• डॉ. यादव: सिंहस्थ आयोजन को वैश्विक स्तर का बनाने की तैयारियां जोरों पर

    सिंहस्थ के विश्वस्तरीय आयोजन के लिए तैयारियां जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के लिए किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार होंगी गतिविधियां

    भोपाल

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह सौभाग्य का विषय है कि इस बार उज्जैन में भव्य, दिव्य और विश्व स्तरीय सिंहस्थ: 2028 मेले का आयोजन किया जाएगा। राज्य सरकार इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पर गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। अब उज्जैन सिर्फ हमारा धार्मिक शहर ही नहीं, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन और ज्ञान-विज्ञान के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उज्जैन में इस बार अद्भुत सिंहस्थ का आयोजन होने वाला है। इसके लिए राज्य सरकार जिला प्रशासन, साधु-संतों के साथ-साथ किसानों से भी सुझाव ले रही है।

    हर वर्ग की परेशानियों को दूर करते हुए सबको साथ लेकर बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के संबंध में किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार गतिविधियां संचालित की जाएंगी। केन्द्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार के उचित नियोजन के परिणामस्वरूप सिंहस्थ के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं।

    सिंहस्थ का आयोजन विश्वस्तरीय है और इसके लिए विश्वस्तरीय प्रबंधन किए जा रहे हैं। भविष्य में किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की विषम परिस्थिति निर्मित न हो, इसके लिए सभी तरह के प्रबंध राज्य सरकार कर रही है। सिंहस्थ : 2028 की व्यवस्थाएं अब तक के सभी मेलों से बेहतर होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए यह विचार व्यक्त किए।

     

  • किसानों की जुबानी : सरकार की नीति से जीवन में सकारात्मक बदलाव

    रायपुर : किसान की जुबानी :सरकार की पारदर्शी, संवेदनशील और स्पष्ट धान खरीदी नीति से किसानों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव

    प्रति एकड़ 21 क्विंटल और प्रति क्विंटल 3100 रुपए की दर से धान खरीदी

    किसानों में उत्साह का माहौल धान खरीदी केंद्रों की व्यवस्थाओं की किसानों ने की सराहना

    रायपुर

    प्रदेश में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में किसानों की आर्थिक तरक्की, उन्नति और सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार बनते ही किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्रति एकड़ 21 क्विंटल एवं प्रति क्विंटल 31 सौ रुपये की दर से धान खरीदी करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था। इस किसान हितैषी नीति का लाभ गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी रायगढ़ जिले के किसानों को व्यापक रूप से प्राप्त हो रहा है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जिले में 15 नवंबर से धान खरीदी का कार्य सुचारू रूप से प्रारंभ हो चुका है।

    ग्राम कोड़तराई के किसानों में धान खरीदी को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। इसी क्रम में ग्राम के किसान श्याम दयाल पटेल ने बताया कि सरकार की पारदर्शी, संवेदनशील और स्पष्ट धान खरीदी नीति ने उनके परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। तीन भाई मिलकर साझा खाते में 40 एकड़ भूमि पर धान की खेती करते हैं। इस वर्ष उनके परिवार का पहला टोकन जारी हुआ, जिसके अंतर्गत 44 क्विंटल धान की बिक्री की गई।

    किसान श्याम दयाल पटेल ने कहा कि 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा और 31 सौ रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य ने उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। बढ़ी हुई आय से वे परिवार की आवश्यक जरूरतों की पूर्ति, बच्चों की उच्च शिक्षा, कृषि उपकरणों की खरीद, घर-परिवार की दैनिक आवश्यकताओं एवं भविष्य की योजनाओं को सुदृढ़ करने में सक्षम हो रहे हैं। इसे उन्होंने अपने आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया।

    धान खरीदी केंद्रों की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी खरीदी के लिए उत्कृष्ट तैयारी की गई है। उपार्जन केंद्रों पर छाया, बैठने की सुविधा, पीने के पानी की उपलब्धता, सटीक तौल व्यवस्था तथा पर्याप्त बारदाना जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। सहज, पारदर्शी और किसान-केंद्रित व्यवस्थाओं से ग्राम कोड़तराई सहित पूरे जिले के किसानों में प्रसन्नता और संतोष का माहौल है। किसानों ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय को धन्यवाद देते हुए हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

  • समाधान योजना अपडेट: 28 हजार से अधिक उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कर सरचार्ज माफ कराया, जानें डिटेल्स

    भोपाल 
    3 नवंबर से शुरू हुई मध्य प्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 में अब तक 28 हजार 478 बकायादार उपभोक्ताओं ने अपना पंजीयन कराया है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 35 करोड़ 47 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 19 करोड़ 31 लाख का सरचार्ज माफ किया गया है।लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को कंपनी भोपाल के लिये portal.mpcz.in पर जाकर पंजीयन कराना होगा। इसमें प्रथम चरण में एकमुश्त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ होगा जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कम होता जाएगा।

    एकमुश्त भुगतान पर ज्यादा लाभ

    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल ने बताया कि समाधान योजना 2025- 26 के लागू होने से ऐसे अनेक उपभोक्ता हैं जो बकाया बिल जमा कर रहे हैं और एकमुश्त बकाया जमा राशि जमा करने पर अधिकतम छूट का लाभ ले रहे हैं। कंपनी ने बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रथम चरण में ही एकमुश्त भुगतान कर इस योजना में शामिल होकर सरचार्ज में अधिकतम छूट का लाभ उठाएं।कि यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाधान योजना के प्रथम चरण में सरचार्ज में 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमुश्त अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है।

    समाधान योजना के बारें में

        समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है।

        इस योजना में उपभोक्ता को प्रथम चरण में एकमुश्त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ होगा जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कम होता जाएगा। यह योजना दो चरणों में प्रारंभ होकर प्रथम चरण की शुरुआत 3 नवंबर से 31 दिसंबर 2025 तक रहेगी जिसमें 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक सरचार्ज माफ किया जाएगा।

        इसी तरह द्वितीय और अंतिम चरण में जो कि एक जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी, इसमें 50 से 90 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। प्रथम चरण में एकमुश्त राशि जमा कराने पर अधिकतम लाभ होगा।

        समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल के लिये portal.mpcz.in पर पंजीयन कराना होगा। कंपनी के उपाय ऐप पर भी पंजीयन की सुविधा शीघ्र ही मिलने लगेगी। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है।

        घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है साथ ही विद्युत वितरण केंद्र में पहुंचकर भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।

    RDSS योजना: अब तक 4 लाख 69 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर स्‍थापित

        केन्द्र सरकार की रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) योजना के अंतर्गत मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने का काम त्वरित गति से चल रहा है। जहां स्‍मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, वहां पर समय पर बिलिंग तथा रीडिंग हो रही है तथा दिन के टैरिफ में 20% की छूट भी मिलनी शुरू हो गई है।

        कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में अब तक 04 लाख, 69 हजार 069 स्मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं। इनमें सर्वाधिक भोपाल शहर वृत्‍त में 02 लाख, 64 हजार 415 स्‍मार्ट मीटर स्‍थापित किए जा चुके हैं।
        नए टैरिफ आर्डर के अनुसार स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को अब खपत के आधार पर दिन के टैरिफ में 20% की छूट भी दी जा रही है। अक्‍टूबर माह का बिल जो कि नवंबर माह में जारी हुआ है, उसमें दिन के टैरिफ में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपयोग की गई विद्युत के दौरान बनी यूनिट पर छूट अलग कॉलम में अंकित की गई है।

  • अफसरों की पदोन्नति सूची में नाम शामिल? 21 नवंबर को आएगा अंतिम निर्णय

    भोपाल 

    राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को आइपीएस अवार्ड देने की प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिर गई है। दो माह पहले 12 सितंबर को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की हुई बैठक को निरस्त कर दिया गया है। अब 21 नवंबर को दोबारा यह बैठक आयोजित की जाएगी। यह पहला अवसर है जब राज्य पुलिस सेवा से आइपीएस अवार्ड के लिए हुई डीपीसी को निरस्त किया गया है। बता दें, 1997-98 बैच के 15 अफसरों के नामों पर विचार कर पैनल तैयार किया गया था। इनमें से पांच अधिकारियों को आइपीएस अवार्ड मिलना था। लेकिन डेढ़ माह तक आदेश की प्रतीक्षा के बाद अचानक डीपीसी को निरस्त कर दिए जाने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।
    इन 15 अफसरों के नाम पर होगा विचार

    आगामी बैठक 21 नवंबर को होगी। इसमें 15 अफसरों के नामों पर विचार होना है। इनमें सीताराम ससत्या, अमृत मीणा, विक्रांत मुराब, सुरेंद्र कुमार जैन, आशीष खरे, राजेश रघुवंशी, निमिषा पांडेय, राजेश कुमार मिश्रा, मलय जैन, अमित सक्सेना, मनीषा पाठक सोनी, सुमन गुर्जर, संदीप मिश्रा, सव्यसाची सर्राफ और समर शर्मा शामिल हैं। अब निगाहें दोबारा होने वाली डीपीसी में होने वाले निर्णय पर टिकी हुई है।

    दो नामों पर पेच

    सूत्रों के अनुसार, पैनल में शामिल दो अधिकारियों के मामलों पर पेच फंसा हुआ है। वरिष्ठता क्रम में पहले नंबर पर आने वाले सीताराम ससत्या के खिलाफ एक विभागीय जांच लंबित है, तो दूसरे नंबर की वरीयता वाले अमृत मीणा का जाति प्रमाण पत्र विवाद अदालत में विचाराधीन है। इन दोनों मामलों के चलते पैनल की विश्वसनीयता व पारदर्शिता को लेकर शंकाएं हैं। अब चर्चा है, पहली डीपीसी को निरस्त किया गया, तो अब दोबारा बैठक में मानक क्या होंगे।

  • पिछड़ी जनजाति परिवारों तक पहुंचा शुद्ध जल, रायपुर में लाभ

    रायपुर : विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को मिल रहा है शुद्ध पेयजल जल का लाभ

    28 हजार से अधिक विशेष पिछड़ी जनजाति के घरों में नल कनेक्शन

    रायपुर

    मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने दूरस्थ अंचलों के लोगों तक भी जल जीवन मिशन योजना के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश संबंधित विभागों को हैं। जशपुर जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति के 28 हजार से अधिक घरों में नल कनेक्शन के कार्यों को पूर्ण कर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है l 

    94 ग्रामों के विशेष पिछड़ी जनजाति बसाहटों के 28 हजार से अधिक घरों में नल कनेक्शन का कार्य को पूर्ण

              जशपुर जिले में विशेष पिछड़ी जनजातियों में बिरहोर एवं पहाड़ी कोरवा निवास करती है। जिले के 94 ग्रामों में विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के लोग निवासरत् है। सम्पूर्ण जिले में नल जल प्रदाय के साथ-साथ इन 94 ग्रामों के विशेष पिछड़ी जनजाति के बसाहटों के कुल 36183 घरेलू नल कनेक्शन स्वीकृति किया गया है।
    इनमें से 28 हजार से अधिक नल कनेक्शन के कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है।

                मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के दिशा-निर्देश में विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को केन्द्र और राज्य शासन की सभी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत दिलाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है।

  • 21 नवंबर को भोपाल में जगदीप धनखड़, उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा के बाद करेंगे पहला कार्यक्रम

    भोपाल 

    पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 21 नवंबर को भोपाल में एक आरएसएस नेता की पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के आयोजकों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।जुलाई में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद धनखड़ का यह पहला सार्वजनिक भाषण होने की संभावना है। इससे पहले उन्हें उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में देखा गया था।

    मनमोहन वैद्य की किताब के विमोचन में होंगे शामिल भोपाल के रवीन्द्र भवन में 21 नवंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य की किताब "हम और यह विश्व" का विमोचन होगा। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ संबोधन देंगे। कार्यक्रम में वृंदावन के श्री आनंदम धाम आश्रम के पीठाधीश्वर रीतेश्वर जी महाराज और वरिष्ठ पत्रकार विष्णु त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

    मुख्य वक्ता रहेंगे जगदीप धनखड़

    सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने पीटीआई को बताया कि धनखड़ 21 नवंबर को रवींद्र भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य की पुस्तक "हम और यह विश्व" के विमोचन समारोह में मुख्य वक्ता होंगे। उन्होंने बताया कि वृंदावन-मथुरा स्थित आनंदम के मुख्य पुजारी रितेश्वर जी महाराज भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।

    धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और 12 सितंबर को राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के अलावा, सार्वजनिक रूप से कहीं भी नज़र नहीं आए। कांग्रेस धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठा रही है। विपक्षी दल ने पिछले महीने कहा था कि धनखड़ अपने सभी पूर्ववर्तियों की तरह एक विदाई समारोह के हकदार थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    इस्तीफा देने के बाद उप राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में आए थे नजर 21 जुलाई को उप राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने के बाद जगदीप धनखड़ नजर नहीं आए। 12 सितंबर को नवनिर्वाचित उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में वह शामिल हुए थे। लेकिन, पद छोड़ने के बाद जगदीप धनखड़ किसी ऐसे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। जिसमें उन्होंने मंच से कोई भाषण या मीडिया में कोई बयान दिया हो।

    इस्तीफे के ठीक 4 महीने बाद होगा सार्वजनिक कार्यक्रम

    उप राष्ट्रपति पद छोड़ने के ठीक चार महीने बाद जगदीप धनखड़ का यह पहला कार्यक्रम होगा। जिसमें वे संबोधन देंगे। 21 जुलाई को उन्होंने इस्तीफा दिया था और 21 नवंबर को ठीक चार महीने बाद वे सार्वजनिक कार्यक्रम में मंच पर नजर आएंगे।

    जगदीप धनखड़ ने 21 सितंबर को उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों को इस्तीफे की वजह बताया था। वे 74 साल के हैं। धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। राष्ट्रपति को पत्र में उन्होंने लिखा- स्वास्थ्य की प्राथमिकता और डॉक्टरी सलाह का पालन करते हुए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं। पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति को उनके सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल को भी सहयोग के लिए आभार जताया।

     

  • अब बदल सकते हैं हालात: 12 हजार स्कूलों में से 322 के पास भवन नहीं, 5600 जर्जर भवन में शिक्षा जारी

    भोपाल 

    मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति का अंदाज इसी से बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में 12000 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक ही शिक्षक पदस्थ है, इन स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की कमी साफ नजर आती है. जबकि कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का आभाव भी साफ नजर आता है. कही बिजली नहीं है तो कही के भवन ठीक नहीं हैं. शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफ्रोमेशन की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. जिसमें यह बताया गया है कि मध्य प्रदेश अभी भी नेशनल पॉलिसी यानि एनईपी के लक्ष्यों प्राप्त करने से फिलहाल बहुत दूर नजर आता है. 

    प्रदेश के 1,22,20 स्कूलों में से 322 के पास भवन नहीं है, जबकि 5,600 स्कूल जर्जर भवन में संचालित हो रहे हैं। इसी तरह करीब चार हजार से अधिक स्कूलों में बालिका व बालिकाओं के लिए शौचालय नहीं है तो करीब डेढ़ हजार से अधिक स्कूलों में प्रयोगशाला नहीं है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यूडाइस यानी स्कूल शिक्षा पर एकीकृत जिला सूचना रिपोर्ट सत्र 2024-25 में यह बात सामने आई है।

    करीब 200 करोड़ रुपये स्वीकृत
    इसे देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने प्र
    देश के आठ हजार हाई व हायर सेकंडरी स्कूलों में से करीब 200 ऐसे स्कूलों को चिह्नित किया है, जिनमें अतिरिक्त कक्ष, शौचालय व प्रयोगशाला, बाउंड्रीवाल नहीं हैं। इन स्कूलों के लिए विभाग ने करीब 200 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। 

     इसमें से 66 प्रतिशत राशि वित्त विभाग की ओर से जारी कर दी गई है। प्रत्येक स्कूलों को करीब 22 से 30 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। विभाग ने स्कूलों को जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कर फोटो भेजने के लिए कहा है, ताकि इन स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।

    4,072 स्कूलों में बालिका शौचालय नहीं
    जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के 4,072 स्कूलों में बालिका शौचालय और 4,926 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय नहीं है। वहीं 564 में पेयजल सुविधा नहीं है तो 39,500 में बाउंड्रीवाल और करीब छह हजार में खेल मैदान नहीं है।

    नया भवन एक ही इकाई में होना चाहिए
    जिन स्कूलों की भवन संरचनाएं अत्यंत जर्जर व जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। उन सभी भवनों को ध्वस्त कर उसी स्थान पर नए भवन का निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं। नवीन भवन का निर्माण इस प्रकार कराया जाएगा, ताकि वर्तमान भवन के साथ समाहित हो। पूरा भवन एक ही इकाई के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।

    एक शिक्षक वाले स्कूल 

    मध्य प्रदेश के 12 हजार सिंगल शिक्षकों वाले स्कूलों में 9620 स्कूल प्राइमरी हैं, यानि यहां पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी केवल एक ही शिक्षक की है, जबकि अपर प्राइमरी की स्कूलों की स्थिति 2590 है, वहीं छात्र शिक्षक अनुपात की बात की जाए तो 26 प्रतिशत प्राईमरी और 45.8 प्रतिशत अपर प्राइमरी स्कूल हैं. वहीं 23087 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं जहां 30 छात्र भी नहीं हैं. वहीं 451 बस्तियों में प्राइमरी स्कूल भी नहीं हैं. जिससे मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति का फिलहाल पता लगाया जा सकता है. यह आंकड़े यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफ्रोमेशन की रिपोर्ट के अनुसार ही सामने आए हैं. 

    वहीं इस मामले में स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि राज्य के सभी स्कूलों में व्यवस्थाएं ठीक करने की पूरी कोशिश की जा रही है. शौचालय, पेयजल और मरम्मत के कामों में तेजी लाई जा रही है. जबकि स्कूलों की व्यवस्थाओं को बेहतर भी किया जा रहा है. लेकिन यह रिपोर्ट एमपी में चर्चा में जरूर बनी हुई है.

    प्रदेश के आंकड़े

        1,22,20 प्रदेश में स्कूलों की संख्या
        10,800 बिजली आपूर्ति नहीं
        14,916 लाइब्रेरी नहीं है
        2,301 डिजिटल लाइब्रेरी नहीं
        1,19,412 खेल का मैदान नहीं
        6,213 पीने का पानी उपलब्ध नहीं
        564 पीने के पानी की सुविधा नहीं
        1,365 बालिकाओं के लिए शौचालय नहीं

  • नियमित फॉलोअप करें और समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य करें पूर्ण: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में नियुक्ति प्रक्रिया अधोसंरचना विकास कार्यों और उपकरण खरीद प्रक्रियाओं की वृहद समीक्षा की

    भोपाल
    उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधोसंरचना विकास कार्यों, भर्ती प्रक्रिया और उपकरण खरीद की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं का नियमित फॉलोअप किया जाए और निर्धारित समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण होना सुनिश्चित किया जाए।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं—विशेषज्ञ चिकित्सकों, स्टाफ नर्स, पैरा-मेडिकल स्टाफ और तकनीकी पदों—की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए रिक्त पदों की शीघ्र भर्ती अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, मेरिट और गति—इन तीनों का समन्वय सुनिश्चित किया जाए।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बुदनी चिकित्सा महाविद्यालय और सिंगरौली मेडिकल कॉलेज से जुड़े निर्माण, उपकरण और अकादमिक व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि दोनों संस्थानों के सभी आवश्यक कार्य समय पर पूर्ण हों। उन्होंने एयर एम्बुलेंस सेवा के सुदृढ़ीकरण पर भी जोर दिया और निर्देश दिए कि गंभीर रोगियों को तेज, सुरक्षित और सक्षम आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने के लिए इस सेवा को और अधिक प्रभावी एवं सुगठित बनाया जाए।

    उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने एमपीपीएचएससीएल के माध्यम से की जा रही उपकरण खरीद प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए जोर दिया कि चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद में पारदर्शिता और गुणवत्ता सर्वोपरि हो। उन्होंने आपूर्ति समयसीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा प्राथमिकता वाले संस्थानों में उपकरणों की शीघ्र उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री तरुण राठी, तथा एमपीपीएचएससीएल के प्रबंध संचालक श्री मयंक अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • विरोध का नया तरीका: ट्रेन से उतारे गए 100 किसानों ने नर्मदापुरम रेलवे स्टेशन पर अर्द्धनग्न होकर किया प्रदर्शन

    नर्मदापुरम
    अपनी मांगों के लिए तमिनलाडु से दिल्ली प्रदर्शन करने जा रहे लगभग 100 किसानों को पुलिस ने सोमवार शाम रेलवे स्टेशन पर उतारा। राष्ट्रीय दक्षिण भारतीय नदी संपर्क किसान संगठन के तत्वावधान में किसान जीटी एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे थे। सूचना मिलने पर पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर किसानों को उतारा।

    किसानों ने अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया
    ट्रेन से उतारे जाने के विरोध में किसानों ने रेलवे स्टेशन पर अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। साथ ही तमिल भाषा में जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी किसानों में पुरुषों के साथ बुजुर्ग, महिलाएं भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारी किसानों को उतारने के साथ ही प्रशासन अब उन्हें वापस करने का इंतजाम कर रहा है। वर्तमान में शहर के एक निजी गार्डन में किसानों के भोजन की व्यवस्था की जा रही है।

    तमिलनाडु एक्सप्रेस से भी उतारे किसान
    नर्मदापुरम की तरह की इटारसी रेलवे स्टेशन पर तमिलनाडु एक्सप्रेस से प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे लगभग 80 किसानों को उतारा गया। सभी किसानों को बस के माध्यम से नर्मदापुरम लाया गया। इन किसानों के लिए रात्रि भोजन की व्यवस्था भी नर्मदापुरम में प्रशासन ने की है। साथ ही सुबह सभी किसानों को वापस तमिलनाडु पहुंचाने का इंतजाम किया जाएगा।

  • प्रदेश के 260 सांदीपनि विद्यालयों में 950 स्कूल लीडर्स के अनुकरणीय प्रयासों को सराहना

    गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये किये जा रहे हैं प्रयास

    भोपाल 
    प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सांदीपनि विद्यालय शिक्षण नेतृत्व और शैक्षिक वातावरण में गुणवत्ता के नये मानक प्रस्तुत कर रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये इन विद्यालयों में शिक्षकों को उनके नवाचारी प्रयासों के लिये राज्य स्तरीय पहचान प्रदान करने तथा उनके प्रोत्साहन के लिये "प्रेरक प्रयास" कार्यक्रम की अभिनव पहल प्रारंभ की गई है। इस पहल से विद्यालयों के स्कूल लीडर्स और शिक्षकों द्वारा किये जा रहे अनुकरणीय एवं प्रभावी कार्यों को हर सप्ताह राज्य स्तर से सभी विद्यालयों में विस्तारित किया जा रहा है।

    प्रेरक प्रयास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सांदीपनि विद्यालय स्तर पर हो रहे हर सकारात्मक प्रयास, चाहे वह छोटा हो या बड़ा उनकी समय पर पहचान हो और सबसे सामने लाया जाये। इस प्रयास से सीखने और सिखाने की परंपरा को बढ़ावा मिल रहा है। इस कार्यक्रम में हर सप्ताह विद्यालयों में नेतृत्व, शिक्षण पद्धति, विद्यार्थी की उपस्थिति एवं प्रगति, नवाचार को पहचान कर चयन किया जाता है, जिन्हें तीन श्रेणियों में आरंभकर्ता, प्रयासकर्ता, सर्वोत्तम गुणवत्ता के रूप में बांटा जाता है। उन्हें विद्यालय स्तर पर सम्मानित कर राज्य स्तर पर बढ़ावा देने के लिये बहुरंगीय पोस्टर के माध्यम से सभी शिक्षकों के बीच साझा किया जाता है। प्रदेश में 260 सांदीपनि विद्यालयों में 950 से अधिक शिक्षकों के अनुकरणीय प्रयासों को राज्य स्तर पर पहचान दिलायी गयी है।

    विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से स्वयंसेवकों को आमंत्रण

    केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विद्यांजलि पोर्टल की शुरूआत की है। इस पोर्टल के माध्यम से स्कूल शिक्षा को सामुदायिक भागीदारी से मजबूत करने के प्रयास किये जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति-2020 में स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में सहभागिता को प्रोत्साहित करने के बिन्दु को मुख्य रूप से जोड़ा गया है। विद्यांजलि एक ऐसा मंच है, जहाँ विभिन्न पृष्ठभूमि से जुड़े लोग जैसे पेशेवर, सेवानिवृत्त, गृहणियां और स्वयंसेवी संगठन अपने समय, कौशल और संसाधनों के माध्यम से शासकीय विद्यालयों की गुणवत्ता सुधार में सहभागी बन सकते हैं। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के अनुरूप शुरू की गयी है।

     

  • बम-बारूद साजिश! पं. धीरेंद्र शास्त्री बोले- ‘विस्फोटक मिलना यात्रा रोकने के लिए हथकंडा’

    छतरपुर
    दिल्ली से वृंदावन तक सनातन हिंदू एकता पदयात्रा संपन्न होने के बाद बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सभी सहयोगियों और श्रद्धालुओं को धन्यवाद दिया। मंगलवार को उन्होंने कहा कि फरीदाबाद में जो भारी विस्फोटक और हथियार मिले, इन सबका मकसद यात्रा को रोकना था, लेकिन बालाजी ने यात्रा नहीं रुकने दी। हनुमान जी की कृपा से यात्रा निर्विघ्न संपन्न हुई।

    पूरी दुनिया ने इसमें हिंदुओं का ज्वार भाटा देखा। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का हमने जो प्रण लिया है, वह सबकी एकजुटता से अवश्य पूरा होगा। सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 7 नवंबर को दिल्ली के कात्यायनी शक्तिपीठ से शुरू हुई और 16 नवंबर को वृंदावन में संपन्न हुई।
     
    पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री यहां बांके बिहारी के दर्शन कर बागेश्वर धाम पहुंचे। मंगलवार को बालाजी की दर्शन पूजा कर पुरानी पेशी का दरबार लगाते हुए भक्तों को आशीर्वाद दिया। पदयात्रा से त्वरित मिली तीन सफलताएं पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि पदयात्रा का संदेश दूर-दूर तक जा रहा है।

    इसकी तीन सफलताएं त्वरित दिखाई दे रही हैं। इससे न सिर्फ हिंदू एकता को ताकत मिली, बल्कि समरसता का संदेश भी गया है। रास्ते में जहां भी उन लोगों के साथ बैठकर भोजन पाया जिन्हें लोग अछूत कहते हैं वहां-वहां समरसता की चर्चा हुई।

  • एमएसपी पर धान, ज्वार एवं बाजरा की उपार्जन नीति जारी : खाद्य मंत्री राजपूत

    न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से की जाएगी औसत अच्छी गुणवत्ता की फसल खरीदी
    एक दिसम्बर से शुरू होगी धान की खरीदी

    भोपाल 
    खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार द्वारा समय – समय पर घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर औसत अच्छी गुणवत्ता की धान, ज्वार एवं बाजरा का उपार्जन किसानों से किया जाएगा। राज्य शासन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा की उपार्जन नीति घोषित कर दी है। समर्थन मूल्य पर ज्वार एवं बाजरा की 24 नवम्बर से 24 दिसम्बर तक और धान की खरीदी एक दिसम्बर से 20 जनवरी, 2026 तक की जायेगी। खरीदी सोमवार से शुक्रवार तक की जायेगी।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश के समस्त कलेक्टर्स, नागरिक आपूर्ति निगम तथा वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि उपार्जन नीति का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराएं, जिससे किसानों को लाभ पहुंचाने की सरकार की मंशा पूरी हो सके। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर उपार्जन कार्य से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि निर्धारित अवधि में उपार्जन किया जाएगा। समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा के उपार्जन के लिए मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज़ कार्पोरेशन नोडल एजेंसी होगी। इसके अलावा विभाग द्वारा केन्द्र एवं राज्य सरकार की अन्य एजेन्सी अथवा उनके द्वारा अधिकृत संस्था को भी उपार्जन एजेन्सी घोषित किया जा सकेगा।

    न्यूनतम समर्थन मूल्य
    न्यूनतम समर्थन मूल्य धान कॉमन का 2369 रूपये, धान ग्रेड-ए का 2389, ज्वार मालदण्डी का 3749 हजार, ज्वार हाइब्रिड का 3699 और बाजरा का 2775 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

    किसानों की सुविधा अनुसार होगा उपार्जन केन्द्रों का निर्धारण
    मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि उपार्जन केन्द्र के स्थान का निर्धारण किसानों की सुविधा अनुसार किया जाएगा। उपार्जन केन्द्र प्राथमिकता से गोदाम/केप परिसर में स्थापित किए जाएंगे। गोदाम/केप उपलब्ध न होने पर समिति एवं अन्य स्तर पर उपार्जन केन्द्र स्थापित किए जा सकेंगे। जिले में उपार्जन केन्द्रों की संख्या का निर्धारण किसान पंजीयन, पंजीयन में दर्ज बोया गया रकबा एवं विगत वर्ष निर्धारित उपार्जन केन्द्रों के आधार पर राज्य उपार्जन समिति द्वारा किया जाएगा।

    बारदाना व्यवस्था
    समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिये 46 प्रतिशत पुराने और 54 प्रतिशत नवीन जूट बारदाने उपयोग किये जायेंगे। बारदानों की व्यवस्था उपार्जन एजेंसी द्वारा की जायेगी। ज्वार एवं बाजरे का उपार्जन नवीन जूट बारदानों में किया जायेगा।

    केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा धान, ज्वार एवं बाजरा के समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिये निर्धारित यूनिफार्म स्पेसिफिकेशन्स के अनुसार एवं समय-समय पर इसमें दी गई शिथिलता के अनुसार उपार्जन किया जायेगा। गुणवत्ता परीक्षण का दायित्व उपार्जन केन्द्र में उपार्जन करने वाली संस्था और भण्डारण स्थल पर उपार्जन एजेंसी का होगा। कृषि उपज मण्डियों में एफएक्यू मानक की धान, ज्वार एवं बाजरा की खरीदी समर्थन मूल्य से कम पर क्रय नहीं किया जायेगा। नॉन एफएक्यू उपज का सैम्पल कृषि उपज मण्डी द्वारा संधारित किया जायेगा। किसान पंजीयन में दर्ज फसल के रकबे एवं राजस्व विभाग द्वारा तहसीलवार निर्धारित उत्पादकता के आधार पर कृषक द्वारा खाद्यान्न की विक्रय योग्य अधिकतम मात्रा का निर्धारण किया जायेगा। कृषक द्वारा उपज बेचने के लिये उपार्जन केन्द्र एवं विक्रय दिनांक के चयन के लिये स्लॉट बुकिंग करानी होगी। उपार्जित खाद्यान्न का उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक परिवहन का दायित्व उपार्जन एजेंसी का और धान को उपार्जन केन्द्र/गोदाम से सीधे मिलर्स तक परिवहन का दायित्व मिलर्स का होगा। 

  • शक्तिशाली राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका : मंत्री सारंग

    विविध संस्कृति का परिचायक राज्य स्तरीय युवा उत्सव का रंगारंग समापन
    विभिन्न कलाओं में निपूर्ण युवा हुए सम्मानित

    भोपाल
    खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि शक्तिशाली राष्ट्र के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। वैभवशाली राष्ट्र बनाने में युवाओं का योगदान जरूरी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि प्रदेश के निर्माण, समाज कल्याण और राष्ट्र को अग्रसर बनाने में अपना सर्वस्व लगायें। मंत्री श्री सारंग रवीन्द्र भवन में आयोजित 29वें राज्य स्तरीय युवा उत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले युवाओं को सम्मानित किया।

    युवा उत्सव प्रदेश की संस्कृति को सहेजने में सहायक
    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि देश का भविष्य युवा शक्ति ही है, जो दिशा और दशा तय करती है। हर परिवर्तन और क्रांति के पीछे युवा ही हैं। युवाओं को अपनी शक्ति सही दिशा में लगानी चाहिये। युवा ही देश की पूँजी एवं सम्पदा हैं। उन्हीं से देश का भविष्य तय होता है। युवा उत्सव प्रदेश की संस्कृति को सहेजने में सहायक है। युवा उत्सव के माध्यम से युवाओं ने प्रदेश और देश की संस्कृति को सहेज कर रखा है और अन्य लोगों को इससे अवगत करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा अपनी संस्कृति को बचाकर रखें। इससे बड़ा और कोई योगदान नहीं है। युवा केवल अपने लिये नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिये जियें। श्री सारंग ने कहा कि जिसने राष्ट्र और समाज के लिये काम किया, उसका ही नाम हुआ है। इसलिये अच्छा काम करें, जिससे उनका नाम हो और लोग उन्हें याद रखें।

    आकर्षक प्रस्तुतियों ने युवा उत्सव को बनाया अविस्मरणीय
    खेल संचालक श्री राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि युवा उत्सव में सभी प्रतियोगिताओं को देखने के बाद लगा कि युवा अपनी संस्कृति को नहीं भूला है। युवाओं की ऊर्जा से भरी मनमोहक और आकर्षक प्रस्तुतियों ने युवा उत्सव को अविस्मरणीय बना दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय युवा उत्सव में प्रस्तुति देने वाले 30 युवा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होंगे और प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी प्रस्तुति देंगे।

    7 विधाओं के युवा और निर्णायक हुए सम्मानित
    राज्य स्तरीय युवा उत्सव में भाषण विधा में प्रथम ग्वालियर संभाग के सोमेश, द्वितीय भोपाल संभाग के तनिष जैन और तृतीय इंदौर संभाग के सजल जैन रहे। कहानी लेखन में प्रथम शहडोल संभाग की कृति शुक्ला, द्वितीय उज्जैन संभाग के गोपाल मालवीय और तृतीय सागर संभाग की मायरा सिंघानिया, पेंटिंग में प्रथम ग्वालियर संभाग की अमृता धाकड़, द्वितीय इंदौर संभाग की संस्कृति श्रीवास्तव और तृतीय जबलपुर संभाग के सुयांश निखरे, कविता लेखन में प्रथम सागर संभाग के नकुल तिवारी, द्वितीय जबलपुर संभाग की काजल चक्रवर्ती और तृतीय नर्मदापुरम संभाग की वैशाली को सम्मानित किया गया। विज्ञान मेले में प्रथम सागर संभाग के समीर अहिरवार, द्वितीय नर्मदापुरम संभाग की प्रतिष्ठा सिंह ठाकुर और तृतीय रीवा संभाग के उत्कर्ष नामदेव रहे। इसी प्रकार समूह लोक गीत में प्रथम स्थान पर सागर संभाग, द्वितीय पर भोपाल संभाग और तृतीय स्थान पर शहडोल संभाग के युवा समूह रहे। समूह लोकनृत्य में प्रथम स्थान पर सागर संभाग, द्वितीय पर जबलपुर संभाग और तृतीय स्थान पर उज्जैन संभाग के युवा समूह को पुरस्कृत किया गया। युवा उत्सव में प्रतियोगिताओं के निर्णायकों को भी स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उप सचिव श्री अजय श्रीवास्तव, संयुक्त संचालक श्री बी.एस. यादव और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारी सहित युवा शक्ति उपस्थित थी।

     

  • भोपाल एक जीवित विरासत वाला नगर, यहां अतीत और वर्तमान संवाद के साथी : पर्यटन मंत्री लोधी

    हिस्टोरिक सिटी सीरीज की भोपाल कार्यशाला-सह-संवाद कार्यक्रम

    भोपाल 
    भोपाल की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य, साहित्यिक धरोहर, सांस्कृतिक बहुलता तथा यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क में “सिटी ऑफ लिट्रेचर” के रूप में अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से पर्यटन विभाग द्वारा स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्ट सहयोग से कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में मंगलवार को कार्यशाला-सह-संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि भारत के चयनित ऐतिहासिक नगरों की परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, स्थापत्य और वैचारिक दर्शन से देश की युवा पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स द्वारा यह श्रृंखला आयोजित की जा रही है। यह गर्व का विषय है कि इस प्रतिष्ठित आयोजन में मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक नगरों ग्वालियर, ओरछा एवं भोपाल तीनों को शामिल किया गया है।

    राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि भोपाल केवल एक शहर नहीं, बल्कि समय, स्मृति, साहित्य, कला और मानव अन्वेषण की अनेक परतों से निर्मित एक जीवंत विरासत है। उन्होंने कहा कि भोपाल की झीलों, पहाड़ियों, बस्तियों और सांस्कृतिक धरोहरों में वह गहराई और दर्शन छिपा है, जो किसी नगर को सिर्फ भौतिक संरचना नहीं, बल्कि एक सामूहिक चेतना बनाता है। भोपाल यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क में “सिटी ऑफ लिट्रेचर” के रूप में अपनी पहचान बनाने का प्रयास कर रहा है, जो शहर की साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक समृद्धि का वैश्विक सम्मान है।

    अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण देश के सबसे समृद्ध राज्यों में से एक है। ओरछा, ग्वालियर और भोपाल के साथ–साथ प्रदेश के अन्य ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगरों को भी संस्थाओं और जनभागीदारी के माध्यम से पर्यटकों के अनुकूल विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। व्यापक सहयोग और योजनाबद्ध पहल से प्रदेश के पर्यटन परिदृश्य को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है।

    पैलन डिस्कशन में डॉ. अभय अरविंद बेड़ेकर, अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने कहा कि सिटी ऑफ लिटरेचर के रूप में भोपाल का नामांकन उसकी अद्वितीय विरासत को सम्मानित करता है। यहां हिंदी और उर्दू समान रूप से पल्लवित होती हैं, जहां अकादमियां और विश्वविद्यालय समृद्ध सांस्कृतिक संवाद के वाहक हैं और जहां विरासत की पहचान केवल स्मारकों से नहीं, बल्कि यहां के लोगों से भी तय होती है। यहां साहित्य केवल संरक्षित नहीं किया जाता, बल्कि उसे जिया जाता है और समुदाय द्वारा निरंतर आकार दिया जाता है।  

    श्री प्रशांत बघेल, संयुक्त संचालक (प्लानिंग), मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने कहा कि भोपाल में सिटी ऑफ लिटरेचर के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की अत्यंत मजबूत संभावनाएं हैं। शहर की सांस्कृतिक बनावट, उसकी समृद्ध भाषाई विरासत और सक्रिय साहित्यिक समुदाय इसे इस श्रेणी के लिए विशिष्ट बनाते हैं। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2026 तक हम यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क के लिए एक और अधिक सशक्त, सुविचारित और प्रमाणित नामांकन प्रस्तुत करने के लिए पूर्णतः तैयार होंगे।  

    इस अवसर पर डॉ. अभय अरविंद बेड़ेकर, अपर प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, भोपाल के डायरेक्टर प्रोफेसर कैलासा राव, मैनिट की एसोसिएट प्रोफेसर श्रीमती सविता राजे, एनएमए के रीजनल डायरेक्टर डॉ. टी. अरुण राज,  द्रोणा फाउंडेशन से सुश्री तपस्या एवं सुश्री मल्लिका, प्रोफेसर रचना खरे उपस्थित थे। 

    हेरिटेज वॉक में जाना भोपाल का सांस्कृतिक महत्व
    भोपाल में एक विशेष हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया, जिसने शहर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कराने का अवसर प्रदान किया। यह वॉक गौहर महल से प्रारंभ होकर इक़बाल मैदान होते हुए भव्य मोती महल तक आयोजित की गई। प्रतिभागियों ने इन स्थलों की वास्तुकला, इतिहास और सांस्कृतिक महत्व के बारे में विस्तार से जाना। इसमें प्रतिभागियों को भोपाल के ऐतिहासिक विकास, सामाजिक विरासत और स्थापत्य विशेषताओं से अवगत कराया गया।

    हिस्टोरिक सिटी सीरीज
    नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) द्वारा देश के चयनित ऐतिहासिक एवं जीवित नगरों की विरासत, पारम्परिक शहरी योजना और सांस्कृतिक विशेषताओं से आमजन को परिचित कराने के लिये हिस्टोरिक सिटी सीरीज (Historic City Series–2025) का आयोजन किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय पहल में मध्यप्रदेश के तीन ऐतिहासिक नगरों ग्वालियर, ओरछा और भोपाल को चुना गया है। श्रृंखला के अंतर्गत 11 नवंबर को ग्वालियर और 13 नवंबर को ओरछा में कार्यक्रम आयोजित किए गए।

     

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त का होगा वितरण

    प्रधानमंत्री श्री मोदी करेंगे वर्चुअली संबोधित
    कृषि उपज मण्डी समिति करोंद भोपाल में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम

    भोपाल
    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त का वितरण देश के किसानों को बुधवार 19 नवम्बर को किया जा रहा है। कार्यक्रम को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअली संबोधित करेंगे।

    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त का वितरण राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम कृषि उपज मण्डी समिति, करोंद, भोपाल में दोपहर 12:25 से आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा सहित जन-प्रतिनिधि और कृषक बंधु शामिल होंगे।

     

  • मेला संस्कृति ही भोपाल की पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री ने किया भोपाल उत्सव मेले का शुभारंभ

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल और मेले एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। शहर में जिधर भी नजर जाए, मेलों की जीवंतता दिखाई देती है। इसी वजह से भोपाल को मेला संस्कृति की दृष्टि से देश के बेहतर शहरों में शामिल किया जाता है। उन्होंने कहा कि ये मेले शहर की पहचान को मजबूत करने के साथ ही स्थानीय समाज, परंपराओं और सामुदायिक संबंधों को भी जीवित रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेला संस्कृति को प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक समरसता बढ़ाने में सहायक है। ऐसे आयोजन स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और उद्यमियों के हुनर को मंच प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री ने मंगलवार शाम टी.टी. नगर के दशहरा मैदान में 33वें भोपाल उत्सव मेले का दीप प्रज्ज्वलन, गणेश पूजा एवं फीता काटकर विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने आयोजन समिति को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि यह मेला इस वर्ष भी व्यापार, मनोरंजन और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि झीलों की नगरी और देश के ह्रदय प्रदेश की राजधानी में शुरू हो रहे भोपाल उत्सव मेला आज 32 वर्ष की लंबी यात्रा को सफलतापूर्ण पार करते हुए 33 वे वर्ष में प्रवेश कर रहा है। वर्ष 1991–92 में स्व. श्री रमेशचन्द्र अग्रवाल द्वारा लगाया गया ‘भोपाल उत्सव मेला’ का बीज आज विशाल वट वृक्ष हो चुका है, जिसका लाभ भोपालवासियों के साथ ही दूर-दराज से आने वाले सैलानियों को हो रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेले प्राचीन समय से ही हमारी सनातन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहे हैं, ये व्यापार को विस्तार देने का साधन थे, साथ ही हमारे धर्म, परंपरा, और संस्कृति के भी वाहक थे। उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी परंपरा और संस्कृति को भूल जाता है, वह राह से भटक जाता है या नष्ट हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी मेला संस्कृति को जीवित रखें। संस्कृति, परंपरा, विरासत किसी भी समुदाय की पहचान और स्मृति के प्रमुख घटक हैं। सांस्कृतिक प्रथाएं, परंपराएं समुदायों को एक साथ लाती हैं। सामाजिक एकता के लिए ये आवश्यक हैं, इसलिए मेलों को जीवित बनाये रखें।

    भोपाल उत्सव मेला समिति के अध्यक्ष श्री मनमोहन अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 1991-92 में मात्र 70 स्टाल-दुकानों से प्रारंभ हुआ यह मेला, पिछले 3 दशकों से लगातार अपने ध्येय वाक्य ‘उत्सव, व्यापार, मनोरजंन एवं सेवा’ को सार्थक कर रहा है। भोपाल उत्सव मेला अब एक ‘ब्रांड’ बन गया है। मेले का उद्देश्य राजधानी के उपभोक्ताओं एवं व्यापारियों को एक मंच पर लाना था। धीरे-धीरे भोपाल के अतिरिक्त आसपास के कस्बों-शहरों के लोग भी मेले से जुड़ते चले गये। आज ‘भोपाल उत्सव मेला’ इतना लोकप्रिय हो चुका है कि निकटवर्ती राज्यों के व्यापारी भी इस मेले में शामिल होने लगे हैं। मेले में फर्नीचर, ब्रान्डेड इलेक्ट्रॉनिक्स शॉप, मीना बाजार, फूड, आधुनिक झूले, आटोमोबाइल, कपड़े, हैण्डलूम, होम एप्लाइंसेस आदि के स्टॉल लगते हैं। भोपाल उत्सव मेला लोगों को रोजगार और व्यापार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने में एक सेतु की भूमिका निभा रहा है। इस मेले में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। भोपाल मेला उत्सव समिति समाज कल्याण की दिशा में भी प्रभावी काम कर रही है। मेला समिति द्वारा प्रतिवर्ष शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सद्भाव से जुड़े कई कार्य किए जा रहे हैं।

    मेले के शुभारंभ कार्यक्रम में विधायक श्री भगवानदास सबनानी, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, श्री आशीष ऊषा अग्रवाल, श्री चंद्रशेखर सोनी, श्री सुनील जैन, श्री अजय सोमानी सहित नागरिक उपस्थित थे।

     

  • भारत और आसियान देशों का साझेदारी संबंध आपसी विश्वास और साझा प्रगति का प्रतीक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आसियान देशों के मिशन प्रमुखों के दल ने की सौजन्य भेंट
    आर्थिक-सांस्कृतिक, पर्यटन और निवेश में सहयोग पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आसियान भारत का अत्यंत ही महत्वपूर्ण रणनीतिक और सांस्कृतिक साझेदार रहा है। सदियों से व्यापार, समुद्री संपर्क, आध्यात्मिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक समानताएं इस प्रगाढ़ संबंध को और भी समृद्ध बनाती रही हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को एक नई गति मिली है, जिससे भारत-आसियान सहयोग व्यापार, कनेक्टिविटी, डिजिटल साझेदारी, क्षमता-निर्माण और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में और भी मजबूत हुआ है। भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया, हरित ऊर्जा और जलवायु पहल की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे आसियान देशों के साथ साझेदारी के नए-नए अवसर सामने आए हैं। भारत और आसियान देशों का यह संबंध आज पारस्परिक विश्वास और साझा प्रगति का प्रतीक बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के राजदूतों के दल को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आसियान देशों के मिशन प्रमुखों के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में सौजन्य भेंट की। यह दल तीन दिवसीय प्रवास पर मध्यप्रदेश आया हुआ है।

    इस उच्चस्तरीय दल में भारत में मलेशिया के उच्चायुक्त मलेशिया (आसियान चेयर) महामहिम श्री दातो मुजफ्फर शाह मुस्तफा, वियतनाम के राजदूत महामहिम श्री गुयेन थान्ह हाई, फिलीपींस के राजदूत महामहिम श्री जोसेल एफ. इग्नासियो, भारत और श्रीलंका में कंबोडिया की राजदूत महामहिम रथ मनी, तिमोर-लेस्ते के राजदूत महामहिम श्री कार्लितो नुनेस, थाईलैंड की राजदूत महामहिम सुश्री छवनार्ट थांगसुमफंट, भारत और भूटान में इंडोनेशिया की राजदूत महामहिम इना एच. कृष्णमूर्ति, ब्रुनेई के द्वितीय सचिव महामहिम पेंगिरन मोहम्मद शफी अलवाली बिन पेंगिरन अबू बकर, भारतीय विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (दक्षिण) श्री प्रशांत अग्रवाल एवं अवर सचिव सुश्री जुही जलोटा सहित मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, आयुक्त जनसम्पर्क श्री दीपक कुमार सक्सेना, मुख्यमंत्री के अपर सचिव श्री चंद्रमौली शुक्ला तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आसियान देशों के राजदूतों (मिशन प्रमुखों) को संबोधित करते हुए कहा कि आप सबका आगमन भारत और आसियान क्षेत्र के बीच गहरे सांस्कृतिक, आर्थिक और लोक-से-लोक संबंधों का जीवंत प्रतीक है। हमारा सौभाग्य है कि आप सब तीन दिवसीय यात्रा पर मध्यप्रदेश में हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व धरोहर सांची की यात्रा आपको हमारी बौद्ध विरासत की गहराई से जोड़ेगी, वहीं हमारा जनजातीय संग्रहालय आपको भारत की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी की समृद्ध संस्कृति से परिचित कराएगा। आपकी यात्रा हमारे बीच सहयोग, विश्वास और एक मजबूत साझेदारी को आगे बढ़ाने का माध्यम है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत और आसियान संबंधों के सुदृढ़ीकरण और प्रदेश के वैश्विक संवाद विस्तार की दृष्टि से यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारत तथा मध्यप्रदेश और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक, औद्योगिक निवेश तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहित नवाचारों के क्षेत्र में व्यापक सहयोग एवं साझेदारी की मंशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आसियान देशों के साथ साझेदारी से मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को एक नई गति मिलेगी और ज्ञान–विज्ञान के आदान-प्रदान से नई तकनीकों एवं नवाचारों को भी बढ़ावा मिलेगा। सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी इस संबंध का महत्वपूर्ण आयाम बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यटन विकास, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के विस्तार पर विशेष बल दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आसियान देशों के साथ हमारी साझेदारी अत्यंत मूल्यवान हैं। आपके साथ हम व्यापार, प्रौ‌द्योगिकी, सतत् विकास तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग की अपार संभावनाएं देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा राज्य समृद्ध संस्कृति, असाधारण प्राकृतिक सौंदर्य, कृषि आधारित शक्ति और तीव्र औ‌द्योगिक विकास का संगम है। आसियान देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मध्यप्रदेश नई ऊर्जा और सहयोग के साथ आगे बढ़ाना चाहता है। निवेश, पर्यटन, ग्रीन ऊर्जा, आईटी व कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में हमारे बीच अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश के साथ आपका सहयोग और साझेदारी इस पूरे अंचल को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और परस्पर प्रगति के नए मार्ग खोलेगा।

    आसियान देशों के चेयर महामहिम श्री मुस्तफा ने इस अवसर पर प्रतिनिधि मंडल का परिचय और प्रत्येक मिशन प्रमुख के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम सब विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हमारा विकास का साझा रोडमैप एशिया को विश्व में अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। उन्होंने मध्यप्रदेश के लोगों की सहजता, आत्मीयता और अतिथि सत्कार के लिए आभार भी जताया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आसियान देशों के मिशन प्रमुखों का मध्यप्रदेश की धरती पर पारम्परिक तरीके से स्वागत और सम्मान किया और सभी को स्मृति चिन्ह भी भेंट किए। उल्लेखनीय है कि आसियान देशों में भारत के अलावा मलेशिया, म्यांमार, ब्रूनेई दारुस्सलाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, लाओस और तिमोर लेस्ते शामिल हैं।

     

  • मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के संचालन की 8वीं बैठक

    प्रदेश में हेल्थ और वेलनेस टूरिज्म को करें प्रोत्साहित
    भोपाल 

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में पर्यटन को उद्योग को दर्जा दिलाने के लिए आवश्यक पहल की जाए। इससे नवाचार के इच्छुक व्यक्तियों तथा उद्यमियों को सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे प्रदेश के विभिन्न अंचलों में पर्यटन गतिविधियों के संचालन और सुविधाओं के विस्तार में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हेल्थ और वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। अत: पर्यटन विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तथा आयुष विभाग के साथ मिलकर परस्पर समन्वय से गतिविधियां संचालित करें। जिन राज्यों में ऐसी गतिविधियां संचालित हैं, उनका अध्ययन कर प्रदेश में संभागवार कार्ययोजना बनाई जाए। वेलनेस टूरिज्म को प्रोत्साहित करने में धार्मिक संस्थाओं और ट्रस्टों का भी सहयोग लिया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के इतिहास और संस्कृति पर केन्द्रित तथा उनसे संबंधित फिल्मों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर संचालित वन्य जीवों और वनों पर केन्द्रित टीवी चैनल्स पर मध्यप्रदेश के समृद्ध वनों और जैवसंपदा के प्रस्तुतिकरण के लिए भी प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मध्यप्रदेश टूरिज्म मंडल के संचालक मंडल की मंत्रालय में हुई 8वीं बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में संस्कृति, पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    बैठक में पीएमश्री पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा के अंतर्गत इंदौर-उज्जैन-ओंकारेश्वर सेक्टर, भोपाल-मढ़ई-पचमढ़ी सेक्टर और जबलपुर-बांधवागढ़-कान्हा सेक्टर में सेवा संचालन के संबंध में चर्चा हुई। साथ ही सिंहस्थ-2028 के लिए जारी गतिविधियों, ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहन करने के लिए संचालित योजनाओं, साहसिक पर्यटन, जल पर्यटन गतिविधियों, पर्यटन क्षेत्र में निवेश संवर्धन और मध्यप्रदेश पर्यटन के राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार के संबंध में भी पर चर्चा हुई।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की बैठक

    प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था विकसित करने में सामान्य यात्रियों की सुविधा और सुगमता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    यात्रियों के लिए ऐप पर हो बस की बुकिंग, किराया भुगतान आदि की व्यवस्था
    प्रतियोगिता के माध्यम से विकसित करें यात्री परिवहन सेवा का लोगो
    अन्य राज्यों की यात्री बस सेवा की बेस्ट प्रैक्टिसेस को भी अपनाया जाए

    भोपाल 
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में यात्री परिवहन व्यवस्था विकसित करने में सामान्य यात्री की सुविधा और सुगमता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। यात्री बसों के आवागमन का प्रबंधन अद्यतन तकनीक का उपयोग कर किया जाए। सामान्यजन की सुविधा के लिए व्हीकल लोकेशन, बस के आवागमन की सूचना और किराए संकलन की सुविधा 'ऐप' पर उपलब्ध कराई जाए। नगर निगमों द्वारा संचालित बसों, भारत सरकार द्वारा मिलने वाली ई-बसों को भी एक ही व्यवस्था के अंतर्गत सम्मिलित किया जाए। साथ ही नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित बस व्यवस्था को युक्तियुक्त तरीके से एकीकृत करते हुए नगरीय क्षेत्रों से जुड़े ग्रामीण इलाकों तक आवागमन को सुविधाजनक बनाया जाए। प्रशासनिक अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि बस संचालक अपने वाहन केवल मुनाफे वाले रूट पर ही संचालित नहीं करें। उन्हें जिन रूट्स के परमिट दिए गए हैं, वाहन उन ही रूट्स पर ही चलाए जाएं, ऐसा न करने वालों पर सख्त कार्यवाही की जाए। पर्यावरण संरक्षण के लिए यात्री परिवहन में लगी 15 साल या उससे पुरानी बसों को ऑफ रूट किया जाए। अन्य राज्यों में संचालित यात्री बस सेवा व्यवस्था का अध्ययन कर उनकी बेस्ट प्रैक्टिसेस को प्रदेश में अपनाने के लिए भी पहल करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में संचालित होने वाली यात्री परिवहन कंपनी का लोगो डिजाइन करने के लिए प्रतियोगिता आयोजित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मंगलवार को मंत्रालय में हुई मध्यप्रदेश यात्री परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मंडल की बैठक में दिए। बैठक में परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में यात्री परिवहन व्यवस्था का संचालन उबर, ओला के समान बस ऑपरेटरों और मोटर मालिकों के साथ सहभागी आधार पर किया जाएगा। व्यवस्था के सुगम संचालन के लिए इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जा रहा है। यह प्लेटफार्म देश का प्रथम इंटीग्रेटेड सॉफ्टवेयर है, जिसमें व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग, ऑटोमेटिक किराया संकलन, अलार्ट मॉड्यूल, शिकायत निवारण जैसे 18 मॉड्यूल शामिल है। यात्री परिवहन बसों का संचालन इंदौर, उज्जैन, सागर और जबलपुर क्षेत्र में किया जाएगा। सर्वप्रथम यह व्यवस्था इंदौर और उसके बाद उज्जैन से आरंभ होगी। इससे संबंधित सर्वेक्षण, रूट प्लानिंग, निजी ऑपरेटरों के साथ परामर्श जारी है। इंदौर क्षेत्र के अंतर्गत धार, झाबुआ, आलीराजपुर, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा और बड़वानी शामिल होंगे। उज्जैन क्षेत्र में देवास, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, शाजापुर और रतलाम को शामिल किया गया है।

    बैठक में बताया गया कि प्रथम चरण में इंदौर शहर से 50 कि.मी. परिधि में आने वाले समस्त शहरी और अंतर शहरी रूट पर बसें संचालित होंगी। द्वितीय चरण में इंदौर संभाग के समस्त जिलों तक सुविधा का विस्तार किया जाएगा। द्वितीय चरण में ही उज्जैन और भोपाल शहर से 50 कि.मी. परिधि में आने वाले समस्त शहरी और अंतर शहरी रूट्स पर बसों का संचालन आरंभ होगा। तीसरे चरण में उज्जैन संभाग के सभी जिलों को शामिल किया जाएगा। चौथे चरण में सागर और जबलपुर संभाग के समस्त जिले, पांचवे चरण में भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के समस्त जिले, छठवे चरण में रीवा और शहडोल संभाग के सभी जिले तथा सातवें चरण में ग्वालियर और चंबल संभाग के सभी जिलों तक यात्री परिवहन सेवा का विस्तार किया जाएगा। यात्री किराये का निर्धारण थोक मूल्य सूचकांक, श्रम दर, ईंधन दर, पूंजीगत लागत और वर्तमान किराये जैसे कंपोनेंट्स के आधार पर विकसित फार्मूले से किया जाएगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव श्री मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव श्री शिव शेखर शुक्ल, इंदौर संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदर्शनी स्थल पर वैज्ञानिकों द्वारा विकसित रोबोट ने किया स्वागत

    बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में देशभर के 900 विद्यार्थियों के 240 इनोवेटिव प्रोजेक्ट और मॉडल हुए प्रदर्शित
    बाल वैज्ञानिकों के महाकुंभ में मैनिट, आईसेक्ट और आईआईएसईआर के वैज्ञानिकों से होगा संवाद
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी-2025 का किया शुभारंभ

    भोपाल
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। देश आधुनिक विज्ञान सहित सभी क्षेत्रों में तेज गति से विकास कर रहा है। इसी वैज्ञानिक शक्ति के बलबूते ही भारत ने पड़ोसी देश को सबक सिखाया। कोविड महामारी के दौर में पूरी दुनिया ने हमारे पतंजलि योग शास्त्र का अनुसरण किया और अभिनंदन के लिए हाथ जोड़कर नमस्कार करने की पद्धति के महत्व को स्वीकारा। सम्राट विक्रमादित्य काल में नवरत्नों के समान आज देश में प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में सभी प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। चाहे मून मिशन हो या गगनयान प्रोजेक्ट, प्रधानमंत्री श्री मोदी सफलता हो या असफलता, हर पायदान पर वैज्ञानिकों के साथ खड़े हैं। इसी प्रकार विद्यार्थियों के बीच वैज्ञानिक और नवाचारी सोच विकसित करने के प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रयासों में राज्य सरकार भी हरसंभव सहयोग प्रदान कर रही है। भारतीय प्राचीन ग्रंथो में विद्यार्थियों के 6 गुणों क्रमशः विद्या, तर्क, विज्ञान, स्मृति, तत्परता और क्रियाशीलता का उल्लेख है। यह माना जाता है कि जिसके पास यह छह गुण हैं, उसके लिए कुछ भी असाध्याय नहीं है। उन्होंने कहा कि इन्हीं गुणों के आधार पर विज्ञान की गति को बढ़ाया जा सकता है। बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में आए विद्यार्थियों में भावी भारत के विक्रम साराभाई, भाभा साहब, कलाम साहब जैसी प्रतिभाओं की झलक मिल रही है। यह बाल वैज्ञानिक भारत की विज्ञान यात्रा का नया अध्याय लिखने वाले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को 52वीं बाल वैज्ञानिक प्रदशर्नी-2025 के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का श्यामला हिल्स स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (आर.आई.ई.) में दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रदर्शनी के द्वार पर पहुंचने पर बाल वैज्ञानिकों द्वारा विकसित रोबोट ने उनका स्वागत किया। उन्होंने बाल प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन कर बाल वैज्ञानिकों से संवाद किया और बाल वैज्ञानिकों द्वारा विकसित रोबोट और तारामंडल के मॉडल के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद तथा स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 6 दिवसीय प्रदर्शनी आगामी 23 नवंबर तक चलेगी।

    ऋषि-मुनियों के ज्ञान और नवाचारों से समृद्ध है हमारी ज्ञान परंपरा
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत के विश्व गुरू बनने में प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक परंपरा के भाग रहे ऋषि-मुनियों के योगदान को समझने की आवश्यकता है। हमारे ऋषि-मुनि न्यूनतम आवश्यकताओं के साथ जीवन यापन करते हुए समाज के कल्याण के लिए नवाचारों को जन्म देते थे। प्रत्येक भारतीय को ऋषि-मुनियों और विद्वान से मिली परंपरा पर गर्व है। अगर हम विमान शास्त्र की बात करें तो ऋषि भारद्वाज याद आते हैं। भगवान श्रीराम के काल में पुष्पक विमान दिखाई देता है। जब शून्य के अस्तित्व को देखें तो आर्यभट्ट की ओर ध्यान जाता है और जब ग्रहों की गति देखते हैं तो भास्कराचार्य नजर आते हैं। योगशास्त्र के लिए महर्षि पतंजलि याद आते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा हर क्षेत्र में ऋषि-मुनियों के ज्ञान से समृद्ध हुई है।

    योग की महिमा को विश्व के सभी देशों ने स्वीकारा
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने योग को संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित किया है। आज यूरोप से लेकर साइबेरिया और चीन से पाकिस्तान और ईरान-इराक तक लोग योगासन करते नजर आते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राचीन सनातन संस्कृति के माध्यम से हमने दुनिया को यह बताया कि ब्रह्मांड में कोटि-कोटि सूर्य विद्यमान है। हजारों साल पहले महर्षि पतंजलि ने दुनिया को बता दिया था कि शरीर में पांच प्राण होते हैं। राज्य सरकार अंगदान को प्रोत्साहित कर रही है और देहदानियों को गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया जा रहा है।

    प्रदेश के स्कूलों में बढ़ाई जा रही है आईसीटी लैब की संख्या
    स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि देशभर से भोपाल पधारे बाल वैज्ञानिक मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल हैं। राज्य सरकार विद्यार्थियों के बीच वैज्ञानिक और नवाचारी दृष्टिकोण विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश के स्कूलों में आईसीटी लैब की संख्या बढ़ाई जा रही है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कार्यक्रम में सहभागी बाल वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं दीं। निदेशक एनसीईआरटी प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव सदैव एनसीईआरटी को प्रोत्साहन प्रदान करते हैं। वे कला एवं विज्ञान के प्रति पारखी दृष्टिकोण रखते हैं। बाल वैज्ञानिक प्रदशर्नी एक अनूठी प्रदर्शनी है, जिसमें देशभर के जिलों से बाल वैज्ञानिकों के प्रोजेक्ट और मॉडल चुनकर लाए गए हैं।