• सालभर में 13.41 करोड़ से अधिक पर्यटक मध्यप्रदेश आए

    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मध्यप्रदेश को दी वाराणसी से
    खजुराहो वंदे भारत ट्रेन की सौगात
    भारत में चिन्हित की गई 17 आइकोनिक सिटीज में खजुराहो भी शामिल
    राजगढ़ पैलेस होटल के जरिए स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

     

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विश्व धरोहर स्थल खजुराहो और पन्ना टाइगर रिजर्व के आसपास पर्यटकों के लिए सभी प्रकार की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। खजुराहो में एयरपोर्ट तो पहले से है ही, अब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी से खजुराहो नई वंदे भारत ट्रेन की सौगात दे दी है, जिससे बुंदेलखंड की शान मतंगेश्वर महादेव सीधे काशी विश्वनाथ से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पर्यटकों की सुविधाओं में बढ़ोतरी करते हुए नई पीएमश्री हेली टूरिस्ट सर्विस शुरू की है। इसके अलावा प्रदेशवासियों को इंटर स्टेट हवाई सेवा और एयर एंबुलेंस की सुविधा भी मिल रही है। पर्यटक इन सुविधाओं का भरपूर लाभ उठाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आने वाले पर्यटकों की संख्या में 526 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। बीते साल 13 करोड़ 41 लाख से अधिक पर्यटक मध्यप्रदेश की धरती पर आए। हमारी पर्यटन प्रोत्साहन योजनाओं के कारण भविष्य में यह आंकड़ा और भी बढ़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को खजुराहो में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने खजुराहो में 'होटल द ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस' का दीप प्रज्ज्वलन एवं फीता काटकर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर ओबेरॉय ग्रुप के स्वामी श्री अर्जुन ओबेरॉय ने पुष्पगुच्छ एवं शॉल ओढाकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खजुराहो का ईश्वर का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है। ओबेरॉय ग्रुप के राजगढ़ पैलेस होटल के माध्यम से आज खजुराहो समृद्धि के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। राज्य सरकार बुंदेलखंड के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। खजुराहो की प्राचीनतम स्थापत्य कला को देखने के लिए पूरी दुनिया खिंची चली आती है। खजुराहो महाराजा छत्रसाल की राजधानी रही है। बुंदेलखंड में आल्हा-ऊदल की वीरता की कहानियां जोश से भर देती हैं। यहां 70 एकड़ में यह भव्य होटल बनकर तैयार हुआ है, जिससे पर्यटकों को तो लग्जरियस फेसिलिटी मिलेगी ही, स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिलेगा।

    क्षेत्रीय सांसद श्री वीडी शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश के लिए आज ऐतिहासिक दिन है। खजुराहो एक विश्व धरोहर है, यहां रोजाना दुनियाभर के पर्यटक आते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत में 17 आइकोनिक सिटी चिह्नित की हैं, इनमें खजुराहो भी शामिल है। यहां नजदीक ही पन्ना टाइगर रिजर्व को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने खजुराहो को हवाई सेवा के साथ सुपरफॉस्ट ट्रेन वंदे भारत की रेगुलर कनेक्टिविटी भी दे दी है। पन्ना में हीरे तो मिलते ही हैं, भविष्य में राजगढ़ पैलेस 'होटल इंडस्ट्री का डायमंड' बनकर उभरेगा।

    राजगढ़ पैलेस की भव्यता की जानकारी देते हुए श्री अर्जुन ओबेरॉय ने बताया कि मध्यप्रदेश अतुलनीय पर्यटन संभावनाओं और संस्कृति का केंद्र है। राजगढ़ पैलेस के डिजाइन और रूप आगंतुकों को मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक विरासत को करीब से देखने का मौका देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि राजगढ़ पैलेस पर्यटकों के लिए मध्यप्रदेश का गेट-वे बनेगा।

    कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार, विधायक श्री अरविंद पटेरिया, विधायक श्रीमती ललिता यादव, विधायक श्री राजेश शुक्ला, विधायक श्री कामाख्या प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती विद्या अग्निहोत्री, अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं पर्यटन श्री शिव शेखर शुक्ला, डी आईजी विजय खत्री, कलेक्टर श्री पार्थ जैसवाल, पुलिस अधीक्षक श्री अगम जैन सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं ओबेरॉय ग्रुप के स्टॉफ मेंबर्स उपस्थित रहे।

     

  • राज्यपाल ने आसियान समिति से कहा मध्यप्रदेश के साथ साझी विकास यात्रा की अपार संभावनाएं

    मध्यप्रदेश में स्थिर, सुरक्षित और उद्योग अनुकूल वातावरण: राज्यपाल मंगुभाई पटेल

    आसियान समिति का प्रतिनिधि मंडल राजभवन में मिला

    भोपाल 
    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने आसियान समिति से कहा है कि मध्यप्रदेश के साथ साझी विकास यात्रा की अपार संभावनाएं हैं। भारत और आसियान देश साझी सभ्यता वाले क्षेत्र हैं। मध्यप्रदेश और आसियान देशों के बीच सांस्कृतिक आत्मीयता, व्यापारिक समानता और सहयोग की संभावनाएँ अत्यंत मजबूत हैं। दोनों क्षेत्रों के पास युवा जनसंख्या की ऊर्जा, नवाचार की क्षमता, विविध सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति तथा विकास के प्रति समान संवेदनशील दृष्टिकोण मौजूद है। प्रदेश के साथ व्यापार, निवेश, पर्यटन, शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में असाधारण और दीर्घकालिक साझेदारियाँ करने की अनंत संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में स्थिर, सुरक्षित और उद्योग अनुकूल वातावरण इस यात्रा को और अधिक अर्थपूर्ण बनाएगा।

    राज्यपाल श्री पटेल राजभवन में आमंत्रित आसियान समिति के प्रतिनिधि मंडल के साथ बुधवार को चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला भी मौजूद थे।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारत सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है। यह नीति भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के साझा इतिहास, सांस्कृतिक जड़ों और भविष्य की समृद्ध साझेदारी को मजबूत करने का मार्ग है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के साथ व्यापारिक, निवेश, तकनीकी, सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों में निरंतर वृद्धि से पारस्परिक रिश्ते मजबूत होंगे। नए अवसर उत्पन्न होंगे। हमारी सहभागिता आने वाले वर्षों में एक नए अधिक विकसित युग का निर्माण करेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार पारदर्शी नीतियों के साथ निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करती है। इसी वर्ष प्रदेश में प्रधानमंत्री श्री मोदी के द्वारा 18 नवीन इन्वेस्टर फ्रेंडली नीतियाँ लॉन्च की गईं। ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में मध्यप्रदेश देश के उत्कृष्ट सुधारक राज्यों में शामिल है। मध्यप्रदेश की जनता सरलता, परिश्रम, सहिष्णुता और सौहार्द की मिसाल है।

    उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को भारत का हृदय कहा जाता है, क्योंकि इस राज्य की धड़कनें भारत की संस्कृति, परंपराएँ, प्रकृति, अध्यात्म, सामाजिक विविधता, आर्थिक क्षमता और आधुनिक विकास को समेटे हुए हैं। उन्होंने प्रदेश के नगरों, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के विकास और पर्यावरणीय संतुलन को रेखांकित किया। बताया कि राज्य में 11 एग्रो क्लाइमेटिक जोन होने के कारण इसे देश की “फूड बास्केट” कहते हैं। राज्यपाल श्री पटेल ने आसियान समिति नई दिल्ली के प्रतिनिधियों को सांची की प्रतिकृति, स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की।

    आसियान नई दिल्ली समिति के अध्यक्ष भारत में मलेशिया के उच्चायुक्त श्री दातो मुजफ्फर शाह मुस्तफा ने मध्यप्रदेश में प्रतिनिधि मंडल के गरिमामय स्वागत सत्कार के लिए आभार ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि आसियान समूह के सभी देश शांति, समृद्धि के लिए मैत्री भाव के साथ सहकार के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की कृषि, आधारभूत अवसंरचना, उत्पादन, पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। फार्मास्यूटिकल, शिक्षा और कौशल उन्नयन के क्षेत्र में पारस्परिक सहकार के द्वारा मध्यप्रदेश और आसियान राष्ट्रों के संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाया जा सकता है।

    स्वागत उद्बोधन प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह ने दिया। मध्यप्रदेश प्रवास पर आए आसियान समिति नई दिल्ली के सदस्यों का परिचय कराया। उन्होंने बताया कि आसियान समिति पहली बार मध्यप्रदेश भ्रमण पर आई है। समिति ने गत दिवस मुख्यमंत्री से भेंट की है। आभार अतिरिक्त सचिव विदेश मंत्रालय भारत सरकार श्री प्रशांत अग्रवाल ने व्यक्त किया।

    आसियान समिति प्रतिनिधि मंडल भारत में वियतनाम के राजदूत श्री गुयेन थान्ह हाई, भारत में फिलीपींस के राजदूत श्री जोसेफ एफ. इग्नासियों, भारत और श्रीलंका में कंबोडिया की राजदूत सुश्री रथ मनी, भारत में तिमोर लेस्ते के राजदूत श्री कार्लितो नुनेस, भारत में थाईलैंड की राजदूत सुश्री छवनार्ट थांगसुमफंट, भारत और भूटान में इंडोनेशिया की राजदूत सुश्री इना एच कृष्णमूर्ति और मिशन प्रमुख द्वितीय सचिव ब्रुनेई दारुस्सलाम गणराज्य श्री पेंगिरन मोहम्मद शफी अलवाली बिन पेंगिरन अबू बकर शामिल है। आसियान समिति प्रतिनिधि मंडल के राजभवन आगमन पर राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव ने चंदेरी वस्त्र से बना अंगवस्त्र एवं पुष्प भेंट कर स्वागत किया।

     

  • पीएमजीएसवाई-IV के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को मिली 774 नई सड़कें

    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल – ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान

    केंद्र सरकार ने राज्य को 774 सड़क कार्यों (2,426.875 किमी) की दी स्वीकृति

    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को मिली 774 नई सड़कों की स्वीकृति हमारे ग्रामीण विकास अभियान को देगी नई गति – मुख्यमंत्री श्री साय

    रायपुर
    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान कायम की है। योजना के विभिन्न चरणों में छत्तीसगढ़ को अब तक कुल 9,722 सड़कें (48,594 किमी) और 669 पुल स्वीकृत हुए हैं। इनमें से 8,753 सड़कें (43,380 किमी) और 470 पुलों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।

    भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर जानकारी दी कि  ग्रामीण सड़क संपर्क को और सुदृढ़ करते हुए PMGSY-IV के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को 774 नई सड़कें (कुल लंबाई 2,426.875 किमी) स्वीकृत की गई हैं। यह पहली बार है जब इस चरण में पात्र संपर्क-विहीन बसावटों को ‘बारहमासी सड़क संपर्कता’ प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस स्वीकृति से छत्तीसगढ़ की दूरस्थ और वंचित बसावटों तक सर्व मौसम सड़क सुविधा पहुँचाने का मार्ग खुल गया है।

    भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्णय की जानकारी देते हुए कहा गया है कि बारहमासी सड़क संपर्कता से इन बसावटों को बाज़ार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पोषण, आपदा प्रबंधन और दैनिक आवागमन में व्यापक सुविधा मिलेगी। इससे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में तेजी, ग्रामीण आजीविका में वृद्धि और जन-कल्याणकारी सेवाओं तक सुगम पहुँच सुनिश्चित होगी।

    केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने लगातार अग्रणी प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए छत्तीसगढ़ के लोगों, पीएमजीएसवाई टीम, इंजीनियरों और मैदानी अमले को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस योजना का लाभ लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए प्रयास निरन्तर जारी रहेगा और छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास की गति में तेजी आएगी।

    “प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को मिली 774 नई सड़कों की स्वीकृति हमारे ग्रामीण विकास अभियान को नई गति देगी। यह निर्णय दूरस्थ और संपर्क-विहीन बसावटों को बारहमासी सड़क सुविधा प्रदान करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। हमारी सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक ग्राम तक सुरक्षित, सुदृढ़ और सर्व मौसम सड़क संपर्क सुनिश्चित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और जन-कल्याण को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जाए।” – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

  • कोकीन सप्लाई रैकेट का भंडाफोड़: इंदौर में अफ्रीकी युवती दबोची, स्टूडेंट वीज़ा पर कर रही थी ड्रग डीलिंग

    इंदौर
    इंदौर नारकोटिक्स पुलिस ने रेसिडेंसी क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अफ्रीकी युवती लिंडा अनाबा को कोकीन के साथ गिरफ्तार किया है। 25 वर्षीय लिंडा जून में स्टूडेंट वीजा पर भारत आई थी। तलाशी के दौरान उसके फोन में कोडवर्ड में सेव किए गए संदिग्ध नंबर मिले, साथ ही उसने अवैध धंधे में शामिल होने और ड्रग्स सप्लाई करने की बात भी स्वीकार की है।

    DIG (नारकोटिक्स) महेशचंद्र जैन ने बताया कि लिंडा मूल रूप से अफ्रीकी देश कोटे दी आईवोर के एक शहर की रहने वाली है और इन दिनों मुंबई के नालासोपारा क्षेत्र में रह रही थी। मंगलवार रात पुलिस ने उसे उस वक्त पकड़ा जब वह कोकीन लेकर पहुंची थी। महिला अधिकारियों ने उसकी तलाशी लेकर 31 ग्राम कोकीन बरामद की।
     
    निरीक्षक हरीश सोलंकी के अनुसार, पूछताछ में लिंडा ने बताया कि भारत आने के बाद उसकी मुलाकात अनैतिक गतिविधियों में शामिल एक एजेंट से हुई, जिसके साथ वह मुंबई सहित कई शहरों में जाने लगी। एजेंट उसे इंदौर भी लेकर आए थे और ड्रग डिलीवरी करवाते थे। इंदौर आने से पहले उसे मुंबई में ही कोकीन का पैकेट सौंपा गया था।

    पुलिस लिंडा के वीजा संबंधी दस्तावेजों की जांच कर रही है और संबंधित जानकारी दूतावास को भेज दी गई है। वह इंटरनेट कॉलिंग का उपयोग करती है और उसके फोन की चैट 24 घंटे में डिलीट हो जाती है। कई नंबर कोडवर्ड में दर्ज होने के कारण पूछताछ में कठिनाई आ रही है। साइबर एक्सपर्ट की मदद से डिलीट डेटा रिकवर करवाया जा रहा है।

     

  • अभियान के दौरान पूर्व सीएम बघेल का बयान सुर्खियों में: नक्सलवाद से जंग जैसे हालात में किया था संघर्ष

    रायपुर

    नक्सलवाद के खिलाफ लगातार चल रही कार्रवाई के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी सरकार की पीठ थपथपाई है. उन्होंने कहा कि नक्सली मामले में हमने अच्छा काम किया था. हमने युद्ध जैसे लड़ाई नक्सलवाद के खिलाफ लड़ी. हमारी सरकार के समय से नक्सलियों का कमर टूटना शुरू हुआ.

    पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा में वहीं बिजली बिल हाफ की घोषणा पर तंज कसते हुए कहा कि यह ऊंट के मुंह में जीरा है. सरकार भी लोगों को ठगने लगी है. सरकार बिजली बिल का रेट तीन बार बढ़ा चुकी है. आम जनता को लाभ नहीं होगा. वहीं आज प्रदेशभर में मारे गए एसीबी-ईओडब्ल्यू के छापे पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वसूली पर लगे हुए हैं. इनके ऊपर छापे पढ़ने चाहिए. रोज हत्याएं हो रही है, बलात्कार हो रहे हैं. आईजी वसूली में लगा हुआ है.

    SISI के जुड़े दो नाबालिगों की रायपुर में गिरफ्तारी पर भूपेश बघेल ने कहा कि ध्यान भटकाने के लिए केंद्र सरकार यह काम कर रही है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद कहा गया था कि अब एक्ट ऑफ वार होगा, फिर अब दाएं-बाएं क्यों कर रहे हैं. एक-दो लोग पकड़ाते रहेंगे, लेकिन कश्मीर से राजधानी तक आतंकी पहुंचे इसका जिम्मेदार कौन है. वहीं सुरक्षा एजेंसी पर निशान साधते हुए कहा कि सुरक्षा एजेंसी विपक्षियों की जासूसी में लगी है. देश की सुरक्षा को खतरे में डाल दिए हैं.

    वहीं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि मंत्री 3100 सौ रुपए में मध्य प्रदेश में धान खरीद रहे हैं. छत्तीसगढ़ में बारदाना आया है, उसमें 40 किलो धान नहीं आ पा रहा है. छत्तीसगढ़ में धान खरीदी शुरू नहीं हो पाई है. लाखों किसान इससे वंचित हो गए हैं.

  • नशामुक्त भारत अभियान की 5वीं वर्षगाँठ पर लोगों ने ली नशामुक्ति की शपथ

    नशामुक्त भारत अभियान (NMBA) की 5वीं वर्षगाँठ पर छत्तीसगढ़ में 19,958 स्थलों पर 6.70 लाख से अधिक लोगों ने ली नशामुक्ति की शपथ

    रायपुर
    नशामुक्त भारत अभियान की 5वीं वर्षगाँठ छत्तीसगढ़ में जनभागीदारी और जागरूकता के अद्भुत संगम के रूप में मनाई गई। समाज कल्याण विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न विभागों के समन्वय से पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर शपथ कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें हर वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम रायपुर स्थित होटल मैरियट में आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया, समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव तथा संचालक श्रीमती रोक्तिमा यादव सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त भारत की शपथ ली और समाज से नशे के उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    प्रदेशभर में आयोजित कार्यक्रमों ने इस राष्ट्रीय अभियान को नई ऊर्जा प्रदान की। 543 स्थलों पर 24,749 प्रतिभागियों, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 505 कार्यक्रमों में 69,356 प्रतिभागियों ने शपथ ली। इसी क्रम में राज्य के 7,452 विद्यालयों में 3,98,675 छात्रों और शिक्षकों ने नशामुक्त समाज निर्माण का संकल्प लिया। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए आयोजित 9,355 कार्यक्रमों में 1,20,410 प्रतिभागियों ने नशा छोड़ने और दूसरों को प्रेरित करने का संकल्प लिया। साथ ही अन्य 2,103 आयोजनों में 57,570 लोगों ने शपथ लेकर अभियान को और मजबूत किया। इस प्रकार कुल 19,958 स्थलों पर 6,70,760 नागरिकों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यमों से एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण का प्रण लिया।

    उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा नशामुक्त भारत अभियान की 5वीं वर्षगाँठ का मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम 18 नवंबर को गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देशभर की तरह छत्तीसगढ़ में भी व्यापक स्तर पर देखा गया। राज्य के सभी जिलों, विभागों, शासकीय कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में सामूहिक रूप से प्रसारण का अवलोकन किया गया, जिससे अधिक से अधिक लोग राष्ट्रीय कार्यक्रम से जुड़े।

    नशामुक्त भारत अभियान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य मादक द्रव्यों, तंबाकू और शराब की लत जैसी सामाजिक बुराइयों से लोगों को बचाना तथा युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रखना है। अभियान के तहत जन-जागरूकता कार्यक्रमों, शिक्षा संस्थानों की गतिविधियों, समुदाय की सहभागिता, काउंसिलिंग, उपचार और पुनर्वास सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि प्रभावित व्यक्तियों को सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता मिले। समाज कल्याण विभाग ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला एवं बाल विकास, शहरी प्रशासन, युवा सेवाएँ सहित अनेक विभागों को अभियान से जोड़कर बहु-विभागीय समन्वय के माध्यम से नशामुक्ति की दिशा में एक व्यापक और प्रभावशाली जन-अभियान आगे बढ़ाया है।
    इतनी बड़ी जनसहभागिता के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत संदेश दिया है कि राज्य नशामुक्त, स्वस्थ और जागरूक समाज निर्माण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। नशामुक्त भारत अभियान के तहत राज्य में जनजागरूकता, काउंसिलिंग और समुदाय आधारित गतिविधियाँ निरंतर जारी रहेंगी, जिससे छत्तीसगढ़ नशामुक्त और प्रगतिशील प्रदेश की दिशा में निरंतर आगे बढ़े।

  • मंत्रालय ने लागू की नई व्यवस्था: सभी विभागों में आधार-आधारित उपस्थिति अनिवार्य

     
    प्रशासनिक कार्यकुशलता और समय की पाबंदी को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम

    रायपुर

    पारदर्शिता, समयपालन और प्रशासनिक कार्यकुशलता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने महानदी भवन और इन्द्रावती भवन में कार्यरत सभी विभागों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) लागू करने की घोषणा की है।

    आज वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील की उपस्थिति में नए सिस्टम का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसमें फेसियल ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली तथा दीवार पर लगाए गए आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरणों का डेमो प्रस्तुत किया गया। इस प्रणाली का परीक्षण कल से प्रारंभ होगा और 01 दिसंबर 2025 से मंत्रालय में AEBAS के माध्यम से उपस्थिति अनिवार्य होगी।

    मुख्य सचिव श्री विकास शील ने निर्देशित किया  है कि 01 जनवरी 2026 से यह प्रणाली सभी संचालनालयों/ विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी लागू कर दी जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समय पालन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को कड़ाई से इसका पालन करना होगा।

    कर्मचारियों के लिए उपस्थिति दर्ज करने के तरीके

    नए प्रोटोकॉल के अनुसार, प्रत्येक कर्मचारी को रोज़ाना दो बार—प्रवेश के समय “IN” और प्रस्थान के समय “OUT”—उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसके लिए दो विकल्प उपलब्ध किए गए हैं:

    1. मोबाइल ऐप के माध्यम से फेसियल ऑथेंटिकेशन

    कर्मचारी अपने स्मार्टफोन पर आधार-आधारित फेसियल वेरिफिकेशन के माध्यम से IN/OUT उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे। यह प्रणाली सुविधा और बायोमेट्रिक सुरक्षा—दोनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

    2. प्रवेश द्वारों पर लगे आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण

    मंत्रालय भवनों के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर दीवार पर लगे थम्ब-बेस्ड आधार-सक्षम बायोमेट्रिक डिवाइसेज़ स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से कर्मचारी उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे।

    दोनों प्रणालियाँ समानांतर रूप से संचालित होंगी और कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी विकल्प का उपयोग कर सकते हैं।

    सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी निर्धारित प्रवेश द्वारों पर आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरण स्थापित कर दिए हैं और नोडल अधिकारियों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया है, जिससे व्यवस्थित और निर्बाध क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। सभी कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि उनके आधार और सेवा संबंधी विवरण उपस्थिति पोर्टल में सही ढंग से अपडेट हों।नई उपस्थिति व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, ढिलाई या अनुपालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा।

    आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) की शुरुआत राज्य सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही, कार्यकुशलता और सेवा प्रदायगी की गुणवत्ता में सुधार लाने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। यह प्रणाली न केवल विभागीय संचालन को सरल बनाएगी, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में अनुशासन और पारदर्शिता की संस्कृति को भी स्थापित करेगी।

    “महानदी और इन्द्रावती भवन के सभी विभागों में आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) का क्रियान्वयन पारदर्शिता, समयपालन और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आज मुख्य सचिव और सभी सचिवों की उपस्थिति में फेसियल ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली और दीवार पर लगे आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपकरणों का विस्तृत प्रदर्शन किया गया। 1 दिसंबर 2025 से मंत्रालय में AEBAS आधारित उपस्थिति अनिवार्य होगी और 01 जनवरी 2026 से यह प्रणाली सभी संचालनालयों में लागू कर दी जाएगी। मैं अपेक्षा करता हूँ कि हर अधिकारी और कर्मचारी समयपालन और पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करेंगे, ताकि हम आधुनिक, तकनीक-आधारित और जवाबदेह शासन व्यवस्था की ओर निरंतर अग्रसर हो सकें।”

    – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

  • ई-अटेंडेंस सिस्टम की गलती या अफसरों की? रीवा में मृत शिक्षकों को नोटिस, तीन दिन में जवाब तलब

    रीवा
    जिले के शिक्षा विभाग की लापरवाही इस कदर सामने आई है कि तीन मृत शिक्षकों को ई-अटेंडेंस न भरने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया। ई-अटेंडेंस प्रणाली, जो हाल ही में सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य की गई है, की निगरानी के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने यह नोटिस जारी किया। विभाग के रिकॉर्ड में अपडेट न होने के कारण मृत शिक्षकों को ड्यूटी से अनुपस्थित दर्शाया गया और नियमानुसार उन्हें नोटिस भेज दिया गया।
     
    जारी नोटिस में कहा गया है कि ई-अटेंडेंस न दर्ज करने के कारण उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। साथ ही तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मृत शिक्षकों के नाम पर नोटिस जारी होने से विभाग की संवेदनहीनता और सिस्टम की खामियां उजागर हो रही हैं।

     

  • गरीबी रेखा नंबर नहीं जुड़ने से दूसरी महिला को दे दी नियुक्ति

    गरीबी रेखा में नाम होने के साथ-साथ पात्र होने के बाद भी आंगनबाड़ी सहायिका के लिए देवकली को नहीं मिल सकी नियुक्ति

    मण्डला/जबलपुर

    सिर्फ और सिर्फ गरीबी रेखा का नंबर नहीं जुड़ पाने के कारण देवकली को आंगनबाड़ी सहायिका की नियुक्ति नहीं दी जा सकी। जिसके कारण अब वह यहां वहां भटकते गुहार लगाकर सहायिका पद पर नियुक्ति मांगने की जद्दोजहद करने में लगी हुई है। यहां पर अन्य आवेदिका की नियुक्ति कर दी गई है । उमरडीह की रहने वाली देवकली सैयाम ने जनसुनवाई और महिला एवं बाल विकास विभाग जिला कार्यक्रम अधिकारी के कार्यालय में 18 नवंबर को आवेदन देकर गरीबी रेखा का नंबर जोड़े जाकर आंगनबाड़ी सहायिका पद पर नियुक्ति दिलाने की मांग की है।

    उसका नाम गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार में है। आवेदन में देवकली ने बताया है,कि उसने मोहगांव विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत बड़झर के पोषक ग्राम उमरडीह कोटवार टोला आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के खाली पद के विरुद्ध आवेदन भरा था। चयन सूची जारी होने पर सूची में देखा तो गरीबी रेखा का नंबर नहीं जोड़ा गया है।जिसके कारण उसका नाम दूसरे नंबर पर है। तत्काल मोहगांव परियोजना कार्यालय पहुंचकर जिम्मेदार कर्मचारी से समस्या बताई। जहां पर कहा गया,कि उसका गरीबी रेखा का नंबर आवेदन में लिखे नहीं होने के कारण चयन सूची में पहले नंबर पर नाम नहीं आया है। तब जाकर देवकली ने कलेक्टर और जिला कार्यक्रम अधिकारी के नाम पर आवेदन देकर गरीबी रेखा नंबर जोड़े जाकर सहायिका पद पर अवसर दिलाने का आग्रह किया है।

    देवकली सैयाम का कहना है,कि उसने ऑनलाइन आवेदन भरते समय आवश्यक कागजातों के साथ में गरीबी रेखा का कार्ड भी रखी थी।सारे जरूरी कागजातों का विवरण आनलाइन आवेदन में भरवाया गया था। बावजूद गरीबी रेखा नंबर जुड़ा कैसे नहीं,उसको यही समस्या परेशान कर रही है।

  • भोपाल में अवैध शराब तस्करी का भंडाफोड़: कार से बरामद हुई लाखों की अंग्रेजी शराब, आरोपी फरार

    भोपाल
    शाहपुरा क्षेत्र की पॉश कॉलोनी से बुधवार को आबकारी टीम ने साढ़े तीन लाख की अंग्रेजी शराब बरामद की है। आबकारी टीम को सूचना मिली थी कि बावड़िया कलां क्षेत्र की एक कॉलोनी में तस्कर कार से महंगे ब्रांड की शराब अवैध रूप से लेकर जा रहा है। इससे टीम मौके पर पहुंची तो तस्कर कार छोड़कर मौके से फरार हो गया।

    विभाग ने अज्ञात तस्कर के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। जिला आबकारी कंट्रोलर आरजी भदौरिया ने बताया कि मुखबिर ने सूचना दी थी कि बावड़िया कलां स्थित आकृति रिट्रीट कॉलोनी परिसर में एक कार से अज्ञात व्यक्ति महंगी अंग्रेजी शराब लेकर जा रहा है। इससे मौके पर टीम को भेजा गया, जहां घेराबंदी कर दबिश दी तो कार चालक भाग खड़ा हुआ। टीम ने वाहन को जब्त कर तलाशी ली तो उसमें से विभिन्न महंगे ब्रांडेड अंग्रेजी शराब के 34 कार्टनों में करीब 306 लीटर शराब बरामद हुई है।
     
    शराब की कीमत करीब साढ़े तीन लाख रुपये
    इसकी कीमत करीब तीन लाख 56 हजार रुपये आंकी गई है। टीम ने अज्ञात आरोपित की तलाश शुरू कर दी है, जिसे जल्द ही गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाएगा। सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र धाकड़ ने बताया कि टीम को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अवैध शराब की तस्करी के खिलाफ निरंतर कार्रवाई की जाए।

  • जिले की स्वच्छता यात्रा:खुले में शौच से ओडीएफ और सस्टेनेबल स्वच्छता की ओर

    विश्व शौचालय दिवस आज

    बिलासपुर,

     स्वच्छ  भारत मिशन के जिले में बेहतर क्रियान्वयन से अब कभी खुले में शौच की समस्या से जूझते ग्रामीण इलाकों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और एक बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। शौचालय निर्माण से लेकर ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन तक आम जनता की भागीदारी से स्वच्छ भारत का सपना अब साकार होता नजर आ रहा है स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण से गांवों में स्वच्छता अभियान ने जोर पकड़ा है ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के तहत शौचालय निर्माण से ग्रामीणों को राहत मिली है।

        स्वच्छ भारत मिशन के पहले चरण में ग्रामीण परिवारों की  व्यक्तिगत शौचालय की आवश्यकता थी लेकिन संसाधन और जागरूकता की कमी बड़ी चुनौती थी। प्रशासन, पंचायतों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से जिले में 2,03,091 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण हुआ। इनमें स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत 1 लाख 38 हजार 770, मनरेगा के तहत 30 हजार 574, डीएमएफ 5 हजार 68 एवं अन्य योजनाएँ 28 हजार 679 शौचालय शामिल है। इन शौचालयों के निर्माण ने हजारों परिवारों को गरिमा, सुरक्षा और स्वच्छ जीवन जीने की राह दिखाई। महिलाएँ, जो पहले अंधेरा होने का इंतज़ार करती थीं, अब उनके पास अपने घर में सुरक्षित और सम्मानजनक सुविधा उपलब्ध है। इसी चरण ने जिले को ओडीएफ की ओर अग्रसर करने की मजबूत नींव रखी।

         बिल्हा ब्लॉक के ग्राम नवगंवा की श्रीमती गायत्री खरे और रानी सूर्यवंशी कहती है कि शौचालय निर्माण से उनकी एक बड़ी समस्या का समाधान हो गया है अब उन्हें किसी भी मौसम में बाहर जाना नहीं पड़ता।।मस्तूरी ब्लॉक के  ग्राम ढेका निवासी युवा खुशबू राजपूत ने कहा कि सरकार द्वारा शौचालय निर्माण महिलाओं की  गरिमा का सम्मान है।

     स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण में जिले ने केवल शौचालय निर्माण तक खुद को सीमित नहीं रखा। यहाँ लक्ष्य था स्वच्छता को स्थायी और सस्टेनेबल बनाना। पहले से निर्मित शौचालयों के अलावा इस चरण में भी 13,987 नए शौचालयों का निर्माण किया गया, जिससे नई बस्तियों और जरूरतमंद परिवारों को सुविधा मिली। ग्राम बाजार, हाट-बाजार और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में 512 सामुदायिक शौचालयों ने स्वच्छता को और सुदृढ़ किया। गाँवों में गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण और प्रबंधन की दिशा में 636 इकाइयाँ स्थापित की गईं। अब कचरा नालियों या सड़कों में इकट्ठा नहीं होता कृ व्यवस्थित निपटान से गाँवों की स्वच्छता स्तर पहले से कई गुना बढ़ गया है। जिले के 4 विकासखण्डों में 4 यूनिट्स स्थापित की गईं, जहाँ प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाता है। यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फिकल स्लज निपटान हेतु एक क्रियाशील और एक निर्माणाधीन इकाई स्थापित की गई है। यह ग्रामीण स्वच्छता के उन्नत स्तर की ओर बड़ा कदम है, जिससे जल स्रोतों के प्रदूषण में भारी कमी आई है। जिले में 8 बायोगैस संयंत्र क्रियाशील हैं। इससे न केवल कचरे का उपयोग हो रहा है, बल्कि स्वच्छ, धुआँ-रहित ऊर्जा भी ग्रामीण परिवारों को मिल रही है।

        उल्लेखनीय है कि विश्व शौचालय दिवस हर वर्ष 19 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिन स्वच्छता, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के महत्व के प्रति जागरूकता के लिए समर्पित है। संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस की शुरुआत दुनिया भर में मौजूद स्वच्छता संकट की ओर ध्यान दिलाने के लिए किया।सुरक्षित शौचालय की सुविधा न होने से विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ फैलती हैं और लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

  • रामलला दर्शन योजना: भारत गौरव स्पेशल ट्रेन राजनांदगांव से अयोध्या धाम के लिए रवाना

    सरकार की निशुल्क सुविधाओं से तीर्थयात्रियों को मिलेगा रामलला व काशी विश्वनाथ के दर्शनों का शुभ अवसर

    रायपुर,

    रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत आज भारत गौरव स्पेशल ट्रेन राजनांदगांव से अयोध्या धाम की ओर रवाना हुई। इस अवसर पर सांसद श्री संतोष पांडे, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा और महापौर श्री मधुसूदन यादव ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया।

        दुर्ग स्टेशन पर विधायक ललित चंद्राकर ने तीर्थ यात्रियों का स्वागत व अभिनंदन किया।
    स्टेशन पर तीर्थयात्रियों का जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था। जिला प्रशासन के अधिकारी, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड और आईआरसीटीसी के प्रतिनिधियों ने भव्य स्वागत किया। स्टेशन पर माहौल भक्तिमय था, जहां ढोल-नगाड़ों की थाप पर तीर्थयात्री अभिवादन से अभिभूत नजर आए। यात्रियों ने इस पावन अवसर को यादगार बताते हुए अपनी भावनाओं को साझा किया।

        तीर्थयात्री भोला राम यादव ने कहा कि सरकार द्वारा दी गई सभी सुविधाएं हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। आने-जाने, रहने व भोजन  की बेहतरीन व्यवस्था ने हमारी यात्रा को सुखद और यादगार बना दिया है। वहीं एक तीर्थ यात्री अमरौतिन बाई ने भावुक होकर कहा कि स्टेशन पर भव्य स्वागत और श्रद्धा का माहौल देखकर मन गदगद हो गया है। एक बुजुर्ग तीर्थयात्री केजा बाई ने आशीर्वाद भरे स्वर में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय व पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल को श्रवण बेटा संबोधित कर तीर्थयात्रा कराने के लिए धन्यवाद दिया।

    तीर्थयात्रियों को अयोध्या धाम में रामलला के दर्शनों के साथ-साथ काशी विश्वनाथ के दर्शन भी कराए जाएंगे। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से तीर्थयात्रियों के आने-जाने, रहने, खाने, ठहरने और चिकित्सा सुविधा सभी निशुल्क प्रदान की जा रही है। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड, समाज कल्याण विभाग और रेलवे के कर्मचारी तीर्थयात्रियों की सेवा के लिए हर समय तत्पर दिखे।

  • खड़गवां में नशा मुक्ति अभियान


      खड़गवाँ

    विकासखंड में जनपद पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर एक महत्वपूर्ण नशा मुक्ति अभियान चलाया। ​इस अभियान का उद्देश्य समाज को नशे के गंभीर परिणामों के प्रति जागरूक करना और एक स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ाना है।

    ​जनपद पंचायत की पूरी टीम ने स्थानीय गांवों और बस्तियों का दौरा किया। उन्होंने लोगों को विस्तार से बताया कि तम्बाकू, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन उनके स्वास्थ्य, परिवार और आर्थिक स्थिति पर कितना बुरा असर डालता है।
    ​अधिकारियों ने नशे की लत छोड़ने के फायदे और इसके लिए उपलब्ध सरकारी सुविधाओं और काउंसलिंग के बारे में भी जानकारी दी।

    ​इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि MCB जिले के प्रशासनिक अधिकारी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि यह अभियान खड़गवाँ विकासखंड को नशा मुक्त बनाने में एक निर्णायक कदम साबित होगा और अन्य क्षेत्रों को भी प्रेरणा देगा।

  • SP रत्ना सिंह का औचक निरीक्षण

    ​ खड़गवां

     खड़गवां थाना में पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी और जनता के प्रति जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम देखने को मिला। ज़िले की पुलिस अधीक्षक,  रत्ना सिंह, ने आज अचानक थाना  खड़गवाँ का औचक निरीक्षण किया।
    ​ज़िला पुलिस अधीक्षक  सिंह सुबह ठीक 12 बजे बिना किसी पूर्व सूचना के थाने पहुँचीं। उनके निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य था — थाने के कामकाज की गुणवत्ता, रिकॉर्ड्स का रख-रखाव, और आम जनता के प्रति पुलिसकर्मियों का व्यवहार सुनिश्चित करना।

    ​एसपी महोदया ने सबसे पहले थाना परिसर की साफ़-सफ़ाई, मालखाना (जब्त किए गए सामान का स्टोर), और हथियारों के रखरखाव का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने विशेष रूप से महिला हेल्प डेस्क, शिकायत कक्ष, और लॉकअप की व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया।

    ​इतना ही नहीं, उन्होंने सभी लंबित मामलों की फ़ाइलें भी जाँच की और गुमशुदगी व महिला अपराधों से जुड़े मामलों में तेज़ी लाने के सख़्त निर्देश दिए। उन्होंने थाने के सभी कर्मचारियों से सीधा संवाद किया और उन्हें जनता से सौहार्दपूर्ण व्यवहार बनाए रखने की ताकीद की।

    रत्ना सिंह ने साफ़ तौर पर कहा कि ज़िले में अपराध पर नियंत्रण और पुलिस की जवाबदेही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके इस तरह के औचक निरीक्षण से स्पष्ट है कि अब ज़िले के थानों को हर समय मुस्तैद रहना होगा।

  • धीमी गति के बावजूद इंदौर मेट्रो का विस्तार जारी, 30 किमी ट्रैक का सर्वे शुरू

    इंदौर

     इंदौर से उज्जैन के बाद अब इंदौर से पीथमपुर के बीच मेट्रो ट्रेन चलाने के लिए सर्वे चल रहा है। पहले चर्चा थी कि एबी रोड से पीथमपुर की ओर मेट्रो का संचालन होगा, अब अफसरों ने अंडरग्राउंड रूट ज्यादा रखने का सुझाव दिया है। इसके तहत लव-कुश चौराहा से मरीमाता चौराहा होकर बड़ा गणपति और वहां से राजेंद्रनगर तक मेट्रो अंडरग्राउंड चलाने और राजेंद्रनगर से पीथमपुर तक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का सुझाव दिया है।

    इंदौर से उज्जैन तक सर्वे

    इंदौर मेट्रो का काम धीमी गति से चल रहा है लेकिन विस्तार की योजनाओं पर आगे काम बढ़ रहा है। इंदौर से उज्जैन तक सर्वे हो गया है। लव-कुश चौराहा से उज्जैन तक मेट्रो का एलिवेटेड कॉरिडोर व उज्जैन स्टेशन की ओर शहर में अंडरग्राउंड ट्रैक बनाने की प्लानिंग है।

    इस बीच इंदौर से पीथमपुर के बीच मेट्रो चलाने की प्लानिंग पर भी काम शुरू हो गया है। शासन ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को सर्वे व डीपीआर बनाने का काम सौंपा है। इस काम के एवज में करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जाना हैं। मेट्रो का काम कब शुरू होगा, यह तय नहीं है लेकिन सर्वे चल रहा है।

    अफसरों ने दिया सुझाव

    दिल्ली की टीम स्थानीय मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन अफसरों के साथ समन्वय कर योजना पर काम कर रहे हैं। हाल ही में मेट्रो के खजराना चौराहा से अंडरग्राउंड होकर एयरपोर्ट तक जाने की बात सर्वसम्मति से जनप्रतिनिधियों की बैठक में तय हुई है। हालांकि सरकार की ओर से अभी इसे लेकर फैसला नहीं हुआ है। इसके बाद इंदौर से पीथमपुर के बीच मेट्रो के संचालन के लिए अंडरग्राउंड ट्रैक बनाने का सुझाव योजना में शामिल किया जा रहा है। अफसरों ने सुझाव दिया है कि लव-कुश चौराहा से पीथमपुर की ओर ट्रैक को शहरी हिस्से में अंडरग्राउंड किया जाए।

    पीथमपुर तक मेट्रो ट्रैक 30 किमी. रहेगा। इसे लव-कुश चौराहा से मरीमाता चौराहा होकर बड़ा गणपति चौराहा और वहां से राजेंद्रनगर तक अंडरग्राउंड मेट्रो चलाने का सुझाव प्लान में शामिल किया जा रहा है। राजेंद्रनगर से राऊ होते हुए पीथमपुर तक एलिवेटेड ट्रैक रहेगा। चूंकि यह इलाका पुराने इंदौर का तंग इलाका है, इसलिए अंडरग्राउंड रूट ही प्रस्तावित किया जा रहा है। अफसरों के मुताबिक, डीएमआरसी की टीम की सर्वे रिपोर्ट को जल्द शासन के समक्ष रखा जाएगा। शासन की मंजूरी के बाद डीपीआर होगी।

    यात्री मिलें, ऐसा रूट हो

    इंदौर-पीथमपुर मेट्रो चलाने के लिए प्लान बनाते समय यह देखना चाहिए कि यात्री कहां से मिलेंगे। मरीमाता, बड़ा गणपति की ओर मेट्रो ले जाने के स्थान पर स्टेशन होते हुए आगे बढ़ना होगा। स्टेशन से पीथमपुर की ओर मेट्रो लाएंगे तो यात्रियों को पीथमपुर से आने के बाद शहर में कहीं भी जाने के लिए आसानी से कनेक्टिविटी मिलेगी। बाहरी इलाके से मेट्रो चली तो यात्री नहीं मिलेंगे। -अतुल सेठ, सिटी प्लानर

  • झीरम कांड में कार्रवाई: शाह टीम ने पूरी की हिसाब-किताब, दिल्ली रही मौन

    बस्तर 

    छत्तीसगढ़ के इतिहास में दर्द के सबसे गहरे निशान छोड़ने वाले झीरम घाटी नरसंहार का हिसाब आखिरकार पूरा हो गया. दो दशक तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना माओवादी कमांडर माडवी हिड़मा एक मुठभेड़ में ढेर हुआ, और उसके साथ उस घाव पर भी मरहम लगा जिसकी टीस 25 मई 2013 से अब तक महसूस की जाती रही है. विशेषज्ञ इस मौत को सिर्फ एक नक्सली कमांडर के खात्मे के तौर पर नहीं, बल्कि झीरम की आत्माओं को सच्ची श्रद्धांजलि मान रहे हैं.

    इस कार्रवाई ने केंद्र की उस प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया है जिसमें नक्सलवाद के समूल अंत की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई थी. हिड़मा का खात्मा ठीक उसी लक्ष्य से पहले होना दिखाता है कि सुरक्षा बलों की रणनीति और सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति एक दिशा में मजबूती से काम कर रही थी. और यह कि अपराध चाहे कितना पुराना हो, उसका हिसाब आखिर होता जरूर है. क्योंकि जिस दौर में झीरम नरसंहार हुआ था उस समय कांग्रेस की सरकार थी और देश के गृह मंत्री थे सुशील कुमार शिंदे.

     काली शाम की दर्दनाक तस्वीर

    25 मई 2013 की शाम, कांग्रेस के ‘परिवर्तन यात्रा’ काफिले पर झीरम घाटी में घात लगाकर किए गए हमले ने छत्तीसगढ़ को हिला दिया था. नेताओं का जत्था सुकमा से जगदलपुर जा रहा था. तभी रास्ता पेड़ों को गिराकर रोक दिया गया और घात लगाए हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी.
    नक्सलवाद दशकों से देश के कई हिस्सों में चुनौती रहा है.

    इस हमले में प्रदेश कांग्रेस के कई शीर्ष नेता शहीद हुए. प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोध का चेहरा माने जाने वाले ‘बस्तर टाइगर’ महेंद्र कर्मा सबसे प्रमुख लक्ष्य थे. महेंद्र कर्मा को बर्बरता से मारा गया, और पूरा हमला डेढ़ घंटे तक चलने के बाद इलाके में गहरे सदमे और शून्यता को छोड़ गया.
    कौन था माडवी हिड़मा?

    हिड़मा माओवादी संगठन की PLGA बटालियन का कमांडर था और बस्तर के जंगलों में सबसे ताकतवर नक्सली चेहरों में गिना जाता था. उस पर दो दर्जन से अधिक बड़े हमलों का मास्टरमाइंड होने का आरोप था. एक स्थानीय आदिवासी नेता से लेकर माओवादी शीर्ष संरचना तक पहुंचने का उसका सफर उसे सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिक सूची में रखता था.
    सुरक्षा बलों की रणनीति: कैसे बनी यह कार्रवाई संभव?

    नक्सल विरोधी अभियानों को पिछले कुछ वर्षों में लगातार तेज किया गया. जंगलों में ठिकाने, मूवमेंट और पूरी कमांड संरचना पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई गई, जिससे हिड़मा की गतिविधियां सीमित होती चली गईं.
    सुरक्षा बलों का मानना है कि बड़े कमांडरों का खात्मा नेटवर्क कमजोर करता है.
    सुरक्षा बलों की प्रमुख रणनीतियां:

        नक्सल कमांड संरचना को निशाना बनाकर ऑपरेशनों की प्राथमिकता तय करना
        जंगलों में मल्टी-लेयर इंटेलिजेंस तैनात करना
        तकनीक आधारित ट्रैकिंग और ड्रोन निगरानी
        सुरक्षा बलों के बीच इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन बढ़ाना
        गश्त एवं कॉम्बिंग ऑपरेशन को लगातार तेज रखना

    इन रणनीतियों का असर यह हुआ कि हिड़मा की मूवमेंट पर निगरानी आसान हुई और आखिरकार वह सुरक्षा जाल में फंस गया.
    शिंदे का दौर, शाह का मिशन

    झीरम कांड के वक्त जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार और गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे थे. तब पीड़ित परिवार कई बार निर्णायक कार्रवाई की मांग करते रहे, लेकिन बड़े स्तर पर कुछ नहीं हो पाया. नक्सल नेटवर्क मजबूत होता गया और हिड़मा जैसे कमांडर सुरक्षित इलाकों में फिर से जमे रहे.

    इसके विपरीत मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद को देश की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती मानकर इसे खत्म करने की समय-सीमा तय की. उन्होंने सुरक्षा बलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए और लगातार समीक्षा बैठकों से अभियान का दबाव बनाए रखा. हिड़मा का खात्मा इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
    मौत के बाद क्या बदलेगा?

    हिड़मा की मौत का सबसे बड़ा असर नक्सली नेतृत्व पर पड़ा है. संगठन पहले ही कई राजस्व और सप्लाई चेन झटकों से कमजोर था, अब उसका सबसे अनुभवी कमांडर भी खत्म हो गया. अब नक्सली नेतृत्व के भीतर टूटन की खबरें आने लगी हैं, और कुछ बड़े चेहरे हथियार छोड़ने की अपील कर रहे हैं. इससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में नक्सल आंदोलन की शक्ति और मनोबल पर गहरा असर होगा.

    प्रमुख घटनाओं की त्वरित झलक
    साल                                  घटना
    25 मई 2013     झीरम घाटी हमला- वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की शहादत
    2019 के बाद      नक्सल क्षेत्रों में अभियान तेज
    हालिया             माडवी हिड़मा मुठभेड़ में ढेर

    क्या यह नक्सलवाद के अंत की शुरुआत है?

    नक्सलवाद दशकों से देश के कई हिस्सों में चुनौती रहा है. सुरक्षा बलों का मानना है कि बड़े कमांडरों का खात्मा नेटवर्क कमजोर करता है और स्थानीय युवाओं को हिंसा से दूर करता है. हिड़मा की मौत उसी दिशा में एक निर्णायक पल है. क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि उस डर की परतों का पतन है जो बस्तर के लोगों ने वर्षों तक महसूस की.

  • कांग्रेस का आरोप—PM सूर्य घर योजना असफल, हाफ बिजली बिल पर देरी पर CM हाउस घेरने की चेतावनी

    रायपुर

    दिल्ली दौरे से लौटे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ में बिजली बिल को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। बैज ने कहा, सरकार ने 200 यूनिट हॉफ कर जनता को फिर धोखा दिया है। कांग्रेस की 400 यूनिट बिल हॉफ योजना को बंद किया गया। चार बार बिजली की दरें बढ़ाई गईं। स्मार्ट मीटर लगाकर अतिरिक्त वसूली की जा रही है। उन्होंने कहा कि 30 नवंबर तक 400 यूनिट हॉफ बिजली बिल योजना लागू नहीं की गई तो CM हाउस का घेराव करेंगे।

    बैज ने कहा, कोयला सस्ता हुआ, उस पर लगने वाला सेस खत्म हुआ, इसलिए अब 400 यूनिट बिजली बिल फ्री करना चाहिए।पीएम सूर्य घर योजना को लेकर पीसीसी चीफ बैज ने कहा, ये योजना छत्तीसगढ़ में फेल है। पीएम सूर्यघर योजना छत्तीसगढ़ में सफल नहीं है, इसे जबरन थोपा जा रहा है।

    दिल्ली में बैठक को लेकर दीपक बैज ने कहा, दिल्ली में 2 घंटे की महत्वपूर्ण बैठक हुई। AICC की बैठक में 12 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष मौजूद रहे। SIR को लेकर कांग्रेस गंभीर है। बिहार में वोटर काटे गए और चुनाव से पहले नए वोटर जोड़े गए। इन मुद्दों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा, घर-घर जाकर मतदाताओं को जागरूक करने की रणनीति तैयार की जाएगी। सचिन पायलट प्रदेश के 3 हिस्सों में बैठक लेंगे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को निगरानी का मूल मंत्र दिया जाएगा।

    जल्द जारी होगी जिलाध्यक्षों की सूची
    कांग्रेस जिलाध्यक्षों की सूची को लेकर बैज ने कहा, जिलाध्यक्षों की सूची अंतिम चरण में है। छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना की सूची लगभग तैयार है। बहुत जल्द जिलाध्यक्षों की लिस्ट जारी होगी।

    झीरम घाटी हमले को बताया राजनीतिक षड्यंत्र
    झीरम घाटी हमले के मास्टरमाइंड हिड़मा के मारे जाने से क्या न्याय मिला? इस मामले में पीसीसी चीफ बैज ने कहा, आंध्रप्रदेश की सीमा पर उसका एनकाउंटर हुआ, बड़ी सफलता है, इसके लिए बधाई। झीरम घाटी की सच्चाई अब तक सामने नहीं आई है। वैसे भी यह राजनीतिक षड्यंत्र है।

  • राष्ट्रीय फॉरेस्ट स्पोर्ट्स में चमका छत्तीसगढ़, 13वीं बार चैंपियन—सीएम साय का खिलाड़ियों को अभिवादन

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मेडिकल कॉलेज परिसर में ऑल इंडिया फ़ॉरेस्ट स्पोर्ट्स मीट में लगातार 13वीं बार ओवरऑल चैंपियन बनने वाले छत्तीसगढ़ के विजेता खिलाड़ियों से मुलाकात की। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को इस शानदार उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री साय ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से उन्होंने छत्तीसगढ़ का मान पूरे देश में ऊंचा किया है और उनकी यह उपलब्धि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

    उल्लेखनीय है कि देहरादून में 12 से 16 नवंबर तक आयोजित 28वीं ऑल इंडिया फ़ॉरेस्ट स्पोर्ट्स मीट में छत्तीसगढ़ ने अपना दबदबा कायम रखते हुए लगातार 13वीं बार ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी जीती। यह विजय छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा, अनुशासन, कठिन परिश्रम और टीम की अदम्य प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भव्य समापन समारोह में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और वन मंत्री सुबोध उनियाल ने संयुक्त रूप से ओवरऑल चैंपियनशिप ट्रॉफी प्रदान की, जिसे छत्तीसगढ़ की ओर से आईएफएस शालिनी रैना एवं दल की नोडल अधिकारी ने ग्रहण किया। उनके नेतृत्व में टीम की एकजुटता और उत्कृष्ट प्रदर्शन इस उपलब्धि की प्रमुख वजह रहा।

    इन खिलाड़ियों ने किया शानदार प्रदर्शन
    इस वर्ष 253 सदस्यों की मजबूत टीम के साथ छत्तीसगढ़ ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए कुल 150 पदक और 578 अंक हासिल किए, जो पहले रनर-अप से 221 अंकों की ऐतिहासिक बढ़त है। टीम ने 74 स्वर्ण, 34 रजत और 42 कांस्य पदक जीतकर प्रतियोगिता में अपना सर्वांगीण प्रभुत्व स्थापित किया। कई खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत स्तर पर भी शानदार प्रदर्शन कर राज्य का गौरव बढ़ाया, जिनमें निखिल ज़ाल्को ने तैराकी में पांच स्वर्ण जीतकर सर्वश्रेष्ठ पुरुष खिलाड़ी का खिताब प्राप्त किया। वहीं संगीता राजगोपालन ने बैडमिंटन और टेनिस में चार स्वर्ण एवं एक रजत जीतकर सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी का सम्मान हासिल किया। इसी प्रकार थोटा संकीर्तन ने पांच स्वर्ण जीतकर महिला ओपन वर्ग में सर्वश्रेष्ठ एथलीट बनीं। सुखनंदन लाल ध्रुव और चारुलता गजपाल ने वेटरन श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया।

    राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया खेल भावना और उत्कृष्टता का नया मानक
    यह ऐतिहासिक सफलता वन मंत्री केदार कश्यप के दूरदर्शी मार्गदर्शन और वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव के प्रेरक नेतृत्व का परिणाम है। उनके निरंतर सहयोग, दिशा और प्रोत्साहन ने टीम को हर बार नई ऊंचाइयों तक पहुंने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छत्तीसगढ़ वन विभाग की यह विजय केवल एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि एक स्वर्णिम अध्याय है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर खेल भावना और उत्कृष्टता का नया मानक स्थापित किया है। राज्य ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि उसकी खेल परंपरा, मेहनत और जज़्बा उसे लगातार चैंपियन बनाए रखते हैं।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, नान के चेयरमैन संजय श्रीवास्तव, योग आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण सिन्हा, छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सलीम राज, वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव सहित लघु वनोपज संघ के सदस्य तथा बड़ी संख्या में विजेता खिलाड़ी उपस्थित थे।

  • ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पैक्स-स्व-सहायता समूह साझेदारी की योजना शुरू

    पैक्स एवं स्व-सहायता समूह साझेदारी से खुलेगा ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण का नया अध्याय

    मंत्री  सारंग ने ली सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक

    भोपाल

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को मंत्रालय में सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक में सीपीपीपी अंतर्गत जीआईएस-2025 के दौरान हुए एमओयू की प्रगति, नवाचार प्रकोष्ठ की गतिविधियों तथा सहकारिता तंत्र को मजबूत बनाने से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

    मंत्री  सारंग ने कहा कि पैक्स और स्व-सहायता समूहों के बीच सहयोगात्मक ढांचा तैयार कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि पैक्स–स्व सहायता समूह के बीच साझेदारी का स्पष्ट एवं क्रियाशील रोडमैप तैयार किया जाए। जिससे ग्रामीण स्तर पर नए रोजगार व उद्यमों को बढ़ावा दिया जा सके।

    मंत्री  सारंग ने कहा कि सहकारिता ही वह सशक्त नेटवर्क है जो हर घर तक आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को पहुँचा सकता है। हमें स्थानीय आवश्यकताओं और संसाधनों को पहचानकर योजनाओं को धरातल पर उतारना होगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि CPPP (Co-operative Public Private Partnership) नवाचार की सक्सेस स्टोरी तैयार की जाए। इस नवाचार को दस्तावेज़ रूप में भी संकलित किया जाए।

    मंत्री  सारंग ने कहा कि जिला स्तर पर सहकारी बैंकों के सीईओ के माध्यम से किसानों, सहकारी समितियों के प्रबंधकों तथा अन्य संबंधित हितधारकों से सुझाव एकत्र किए जाएं। जिससे मुख्यालय से आवश्यक सुधार करते हुए योजनाओं का प्रभावी कियान्वयन किया जा सके।

    बैठक में प्रमुख सचिव सहकारिता  डी.पी. आहूजा, आयुक्त सहकारिता  मनोज पुष्प, प्रबंध संचालक (उपभोक्ता संघ)  ऋतुराज रंजन, प्रबंध संचालक (बीज संघ)  महेंद्र दीक्षित, प्रबंध संचालक (अपेक्स बैंक)  मनोज गुप्ता सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • वंदना ठाकुर का ऐतिहासिक प्रदर्शन, वर्ल्ड बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में भारत को मिला गोल्ड

    इंदौर 

    मध्य प्रदेश की बेटियों ने कई बार देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है, और इस सूची में अब एक और सुनहरा नाम जुड़ गया है। इंदौर की वंदना ठाकुर ने इंडोनेशिया में आयोजित 16वीं वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग और फिजिक स्पोर्ट्स चैंपियनशिप 2025 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि से न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि पूरा देश गौरवान्वित हुआ है। वंदना ठाकुर ने 55+ किग्रा श्रेणी में दमदार प्रदर्शन कर दुनिया भर के प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए गोल्ड अपने नाम किया। मंच पर उनकी फिटनेस, पॉज़िंग और परफॉर्मेंस ने सभी को प्रभावित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई

    उनकी इस जीत पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- “World Bodybuilding & Physique Sports Championships 2025 (55+ किग्रा श्रेणी) में इंदौर की बेटी वंदना ठाकुर जी को स्वर्ण पदक अर्जित करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

    मध्यप्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने वाली यह उपलब्धि हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।” वंदना की यह जीत साबित करती है कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। उनकी सफलता से प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को भी नया उत्साह मिला है।

    11 से 17 नवंबर 2025 तक इंडोनेशिया के बाटम शहर (रियाउ प्रांत) में आयोजित 16वीं वर्ल्ड बॉडीबिल्डिंग एंड फिज़िक स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में वंदना ठाकुर ने वह कारनामा कर दिखाया जिसकी कल्पना भी साहस माँगती है। विश्व के दिग्गज बॉडीबिल्डर्स के बीच अकेले भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने करोड़ों देशवासियों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। अपने कंधों पर पूरे राष्ट्र की उम्मीदों का भार उठाकर उन्होंने उसे सुनहरे मुक़ाम तक पहुँचाया।

    मंच पर उनकी जीत जितनी चमकदार थी, उस तक का सफ़र उतना ही पथरीला। कड़कड़ाती ठंड में सुबह चार बजे उठना, घंटों की हैरतअंगेज़ ट्रेनिंग, चोटों से जूझना, फिर भी हँसते हुए आगे बढ़ना; यही वंदना की कहानी है। वे बस एक बात पर अड़ी थीं, “रार नहीं ठानूँगी, हार नहीं मानूँगी।” यह जीत केवल उनके मज़बूत शरीर की नहीं, उनके अटूट इरादे, कठोर अनुशासन और देशप्रेम की जीत है।

    जीत को लेकर भावुक वंदना ठाकुर ने अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा, "जब मैं मंच पर गई, तो मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी, तिरंगे के लिए जीतना। भारत का तिरंगा इस मंच पर लहराना है, यही मेरा लक्ष्य था और इसे सच करने के लिए जो भी करना पड़े, उसके लिए मैं तैयार थी। मैंने कई महीनों पहले से ही देश के लिए गोल्ड लाने की ज़िद के साथ तैयारी कर दी थी। मैं हर महिला से, हर बालिका से यही कहना चाहती हूँ कि कुछ भी हासिल करने की ललक यदि मन में हो, तो उसे पूरा करने की ज़िद पर अड़ जाओ, तुम्हें जीतने से कोई भी नहीं रोक सकता, खुद तुम भी नहीं। यह गोल्ड मैडल सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि हर उस महिला का है, जिसे कभी बताया गया था कि वह कुछ नहीं कर सकती, लेकिन फिर भी उसने कर दिखाया। मैं चाहती हूँ कि यह मेडल भारत की हर एक बेटी के सपनों में सुनहरा रंग भरे और उन्हें सबसे आगे रहने की प्रेरणा दे।"

    वंदना ठाकुर की यह ऐतिहासिक उपलब्धि इसलिए भी विशेष है, क्योंकि वे भारत की पहली महिला बॉडीबिल्डर बन गई हैं, जिन्होंने महिला बॉडीबिल्डिंग कैटेगरी में भारत के लिए गोल्ड जीतकर दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया है। वंदना की इस उपलब्धि ने न सिर्फ भारत के खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है, बल्कि करोड़ों महिलाओं को यह भरोसा भी दिया है कि सपनों के साथ चलने वाले कदम कभी व्यर्थ नहीं जाते। ऐसे में, वंदना आज सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की प्रेरणा, उम्मीद और साहस की प्रतीक बन चुकी हैं। सिल्वर और गोल्ड की कहानी से परे, असल में वंदना जैसी महिलाएँ ही भारत का गोल्ड है। बल्कि नई पीढ़ी की प्रेरणा, उम्मीद और साहस की प्रतीक बन चुकी हैं। सिल्वर और गोल्ड की कहानी से परे, असल में वंदना जैसी महिलाएँ ही भारत का गोल्ड है।

    'तिरंगे के लिए जीतना है'

    जीत को लेकर भावुक वंदना ठाकुर ने अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा, "जब मैं मंच पर गई, तो मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी, तिरंगे के लिए जीतना। भारत का तिरंगा इस मंच पर लहराना है, यही मेरा लक्ष्य था और इसे सच करने के लिए जो भी करना पड़े, उसके लिए मैं तैयार थी। मैंने कई महीनों पहले से ही देश के लिए गोल्ड लाने की जिद के साथ तैयारी कर दी थी। मैं हर महिला से, हर बालिका से यही कहना चाहती हूँ कि कुछ भी हासिल करने की ललक यदि मन में हो, तो उसे पूरा करने की जिद पर अड़ जाओ, तुम्हें जीतने से कोई भी नहीं रोक सकता, खुद तुम भी नहीं। यह गोल्ड मेडल सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि हर उस महिला का है, जिसे कभी बताया गया था कि वह कुछ नहीं कर सकती, लेकिन फिर भी उसने कर दिखाया। मैं चाहती हूँ कि यह मेडल भारत की हर एक बेटी के सपनों में सुनहरा रंग भरे और उन्हें सबसे आगे रहने की प्रेरणा दे।"

    खास है उपलब्धि

    वंदना ठाकुर की यह ऐतिहासिक उपलब्धि इसलिए भी विशेष है, क्योंकि वे भारत की पहली महिला बॉडीबिल्डर बन गई हैं, जिन्होंने महिला बॉडीबिल्डिंग कैटेगरी में भारत के लिए गोल्ड जीतकर दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया है। वंदना की इस उपलब्धि ने न सिर्फ भारत के खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है, बल्कि करोड़ों महिलाओं को यह भरोसा भी दिया है कि सपनों के साथ चलने वाले कदम कभी व्यर्थ नहीं जाते। ऐसे में, वंदना आज सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की प्रेरणा, उम्मीद और साहस की प्रतीक बन चुकी हैं। सिल्वर और गोल्ड की कहानी से परे, असल में वंदना जैसी महिलाएँ ही भारत का गोल्ड है।

    घंटोंं की कड़ी मेहनत और अनुशासन वंदना का रोज सुबह जल्द उठना, घंटों की कड़ी ट्रेनिंग, चोटों से लड़ना और फिर भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना उनके इस संकल्प ने उन्हें यह गौरव दिलाया।

    जीत को लेकर भावुक हुई वंदना ठाकुर ने फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि जब मैं मंच पर गई तो मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी, तिरंगे के लिए जीतना। भारत का तिरंगा इस मंच पर लहराना है, यही मेरा लक्ष्य था। इसे सच करने के लिए जो भी करना पड़े, उसके लिए मैं तैयार थी। मैंने कई महीनों पहले से ही देश के लिए गोल्ड लाने की जिद के साथ तैयारी कर दी थी।

    वंदना ने कहा कि बचपन से अब तक के कठिन परिश्रम के बाद आज वो सपना पूरा हुआ है। उन्होंने अपनी कोच गीतांजली विश्वकर्मा को दिल से धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं आज उनके सहयोग से ही विश्व चैम्पियन हूं। इसके साथ अतुल मलिकराम सर, नेहा गौर और स्वामी रमेश सर का आभार जाताया।

    इसके पूर्व वंदना 2024 में एशियन चैंपियनशिप में भारत के लिए सिल्वर जीत चुकी है। इसके साथ ही नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड जीत चुकी है। वह इंदौर स्वच्छता अभियान की ब्रांड एम्बेसेडर हैं।