• नक्सलियों पर प्रहार जारी: मुख्यमंत्री साय ने कहा— ‘नक्सलवाद का दौर समाप्ति पर’

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती इलाकों में जारी एंटी नक्सल ऑपरेशन को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को मीडिया से चर्चा में बयान दिया. उन्होंने कहा कि करीब 2 साल होने को आया, हमारे जवान ताकत के साथ नक्सली के खिलाफ लड़ते आ रहे हैं. अब नक्सलवाद का समापन होने वाला है, वह अपनी अंतिम सांस गिन रहा है. केंद्र में हमारी (भाजपा) सरकार है, जिसका लाभ मिल रहा है. प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नक्सलवाद को समाप्त करने का संकल्प अवश्य पूर्ण होगा.

    बिजली बिल हाफ योजना के फैसले पर सीएम साय
    मुख्यमंत्री साय ने बिजली बिल हाफ योजना को लेकर कहा कि मंगलवार को विधानसभा का पुराने भवन, जो 25 वर्षों तक छत्तीसगढ़ की जनता का आशा और विश्वास का प्रतीक रहा, वहां दिनभर चर्चा हुई. इसी के साथ विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की गई. हाफ बिजली बिल जो 100 यूनिट था, उसमें वृद्धि कर 200 यूनिट किया गया है. इसका काफी लोगों को फायदा मिलेगा, और जो बच गए हैं, उनके लिए प्रधानमंत्री सूर्य मुफ्त योजना से लाभ दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि एक किलोवाट में भारत सरकार की ओर से 30 हजार रुपए और राज्य सरकार की तरफ से 15 हजार रुपए की सब्सिडी दी जा रही है. लगभग लागत का तीन चौथाई सब्सिडी के रूप में कंज्यूमर को मिलेगा. एक चौथाई उनको लगाना पड़ेगा और कुछ वर्षों में उनका पूरा लोन समाप्त हो जाएगा. उसके बाद वह मुफ्त में बिजली का इस्तेमाल कर सकेंगे. साथ ही जो बिजली उत्पन्न करेंगे वह बिजली बेच भी पाएंगे.

    किसानों के लिए आज सौभाग्य का दिन
    धमतरी में किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त अंतरण कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री साय ने  कहा कि आज का दिन हमारे छत्तीसगढ़ सहित देश के किसान भाईयों के लिए सौभाग्य का दिन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोयंबटूर से देश के 9 करोड़ किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त के 18 हजार करोड़ रुपए भेजने वाले हैं. छत्तीसगढ़ के 24 लाख 70 हजार किसानों के खाते में 494 करोड़ दिए जाएंगे. उन्होंने प्रदेश के सभी किसानों को बधाई दी. साथ ही देश के प्रधानमंत्री मोदी और कृषि मंत्री शिवराज को धन्यवाद ज्ञापित किया.

  • छत्तीसगढ़ में आतंकवादी साजिश फेल, ATS ने पहली बार UAPA 1967 के तहत FIR दर्ज की

    रायपुर
     छत्तीसगढ़ में एक बड़ा आतंकी नेटवर्क तैयार करने की कोशिश को एटीएस (Anti-Terrorism Squad) ने समय रहते विफल कर दिया है। रायपुर एटीएस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान स्थित इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) मॉड्यूल इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर भारतीय किशोरों को अपने नेटवर्क में जोड़ने की कोशिश कर रहा था। इस मामले में एटीएस ने सोमवार देर रात गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत पहली एफआईआर दर्ज की है।

    इसकी स्थापना के बाद से पहली बड़ी कार्रवाई है। सूत्रों के अनुसार, एटीएस ने दो नाबालिग लड़कों की पहचान की है, जिनकी उम्र 16 और 17 वर्ष बताई जा रही है। इनमें से एक रायपुर का रहने वाला है और दूसरा भिलाई का। खुफिया एजेंसियां इन दोनों पर पिछले डेढ़ साल से नजर रख रही थीं। जांच के दौरान इनके मोबाइल फोनों से कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले कई संदेश और वीडियो सामग्री मिली है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि विदेशी हैंडलर्स इन युवाओं को आतंकी विचारधारा की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे थे।

    फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए गुमराह कर रहा था ISIS मॉड्यूल जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि पाकिस्तानी हैंडलर फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट्स का इस्तेमाल कर भारतीय नाबालिगों से संपर्क साध रहे थे। एटीएस के अधिकारियों के मुताबिक, ये हैंडलर्स पहले किशोरों से दोस्ती करते, फिर धीरे-धीरे उन्हें कट्टरपंथी सामग्री भेजकर उनकी मानसिकता को प्रभावित करते थे। ग्रुप चैट्स के जरिए उन्हें जिहादी वीडियो, कथित धार्मिक संदेश और ISIS से जुड़ी गलत सूचनाएं भेजी जाती थीं। हैंडलर्स का उद्देश्य नाबालिगों को इस कदर ब्रेनवॉश करना था कि वे स्थानीय स्तर पर ISIS की जड़ें फैलाने में मदद कर सकें। इसके तहत उन्हें "अंदरूनी सूचनाएं जुटाने", "स्थानीय समर्थन आधार बनाने" और "छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल खड़ा करने" के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

    एजेंसियों को मिला संदिग्ध डिजिटल सबूत एटीएस और खुफिया एजेंसियों की जांच में यह भी पाया गया कि दोनों नाबालिगों के मोबाइल में ऐसे कई चैट, नोट्स और वीडियो मौजूद हैं जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। एजेंसियों को संदेह है कि इन युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से "लोन वुल्फ" हमलों और स्थानीय स्तर पर अस्थिरता पैदा करने के तरीकों पर भी प्रभावित किया जा रहा था। एटीएस अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान स्थित ISIS नेटवर्क का यह मॉड्यूल भारत में अस्थिरता पैदा करने के लिए किशोरों और युवाओं को सबसे आसान निशाना मानकर उन पर फोकस कर रहा था।

    स्थापना के बाद ATS की पहली FIR छत्तीसगढ़ एटीएस की स्थापना वर्ष 2017 में की गई थी। हालांकि विशेष मामलों में आमतौर पर स्थानीय पुलिस स्टेशन के माध्यम से UAPA लागू किया जाता था, लेकिन इस बार एटीएस ने स्वयं UAPA की पहली FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई आतंकवाद-रोधी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 

    एटीएस अधिकारियों के अनुसार, राज्य में ऐसे अन्य संभावित संपर्कों की तलाश की जा रही है जो विदेशी आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। एजेंसियों का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह की जांच और सख्ती बढ़ाई जाएगी। राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती छत्तीसगढ़ में आतंकवादी संगठनों की ऑनलाइन घुसपैठ सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथ फैलाने की यह नई रणनीति युवा वर्ग को तेजी से प्रभावित कर रही है, जिसे रोकने के लिए एटीएस और साइबर सेल मिलकर रणनीतिक कदम उठा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद राज्य की एजेंसियां अधिक सतर्क हो गई हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकी संगठनों की घुसपैठ रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाने की तैयारी कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में ISIS मॉड्यूल की यह साजिश बेनकाब होना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

  • भोपाल:मैजिक स्पॉट कैफे में हिंसक हमला, 20 बदमाशों ने किया तोड़फोड़ और भगदड़, लाखों का नुकसान

     भोपाल
    राजधानी भोपाल में एक बार फिर बदमाशों के हौसले बुलंद हो गए हैं. शहर के होशंगाबाद रोड स्थित मैजिक स्पॉट कैफे में बदमाशों ने जमकर तोड़फोड़ की. पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. 

    मिसरोद थाना इलाके में मैजिक स्पॉट कैफे संचालक सक्षम गोस्वामी ने बताया कि मंगलवार शाम 7:00 बजे करीब 20 से 25 बदमाश मुंह पर कपड़ा बांध अपने हाथों में डंडे, तलवार, बेसबॉल डंडा लेकर आए और दुकान का फर्नीचर, कांच का सामान फोड़कर चले गए. एक कर्मचारी को हाथ में तलवार भी लगी है. साथ ही एक ग्राहक को डंडा मारा था, जिससे उसकी उंगली फैक्चर हो गई. 

    कैफे संचालक ने बताया, ''मेरा कभी किसी से कोई भी विवाद नहीं हुआ. पुलिस में FIR दर्ज कराई है, जिसमें पुलिस ने बलवा, तोड़फोड़ मारपीट की धाराएं लगाकर हमको मदद का आश्वासन दिया है.

    ये गुंडे हाथों में तलवारें, डंडे और अन्य हथियार लेकर कैफे के अंदर घुस आए. उन्होंने वहां जमकर तोड़फोड़ शुरू कर दी. कैफे का काउंटर तोड़ दिया, कांच के शीशे चकनाचूर कर दिए, फर्नीचर को तहस-नहस कर दिया. डिस्प्ले में रखी चीजें और मशीनें भी नहीं बख्शीं. सब कुछ तोड़ते-फोड़ते हुए ये बदमाश चिल्ला रहे थे और डर का माहौल बना रहे थे. कैफे में मौजूद कर्मचारियों को भी इन गुंडों ने नहीं छोड़ा. उन्होंने स्टाफ के साथ मारपीट की. डंडों और तलवारों से हमला किया, जिससे कई कर्मचारी घायल हो गए. कैफे में उस समय कुछ ग्राहक भी मौजूद थे. जैसे ही तोड़फोड़ शुरू हुई, ग्राहक अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे. कोई बाहर की ओर भागा, तो कोई छिपने की कोशिश करने लगा. पूरा कैफे अफरा-तफरी से भर गया.

    यह पूरी घटना कैफे में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई. वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे नकाबपोश बदमाश एक-एक करके चीजें तोड़ रहे हैं. काउंटर पर कूदकर सामान फेंक रहे हैं, ग्लास फोड़ रहे हैं और फर्नीचर पर डंडे बरसा रहे हैं. यह फुटेज सामने आने के बाद इलाके में दहशत फैल गई. लोग सहम गए कि इतनी बड़ी संख्या में गुंडे दिनदहाड़े कैसे हमला कर सकते हैं.

    कैफे के मालिक बहुत डर गए. उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की. मिसरोद थाने में जाकर उन्होंने एफआईआर दर्ज करवाई. मालिक ने बताया कि यह हमला किसी पुरानी रंजिश या फिर जबरन वसूली की वजह से हो सकता है. उन्होंने कुछ नामों का जिक्र किया. एफआईआर में योगी, निखिल, अभिषेक और कई अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए. पुलिस ने इन नामों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है. अब पुलिस जांच कर रही है. सीसीटीवी फुटेज की मदद से बदमाशों की पहचान करने की कोशिश हो रही है. इलाके में लोगों का कहना है कि गुंडागर्दी बढ़ रही है, पुलिस को सख्ती दिखानी चाहिए. नया कैफे खुला था, लोग खुशी-खुशी आते थे, लेकिन इस घटना ने सबको डरा दिया. उम्मीद है कि जल्दी ही सभी आरोपी पकड़े जाएंगे और कैफे मालिक को न्याय मिलेगा.यह घटना बताती है कि शहर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है. आम लोग सुरक्षित महसूस करें, इसके लिए पुलिस को सक्रिय रहना होगा.

    दो संदेही उठाए, पूछताछ कर रही पुलिस डीसीपी विवेक सिंह ने बताया कि एफआईआर में जिन नामों का जिक्र था, उनमें से दो को राउंड अप कर लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। हमने 2 संदेहियों को उठाया है। उनके बयान लिए जा रहे हैं। अभी वजह स्पष्ट नहीं है, रंजिश थी या कोई पुराना विवाद, इसकी पड़ताल की जा रही है।

    तीन थानों की संयुक्त टीमें लगीं हमले की गंभीरता देखते हुए पुलिस ने तीन थानों की संयुक्त टीमें लगाई हैं। जिसमें मिसरोद, बागसेवनिया और कटारा हिल्स शामिल हैं विवेक सिंह ने बताया, तीनों थानों की टीमें अलग-अलग एंगल पर जांच कर रही हैं। फुटेज, शक के आधार, रूट मैप, और संभावित विवादों को लेकर जांच की जा रही है।

    हमलावरों ने अपने चेहरे बांध रखे थे, जिससे पहचान में दिक्कत हो रही है। लेकिन पुलिस को कुछ क्लू मिले हैं, जिन पर टीमें काम कर रही हैं। कैफे संचालक सक्षम गिरि ने योगी, निखिल, अभिषेक समेत पांच नामजद और अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कराई है।

     
    डीसीपी जोन 2 विवेक सिंह ने बताया कि मैजिक स्पॉट कैफे में कुछ बदमाशों ने तोड़फोड़ की है. कैफे संचालक शुभम गोस्वामी ने थाने जाकर FIR दर्ज कराई है. तत्काल पुलिस ने मारपीट, बलवा, आर्म्स एक्ट की धारा लगाकर जांच शुरू कर दी है. 

    पुलिस अफसर ने बताया कि कई थानों की टीम बदमाशों को पकड़ने के लिए लगाई हुई है. कैफे मालिक की तरफ से अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उसकी किसी से पुरानी रंजिश है या नहीं. कैफे संचालक ने कुछ संदेहियों के फोटो दिए हैं, उसी के आधार पर दो से तीन लोगों को पुलिस ने राउंडअप किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.

  • भव्या मित्तल को मिला जल प्रबंधन में राष्ट्रीय सम्मान, खरगोन बना मॉडल जिला

    खरगोन
     जिले को जल संरक्षण के क्षेत्र में पश्चिम क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ जिला चुना गया है। कलेक्टर भव्या मित्तल को 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है। उन्होंने जिले में 4.21 लाख जल संरचनाएं बनाकर 2.31 करोड़ घनमीटर पानी जमा करने की क्षमता बढ़ाई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में कलेक्टर को यह सम्मान दिया।

    25 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि मिली
    इस कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ आकाश सिंह को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 'जल संचय जनभागीदारी 1.0' के तहत उत्कृष्ट काम करने के लिए सम्मानित किया। खरगोन जिले को पश्चिमी क्षेत्र में श्रेणी 3 के तहत 13वां स्थान मिला है, जिसके लिए उसे 25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिली है। जिले में 5606 जल संरक्षण के काम पूरे हो चुके हैं और उनकी जांच भी हो चुकी है।

    नदियों को बचाने के लिए किया काम
    खरगोन जिले ने नदियों को बचाने और उनके किनारों को सुधारने के लिए भी बहुत अच्छा काम किया है। नर्मदा, नानी, वंशावली और बोराड़ नदियों के 8000 हेक्टेयर खराब हो चुकी जमीन को स्टॉप डैम, चेक डैम, खेत तालाब और लूस बोल्डर स्ट्रक्चर जैसी चीजों से ठीक किया गया है। जो छोटी नदियां पहले नवंबर या दिसंबर तक सूख जाती थीं, वे अब अप्रैल तक बहती रहती हैं। कुंदा नदी के आसपास से 627 जगहों पर अवैध कब्जे हटाए गए हैं।

    सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराए सभी जल स्त्रोत
    इन कब्जों से खाली हुई 106 एकड़ जमीन पर 'निधिवन' नाम का एक पर्यटन स्थल बनाया गया है। जिले में कुल 4,21,182 कृत्रिम जलभरण संरचनाएं बनाई गई हैं, जैसे काउंटर ट्रेंच, चेक डैम, पर्काेलेशन टैंक, गली प्लग और गैबियन। इनसे भूजल स्तर बढ़ा है। जिले के सभी जल स्रोतों की जानकारी इकट्ठा करके सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज की गई है और 45 पुरानी बावड़ियों का जीर्णोद्धार किया गया है। जिले में सूक्ष्म सिंचाई के तहत 48,975 हेक्टेयर जमीन आती है, जिसमें इस साल 3,290 हेक्टेयर नई जमीन जोड़ी गई है। इससे 37,042 किसानों को फायदा हो रहा है।

    केंद्र की योजनाओं में भी आगे
    जिले में 156 नए अमृत सरोवर बनाए गए हैं, जिससे कुल 2,31,75,828 घनमीटर पानी जमा करने की क्षमता बढ़ी है। इन कामों को ग्रामीण विकास विभाग की वाटरशेड विकास- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 और मनरेगा के तहत किया गया है।

    जिले में क्या क्या हुआ
    जिले में गंदे पानी को फिर से इस्तेमाल करने के लिए 15 इकाइयां, 4 मलजल उपचार संयंत्र और 94 अपशिष्ट स्थिरीकरण कुंड चालू हैं। 5400 हेक्टेयर जमीन पर 30 लाख पेड़ लगाए गए हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत पेड़ जीवित हैं। मनरेगा के तहत 3,80,000 पौधे और निजी बागों में 2,66,412 अमरूद के पौधे लगाए गए हैं, जिससे भूजल स्तर बढ़ा है। जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए 2,277 सफाई अभियान चलाए गए, 605 क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की गईं, 200 ग्राम पंचायतों में कलश यात्रा निकाली गई और 147 जल चौपाल का आयोजन किया गया। इससे लोगों और सरकारी कर्मचारियों को जल संरक्षण के बारे में जागरूक किया गया।

    जल सरंक्षण काम की जियो टैगिंग भी की
    'जल संचय जनभागीदारी 1.0' अभियान के तहत 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 तक जिले में 5606 जल संरक्षण के काम पूरे हो चुके हैं और उनकी जियो-टैगिंग करके पोर्टल पर जांच की गई है। इनमें खेत तालाब, स्टॉप डैम, कंटूर-ट्रेंच, सोकपिट, चेकडैम, कपिलधारा जैसी जल संरचनाएं शामिल हैं। इन संरचनाओं से लोगों की मदद से बारिश का पानी जमा करने के साथ-साथ पुराने जल स्रोतों को भी ठीक किया गया है। इस अभियान के तहत जिले में 757 जल संरक्षण के काम अभी चल रहे हैं।

  • बर्फीली हवाओं ने किया मध्यप्रदेश का तापमान और घटा, 21 जिलों में ठंड का असर

    भोपाल 
    मध्य प्रदेश में ठंड से थोड़ी राहत मिलने वाली है। आज से मौसम में फिर बदलाव आने वाला है जिससे तापमान में वृद्धि होगी और शीतलहर का असर कम होगा ।बुधवार को 1 दर्जन से ज्यादा जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है।इधर, 22 नवंबर से दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया सक्रिय होने जा रहा है।मंगलवार को राजगढ़ सबसे ठंडा दर्ज किया गया। यहां पारा 6.5 डिग्री दर्ज किया गया।

    21 जिलों में कोल्ड वेव अलर्ट
    मौसम विभाग ने बुधवार के लिए भोपाल, इंदौर, राजगढ़, जबलपुर, शाजापुर, सीहोर, देवास, खंडवा, खरगोन, धार, बड़वानी, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, शहडोल, कटनी और उमरिया में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है।

    18 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे
    सोमवार-मंगलवार की रात तापमान लगातार गिरावट में रहा। 18 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से भी नीचे दर्ज किया गया। राजगढ़ सबसे सर्द रहा, जहां पारा 5.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। पचमढ़ी में 6.4 डिग्री, उमरिया में 7.6 डिग्री, नौगढ़ में 7.8 डिग्री, शिवपुरी में 8, बैतूल में 8.7, धार में 8.8, मलाजखंड में 8.9, खंडवा में 9.4, छिंदवाड़ा में 9.5 और खरगोन-मंडला में 9.6 डिग्री तापमान दर्ज हुआ।

    बड़े शहरों में भी कड़ाके की ठंड
    भोपाल का तापमान एक दिन पहले की तुलना में 3 डिग्री बढ़ा है। रविवार-सोमवार की रात 5.2 डिग्री पारे ने 84 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था। अब यह बढ़कर 8.2 डिग्री पर पहुंच गया है। इंदौर में 7.7 डिग्री, ग्वालियर में 10.5 डिग्री, उज्जैन में 11 डिग्री और जबलपुर में रात का तापमान 9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

    84 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
    16-17 नवंबर की रात भोपाल में नवंबर का न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री दर्ज हुआ, जो 1941 के 6.1 डिग्री के रिकॉर्ड को पार कर गया। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, साफ मौसम और उत्तरी हवाओं के कारण ठंड और बढ़ रही है। 22 नवंबर से दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में बनने वाला निम्न दबाव क्षेत्र मौसम को फिर बदल सकता है। तब तक प्रदेश में शीतलहर का असर बना रहेगा। पिछले 10 वर्षों से नवंबर में ठंड के साथ बारिश का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। इस बार भी अक्टूबर में 121% ज्यादा बारिश हुई। 30 अक्टूबर को भोपाल में दिन का तापमान 24 डिग्री रहा, जो 25 साल में अक्टूबर का सबसे ठंडा दिन दर्ज किया गया। उज्जैन, छतरपुर और नरसिंहपुर में भी दिन का तापमान 24 डिग्री से नीचे रहा। 

    कई स्कूलों के समय में बदलाव

    बढ़ती ठंड व शीतलहर को देखते हुए मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल, अशोकनगर, इंदौर, बुरहानपुर, खंडवा सतना, उमरिया, छिंदवाड़ा,सागर, शहडोल, झाबुआ, रीवा, देवास, ग्वालियर, अनूपपुर और मंडला के नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के स्कूलों के समय में बदलाव कर दिया गया है।

    मध्य प्रदेश मौसम विभाग ताजा पूर्वानुमान

    भोपाल मौसम केन्द्र के मुताबिक, आज कोमोरियन और निकटवर्ती क्षेत्रों में निम्न दाब क्षेत्र अवस्थित है और इससे जुड़ा चक्रवातीय परिसंचरण माध्य समुद्र तल से 5.6 किमी की ऊंचाई पर सक्रिय है। अगले 24 घंटों के दौरान इसके धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है।22 नवंबर के आसपास दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक निम्न दाब क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद, इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और अगले 48 घंटों के दौरान और अधिक स्पष्ट होने की प्रबल संभावना है।आज बुधवार से ठंड से कुछ राहत मिलने की संभावना है। अगले तीन दिनों में रात के तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि होगी, जिससे शीतलहर से राहत मिलेगी। हालांकि रात में ठंड बरकरार रहेगी।

    जबलपुर में आज से स्कूलों का समय बढ़ा इधर, तापमान में गिरावट के चलते भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, खंडवा, झाबुआ, शहडोल, सागर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बढ़ा दी गई। इससे बच्चे मंगलवार सुबह नई टाइमिंग के हिसाब से ही स्कूल पहुंचे। जबलपुर में 19 नवंबर से कक्षा नर्सरी से 5वीं तक के स्कूल सुबह 9 बजे से पहले शुरू नहीं होंगे। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने आदेश जारी किए हैं।

    भोपाल में टूट चुका है 84 साल का रिकॉर्ड इससे पहले 16-17 नवंबर की रात में भोपाल में 84 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि भोपाल में नवंबर का रात का तापमान ब्रेक हो गया। रविवार-सोमवार की रात में पारा 5.2 डिग्री सेल्सियस रहा था। इससे पहले साल 1941 में 6.1 डिग्री तापमान रहा था। वर्तमान में प्रदेश में मौसम साफ है। इस वजह से उत्तरी हवाओं का असर ज्यादा बना रहेगा।

    22 नवंबर से देश के दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दबाव का क्षेत्र) एक्टिव हो रहा है। इससे पहले प्रदेश में अगले 2 दिन तक शीतलहर का अलर्ट है।

    मंगलवार को कहां कैसा रहा मौसम

        18 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से भी नीचे दर्ज किया गया। राजगढ़ सबसे सर्द रहा, जहां पारा 5.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया।
        भोपाल में 8.2 डिग्री, इंदौर में 7.7 डिग्री, पचमढ़ी में 6.4 डिग्री, ग्वालियर में 10.5 डिग्री, उज्जैन में 11 डिग्री और जबलपुर में रात का तापमान 9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
        भोपाल, विदिशा, सीहोर, धार, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, रीवा, शहडोल, जबलपुर, छतरपुर, अनूपपुर, शिवपुरी और बैतूल जिलों में शीत लहर का प्रभाव रहा। राजगढ़, इंदौर और शाजापुर जिलों में तीव्र शीत लहर दर्ज की गई।

    आज इन जिलों में शीतलहर का अलर्ट

    भोपाल, इंदौर, राजगढ़, जबलपुर, शाजापुर, सीहोर, देवास, खंडवा, खरगोन, धार, बड़वानी, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, शहडोल, कटनी और उमरिया में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है।

  • जायसवाल का बयान: छत्तीसगढ़ की पहचान और विकास का श्रेय स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को

    रायपुर : छत्तीसगढ़ की 25 वर्षों की संसदीय यात्रा

    आज का छत्तीसगढ़ स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की देन: स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल

    हजारों साल पुरानी है छत्तीसगढ़ की संस्कृति

    रायपुर 

    छत्तीसगढ़ की 25 वर्षों की संसदीय यात्रा पर आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में अपनी बात रखी। उन्होंने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा को आज का छत्तीसगढ़ पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय  अटल बिहारी वाजपेयी की देन है। हालांकि छत्तीसगढ़ का इतिहास सिर्फ 25 साल पुराना नहीं है बल्कि ये हजारों साल पुरानी संस्कृति है। पहली बार पंद्रहवीं सदी में कवि दलपत राव ने पहली बार छत्तीसगढ़ का जिक्र किया था। 

    कल्चुरियों के 1 हजार साल के शासन में रतनपुर और रायपुर के राजधानी रहते हुए 36 गढ़ों की वजह राज्य का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा है। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत सदियों पुरानी है जिसको देखकर और सुनकर इस क्षेत्र के विशाल महत्व को समझा जा सकता है। 
    स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय ऐसा आया जब मध्य प्रदेश का हिस्सा रहते हुए आज का छत्तीसगढ़ भुखमरी और पलायन के लिए जाना जाता था। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के शासन काल में छत्तीसगढ़ ने दिनों दिन तरक्की की और 15 वर्षों में ही छत्तीसगढ़ राज्य ने तरक्की की रफ्तार में देश के बड़े राज्यों की बराबरी की। स्वर्गीय  अटल जी ने जिस उद्देश्य के साथ राज्य की स्थापना की थी , ये राज्य उसी दिशा में पिछले 25 वर्षों से लगातार तरक्की कर रहा है। 

    स्वास्थ्य मंत्री ने छत्तीसगढ़ के उन महान विभूतियों को नमन करते हुए कहा कि उनके संघर्ष के बिना आज के छत्तीसगढ़ का निर्माण कर पाना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि हम सभी की ये जिम्मेदारी है कि अपनी संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ते रहें ताकि आने वाली पीढ़ियों इस विरासत को देख के ये जान सके कि हमारा इतिहास कितना समृद्ध रहा है।

  • घटी GST दरों का लाभ आम जनता तक पहुँचाना विभाग की प्रमुख जिम्मेदारी–वित्त मंत्री

    रायपुर : वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने किया राज्य जीएसटी विभाग के नये कार्यालय का शुभारंभ

    मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए उन्नत व्यापार और सहयोगी कर प्रशासन अनिवार्य– वित्त मंत्री ओपी चौधरी

    घटी GST दरों का लाभ आम जनता तक पहुँचाना विभाग की प्रमुख जिम्मेदारी–वित्त मंत्री

    रायपुर

    छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने  नवा रायपुर स्थित सीबीडी बिल्डिंग के 5वें एवं 6वें तल पर निर्मित आयुक्त, राज्य कर (GST) के नए अत्याधुनिक कार्यालय भवन का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर वित्त सचिव मुकेश बंसल, चेम्बर ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन सतीश थौरानी एवं प्रतिनिधिगण, CAIT के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर परवानी, CA एसोसिएशन व बार एसोसिएशन के पदाधिकारी सहित रायपुर मुख्यालय एवं विभिन्न संभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

    उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि “राज्य की अर्थव्यवस्था तभी मजबूत हो सकती है, जब व्यापार तरक्की करे और व्यापारियों को सरल एवं सहयोगी कर प्रशासन मिले। राज्य सरकार जनकल्याण के कार्यों को प्रभावी ढंग से तभी आगे बढ़ा सकती है, जब राजस्व व्यवस्था सुदृढ़ हो। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि GST विभाग के अधिकारी व्यापारियों की समस्याओं को समर्पण भाव से दूर करें, तकनीकी कठिनाइयों में उनकी सहायता करें और उन्हें नियमों व प्रक्रियाओं को समझने में सहयोग प्रदान करें।

    GST 2.0: जनता को राहत, व्यवसाय और रोजगार को गति

    वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि GST 2.0 कर सुधारों का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों पर कर का बोझ कम करना, खपत को बढ़ावा देना, रोजगार सृजित करना और छोटे व्यवसायों व किसानों को मजबूती देना है। उन्होंने बताया कि इन सुधारों से औसत भारतीय परिवार को सालाना 25 हजार से 40 हजार तक की सीधी बचत मिलेगी, वहीं किसानों, छोटे व्यवसायियों और कारीगरों की आय में 10-20% वृद्धि संभव होगी।

    वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवनयापन संबंधी वस्तुओं पर कर घटने से परिवारों पर व्यय का बोझ कम होगा और जीवन अधिक सुरक्षित व सुलभ बनेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि “GST 2.0 से मिलने वाली राहत का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे, यह विभाग की जिम्मेदारी है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि 22 सितंबर से लागू GST 2.0 ने कर संरचना को सरल बनाया है और कई वस्तुओं पर कर दरों में कटौती की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुधारों का लाभ व्यापारियों, मध्यम वर्गीय परिवारों, किसानों, विद्यार्थियों और आम उपभोक्ताओं तक बिना किसी बाधा पहुँचाया जाए।

    उत्कृष्ट करदाताओं को किया सम्मानित

    कार्यक्रम में वर्ष 2024-25 के उत्कृष्ट करदाताओं को उच्च कर भुगतान, उत्कृष्ट अनुपालन और निरंतर वृद्धि के लिए Taxpayer Appreciation Award प्रदान किए गए। पुरस्कार पाने वाले प्रमुख संस्थानों में महिन्द्रा एंड महिन्द्रा लिमिटेड, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमपीसीजी मोबाइल प्रा. लि., एनटीपीसी, रिलायंस रिटेल लिमिटेड, सारडा एंड मिनरल्स, मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे, भिलाई स्टील प्लांट और एबिस फूड्स एंड प्रोटीन प्रा. लि. शामिल हैं।

    वित्त मंत्री ने कहा कि यह सम्मान राज्य के अनुकरणीय करदाताओं को प्रोत्साहित करने तथा कर अनुपालन को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कदम है।

    आधुनिक, पारदर्शी व करदाता हितैषी प्रशासन की दिशा में कदम

    अपने संबोधन के अंत में वित्त मंत्री ने कहा कि नवा रायपुर में निर्मित नया कार्यालय भवन राज्य कर विभाग की पारदर्शिता, कार्यकुशलता और करदाता हितैषी सेवाओं को नई दिशा देगा। यह भवन आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था और सहज कर सेवा प्रणाली का नया प्रतीक है।

  • रायपुर: प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए CM साय का बड़ा फैसला

    रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के लिए की बड़ी घोषणा

    200 यूनिट तक मिलेगा हाफ बिजली का लाभ

    प्रदेश के 42 लाख उपभोक्ता होंगे लाभान्वित

    प्रधानमंत्री सूर्य घर मुक्त बिजली योजना का लाभ प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं को

    रायपुर

    राज्य के विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज विधानसभा के विशेष सत्र में नई बिजली योजना की घोषणा की। अब प्रदेश के ऐसे घरेलू उपभोक्ताओं को जिनका 200 यूनिट तक विद्युत खपत है उन्हें 200 यूनिट तक हाफ बिजली का पूरा लाभ प्राप्त होगा। इस निर्णय से राज्य के 36 लाख घरेलू उपभोक्ता  सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। 200 से 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को भी अगले 1 वर्ष तक 200 यूनिट तक हॉफ बिजली बिल का लाभ मिलेगा, इससे 6 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। इन उपभोक्ताओं को 1 वर्ष तक की छूट दी गई है ताकि इस अवधि  में  वे अपने घरों में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर प्लांट स्थापित करा सके। इस तरह 200 यूनिट तक हॉफ बिजली बिल योजना से प्रदेश के 45 लाख उपभोक्ताओं में से 42 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे, वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर मुक्त बिजली योजना का लाभ प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं को मिलेगा। 

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता हर उपभोक्ता को सस्ती, सुचारू और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है। सोलर प्लांट स्थापना प्रक्रिया में समय लगने के कारण घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 1 दिसंबर से नई योजना लागू की जा रही है, जिससे आम जनता के बिजली बिल में महत्वपूर्ण कमी आएगी।

    मुख्यमंत्री  साय ने यह भी बताया कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य शासन की ओर से सब्सिडी दी जा रही है। जिसके तहत 1 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट पर 15,000 रुपये तथा 2 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के प्लांट पर 30,000 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। यह व्यवस्था राज्य में सौर ऊर्जा अपनाने को प्रोत्साहित करेगी और आने वाले समय में उपभोक्ताओं को हाफ बिजली से फ्री बिजली की ओर ले जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह निर्णय न केवल जनता के बिजली बिल को कम करेगा बल्कि राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।

  • रायपुर: मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने किया हॉकी जूनियर वर्ल्ड कप 2025 ट्रॉफी का भव्य अनावरण

    रायपुर : मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने हॉकी मेन्स जूनियर वर्ल्ड कप ट्रॉफी 2025 का किया भव्य अनावरण

    प्रदेश में प्रतिष्ठित ट्रॉफी का आगमन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी: मुख्यमंत्री  साय

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज विधानसभा परिसर से प्रतिष्ठित एफआईएच जूनियर मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2025 की ट्रॉफी का अनावरण किया। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू, प्रदेश के कैबिनेट मंत्री  केदार कश्यप तथा उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि विश्व की प्रतिष्ठित एफआईएच जूनियर मेन्स हॉकी वर्ल्ड कप 2025 की चमचमाती ट्रॉफी पहली बार भारत टूर के तहत आज छत्तीसगढ़ पहुंची और विधानसभा परिसर में आयोजित गरिमामयी समारोह में इसका अनावरण किया गया। 

    मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर कहा कि भारत में एफआईएच जूनियर वर्ल्ड कप 2025 का आयोजन होना अत्यंत गर्व की बात है और इस ट्रॉफी का छत्तीसगढ़ आगमन राज्य के लिए विशेष सम्मान का अवसर है। उन्होंने हॉकी इंडिया के प्रति आभार जताते हुए कहा कि ट्रॉफी टूर देशभर में खेलों के प्रति उत्साह एवं प्रेरणा को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

    उन्होंने कहा कि केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया द्वारा इस अभियान का शुभारंभ देश में खेल भावना को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला कदम है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ शुरू से ही हॉकी की उर्वर भूमि रहा है। राजनांदगांव, बस्तर, जशपुर, सरगुजा, रायपुर, बिलासपुर और कोरबा जैसे जिलों से बड़ी संख्या में बच्चे हॉकी खेल में अपना भविष्य संवार रहे हैं। ट्रॉफी का यहां आगमन राज्य के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेल अधोसंरचना के विस्तार, प्रशिक्षण सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और उभरती प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है।  साय ने कहा कि यह ट्रॉफी दुनिया के श्रेष्ठ खिलाड़ियों की मेहनत, अनुशासन और सपनों का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर हॉकी इंडिया, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ और छत्तीसगढ़ हॉकी को बधाई और शुभकामनाएं भी दी।

    इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने ट्रॉफी के भव्य अनावरण के लिए छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ और छत्तीसगढ़ हॉकी के पदाधिकारियों और खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ दीं।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया, संघ के अन्य पदाधिकारी, हॉकी संगठन के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित रहे।

    ’भारत पहली बार बनेगा जूनियर वर्ल्ड कप का मेजबान’

    गौरतलब है कि एफआईएच हॉकी जूनियर मेन्स वर्ल्ड कप 2025 की मेजबानी भारत पहली बार कर रहा है। प्रतियोगिता 28 नवंबर से 10 दिसंबर तक चलेगी और तमिलनाडु के चेन्नई व मदुरै में आयोजित की जाएगी।

  • छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति के हाथों छत्तीसगढ़ को मिला पुरस्कार

    रायपुर : जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य पर छत्तीसगढ़ को मिले तीन राष्ट्रीय जल पुरस्कार

    छत्तीसगढ़ को सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ पंचायत और सर्वश्रेष्ठ संस्थान श्रेणी में मिला सम्मान

    छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति के हाथों छत्तीसगढ़ को मिला पुरस्कार

    जल संचय, जन भागीदारी में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन, छत्तीसगढ़ को मिला द्वितीय पुरस्कार, रायपुर नगर निगम ने मारी बाजी

    रायपुर

    जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में छत्तीसगढ़ को विभिन्न श्रेणियों में तीन राष्ट्रीय जल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। जल संचय, जन भागीदारी श्रेणी में भी छत्तीसगढ़ को उत्कृष्ट राज्य का द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। वहीं, नगरीय निकाय श्रेणी में रायपुर नगर निगम को प्रथम स्थान मिला है। इसके अलावा पूर्वी जोन के जिलों में विभिन्न श्रेणियों में बालोद, राजनांदगांव, रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, बिलासपुर एवं रायगढ़ को भी जल संचय, जन भागीदारी अवार्ड से सम्मानित किया गया।

    विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मू ने यह पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर केंद्रीय जलमंत्री सीआर पाटिल भी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ को मिले राष्ट्रीय जल पुरस्कारों पर सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा यह सम्मान राज्य में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के प्रति हमारी निरंतर मेहनत का परिणाम है।

    केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आज छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले को पूर्वी जोन में सर्वश्रेष्ठ जिला, कांकेर जिले की डूमरपानी ग्राम पंचायत को श्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में तीसरा स्थान तथा रायपुर के कृष्णा पब्लिक स्कूल को सर्वश्रेष्ठ स्कूल श्रेणी में सम्मानित किया गया।

    जल शक्ति मंत्रालय द्वारा एक नई पहल शुरू की है, जल संचय, जन भागीदारी। इसके तहत भी इस वर्ष पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। इस श्रेणी में छत्तीसगढ़ को उत्कृष्ट राज्य का द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है। छत्तीसगढ़ से जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार ग्रहण किया। वहीं, नगरीय निकाय श्रेणी में रायपुर नगर निगम को देश में प्रथम स्थान मिला है। निगम के आयुक्त विश्वदीप ने यह पुरस्कार प्राप्त किया। इसके अलावा पूर्वी जोन के जिलों में विभिन्न श्रेणियों में बालोद, राजनांदगांव, रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, बिलासपुर एवं रायगढ़ को भी जल संचय, जन भागीदारी अवार्ड से सम्मानित किया गया।

    जल शक्ति मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर जल संरक्षण और प्रबंधन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय जल पुरस्कार (एनडब्ल्यूए) की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से लोगों को जल के महत्त्व से अवगत कराने और उन्हें बेहतर जल उपयोग पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

    राष्ट्रीय जल पुरस्कार व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा पूरे देश में जल संरक्षण, जल प्रबंधन और ‘जल समृद्ध भारत’ के सरकार के विज़न को साकार करने के लिए किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों को सम्मानित किया जाता है। इन पुरस्कारों का उद्देश्य उत्कृष्ट कार्यों को पहचान देना, जागरूकता फैलाना और समाज को जल संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करना है।

    “छत्तीसगढ़ को एक साथ तीन राष्ट्रीय जल पुरस्कार तथा ‘जल संचय–जन भागीदारी’ श्रेणी में उत्कृष्ट राज्य का द्वितीय स्थान मिलना हम सभी के लिए गर्व का क्षण है। यह उपलब्धि हमारे किसानों, पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, नगरीय निकायों, जल संसाधन विभाग, समाज के जागरूक नागरिकों और जनभागीदारी से आगे बढ़े जल संरक्षण जनआंदोलन का प्रतिफल है। राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मू जी के हाथों यह सम्मान मिलना हमारे प्रयासों को और सशक्त करता है। छत्तीसगढ़ सरकार जल संसाधनों के संरक्षण, पुनर्भरण और सतत प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ‘जल समृद्ध छत्तीसगढ़’ के संकल्प को तेज गति से आगे बढ़ा रही है।” — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

  • रायपुर: मुख्यमंत्री साय ने कहा, विधानसभा ने रिकॉर्ड उपलब्धियाँ हासिल कीं

    रायपुर : छत्तीसगढ़ की विधानसभा ने कई कीर्तिमान स्थापित किए-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    वर्ष 2047 तक इस मजबूत बुनियाद पर विकसित छत्तीसगढ़ की इमारत खड़ी होगी

    रायपुर

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा के विशेष सत्र के समापन अवसर पर कहा कि यह लोकतंत्र का मंदिर है। यह विधानसभा भवन केवल एक परिसर नहीं है, यह हमारे छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ निवासियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक है। इस भवन से छत्तीसगढ़ विधानसभा के अब तक के सभी सदस्यों की स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। यह संविधान का अमृत वर्ष है। हमें अपने संविधान को आत्मार्पित किए 75 वर्ष हो गए हैं, ऐसे में यह अवसर संवैधानिक मूल्यों से प्रेरणा लेते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं को समृद्ध करने वाली विभूतियों के स्मरण का भी है।

    श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं का विकास हुआ

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह विधानसभा भवन अंत्योदय और जनकल्याण की उपलब्धियों का साक्षी रहा है। सभी सदस्यगणों ने अपनी पूरी ऊर्जा और प्रतिभा के साथ इस विधानसभा भवन में जो कड़ी मेहनत की है, वह अविस्मरणीय रहेगी। उन्होने कहा कि विधानसभा के इस भवन में जो विधेयक पारित हुए हैं, जो कानून बनाये गए हैं, उनके माध्यम से आज 25 वर्षों की गौरवशाली संसदीय यात्रा में समृद्ध छत्तीसगढ़ की नींव तैयार हुई है। साय ने कहा कि राज्य बनने के बाद विधानसभा के पहले सत्र का आयोजन राजकुमार कॉलेज के जशपुर हॉल में हुआ था और उसके बाद इस भवन में विधानसभा शुरू हुई। फिर अनेक गौरवशाली पलों का यह विधानसभा भवन साक्षी रहा है। भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से लेकर वर्तमान राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु तक अनेक गणमान्य अतिथियों की यहां उपस्थिति एवं प्रेरक सम्बोधनों ने संवैधानिक परम्परा को मजबूत किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के स्वरूप को निखरते हुए सभी सदस्यों ने देखा है। कैसे न्यूनतम साधनों से छत्तीसगढ़ महतारी के सपूतों ने इन पच्चीस बरसों में छत्तीसगढ़ को संवारा है। प्रत्येक सदस्य इस बात के गवाह है। विधानसभा का यह भवन छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा। लोकतंत्र के इस मंदिर की बहुत सारी स्मृतियां, यहां के सत्र, तीखी और मीठी नोंक-झोंक, सबकुछ इस परिसर ने देखा है और यह दस्तावेज के रूप में संकलित है।

    समृद्धि छत्तीसगढ़ की हुई नींव तैयार

    साय ने कहा कि 25 बरस पहले जब हमने विधानसभा की यात्रा आरंभ की थी, तब हम सभी अपने साथ अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा की गौरवशाली परंपराएं लेकर आये थे। हमने हर श्रेष्ठ संसदीय परंपरा का पूरी प्रतिबद्धता से निर्वहन किया है। अविभाजित मध्यप्रदेश की विधानसभा में जिन सुंदर विधायी परंपराओं का निर्माण हुआ, उनके पीछे छत्तीसगढ़ की विभूतियों की भी प्रमुख भूमिका रही है। मुझे भी अविभाजित मध्यप्रदेश में विधायक रहने का अवसर प्राप्त हुआ। हमें गर्व है कि सभी श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं को इस विधानसभा भवन ने समृद्ध करने का काम किया है।

    25 वर्षों की जनाकांक्षा, जन संघर्ष और जन गौरव का उत्सव

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य स्थापना के रजत महोत्सव के दिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों छत्तीसगढ़ के नये विधानसभा परिसर का लोकार्पण हुआ है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि ‘‘यह केवल एक इमारत का समारोह नहीं, बल्कि 25 वर्षों की जनाकांक्षा, जन संघर्ष और जन गौरव का उत्सव है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में देश स्वर्णिम शिखर की ओर बढ़ा और एक नवंबर वर्ष 2000 को छत्तीसगढ़ पृथक राज्य के रूप में और हमारा यह विधानसभा अस्तित्व में आया। स्व. बाजपेयी ने राज्य का निर्माण तो किया ही, साथ ही केंद्र में जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्थापना की। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के रूप में ग्रामीण बसाहटों को जोड़ने की महती योजना तैयार की, जिसका इसका भरपूर लाभ छत्तीसगढ़ को मिला। छत्तीसगढ़ के नवनिर्माण के लिए 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में आपने और हमारे विधानसभा के साथियों ने बहुत पसीना बहाया है। सबको खाद्य सुरक्षा दिलाने की आपकी पहल से प्रदेश के लाखों लोगों को भूख से मुक्ति मिली। छत्तीसगढ़ के पीडीएस मॉडल को देश के अन्य राज्यों ने भी अपनाया। धान खरीदी के व्यवस्थित मॉडल से लाखों किसानों को पहली बार अपने फसल का बढ़िया मूल्य प्राप्त हुआ।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विधानसभा नीति निर्माण का मंच होने के साथ सामाजिक सुधार का सेतु भी है। इसी विधानसभा भवन में मातृ शक्ति के सम्मान को सुरक्षित रखने टोनही प्रताड़ना निवारण विधेयक, शासन और लोक सेवकों की जनता के प्रति जवाबदेही तय करने छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी विधेयक तथा युवाओं को कौशल विकास का अधिकार प्रदान किया गया। उन्होेने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास को डबल इंजन की सरकार से शक्ति मिल गई और चहुँओर ऐसे कार्य आरंभ हुए, जिससे छत्तीसगढ़ के विकास का ग्राफ तेजी से उत्तरोत्तर चढ़ता गया।

    26 लाख से अधिक पीएम आवास स्वीकृत

    साय ने कहा कि इस विधानसभा भवन ने श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी तथा वर्तमान यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के संकल्प को साकार करने अहम भूमिका निभाई है। वर्ष 2023 में जब हमारी सरकार बनी, तो सबसे पहले हमने प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी फाइल को मंजूरी प्रदान की। प्रदेश में अब तक 26 लाख से अधिक पीएम आवास स्वीकृत किये जा चुके हैं। घर भी बने और घर के अंदर रसोई भी बदली। चूल्हे की जगह उज्ज्वला सिलेंडर प्रदान किया गया।

    हर घर बिजली पहुंचाई

    मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 वर्षों में हमने हर घर बिजली पहुंचाई है। अब लोग प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के माध्यम से बिजली का उत्पादन भी कर रहे हैं। इसी विधानसभा में पिछले दो साल में ज्ञान और गति आधारित ऐतिहासिक बजट पेश किया। इस सदन द्वारा जनविश्वास विधेयक, लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक, कृषि उपज मंडी संशोधन विधेयक, नगर पालिका तथा नगर निगम संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय स्थापना संशोधन विधेयक, राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण विधेयक, राजिम माघी पुन्नी मेला संशोधन विधेयक और भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक समेत अनेक जनकल्याणकारी विधेयक पारित किए गए।

    छत्तीसगढ़ का हर किसान उम्मीद से भरा

    मुख्यमंत्री साय ने विधान सभा में कहा कि विधानसभा भवन को हमने धान की बालियों से सजाया है। छत्तीसगढ़ का हर किसान उम्मीद से भरा है, क्योंकि पर्याप्त पानी है, बिजली है और उनके उत्पादन का उचित मूल्य है। जब किसान भरपूर मेहनत करते हैं, खूब अन्न उपजाते हैं तो एक संवेदनशील सरकार की यह भी जिम्मेदारी होती है कि किसानों के उत्पादन के अनुरूप खरीदी का स्तर भी बढ़ाये। हमने 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी के साथ ही 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान खरीदी का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 25 बरसों की इस यात्रा में मातृशक्ति की अहम भूमिका है। विधानसभा में बैठी हुईं महिला सदस्य राज्य को संवारने में कड़ी मेहनत कर रही हैं। पूर्व में भी महिला सदस्यों ने अपनी ऊर्जा और प्रतिभा से छत्तीसगढ़ को संवारा है। महिला सशक्तीकरण की दिशा में क्रांतिकारी पहल करते हुए इसी विधानसभा भवन से पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया गया है।

    विकास यात्रा को युवा शक्ति ने लगातार गढ़ा

    साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है, इस संकल्प में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने विज़न डॉक्युमेंट नवा अंजोर 2047 के रूप में लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने का कि छत्तीसगढ़ की 25 बरसों की विकास यात्रा को युवा शक्ति ने लगातार गढ़ा है। इस रजत यात्रा में ऐसी अनेक संस्थाएं प्रदेश में स्थापित हुई हैं जिन्होंने प्रदेश के मानव संसाधन की प्रतिभा को उभारने में बड़ी भूमिका निभाई। हमारे यहां एनआईटी, आईआईटी, ट्रिपलआईटी, आईआईएम और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी है। यहां निफ्ट, फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट जैसी राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थाएं भी यहां आरंभ किया जा रहा है। हमारा नवा रायपुर आधुनिक भारत की सबसे नई बसाहट है। रायपुर, दुर्ग-भिलाई तथा नवा रायपुर को मिलाकर हमने स्टेट कैपिटल रीजन बनाया है। यह आईटी हब, फार्मा हब, टैक्सटाइल हब के रूप में उभरेगा। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल ने हमंे एम्स दिया, मोदी जी ने हमें मेडिकल कॉलेजों की सौगात दी, हम एम्स की तरह ही सुपर स्पेशयिलिटी हॉस्पिटलों की श्रेणी खड़ी करेंगे। इसके साथ ही हम मेडिसिटी बना रहे हैं।

    बस्तर के गांवों में नया आत्मविश्वास उत्पन्न

    साय ने कहा कि माओवाद की वजह से पिछड़ गये बस्तर जैसे इलाकों के लिए यहां से विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। नियद नेल्ला नार योजना, पीएम जनमन योजना, प्रधानमंत्री जनजातीय उत्कृष्ट ग्राम अभियान, जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से बस्तर विकसित छत्तीसगढ़ के आकाश में नक्षत्र की तरह उभरने की तैयारी कर रहा है। मुख्यमंत्री साय ने नक्सल उन्मूलन पर बात करते हुए कहा कि बीते महीनों में सैकड़ों नक्सलियों का आत्मसमर्पण, टॉप कैडर की गिरफ्तारियाँ और लगातार सफल ऑपरेशन्स यह संकेत देते हैं कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। नियद नेल्ला नार, नक्सलियों के पुनर्वास की प्रभावी नीति और नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना ने जनविश्वास को अत्यधिक मजबूत किया है और बस्तर के गांवों में नया आत्मविश्वास उत्पन्न किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्ण अंत हो जाएगा।

    200 यूनिट तक हाफ बिजली का लाभ देने का निर्णय

    राज्य के विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा के विशेष सत्र में नई बिजली योजना की घोषणा की। अब प्रदेश के ऐसे घरेलू उपभोक्ताओं को जिनका 200 यूनिट तक विद्युत खपत है उन्हें 200 यूनिट तक हाफ बिजली का पूरा लाभ प्राप्त होगा। इस निर्णय से राज्य के 36 लाख घरेलू उपभोक्ता सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। 200 से 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को भी अगले 1 वर्ष तक 200 यूनिट तक हॉफ बिजली बिल का लाभ मिलेगा, इससे 6 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। इन उपभोक्ताओं को 1 वर्ष तक की छूट दी गई है ताकि इस अवधि में वे अपने घरों में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर प्लांट स्थापित करा सके। इस तरह 200 यूनिट तक हॉफ बिजली बिल योजना से प्रदेश के 45 लाख उपभोक्ताओं में से 42 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे, वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर मुक्त बिजली योजना का लाभ प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं को मिलेगा।

    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता हर उपभोक्ता को सस्ती, सुचारू और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है। सोलर प्लांट स्थापना प्रक्रिया में समय लगने के कारण घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 1 दिसंबर से नई योजना लागू की जा रही है, जिससे आम जनता के बिजली बिल में महत्वपूर्ण कमी आएगी।

    पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत फ्री बिजली का लाभ

    मुख्यमंत्री साय ने यह भी बताया कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है, जिसके तहत 1 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट पर 15,000 रुपये तथा 2 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के प्लांट पर 30,000 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। यह व्यवस्था राज्य में सौर ऊर्जा अपनाने को प्रोत्साहित करेगी और आने वाले समय में उपभोक्ताओं को हाफ बिजली से फ्री बिजली की ओर ले जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय न केवल जनता के बिजली बिल को कम करेगा बल्कि राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा। राजनीतिक प्रतिस्पर्धा एवं वैचारिक भिन्नता के बावजूद छत्तीसगढ़ विधानसभा ने मर्यादित और संसदीय आचरण की श्रेष्ठता को बरकरार रखा है। यह देश की अन्य विधानसभाओं के लिए अनुकरणीय है।

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज विधानसभा के विशेष सत्र के समापन अवसर पर कहा कि’ सत्ता पक्ष की ओर 15 और विपक्ष की ओर से 10 सदस्यों इस तरह 25 वर्ष की विकास यात्रा में संयोग से 25 माननीय सदस्यों ने सदन में विशेष सत्र में अपनी बात रखी। मुझे इस बात की ख़ुशी है कि जिसकी बुनियाद हमारे पुरोधाओं ने रखी थी उसकी मर्यादा को यहाँ माननीय सदस्यों ने क़ायम रखा। उन्होंने कहा कि प्रेम प्रकाश पांडेय जी के विधानसभा अध्यक्ष रहते क्लोज़ डोर मीटिंग हुई। यह सदन केवल क़ानून नहीं बनाता बल्कि बेहतर भविष्य बनाता है। दिसम्बर 2023 को मेरे सार्वजनिक जीवन का वह क्षण था, जिसे मेरे लिए शब्दों में बाँध पाना संभव नहीं।

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने आगे कहा कि आज जो दायित्व निभा रहा हूँ वह बड़ा दायित्व है। मैं इसके काबिल बनने का प्रयास कर रहा हूँ । विधानसभा अध्यक्ष का पद शक्ति का नहीं, उत्तरदायित्व का है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की विशेष पहचान बनी है। उनके नेतृत्व में राज्य और मुझे लगता है कि राष्ट्र की सबसे बड़ी समस्या माओवाद आतंक का समाधान होने जा रहा है । विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण शून्य ब्याज दर मिलने और सड़क का नेटवर्क यही से पास हुआ । मेडिकल कॉलेज सहित जनहित के सभी विकास कार्यों और कार्यक्रमों का निर्णय यही से हुआ। उन्होंने कहा कि विधानसभा का शीतकालीन सत्र 14 दिसंबर से 17 दिसंबर 2025 तक आयोजित होगा। उन्होंने रजत जयंती वर्ष में विधानसभा के विशेष सत्र के समापन अवसर पर सदस्यों और मीडिया के साथियों ने सहयोग दिया उसके लिए धन्यवाद दिया।

  • छत्तीसगढ़ की लोकतांत्रिक यात्रा में वर्तमान विधानसभा भवन की खास भूमिका—मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    रायपुर : छत्तीसगढ़ की लोकतांत्रिक यात्रा का साक्षी रहा वर्तमान विधानसभा भवन : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

    रायपुर
    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की 25 वर्षीय लोकतांत्रिक यात्रा में वर्तमान विधानसभा भवन हमारी कार्यसंस्कृति, संवाद, लोकतांत्रिक मर्यादाओं और जनसेवा के संकल्प का जीवंत प्रतीक रहा है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकतांत्रिक यात्रा में वर्तमान विधानसभा भवन हमारी सामूहिक कार्यसंस्कृति, संवाद, लोकतांत्रिक मर्यादाओं और जनसेवा के संकल्प का साक्षी रहा है।  उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में इस भवन ने अनगिनत ऐतिहासिक निर्णयों, महत्त्वपूर्ण बहसों और जनहित से जुड़े विधेयकों को जन्म लेते देखा है। यह भवन प्रदेश के विकास, समृद्धि और मजबूत लोकतंत्र का आधार स्तंभ रहा है। यह भवन न केवल हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है, बल्कि आगामी जिम्मेदारियों और भविष्य की चुनौतियों के प्रति हमें और अधिक दृढ़ता, प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की प्रेरणा भी देता है। हम सभी के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ ने बीते वर्षों में विकास, सुशासन और जनकल्याण की नई इबारत लिखी है।

    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि अब जब हम नए विधानसभा भवन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, तब यह पुराना भवन अपनी हर दीवार, खिड़की और आँगन के साथ हमारी स्मृतियों में सदैव अंकित रहेगा। यह स्थान छत्तीसगढ़ की गौरवशाली संसदीय परंपरा, सुसंस्कृत संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों का सजीव प्रमाण है।छत्तीसगढ़ की लोकतांत्रिक यात्रा का साक्षी रहा वर्तमान विधानसभा भवन : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय

  • प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार होगा प्रेरणादाई: मुख्यमंत्री साय

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के दो जिलों को जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रायपुर और बालोद जिला प्रशासन को किया सम्मानित

    प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार होगा प्रेरणादाई: मुख्यमंत्री  साय

    रायपुर

    जल संरक्षण एवं सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कर छत्तीसगढ़ के दो जिलों रायपुर और बालोद ने राष्ट्रीय स्तर पर नया इतिहास रच दिया है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार एवं जल संचय जनभागीदारी 1.0 अवार्ड समारोह में राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु ने दोनों जिलों को सम्मानित किया।

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण की दिशा में देशभर में विशेष पहचान बनाई है। पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार के अभिनव प्रयासों और जनभागीदारी ने जल संचयन की दिशा में नए आयाम हासिल किए हैं। मुख्यमंत्री ने दोनों जिलों के नागरिकों और प्रशासन को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि जल संचयन के प्रति लोगों में आई यह चेतना जल के समुचित उपयोग को बढ़ावा देगी और जल का अनावश्यक दोहन कम होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार प्रेरणादाई होगा और जनभागीदारी बढ़ने से हम जल संचयन के लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे। 

    रायपुर जिला देश में प्रथम स्थान पाने वाला नगर निगम, पूर्वी जोन में मिला तीसरा स्थान

    रायपुर जिले को जल संचय जनभागीदारी 1.0 अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह और नगर निगम आयुक्त  विश्वदीप ने ग्रहण किया। देशभर के नगर निगमों में रायपुर नगर निगम प्रथम स्थान पर रहा, जबकि ईस्टर्न जोन कैटेगरी 01 में रायपुर जिला तीसरे स्थान पर रहा। रायपुर जिले और नगर निगम ने मिलकर सामुदायिक सहभागिता को जल संचय का व्यापक अभियान बनाया। रायपुर नगर निगम द्वारा 33,082 कार्य और जिला प्रशासन द्वारा 36,282 कार्य तथा राज्य स्तर पर कुल 4,05,563 जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए। इनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज पिट्स, अमृत सरोवर, टॉप डैम एवं परकुलेशन टैंक शामिल हैं।

    तरल अपशिष्ट प्रबंधन में भी रायपुर ने दर्ज की महत्वपूर्ण उपलब्धि

    रायपुर में 4 एसटीपी के माध्यम से 206 एमएलडी क्षमता विकसित की गई है। 09 औद्योगिक इकाइयों को 125.849 एमएलडी शुद्ध जल आपूर्ति की जा रही है। प्रत्येक वार्ड में वर्षा जल संचयन, 20 से अधिक सरोवरों का पुनर्जीवन और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से स्मार्ट ग्राउंडवॉटर मॉनिटरिंग ने इस उपलब्धि को हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाई है। 

    बालोद जिला पूर्वी जोन में प्रथम, मिला 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित दूसरे जिले बालोद को पूर्वी जोन में बेस्ट परफॉर्मिंग जिला घोषित किया गया, जिसके साथ 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। यह सम्मान कलेक्टर मती दिव्या उमेश मिश्रा ने ग्रहण किया।

    कलेक्टर मिश्रा ने इस उपलब्धि का श्रेय जिले के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अमले और संपूर्ण बालोदवासियों को दिया। बालोद जिले ने ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तहत प्रभावशाली और बड़े पैमाने पर जल संरक्षण कार्य किए। इसके तहत 1 लाख 6 हजार 677 नई जल संरचनाएँ निर्मित की गई। 30 हजार 849 पुराने जल स्रोतों की मरम्मत व सफाई, प्रधानमंत्री आवासों में 10 हजार वाटर रिचार्ज पिट, वन क्षेत्र में 3 लाख 88 हजार पौधरोपण, 27 हजार से अधिक घरों में स्वयं प्रेरित सोकपिट निर्माण, 1 लाख 09 हजार 27 स्टेगर्ड कंटूर ट्रेंच, 140 अमृत सरोवर, 6 हजार 160 निजी डबरी, 1 हजार 944 सामुदायिक तालाब, 399 मिनी परकुलेशन टैंक, 6 हजार 614 लूज बोल्डर चेक डैम, 69 स्टॉप डैम, 316 गेबियन चेक डैम, 423 कुएं निर्मित किए गए हैं। ये विस्तृत कार्य बालोद की जल संरक्षण नीतियों और जनता की सक्रिय भागीदारी की मिसाल हैं।

  • मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा डाकघर में बिजली बिल भुगतान की सुविधा शुरू

    भोपाल 
    मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को डाकघरों और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के अधिकृत प्रतिनिधि (डाकिये) के माध्‍यम से बिना किसी अतिरिक्‍त शुल्‍क के बिजली बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराई गयी है। अब बिजली उपभोक्‍ताओं को यह सरल और सुलभ भुगतान की सुविधा बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नजदीकी डाकघर में मिलना शुरू हो गई है। डिजिटल और सुरक्षित तरीके से डाकघर के माध्‍यम से बिल भुगतान की सुविधा शहरी क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी उपलब्‍ध है।

    गौरतलब है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को प्रदत्त सेवाओं का विस्तार करते हुए बिल भुगतान की व्यवस्था को और अधिक सरल एवं सुलभ बनाते हुए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के माध्‍यम से बिजली बिल भुगतान की विशेष सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए एक समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित किया गया है। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के सहायता प्राप्त चैनलों के माध्यम से बिजली बिल संग्रहण को सक्षम बनाते हुए बिजली उपभोक्‍ताओं को बिना अतिरिक्‍त प्‍लेटफॉर्म चार्ज के बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराना है। अब बिजली उपभोक्ता इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के विस्तृत नेटवर्क और डाकिया/ग्रामीण डाक सेवक की सहायता से भी अपने घर के पास या घर बैठे ही आसानी से बिजली बिल का भुगतान कर सकेंगे। 

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- सिंहस्थ के विश्वस्तरीय आयोजन के लिए तैयारियां जारी

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह सौभाग्य का विषय है कि इस बार उज्जैन में भव्य, दिव्य और विश्व स्तरीय सिंहस्थ: 2028 मेले का आयोजन किया जाएगा। राज्य सरकार इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पर गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। अब उज्जैन सिर्फ हमारा धार्मिक शहर ही नहीं, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन और ज्ञान-विज्ञान के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उज्जैन में इस बार अद्भुत सिंहस्थ का आयोजन होने वाला है। इसके लिए राज्य सरकार जिला प्रशासन, साधु-संतों के साथ-साथ किसानों से भी सुझाव ले रही है। हर वर्ग की परेशानियों को दूर करते हुए सबको साथ लेकर बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के संबंध में किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार गतिविधियां संचालित की जाएंगी। केन्द्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार के उचित नियोजन के परिणामस्वरूप सिंहस्थ के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। सिंहस्थ का आयोजन विश्वस्तरीय है और इसके लिए विश्वस्तरीय प्रबंधन किए जा रहे हैं। भविष्य में किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की विषम परिस्थिति निर्मित न हो, इसके लिए सभी तरह के प्रबंध राज्य सरकार कर रही है। सिंहस्थ : 2028 की व्यवस्थाएं अब तक के सभी मेलों से बेहतर होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए यह विचार व्यक्त किए।

     

  • जीवन प्रमाण पत्र बनाने का झंझट खत्म! पेंशनरों को बड़ी राहत, घर बैठे सुविधा और कम खर्च में होगा काम

    दमोह
    भारतीय डाक विभाग ने पेंशनधारकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब वरिष्ठ नागरिकों को जीवन प्रमाण पत्र बनवाने के लिए बैंक या डाकघर के चक्कर नहीं लगाने होंगे। डाक विभाग की नई सेवा के तहत पोस्टमैन स्वयं पेंशनधारक के घर पहुंचकर डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र तैयार करेगा। इसके लिए मात्र 70 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

    यह सुविधा बुजुर्गों को सुरक्षित व आरामदायक वातावरण में घर बैठे प्रमाण पत्र उपलब्ध कराकर बड़ी राहत प्रदान कर रही है। प्रमाण पत्र बनने के बाद यह सीधे ऑनलाइन माध्यम से संबंधित पेंशन प्रदाता संस्थान को भेज दिया जाता है, जिससे अलग से जमा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। सेवा के सुचारू संचालन हेतु इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक दमोह शाखा के प्रबंधक लक्ष्मीनारायण पाल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
     
    जानकारी व सहायता के लिए मोबाइल नंबर 9893115877 जारी किया गया है। इस सेवा के अंतर्गत 81 वर्षीय कुलदीप कुमार चौबे (एमपीआरडीसी से सेवानिवृत्त) का जीवन प्रमाण पत्र ब्रांच पोस्ट मास्टर ब्रजेश पटेल ने उनके घर जाकर बनाया। इसी प्रकार लीला देवी विश्वकर्मा, गोपाल और नीमा बाई नामदेव के प्रमाण पत्र भी उनके घर पर ही तैयार किए गए।

  • राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुआ छत्तीसगढ़, जल संरक्षण में किया सराहनीय काम

    रायपुर : छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में राज्य के 12 जिलों को किया सम्मानित

    प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार होगा प्रेरणादायी: मुख्यमंत्री साय

    रायपुर

    जल संरक्षण एवं सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कर छत्तीसगढ़ के 12 जिलों रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद, राजनांदगांव, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, बालोद, बलरामपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग और सूरजपुर ने राष्ट्रीय स्तर पर नया इतिहास रच दिया है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आज 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार एवं जल संचय जनभागीदारी 1.0 अवार्ड समारोह में राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु ने इन जिलों को सम्मानित किया है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण की दिशा में देशभर में विशेष पहचान बनाई है। पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार के अभिनव प्रयासों और जनभागीदारी ने जल संचयन की दिशा में नए आयाम हासिल किए हैं। मुख्यमंत्री ने इन जिलों के नागरिकों और जिला प्रशासन को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि जल संचयन के प्रति लोगों में आई यह चेतना जल के समुचित उपयोग को बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार प्रेरणादायी होगा।

    रायपुर जिले को जल संचय जनभागीदारी अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। देशभर के नगर निगमों में रायपुर नगर निगम प्रथम स्थान पर रहा, जबकि पूर्वी जोन कैटेगरी 01 में रायपुर जिला तीसरे स्थान पर रहा। रायपुर जिले और नगर निगम ने मिलकर सामुदायिक सहभागिता को जल संचय का व्यापक अभियान बनाया। रायपुर नगर निगम द्वारा 33,082 कार्य और जिला प्रशासन द्वारा 36,282 कार्य किए गए हैं।

    बालोद जिले को केटेगरी 01 में बेस्ट परफॉर्मिंग के लिए पहला स्थान प्राप्त हुआ है, साथ ही 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। यहां 92,742 नई जल संरचनाएँ निर्मित की गई। राजनांदगांव जिले को केटेगरी 01 में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 2 करोड़ रूपए की राशि प्रदान की गई है। यहां 58,967 जल संचय के कार्य जनभागीदारी से पूर्ण किए गए हैं।

    महासमुंद जिले को कैटेगरी 2 अंतर्गत प्रथम स्थान के लिए सम्मानित किया है। यहां 35,182 जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले को कैटेगरी 2 के तहत दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 01 करोड़ रूपए की पुरस्कार राशि दी गई है। यहां 30,927 संरचनाओं का निर्माण किया गया है। गरियाबंद जिला को केटेगरी-2 में देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप एक करोड़ रूपए की राशि मिली है। यहां 26,025 सतही जल के बेहतर रख-रखाव के कार्य किए गए हैं।

    बिलासपुर को केटेगेरी 03 में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 25 लाख रूपए की पुरस्कार राशि मिली है। यहां 21,058 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य किया गया है। दुर्ग जिले को केटेगरी-03 में 16वां स्थान प्राप्त हुआ है तथा 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 5010 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। बलरामपुर जिले को केटेगरी-03 में 6वें स्थान के लिए सम्मानित किया गया है तथा 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 8644 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है।

    धमतरी जिले को केटेगरी 3 में 8वां स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 7674 जन संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। रायगढ़ जिले को केटेगरी 3 में द्वितीय स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 19088 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। सूरजपुर जिले को केटेगरी 3 में 12वां स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है तथा यहां 5797 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है।

  • छतरपुर को मिली नई सौगात: मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्घाटन करेंगे फाइव-स्टार राजगढ़ पैलेस होटल का

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव छतरपुर के चंद्रनगर में करेंगे पांच सितारा होटल राजगढ़ पैलेस का शुभारंभ

    पन्ना जिले को देंगे 82.62 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात

    छतरपुर

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 19 नवम्बर को छतरपुर जिले के चन्द्रनगर में द ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस का उद्घाटन और पन्ना जिले के शाहनगर में विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। चंद्रनगर के पांच सितारा लग्जरी होटल से प्रदेश सहित जिले में पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। देश के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक भी हमारी समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक धरोहर और वन्य प्राणी पर्यटन की ओर आकर्षित होंगे।

    राज्य सरकार द्वारा राजगढ़ पैलेस के नवीनीकरण और जीर्णोंद्धार कर उसे पांच सितारा होटल के रूप में संचालित करने के लिए ओबेरॉय समूह को लीज पर दिया गया है। द ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस चंद्रनगर के पास मानगढ़ और मनियागढ़ की पहाड़ियों के मध्य हर-भरे वातावरण के बीच स्थित है। बुन्देला राजवंश द्वारा निर्मित 350 साल पुराना यह महल भारतीय स्थापत्य और पारंपरिक बुंदेलखंड की विशेषताओं का मिश्रण है। द ओबेरॉय समूह द्वारा विकसित राजगढ़ पैलेस होटल में महलनुमा रेस्टोरेंट, भव्य बैंक्वेट हॉल सहित 66 भव्य कक्ष उपलब्ध हैं। यह कॉर्पोरेट आयोजन, डेस्टीनेशन वेडिंग्स, सामाजिक समारोह आदि के लिए आदर्श स्थान के रूप में स्थापित होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव पन्ना जिले के पवई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत शाहनगर के खेल परिसर आमा में आयोजित हितग्राही सम्मेलन में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव यहाँ 82.62 करोड़ के 14 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे।

     

  • यातायात विभाग में सख्ती: 899 बस परमिट रद्द करने की तैयारी, नियमों में बदलाव के लिए समय सीमा निर्धारित

    भोपाल
    राज्य सरकार बस परमिट नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर रही है। अब किसी भी बस को उसके रूट के लिए उतनी ही अवधि का परमिट दिया जाएगा, जितनी उसकी निर्धारित आयु है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी बस का संचालन निर्माण तिथि से 15 वर्ष तक ही संभव है, तो परमिट भी अधिकतम 15 वर्ष तक का ही होगा।

    वर्तमान व्यवस्था में परमिट पांच-पांच वर्ष की अवधि के लिए जारी किए जाते हैं, जिसके कारण कई मामलों में बसों के परमिट 15 वर्ष से भी अधिक अवधि के लिए वैध दिखाई देते हैं। जबकि राज्य के भीतर बस संचालन की अधिकतम सीमा 15 वर्ष और अंतरराज्यीय संचालन की सीमा 10 वर्ष तय है।
     
    हाल ही में परिवहन सचिव मनीष सिंह ने परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर उन 899 बसों की सूची भेजी है जिनके परमिट 15 वर्ष से अधिक अवधि के लिए जारी किए गए हैं। सचिव ने आशंका जताई है कि ये बसें संभवतः अभी भी चल रही होंगी, इसलिए इनकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। इस पत्र के बाद परिवहन आयुक्त कार्यालय ऐसे नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत बसों के परमिट उनकी अधिकतम आयु की अवधि के भीतर ही सीमित रहेंगे।

    अधिकारियों के अनुसार, परमिट वाहन मालिक के नाम पर जारी होता है, जिसमें बस नंबर और रूट का उल्लेख रहता है। पांच वर्ष का परमिट इसलिए दिया जाता था ताकि बस की 15 वर्ष की अवधि पूरी होने पर मालिक उसी रूट पर अनुमति लेकर दूसरी बस संचालित कर सके और नया परमिट लेने की आवश्यकता न पड़े। लेकिन अब नई व्यवस्था में यह समयसीमा बस की अधिकतम आयु से आगे नहीं जाएगी।

     

  • सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए नई चिंता, एनआरआई भी जेल व्यवस्था से हो सकते हैं प्रभावित

    भोपाल
     मध्य प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों में मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानि एसआईआर शुरू हो गया है. इसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं की वोटर लिस्ट का मिलान कर रहे हैं. लेकिन मिलान साल 2003 की मतदाता सूची से किया जा रहा है. ऐसे में कई लोगों को अगले चुनाव में मताधिकार से वंचित रहना पड़ सकता है. इस समस्या को लेकर अब तक सरकार ने कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किया है.

    ऐसे समझें एसआईआर की प्रक्रिया

    एसआईआर का मतलब है मतदाता सूची का विशेष गहन निरीक्षण यानि मतदाता सूची को अपडेट कर वास्तविक मतदाताओं की पहचान करना. इसके लिए बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना पत्र वितरित कर रहे हैं. मतदाताओं द्वारा इस फार्म को भरकर बीएलओ को वापस लौटाना अनिवार्य है. अन्यथा मतदाता सूची से नाम काटा जा सकता है.

    एसआईआर में यहां उलझ रहा पेंच

    दरअसल प्रत्येक मतदाता को जो फार्म दिया गया है, उसमें जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर भरना है. इसके साथ ही पुरानी वोटर लिस्ट का एपीआईसी नंबर भी दर्ज करना होगा. फार्म के साथ एक पासपोर्ट साइज फोटो भी लगानी है. खास बात यह है कि वर्तमान वोटर लिस्ट को वर्ष 2003 की लिस्ट से मिलाया जा रहा है. लेकिन कई लोग ऐसे हैं, जो साल 2003 में किसी और स्थान पर थे, लेकिन अब कहीं और निवास कर रहे हैं, ऐसे में उन लोगों के लिए एसआईआर प्रक्रिया चुनौती बन सकती है.

    सरकारी और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को टेंशन

    कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी ने बताया कि सेंट्रल गवर्नमेंट और राज्य के लाखों ऐसे कर्मचारी हैं, जो साल 2003 में किसी और जिले में पदस्थ थे. उन्होंने उस समय कहीं और वोट डाला था. लेकिन आप ट्रांसफर के बाद किसी और जिले में पदस्थ हो गए हैं या फिर ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारी जो सेवाकाल में किसी और शहर में थे और रिटायरमेंट के बाद किसी और शहर में बस गए हैं. ऐसे लोगों को साल 2003 की मतदाता सूची से वोटर लिस्ट का मिलान कराना बड़ी कठिनाई प्रक्रिया होगी.

    46 हजार कैदियों का सत्यापन अधर में

    जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया में व्यक्ति की प्रत्यक्ष मौजूदगी जरूरी नहीं होती है. वह व्यक्ति कहीं भी रहे, लेकिन उसके परिजन या प्रतिनिधि साल 2003 की मतदाता सूची के साथ वर्तमान सूची का मिलान कर फार्म भरकर बीएलओ को दे सकते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश की जेलों में बंद करीब 46 हजार कैदियों लिए यह काम काफी कठिन है. यही कठिनाई एनआरआई या प्रवासियों के साथ है. क्योंकि इन लोगों के परिजन या रिश्तेदार यदि दूसरे राज्यों में रहते हैं, तो उन्हें फार्म भरने और जमा करने में काफी संघर्ष करना पड़ सकता है.

    ऑनलाइन फार्म भर सकते हैं एनआरआई

    जो लोग लंबे समय से विदेश में रह रहे है, उनके परिजनों को गणना प्रपत्र में उनकी जानकारी देना होगी. 2003 की वोटर लिस्ट में अगर उनका या उनके माता-पिता का नाम है तो वह यह फार्म भर सकते है. यदि उन्होंने दूसरे देश की नागरिकता ले ली है तो वे वोटिंग लिस्ट से बाहर कर दिए जाएंगे. हालांकि यदि फिजिकल फार्म नहीं भर सकते, तो ऐसी परिस्थिति में एनआरआई ऑनलाइन फार्म भी भर सकते है.

    अधिकारी भी नहीं दे रहे जबाव

    इस मामले में जब गोविंदपुरा एसडीएम रवीश श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही. वहीं डिप्टी डीईओ भी इसका जबाव नहीं दे सके. वहीं इस मामले में जेल डीजी वरुण कपूर का कहना है कि इलेक्शन कमीशन से अभी जेलों में बंद कैदियों के एसआईआर को लेकर कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. इस संबंध वही जानकारी दे पाएंगे.