• मध्य प्रदेश में ठंड से राहत नहीं, कोहरे की वजह से रीवा-सागर में विजिबिलिटी 1-2 किमी

    भोपाल 

     मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड का कहर जारी है। उत्तर से आ रही बर्फीली हवाओं के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक शीतलहर से राहत नहीं मिलने की चेतावनी दी है। साथ ही कई जिलों में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे विजिबिलिटी मात्र 200 मीटर तक रहने की संभावना है।
    दिल्ली से मध्यप्रदेश आने वाली ट्रेनें कोहरे की वजह से 30 मिनट से 8 घंटे तक लेट चल रही हैं। गुरुवार को पंजाब मेल, शताब्दी, झेलम, सचखंड, मालवा, छत्तीसगढ़, कोल्हापुर एसएफ, मंगला लक्षद्वीप समेत कई ट्रेनें अपने तय समय से देरी से चल रही हैं।

    दूसरी ओर आज सुबह भोपाल, ग्वालियर-उज्जैन समेत 12 जिलों में कोहरा छाया रहा। रीवा और सागर में विजिबिलिटी 1 से 2 किलोमीटर दर्ज की गई। भोपाल, गुना, ग्वालियर, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, उज्जैन खजुराहो, मंडला में विजिबिलिटी 2 से 4 किमी तक रही। उत्तरी हिस्से के अन्य जिलों में भी कोहरे का असर देखा गया।

    मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार-गुरुवार की रात में कई शहरों में पारे में गिरावट का दौर जारी रहा। इंदौर प्रदेश में सबसे ठंडा रहा। 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 5.4 डिग्री, इंदौर में 4.5 डिग्री, ग्वालियर में 9.3 डिग्री, उज्जैन में 7.3 डिग्री और जबलपुर में पारा 9.2 डिग्री रहा।

    अन्य प्रमुख शहरों का तापमान इस प्रकार रहा 

        ग्वालियर: 9.8 डिग्री
        उज्जैन: 8.0 डिग्री
        दमोह: 8.5 डिग्री
        जबलपुर: 8.6 डिग्री
        खजुराहो: 8.2 डिग्री
        मंडला: 8.5 डिग्री
        नरसिंहपुर: 8.6 डिग्री
        रीवा: 7.3 डिग्री
        सतना: 8.4 डिग्री

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत की पहाड़ियों पर बर्फबारी से ठंडी हवाएं एमपी पहुंच रही हैं, जिससे शीतलहर का प्रभाव बढ़ गया है। घने कोहरे के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात पर असर पड़ सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटों में तापमान में और गिरावट आ सकती है। 

    शाजापुर में 50 मीटर बाद कुछ नहीं दिखा, भोपाल-ग्वालियर में भी कोहरा इससे पहले बुधवार सुबह भोपाल, ग्वालियर समेत 22 जिलों में कोहरा छाया रहा। कोहरे की वजह से ट्रेनें-फ्लाइट भी डिले हुई। भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, कटनी, जबलपुर, दमोह, सागर और विदिशा में घना कोहरा छाया रहा।

    ग्वालियर, नर्मदापुरम, उज्जैन, मंडला, रीवा, सतना में 1 से 2 किलोमीटर तक विजिबिलिटी रही। वहीं, भोपाल, जबलपुर, खजुराहो, नौगांव, मलाजखंड, दतिया, गुना, इंदौर, रतलाम में 2 किमी के बाद कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था। कोहरा छाने के दौरान वाहनों को सावधानी से चलाने की समझाइश भी दी गई। शाजापुर में इतना कोहरा था कि 50 मीटर के बाद कुछ भी नहीं दिख रहा था।

     

    मंदसौर-शाजापुर सबसे ठंडे, पारा 4 डिग्री से नीचे मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार-बुधवार की रात प्रदेश के कई शहरों में पारे में खासी गिरावट देखी गई। 5 बड़े शहरों की माने तो इंदौर में सबसे कम 4.9 डिग्री रहा। भोपाल में 5.1 डिग्री, ग्वालियर में 9.8 डिग्री, उज्जैन में 8 डिग्री और जबलपुर में 8.6 डिग्री रहा।

    मंदसौर प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री पहुंच गया। शाजापुर में पारा 3.8 डिग्री रहा। वहीं, राजगढ़ में 4.4 डिग्री, पचमढ़ी-नौगांव में 5.4 डिग्री, उमरिया-मलाजखंड में 5.6 डिग्री, रायसेन में 6.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 6.8 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, मंडला में 8.1 डिग्री, खंडवा-सतना में 8.4 डिग्री, दमोह-बैतूल में 8.5 डिग्री, नरसिंहपुर में 8.6 डिग्री, खजुराहो, रतलाम-गुना में 9.6 डिग्री और दतिया में 9.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    सुबह कोहरा…इसलिए गाड़ी संभलकर चलाने की सलाह प्रदेश में कोहरा छा रहा है। ऐसे में एक्सपर्ट ने लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग करने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने हेल्थ और फसलों को लेकर एडवाइजरी भी जारी की है।

        ट्रैफिक – कोहरा होने पर गाड़ी चलाते समय या किसी ट्रांसपोर्ट के जरिए ट्रैवल करते समय सावधान रखें। ड्राइविंग धीरे करें और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।

        हेल्थ– तेज ठंड होने पर शरीर की गर्माहट बनाए रखने के लिए सिर, गर्दन, हाथ-पैर की उंगलियों को अच्छे से ढंके। फ्लू, सर्दी, खांसी-जुकाम होने पर डॉक्टर को दिखाए। विटामिन सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं।

        कृषि- जहां मिट्‌टी में पर्याप्त नमी हो, वहां गेहूं, चना, सरसों-मटर की बुआई करें। जहां बुआई हो चुकी है, वहां जरूरत पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लें। पिछली फसलों के अवशेष यानी, ठूंठ को कभी न जलाएं।

    19 दिसंबर से फिर नया सिस्टम, ठंड बढ़ेगी मौसम विभाग के अनुसार, नए नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) 19 दिसंबर से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करने की संभावना है। जिसका असर एमपी में अगले दो-तीन दिन में दिखाई देने लगेगा। इसके पीछे ही एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस आ रहा है। इससे ठंड का असर और भी बढ़ेगा।

    जेट स्ट्रीम की रफ्तार 185 किमी प्रतिघंटा वर्तमान में जेट स्ट्रीम भी चल रही है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर है। बुधवार को यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 185 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। बीते दिनों रफ्तार 222 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच चुकी है।

    क्या होती है जेट स्ट्रीम? मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इस बार रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है।

    पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा सर्दी बढ़ा रही है। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही हो रहा है।

  • मुख्यमंत्री के नेतृत्व में डीजी-आईजी कांफ्रेंस, पुलिसिंग में बदलाव और कानून व्यवस्था पर फोकस

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज का दिन बेहद व्यस्त रहने वाला है। वे पुलिस मुख्यालय (PHQ) में आयोजित डीजी/आईजी कॉन्फ्रेंस से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे और स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल होंगे। सुबह 11 बजे पुलिस मुख्यालय (PHQ) में स्टेट लेवल कॉन्फ्रेंस ऑन इम्प्लीमेंटेशन फॉर डिसेमिनेशन ऑफ आउटकम्स ऑफ डीजी/आईजी कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय स्तर पर हुई डीजी/आईजी कॉन्फ्रेंस के निष्कर्षों को राज्य स्तर पर लागू करने और प्रसारित करने पर विस्तृत चर्चा होगी। मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल होंगे और पुलिस अधिकारियों को दिशा-निर्देश देंगे। इसके बाद दोपहर 1:35 बजे सीएम हाउस में एक अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग मुख्यमंत्री का अभिनंदन करेंगे।

    दोपहर 3 बजे सीएम हाउस में ही जनजातीय क्षेत्र आरोग्य सेवा संकल्प सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का फोकस जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, चुनौतियों का समाधान और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर होगा। मुख्यमंत्री इस सम्मेलन में संकल्प के साथ नई योजनाओं और पहलों की घोषणा कर सकते हैं। ये आयोजन राज्य में कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और जनजातीय क्षेत्रों के स्वास्थ्य विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। 

    मॉडर्न पुलिसिंग और साइबर सुरक्षा पर होगा मंथन 

    आज सुबह 11 बजे भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) में स्टेट लेवल कॉन्फ्रेंसआयोजित की जा रही है। ये कॉन्फ्रेंस राष्ट्रीय स्तर पर हुई डीजी और आईजी कॉन्फ्रेंस के फैसलों को लागू करने के लिए बुलाई गई है।

    सीएम मोहन यादव इस बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य  मध्यप्रदेश में सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को सुधारना है। सीएम यहां मॉडर्न पुलिसिंग, साइबर सुरक्षा और राज्य की इन्ट्रिंसिक सेफ्टी को लेकर नए दिशा-निर्देश भी जारी करेंगे। 

    जन-संवाद का कार्यक्रम

    PHQ Bhopal की बैठक के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 1:35 बजे सीएम हाउस पहुंचेंगे, जहां एक खास स्वागत समारोह होगा। इस कार्यक्रम में समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग सीएम से मिलकर उनके अब तक के काम के लिए उन्हें सम्मानित करेंगे।

    इसके बाद, दोपहर 3 बजे सीएम हाउस में 'जनजातीय क्षेत्र आरोग्य सेवा संकल्प सम्मेलन' होगा। इस सम्मेलन में सीएम यादव जनजातीय इलाकों में स्वास्थ्य की चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। इसमें डॉक्टरों की उपलब्धता, नई स्वास्थ्य योजनाओं और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बारे में बातचीत होगी।

    इसके साथ ही, सीएम इस अवसर पर जनजातीय क्षेत्रों के लिए नई मोबाइल मेडिकल यूनिट्स या विशेष हेल्थ सेंटर्स की घोषणा भी कर सकते हैं। इन दोनों कार्यक्रमों के जरिए राज्य सरकार अपनी सुरक्षा और सेवा के वादे पर काम करने की कोशिश कर रही है।

    सरकार की प्राथमिकताएं बताएंगे सीएम

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव अधिकारियों को कानून व्यवस्था को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं से भी अवगत कराएंगे। साथ ही बालाघाट, डिंडोरी और मंडला जिलों में नक्सलवाद के खात्मे के बाद वहां के लोगों की जीवनशैली में आए बदलाव और आगे की कार्ययोजना पर भी चर्चा करेंगे।

    गौरतलब है कि राज्य सरकार ने फील्ड में पदस्थ अधिकारियों को नियमित फील्ड विजिट करने और थानों में आने वाले नागरिकों की शिकायतों को संवेदनशीलता और सह्रदयता से सुनने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री इस विषय पर भी अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा करेंगे। बैठक में डीजीपी कैलाश मकवाणा सहित सभी डीजी, एडीजी और आईजी स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहेंगे।

    सीएम मोहन यादव का आज का कार्यक्रम 

        सुबह 11:00 बजे: पुलिस मुख्यालय (PHQ) में 'स्टेट लेवल कॉन्फ्रेंस' में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

        सुबह 11:30 बजे: राष्ट्रीय डीजी/आईजी कॉन्फ्रेंस के निष्कर्षों को राज्य में लागू करने पर पुलिस अफसरों से चर्चा करेंगे।

        दोपहर 12:30 बजे: साइबर सुरक्षा और मॉडर्न पुलिसिंग को लेकर नए दिशा-निर्देश और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स जारी करेंगे।

        दोपहर 01:35 बजे: मुख्यमंत्री निवास (CM House) आगमन और विभिन्न समाज प्रमुखों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में हिस्सा लेंगे।

        दोपहर 02:15 बजे: समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर जन-संवाद और उनकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे।

        दोपहर 03:00 बजे: सीएम हाउस में 'जनजातीय क्षेत्र आरोग्य सेवा संकल्प सम्मेलन' का शुभारंभ करेंगे।

        दोपहर 03:45 बजे: जनजातीय क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी और स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान पर विशेषज्ञों से संवाद करेंगे।

        शाम 04:30 बजे: आदिवासी इलाकों के लिए नई मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्पेसिफिक हेल्थ सेंटर्स की बड़ी घोषणा कर सकते हैं।

  • कथनी नहीं करनी में विश्वास: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जनकल्याण संदेश

    जनकल्याण के लिए जो कहा, वही करके दिखाया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    कथनी नहीं करनी में विश्वास: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जनकल्याण संदेश

    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनकल्याण के लिए जो बात कही गई, उस पर अमल भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में नागरिकों की समृद्धि के लिए दो वर्ष में किए गए विशेष कार्यों और अर्जित उपलब्धियों की बिंदुवार जानकारी बुधवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में दिए गए संबोधन में सदन में प्रस्तुत की। इन में प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार है:-

        पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल जी की जन्म वर्षगांठ पर आगामी 25 दिसम्बर को ग्वालियर में उद्योग वर्ष के समापन अवसर पर 2 लाख करोड़ के निवेश से विभिन्न इकाईयों के भूमि पूजन का कार्य हो रहा है।

        मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के क्षेत्रों में संयुक्त चीता कॉरीडोर बनाने की पहल। गांधी सागर और नौरादेही में भी चीते बसाएंगे।

        शिवपुरी में 9वें टाइगर रिजर्व पार्क की शुरूआत।

        रीजनल औद्योगिक कॉन्क्लेव के साथ ही रेडिमेड और खिलौना निर्माण इकाईयों में कार्य करने वालों को प्रोत्साहन राशि।

        आने वाले समय में सेटेलाइट के माध्यम से किसानों के खेतों और खसरा खतोनी की जानकारी प्राप्त कर घर बैठे खाद पहुंचाने का संकल्प।

        स्वास्थ्य क्षेत्र में चिकित्सा अधिकारियों सहित अन्य पदों पर लगभग 42 हजार नियुक्तियों की स्वीकृति।

        वर्ष 1956 में प्रदेश में 5 मेडिकल कॉलेज थे। गत डेढ़ वर्ष में 6 नए कॉलेज प्रारंभ, पीपीपी मोड पर 14 कॉलेजों के लिए निविदा की कार्यवाही। दिसम्बर 2025 में 4 मेडिकल कॉलेजों का भूमि पूजन निर्धारित। प्रदेश में 52 मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे। सभी जिलों में कॉलेज होगा।

        प्रत्येक संभाग में वन्य प्राणी संग्रहालय और रेस्क्यू सेंटर प्रारंभ करने की पहल।

        राजधानी भोपाल में बड़ी झील में शिकारों से पर्यटकों और नागरिकों को कश्मीर का सुखद अहसास।

        इंदौर में मेट्रो प्रारंभ। भोपाल में मेट्रो ट्रेन संचालन शीघ्र।

        प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जन्म वर्षगांठ 17 सितम्बर को धार जिले में पीएम मित्रपार्क की आधारशीला रखी।

        प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण की ठोस पहल कर पीढ़ियों को गंभीर जन्मजात रोग से बचाने का प्रयास।

        भगोरिया को राष्ट्रीय पर्व की मान्यता दी गई। उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी में जनजातीय वर्ग की भागीदारी की शुरूआत की। जनजातीय गौरवशाली विभूतियों के सम्मान में जबलपुर, सिंग्रामपुर और पचमढ़ी में मंत्रिपरिषद की बैठकें की गईं।

        राज्य में तेज ध्वनि यंत्रों पर नियंत्रण की पहल।

        गौ-संरक्षण के राज्य में ठोस प्रयास किए गए।

     

  • सुकमा में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़, दोनों ओर से फायरिंग जारी

    सुकमा 

    छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में DRG जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ चल रही है। खबर है कि इस दौरान  तीन नक्सली मारे गए हैं, जबकि कुछ घायल भी हुए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    पुलिस को सूचना मिली थी कि गोलापल्ली इलाके में भारी संख्या में नक्सली मौजूद हैं। इस आधार पर DRG के जवान जंगल में सर्च ऑपरेशन के लिए गए थे। 18 दिसंबर की सुबह जब जवान उस इलाके में पहुंचे, तो माओवादियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी।

    माओवादियों की मौजूदगी की जानकारी के आधार पर जिला सुकमा की डीआरजी(जिला रिजर्व गार्ड) टीम ने गुरुवार की सुबह सर्च आपरेशन शुरू किया था। अभियान के दौरान सुबह से ही सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच रुक-रुक कर फायरिंग हो रही है।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार मुठभेड़ स्थल से हथियारों की बरामदगी हुई है, हालांकि मारे गए माओवादियों की पहचान और बरामद सामग्री का विस्तृत विवरण अभियान पूर्ण होने के बाद जारी किया जाएगा।

    इस पूरे ऑपरेशन की मॉनिटरिंग स्वयं सुकमा एसपी किरण चव्हाण कर रहे हैं। क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात कर सर्च ऑपरेशन को और तेज किया गया है। बता दें कि पिछले दो वर्ष में माओवादियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है, शीर्ष माओवादी नेताओं सहित 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ में मारे गए हैं।

    इसके जवाब में जवानों ने भी कार्रवाई की और दोनों तरफ से सुबह से ही गोलीबारी जारी है। मारे गए नक्सलियों में एरिया कमेटी मेंबर (ACM) कैडर के होने की संभावना जताई जा रही है। इस कैडर पर 5 लाख रुपए का इनाम रखा गया है।

    3 दिसंबर को मुठभेड़ में मारे गए थे 12 नक्सली

    इससे पहले 3 दिसंबर को दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर जवानों ने 12 नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) वेल्ला मोडियम भी मारा गया था। वहीं, इस एनकाउंटर में DRG के 3 जवान शहीद और 2 घायल हुए थे।

    16 नवंबर- 3 नक्सली मारे गए थे

    16 नवंबर 2025 को भेज्जी-चिंतागुफा के सीमावर्ती क्षेत्र में जवानों ने तीन नक्सलियों को मार गिराया था। इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। जिसके बाद DRG की टीम ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान तुमालपाड़ के जंगल में नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी।

    फायरिंग के बाद जवानों ने भी मोर्चा संभाला। नक्सलियों की गोलियों का जवाब दिया। सुबह से दोनों ओर से रुक-रुककर फायरिंग हुई। इसमें तीन नक्सली मारे गए थे। जवानों ने सर्चिंग के दौरान जंगल से तीनों नक्सलियों के शव बरामद किए गए थे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिया समृद्ध मध्यप्रदेश विजन 2047 पर केंद्रित संबोधन

    सुखद, संपन्न मध्यप्रदेश की कल्पना को बिना भेदभाव के खुला दृष्टिकोण रखकर करेंगे साकार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    समृद्ध मध्यप्रदेश विजन@2047 आठ प्रमुख बिंदुओं पर होगा केंद्रित
    केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डेडलाइन के पहले किया नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिया समृद्ध मध्यप्रदेश विजन 2047 पर केंद्रित संबोधन

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुखद और सम्पन्न मध्यप्रदेश की कल्पना को बिना भेदभाव के खुले दृष्टिकोण के साथ कार्य करते हुए साकार किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मध्यप्रदेश विधान सभा के विशेष सत्र के समापन अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि पक्ष और विपक्ष के साथ नागरिकों के सुझावों और सहयोग के आधार पर प्रदेश के समग्र  विकास के लिए कार्य होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के विजन के अनुसार मध्यप्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में क्रियान्वयन किया जाएगा। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के विजन को क्रियान्वित करने के लिए 8 प्रमुख विषयों पर तैयार किए गए दृष्टि-पत्र पर कार्य करेगा।

    दृष्टि-पत्र के इन 8 विषयों में 300 बिंदु निर्धारित किए गए हैं। आठ प्रमुख विषयों में सतत औद्योगिक विकास, अगली पीढ़ी की उन्नत कृषि, सेवाओं के क्षेत्र में विकास, विश्व स्तरीय शिक्षा और कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य और पोषण, शहरी और ग्रामीण बुनियादी ढांचा, सुशासन और सुगम नागरिक सेवा और नवीन वित्त पोषण और निवेश शामिल है। 

    इसके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन में अपने संबोधन में प्रदेश में गत 2 वर्ष में अर्जित उपलब्धियों का भी विस्तार से उल्लेख किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्य रूप से राज्य के नागरिकों की समृद्धि के लिए कृषि, महिला सशक्तिकरण, वन्य-प्राणी संरक्षण, सांस्कृतिक अभ्युदय, शासकीय विभागों में पदों पर नियुक्तियां, नक्सलवाद पर केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डेडलाइन के पूर्व  नियंत्रण की प्रभावी कार्यवाही , शहरी विकास, ग्रामीण विकास, ऊर्जा उत्पादन, सड़कों के निर्माण, स्वास्थ्य क्षेत्र में नई सुविधाओं, जनजातीय नायकों के सम्मान, मजरों-टोलों तक बिजली पहुंचाने, अन्तर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोनाओं के संबंध में विस्तार से जनकारी दी।    

     

  • सिंहस्थ 2028 को लेकर बड़ा कदम: प्रयागराज के अधिकारी इंदौर में साझा करेंगे व्यवस्थाओं का अनुभव

    इंदौर
     उज्जैन में वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ महापर्व के सफल आयोजन के लिए बिजली वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में ठोस प्रयास शुरू हो गए हैं।

    इसी क्रम में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान बिजली प्रबंधन का अनुभव रखने वाले अधिकारियों का एक दल मध्य प्रदेश के इंदौर और उज्जैन के दौरे पर आया है।

    इस दौरे का मुख्य उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान निर्बाध, सुरक्षित और प्रभावी विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपने अनुभव साझा करना और स्थानीय अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना है।

    इंदौर और उज्जैन में बिजली वितरण व्यवस्था का होगा अवलोकन

    मंगलवार को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम, लखनऊ के वरिष्ठ अधिकारियों का दल इंदौर पहुंचा। यह दल पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलकर इंदौर और उज्जैन में बिजली वितरण से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं का अवलोकन करेगा।

    साथ ही सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इन अधिकारियों के सुझावों और तकनीकी मार्गदर्शन के आधार पर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देगी।
    इंदौर और उज्जैन में कार्यशालाओं का आयोजन भी करेंगे

    उल्लेखनीय है कि पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों का एक दल पहले ही प्रयागराज जाकर महाकुंभ के दौरान की गई बिजली व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अध्ययन कर चुका है।

    अब उसी अनुभव को व्यवहार में लाने के लिए प्रयागराज से आए विशेषज्ञ अधिकारी चार दिवसीय दौरे के दौरान इंदौर और उज्जैन में कार्यशालाओं का आयोजन भी करेंगे। इन कार्यशालाओं में वे अधिकारी शामिल होंगे, जिन्होंने महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन में विद्युत आपूर्ति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी।

     

  • एमपी में सड़क क्रांति: अमरकंटक-झाबुआ नर्मदापुरम एक्सप्रेस वे से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    अमरकंटक

    मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से झाबुआ तक निर्माणाधीन नर्मदा एक्सप्रेस-वे (नर्मदा प्रगति पथ) नर्मदापुरम को प्रदेश के 10 शहरों से जोड़ देगा। इसके जरिए जिले की औद्योगिक विकास होने के साथ व्यापारिक गतिविधियां सुलभ होंगी। सीहोर के बाड़ी से बुदनी के बीच प्रगति पथ के फोरलेन सड़क का निर्माण शुरू किया है। नर्मदा नदी के किनारे 867 किमी के इस पथ का बाड़ी से बुदनी तक 64 और बुदनी से भैरुंदा तक 51 किमी का हिस्सा नर्मदापुरम की सीमा से गुजरेगा।

    मोहासा औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा लाभ

    नर्मदापुरम के मोहासा औद्योगिक क्षेत्र और रिन्युएबल एनर्जी पार्क के चलते नर्मदा प्रगति पथ महत्वपूर्ण साबित होगा। इस पथ से उद्योगों को हवाई अड्डे से बंदरगाह तक का सफर आसान होगा। इसके अलावा प्रगति पथ पर्यटन को बढ़ाने में भी अहम साबित होगा। छवीसगढ़ की सीमा से गुजरात तक सफर आसान बनाने वाले इस प्रोजेक्ट से उद्योगों और पर्यटन में सकारात्मक परिणाम क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ाएंगे।

    2026 तक पूरा होगा निर्माण

    एनएचएआइ के मुताबिक 2026 तक इस एक्सप्रेस वे को तैयार करने का लक्ष्य लेकर निर्माण किया जा रहा है। एनएचएआई देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे की तरह नर्मदा प्रगति पथ को अत्याधुनिक बना रही है। इस पर सफर करने वाले राहगीरों, वाहन चालकों को हर जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। यह एक्सप्रेस-वे डिंडौरी, जबलपुर, बड़वाह, इंदौर, धार, सरदारपुर, झाबुआ से गुजरात सीमा तक जाएगा। छवीसगढ़ से गुजरात तक एक कनेक्टिविटि बनाएगा। प्रदेश के 10 जिले सीधे नर्मदापुरम से भी जुड़ जाएंगे। इससे बुदनी, शाहगंज, से बाड़ी बकतरा, रेहटी, नसरूल्लागंज तक आवागमन सुलभ होगा।

    नर्मदा प्रगति पथ का निर्माण शुरू

    बाड़ी से बुदनी तक नर्मदा प्रगति पथ का निर्माण शुरू हो गया है। इस फोरलेन सडक़ का निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे नर्मदा किनारे के 10 शहर आपस में जुडेंगे।

    – आकाश चौकसे, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआइ नर्मदापुरम

  • 2026 में VDTR का नया अध्याय: चीते शिफ्टिंग, बजट की मंजूरी और प्रोजेक्ट तैयार

    सागर

     वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (वीडीटीआर) में चीता प्रोजेक्ट अब साकार होने की दहलीज पर है। लंबे समय से प्रशासनिक, तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारणों से अटका यह प्रोजेक्ट 2026 में गति पकड़ेगा। शासन से बजट स्वीकृत होने के बाद तैयारियों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि निर्माण कार्य मार्च तक पूर्ण होने की संभावना है। इसके बाद जुलाई तक चीतों की शिफ्टिंग हो सकेगी।

    5.20 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत

    डिप्टी डायरेक्टर डॉ. एए अंसारी ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत शासन द्वारा 5.20 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि से चीतों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।

    चीता लाने से पहले टाइगर रिजर्व में अलग-अलग तरह की तैयारी भी की जानी है. इसके लिए टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के द्वारा 5 करोड़ रुपए भी दिए गए हैं इन पैसों से चार सॉफ्ट रिलीज बोमा बनाए जाएंगे साथ ही जल स्रोत के लिए तालाब भी खुदबाएं जाएंगे.

    2026 में शिफ्ट होंगे चीते

    – 5.20 करोड़ मंजूर

    – मार्च 2026 तक पूरा होगा निर्माण कार्य 
    जुलाई 2026 तक चीतों की शिफ्टिंग की की उम्मीद

    -3 से 4 चीते शुरू में लाए जा सकते हैं

    चीतों के नए आवास में बनेंगे 8 बोमा

    एमपी के प्रोजेक्ट चीता के तहत मोहली क्षेत्र में 8 बोमा तैयार होंगे। इनमें 4 क्वारंटाइन बोमा 50-50 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होंगे। यहां चीतों को प्रारंभिक अवधि में रखा जाएगा। इसके अलावा 100-100 हेक्टेयर के 4 सॉफ्ट रिलीज बोमा भी बनेंगे। वीडीटीआर के अफसरों के अनुसार, बजट स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। उम्मीद है कि 3 से 4 चीते रिजर्व में आएंगे।

     

    वैज्ञानिकों ने किया निरीक्षण

    इसको लेकर पिछले हफ्ते भोपाल और कूनो से आए वैज्ञानिकों ने जो एरिया चीतों के लिए चिन्हित किया गया है उस जगह का निरीक्षण किया. यहां पर कुछ जरूरी चीजों पर ध्यान देने की निर्देश दिए गए हैं जो व्यवस्था को सुधारने के साथ दुरुस्त करेंगे. चीता आने लाने सबसे पहले बोमा की ही आवश्यकता होगी. इसके लिए सौ-सौ हेक्टेयर के 4 बोमा बनाए जाएंगे जो एक दूसरे से कनेक्ट रहेंगे. यानी की 1000 एकड़ का एरिया तार फेंसिंग के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा.

    जहां चीता लाकर छोड़ जाएंगे इनकी मॉनिटरिंग की जाएगी कि यहां पर उनका बिहेवियर कैसा है, अपने भोजन के लिए किस तरह की शिकार करते हैं रोजाना की एक्टिविटी क्या होगी और जब सब कुछ अनुकूल हो जाएगा तो इन्हें इसे रिलीज कर खुले जंगल में छोड़ दिया जाएगा ताकि यह अच्छे से सरवाइव कर सके. इसके साथ ही यहां पर सुरक्षा की दृष्टि से हाथियों से निगरानी होगी, 300 से अधिक वन कर्मी  इनकी हर एक एक्टिविटी पर नजर रखेंगे.

    चीता का बनेगा तीसरा घर

    टाइगर रिजर्व के अंदर तीन ऐसे एरिया चिन्हित किए गए हैं. जो बिल्कुल जंगल के बीचों बीच है. जहां शिकारियों की दृष्टि से भी यह बचे रहेंगे, क्योंकि वन विभाग को शिकारियो से बचाने की ही सबसे बड़ी चुनौती होती है. वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व की डिप्टी डायरेक्टर डॉ ए ए अंसारी बताते हैं कि इस अभ्यारण को चीतों का तीसरे घर के रूप में चिन्हित किया गया है. इस रूप में विकसित करने या उनके लिए किस तरह से सुरक्षित माहौल मिले उसको कैसे तैयार किया जाए इसके लिए फाइनल डीपीआर बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों के लिए भेज दी है उनसे अनुमति मिलने के बाद ही ग्राउंड स्तर पर काम शुरू कर दिया जाएगा.

    बनेगा पर्यटन का केंद्र

    नौरादेही में चीता आने के बाद यह एशिया का एकमात्र ऐसा टाइगर रिजर्व होगा जहां कैट फैमिली के तीन वन्य प्राणी होंगे. यहां पर्यटक तेंदुआ, टाइगर और चीता को देख सकेंगे, चीता आने के बाद इस टाइगर रिजर्व में पर्यटन के नए पंख लग जाएंगे, क्योंकि यहां जैसे जबलपुर सागर और दमोह जिले से बेहतर कनेक्टिविटी तो है ही साथ ही खजुराहो की चंदेल कालीन मंदिर पन्ना का टाइगर रिजर्व जबलपुर भेड़ाघाट और रायसेन का सांची स्तूप, के मध्य यह टाइगर रिजर्व है जिससे टूर प्लान में यह भी शामिल रहेगा.

  • भारत में पहली बार: MP हाइवे पर ‘टेबल-टॉप रेड मार्किंग’, वाहन चालकों और जानवरों की सुरक्षा में बड़ा सुधार

     जबलपुर

    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सड़क सुरक्षा और जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (पूर्व में नौरादेही अभयारण्य) से गुजरने वाले नेशनल हाइवे पर भारत की पहली 'टेबल-टॉप रेड मार्किंग' की गई है. दुबई के फेमस शेख जायद रोड की तर्ज पर NHAI ने हाईवे के 2 किलोमीटर लंबे घाट पर सड़क की सतह को चमकीले लाल रंग में बदल दिया है.

    खतरे वाले क्षेत्र में सड़क के ऊपर 5 मिमी मोटी, गर्म करके लगाई गई थर्मोप्लास्टिक की लाल सतह की परत बिछाई गई है. चमकीला लाल रंग वाहन चलाने वालों को तुरंत सचेत करता है कि वे गति-प्रतिबंधित और वन्यजीव-संवेदनशील गलियारे में प्रवेश कर रहे हैं.

    इसकी हल्की उभरी हुई सतह से वाहन चालक को स्पर्श और ध्वनि का संकेत मिलता है, जिससे वह बिना झटके या अचानक ब्रेक लगाए स्वाभाविक रूप से गति कम कर लेता है.

    वन्यजीवों और इंसानों के लिए 'सुरक्षा कवच'

        यह पहल पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है.
        पारंपरिक रंबल स्ट्रिप के मुकाबले यह कम शोर करती है, जिससे जंगल के जानवरों को कम परेशानी होती है.

        1.96 किलोमीटर के हिस्से में 25 समर्पित अंडरपास बनाए गए हैं ताकि जानवर सुरक्षित रूप से सड़क के नीचे से गुजर सकें.

        हाइवे के दोनों ओर ऊंची बाड़ लगाई गई है ताकि जानवर सीधे सड़क पर न आएं और अंडरपास का उपयोग करें.

        पुलों पर लगे कैमरे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं.

    NHAI की यह परियोजना यह साबित करती है कि आधुनिक इंजीनियरिंग के माध्यम से मानव जीवन और वन्यजीवों को एक साथ सुरक्षित रखा जा सकता है. यहां 'लाल सड़कें' खतरे का नहीं, बल्कि सुरक्षा और हरित इरादे का प्रतीक हैं.

    NHAI ने एक ऐसा समाधान पेश किया है जो हादसों को कम करके मानव जीवन बचाता है, वन्यजीवों को वाहनों की टक्कर से बचाता है, वन के इको-सिस्‍टम की अखंडता को संरक्षित करता है और सड़क से गुजरने वालों लिए सुगम, आरामदायक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करता है.

     

  • सदन में मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के संबंध में चर्चा

    स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह का वक्तव्य

    भोपाल 
    स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न-2047 की ओर बढ़ते हुए देश के अनुरूप मध्यप्रदेश को भी विकास की गति दी जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विकसित मध्यप्रदेश के सपने को साकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में कक्षा-5वीं तक मातृभाषा पर जोर दिया गया है और व्यावसायिक शिक्षा को छात्रों के व्यावहारिक कौशल के हिसाब से बनाया गया है। प्रदेश में तकनीकी आधारित शिक्षा में प्रौद्योगिक डिजिटल शिक्षा को महत्व दिया गया है। मंत्री श्री सिंह बुधवार को विधानसभा में विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे। अतीत की चर्चा करते हुए मंत्री श्री सिंह ने बताया कि राज्य की स्थापना के समय साक्षरता दर 21.41 प्रतिशत हुआ करती थी, जो आज लगभग 75 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह किसी एक योजना के कारण नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों के लगातार शिक्षा गुणवत्ता में सुधार, निवेश और प्रतिबद्धता का स्पष्ट उदाहरण है।

    स्कूल शिक्षा विभाग

    स्कूल शिक्षा मंत्री ने सदन में जानकारी दी कि प्रदेश में वर्ष 2003-04 में 4495 हाई स्कूल और 4211 हायर सेकेण्डरी स्कूल थे, जिनमें कक्षा-9 से 12 तक 18 लाख 79 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत थे। आज वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 22.56 लाख हो चुकी है। पिछले दो दशकों में 4670 माध्यमिक शालाओं को हाई स्कूल में तथा 1991 हाई स्कूलों को हायर सेकेण्डरी में उन्नयन किया गया है। नि:शुल्क साइकिल योजना में वर्ष 2004-05 में लाभार्थियों की संख्या 34 हजार से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 4 लाख 90 हो गई है। लैपटॉप योजना में वर्ष 2009-10 में लाभार्थी 473 से बढ़कर आज 94 हजार 300 हो गये हैं। नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकों के वितरण में लाभार्थी एक लाख 20 हजार हुआ करते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 21 लाख 70 हजार हो गयी है। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना में वर्ष 2022-23 में 7832 विद्यार्थियों को लाभ दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है। समग्र आईडी के माध्यम से 90 प्रतिशत बच्चों की ट्रेकिंग पूर्ण की जा चुकी है। बच्चों को दी जाने वाली सुविधाएँ स्कूल के सत्र शुरू होने के साथ ही दिये जाने के प्रयास किये गये हैं। प्रदेश में 30 हजार 281 शिक्षक पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। स्कूलों में 76,325 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। विभाग ने पहली बार 20 हजार से अधिक अतिशेष शिक्षकों का तर्कसंगत स्थानांतरण किया है। प्रदेश में बोर्ड परीक्षा परिणामों में भी सुधार हुआ है। कक्षा-10 का उत्तीर्ण प्रतिशत 56 प्रतिशत से बढ़कर 74.56 प्रतिशत तथा कक्षा-12 का 63 प्रतिशत से बढ़कर 76.22 प्रतिशत हो गया है। उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में 42 लाख के लक्ष्य के विरुद्ध 62 लाख 80 हजार को साक्षर करने की उपलब्धि प्राप्त की गयी है।

    कौशल विकास एवं रोजगार
    मंत्री श्री सिंह ने बताया कि प्रदेश में इस बार आईटीआई में 94.5 प्रतिशत एडमिशन हुआ है, जिसमें पिछले वर्ष से 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इन संस्थानों में प्रशिक्षण पाने वाली महिलाओं की संख्या 12179 हो गयी है। प्रदेश के आईटीआई में 8 राज्यों के विद्यार्थियों ने भी प्रवेश लिया है। उन्होंने बताया कि 20 वर्षों में प्रदेश में सरकारी आईटीआई की संख्या 133 से बढ़कर 290 हो गयी है। सीटों की संख्या भी बढ़कर 52 हजार 248 हो गयी है। आईटीआई में एक लाख बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

    तकनीकी शिक्षा
    मंत्री श्री सिंह ने बताया कि डिप्लोमा पाठ्यक्रम को कक्षा-12वीं के समतुल्य घोषित किये जाने से शैक्षणिक सत्र वर्ष 2025-26 में पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के प्रवेश में 21.38 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गयी है। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में वर्ष 2024-25 में 78 हजार 218 मेधावी विद्यार्थियों को 750 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गयी है।

    उच्च शिक्षा
    मंत्री श्री सिंह ने बताया कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है। उच्च शिक्षा वह शक्ति है, जो युवाओं को केवल रोजगार नहीं, बल्कि दृष्टि, दिशा और नेतृत्व प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में गुना, खरगौन और सागर जैसे क्षेत्रों में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई है। इन विश्वविद्यालयों ने जनजातीय ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं के लिये उच्च शिक्षा के नये द्वार खोले हैं। पिछले 2 वर्षों में उच्च शिक्षा के लिये 1150 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की परिकल्पना ने प्रत्येक जिले में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को सुलभ बनाया है। नवाचार और अनुसंधान से हमारे महाविद्यालय केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले संस्थान बनते जा रहे हैं। प्रदेश के कॉलेजों में डिजिटल शिक्षा और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। छात्राओं के लिये गाँव की बेटी और प्रतिभा किरण जैसी योजनाएँ हमारी सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने बताया कि आने वाले 3 वर्षों में उच्च शिक्षा में डिजिटल शिक्षा का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन किया जायेगा। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आईआईटी नई दिल्ली से टायअप कर प्लेसमेंट किया जा रहा है। आईआईटी बॉम्बे से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एमओयू किया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग नई शिक्षा नीति के द्वितीय चरण में काम कर रहा है, जो ऐतिहासिक उपलब्धि है।

     

  • राष्ट्रीय पशुधन मिशन – उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अमल में मध्यप्रदेश देश में दूसरे नंबर पर

    हिरण्यगर्भा अभियान से नस्ल सुधार और टीकाकरण में मध्यप्रदेश ने रचा नया कीर्तिमान

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में पशुधन विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन संभावनाओं को एक्सप्लोर करने के लिए पशुओं का नस्ल सुधार एक सशक्त माध्यम है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर हिरण्यगर्भा अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश में अगले पांच सालों में कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन) का कवरेज 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत चालू वित्त वर्ष में कुल मादा पशुओं में से 28.04 लाख (लगभग 33 प्रतिशत) गौवंशीय एवं भैंस वंशीय पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अप्रैल से नवम्बर 2025 के बीच प्रदेश में 11.76 लाख से अधिक पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कराकर उल्लेखनीय प्रगति हासिल की गई है। मध्यप्रदेश में पशुपालन को लाभ का व्यवसाय बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में हिरण्यगर्भा अभियान एक प्रभावशाली पहल बनकर उभरा है। हाल ही में हुई 20वीं पशु संगणना के अनुसार प्रदेश में कुल 290.57 लाख से अधिक गौवंशीय एवं भैंस वंशीय पशु उपलब्ध हैं। इनमें से 77.18 लाख पशु (लगभग 27 प्रतिशत) उन्नत नस्ल के हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पशुधन विकास की केन्द्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका में है। नेशनल एनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनएडीसीपी) के अंतर्गत फुट-एंड-माउथ-डिजीज (एफएमडी) टीकाकरण चलाया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में हुए चौथे और पाचवें चरण में मध्यप्रदेश ने देश में सर्वाधिक पशुओं का टीकाकरण कर इसे ऑनलाइन दर्ज किया। वर्तमान में प्रदेश में इसका छठवां चरण संचालित है, जिसमें अब तक 154.16 लाख पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके अलावा राष्ट्रीय पशुधन मिशन – उद्यमिता विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान पाकर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि पशु नस्ल सुधार के लिए चलाए जा रहे हिरण्यगर्भा अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसके अंतर्गत प्रदेश की 691 चयनित गौशालाओं में उपलब्ध प्रजनन योग्य गौवंश में भी कृत्रिम गर्भाधान किया जा रहा है। इससे गौवंश की नस्ल/गुणवत्ता में तो सुधार होगा ही, गौशालाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

    संचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने बताया कि पशुपालकों के द्वार पर कृत्रिम गर्भाधान की घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराने और ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार देने की मंशा से वर्ष 2014-15 से हर पंचायत में बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) तैयार किए जा रहे हैं। वर्तमान वित्त वर्ष में 2399 मैत्री कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही, ऐसे मैत्री जो किसी कारणवश निष्क्रिय हो गए थे, उन्हें भी पुनः सक्रिय करने के लिए रि-फ्रेशर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक ऐसे 1227 मैत्री कार्यकर्त्ता प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। इस वित्त वर्ष में अब तक 1.28 लाख से अधिक पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि हिरण्यगर्भा अभियान और केन्द्रीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश पशुधन विकास एवं नस्ल सुधार के क्षेत्र में आदर्श राज्य(इमर्जिंग स्टेट) के रूप में ख्याति प्राप्त कर रहा है। इससे पशुपालकों की दैनिक आय बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिल रही है। पशुपालकों के जीवन में समृद्धि लाने के लिए विभाग द्वारा कई नवाचार भी किए जा रहे हैं।

     

  • मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के संबंध में विधानसभा में चर्चा

    मध्यप्रदेश के विकास में आलोचनाओं को नहीं, सुझाव को दें प्राथमिकता
    नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय का वक्तव्य

    भोपाल 
    नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को विधानसभा में एक दिन के विशेष सत्र में अपने वक्तव्य में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत-2047 के विकास का विजन दिया है। हमें विकसित मध्यप्रदेश @2047 को ध्यान में रखकर आलोचनाओं से हटकर प्रगति के सुझाव को प्राथमिकता देनी होगी। इसमें सदन के प्रत्येक सदस्य का सुझाव महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब भारत 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरा करेगा, तब इतिहास पूछेगा मध्यप्रदेश ने अपने हिस्से की जिम्मेदारी किस तरह से निभाई है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट, सिंहस्थ-2028 की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश को आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये राम वन पथ गमन और श्रीकृष्ण पाथेय का विकास किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ने आर्थिक विकास, पर्यटन, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार, सामाजिक कल्याण और सांस्कृतिक गौरव के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

    मध्यप्रदेश गठन का इतिहास
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि मध्यप्रदेश का जन्म एक विशिष्ट और असामान्य ऐतिहासिक संयोग का परिणाम था। इस क्षेत्र के निवासियों द्वारा कभी किसी पृथक मध्यप्रदेश राज्य की मांग नहीं की गई थी। स्वतंत्रता के बाद गठित राज्य पुनर्गठन आयोग मूलत: भाषायी आधार पर राज्यों के गठन की प्रक्रिया का कार्य कर रहा था, किन्तु मध्यप्रदेश का निर्माण भाषायी नहीं, बल्कि प्रशासनिक और भौगोलिक स्थिति के आधार पर हुआ है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विंध्य प्रदेश, मध्य भारत, भोपाल रियासत और महाकौशल क्षेत्र का विलय हुआ। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश आर्थिक रूप से अवश्य पिछड़ा था, किन्तु केन्द्रीय स्तर पर राजनीतिक भागीदारी जरा भी कम नहीं थी। स्व. डॉ. शंकरदयाल शर्मा उप राष्ट्रपति और बाद में राष्ट्रपति बने।

    विकास यात्रा
    नगरीय विकास मंत्री श्री विजयवर्गीय ने प्रदेश की विकास यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 1956 में प्रति व्यक्ति आय मात्र 261 रुपये थी, जो आज बढ़कर एक लाख 50 हजार रुपये से अधिक हो चुकी है। राज्य का बजट 1956 में 493 करोड़ रुपये का था, जो आज बढ़कर 4.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है। साक्षरता दर भी काफी बढ़ी है। यह आँकड़े हमारी विकास यात्रा को बताते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 के बाद मध्यप्रदेश के विकास को न केवल गति मिली, बल्कि उसे स्पष्ट दिशा और ठोस परिणाम भी प्राप्त हुए। आज राज्य में 5 लाख किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क है। इस मामले में मध्यप्रदेश देश में चौथे स्थान पर है। बिजली के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस राज्य बन चुका है। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में रीवा और ओंकारेश्वर जैसे प्रकल्पों ने सौर ऊर्जा में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलायी है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि कृषि क्षेत्र में मध्यप्रदेश को 7 बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त हुआ है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने पं. रविशंकर शुक्ल से लेकर अब तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में हुए उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी सदन को दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के उल्लेखनीय कार्यों का ‍जिक्र करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि धार में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन हुआ है। इस परियोजना में 3 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा, 6 लाख कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2025 में उद्योग वर्ष के दौरान ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, रीजनल इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव, राष्ट्रीय इंटरेक्टिव सेशन और विदेश यात्राओं के माध्यम से मध्यप्रदेश को 32 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्राप्त हुए हैं। इन निवेशों से 23 लाख से अधिक रोजगार का सृजन होगा।

    विकास के अन्य कार्य
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा का भूमि-पूजन किया गया है। दो मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में इंदौर-उज्जैन और भोपाल क्षेत्र का विकास किया जायेगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की उपलब्धि की चर्चा करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि पिछले 2 वर्षों में प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना में एक लाख 64 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। नागरिकों को 24 घंटे पेयजल आपूर्ति की दिशा में ठोस कदम उठाये गये हैं। उन्होंने इंदौर को लगातार स्वच्छ शहर के रूप में देश में पहचान दिलाने का जिक्र भी किया। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि 32 वर्ष पुराने विवाद हुकुमचंद मिल के प्रकरण का समाधान किया गया। मिल के 6 हजार से अधिक मजदूर परिवारों को 250 करोड़ रुपये बकाया भुगतान किया गया। इंदौर शहर के मध्य 43 एकड़ भूमि का विकास कर निवेश को आकर्षित किया जायेगा। 

  • खंडवा पुलिस ने नकली पुलिस बनकर लूट करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का किया पर्दाफाश

    500 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगालकर पुलिस ने दो सदस्‍यों को किया गिरफ्तार

    भोपाल 
    खंडवा जिले के थाना पदमनगर पुलिस ने नकली पुलिस बनकर लूट की घटनाओं को अंजाम देने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो सदस्यों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। यह गिरोह मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी नकली पुलिस बनकर वारदातों को अंजाम देते थे।

    दिनांक 12 नवंबर को फरियादी हसमतराय गुरवानी (उम्र 65 वर्ष) निवासी कावेरी स्टेट, थाना पदमनगर ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि दो अज्ञात बाइक सवार व्यक्तियों ने स्वयं को पुलिसकर्मी बताकर उनसे सोने की एक चेन एवं दो अंगूठियां यह कहकर उतरवा लीं कि पास में लूट की घटना हुई है। विरोध करने पर फरियादी पर हमला कर फरार हो गए। इस संबंध में बीएनएस के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार राय के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) श्री महेन्द्र तारनेकर एवं सीएसपी खंडवा श्री अभिनव कुमार बारंगे के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण आर्य के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम द्वारा शहर एवं आवागमन मार्गों पर लगे 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का विश्लेषण किया गया, जिससे तीन संदिग्धों की पहचान की गई।

    15 दिसंबर को संदिग्धों के फुटेज अन्य जिलों में प्रसारित किए गए। विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि आरोपी नर्मदापुरम जिले के ईरानी गैंग से जुड़े हैं। इसके आधार पर पदमनगर पुलिस की टीम को नर्मदापुरम भेजा गया, जहाँ तकनीकी साक्ष्य एवं मुखबिरों की मदद से दो आरोपी गटरा उर्फ अप्पा हुसैन उर्फ अयान, पिता अफसर हुसैन, उम्र 25 वर्ष निवासी वार्ड क्रमांक 32, ईदगाह मोहल्ला, थाना कोतवाली, जिला नर्मदापुरम तथा कासिम, पिता अफसर सैय्यद, उम्र 30 वर्ष निवासी ईदगाह मोहल्ला, नर्मदापुरम, मूल निवासी साई बाबा मंदिर के पीछे, अंबीवली मंगलनगर, कल्याण, मुंबई (महाराष्ट्र) को गिरफ्तार किया गया।

    पूछताछ में आरोपियों ने अपने साथी इकबाल हुसैन के साथ मिलकर उक्त वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया तथा लूटा गया माल उन्होंने अपने साथी इकबाल हुसैन को देना बताया। आरोपियों ने महाराष्ट्र के नागपुर, अमरावती एवं मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के शाहगंज क्षेत्र में भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम देना स्वीकार किया है।

    आरोपियों द्वारा सुनियोजित तरीके से स्वयं को पुलिसकर्मी बताकर वारदात को अंजाम दिया जाता था। वे अकेले या उम्रदराज राहगीरों को रोककर किसी हालिया अपराध या चेकिंग का हवाला देते हुए विश्वास में लेते थे। इसके बाद सुरक्षा जांच के बहाने पीड़ित से सोने के आभूषण उतरवाकर कागज में रखने को कहते थे। जैसे ही आभूषण उनके हाथ में आते, आरोपी मोटरसाइकिल से तेजी से फरार हो जाते थे।

    आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल जप्त की है। आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है तथा गिरोह के अन्य सदस्यों एवं लूटे गए माल की बरामदगी हेतु आगे की कार्रवाई जारी है।

    खंडवा पुलिस की यह कार्रवाई तकनीकी दक्षता, सतत निगरानी एवं अंतरजिला समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिससे नागरिकों में सुरक्षा की भावना सुदृढ़ हुई है। ऐसे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत डायल 112 या नजदीकी थाने में दें।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में निवेश और औद्योगिक विकास के पथ पर लगातार अग्रसर-एमएसएमई मंत्री काश्यप

    2047 तक मध्यप्रदेश की जीडीपी 15 लाख करोड़ से 250 लाख करोड़ ले जाने का लक्ष्य
    मध्यप्रदेश में निवेश और उद्योगों के प्रति देश और दुनिया के उद्योगपतियों में आकर्षण

    भोपाल
    एमएसएमई मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन के क्षेत्र में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है और देश विदेश के निवेशक मध्यप्रदेश के प्रति आकृषित हुए हैं।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य 2047 तक प्रदेश की जी डी पी 15 लाख करोड़ से 250 लाख करोड़ तक ले जाने का है।विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप मुख्यमंत्री डॉ यादव ने मध्यप्रदेश के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किया है—प्रदेश को एक संतुलित, समावेशी और आत्मनिर्भर औद्योगिक अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना, जहां युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिले, एमएसएमई सशक्त हों और निवेशकों को भरोसेमंद माहौल प्राप्त हो। इसी विज़न के साथ सरकार ने आगामी तीन वर्षों का मिशन तय किया है, जो अधोसंरचना, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, निवेश और नवाचार पर केंद्रित है।

    विधानसभा के विशेष सत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप ने सरकार की उपलब्धियों, आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना और मिशन 2047 की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में औद्योगिक विकास को केवल नीतियों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उसे ज़मीन पर परिणामों में बदला गया है।

    पिछले दो वर्षों में निवेश और औद्योगिक विश्वास की मजबूती
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि पिछले दो वर्षों में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने औद्योगीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया है। फरवरी 2025 में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश आज निवेशकों के लिए भरोसे, स्थिरता और दीर्घकालिक दृष्टि वाला राज्य बन चुका है। इसके साथ-साथ रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव, रीजनल इंडस्ट्री स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट कॉनक्लेव (RISE), सेक्टर-विशिष्ट संवाद और देश-विदेश में आयोजित इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से स्थानीय उद्यमियों, एमएसएमई इकाइयों और वैश्विक निवेशकों को सीधे संवाद का अवसर मिला।

    इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश को लगभग 30.77 लाख करोड़ रु. के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 8.57 लाख करोड़ रु. के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। मंत्री श्री काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं निवेश प्रोत्साहन की पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और निवेश अनुकूल 18 नई नीतियों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि निवेश केवल कागज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि समयबद्ध रूप से उत्पादन और रोजगार में परिवर्तित हो।

    आगामी तीन वर्षों का मिशन : अधोसंरचना, गति और विश्वास
    सरकार की आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना अधोसंरचना विकास, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर आधारित है। वर्ष 2029 तक 35 नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना, एक्सप्रेस-वे और कॉरिडोर आधारित औद्योगिक नोड्स का विकास, डीएमआईसी के अंतर्गत विक्रम उद्योगपुरी फेस-2 और इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर को गति देना इस मिशन का प्रमुख हिस्सा है।

    लॉजिस्टिक्स को सशक्त बनाने के लिए नए कार्गो टर्मिनल और इनलैंड कंटेनर डिपो विकसित किए जाएंगे। प्लग-एंड-प्ले पार्क और रेडी-टू-यूज़ शेड्स के माध्यम से उद्योगों की त्वरित स्थापना सुनिश्चित की जाएगी। सभी G2B सेवाओं को पूरी तरह पेपरलेस करते हुए सिंगल विंडो सिस्टम Invest 3.0 के माध्यम से निवेशकों को पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं दी जा रही हैं।

    मिशन 2047 : संतुलित और औद्योगिक अर्थव्यवस्था की दिशा में
    मिशन 2047 के तहत मध्यप्रदेश को कृषि आधारित मजबूती के साथ उद्योग और सेवा क्षेत्र में संतुलित वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। उद्योग क्षेत्र के योगदान को सशक्त करते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था को अधिक मूल्य संवर्धन, निर्यात और व्यापक रोजगार सृजन से जोड़ने का लक्ष्य है। सरकार का उद्देश्य है कि 2047 तक सेवा और उद्योग क्षेत्र का योगदान लगभग 75 प्रतिशत तक पहुंचे।

    नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी, क्लीन टेक, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे सनराइज सेक्टर्स में निवेश आकर्षित किया जाएगा। आईटी पार्क, साइबर सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क, पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन और लेदर क्लस्टर जैसी परियोजनाएं प्रदेश को भविष्य की अर्थव्यवस्था से जोड़ रही हैं।

    रोजगार, एमएसएमई और उद्यमिता पर फोकस
    मुख्यमंत्री के विज़न का केंद्र रोजगार सृजन है। औद्योगिक कॉरिडोर, मेगा निवेश परियोजनाएं और एमएसएमई आधारित विकास के माध्यम से लाखों युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। एमएसएमई नीति, स्टार्टअप नीति और उद्यम क्रांति योजना के माध्यम से युवाओं, महिलाओं और नए उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आगामी वर्षों में एमएसएमई के जरिए बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार और निर्यात को बढ़ावा देने का लक्ष्य तय किया गया है।

    आत्मनिर्भर और विकसित मध्यप्रदेश की ओर निर्णायक कदम
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास को केवल आंकड़ों की उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के सशक्त माध्यम के रूप में आगे बढ़ा रहा है। आगामी तीन वर्ष प्रदेश के लिए निर्णायक सिद्ध होंगे, जिनमें अधोसंरचना, निवेश, नवाचार और रोजगार को एक साथ जोड़ते हुए मिशन 2047 की ठोस नींव रखी जा रही है।

     

  • लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता और भविष्य के प्रति साझा उत्तरदायित्व के संकल्प का परिचायक है विशेष सत्र : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    प्रदेश का विधान सभा सदन सत्ता का नहीं जनता के विश्वास का मंदिर रहा है
    हमारी सरकार ने बीमारू राज्य की छवि से निकालकर प्रदेश को विकासशील और संभावनाओं से परिपूर्ण राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
    जनता के कष्ट कम कर उनके जीवन में खुशियों की बाहर लाना हमारी सरकार का प्रयास
    हम ऐसा प्रदेश बनाएंगे जहां चारों ओर हरियाली और उद्योग- धंधों का जाल होगा,जहां बेरोजगारी और गरीबी नहीं होगी, सभी सुखी और संपन्न होंगे
    हमारा संकल्प पूर्ण होगा, क्योंकि हमारे नेता, नीति और नियत सभी स्पष्ट हैं
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा के विशेष सत्र में प्रदेश को आत्मनिर्भर, विकसित और समृद्ध बनाने के संकल्प पर चर्चा का रखा प्रस्ताव
    मध्यप्रदेश विधानसभा के 70 वर्ष की यात्रा पूर्ण होने पर हुआ एक दिवसीय विशेष सत्र

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश विधानसभा के 70 वर्ष की गौरवशाली यात्रा पूर्ण होने के उपलक्ष में आयोजित एक दिवसीय विशेष सत्र में विधानसभा के सभी सदस्यों का स्वागत अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर, विकसित और समृद्ध बनाने के संकल्प पर विशेष सत्र में चर्चा का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि विधानसभा का विशेष सत्र सभी के लिए सौभाग्य का विषय है। लोक कल्याणकारी राज्य के निर्माण के पथ पर अग्रसर व्यवस्था के लिए यह सत्र विशेष महत्व का है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल को प्रणाम करते हुए कहा कि यह विशेष सत्र केवल औपचारिकता नहीं अपितु लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता और भविष्य के प्रति साझा उत्तरदायित्व के संकल्प का परिचायक है। यह सत्र मध्यप्रदेश को सुखद, समृद्ध, सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली और आत्मनिर्भर बनाने के अपने संकल्प को दोहराने का अवसर है। विधानसभा की 70 साल की यात्रा हमारी लोकतांत्रिक यात्रा का प्रमाण है, यह सदन सत्ता का नहीं जनता के विश्वास का मंदिर रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने हाल ही में दो वर्ष पूर्ण किए हैं। इस अवधि में लिए गए दूरगामी निर्णय आने वाले समय में माइलस्टोन के रूप में जाने जाएंगे। यह निर्णय निश्चित ही जनता के जीवन में बदलाव का माध्यम बनेंगे। जनता के कष्ट कम कर उनके जीवन में खुशियों की बाहर लाना हमारी सरकार का प्रयास रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वर्षों तक बीमारू राज्य के रूप में पहचाना जाता रहा। हमारी पार्टी की सरकारों ने बीमारू की छवि से निकालकर प्रदेश को विकासशील और संभावनाओं से परिपूर्ण राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार ने पिछले 2 वर्षों में विकास के हर क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। हमें पूरा विश्वास है कि जल्द ही हम लोग राज्य को विकसित राज्य की सूची में आगे ले जाएंगे। हम ऐसा प्रदेश बनाएंगे जहां चारों ओर हरियाली होगी, उद्योग- धंधों का जाल होगा,जहां बेरोजगारी और गरीबी नहीं होगी, सभी सुखी और संपन्न होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा यह संकल्प पूर्ण होगा, क्योंकि हमारे नेता, नीति और नियत सभी स्पष्ट हैं। हम पूरे आत्मविश्वास के साथ विकसित आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाकर ही दम लेंगे, इसके लिए हम मेहनत की पराकाष्ठा करेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में हमने 11 दिसंबर को नक्सलवाद के लाल सलाम को आखिरी सलाम किया है। उन्होंने कहा कि यह विधानसभा के लिए भी गौरव का विषय है, क्योंकि वर्ष 1999 में कांग्रेस पक्ष के एक मंत्री की नक्सलियों द्वारा निर्मम हत्या कर लोकतंत्र को चुनौती दी गई थी। लाल सलाम को आखरी सलाम कर इस सदन ने वही बदला चुकता किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नक्सलवाद के साथ ही आतंकवाद और उग्रवाद से जुड़े मॉडलों को ध्वस्त किया गया है। भारतीय मुजाहिदीन, आईएसआईएस समर्थक समूह़ टेरर फंडिंग, चरस नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मनी लॉन्ड्रिंग जांच में 1300 संदिग्ध खातों से 2000 करोड़ रुपए के अवैध लेनदेन का खुलासा किया गया। अवैध हथियार फैक्ट्री ध्वस्त कर 1900 से अधिक बैरल/शटर नलियां तथा हथियार बनाने की सामग्री सहित अवैध हथियार बरामद किए गए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकसित करने की योजना है। हमारे शहरों की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है। शहरी विकास के क्षेत्र में दूरगामी दृष्टि से निर्णय लिए जा रहे हैं। राजधानी के स्वरूप पर गहन विचार-विमर्श हो रहा है। मालवा के साथ-साथ मध्य भारत- चंबल क्षेत्र और महाकौशल में भी सुव्यवस्थित विकास हो, इस उद्देश्य से कार्य योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रारंभिक रूप से इंदौर और भोपाल को मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के लिए प्राथमिकता पर लिया गया है। वर्ष 2026 में ग्वालियर और जबलपुर को भी मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य आरंभ होगा। हम सुव्यवस्थित शहरीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्राम विकास के क्षेत्र में भी गत दो वर्ष में गांव की समृद्धि, आत्मनिर्भरता और सुव्यवस्थित विकास के लिए कार्य किए गए। हर ग्राम पंचायत में पीएम किसान समृद्धि केंद्र की स्थापना का निर्णय लिया गया है। प्रत्येक विकासखंड में एक गांव को वृंदावन ग्राम बनाया जा रहा है।

     

  • पक्ष-विपक्ष मिलकर विकसित मध्यप्रदेश के साझा संकल्प और भविष्य की दिशा तय करेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा आगमन पर की राज्यपाल  मंगुभाई पटेल की अगवानी
    विधानसभा की ऐतिहासिक यात्रा तथा विकास और सेवा के दो वर्ष पर केंद्रित प्रदर्शनी का किया शुभारंभ
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा के विशेष सत्र आयोजन पर विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को बधाई

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश विधानसभा के स्थापना दिवस के अवसर पर विशेष सत्र के माध्यम से अतीत की गौरवशाली संसदीय लोकतांत्रिक परंपराओं की स्मृतियां जीवंत हो रही हैं। इस विशेष सत्र में पक्ष-विपक्ष मिलकर वर्ष 1956 से लेकर अब तक की विधानसभा की यात्रा का पुनरावलोकन करने के साथ-साथ विकसित भारत@2047 और विकसित मध्यप्रदेश के साझा संकल्प और भविष्य की दिशा तय करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश विधानसभा के 70 वर्ष की गौरवशाली यात्रा पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के अवसर पर विधानसभा परिसर में लगाई गई एक दिवसीय प्रदर्शनी के शुभारंभ अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष सत्र के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष एवं विधानसभा सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के विधानसभा आगमन पर उनकी अगवानी की।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंगर ने विधानसभा परिसर में "मध्यप्रदेश विधानसभा के 1956 से 2025 तक इतिहास के पल" और "मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अभ्युदय मध्यप्रदेश विकास और सेवा के दो वर्ष" विषय पर लगी प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अन्य वरिष्ठ मंत्री और विधायकगण भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि विकसित, आत्मनिर्भर समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण को समर्पित विशेष विधानसभा के विशेष सत्र के अवसर पर विधानसभा परिसर में लगाई गई प्रदर्शनी में विधानसभा के 70 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाती दुर्लभ तस्वीरें और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विकास कार्यों को प्रदर्शित किया गया।

     

  • हमारा मंत्र है- गाँव चले, देश चले, जब गाँव सशक्त होगा, तभी देश सशक्त होगा

    हमारी सरकार पंचायत राज व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए कृत संकल्पित
    पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम विभाग के मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने विधानसभा सत्र में दिया संबोधन

    भोपाल
    पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम विभाग के मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने विधानसभा सत्र में कहा कि प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानती है। श्रद्धेय अटल जी के ग्रामीण विकास के विचारों में गांव, गरीब और किसान केंद्र में थे, उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) जैसी बुनियादी ढांचागत पहल, पंचायत सशक्तिकरण और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो, रोजगार बढ़े और शहरों की ओर पलायन रुके। साथ ही उन्होंने विकास के लिए एक समग्र, समुदाय-केंद्रित और पर्यावरण-अनुकूल दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया था। मध्‍यप्रदेश में इसी दिशा में कार्य किया जा रहा है। मंत्री श्री पटेल आज विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    "आत्मनिर्भर पंचायत एवं समृद्ध मध्यप्रदेश" विषय पर केंद्रित तीन दिवसीय कान्‍फ्रेंस आयोजित की
    पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्री पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा है कि "हमारा मंत्र है- 'गाँव चले, देश चले'। जब गाँव सशक्त होगा, तभी देश सशक्त होगा।" यह गाँव के सशक्तिकरण और राष्ट्र के विकास के बीच सीधा संबंध स्थापित करता है। इसी विचार के दृष्टिगत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा से हमने पंचायत राज व्यवस्था अंतर्गत निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद को वरीयता दी है। इसीक्रम में "आत्मनिर्भर पंचायत एवं समृद्ध मध्य प्रदेश" विषय को केंद्रित कर हमने विगत वर्ष 23, 24 एवं 25 जुलाई, 2024 को तीन दिवसीय कांफ्रेंस का आयोजन किया था। कॉन्फ्रेंस में भोपाल में सभी जिला पंचायतों के माननीय अध्यक्ष,उपाध्यक्ष सभी जनपदों के माननीय अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सभी जिला पंचायत सदस्यों के साथ-साथ शहरों से लगी हुई चिन्हित ग्राम पंचायतों के सरपंच गणों एवं सभी जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के साथ तीन दिवसीय कांफ्रेंस आयोजित कर उनके अनुभवों तथा समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की थी। इस वर्ष भी हमने 24, 25 एवं 26 नवंबर, 2025 को पुनः यह कॉन्फ्रेंस आयोजित कर चर्चा की है। इस बार की कॉन्फ्रेंस में हमने सरपंच,सचिव तथा ग्राम रोजगार सहायकों के संगठनों के पदाधिकारियों को भी तीनों दिन आमंत्रित किया था। चर्चा में उभर कर आए महत्वपूर्ण सुझावों के क्रियान्वयन हेतु हम आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं। जिलों में जाकर पंच सरपंच सम्मेलन आयोजित कर सरपंच एवं पंचगणों से भी सीधे संवाद किया जा रहा है।

    अनुसूचित जनजाति परिवारों को रोजगार देने में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर
    पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री श्री पटेल ने कहा कि हमारी सरकार पंचायत राज व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए कृत संकल्पित है। विगत दो वर्षों के कार्यकाल में ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए गए कुछ कार्यों का उल्लेख भी किया है। जिसमें :-
        सभी ग्राम पंचायतों के पास अपना व्यवस्थित कार्यालय भवन हो। इस हेतु अभी तक हमने 2472 अटल ग्राम सेवा सदन (ग्राम पंचायत भवन) के निर्माण हेतु रुपए 922.20 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है।

        जनपद पंचायत के कार्यालय को भी बेहतर स्वरूप देने के लिए हमने अभी तक 106 अटल सुशासन भवन (जनपद पंचायत भवन) के निर्माण हेतु रुपए 557.08 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है।

        पांच जिला पंचायतों के भवन निर्माण हेतु भी हमने रुपए 49.98 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है।

        गांव की सामुदायिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हमने 3755 सामुदायिक भवनों के निर्माण

        माँ नर्मदा हमारे प्रदेश को जीवन प्रदान करने वाली नदी है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इनकी परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा मार्ग को सुगम बनाने के उद्देश्य से हमने परिक्रमा पथ पर 19 आश्रय स्थल बनाने के लिए रुपए 10.34 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है।

        परिक्रमा पथ में 231 आश्रय स्थल बनाने की योजना है जिनके लिए स्थान चिन्हित किया जाकर पौधरोपण कार्य हेतु फेंसिंग के लिए हमने रुपए 7.46 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है।

        मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मध्य प्रदेश नदियों का मायका कहा जाता है। मैंने अभी तक 106 नदियों के उद्गम स्थल पर जाकर स्थानीय जन समुदाय से संवाद कर उद्गम स्थलों को संरक्षित करने के उद्देश्य से चर्चा की है तथा 89 उदगमों पर पौधरोपण कार्य हेतु फेंसिंग के लिए भी राशि स्वीकृत की है।

        प्रदेश में तामिया एवं भीमबेटका जैसे पूरा ऐतिहासिक पर्यटन क्षेत्र स्थित है इनके विकास हेतु हमने मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम को 2 करोड़ की राशि स्वीकृत की है।

        प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेस 1, 2 और 3 के अंतर्गत 913 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण तथा 305 पुलों का निर्माण किया गयाहै।

        आरसीपीएलब्ल्यूईए (Road Connectivity Project for Left Wing Extremism Affected Areas) अंतर्गत 107 किलोमीटर लंबाई की सड़क एवं 18 पुलों का निर्माण किया गया है।

        पीएम जनमन के अंतर्गत भी 236 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनाई गई है।

        हम मुख्यमंत्री मजरा टोला योजना लाए हैं जिसके अंतर्गत अभी तक 20600 बसाहटों को चिन्हित किया जा चुका है।

        हम क्षतिग्रस्त पुलपुनर्निर्माण योजना भी लाए हैं जिसके अंतर्गत अभी तक 1766 संरचनाओं का चयन किया जा चुका है।

        प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे फेज के लिए भी 10602 बसाहटों को चिन्हित किया जा चुका है। जिनके लिए 1849 किलोमीटर की सड़कों की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है।

     

  • वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण हर भारतीय के लिए गर्व का विषय – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    रायपुर
    राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  वंदेमातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वंदे मातरम्  देशप्रेम का वह जज्बा था जिसकी गूंज से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह उद्घोष करोड़ों भारतीयों के हृदय में साहस, त्याग और बलिदान की अग्नि प्रज्वलित करता रहा। उन्होंने कहा कि यह वही स्वर था जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति प्रदान की।

    उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारी वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत हमें उस संघर्ष, उस पीड़ा और उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार स्तंभ है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, जो मानचित्र पर अंकित होती हैं। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं और उन मूल्यों से होती है, जो सदियों से उसके आचार-विचार और जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। भारत की यह सांस्कृतिक निरंतरता विश्व में अद्वितीय है।

    उन्होंने कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा आयोजित करने का उद्देश्य यह भी है कि हम इतिहास की उन गलतियों को कभी न भूलें, जिन्होंने देश को गहरे घाव दिए, जिनकी पीड़ा आज भी हमारे समाज में कहीं-न-कहीं महसूस की जाती है। इतिहास से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के भाव को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमें हमारी विरासत, हमारी सांस्कृतिक चेतना और हजारों वर्षों की सभ्यता से जोड़ता है। यह उन आदर्शों की सामूहिक अभिव्यक्ति है, जिन्हें हमने युगों-युगों में आत्मसात किया है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धरती को माता के रूप में पूजने की भावना रही है, जिसे हम मातृभूमि कहते हैं। वंदे मातरम् इसी भाव का सशक्त और पवित्र स्वरूप है, जो हमें प्रकृति, भूमि और राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध सिखाता है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस विशेष चर्चा के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष तथा सभी  सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में नारीशक्ति और जलशक्ति की निर्णायक भूमिका : मंत्री श्रीमती संपतिया उइके

    भोपाल 
    मध्यप्रदेश विधानसभा के छठवीं विधानसभा के अष्टम सत्र के दौरान "विकसित, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध मध्यप्रदेश” विषय पर हुई चर्चा में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने महिला सशक्तिकरण और पेयजल सुरक्षा को राज्य के समग्र विकास की आधारशिला बताते हुए सरकार की उपलब्धियों और आगामी तीन वर्षों के स्पष्ट रोडमैप को सदन के समक्ष रखा।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि विकास की वास्तविक परिभाषा केवल भौतिक अधोसंरचना तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह इस बात से तय होती है कि समाज का अंतिम व्यक्ति, विशेषकर महिलाएँ, बच्चे, जनजातीय समुदाय और कमजोर वर्ग कितना सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जी पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण और पेयजल सुरक्षा किसी भी संवेदनशील और उत्तरदायी शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    मंत्री श्रीमती उइके ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार द्वारा किए गए ठोस प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि आंगनवाड़ी सेवाओं में पारदर्शी एवं मेरिट आधारित ऑनलाइन चयन प्रक्रिया लागू कर मध्यप्रदेश ने देश में एक नई मिसाल कायम की है। इस प्रक्रिया के तहत 19 हजार 477 रिक्त पदों के विरुद्ध 3 लाख 99 हजार 331 आवेदन प्राप्त हुए जिसमें से अब तक 12 हजार 75 नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके हैं। शेष पदों की भर्ती प्रक्रिया प्रगतिरत है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था महिला सशक्तिकरण के साथ साथ सुशासन और पारदर्शिता को भी सुदृढ़ करती है।

    मंत्री श्रीमती उइके ने लाड़ली बहना योजना को महिला आर्थिक आत्मनिर्भरता की ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और पारिवारिक निर्णयों में सहभागिता सुदृढ़ हुई है। इससे लगभग एक करोड़ 26 लाख महिलाएँ लाभ उठा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से 24 घंटे सातों दिन निःशुल्क सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

    पेयजल सुरक्षा पर बोलते हुए मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि जल संकट का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है। इसी सामाजिक यथार्थ को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन को जन-आंदोलन के रूप में लागू किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में जहां केवल 12.11 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध था, वहीं आज यह आंकड़ा बढ़कर 72.79 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। प्रदेश के 23 हजार से अधिक गांवों को "हर घर जल ग्राम" घोषित किया जा चुका है।

    जनजातीय और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के गांवों में जल जीवन मिशन की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 70 प्रतिशत से अधिक परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। "जल सखी" मॉडल के माध्यम से महिलाओं को जन योजनाओं के संचालन, संधारण और जल गुणवत्ता परीक्षण में निर्णायक भूमिका दी गई है, जिससे महिला नेतृत्व को नई पहचान मिली है।

    मंत्री श्रीमती उइके ने आगामी तीन वर्षों के रोडमैप की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना, जल स्रोतों का संरक्षण-पुनर्भरण, तकनीक आधारित निगरानी तथा महिलाओं को नीति निर्माण और स्थानीय अर्थव्यवस्था में निर्णायक भूमिका देना है।

    मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में मध्यप्रदेश ने नारीशक्ति और जलशक्ति को केंद्र में रखकर विकास की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने सदन के सभी सदस्यों से आग्रह किया कि विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए सभी मिलकर रचनात्मक और परिणामोन्मुख सहयोग करें।

     

  • विरासत के साथ विकास का स्वर्णिम अध्याय लिख रहा मध्यप्रदेश : विधायक शर्मा

    विधानसभा के 8वें सत्र में गूंजा सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद

    भोपाल 
    भारत माता को परम वैभव के शिखर पर प्रतिष्ठित करने वाले यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के "विरासत भी, विकास भी" के महामंत्र और मध्यप्रदेश के "धर्म-ध्वज वाहक" मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भगीरथ प्रयासों से प्रदेश में एक नए 'सांस्कृतिक अभ्युदय' का सूर्योदय हो चुका है। विधानसभा के अष्टम सत्र के दौरान पूर्व प्रोटेम स्पीकर और हुजूर विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में मोदी-मोहन की डबल इंजन सरकार की इस युगांतकारी यात्रा का विषद चित्रण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी-मोहन सरकार केवल 'शासन' नहीं, बल्कि 'साधना' कर रही है, जिसके फलस्वरूप मध्यप्रदेश भारत की 'सांस्कृतिक चेतना का स्पंदन' बन गया है।

    विधायक श्री शर्मा ने सदन में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने जिस सांस्कृतिक अनुष्ठान का आरंभ काशी और अयोध्या से किया, उसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश की पुण्य धरा पर मूर्त रूप दे रहे हैं। मोहन सरकार का विजन स्पष्ट है—मध्यप्रदेश को भारत का 'आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र' बनाना। इस दिशा में 'श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास' के माध्यम से भगवान श्रीराम के पदचिह्नों को सहेजा जा रहा है, तो वहीं 'श्रीकृष्ण पाथेय न्यास' के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन और संबंधित स्थलों को विश्व पटल पर स्थापित करने का महायज्ञ चल रहा है।

    विधायक श्री शर्मा ने बताया कि प्रदेश में 'लोकों' का निर्माण आस्था और अर्थव्यवस्था के संगम का प्रमाण है। महाकाल लोक की तर्ज पर ओंकारेश्वर में 'ममलेश्वर लोक', ओरछा में 'रामराजा लोक' और सलकनपुर में 'देवी लोक' जैसे 20 लोकों का निर्माण 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से किया जा रहा है। प्रदेश के सांस्कृतिक विकास में नदियों के योगदान के बारे में बताते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी संस्कृति में नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि सभ्यता की धमनियां हैं, और सरकार इनके संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

    पर्यटन और आर्थिक प्रगति के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए विधायक श्री शर्मा ने बताया कि प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2023-24 में जहाँ 11 करोड़ पर्यटकों ने भ्रमण किया, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 14 करोड़ के पार पहुँच गई है। सिंहस्थ-2028 के लिए युद्धस्तर पर तैयारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उज्जैन के पास 18 ग्रामों को 'पर्यटन ग्राम' के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    विधायक श्री शर्मा ने बताया कि कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए 'पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा' और 'हेली पर्यटन सेवा' जैसी अनूठी पहल शुरू की गई है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों को भी सुगम यात्रा का लाभ मिल रहा है।

    अपने उद्बोधन के समापन में विधायक श्री शर्मा ने 'विकसित भारत-2047' के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य देश की जीडीपी में पर्यटन का योगदान 10% करना है। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि मध्यप्रदेश एक ऐसा गंतव्य बनेगा, जहाँ दुनिया केवल घूमने नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को अनुभव करने आएगी।