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी,संचालक श्री पदुम सिंह एल्मा, यूनिसेफ की बाल संरक्षण विशेषज्ञ सुश्री चेतना देसाई, CEAC की निदेशक डॉ. वसुंधरा ,Curley Street Media Private Limited की प्रमुख सुश्री पवित्रा चलम, संयुक्त संचालक श्री नंदलाल चौधरी, उप संचालक श्रीमती नीलम देवांगन सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। विशेषज्ञों ने पोषण देखरेख कार्यक्रम की चुनौतियों, बेहतर क्रियान्वयन तथा भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की।

    कार्यक्रम में पोषक परिवारों, स्वयंसेवी संगठनों, जिला अधिकारियों एवं बाल संरक्षण विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। यह राज्य स्तरीय सम्मेलन गैर संस्थागत देखरेख प्रणाली को मजबूत करने और जरूरतमंद बच्चों के जीवन में नई आशा, सुरक्षा और अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।